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उलझन मोहब्बत की

राजेश (गुस्से से) - साफ-साफ कहें जो भी कहना है ,

कहना क्या चाहती हैं आप ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम्हें याद है ना , मैंने दिल्ली में एक बंगला देखा था रिया के लिए ?

राजेश अच्छी तरह से याद है ।

मिसेज मल्होत्रा - और तुम्हें यह भी याद होगा कि तुमने उस बंगले की जुड़ी सारी जानकारी मांगी थी ?

राजेश - हां , यह भी याद है पर इस बात से क्या साबित होता है ?

मिसेज मल्होत्रा - रिया बेटा, तुमने सुना ना ? ये इंसान जानता था कि वह बंगला मै तुम्हारे लिए खरीदना चाहती हूं। , इसने मुझ से जानकारी मांगी पर मैंने नहीं दी क्योंकि मुझे तो शुरू से ही इस पर भरोसा नहीं है । तुम जानती हो इसने क्या किया?

रिया - क्या किया?

मिसेज मल्होत्रा - मैं वह बंगला खरीद लू, उससे पहले ही इसने उसे खरीद लिया अपने लिए। क्यों ? क्या पूरी दिल्ली में एक वही बंगला था और वो भी तब,जब यह अच्छे से जानता था कि वह बंगला में तुम्हारे लिए लेना चाहती हूं ।

राजेश (हैरानी से )- क्या बकवास है यह? मैंने कब बंगला खरीदा? रिया यह झूठ बोल रही हैं। मैं भला ऐसा क्यों करूंगा ? तुम अच्छे से जानती हो , मुझे ऐसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है और अगर खरीदना भी होता तो वह क्यों खरीदूंगा जो तुम्हारे लिए लिया जाना है ।

रिया - भाई मैं जानती हूं कि आप ...

मिसेज मल्होत्रा( हंसते हुए) - देखा रिया , इसके मन में खोट है । अगर बंगला लिया है तो लिया है । इसमें छुपाने की क्या जरूरत है ? सच तो यह है कि इसने ऐसे ही न जाने कितनी प्रॉपर्टी हमसे छुपा कर खरीद रखी है और कहां-कहां कितना , कुछ जमा कर रखा होगा इसने ।

विशाल - आपके पास क्या सबूत है ? ऐसे आप राजेश पर इल्जाम नहीं लगा सकती । सच क्या है , यह सब जानते हैं।

मिसेज मल्होत्रा - हां मैं जानती हूं , तुम लोगों ने मेरी बेटी की आगे मुझे ही बुरा बना रखा है इसलिए आज सबूत भी लायी हूं ।

रिया ( खीझते हुए ) -मां बंद कीजिए तमाशा । अगर भाई ने खरीद भी लिया तो क्या हुआ?

मिसेज मल्होत्रा - बात खरीदने की नहीं धोखे की है । अगर इसके दिल में चोर नहीं है तो इसनें यह बात छुपाई क्यों और वही बंगला क्यों लिया जो तुम्हारे लिए लिया जाना था। यह जलता है तुमसे रिया ।

रिया अब राजेश को देखने लगी, राजेश ने अब रिया की ओर पूरे आत्मविश्वास से देखा और कहा - मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है , मैं नहीं जानता कि मिसेज मल्होत्रा किस सबूत की बात कर रही हैं और रही बात जलने की तो सबको पता है कि कौन किससे जलता है - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की तरफ गुस्से से देखा।

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पूरा स्टाफ दरवाजे के बाहर खड़ा होकर तमाशा देखने लगा।

मिसेज मल्होत्रा - आओ , सब देखो अपने बॉस का असली चेहरा । कल तो तुम लोगों को सजा से बचाने के लिए भगवान बन रहा था पर सच तो यह है कि यह किसी का सगा नहीं है ।

साहिल यह सुन मुस्कुराने लगा , नैना अब आगे बढ़ने को हुई कि साहिल ने उसका हाथ पकड लिया- अगर तुम कुछ भी बोली तो मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा और राजेश यह नहीं चाहता । नैना मजबूर सी खड़ी रह गई।

मिसेज मल्होत्रा ने अब वो पेपर्स निकाल उस पर राजेश के साइन रिया को दिखाएं - यह देखो , तुम्हारे भाई के ही साइन है ना इस पर?

रिया ( साइन देख) - हां भाई के है पर..

मिसेज मल्होत्रा विशाल की ओर बढ़ी - तुम बताओ , तुम्हारे दोस्त के साइन है या नहीं इन पर ?

विशाल ने हां में सिर हिला दिया ।

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राजेश हैरान सा मिसेज मल्होत्रा को देख रहा था , मिसेज मल्होत्रा ने अब फाइल राजेश की हाथों में थमा दी, तुम बताओ कि यह किसके साइन है ? राजेश ने साइन देखे तो सच में ही उसके साइन थे - हां , यह मेरे ही साइन है पर मैंने ऐसा कुछ भी पेपर साइन नहीं किया ।

मिसेज मल्होत्रा ( हँसते हुए) - तो क्या यह साइन अपने आप ही चलकर यहां आ गया?

राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि उसने कब साइन किए ये पेपर्स? क्या उससे धोखे से साइन लिए गए? पर कब? राजेश ने अब फटाफट से फाइल को पढ़ना शुरू किया, फाइल पढ़ते ही राजेश अब हैरानी से मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा ने वह फाइल राजेश के हाथ से ली और रिया को थमा दी - लो , तुम भी पढ़ लो इस फाइल में क्या लिख रहा है ? जो मैं कह रही हूं , वह सच है या नहीं?

रिया ने वह फाइल पड़ी तो हैरान रह गई।

अब मिसेज मल्होत्रा और साहिल तैयार थे दोनों भाई बहन में , पहली दरार देखने को ।

राजेश और रिया अब एक दूसरे को खामोशी से देख रहे थे...,
 
नैना अब मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी - हे भगवान, कुछ भी हो जाए पर इन भाई बहन के रिश्ते में दरार नहीं आने देना।

रिया और राजेश अब एक दूसरे को खामोशी के साथ देख रहे थे ।

मिसेज मल्होत्रा - अब क्यों चुप हो रिया? अब तो सबूत भी है तुम्हारे हाथ में । जिसे तुम दिन भर भाई भाई कहते नहीं थकती थी , पूछो इससे कि क्यों किया इसनें ऐसा?

रिया अब आगे बढ़कर राजेश के पास जाकर खड़ी हो गई - क्या है यह सब ? अब आपके पास कुछ जवाब है ?

राजेश ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा - आज कोई जवाब नहीं है मेरे पास।

रिया ने अब पलटकर मिसेज मल्होत्रा की ओर देखा - सही कहती हैं आप , ये मेरे सौतेले भाई हैं और आप मेरी सगी मां है और सगे से बढ़कर दुनिया में कोई और रिश्ता नहीं होता। पता नहीं क्यों , मैं आज तक आप को नजरअंदाज करती रही? आप तो इतना कुछ करती है मेरे लिए ।

मिसेज मल्होत्रा के चेहरे पर अब जीत की एक मुस्कान तैर गई।

रिया - आज मुझे बहुत शर्म आ रही है खुद पर कि मैंने एक ऐसे इंसान को तवज्जो दी , प्यार और सम्मान दिया जो शायद इसके लायक था ही नहीं - कहते हुए रिया ने अब गुस्से में राजेश को देखा ।

राजेश एकदम शांत खड़ा था उसकी नजरें झुकी हुई थी।

रिया - आज मेरे अपने ने ही मुझे शर्मसार किया, भरोसा तोड़ा गया है मेरा। आप क्यों खामोश है भाई , कुछ कहिए ना?

राजेश अब चुपचाप केबिन से बाहर निकलने को हुआ कि रिया ने आगे बढ़कर उसे रोक लिया - इस बार आपको ऐसे नहीं जाने दूंगी। जो गलत है, वह गलत है फिर चाहे गलती किसी की भी क्यों ना हो । अगर पूरे स्टाफ के सामने इज्जत , उछाली गई है तो माफी भी मांगनी पड़ेगी इस घटिया हरकत की ।

नैना की आंखें नम हो गई यह सोच कि क्या कह रही है रिया? अपने भाई पर बस इतना ही भरोसा था इसे ?

साहिल अब पीछे खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था।

रिया - बस बहुत हो गया , खत्म करते हैं यही सब - कहते हुए वह जैसे ही मिसेज मल्होत्रा की ओर बढ़ी कि राजेश ने रिया का हाथ पकड़ लिया ।

राजेश में अपनी नजरें उठाई उसकी आंखों में एक बेबसी साफ नजर आ रही थी - ऐसा मत करो रिया , यह गलत है ।

रिया - अच्छा, यह गलत है और जो अभी तमाशा हुआ उसका क्या ?

मिसेज मल्होत्रा अब असमंजस की स्थिति में दोनों को देखने लगी कि आखिर हो क्या रहा है?

रिया - भाई आप चलिए, आज माँम को आपसे माफी मांगनी ही होगी ।

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यह सुनकर वहाँ सभी लोग हैरानी से रिया को देखने लगे।

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से में ) - रिया होश में तो हो? क्या कह रही हो तुम?

रिया - होश में तो आप नहीं है । आपने बिना वजह भाई को उनके ही स्टाफ के सामने इतना बुरा भला कह दिया । कितना शर्मिंदा किया उन्हें । अगर सौतेला भाई ऐसा हो तो मुझे हर जन्म में सौतेला भाई चाहिए । आपके दिमाग में बस भाई को कैसे परेशान करना है , यही चलता रहता है तभी आज आप इतनी बड़ी गलती कर बैठी।

मिसेज मल्होत्रा - गलती ? कैसी गलती?

रिया - लो, आपको तो यह भी नहीं पता। अगर भाई चाहते तो इसी बात का फायदा उठाकर आपको अभी दोगुना बेइज्जत कर सकते थे पर वह तो आपकी इज्जत की खातिर यहां से चुपचाप अपराधियों की तरह जा रहे थे । यही फर्क है आप में और मेरे भाई में । एक आप है जो हर वक्त हमें एक दूसरे से दूर करने की कोशिश करती हैं , दूसरी तरफ भाई हैं जो हर वक्त मुझे आपकी इज्जत करने को बोलते हैं ।

, मिसेज मल्होत्रा - मैंने तुम्हें सबूत दिया , उसके बाद भी तुम...

रिया - एक बार आप इन पेपर्स को पढ़ तो लीजिए कि ये है किस चीज के - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की ओर वो पेपर्स कर दिए ।

मिसेज मल्होत्रा ने वो पेपर्स चैक किए तो पाया वो तो ऑफिस के काम से जुड़े कुछ जरूरी कागजात थे जिन पर राजेश के साइन थे ।

मिसेज मल्होत्रा हैरानी से साहिल को देखने लगी - इस साहिल ने मुझे गलत पेपर क्यों पकड़ाए है ?

साहिल गहरी सोच में डूब गया कि आखिर माजरा क्या है?

रिया - अब कुछ समझ में आया आपके , अगर ऐसे पेपर्स पर भाई के साइन नहीं होंगे तो किसके होंगे ।

यह सुन नैना की जान में जान आई।

रिया - अगर गलती आप से हुई है तो माफी भी आप ही मांगेंगी, वह भी सबके सामने ।

, मिसेज मल्होत्रा कुछ बोल पाती , उससे पहले ही राजेश बोल उठा - बंद करो यह सब रिया। यहां पहले ही बहुत तमाशा हो चुका है , मैं अब और मजाक उडवाना नहीं चाहता यहां किसी का भी - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की ओर गुस्से से देखा ।

रिया - नहीं भाई , माफी तो माननी पड़ेगी । आप हर बार इन्हें यूं ही छोड़ देते हो इसलिए बार-बार वही हरकतें करती हैं वो, इनको भी पता चले कि जब कोई सबके सामने बेइज्जत होता है तो कैसा लगता है फिर इनकी तो गलती भी थी ।

मिसेज मल्होत्रा - जुबान संभाल कर बात करो रिया , मां हूँ तुम्हारी ।इस तरह बात नहीं कर सकती तुम मुझसे। तुम मुझे माफी मांगने को कह रही हो ?

रिया - तो ठीक है , भूल जाइए कि आपकी कोई बेटी भी है।

राजेश और मिसेज मल्होत्रा हैरानी से रिया को देखने लगे।

राजेश (गुस्से में ) - बस करो रिया ,बाद में बात करते हैं ।

रिया - नहीं भाई , मैं इस बार पीछे नहीं हटूंगी । मां को माफी मांगनी हीं होगी - कहते हुए उसने गुस्से में मिसेज मल्होत्रा , को देखा ।

मिसेज मल्होत्रा को अब साहिल पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि इस बेवकूफ ने यहां सब कुछ बिगाड़ दिया । गलती तो उनकी भी थी जो बस साइन पर ही ध्यान दिया, यह नहीं देखा कि वह पेपर्स है किस चीज के ?

इस वक्त उन्हें माफी मांगना ही सबसे सही लगा वरना वो रिया से भी हाथ धो बैठती।

मिसेज मल्होत्रा आगे बढ़कर राजेश के सामने खड़ी हो गई, राजेश ने एक बार भी उनकी तरफ नहीं देखा क्योंकि वह भी जानता था कि यह उनकी मजबूरी है , पछतावा नहीं ।

मिसेज मल्होत्रा - मुझे माफ कर दो , मुझसे गलती हो गई - कहते हुए वह ऑफिस से निकल गई। अब स्टाफ वापस अपने अपने काम पर लग गया।

रिया (मायूसी से) - आई एम सॉरी भाई , मॉम की वजह से..

राजेश (मुस्कुराकर ) - कोई बात नहीं , होता है ऐसा ।

, रिया - मॉम को पता नहीं क्या मिलता है यह सब करने में , मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता जब वह आपके साथ ऐसा करती है - कहते हुए रिया की आंखें नम हो गई।

राजेश ने बड़े प्यार से रिया को गले से लगा लिया - बस ऐसे ही अपने भाई पर भरोसा करते रहना हमेशा । मैं कभी तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं करूंगा , जो भी है जैसा भी है और जितना भी है हम दोनों साथ मिलकर बाँटेंगे और साथ मिलकर रहेंगे । मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकता हूं पर तुम्हारी आँखों में खुद के लिए शक नहीं और शायद इसीलिए मिसेज मल्होत्रा को भी बर्दाश्त कर रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि तुम मेरे साथ हो ।

रिया (मुस्कुराकर) - जानती हूं ।

नैना अब एक कोने में खड़ी उन दोनों भाई बहन के प्यार को देखकर बहुत खुश थी कि चलो राजेश के साथ मैं ना सही पर इतना प्यार करने वाली बहन तो है ।

विशाल जो दोनों भाई बहन के प्यार को देख रहा था , आगे बढ कर आया - क्या बात है , आज तो हमारी रिया ने मिसेज मल्होत्रा की छुट्टी कर दी ।

, रिया - क्यों नहीं , कोई भी मेरे भाई के बारे में कुछ भी बोलेगा तो ऐसे ही थोड़ी जाने दूंगी कहते हुए रिया हंसने लगी। उसे यूं हंसते देख राजेश और विशाल भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके ।

साहिल अपनी चेयर पर बैठा बैठा सोच रहा था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है ? कल मिसेज मल्होत्रा ने जब पेपर दिए थे तो उसने वह पड़े थे और उन्हीं पेपर्स को फाइल में लगाया था तो यह पेपर्स कहां से बीच में आ गए ? मैं भी कितना बेवकूफ हूं जो बस साइन पर ध्यान दिया लेकिन पेपर्स है किस चीज के, इस पर ध्यान देना भूल ही गया। मिसेज मल्होत्रा क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में ।

तभी नैना उसके पास आकर अपनी चेयर पर बैठ गई ।

नैना - थैंक गॉड , सब कुछ ठीक हो गया वरना मिसेज मल्होत्रा तो आज पूरी प्लानिंग के साथ राजेश को नीचा दिखाने की तैयारी करके आई थी। भला कोई मां कैसे अपने बच्चे के साथ ऐसा कर सकती है ? हां सौतेला ही सही पर है तो बेटा ही ना । वह तो शुक्र है कि रिया इनके बहकावे में नही आई और पेपर्स गलत निकले । साहिल तुम क्या कहते हो?

साहिल - मैं क्या कहूं ? अब इनका फैमिली मैटर है , इसमें , हम कर भी क्या सकते हैं ।

नैना - मिसेज मल्होत्रा जितने विश्वास से बोल रही थी , उससे तो ऐसा लग रहा था कि उनकी बात सही है । उन्होंने कहीं से तो राजेश के साइन लिए होगे वरना इतनी बड़ी बेवकूफी क्यों की?

साहिल - पता नहीं , वह भी हो सकता है ।

नैना अब उठ कर किसी काम से दूर चली गई, साहिल की नजर अब टेबल पर रखी उस फाइल पर गई जिसमें उसने पेपर्स रखकर राजेश के साइन करवाए थे ।

साहिल ने वह फाइल उठाई और उसको जल्दी से पलटने लगा । वह अब हैरान रह गया फाइल को देखकर - असली पेपर उस फाइल में ही रखे थे । साहिल अब अपनी बेवकूफी पर हैरान रह गया, इसका मतलब मैंने हीं जल्दबाजी में फाइल से गलत पेपर निकाल लिए थे । मुझसे इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है ? वह सोच में डूब गया। उसने इतना अच्छा मौका अपने हाथों से निकाल दिया।

राजेश चुपचाप कैबिन में बैठा था। आज जो भी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था । आज दिस तरह उसे बेइज्जत करने

, की कोशिश की गई, यह बात उसे अंदर तक कचोट गई थी। भले ही वह रिया के सामने मुस्करा रहा था पर ठेस तो लगी ही थी गहरी।

नैना अब कैबिन मे आई। राजेश चुपचाप बैठा था।

नैना - तुम ठीक हो ना?

राजेश - तुम्हें मेरी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है ।

नैना - जरूरत है। आखिर कब तक सहन करोगे ये सब तुम। थक नहीं जाते ये सब झेलते हुए?

राजेश ने अब नैना को देखा - हम्म, आदत है मुझे। मेरे हिस्से की नफरत मुझे ही झेलनी होगी। तुम परेशान मत हो, तुमको साहिल के साथ शाम को बाहर जाना है ना । उसी पर फोकस करो ।

नैना - राजेश तुम हर बात पर घूम फिर कर वहीं पहुंच जाते हो ।

राजेश (गुस्से मे ) - क्योंकि मैं ऐसा ही हूं । मेरे आगे नाटक करने की जरूरत नहीं है ।

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नैना - मेरी चिंता तुम्हे नाटक लगती है ।

राजेश - जाओ यहाँ से, मुझे और परेशान मत करो।

नैना - अगर मै मिसेज मल्होत्रा को अपनी सच्चाई बता दूँ तो वो तुम्हें छोड़ कर मुझे तंग करने लग जाएंगी, तुम तब तक सुकून से तो रह पाओगे तब तक - कहते हुए नैना राजेश को देखने लगी।

राजेश ने यह सुन अब नैना की ओर देखा।

नैना - इतना तो कर ही सकती हूँ मै तुम्हारे लिए- कह नैना एक पल को रूकी और कैबिन के दरवाजे की ओर चली।

राजेश अब सीट से उठ खड़ा हुआ - बेेेेशक वो तुम्हारे पीछे पड जाएंगी पर क्या तुम्हें सच मे लगता है कि तब मै सुकून से रह पाऊंगा?

नैना उदास होकर बोली - नहीं।

राजेश - मै अपने हिस्से की तकलीफ किसी को भी नहीं दे सकता। जब तक सहन कर सकता हूँ, कर रहा हूँ अपनों की , खातिर। जब किसी दिन पानी सर से ऊपर चला जाएगा तो निकल जाऊँगा कहीं दूर, जहाँ कम से कम कुछ वक्त सुकून से तो रह पाऊंगा ।

नैना - रह पाओगे अपनों के बिना?

राजेश यह सुनकर मुस्कुरा दिया - ये जो इंसान के पैरों में अपनों के नाम की बेडी होती है, यह वक्त के साथ साथ उस इंसान को और जकडती चली जाती है और जब इंसान इसे तोडने की कोशिश करता है तो अक्सर खुद ही टूट जाया करता है पर ये बेडियाँ मौत तक उसे जकड कर ही रखती है - कहते हुए राजेश केबिन से बाहर निकल गया।

नैना चुपचाप खड़ी रह गई ।
 
शाम को मिसेज मल्होत्रा ने ऑफिस बंद होने के बाद साहिल को एक रेस्टोरेंट में बुलाया ।

मिसेज मल्होत्रा - एक काम ठीक से नहीं कर पाए तुम ? तुम जानते हो ,आज तुम्हारी वजह से कितनी बेइज्जती हुई है मेरी सबके सामने ?

, साहिल - मैं मानता हूं कि गलती हुई है पर आप भी उसमें बराबर की हकदार है । अगर मैंने वह पेपर्स नहीं देखे थे तो आपने भी नहीं देखे थे इसलिए मुझ पर सब कुछ थोपने की जरूरत नहीं है ।

मिसेज मल्होत्रा - तमीज से बात करो । एक तो काम खराब कर दिया और ऊपर से मुझसे ही जुबान चला रहे हो । अगर इतनी मेहनत अपने काम में की होती तो यह दिन ना देखना पड़ता ।

साहिल - मैंने तो ढंग से ही किया था पता नहीं सही पेपर्स की जगह गलत पेपर्स कैसे निकाल लिए मैंने पर अब असली पेपर्स लाया हूं मैं । आप इन्हें रिया को दिखा सकती हैं - कहते हुए उसने पेपर्स मिसेज मल्होत्रा की ओर बढ़ा दिए ।

मिसेज मल्होत्रा ने वो पेपर्स फाड़ कर फेंक दिए - पागल दिखती हूं तुम्हें , अब इनका कोई फायदा नहीं ।अब अगर इन्हें लेकर गई तो राजेश , रिया को मुझ पर शक हो जाएगा।

साहिल - इतनी जल्दी हार नहीं मानूंगा मैं , फिर से कोशिश करेंगे ।

मिसेज मल्होत्रा - पर पूरी सावधानी बरतनी होगी ।

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इधर शाम को सारा अपने घर पर उदास बैठी थी , लाइफ में पहली बार कुछ अच्छा होने वाला था कि सब कुछ गड़बड़ हो गया । आज मुझे राजेश सर कैफे ले जाने वाले थे पर उनकी सौतेली मा ने सब कुछ गड़बड़ कर दिया ।

सारा उदास हो गई - कितना गंदा लग रहा होगा सर को ? वह अभी यह सोच रही थी कि राजेश का फोन आया, यह देख सारा हैरान रह गई।

सारा - हेलो।

राजेश - सारा तुम तैयार हो ना? मैं बस कुछ ही देर में तुम्हारे यहां पहुंचने वाला हूं ।

सारा यह सुनकर हडबडाते हुए बोली- पर मुझे तो लगा कि आज की वजह से ....

राजेश - मैंने वादा किया था तुमसे , तो ऐसे कैसे छोड़ सकता हूं । अच्छा चलो , एक काम करते हैं । मुझे अभी थोड़ा काम है , मैं पहले वह काम खत्म कर लेता हूं । तुम तब तक तैयार हो जाओ । 1 घंटे में पहुंच जाऊंगा मैं ।

, सारा (मुस्कुराते हुए ) -थैंक्यू सर , मैं अभी तैयार होती हूं।

राजेश ने फोन काट कार में बगल में बैठे विशाल को देखा।

विशाल - आज का दिन काफी थका देने वाला रहा यार ।पहले मिसेज मल्होत्रा का ड्रामा झेलना पड़ा और अब यह सब ड्रामा करना पड़ रहा है ।

राजेश - वह तो है । अब नैना सारा के साथ उलझी रहेगी और हम अपना काम करके निकल जाएंगे ।

विशाल - हाँ, समझ गया ।

राजेश - वकील से बात की ? पेपर्स तैयार है ना ?

विशाल - हां ।

राजेश - तो चलो , वह पेपर्स वहां से कलेक्ट करते हैं ।

विशाल - राजेश एक बार और सोच लो। क्या तुम सच में यह सब करने वाले हो ?

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राजेश अब कुछ देर तक खामोश रहा फिर मुस्कुरा कर बोला - थक गया हूं सब करते हुए । अब सोच लिया है कि यह तो करना ही पड़ेगा । मेरे पास और कोई चारा नहीं है पर हां, अगर तुम पीछे हटना चाहते हो तो हट सकते हो । मै कुछ और सोच लूँगा।

विशाल - मैं अपने दोस्त के लिए कुछ भी करूंगा। मुझे पूरा भरोसा है तुम पर लेकिन रिचा ? उसका क्या?

राजेश - क्या वह तुम्हारी बात नहीं मानेगी ?

विशाल - यह उसकी जिंदगी का सवाल है , उसकी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला हम उसकी इजाजत के बिना नहीं कर सकते । सोचो क्या बीतेगी उस पर , जब उसे पता चलेगा कि हम उसके साथ इतना बड़ा धोखा करने वाले हैं ।

राजेश - नहीं , धोखा नहीं करूंगा । जो भी करूंगा , उसे बता कर करूंगा ।

विशाल - कहीं उसने घबराकर नैना को फोन कर सारी , सच्चाई बता दी तो ?

राजेश मुस्कुराते हुए विशाल की तरफ देखा - वो ऐसा कुछ भी नहीं कर सकती । इस बार परेशानी में उसी ने मुझे फंसाया है तो वही निकालेगी।

विशाल - जो भी है , थोड़ा संभाल कर ।

विशाल,राजेश दोनों सीधे वकील के पास गए और वहां से कुछ पेपर्स उठाए। राजेश ने वो पेपर्स विशाल को दे दिए - कल सुबह साथ लेकर आना। मैं अपने पास नहीं रख सकता इन्हें , तुम तो जानते ही हो मिसेज मल्होत्रा की हरकतें ।

विशाल - हां , आज तो बाल-बाल बचे तुम वरना बुरी तरह फँसाने की तैयारी थी उनकी लेकिन उनके पास वह पेपर्स आए कहां से ? अगर उन्होंने सबके सामने तमाशा किया तो उसका जाल बिछाकर रखा ही होगा ना तो उनका प्लान फेल कैसे हुआ ?

राजेश - कुछ नहीं, नैना ने जो आखिरी फाईल साइन कराई, उसमे थे वो पेपर्स। मैंने साइन तो किए पर उन्हें पीछे से निकाल बीच मे रख दिया साहिल से नजर चुरा कर। बाद मे , जब मिसेज मल्होत्रा ने नाटक शुरू किया तो मै समझ गया कि ये भी उससे मिली हुई हैं।

विशाल - अगर साहिल सही पेपर्स उठा लेता तो?

राजेश - कुछ नहीं होता तब भी। रिया और मेरा रिश्ता इतना कमजोर नहीं। वैसे यह सब बात की बात है पर याद रखो कि इस बार मिसेज मल्होत्रा अकेली नहीं है ,उनके साथ साहिल भी है । ये चुप नहीं बैठेंगे।

विशाल - तुम सब जानते हो तो रिया को उसकी मां के बारे में बताते क्यों नहीं ?

राजेश अब गंभीर होकर बोला - बता देता पर उससे रिया रिश्ता खत्म कर देती तो मिसेज मल्होत्रा वाली बात सच हो जाती कि मैं उनसे उनकी बेटी को छीनना चाहता हूं ।

आज इस एक बात पर ही रिया उनसे रिश्ता खत्म करने को तैयार हो गई तो सोचो जब उसे पता चलेगा कि उसकी मॉम साहिल के साथ मिलकर एक बार फिर मेरे पीछे है तो वह क्या करेगी।

विशाल - तो क्या खामोश रहोगे ?

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राजेश - नहीं जवाब दूंगा पर अपने तरीके से लेकिन इस बात का ध्यान रखना है कि रिया को मिसेज मल्होत्रा की हरकतों के बारे में शक ना हो । मैं नहीं चाहता कि उसके रिश्ते खत्म करने की वजह मैं बनूं । मिसेज मल्होत्रा जितनी नफरत मुझसे करती है उतना ही प्यार रिया से भी करती हैं । अगर मैं भी उन्हीं की तरह बन गया तो क्या फर्क रह जाएगा उनमें और मुझमें ? मुझे मेरी फैमिली का ख्याल है फिर चाहे किसी और को हो ना हो ।

तभी विशाल ने पास रिचा का फोन आया।

विशाल - रिचा का फोन है।

राजेश- उठाओ, क्या बात है ?

विशाल (फोन उठाकर) - हां बोलो।

रिचा - कहां हो तुम? आज एक बार भी फोन नहीं किया।

विशाल - वह काम में बिजी था बहुत, तुम्हारी तबीयत ठीक है ?

, रिचा - अच्छी हूं मैं । अच्छा, राजेश तुम्हारे पास तो नहीं है?

विशाल (राजेश की ओर देखकर फोन स्पीकर पर डाल दिया) - नहीं , मैं अकेला हूं। राजेश यहां नहीं है । कहो क्या बात है ?

रिचा - ये राजेश का दिमाग कुछ ज्यादा ही चलता है। उसके दिमाग में कुछ चल रहा है क्या ?

यह सुन राजेश मुस्कुरा दिया ।

विशाल -नहीं तो। क्यों , क्या हुआ ? किसी ने कुछ कहा तुमसे?

रिचा - नहीं, मुझे बस ऐसा लगा और फिर कोई बात होगी तो तुम मुझसे छुपाओगे थोड़े ही ?

विशाल - बिल्कुल। मैं भला तुमसे क्या छुपा सकता हूं? चलो बाद में बात करते हैं । विशाल ने फोन रख राजेश को मुस्कुराते हुए देखा - तो आग यहां तक फैल गई ।

राजेश - जानता था कि नैना शांत नहीं बैठेगी और उसे पूरा शक है हम पर तभी तो सारा को बीच में लाना पड़ा। नैना , सोच रही है कि मै सारा को अपनी तरफ कर चाहता हूँ पर ऐसा कुछ नहीं है।

विशाल - क्या झमेला है यार, इससे अच्छा तो इंसान अकेला ही खुश है ।

राजेश नेें अब टाइम देखा - चलो, मैं तुम्हें घर छोड़ कर आता हूं और सारा का टाइम हो गया है ।

राजेश सारा को लेकर एक कैफे में पहुंचा। सारा बहुत खुश थी राजेश के साथ ऐसे अकेले समय बिताते हुए ।

राजेश - तुमने किसी को बताया तो नहीं कि हम यहां आए हैं?

सारा - नहीं सर।

राजेश - नैना को?

सारा - बिल्कुल नहीं । उसका फोन आया था, कह रही थी कि आप मुझे बस पागल बना रहे हो क्योंकि आप उसे तंग करना चाहते हो और मेरी दोस्ती उससे तुडवाना चाहते हो।

, राजेश यह सुनकर मुस्कुरा दिया - मुझे लगता है कि जैसे वह तुम्हे परेशान करती है तो तुम भी उसे परेशान करना चाहिए।

सारा - वह कैसे ?

राजेश - कल तुम ऑफिस में जाकर बताओ कि आज तुम मेरे साथ थी, उसे भी तो पता चलना चाहिए कि तुम किसी से कम नहीं हो ।

सारा ( सोचते हुए) - हां सही कह रहे हैं आप ,ऐसा ही करूंगी।

राजेश सोचने लगा -चलो इनका इंतजाम तो हो गया ,अब रिचा को देखता हूं ।

सारा - आप भी देखना सर कल , नैना को मैंने तंग ना किया तो ।

राजेश - नहीं , मैं कल नहीं आ रहा हूं । कुछ जरूरी काम है मुझे ।

सारा (उदास होकर ) - ठीक है ।

, राजेश - पर तुम तो उसे परेशान कर ही सकती हो थोड़ा सा। हक है तुम्हें , दोस्त हो उसकी ।

सारा - ठीक है ।

उसी रात विशाल ने रिचा को फोन किया - कल हम दोनों घूमने चल रहे हैं ।

रिचा (खुशी से उछलते हुए) - कहाँ?

विशाल - खुद ही देख लेना।

रिचा- ठीक है।

विशाल- बस तुम और मैं चलेंगे। इतना टाइम हो गया अकेले घूमे। कुछ मत कहना किसी से भी।

रिचा - ठीक है, नहीं कहूँगी किसी से । (कुछ सोचकर) राजेश को पता है ?

विशाल -नहीं , मैंने किसी को भी नहीं बताया । कल ऑफिस की छुट्टी ले ली है । अपनी भी तो पर्सनल लाइफ है। तो चलो , कल मिलते हैं ।
 
विशाल ने फोन रख दिया -आई एम सॉरी रिचा, मैंने बोला था पर तुम्हारी एक बेवकूफी की वजह से सारा काम बिगड़ गया। काश तुम उस दिन अपना दिमाग ना लगा कर मेरी सुनती तो अब तुम्हें यह सब ना भुगतना पड़ता ।

राजेश अब घर जाने के रास्ते में था कि विशाल का फोन आया - मैंने रिचा को कल के लिए बोल दिया है ।

राजेश - अच्छी बात है , उसे शक तो नहीं हुआ ।

विशाल - नहीं , उसे कोई शक नहीं हुआ।

राजेश - ठीक है , कल मिलते हैं और वह पेपर्स का ध्यान रखना।

विशाल - हां जरूर ।

राजेश अब घर पहुंचा तो रिया उसका इंतजार कर रही थी।

राजेश - खाना खाया या नहीं ?

,

रिया - आपका इंतजार कर रही थी ।

राजेश - मिसेज मल्होत्रा ने खाया?

रिया - नहीं और ना ही मैं उन्हें कहने वाली हूं ।भूख लगेगी तो खा लेंगी ।

राजेश (मुस्कुरा कर) - ऐसे नहीं करते रिया। मां है वह तुम्हारी, जो भी करती है तुम्हारे लिए करती हैं ।

रिया - पर मैंने तो नहीं कहा था उन्हें यह सब करने के लिए फिर क्यों करती हैं । आप भी तो करते हो मेरे लिए पर आप उनका दिल नहीं दुखाते , ना नीचा दिखाते हो।

राजेश - अच्छा ठीक है ,जाओ बुलाकर लाओ खाने को ।

रिया (गुस्से में ) - जिसे आना है , खुद आ जाएगा। मैं नहीं जा रही ।

राजेश - ठीक है , मैं जाता हूं ।

रिया ( हैरानी से ) - इतना सब होने के बाद भी आप...

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राजेश - इस सब के बाद भी वह तुम्हारी माँ ही रहेंगी । जो भी है उसे हम कभी ना कभी सुलझा लेंगे लेकिन खाने पर गुस्सा करने काकोई फायदा नहीं । जानती हो ना कि लो बीपी है उन्हें , अगर दवा नहीं लेंगी तो तबीयत खराब हो सकती है - कहते हुए वह मिसेज मल्होत्रा के कमरे की ओर बढ़ चला।

मिसेज मल्होत्रा अपने कमरे में नाराज बैठी थी। राजेश अंदर आया तो उसे देख कर वह मुंह फेर खड़ी हो गई ।

राजेश - चलिए , खाना खा लीजिए ।

मिसेज मल्होत्रा - मैं नहीं खा रही और ना ही मेरे सामने नाटक करो । पहले मुझे बेइज्जत किया सबके सामने और अब जले पर नमक छिड़क रहे हो ?

राजेश - मैं बस खाना खाने की कहने आया था और रही बात बेइज्जत होने की तो आप ऐसा करती ही क्यों है ? आपने जाल बिछाया था मुझे फँसाने को और सबके सामने बेइज्जत करने को पर आपकी लापरवाही से सब कुछ बिगड़ गया और आपको ही शर्मसार होना पड़ा ।

मिसेज मल्होत्रा - नफरत करती हूं तुमसे । तुम्हें आंखों से दूर , करने के लिए करती हूं , मेरे परिवार से बाहर निकालने के लिए करती हूं पर मेरी बेटी कुछ समझती ही नहीं ।

राजेश (मुस्कुराकर )- यह परिवार मेरा भी है । अपने पापा रिया को छोड़कर मैं यहां से कहीं नहीं जाऊंगा । रिया की नजरों में खुद को गिराने की जिम्मेदार भी आप ही हैं , आप आप उसके सामने कुछ ना कुछ ऐसी हरकत कर देती है कि वह आपके मन्सूबे जान जाती है फिर मुझे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

यह बात आप भी जानती है कि ऐसे कितने राज है आपके, जो मैंने छुपा कर रखे हैं । अगर यह रिया को पता पड़ गए कि आपने मेरे साथ क्या-क्या किया है तो वह एक पल नहीं सोचेगी आप से रिश्ता खत्म कर रहे हैं पर हां वह बात अलग है कि आप कभी भी मुझसे जीत नहीं पाई और ना ही जीत पाएंगी ।

मिसेज मल्होत्रा - देख लेना , एक दिन निकाल फेंकूंगी तुम्हें हमारी जिंदगी से ।

राजेश - किस की मदद से ? साहिल की मदद से ?

मिसेज मल्होत्रा हैरानी से राजेश को देखने ली कि राजेश , बोला - चौकिँए मत, सब जानता हूं बस रिया की वजह से खामोश हूं लेकिन इसे मेरी कमजोरी मत समझना। साहिल को रिया तो क्या उसकी परछाई तक नसीब नहीं होगी। शर्म आनी चाहिए आपको अपनी बेटी का इस्तेमाल करते हुए

मिसेज मल्होत्रा - मेरी बेटी है वह ।

राजेश - बेटी है प्रॉपर्टी नहीं ।

मिसेज मल्होत्रा - तुम मुझे धमकाने आए हो ?

राजेश - मेरे पास उन कामों के लिए वक्त नहीं है। यह सब तो चलता ही रहेगा पर खाने पर ध्यान दीजिए । अगर ऐसे ही मुंह फुला कर बैठी रही तो मुझसे मुकाबला कैसे करेंगी या फिर मैने सच में सारी जायदाद, अपने नाम कर ली तो?

मिसेज मल्होत्रा - मै हार नहीं मानूंगी ।

राजेश - तो ठीक है , चलिए फिर।

मिसेज मल्होत्रा गुस्से में डायनिंग हॉल की तरफ बढ़ चली।

, राजेश यह देख कर मुस्कुराने लगा - चलो , थोड़ी देर मां बेटी साथ बैठेंगे तो कुछ तो बात करेंगी ही ।

अगले दिन विशाल रिचा के यहां पहुंचा ।

रिचा फटाफट से गाड़ी में बैठ गई - चलो जल्दी , आज कितने दिनों बाद हम सुकून से एक साथ घूमने जा रहे हैं ।बड़ा मजा आएगा ।

उधर ऑफिस में सारा ने खूब नमक मिर्च लगाकर नैना को कल शाम के बारे में बताया कि कैसे राजेश सर और उसने खूब मजा किया । नैना अब अंदर ही अंदर जल भुन रही थी।

साहिल टाइम देखते हुए - पर यह विशाल और राजेश है कहाँ? अब तक आए क्यों नहीं ?

सारा - राजेश सर तो ऑफिस आएंगे नहीं । आज वह छुट्टी पर है , कल बताया था उन्होंने मुझे ।

नैना - तुम अब बंद भी करोगी अपना कल का राग?

सारा - क्यों तुम्हें जलन हो रही है ? सही कहा था राजेश सर ने कि तुम बहुत जलोगी। अच्छा है , और जलो ।

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नैना अब यह सुनकर सारा को हैरानी से देखने लगी - राजेश ने कहा यह?

सारा - हाँ।

नैना - उसने कुछ पूछा तो होगा तुमसे हमारे प्लान या मेरे और साहिल के बारे में?

सारा - कुछ नहीं पूछा।

नैना सोच मे पड गई कि आखिर राजेश फिर सारा को काँफी पर लेकर गया? क्या चल रह है उसके दिमाग में?

उधर विशाल रिचा को एक फार्म हाउस पर लेकर आया ।

रिचा गाड़ी से उतरकर - कितना सुंदर है । यह तुम्हारा है?

विशाल - हां ।

रिचा अब फार्म हाउस के अंदर चली गई- कितनी शांति है यहाँ । तभी उसके कानों में आवाज आई - तुम्हें पसंद तो आया ना ?

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रिचा हां कहकर जैसे ही आवाज की ओर मुड़ी तो सामने मुस्कुराता हुआ राजेश खड़ा था ।

राजेश को देखकर रिचा चौक गई - तुम यहां ?

अब उसने विशाल की ओर देखा - पर तुमने तो कहा राजेश को...

राजेश - मैंने ही कहा था उसे तुमसे यह कहने को ।

रिचा - पर क्यों ?

राजेश - अगर मैं सच कह कर बुलाता तो तुम कभी नहीं आती ।

रिचा - क्यों ? ऐसी क्या बात है ?

राजेश ने विशाल को इशारा किया तो उसने फॉर्म हाउस का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।

रिचा - विशाल लॉक क्यों कर रहे हो? कोई परेशानी है क्या?

, विशाल खामोशी से रिचा को देखता रहा।

राजेश - पेपर लाए हो ?

विशाल - हां।

रिचा को अब टेंशन होने लगी कि आखिर बात क्या है ,यह दोनों ऐसे क्यों बर्ताव कर रहे हैं ?

राजेश रिचा के पास आकर खड़ा हो गया - मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि सिर्फ सगाई की बात बोलनी है नैना को लेकिन तुमने सब गड़बड़ कर दिया सबके सामने शादी की बात कहकर ।

रिचा हैरानी से राजेश को देख रही थी ।

राजेश - शायद नैना को शक है हमारी सगाई वाली बात पर, वह शादी के दिन गिन रही है और मेरे सामने कोई चारा नहीं है ।

रिचा - तो पीछे हट जाओ ।

, राजेश - कभी नहीं । इतना आगे निकल कर पीछे नहीं हट सकता ।

रिचा - अब ?

राजेश - अब झूठ को सच में बदलने का वक्त आ गया है ।

रिचा - मतलब ?

राजेश - मतलब यह कि हम दोनों आज ही शादी करेंगे ।

रिचा ( हैरानी से) - पागल हो गए हो तुम? विशाल यह क्या कह रहा है ?

राजेश- विशाल से मैं बात कर चुका हूं , उसे कोई परेशानी नहीं है ।

रिचा - पर मुझे है । मुझसे क्यों नहीं पूछा तुमने ?

राजेश ( गुस्से से) - क्या तुमने मुझसे पूछा था सबके सामने शादी की बात करने से पहले ? समझ लो, यही तुम्हारी सजा है ।

, रिचा - पर तुम नैना से ....

राजेश - उसी के लिए कर रहा हूं सब,जब वह मुझसे दूर हो जाएगी तब मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा और विशाल तुमसे शादी कर लेगा । हम दोनों शादी के बाद भी अच्छे दोस्त की तरह रहेंगे ।

रिचा (घबरा कर) - पर मैं शादी नहीं करना चाहती और ना ही करूंगी। मै विशाल से प्यार करती हूँ।

विशाल बस मायूस सा चुपचाप खड़ा था।

राजेश - पूछ नहीं रहा , बता रहा हूं ।

रिचा की आंखें नम हो चली - तुम जबरदस्ती नहीं कर सकते, तुम तो ऐसे नहीं थे ?

राजेश - मैं बस सब ठीक करने की कोशिश कर रहा हूं और उसके लिए यह सब जरूरी है ।

रिचा विशाल की ओर देखने लगी - तुम बोलते क्यों नहीं कुछ।

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विशाल - मुझे पूरा भरोसा है राजेश पर । अपने दोस्त के लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं ।

रिचा अब दोनों को हैरानी से देखने लगी ।राजेश और विशाल दोनों ही बेहद गंभीर होकर उसके सामने खड़े थे...,
 
नैना अब सोच में पड़ गई कि राजेश फिर सारा को लेकर गया ही क्यों था अपने साथ? क्या सिर्फ मुझे जलाने के लिए या फिर कुछ और चल रहा है उसके दिमाग में ?

उधर रिचा हैरानी से राजेश और विशाल को देख रही थी - तुम दोनों पागल हो गए हो? विशाल तुम जानते भी हो कि तुम क्या करने को कह रहे हो मुझे ?

विशाल - अच्छे से जानता हूं लेकिन यह सब करने के लिए कहीं ना कहीं तुम ने मजबूर किया है हमें । ना तुम उस दिन ऑफिस में शादी की बात करती और ना ही आज यह नौबत आती। मैं बस अपने दोस्त को जीतते हुए देखना चाहता हूं और तुम घबरा क्यों रही हो ? यह हमारा दोस्त है , भूल गई?

तुम बस यह समझ लो कि कुछ वक्त की बात है और तुम अपनी दोस्ती का फर्ज निभा रही हो ।

रिचा - पर ऐसे?

राजेश - देखो रिचा , मैं समझ सकता हूं कि यह सब तुम्हारे लिए इतना आसान नहीं है । यकीन मानो मेरा, इसके अलावा और कोई चारा नहीं है । मिसेज मल्होत्रा मेरे पीछे शुरू से पड़ी है और अगर उन्हें यह पता चल गया कि नैना मेरा पुराना प्यार है तो वह उसे भी नहीं छोड़ेंगी । साहिल भी अच्छा लड़का नहीं है , जब हम दोनों शादी कर लेंगे तो नैना यहां से दूर चली जाएगी जिससे कम से कम वह तो सुरक्षित हो जाएगी उन सभी गलत लोगों से । वह अपनी दोस्त की शादीशुदा जिंदगी में दखल नहीं देंगी। जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तो मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा फिर विशाल तुमसे शादी कर लेगा। मैं बस सब कुछ ठीक करना चाहता हूं ।

रिचा - नैना तो दूर चली जाएंगी पर तुम ? तुम रह पाओगे नैना के बिना ?

राजेश - मेरी वजह से वह तकलीफ में रहे तो भी कौन सा जी , पाऊंगा मैं ?

विशाल - राजेश की परेशानी को समझो और हां कह दो।

रिचा - नहीं मैं शादी नहीं कर सकती। कोई मजाक है क्या यह सब?

राजेश - तो फिर तुम मुझे जबरदस्ती शादी करने को मजबूर कर रही हो, विशाल लाओ पेपर ।

रिचा ( हैरानी से ) - कौन से पेपर ?

राजेश - यह हमारी शादी के पेपर्स है । एक महीने बाद हमारी शादी खत्म हो जाएगी ,यह एक महीना दे दो मुझे । मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा ।

रिचा - यह कोई शादी होती है इस तरह? यह तो बस एक सौदा है राजेश । विशाल तुम समझाओ इसे, यह होश में नहीं है।

राजेश - ठीक है , अगर तुम्हारे हिसाब से यह सौदा है तो तुम इन पर तो साइन कर ही दो, मैं पंडित जी का इंतजाम कर दूंगा । विशाल वह पंडित जी को बुलाओ , कह दो कि बशादी , करानी है अभी के अभी ।

रिचा की आंखें नम हो गई , सोचा नहीं था कि जिन दो लोगों पर भरोसा किया वह इस तरह उसे धोखा देंगे ।

राजेश - अब खुश? पंडित जी जल्दी आ जाएंगे ।

रिचा (गुस्से में ) - नहीं, मैं नहीं करूंगी शादी ।

राजेश अब गुस्से में चिल्लाया - बस , बहुत बोल ली तुम । सब कुछ समझा दिया पर इतनी सी बात समझ नहीं आती तुम्हारे? मैं वैसे भी बहुत परेशान हूं, मुझे और गुस्सा मत दिलाओ - कहते हुए राजेश ने विशाल से पेपर ले उन पर साइन कर दिए ।

राजेश - लो रिचा, चुपचाप इन पेपर पर साइन करो।

रिचा अब रोने लगी - राजेश यह गलत है । विशाल तुम कुछ बोलते क्यों नहीं?

विशाल - राजेश की बात मान लो।

, राजेश - साइन करो रिचा - कहते हुए उसने गुस्से में रिचा के हाथ में पेन पकड़ा दिया ।

रिचा - तुम गुस्से में गलत कर रहे हो।

राजेश - चुपचाप साइन करो , कुछ नहीं सुनना मुझे - कहते हुए उसने जबरदस्ती रिचा से साइन ले लिए पेपर्स पर।

रिचाकी आंखों से आंसू बहे जा रहे थे, विशाल यह देख परेशान हो गया और दूसरी ओर मुंह फेर लिया ।

राजेश - सामने वाले कमरे में जाकर आराम करो । मेरे हिसाब से तो शादी हो गई है , बस अब तुम्हारे हिसाब से बाकी है जो पंडित जी करवा देंगे ।

रिचा रोते हुए कमरे में चली गई । राजेश ने गहरी सांस ली और विशाल की ओर देखा - उसकी आंखों में उदासी थी। राजेश का चेहरा भी अब उदास हो गया।

नैना ने रिचा को फोन लगाया पर उसने फोन नहीं उठाया, उठाती भी कैसे ? उसका फोन विशाल के पास जो था ।

नैना को अब चिंता होने लगी कि यह फोन क्यों नहीं उठा , रही?

नैना ने अब राजेश और विशाल को फोन किया पर किसी ने भी फोन नहीं उठाया ।

नैना (घबराते हुए ) - यह हो क्या रहा है ? कहां है यह तीनों और फोन क्यों नहीं उठा रहे ? क्या करूं, किस से पूछू - रिया? हां रिया से पूछती हूं ।

नैना ने रिया को फोन किया।

रिया - हां बोलो नैना?

नैना - तुम्हें पता है क्या राजेश और विशाल कहां है ?

रिया - नहीं , मुझे नहीं पता । भाई कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से बाहर जा रहे हैं पर कहाँ? वह मुझे भी नहीं पता । क्यों कोई परेशानी है क्या?

नैना - नहीं ऐसी बात नहीं है ,बस यूं ही ।

उधर रिचा कमरे में बैठी रो रही थी । विशाल उसके पास पहुंचा और बैठ गया - अब तुम कानूनी तौर पर मिसेज रिचा , राजेश मल्होत्रा बन गई हो , संभालो खुद को । रोने का कोई फायदा नहीं।

रिचा गुस्से से बोली - चले जाओ यहां से , तुम धोखेबाज हो। राजेश तो दोस्त है मेरा पर तुम तो मंगेतर थे, प्यार थे। यह क्या किया तुमने? राजेश को समझाने की जगह उसका साथ दिया?

विशाल अब वहां चुपचाप बैठा था ।

रिचा को अब नैना की याद आई लेकिन वह नैना को कुछ बताए भी तो कैसे ? क्योंकि उसके पास फोन ही नहीं था। रिचा ने देखा कि विशाल की जेब में फोन रखा है । वह कैसे भी करके फोन हासिल करना चाहती थी, तभी विशाल को पंडित जी का फोन आया ।

विशाल - हेलो पंडित जी । ठीक है , मैं आ रहा हूं - कहते हुए विशाल ने जल्दी से फोन टेबल पर रखा और बाहर दरवाजा खोलने चला गया।

रिचा ने फटाफट से फोन उठाया और नैना को फोन लगाया।

, नैना ने जब विशाल का फोन देखा तो उसे उम्मीद बंधी - हेलो विशाल, मैं कब से फोन मिला रही हूं कि तभी दूसरी ओर रिचा के रोने की आवाज सुनाई दी ।

नैना यह सुन हैरान रह गई- रिचा? रिचा कहां हो तुम ? और रो क्यों रही हो ।

रिचा ने अब रोते हुए सारी बातें नैना को बता दी - प्लीज नैना जल्दी आओ । इन्होंने पेपर पर मुझसे साइन करवा लिए हैं कानूनी शादी के लिए और अब पंडित जी भी आ गए हैं। प्लीज मुझे बचा लो ।

यह सुनते ही नैना के पैरों तले जमीन खिसक गई - क्या? कहाँ हो तुम?

रिचा ने उसे बताया कि वह फिलहाल विशाल के फार्म हाउस में है और उसे फार्म हाउस का एड्रेस दिया । तभी रिचा को विशाल के आने की आहट सुनाई दी, उसने जल्दी से फोन काट वहीं वापस टेबल पर रख दिया।

विशाल वहां आकर अपना फोन ढूंढने लगा , फोन मिलते ही उसने वापस जेब में डाला - चलो पंडित जी आ गए ।

, रिचा - नहीं जाऊंगी।

विशाल - शादी तो हो चुकी है कानूनन तौर पर। राजेश आ गया तो उसके गुस्से से मैं भी तुम्हें नहीं बचा पाऊंगा - कहते हुए वह रिचा को बाहर ले गया ।

राजेश वहां पहले से ही उसका इंतजार कर रहा था। दोनों अब शादी की विधि पूरी करने के लिए मंडप में बैठ गए ।

इधर नैना सदमे में बैठी सी रह गई- राजेश ने शादी कर ली? वह भी जबरदस्ती अपनी ही दोस्त से ?

नैना यूं ही बदहवास सी सोचने लगी।

सारा ने अब नैना को ऐसी हालत में देखा तो घबरा गई - नैना क्या हुआ ? बात क्या है ?

तभी वहां साहिल भी आया - क्या बात है ?

सारा - देखो ना , क्या हुआ है नैना को ?

साहिल - नैना बोलती क्यों नहीं ?

,

नैना ने अब उन्हें सारी बातें बताई।

सारा - राजेश सर? नहीं , मेरा मन नहीं मानता कि वह कुछ ऐसा कर सकते हैं ।

नैना - विशाल भी वहां है और राजेश का साथ दे रहा है । ऐसा कैसे कर सकते हैं यह लोग रिचा के साथ?

साहिल - अपने स्वार्थ के लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं।

नैना - साहिल जल्दी चलो , रिचा ने पता बता दिया है । हमें वहां जल्दी पहुंचना है ।

नैना की चेहरे पर अब गुस्सा नजर आने लगा - आखिर कोई कैसे कर सकता है यह सब ? इसकी हिम्मत कैसे हुई रिचा की जिंदगी बर्बाद करने की?

अब सारा साहिल और नैना विशाल के फॉर्महाउस की तरफ चल दिए।

मिसेज मल्होत्रा ने देखा कि रिया किसी काम से बाहर गई है तो वो चुपके से राजेश के कमरे में आई और उसकी तलाशी , लेना शुरू कर दिया । क्या पता , यहां राजेश के खिलाफ कोई सबूत मिल जाए या फिर कोई जरूरी कागजात, जिससे मैं फायदा उठा सकूं ? मेरा दिल नहीं मानता कि राजेश इतना शरीफ है कि वह रिया को धोखा नहीं दे रहा होगा। इंसान कितना भी अच्छा क्यों ना हो , लालच आ ही जाता है ।

मिसेज मल्होत्रा ने अब राजेश की अलमारी ,टेबल वगैरह सारी जगह छान मारी पर उनके हाथ कुछ भी ना लगा।

मिसेज मल्होत्रा निराश हो गई - कम से कम कुछ तो मिल जाता उसके खिलाफ ,तब बताती उसे कि वह कितना शरीफ है - सोचते हुए मिसेज मल्होत्रा बेड पर बैठ गई। यह लड़का जरूरत से ज्यादा चालाक है, एक भी ऐसी चीज नहीं मिली जो मेरे काम की हो और मैं इस राजेश नाम के कांटे को अपनी जिंदगी से निकाल फेंकू।

अभी वह बैठी थी कि उन्हें ध्यान आया कि राजेश की अलमारी में एक छोटा सा लॉकर है । उन्होंने अब फटाफट से अलमारी खोली और उसमें लॉकर को खोलने की कोशिश की पर उसका कोड सही नहीं डाल पा रही थी । आखिर कोड है क्या इसका? अब वह सोचने लगी ,सब कुछ तो ट्राई कर लिया मैंने लेकिन लॉकर खुला ही नहीं ।

, उन्हें याद आया कि राजेश की कॉलेज वाली गर्लफ्रेंड का नाम डाल कर देखती हूं । मिसेज मल्होत्रा ने जैसे ही नैना का नाम डाला तो लॉकर खुल गया। वह मुस्कुराने लगी - ओह तो अपने पहले प्यार को राजेश अभी तक भुला नहीं पाया है?

उन्होंने अब जल्दी से लॉकर को खाली किया और सारे कागजात लाकर बेड पर रख दिए । उन पेपर्स में कुछ फोटो भी थे । जब मिसेज मल्होत्रा ने वह फोटो देखी तो हैरान रह गई क्योंकि इनमें वही लड़की थी जिसने 2 दिन पहले मिसेज मल्होत्रा के साथ ऑफिस में बहस की थी ।

मिसेज मल्होत्रा हैरान रह गई कि इस लड़की के फोटो राजेश के लॉकर में क्या कर रहे हैं ? आखिर बात क्या है ? कही यह वही लड़की तो नहीं ? तभी राजेश ने यहां मुंबई में ऑफिस खोला और इस कंपनी को खरीदा था लेकिन इस लड़की ने तो राजेश का दिल तोड़ा था, तो क्या राजेश ने इसे माफ कर दिया पर जहां तक मैं जानती हूं राजेश तो अपनों की गलती को इतनी आसानी से माफ नहीं करता फिर इसे कैसे माफ कर दिया ? यह लड़की तो मेरे बड़े काम आ सकती है , इसे अपनी तरफ करना ही होगा और साहिल ? क्या वह नहीं जानता कि नैना ही राजेश का पहला प्यार है या वह जानता है और मुझसे चालाकी कर रहा है ?

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मिसेज मल्होत्रा अब मन ही मन मुस्कुरा उठी कि चलो एक चीज तो फायदे की मिली । उन्होंने अब बाकी के पेपर्स जल्दी से देखने शुरू किए- देखूं तो क्या क्या खरीद कर बैठा है यह लड़का ?

मिसेज मल्होत्रा ने जब सारे पेपर चेक किए तो हैरान रह गई वह पेपर्स कुछ प्रॉपर्टीज के थे पर सारी की सारी रिया के नाम पर ली गई थी ।

मिसेज मल्होत्रा सोच में पड़ गई - इससे क्या होगा? मुझे पूरी जायदाद चाहिए अपनी बेटी के लिए , जो उसे ऐसे नहीं मिलेगी । अब राजेश खुद ही सब कुछ मेरे नाम कर दे, तब जाकर दिल को ठंडक पहुँचे। मेरे पास राजेश की कमजोरी है - नैना ।

उधर नैना साहिल और सारा के साथ रास्ते में थी, उसे अब खुद पर गुस्सा आ रहा था कि कैसे उसने रिचा की जिंदगी को दाँव पर लगा दिया और राजेश ने तो उससे शादी भी कर ली। यह मेरी गलती है , मुझे ऐसा प्लान नहीं बनाना चाहिए था। बस बहुत हो गया , आज राजेश को उसके किए की सजा मिल कर रहेगी ।

, राजेश और रिचा मंडप में बैठे थे , रिचा बार-बार रोए जा रही थी लेकिन उसकी कोई नहीं सुन रहा था।

रिचा - राजेश मान भी जाओ , तुम इतनी घटिया हरकत कैसे कर सकते हो ?

राजेश ने अब मुस्कुराकर रिचा की ओर देखा - मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम इतना क्यों तड़प रही हो ? एक महीने की ही तो बात है , उसके बाद तुम विशाल की हो जाओगी। अब चुपचाप बैठो , कानूनी तौर पर मेरी बीवी तो तुम उन पेपर पर साइन करके ही बन गई थी । यह तो बस औपचारिकता है जो मैं तुम्हारी खुशी के लिए कर रहा हूं कि तुम्हें तसल्ली हो सके कि हां तुम्हारी शादी हो गई है । अब इसका होना, ना होना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता ।

रिचा अब गुस्से में बोली - सही है , तुम्हारे जैसे घटिया आदमी के साथ यही होना चाहिए । तुम किसी के लायक नहीं हो इसीलिए नैना तुम्हें छोड़ कर चली गई थी क्योंकि शायद तुम्हारा असली चेहरा वो देख चुकी हो। तुम ने अपनी जीत के लिए मेरा इस्तेमाल किया है , देख लेना एक दिन तुमसे रिया भी बहुत दूर चली जाएगी क्योंकि तुम्हारे जैसे गिरे हुए इंसान किसी के सगे नहीं हो सकते । तुम कभी खुश नहीं रहोगे।

, राजेश यह सुनकर गुस्से से आगबबूला हो उठा, वह अब रिचा से कुछ कहना ही वाला था कि विशाल ने उसे रोक दिया।

विशाल - तुम शादी पर ध्यान लगाओ राजेश , वह परेशान है इसलिए बोल रही है सब।

राजेश अब चुप होकर सीधा बैठ गया।

रिचा ने देखा राजेश के पास ही वह शादी के पेपर रखे हैं और उसका ध्यान इस ओर नहीं है । रिचा ने फुर्ती से वह कागज उठाए और जलते हुए हवन कुंड में डाल दिए ।

राजेश ने जब यह देखा तो गुस्से में रिचा से बोला - यह क्या किया तुमने बेवकूफ लड़की ?

विशाल - पागल हो गई हो?

रिचा (मुस्कराते हुए) - हो गई तुम्हारी शादी खत्म ।

राजेश यह सुनकर हंसने लगा ।

रिचा हैरानी से राजेश को देखने लगी - लगता है , तुम पागल हो गए हो ।

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राजेश - मैं पागल हूं ? नैना सही कहती है कि तुम एक नंबर की झल्ली हो । अगर वह कागज जल गए तो कोई बात नहीं, लेकिन अभी तो हम मंडप में बैठे हैं ना तो यह भी तो शादी ही हो रही है । वह ना सही तो यही सही । शादी तो होगी रिचा।

रिचा ने विशाल की ओर देखा तो वह चुपचाप खड़ा रहा, उसके चेहरे पर कोई भाव ना था ।

रिचा - राजेश तो यह सब जीतने के लिए कर रहा है पर तुम किस लिए कर रहे हो ? दोस्ती के लिए? अगर इतनी दोस्ती है तो समझाया क्यों नहीं इसे ?

विशाल अब दो वरमाला ले आया, पंडित जी के मंत्र चालू थे। विशाल ने रिचा को वरमाला दी तो उसने उसे फेंक दिया।

राजेश - कोई बात नहीं , हम सीधे फेरे ही लेते हैं - कहते हुए उसने रिचा का हाथ पकड़ लिया और उसे लगभग खींचते हुए फेरे लगाने शुरू कर दिए ।

रिचा अब फूट-फूट कर रोने लगी -तुम बहुत पछताओगे राजेश, नैना को जब यह पता चलेगा तो उस पर क्या बीतेगी।

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राजेश ने अब फेरे लगाते हुए सामने विशाल को देखा विशाल की आंखों में आंसू थे ।राजेश उसे यूं कमजोर पड़ते देख उदास हो गया पर उसे करना तो था ही यह सब।

राजेश - विशाल एक काम करो , जाकर बाहर का दरवाजा खोल दो । शादी तो होने ही वाली है , किसी बात का डर नहीं रहा । अब कहाँ जाएगी ये भाग कर। थोड़ी देर में हम घर के लिए निकलेंगे ।

विशाल - ठीक है , कहते हुए दरवाजा खोलने चला गया।
 
नैना को अब एक-एक पल घंटों के बराबर लग रहा था । राजेश जिसे वह इतने समय से जानती थी , आज बिल्कुल ही अलग रूप में दिखाई दे रहा था । कोई भला एक ही रात में कैसे इतना बदल सकता है ? आज राजेश को हरगिज माफ नहीं करूंगी और ना ही विशाल को। बस एक बार रिचा मुझे मिल जाए , दोनों को जेल भिजवा कर ही मानूंगी ।

सारा नैना को खामोश देख कर बोली - नैना , तुम ठीक हो ना।

नैना का चेहरा गुस्से में लाल हो रहा था - हां , मैं ठीक हूं और , जो बिगड़ा है उसे भी ठीक कर दूंगी ।

साहिल - नैना संभलकर । राजेश कुछ भी कर सकता है ।

नैना (मुस्कुरा कर ) - सही कहा तुमने , वह कुछ भी कर सकता है और कितना भी नीचे गिर सकता है ।

अब उनकी गाड़ी विशाल के फार्म हाउस के बाहर पहुंची तो वह जल्दी से गाड़ी से उतर कर अंदर की ओर भागे कि तभी सामने से पंडित जी आते दिखाई दिए ।

सारा - पंडित जी शादी हो गई ?

पंडित जी - शादी तो 20 मिनट पहले ही हो गई - कहते हुए वह निकल गये ।

सारा और साहिल ने नैना को देखा - वह चुपचाप अंदर की ओर बड़े दी ।

उन लोगों ने अंदर आकर देखा कि एक कोने में रिचा उदास सी बैठी है और उससे कुछ ही दूरी पर विशाल अपने मोबाइल में लग रहा था । नैना की नजरें अब राजेश को ढूंढ रही थी।

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नैना ने देखा कि राजेश दूर खड़ा किसी से फोन पर मुस्कुराते हुए बात कर रहा था । उसे देख कर लग ही नहीं रहा था कि उसे अपनी गलती का कोई पछतावा है ।

विशाल और रिचा ने अब नैना को देखा तो वह खड़े हो गए।

रिचा नैना की ओर बढ़ी । नैना सीधे राजेश की ओर बढ़ चली, राजेश की पीठ नैना की तरफ थी , उसे पता ही नहीं था कि नैना वहां पहुंच चुकी है ।

रिचा और विशाल नैना को आवाज देते रह गए पर नैना ने किसी की ना सुनी । वह जाकर सीधा राजेश के पीछे जाकर खड़ी हो गई ।

नैना ने अब राजेश को हाथ से पकड़ कर अपनी ओर घुमाया।

राजेश ने जब सामने नैना को देखा तो वह बोला - तुम यहां ? इससे पहले कि राजेश कुछ और कह पाता कि नैना ने अपनी पूरी ताकत के साथ एक जोरदार तमाचा उसके गाल पर जड़ दिया ।

यह देख वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए ।

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राजेश का चेहरा अब पूरी तरह लाल हो चुका था । इसकी वजह नैना का थप्पड़ था या राजेश का गुस्सा , यह कह पाना मुश्किल था...,
 
नैना ने एक जोरदार थप्पड राजेश को मारा।

वहां मौजूद हर इंसान नैना के इस रूप को देखकर हैरान रह गये , राजेश ने अब नैना की ओर देखा । उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था । वह नैना से कुछ कहने को हुआ कि पीछे खड़े साहिल और सारा को देखकर खून का घूंट पीकर रह गया ।

राजेश, नैना अब गुस्से में एक दूसरे को देख रहे थे । फर्क सिर्फ इतना था कि राजेश की आंखों में गुस्सा और नाराजगी थी तो वही नैना की आंखों में गुस्सा और नफ़रत थी ।

विशाल (गुस्से में ) - यह क्या किया आपने नैना?

नैना विशाल की ओर गुस्से में देखते हुए बोली - आप मुझसे बात ना ही करे तो अच्छा है । आज आपने अपने दोस्त की घटिया हरकत में उसका साथ देखकर मेरे दिल में अपने लिए इज्जत हमेशा के लिए खत्म कर दी है । अब मैं आपसे बात करना जरूरी नहीं समझती ।

विशाल यह सुनकर चुप हो गया।

नैना ने अब राजेश की काँलर पकड़ी और गुस्से में बोली - शर्म नहीं आती तुम्हें अपनी दोस्त की जिंदगी बर्बाद करते हुए? यहां बेशर्म की तरह खड़े हो ? अभी भी इतनी शर्म बाकी है तुम्हें जो तुम मुझसे नजरें मिलाने की हिम्मत रखते हो ?

राजेश ने अब अपनी नजरें नैना से हटा ली और दूसरी ओर देखने लगा।

नैना - तुम्हारे जैसे घटिया आदमी से मेरा कोई रिश्ता हो ही , नहीं सकता। तुमने अपनी जिद के लिए इतने रिश्ते बर्बाद कर दिए , क्या तुम्हारे लिए मुझे हराना इतना जरूरी है कि तुमने अपने साथ साथ 3 लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी ? तुम्हारे जैसा गंदा आदमी मैंने आज तक नहीं देखा । सारी सीमाएं लाँघ दी तुमने और वह भी सिर्फ मुझसे जीतने के लिए । लो जीत गए और मैं हार गई। खुश हो?

तुम मेरी एक गलती के लिए मुझे आज तक माफ नहीं किया और खुद ने जानबूझकर गुनाह कर किया है उसका क्या करोगे तुम ? सही कहा था तुमने कि तुम सिर्फ दिमाग से सोचते हो तो तुमने रिश्ते में भी सौदेबाजी आखिर कर ही ली।

रिचा (आगे बढ़कर ) - नैना, रहने दो।

नैना - नहीं रिचा, यह इंसान इसी लायक है । इसे जितना कहो, उतना ही कम है । आज मुझे खुद से नफरत हो रही है कि मैंने तुमसे प्यार किया। राजेश तुम्हारे जैसे नीच इंसान किसी के प्यार के काबिल नहीं। ठीक है , तुम जीते पर मुझसे नहीं, मक्कारी और धोखेबाजी में - कहते हुए वह अब गुस्से से राजेश को घूरने लगी।

मुझे बहुत शर्म आ रही है खुद पर कि तुम मेरी पसंद थे। अब मै तुम्हें अपनी आँखों के सामने बर्दाश्त नहीं कर सकती , इसलिए आज ही मै तुम्हारी काली परछाई से हमेशा के लिए दूर चली जाँऊंगी।

सारा ने आगे बढ़कर नैना को संभाला , नैना ने अब राजेश की कालरँ छोड़ दी।

विशाल कुछ कहना चाहता था पर राजेश ने हाथ से उसे चुप रहने का इशारा किया ।

साहिल आगे बढ़ा - चलो यहां से नैना।

नैना - कम से कम अपने दोस्त का ही लिहाज कर लिया होता राजेश। खुद के लिए उसकी खुशी कुर्बान कर दी तुमने। तुम अच्छी तरह जानते हो कि रिचा विशाल की मंगेतर है और दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं पर अपने अहंकार के आगे तुम्हें कुछ नहीं दिखा।

तुम्हारे जैसा खुदगर्ज इंसान कभी किसी का भला नहीं सोच सकता । तुम किसी के कुछ नहीं लगते और ना ही कोई रिश्ते मायने रखते हैं , तुम सिर्फ अपना फायदा देखते हो ।

नैना अब रिचा के पास आई - हो सके तो मुझे माफ कर देना। मेरी दोस्ती की वजह से तुम आज इतनी मुसीबत में फंस गई, , मैं तुम्हें इन सब से निकालूंगी। ऐसी जोर जबरदस्ती की शादी कोई नही मानता और कानून भी इसकी इजाजत नहीं देता। हम पुलिस के पास जाएंगे और इन दोनों दोस्तों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएंगे।

राजेश चुपचाप खडा नैना की सारी बातें ध्यान से सुन रहा था।

रिचा - नहीं नैना, मैं ऐसा नहीं कर सकती।

नैना ( हैरानी से ) - इतना सब होने के बाद भी तुम इन लोगों को सजा नहीं दिलाना चाहती ? यह रहम की हकदार नहीं है। इन दोनों ने ही तुम्हारे विश्वास तोड़ा है , तुम्हारी जिंदगी खराब की है ।

साहिल ने अब राजेश की तरफ देखा और मन ही मन सोचने लगा - मैं जानता हूं कि तुमने यह सब क्यों किया? तुमने रिचा से शादी की क्योंकि तुम नैना को मुझ से बचाना चाहते हो । ऐसे तो नैना सब कुछ छोड़ कर चली जाएगी और हमें उसे तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिलेगा। वाह मान गया तुम्हारे दिमाग को , अपने प्यार को बचाने के लिए खुद ही उसकी नजरों में गिर गए लेकिन मै हार नहीं मानूंगा।

, विशाल - नैना , मेरे ख्याल से तुम्हें अब चुप हो जाना चाहिए।

नैना हैरानी से विशाल को देखने लगी - यह आप कह रहे हैं? विशाल आपको तो यह भी नहीं पता कि रिश्तो का मतलब क्या होता है ? दोस्ती का मतलब क्या है ? सच्चा दोस्त वो नहीं जो अपने दोस्त की हर बात पर साथ दे , सच्चा दोस्त वह है जो अपने दोस्त को सही और गलत का फर्क बता सके । आपने तो अपनी रिचा को भी अपने दोस्त के हवाले कर दिया। वो तो आपका प्यार थी ना ?तो कैसे कर दिया इस इंसान के हवाले ? याद रखना , अगर यह मेरा नहीं हुआ तो किसी का भी नहीं होगा। यह सिर्फ एक खुदगर्ज इंसान है जो अपने बारे में सोचता है और सबको अपना गुलाम समझता है ।

सारा - नैना वह जा चुके हैं ।

नैना ने सारा को देखा।

सारा -शांत हो जाओ, राजेश सर यहां से जा चुके हैं ।

नैना ने अब राजेश की ओर देखा पर वह वहां नहीं था । नैना अब खामोश हो गई .

, विशाल फार्म हाउस से बाहर की ओर चल दिया।

राजेश फार्म हाउस से बाहर निकला। नैना के कहे एक एक शब्द उसके कानों में गूँज रहे थे , उसकी एक एक बात उसे दिल पर हथौड़े की तरह पड़ रही थी ।

नैना ने आज उस पर दूसरी बार हाथ उठाया था , राजेश को इस बात का अफसोस नहीं था कि नैना ने उसे थप्पड़ मारा सबके सामने। उसे चोट पहुंची थी इस बात से कि नैना ने एक बार उससे कुछ भी पूछना जरूरी नहीं समझा।

राजेश अब अपनी गाड़ी की ओर बढ़ चला, जैसे ही उसने अपनी गाड़ी का दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया कि पंडित जी वहां आ गए - सर मेरे पैसे ?

राजेश ने उसकी ओर देखा फिर मुस्कुरा कर अपनी जेब से पैसे निकाल कर उसे दे दिए।

पंडित - मैंने एक्टिंग तू अच्छी की थी ना सर?

राजेश - हां ।

पंडित - फिर कभी जरूरत हो तो याद कीजिएगा ।

,

राजेश - शायद अब कभी जरूरत नहीं पड़ेगी।

पंडित वहां से चला गया कि तभी विशाल वहां आया उसने राजेश के कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोला -राजेश ।

राजेश ने पलटकर विशाल को देखा तो मुस्कुराने लगा - अब सब ठीक हो जाएगा विशाल ।

विशाल राजेश को मुस्कुराते देख हैरान रह गया - किस मिट्टी के बने हो यार तुम ? यहां शादी के घंटे भर के ड्रामे में मैं तकरीबन एक हजार बार मरा और तुमने यहां अपने ही हाथों अपनी ही खुशियों को आग लगा दी ? नैना के दिल में खुद के लिए नफरत जगा दी जिससे वह यहाँ से दूर चली जाए और फिर भी तुम यहां खड़े ऐसे मुस्कुरा रहे हो जैसे कुछ हुआ ही ना हो ? कम से कम यह दिखावा मेरे सामने तो मत करो।

विशाल की बात सुनते ही राजेश के चेहरे की मुस्कुराहट गायब हो गई और उसकी जगह दर्द ने ले ली - तो क्या करूं? बैठकर रोने लगू ? अपनी खुशी के लिए नैना का इस्तेमाल करू?

मिसेज मल्होत्रा कभी भी नैना के बारे में पता लगा सकती हैं, , क्या पता साहिल उन्हें अभी तक बता चुका हो और फिर वही होगा जो कई सालों से मुझे सहन करना पड़ रहा है - उनका गुस्सा और हर पल नीचा दिखाने की कोशिश ।

यह सब कुछ मेरे हिस्से का है और मैं इसे किसी के साथ नहीं बाँटना चाहता । नैना वैसे तो कभी मुझसे दूर जाती नहीं पर अब साहिल उसे दूर ले जाए , उससे पहले ही वहां से खुद ही बहुत दूर जा चुकी होगी । शुरू में तकलीफ होगी पर धीरे धीरे जीना आसान हो जाएगा।

विशाल - और तुम ? तुमने क्या सोचा है अपने बारे में , तुम रह पाओगे उसके बिना ?

राजेश की आंखें अब नम हो चली - मैं नहीं रह पाऊंगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं । अगर मैं सब कुछ ठीक कर पाया तो नैना के पास चला जाऊंगा वरना अपनी बाकी की जिंदगी उसकी यादों के सहारे ही काट दूंगा ।

विशाल की आंखों में आंसू बह चले - तुम हो क्या ? अंदर नैना तुम्हें बार-बार खुदगर्ज कह के पुकार रही थी पर सच तो यह है कि तुमने कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं तुम्हें रिया और नैना के आगे कोई दिखता ही नहीं । रिया और नैना के अलावा कुछ नहीं सूझता । पत्थर बन चुके हो बिल्कुल खुद , के लिए । अरे तुम्हारे रिचा के साथ शादी करने के ड्रामे में मुश्किल से एक घंटा लगा होगा लेकिन उसे खोने के डर से अभी तक मेरे रोंगटे खड़े हैं और तुम यहां आराम से खड़े हो।

राजेश- और कोई चारा भी तो नहीं है । अब नैना यहां आए उससे पहले मुझे निकलना होगा ।

राजेश अब गाड़ी में बैठने को हुआ कि विशाल ने उसे आवाज दी- रा .. राजेश ।

राजेश ने पीछे मुड़कर उसे देखा तो विशाल ने आगे बढ़ उसे गले से लगा लिया - बहुत खुशनसीब हूं जो तुम्हारे जैसा दोस्त मिला ।

राजेश यह सुनकर हंस दिया - नहीं , खुशनसीब तो मैं हूं जो तुम मुझे मिले जो हर परेशानी मे मेरे साथ खड़े रहे । मुझे तो तुमसे माफी मांगने चाहिए । रिचा से सच उगलवाने और नैना को खुद से दूर करने के लिए मैंने तुम्हारा इस्तेमाल किया। मैं जानता हूं फिर भी रिचा को बहुत तकलीफ से गुजरना पड़ा । मैं तुम दोनों का एहसान कभी नहीं भूलूंगा ।

राजेश अब गाड़ी में बैठ कर वहां से चला गया ।

,

विशाल अब वही खड़ा - खड़ा सोचने लगा जो फॉर्म हाउस में कुछ समय पहले हुआ था -

" राजेश ने रिचा के साथ जबरदस्ती फेरे लेने शुरू कर दिए। अभी दूसरा फेरा ही हुआ था कि रिचा रोते हुए राजेश से बोली - तुम नैना की नजरों में हमेशा के लिए गिर जाओगे क्योंकि तुम अपनी दोस्त के साथ ही नहीं बल्कि विशाल की मंगेतर के साथ भी शादी कर रहे हो ।

राजेश (हंसते हुए ) - पर यह बात नैना थोड़े ही जानती है कि तुम मेरी नहीं विशाल की मंगेतर हो । उसे तो यही लगेगा कि मैंने अपनी मंगेतर से शादी की है तो इसमें गलत ही क्या है।

रिचा - वह बहुत पहले से जानती है कि मैं तुम्हारी नहीं विशाल की मंगेतर हूं ।

रिचा की यह बात सुनते ही राजेश ने फेरे लेने बंद कर दिये और मुस्कुरा कर विशाल की ओर देखा ।

विशाल जो अब तक परेशान सा खड़ा था , यह सुन अब वही , जमीन पर बैठ गया - थैंक गॉड यार राजेश, यह लड़की फाइनली बोली तो सही वरना मैं तो थोड़ी देर में हार्ट अटैक से मर ही जाता।

रिचा हैरानी से राजेश और विशाल को देखने लगी कि विशाल कह क्या रहा है और राजेश फेरे लेने से कैसे रूक गया?

राजेश ने अब रिचा का हाथ छोड़ दिया और विशाल की ओर बढ़ चला। उसने विशाल को उठाया और बोला - सच कहूँ तो तुमसे पहले तो मैं ही मर जाता। यह एक बात कहने के लिए इस लड़की ने हमसे घंटा भर ड्रामा करवाया। मुझे लग ही रहा था कि यह नहीं बोलेगी तो हम बेमौत मारे जाएंगे इसलिए तो मैंने नकली पंडित लाने को कहा था।

रिचा (हैरानी से ) - यह क्या बात कर रहे हो तुम दोनों आपस में ? नकली पंडित ? क्या यह सब ड्रामा था? क्यों किया तुमने यह सब ?

विशाल (मुस्कुराते हुए ) - हां यह सब ड्रामा था। तुम्हे क्या लगता है कि मैं इतनी आसानी से तुम्हें किसी और की होने दूंगा ? रिचा तो बस विशाल की है । यह सब ड्रामा तो इसलिए था कि तुम कबूल करो कि तुमने हमसे क्या झूठ बोला है ।

,

रिचा - मैंने क्या झूठ बोला ?

राजेश गंभीर होकर बोला - तुमने हमें बताया नहीं कि तुम नैना को हमारे रिश्ते की सच्चाई पहले ही बता चुके हो । मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ा तो तुमने एक और नई कहानी बुन दी। तुम पर भरोसा था पर तुमने उसे तोड़ ही दिया और अभी तुमने इतने सब नाटक के बाद यह बात कबूल की है ।

रिचा - हां तो क्या करती मैं ? मैंने जानबूझकर तुम्हें धोखा नहीं दिया । सच कहती हूं - तुम सब लोग पागल हो । मुझे इतनी तकलीफ दी , इतना रुलाया सिर्फ सच उगलवाने के लिए ?

राजेश - हां क्योंकि तुम से पूछते तो तुम जवाब देती नहीं इसलिए यह सब करना पड़ा ।

विशाल - तुम यह बात पहले भी तो मान सकती थी? पता है हर पल यही सोचते रहा कि रिचा अब बोलेगी - अब बोलेगी। अरे इतना टाइम लगा दिया तुमने - कहते हुए विशाल ने आगे बढ़ रिचा को गले लगाना चाहा तो उसने उसे दूर हटा दिया - ऐसा भी करता है कोई ?

, यह राजेश नैना बिल्कुल एक जैसे हैं । नैना ने पहले सच जानने के लिए मुझे चाकू से मारने का नाटक किया और यहां राजेश ने नैना का सच जानने के लिए शादी का नाटक किया।

यह सुन राजेश और विशाल हैरान रह गए- मारने का नाटक?

तब रिचा ने उन्हें सारी बात बताई कि नैना ने कैसे उससे सच उगलवाया था।

सारी बात सुनकर दोनों दोस्त हंसने लगे ।

विशाल ने रिचा को काफी देर तक समझा बुझाकर शांत किया ।

राजेश ने भी आगे बढ़ कर माफी मांगी - आई एम रियली सॉरी । मुझे पता है कि यह सब तुम्हारे लिए आसान नहीं रहा होगा पर तुम सीधे-सीधे पूछने पर बताती नहीं । शायद मैं स्वार्थी हो गया था जो तुम्हें अपने साथ अपने मुसीबतों में शामिल कर लिया पर अब और नहीं । मैं तुम्हें और विशाल को आगे से कोई तकलीफ नहीं दूंगा। बस एक आखरी एहसान कर दो कि तुम नैना के सामने चुप ही रहना वह जो भी मुझसे कहे या करें , तुम उसे नहीं बताओगी कि यह सब , नाटक था । (घड़ी देखकर )वैसे भी वह थोड़ी देर में आती होगी ।

रिचा हैरानी से राजेश को देखने लगी - तुम्हें कैसे पता कि नैना यहां आने वाली है ?

राजेश - तुम्हें क्या लगता है विशाल यूं ही तुम्हारे कमरे में मोबाइल छोड़ कर आया था और मैं शादी के नकली पेपर्स लेकर मंडप ने क्यों बैठूंगा ? फिर मैंने विशाल को दरवाजा खोलने भी भेजा था ।

रिचा ( सोचते हुए) - हे भगवान , मैं यह बात पहले क्यों नहीं समझी ।

विशाल - समझती कैसे ? तुम्हें तो लग रहा होगा कि तुम हमसे ज्यादा स्मार्ट हो और हम बेवकूफ।

रिचा- लेकिन राजेश नैना तो तुम्हें गलत समझेगी और शायद तुम्हें छोड़कर हमेशा के लिए चली जाए ।

राजेश - हम्म जानता हूं और यही चाहता हूं ।

रिचा असमंजस की हालत में राजेश को देखने लगी - पर , क्यों?

राजेश - क्योंकि इसी में उसकी भलाई है । मिसेज मल्होत्रा और साहिल दोनों मेरे पीछे हैं । साहिल के खिलाफ मेरे पास कोई सबूत नहीं है तो नैना ने मेरी बात पर यकीन नहीं किया फिर मिसेज मल्होत्रा आज नहीं तो कल नैना के बारे में पता लगा ही लेंगी । वह नैना तक पहुंचे या उसे परेशान करें और साहिल नैना को कुछ भी नुकसान पहुँचाए, उससे पहले ही मुझे नैना को यहां से दूर भेजना है तो उसके लिए बेहतर यही होगा । फिर मैं भी सुकून से इन लोगों को हैंडल कर पाऊंगा।

रिचा - तो तुम नैना से कह दो कि वह कुछ दिन यहां से चली जाए ।

विशाल (मुस्कुरा कर ) - अगर तुम नैना की जगह होती तो क्या मुझे छोड़ कर चली जाती ?

रिचा (उदास होकर) - नहीं ।

राजेश - बस इसलिए यह सब कर रहा हूं यह तो आज मैं अच्छी तरह समझ चुका हूं कि नैना साहिल को एक मौका नहीं देना चाहती, वह बस मुझे जला रही थी । वो किसी भी , कीमत पर मुझे छोड़कर नहीं जाएगी पर मैं उसे अपनी वजह से और तकलीफ नहीं देना चाहता इसलिए जब नैना यहां आए तो तुम बस खामोश रहना । हो सकता है कि साहिल भी उसके साथ हो।

रिचा - मैं बात करके देखती हूं नैना से ।

राजेश - नहीं , ऐसा मत करना। अगर साहिल को कहीं तुम्हारे बारे में पता लग गया तो वह तुम्हें भी परेशान करेगा और मैं अब इस हालत में नहीं हूं कि अपनी वजह से किसी और को तकलीफ में पडते देखू

विशाल - राजेश एक बार फिर सोच लो , वापस लौटना मुश्किल होगा ।

राजेश - सोच लिया ।

राजेश ने अब नकली पंडित से कहा - वो लोग थोड़ी देर में आते ही होंगे , तुम जाकर दरवाजे पर खड़े हो जाओ । जब वह आए और कोई पूछे तो कह देना किशादी पहले ही हो चुकी है ।

, पंडित - जी सर, कहते हुए बाहर दरवाजे पर चला गया।

राजेश - तुम लोग बैठो , रिया का फोन कई बार आ चुका है - कहते हुए रिया से फोन पर बात करता हुआ उनसे दूर चला गया फिर आगे क्या हुआ वह तो सबको पता ही है ।"

विशाल अब नैना और रिचा की आवाज सुन होश में आया।

नैना रिचा को अपने साथ ले जा रही थी - चलो मेरे साथ , हम पुलिस स्टेशन चलेंगे ।

रिचा ने झटके से नैना से हाथ छुड़ा लिया - नहीं जाना मुझे कहीं , प्लीज मुझे अकेला छोड़ दो । मैं बस घर जाना चाहती हूं , मुझे और परेशान मत करो ।

नैना हैरानी से रिचा को देखने लगी ।
 
साहिल - नैना, रिचा अभी बहुत परेशान है । उसे आराम की सख्त जरूरत है । इस मामले में कल बात करते हैं उससे ।

नैना ने गुस्से से विशाल की ओर देखा और सारा साहिल के साथ रिचा को उसके घर छोडने़ चली गई ।

,

विशाल को राजेश के लिए बहुत बुरा लग रहा था कि जिस लड़की से उसने इतनी मोहब्बत की, उसी की नजरों में आज राजेश के लिए नफरत है । क्या कभी यह दोनों मिल पाएंगे या इनकी उलझन यूं ही इन्हें जकड़ कर रखेगी।

सभी को उनके घरों पर छोड़कर साहिल अपने घर आया। वह अब सोच में डूब गया - राजेश नें मेरा सारा प्लान चौपट कर दिया ।अब कैसे अपना मकसद पूरा करूंगा? इस राजेश ने तो सब गड़बड़ कर दी । मेरा सारा काम बिगाड़ दिया है कि तभी मिसेज मल्होत्रा का फोन आने लगा ।

साहिल ने फोन उठाया - बोलिए मिसेज मल्होत्रा ।

मिसेज मल्होत्रा - तुम एक बात बताओ , तुम मेरे साथ हो या खिलाफ?

साहिल ( हैरानी से ) - मतलब? मैं समझा नहीं ?

मिसेज मल्होत्रा - क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे ऑफिस में काम करने वाली नैना शर्मा ही वह लड़की है जिसे राजेश कॉलेज में प्यार करता था।

,

साहिल यह सुनकर दंग रह गया कि इन्हें कैसे पता चला? मेरा हुकुम का इक्का मेरे हाथों से निकला जा रहा है ,यहां यह भी उसके बारे में जान गई ।

साहिल की खामोशी सुन मिसेज मल्होत्रा बोली - तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई ।

साहिल नहीं ऐसा नहीं है । मुझे भी अभी पता चला है।

मिसेज मल्होत्रा - मुझे लगता है कि हमें उस लड़की का फायदा उठाना चाहिए और इस फायदे में अगर उसका थोड़ा बहुत नुकसान हो भी जाए तो कोई परवाह नहीं ।

साहिल - ऐसा कुछ नहीं होगा ,आपके बेटे ने पूरी बाजी पलट दी है ।

मिसेज मल्होत्रा (हैरानी से ) - हुआ क्या है ?

साहिल ने उन्हें बताया कि राजेश ने रिचा शादी कर ली है। और नैना सब कुछ छोड़ छाड़ कर यहां से बहुत दूर जा रही है तो हम उसका फायदा कैसे उठाएंगे ?

, मिसेज मल्होत्रा चौक गई - राजेश ने शादी की रिचा से ? नहीं, मुझे नहीं लगता । पक्का कुछ गड़बड़ है , यह लड़का झूठ बोल रहा है ।

साहिल - लगता तो मुझे भी यही है कि उसने नैना को हमसे बचाने के लिए झूठ बोला है क्योंकि वह जानता है कि हम नैना के जरिए उसके करीब पहुंच सकते हैं लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता ।

मिसेज मल्होत्रा कुछ देर चुप रही फिर मुस्कुराते हुए बोली - अगर तुम नैना को सच्चाई बता दो तो वह नहीं जाएगी और फिर हम नैना का फायदा उठा सकते हैं । नैना जब रिचा से कड़ाई से पूछताछ करेगी तो वह टूट जाएगी। अब यह तुम्हारे ऊपर है कि तुम नैना को कैसे रोकते हो वरना रिया को भूल ही जाना - कहते हुए मैसेज मल्होत्रा ने फोन रख दिया

साहिल अब गहरी सोच में डूब गया , उसने जल्दी से किसी को फोन मिलाया और सारी बातें बताई - समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं ? सारा गेम बिगड़ गया ।...तुम चाहते हो कि मैं मिसेज मल्होत्रा की बात मान लू ? मालूम है हमारा फायदा नैना को रोकने में ही है । ठीक है , मैं कोशिश करता हूं - सोचते हुए वह घर से बाहर निकल गया ।

, नैना अपने घर आई और आकर अपने कमरे में बैठ गई। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था अब धीरे-धीरे उसका गुस्सा ठंडा पड़ने लगा और दर्द का एहसास होने लगा। धीरे-धीरे अब दर्द बढ़ता ही जा रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने एक झटके से उसका दिल बाहर निकाल कर फेंक दिया हो ।

नैना को याद आया कि राजेश ने रिचा के साथ क्या किया? उसने कैसे पूरी ताकत के साथ राजेश को सबके सामने थप्पड़ मारा पर वह खामोशी से खड़ा रहा। राजेश ने एकदम से उसकी पूरी जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी, सब कुछ खत्म हो गया था। उसकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई और राजेश का नया चेहरा उसे देखने को मिला। अब धोखे का दर्द नैना को सहन नहीं हो पा रहा था , उसकी आंखों से आंसू बहने लगे । उसने अपनी दुनिया की सबसे प्यारी चीज खो दी ।वह जोर-जोर से रोने लगी कि सब कुछ खत्म हो गया। ऐसा लग रहा था कि मैं तुम्हें पाने के करीब हूं पर तुम ने एक झटके से सब कुछ खत्म कर दिया । अपने अहंकार में एक साथ इतने सारे लोगों की जिंदगी बर्बाद करके रख दी तुमने , सिर्फ मुझसे जीतने के लिए । तुम वह राजेश नहीं हो जिससे मैंने प्यार किया था , मुझे तो खुद से ही नफरत हो रही है कि मैंने तुम जैसे इंसान से प्यार किया। नैना फूट-फूट कर रोने लगी, शायद उसकी किस्मत भी उसकी मां की ही तरह थी - उसके , हिस्से में भी प्यार और खुशियां नहीं थी । वह जोर जोर से चीख रही थी पर वहां उसकी चीखों को सुनने और उसके आंसुओं को देखने वाला कोई नहीं था और जो था वह कहीं दूर बैठा धीरे धीरे अंदर ही अंदर टूट रहा था ।

राजेश समुद्र के किनारे खडा सूरज को धीरे-धीरे डूबते देख रहा था , ठीक वैसे ही जैसे कि वह खुद को धीरे धीरे दर्द के दरिया में डूबते हुए महसूस कर रहा था । वह चाहकर भी किसी से अपने दिल का हाल नहीं कह पा रहा था , सच तो यह था कि नैना को खुद से दूर करने के बाद वह बहुत कमजोर पड़ गया था। उसकी आंखों के सामने बार-बार नैना का चेहरा घूम रहा था , उसकी नफरत भरी नजरें और बातें राजेश के कानों में गूंज रही थी । काश , काश नैना ने एक बार मुझसे पूछा होता कि क्या मैंने रिचा से सच में शादी की भी है या नहीं ? काश उसे मुझ पर भरोसा होता कि उसका राजेश कभी ऐसी घटिया हरकत कर ही नहीं सकता।

रिचा ने कहा और नैना ने मान लिया जबकि वह तो मुझे इतना करीब से जानती है फिर भी नहीं समझ पाई कि मैं किसी को भी ऐसी तकलीफ कभी नहीं दे सकता। रिया भी तो अपनी सगी मां की उल्टी सीधी बात सुनती है पर उन पर ध्यान नहीं देती, क्यों ? क्योंकि उसे भरोसा है अपने भाई पर लेकिन नैना, वह आज तक नहीं जान पाई मुझे । क्या कोई , ऐसा नहीं है इस पूरी दुनिया में जो मुझ पर आंखें बंद कर भरोसा कर सके ? क्या सच में इतना खुदगर्ज और गिरा हुआ हूं ?

चलो अच्छा ही है , यही तो मैं चाहता था कि नैना इस झूठ पर भरोसा करें और यहां से दूर चलीे जाए पर फिर भी एक बार पूछती तो सही मुझसे कि सच क्या है ? नैना को कितनी तकलीफ हुई होगी? कैसे संभाल रही होगी खुद को? कोई उसके पास है भी या नहीं ? क्या जाकर उसे बता दूं सब कुछ? नहीं ऐसा नहीं करूंगा वरना मेरे साथ साथ नैना को भी तकलीफ झेलनी होगी ,मैं किसी भी कीमत पर ऐसा नही होने दूंगा ।

राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी जीत पर खुश हो या फिर दुखी ? एक आखिरी बार नैना को देखने की हसरत लिए वह खड़ा हुआ और नैना के घर की ओर बढ़ चला।

नैना के घर पहुंच राजेश ने अपने पास रखी नैना के घर की डुप्लीकेट चाबी से उसके घर का दरवाजा खोला । राजेश ने जैसे ही नैना के घर में कदम रखा, उसे नैना के रोने की आवाज सुनाई देने लगी । वह अब धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर बढ़ा और दरवाजे के कुछ ही दूर जाकर खड़ा हो गया , सामने नैना बेड पर पड़ी हुई बस रोए जा रही थी। राजेश अब खुद को काबू करने लगा । उसका दिल उसे बार-बार कह रहा था कि जाओ, आगे बढ़ो और सम्भालो अपनी नैना को पर दिमाग कह रहा था कि नहीं , तुम आज इस के दर्द की वजह हो पर इसी में नैना की भलाई है फिर नैना को भी तो तुम पर जरा भी भरोसा नहीं , जो सुना उस पर भरोसा कर लिया।

राजेश काफी देर तक वहां चुपचाप खड़ा रहा। नैना का रोना अब सिसकियों में बदल चुका था। थोड़ी ही देर में वह सो गई। राजेश अब आगे बढ़ा और नैना के पास बैठ गया - हो सके तो मुझे माफ कर देना पर तुम्हारे लिए यही सही है । राजेश कुछ पल के लिए नैना को देखता रहा फिर धीमे धीमे कदमों से घर से बाहर निकल गया ।

राजेश की गाड़ी के जाते ही साहिल की गाड़ी वहां आ गई, राजेश को जाता हुआ देख साहिल सोच में पड़ गया - इसका मतलब मेरा शक सही है , यह झूठ बोल रहा है । मुझे नैना को मनाना ही होगा - कहते हुए नैना के घर की ओर बढ़ चला

राजेश घर पहुंचा , वहां उसके इंतजार में बैठी मिसेज मल्होत्रा ने उस पर तंज कसे पर वह बिना कोई जवाब दिए सीधा अपने कमरे में चला गया । कुछ दूरी पर खडी रिया अब राजेश के पीछे पीछे उसके कमरे में चली गई। राजेश जाकर , अब अपने बिस्तर पर बैठ गया।

रिया - भाई क्या हुआ , आप इतने परेशान क्यों लग रहे हो?

राजेश - रिया मैं अभी किसी से कोई बात करना नहीं चाहता, तुम जाओ और मुझे अकेला छोड़ दो ।

रिया राजेश को ऐसे देख हैरान रह गई - आप ठीक नहीं हैं, कोई तो बात है । हुआ क्या है , बताओ तो ?

राजेश अब खामोश बैठा रहा ।

रिया - भाई, इधर देखो मेरी तरफ पर राजेश ने दूसरी ओर मुँह फेर लिया।

जब बार बार कहने पर भी राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया तो वह बेमन से उठकर बाहर जाने लगी । उसने पीछे मुड़कर देखा कि राजेश की आंखों से आंसू बह रहे थे , वह बार-बार अपने आंसुओं को पोंछ रहा था।

रिया यह देख भावुक हो गई - भाई आप रो क्यों रहे हो?

, राजेश अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके जीने की सारी वजह ही खत्म हो गई हो। उसने अपने हाथों में अपने चेहरे को छुपा लिया और जोर-जोर से रोने लगा। लाख कोशिशों के बाद भी वह अपने दर्द को छुपा नही पाया।

रिया अब वापस लौट कर आई और राजेश के पास बैठ गई - क्या हुआ भाई ? आप ऐसे क्यों रो रहे हो ? मुझे बहुत डर लग रहा है ? मैंने आपको ऐसे कभी नहीं देखा पर राजेश बस रोये ही जा रहा था।

उसे ऐसी तरह रोते देख रिया भी अब राजेश के गले लग कर रोने लगी - भाई प्लीज ऐसे मत रो, मुझे बहुत डर लग रहा है। मैं आपको ऐसे नहीं देख सकती , प्लीज चुप हो जाओ।

राजेश अब रोते हुए बोला - सब खत्म हो गया रिया । आज मैं सब कुछ खत्म करके आया हूं , अपने ही हाथों अपनी जिंदगी को बर्बाद करके आया हूं पर क्या करूं मैं मजबूर हूं ? मैं नैना के साथ भी नहीं जी सकता और उसके बिना भी नहीं जी सकता और वो भी मुझ पर भरोसा नही करती। उसने एक बार भी मुझसे नही जानने की कोशिश की कि मैने कुछ गलत किया है भी या नहीं।

, कभी-कभी ऐसा लगता है कि खुद को खत्म ही कर दूँ, कम से कम सुकून की मौत तो मिलेगी । मेरे जीने की कोई वजह नहीं रही रिया - कहते हुए वह रोए जा रहा था ।

राजेश को इस कदर टूटा देख रिया भी रोये जा रही थी।

वह जानती थी कि राजेश किस दौर से गुजर रहा है । पिछले 2 साल नैना के बिना उसने किस तरह घुट-घुट कर गुजारे थे फिर भला वह आगे की जिंदगी उसके बिना कैसे गुजारेगा?
 
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