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राजेश - किचन का तो तुम्हें पता ही होगा ,आखिर उसकी खिड़की से तो तुम यहां आई हो ।
नैना अब उदास होकर किचन में पानी लेने चली गई और पानी का गिलास ला राजेश की हाथों में थमा दिया। राजेश को नैना को तंग करने में बहुत मजा आ रहा था । वह पानी पी कर बोला - नैना मेरे पास बैठो।
नैना - नहीं मैं यही ठीक हूं ।
राजेश - मैं रिक्वेस्ट नहीं कर रहा हूं , ऑर्डर दे रहा हूं ।चुपचाप बैठो वरना ...... - कहते हुए राजेश ने अपना फोन , उठाया कि नैना झट से उसके पास बैठ गई ।
राजेश - अब ठीक है। अच्छा सुनो, मेरे सिर में बहुत दर्द है। प्लीज , थोड़ा दबा दो और हां आराम से वरना मैं क्या कर सकता हूं , यह मुझे तुम्हें याद दिलाने की जरूरत नहीं - कहते हुए राजेश अब नैना की गोद में सर रखकर लेट गया ।
नैना - यह तुम.......
राजेश (बड़े इत्मीनान से ) - तुम्हें याद है, नैना कॉलेज में हम दोनों ऐसे ही बैठ कर खूब सारी बातें किया करते थे । नैना ने अब राजेश के सर को बड़े आराम से दबाना शुरू किया , कुछ देर बाद राजेश करवट लेकर लेट गया और उसकी आँखों से आँसू बह निकले। वह उन्हें पोंछ पाता कि नैना ने उसे देख लिया और उसके आँसू पोंछ दिए।
थोड़ी देर तक वहां सन्नाटा पसरा रहा।
राजेश - तुम्हारे हाथों में सच में जादू है नैना।
नैना - राजेश, अब तो दरवाजा खोल दो ।मुझे लेट हो रहा है।
राजेश - अभी नहीं , पहले मुझे बहुत भूख लगी है। तुम , जाकर कुछ अच्छा सा बना कर लाओ। काफी वक्त हो गया है तुम्हारे हाथ का खाना खाए । कितना कुछ बदल गया वक्त के साथ - यहां तक कि तुम और मैं भी।
राजेश अब चुप हो उठा और सीढ़ियों से होते हुए अपने कमरे में चला गया। नैना उसे बस यूं ही जाते हुए देखती रही । थोड़ी ही देर में राजेश वापस आया लेकिन इस बार उसके हाथ में फाइल थी । राजेश नैना के पास आकर बैठ गया और फाइल टेबल पर रख दी ।
नैना - यह क्या है?
राजेश - वहीं फाइल जिसके लिए तुम ने आज अपने सारे उसूलों को तोड दिया ।
नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी - पर तुम इसे ऐसे......
राजेश - इस बारे में बाद में बात करेंगे पर पहले खाना खिला दो।
नैना किचन में चली गई। राजेश अब गहरी सोच में डूबा हुआ था - क्या उसका नैना को इस तरह जबरदस्ती रोकना सही था ? क्या नैना वाकई उससे दूर जाना चाहती है और वह भी , इस कदर कि वह आज राजेश के घर में चोरों की तरह घुसकर आ गई । नहीं नहीं मैं अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका हूं , इस तरह कमजोर पडूंगा तो कैसे काम चलेगा । इसी तरह के सवालों से जूझते हुए राजेश के कानों में नैना की आवाज आई ।
नैना ने खाना बनाकर डाइनिंग टेबल पर लगा दिया था और राजेश को अावाज दी - खाना खा लो राजेश ।
राजेश अब जैसे नींद से जागा हो - हां आया - कहकर वह फाइल ले डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ा ।
नैना - राजेश यह फाइल प्लीज मुझे दे दो ।
राजेश कुर्सी पर बैठते हुए - दे दूंगा पर मेरी एक शर्त है ।
नैना - कैसी शर्त?
राजेश - मेरी शर्त यह है कि मेरी और रिचा की शादी की पूरी तैयारियां तुम करोगी । शादी के बाद यह फाइल मैं खुद तुम्हें दे दूंगा।
नैना हडबड़ा कर बोली - मैं..... मैं नहीं कर सकती।
,
राजेश - क्यों नहीं कर सकती? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझसे.....
नैना - नहीं , ऐसी बात नहीं है । वह मैंने कभी ऐसा काम किया नहीं है और फिर यहां तो इतने अच्छे वेडिंग प्लानर है तो उन्हें देख लो।
राजेश - जितना मैंने पूछा है उसका जवाब दो ।
नैना अब अजीब सी कशमकश में फंस गई कि कैसे अपने प्यार को अपने ही हाथों से किसी और को सौंप दें ? इससे बेहतर वह मर जाना पसंद करेगी ।
राजेश - तो फिर ठीक है , यह फाइल भी 1 साल तक तुम भूल ही जाओ । अब जल्दी से खाना दो,भूख लगी है बहुत तेज - कहते हुए उसने फाइल और दरवाजे की चाबी अपने बगल वाली सीट पर रख ली । अरे वाह ! भिंडी की सब्जी -यह तो मेरी फेवरेट है और जब भी तुम्हारे हाथ की होती है तो बस मजा ही आ जाता है - कहकर राजेश बच्चों की तरह चहकने लगा ।
नैेना - और मीठे में मैंने यह बनाया है - कहते हुए नैना ने खीर , की ओर इशारा किया ।
राजेश - थैंक्स नैना , तुम नहीं जानती कि तुम्हारे जाने के बाद आज कितने टाइम बाद मैं सुकून से खाना.... कहते हुए राजेश रुक गया और नम आँखों से नैना की ओर देखने लगा।
उसे यूँ देख नैना की भी आंखे भर आई ।
राजेश अब उठ कर जाने लगा कि नैना ने राजेश का हाथ पकड़ उसे वापस कुर्सी पर बैठा दिया।
नैना - खाना ऐसे बीच में छोड़कर नहीं जाते फिर तुम्हें तो भूख भी लगी है । अाज मैं तुम्हें अपने हाथों से खाना खिलाऊंगी।
राजेश हैरान हो नैना की ओर देखने लगा - क्या कहा तुमने? तुम खिलाओगे जैसे कॉलेज में खिलाती थी? क्या हो गया है तुम्हें?
नैना - बस ज्यादा सवाल जवाब मत करो । क्या हम कुछ देर के लिए शांति के साथ नहीं बैठ सकते ।
राजेश नैना के बदले रूप को देश हैरान सा रह गया - तुम्हारी तबीयत ठीक है ?
,
नैना ने अब राजेश की प्लेट से एक निवाला तोडा़ और राजेश की ओर बढ़ा दिया ।
राजेश हैरानी से - क्या बात है नैना ,आज बड़ा प्यार आ रहा है तुम्हें मुझ पर । कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने इसमें कुछ मिला दिया जैसे कि जहर ?
नैना (गुस्से में) -राजेश क्या बकवास कर रहे हो ? मैं जहर क्यों दूंगी तुम्हें ?
राजेश -ठीक है तो पहला निवाला तुम खाओगी ।
नैना को यह बहुत बुरा लगा ,उसका चेहरा एकदम उतर सा गया । उसने जैसे ही उस निवाले को खाने के लिए अपना मुंह खोला कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया - रहने दो , वैसे भी इसमें जहर हुआ भी तो कौन सा मुझे जी कर कुछ करना है । जिंदा रह कर नही तो मर कर ही तुम्हारे काम आ जाऊंगा - कहकर उसने नैना के हाथ से निवाला खा लिया । नैना बड़े प्यार से राजेश को खाना खिला रही थी । दोनों अब चुपचाप एक दूसरे को निहारे जा रहे थे ।
नैना और राजेश की आंखों में आंसू आ गए, दोनों अब , एक-दूसरे से नजरें चुराने लगे। दर्द तो दोनों के ही दिलों में बेइंतहा था पर कोई किसी को अपना दर्द दिखा नहीं सकता था । नैना ने अब बड़े प्यार से उसे खीर खिलाई , राजेश को आज फिर वही कॉलेज वाली नैना याद आने लगी । नैना के चेहरे पर फिर वही प्यार और फिक्र थी। राजेश ने नैना को भी खाना खाने को कहा पर उसने मना कर दिया।
खाना खिलाने के बाद नैना अपनी कुर्सी से उठी और राजेश का हाथ पकड़ उसे सीढ़ियों से ऊपर कमरे में ले जाने लगी।
राजेश कुछ समझ नहीं पाया कि नैना कर क्या रही है - नैना तुम ....
नैना - चुपचाप चलो मेरे साथ , आज तुम कुछ नही कहोगे, सिर्फ सुनोगे - कहते हुए उसे उसके कमरे में ले गई । वहां नैना ने राजेश को उसके बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसका हाथ पकड़ वही उसके पास बैठ गई । राजेश के लिए नैना आज फिर एक अनसुलझी पहेली बनकर खड़ी हो गई।
नैना - राजेश , मैं जो भी कह रही हूं वह ध्यान से सुनना।
राजेश - हम्म ।
, नैना - जब तक मैं यहां रहूंगी , तुम अंदर ही अंदर खुद से जूझते रहोगे । मैंने कई बार तुम्हें चोट पहुंचाई है - कभी जानबूझ कर तो कभी अनजाने में । आज फिर मैंने तुम्हें धोखा दिया है पर वह भी सब की खुशी के लिए । अगर मैं यहां से नहीं गई तो तुम और रिचा कभी खुश नहीं रह पाओगे और तुम भी मुझे खुद से दूर नहीं जाने दोगे।
मैं जानती हूं कि तुम्हें मुझ पर बहुत गुस्सा आएगा पर एक ना एक दिन तुम समझोगे कि आज मैंने जो भी किया , वह इस समय सबसे सही है ।
राजेश हैरानी से नैना को देखे जा रहा था कि आखिरी यह सब नैना कह क्या रही है ?
नैना की आंखों से आंसू बहने लगे - मुझे अपनी जिंदगी का एक बुरा सपना समझकर भूल जाना । तुम्हें मैने इतनी तकलीफ दी है और आज आखरी बार तुम्हें एक और तकलीफ दे रही हूं। कल सुबह जब तुम उठोगे , तब तक सब कुछ ठीक हो चुका होगा । मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होंगी, तुम सुकून के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करना और यह तुम्हारा हक भी है।
राजेश - कहना क्या चाह...... तभी राजेश को अपना सिर , भारी सा लगने लगा । उसकी आंखें धीरे धीरे बंद होने लगी, वह नैना से बोला - ये क्या किया है तुमने? क्या मिलाया खाने में मेरे?
नैना - मैंने खीर में नींद की दवा मिलाई थी जो तुम्हारे किचन में टेबल की रैक में मेडिसिन के डिब्बे में रखी थी। मैं जानती थी कि तुम जिद्दी हो, नहीं मानोगे इसलिए यह करना पड़ा - कहकर नैना उठने को हुई कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया , वह गुस्से में बोला - दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा? यह क्या किया तुमने ? मैं ही पागल था जो तुम पर फिर से भरोसा किया , तुम ऐसे नहीं जा सक... धीरे-धीरे राजेश की आंखें बंद होने लगी , वह पूरी कोशिश कर रहा था कि सोए नहीं पर कुछ ही पलों में वह गहरी नींद में सो गया ।
नैना अब राजेश के पास बैठ उसे जी भर कर देखने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अब वह कभी राजेश को नहीं देख पाएगी । नैना जैसे ही चार कदम राजेश से दूर चली तो उसे ऐसा लगा कि जैसे वह अपनी आत्मा को ही छोड़ कर जा रही है , वह वापस लौट कर आई और राजेश के सीने पर सर रखकर फूट-फूट कर रोने लगी - बहुत, प्यार करती हूं तुमसे। खुद से भी ज्यादा इसलिए तुम्हारी खुशी के लिए खुद को तकलीफ देने से भी पीछे नहीं हटूंगी।काफी देर तक सिसकते रहने के बाद नैना ने अपने आंसू पोंछ खुद को संभाला और सीधी कमरे से बाहर निकल गई।
अगले दिन जब दोपहर को राजेश की नींद खुली तो उसे ध्यान आया कि नैना ने रात को उसके खाने में नींद की दवा मिलाई थी । वह अब हडबड़ाकर उठा और सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतर दरवाजे की ओर भागा कि तभी उसे डाइनिंग टेबल पर रखी नैना की फाइल की याद आई । वह वापस डाइनिंग टेबल की ओर भागा, वहां जाकर उसने देखा कि नैना की फाइल गायब थी ।
राजेश अब गुस्से में आग बबूला हो गया - यह तुमने अच्छा नहीं किया नैना , इसके लिए मैं तुम्हें मैं कभी माफ नहीं करूंगा । एक बार फिर तुमने मुझे धोखा दिया है - बड़बड़ाते हुए कार की चाबी ले दरवाजे की ओर भागा । वह कार में बैठकर नैना के घर की ओर चल दिया । उसके हाथ पैर अब सुन्न से होने लगे ,उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे। दिल जोरो से धड़कने लगा कि नैना कहीं चली ना गई हो - यह सोच कर इसी उलझन में और उलझते हुए वह नैना के घर तक पहुंच गया ।
जैसे ही वह कार से निकल नैना के घर के दरवाजे की ओर बढ़ा तो वहां लगे ताले को देख दंग रह गया । उसने पड़ोस , वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि नैना तो कई घंटे पहले ही अपनी मां के साथ यहां से निकल गई है ।
नैना चली गई , वह चली गई मुझे छोड़कर - सोचते हुए वह वही दरवाजे से टिक कर बैठ गया । वह अब कभी नैना से नहीं मिल पाएगा । अब राजेश कभी नैना पर उसके धोखे की वजह से कभी उस पर गुस्सा करता तो कभी उसके जाने के ग़म में फूट-फूट कर रोता ।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि करें तो करें क्या? आखिरकार गुस्से को दर्द ने हरा ही दिया और राजेश चुपचाप उठकर गाड़ी में आ बैठा , अब वह वहीं बैठा रोता रहा। विशाल बार-बार राजेश को फोन कर रहा था क्योंकि आज एक बहुत जरूरी मीटिंग थी पर राजेश के लिए अब सब कुछ खत्म हो चुका था । उसे ना दुनिया से मतलब था और ना ही दुनिया वालों से । उस पूरे दिन वह गाड़ी से शहर की गलियों के चक्कर लगाता रहा , जब शाम हुई तो विशाल के बार बार फोन आने पर वह अब ऑफिस की ओर चल पड़ा ।
ऑफिस पहुंचते ही विशाल भाग कर उसके पास आया और बोला - कहां थे तुम यार ? कितनी जरूरी मीटिंग थी?
विशाल ने देखा कि राजेश का ध्यान उसकी ओर नहीं था, वह , तो किसी और ही दुनिया में खोया था ।
विशाल - क्या हुआ, तुम ठीक तो हो ?
राजेश ने अब विशाल से कहा - मुझे कोई मीटिंग नहीं लेनी, मैं किसी से बात करना नहीं चाहता।
विशाल - इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मीटिंग अच्छे से हो चुकी है , उसने सब हैंडल कर लिया ।
राजेश (बुझे स्वर में ) - किसने ?
विशाल - अरे अपनी नैना ने और किसने ?
नैना का नाम सुनते ही राजेश ने हैरानी से विशाल की ओर देखा - क्य...... क्या कहा तुमने ?
विशाल ने अब खुद से कुछ ही दूरी पर राजेश के पीछे खड़ी नैना की ओर इशारा किया और बोला - नैना ने ।
राजेश ने अब जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सामने मुस्कुराती हुई नैना को देख वह दंग रह गया ।
, नैना राजेश की ओर देख मुस्कुरा रही थी ।
राजेश ( हैरानी से) - नैना तुम, यहां......?,
नैना अब उदास होकर किचन में पानी लेने चली गई और पानी का गिलास ला राजेश की हाथों में थमा दिया। राजेश को नैना को तंग करने में बहुत मजा आ रहा था । वह पानी पी कर बोला - नैना मेरे पास बैठो।
नैना - नहीं मैं यही ठीक हूं ।
राजेश - मैं रिक्वेस्ट नहीं कर रहा हूं , ऑर्डर दे रहा हूं ।चुपचाप बैठो वरना ...... - कहते हुए राजेश ने अपना फोन , उठाया कि नैना झट से उसके पास बैठ गई ।
राजेश - अब ठीक है। अच्छा सुनो, मेरे सिर में बहुत दर्द है। प्लीज , थोड़ा दबा दो और हां आराम से वरना मैं क्या कर सकता हूं , यह मुझे तुम्हें याद दिलाने की जरूरत नहीं - कहते हुए राजेश अब नैना की गोद में सर रखकर लेट गया ।
नैना - यह तुम.......
राजेश (बड़े इत्मीनान से ) - तुम्हें याद है, नैना कॉलेज में हम दोनों ऐसे ही बैठ कर खूब सारी बातें किया करते थे । नैना ने अब राजेश के सर को बड़े आराम से दबाना शुरू किया , कुछ देर बाद राजेश करवट लेकर लेट गया और उसकी आँखों से आँसू बह निकले। वह उन्हें पोंछ पाता कि नैना ने उसे देख लिया और उसके आँसू पोंछ दिए।
थोड़ी देर तक वहां सन्नाटा पसरा रहा।
राजेश - तुम्हारे हाथों में सच में जादू है नैना।
नैना - राजेश, अब तो दरवाजा खोल दो ।मुझे लेट हो रहा है।
राजेश - अभी नहीं , पहले मुझे बहुत भूख लगी है। तुम , जाकर कुछ अच्छा सा बना कर लाओ। काफी वक्त हो गया है तुम्हारे हाथ का खाना खाए । कितना कुछ बदल गया वक्त के साथ - यहां तक कि तुम और मैं भी।
राजेश अब चुप हो उठा और सीढ़ियों से होते हुए अपने कमरे में चला गया। नैना उसे बस यूं ही जाते हुए देखती रही । थोड़ी ही देर में राजेश वापस आया लेकिन इस बार उसके हाथ में फाइल थी । राजेश नैना के पास आकर बैठ गया और फाइल टेबल पर रख दी ।
नैना - यह क्या है?
राजेश - वहीं फाइल जिसके लिए तुम ने आज अपने सारे उसूलों को तोड दिया ।
नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी - पर तुम इसे ऐसे......
राजेश - इस बारे में बाद में बात करेंगे पर पहले खाना खिला दो।
नैना किचन में चली गई। राजेश अब गहरी सोच में डूबा हुआ था - क्या उसका नैना को इस तरह जबरदस्ती रोकना सही था ? क्या नैना वाकई उससे दूर जाना चाहती है और वह भी , इस कदर कि वह आज राजेश के घर में चोरों की तरह घुसकर आ गई । नहीं नहीं मैं अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका हूं , इस तरह कमजोर पडूंगा तो कैसे काम चलेगा । इसी तरह के सवालों से जूझते हुए राजेश के कानों में नैना की आवाज आई ।
नैना ने खाना बनाकर डाइनिंग टेबल पर लगा दिया था और राजेश को अावाज दी - खाना खा लो राजेश ।
राजेश अब जैसे नींद से जागा हो - हां आया - कहकर वह फाइल ले डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ा ।
नैना - राजेश यह फाइल प्लीज मुझे दे दो ।
राजेश कुर्सी पर बैठते हुए - दे दूंगा पर मेरी एक शर्त है ।
नैना - कैसी शर्त?
राजेश - मेरी शर्त यह है कि मेरी और रिचा की शादी की पूरी तैयारियां तुम करोगी । शादी के बाद यह फाइल मैं खुद तुम्हें दे दूंगा।
नैना हडबड़ा कर बोली - मैं..... मैं नहीं कर सकती।
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राजेश - क्यों नहीं कर सकती? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझसे.....
नैना - नहीं , ऐसी बात नहीं है । वह मैंने कभी ऐसा काम किया नहीं है और फिर यहां तो इतने अच्छे वेडिंग प्लानर है तो उन्हें देख लो।
राजेश - जितना मैंने पूछा है उसका जवाब दो ।
नैना अब अजीब सी कशमकश में फंस गई कि कैसे अपने प्यार को अपने ही हाथों से किसी और को सौंप दें ? इससे बेहतर वह मर जाना पसंद करेगी ।
राजेश - तो फिर ठीक है , यह फाइल भी 1 साल तक तुम भूल ही जाओ । अब जल्दी से खाना दो,भूख लगी है बहुत तेज - कहते हुए उसने फाइल और दरवाजे की चाबी अपने बगल वाली सीट पर रख ली । अरे वाह ! भिंडी की सब्जी -यह तो मेरी फेवरेट है और जब भी तुम्हारे हाथ की होती है तो बस मजा ही आ जाता है - कहकर राजेश बच्चों की तरह चहकने लगा ।
नैेना - और मीठे में मैंने यह बनाया है - कहते हुए नैना ने खीर , की ओर इशारा किया ।
राजेश - थैंक्स नैना , तुम नहीं जानती कि तुम्हारे जाने के बाद आज कितने टाइम बाद मैं सुकून से खाना.... कहते हुए राजेश रुक गया और नम आँखों से नैना की ओर देखने लगा।
उसे यूँ देख नैना की भी आंखे भर आई ।
राजेश अब उठ कर जाने लगा कि नैना ने राजेश का हाथ पकड़ उसे वापस कुर्सी पर बैठा दिया।
नैना - खाना ऐसे बीच में छोड़कर नहीं जाते फिर तुम्हें तो भूख भी लगी है । अाज मैं तुम्हें अपने हाथों से खाना खिलाऊंगी।
राजेश हैरान हो नैना की ओर देखने लगा - क्या कहा तुमने? तुम खिलाओगे जैसे कॉलेज में खिलाती थी? क्या हो गया है तुम्हें?
नैना - बस ज्यादा सवाल जवाब मत करो । क्या हम कुछ देर के लिए शांति के साथ नहीं बैठ सकते ।
राजेश नैना के बदले रूप को देश हैरान सा रह गया - तुम्हारी तबीयत ठीक है ?
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नैना ने अब राजेश की प्लेट से एक निवाला तोडा़ और राजेश की ओर बढ़ा दिया ।
राजेश हैरानी से - क्या बात है नैना ,आज बड़ा प्यार आ रहा है तुम्हें मुझ पर । कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने इसमें कुछ मिला दिया जैसे कि जहर ?
नैना (गुस्से में) -राजेश क्या बकवास कर रहे हो ? मैं जहर क्यों दूंगी तुम्हें ?
राजेश -ठीक है तो पहला निवाला तुम खाओगी ।
नैना को यह बहुत बुरा लगा ,उसका चेहरा एकदम उतर सा गया । उसने जैसे ही उस निवाले को खाने के लिए अपना मुंह खोला कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया - रहने दो , वैसे भी इसमें जहर हुआ भी तो कौन सा मुझे जी कर कुछ करना है । जिंदा रह कर नही तो मर कर ही तुम्हारे काम आ जाऊंगा - कहकर उसने नैना के हाथ से निवाला खा लिया । नैना बड़े प्यार से राजेश को खाना खिला रही थी । दोनों अब चुपचाप एक दूसरे को निहारे जा रहे थे ।
नैना और राजेश की आंखों में आंसू आ गए, दोनों अब , एक-दूसरे से नजरें चुराने लगे। दर्द तो दोनों के ही दिलों में बेइंतहा था पर कोई किसी को अपना दर्द दिखा नहीं सकता था । नैना ने अब बड़े प्यार से उसे खीर खिलाई , राजेश को आज फिर वही कॉलेज वाली नैना याद आने लगी । नैना के चेहरे पर फिर वही प्यार और फिक्र थी। राजेश ने नैना को भी खाना खाने को कहा पर उसने मना कर दिया।
खाना खिलाने के बाद नैना अपनी कुर्सी से उठी और राजेश का हाथ पकड़ उसे सीढ़ियों से ऊपर कमरे में ले जाने लगी।
राजेश कुछ समझ नहीं पाया कि नैना कर क्या रही है - नैना तुम ....
नैना - चुपचाप चलो मेरे साथ , आज तुम कुछ नही कहोगे, सिर्फ सुनोगे - कहते हुए उसे उसके कमरे में ले गई । वहां नैना ने राजेश को उसके बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसका हाथ पकड़ वही उसके पास बैठ गई । राजेश के लिए नैना आज फिर एक अनसुलझी पहेली बनकर खड़ी हो गई।
नैना - राजेश , मैं जो भी कह रही हूं वह ध्यान से सुनना।
राजेश - हम्म ।
, नैना - जब तक मैं यहां रहूंगी , तुम अंदर ही अंदर खुद से जूझते रहोगे । मैंने कई बार तुम्हें चोट पहुंचाई है - कभी जानबूझ कर तो कभी अनजाने में । आज फिर मैंने तुम्हें धोखा दिया है पर वह भी सब की खुशी के लिए । अगर मैं यहां से नहीं गई तो तुम और रिचा कभी खुश नहीं रह पाओगे और तुम भी मुझे खुद से दूर नहीं जाने दोगे।
मैं जानती हूं कि तुम्हें मुझ पर बहुत गुस्सा आएगा पर एक ना एक दिन तुम समझोगे कि आज मैंने जो भी किया , वह इस समय सबसे सही है ।
राजेश हैरानी से नैना को देखे जा रहा था कि आखिरी यह सब नैना कह क्या रही है ?
नैना की आंखों से आंसू बहने लगे - मुझे अपनी जिंदगी का एक बुरा सपना समझकर भूल जाना । तुम्हें मैने इतनी तकलीफ दी है और आज आखरी बार तुम्हें एक और तकलीफ दे रही हूं। कल सुबह जब तुम उठोगे , तब तक सब कुछ ठीक हो चुका होगा । मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होंगी, तुम सुकून के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करना और यह तुम्हारा हक भी है।
राजेश - कहना क्या चाह...... तभी राजेश को अपना सिर , भारी सा लगने लगा । उसकी आंखें धीरे धीरे बंद होने लगी, वह नैना से बोला - ये क्या किया है तुमने? क्या मिलाया खाने में मेरे?
नैना - मैंने खीर में नींद की दवा मिलाई थी जो तुम्हारे किचन में टेबल की रैक में मेडिसिन के डिब्बे में रखी थी। मैं जानती थी कि तुम जिद्दी हो, नहीं मानोगे इसलिए यह करना पड़ा - कहकर नैना उठने को हुई कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया , वह गुस्से में बोला - दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा? यह क्या किया तुमने ? मैं ही पागल था जो तुम पर फिर से भरोसा किया , तुम ऐसे नहीं जा सक... धीरे-धीरे राजेश की आंखें बंद होने लगी , वह पूरी कोशिश कर रहा था कि सोए नहीं पर कुछ ही पलों में वह गहरी नींद में सो गया ।
नैना अब राजेश के पास बैठ उसे जी भर कर देखने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अब वह कभी राजेश को नहीं देख पाएगी । नैना जैसे ही चार कदम राजेश से दूर चली तो उसे ऐसा लगा कि जैसे वह अपनी आत्मा को ही छोड़ कर जा रही है , वह वापस लौट कर आई और राजेश के सीने पर सर रखकर फूट-फूट कर रोने लगी - बहुत, प्यार करती हूं तुमसे। खुद से भी ज्यादा इसलिए तुम्हारी खुशी के लिए खुद को तकलीफ देने से भी पीछे नहीं हटूंगी।काफी देर तक सिसकते रहने के बाद नैना ने अपने आंसू पोंछ खुद को संभाला और सीधी कमरे से बाहर निकल गई।
अगले दिन जब दोपहर को राजेश की नींद खुली तो उसे ध्यान आया कि नैना ने रात को उसके खाने में नींद की दवा मिलाई थी । वह अब हडबड़ाकर उठा और सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतर दरवाजे की ओर भागा कि तभी उसे डाइनिंग टेबल पर रखी नैना की फाइल की याद आई । वह वापस डाइनिंग टेबल की ओर भागा, वहां जाकर उसने देखा कि नैना की फाइल गायब थी ।
राजेश अब गुस्से में आग बबूला हो गया - यह तुमने अच्छा नहीं किया नैना , इसके लिए मैं तुम्हें मैं कभी माफ नहीं करूंगा । एक बार फिर तुमने मुझे धोखा दिया है - बड़बड़ाते हुए कार की चाबी ले दरवाजे की ओर भागा । वह कार में बैठकर नैना के घर की ओर चल दिया । उसके हाथ पैर अब सुन्न से होने लगे ,उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे। दिल जोरो से धड़कने लगा कि नैना कहीं चली ना गई हो - यह सोच कर इसी उलझन में और उलझते हुए वह नैना के घर तक पहुंच गया ।
जैसे ही वह कार से निकल नैना के घर के दरवाजे की ओर बढ़ा तो वहां लगे ताले को देख दंग रह गया । उसने पड़ोस , वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि नैना तो कई घंटे पहले ही अपनी मां के साथ यहां से निकल गई है ।
नैना चली गई , वह चली गई मुझे छोड़कर - सोचते हुए वह वही दरवाजे से टिक कर बैठ गया । वह अब कभी नैना से नहीं मिल पाएगा । अब राजेश कभी नैना पर उसके धोखे की वजह से कभी उस पर गुस्सा करता तो कभी उसके जाने के ग़म में फूट-फूट कर रोता ।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि करें तो करें क्या? आखिरकार गुस्से को दर्द ने हरा ही दिया और राजेश चुपचाप उठकर गाड़ी में आ बैठा , अब वह वहीं बैठा रोता रहा। विशाल बार-बार राजेश को फोन कर रहा था क्योंकि आज एक बहुत जरूरी मीटिंग थी पर राजेश के लिए अब सब कुछ खत्म हो चुका था । उसे ना दुनिया से मतलब था और ना ही दुनिया वालों से । उस पूरे दिन वह गाड़ी से शहर की गलियों के चक्कर लगाता रहा , जब शाम हुई तो विशाल के बार बार फोन आने पर वह अब ऑफिस की ओर चल पड़ा ।
ऑफिस पहुंचते ही विशाल भाग कर उसके पास आया और बोला - कहां थे तुम यार ? कितनी जरूरी मीटिंग थी?
विशाल ने देखा कि राजेश का ध्यान उसकी ओर नहीं था, वह , तो किसी और ही दुनिया में खोया था ।
विशाल - क्या हुआ, तुम ठीक तो हो ?
राजेश ने अब विशाल से कहा - मुझे कोई मीटिंग नहीं लेनी, मैं किसी से बात करना नहीं चाहता।
विशाल - इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मीटिंग अच्छे से हो चुकी है , उसने सब हैंडल कर लिया ।
राजेश (बुझे स्वर में ) - किसने ?
विशाल - अरे अपनी नैना ने और किसने ?
नैना का नाम सुनते ही राजेश ने हैरानी से विशाल की ओर देखा - क्य...... क्या कहा तुमने ?
विशाल ने अब खुद से कुछ ही दूरी पर राजेश के पीछे खड़ी नैना की ओर इशारा किया और बोला - नैना ने ।
राजेश ने अब जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सामने मुस्कुराती हुई नैना को देख वह दंग रह गया ।
, नैना राजेश की ओर देख मुस्कुरा रही थी ।
राजेश ( हैरानी से) - नैना तुम, यहां......?,