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“इस वक्त तेरा मज़ाक इन्ज्वाॅय करने के मूड में बिल्कुल नहीं हूँ, ऋचा। जानती है, मेरी अॅंगूठी का नाप ले गया है। मम्मी से शाम को चार बजे ज्वेलर के यहाँ ले जाने की इजाजत भी ले ली है।”
“ठीक है, उसकी दी हुई हीरे की अॅंगूठी पहनकर अपनी माँग का सिन्दूर दिखा देना। उसकी ओर से एक कीमती तोहफ़ा स्वीकार करने में कौन-सी बड़ी कठिनाई है। डाॅलर कमाने वाले के लिए एक अॅंगूठी कौन बड़ी चीज है।”
“ऋचा, अब बस कर, मेरी जान निकली जा रही है और तू है कि मज़ाक पर मज़ाक किए जा रही है। वक्त की नज़ाकत भी तो कोई चीज होती है।” स्मिता की आँखें भर आई।
“अच्छा, चल पहले उधर जाना है।” ऋचा ने उसका हाथ खींचा।
“अब किधर जा रही है एऋचा?” स्मिता ने पूछा।
“विशाल को साथ ले चलना है। तू यहीं रूक, मैं विशाल को लेकर आती हूँ।” स्मिता को सवाल पूछने का समय न दे, ऋचा विशाल डिपार्टमेंट की ओर बढ़ गई थी।
ऋचा को आया देख, विशाल का चेहरा खिल गया –
“अरे ऋचा, हमारा वादा तो शाम को कम्पनी बाग में मिलने का था। क्या शाम का इन्तज़ार कर पाना मुश्किल था?” विशाल हॅंस रहा था।
“अभी पूरी बात बताने का वक्त नहीं है, जल्दी चलो, ज़रूरी काम है।”
“वाह! हम पर इस तरह हक जमाने का आपका अन्दाज़ अच्छा लगा। कहिए, कहाँ चलना है? बन्दा तो आपके हुक्म का गुलाम है।”
आॅटो से तीनों रोहित के घर पहॅुचे। रोहित के कमरे में ही मण्डप बनाया गया था। रोहित और नीरज के चार-पाँच घनिष्ठ मित्र पहुँच चुके थे, पर नीरज अभी नहीं पहॅुंचा था। नीरज को न देख, स्मिता के चेहरे का रंग उड़-सा गया।
“कहीं नीरज ने अपना इरादा तो नहीं बदल दिया?” स्मिता शंकित थी।
“प्यार पर विश्वास नहीं था तो इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, स्मिता?” ऋचा भी चिन्तित थी।
तभी नीरज आता दिखा। सबके चेहरे खिल गए। दोस्तों ने नीरज की पीठ ठोंक, बधाई दी। स्मिता ने पैकेट से एक लाल साड़ी निकालकर ऋचा की ओर बढ़ाते हुए कहा –
“आज इसी साड़ी से काम चलाना होगा, स्मिता। अगर तेरे घर से तेरी शादी होती तो बेशकीमती साड़ी पहनती।”
“प्यार से ज्यादा कीमती कोई दूसरी चीज नहीं होती, ऋचा। मेरे ख्याल में तो आज स्मिता और नीरज दुनिया के सबसे ज्यादा धनी इन्सान हैं।” विशाल ने ऋचा पर दृष्टि डाल, अपनी बात कही थी।
नीरज को रोहित ने अपना सिल्क का नया कुर्ता-पाजामा पहनाया। दोस्तों में अजीब उत्साह था। दोनों के साहस से वे अभिभूत थे। रोहित ने पण्डित जी से विवाह-संस्कार शुरू करने को कहा। तभी विशाल ने एक अजीब सवाल कर डाला-
“नीरज, एक सच बताना। कहीं तुम्हारे मन में स्मिता की सम्पत्ति का लोभ तो नहीं है? अगर स्मिता के मम्मी-पापा ने तुम्हें स्वीकार नहीं किया तो तुम्हें कुछ न मिलने का दुःख तो नहीं होगा?”
“स्मिता को पाकर मुझे सबकुछ मिल जाएगा। स्मिता की सम्पत्ति से मेरा कोई सरोकार नहीं। स्मिता के माता-पिता का दिया हुआ मुझे कुछ भी स्वीकार नहीं होगा, क्योंकि मेरा स्वाभिमान भीख-ग्रहण नहीं कर सकता।”
नीरज के जवाब पर दोस्तों ने तालियाँ बजा डालीं। नीरज के दृढ़ चेहरे पर मुग्ध दृष्टि डाल, स्मिता ने आँखें झुका लीं। पण्डित जी ने मन्त्रोच्चार शुरू कर दिए। रोहित ने ही कन्यादान का फ़र्र्ज़ पूरा किया। सोल्लास विवाह सम्पन्न हो गया।
रोहित ने सबके लिए लंच का आयोजन कर रखा था। विवाह के बाद ऋचा ने लड्डू खिलाकर वर-वधू का मुँह मीठा कराया। हल्के संगीत ने माहौल खुशनुमा कर दिया। दोस्तों के परिहास ने नीरज का मन हल्का जरूर कर दिया, पर आगे क्या होगा की चिन्ता सिर पर सवार थी। स्मिता का चेहरा लाज से लाल हो रहा था। इतना बड़ा कदम उठाना स्वप्नवत् था, पर नीरज का नाम सुनते ही मम्मी के चेहरे पर घृणा के जो भाव अंकित थे, उसके बाद नीरज के साथ विवाह की बात सोचना भी असम्भव था। मॅंुह बिचकाकर मम्मी ने कहा था-
“तू क्या सोचती है, वह तुझे प्यार करता है? देख स्मिता, मैं इस क्लास को अच्छी तरह जानती हूँ। जल्दी-से-जल्दी अमीर बन जाने के लिए किसी अमीर लड़की को फंसा लेना सबसे आसान तरीका है। वह तुझसे नहीं, तेरे पैसे से प्यार करता है।”
“नीरज ऐसा लड़का नहीं है, मम्मी। वह हमें सचमुच प्यार करता है।”
डरते-डरते स्मिता इतना ही कह सकी थी।
“बेवकू।फ़ लड़की, तुझमें ऐसा क्या है जिसकी वजह से कोई तुझे प्यार करे? मेरी तो समझ में नहीं आता, लाख कोशिशों के बावजूद तेरी पर्सनैलिटी डेवलप क्यों नहीं हुई? कान खोलकर सुन ले, नीरज का नाम भी लिया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा। वह कंगला मेरा दामाद बनने का सपना इसीलिए देख सका, क्योंकि तू मूर्ख है।”
उमड़ते आँसुओं के साथ स्मिता कमरे के पलंग पर ढह-सी गई थी। नीरज हमेशा कहता, स्मिता दूसरी लड़कियों से बिल्कुल अलग थी। उसका निष्पाप चेहरा, उसका भोलापन नीरज को कितना प्रिय है।
दूसरे दिन ही अमेरिका से प्रशान्त आ गया था। प्रशान्त की ख़ातिर में मम्मी ने कोई कसर नहीं उठा रखी। अकेले में स्मिता को अच्छी तरह चेतावनी दे डाली, अगर उसने जरा भी गड़बड़ की तो पापा-मम्मी उसे नहीं बख्शेंगे। यह उनके सम्मान का प्रश्न था। स्मिता की जरा-सी ग़लती से उनकी नाक कट जाएगी। प्रशान्त की हर बात का जवाब स्मिता हाँ-ना में देती रही, फिर भी स्मिता जैसी बेवकूफ लड़की प्रशान्त को पसन्द आ गई। प्रशान्त की ‘हाँ’ पर मम्मी फूली न समाई। पहली बार स्मिता को सीने से चिपटाकर प्यार किया। स्मिता के उदास चेहरे पर उनकी नजर ही कहाँ पड़ी थी! स्मिता ने पूरी रात जागकर काटी थी। नीरज के बिना वह जी नहीं सकेगी। सुबह तक वह निर्णय ले चुकी थी। मम्मी-पापा अगले सप्ताह उसके विवाह की तारीख तय कर, शादी की तैयारियों की सोच रहे थे, और आज ……… स्मिता की शादी भी हो गई। अचानक स्मिता काॅप उठी। मम्मी-पापा का रौद्र-रूप उसे डरा गया।