S
StoryPublisher
Guest
"लेकिन ये हैरत के साथ साथ अविश्वास वाली बात भी है कि बंद फैक्टरी के अंदर तथा तहखाने का भी लाॅक तोड़ कर वो शख्स अंदर पहुॅच कैसे गया?" अजय सिंह ने कहा__"और तहखाने से सारी चीज़ें गायब कैसे किया उसने? क्या वो सब चीज़ें वह अपने साथ ले गया? जबकि फैक्टरी के गेट पर तैनात दरबान के अनुसार गेट पर बाहर से ताला ही लगा था। कहने का मतलब ये कि ये सब अगर उसने ही किया है तो कैसे किया ये?"
"यकीनन अजय।" प्रतिमा ने गहरी साॅस लेते हुए कहा__"ये बड़े ही आश्चर्य की बात है। कोई बंद फैक्टरी के तहखाने में आसानी से पहुॅच गया और अपना सारा काम बड़ी आसानी से ही करके उड़नछू हो गया। किसी को इस सबकी कानों कान भनक तक न लगी। यकीन नहीं होता।"
"अगर ऐसा ही है।" अजय सिंह कह रहा था__"तो सबसे बड़ी परेशानी की बात तो अब हुई है प्रतिमा। ज़रा सोचो जिसने भी ये सब किया है वो कभी भी हमारे खिलाफ वो सब चीजें पुलिस तक पहुॅचा सकता है, या फिर उन सब चीज़ों के आधार पर वह कभी भी हमें ब्लैकमेल कर सकता है। हमारा जीना हराम कर सकता है प्रतिमा...समझ में नहीं आता कि अब क्या करूॅ मैं??"
"अब तो यही कर सकते हैं कि हम उस शख्स के ब्लैकमेल करने का इंतज़ार करें।" प्रतिमा ने कहा__"इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है।"
अजय सिंह चिंता व परेशान सा बैठा रह गया। उसे क्या पता था कि ये सब चक्कर चलाने वाला वही है जिसे वह होटल या ढाबे में कप प्लेट धोने वाला समझता है।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
"ये क्या कह रहे हो तुम?" जगदीश ने चौंकते हुए सामने सोफे पर बैठे विराज की तरफ देख कर कहा__"अजय सिंह की फैक्टरी के तहखाने से वो सारी चीज़ें तुमने गायब करवाई थी???"
"यही सच है अंकल।" विराज ने अजीब भाव से कहा__"और ये सब करने के पीछे भी मेरा एक मकसद था।"
"कैसा मकसद राज?" गौरी ने हैरानी से अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
"मैं नहीं चाहता था कि अजय सिंह अपनी ही बेटी की वजह से इतना जल्दी कानून के हाॅथ लग जाए।" विराज ने कहा__"अगर ऐसा हो जाता तो खेल का मज़ा ही ख़राब हो जाता अंकल। जेल में पहुॅच कर अजय सिंह को वो मज़ा नहीं मिल पाता जो मज़ा आने वाले समय में मेरे द्वारा उसे मिलने वाला है। उसकी जगह जेल में नहीं है अंकल बल्कि जेल के बाहर ही है। मैं उसे कभी भी कोई शिकायत का मौका नहीं देना चाहता, वर्ना जेल में बंद होने पर वो ये कहेगा कि मुझे तो अपने हाॅथ पैर चलाने का मौका ही नहीं दिया गया। अब आप ही बताइए अंकल, क्या ऐसा करना सही होगा? नहीं न......इसी लिए मैंने उसे उसकी बेटी द्वारा जेल जाने से बचा लिया।"
"वो सब तो ठीक है बेटे।" जगदीश ने कहा__"मगर मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि तहखाने से वो सब चीज़ें तुमने कैसे और कब गायब करवाई?"
"आपके सभी सवालों का जवाब आपको दूॅगा अंकल।" विराज ने हॅस कर कहा__"लेकिन उससे पहले मैं गरमा गरम चाय पीना चाहता हूॅ। फिर तसल्ली से आपको समझा समझा कर सब कुछ बताऊॅगा।"
"ये तो चीटिंग है भइया।" निधि ने बुरा सा मुॅह बना कर कहा__"कितना अच्छा मज़ा आ रहा था मुझे और आपने इंटरवल करके सारा मज़ा ही ख़राब कर दिया मेरा। जाइए मुझे बात ही नहीं करना आपसे, हाॅ नही तो।"
"तुमने बिलकुल ठीक कहा बेटी इसने सारा मज़ा ख़राब कर दिया।" जगदीश ने हॅस कर कहा__"मैं भी अब इससे बात नहीं करूॅगा। अपने आपको बड़ा सूरमा समझने लगा है ये। है न बेटी?"
"बिलकुल।" रितू ने मुॅह फुला कर कहा__"हाॅ नहीं तो।"
"चुप कर।" सोफे से उठते हुए गौरी ने निधी को झिड़का__"हाॅ नहीं तो की बच्ची, वर्ना लगाऊॅगी एक।"
"यकीनन अजय।" प्रतिमा ने गहरी साॅस लेते हुए कहा__"ये बड़े ही आश्चर्य की बात है। कोई बंद फैक्टरी के तहखाने में आसानी से पहुॅच गया और अपना सारा काम बड़ी आसानी से ही करके उड़नछू हो गया। किसी को इस सबकी कानों कान भनक तक न लगी। यकीन नहीं होता।"
"अगर ऐसा ही है।" अजय सिंह कह रहा था__"तो सबसे बड़ी परेशानी की बात तो अब हुई है प्रतिमा। ज़रा सोचो जिसने भी ये सब किया है वो कभी भी हमारे खिलाफ वो सब चीजें पुलिस तक पहुॅचा सकता है, या फिर उन सब चीज़ों के आधार पर वह कभी भी हमें ब्लैकमेल कर सकता है। हमारा जीना हराम कर सकता है प्रतिमा...समझ में नहीं आता कि अब क्या करूॅ मैं??"
"अब तो यही कर सकते हैं कि हम उस शख्स के ब्लैकमेल करने का इंतज़ार करें।" प्रतिमा ने कहा__"इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है।"
अजय सिंह चिंता व परेशान सा बैठा रह गया। उसे क्या पता था कि ये सब चक्कर चलाने वाला वही है जिसे वह होटल या ढाबे में कप प्लेट धोने वाला समझता है।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
"ये क्या कह रहे हो तुम?" जगदीश ने चौंकते हुए सामने सोफे पर बैठे विराज की तरफ देख कर कहा__"अजय सिंह की फैक्टरी के तहखाने से वो सारी चीज़ें तुमने गायब करवाई थी???"
"यही सच है अंकल।" विराज ने अजीब भाव से कहा__"और ये सब करने के पीछे भी मेरा एक मकसद था।"
"कैसा मकसद राज?" गौरी ने हैरानी से अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
"मैं नहीं चाहता था कि अजय सिंह अपनी ही बेटी की वजह से इतना जल्दी कानून के हाॅथ लग जाए।" विराज ने कहा__"अगर ऐसा हो जाता तो खेल का मज़ा ही ख़राब हो जाता अंकल। जेल में पहुॅच कर अजय सिंह को वो मज़ा नहीं मिल पाता जो मज़ा आने वाले समय में मेरे द्वारा उसे मिलने वाला है। उसकी जगह जेल में नहीं है अंकल बल्कि जेल के बाहर ही है। मैं उसे कभी भी कोई शिकायत का मौका नहीं देना चाहता, वर्ना जेल में बंद होने पर वो ये कहेगा कि मुझे तो अपने हाॅथ पैर चलाने का मौका ही नहीं दिया गया। अब आप ही बताइए अंकल, क्या ऐसा करना सही होगा? नहीं न......इसी लिए मैंने उसे उसकी बेटी द्वारा जेल जाने से बचा लिया।"
"वो सब तो ठीक है बेटे।" जगदीश ने कहा__"मगर मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि तहखाने से वो सब चीज़ें तुमने कैसे और कब गायब करवाई?"
"आपके सभी सवालों का जवाब आपको दूॅगा अंकल।" विराज ने हॅस कर कहा__"लेकिन उससे पहले मैं गरमा गरम चाय पीना चाहता हूॅ। फिर तसल्ली से आपको समझा समझा कर सब कुछ बताऊॅगा।"
"ये तो चीटिंग है भइया।" निधि ने बुरा सा मुॅह बना कर कहा__"कितना अच्छा मज़ा आ रहा था मुझे और आपने इंटरवल करके सारा मज़ा ही ख़राब कर दिया मेरा। जाइए मुझे बात ही नहीं करना आपसे, हाॅ नही तो।"
"तुमने बिलकुल ठीक कहा बेटी इसने सारा मज़ा ख़राब कर दिया।" जगदीश ने हॅस कर कहा__"मैं भी अब इससे बात नहीं करूॅगा। अपने आपको बड़ा सूरमा समझने लगा है ये। है न बेटी?"
"बिलकुल।" रितू ने मुॅह फुला कर कहा__"हाॅ नहीं तो।"
"चुप कर।" सोफे से उठते हुए गौरी ने निधी को झिड़का__"हाॅ नहीं तो की बच्ची, वर्ना लगाऊॅगी एक।"