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कांता की कामपिपासा

फिर कांता ने अपना एक हाथ धीरे से मामा के दोनो अंडकोषो पर ले गयी और उनको पकड़ कल हल्के हल्के दबाने लगी ……. मामा ने अपना हाथ कांता के सिर पर रख दिया और अपनी उंगलियो को कांता के रेशमी बालो मे फिराने लगा….. कांता मामा की आखो मे देख कर हल्के से बोली……

कांता: क्या मामा जी…… खुद ने तो अपना मुँह मीठा कर लिया……….. लेकिन मेरे बारे मे सोचा तक नही…… क्या आप मेरा मुँह मीठा नही कराएँगे क्या………

मामा: ……. अरे कांता मेरे पास तुम्हारी तरह दूध के बड़े बड़े बॉटल तो है नही,… जो तुम्हे पिला दूँ…….. … लेकिन फिर भी मेरे पास के चीज़ है जो मैं तुम्हे दे सकता हू?

कांता: कौन ससी चीज़ है मामा जी…….??

मामा: मेरे पास एक मलाई वाली कुलफी है……… तुम चाहो तो मैं उसे तुम्हे चुसवा सकता हूँ……. चूसोगी कांता मेरी कुलफी????

कांता: अरे मामा जी आप जो कहेंगे मैं वो चूस लूँगी……… आप अपनी कुलफी चूस्वाइए तो सही…………

कांता की बात सुनकर मामा ने अपने अंडरवेर का नाडा खोल दिया और उसे अपनी कमर से अलग कर दिया……. मामा का लंड फुंफ़कार्ता हुआ बाहर निकला……. मामा के लंड की मोटाई और लंबाई देख कर कांता की आँखे फटी की फटी रह गयी…….. मामा के लंड का सुपाडा किसी टमाटर की मानिंद लाल हो रहा था…… वैसे तो मामा का लंड उपर से भी मोटा था…… लेकिन जड़ की तरफ मामा का लंड ज़्यादा मोटा था……

कांता ने बड़े प्यार से मामा के लंड को देखा और फिर अपने हाथ मे लेकर उसे प्यार करने लगी… कुछ देर मामा का लंड सहलाने के बाद कांता ने अपने लाल लाल कामुक होंठो को खोलकर अपनी जीभ निकाल कर मामा के लंड के सुपाडे पर ऐसे फेरने लगी जैसे कोई आइस्क्रीम चाट रही हो…. कुछ देर मामा के सुपाडे को चाटने के बाद कांता ने अपना मुँह और खोला और फिर अपने मुँह मे मामा के लंड का ऊपरी हिस्सा भर लिया और मामा के लंड को ऐसे चूसने लगी जैसे वो कोई कुलफी चूस रही हो……..

 
मामा का हाथ कांता के बालो मे घूम रहा था… मामा ने अपनी कमर को थोड़ा सा टेढ़ा कर दिया जिस से कि कांता के मुँह मे मामा का लंड ज़्यादा से ज़्यादा अंदर जा सके….

कांता भी मामा की भावनाओ की कदर करते हुए अपने मुँह को और खोल कर मामा के लंड को अपने मुँह मे लेने का प्रयास करने लगी… कुछ ही देर मे कांता ने मामा के लंड को जड़ तक अपने मुँह मे भर लिया….

मामा को खुद भी बड़ा अचम्भा हुआ कि आख़िर कांता ने उनका इतना बड़ा लंड कैसे अपने मुँह मे पूरा का पूरा भर लिया…

कांता बड़े जोश के साथ मामा के लंड को चूस रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसा कांता मामा के लंड को पूरी तरह से सूखा देना चाहती थी…. कांता ने अपने दोनो हाथ मामा के चुतड़ों पर रख रखे थे….

मामा को परम आनंद की अनुभूति हो रही थी….. मामा ने अपना एक हाथ कांता की मांसल और चिकनी पीठ पर रख दिया और उसकी पीठ को बड़े ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगे….. काना की चूत कामाग्नि के कामरस से तरबतर हो चुकी थी…….. मामा ने कांता के मुँह मे से अपना लंड बाहर की तरफ खिचा…..

ऐसा करने पर कांता मामा की तरफ के प्रश्वचाक़ दृष्टि से देखने लगी… मामा ने आखो के इशारे से कांता को अपना लंड छोड़ने के लिए कहा… जब कांता के होंठो की पकड़ मामा के लंड पर थोड़ी ढीली पड़ी तो मामा ने कांता के मुँह मे से अपना लंड बाहर खीच लिया…. जैसे ही मामा का लंड कांता के मुँह से बाहर निकला … एक ऐसी आवाज़ आई जैसे कि कोल्ड ड्रिंक्स की बॉटल को ओपन करने पर आवाज़ आती है…. मामा का लंड कांता की लार से पूरी तरह गीला और चीकना हो चुका था…… मामा ने कांता को सोफे पर बैठने का इशारा किया….

कांता सोफे पर बैठ गई तब मामा ने कांता से अपनी पैंटी निकालने के लिए कहा…. कांता अपनी गान्ड को थोड़ा उची करती हुई अपनी कमर मे फसी हुई छोटी सी पैंटी को निकाल कर अपने घुटनों तक खिसका दिया …

मामा ने कांता की पैंटी को उसके पैर से निकाल कर कांता के तन से अलग कर दिया….. कांता की पैंटी उसकी चूत के काम रस से पूरी तरह सरोबार हो चुकी थी. मामा कांता की पैंटी को अपनी नाक से लगाकर ऐसे सूंघने लगा जैसे कोई ड्रग्स का आदि इंसान ड्रग को सूँघता हो….. मामा कांता की पैंटी की मदमस्त और सुगंधित गंध सूंघ कर मदहोश होने लगा……

 
कांता मामा को ऐसे देख कर और भी उत्तेजित होने लगी थी…. कुछ देर तक कांता की पैंटी को सूंघने के बाद मामा ने कांता की पैंटी को एक तरफ रख दिया और फिर कांता की दोनो टाँगों को चौड़ा करके फर्श पर नीचे घुटनो के बल बैठ गया…

आगे का कार्यक्रम समझ कर कांता बड़ी रोमांचित होने लगी… मामा कांता की केले के तने जैसी चिकनी जाँघ को सहलाने लगा और अपने होंठ को कांता की गरम और लरजति हुई चूत पर रख दिया…

कांता भी अपनी दोनो टाँगों को चौड़ा करते हुए अपनी चूत को मामा के मुँह की तरफ बढ़ा दिया……. अपनी चूत पर मामा के गरम होंठो का स्पर्श पाते ही कांता के मुँह से एक सीत्कार निकल पड़ी ….

मामा कांता की गुलाबी चूत की दोनो फाको के बीच मे अपनी जीभ किसी भूके कुत्ते की तरह चला रहा था……..

कांता ने अपने दोनो हाथो से मामा का सिर थाम लिया और अपने हाथ से मामा के सिर को अपनी चूत पर और दबाने लगी ….

मामा ने भी चूत चाटने की स्पीड दुगुनी कर दी….. कांता के मुँह से ज़ोर ज़ोर से सिसकारी निकलने लगी … मामा बीच बीच मे कांता की चूत पर हल्के से दाँत भी गढ़ा देता था………..

कांता की चूत की सुगंध मामा के नथुनो से होते हुए उसके मस्तिस्क मे पहुच रही थी….. मामा कांता की चूत रस की हर बूँद को बड़ी सफाई से सॉफ कर रहा था…. कांता के होंठ उत्तेजना की गर्मी से सूखने लगे थे.. और कांता अपने होंठो मे अपनी जीभ को बार बार फेर रही थी…..

लगभग 5 मिनट तक मामा कांता के चूतरस का रस्पान करता रहा …… कांता की चूत की खुजली और बढ़ती ही जा रही थी…….. उसे अपनी चूत के अंदर चीटियाँ रेंगती हुई महसूस हो रही थी…. उसने फुसफुसाती हुई आवाज़ मे मामा से कहा

कांता: माआआमाआअ……… अब बर्दाआस्स्स्स्स्स्स्स्त्त्त्त्त्त्त्त्त नही हो रहाआआआआ हाऐईयईई………..ईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीसीसीसीसीसीसिस कुछ कीईईईइजीीइईईईईईईईईईईईए नाआआअ ममाआआ जीिीइ…

मामा कांता के दोनो उरोजो को अपनी दोनो हथेलियो मे भरकर ज़ोर से दबाते हुए बोला…..

 
लगभग 5 मिनट तक मामा कांता के चूतरस का रस्पान करता रहा …… कांता की चूत की खुजली और बढ़ती ही जा रही थी…….. उसे अपनी चूत के अंदर चीटियाँ रेंगती हुई महसूस हो रही थी…. उसने फुसफुसाती हुई आवाज़ मे मामा से कहा

कांता: माआआमाआअ……… अब बर्दाआस्स्स्स्स्स्स्स्त्त्त्त्त्त्त्त्त नही हो रहाआआआआ हाऐईयईई………..ईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीसीसीसीसीसीसिस कुछ कीईईईइजीीइईईईईईईईईईईईए नाआआअ ममाआआ जीिीइ…

मामा कांता के दोनो उरोजो को अपनी दोनो हथेलियो मे भरकर ज़ोर से दबाते हुए बोला…..

मामा: अरे कांता क्या करवाना चाहती हो……… ज़रा मुझे भी तो बताओ……….

कांता की आँखे बिल्कुल लाल हो गयी थी…….. शराब और जवानी की हवस उसकी आँखो मे सॉफ नज़र आ रही थी….. उसने अपनी नशीली आखो से मामा को घूरते हुए कहा……….

कांता (अपनी चूत को मसल्ते हुए) …. अरे ममाआ……… इसमे बड़ी खुलजी हो रही है…….. प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़……… कुछ कीजिए नाआ…

मामा: तुम ही बताओ कांताआआ……….. कि मैं तुम्हारी खुजली कैसे मिटाऊ (मामा कांता को छेड़ते हुए बोला)

कांता: अर्र्र्र्र्र्र्रररीईईई………. मममम्ममाआआ……. तुम कह रहे थे ना….. कि तुम मेरे अंदर तक रंग डालना चाहते हो अपनी पिचकारी से… तो फिर आओ ना और अपनी पिचकारी से मेरे अंदर रंग डाल दो ……..\

मामा (अपने खड़े लंड को हाथ मे लेकर हिलाते हुए) तुम्हारा कहने का मतलब है कि मैं अपनी इस पिचकारी से तुम्हारे अंदर रंग डालु?

कांता: अर्र्र्र्र्रररीईईई हााआ माआआअमाआआअ…… तुम्हारी इस पिचकारी से ही मुझे रंग डलवाना है ……….

कांता की बात सुनकर मामा ने कांता के होंठ चूमते हुए उसे वही सोफे पर लिटा दिया……

कांता भी मामा के लंड के स्वागत की तैयारी मे अपनी दोनो टांगे चौड़ी कर के सोफे पर पीठ के बल लेट गयी…. टांगे चौड़ा करने से उसकी चूत की फाके एक दूसरे से दूर हो गयी और उसकी चूत का आंतरिक गुलाबी भाग नज़र आने लगा…..

मामा अपने लंड को मुठियाते हुए कांता के मांसल पैरो को चौड़ा कर के अपने एक घुटने को सोफे पर टिका दिया और अपने लंड के मोटे सुपाडे कांता को गीली चूत की फांको पर टिका दिया.

कांता को मामा के लंड का स्पर्श किसी गरम रोड की तरह अपनी चूत पर महसूस हुआ……….

 
मामा ने कांता की चूत की फांको के बीच मे अपने लंड को उपर नीचे रगड़ने लगा….. फिर अपने लंड को कांता के योनि द्वार पर टीका कर अपने एक हाथ से कांता की मदमस्त चूचिया को पकड़ा और अपने दूसरे हाथ से कांता के कंधे को पकड़ कर एक जोरदार झटका लगाया… कांता की चूत पहले से ही बहुत चिकनी हो गयी थी. फलस्वरूप मामा का मोटा लंड कांता की चूत मे आधा समा गया …. जैसे ही मामा ने झटके से लंड को कांता की चूत मे घुसाया वैसे ही कांता के मुँह से आहह निकल गयी…. मामा कांता की चूचियो की मिसता हुआ कांता से बोला…..

मामा: होली ……… मुबाराआाक्कककककककककक………. हो काआन्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्ताआअ……..

कांता भी आह भरती हुई मामा के मोटे और चौड़े कुल्हो को अपने दोनो हाथ से पकड़ कर अपनी गान्ड को उपर की तरफ उछालती हुई बोली………

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कांता: आपको भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ………

कांता की जोश बढ़ाने वाली बाते सुनकर मामा ने एक और जोरदार झटका कांता की चूत पर मारा और इसके साथ ही मामा का लंड कांता की चूत मे पूरा धस गया… कांता के मुँह से हल्की आआहह निकल गयी…… अब मामा ने कांता की चूत मे अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया…. और कांता से बोले:

मामा: कययूऊऊऊऊऊ……… कांताआ………. कैसे लगी मेरी पिचकारी……

कांता ने भी अपनी गान्ड उचकाते हुए कहा……..

कांता: अरे मामा जी………. अगर मुझे पता होता कि आपके पास इतनी शानदार पिचकारी है तो मैं तो पिछली दीवाली पर ही आपसे होली खेल ली होती……….

मामा: क्यो कांता…… रानी तुम्हारे पति की पिचकारी से मन नही भरता क्या तुम्हारा….? मामा ने अपने धक्को की स्पीड बढ़ाते हुए कांता से पूछा…..

कांता: मान्ंनननणणन् भर गया है मामा ….. तभी तो आपकी पिचकारी से होली खेल रही हूँ….

कांता की हाजिर जवाबी ने मामा को लाजवाब कर दिया…. मामा कांता के दोनो बड़े स्तनों को अपनी दोनो मुट्ठी मे भरकर भीचते हुए बोला……..

मामा: कान्त्त्त्त्त्त्त्ताआआअ…. तुम्हारे इन मदमस्त जोबन ने मेरे को बहुत तडपाया है… आज अपनी सारी तड़प का बदला इन से निकाल लूँगा………..

कांता: (मीठी दर्द भरी आवाज़ मे सिसकारी भरती हुई) अरे मामा तो कौन रोक रहा है आपको……. जैसे मर्ज़ी वैसे बदला ले लीजिए … अब ये दोनो आपके हवाले है… वैसे भी इनके साथ जितनी बेदर्दी से पेश आईएगा उतना ज़्यादा निखार आता है इनमे…

कांता की बाते सुनकर मामा अपनी दोनो हथेलियों मे कांता के जोबन को भरकर पूरी ताक़त के साथ भीचने लगा…

कांता के जोबन मे मीठे दर्द की लहर सी दौड़ रही थी… जो उसे सिसकने पर मजबूर कर रही थी …. कांता की चूत कामरस से सरोबार हो चुकी थी….मामा के हर प्रहार से कांता की चूत मे से पचह्क्ककचह………. पचह्क्ककचह………. की आवाज़ आ रही थी. कांता शराब और जवानी के नशे मे मदमस्त थी. वो मामा की ताल से ताल मिलाते हुए बोली.

कांता: एक बात पुच्छू मामा जी…………

मामा: हाँ पुछो कांता…………

कांता: आपकी नज़र मुझपर कब से थी?

मामा: वैसे तो तुम 16-17 साल की होते होते ही पटाखा बन गयी थी… लेकिन शादी के बाद तो तुम पूरा बॉम्ब ही बन गयी…. जब शादी के बाद तुम पहली बार अपने ससुराल से आई तब तुम्हारी उफनती हुई जवानी देख कर मेरा लंड भी फंफनाने लगा था….

कांता: क्यो …… शादी के बाद ऐसी क्या बात हो गयी थी जो मुझमे शादी से पहले नही थी.

 
कांता की बात सुनकर मामा अपना मुँह कांता के कान के पास लेकर गया और अपने तपते होंठो से कांता के कान को स्पर्श करते हुए फुसफुसा कर बोला……

कांता: अरे कांता शादी के पहले तुम राजकुमारी थी….. और शादी के बाद…….. मामा ने अपनी बात अधूरी छोड़ कर एक जोरदार प्रहार अपने लंड का कांता की चूत पर किया…. धक्का इतना तेज था कि पूरा का पूरा सोफा हिल सा गया….

कांता ने सिसकारी भरते हुए पूछा….

कांता: और शादी के बाद मामा जी………..

मामा अपनी बात पूरी करते हुए बोला……. और शादी के बाद तुम रानी बन गयी हो…… शादी के पहले तुम काली थी….. और शादी के बाद……. मामा ने फिर से अपनी बात अधूरी छोड़ दी और एक जोरदार धक्का कांता की चूत पर लगा दिया………

इस धक्के मे पहले वाले धक्के से जायादा ताक़त महसूस की थी कांता ने… और कांता की चूत ने भी.. कांता ने फिर सिसकते हुए कहा………..

कांता: और शादी के बाद मामा जी………..

मामा कांता को चोदते हुए उसके कान मे धीरे से फुसफुसाकर बोला … शादी के बाद तुम कली से फूल बन गयी हो, जिसका रस पीने के लिए भंवरे तरसते रहते है…. मामा ने कांता की बड़ी बड़ी चूचियो को मिसते हुए कहा….

मामा: शादी के पहले तुम्हारे पास दो संतरे थे…… और शादी के बाद….. मामा ने फिर से अपनी बात अधूरी छोड़ दी और फिर से एक तेज प्रहार कांता की जाँघो के जोड़ पर कर दिया…

कांता के मुँह से एक बार फिर आआहह निकल गयी… वो मामा की तरफ काम पिपासा भरी निगाहो से देखती हुई बोली

कांता: और शादी के बाद मामा जी………..

मामा फिर उसके कान मे फुसफुसाते हुए बोला… शादी के बाद तुम्हारे पास दो रसीले और चूसने वाले आम हो गये… उसके बाद मामा ने कांता को अपनी गोद मे उठाकर वहाँ नीचे बिछे हुए कालीन पर लेट गया और कांता को अपने उपर बिठाकर उसे नीचे से चोदते हुए बोला … शादी से पहले तुम्हारी बुर थी… और शादी के बाद……. मामा ने फिर से अपनी बात अधूरी छोड़ दी और एक ज़ोर का झटका लगाया.. जिस से मामा का लंड वापस कांता की चूत मे जड़ तक पेबस्त हो गया

मामा का लंड जैसे ही कांता की चूत मे घुसा, कांता के मुँह से एक जोरदार सिसकारी निकली… और वो पलंग पर उठ कर बैठ गयी…….

अचानक कांता की तंद्रा टूटी तो उसने अपने आपको अपने कमरे मे पाया….. अपने हाथ को जब अपने नीचले अन्द्रुनि हिस्से पर ले कर गयी तो उसे अहसास हुआ अपनी निचली घाटी मे बहती हुई रज सरिता का…… अपने हाथ से अपनी चूत को मसल्ते हुए कांता….. अपने आप से बोली…… उफफफफफ्फ़………… हाई मा…मा…..आ जी…. तुम्हरी पिचकारी की बड़ी याद आ रही है….. आऊओ ना ….. पिछलि होली की तरह होली खेलने…. इस बार भी…………….. काता अपने अतीत की याद से वर्तमान मे आ चुकी थी……. अपने तपते शरीर की जलन को कम करने की खातिर वो उठकर बाथरूम मे चल पड़ी…………….

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जानकी लाल हॉल मे बैठे अख़बार मे किसी खबर को बड़ी दिलचस्पी के साथ पढ़ रहे थे… टेबल पर चाइ पड़ी हुई थी… तभी उनकी कानो मे कांता को स्वर गूंजा……

कांता: अरे बाबू जी…… कहाँ खो रहे है आप…… ऐसी कौन सी न्यू आ गयी अख़बार मे जो आप इतने मसगूल हो गये है अख़बार मे…. कम्से कम चाइ तो पी लीजिए…………

जानकी लाल: (उत्सुकता से) अरे कांता इधर आओ…… देखो रोहिणी शुगर मिल का मालिक ने अपनी फॅक्टरी को लीज़ पर देने के लिए एड दिया है अख़बार मे……..

कांता : (जिग्यासा से) तो…. आपका क्या इरादा है इस फॅक्टरी के बारे मे….

जानकी लाल: इरादा ये है कि क्यों ना हम इसे लीज़ पर ले लें….. उसके पास सारी नयी मशीनरी है, मॅन पवर भी यहाँ आराम से मिल जाएगी…. अगर हम कोशिश करे तो इस फॅक्टरी से अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते है (जानकी लाल की आखो मे चमक थी)

कांता: (गंभीर मुद्रा मे) लेकिन बाबूजी ये तो सोचिए कि इस मिल का मालिक इस फॅक्टरी लीज़ पर क्यो दे रहा है… वो खुद भी इस मिल को चला कर मोटा मुनाफ़ा कमा सकता है.

जानकी लाल: बिल्कुल……………….. तुम्हारी बात वाजिब है…. जहाँ तक मैने सुना है… इस मिल का मालिक सेठ जमना दास है…. उसकी और भी कई फॅक्टरीस है…. इस फॅक्टरी के लिए कच्चा माल पूरा नही मिल रहा था.. इसी वजह से वो ये फॅक्टरी लीज़ पर देना चाह रहा है…

कांता : तो ये प्राब्लम तो हमारे साथ भी होगी….. हमे भी कच्चे माल के लिए काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है….

जानकी लाल: हाँ बिल्कुल………… लेकिन जमना लाल को इसलिए परेशानी हो रही थी क्यो कि वो कच्चा माल काफ़ी सस्ते मे खरीदना चाह रहा था….. लेकिन कुछ छोटे मोटे ठेकेदार के अलावा उसे कोई बड़ा ठेकेदार सस्ता माल नही दे रहा था…. इसी वजह से उसने ये फ़ैसला किया होगा…..

कांता : तो फिर आप क्या उची कीमत पर माल ख़रीदेंगे उस से?

जानकी लाल: हाँ बिल्कुल… यही सोचा है हम ने……

कांता : (अचरज भरी निगाहो से उसे देखती हुई बोली) तो फिर इसमे हमारा क्या फ़ायदा होगा????

जानकी लाल: (मुस्कुराते हुए) अरे मेरी बहू राणिीईईईईईईईईई…………… हम माल को केवल थोड़ी सी ज़्यादा कीमत चुकाकर उस से ख़रीदेंगे…… समझी…………

कांता: अरे बाबू जी…….. ये बताओ कि वो आप को माल क्यो सस्ता देगा….. जब उसने जमना दस को ही नही दिया तो. नही बाबू जी…….. मुझे नही लगता कि वो आपकी इस डील को इतनी आसानी से मान जाएगा………..

जानकी लाल: हाँ … ये भी जानता हूँ मैं कि वो मेरी बात इतनी आसानी से नही मानेगा…. लेकिन तुम्हारी बात तो मानेगा ना……………

.. (जानकी लाल कांता से चुटकी लेते हुए बोला)

कांता: आप कहना क्या चाहते है…..???????

जानकी लाल: वही जो तुम समझ रही हो मेरी रानी……………………

कांता: आपका मतलाब है कि मायन्न्ननननणणन्……………………………….

जानकी लाल ने कांता की बात को बीच मे काटते हुए कहा…………….. हाँ मेरा मतलब ये है कि तुम इस ऑफर को वहाँ के सबसे बड़े ठेकेदार के पास लेकर जाओगी… और उसे कम से कम दाम पर माल बेचने के लिए कन्वेन्स करोगी………………..

कांता: (थोड़ी झिझकते हुए)…. क्या बाबू …… ऐसा करना ठीक रहेगा………….

जानकी लाल: बिल्कुल ठीक रहेगा………. एवेरितिंग ईज़ फेयर …………………. लव आंड बिज़्नेस

कांता: ठीक है बाबू जी…………………. तो फिर अपने इस प्रॉजेक्ट मे लग जाते है… ……. आप जमना दास से उसकी फॅक्टरी को लीज़ पर लेने की बात करे…. ठेकेदार के मॅटर को मैं संभाल लूँगी……………..

ये कह कर कांता वहाँ से उठकार अपने कमरे की तरफ चल दी…. जानकी लाल कांता के मटकती हुई गान्ड को देख रहा था……

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1 वीक लेटर

कांता हाल मे बैठी हुई थी… पास ही उसकी सासू माँ भी बैठी थी… वक़्त कोई शाम के 6:00 बज रहे थे.. दोनो चाइ की चुस्कियो के साथ गॅप शॅप कर रही थी… फूलवा किचन मे बिज़ी थी… तभी मेन गेट के पास किसी गाड़ी के रुकने की आवाज़ सुनाई दी. सास और बहू दोनो की निगाहें एक साथ मेन गाते की तरफ उठ गयी.. कुछ ही देर मे जानकी लाल अंदर आते हुए दिखाई दिए… उनके चेहरे से खुशी सॉफ झलक रही थी… उनके हाथ मे एक फाइल भी थी… उन्होने अंदर आते ही फाइल को बड़ी जोशोगर्मी के साथ टेबल पर लगभग पटकते हुए कांता और अपने पत्नी की तरफ देख कर बोले….

जानकी लाल: हमे शुगर मिल की लीज़ बड़ी ही सस्ती रेट पर मिल गयी है…. सेठ जमाना दास को तो बड़ी हैरानी हुई कि मैं इस मिल को लीज़ पर लेना चाहता हूँ…. वो बोल रहे थे कि सोच लो जानकी दास जी ….. कहीं आपको काफ़ी नुकसान ना उठाना पड़े इस डील मे….. तो मैने तो कह दिया कि जमना दास जी बिज़्नेस मे जोखिम तो उठाना ही पड़ेगा… अगर बिज़्नेस चलाना है तो….

कांता : चलिए ये लीज़ वाला मॅटर तो ख़तम हो गया… अब हमे कच्चे माल के लिए भाग दौड़ करनी पड़ेगी….

जानकी लाल: हाँ…. कांता बस अगर एक बार हमे 1 साल के लिए भी सही रेट्स मे माल मिल जाए तो ये मिल हमारे लिए बॅंक साबित होगी…..

कांता: वो सब आप मुझपर छोड़ दीजिए….. आप तो बाकी की फॉरमॅलिटीस पूरी कीजिए… और मुझे वो ठेकेदार से साल भर के कांट्रॅक्ट के डॉक्युमेंट्स तैयार कर के दीजिए…… ठेकेदार से बात करके मीटिंग फिक्स कीजिए… उसके बाद मैं संभाल लूँगी सब कुछ… ये कह कर कांता ने एक कातिल मुस्कान जानकी लाल की तरफ उछाल दी…

इस मुस्कान को कांता की सास तो एक नॉर्मल मुस्कान ही समझ रही थी लेकिन इस मुस्कान का अर्थ कांता और जानकी लाल दोनो ही बखूबी समझ रहे थे….

कांता उठकर अपने कमरे की तरफ चली गयी.. उसके जाने के बाद उसकी सास जानकी लाल से बोली

सासू माँ: कांता …. कितनी टॅलेंटेड है… हमारे बिज़्नेस को कितनी अच्छी तरह से चला रही है… जबसे उसने बिज़्नेस मे आपका हाथ बटाना शुरू किया है… अपना बिज़्नेस तो दिन दूना रात चौगुना.. बढ़ता जा रहा है… क्यो ठीक कह रही हूँ ना…..

जानकी लाल: हाँ ये तो तुम बिल्कुल सही कह रही हो… बहुत टॅलेंटेड है वो….. (ये कहते हुए जानकी लाल को कांता के साथ खेला गया चेस याद आ गया)

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दो दिन बाद

दीवार पर लटकी घड़ी मे शाम के बज चुके थे. जानकी लाल फोन पर किसी से बात कर रहे थे….. शायद ठेकेदार से बात का रहे थे… मीटिंग के बारे मे… कांता की सास अपने कमरे मे थी.. कांता किचन मे फूलवा का हाथ बटा रही थी… फोन पर बात ख़तम करने के बाद जानकी लाल ने कांता को आवाज़ लगाई…. जानकी लाल की आवाज़ सुनकर कांता किचन से बाहर जानकी लाल के पास आ गयी…

जानकी लाल: बहू……… ठेकेदार से बात हो गयी है काल शाम को 4:00 बजे हमारी उस से मीटिंग है…. उसने हमे अपने फार्म हाउस चाइ पर बुलाया है….. अगर बात बन गयी तो वही उस से कांट्रॅक्ट भी साइन करवा लेंगे…

कांता: ठीक है बाबू जी…. लेकिन उसका फार्म हाउस है कहाँ पर………….

जानकी लाल: उसका फार्म हाउस यहाँ से लगभग 150 किमी दूर है…. रामू (ड्राइवर) तुम्हे वहाँ लेकर चला जाएगा…….

कांता: क्यो आप मेरे साथ नही चलेंगे क्या…..

जानकी लाल: अरे नही बहू … मुझे पता है कि तुम अपना काम बहुत अच्छी तरह से अकेले भी कर सकती हो.. प्रेम सिंग के साथ डील भी तुमने अकेले ही तय कर लिया था.. और वैसे भी कल मुझे रिजिस्ट्रार ऑफीस जाना है कुछ डॉक्युमेंट्स रेडी करवाने के लिए … इसलिए तुम कल दोपहर बाद अकेले ही निकल जाना…. मैने कांट्रॅक्ट के सारे पेपर्स तैयार करवा दिए है….

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अगले दिन

दोपहर के लगभग 1.30 बज रहे थे…. कांता की सासू माँ बाहर के लोन मे गुनगुनी धूप का मज़ा ले रही थी… वही फूलवा भी लोन मे नीचे बैठी हुई थी .. कांता की सासू फूलवा से इधर उधर की बाते और हल्की फुल्की मज़ाक कर रही थी… गाड़ी मेन गेट के सामने के पोर्च मे खड़ी थी… ड्राइवर रामू भी वही खड़ा था.. तभी अंदर से कांता के कदमो की आहट सुनाई दी… कांता की सासू माँ कुछ दूर पर लोन मे बैठी थी, शायद इसीलिए उन्होने कांता की आहट नही सुनी, ड्राइवर मूड कर आहट की तरफ देखने लगा…. सामने कांता को देख कर उसकी आँखे फटी रह गयी………… उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…. कांता के सन्गेमरमरी और गदराए हुए जिस्म को देख कर वो पलके झपकाना भूल गया… कांता ने आसमानी रंग की ट्रॅन्स्परेन्सी साड़ी पहनी हुई... उसका ब्लाउस स्लीवेलेस्स था और काफ़ी छोटा भी था... उसके स्तनों के आकार के हिसाब से... उसके दोनो उभार अधखुले थे.. खुले हुए बालो मे कांता कयामत ढा रही थी.... कुल मिलाकर कांता काम की देवी लग रही थी. सेक्स की देवी लग रही थी

कांता ने वही खड़े खड़े अपनी सासू माँ को ये इशारा किया कि वो जा रही है…. सासू माँ उसके इशारे को समझ कर बोली….

सासू माँ: ठीक है बेटी…. अपना ध्यान रखना…………. रामुउउउउउउउउउउउउउउ

आवाज़ सुनकर रामू की तंद्रा टूटी………… वो हड़बड़ाकर बोलाआा………..

रामू: ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जििइईईईईईईईईईईईईई………… मालकिंन्ननननननननननननननणणन्

सासू माँ: बहू का ख़याल रखना…….. कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए……….

रामू: जीिइईईईईई…………. मालकिंन्ननननननननननननणणन्….

रामू ने कार के पीछे का गेट खोला कांता कार मे बैठ गयी….. रामू ने शालीनता से गेट बंद किया और आगे ड्राइवर की सीट पर काबिज हो गया….. कुछ ही देर मे गाड़ी हवेली के बाहर मेन रोड पर आ चुकी थी…. कांता पीछे बैठे बैठे वो कांट्रॅक्ट के पेपर्स को पढ़ रही थी… रामू ने बॅक मिरर कांता पर सेट कर रखा था.. बीच बीच मे वो कांता के मदमस्त यौवन का रस्पान भी कर रहा था… इस बात का अंदाज़ा कांता को भी था.. लेकिन उसने इसे इग्नोर कर दिया……..

लगभग 2 घंटे के बाद वो किसी कस्बे मे पहुचि… रामू ने गाड़ी को वहाँ चाई की दुकान पर रोका और खुद उतर कर दुकानदार से पता पूछने चला गया…. कांता कार मे ही बैठी थी… कुछ देर बाद वो वापस आया और कांता से बोला.

रामू : मालकिन… यहाँ से कोई 1 किमी दूर है लाखा राम का घर…. वहाँ के ठेकेदार का नाम लाखा राम था….

 
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