• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

क्या वह बेवफ़ा थी?

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
क्या वह बेवफ़ा थी?

तान्या को नींद नहीं आ रही थी। रात के १२ बज गए थे और वह करवटें बदल रही थी। वह १९ साल की एक जवान और स्वस्थ बदन की लड़की थी। उसकी शादी उसके मर्ज़ी के ख़िलाफ़ एक ३० साल के युवक रवि से कर दी गयी थी। तान्या अभी आगे पढ़ना चाहती थी पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। अच्छा ख़ासा कमाऊ लड़का मिल गया था तो उसके मॉ बाप क्यों उसे हाथ से जाने देते। शादी को ३ महीने हो गए थे और आज पहली बार रवि अपनी कम्पनी के काम से टूर पर बाहर गया था। उसने बताया हुआ था कि क्योंकि वह मार्केटिंग में है ,इसलिए उसे कभी कभी टूर पर जाना पड़ेगा। दिल्ली शहर के इस फ़्लैट में वो आज रात बिलकुल अकेली थी और उसे पुरानी बातें याद आ रही थी।

तान्या एक अल्लढ़ और मौजी लड़की थी। परिवार में माँ और पिता के अलावा एक बड़ा भाई भी था। जीवन बिलकुल ठीक ठाक चल रहा था। जब वह १८ की हुई उसका जन्म दिन बड़ी धूम धाम से मनाया गया। उसके पापा हरी व्यास ने सब परिवार वालों को बुलाया और कुछ सहेलियाँ भी आयीं थीं। तान्या ने १२वीं की परीक्षा भी अच्छे नम्बरों से पास की थी । उसकी मम्मी लक्ष्मी भी बहुत ख़ुश थी कि अब बिटिया कोलेज जाएगी। शिवा भय्या ने भी उसे सुबह सुबह प्यार किया और जन्म दिन की बधाई दिया। शिवा उससे २ साल बड़ा था और कोलेज में पढ़ता था। हरी व्यास का अपना व्यवसाय था और वो एक उच्च मध्यम वर्ग में गिने जाते थे।

शाम को पार्टी एक होटेल में रखी गयी थी। तान्या एक सुंदर से टॉप और स्कर्ट में तय्यार होकर आयी थी। वह एक लम्बी स्वस्थ और दिल्ली की फ़ैशनबल लड़की थी। ३२ साइज़ की चूचियाँ ब्रा में फँसी हुई टॉप से साफ़ दिख रही थी। टॉप से उसकी गहरी क्लीवेज़ भी दिखाई दे रही थी। पेट का कुछ हिस्सा नंगा था और उसकी गहरी नाभि जैसे क़यामत ढा रही थी। छोटी सी स्कर्ट से नीचे उसकी गदराई हुई गोरी पुष्ट जाँघें तो उफ़्फ़्फ क्या मस्त दिख रहीं थीं । स्कर्ट से पैंटी के किनारे भी दिख रहे थे।

जैसे ही वह अपनी सहेली रम्या के साथ अंदर हाल में आयी , सब मर्दों की मानो साँसे ही रुक गयीं । वह अंदर आकर अपनी मम्मी लक्ष्मी से लिपट गयी।

लक्ष्मी: वाह बेटी, आज बहुत प्यारी लग रही हो। ध्यान रखना कोई तुमको पसंद ना कर ले।

तान्या: मम्मी कोई मुझे पसंद करे उससे क्या होता है। सवाल ये है कि मैं भी उसे पसंद करूँ।

दोनों हँसने लगे। तान्या आगे जाकर पापा की तरफ़ बढ़ी जो एक कोने में होटेल के मैनेजर को कुछ आदेश दे रहे थे। तान्या को अपनी ओर आते देखकर हरी पहली बार थोड़ा सा अलग सा महसूस किया। आज उसकी बेटी सच में मस्त लग रही थी। तान्या पास आयी और आके अपने पापा से लिपट गयी और हरी ने उसकी सख़्त चूचियों ka दबाव अपने सीने पर महसूस किया और पहली बार अपनी बेटी के स्पर्श से उसका लंड झटका मारा। उसके हाथ बेटी की पीठ सहलाने लगे और वहाँ ब्रा का स्ट्रैप छूकर वह और उत्तेजित हो गया। उसका लंड अब काफ़ी बड़ा हो गया था। वो अपनी कमर पीछे को किया ताकि तान्या को उसके लंड की चुभन का अहसास ना हो जाए। फिर वह झुका और उसके गाल चूमा और बोला: चलो बेटी क़रीब क़रीब सब आ गए हैं अब केक काटा जाए।

तान्या उससे अलग हुई और बोली: भय्या कहाँ है?

हरी: वो देखो अपने दोस्तों के साथ खड़ा बातें कर रहा है।

उसके जाते ही उसने अपनी पैंट में लंड ऐडजस्ट किया और थोड़ा सा शर्मिंदा भी हुआ।

तान्या उसी तरफ़ को गयी और वहाँ जाकर अपने भाई के गले लगी। शिवा बोला: वाह आज तो बहुत सुंदर दिख रही हो। वह भी अपने सीने में उसके सख़्त अनारों के स्पर्श से पहली बार थोड़ा सा विचलित हुआ और फिर बोला: चलो केक काटा जाए।

शिवा ने नोटिस किया कि उसके सब दोस्त तान्या को ख़ा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे। उसने देखा कि कुछ दोस्तों ने तो उसकी जाँघें और स्कर्ट से उभरी मस्त गाँड़ देखकर अपना लंड भी पैंट में ऐडजस्ट करना शुरू कर दिया था। अचानक उसे भी महसूस हुआ कि उसका लंड भी अकड़ने लगा है। उसे ख़ुद पर शर्म आयी कि वो अपनी बहन के बारे में ऐसा कैसे सोच सकता है।

अब लक्ष्मी ने अनाउन्स किया और सब एक टेबल के पास आ गए जहाँ केक कटना था। तान्या का परिवार उसके पास था। तभी शिवा का फ़ोन बजा। शिवा: हेलो, ओह ताऊ जी ? आप लोग कहाँ हो? हम तो केक काटने जा रहे थे। अच्छा अच्छा आप लोग आओ फिर काटेंगे। फिर वो हरी से बोला: पापा ताऊजी और उनका परिवार होटेल के गेट तक आ गया है, पाँच मिनट रुक जाते हैं ।

सब बातें करने लगे। तभी हरी के बड़े भय्या श्याम और उनका बेटा अजय और उसकी पत्नी रूपा वहाँ आ पहुँचे।

सब एक दूसरे के गले मिले । श्याम भी दिल्ली में ही रहते थे। भाइयों के घरों के बीच में क़रीब २० किलोमीटर की दूरी थी। तान्या ने जब ताऊजी के पैर छुए तब उन्होंने उसे गले से लगा लिया और ना जाने तान्या को क्यों ऐसा लगा कि वो उसे ज़रा ज़ोर से अपने में भींच रहे थे। उनके हाथ भी उसकी पीठ से होते हुए थोड़ी देर के लिए ही सही पर उसके उठे हुए हिप्स पर आया और हाथ हट भी गया। तान्या हैरानी से उनको देखी पर ताऊ जी ने ऐसा व्यवहार किया मानो कुछ हुआ ही ना हो। अब तान्या जब पीछे को हटी तो उसकी आँख एक क्षण के लिए ताऊ जी के पैंट पर पड़ी तो वहाँ उसे साफ़ साफ़ एक बड़ा सा तंबू नज़र आया जिसे ताऊजी ने मुस्कुराकर तान्या को दिखाकर ऐडजस्ट किया।

तान्या वहाँ से हट गयी पर उसे थोड़ा सा अजीब तो लगा ही। फिर तान्या अपनी रूपा भाभी से भी गले लगी। उसके कज़िन अजय ने भी उसे गले लगाया और आशीर्वाद दिया। तान्या की ताई जी का दो साल पहले देहांत हो गया था लम्बी बीमारी के बाद ।

अब सब टेबल के पास आए और तान्या ने केक काटा । सबने तालियाँ बजाईं और जन्म दिन के गाने गाए गए ।तान्या को उसके परिवार के सदस्यों और फिर सहेलियों ने और शिवा के दोस्तों ने भी केक खिलाया। फिर पार्टी शुरू हुई । शिवा के दोस्त बोले: चल भाई हमारा गला कहाँ गीला कराएगा ?

शिवा ने एक वेटर को कहा: ये मेरे चारों दोस्तों और अजय भय्या को ले जाओ उस कमरे में जहाँ सब इंतज़ाम किया है। फिर दोस्तों से और अजय से बोला: आप चलो मैं अभी आता हूँ।

उनके जाने के बाद शिवा तान्या की एक सहेली रम्या से बात करने लगा और कोशिश करने लगा कि वो पट जाए तो थोड़ा बहुत मज़ा ले लेगा।

उधर तान्या अपनी मम्मी और रूपा भाभी के साथ बातें कर रही थी तभी उसकी सहेलियाँ भी आ गयीं और सन खाते हुए बातें करने लगे।

हरी भी अपने दोस्तों और भय्या के साथ एक टेबल पर बैठा और श्याम बोला: क्या हरी कुछ पीने का इंतज़ाम नहीं किया है क्या?

हरी: वाह भय्या पार्टी हो और ड्रिंकस ना हो ऐसा कभी हो सकता है।

तभी वेटर वहाँ ड्रिंकस सर्व करने लगे। जल्दी ही सब नशे में मस्त होने लगे।

उधर कमरे में अजय भी शिवा के दोस्तों के साथ मस्त हो रहा था।

उधर शिवा रम्या से मीठी मीठी बात करते हुए उसे क़रीब क़रीब पटा ही लिया था।

अब शिवा बोला: चलो ना रम्या मेरे साथ चलो थोड़ी सी वाइन पीते है।

रम्या दो बार पार्टी में वाइन पी चुकी थी सो वह उसके साथ चली गयी ।

तान्या ने रम्या को भाई के साथ जाते देखा तो वह समझ गयी कि कुछ गड़बड़ है। वह सबकी नज़र बचाकर उनके पीछे गयी और उनको एक कमरे में जाते देखकर उसका नम्बर नोट किया और वापस आ गयी।

क़रीब एक घंटे के बाद ताऊजी उठे और अजय को आवाज़ दिए। अजय तो वहाँ था नहीं। उनकी बहू रूपा भाग कर उनके पास गयी और बोली: पापा ये तो यहाँ नहीं है। कुछ काम था क्या?

श्याम थोड़ा लड़खड़ाते हुए: हाँ बहू ज़रा बाथरूम जाना था पर थोड़ा ज़्यादा चढ़ गयी है। थोड़ा सा सहारा दे दो।

रूपा ने देखा कि हरी और बाक़ी के मर्द सब मस्ती में झूम रहे थे और किसी का भी ध्यान उसके ससुर पर नहीं था ।उसने ससुर की कमर में हाथ रखा और श्याम ने बहू के कंधे पर हाथ रखा और दोनों बाथरूम की ओर चल पड़े।

अब तान्या सोची कि ज़रा मैं भी उस कमरे में जाऊँ जहाँ भय्या रम्या को लेकर गए हैं । उसे पता था कि वहाँ दारू चल रही होगी। उसने आज तक कभी वाइन भी नहीं ली थी। जब वह लॉबी की तरफ़ मुड़ी तो उसने देखा कि ताऊ जी अपनी बहू के साथ उसका सहारा लेकर बाथरूम को जा रहे हैं और तभी उसने जो देखा वो सन्न रह गयी। ताऊ जी ने अपने एक हाथ को रूपा के कंधे पर रखा हुआ था। उनका वह हाथ रूपा के ब्लाउस पर आया और वह उसकी एक बड़ी सी चूचि दबाने लगे। रूपा: पापा क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।

श्याम: हा हा यहाँ कौन है बहू? फिर वह अपना हाथ नीचे लाकर उसकी बड़ी बड़ी गाँड़ दबाने लगे। रूपा छिटक कर अलग हुई और बोली: जाइए बाथरूम आ गया है अंदर जायीये।

नशे में झूमते हुए श्याम: अरे बहू आओ ना तुम भी एक राउंड यहाँ कर लेते है।

रूपा: पापा आपसे खड़े तो हुआ नहीं जा रहा है और आप राउंड करोगे। जाओ जल्दी से निपट कर आओ। मैं यहीं खड़ी हूँ।

श्याम फिर से उसकी गाँड़ दबाकर: बहू आज तो तुम्हारी गाँड़ ही मारूँगा।

रूपा हँसकर: खड़े तो हो जायीये सीधे फिर जो मारना हो मार लीजिएगा ।

यह कहकर वो हँसती हुई वापस आ गयी। तान्या को तो काटों ख़ून नहीं। ये क्या हो रहा था ससुर और बहू में। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ वो हड़बड़ा कर उस कमरे में घुसी। जैसे ही वह अंदर आयी उसकी हालत एक बार फिर से ख़राब हो गयी। अंदर शिवा के दो दोस्त तो लुढ़क गए थे । पर जो हैरान करने वाला दृश्य था वो ये कि शिवा और अजय भय्या रम्या की एक एक चूची दबा रहे थे। शिवा का एक हाथ उसके स्कर्ट के अंदर ऊपर नीचे हो रहा था और रम्या आऽऽऽऽह कर रही थी। शिवा के एक एक हाथ भय्या के दोस्तों के पैंट से खड़े लंड पर था और वो बहुत ही उत्तेजित थी और अपनी गाँड़ हिलाकर शायद भय्या की ऊँगलियों का मज़ा ले रही थी। वो सोफ़े पर अधलेटी सी पड़ी थी और चार मर्द उसके ऊपर चढ़े जा रहे थे। तभी वह आऽऽऽऽऽऽह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइ चिल्लाई और फिर एक झटके से शांत हो गयी।

ये सब १८ साल की तान्या के लिए कुछ ज़्यादा ही हो रहा था। अभी ताऊजी और भाभी का देखी और अब यहाँ ये सब। वो चिल्लाई: ये सब क्या हो रहा है?

शिवा और अजय हड़बड़ा कर उठे और तान्या की आँखों के आगे दो बड़े से तंबू तने हुए थे उनकी पैंट में। रम्या ने जल्दी से अपना हाथ उन लड़कों के पैंट से हटाया जहाँ पैंट पर तंबू और साथ में गीला सा कुछ धब्बा भी था। रम्या अपने कपड़े ठीक करने लगी और बोली: देखो ना तान्या इन लोगों ने मुझे वाइन पिला कर मेरे साथ पता नहीं क्या क्या कर दिया।

अजय: अरे कुछ नहीं किया तुम्हारे साथ। और हमने नहीं पिलाई तुम ख़ुद से पीना चाहती थी।

शिवा: हाँ तान्या ये अपने मज़े से पी रही थी।

तान्या की आँख ना चाहते हुए भी भय्या के तंबू पर गयी और वह सिहर उठी और बोली: चलो रम्या अब चलो यहाँ से। बहुत पी ली है तुमने।

फिर वो रम्या को वहाँ से लेकर बाहर लायी और रम्या के ड्राइवर को फ़ोन किया और बाहर कार में छोड़कर आयी।

उधर हरी के सब दोस्त जा चुके थे और अब श्याम और हरी ही बचे थे। अब श्याम ने आवाज़ दी: अरे रूपा और लक्ष्मी आओ यहाँ बैठो।

दोनों आकर उनके साथ टेबल में बैठ गयीं । लक्ष्मी श्याम के पास और रूपा हरी के साथ वाली कुर्सी में बैठ गयी। अब श्याम ने दो ग्लास वाइन बनाई और उन दोनों को देता हुए बोला: चलो तुम दोनों भी पीओ।

दोनों मुस्कुराकर पीने लगीं। श्याम ने लक्ष्मी की जाँघ सहलाते हुए कहा: लक्ष्मी बहुत दिन हो गए तुमसे मज़े किए हुए।

लक्ष्मी: जी भय्या होली के बाद आज मिले हैं।

श्याम: वाह क्या याद दिलाई होली की। बहुत मज़ा किए थे। क्यों हरी याद है ना।

हरी: हाँ भय्या हम दोनों ने इसकी एक साथ ली थी। और फिर रूपा की चूची दबाकर बोला: और बहू से भी ख़ूब मस्ती की थी।

रूपा: आप दोनों भाई उस दिन पागल हो गए थे। वो तो अच्छा हुआ कि अजय शिवा और तान्या बाहर गए थे होली खेलने वरना मुश्किल हो जाती।

इस पर सब हँसने लगे। श्याम ने लक्ष्मी का हाथ अपने पैंट जे ऊपर से लंड पर रखा और हरी ने रूपा को देखा और वह ख़ुद ही उसका लंड दबाने लगी।

उधर आज तान्या हिल सी गयी थी। वो पापा के टेबल पर आयी तो देखा कि ताऊ जी वापस आकर फिर से पीरहे थे। पापा के सब दोस्त जा चुके थे।अब मम्मी और भाभी भी पी रहे थे। तान्या को देखकर सब सलीक़े से बैठ गए। वो हरी के पास आयी और बोली: पापा अब बस करिए । चलिए घर चलते हैं।

हरी ने देखा कि तान्या और सुंदर लग रही है। वो सोचा कि शायद मुझे चढ़ गयी है। वो सिर को झटका और बोला: बस बेटी चलते हैं। वैसे अब तुम भी १८ की हो गयी हो आज एक वाइन का ग्लास तुम्हारा भी बनता है।

इस पर श्याम ख़ुश होकर बोला: सही कहा। लो बेटी ये वाइन पीओ । उसे एक ग्लास देते हुए वह बोला। तान्या ने देखा की ताऊ जी की नज़रें उसकी चूचियों को घूर रहीं थी।

तभी लक्ष्मी बोली: हाँ हाँ बेटी पी लो एक ग्लास। थकावट दूर हो जाएगी। जेठ जी ने मुझे और रूपा को भी दो दो ग्लास पिला दी है।

तान्या ने ग्लास लिया और अपने पापा के पास जाकर खड़े खड़े ही पीने लगी। तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि पापा का हाथ उसकी कमर पर आ गया था और वो उसे सहलाते हुए बोले: बेटी वाइन का टेस्ट पसंद आया?

तान्या: जी पापा अच्छा है ।

तभी उसने महसूस किया कि पापा का हाथ उसकी कमर सहलाते हुए अब उसकी एक हिप पर आ गया था। वह थोड़ा सा चौंकी और पापा को देखी। पर वह तो श्याम से बात कर रहे थे । और श्याम अब भी उसकी चूचियों को बीच बीच में घूर रहे थे।

आज उसका अठ्ठारवाँ जन्म दिन काफ़ी महत्व पूर्ण था क्योंकि आज उसका वाइन से और कुछ सेक्शूअल फ़ीलिंग का सामना हुआ था।

आगे क्या होगा देखते हैं —————CONTI....................

आपके कामेंट्स का इंतज़ार रहेगा ।
 
पार्टी के बाद तान्या और उसका परिवार बाहर आया। श्याम अपने बेटे बहु के साथ और हरी अपने परिवार के साथ अपने अपने घर चले गए।

रात को बिस्तर पर तान्या की आँखों में नींद का अता पता नहीं था। वह आज शाम की पार्टी के बारे में सोचने लगी। बहुत कुछ अजीब हुआ था आज। ताऊजी का उसकी चूचियों को घूरना, उसके हिप सहलाना , ताऊजी का अपनी बहु से सम्बंध होने का विश्वास और पापा का उसके हिप को सहलाना और उसके भाइयों का रम्या के साथ व्यवहार और ख़ुद पापा उसे वाइन पिलाए आग्रह करके। ये सब अजीब बातें थीं। उसका हाथ अपने एक हिप पर चला गया और वह सोचने लगी कि पापा और ताऊ जी दोनों ने आज इसे सहलाया है। ये सब क्या है?

ऐसा नहीं था कि वो सेक्स के बारे में अनजान थी। स्कूल में कई लड़के उसे लाइन मारते थे और कई बार उन्होंने उसके अंगों को छूआ भी था मानो अनजाने में हाथ लग गया हो। पर वो सब उसके हमउम्र लड़के थे। और स्कूल में ये सब सामान्य बात थी। पर यहाँ घर में ये बड़ा अजीब सा लगा उसे। फिर वो ये सब सोचते हुए नींद की आग़ोश में समा गयी।

उधर हरी ने कपड़े उतारते हुए लक्ष्मी से कहा: तान्या जवान हो गयी है। आज तो बड़ी प्यारी लग रही थी।

लक्ष्मी: एक बात बोल देती हूँ कि वो आपकी बेटी है उसके बारे में उलटा सीधा नहीं सोचना। श्याम भाई का रूपा से कोई ख़ून का रिश्ता नहीं है इसलिए वो अपनी बहु से क्या करते हैं इसका हमसे कोई लेना देना नहीं है। पर आप तान्या को भूल से भी वैसे नज़र से नहीं देखना।

हरी: अरे ऐसा कुछ नहीं है जान तुम तो बस यूँ ही पीछे पड़ गयी हो। चलो गाउन उठाओ मुझे अभी चोदना है तुमको। वो अब पूरा नंगा खड़ा था और उसका लंड जो करीब सात इंच का मोटा सा था पूरा तना हुआ था।

लक्ष्मी ने अपना गाउन ऊपर किया और टाँग फैलाकर लेट गयी और हरी उसके ऊपर आकर उसे चूमने लगा और फिर अपना लंड उसकी चूत में डालकर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी भी जल्दी ही गरम हो गयी और नीचे से अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। उसने गाउन का ऊपरी हिस्सा खोला और उसकी चूचियाँ दबाकर चूसने लगा और अब धक्कों की स्पीड और ज़बरदस्त हो गयी। अब लक्ष्मी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आऽऽऽऽऽह उम्न्न्न्न्न्न्न कहकर मस्ती से चिल्लाने लगी। उधर हरी भी आऽऽऽऽह कहकर बोला: आऽऽऽऽऽह सच तान्या की माँ तुम अब भी बहुत मज़ा देती हो। जल्दी ही तान्या भी अपने बोय्य फ़्रेंड को मज़ा देगी हैं ना। उफ़्फ़्फ़्फ कहकर वो झड़ने लगा। लक्ष्मी भी अब उंन्न्न्न्न्न्न कह कर झड़ने लगी।

जब दोनों चुदाई के बाद आराम कर रहे थे तब लक्ष्मी बोली: आप तान्या के बारे में क्यों गंदा गन्दा बोल रहे थे?

हरी: आऽऽऽह बस ऐसे ही मुँह से निकल गया। सॉरी जान।

फिर दोनों चिपक कर सो गए।

सुबह तान्या उठकर तय्यार हुई और जींस और टॉप पहनकर नाश्ते के टेबल पर बैठकर लक्ष्मी से बोली: मम्मी मैं आज कोलेज में अड्मिशन करवा कर आती हूँ। रम्या भी जाएगी । शाम को देर हो सकती है। पापा कहाँ हैं?

लक्ष्मी: बेटी वो तो मुंबई चले गए सुबह की फ़्लाइट से ।

तान्या: ठीक है मम्मी मैं चलती हूँ।

तान्या रम्या के घर पहुँची जो कि पास ही था। रम्या जींस और टॉप में बाहर आयी और दोनों कोलेज जाने के लिए एक बस में चढ़ गयीं। बस ख़ाली थी इसलिए दोनों एक साथ बैठ गयीं और तान्या ने पूछा: ये कल तुम इतना क्यों पी ली थीं ? अगर मै ना आती तो भय्या और सब लड़के तुम्हारा सत्यानाश कर देते।

रम्या मुस्कुराकर: क्या सत्यानाश करते वो लोग? सत्यानाश तो तुमने कर दिया मेरे मज़े का। मैं तो मस्त गरम हो कर मज़े लेने वाली थी और तुम आ कर सब गड़बड़ कर दी।

तान्या हैरानी से : क्या कह रही हो? कैसे मज़े?

रम्या शरारत से: जवानी के मज़े और क्या ? तुम्हारे शिवा भय्या का मस्त हथियार है उन्होंने पैंट के ऊपर से पकड़ाया था। वो भी मेरी चूचियों को दबाकर मस्त हो चुके थे पर तुमने सब काम ख़राब कर दिया।

तान्या: क्या कह रही हो? तुमने भय्या का वो पकड़ा था। छी तुमको शर्म नहीं आइ?

रम्या: अरे मैंने तो सब लड़कों का पकड़ा था। पर तुम्हारे भय्या का सबसे मस्त था। हाँ और एक बात तुम्हारे कज़िन अजय भाई का काफ़ी छोटा सा है। पता नहीं बेचारी रूपा भाभी का इतने छोटे से हथियार से कैसे काम चलता होगा? ज़रूर वो किसी और से मज़ा लेती होगी।

तान्या के सामने रूपा और उसके ससुर की मस्ती का दृश्य घूम गया। वो समझ गयी कि क्यों बेचारी रूपा अपने ससुर के चंगुल में फँसी है । वो बोली: उफ़्फ़्फ रम्या तो क्या तुम सच में सब लड़कों से मज़ा लेने वाली थी?

रम्या: अरे प्लान तो ये बन रहा था कि शिवा के दोस्त तुमको भी लेकर आएँगे और पिला कर तुमसे भी मज़ा लेंगे।

तान्या: क्या मुझसे? ये उन लड़कों ने भय्या के सामने कहा?

रम्या: और क्या? इस पर शिवा बोला कि हाँ हाँ क्यों भी अब तान्या भी तो जवान हो गयी है। उसकी भी खुजा रही होगी।

तान्या का मुँह खुला रह गया । वो बोली: भय्या ने मेरे बारे में ऐसा कहा? उफ़्फ़ मैं भाई को कितना सीधा समझती थी।

रम्या हँसकर: वैसे तेरा ख़ानदान है बहुत सेक्सी?’

तान्या: क्या मतलब?

रम्या: तेरे पापा भी रसिया हैं । वो मेरी चूचियाँ कई बार दबा चुके हैं और मेरे चूतडों को भी मसले हैं । उन्होंने अपना लंड भी मुझे पकड़ाया है पैंट से बाहर निकाल कर। एक बार उन्होंने मुझे लिफ़्ट दी थी तब कार में मुझे बहुत गरम कर दिए थे। पता है मेरी पैंटी में ऊँगली डालकर मेरी चूत में डाले और बाद में ऊँगली निकालकर मुझे दिखाकर चूसे।

तान्या हैरान से उसकी बातें सुन रही थी। वो: ओह हे भगवान। पापा भी। क्या वो तुम्हारे साथ सेक्स कर चुके है?

रम्या: नहीं चुदाई नहीं हुई है बाक़ी सब हो चुका है। तीन चार दिन में वह भी हो जाएगी। मुंबई से वापस आएँगे तब।

तान्या: तुमको कैसे पता कि वो मुंबई गए हैं ।

रम्या: हा हा हम दोनों Watsapp में कनेक्टेड हैं । देखो तुम्हारे पापा कितने नॉटी मेसिज भेजते हैं? देखो मोबाइल।

तान्या ने पापा के मैसेज़ पढ़े और उसके गाल शर्म से लाल हो गए। पापा ने कितनी अश्लील बातें लिखीं हुई थी। और सेक्स के विडीओ भेजे थे। और अचानक एक कमर के नीचे की नंगी फ़ोटो भी थी किसी आदमी की, बिना चेहरे के।

रम्या मुस्कुराकर : ये फ़ोटो उस लंड की है जिसने तुझे पैदा किया है।

तान्या पापा के लंड की फ़ोटो देखकर सन्न रह गयी और अचानक उसे महसूस हुआ कि उसकी साँसे तेज़ हो गयी हैं और पैंटी गीली हो रही है। उसे अपने आप पर शर्म आयी कि वो अपने पापा के लंड को देखकर कैसे गरम हो सकती है??????

 
बस तेज़ी से जा रही थी और तान्या का दिल उससे भी तेज़ी से धड़क रहा था। रम्या समझ गयी कि उसका तीर निशाने पर बैठा है।दोनों सहेलियाँ फुसफुसा कर बात कर रहीं थीं। वो बोली: यार क्या इतना सोच रही है? मुझे देख अब तक ना जाने कितने ऐसे मस्त लंड खा चुकी हूँ पर प्यास है कि बुझती ही नहीं। ये दिल माँगे मोर । वह यह कहकर वह अपनी बुर को खुजा कर हँसने लगी। अब तान्या उसको देखती ही रह गयी।

तान्या हैरानी से: क्या तू कुँवारी नहीं है?

रम्या: हा हा, मुझे तो याद ही नहीं कि मैं कितनो से मज़ा कर चुकी हूँ। कई दोस्त , कई नौकर और फिर——- । वो एकदम से चुप हो गयी।

तान्या: और फिर क्या?

रम्या: चल जाने दे । वो सब बताना शायद ठीक ना हो।

तान्या: बता ना प्लीज़।

रम्या: तो सुन मैं परिवार के लोगों से भी मज़ा ले चुकी हूँ।

तान्या सन्न रह गयी: मतलब?

रम्या: चल छोड़ ना।

तान्या कांपते हुए आवाज़ से बोली: बता ना कौन कौन थे?

रम्या: मेरे चाचा ने मेरी सील तोड़ी थी। उसके बाद तो पापा और भय्या से भी हो चुका है।

तान्या को जैसे साँप सूंघ गया। वो बोली: पापा और भय्या से भी? उफ़्फ़्फ़्फ ये कैसे हो सकता है?

रम्या: सब हो सकता है बेबी। और एक बात बताऊँ? तुझे काफ़ी हैरानी होगी सुनकर।

तान्या: क्या?

रम्या: तेरे पापा भी तुझे चोदना चाहते हैं ।

तान्या: क्या? वो ऐसा बोले?

रम्या: हाँ मुझसे पूछ रहे थे तेरे बारे में। क्या तुम अभी कुँवारी हो या चुद चुकी हो। मैं बोली कि तान्या अभी कुँवारी है। बस वो बहुत गरम हो गए और बोले कि उसे मुझसे चुदवा दो प्लीज़। वो मुझे इसके लिए पैसे देने की बात भी किए।

तान्या: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ये क्या कह रही हो?

रम्या: मैं तेरे पापा के साथ मुफ़्त में मज़े नहीं करती। हर बार के वो पैसे देते हैं । लंड चूसवाने के १००० लेती हूँ और अब परसों का चुदाई का प्लान बना है उसके भी ५००० तक तो लूँगी ही। और अगर तुम उनसे चुदवाओगी तो भी मुझे दलाली के ५००० तो मिल हो जाएँगे। हा हा हा । वो हँसने लगी।

तान्या का सिर घूमने लगा। ये क्या सुन रही है। क्या सच में उसके पापा और भाई उसे चोदना चाहते है??? सोचकर भी बड़ा अजीब लगता है। तभी भीड़ बढ़ने लगी और बस खचाखच भर गयी। तान्या खिड़की पर बैठी थी और रम्या पेसेज वाली सीट पर थी। तान्या ने सामने की सीट का हैंडल पकड़ा हुआ था। तभी एक सुंदर सा लड़का आकर अपने पैंट के आगे वाले भाग को रम्या के हाथ से सटा दिया। रम्या ने तान्या को आँख मारी और उसे अपने हाथ की तरफ़ देखने का इशारा किया। तान्या इस लड़की की बेशर्मी से हैरान रह गयी। रम्या के हाथ में वह लड़का साफ़ साफ़ पैंट से उभरा हुआ अपना लंड रगड़ रहा था। रम्या ने अपना दूसरा हाथ भी वहाँ इस तरह रखा कि उसकी उँगलियाँ अब साफ़ उसके लंड को दबा रही थी। तान्या की साँस तेज़ चलने लगी और उसकी पैंटी गीली होती चली गयी।

तभी उनका स्टॉप आ गया और दोनों लड़कियाँ खड़ी हो गयीं । जब वो उस लड़के और उसके दोस्तों के बग़ल से गुज़रीं तो उन्होंने तान्या और रम्या की चूचियाँ और गाँड़ दबा दिए। दोनों चुपचाप उतर गयीं।

रम्या: मज़ा आया दबवाने में। मैं तो उस लड़के का लंड दबा दी पैंट के ऊपर से ।

तान्या: इसीलिए अब वो देख तेरे पीछे पीछे आ रहा है।

रम्या पीछे देखी और मुस्कुराई: आने दे साले को। हमें क्या फ़र्क़ पड़ता है।

जब वो दोनों कोलेज में घुसीं तो उनको और भी लड़कियाँ मिल गयीं और वो लड़के वहाँ से खिसक गए।

रम्या बोली: मेरे पापा के एक दोस्त हैं खान अंकल उन्होंने प्रिन्सिपल को फ़ोन कर दिया है। चल हम सीधे उनके पास जाकर फ़ॉर्म लेकर वहाँ ही भर देंगे।

जब वो दोनों प्रिन्सिपल के ऑफ़िस के सामने पहुँची तब वहाँ एक चपरासी खड़ा था । उसने उनको रोक लिया और रम्या के कई बार कहने के बाद भी उसे अंदर नहीं जाने दिया। अब रम्या ने कहा: मैं खान अंकल को फ़ोन करती हूँ। उसने फ़ोन लगाया। तान्या पास ही खड़ी थी इसलिए उसकी बातें साफ़ सुन पा रही थी।

रम्या: हेलो अंकल नमस्ते। आप ज़रा प्रिन्सिपल को बोल दीजिए ना हम बाहर खड़े हैं । चपरासी हमें अन्दर नहीं जाने दे रहा है।

खान: अच्छा साले मादरचोद चपरासी की ये मज़ाल कि हमारी प्यारी सी गुड़िया को रोक रहा है। अभी साले खन्ना को बोलता हूँ वो साला ख़ुद बाहर आकर हमारी प्यारी गुड़िया को अंदर लेकर जाएगा।

रम्या: थैंक्स अंकल।

खान: अरे थैंक्स की क्या बात है? वैसे साला खन्ना हरामी है बच कर रहना । लौंडिया पटाने में मास्टर है। हा हा हा ।

रम्या: क्या अंकल बस आप भी कुछ भी बोलते रहते हो। अच्छा रखती हूँ आप उसे फ़ोन करो।

खान : हाँ हाँ अभी करता हूँ। पर ये तो बताओ कब मिलोगी? बहुत दिन हो गए तुम्हारी लिए हुए? सच तुमसे बात करके खड़ा हो गया है। अच्छा ये बताओ कितने बजे तक फ़्री हो जाओगी? मैं आता हूँ कोलेज के सामने। वही से ले जाऊँगा तुमको उसी फ़्लैट में। दो घंटे मज़े करेंगे। क्या कहती हो?

रम्या: नहीं अंकल आज नहीं, कल का प्रोग्राम बनाएँगे। आज मेरी एक सहेली भी है मेरे साथ । प्लीज़ आप फ़ोन करो ना।

खान: चलो ठीक है कल का ही रखते हैं । ओक बाई।

रम्या ने फ़ोन काट कर कहा: ये अभी फ़ोन करेंगे तो प्रिन्सिपल हमें बुला लेगा।

तान्या का तो ध्यान इस पर था कि ये खान अंकल से भी चुदवा रही है- हे भगवान। क्या लड़की है।

तभी चपरासी बाहर आया और बोला: आपको प्रिन्सिपल साहब बुला रहे हैं।

रम्या और तान्या अन्दर ऑफ़िस में गयीं और वहाँ खन्ना सर बैठे हुए थे जोकि क़रीब ४५ साल के एक तगड़े बढ़िया व्यक्तित्व वाले दिख रहे थे।

खन्ना: हाँ हाँ अंदर आ जाओ । बैठो बैठो। वो उनके जवान बदन को घूरता हुआ बोला।

दोनों उसे नमस्ते करके सामने रखी कुर्सियों पर बैठ गयीं ।

रम्या: जी मेरा नाम रम्या है और ये तान्या है। हम दोनों को यहाँ अड्मिशन लेना है।

खन्ना: हाँ हाँ क्यों नहीं। खान सांब का फ़ोन आया था। वो अब भी उनकी जवान चूचियों को बारी बारी से घूर रहा था।

फिर उसने घंटी बजायी और चपरासी को कहा: इनके लिए कोल्ड ड्रिंक लाओ। और ज़रा सामंत सर को बुलाओ।

चपरासी उनको कोल्ड ड्रिंकस दे गया वो पीने लगीं।

खन्ना: हाँ अब बताओ। खान साहब को कैसे जानती हो?

रम्या: जी वो मेरे पापा के दोस्त हैं । हमारे घर भी आते हैं ।

खन्ना: ओह बढ़िया। और तुम तान्या?

तान्या: जी मैं उनको नहीं जानती बस मैं तो इसकी दोस्त हूँ।

खन्ना एक गंदी सी हँसी के साथ: अरे रम्या इनको भी खान से मिलवाओ ना। मस्त मज़ेदार आदमी है। वैसे उसके जान पहचान की सब लड़कियों को मैं जानता हूँ पर पता नहीं तुमसे कैसे नहीं मिलवाया उसने?

रम्या: वो बोल रहे थे कि आपसे मिलवाएँगे। पर शायद मौक़ा नहीं मिला।

खन्ना: चलो कोई बात नहीं । आज तो मिल लिए ना। अभी सामंत सर आएँगे तो तान्या उनके साथ फ़ॉर्म भरवा लेगी तब तक हम दोनों बात कर लेंगे।

तभी सामंत सर आए और तान्या को साथ लेकर फ़ॉर्म भरवाने चले गए। खन्ना ने रम्या को आँख मारकर कहा: खान बोला है कि मज़े कर लेना । छोकरी बहुत गरम माल है। क्या कहती हो?

रम्या हँसकर: यहाँ ?

खन्ना: अंदर इंतज़ाम है। चलो ना एक क्विकी कर लेते हैं ।

रम्या हँसकर: चलिए जैसा आप चाहो। पर पैसे तो देंगे ना?

खन्ना: हाँ हाँ खान बोल रहा था कि तुम रँडी की तरह पैसे लेकर ख़ुश होती हो। बिलकुल मिलेगा पैसा। चलो अंदर चलो समय ज़्यादा नहीं है।

रम्या उठकर खन्ना के पीछे पीछे अंदर कमरे में गयी। वहाँ एक बिस्तर बिछा था और साथ ही एक बाथरूम भी था। खन्ना ने पीछे से रम्या को जकड़ लिया और उसके गरदन में अपना मुँह डालकर चूमने लगा और उसके हाथ उसकी चिकनी कमर से होकर उसकी चूचियों तक पहुँच गयीं । वो उनको दबाने लगा और अपना खड़ा लंड उसकी गोल गाँड़ में दबाने लगा। रम्या भी मस्ती में आकर पीछे होकर अपनी गाँड़ पर उसका लंड महसूस करके मस्ती से भर उठी।

फिर वह उसे घुमाकर उसके होंठ चूसने लगा। वह भी उसका साथ देने लगी। थोड़ी देर बाद वह उसका टॉप उठाया और उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और फिर उसको सीधा बिस्तर पर लिटाया और उसकी स्कर्ट ऊपर किया और पैंटी एक झटके में निकाला और उसकी चूत में मुँह घुसेड़कर सूँघा और फिर जीभ से चाटने लगा। जल्द ही रम्या आऽऽऽह कर उठी और अब वो अपनी पैंट उतार और चड्डी भी निकाल दिया। उसका मोटा लंड देखकर रम्या मस्त हो गयी और उठी और झुक कर उसे मुँह में ले कर चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के सुपाडे को छेड़ रही थी और खन्ना उसके मुँह से लंड निकाला और उसकी टाँगे उठाकर फैलाया और बीच में आकर अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और हल्के से दबाकर अंदर पेलने लगा।

रम्या आऽऽऽऽऽह करके नीचे से अपनी गाँड़ उठाई और किसी रँडी के माफ़िक़ मस्ती से उसका पूरा लंड निगल गयी। फिर वो कमरा रम्या की सिसकियों से गूँजने लगा। ज़बरदस्त चुदक्कड है ये खन्ना तो रम्या सोची। करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद रम्या झड़ने लगी और खन्ना भी उसकी बुर में अपना माल छोड़ दिया। फिर बाथरूम से आकर जल्दी जल्दी दोनों ने कपड़े पहने और खन्ना ने उसे २००० दिए और रम्या ने किसी रँडी की तरह अपने पर्स में रख लिए।

दोनों बाहर आए तो खन्ना उसकी गाँड़ दबाकर बोला: एक बात तो है कि खान ने जितनी तुम्हारी तारीफ़ की थी तुम उससे भी ज़्यादा हॉट हो।

उधर तान्या को सामंत सर लेज़ाकर अपने कमरे में फ़ॉर्म भराने ले गया था। वहाँ क्या हुआ?? ——-

 
सामंत सर तान्या को लेकर अपने ऑफ़िस में आए और उसको फ़ार्म दिए और बोले : बेटी इसे भर दो। रम्या का फ़ार्म भी यहीं रखा है । वो आएगी तो उससे भी भरवा लेना। मैं अभी आता हूँ।

तान्या अपना फ़ार्म भरी और तभी सामंत वापस आया और बोला: लाओ चेक करता हूँ। फ़ार्म चेक करते हुए वो बोला: बेटी इस कोलेज में तो अड्मिशन नहीं हो पाएगी। हमारा कट ऑफ़ थोड़ा ज़्यादा है।

तान्या: पर रम्या बोली थी कि मेनेज हो जाएगा।

सामंत : हाँ उसका तो मेनेज हो रहा है अभी भी। प्रिन्सिपल साहब उसको मेनेज कर रहे हैं । पर तुम्हारा कैसे मेनेज होगा?

तान्या: मतलब?

सामंत: देखो अगर प्रिन्सिपल साहब के चक्कर में पड़ी तो वो बहुत क़ीमत वसूल करेंगे। हाँ मैं सस्ते में निपटा दूँगा।

तान्या: मैं समझी नहीं सर।

सामंत: देखो साफ़ साफ़ बोलता हूँ । अगर प्रिन्सिपल के चक्कर में पड़ी तो वो तुम्हारी लिए बिना मानेगा नहीं।

तान्या का मुँह लाल हो गया और वो बोली: छी सर कैसी गंदी बात करते हैं आप।

सम्मत: अरे क्या गंदी बात की है मैंने? रम्या वहाँ प्रिन्सिपल को अभी दे रही है और क्या ? पर तुम्हारा काम बिना दिए भी हो सकता है। अगर मेरी बात मान लो।

तान्या: मतलब?

सामंत: देखो मेरा पिछले साल ऐक्सिडेंट हो गया था । तब से मेरा ये ( अपने लंड को पैंट के ऊपर से पकड़कर) खड़ा नहीं होता। अगर तुम मुझे अपनी वो ( उसकी चूत की तरफ़ इशारा करके) चूसने दोगी तो अड्मिशन की कोई समस्या नहीं होगी। वरना प्रिन्सिपल साहब तो तुम्हारी फाड़ ही देंगे।

तान्या उसकी बातों से सन्न रह गयी । ये क्या मुसीबत है, इधर कुआँ और उधर खाई? वो क्या करे?

वो बोली: मुझे एक मिनट एक फ़ोन करना है।

सामंत: ठीक है मैं पाँच मिनट में आता हूँ । तुम तब तक फ़ैसला ले लो।

तान्या ने उसके जाते ही माँ को फ़ोन किया: माँ एक बात बताओ। पापा की कोई पहचान है क्या इस कोलेज में?

लक्ष्मी: अरे बेटा कोई पहचान नहीं है। तू ख़ुद ही मेनेज कर ले। और तू बोल रही थी ना कि फ़ार्म भरने का आख़री दिन भी कल ही है। तो बेटा कुछ भी करके अड्मिशन ले ही ले।

तान्या: ओह ठीक है माँ।

वो सोची कि माँ बोल ही दी है कि कुछ भी करके? वो ये सोचकर कि सर उसकी चूत चाटेगा बहुत गरम हो गयी थी। उसने मोबाइल पर क्लिप्स देखीं थीं जिसमें मर्द औरत की चूत चाटते हैं । और वो सोची कि क्या वो सच कह रहा है कि उसका खड़ा नहीं होता। हो सकता है वो झूठ बोल रहा हो और उसे चोद ही डाले। पिछले २४ घण्टे में जो कुछ उसने देखा सुना था , उससे उसकी चूत कई बार गीली हो चुकी थी और वो सोच रही थी कि साला ये सामंत अगर उसे चोद भी लेता है तो कोई बात नहीं।

तभी सामंत आया और बोला: हाँ बेटी क्या फ़ैसला किया?

तान्या: सर आप मुझे बेटी बोलते हो और साथ ही ये गंदा काम करने को भी कहते हो ये कैसे हो सकता है?

सामंत: असल में बेटी बोलकर प्यार से मस्ती करने में मज़ा ही कुछ और है, तुम नहीं समझोगी। बोलो क्या फ़ैसला किया?

तान्या: ठीक है सर मुझे अड्मिशन तो चाहिए ही । अब आप जो चाहे कर लो मेरे साथ।

सामंत: वाह समझदार बेटी हो। चलो उस बाथरूम में जाओ और अपनी स्कर्ट और पैंटी उतार दो । मैं अभी आता हूँ। और हाँ अगर पेशाब आयी हो तो कर लेना पर चूत को धोना नहीं।

तान्या बाथरूम में घुसी । वहाँ बस एक इंग्लिश टॉयलेट थी और एक वाश बेसिन था वो जाके अपनी स्कर्ट उतारी और हैंगर में टाँगी और फिर पैंटी नीचे करके सुसू करने लगी। मस्त सीटी बज रही थी उसकी चूत में से जब सामंत अंदर आया। तान्या शर्मा गयी। सामंत उसको देखते हुए मस्ती से बोला: आऽऽऽह बेटी क्या सीटी बजा कर मूत रही हो।

अब तान्या उठी और पैंटी को ऊपर करने लगी। पर सर ने उसे रोका और कहा: बेटी इसे निकालो । फिर वो ख़ुद ही झुका और उसकी पैंटी निकाल दिया। अब तान्या नीचे से पूरी नंगी थी।सामंत ने उसे अपने से चिपका लिया और उसके होंठ चूमने लगा और फिर उसके हाथ उसकी पीठ कमर होते हुए उसके नंगे गोल पुष्ट चूतरों पर आ गए और उनको दबाने लगे। फिर वह उसकी गरदन चूमते हुए टॉप के ऊपर से उसकी चूचियों को चूमने लगा। वह टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबा कर तान्या को मस्त कर दिया और उसकी चूत मस्त गरम होने लगी।

अब सामंत नीचे बैठ गया और उसके पेट को चूमते हुए उसकी नाभि में जीभ फिराने लगा। फिर वो उसके गोल चूतरों को दबाते हुए उसकी जाँघे चूमने और चाटने लगा। तान्या के पैर उत्तेजना से काँप रहे थे।उसने तान्या के एक पैर को कोमोड की सीट पर रखा और अब उसकी चूत खुली हुई उसके सामने थी। उसका यह पहला अनुभव था और वो पगला रही थी उत्तेजना के मारे। अब सामंत ने उसकी जाँघों को फैलाया और उसकी कुँवारी बुर का मुआयना किया। हल्के बालों वाली बुर मस्त उभरी हुई थी किसी फूली ही कचौरी की माफ़िक़। बीच में एक दरार थी जो कि बहुत सेक्सी लग रही थी। उसने उसे सहलाया और बोला: आऽऽऽह बेटी क्या मस्त बुर है तुम्हारी। चुदवायि हो क्या किसी से ?

तान्या ने शर्मा कर नहीं में सिर हिला दिया।

सामंत अब और उत्तेजित होकर वहाँ अपनी नाक डाला और सूँघते हुए बोला: उफ़्फ़्फ क्या मस्त गंध है बिटिया तुम्हारी बुर की। फिर वो वहाँ मुँह डालकर चूमने लगा और जल्दी ही उसकी जीभ उसकी बुर की लम्बाई और गहराई नापने लगी। अब तान्या मस्ती के सैलाब में डूबने लगी और चिल्लाई: आऽऽऽऽऽह उन्न्न्न्न्न ।

सामंत पूरी ताक़त से उसकी बुर को चाटते हुए अब चूसने भी लगा। उसकी जीभ उसकी कुँवारी बुर में मानो आग सी लगा रही थी। वो मस्ती में आकर उसका सिर पकड़ी और अपनी बुर में दबाने लगी। सामंत का हाथ जो उसकी गाँड़ को दबा रहा था , अब उसकी गाँड़ के छेद को सहलाने लगा। फिर वो उसके गाँड़ के छेद में एक ऊँगली भी डाल दिया और अब तान्या मज़े के अंतिम छोर पर पहुँचकर चिल्लाई: उईईईईई माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैं तो गयीइइइइइइइइ।

तान्या ने कई बार अपनी बुर में ऊँगली की थी और वो इस मज़े से परिचित थी पर आज जो मज़ा सर दे रहे थे वो तो कल्पना के परे था। अब वो गहरी साँस लेते हुए आऽऽऽऽह करके दीवार के सहारे खड़ी हो गयी। सामंत भी उसका पूरा पानी पी गया और बोला: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटी बहुत मज़ा आया। फिर वह आख़री बार उसकी चूत चूमा और गाँड़ के छेद से ऊँगली निकाला और उसे सूँघा और बोला: आऽऽऽऽह बिटिया तुम्हारी गाँड़ की गंध भी बहुत सेक्सी है।

तान्या शर्मा कर पैंटी पहनी और स्कर्ट पहनी। सामंत हाथ धोकर बाहर चला गया था। वो अपना कपड़ा ठीक की और पर्स से कंघी निकालकर बाल ठीक की। फिर बाहर आयी तो सामंत ने उसे फ़ार्म देकर कहा : जाओ बेटी उसे सामने बैठे क्लर्क को दे दो और फ़ीस भी जमा कर देना।

तभी रम्या आयी और बोली: फ़ार्म भर दी?

तान्या: हाँ अब तुम भी भर लो। रम्या भी फ़ार्म भरी और दोनों ने फ़ीस जमा की और बाहर आयीं ।

तान्या: प्रिन्सिपल के यहाँ सब ठीक था ना?

रम्या: हाँ सब ठीक ही था। बोला एक क्विकी करते हैं।

तान्या: ये क्या होता है?

रम्या हँसकर: मेरी भोली सहेली जब समय ना हो और चुदाई जल्दी में करनी हो तो उसे क्विकी कहते हैं । इसमें कई बार कपड़े उतारे भी नहीं जाते बस उठाकर काम हो जाता है।

तान्या: ओह तो उससे चुदवा ली? और वो भी जल्दबाज़ी में?

रम्या: हाँ यार पर बड़ा मज़ा आया। मस्त मर्द है साला ।

तान्या चुपचाप सुनती रही पर उसने अपना भेद नहीं खोला। पता नहीं इस लड़की का क्या है कहीं पापा को ही ना बता दे।

फिर उससे बिदा लेकर जब वो अपने घर पहुँची तो वह काफ़ी थक गयी थी। रात को खाना खाकर जल्दी से सो गयी। भय्या तब तक आया ही नहीं था। मम्मी बतायी कि वह दोस्तों के साथ सिनमा देखने गया है। वो सामंत की जीभ के आनंद के बारे में सोचते हुए सो गयी। क़रीब १ बजे उसकी नींद खुली । शायद बिल्ली ने कुछ शोर मचाया था। उसे प्यास सी लगी तो वो किचन में जाकर पानी पी ली। वो वापस आ रही थी तो उसे भय्या के कमरे से रौशनी आती दिखी। वो सोची क्या भय्या अभी तक जाग रहा है?

वह चुपचाप से उसके कमरे के सामने पहुँची और आवाज़ सुनने की कोशिश की। वो शायद किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था। वो चुपचाप जाकर एक खिड़की के सामने आई और एक पल्ले को हल्के से दबाई। पल्ला थोड़ा सा खुला और वह हल्के से परदे को हटाई और अंदर झाँकी तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया। क्योंकि वो ड्रॉइंग रूम में अंधेरे में खड़ी थी इसलिए भय्या को वो नहीं दिखाई दे रही थी। अंदर भय्या लैप्टॉप पर किसी से विडीओ चैट कर रहा था। और वो पूरा नंगा था। बस एक तौलिए को उसने अपनी जाँघों पर रखा था। वहाँ एक तंबू सा बना हुआ था। वह बिस्तर पर बैठा हुआ था।

अब तान्या ने उसकी बातें सुनने की कोशिश की। वो कह रहा था: हाँ बेबी कौन कौन हैं तुम्हारे घर में?

बेबी: मेरी मम्मी और पापा बस। आपके घर में कौन कौन है?

शिवा: मेरे घर में मेरी एक बहन है और मम्मी पापा।

फिर वो काफ़ी देर तक ऐसी ही बातें करते रहे। अब तान्या बोर होकर वहाँ से जाने का सोची तभी भय्या की एक बात उसके कान में पड़ी और वह रुक गयी।

शिवा: अच्छा बेबी अब अपनी जवानी का दीदार तो कराओ यार।

बेबी: अच्छा बस एक मिनट के लिए मैं टॉप उठाकर दिखाती हूँ। मैंने ब्रा तो पहनी ही नहीं है । तान्या को लैप्टॉप का स्क्रीन नहीं दिख रहा था।

अब शायद उसने लैप्टॉप में अपना बदन दिखाया क्योंकि शिवा बोला: उफ़्फ़्फ़्फ क्या चूचियाँ है यार तुम्हारी। मस्त हैं।

बेबी हँसकर: अब आप अपना तौलिया हटाओ। हम भी तो देखें आपका हथियार कैसा है?

अब शिवा ने हँसकर अपना तौलिया हटा दिया। उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त लंड है भय्या का वो सोची। अब शिवा उसे हिलाकर मूठिया रहा था। तान्या तो जैसे मन्त्रमुग्ध होकर भय्या के लंड को देख रही थी।

बेबी: उफ़्फ़्फ़्फ आपका कितना बड़ा है? मेरे पापा से भी बड़ा है।

शिवा: पापा का कब देखा?

बेबी: पापा को कई बार मम्मी के ऊपर देख चुकी हूँ। उसी समय देखा था।

शिवा: कभी पापा ने पकड़ा क्या तुम्हारी चूचियों को?

बेबी: हाँ कई बार। वो तो पागल हैं मेरी चूचियों के लिए। ये इतनी बड़ी इसीलिए तो हो गयीं हैं । पापा ने बहुत मसला है इनको।

शिवा अब लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाकर बोला: क्या पापा ने तुमको चोदा भी है क्या?

बेबी: नहीं अभी तक नहीं। तुम्हारी मम्मी और बहन कैसी है दिखने में?

शिवा: अच्छी हैं ।

बेबी: उनका फ़िगर कैसा है?

तान्या के कान खड़े हो गए। देखें भय्या क्या बोलते हैं?

शिवा अपना लंड हिलाता हुआ बोला: अरे दोनों मस्त माल हैं । मम्मी तो मत पूछो। बड़ी बड़ी चूचियाँ और बड़ी सी चौड़ी सी गाँड़। मेरे सभी दोस्त मम्मी के दीवाने हैं । वही हाल मेरी बहना का भी है। क्या मस्त माल है। मेरे सभी दोस्त कहते हैं कि वो ही उसकी सील तोड़ेंगे। बेचारी सील एक तोड़ने वालों की लाइन लगी है।

बेबी: तुम्हारी इच्छा नहीं होती कि तुम हो सील तोड़ दो अपनी बहना की?

शिवा: यार होती तो है पर जब तक आग दोनों तरफ़ से बराबर ना लगी हो मज़ा नहीं आता।

बेबी: और माँ के बारे में क्या सोचते हो?

शिवा: उफ़्फ़्फ़्फ मत पूछो कई बार माँ के नाम की मूठ्ठ मार चुका हूँ। अब भी देखो मूठिया रहा हूँ। आऽऽऽऽऽऽह देखो मेरा पाऽऽऽऽऽऽऽऽऽनि छूट रहाआऽऽऽऽऽऽऽऽ है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ये कहते हुए वह अपना वीर्य छोड़ने लगा। उसका पूरा हाथ उसके सफ़ेद गाढ़े रस से भर गया था और तान्या बड़े ध्यान से उसकी पिचकारी से रस निकलता हुआ देख रही थी और अपनी पैंटी में हाथ डालकर अपनी बुर मसल रही थी। वह भी भाई के साथ साथ झड़ने लगी।

jaree hai

 
सुबह तान्या की नींद देर से खुली। कोलेज शुरू होने में अभी कुछ दिन बाक़ी थे। ख़ाली दिमाग़ में फिर वही सब घूमने लगा। ये तो पक्का हो गया था कि शिवा भय्या उस पर गंदी नज़र रखते हैं पर मम्मी पर भी उनकी नज़र है ये सोचकर वो हैरान रह गयी। फिर वह सोची कि पापा ही कौन से दूध के धुले हैं । क्या सच में यह सब होता है, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ । वह उठकर बाथरूम में गयी और नहाने के समय अपने बदन को देखकर ख़ुद ही अपनी जवानी पर मुग्ध हो गयी। क्या मस्त गोल मटोल चेहरा है गाल फूले हुए। गोरी गोरी सामान्य साइज़ की एकदम अनार सी सख़्त चूचियाँ और उन पर खड़े हुए निपल्ज़।नीचे सपाट पेट पर चमकती सी गहरी नाभि और पतली कमर से नीचे फिर गहरी घाटी। उसने अपने प्यूबिक एरिया को साफ़ कर रखा था। उसने माँ की बाल निकालने वाली क्रीम का उपयोग किया था। अब वो पीछे होकर अपनी पीठ को देखी और नीचे उठे हुए गोल गोल नितम्ब तो मानो किसी छोटे ख़रबूज़ की तरह दिख रहे थे।

उसे नहाते हुए सामंत सर की जीभ और फिर भय्या के लंड की याद आ गयी और उसके हाथ अपनी चूत में अपने आप ही चले गए और वो अपनी चूत सहलाने लगी। फिर वो अपनी दो ऊँगलियों से अपनी चूत को मज़ा देने लगी। और एक हाथ से बारी बारी से अपनी चूचियाँ दबाने लगी और निपल भी मरोड़ने लगी। फिर वो सीइइइइइइइइ आऽऽऽह्ह्ह करके अपना पानी छोड़ बैठी।

क़रीब आधे घंटे के बाद जब वह स्कर्ट और टॉप में नाश्ते के टेबल पर बैठी नाश्ता कर रही थी तभी शिवा अपने कमरे से बाहर आया और तान्या उसे देखती ही रह गयी। उसने एक टी शर्ट और हाफ़ पैंट पहना हुआ था। स्पोर्ट्स शू में वो बहुत हैन्सम लग रहा था। उसकी जाँघें बालों से भरी बहुत आकर्षक लग रही थीं। और हाफ़ पैंट के सामने का हिस्से का उभार देखकर तान्या को भाई की रात की हरकत याद आ गयी। उसे अपनी चूत में चींटियाँ सी चलती लगने लगीं। शिवा ने भी बहन की टॉप से झाँकते मस्त अनारों को देखा और पास आकर उसके गाल सहलाया और उसके टॉप के अंदर घूरता बोला: वाह बहना आज बड़ी प्यारी लग रही हो।

तान्या के सामने अब उसकी पैंट का उभार बिलकुल उसके पास सट सा गया था। वो भाई की मर्दानी पसीने की गंध से मस्त हो गयी। वो बोली: भय्या आप भी बड़े हॉट लग रहे हो। देखो टेनिस कोर्ट में कोई लड़की आपको फँसा ना ले।

शिवा हँसकर: अरे बहना मुझे तो तेरी जैसी प्यारी लड़की चाहिए। कोई हो तो बताना।

तभी लक्ष्मी किचन से बाहर आयी । उसने एक नायटी पहनी हुई थी जिसमें से उसके बड़े बड़े उभार आधे बाहर दिख रहे थे। वो अपना पसीना पोंछ कर बोली: अरे शिवा नाश्ता लगाऊँ क्या?

शिवा मम्मी को देख कर मस्त हो गया और जाकर उसे गले लगाकर बोला: मम्मी वापस आके खाऊँगा। वैसे मम्मी आप बहुत हॉट लगती हो नायटी में।

लक्ष्मी हँसकर: चल हट बदमाश कहीं का। भला अपनी माँ से कोई ऐसी बात करता है?

अब शिवा और ज़ोर से अपनी माँ से लिपटा और उसके गाल चूम लिया। माँ हंस कर उसके गाल भी चूमी और बोली: अच्छा अब जा और जल्दी वापस आना। वह अपनी माँ को जकड़कर एक हग दिया और हँसता हुआ बाहर चला गया।

तान्या सोची कि अगर भाई की चैट मैंने रात में मैंने नहीं देखी होती तो शायद सोचती कि ये माँ बेटे का सामान्य प्यार है। पर अब तान्या जानती थी कि भय्या तो उसके साथ साथ माँ पर भी गंदी नज़र रखता है।

तभी उसकी सहेली शांता का फ़ोन आया: हाय तान्या , मूवी का प्रोग्राम बनाया है चलोगी क्या?

तान्या ने उससे मूवी का नाम पूछा और बोली: कौन कौन जाएँगे?

शांता: मैं, मेरी जान नदीम और उसका दोस्त अरविंद ।

तान्या उन दोनों को जानती थी क्योंकि स्कूल में सब साथ ही थे। उसने हामी भर दी। थोड़ा देर टी वी देखी और फिर मॉ को बोलकर वह मेट्रो के लिए निकल पड़ी जो कि पास में ही था। वह क़रीब ११ बजे मूवी थिएटर पहुँची तो सामने ही तीनों मिल गए। सब ने हाथ मिलाए और फिर अंदर चले गए। चलते हुए नदीम ने एक मिनट के लिए भी शांता का हाथ नहीं छोड़ा। स्कूल में सब जानते थे कि वो लव बर्ड्ज़ हैं। अंदर एक कोने में उनकी सीट थी। दीवाल की तरफ़ अरविंद बैठा और उसके साथ तान्या ,फिर शांता और उसके बाद नदीम । हाल आधा ख़ाली था। सब बातें करने लगे। फ़िल्म चालू हुई और बातें बंद हो गयीं। थोड़ी देर बाद तान्या का ध्यान शांता की ओर गया और वो चौंक उठी। नदीम का एक हाथ शांता के गले से होकर उसके एक बूब पर था और वो उसे दबा रहा था। फिर उसने हाथ को टॉप के ऊपर से उसके अंदर डाला और शांता की सिसकियाँ निकल गयीं। अचानक तान्या ने देखा कि शांता का हाथ भी नदीम के पैंट पर लंड के ऊपर ही था और वो भी उसे दबा कर मस्त हो रही थी। तान्या की पैंटी में गीलापन आने लगा। उसने अपने एक पैर को दूसरे पर चढ़ा लिया और चूत पर एक सनसनी सी महसूस होने लगी। अरविंद ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था। वह समझ गया कि लोहा अभी गरम है। उसने अपना एक हाथ तान्या की स्कर्ट पर रखा और तान्या की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करने लगा। तान्या ने जैसे ही अरविंद का हाथ अपनी जाँघ पर महसूस किया वो थोड़ा सा चौंकी पर चुप रही। वो देखना चाहती थी की ये कितना आगे तक जाता है। अरविंद जब देखा कि तान्या विरोध नहीं कर रही है तो वह अब स्कर्ट के ऊपर से हाथ खिसका कर नंगे घुटनों तक ले गया और वहाँ सहलाने लगा। फिर उसका हाथ स्कर्ट के अंदर से होता हुआ नंगी जाँघ तक पहुँचा। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त चिकनी और गदराई हुई जाँघ थी। तान्या ने देखा कि वह दूसरे हाथ से अपना लंड सहला रहा था। वो गरम होने लगी। तभी हाल की रोशनी में उसने देखा कि नदीम ने अपना लंड बाहर निकाल लिया था और शांता उसे मूठिया रही थी। उफ़्फ़्फ़्फ कितना मस्त मोटा और लम्बा था उसका हथियार । भय्या से बीस ही होगा। उधर नदीम का हाथ भी शांता की स्कर्ट के अंदर था और साफ़ लग रहा था कि वो वहाँ ऊँगली कर रहा है। अब तान्या भी मस्त होकर सोची कि आज मैं भी थोड़ा मज़ा ले लेती हूँ। ये सोचकर वो पैरों को थोड़ा फैलायी और अब अरविंद मज़े से अपना हाथ अंदर उसको पैंटी के सिरे तक ले गया। तान्या की आँखें मस्ती से बंद हो गयीं और वह उसकी उँगलियों को अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत में अनुभव की। जब वह आँख खोली तो हैरानी से देखी कि अब शांता नदीम के लंड पर झुकी हुई थी और उसका सिर ऊपर नीचे हो रहा था। उफ़्फ़्फ़्फ ये तो उसका लंड चूस रही है। तभी अरविंद ने अपनी दो उँगलियाँ पैंटी के साइड से उसकी चूत में डाल दी और उसकी चिकनी बुर को मूठ्ठी में भर कर मज़े लेने लगा ।

उधर शांता अब ज़ोर से उसका लंड चूस रही थी और नदीम भी उसकी चूचियाँ दबा कर धीरे से आऽऽऽऽह करने लगा। तभी अरविंद ने अपना हाथ उसकी चूत के छेद में फेरा और एक ऊँगली से छेद को कुरेदने सा लगा। अब तान्या की आँख मस्ती से लाल हो चली थी। तभी अरविंद ने तान्या का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रख दिया। तान्या भी जवानी की गरमी से मज़बूर थी । वह अब मस्ती से उसका लंड पैंट के ऊपर से दबाने लगी। उग्ग्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना मस्त लंड है, कितना कड़ा है वो सोची।

तभी शांता गूँ गूँ करने लगी और नदीम जैसे अकड़ने सा लगा और ह्म्म्म्म्म कहकर हल्के से आऽऽहें भरा। अब शांता ने अपना सिर उठाया और एक रुमाल से अपना मुँह साफ़ किया और धीरे से नदीम को कहा: आऽऽह मस्त स्वाद है आपके रस का म्म्म्म्म्म्म । वह चटकारे लेते हुए बोली। नदीम ने उसके होंठ चूमे और कहा: उफ़्फ़्फ बेबी क्या चूसती हो तुम। अब चलो अरविंद के घर चलते हैं और एक दो राउंड चुदाई करते हैं ।

तान्या के कानों में ये बातें पड़ रहीं थी और उधर अरविंद की उँगलियाँ उसकी क्लिट को सहला रही थी। बस क्या था तान्या उईओईईईईई कह कर झड़ने लगी और अरविंद ने मुस्कुरा कर अपनी भीगी उँगलियाँ निकाली और चूसने लगा और बोला: मस्त स्वाद माल है तुम्हारा। चलो अब घर चलो तुमको अपने लंड का पानी पिलाता हूँ।

तान्या ने अपना हाथ उसके पैंट से हटाया और कहा: नहीं अब मैं घर जाऊँगी।

अरविंद और सबने उसको बहुत मनाया पर वह नहीं मानी और फिर तान्या अपने घर और बाक़ी तीनों अरविंद के घर को चले गए

kahani jari rahegi।
 
घर आकर तान्या अपनी जवानी की मस्ती में थी। वो सोची कि आह क्या मस्त मज़ा दिया है अरविंद आज उसे।उफ़्फ़्फ़्फ कितना कड़ा लंड था उसका। रात में देखा हुआ उसे भाई का लंड याद आ गया। क़रीब क़रीब वैसा ही था। वोकपड़े बदल कर ड्रॉइंग रूम में टी वी देख रही थी। मम्मी किचन से बाहर आयी और बोली: बेटी कैसी मूवी थी?

तान्या: बहुत बोर थी। वह क्या बताती कि उन लोगों ने मूवी तो देखी ही नहीं। वह सब तो जवानी की मस्ती में डूबे हुए थे।

लक्ष्मी: ओह चलो खाना लगा दूँ? तुम्हारा भाई भी आ रहा है। अभी उसका फ़ोन आया था।

तान्या: मम्मी उसे आ जाने दो फिर साथ में खाते हैं।

तभी शिवा आया और वो पसीने से भीगा हुआ था। वह बोला: मम्मी मैं नहाकर आता हूँ। फिर खाना खाऊँगा। फिर तान्या को देखकर बोला: बहना भूक़ लगी है क्या

तान्या ने देखा कि वह उसकी स्कर्ट के नीचे की खुली जाँघों को घूर सा रहा था। तान्या की आँख भी भाई के पैंट के सामने के उभार पर पड़ी। उसकी बुर में हल्की सी गुदगुदी हुई। अब भाई माँ के पास जाके बोला: मम्मी मैं पसीने से भीगा हुआ हूँ वरना आपको जनरदस्त हग करता। चलो नहाकर आता हूँ फिर आपको हग करूँगा। वह मुस्कुराता हुआ अपने कमरे की ओर चला गया। अपने कमरे में जाकर वह पूरा नंगा हुआ और शॉवर के नीचे खड़ा होकर अपनी माँ और बहन के बदन के बारे में सोचने लगा और उसका लंड खड़ा हो गया। नहाते हुए वह सोचा कि अभी मूठ्ठ मारना सही नहीं होगा। फिर तय्यार होकर वह एक बरमूडा और टी शर्ट में वापस डाइनिंग टेबल पर आया और बोला: मम्मी भूक़ लगी है।

लक्ष्मी किचन से तान्या को आवाज़ दी: तान्या आ जा थोड़ी मदद कर दे।

पर तान्या तो टी वी देखने में मगन थी। अब शिवा उठा और किचन में जाके लक्ष्मी के पीछे जाके उसके मोटे चूतरों पर अपना लंड दबाकर उसके पीछे से उसके पेट को दोनों हाथों से दबाते हुए बोला: मम्मी मुझे बताओ क्या काम है? आपका ग़ुलाम हाज़िर है।

लक्ष्मी को शिवा का आधा खड़े लंड का अहसास हुआ और वह उसे नज़र अन्दाज़ करते हुए बोली: अच्छा चल छोड़ मुझे। चल प्लेट लगा सबके लिए।

शिवा माँ से अलग हुआ और प्लटें लगाने लगा। फिर सब खाना खाए और इधर उधर की बातें करते रहे।

फिर सब अपने अपने कमरे में चले गए आराम करने।

तान्या अभी कमरे में पहुँची ही थी कि उसका मोबाइल बज उठा। शांता का फ़ोन था वो बोली: हाय शांता सब ठीक है ना? मज़े ले लिए नदीम से ?

शांता हाँ यार पूरे दो राउंड चोदा । मस्त कर दिया। पर अरविंद तुमको बहुत गाली दे रहा था कि तुमने उसे के॰एल॰पी॰डी॰ कर दिया?

तान्या: मतलब? ये क्या होता है?

शांता: अरे इसका मतलब है खड़े लंड पर धोखा। वही तो किया तुमने उसके साथ। बिचारा तुमको चोदने का सपना देख रहा था और तुम उसको प्यासा छोड़ आयी।

तान्या: अब कोई कुछ भी सपना देखेगा तो मैं क्या कर सकती हूँ। अच्छा चल छोड़ और बता आज शाम को क्या कर रही है? मेरे घर आ जा बातें करेंगे।

शांता: ठीक है ६ बजे तक आती हूँ। आज नदीम ने कुछ चुदाई के फ़ोटो भी खींचे थे तुझे दिखाऊँगी ।

फिर उसने फ़ोन रखा और अरविंद के कड़े लंड के बारे में सोचते हुए उसकी आँख लग गयी।

उधर लक्ष्मी लेटी ही सोच रही थी कि शिवा ज़रा ज़्यादा ही चिपकने लगा है आजकल उससे। शायद इस उम्र में यह सबके साथ होता होगा। वैसे भी वो अब जवान हो गया है। चलो जल्दी समझ में आ जाएगा सब उसे। वह यह सोचते हुए अपनी बुर खुजाई । काश आज उसके पति यहाँ होते तो मस्त चुदवाई उनसे। फिर वह उठी और एक ८ इंचि डिल्डो आलमारी से निकाली और उस पर क्रीम लगाकर उसका स्विच चालू की। उसके हाथ में उसका कम्पन उसे मदहोश कर रहा था । उसने अपनी साड़ी उठाई और पैंटी साइड में करके उसे अपनी बुर में धीरे से पेलने लगी। जल्दी ही वो मस्त डिल्डो पूरा उसकी मस्त बुर में समा गया और वो मस्ती में आकर एक हाथ से अपने निपल ऐंठती हुई दूसरे हाथ से डिल्डो को अंदर बाहर करने लगी। अब उसकी सिसकियाँ और आहें गूँजने लगीं।

उधर लक्ष्मी अपने पति को याद करते हुए डिल्डो का मज़ा ले रही थी और इधर शिवा को भी जवानी की मस्ती तंग कर रही थी। उसे याद आया कि उसकी चैट फ़्रेंड उसकी बहन और माँ की सेक्सी फ़ोटो माँग रहा था। वह सोचा कि सोयी हुई माँ काफ़ी सेक्सी दिखेगी। चलकर एक दो फ़ोटो लेता हूँ और फिर उसे अपनी चैट फ़्रेंड को दिखूँगा। उसे पता था कि जब पापा नहीं रहते थे घर पर तो माँ कमरे को बंद नहीं करती थी।

वो दबे पाँव माँ के कमरे के सामने पहुँचा और फिर बुरी तरह से चौंक गया। अंदर के कमरे से आती हुई आवाज़ें ऐसी थी जैसी कोई माँ को चोद रहा है। वो सोचा कि इस समय कौन आ गया माँ को चोदने ? वो दरवाज़े से चिपक कर सुनने लगा और उसे कोई शक नहीं था कि ये सिसकियाँ माँ ही भर रही थी। उसने धीरे से कांपते हुए दरवाजे को हल्के से खोला और झिरी से झाँका कि आख़िर कौन है जो माँ को ऐसे दिन में भरी दोपहर में ही चोद रहा है? अंधेरे में उसने देखा कि माँ अकेली ही है। उसे चैन आया कि मा को कोई चोद नहीं रहा है। अब उसकी आँखें अंधेरे की अभ्यस्त हो गयीं थीं। उसने देखा कि मॉ की साड़ी ऊपर है और उनके हाथ ऊपर नीचे हो रहे हैं । उनकी गोरी मोटी जाँघें बुरी तरह से हिल रहीं थीं और अब उसे विशाल डिल्डो दिखाई दिया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ये मम्मी क्या कर रहीं हैं? वो बुरी तरह से डिल्डो को अपनी बुर में अंदर बाहर कर रही थी। अचानक वो आऽऽऽऽहह उइइइइइइइइ चिल्लाई और झड़ने लगीं। काफ़ी देर तक वो हिलती रहीं और फिर शांत होकर पड़ गयीं। शिवा के लिए ये नयी बात थी। ये वो मम्मी नहीं थी जिसे वो जानता था। ये तो एक काम वासना से भरी एक औरत थी जो झड़कर अपने बिस्तर में नीचे से पूरी नंगी लेटीं हुईं थीं । उसका लौड़ा पूरा खड़ा था और उसका मन हुआ कि जाकर माँ के ऊपर अभी चढ़ जाए और उसे बुरी तरह से चोद ले। पर वो जानता था कि ये सही नहीं होगा। फिर उसे याद आया और वो अपना मोबाइल निकाला और लेटी हुई माँ की फ़ोटो खींचने लगा। उसने कई फ़ोटो ली। माँ के हाथ में अभी भी डिल्डो था। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या माल लग रही थी। फिर वो चुपचाप अपने कमरे में गया और बाथरूम में जाकर माँ की नंगी फ़ोटो देखकर उसने मूठ्ठ मारी और शांत होकर सोने लगा । उसने सोचा कि रात को चैट फ़्रेंड को दिखाऊँगा पर बिना माँ के चेहरे के।

 
शाम को सब चाय पी रहे थे तब शांता आयी। थोड़ी देर सबसे बात करने के बाद तान्या शांता को अपने कमरे में ले गयी। अब माँ बेटा बैठे थे। और शिवा मॉ को घूरे जा रहा था । उसे माँ की सिसकियाँ और डिल्डो का अंदर बाहर होते हुए बुर में जाना किसी मूवी की तरह याद आ रहा था। माँ अभी भी उसी साड़ी में थी।

लक्ष्मी: क्या सोच रहा है? शाम को आज बाहर नहीं जाना?

शिवा: मम्मी आज सोच रहा हूँ कि अपनी नयी गर्ल फ़्रेंड के साथ शाम बिताऊँ।

लक्ष्मी: अच्छा। क्या नाम है उसका? और कहाँ लेकर जाएगा उसे?

शिवा: मम्मी नाम तो बता दूँगा पर कहाँ लेकर जाऊँगा ये अभी तय नहीं है।

लक्ष्मी: ओह तो फ़ोन करके पूछ ले उसे?

शिवा: मम्मी आप बताओ ना अगर आपको कोई बोय्य फ़्रेंड या पापा कहीं घूमने को ले जाने को बोलेंगे तो आप कहाँ जाना चाहोगी?

लक्ष्मी: ह्म्म्म्म्म मैं तो यहाँ से २० किलॉमेटर पर जो झरना है वहीं जाऊँगी। पर तेरे पापा को फ़ुर्सत ही नहीं रहती। फिर हँसकर बोली: और हाँ मेरा कोई बोय्य फ़्रेंड भी नहीं है।

शिवा: तो चलो मम्मी मुझे अपना बोय्य फ़्रेंड समझ लो और चलो अभी चलते हैं झरना देखने।

लक्ष्मी: जा जा अपनी गर्ल फ़्रेंड को ले जा। चल मुझे रात के खाने की तय्यारी करनी है।

शिवा उठकर उसके पास आकर बैठा और बोला: प्लीज़ चलो ना मम्मी । मैं बिलकुल अकेला हूँ आज शाम को। खाना बाहर खा लेंगे और तान्या के लिए भी ले आएँगे।

लक्ष्मी: चल पागल है क्या? मुझे बक्श दे अभी बहुत काम है।

अब वो सोफ़े पर बैठी माँ के दोनों टांगों को पकड़ा और सामने घुटनों पर बैठा और माँ की गोद में सिर रखकर मानो ज़िद सी करने लगा: प्लीज़ मम्मी चलो ना प्लीज़।

लक्ष्मी: ओह बाबा रे ये तो पीछे ही पड़ गया। अच्छा एक काम कर जा तान्या को भी पूछ ले कि वो जाना चाहती है या सहेली से गप्प मारेगी?

शिवा ख़ुश होकर उसके गाल चूमा और उठता हुआ बोला: आप बहुत प्यारी मम्मी हो। मैं अभी तान्या को पूछकर आता हूँ।

उधर शांता जैसे ही तान्या के साथ कमरे में पहुँची , तान्या बोली: तू फ़ोटो दिखाने वाली था ना? चल दिखा।

शांता हँसकर: तो ये बात है । तूने मुझे इसीलिए यहाँ बुलाया है।

तान्या: ज़्यादा भाव मत खा । चल दिखा।

वो दोनों बिस्तर के सामने रखे सोफ़े पर बैठीं और शांता ने अपना मोबाइल ऑन किया और फिर उसने नदीम और अपनी कई फ़ोटो तान्या को दिखाई। कितने ख़ुश थे दोनों इन फ़ोटो में। आख़िर तान्या बोली: अरे वो वाली फ़ोटो कहाँ है जो तुम बोल रहीं थी?

शांता हँसकर: कौन सी वाली?

तान्या: अरे वही वाली जिसमें तुम नदीम के साथ मस्ती कर रही हो।

शांता: अरे इन सभी फ़ोटो में हम दोनों मस्ती ही तो कर रहें हैं ।

तान्या: साऽऽऽऽऽऽली मुझे वो वाली फ़ोटो देखनी है जिसमें तुम दोनों चु— मतलब सब कुछ कर रहे हो।

शांता: देख चुदाई शब्द बोलने में तुझे कोई कष्ट है क्या? जब तक तू साफ़ साफ़ नहीं बोलेगी मैं फ़ोटो नहीं दिखाऊँगी।

उधर शिवा तान्या के कमरे की ओर चला और जैसे ही वो उसके कमरे की खिड़की के पास आया, उसे जो सुनाई दिया वो सन्न रह गया।

तान्या बोल रही थी: अच्छा बाबा चल चुदाई की फ़ोटो दिखा।

शिवा छुपकर उनकी बातें सुनने लगा।

शांता: हाँ अब सही बोली। ले देख ये फ़ोटो जो अरविंद ने खींची है। वो पूरे टाइम हमारी चुदाई देखता रहा और अपना लंड सहलाता रहा और तुमको गाली देता रहा।

तान्या आँख फाड़कर फ़ोटो देख रही थी जिसमें नदीम और शांता पूरे नंगे होकर चुदाई का मज़ा ले रहे थे। शिवा को फ़ोटो तो नहीं दिख रहा था पर तान्या की फूली हुई साँसों के साथ उठती और बैठती चूचियाँ दिखाई दे रही थी। उसका लंड खड़ा हो गया था ये सोचकर कि उसकी बहन चुदाई की फ़ोटो देखकर कितनी उत्तेजित हो रही थी।

 
उधर शांता ने बेशर्मी से तान्या की चूची दबाई और कहा: कैसा लगा ? जब देखने में इतना मज़ा है तो करने में कितना मज़ा आता होगा? सोचा है कभी?

तान्या ने उसका हाथ हटाकर कहा: उफ़्फ़्फ छोड़ मुझे। क्या कर रही है?

शांता: अच्छा सच बता ? नीचे खुजली नहीं हो रही है क्या?

तान्या: चल हट जब देखो उलटी सीधी बोलती रहती है।

शांता: अच्छा अब चलती हूँ। तुझे तो मैं अच्छी नहीं लगती ना।

तान्या उसे रोकते हुए बोली: अरे मैंने ऐसा कब कहा? अच्छा बोल चाय पिएगी क्या? बनाकर लाऊँ?

अब शिवा समझ गया कि हॉट सीन शायद ख़त्म हो गया है। सो वह दरवाज़ा खटखटाया और बोला: तान्या अंदर आ जाऊँ?

तान्या: हाँ भय्या आओ ना।

शिवा अंदर आया और बोला: मैं और मम्मी घूमने जा रहे हैं । खाना बाहर ही खाएँगे। तुम चलोगी?

तान्या: नहीं मैं नहीं जाऊँगी। मेरा खाना यहीं ला देना आते हुए।

शिवा शांता को घूरता हुआ चला गया। वह मन ही मन में ख़ुश था क्योंकि आज उसे माँ के साथ अकेले जाने का अवसर मिल रहा था ।वह लक्ष्मी से बोला: माँ चलो अब आप तय्यार हो जाओ तान्या नहीं जाएगी।

लक्ष्मी हँसकर अपने कमरे में गयी और कपड़े बदलने लगी। जब वो अपनी क़ुर्ती उतारी तो अपने बूब्ज़ को शीशे में देखकर मस्त हो गयी। चालीस के साइज़ के बूब्ज़ उसके भरे बदन का सबसे मादक अंग थे। वह अपनी बग़ल उठाकर अपनी साफ़ काँखें देखी और वहाँ पाउडर लगायी और फिर ब्लाउस पहन कर एक मस्त सेंट भी लगाई। अब वो नाभि के नीचे साड़ी पहनी। हाई हील के सेंडल में उसके मस्त मोटे चूतर और उभर आए थे। जब वह अपने आप को शीशे में देखकर अपनी साड़ी ठीक कर रही थी तब उसकी नज़र अपने मादक रूप पर पड़ी और तभी शिवा अंदर आया और पीछे से अपनी माँ से चिपक गया। वह वैसे ही मॉ के साथ बाहर जाने का सोचकर उत्तेजित था । उसका आधा खड़ा लंड माँ के चूतरों में धँस गया। लक्ष्मी चौंकी और आगे को होकर बोली: हट क्या कर रहा है? अब तू बड़ा हो गया है । मुझसे ऐसे नहीं चिपका कर।

शिवा बेशर्मी से हँसकर: अरे मम्मी जिसकी माँ इतनी सेक्सी हो वो बेटा तो अपनी माँ से चिपकेगा ही MA?

लक्ष्मी हँसती हुई: अच्छा ये बढ़िया अब तुझे सेक्सी लगने लगी। जा कोलेज में ढूँढ के बहुत सेक्सी लड़कियाँ मिल जाएँगी।

शिवा: मम्मी मुझे तो आप ही सबसे सेक्सी लगती हो।

लक्ष्मी: अच्छा चल अब बकवास बंद कर। बाहर जाना है या नहीं?

शिवा: हाँ हाँ जाना है। चलिए । दोनों बाहर आए तो वहाँ तान्या और शांता चाय पी रहे थे।

तान्या शांता के साथ नीचे ड्रॉइंग रूम में आयी थी और चाय बनाकर लाई थी।

वो दोनों उसे बाई करके चले गए। उनके जाने के बाद शांता फिर से अपना मोबाइल खोली और बोली: ये देख कल हमारी चुदाई के बाद अरविंद ने मूठ्ठ मारी थी तब नदीम ने उसकी फ़ोटो खींची थीं। तान्या ने जैसे मोबाइल में अरविंद का मोटा कड़ा लंड देखा और फिर उसमें से वैसे ही सफ़ेद रस निकलते देखा जैसा कल भय्या का निकला था वह पूरी गीली हो गयी और अपनी बुर को स्कर्ट के ऊपर से खुजा बैठी। शांता उसे देखकर बोली: अरे ख़ुद खुजाने में वो मज़ा कहाँ जो कोई और खुजाए तो ज़बरदस्त मज़ा आता है।

तान्या: मतलब?

शांता: तू चाहे तो मैं तेरी बुर खुजा देती हूँ। तुझे बहुत मज़ा आएगा। वैसे बुर को जीभ से चटवाने का भी अलग ही मज़ा है।

तान्या क्या बोलती । वो तो ये मज़ा ले चुकी थी सामंत सर से । अचानक शांता ने उसकी स्कर्ट ऊँची की और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को मूठ्ठी में भर लिया। शांता: आऽऽऽह तू तो पूरी गीली हो रही है।

तान्या: आऽऽऽऽह क्या कर रही हो? छोड़ो प्लीज़ उइइइइइइइ।

मित्रों: इधर तान्या शांता के साथ मस्ती में डूब रही थी।

उधर लक्ष्मी अपने बेटे के साथ बाइक के पीछे बैठी थी और शिवा उछालकर गाड़ी ऐसे चला रहा था कि उसकी मम्मी उससे बार बार चिपक जाती थी डर कर। और बम्बई में हरी याने तान्या का पापा अपने होटेल के कमरे में एक १९ साल की लड़की को गोद में बिठाकर उसकी चूचियाँ मसलते हुए बोल रहा था: आऽऽऽऽऽह तान्या बेटा क्या मस्त बड़ी हो गयीं हैं तुम्हारी चूचियाँ। और वो लड़की भी पैसे लेकर बोल रही थी: आऽऽऽऽह पापा और दबाओ अपनी बेटी की चूचियाँ।

 
जैसे ही तान्या ने चाय ख़त्म की, अचानक शांता उस पर टूट सी पड़ी। तान्या एक मिनट के लिए तो हतप्रभ सी रह गयी। फिर अचानक उसे महसूस हुआ कि शांता उसके ऊपर आधी चढ़ी हुई है और उसके होंठ चूम रही है। साथ ही उसके दोनों दूध भी दबा रही है। एक लड़की के द्वारा ऐसा व्यवहार तान्या के लिए बिलकुल नया था। वह थोड़ा सा विरोध करी पर बाद में उसे मज़ा आने लगा और वह चुपचाप मज़ा लेने लगी। अब शांता ने अपनी जीभ उसके मुँह में घुसेड़ दी थी और वह उसकी जीभ को रगड़ रही थी। उग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मज़ा आ रहा है : तान्या सोची। तभी शांता ने उसकी स्कर्ट उठायी और उसकी पैंटी के साइड से उँगलियाँ डालकर उसकी बुर को सहलाने लगी। तान्या की सिसकियाँ निकल गयीं। उसे मोबाइल में देखे हुए ऐसे कई क्लिप याद आए जिसमें लड़कियाँ एक दूसरे से मज़ा लेतीं थीं।

अब तान्या बोली: आऽऽऽह क्या कर रही है तू? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मार डालेगी क्या?

शांता ने उसका टॉप उठा दिया था और उसकी ब्रा भी ऊपर कर दी थी। अब वो उसकी मस्त अनार सी चूचियों को दबाकर चूसने लगी। तान्या मज़े से आँखें बंद कर ली और पूरा मज़ा लेते हुए ख़ुद अपने हाथ शांता की बड़ी बड़ी चूचियों पर रखी और दबाने लगी। शांता मुस्कुराई और अब वो सोफ़े के नीचे आकर तान्या की टांगों के बीच बैठ गयी। उसने स्कर्ट उठाया और तान्या की पैंटी को सहलायी और फिर पैंटी को नीचे खींचने लगी। तान्या ने अपनी गाँड़ उठाकर उसकी मदद की । अब तान्या की दोनों जाँघों को फैलाकर शांता ने अपने कंधों पर रखा और अपना मुँह उसके बीच में घुसा दिया । अब वो उसकी बुर को चूसते हुए जीभ से चाटने लगी। तान्या मस्ती से भर कर उइइइइइइइ चिल्लाई और अपनी गाँड़ उछाली और उसके सिर को अपनी बुर में दबाने लगी। उधर शांता पूरी शिद्दत से जीभ से उसकी बुर चाटने में लगी हुई थी। तान्या की सिसकियाँ गूँजने लगीं। फिर जब वो उसकी क्लिट को जीभ से छेड़ने लगी। तान्या अपने आप को नहीं रोक पायी और उसके मुँह में अपना पानी छोड़ने लगी जिसे शांता ने मज़े से पी लिया।

अब शांता ने अपना मुँह उठाया और अपनी जीभ फिराकर मुँह में लगा पानी पी लिया। वो बोली: मज़ा आया मेरी गुड़िया?

तान्या क्या कहती! कल सामंत और आज शांता दोनों ने उसे किस सुख की ऊँचाइयों पर पहुँचाया है ये तो बस वही जानती थी। उफ़्फ़्फ कितना सुख है इस काम में: वह सोची।

शांता: अरे सोच जब चूत की चुसाई में इतना मज़ा है तो चुदाई में कितना मज़ा आता होगा?

तान्या: उफ़्फ़्फ़्फ आज तुझे हो क्या गया था? ये करने की क्या ज़रूरत थी?

शांता: पता नहीं बस ऐसा लगा कि तुझे जवानी के मज़े के प्रैक्टिकल कराऊँ ।

फिर वह अपनी बुर को स्कर्ट के ऊपर से खुजा कर बोली: चूसेगी क्या?मेरी भी खुजा रही है।

तान्या हँसकर: दिन में चुदवाने के बाद अभी भी खुजा रही है?

शांता: अरे इसकी प्यास का क्या कहूँ? बोल ना चूसेगी?

तान्या थोड़ा सा कन्फ़्यूज़्ड हो गयी और बोली: मैंने कभी ये किया नहीं है।

शांता: तो क्या हुआ ? सबका कभी ना कभी पहली बार होता है ना। प्लीज़ चूस दे ना । ये कहते हुए वो सोफ़े पर बैठी और अपनी पैंटी उतार दी और फिर अपनी टाँगे मोड़कर सोफ़े में रखी और फैला दी। तान्या की आँखें उसकी गुलाबी बुर से चिपक गयीं । उफ़्फ़्फ क्या मस्त कचौरी सी फूली हुई बुर थी और बीच की फाँकों से गुलाबी माँस बाहर झाँक रहा था ।तान्या जैसे किसी मैजिक स्पेल में होकर उठी और उसकी खुली हुई जाँघों के बीच आकर ज़मीन में बैठी और अपना मुँह उसकी बुर पर रख दी। अपने आप ही वह सब सीख गयी और उसकी बुर को चूसने लगी। फिर उसने दोनों हाथों से उसकी फाँकों को फैलाया और अब जीभ से उसकी बुर को मानो चोदने लगी। अब शांता की आऽऽऽऽहह निकलने लगी। वो तान्या के सिर को अपनी बुर में दबा कर मज़े का अहसास देने लगी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या सुख मिल रहा था तान्या सोची। क्या मस्त गंध है इसकी बुर की और उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितनी नरम चूत है। अब शांता अपनी गाँड़ उछालकर चूसवा रही थी। जल्दी ही वह बड़बड़ाने लगी: उइइइइइइ चूऊऊऊउसो मेरी जाऽऽऽऽऽऽऽऽन । आऽऽऽऽऽह मैं गयीइइइइइइइइइ।

अब वह झड़कर सुस्त पड़ गयी। तान्या मस्ती से उसका पानी पी गयी। फिर उठकर वह बाथरूम जाकर अपना मुँह धोयी और मूतने लगी।

वह जब बाहर आयी तो देखी की शांता ने अपने कपड़े ठीक कर लिए थे। वो भी बाथरूम से फ़्रेश होकर आयी और फिर थोड़ी देर बात करके अपने घर चली गयी।

उसके जाने के बस तान्या के मन में आया कि भाई का लैप्टॉप चेक किया जाए। जब वो खोली तो पास्वर्ड ना होने के कारण वह उसे चालू नहीं कर पाई। वो सोची कि भय्या क्या पास्वर्ड रख सकता है। थोड़ा सोचकर वो कई पास्वर्ड ट्राई की पर कोई नहीं काम किया। फिर वह सोची कि भाई आजकल माँ के पीछे पड़ा है हो सकता है उसने माँ के नाम पर रखा हो? वो लक्ष्मी टाइप की पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। फिर उसे याद आया कि आजकल वो सेक्सी मॉम शब्द का उपयोग करता है । उस लड़की के साथ चैट में भी वह उनको सेक्सी मॉम ही कह रहा था। उसने sexymom। टाइप किया और लो लैप्टॉप open हो गया। अब वो जाकर फ़ोटो ढूँढी और उसे जो मिला वो उसे सन्न कर गया। उसके मम्मी की नीचे से नंगी फ़ोटो थी और वो डिल्डो से मज़े ले रहीं थीं। उसकी आँखें फैल गयीं। ये क्या हो रहा है? क्या मम्मी ये भी कर सकती है? और भय्या को ये फ़ोटो कैसे मिले? उसका सिर घूमने लगा। फिर वो ध्यान से देखी कि फ़ोटो मम्मी के कमरे ही की थी। इसका मतलब है कि डिल्डो मम्मी के कमरे में ही है। वो उठी और लैप्टॉप को बंद की और मम्मी के कमरे में गयी। क़रीब दस मिनट में ही आलमारी में कपड़ों के नीचे छिपाकर रखा डिल्डो उसके हाथ में था। उफ़्फ़्फ़्फ कितना बड़ा था और उसने पहली बार कुछ ऐसा पकड़ा था। स्विच ओन करते ही वो वाइब्रेट करने लगा। आऽऽऽऽऽहहह उसके हाथ में कितनी गुदगुदी हो रही थी ह्म्म्म्म्म्म के आवाज़ के साथ। वह उत्तेजित हो गयी। फिर वो मम्मी के बिस्तर पर बैठी और अपनी पैंटी उतारी और वाइब्रेटर को अपनी बुर पर रखी और स्विच आन करी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या फीलिंग्स थी । अब वो उसे अंदर डालने की कोशिश की। कुँवारी चूत में ८ इंचि मोटा डिल्डो भला कैसे जाता। ज़रा सा दर्द होता तो वो उसे बाहर खींच लेती थी। फिर अचानक वो मोटू उसकी क्लिट को छू गया और वह मज़े से उछल पड़ी। जल्दी ही वह अपनी क्लिट पर उसे रखकर वायब्रेशन ka मज़ा लेने लगी और सिर्फ़ पाँच मिनट में ही उईईईईईई माँआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर पानी छोड़ने लगी। अब वह डिल्डो को साफ़ की और वापस वहीं रख दी। फिर बाहर आकर टीवी देखने लगी।

उधर शिवा अपनी मम्मी को बाइक पर बिठाकर शहर के बाहर झरने की तरफ़ जा रहा था। लक्ष्मी बेटे के कंधे को पकड़ी थी और एक ही तरफ़ पाँव करके बैठी थी साड़ी जो पहनी हुई थी।

उधर शिवा और लक्ष्मी बाइक से शहर के बाहर झरने की ओर जा रहे थे। लक्ष्मी एक ही तरफ़ पाँव करके बैठी थी उसने साड़ी जो पहनी थी। पर उसका हाथ शिवा के कंधे पर था। थोड़ी दूर जाकर शिवा बोला: मम्मी आप मेरे पेट पर हाथ रखो ना वरना गिर सकती हो आगे रास्ता थोड़ा कच्चा सा है । लक्ष्मी ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा और अब वो उससे सट सी गयी थी। जैसे ही रास्ता ख़राब हुआ उसकी एक चूची बार बार गाड़ी के उछलने से शिवा की पीठ पर टकराने लगी।

शिवा शरारत से: मम्मी आप मुझे मार क्यों रही हो?

लक्ष्मी: मैं कहाँ मार रही हूँ?

शिवा:: वो आपका एक दूध मुझे बार बार पीठ पर मार रहा है ना।

लक्ष्मी झेंप कर: चल हट बदमाश कहीं का।

शीवा: मम्मी पर आप मारते रहो बहुत अच्छा लग रहा है।

लक्षमी ने एक हाथ मारा उसके कंधे पर और बोली: चुप कर बदमाश।

शीवा बेशर्मी से हँसकर अपने पेट पर रखा अपनी माँ के हाथ को एक हाथ से सहलाने लगा।

लक्ष्मी: क्या एक हाथ से गाड़ी चलाएगा?

शीवा उसके हाथ को सहलाता हुआ: मम्मी आपके साथ तो मैं दोनों हाथ छोड़कर भी चला सकता हूँ।

लक्ष्मी अब चुप हो गयी। शिवा का लंड खड़ा हो चुका था और वह चाहता था कि किसी तरह से माँ का हाथ वहाँ लग जाए। उसने अब दोनों हाथ से गाड़ी चलानी शुरू की और एक बार ज़ोर से ब्रेक लगाई और एकदम से माँ का हाथ उसके लंड से जा टकराया।

 
Back
Top