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क्या वह बेवफ़ा थी?

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सब बातें करते हुए नाश्ता करने लगे। तान्या और हरी अग़ल बग़ल बैठे थे और शिवा और लक्ष्मी साथ सामने बैठे थे।

हरी: शिवा आज का kya प्रोग्राम है बेटा?

शिवा: पापा आज मम्मी के साथ अभी मार्केट जाऊँगा उनको सब्ज़ी के थैले उठाने के लिए एक मज़दूर चाहिए।

इस पर सब हँसने लगे ।

हरी: और तान्या बेटी तुम्हारा क्या प्रोग्राम है? वह उसकी जाँघ को स्कर्ट के ऊपर से सहलाते हुए कहा।

तान्या: पापा मैं अपनी सहेली के साथ मॉल जाऊँगी। वह झूठ बोल रही थी क्योंकि वह आज पापा के साथ लंच करने वाली थी।

अब नाश्ते के बाद सब उठे और हरी तय्यार होकर ऑफ़िस के लिए निकाला । उधर शिवा भी लक्ष्मी के साथ सब्ज़ी लेने चला गया। तान्या अकेले घर में थी और वह अब सीधे मम्मी के कमरे में जाकर डिल्डो निकाली और अब वो उसे लेकर अपने कमरे में गयी। वह जानती थी कि उसकी कुँवारी बुर में इतना बड़ा डिल्डो घुसेड़ने में काफ़ी दर्द होगा। पर उसे एक सेक्स क्लिप याद थी जो कि उसने एक सहेली के मोबाइल पर देखी थी। उसमें वो अपनी क्लिट में डिल्डो रगड़कर मज़ा लेती है। वह भी शायद कुछ ऐसा ही करेगी।

उधर शिवा ने अपने दोस्त शशि को मेसिज किया: आधा घंटे में सब्ज़ी मंडी आ जाओ। आज मम्मी बहुत सेक्सी साड़ी में है। मज़ा ले लेना।

शशि: आऽऽह सच में? क्या वैसे ही दिख रही है जैसी मेरी मम्मी उस दिन तुझे घर में दिखाई थी।

शिवा: हाँ वैसे ही बल्कि उससे भी ज़्यादा सेक्सी।

शशि: ठीक है मैं आता हूँ।

असल में शशि और शिवा दोनों खुलकर एक दूसरे की मम्मी को भांपते थे। वो उनके बारे में अश्लील बातें भी करते थे। पिछले दिनों शशि ने उसको अपनी मम्मी की सेक्सी फ़ोटो दिखाई थीं जो उसने चुपचाप खींची थीं । और एक बार जब वो किसी पार्टी में जाने के लिए तय्यार हुई थीं तो वह उसे अपने घर बुलाकर अपनी मम्मी का वो अनोखा रूप भी दिखाया था। जिसे देखकर वो दोनों उस दिन साथ में मूठ्ठ भी मारे थे।

शिवा मम्मी के साथ बाहर आया। वो बोला: मम्मी इस साड़ी में आप बहुत सेक्सी लग रहे हो।

लक्ष्मी: कोई अपनी मम्मी को सेक्सी कहता है क्या भला?

शिवा: मम्मी सच में यह साड़ी और बिना स्लीव का ब्लाउस आपको बहुत सूट कर रहा है। वो उसकी ब्लाउस से झाँक रहे क्लीवेज़ को देखता हुआ बोला। लक्ष्मी ने भी पल्लू ठीक नहीं किया और उसे अपनी आधी चूचियों का दर्शन करने दिया।

शिवा: मम्मी बाज़ार तो दूर है ना? एक रिक्शा कर लें?

लक्ष्मी: ठीक है कर लो।

शिवा ने रिक्शा बुलाया और लक्ष्मी को बैठने का इशारा किया। जब वो चढ़ रही थी तो नीचे खड़े शिवा को उसकी मस्त मोटी गाँड़ का जो नज़ारा मिला उसने उसके लंड को हिला दिया। उफ़्फ़्फ साड़ी के साइड से झाँकते बड़े बड़े चूचे और मोटी मदमस्त गाँड़ किसी को भी दीवाना बना सकती थी। अचानक शिवा की निगाह रिक्शावाले पर पड़ी तो वह भी उसकी तरह उस मस्त गदराई हुई भरी पूरी औरत के बदन को घूर रहा था और अपने पाजामा के ऊपर से अपना लंड दबा रहा था। शिवा को पता नहीं क्यों ये सब ख़राब नहीं लगा बल्कि वह और उत्तेजित हो उठा।

उधर तान्या अपने कमरे में आकर पूरी नंगी हुई और डिल्डो हाथ में लेकर बिस्तर पर लेट गयी। अब वह अपनी चूचियों को और निपल्ज़ को दबाके मस्त होने लगी। फिर वह अपनी चूत के ऊपर डिल्डो को सहलाई और फिर आह करके उसकी बैटरी को ऑन किया और फिर उसके वायब्रेशन को महसूस करके मज़े से भर गयी। अब वो उसकी अपनी कुँवारी बुर के ऊपर फिराइ और फिर उसे क्लिट पर लेज़ाकर उसकी वायब्रेशन को अहसास करके खुल कर अकेले घर में चिल्लाई: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽऽपा और झंडने लगी। अचानक उसे अहसास हुआ कि वो अपने पापा का नाम ली थी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या सच में वह ख़ुद भी पापा से चूदना चाहती है।

आगे क्या होगा? — अगले अप्डेट में——

 
उधर तान्या अपने कमरे में आकर पूरी नंगी हुई और डिल्डो हाथ में लेकर बिस्तर पर लेट गयी। अब वह अपनी चूचियों को और निपल्ज़ को दबाके मस्त होने लगी। फिर वह अपनी चूत के ऊपर डिल्डो को सहलाई और फिर आह करके उसकी बैटरी को ऑन किया और फिर उसके वायब्रेशन को महसूस करके मज़े से भर गयी। अब वो उसकी अपनी कुँवारी बुर के ऊपर फिराइ और फिर उसे क्लिट पर लेज़ाकर उसकी वायब्रेशन को अहसास करके खुल कर अकेले घर में चिल्लाई: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽऽपा और झंडने लगी। अचानक उसे अहसास हुआ कि वो अपने पापा का नाम ली थी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या सच में वह ख़ुद भी पापा से चूदना चाहती है।

जैसे ही लक्ष्मी रिक्शे पर बैठी उसकी मस्त गाँड़ देखते हुए शिवा भी उसकी बग़ल में उससे चिपक कर बैठ गया। शिवा को मम्मी की जाँघों से अपनी जाँघे सटाना मस्त लग रहा था। शिवा फुसफुसाकर : मम्मी रिक्शे वाला भी आपकी फ़िगर को घूर रहा था। आज आप सही में बहुत सेक्सी दिख रही हो।

लक्ष्मी ने उसके जाँघ पर एक चपत लगाई और फुसफुसाई: मम्मी से ऐसे बात करते हैं क्या? कमीना रिक्शा वाला।

शिवा: मम्मी आप हो इतनी सेक्सी कोई भी पागल हो जाए।

लक्ष्मी: चुप कर।

शिवा लक्ष्मी की जाँघ की चिकोटि काटा और बोला: ठीक है मेरी सेक्सी मम्मी अब चुप हो जाता हूँ।

रिक्शा वाला उनको सब्ज़ी मार्केट के सामने उतारा। इस बार शिवा ने देखा कि वो पूरी बेशर्मी से मम्मी की गाँड़ को घूर रहा था जब वो नीचे आयी। लक्ष्मी ने पीछे हाथ डालकर साड़ी का आँचल और गाँड़ के पास से सिलवटों को सही किया। फिर उसे पैसे देकर वो चल पड़े। सबसे पहले लक्ष्मी आलू प्याज की दुकान पर गयी। शायद वो लक्ष्मी को पहचानता था। उसने लूँगी पहनी थी। और लूँगी समेट कर ऊपर को चढ़ी हुई थी जिससे उसकी बालों से भरी काली जाँघें साफ़ दिखाई दे रही थी। वो ख़िंसें निपोर कर बोला: आइए भाभी जी इस बार बहुत दिन बाद आयीं । बहुत अच्छे बड़े बड़े आलू आए हैं निकाल कर दिखाऊँ क्या? यह कहकर वो अपने आंडों को लूँगी के ऊपर से दबाया। शिवा लक्ष्मी से हट कर थोड़ा बग़ल में खड़ा था और इसलिए उसे शायद लगा कि वो लक्ष्मी के साथ नहीं है। लक्ष्मी जानती थी कि ये साला हरामी हमेशा ऐसा करता है। और अंदर ही अंदर वह भी थोड़ा इस कमीने की बयानबाज़ी का मज़ा ले लेती थी पर आज बेटा साथ था ।

लक्ष्मी उसे आँख दिखाई और बोली: हाँ दो किलो दे दो।

सब्ज़ी वाला समझ नहीं पाया और मुस्कुरा कर अपने आंड सहलाकर बोला: आप लोगी या मैं निकालूँ?

लक्ष्मी उसकी बात को अनसुना करके आलू छाँटने लगी। झुक कर ऐसा करने में उसकी एक मोटी चूची पल्लू से बाहर आकर शिवा और सब्जीवाले का मुँह चिढ़ाने लगी।

सब्जीवाला उसे घूरकर धीरे से बोला: भाभी आज आपका ब्लाउस बहुत सुंदर दिख रहा है।

लक्ष्मी का ध्यान अपनी चूची पर गया तो वो झट से उसे पल्लू ठीक कर ली। उसने सब्जीवाले को समझाने के लिए कहा: शिवा बेटा तुम भी थोड़ा मदद करो ना। सब्जीवाला समझ गया कि शिवा उसके साथ है। फिर उसने कोई बदतमीज़ी नहीं की। पर शिवा का मज़ा ख़राब हो गया। वो बोला: मम्मी आप मुझे बताओ पसारीं से क्या लाना है आप सब्ज़ी लो तब तक मैं ले आता हूँ बाक़ी का राशन।

लक्ष्मी ने उसे लिस्ट और पैसे दे दिए। शिवा अब वहाँ से चला गया। तभी उसके दोस्त शशि का फ़ोन आया और वो उसे एक कोने में मिला और बोला: यार जल्दी कर । वो जो लाल साड़ी में वहाँ आलू प्याज़ ले रही है वो मम्मी है। तू जा और उनके आसपास मँडरा और बाद में क्या क्या हुआ बताना।

शशि मुस्कुरा कर ठीक है बोलकर लक्ष्मी के आसपास आकर मानो सब्ज़ियाँ चेक करने लगा। शिवा राशन की दुकान की ओर चल पड़ा।

शशि ने देखा कि अब लक्ष्मी प्याज़ ले चुकी थी। अब वो बैगन पसंद कर रहीं थीं। सब्जीवाला अपने लूँगी के ऊपर से लंड दबाकर: भाभी आपको तो मोटे बैगन ही पसंद होंगे ना? मेरा काफ़ी मोटा है।

लक्ष्मी सब कुछ समझकर अनजान बनकर : हाँ हाँ मैं मोटे ही तो पसंद कर रही हूँ।

सब्जीवाला: भाभी आप हो इतनी मस्त पतले बैगन में आपका काम नहीं बनेगा। ही ही ।

लक्ष्मी ने उसकी बात पर मानो ध्यान नहीं दिया और बोली: चलो एक लौकी दे दो। और अब बताओ कितना पैसा हुआ।

शशि सब देख रहा था। तभी सब्जीवाला: भाभी आपसे पैसे लेना बुरा लगता है। एक बात बोलूँ आप एक बार ये पीछे बनी कोठरी में आ जाओ दस मिनट के लिए सच कहता हूँ आपका ग़ुलाम बन जाऊँगा।

लक्ष्मी झूठा ग़ुस्सा दिखाकर: मैं ऐसी वैसी औरत नहीं हूँ । चलो पैसा लो । थोड़ा सा हँस बोल लिया तो यहाँ तक पहुँच गए। और वैसे भी क्या तुम सिर्फ़ दस मिनट ही चलते हो? ही ही ।

सब्जीवाला अब अपने लूँगी में लंड दबाकर बोला: भाभी एक बार मौक़ा तो दो सच कहता हूँ ख़ुश कर दूँगा।

लक्ष्मी: मैं शादी शुदा हूँ। वैसे बैगन अच्छा है तुम्हारा। वो उसकी ओर आँख मारकर बोली और पैसे देकर आगे फल वाले के पास पहुँची। शशि भी उसके पीछे पीछे था। उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त गाँड़ है आंटी की। ये तो मेरी मम्मी से भी ज़्यादा गोल गोल है। उसका लंड अकड़ने लगा था।

लक्ष्मी: भाई सेब कैसे दिए?

फल वाला: भाभी आपसे पैसे कौन माँगता है। वो पल्लू से बाहर आए उसकी एक चूचि को घूरता हुआ बोला: वैसे भी आपके ख़रबूज़ मस्त हैं ।

लक्ष्मी मुस्कुरा कर अपनी छाती को देखी और बोली: अच्छा चलो ख़रबूज़ ही दिखाओ।

फलवाला: आपको ख़रबूज़ की क्या ज़रूरत है? आप तो दो दो लेकर घूमती हो।

लक्ष्मी: चल बकवास बंद कर और अच्छे केले दे दे।

फल वाला: ये लो लम्बे मोटे केले । आपको तो ऐसे ही पसंद हैं ना? वो गंदी मुस्कान देकर बोला।

लक्ष्मी: हाँ मुझे ऐसे ही पसंद हैं ।

फल वाला: वैसे बड़े बड़े तरबूज़ भी आएँ हैं । वैसे आपको क्या ज़रूरत है आपके ख़ुद ही इतने बड़े बड़े हैं । वो उसके पिछाड़ी को घूरकर बोला। लक्ष्मी बोली: हाँ मुझे नहीं चाहिए। फिर वह पैसे देकर निकल कर और भी सब्ज़ियाँ ली और हर जगह लोग उससे मज़ाक़ करके मज़ा लिए। ये शशि के लिए बड़ी हैरानी की बात थी।

एक घरेलू महिला से कैसे ये लोग इस तरह के मज़ाक़ कर सकते हैं ? जब तक इसकी उसमें सहमति ना हो? वो सोचा। उसने भरपूर निगाह डाली अपनी दोस्त की माँ पर और लंड को दाबकर सोचा: सच में मस्त माल है। उसकी मम्मी से भी बीस ही होगी।

उधर तान्या अब स्कर्ट और टॉप में घर से बाहर निकली । उसके पापा ने उसे पास ही के एक चौक में बुलाया था। जब वह वहाँ पहुँची तो अचानक से हरी की कार आयी और वो दरवाज़ा खोलकर अंदर बैठी। हरी ने देखा कि जब वो अंदर आइ तो उसकी स्कर्ट उसके जाँघ पर चढ़ गयी थी और उसकी पैंटी जो सफ़ेद रंग की थी उसे दिखाई दे गयी थी। उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त माल हो गयी है उसकी बेटी : वो सोचा। उसके पैंट में लंड अकड़ने लगा। वह उसकी नंगी जाँघ सहला कर बोला: बेटी तो अपनी गिफ़्ट के लिए रेडी हो?

तान्या: पापा बर्थ्डे गिफ़्ट इतनी देरी से क्यूँ?

हरी उसकी जाँघ सहलाता हुआ और उसके टॉप में से बाहर झाँकती हुई चूचियों को घूरकर: बेटी ये सिर्फ़ बर्थ्डे का गिफ़्ट नहीं है। यह असल में तुम्हारे जवान होने की ख़ुशी में भी है।

वह चौक कर हरी को देखी तो वहाँ उसे सिर्फ़ वासना ही नज़र आयी। उसने देखा कि हरी के पैंट में बाँयी जाँघ के ऊपर उसका लंड तना हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था और उसने भी उसे छिपाने की कोई कोशिश नहीं की। पापा का लंड देखकर तान्या की पैंटी भी गीली होने लगी। वो सोच रही थी कि पता नहीं आज क्या होने वाला है??

 
हरी ने कार हुंडई के कार शो रूम में रोकी। तान्या हैरानी से पापा को देखकर बोली: यहाँ क्या काम है पापा?

हरी उसकी चिकनी जाँघ सहलाया और बोला: बेटी आओ उतरो तो।

तान्या उतरी और हरी भी उसके पास आया। तान्या सब तरफ़ घूमकर शो रूम देख रही थी। उसकी पीठ अब हरी के सामने थी। वह उसकी स्कर्ट से चिपकी हुई गोल गाँड़ देखकर सोचा कि सच में लौंडिया मस्त जवान हो गयी है। उसकी पीठ का काफ़ी बड़ा हिस्सा टॉप से नंगा था। पतली गरदन और पतली कमर उसके फ़िग्यर को और सेक्सी बना रहे थे। वो पलटी और बोली: पापा बताओ ना हम यहाँ क्यों आयें हैं ?

हरी उसकी बाँह सहलाकर : कार के शो रूम में हम समोसा तो नहीं ले सकते। कार ही ले सकते हैं ।

तान्या: लेकिन आपके पास तो नयी कार है।

हरी उसकी जवान चूचियों को घूरते हुए बोला:लेकिन मेरी प्यारी सी जवान हो चली गुड़िया के पास तो कार नहीं है ना। इस बार जो उसने उसकी बाँह सहलाई तो जान बूझकर थोड़ा सा चूची को भी छू लिया।

तान्या ख़ुशी और हैरानी से उछल पड़ी और उससे लिपट गयी और बोली: सच पापा आप मेरे लिए कार ले रहे हो? आप बहुत अच्छे पापा हो। आइ लव यू । यह कहते हुए उसने हरी का गाल चूम लिया।

हरी भी उसे अपने से चिपका कर उसके ताज़े जवान बदन को महसूस करते हुए उसकी कमर सहलाया और हल्के से हाथ को उसके चूतडों के ऊपर के उभार तक ले जाकर मस्ती से भर कर बोला: मैंने कहा था ना कि अपनी बेटी के जवान होने की और उसके बर्थ्डे की ख़ुशी में मैं गिफ़्ट दूँगा।

फिर वह उसे लपेटे हुए ही मैनेजर को बोला: लाओ भाई जो कार हमने अपनी रानी बेटी के लिए पसंद की है दिखाओ।

मैनेजर दोनों को एक आइ टेन कार के पास ले गया और उसे देखकर तान्या चिल्लाई: वाऽऽहह पापा आपने मेरी मनपसंद का महरून रंग ही चुना।

हरी उसकी नंगी कमर को सहलाकर बोला: बेटी अगर रंग पसंद नहीं हो तो दूसरी कार भी रेडी कर देंगे।

तान्या पापा से चिपक कर: नहीं पापा मुझे तो यही रंग चाहिए। अब तान्या की एक चूची उसकी पसली में चुभ रही थी। वो झुका और अपनी बेटी की अधनंगी चूचियाँ देख कर उसके गाल को चूमा और बोला: बेटी बधाई हो।

वो भी ख़ुश होकर उसके बाँह को चुमी और बोली: थैंक यू पापा। मेरे स्वीट पापा।

हरी ने मौक़े का फ़ायदा उठाया और आसपास कोई नहीं देखकर उसके चूतड़ को हल्के से सहलाकर बोला: पर बेटी रिटर्न गिफ़्ट तो दोगी ना?

तान्या ख़ुशी से: हाँ पापा जो चाहिए ले लेना।

ये सुन कर हरी का लंड तन गया। उफ़्फ़्फ ये लड़की क्या कह गयी जो चाहे ले लेना। हरी सोचा : मुझे तो तेरी कुँवारी फुद्दी चाहिए बेटी। और वह अपना लंड दबा लिया।

• उधर लक्ष्मी की सब्ज़ी की ख़रीददारी हो गयी थी। वह राशन वाले की दुकान में पहुँची तो शिवा सामान ले चुका था। उसने लक्ष्मी को देखा तो बोला: ये बिल हुआ है मम्मी।

दुकानदार : अरे आपका बेटा है ये क्या?

लक्ष्मी: हाँ मेरा बेटा है।

दुकानदार लक्ष्मी की चूचियों को देखते हुए बोला: आप तो बहुत छोटी दिखती हैं ।भाभी जी आपकी उम्र तो ऐसी लगती नहीं। उसने उसकी ओर शायद बहुत वासनामय नज़रों से देखा और अपने पाजामा में से अपना लंड दबाया।

शिवा मस्ती में आकर मुँह फेर लिया मानो उसे इससे मतलब ही ना हो। पर वो कनख़ियों से सब देख रहा था। तभी लक्ष्मी ने उस दुकानदार को इशारा सा किया कि बेटा है थोड़ा आराम से बात करो।

वो मुस्कुरा कर शायद आँख मारा और लक्ष्मी ने पैसे दिए। अब शिवा थैला उठाया और एक रिक्शा बुलाया। तभी उसे शशि दिखा और वह उसे एक ओर ले जाकर पूछा: कैसा रहा ?

शशि अपने लंड को मसल कर बोला: यार तेरी माँ तो बहुत मस्त है। सन सब्ज़ी वाले उससे अश्लील बातें कर रहे थे और वो मुस्कराहट के साथ जवाब दे रही थी।

शिवा ने अपना लंड दबाया और बोला: किसी ने सहलाया क्या उनको?

शशि: नहीं किसी ने नहीं छुआ उनको। पर यार मुझे छूने का मन है।

शिवा: सिर्फ़ छूने का?

शशि: हा हा चोदने का भी।

शिवा: बस थोड़ा इंतज़ार कर। पहले मैं लें लूँ इनकी। फिर तुझे भी दिला दूँगा। और तू भी तो अपनी मम्मी की मुझे दिलाएगा ना?

शशि: यार ये भी कोई पूछने वाली बात है।

शिवा: अच्छा चलता हूँ। मम्मी इंतज़ार कर रही होंगी और दुकानदार से मज़ा भी ले रहीं होंगी।

शिवा जब दुकान के पास रिक्शा लेकर पहुँचा तो वो देखा कि लक्ष्मी और दुकान दार बहुत हँस कर बातें कर रहे थे। उसे देखकर वो चुप हो गए।

अब शिवा सामान रिक्शे में रखा और लक्ष्मी को बैठने को कहा। फिर से उसे मस्त गाँड़ के दर्शन हुए और वो उससे सट कर बैठा और रिक्शा घर की ओर चल पड़ा। उसने नोटिस किया कि मम्मी ख़ुश दिख रही थी। उसने सोचा कि चान्स लिया जाए। वो उसकी साड़ी के ऊपर से जाँघ सहलाता हुआ बोला: मम्मी बड़ी ख़ुश दिख रही हो? ऐसा क्या बोला साला वो दुकानदार?

लक्ष्मी चौंक कर: कुछ भी तो नहीं।

शिवा फुसफुसाया: मम्मी वो आपको लाइन मार रहा था।

लक्ष्मी धीरे से: क्या बक रहा है!

शिवा: सच में मम्मी आप हो ही इतनी सेक्सी कि कोई भी आपकी फ़िगर पर लट्टू हो जाए। वह उसकी। ब्लाउस से झाँकती चूचियों को देखकर बोला।

लक्ष्मी: चुप कर। कुछ भी बोले जा रहा है।

शिवा: अच्छा मम्मी मैं आज आपका क़ुली बना ना? तो मुझे क्या ईनाम दोगी?

लक्ष्मी समझ गयी कि वो अब किस तरफ़ बात को ले जा रहा है? मगर सामने से अनजान बनकर बोली: पैसे ले लेना क़ुली बाबू।

शिवा: मुझे पैसे नहीं चाहिए कुछ और चाहिए।

लक्ष्मी: क्या चाहिए।

शिवा: आपके दूध चाहिए।

लक्ष्मी: क्या?

शिवा: मेरा मतलब है कि आज आपका दूध पीना है।

लक्ष्मी की पैंटी के अंदर गीलापन सा होने लगा। वो एक जाँघ को दूसरे के ऊपर रखी और चूत को दाबकर बोली: घर चल तेरी पिटाई करूँगी।

शिवा: मम्मी जितना चाहे पीट लेना बस पहले दूध पिला देना।

अब लक्ष्मी चुप हो गयी। उसने मुँह फेर लिया। पर ना जाने क्यों उसके निपल्ज़ तन गए थे। उफ़्फ़्फ़्फ ये सब क्या हो रहा है? वो सोची।

हरी बेटी की नंगी क़मर सहला कर बोला: मैनेजर ये कार मेरे घर में डिलिवर कर देना।

मैनेजर: जी शाम तक पहुँचा देंगे।

हरी तान्या को देखकर: तो अब चलें?

तान्या: जी पापा।

बाहर निकलते हुए भी हरी तान्या को अपने से चिपकाए हुए था । कार में बैठ कर वो बोला: अब भूक़ लगी क्या?

तान्या: नहीं पापा ज़्यादा भूक़ तो नहीं लगी। कार ने मेरी भूक़ मार दी। थैंक यू आप बहुत प्यारे पापा हो।

हरी: तो चलो तुम्हारे पसंद के माल में चलते हैं ।

तान्या ख़ुश होकर : पापा मुझे ड्रेस दिलाइए ना?

हरी उसकी जाँघ सहलाता हुआ: हाँ हाँ क्यों नहीं। अपनी ख़ूबसूरत बेटी के लिए बढ़िया ड्रेस दिलाते हैं । चलो।

वो माल की बेस्मेंट पार्किंग में अपनी कार खड़ा किया। कार एक कोने में थी जहाँ सुनसान सा था। हरी की वासना बढ़ती ही जा रही थी। वह अचानक से तान्या को कार के अंदर ही अपनी ओर खींचा और उसके गाल को चूम कर पूछा: बेटी एक बात बताओ? कभी किसी ने लीप किस्स किया क्या?

तान्या शर्मा कर नहीं में सिर हिलाई।

हरी: तो मैं पहला आदमी बन जाऊँ जो तुम्हारी लिप किस्स करे।

तान्या: धत्त पापा आप कुछ भी बोलते हो। वो कार से बाहर आयी।

हरी भी बाहर आके उसके पास गया और बोला: बेटी क्या हुआ? एक नया अनुभव होगा। करूँ क्या?

वो उसे अपनी बाँहों में खींचकर बोला: बेटी किस्स करूँ?

तान्या: बस एक बार। वो भी जल्दी से। कोई आ गया तो।

हरी समझ गया कि लाइन क्लीयर हो रही है । वो उसके होंठ पर अपने होंठ रखा और उसे चूम किया। जल्दी तो क्या होना था। उसका मन अपने होंठ उसके नरम होंठ से मानो हटना ही नहीं चाहते थे। उसके हाथ भी अब उसके चूतडों पर आ गये और वहाँ भी दबा कर वो मस्ती से भर गया। तान्या को भी उसकी बड़ी सी मस्ती अपने पेट पर चुभने से लगी थी। वो जानती थी कि ये पापा का लंड है। वो अपनी गीली हुई जा रही पैंटी से परेशान थी। अचानक एक कार के आने की आवाज़ से दोनों चौंके और अलग हुए। अब हरी ने तान्या का हाथ पकड़ा और कहा: चलो लिफ़्ट उधर है। लिफ़्ट में वो दोनों ही थे। तान्या ने चोर नज़रों से पापा की पैंट का उभार देखा और उसे रम्या की बात याद आयी कि पापा उसे चोदना चाहते हैं। उसकी चूत में ज़ोर से खुजली सी उठी पर पापा के सामने वो वहाँ खुजा भी नहीं सकती थी।

वो नज़र उठाई तो देखी कि पापा अभी भी उसके स्तनों को ही देख रहे थे। वो दूसरी तरफ़ देखने लगी।

अब हरी बोला: बेटी नाराज़ हो क्या?

तान्या अनजान बन कर: क्यों नाराज़ होऊँगी?

हरी: वो वो मैंने तुम्हें लिप किस्स किया ना ?

तान्या ने शर्मा कर सिर झुका कर नहीं में सिर हिला दिया।

हरी ख़ुशी से मस्त हो कर तान्या को अपनी ओर खिंचा और बोला: आई लव यू बेटी। और उसके गरदन को चूम लिया।

तान्या: पापा आइ लव यू टू ।

तभी लिफ़्ट रुकी और दोनों अलग हुए और बाहर आए।
 


हरी तान्या को लेकर एक बड़े शोरूम में पहुँचा । वहाँ अभी कोई ग्राहक नहीं था। सेल्ज़ गर्ल क़रीब ४० साल की एक मस्त सेक्सी औरत थी जिसका नाम रोज़ी था।

रोज़ी: आओ बेबी क्या दिखाऊँ? वेस्टर्न या इनडीयन ?

हरी: आप बेबी किसे कह रहीं हैं ? ये अब जवान हो गयी है। कोई बेबी थोड़े ही है।

रोज़ी: हा हा । सही कहा सर आपने। तो यंग गर्ल क्या दिखाऊँ?

तान्या: मेरा नाम तान्या है। मुझे वेस्टर्न दिखाइए।

रोज़ी ने कई स्कर्ट और टॉप दिखाए।

हरी: तान्या तुम पर तो हॉट पैंट सूट करेगी।

तान्या: पापा मुझे थोड़ा अजीब लगता है , उसमें पूरी जाँघें नंगी दिखती हैं ।

हरी: अरे तो क्या हुआ? तुम्हारी गोरी मस्त जाँघें दिखाने लायक ही हैं ,छुपाने के लिए थोड़ी हैं ?

रोज़ी चौंक कर हरी को देखी कि ये कैसा बाप है। पर चुप रही है और उसने हाफ़ पैंट दिखाईं ।

हरी: बेटी इसे पहन कर दिखाओ। और ये टॉप भी।

तान्या हिचकते हुए ट्राइयल रूम में गयी।

रोज़ी: सर आप बहुत माडर्न हो। जो ख़ुद अपनी बेटी को ऐसे कपड़े पहनने को कह रहे हो।

हरी ने रोज़ी को भरपूर निगाहों से देखा। वो करींब ४० साल की मस्त भरी हुई औरत थी। उसने भी स्कर्ट टॉप पहना था। उसकी चूचियाँ कम से कम ४० की तो होंगी। गाँड़ भी मस्त उभरी हुई थी। हरी: आपके पति तो भी तो आपको वेस्टर्न कपड़े पहनने से नहीं रोकते?

रोज़ी: सर मेरा तलाक़ हो चुका है। मुझे कोई रोकने वाला नहीं है।

हरी: ओह आप जैसी सुंदर औरत को कोई तलाक़ कैसे दे सकता है? वो उसे लाइन मारने लगा।

रोज़ी: सर अपनी अपनी क़िस्मत है।

तभी तान्या बाहर आई और हरी के लंड में मानो करेंट लग गया। उफ़्फ़ क्या माल दिख रही थी वो। टॉप में उसकी मस्त जवान हो रही चूचियाँ जलवा दिखा रहीं थीं । आधी चूचियाँ तो बाहर ही थीं और हाफ़ पैंट से उसकी जवान गदराई जाँघें तो जैसी बिजली गिरा रही थीं । पैंट उसकी चूत से बिलकुल सटी हुई थी और वहाँ का उभार भी किसी को पागल ही कर देता।

हरी: वाऽऽऽऽह क्या सूट कर रहा है बेटी ये तुम पर।

रोज़ी: थोड़ा पैंट टाइट है जोड़ पर। एक बड़ा साइज़ दूँ?

हरी: नहीं नहीं। बिलकुल मस्त है। मेरा मतलब है कि फ़िटिंग सही है। वो उसके जोड़ को जहाँ उसकी चूत का उभार था देखते हुए बोला।

तान्या: ठीक है पापा फिर ले लेती हूँ।

हरी: रोज़ी स्कर्ट टॉप भी दिखाओ। वैसी ही जैसे आपने पहनी है। उसकी मस्त चूचियों को घूरते हुए बोला।

रोज़ी ने कुछ कपड़े दिखाए। उसमें से जो ज़्यादा पारदर्शी थे वो ही हरी ने पसंद किए और कहा: बेटी इसका ट्राइयल करो।

उसके जाने के बाद रोज़ी बोली: आप जैसा बाप मैंने नहीं देखा जो कि अपनी ही बेटी के लिए ऐसे कपड़े ख़रीद रहा है।

हरी: अरे माडर्न कपड़ों में ही लड़की जँचती है। अब आपको ही देख लो क्या मस्त लग रही हो आप इन कपड़ों में। वो अब उसे भी लाइन मारने लगा था।

रोज़ी : थैंक यू सर ।

हरी: आपका ख़ाली टाइम कैसे कटता है? मेरा मतलब तलाक़ होने के बाद इंसान अकेला पड़ जाता है ना?

रोज़ी: बस यूँ ही । कुछ ख़ास नहीं है जीवन में।

हरी: आपका फ़िग्यर देख कर लगता है कि आपके बच्चे तो होंगे नहीं।

रोज़ी: नहीं कोई बच्चा नहीं है मेरा।

हरी अपना कार्ड निकाला और उसे देता हुआ बोला: ये मेरा कार्ड है। अगर कभी अकेलापन लगे तो मुझे कॉल कर लेना। मुझे पार्टी वगेरह का बहुत शौक़ है।

रोज़ी ने चुपचाप कार्ड ले लिया। तभी तान्या बाहर आयी और हरी एक बार फिर से मस्त हो गया। पारदर्शी टॉप से उसकी काली ब्रा साफ़ दिख रही थी और स्कर्ट भी टाइट फ़िट थी । गाँड़ का हिस्सा भी मस्त दिखाई दे रहा था।

रोज़ी ने हरी को देखा तो वो अपना लंड ऐडजस्ट कर रहा था। वो समझ गयी कि ये ठरकी आदमी अपनी बेटी के पीछे है। उसे कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि उसका ख़ुद का भी कुछ इसी तरह का अनुभव था। वो ख़ुद भी ये सब देख चुकी थी।

अब रोज़ी भी एक चाल चली और बोली: तान्या कुछ लिंगरी भी चाहिए क्या?

हरी एकदम से बोला: हाँ हाँ दिखाओ ना। जवान लड़की को लिंगरी बहुत भाती है। है ना बेटी?

तान्या ने शर्मा कर हॉ में सिर हिला दिया। रोज़ी समझ गयी और ख़ुद भी एक योजना बनाने लगी। उसे यह तो समझ में आ गया था कि हरी पैसे वाला है और लंगोट का कच्चा है।

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उधर घर के अंदर सामान लाकर शिवा सोफ़े पर ढेर होकर बोला: मम्मी पानी दो।

लक्ष्मी मुस्कुरा कर: चलो अच्छा है दूध की जगह पानी माँगा।

शिवा: मम्मी नो चीटिंग। पहले पानी फिर दूध।

लक्ष्मी हँसती हुई किचन से पानी लायी। शिवा ने खींचकर लक्ष्मी को अपने पास बिठाया और बोला: मम्मी आज पता चला कि सिर्फ़ मैं ही नहीं बल्कि सब आपको सेक्सी समझते हैं ।

लक्ष्मी चौंक कर: मतलब?

शिवा: मम्मी वो सब्ज़ी वाला और राशन वाला आपको बड़ी भूकि नज़रों से देख रहे थे। पर उनकी कोई ग़लती नहीं है आप हो ही इतनी सेक्सी।

लक्ष्मी: बेटा अब मैं सबकी आँखे तो नहीं फोड़ सकती ना। जिसे जो सोचना है सोचे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। कहीं तुझे जलन तो नहीं होती?

शिवा: नहीं मम्मी मुझे जलन नहीं होती। बल्कि मुझे आपके सेक्सी होने पर गर्व है। सच मम्मी आपके बड़े बड़े दूध और आपके बड़े बड़े चूतड़ और पतली कमर सब बहुत सेक्सी हैं ।

लक्ष्मी : अपनी माँ के बारे में ऐसा बोलते हैं?

शिवा: सबकी मम्मी आपके जैसे सेक्सी नहीं होती। जैसे मेरा एक दोस्त है शशि उसकी मम्मी भी सेक्सी है पर आपसे कम।

लक्ष्मी: तो तू अपने दोस्तों की मम्मियों को भी लाइन मारता है?

शिवा: अरे मम्मी कोई लाइन नहीं मारता हूँ सबको। बस आपको मारता हूँ। वह अपनी मम्मी की जाँघ सहला कर बोला।

लक्ष्मी: अच्छा चल अब खाना बनाती हूँ।

शिवा: मम्मी प्लीज़ आज मत बनाओ ना बाहर से मँगा लेते हैं । और आप मुझे दूध पिलाओ ना उस दिन जैसे।

लक्ष्मी : बहुत बदमाश हो गया है। अच्छा चल ऑर्डर कर खाना । मैं कपड़े बदल के आती हूँ । इस साड़ी में गरमी लगती है।

शिवा: गरमी लगती है तो साड़ी उतार दो ना। मेरे अलावा और कोई नहीं है। गरमी भी नहीं लगेगी और बच्चे को मज़ा भी आ जाएगा। यह कहते हुए उसने लक्ष्मी की साड़ी का पल्लू गिरा दिया और बोला: उठो मैं आपकी साड़ी उतार देता हूँ।

लक्ष्मी भी अब उसकी शरारतों से गरम होने लगी थी। वह खड़ी हुई और उसके बेटे ने घूम घूम कर उसकी साड़ी की एक एक परत खोलनी शुरू की। इस चक्कर में वो कभी सामने आकर ब्लाउस में कसे दूध देखता था और कभी उसके मोटे चूतड़ ।

लक्ष्मी: अरे ऐसे थोड़े साड़ी खोलते हैं । बीच में से निकाल दे एक बार में निकल जाएगी।

शिवा: मम्मी उसमें क्या मज़ा ? मज़ा तो ऐसे ही आ रहा है।

लक्ष्मी चुप चाप उसे साड़ी खोलती देखती रही और उसकी निगाह पैंट में बने तंबू पर भी पड़ी। अब साड़ी निकल गयी थी। पेटिकोट और ब्लाउस में उसकी सेक्सी माँ उसके सामने खड़ी थी। वो एकदम चुपचाप उसे देखता रहा और बोला: मम्मी आप वाक़ई बहुत सेक्सी और सुंदर हो।

लक्ष्मी भी अब उत्तेजित हो चुकी थी। वो बोली: चल मुझे बाथरूम जाना है।

शिवा: मम्मी एक रिक्वेस्ट करूँ?

लक्ष्मी: हाँ बोल।

शिवा: जब आप बाथरूम से वापस आना तो पैंटी वहीं उतार देना।

लक्ष्मी: वो क्यों?

शिवा: प्लीज़ मेरी बात मान लो ना।

लक्ष्मी कुछ नहीं बोली और बाथरूम में जाकर पैंटी नीचे करके पेटिकोट उठाकर मूतने लगी। चूत में पानी का स्प्रे मारकर जब वो उठी तो पैंटी ऊपर की। पर पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो पैंटी उतार दी और खूँटी में लटका दी और पेटिकोट नीचेकर वापस कमरे में आ गयी।

जब वो सोफ़े के पास आयी तो देखी कि शिवा फ़ोन पर खाना ऑर्डर कर रहा था । वो फ़ोन रखा और उसने जो किया लक्ष्मी उसके लिए बिलकुल तय्यार नहीं थी। इसके पहले की लक्ष्मी बैठ पाती शिवा ने उसके पेटिकोट के ऊपर से उसके चूतडों पर एक हाथ फेरा और चेक करते हुए बोला: मम्मी पैंटी उतार दी ना?

लक्ष्मी उसकी इस हरकत पर हतप्रभ रह गयी।

 
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