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मोना चौधरी ने दरवाजा ,खोला और भीतर प्रवेश करते हुए, दरवाजा बंद कर दिया । उसके चेहरे पर गंभीरता ठहरी हुई थी । उसकी सोचे चाकू , मंगलू और सतपाल के गिर्द घूम रही थी । उसने तो सोचा था कि मंगलू उसे फ्लैट के बाहर ही कहीं मिलेगा, परंतु वो कहीं भी नहीं नजर आया था ।
मोना चौधरी जानती थी कि मंगलू इस तरह खामोश नहीं बैठने बाला था ।
वो जल्दी ही कहीं पर, उससे मुलाकात करेगा ।
ये तो उसने सपने में भी नहीं था कि मंगलू उसके फ्लेट में छिपा, उसका इंतजार कर रहा है ।
मोना चौधरी का, विचार-नहाने का था । उसके बाद काफी लेने का ।
ज्यों ही मोना चौधरी पीछे वाले कमरे में पहुंची कि ठिठकुकर रह गई ।
सामने की कुर्सी पर मंगलू बैठा था ।
“तुम......." मोना चौधरी चौंकी ।
मंगलू कठोर निगाहों से उसे देखता रहा।
मोना चौधरी ने गहरी सांस ली-खुद को संभाला ।
"यहां क्या कर रहे हो तुम?" मोना चौधरी के स्वर में अब सतर्कता आगई थी। "
"तुम्हारा इंतजार मोना चौधरी ।"
"यहां से बाहर निकल जा !" दोबारा कभी इधर नहीं आना ।" मोना चौधरी के दांत भिंच गए । "
“ठीक कहा तुमने । मैं फिर से तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहता ।" मंगलू उठता हुआ बोला-----" वो चाकू मेरे हवाले कर दो, मैं यहां से चला जाता हूं । तुम्हें वो चाकू नहीं लेना चाहिए था ।"
" चाकू नहीं मिलेगा तुम्हे ?"
"वहम है तुम्हारा ।"
कुछ चुप रहकर मंगलू पूर्ववत् स्वर मे बोला ।
"वो चाकू शैतान के बेटे का है । तुम्हें हर हाल में चाकू वापस देना होगा । अगर तुमने ज्यादा एतराज उठाया तो तुम्हारी जान भी जा सकती है । बेहतर यहीं होगा कि चाकू मेरे हवाले कर दो ।"
"तुम फिर मेरे हाथों पिटना चाहते हो ?"
" पहले की बात और थी । तुमसे झगडा करने के लिए मैं तैयार नहीं था।" मंगलू ने कहा।
"मतलब कि अब तैयार होकर आए हो ।" मोना चौधरी का लहजा कडवा हो गया है . ,,
"तुम्हारी भला इसी में है की चाकू........ !"
"नहीं मिलेगा तुम्हें ।"
इसी पल मंगलू ने गुर्रा कर उसके ऊपंर छलांग लगा दी ।।
मोना चौधरी सतर्क थी ।
उसने फुर्ती से अपनी जगह छोडी और आगे जाते मंगलू की पीठ पर घूंसा जड़ दिया।
मगंलू फर्श पर लुढक गया ।
मोना चीथरी पलटी और मंगलू को देखने लगी ।
मंगलू संभला और मोना चौधरी को कहर-भरी नजरों से देखता कह उठा ।
"मैं अभी भी तुम्हें कम समझ रहा हूं लेकिन अब तुम मेरे हाथों से नहीं वचोगी ।"
मोना चौधरी वैसे ही खडी उसे देखती रही ।
मंगलू धीरे-धीरे सावधानी से मोना चौधरी की तरफ बढने लगा ।
एकाएक मोना चौधरी ने रिवॉल्वर निकाल ली ।
मंगलू ठिठका ।
"मेरी एक उंगली हिलेगी और तुम मर जाओगे रिवॉल्वर को जानते हो ना?"
" चाकू मुझे वापस दे दो !"
"यहां से बाहर निकल जा । दोबारा मेरे सामने पड़ा तो तेरी जान लिए बिना मानूंगी नही !"
" तू मेरे .......!"
"बाहर निकल जा, चल ड्राइंगरूम मे, दरवाजा खोल और निकल जा, वरना गोली मार दूंगी ।"
मंगलू दांत भिंचे पलटा और कमरे से निकलकर ड्राइंगरूम मे पहुचा ।
"मंगलू !" जंगला की फुसफुसाहट उसके कानों में पडी----"तू फिर बेबस होगया ।"
"क्या करूं ? उसने रिवॉल्वर पकड रखी है ।"
"जानता हूं रिवॉल्वर की गोली तेरे शरीर को नुकसान पहुचा देगी । दर्द देगी तेरे को ।"
" कया करूं मैं?"
तभी मोना चौधरी की आवाज मंगलू के कानों में पडी ।
"स्क क्यों गया मंगलू? बाहर निकल जा यहां से ।" मंगलूं धीमे ढंग से दरवाजे की तरफ़ बढा । "
"मैं आऊँ?" जंगला ने पूछा।
"आ जा !"
इसके बाद दो पल ही बीते होंगे कि मंगलू एकाएक फर्श पर गिरकर तड़पने लगा ।
मोना चौधरी के माथे पर बल पड़े । रिवॉल्वर उसके हाथ में दबी थी ।
" मिनट-भर बीता कि मंगलू का शरीर शांत पड गया ।
मोना चौधरी सावधान थी कि मंगलू कोई ड्रामा न कर रहा हो ।
परंतु जब उसका शरीर शांत पड़ा और होंठों से झांग निकलते देखा तो मन-ही-मन चौकी ।
मिनट-भर और बीत गया । मंगलू के शरीर में जरा भी हरकत न हुई तो मोना चौधरी सावधानी से उसके पास पहुंचने लगी ।
“मंगलू ...!" मोना चौधरी ने पुकारा ।
मंगलू का शरीर वैसे ही पड़ा रहा।
मोना चौधरी कुछ और पास पहुंची ।
"मंगलू उठो…अपना चाकु ले लो ।"
परंतु मंगलू के शरीर में हरकत नहीं हुई ।
मोना उसके करीब जा पहुंची ।
यहीं चूक हो गई मोना चौधरी से ।
उसी क्षण मंगलू की आंखें खुली ओंर उसके शरीर ने तेजी से हरकत की ।
मंगलू के जूते की ठोकर मोना चौधरी कै रिवाल्वर वाले हाथ की कलाई पर पडी।
सच बात तो ये थी कि ये सब इतनी तेजी से हुआ कि मोना चौधऱी कुछ भी न समझ पाई।
रिवॉल्वर उसके हाथ से निकलकर छत से जा टकराईं और कोने में जा गिरी।
उसी पल मंगलू का शरीर रबड़ के पुतले की तरह उछला और उसके जूते की ठोकर उसके सिर पर पडी । मोना चौधरी के होठो से चीख निकली और सोफे टकराती वो नीचे जा गिरी ।
एक तो कलाई का दर्द ऊपर से ठोकर की बजह से घूमता सिर । मोना चौधरी ने अपने पर काबू पाने की चेष्टा की, परंतु सफ़ल नहीं हो सकी । बेदम-सी वहीं पड़ी रही ।
मगलू पास पहुंचा और मुट्ठी में मोना चौधरी के सिर के बालों को पकडकर भिंचता बोला ।
"चाकू दे मुझे ।"
नीचे पडी मोना चौधरी ने मंगलू की टांगे खींचनी वही, परंतु सफ़ल न हो सकी ।
मंगलू ने सिर के बाल छोड़े और उसकै सिर पर घूंसा मारा ।
मोना चौधरी पूरी तरह फर्श पर लुढ़कती चली गई बेहोश होगई।
उसी पल मंगलू लगा जैसे उसके भीतर से कोई चीज निकली ।
अगले ही पलं मंगेलू के कानो मे जंगला की फुसफुसाहट पड्री ।
"कैसा रहा मंगलू?"
"वहुत अच्छा ।"
" देखा, मैंने तीन वारों में ही मोना चौधरी को लुढका दिया ।"
"हां । तुममें सच से वहुत ताकत है ।"