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खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete



"मंगलू ।" जंगला की फुसफूसाहट मगलू के कानों मे गूंजी …" अब तो तेरे को खुश होना चाहिए कि चाकू मिल गया ।"

"मैं खुश हूं ।" मंगलू के होंठ हिले ।

मगलू इस वक्त भीढ़-भरे फुटपाथ पर तेजी से आगे बढा जा रहा था ।।

"क्या तूने सोचा था कि चाकू मिल जाएगा !"

"मैंने ये सोचा था कि मैं चाकू लेकर रहूंगा ।"

"तात्रिक बेलीराम के इशारे पर कितनी आसार्नी से मिल गया । बेलीराम बहुत करामाती इंसान है ।"

"बताया था तुमने ।" मंगलू की नजरें हर तरफ जा रही थीं--“ अब मैंने कहां जाना है?"

"शैतान के बेटे से पूछकर आता हूं ।"

"तू तो कह रहा था कि शैतान का बेटा व्यस्त है ।"

" व्यस्त है, लेकिन अब हमारी बात भी जरूरी है । कहीं चाकू फिर से हाथ से निकल गया तो ?"

"ठीक है पूछ शैतान के बेटे से !"

मंगलू फुटपाथ पर आगे बढा जा रहा था ।

मोना चौधरी के फ्लैट से वो काफी दूर आ गया था । मोना चौधरी का उसे जरा भी डर नहीं था ।

ना ही खयाल था मोना चौधरी का । वो तो मगलू के दिमागं से निकल चुकी थी ।

ऐसे मंगलू कैसे सोच सकता था कि मोना चौधरी उसका पीछा कर रही है ।

आगे बढती मोना चौधरी की निगाह एकटक मंगलू पर थी । भीड़-भरे फुटपाथ पर वो मगलू से दस कदम पीछे थी । ऐसे में मंगलू पलटकर देखता तो भी मोना चौधरी नजर न आ पाती ।

वैसे भी चलती भीड़ मंगलू को इतना मोका ही कहां देने वाली थी कि वो पीछे देख सके ।

मौना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता, भी थी और कठोरता भी ।।

तभी उसका मोबाइल बजा ।

मोना चौधरी फोन निकलकर बात की ।दुसरी तरफ पारसनाथ था ।

‘तुम कहां हो मोना चौधरी?" पारसनाथ की आवाज कानों में पड्री ।

"व्यस्त हूं ।"

" शायद तुम मंगलू के पीछे हो?"

"हां ।"

"खतरा हो जाएगा, अगर उसंने तुम्हें देख लिया । तुमने उससे . चाकू ले लिया तो वो पुन: राधा को पकड़ लेगे ।"

"राधा को तुम अपनी पत्नी सितारा के पास छोड़ दो ।"

"ठीक है ऐसा ही करता हूं । मुझें बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हू।"

“जरूरत पडने पर तुम्हें फोन करूगी पारसनाथ !" कहकर मोना चौधरी ने फोन बंद करके जेब मे डाला । आगे बढते उसकी निगाह बराबर मगलू पर थी । वो मगंलू का पीछा किसी हालत में नहीं. छोड़ना चाहती थी और उचित मौका मिलने पर उससे वो चाकू ले लेना चाहती थी ।

@@@@@@@@@@@@

जंगला की फुसफुसाहट मंगलू कें कानों में गूंजी ।

"मैं आ गया मंगलू ।"

"शेतान के बेटे से बात हुई?"

" हां,बो सच में बहुत व्यस्त है !"

"मेरे बारे में क्या कहा उसने ?"

"तुम्हें चाकू के साथ तांत्रिक बेलीराम के पास पहुचना होगा !"

"मुझे क्या पता कि बेलीराम किधर हैं जो !"

" मै हूं ना । मै बताऊंगा रास्ता…तू चिंता क्यों करता है?"

"ठीक है बता ।"

"बेलीराम इस शहर से दूर रहता है । तेरे को स्टेशन पहुचना है। वहा से ट्रेन पकड़नी है !"

@@@@@@@@@@@@

धड़.......धड़.....धड.... .ट्रेऩ पटरियों पर दौड रही थी । ट्रेन जब पटरी बदलती तो शोर एकाएक बढ़ जाता । ट्रेन क्रो चले आधा घंटा हो चुका था । मोना चौधरी ट्रेन में जहाँ बैठी थी, उससे दस फीट पर मंगलू बेठा था, पर मगलू की इस तरफ पीठ होने की वजह से वो मोना चौधरी की न देख पाया था । मगलू ने जब टिकट लो तो उसने टिकट देने वाले से पूछ लिया था कि नीली कमीज वाले व्यंक्ति ने कहां की टिकट ली और वहीं की टिकट उसने खुद ले ली थी ।

इस वक्त मोना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता थी ।

उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि बो कुछ व्याकुल-सी है ।

मोना चौधरी ने फोन निकाला और सतपाल का फोन नम्बर मिलाने लगी ।

कुछ पलों तक दूसरी तरफ़ बेल होती रही, फिर सतपाल की आवाज कानों में पडी ।

"हैलो !"

" मै मोना चौधरी !"

सतपाल की तरफ से कोई आवाज न आई ।

"सतपाल ।।"

" तुमने गलत किया मोना चौधरी!"

" राधा की जिन्दगी बचानी ज़रूरी थ्री ।उन्होंने राधा को पकड लिया था । वो चाकू मांग रहे थे।"

"तुम नहीं जानती कि तुमने कितनों की जिन्दगी खतरे में डाल दी ! अगर भवतारा को : जीवन मिल गया तो वो इंसानों का खून पीने लगेगा । बहुत लोग बेमौत मरेंगे ।" सतपाल का गंभीर स्वर कानों में पड़ा ।

"मुझे भी इस बारे में चिंता है !"

"तुम चिंता' करके क्या कर सकती हो अब-कुछ भी नहीं ।"

"मैं इस वक्त ट्रेन में बैठी , मंगलू के पीछे हू ।"

"मंगलू के पीछे?" सतपाल चौंकता स्वर कानों में पड़ा ।

"हां ।"

"मंगलू किस जगह पर जा रहा है ट्रेन में बैठकर?” मोना चौधरी ने बताया ।

"ओह्न तो बो चाकू लेकर तांत्रिक बेलीराम के पास जा रहा है ।"

" उस ,जगह पर बेलीराम रहता है?"

" हां । तुम्हारा क्या इरादा है कि तुम ?"

"मैँ मंगलू से चाकू पाने की चेष्टा करूंगी । जहाँ मोका मिला वहां. . . !"

" यै खतरनाक होगा । शैतानी 'शक्तियां मंगलू की सहायता कर रही हैं !" सतपाल की व्याकुल. आवाज कानों में पडी ।

"तुम्हारा दिया धागा अभी भी मेरे गले में है ।" मोना चौधरी ने कहा ।

"वो धागा एक हद तक ही तुम्हें शैतानी शक्तियों से बचा सकता हैं। तुम अपने को खतरे में डाल लोगी ।"

"मंगलू से चाकू छीनना भी तो जरूरी है ।"

कुछ पलो के लिए फोन पर खामोशी रही ।

"इस बार चाकू हाथ लग गया तो फौरन. तुम्हें दे दूंगी ।" मोना चौधरी ने कहा ।

" चाकू हासिल करना अव आसान नहीं लगता ।"

"जो होगा सामने आ जाएगा ।"

"मैं भी यहाँ के लिए चल रहा हू । प्लेन से आता हूं । तुम्हें स्टेशन पर ही मिलूंगा । दो होंगे तो अच्छी तरह मंगलू का मुकाबला करके उससे चाकू लिया जा सकता है ।"

"मंगलू के लिए मैं अकेली ही..!"

" तुम ये क्यों भूल जाती हो कि मंगलू के आस-पास शैतानी शक्तियां भी हैं ।"

मोना चोधरी ने कुछ नहीं कहा ।

"स्टेशन पर मिलूंगा तुमसे ।" कहकर उधर से सतपाल ने फोन बदकर दिया था ।

मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा !"

अभी भी मंगलू की पीठ उसकी तरफ़ थी ।

ट्रेन तेजी से दौड्री जारही थी।

@@@@@@@@@@@@

 


सतपाल ने मिथलेश को सारी बात बताईं ।

"शायद मोना चौधरी मंगलं से चाकू लेने में कामयाब न हो सके ।"

उसके होंठों से निकला ।

"तभी तो मैं वहीं जा रहा हूं !"

"मोना चौधरी ने चाकू उसके हवाले करके बहुत गलत काम किया ।" मिथलेश ने गहरी सांस ली ।

"जो हो गया, हमें उस पर ज्यादा नहीं सोचना चाहिए ।" सतपाल ने गंभीर स्वर में कहा…

-" हमें सिर्फ ये कोशिश करनी है कि अपने चाकू के सहारे भवतारा पुन जीवित न हो । इसके लिए वो चाकू हमें हासिल करना होगा । मोना चौधरी की ये समझदारी ही है कि के मगलू के पीछे है और हमे फोन किया, वरना हमे मगलू का पता ही न चलता कि बो कहां गया ।"

मिथलेश चुप-सा उसे देखता रहा 1

"में एयरपोर्ट जा रहा हूं । वहां के लिए घंटे-भर बाद एक प्लेन जाएगा ।" मिथलेश ने मोबाइल फोन निकाला और नम्बर मिलाने लगा ।

" किसे फोन कर रहे हो?"

"राजन को !"

" हो सकता है, उसके फोन की चाजिंग खत्म...!"

"वेल हो रही है ।" कान से लगाए मिथलेश कह उठा !!

फिर मिथलेश के कानों मे राजन का मद्धिम-सा स्वर पडा ।

"हेलो !"

" तुम कहाँ हो?" मिथलेश ने कहा।

" तात्रिक वेलीराम के डेरे पर हूं। साधु के वेष में ! मुझे रहने को झोंपड़ा मिल गया है और यहां पर बिजली भी है । फोन चार्ज कर सकता हूं ।" राजन की आवाज कानों में पडी ।

 
"ये तो अच्छी बात है. । तांत्रिक बेलीराम की नजदीकी पाने की चेष्टा करो और उस पर नजर रखो । मेरे ख्याल में मंगलू भी चाकू के साथ बेलीराम के पास ही पहुच रहा है, तुम देखना के मंगलू वहां आने के बाद वो क्या करता है ?"

"ठीक है खबर पाते ही फोन करूँगा ।" मिथलेश फोन बंद करते सतपाल से बोला ।

"राजन साघू के वेष में है,बेलीराम के डेरे पर वहाँ उसे झोपडा मिल गया है, जहां बिज़ली भी है।"

"ठीक है तुम राजन के कांन्टेक्ट में रहना । मैं चलता हूं !"

"जो भी हो मुझे खबर कर देना ।"

" हां, तब तक तुम शैतान के बेटे भवतारा के बारे में किताबों से जानने की चेष्टा करो । भवतारां के बोरे में कई किताबों में जिक्र होगी । हमे कई नई जानकारियां मिल सकती हैं ।"

मिथलेश ने सिर हिला दिया ।

सतपाल वहां से बाहर निकल गया ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@

सतपाल शाम आठ बजे उस स्टेशन पर पहुचा जहाँ पर मंगलू ने टिकट लिया था । सतपाल जानता था कि इस स्टेशन से बेलीराम के डेरे तक रास्ता जाता था । कुछ दिन पहले ही तो वो बेलीराम के डेरे पर से होकर आया था ।

उसने स्टेशन पर बने रेस्टहाउस में ही रात-भर रहने को कमरा लिया और मोना चौधरी को फोन किया फौरन ही मोना चौधरी से बात हो गई ।

"मैं स्टेशन पर पहुच गया हूं।" सतपाल ने बताया ।

"ठीक है ।"

"मंगलू की क्या पोजीशन है?"

"वो वहीं अपनी जगह पर बैठा है । मेरी नजर उस पर ही है । मोना चौधरी को आबाज उसके कानों में पडी ।

"ये ट्रेन सुवह छः बजे स्टेशन पर पहुंचेगी । अव हम सुबह ही मिलेगे । कोई खास बात हो हो फोन कर देना ।"

"ठीक है।"

सतपाल ने फोन बंद कर दिया । चेहरे पर सोचों के भाव नजर आ रहे थे । वो सोच रहा था कि अगर मगलू से वो चाकू हासिल कर ले तो पाच मिनट का वक्त वहुत होगा, उस चाकू को बेकार , करने के लिए । इसके लिए उसे चाकू को हाथ में पकड़कर चद खास मंत्रों का उच्चारण करना पडेगा कि उस चाकू का असर खत्म हो जाएगा ।

फिर भवतारा चाकू के दम पर पुन जीवित नहीं हो सकेगा ।

और कुछ वक्त के लिए भवतारा का खतरा लोगों पर से हट जाएगा ।

: rose: @@@@@@@@@@@@@@@@@

 
"ये तो अच्छी बात है. । तांत्रिक बेलीराम की नजदीकी पाने की चेष्टा करो और उस पर नजर रखो । मेरे ख्याल में मंगलू भी चाकू के साथ बेलीराम के पास ही पहुच रहा है, तुम देखना के मंगलू वहां आने के बाद वो क्या करता है ?"

"ठीक है खबर पाते ही फोन करूँगा ।" मिथलेश फोन बंद करते सतपाल से बोला ।

"राजन साघू के वेष में है,बेलीराम के डेरे पर वहाँ उसे झोपडा मिल गया है, जहां बिज़ली भी है।"

"ठीक है तुम राजन के कांन्टेक्ट में रहना । मैं चलता हूं !"

"जो भी हो मुझे खबर कर देना ।"

" हां, तब तक तुम शैतान के बेटे भवतारा के बारे में किताबों से जानने की चेष्टा करो । भवतारां के बोरे में कई किताबों में जिक्र होगी । हमे कई नई जानकारियां मिल सकती हैं ।"

मिथलेश ने सिर हिला दिया ।

सतपाल वहां से बाहर निकल गया ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@

सतपाल शाम आठ बजे उस स्टेशन पर पहुचा जहाँ पर मंगलू ने टिकट लिया था । सतपाल जानता था कि इस स्टेशन से बेलीराम के डेरे तक रास्ता जाता था । कुछ दिन पहले ही तो वो बेलीराम के डेरे पर से होकर आया था ।

उसने स्टेशन पर बने रेस्टहाउस में ही रात-भर रहने को कमरा लिया और मोना चौधरी को फोन किया फौरन ही मोना चौधरी से बात हो गई ।

"मैं स्टेशन पर पहुच गया हूं।" सतपाल ने बताया ।

"ठीक है ।"

"मंगलू की क्या पोजीशन है?"

"वो वहीं अपनी जगह पर बैठा है । मेरी नजर उस पर ही है । मोना चौधरी को आबाज उसके कानों में पडी ।

"ये ट्रेन सुवह छः बजे स्टेशन पर पहुंचेगी । अव हम सुबह ही मिलेगे । कोई खास बात हो हो फोन कर देना ।"

"ठीक है।"

सतपाल ने फोन बंद कर दिया । चेहरे पर सोचों के भाव नजर आ रहे थे । वो सोच रहा था कि अगर मगलू से वो चाकू हासिल कर ले तो पाच मिनट का वक्त वहुत होगा, उस चाकू को बेकार , करने के लिए । इसके लिए उसे चाकू को हाथ में पकड़कर चद खास मंत्रों का उच्चारण करना पडेगा कि उस चाकू का असर खत्म हो जाएगा ।

फिर भवतारा चाकू के दम पर पुन जीवित नहीं हो सकेगा ।

और कुछ वक्त के लिए भवतारा का खतरा लोगों पर से हट जाएगा ।

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सुबह के पांच बज रहे थे ।

भोर का उजाला फूटने को ही था रात की कालिमा घीरे धीरे छंटती जा रही थी । ट्रेन धड़-घड़ धड़ पटरियों पर दौडती जा रही थी ।

मंगलू आधी मिली सीट पर नीद में डूबा हुआ था कि तभी उसके कानो में फुसफुसाहट पडी ।

"मंगलू ।"

मंगलू फोरन हड़बड़ाकर उठ गया । उसने आस-पास देखा ।

"मैं हूं जंगला।"

" कह !" मंगलू नीद से भरीं आंखें मलता हुआ कह उठा ।

"खूब नींद ली !"

"हां सो गया था । तूने क्यों उठा दिया !"

सामने बैठे आदमी ने मंगलू को देखा तो यही सोचा ।

सुबह-सुबह भगवान का नाम ले रहा है ।

"मोना चौधरी कल से ही तेरे पीछे है ।" जंगला की फुसफुसाहट कानो में पड्री।

"मेरे पीछे------?" मंगलू के होठों से निकला !

”इसी तरह बैठा रह । पीछे मत देखना । कुछ पीछे बैठी मोना चौधरी । इधर ही देख रही है ।

मगलू शांत-सा बैठा रहा ।

"ज़ब से तू उसके घर से चाकू लेकर निकला था । तभी वो तेरे पीछे लग गई थी ।"

“तूने पहले क्यों नहीँ बताया था !"

"क्या फायदा होता बताने का । तू बेचैन रहता । नींद भी ठीक तरह से न ले पाता । अब तो तेरे को इसलिए बताया कि कुछ देर में ही स्टेशन आने वाला है । तू नीचे उतरेगा तब मोना चौधरी तेरे से चाकू लेने की केशिश करेगी ।"

" वो पागल है , जो ऐसा सोचती है ।" मंगलू कठोर स्वर में बोला।

"वो पागल नहीं समझदार है । दृढ़ इरादों वाली है मोना चौधरी ।”

"मैँ अभी उसे... !"

"पागल मत वन । तू उसे कुछ मी नहीं, कहेगा । मस्त रह । तेरा काम चाकू को सुरक्षित रखना हैं।"

"मैं मोना चौधरी को मार दूगा ।"

"मार दे। मैं तेरे साथ हूं ।” मंगलू उठा ।

"कहा जा रहा है?"

"बाथरूम मेँ…वहां टेप के साथ बांध रखा चाकू निकालकर जेब में रखूंगा । मोना चौधरी को मारना जो है ।"

"ठीक है ।"

मंगलू बाथरूम की तरफ बढ़ गया ।

ट्रेन दौडी जा रही थी ।

"पीछे मत देखना मोना चौधरी तेरे को देख रही है ।" मंगलू बाथरुम में जाकर बंद हो गया ।

दो मिनट बाद बाहर निकला ।

"निकाल लिया चाकू ?"

"हाँ ! "

"अब चुपचाप वापस जाकर अपनी सीट पर बैठ जा । जब स्टेशन आएगा, बता दूंगा !"

मंगलू वापस अपनी सीट पर जा बैठा । एक बार भी उधर नहीँ देखा, जिधर मोना चौधरी बैठी थी ।

@@@@@@@@@@@@@@@@@

स्टेशन पर रुकी ।

मंगलू ट्रेन से प्लेटफार्म पर उतरा ।

डिब्बे के दूसरे दरवाजे से मोना चौधरी नीचे उतरी । नजर मंगलू पर थी । काफी लोग थे उतरने वाले । चढने वाले भी थे । ठीक-ठीक ही भीड़ थी प्लेटफार्म पर । मोना चौधरी मंगलू पर भी नजर रख रही थी और सतपाल को भी तलाश कर रही । "

मंगलू को प्लेटफार्म के बाहर की तरफ जाते देखा तो मोना चौधरी उसका पीछा करने लगी । यही वो वक्त था कि सतपाल पीछे से आकर मोना चीधरी की बगल में चलने लगा । "

"मंगलू कहाँ है?" सतपाल ने पूछा ।।

“बो उधर, काफी आगे ।" आगे बढती मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने मंगलू को पहचाना, पीठ की तरफ़ से ।

"उसे तुम पर शक तो नहीं हुआ !"

"आज हमें हर हाल मे चाकू उससे लेकर रहना है ।"

सतपाल ने दात भींचकर कहा ।

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"मोना चौधरी पीछे आ रही है?" मंगलू के होंठ हिले । वो स्टेशन से बाहर आकर एक तरफ़ चलने लगा था ।

"हां और उसके साथ सतपाल भी है ।"

"सतपाल ?" मंगलू हैरान हुआ…"वो कहाँ से आ गया?"

"पता नहीं, वो पहले से ही स्टेशन पर था ।"

मंगलू का चेहरा कठोर नजर आने लगा ।

"तो दोनों मिलकर मेरे से शैतान के बेटे का चाकू लेना चाहते हैं !"

" हाँ ।" जंगला की फुसफुसाहट कानों में, पड्री--"वो तेरे से पंद्रह कदम पीछे हैं ।"

"अब मैं इन्हें मार दूगा ।"

"वो तेरे पे भारी पड़ सकते हैं । मोना चौधरी ह्यथ-पाव चलाने में वहुत तेज है ।"

"तू कहना क्या चाहता है?"

"मैं आऊं तेरे भीतर. !"

"तू मुझे कमजोर कर सकता है ।"

" ये वात मैंने कब कही?"

" तभी तो तू मेरे भीतर आकर, इनका मुकाबला करने को कह रहा ।"

" मंगलू ! इससे क्या तेरी नाक नीची हो जाएगी । सोच कि अगर शैतान के बेटे का चाकू वो दोनों छीनकर ले गए तो क्या तू अपना मुंह दिखाने के लायक रहेगा । शैतान का बेटा समझ जाएगा कि तू कमजोर है और उसकी सेवा करने के लायक नहीं है । ऐसा होने पर क्या तेरे को अच्छा लगेगा ?"

"नहीं !"

"तू समझदार बन । मेरे को अपने भीतर आने दे । मै इन दोनों से निबट लूंगा । इस बार शैतान के बेटे के चाकू को हर हाल में सुरक्षित रखना हैं । धीरे-घीरे तू भी ऐसे लोगों का मुकाबला करना सीख़ जाएगा ।"

मंगलू खामोश रहा ।

आगे बढता जा रहा था वो ।

"तात्रिक बेलीराम तेरा इंतजार कर रहा है । कि तू चाकू लेकर उसके पास आ रहा है ।"

"ठीक है, तू मेरे भीतर आकर मोना चौधरी और सतपाल का मुकाबला कर ।"

"अब की तूने समझदारी की बात । मै सबके भीतर प्रवेश कर सकता हु, लेकिन इजाजत लेकर ।"

"एक बात का तो जवाब दे ।"

“क्या ?”

"मुझे पैसा चाहिए । कब देगा शेतान का बेटा मुझे पैसा?" मंगलू ने पूछा ।

"बहुत जल्द…एक बार शैतान कें बेटे को जिन्दा हो लेने दे ।" जंगला हंसा ।

"क्या अब वो मरा हुआ है?”

"तू इन बातों में न पड़---तेरे को समझ नहीं आएगी । पर धीरे-धीरे तू सव समझने लगेगा ।"

" तुम लोग जो मर्जी करो, लेकिन मुझे पैसा चाहिए । दौलत......।"

" शैतान का बेटा तुझे इतनी दौलत देगा कि तू संभाल नहीं पाएगा ।"

" कव देगा ?"

" बोला तो-बहुत जल्द देगा-अव मैं तेरे शरीर में आ रहा हूं । पहले मोना चौधरी और सतपाल से निबट लूं ।"

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मगलू इस वक्त ऐसी सड़क पर था जो कि खाली है । सुबह-सवेरे शायद ही कोई वहां से गुजर रहा था । मंगलू एक बार भी पीछे देखता तो मोना चौधरी और सतपाल को देख लेता । यही अहसास उन दोनो को हो रहा था, तभी मोना चौधरी कह उठी ।

"मेरे ख्याल में मौका अच्छा है, मंगलू पर हाथ डाल देना चाहिए!"

"मेरा भी यही ख्याल है मोना चौधरी, याद रहे हमने अपना ध्यानं उससे चाकू लेने पर लगाना है ।" सतपाल का स्वर ही नहीं चेहरे के भाव भी कठोर नजर आने लगे थै ।।

अगले ही पल दोनों तेजी से मंगलू की तरफ़ बढे ।

यही वो वक्त था कि मंगलू ठिठका और पलटकर उन्हें देखने लगा ।

ऐसा होते ही दोनों सकपका उठे । आगे बढने की रफ्तार कुछ कम हुई ।

" ये जानता था कि हम पीछे आ रहे हैं ।" सतपाल के होठों से निकला ।

"नहीं, ये नहीं जान सकता ।" मोना चौधरी अजीब-से स्वर में बोली ।

मंगलू के चेहरे पर जहरीली मुस्कान थिरक रही थी ।

दोनों उसके पास पहुंचते जा रहे थे ।

"आओ ।" मगलू कह उठा-"बहुत मेहनत कर रहे हो शैतान के बेटे का चाकू पाने के लिए !"

"तुम भी तो उसे बचाने में वहुत मेहनत कर रहे हो ।" सतपाल कह उठा ।

" बहुत बडी गलती कर दी पीछे आकर !" मंगलू गुर्रा उठा । "

"मंगलू चाकू मेरे हवाले कर दे !" सतपाल सख्त स्वर मे बोला----" वरना अंजाम बुरा होगा ।"

"मंगलू !" हंस पड़ा--“इस वक्त तू मंगलू से नहीं जंगला से बात कर रहा है ।"

"ओह समझा । पर तू है कौन?"

मोना चौधरी और सतपाल मंगलू से चार कदम पहले ठिठक गए।

"शैतान के बेटे का छोटा-सा सेवक !"

" तू बीच मे क्यों आया ?"

"बचाना है मगलू को, वो तुम दोनो का मुकाबला नहीं कर सकता । शैतान के बेटे के चाकू की रक्षा करना धर्म है ।"

"तु हमारा मुकाबला नहीं कर सकता जंगला?" सतपाललं दहाडा ---" हम सुरक्षित है शैतानी ताकत से ।"

"अच्छा वो कैसे?”

"मैने तो खुद को कब से सुरक्षित कर रखा है । मुझे मारने के लिए शैतान के बेटे को स्वयं धरती पर आना होगा ।"

"बो आने वाला है और तेरे को नहीं छोड़ेगा सतपाल ।।"

" तू मोना चौधरी को भी कुछ नहीं का सकता, क्योंकि तांत्रिक मोहम्मद का धागा इसके गले में है । तेरा कोई भी वार तब तक मोना चौधरी पर नहीं चल सकता, जव तक कि उसके गले मैँ नीला धागा है ।"

 


मंगलू के होंठों से गुर्राहट निकली । "तू तो फंस गया जंगला---अब तो हम शैतान के बेटे का चाकू ले जाएंगे ।"

"मेरा काम शैतान के बेटे के चाकू की रक्षा करना है , किसी का लिहाज नहीं करूगा ।"

"तात्रिक मोहम्मद का भी नहीं?" सतपाल ने सख्त स्वर में पूछा ।

"नहीं ।"

"तांत्रिक मोहम्मद की शक्तियों का तू मुकाबला नहीं कर सकता---वो तेरे को मार देगा ।"

ठीक इसी पल मोना चौधरी ने खतरनाक ढंग से मंगलू पर छलांग लगा दी ।

महज चार कदम का फासला था उनके बीच ।

मोना चौधरी सीधी मगलू से जा टकराई और उसे लेते नीचे जा गिरी । दोनों लुढ़कते चले गए ।

फिर दोनों संभले और उछलकर खडे हो गए । खूनी निगाहों से एक्र-दूसरे को देखा ।

तभी मंगलु का हाथ धूमा और मोना चौधरी के चेहरे से टकराया । सामान्य ढंग से उसका हाथ मोना चौधरी को लगा । खास तकलीफ न हुई ।

" मैंने कहा था जंगला !" सतपाल कठोर स्वर में बोला--"तेरी ताकत हम पर कोई असर नहीं करेगी !"

"तू शेतान के बेटे का चाकू नहीं ले सकेगा !"

सतपाल खतरनाक ढंग से मंगलू की तरफ बढा !! ठीक इसी वक्त मोना चौधरी उस पर झपटी !!

मंगलू ने दोनों को एक साथ अपनी तरफ़ आते देखा तों फौरन नीचे झुका और सड़क पर पडी ईंट उठाकर पास आ चुके सतपाल पर दे मारी ।

सतपाल खुद को बचा न सका और माथे पर लगी ईट । वो कराह उटा ।। तब तक मोना चौधरी ऩे पास पहुंचकर मगंलू का गला पकड़ लिया और दबाने लगी ।

मंगलू की आंखें बाहर को उबली । छटपटाकर उसने खुद कौ बचाना चाहा, परंतु आजाद न हो सका । खुद को बचाने की कई बार तरकीब लगाई परंतु मोना चौधरी की उंगलियां उसके गले पर कस चुकी थी । तभी मगलू की निगाह मोना चौधरी के गले पर पड़े नीले रंग के धागे पर पडी और कुछ नहीं सूझा उसे तो उसने हाथ आगे बढाया और धागा पकड़कर तीव्रता से हाथ को झटका दिया ।

मोना चौधरी की गर्दन को तीव्र झटका लगा और धागा टूटकर मंगलू के हाथ में झूलने लगा ।

अगले ही पल मंगलू ने अपना हाथ घुमाया तो मोना चौधरी के गाल पर पड़ा । मोना चौधरी को ऐसा लगा जैसे हधौड़ा उसके गाल से आ टकराया हो, उसके होंठों से चीख निकली और वो नीचे जा गिरी । उस धागे के टूटते ही शैतानी शक्तिया उस पर असर करने लगीं थीं ।

मंगलू ने धागा एक तरफ़ फेका और क्रोध से भरा आगे बढा ।

मोना चौधरी के पास पहुंचा जो कि खड़े होने का प्रयत्न कर रही है थी ।

उसने मोना चौधरी के सिर के बाल पकड़कर खड़ा किया और जोरों का एक घूंसा उसने मोना चौधरी के सिर पर मार दिया ।

मोना चौधरी के होंठों से दबी-दबी चीख निकली और नीचे गिरकर बेहोश होती चली गई ।

मंगलू के होंठो से गुर्राहट निकली और सतपाल की तरफ देखा ।

सतपाल सड़क पर बेहोश पडा था । उसके माथे से खून निकल रहा था ।

मंगलू पलटा और तेज-तेज कदमों से आगे बढ गया ।

करीब पांच मिनट बाद मंगलू के कानों में जंगला के फुसफुसाहट पड़ी ।

"देखा मंगलू दोनो को ढेर कर दिया । मैं बीच मे न आते तो वो दोनों तेरे से जीत जाते ।!

"हाँ, सच कहता है तू।” मंगलू के होंठ हिले !"

"लेकिन एक गड़बड़ हो गई !"

"क्या?”

"मोना चौधरी के गले में पड़ा तांत्रिक मोहम्मद का धागा मुझे छोड़ना पड़ा, तभी मेरी ताकत ने उस पर असर किया!"

"धागा तोड़ने, से गड़बड़ क्या हो गई?”

“तांत्रिक मोहम्मद बहुत शक्तिशाली है । उसकी किसी चीज को तोढ़ना दुश्मनी का डंका बजाने के बराबर है । अब तक उसे पता चल गया होगा कि उसका दिया धागा तोड़ दिया गया है !" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पड़ रही थी ।

"तेरे को ऐसा नहीं करना चाहिए था ?"

"न करता हो खतरा पैदा हो जाता । मोना चौधरी मुझ पर भारी पड़ रही थी ।"

"अब क्या होगा?" मंगलू के होंठों से निकला ।

"बेलीराम से बात करूगा, वो बताए शायद कि तात्रिक मोहम्मद तेरा कुछ बिगाड लेगा । तात्रिक मोहम्मद के पास वहुत शक्तियां हैं । वो शरीर वाले या विना शरीर वाले किसी के पास भी पहुच सकता है ।"

“ओह्म"

"अब हमें तेजी दिखानी है । दोपहर तक हम बेलीराम के पास पहुंच जाएंगे ।"

"तू शैतान के बेटे से भी तो बात कर सकता है तात्रिक मोहम्मद के बारे में ।"

"शेतान का बेटा इन बातों में नहीं आता । उसकी अपनी दुनिया है । वॅ अपने कामों में व्यस्त रहता है ।”

" तूने शैतान के बेटे का चाकू बचाने के लिए तांत्रिक मोहम्मद का धागा मोना चौधरी के गले से तोड़ा । तो ऐसे में शैतान के बेटे को तेरे काम नहीं आना चाहिए क्या?"

"मेरा फर्ज था कि शैतान के बेटे के चाकू की रक्षा करूं । मैं सेवक हूं। मैंने अपना काम किया । मेरी वजह से शैतान का बेटा क्यों तांत्रिक मोहम्मद से झगडा लेगा ! ऐसे तो शैतान के बेटे को जाने किस-किस से झगड़ा लेना पडेगा ।”

" समझा, तो तेरे को अपनी मुसीबत से खुद ही निबटना होगा ।"

"हां । अब देखना तो ये है कि तांत्रिक मोहम्मद मेरी हरकत पर क्या कदम उठाता है ।”

@@@@@@@@@@@@@@@@@

 


तात्रिक मोहम्मद झोंपड़े के भीतर तब अपने घास के बिछौने पर लेटा आराम कर रहा था ।

उसकी आंखें बंद थीं । कमर के गिर्द लंगोट जैसा कोई कपडा बांध रखा था । दो दिन से वो इसी तरह लेटा हुआ था । अभी उसने उठना नहीं था । वो ऐसा ही था । समाधि में तो बैठा रहता, लेटता तो कई कई दिन न उठता था ।

उस वक्त सुबह के सात के आस-पास का वक्त होगा कि एकाएक तांत्रिक मोहम्मद चोंककर उठ बैठा, परंतु उसकी आखें बंद ही रही, वो बड़बड़ा उठा ।

" ये क्या हो रहा है-कुछ हुआ है, वरना मुझे कुछ होने का अहसास न होता । क्या हुआ है ?"

अगले ही पल तांत्रिक मोहम्मद की आखें खुली वो उसी पल उठा और झोंपड़े से बाहर निकल गया । सुबह की ठंडी हवा का झोंका उसके शरीर से जा टकराया।

तांत्रिक मौहम्मद उस झोंपड़े में पहुंचा, जहां हड्डियां बिखरी पडी थीं । कोने में वने हवनकुण्ड के पास जा बैठा और होंठों-ही-होंठों में किसी मंत्र का जाप करते हुए, कोने मे बने हुए हवन की राख में हाथ घुमाने लगा । बीते वक्त के साथ-साथ उसके होंठों से निकलने वाली मंत्रों की वड़वड़ाहट तेज हो गई।

एकाएक हवनकुंड में फिरता उसका हाथ रुका ।

मंत्रों कां बड़बडाना बंद हो गया ।

राख में लिपटा उसका हाथ हवन कुड से बाहर आया तो हाथ में धागा लिपटा हुआ था ।।

कुछ पल टकटकी बांधे वो धागे को देखता रहा ।

"ओह समझा, किसी ने मुझे चुनौती दी है । मैंने जो धागा सतपाल को दिया था, किसी ने उस को तोड़ दिया । आह, कौन हो सकता है ऐसा बहादुर, जो मेरी शक्तियों को इस तरह आंच पहुंचाए ।"

बड़बड़ाते हुए उसने धागा एक तरफ रखा और समाधि में लीन होगया । गहरी खामोशी छा गई बहां ।

मिनट-भर बाद उसने आँखें खोली । गुस्सा था उसकी आंखों में।

" तो शेतान का बेटा मुझसे टक्कर की सोच रहा है । 'उसकै सेवक ने मेरी शक्तियों का धागा तोड़ दिया ।" तांत्रिक मोहम्मद ने गुस्से मैं कहा और हवनकुण्ड की राख बाहर निकालने लगा।

फुर्ती से उसने दोबारा हवनकुंड तैयार किया और घी डालकर लकडियों मैं आग लगाई, फिर पास पड्री हड्डी उठाकर हवनकुंड में डाली और किसी मंत्र का उच्चारण करने लगा ।

ज्यादा देर न हुई कि हवनकुंड से निकली तांत्रिक बेलीरामृ की आबाज सुनाई दी।

"कैसे याद किया तांत्रिक मोहम्मद?"

“बेलीराम ।" तांत्रिक मोहम्मद का स्वर, कडवा-सा था----" अब तो तू बहूत ताकतवर होगया हैं ।"

" तुमसे तो कम ही हूं मोहम्मद !!"

"मुझे तो लगता है कि तू मेरे से ज्यादा ताकतवर हो गया है ।"

"क्यों कह रहा है ऐसा?"

"शैतान के बेटे के सेवक जंगला ने मेरा दिया धागा तोड दिया !!"

"ओह मुझे ये खबर नहीं थी ।”

"पेरी मांद में हाथ डालने की तुम लोगों की हिम्मत कैसे हुई?"

" जंगला से अनजाने में हो गया होगा । उसकी तरफ से मैं माफी मागता हूं । समझा दूगा उसे ।"

"जंगला बच्चा नहीं है, जो तुझे समझा देगा । वो सब जानता है, फिर भी उसने मेरी शक्तियों को तोड़ा । मैं सव देख चुका हू । जंगला उस वक्त शैतान के बेटे का चाकू सतपाल और मोना से बचा लेना चाहता था ।"

"मैं समझा दूगा जंगला को !"

"बात ऐसे खत्म नहीं होगी ! क्योकि ये काम जान-बूझकर किया गया है ।"

"क्या चाहता है तू?"

"सजा भुगतनी होगी बेलीराम....." तात्रिक मोहम्मद जैसे दहाड रहा था ।

" क्या सजा देगा !"'

"शैतान के बेटे का चाकूं मेरे, हवाले करना होगा, तभी माफी मिलेगी !"

" बूढा होगया है तू... !"

"क्या बकवास करता है ।”

"मैं ठीक का रहा । तेऱी मांग बहुत ही ग़लत हैं । तूने कैसे सोच लिया कि शैतान के बेटे का चाकू तेरे को मिल सकता है । उसकी शैतान के बेटे को जरुरत है ये तू भी जानता है !" बेलीराम का शांत स्वर वहां गूंज रहा था ।

“इसका मतलव तू मेरा मुकाबला करेगा?”

" मैंने ऐसा तो नहीं कहा... !"

"तो फिर शैतान के बेटे का चाकू मुझें दे दे । मंगलू वो चाकू लेकर तेरे पास आ रहा है।"

"ये सम्भव नहीं, तू जानता है कि शैतान का बेटा वापस जीवन में आने के लिए कितनी चेष्टा कर रहा है ।"

"मैं तो सिर्फ इतना जानता हूं कि तुम लोगों ने मेरी शक्तियों को . तोड़कर, मेरे को ललकारा है ।"

"भूल जा, क्षमा दे दे जंगला को…-मैं समझाऊंगा उसे ।"

"मैँ चाहकर भी क्षमा नहीं दे सकता बेलीराम ., जिस दिन किसी को क्षमा करूंगा उस दिन से मेरी शक्तियों क्षीण हो जाएंगी । मेरी ताकत कमजोर हो जाएगी । मैं किसी को क्षमा नहीं कर सकता ।"

बेलीराम की आवाज नहीं आई ।

“शेतान के बेटे का चाकू मेरे हवाले कर दे, ये ही तुम लोगों की सजा है ।"

“ये संभव नहीं ।" बेलीराम को गंभीर स्वर सुनाई दिया-----"कोई और सजा दे दे !"

“जो सजा मेरे मुँह से निकली है, वो ही सजा दूगा । नही मानेगा तो बहुत बुरा होगा ।

"मोहम्मद तू क्रोध मे है जब शांत होगा , तब तेरे से बात करूंगा ।"

"बेलीराम !" दहाड़ा मोहम्मद ।

परंतु बेलीराम की आवाज नहीं आई ।

एकाएक तांत्रिक मोहम्मद के कठोर चेहरे पर मुस्कान नाच उठी ।

" मैं जानता था…मुझे पहले से ही पता था कि झगड़ा होकर रहेगा !"

 


मोना चौधरी और सतपाल को होश आया तो खुद को उन्होंने सरकारी अस्पताल के बैड पर पड़े पाया । दोनों वेड पास ही थे । सतपाल के माथे पर पट्टी बंधी हुई थी । नर्स से फ्ता चला कि उन्हें दो पुलिस वाले अस्पताल लाए थे और तब से दोनों बेहोश थे।

पुलिस वाला तब शायद पास ही क़हीं था, क्योंकि नर्स के जाते ही वो आ पहुंचा और उनके बेहोश होने और घायल होने के बारे में पूछताछ करने लगा कि ये सब कैसे हुआ ।"

तब सतपाल ने यही कहा कि वे भाई-बहन हैं, ट्रेन से उतरकर जा रहे थे कि दो लोगों ने उन्हें लूटने की चेष्टता की, उन्होंने मुकाबला किया और वे घायल और बेहोश हो गए । लुटेरे उनका सामान ले गए, जो कि सूटकेस और बैग के रूप में था । इस पर पुलिस वाले ने कहा कि वे थाने चलकर चोरी की-लूट की रिपोर्ट लिखा दे ।

पंरंतु उनके ये कहने पर कि वो परदेसी हैं और इस चक्कर में नहीं पड़ना चाहते, वो पुलिस वाला वहां से चला गया । दोनों ने उसे कई बार थैंक्स कहा कि वो उन्हें अस्पताल लाया ।

पुलिसं वाले के जाने के बाद दोनों की नजरे मिलीं ।

“हम सफ़ल नहीं हो सके ।"

"मुझे अफसोस है ।"

"तब मंगलू में शैतानी ताकत मौजूद थी । उसी ने हमारा मुकाबला किया !"

"मेरा वो नीला धागा ।" मोना चौधरी का हाथ अपने गले पर था । सतपाल की निगाह उसके गले पर गई ।

"कहां गया?" सतपाल के होंठों से निकला !"

"मंगलू ने तोड दिया था ।"

“ओंफ्फ..... !" सतपाल उसी पल बेचैन हो गया ।

"क्या हुआ?"

"हुआ नहीं, होगा--बुरा होगा । वो तांत्रिक मोहम्मद का धागा था । शैतानी शक्ति द्वारा इस प्रकार उसके धागे को तोड़ा जाना....."

“कोई खास बात?"

"हमारे हक में ठीक बात ही है । तांत्रिक मोहम्मद अब शैतानी शक्तियों पर गुस्सा उतारेगा ।"

"कैसे?"

"बो मैं नहीं जानता, लेकिन तांत्रिक मोहम्मद अव खामोश नहीं बैठेगा" । सतपाल ने गहरी सांस ली।

"शेतान के बेटे के चाकू के बारे में सोचो ।"

" ऊब मंगलू को पकड़ पाना आसान नहीं---- "वो दोपहर तक बेलीराम तक पहुंच जाएगा।"

“इसका मतलब हम हार गए?"

सतपाल ने मोना चौधरी को देखा और मुस्कराया ।

"ये खेल कभी खत्म नहीं होगा मोना चौधरी!”

"क्या मतलब?”

“अभी तो ये खेल शुरू हुआ है । शुरुआत है । सही मायने में तो शुरुआत तब होगी, जब शैतान का बेटा, भवतारा जिन्दा हो जाएगा, पुन: मृत्यु से जीवन में प्रवेश कर जाएगा । हो सकता है ये मामला मेरे जीवन का अंतिम मामला हो ।"

उसकी बात समझने की चेष्टा में मोना चौधरी उसे देखने लगी ।।

"शेतान का बेटा जिन्दा हो सकता है ।"

" शैतान के बेटे यानी कि भवतारा जैसे शैतानी शक्तियों के मालिक दोबारा जन्म लेने के लिए, शैतानी मंत्रों से सिद्ध कर रखी कोई भी चीज, अपने अंतिम वक्त में, इस दुनिया मेँ किसी सुरक्षित जगह छोड़ जाते हैं । साथ ही अपना शरीर भी विभिन्न तरह के रसायनों में लपेटने को, अपने चेलों से कह देते है और वे उस शरीर की देखभाल करते हैं । उसके बाद दोबारा जन्म लेने के लिए, उसी सिद्ध चीज का इस्तेमाल करना पड़ता है, तभी पुन: जीवित हुआ जा सकता है ।"

"ओह......!" मोना चौधरी ने कहा…“लेक्रिन वो चाकू मगंलू के हाथ कैसे आ गया?"

" ये होना ही था । मगंलू नामक के युवक ने भवतारा के पुन: जन्म लेने में सहायता करनी थी । ऐसे में मंगलू के हाथ ही वो चाकू हाथ लगा । शायद 210 बरस से रखा शैतान के बेटे का चाकू किसी की छेडछाड से अपनी जगह से निकल गया होगा और वो मंगलू के हाथ लग गया । शैतानी शक्तियां चाकू को मंगलू के सामने ले आई । मंगलू सोचता होगा कि वो उसे मिला है, ये गलत है । शैतानी शक्तियों ने ही चाकू मंगलू के सामने किया ।

लेकिन तुम कैसे कह सकते हो कि ये खेल शुरू हुआ है!!" मोना चौधरी ने पूछा ।

सतपाल कुछ खामोश रहकर गंभीर स्वर में कह उठा ।

"तुम्हारा काम तो ख़त्म हो गया मोना चौधरी! यूं ही तुम्हारा दखल इस मामले में हो गया, परंतु मेरा दखल यूं ही नहीं हुआ इस मामले में । मुझे इस मामले में दखल देना ही था । क्योंकि ये ही काम है मेरा । खतरा देखकर मैं अपने काम से भाग नहीं सकता । मेरी आदत ही कुछ ऐसी है ।" सतपाल ने माथे पर बंधी पट्टी टटोलते कहा--- “शेतान के बेटे ने अगर पुन जंन्म लिया तो वो अपना पेट भरने के लिए, इंसानों का खून पीएगा और मुझे उसे रोकना होगा ।"

मोना चौधरी उसे देखती रही ।

"भवतारा इंसानी खून पीने के लिए ही तो जन्म लें रहा है । उसे इंसानों का खून बहुत अच्छा लगता है और जब वो ऐसा करेगा तो मुझे उसे रोकना होगा !"

" तुम रोक लोगे उसे !"

"यही तो असली खतरा होगा मेरे लिए । मैं शेतानं के बेटे का मुकाबला नहीं कर सकता ।"

"फिर क्या फायदा उसे रोकने की केशिश करके?"

"ये मेरा काम हैं और अंत तक, मैं अपना काम करते रहने की कोशिश करूंगा । सतपाल बोला…“मैं जानता हूं कि वक्त बहुत भयानक होगा, जब मैं भवतारा को रोकना चाहूंगा खून पीने से । क्योकि मेरी शक्तियां क्षीण पड जाएंगी, शैतान के बेटे के सामने । वो बैसे भी मेरे से उखडा हुआ होगा ।"

" क्यों ?"

"क्योंकि मैंने जाने कितनी शैतानी आत्माओं को वापस भेजा है, जो इंसानों के शरीर में प्रवेश करके, शरीरों पर अपनी हुकूमत कायम कर लेना चाहती थी । ये बात शैतान के बेटे को क्यों पसंद आएगी ।"

“फिर तो शैतान का बेटा तुम्हें भी खत्म करना चाहेगा ।”

"ये ही तो मैं कहना चाहता हुँ ।"

"मैं तुम्हारे साथ ही रहुंगी इस काम में ।"

सतपाल ने गहरी निगाहो से मोना चौधरी को देखा ।

" तुम शायद मेरी बात को मजाक समझ रही हो तभी साथ रहने को कह रही हो ।"

"मैँ मजाक नहीं समझ रही ।"

"तो फिर समझदारी इसी में है कि अब मेरे से दूरी बनानी शुरू कर दो ।"

"मेरे साथ रहने में क्या हर्ज......?"

“तुम मेरी कोई सहायता नहीं कर सकती । अब जो तो होगा, शैतानी और पवित्र ताकतों से होगा । तुम साथ रहोगी तो मरोगी ।"

"मेरी फिक्र मत करो... मैँ..!"

"क्यों अपनी जान गंवाना चाहती हो? तुम्हें तो........!"

"मै तुम्हारे साथ रहूंगी-तुम्हें तो मेरे साथ रहने पर कोई ऐतराज नहीं?"

" तुम मरना चाहती हो तो मुझे क्या ऐतराज हो सकता है, लेकिन ये बात समझदारी नहीं ।"

"शैतान के बेटे के बारे में सोचो कि अब हम क्या कर सकते है . . ।

“मैं अपने भाई सजन से बात करता हूं । वो बेलीराम के ड़ेरे पर उस पर नजर रखने गया हुआ है ।"

"तुम तीन भाई हो ?"

" हां...मैं...!"

तभी नर्स पास आ पहुंची । नर्स ने उनका हाल पूछा । वो अब ठीक ही थे । तो उसने जाने को कह दिया ।

सतपाल और मोना चौधरी अस्पताल से बाहर निकले ।

सतपाल ने मोबाइल फोन निकालकर राजन को फोन किया ।

"कहो ।" राजन की आवाज कानों में पड्री ।

“क्या चल रहा है?" सतपाल ने पूछा ।

"सब वैसा ही है, मैं बेलीराम के डेरे के लोगों में दोस्ताना कायम कर रहा हूं। बेलीराम अभी तक नहीं दिखा ।"

"यहा गड़बढ़ हो गई ।"

""क्या?"

"मगलू से हम शैतान के बेटे का चाकू नहीं ले सकै ।" सतपाल ने अफसोस-भरे स्वर में कहा ।

" अगर ले लेते तो सब ठीक हो जाता !"

सतपाल ने बताया कि वो कहां से बोल रहा है ।

"ये तुम यहां कैसे ?" राजन की आवाज कानों में पडी । सतपाल ने सब कुछ बताया।

"तो मंगलू चाकू के साथ बेतीराम के पास ही आ रहा है?"

"हां ?"

"मैं उसे रास्ते में घेर लेता हूं !”

"ये गलती मत करना । मैं और मोना चौधरी ये ही काम कर चुके हैं । मंगलू शैतानी शक्तियों की सुरक्षा के घेरे में है !"

“मोना चौधरी को चाकू वापस नहीं करना चाहिए था ।”

“वो बीती बात हो गई, अब की बात करो ।" सतपाल ने मोना चौधरी पर नजर डालकर कहा ।

"अब क्या?”

"वो चाकू हाथ में आते ही बेलीराम, शैतान के बेटे भवतारा के शरीर के पास जाएगा । जहाँ भी उसने शैतान के बेटे का शरीर सुरक्षित रखा हुआ है और तुम वहीं पर हो । बेलीराम के पीछे जाकर ये जान सकते हो कि भवतारा का शरीर कहां पर है !"

"मैं समझ गया ।"

"खतरा है ।”

"मालूमं है ।"

"अगर बेलीराम को तुम पर जरा भी शक हो गया तो वो तुम्हें मार डालेगा !"

"मैं सावधानी से उसका पीछा करूगा ।"

"बेलीराम की शैतानी शक्तियां उसे इस बात का अहसास करा सकती हैं कि तुम उसका पीछा कर रहे हो ।"

"मैं जरूरत से ज्यादा सावधानी से काम लूगा ।"

"मैं इसी शहर में मोना चौधरी के साथ रुका हुआ हूं । जो भी हाल हो, फोन पर मुझे बता देना। मैं तेरे फोन के इंतजार में रहुंगा ।"

"नईं बात के पता चलते ही मैं तुम्हें फोन करूंगा !"

 


सतपाल ने फोन बंद किया और मोना चौधरी से कहा ।

"हमे इसी शहर में किसी होटल में रुकना होगा ।"

"ठीक है ।" मोना चौधरी ने सिर हिला दिया ।

" मुझे लगता है कि आने वाला वक्त वहुत खतरनाक होगा ।"

सतपाल के होंठ र्भिच गए ।

“क्या हम बेलीराम से बात नहीं कर सकते कि.....!"

"गलती मत कर देना । वो शैतान के बेटे का सच्चा भक्त है, तुम्हारे टकड़े कर देगा ।"

"अब तो मुझे भी इस मामले में दिलचस्पी होने लगी है ।" मोना चौधरी मुस्करा पडी ।

"जल्दी मरोगी ।"

@@@@@@@@@@@@@@@@@

मंगलू तांत्रिक बेलीराम के डेरे पर पहुचा और उससे मिला ।।

बेलीराम ने उसे देखा तो उसके चेहरे पर मीठी मुस्कान नाच उठी ।

"तुम शैतान के बेटे के सच्चे सेवक हो ।"

" मुझे जो करने को कहा गया, वो ही मैंने किया" । मंगलू बोला ।

“तुम जैसे भक्त वहुत कम मिलते हैं । नगीने की तरह तुम जैसे भत्तों को दूढ़ना पड़ता है ।" बेलीराम ने कहा ।

" मैने ये काम दौलत पाने के लिए किया है।"

" दौलत! " बेलीराम मुस्कराया--" दौलत का हमारे पास क्या काम? हमारे पास तो विद्या है, ताकते हैं, वो तुम्हें देंगे ।"

"लेकिन मुझे दौलत चाहिए । मुझे बहुत सी दौलत देने को कहा गया है !"

तांत्रिक बेलीराम कुछ कहने लगा कि वहां शैतान के बेटे का स्वर गूजा ।

"बेली !"

"ओह महागुरू !" बेलीराम ने फौरन हाथ बाध लिए।

"मंगलु को तुम नहीं मैं दूगा । मैंने वादा किया है मंगलू से ।"

"मुझे खबर नहीं थी आपके वादे की ।"

तभी मगंलू बोला ।

“तुम शैतान के बेटे भवतारा हो । मैंने तुम्हारी आवाज पहचान ली है ।"

" तुमने सही पहचाना मंगलू....!" शैतान के बेटे की आवाज गूंजी ।

"तुम कहाँ. हो?”

"तुमसे बहुत दूर, अपनी दुनिया में ! "

"मुझे दौलत कब दोगे?”

"बहुत जल्द, जब मैं जिन्दा हो जाऊगा । मेरे जिन्दा होने में अब ज्यादा वक्त नहीं रहा !"

"तुमने पहले नहीं कहा था कि जिन्दा होने के' बाद मुझे दौलत दोगे !"

" पहले उस सिलसिले में हमारी बात न हो पाई थी ।तुम मेरे सच्चे सेवक हो । मैं तुम्हारी कद्र करता हू । तुमने मेरा खयाल रखा, अब मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगा ।। बेलीरांम! "

"महागुरु?"

"मेरा चाकू इससे ले लो ।"

“मंगलू!" तांत्रिक वेलीराम ने, कहा…"वो चाकू मुझें है दो ।"

मंगलू ने लेदरकैस में फसा चाकू निकाला, और बेलीराम की तरफ बढा दिया ।

बेलीराम की आंखें चंमक उठी ।

चाकू थामते हुए उसका हाथ कांपा, फिर स्थिर होगया ।हाथ में थमे चाकू को बेलीराम चमक भरी नजरों से देखने लगा । उसपर हाथ फेरने लगा । बहुत खुश दिखा वो ।

"बेलीराम !!" शैतान के बेटे की आवाज गूजी----"तुम् जानते ही हो कि अब तुम्हें क्या करना है?"

“हाँ महागुरु?"

"फौरन ये कांम करों । मंगलू को अपने साथ ले जाओ और इसे वहीं पर मेरे पास छोड़ देना ।"

"ऐसा ही करूंगा मैं ।" तात्रिक बेलीराम ने कहा------" एक समस्या है महागुरु!"

" कहो ।"

"तांत्रिक मोहम्मद नाराज है !! उसका धागा जंगला ने तोड दिया है । वो झगड़ा करने का मन बना रहा है ।"

"ये तुम लोगों की बाते हैं । खुद ही निबटो ।"

"झगडा खत्म करने के लिए बो आपका चाकू मांग रहा । महागुरू !"

"बूढा हो गया है मोहम्मद । तभी तो उसने चाकू मांगा । वो हमारा कुछ न बिगाड पाएगा ।'"

"ये ही समस्या थी महागुरू !"

"इन वातो में वक्त बर्बाद न करके मेरा काम करो । शेतान के वेटे की आबाज आई ।

"मैं मंगलू के साथ अभी यहां से रवाना होता हूं मृहागुरु? तांत्रिक बेलीराम ने कहां ।

फिर शैतान के बेटे की आवाज-नहीँ आई ।

 
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