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गद्दार देशभक्त complete

बलवंत के मुंह से बोल न फूट सका । ओवरकोट धारी को ऐसी नजरों से देखता रह गया वह अपने सामने खडी कुतुबमीनार को कत्थक करते देख रहा हो ।

" पहले सोचा था इस बारे में तुम्हें भी कुछ नहीं बताऊंगा मगर लग रहा है, तुम्हें बताए बगैर काम नहीं चलेगा ।" ओवरकोट थारी कहता चला गया----'"बहरहाल, तुम्हारी मदद भी तो चाहिए ।"

"म------मेरी मदद ?"'

"यकीनन ।"

"मेरी क्या मदद चाहिए तुम्हें और तुम क्या करने वाले हो?”

ओवरकोट धारी ने बताया तो बलवंत राव की हालत ऐसी हो गई जैसे किसी साधु के श्राप से पत्थर की मूर्ति में बदल गया हो ।

ओवरकोट धारी ने पूछा'-'"क्या हुआ"'

"त. . .तुम पागल तो नहीं हो?” पत्थर के होंठ हिले ।

"वो तो तुम जैसे लोग मुझे वहुत पहले घोषित कर चुके हैं । अब तो सिर्फ यह बताना है कि मेरी मदद करोगे या नहीं! यह तो समझ ही गए होगे कि अगर तुमने इंकार भी किया तो मैं अपने कदम वापस खींचने वाला नहीं हूं । जंग में पहला तीर छोड़ने के बाद कदम वापस खींचने भी नहीं चाहिए और वो मैं छोड़ चुका हूं ।"

बलवंत राव ने बस तीन शब्द उगले-"क्या चाहते हो?"

ओवरकोट अरी ने बताना शुरू किया और जितना बताता गया ! बलवंत की आखें उतनी ही फैलती चली गई ।

कल्याण होलकर आईबी के मुख्यालय में स्थित, अपने आफिस में बैठा कम्यूटर में उलझा हुआ था ।

उसने इंटरपोल पुलिस की वह वेबसाइट खोल रखी थीी, जिस पर आईबी की तरफ से आधिकारिक तौर पर उन तीनों विदेशियों के फोटो और भौतिक पहचान का मुकम्मल डाटा हाल ही में अपलोड कराया गया था और अव आईबी को इंटरपोल की तरफ से अाने वाली किसी प्रतिक्रिया का इंतजार था मगर, जो आज एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नहीं आई थी ! मारे गए विदेशियों को लेकर होलकर का अंदाजा अगर सही था और वे तीनों या फिर उनमें से कोई एक अपने मुल्क में या किसी भी मुल्क में वांटेड थे, तो इंटरपोल के पास उनका डाटा होना चाहिए था और इस तरह होलकर को उनकी शिनाख्त सुलभ हो सकती थी ।

अगर वे उतने की क्रिमिनल नहीं थे, जितना होने पर कोई भी इंटरपोल के रॉडार पर आता है तो होलकर की सारी कोशिश बेकार साबित होने वाली थी । तब, उन तीनों कत्लों की गुत्थी सुलझाने के लिए और उस मामले की तह तक पहुंचने के लिए उसे कोई दूसरा रास्ता अख्यियार करना पड़ता, जिसका कि उसे दूर--दूर तक कोई और-छोर नजर नहीं आ रहा था ।

अभी कोई रिजल्ट नहीं निकला था कि प्रताप ने आफिस में कदम रखा ।

प्रताप उसका एक युवा और होनहार जूनियर था, जो आईबी में भर्ती होने के पहले से उसका दोस्त था । उसे देखते ही होलकर का हाथ स्वत: ही कम्यूटर के माउस से हट गया ।

"आओ प्रताप, यया खबर लाए हो?”

"एक से ज्यादा खबर लाया हूं बॉस ।" वह अपनी अादत के मुताबिक बेबाकी से बोला ।

“अच्छा !" होलकर की उम्मीद रोशन हुई----“क्या कोई खबर उन विदेशियों के कत्ल से भी सम्बंध रखती है?"

"एक खबर उस मामले से भी सम्बंध रखती है ।"

"जल्दी बताओ ।"

"बताता हूं यार । सांस तो लेने दो ।"

"यार ?" होलकर ने आंखे निकाली ।

"सॉरी . . .बॉंस ।"

"हां । यह ठीक है । आगे बोलो ।"

"आगे क्या बोलूं ?”

" पहले मेरे केस से सम्बंध रखने वाली खबर सुनाओ ।"

"दूसरी खबर भी उसी केस से सम्बंध रखने वाली हो सकती है !"

"बाद में देखेंगे । पहले पहली सुनाओ ।"

प्रताप सांस लेने के लिए रुका, फिर बोला---"आज इतने दिनों बाद पहला ऐसा शख्स मिला है, जिसके साथ अपनी मौत से पहले तुम्हारे एक मृतक को देखा गया है ।"

"कौन से मृतक को?"

''तीसंरे को, जो हाल ही में मरा है ।"

"अच्छा ।" होलकर संभलकर बैठ गया------"कौन है वह शख्स ? और उसके साथ थर्ड मृतक को कब और कहां देखा गया?"

"वह शख्स एक है औरत.......सॉरी, लड़की है । बत्तीस-बाईस बत्तीस साइज वाली एक कयामत, जो अपनी फिगर और खूबसूरती में फैशन माडलों को भी मात कर सकती है । हमारे थर्ड मृतक को उसकी मौत से पहले फर्स्ट एंड लास्ट बार उसी बला या बाला के साथ देखा गया था ।"

“कौन है वह बला?"

"इस बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है ।"

“लेकिन कहां देखा गया है उस लड़की के साथ उसे?"

‘'एक हाई प्रोफाइल पब में, वहां वह उस अधनंगी लड़की के साथ बांहों में बांहें डाले होश खोकर नाच रहा था । दोनों ही वहुत ज्यादा नशे में थे ।"

"पब का नाम?"

"याना. . .याना पब ।"

"पता ?"

"खार मेन रोड पर स्थित काफी फेमस पब है ।"

"किसने देखा?"

"पब के एक अटेंडेंट ने ।"

“अटेंडेंट का नाम?"

"पास्को ।"

"गोवानी है क्या?"

"नाम से ही जाहिर है ।"

"कब की बात है?"

“मृतक के कत्ल से एक सप्ताह पहले की ।"

"पास्को ने मृतक को पहचाना कैसे ?"

"अगले रोज अखबार में उसकी मृत अवस्था की फोटो देखी थी । तुम्हें याद होगा, चेहरा इतना नहीं बिगड़ा था कि पहचाना ही न जा सके ।"
 
"फिर भी चुप बैठा रहा ! पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?"

" आम आदमी पुलिस को छूत की बीमारी जो समझता है! मैं भी पुलिस बाला बनकर उससे नहीं मिला था, वरना मुझे भी अपने पास नहीं फटकने देता ।"

"क्या पास्को को पूरा यकीन है कि जिस आदमी को उसने देखा, अखवार में मृत अवस्था में उसी की फोटो छपी थी! मेरा मतलब, उसे पहचानने में उससे कोई भूल तो नहीं हुई है ?"

"नहीं ।" प्रताप ने मजबूती से इंकार में गर्दन हिलाई------" उसे पहचानने में अपने गोवानी से कोई भूल नहीं हुई है ।"

"दावे के वजह?”

"मेरे पास सबूत है ।"

"सबूत? ”

"मेरे इस मोबाइल में है, बल्कि इसमें पड़ी 'चिप' में है ।" उसने अपना मोबाइल निकालकर होलकर के सामने रख दिया ।

" मैं समझा नहीं ।” होलकर के माथे पर वल पड़ गए ।

"उस पब में सीसीटीवी कैमेरे लगे हुए हैं, जो पब के समूचे हॉल में नजर रखते है और पिछले एक माह तक की रिकार्डिंग का डाटा अपनी मेमोरी में सेव रखते हैं । मैंने गोवानी की बताई हुई तारीख तथा समय की रिकार्डिंग को चेक कराया तो उससे गोवानी की बातों की स्पष्ट तस्दीक होगई ।"

" यानी सीसीटीवी रिकार्डिंग में हमारा मृतक उस बला के साथ डांस करता नजर अा रहा है?"

"अपने चक्षुओं से देख तो ।"

होलकर इस तरह मोबाइल पर झपटा कि चीता भी क्या अपने शिकार पर झपटता होगा । उसने प्रताप के मोबाइल में मोजूद सीसीटीवी रिकार्डिंग देखी मगर पूरी नहीं । एक घंटे की रिकार्डिंग देखने का न उसके पास टाइम था और न ही उसकी जरूरत थी । उसे केवल यह पुष्टि करनी थी कि रिकार्डिंग में मृतक ही था और यह पुष्टि केवल पांच मिनट में हो गई । रही उस हसीना की बात, जिसके साथ वह था…वह उसके लिए नितांत अजनबी थी परंतु अल्ट्रा माडर्न हसीना की खूबसूरती के बारे में प्रताप ने जो भी बताया था, वह अक्षरशः सच था ।

वह सचमुच बला की हसीन और सैक्सी थी ।

मादकता उसके अंग-अंग से टपक रही थी ।

अगर वह हसीना आईबी के हाथ लग जाती तो होलकर का रास्ता काफी आसान हो सकता था ।

वह उत्तेजित हो उठा ।

वह एक बड़ा क्लू था जो प्रताप के हाथ लगा था, जिसके जरिए वह दूसरे रास्ते से अपनी मंजिल तक पहुच सकता था ।

“ये चाहिए ।" होलकर मोबाइल मेज पर रखता हुआ बोता ।

"बोला न, अभी इसके बारे में कुछ पता नहीं लग सका है ।" प्रताप बोला-----"लेकिन बकरे की मां कब तक खेर मनाएगी! पास्को का कहना है कि वह गाहे-बगाहे पब में आती रहती है ।"

" अकेली ?"

"बांस । पब में भला किसी अकेली या अकेले का क्या काम?"

"यानी इसके साथ हमेशा कोई-न-कोई होता हैं?"

"हां । यह बला अपने साथ किसी-न-किसी लड़के को लपेट ही लीती है ।"

"क्या पिछले हफ्ते के बाद यह दोबारा पब में पहुची थी?"

"पहुंची थी ।"

"पहुंची थी! कब?"

“कल ।"

"क्या? "

" मैंने कहा, कल उसे फिर उसी पब में देखा गया था बॉस ।"

"किसी दूसरे लड़के के साथ?"

"नहीं, उसी मृतक के साथ ।"

होलकर ने उसे घूरा----" तुम मुझसे मजाक कर रहे हो?”

"मजाक तो आप कर रहे हैं बांस ।"

"कल वह किसके साथ थी?"

"उसका चेहरा भी मेरे मोबाइल में मोजूद है ।"

"अच्छा !"

"कल जिस लड़के के साथ वह पब में पहुंची थी, उसकी सीसीटीवी रिकार्डिंग भी मैंने अपने मोवाइल में सेव कर ली है । कल वह केवल पैतीस मिनट वहां रुकी थी । अगला फोल्डर उसी का है ।"

होलकर ने दोबारा मोबाइल उठा लिया ।

निर्देशित फोल्डर खोला ।

उस फोल्डर में हसीना उतने नशे में नहीं थी । न है आधा-अधूरा लिबास पहन रखा था । इसमें उसने जींस और कुर्ती पहन रखी थी ।

डांस में भी पहले जैसा फूहड़पन नहीं था । इस फोल्डर मे, उसकी बांहों में बाहे़ डाले जो नौजवान म्यूजिक की धुन पर थिरक रहा था, वह कोई विदेशी नहीं था । वह इंडियन था तथा किसी फिल्म स्तर जैसा हैंडसम है स्मार्ट लग रहा था । उसने अपनी आंखों पर गॉगल्स लगा रखा था । होलकर के लिए वह नितांत अजनबी था ।

"यह लडका कौन है?" उसने प्रताप से सवाल किया----"क्या तुम इसे जानते हो?”

प्रताप इत्मीनान से बोला----"' तुम्हें याद है न, मैंने कहा था कि एक से ज्यादा खबर लाया हूं ! यह अगली खबर है ।”

“मैंने इस लड़के के बारे में सवाल किया है !"

"मैं भी इसी लड़के की बात कर रहा हूं !" " प्रताप ने ऐसे अंदाज़ में कहा जैसे धमाका कर रहा हो----"इसका नाम राजा हैं-----राजा चौरसिया ।"

"कौन राजा चौरसिया?"
 
प्रताप के चेहरे पर ऐसे भाव उभरे जैसे उसका धमाका फुस्स हो गया हो और इसका उसे अफसोस हो । फिर, थोड़ा चौंका । जैसे कुछ याद आया हो और तब बोला…“ओहा हां, उन दिनों तो तुम एक खास मिशन पर चीन गए थे । पूरे दो महीनों के लिए!"

“किन दिनों?"

“जिन दिनों राजा चौरसिया नाम की इस अजीमुशशान हस्ती ने एक ऐसा कारनामा अंजाम दिया था जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था ।"

"मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा कि तुम यया कह रहे हो?"

"समझाता हूं बाॉस, असल में तुम्हें पूरा किस्सा एबीसीडी से समझाना पडे़गा ।" कहते हुए प्रताप ने ठंडी सांस ली और पुन: शुरू हो गया

हस्ती का नाम राजा चौरसिया है, वह हमारे मुल्क का एक कुख्यात कम्यूटर घुसपैठिया है, जिन दिनों तुम चाईना गए हैं थे उन दिनों इसने शातिराना हुनर से भारत को नहीं बल्कि सारी दुनिया को हिलाकर रख दिया था और एक घंटे के अंदर------महज एक घंटे के अंदर मुत्क के कई बैकों से ढाई सौ करोड़ रुपए उड़ा लिए थे ।"

"ए. . .एक घंटे के अंदर ढाई सौ करोड़ रुपए उड़ा लिए थे?" होलकर की आंखें हैरानी से फ़टी रह गई थी । मुह से अविश्वसनीय स्वर निकला------" तुम क्या कह रहे हो? ऐसा कैसे हो सकता है?”

"हो सकता है नहीं बॉस, हुआ है । इस इंसान ने, जो उस लड़की के साथ पब में नाच रहा है, इसने यह कारनामा करके दिखाया है । साइबर फ्राड के जरिए इसने बैकों से दाई सौ करोड़ रुपए लिए थे ।"

" कैसे ?"

"अमरीकी कम्पनी के मेन सिक्योरिटी सरवर को हैक करके ।"

"कौन भी अमरीकी कम्पनी ?"

"उस कम्पनी का नाम "एनस्टेज साफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड' है, उसकी इंडियन ब्रांच दिल्ली में कनॉट प्लेस में है ।"

"किसी अमरीकी साफ्टवेयर कम्पनी का भारत के बैकिंग सिस्टम के सरवर से क्या सम्बंध?"

“तुम इसी दुनिया के जानवर हो बॉस या मोहन जीदड़ो और हडप्पा की खुदाई से निकले हुए !"

"मांइड योर लेग्वेज ।" होल्कर ने आंखें निकाली ।

“सौरी बॉस. .लेकिन ऐसा इसलिए मुंह से निकल गया क्योकिं मैं नहीं समझता था कि तुम्हें आजकल की वेर्किग के बारे में मालूम नहीं होगा ।"

"तुम तो जानते हो प्रताप, साइबर दुनिया की जानकारी रखने के मामले में मैं जीरो हूं ! कभी इंट्रैस्ट ही नहीं लिया इसमे ।"

" उम्मीद है अब लिया करोगे ।"

"प्लीज, मुझे सारी बातें खोलकर--------विस्तार से समझाओ ।"

“तो सुनो ।" प्रताप चालू हो गया------"अकेला हमारा देश ही नहीं, सारी दुनिया के मुल्कों के बेैंक अपने अॉन-लाइन फंड ट्रांजेक्शन के लिए इसी अमरीकी कम्पनी पर निर्भर हैं । दूसरे लफ्जों में कहें तो दुनिया भर के मुल्कों के लगभग सारे ही बैंकों के आनलाइन ट्रांजेक्शन को एनस्टेज साफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड ही अंजाम देती है, वह ट्रांजेक्शन चाहे एटीएम कार्ड के जरिए हो, क्रेडिट कार्ड के जरिए हो या फिर अन्य किसी भी आनंलाइन इलेवट्रॉनिक ट्रांसफ़र के माध्यम से । इस संदर्भ में राजा चौरसिया जैसे कम्यूटर हैकरों तथा हर तरह की आंनलाइन धोखाधडी़ को रोकने का जिम्मा भी इसी कम्पनी का होता है । एकाकी होल्डर के एकाउंट से सम्बंधित सभी सन्वेदनशील जानकारियों को गोपनीय रखने का काम भी यही कम्पनी करती है । इसके लिए उसने दुनिया-भर में अपने "थ्री डी सिक्योर साल्यूशन' का अभेद्य कम्यूटर नेटवर्क स्थापित कर रखा है । इसीलिए तो सारी दुनिया के बैंकों ने 'ऐनस्टेज' के साथ आनलाइन फंड ट्रांसफर का करार कर रखा है ।"

"इसके बावजूद राजा चौरसिया ने सारे सिक्योरिटी सिस्टम को धता बताकर दाई सौ करोड़ रुपए लूट लिए?"

" उसने निहायत ही शातिराना तरीका अपनाया था ।"

"वया था उसका यह शातिराना तरीका?"

"मुझे नहीं लगता कि यहां उसके जिक्र का कोई फायदा होगा बॉस । हमारा टार्गेट दूसरा है ।"

"ओ.के तो उस लूट के बाद क्या हुआ?"

"क्या हुआ से मतलब?”

"क्या राजा कभी पकड़ा नहीं गया?"

" पकड़ा गया । सरासर पकड़ा गया । इस तरह के बैंकिग फ्राड की जांच करने वाली ट्रस्टवेयर स्पाइडर लेब नाम की फारेंसिक कम्पनी ने फोरन ही सच मालूम कर लिया था । उसकी निशानदेही पर पुलिस ने फौरन ही राजा को गिरफ्तार कर लिया था !"

"तो फिर वह आजाद कैसे घूम रहा है और जो ढाई सौ करोड़ रुपए उसने लूटे थे, क्या वह रकम उससे बरामद हुई ?"

"एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ था । ट्रस्टवेयर फारेंसिक लेब वालों ने सच भले ही मालूम कर लिया था, लेकिन राजा के खिलाफ़ उसके पास ऐसा एक भी सबूत नहीं था, जो उसे अदालत में मुजरिम सावित कर पाता और सजा दिला पाता । उसके पास तो लूटी गई रकम तक बरामद नहीं हुई थी । वैसे भी साइबर एक्ट को लेकर मुल्क का कानून अभी बेहद लचर है ।"

"तो फिर ?"

"इस मामले को उसी अमरीकी साफ्टवेयर कम्पनी ने हैंडल किया था जिसका बैंकों के साथ करार है, नियमानुसार बैकों को हुए नुकसान की भरपाई एनस्टेज साफ्टवेयर को ही करनी पड़ती, यानी "एनस्टेज‘ बैकों के लूटे गए ढाई सौ करोड़ की देनदार थी । इसके लिए उसने बीच का रास्ता अपनाया ।'"

"बीच का रास्ता?”

‘उसने राजा के सामने शर्त रखी कि अगर यह बैंकों से लूटा गया रुपया वापस कर दे तो वह उसके खिलाफ़ लगे सारे आरोप वापस ले लेगी और राजा को एक दिन भी जेल में नहीं रहना पडेगा ।'"

राजा मान गया?"

"हां । मगर सूखे-सूखे नहीं । उसने पचास करोड़ रुपए अपने पास रख लिए थे, जिसका कि बाकायदा कम्पनी से लिखित एग्रीमेंट किया और बाकी दो सौ करोड़ कम्पनी को लौटा दिए ।"

"कमाल है । ऐसा ईमानदार लुटेरा मैंने पहले कभी नहीं देखा ।"

"कैसा ईमानदार लुटेरा बॉस ! उसने तो अपना मेहनताना पचास करोड़ रुपए हासिल कर ही लिया था । वेैसे अगर वह चाहता तो एक रुपया भी कम्पनी को न लौटाता । लेकिन वह फैसला मुनासिब नहीं होता । ऐसी रकम का क्या फायदा होता जो उसके द्वारा छुपाई गई जगह पर पड़ी सडती रहती और वह जेल में सिसकता रहता । फिर पचास करोड़ रुपए क्या कम होते हैं, जिन्हें खर्च करने के लिए राजा अब पूरी तरह से आजाद था ।"

"बहुत खूब !" ये शब्द होलकर के मुंह से स्वतः निकल गए----" बड़ा सुलझा हुआ और शातिर लड़का है ये ।'"

"कहते हैं उसके बाद "एनस्टेज' ने राजा को अपनी कम्पनी में बहुत अच्छी जॉब का ओंफ़र दिया था, कम्पनी राजा की विलक्षण काबिलियत का पूरा फायदा उठाना चलती थी । लेकिन राजा ने आफर नामंजूर कर दिया ।'"

"क्यों भला?"

"जो अपने हुनर से एक घंटे में ढाई सौ करोड़ कमा सकता हो, उसे किसी का गुलाम बनकर रहना भला क्यों मंजूर होगा? वेसे 'एनस्टेज‘ ने अब इस बात का पुख्ता इंतजाम कर दिया है कि राजा चौरसिया या फिर उस जैसा दूसरा कम्यूटर हैकर कम्पनी के सिक्योरिटी सिस्टम के साथ वैसा फ्रांड न कर सके ।"

"सवाल ये उठता है कि राजा चौरसिया जैसा कुख्यात कम्यूटर हैकर मुम्बई में क्यों आया है? इससे भी बड़ी बात, वह उस लड़की के साथ क्या कर रहा है जो हमारे मृतक नम्बर थ्री के साथ थी?"

"इसका जवाब तो राजा ही दे सकता है या फिर वह लडकी? "

"गडबड है…जरूर कोई गड़बड़ है ।"

"केैसी गड़बड़ बॉस?"

"फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन राजा का फौरन हमारे हाथ जाना जरूरी है । यह हमें कहां मिलेगा?"

"मालूम करने की कोशिश कर चुका हूं-----कोईं रेग्यूलर ठीया नहीं है । आजाद पंछी है । कब कहां होता , उसे खुद नहीं पता होता ।"

“फिर ? "

"अपनी कोशिश जारी रखता हूं ! अगर वह अभी भी मुम्बई में ही है तो मुझे पूरा यकीन है, मैं उसे दूंढ़ निकालूंगा !"

"और वह लड़की ! वह भी मुझे चाहिए । केवल वही है जो उन विदेशियों के कत्ल के रहस्य से पर्दा हटा सकती है ।"

"उसकी भी खोज…खहर निकालता हूं !"

"जितनी जल्दी हो सके । इन दोनों कामों को करो ।"

तभी इंटस्काम बजा ।

होलकर ने रिसीवर उठाया ।
 
"इंटरपोल से कोई मिस्टर कार्टर आए है सर ।" उसके कानों में अॉपरेटर की मधुर आवाज पड़ी-------"आपसे मिलना चाहते है ।"

होलकर के माथे पर वल पड़ गए ।

"उन्हें भेज दो ।" उसने अॉपरेटर से कहा और रिसीवर वापस रख दिया ।

नजरे उठाकर प्रताप को देखा जो उसे ही देख रहा था ।

"कोई इंटरपोल से आया है ।" होलकर ने उसे बताया----फौरन मिलने को कह रहा है ।"

"लगता है कोशिशे रंग ला रही हैं ।" प्रताप होंठों में बुदबुदाया था !

"वह जरूर उन विदेशियों के बारे में कोई खबर लाया होगा । मुबारक हो बॉस ।"

" शुक्रिया । अभी तुम जाओ ।"

" ओ.के ! " कहने वाद प्रताप चला गया ।

तभी वहां कार्टर ने कदम रखा ।

केंद्रीय गृहमंत्री बादल नारंग के सरकारी आवास पर चुनिंदा सांसदों की आपात बैठक बुलाई गई थी ।

बैठक में सत्ता पक्ष ही नहीं वरन् प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों को भी आमंत्रित किया गया था ।

प्रधानमंत्री की गैेर मौजूदगी में आपात बैठक की अध्यक्षता स्वयं बादल नारंग कर रहे थे ।

रक्षामंत्री हंसराज ठकराल भी मौजूद थे ।

इसके अलावा मुख्य विपक्षी दल का नेता बसंत स्वामी भी शिरकत कर रहा था ।

कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों के संसदीय नेता भी मीटिंग में मौजूद थे । देश की इतनी सारी महत्वपूर्ण हस्तियों की उपस्थिति के बावजूद दुधिया रोशनी से जगमगाते समूचे हाल में एक तनाव भरा सन्नाटा छाया हुआ था ।

हर चेहरे पर गहरा तनाव व्याप्त था ।

सबसे गहरा व विचलित करने वाला सन्नाटा मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता बसंत स्वामी के चेहरे पर खिंचा हुआ था ।

आपात बैठक का एजेंडा, जैसा कि वहां उपस्थित सभी नेतागण जानते थे कि चान्दनी सिंह थी ।

चांदनी सिंह !

वह चांदनी सिंह जिसे हाल ही में अगवा कर लिया गया था ।

चौबीस घंटे बीतने से पहले ही पाकिस्तान के प्रमुख अातंकी संगठन जमात उल फिजा ने इस अपहरण की जिम्मेदारी ले ली थी । सभी जानते थे कि जमात उल फिजा का सरगना हाफिज लुईस है ।

हाफिज लुईस ने भारत सरकार के सामने चांदनी सिंह को छोड़ने की शर्त रख दी थी । चांदनी सिंह के बदले में उसके द्वारा खूंखार आतंकी मुस्तफा को मांगा गया था, उस मुस्तफा को जो तिहाड़ में अपनी फांसी का इंतजार कर रहा था ।

महज मुस्तफा की रिहाई ।

और कुछ नहीं ।

जमात उल फिजा की तरफ से भारत सरकार को केवल बीस घंटे का वक्त दिया गया था ।

यानी अगले बीस घंटे से पहले ही उसे मुस्तफा को रिहा करना था ।

रिहा न करने का अंजाम सारी दुनिया बखूबी मालूम था ।

बीस में से दस घंटे बीत भी चुके थे ।

एब सरकार के पास दस घंटे शेष थे !

केवल दस घंटे!

दहशतगर्दों की ओर से आया बीडीयो टेप अभी-अभी माननीय सांसदों को दिखाया गया था । वह वीडियो टेप जिसमे चांदनी सिंह दो नकाबपोश गनधारियों की धार पर नजर आ रही थी, बेक ग्राउंड से गूंजी थी धमकियां देती खनकदार आवाज ।

वह आवाज जो वीडीयों टेप समाप्त हो जाने के बाद भी वहां मौजूद हर शख्स के कानों में दहशत बनकर गूंज रही थी ।

जव यह फैसला लिया जाना था कि आगे क्या किया जाए !

सरकार को चांदनी सिह की रिहाई के बदले दहशतगर्दों की मांग मान लेनी चाहिए या कोई और रास्ता अख्तियार करना चाहिए!

उस पैनी तथा तनाव भरी खामोशी को अंतत: बादल नारंग को ही छोड़ना पड़ा----"यह हमारे तथा इस देश के लिए सचमुच मुश्किल समय है । आज हमारा मुल्क बहुत संवेदनशील घटनाचक्र के मुहाने पर खड़ा है । नियति एक बार फिर हमारे धैर्य की परीक्षा लेने पर आमादा है और हमारे पास केवल दो रास्ते है मुल्क की आन गंवा दे या दहशतगर्दों को मुंहतोड जवाब दे । दोनों की ही कीमत इस देश को चुकानी होनी ।”

" सब इस सरकार के ढुलमुल रवैये का परिणाम है ।" बसंत स्वामी अपना हाथ लहराकर आवेश में बोला…“यह उसके नाकारापन का जीता-जागता सबूत है । मैं पूछता हूं कि जब हमारी खुफिया एजेसियों ने पहले ही सरकार को खबरदार कर दिया था कि जमात उल फिजा फांसी की सजा पाए अपने खूंखार आतंकी मुस्तफा को छुड़ाने का प्लान वना रहा है, इसके बावजूद सरकार क्यों सोती रही, क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और क्यों उस आफ़त का इंतजार करती रही, जो आज हमारे सिर पर टूटी है । यदि सरकार ने पहले से ऐहतियात बरती होती तो इस मुसीबत को टाला जा सकता था । मैं इस वारदात के लिए साफ़-साफ़ सत्ताधारी लोगों को जिम्मेदार ठहराता हूं जिनके पास देश को नेतृत्व देने की क्षमता का सर्वथा आभाव है ।"

स्वामी चुप हुआ तो सत्तापक्ष के माननियों की भृकुटि तन गई ।

कई के चेहरे तमतमाने लगे ।

एक मंत्री ने अपनी कड़ीं प्रतिक्रिया जताने के लिए मुंह खोला ही था कि नारंग ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया ।

"गुस्ताखी माफ स्वामी साहब !" बह बोला…“क्या चांदनी सिह सचमुच आपकी पत्नी हैं?"

“व्याट !" वसंत स्वामी ने तमककर नारंग को देखा---" क्या मतलब है आपका मंत्री महोदया मिसेज चांदनी मेरी व्याहता बीबी है और वह इस वक्त दहशतगर्दों की चंगुल में है ।"

“फिर भी आप राजनीति कर रहे हैं…इस सम्बेदनशील मौके को अपना राजनैतिक करियर संवारने में केश करने की केशिश कर रहे है । सत्ता पक्ष को 'नाकारा' और 'नेतृत्वहीन' ठहराने का प्रयास कर रहे हैं । जबकि यह मीटिंग मैंने राजनीति करने के लिए नहीं बुलाई है । मैंने सर्वसम्मति से यह फैसला करने के लिए आप सबको यहां इकट्ठा किया है कि इन हालात में हमें क्या करना चाहिए। उनकी बात मान लेनी चाहिए या उन्हें इंकार कर देना चाहिए ?"

"इंकार का मतलब आप जानते हैं?” वसंत स्वामी रोष भरे स्वर में बोला था ।

"जानता हूं । हमें हिन्दुस्तान के किसी कोने से आपकी बीबी की लाश मिल जाएगी और अगर हाफिज की बात मानते हैं तो एक बार फिर भारत माता का मस्तक लज्जा से झुक जाएगा ।"

"मैं आपको किसी भी कीमत पर इंकार करने की सलाह नहीं दे सकता ।" बसंत स्वामी पुरजोर विरोधपूर्ण स्वर में बोला-------और फिर यह कोई पहला मौका नहीं है । इससे पहले भी मुल्क के सामने ऐसे हालात पेश उग चुके हैं, जब आतंकियों की मांग के आगे हमें घूटने टेकने पड़े थे, वह चाहे रजिया अपहरण कांड हो या कंधार हाईजैक कांड । फिर, भारतीय दंड विधान भी तो यही कहता है कि गुनाहगार को जितने छूट जाएं लेकिन एक भी बेगुनाह की जान नहीं जानी चाहिए ।”

"बसंत स्वामी साहब ने तो अपना फैसला सुना दिया ।" नारंग अन्य सभी सांसदों से मुखातिब होकर बोला-----अब मैं बाकी लोगों से उनकी राय जानना चाहता हूं ! ”

सूअर जैसी थूथनी वाला डिफेंस मिनिस्टर बोला…“स्वामी साहब सही कह रहे । हमें मुस्तफा को छोड़ देना चाहिए । एक बार स्वामी साहब की धर्मपत्नी वापस आ जाएं, फिर हम मुस्तफा को दोबारा गिरफ्तार करने का रास्ता निकल सकते हैं ।"

नारंग ने एक अन्य विपक्षी नेता की तरफ़ देखा ।

" टैरेरिस्टों ने अपने केवल एक साथी की रिहाई की शर्त रखी है ।" वह खंखारकर अपना गला साफ करता हुआ बोला"-“किसी एक टेरेरिस्ट के लिए चांदनी सिह जैसी महिला को कुर्बान नहीं किया जा सकता । मेरी बेशक राय तो यही है कि हमे मुस्तफा को छोड़ देना चाहिए ।"

नारंग एक अन्य शख्स से हुआ। उसने भी कमोवेश वैसी ही राय जाहिर की, उससे पहले शख्स दे चुके थे ।

सबसे अंत में नारंग ने हंसराज ठकराल की तरफ देखा।

"इस सम्मानीय सभा का बहुमत मुस्तफा को छोड़ देने ही सिफारिश कर रहा है ।" ठकराल गहरी सांस भरता हुआ बोला----“मैं इस सभा की खिलाफत करने का हौंसला तो नहीं जुटा सकता मगर आज यहां एक बात जरूर कहना चाहता हूं ।"

"हम आपको सुन रहे हैं ।" नारंग ने उसका हौंसला बढ़ाया ।

“हमेँ अपने मुल्क की इस पुरानी और धिसी हुई परिपाटी को बदलना होगा, जो गुनाहगारों और टेरेरिस्टों का रास्ता आसान करती है । वक्त आगया कि हम इस सच्चाई को समझें कि वीवीआईपी होने के सिर्फ फायदे ही नहीं, नुकसान भी है । हम अगर विशिष्ट जन बनकर सारे ऐश्वयों का भोग कर सकते है तो नुकसान उठाने को भी तेयार रहना चाहिए---------खासतौर पर तब, जब मामला मुल्क-की अस्मित से जुड़ा हो ।”

वसंत स्वामी तुरंत तीखे स्वर में बोला-----"'क्या आप यह कहना चाहते हैं मिनिस्टर साहब कि मुझे अपनी पत्नी को देश पर कुर्बान कर देना चाहिए? उसे आप लोगों के नाकारापन की सलीब पर चढ़ा देना चाहिए?"

" आपको क्या करना चाहिए, मैं इस बारे में कोई कमेंट नहीं कर सकता, मगर इतना जरूर कहूंगा, आज अगर इस जगह मेरी अपनी पत्नी होती तो मैंने उसे देश लिए कुर्बान करने में एक पल भी न लगाया होता !"

ठकराल के अल्फाजों से कक्ष में धारदार सन्ताटा खिंच गया ।

"तो साहबान !" अंतत: नारंग उस सन्नाटे को भंग करता हुआ बोला-------" हम सर्वसम्मति से मुस्तफा को रिहा करने का फैसला करते हैं और इस फैसले से हममें से किसी को कोई आपत्ति नहीं है । क्योंकि फिलहाल यही मानवता और हमारे देश के हित में है ।"
 
लगभग सभी ने-कुछ ने मन से और कुछ ने अनमने मन से अपनी सहमति दर्शाई ।

"आल-राइट ।" नारंग पटाक्षेप करने वाले अंदाज में अपने दोनों हाथ उठाता हुआ बोला-----" मैं मुस्तफा की रिहाई के कागजात पर दस्तखत कर रहा हू। आगे की कार्यवाही चांदनी सिह के सकुशल वापस आ जाने के बाद ही अंजाम दी जाएगी ।”

इंटरपोल के अफ़सर का पूरा नाम ब्रॉन कार्टर था । वह पैंतालीस साल का एक मजबूत कद-काठी वाला गोरा-चिट्टा अंग्रेज था, जो इंटरपोल की भारतीय शाखा में तैनात था ।

उन दिनों उसकी पोस्टिंग मुम्बई में थी ।

"जी जनाब ।" औपचारिकताओं के बाद होलकर ने कार्टर से सवाल--किया-------"तशरीफ़ लाने की वजह फ़रमाएं ।"

“हमारा वजह वहुत अहम है ।" वॉन कार्टर टुटी फूटी हिंदी मे बोला बोला----"पिछले दू मंथ में आपका मुत्क में एक दो नहीं पुरे तीन-तीन विदेशियों का मर्डर हुआ है और हमारा इंटरपोल की रिपोर्ट कहता है कि अभी उन तीनों मरने वालों में से किसी की भी पहचान नहीं हो पाया है ।"

" और फारेनर के केस में ऐसा तभी सम्भव है जबकि मरने वाला अवेैध रूप से में दाखिल हुआ हो ।" होलकर बोला…“मततब वह फर्जी बीजा पर मुल्क में आया हो!"

“आई नो ।"

"क्या इंटरपोल के पास कोई इन्फारमेशन है?"

"तभी तो हम खुद यहाँ आया ।"

"क्या इन्फारर्मेशन है अपके पास?"

"जो तीन फारेनर का मर्डर हुआ, उनमें से दो का हमारे पास कम्प्लीट इन्फार्मशन है । एक जो सबसे पहले मरा और दूसरा जो हॉल ही में मरा । वट बीच वाले के बोरे में हमेँ अभी तक कोई खबर नहीं लग पाया है ।"

होलकर अधीर होकर बोला----“जो आपको मालूम है, बही बताएं? कौन है वे दोनों ?''

"एक तो हमारे अपने मुल्क ब्रिटेन का ही था, उसका नाम फेजर था । दूसरा कनाडा से था, उसका नाम टॉमस था । ये दोनों है नांन क्रिमनल थे और साइबर क्राइम के इंटरनेशनल अंडरवर्ल्ड से जुड़े थे । दोनों कुख्यात कम्पूटर हैकर थे, जो अकेले अपने'अपने मुल्कों में ही नहीं, दुनिया के कई दूसरे मुल्कों में भी साइबर क्राइम की कई वड़ी वारदातों को अंजाम दे चुके थे और उन सभी मुल्कों की पुलिस को बेहद सरगर्मी से इनकी तलाश है ।"

होलकर सन्नाटे में आ गया ।

तो उन तीनों विदेशियों में से दो दुनिया के माने हुए कम्यूटर हैकर थे । तीसरे की भले ही शिनाख्त नहीं हो सकी हो, लेकिन अब उसे पुरा यकीन था कि वह भी कम्यूटर हैकर होना चाहिए था ।

चौथा राजा चौरसिया भी कुख्यात कम्यूटर हैकर था, तो क्या अब राजा चौरसिया की जान को भी खतरा था?

वह कौन था जो दुनिया भर के उन नामचीन कम्यूटर हैंकरों को हिंदुस्तान बुला रहा था और फिर उनका कत्ल कर रहा था ?

“क्या हुआ ब्रदर ?"' होलकर को सोच में तल्लीन देखा तो कार्टर ने उसे टोका---तुम किस सोच में डूब गया?"

“क्या यह सोचने वाली बात नहीं मिस्टर कार्टर कि साइबर अंडरवर्ल्ड की दुनिया के तीन-तीन कुख्यात कम्यूटर हैकर लगभग एक ही वक्त में भारत क्यों आए ?"

"क्यों आया?"

"आप बताएं जनाब । सवाल मैंने आपसे किया है । बैसे भी यह आपका फील्ड है । आ इंटरपोल की साइबर शाखा से सम्बंध रखते हैं । ऐसे मामलों का आपको खास प्रशिक्षण दिया जाता है ।”

“मेरे एक्सपीरियंस के मुताबिक वे लोग खुद इंडिया नहीं आए होंगे । उन्हें यहाँ से जरूर किसी ने इन्वाइट किया होगा ।"

“किसलिए ?"

"अपना काम कराने के लिए?"

"कैसा काम? "

"आफ्टर अाल, काम तो डेफिनेटली वही होना चाहिए, जिसके कि वे दोनों या तीनों माहिर थे ।"

"मतलब यह साइबर क्राइम की दुनिया से सम्बंध रखने वाला कोई काम होगा । कम्यूटर हैकरों की यहां बुलाने वाला शख्स उनके जरिए किसी बडे़ साइबर क्राइम को अंजाम देना चाहता होगा?"

“करेक्ट ।"

" ऐसा क्या काम हो सकता है?”

"ये भला हम कैसे बता सकता है ब्रदर आज सारी दुनिया ही साइबर और टेक्नोलॉजी की धुरी पर घूम रही है । फाइनेंस, बैंकिग, एयरवेज, डिफेंस और प्राइवेट सेक्टर सहित दुनिया के हर महत्त्वपूर्ण सेक्टर में कम्यूटर सरवर का व्यापक नेटवर्क फैला हुआ है और उनमें से हर सेक्टर हमारे लिए लाईफ लाइन जैसी अहमियत रखता है । ऐसे में साइबर क्रिमनल्स के लिए चौतरफा वहुत बड़े स्कोप हैं, जिसमें वे अपने आश्चर्यजनक हुनर का इस्तेमाल करके फायदा उठा सकते हैं । यह अंदाजा लगाना काफी डिफीकल्ट होगा कि उन हैकरों को यहां किस काम के लिए बुलाया गया होगा और यदि बुलाया गया था तो अपना काम पूरा करके वे वापस अपने मुल्क क्यों न लौट गए? उन सबको बेरहमी से कत्ल क्यों कर दिया गया?"

"शायद वे अपना काम पूरा करने में नाकाम साबित हुए हो"'

"दोनों? या तीनों?"

"और क्या? तभी तो दूसरे और तीसरे को बुलाने की नौबत आई । अगर पहला हैकर फैजर ही कामयाब हो गया होता तो दूसरे तथा तीसरे हैकर को बुलाने की नौबत ही क्यों आती!"

“लेकिन उनका मर्डर. . .

"उसकी वजह सीक्रेसी हो सकती है । काम कराने वालो तो आशंका होगी कि हैकर काम की प्रकृति और उसकी तमाम सीक्रंसी जान चुके हैं । ऐसे में यह उसे आगे कहीं पास आँन कर सकते है । वैसे भी वे फर्जी आइडेंटिटी और बीजा पर भारत अाए थे, लिहाजा उनकी पहचान करना आसान न था । ऊपर से वे कई मुल्को के मोस्ट वांटेड थे । इन हालात में उनका कत्ल कोई समस्या नहीं थी ।"

“इसका उलटा भी तो हो सकता है ब्रदर ।"

" मतलब ?"

"क्या यह मुमकिन नहीं कि उन तीनों ने अपना-अपना काम पूरी कामयाबी से मुकम्मल कर दिया हो । और तव काम कराने वाले को यह खतरा लगने लगा हो कि हैकर उसके काम की सीक्रेसी से वाकिफ हो चुके हैं और जब भी उनका दांव लगेगा, उसे नुकसान पहुचा सकते हैं या उसे ब्लैकमेल कर सकते है । लिहाजा उसने ऐसे हालात से बचने के लिए उनका मर्डर कर दिया हो ।"

" ऐसा होता तो तीन-तीन हैकरों को बुलाने की क्या जरूरत थी?" होलकर बोला----'"हालात में तो पहले हैकर अर्थात् फेवर को ही भारत बुलाया गया होता और उसका काम मुकम्मल हो जाने के बाद उसे कल्ल कर दिया गया होता । किस्सा खत्म । फिर दूसरे तीसरे और चौथे हैकर को एंगेज करने की क्या जरूरत थी!"
 
"हूं !" कार्टर ने सोचपुर्ण ढंग से हुंकार भरी…“मगर तुमने चौथे हैकर का जिक्र क्यों किया?"

''क्योकि मेरे खयाल से, जिस शख्स को कोई बडा़ साइबर क्राइम कराना है, उसने चौथे हैकर को दूंढ़ निकाला है और आजकल यह चौथा हैकर उसके सम्पर्क में है ।"

"ओ गॉड! यह चौथा कौन है?"

“वह इसी मुल्क का बाशिंदा है । नाम है राजा चौरसिया ।"

" यह नाम मेरा सुना हुआ है । अभी हाल ही में इसने तुम्हारे इंडिया के ब्रेकिंग सैक्टर को हैक करके कई सौ करोड़ लूट लिए थे ।"

" उसी की बात कर रहा है ।"

“और यह कह रहे हो कि राजा चौरसिया इस वक्त उस डेंजरस पर्सन के साथ है, जो पहले के तीन-तीन हैकरों का कातिल है?”

"हालात तो कुछ ऐसा ही कह रहे हैं ।"

"क्या तुम उस डेंजरस पर्सन को जानते हो?"

"जानता होता तो वह इस वक्त सलाखों के पीछे होता ।"

"फिर? "

"मेरी मालूमात पुख्ता है । हम इस केस पर यू ही अपना वक्त बरबाद नहीं कर रहे । कुछ तो क्लू हमने हासिल किए हैं ।"

“लेकिन इसका मतलब तो ये हुआ कि राजा चौरसिया की जान भी खतरे में है । यदि वह डेंजरस पर्सन का काम नहीं कर पाया तो उसे भी कत्ल कर दिया जाएगा?"

" हां ; अगर ।" होलकर ने 'अगर' शब्द पर खास जोर दिया था------"चौरसिया उसका काम करने में नाकामयाब हो जाता है तो? बहरहाल, सीक्रेसी वाले पाइंट अॉफ व्यू से हालात का स्पष्ट इशारा यही है । वैसे भी, जो शख्स पहले भी तीन-तीन कल्ल कर चुका है, उसके लिए चौथा कत्ल करना कोई बड़ी बात नहीं होनी ।"

"यह तो फिक्रमंद करने वाली बात है । क्या यह सब जानने के बाद भी तुम चौरसिया का कत्ल हो जाने दोगे ?"

“हम उसे रोकने की पूरी केशिश करेंगे ।"

"मगर काम के बारे में. . .मेरा मतलब उस काम के बारे में क्या तुम्हारा कोई अंदाजा हेै…जो डेंजरस पर्सन हैकरों से करवाना चाहता है?"

"फिलहाल कुछ भी कहना मुश्किल है लेकिन यह तय है कि इस मुल्क में कुछ होने वाला है । साइबर की दुनिया के शैतान एक बार फिर किसी हिला देने वाली घटना को अंजाम देने के फिराक में है ।"

"आल-राइट आफिसर । अब मैं इजाजत चाहता हूं !”

“थेंक्यू। लेकिन उस तीसरे शख्स के बारे मे, जिसकी अभी शिनाख्त नहीं हुई है, अगर इंटरपोल को कोई जानकारी हासिल होती है तो कृपया उसे मेरी नालिज में लाना मत भूलना !"

"नहीं भूलूंगा ।" कहने के वाद कार्टर वहां से रुखसत हो गया ।

तभी इंटरकाम बजा ।

"यस ।" होलकर रिसीवर कान से लगाकर बोला ।

"होलकर ।" दूसरी तरफ से आईबी के चीफ़ बलवंत राव का स्वर उसके कान से टकराया…“फोंरन मेरे पास पहुचों ।"

" आल-राइट सर ।" होलकर तत्परता से बोला ।

यह मन-ही-मन चौकन्ना हो गया था ।

उसे खुद बलवंत राव ने फोन करके बुलाया था ।

मतलब साफ था कि काम निहायत ही अहम था ।
 
पांच मिनट बाद होलकर बलवंत राव के आँफिस में उसके सामने बैठा था, जो कि आईबी की उसी इमारत में टाँप फ्लोर पर स्थित था । बलवंत राव की गम्भीर और फिक्रमंद भाव भंगिमा ने ही उसे बता दिया था कि मामला उसकी उम्मीद से ज्यादा संजीदा था ।

बलवंत राव ने उसे बैठने का इशारा नहीं किया ।

"चांदनी सिंह का केस तुम्हें पता ही होगा आँफिसर?" बलवंत राव एक सिंगार सुलगाता हुआ बोला ।

"यस सर ।" होलकर ने संक्षिप्त सा जवाब दिया-------"' पता है । यह एक चौंका देने वाली आतंकी वारदात है । टेरेरिस्टों की मांग को पूरा नहीं किया जा सकता । मुस्तफा एक खूंखार आतंकी है ।"

“फैसला हो चुका है आफिसर । मेरे पास अभी-अभी दिल्ली से फैक्स आया है । सरकार ने टेरेरिस्टों की मांग को मानने का फैसला कर लिया है ।"

"ओह नो! यह ठीक नहीं हुआ सर ।" कल्याण होलकर व्याकुल हो उठा-------" यह नहीं होना चाहिए था । मुस्तफा की गिरफ्तारी में आईबी का भी वहुत बड़ा योगदान था । सरकार का यह फैसला हमारे जासूसों का मनोबल गिरा देगा ।"

"फैसला हो चुका है होलकर । चांदनी इस मुल्क के अपोजीशन के लीडर की बीबी है । सरकार चाहकर भी उसकी जान दांव पर नहीं लगा सकती । सरकार ने वहुत सोच समझकर और मामले के हर पहलू पर विचार करने के बाद फैसला लिया है ।”

“फिर भी मुझे यकीन नहीं हो रहा सर ।"

"हम हुक्मरान नहीं हैं । सरकार के मुलाजिम हैं----सिर्फ मुलाजिम । न हमें फैसले लेने का अधिकार हैं न ही सरकार के पर टीका-टिप्पणी करने का । हमारा काम सिर्फ और सिर्फ हुक्म बजाना है । जो ओँर्डर दिया जाए, उसे फालो करना है ।"

“जी।"

“टेरेरिस्टों के मुताविक चांदनी सिह इस वक्त मुम्बई में है और सरकार के साथ का जो सौदा हुआ है, उसके मुताबिक मुस्तफा और चांदनी की अदला-बदली के लिए उन लोगों ने मुम्बई ही चुना है ।”

“मुम्बई को क्यों?"

“असलियत तो खेर दहशतगर्द ही जाने लेकिन मेरा अनुमान ये है कि उन्होंने मुम्बई को इसलिए चुना है क्योंकि मुस्तफा के साथ यहां से सुरक्षित अपने मुल्क भी वापस लौटना है और ऐसा सुरक्षित रास्ता केवल समुद्र ही हो सकता है, जो कि दिल्ली में नहीं है ।"

"माफ करें सर । मुझे यह बात हजम नहीं हो रही ।"

"कोन-सी? "

"टेरेरिस्टों के अपने मुल्क सुरक्षित लौटने वाली बात । अगर ऐसा था तो टेरेरिस्टों को चांदनी को लेकर अपने मुल्क चले जाना चाहिए था और वहीं से यह डील करनी चाहिए थी । उन्हें मुस्तफा को पाकिस्तान बुलाना चाहिए था, जैसे विमान अपहरण 'कंधार' बुलाया था । अगर ऐसा होता तो मेरी गारंटी है कि हमारी सरकार इंकार नहीं करती । वे मुस्तफा को प्लेट में सजाकर इस्लामाबाद या लाहौर ले जाते और उसे यहीं परोसकर चांदनी को वापस ले आते !" होलकर के लहजे में अजीब-सा रोष था ।

"मैं तुम्हारे तंज को समझ रहा हूं आंफिसर । लेकिन मत भूलो कि पाकिस्तान अगर ऐसा करता तो विश्व बिरादरी में बदनाम हो जाता । तब उसका असली चेहरा खुलकर दुनिया के सामने अा जाता, जो अभी नकाब के अंदर छुपा हुआ है । इसीलिए कंधार कांड के वक्त उसने हमारे विमान को पाकिस्तान की जगह अफगानिस्तान की धरती पर उतारा था । जहाँ उसी के इशारों पर चलने वाली तालिबानी सरकार काम कर रहीं थी ।"

"अफगानिस्तान के हालात अभी भी वहुत ज्यादा नहीं बदले हैं । अगर पाकिस्तान चाहता तो यह डील वहां भी कर सकता था ।"

" तुम आखिर कहना क्या चाहते हो आफिसर?”

"" खुद नहीं समझ पा रहा सर कि मैं क्या कहना चाहता हूं और ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि यह सोचकर मेरी खोपडी़ बुरी तरह भन्नाई हुई है कि एक बार फिर मेरे प्यारे देश की प्यारी सरकार ने दहशतगर्दों के सामने घुटने टेक दिए है ।"

"खुद को सम्भालो ओंफिसर ।"

"सॉरी सर । खैर. . . मुझे यहां क्यों बुलाया गया है?"

इस डील को अंजाम देना होगा । मुस्तफा को टेरेरिस्टों के हबाले करके चांदनी सिंह को उनके चंगुल से सुरक्षित निकालकर लाने की जिम्मेदारी तुम्हारी होगी ।"

"म.. मुझे?" होलकर की आंखे सिकुड़ी । आश्चर्य पराकाष्ठा पर पहुच गया'--“मुझे इस डील को अंजाम देना होगा?"

"हां । मैंने यह फैसला किया है कि इस काम को तुम्हे ही अंजाम देना होगा । अपनी टीम चुनने के लिए तुम आजाद होगे, काम में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए । मुस्तफा के छूट जाने का हमे कोई गिला नहीं, लेकिन चांदनी मेैडम को कुछ नहीं होना चाहिए । उनकी सलामती पर अांच नहीं आनी चाहिए । बोलो, इस काम को तुम कामयाबी से अंजाम दे सकोगे?”

"पहले तो मैंने कभी ऐसे किसी काम को अंजाम नहीं दिया ।"

"इसीलिए इतने हैरान हो?"

"क्या मेरा हैरान होना गलत है सर? क्या मुझे हैरान नहीं होना चाहिए? यह एक निहायत ही अहम मिशन है, जिसके लिए किसी बेहद तजुर्बेकार कमांडर की जरूरत है, जो पहले भी ऐसे कामों को अंजाम दे चूका हो और अनुभवी कमांडर आईबी में भरे पड़े हैं । फिर भी उन्हें छोड़कर आईबी इस काम के लिए मुझे अप्रोच कर रहीं है, यह वहुत ज्यादा हैरानी की बात है?”

“बलवंत राव ने शुष्क स्वर में कहा---;-"मैं इस मिशन के लिए आईबी के किसी उच्च अधिकारी को नहीं न सकता ।"

“क्यों सर?" होलकर की हैरत बढ़ ।

"क्योंकि मुस्तफा को पकड़ने में आईबी के ऐसे तीन-तीन अफसरों ने अपनी जिन्दगी की कुर्बानी दी थी । मुस्तफा को रिहा करने का सरकार का फैसला जिस तरह तुम्हारे गले नहीं उत्तर रहा, उसी तरह तुमसे ऊंचे ओहदे के अधिकरियों के भी गले नहीं उत्तर रहा । बल्कि यह तो सरकार के इस फैसले पर वहुत आक्रोश में हैं और बुरी तरह से भड़के हुए हैं । उनमें भारी असंतोष का माहोल है । सिर्फ डिसिप्लीन के कारण जुबान नहीं खोल रहे हैं । ऐसे सम्बेदनशील हालात में यदि यह काम उसे सौंपा जाता है तो कायदे कानून से अंधे होने के कारण वे ओंर्डर को फालो करने से इंकार तो नहीं कर सकते । लेकिन मैं जानता हूं कि उनके अंदर का आक्रोश और असंतोष उन्हें ईमानदार नहीं रहने देगा…उन्हें निष्ठावान नहीं रहने देगा । मुमकिन है अपने अंदर के आक्रोश के कारण वे कोई ऐसा कदम उठा बैठे जो उसे नहीं उठाना चाहिए । तुम मेरा मतलब समझ रहे हो न?”

"समझ रहा हूं सर ।"

“इसीलिए इस मिशन के लिए मुझे पुराने और अनुभवी कमांडर की वजाय नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी कमांडर की जरूरत है, जो कि तुम हो । वैेसे भी चान्दनी के केस में सरकार की नीयत साफ है । न तो कोई खोट है, न ही कोई धोखा या दांव-पेच है । हमें चांदनी मेडम जिंदा चाहिए । मैं जानता हूं कि तुम इस कामको बेहतर अंजाम दे सकते हो । इसीलिए मैंने तुम पर भरोसा किया है और इस काम के लिए तुम्हें चुना है ।"

होलकर अपलक बलवंत राव को देखता रह गया । वहुत कुछ कहने की इच्छा के बावजूद कुछ कर नहीं सका वह ।

 
बलवंत राव ने निर्विकार भाव से कश लगाया ।

"मुझे तुम्हारा जवाब चाहिए आँफिसर ।" थोडी चुप्पी के बाद बलवंत राव बोला…“क्या तुम्हें यह चुनौती स्वीकार है ?"

"चुनौतियां स्वीकार करने के लिए मैं हमेशा तैयार रहता हूं सर ।" वह दृढ़तापूर्वक बोला ।

"गुड । पर याद रखना!" एकाएक बलवंत राय के लहजे में चेतावनी का पुट उभर आया था…“तुम्हें वैसी कोई गलती नहीं करनी है जैसी की आशंकाओं के कारण यह मिशन सीनियर को नहीं सौंपा जा रहा है । तुम्हें अपने जजबातों पर काबू रखना है ।"

यह केवल इतना ही कह सका…“कोशिश करूंगा सर ।"

बलवंत राय कुछ बोला नहीं । केवल देखता रहा उसकी तरफ ।

उसकी तरफ़, जिसने पूछा--""मुस्तफा और चांदनी सिह की अदला-बदली के लिए टेरेरिस्टों ने कौन - सी जगह मुकर्रर की है?"

अभी कोई नहीं । मेरा खयाल है कि जगह के बारे में वे ऐन वक्त पर बताएंगे, ताकि हमे चालाकी दिखाने का मौका न मिल सके ।"

" हूं !

"

"मिशन की तैयारी के लिए जो भी होमवर्क करना चाहो, कर सकते हो लेकिन यह बात जेहन में रखना कि चांदनी सिंह का बाल भी बांका न हो पाए । ऐसा हो गया तो तुम समझ सकते हो कि देश की पालिटिक्स में कितना बडा बवंडर उठ खड़ा होगा ।"

"क्या आईबी के पास कोई इनसाइड इन्कारमेशन है कि चांदनी सिंह को कुछ हो सकता है?"

"नहीं । हमारे पास ऐसी कोई इनसाइड इन्यारमेशन नहीं है । लेकिन मुझे. . .मुझे यह अंदेशा है कि वह टेरेरिसट----खासतोर पर मुस्तफा चांदनी सिह को नुक्सान पहुंचा सकता है ।"

"क्या मैं आपके अंदेशे की वजह जान सकता हूं?”

“बाकी टेरेरिस्टों का तो मुझे कुछ पता नहीं है, लेकिन जो सामने है और जिसके लिए चांदनी सिह को अगवा किया गया है, उसे मैं बखूबी जानता हूं ! वह एक निहायत ही खूंखार और इंतहाई जनून पसंद शैतान है, वह एक खतरनाक जुनून के हवाले है । वह न हमसे डरता है, न अपनी मौत से ।"

"सुना तो मैंने भी है ।"

"वह सालों से हमारी कैद में है । उसने हर दिन जेल की नारकीय यातना को भुगता है । कहने का मतलब यह कि मुस्तफा की हालत इस वक्त एक जख्मी शेर या घायल सांप से कम नहीं होगी । उसके अंदर दोहरा प्रतिशोध धधक रहा है, जो यहां जाने के बाद मैंने खुद उसकी आंखों में देखा है । ऐसे खूंखार भेडि़यों के बारे में मेरा तजुर्बा कहता है कि वह किसी भी हालात में चुप नहीं बैठ सकते । मुस्तफा भी चुप नहीं बैठेगा । वह कुछ-न-कुछ करेगा और जरूर करेगा ।"

"ओहा और आपको अंदेशा है कि मुस्तफा का वह कदम चांदनी मेडम के खिलाफ हो सकता है?"

"क्योंकि उस वक्त केवल वही उसके सबसे करीब होगी और चांदनी सिंह की अहमियत से वह भी अंजान नहीं होगा ।"

“मैं समझ गया । जव तक चांदनी मेडम सुरक्षित हमारे हाथ नहीं अा जाती, हम मुस्तफा को हरगिज रिहा नहीं करेगे ।"

"टेरेेरिस्ट यहीं शर्त रख सकते हैं । पलड़ा दोनों तरफ़ बराबर होगा । वैसे भी, ऐसी डील का टेरेरिस्टों को ज्यादा तजुर्बा होता है । मुस्तफा वहुत शातिर इंसान है । वह हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है । मेरा मतलब समझ रहे हो न?"

"हालांकि यह मुझ आंफिसर के ओहदे और तजुबे से काफी बड़ा मिशन है सर । लेकिन मैं आपका यकीन नहीं टूटने दूंगा । अगर चांदनी मेडम अभी तक सलामत हैं तो आगे भी सलामत ही रहेंगी । मुस्तफा या कोई भी दहशतगर्द उसे नुकसान नहीं पहुचा पाएगा ।"

मैं तुम्हारे मुंह से यही सुनना चाहता था अगले प्रोग्राम की खबर बहुत जल्द तुम तक पहुच जाएगी !"

" थैक्यू सर !" एकाएक ऐसा लगने लगा था जैसे होलकर को इस मिशन पर अपनी तैनाती रोमांचित कर रही हो !

नगमा बाथरूम से बाहर निकली ।

उस वक्त उसके जिस्म पर केवल एक टॉवल लिपटा हुआ था । उसने उसके वक्षों से लेकर कमर के नीचे तक के हिस्से को ढक रखा था । उसके ऊपर तथा नीचे के जिस्म का समूचा हिस्सा नग्न था । उस पर झिलमिलाती पानी की बुंदों को साफ देखा जा सकता था ।

उसका चमचमाता चेहरा अाकर्षक घुला, निखरा तथा गुलाब की तरह तरोताजा नजर आ रहा था, उस पर नहाने के तुरंत बाद की ताजगी खिली हुई थी । भीगे बाल अधनंगी पीठ पर बिखरे हुए थे ।

वह एक फाईव स्टार होटल का डीलक्स सुईट था, जहाँ उस रात वह राजा चौरसिया के साथ ठहरी हुई थी, सारी रात दोनों एक ही विस्तर पर पति-पत्नी की तरह सोये थे ।

नगमा निसंदेह वही लड़की थी, जिसे याना पब में पहले एक विदेशी कम्यूटर हैकर के साथ और फिर देसी कम्यूटर हैकर राजा चौरसिया के साथ मौज मस्ती करते देखा गया था ।

राजा चौरसिया सुईट में ही मौजूद था और एक इंजी चेयर पर पसरा हुआ था । उसने अपने कानो से ब्लू टूथ से कनेक्ट होने वाला विना वायरों वाला हेडफोन चढा़ रखा था, जिससे कनेक्ट मोबाइल उसकी जेब में पड़ा था ।

वह पूरी मस्ती के साथ हेडफोन पर म्यूजिक सुन रहा था ।
 
नगमा के रूप में बाथरूम से बाहर निकली कयामत को देखते ही उसकी म्यूजिक मस्ती ब्रेक हो गई । नजरे यूं नगमा पर चिपक गईं जैसे फेवीक्रोल से चिपका दी गई हो ।

नगमा के होंठों पर दिलफरेब मुस्कराहट उभरी ।

“खबरदार ।" वह वक्षो पर बंधे टॉवल की गांठ थामे दो कदम पीछे हटती बोली…"खबरदार राजा । आगे मत बढना वरना-------

राजा शरारती अंदाज में मुस्कुराया----"वरना क्या करोगी ?"

" वापस बाथरुम में चली जाऊंगी !"

चौरसिया हंसता हुआ बोला---" और फिर क्या सारी उम्र बाथरूम के अंदर ही बैठी रहोगी ?"

" ओह नो ! यह ठीक नहीं है ! मैं अभी-अभी नहाकर आई हूं और अब फौरन ही दोबारा नहाना नहीं चाहती ! प्लीज , वक्त का भी ख्याल करो !"

" वक्त का क्या ख्याल करूं ?"

" सुवह के दस बजने वाले है और ठीक ग्यारह बजे नवाब से तुम्हारी मीटिगं है ! नवाब वक्त का बहुत पाबंद है !"

इस बार चौरसिया चुप रह गया !

जैसे जेहन को झटका लगा हो !

" मैं चेंज करके आती हूं ! तब तक तुम म्युजिक का आंनद लो !" कहने के बाद वह इठलाती हुई चेंजरूम में चली गई !

अचानक ही चौरसिया जाने किस सोच में डूब गया था !

थोड़ी देर बाद नगमा बापस आई !

अब उसके बदन पर नई खरीदी हुई जींस थी और कसी हुई टॉप थी !

छलकता यौवन , गालों की लालिमा , आंखों में चंचलता तथा होंठों पर मंद मंद मुस्कान थिरक रही थी !

" चलें ?" उसने चौरसिया से पुछा !

" कहां ?" नवाबजादे के पास ?"

" अभी तो मेरा मतलब ब्रेकफास्ट से था ! डायनिंग में........

" उससे पहले मेरे एक सबाल का जबाब दो !"

" सबाल ?"

" नवाब को कब से जानती हो ?"

" अगर मैं कहूं कि पिछले तीन साल से तो क्या तुम्हारे पास यह जानने का कोई तरीका है कि मैं सच बोल रही हूं या झूठ ?"

" नही !"

" तो फिर क्या फायदा !" उसने कंधे उचकाये !

" तुम जितनी खूबसूरत हो , उतनी ही स्मार्ट भी हो !"

" तारीफ के लिए शुक्रिया !"

" एक और सबाल !"

" तुम तो यार खुद ही सबाल बनते जा रहे हो !"

" क्या तुम सब अपनी मर्जी से कर रही हो ?"

" क्या सब ?"

" जो मेरे साथ रात किया !"

" अरे क्या सब हो गया है तुम्हें ? कैसे कैसे सवाल घुमड़ रहे है खोपड़ी में और क्यों ! मैं अपनी मर्जी से खुद को लुटा रही हूं ! पिछली रात वह सब मैंने पहली बार नही किया ! वह सब मेरी डयूटी का ही एक हिस्सा है ! मुझे भरपुर किमत मिलती है !

" नबाव से !"

"और क्या ! मै उसी के लिए काम कर रही हूं !" नगमा हर बात पूरी बेवाकी से कर रही थी !....

चौरसिया नगमा के चेहरे पर झुका और एक एक शब्द को चबाता हुआ बोला------" तुम अपने पति के लिए काम कर रही हो !"

" क्या ?" नगमा हकबकाई । उसके चेहरे का रंग उड़ गया था------"म...मेरा पति ?"

" तुमने अपने चेहरे पर भले ही चाहे जितने चेहरे चढ़ा रखे हो स्वीट हार्ट, लेकिन सच ये है कि तुम एक शादी शुदा औरत हो और तुम्हारा पति हस्पिटल में है ! वह एक लाइलाज और जानलेवा बीमारी का शिकार है ! उसे खून का कैंसर है , जिसके बारे में हर कोई जानता है वह ठीक नहीं हो सकता , भले ही उसके ईलाज में चाहे जितनी दौलत क्यों न बरबाद कर दी जाए! तुम भी जानती हो ! मगर तुम अपने पती से बेइंतहा मुहब्बत करती हो और तुम्हारा दृढ़ विश्वास है कि एक दिन तुम्हारा पति ठीक होजाएगा ! मौत हार जाएगी और तुम्हारा प्यार जीत जाएगा ! इसीलिये........"

" इ.....इसीलिये क्या ?"

" इसीलिये तुम मुम्बई के सबसे महंगे अस्पताल में उसका इलाज करा रही हो , वहां तुम्हारे पति के इलाज का बिल लगभग चार लाख रूपए महीना आता है---चार लाख रूपए महीना ! सुना तुमने ?"

" क......कैसे मालूम हुआ तुम्हें यह सब ?"

" हैरान हो गई ना !"

" तुमने जरूर मेरे कपड़ों में कहीं माइक्रोफोन छुपा रखा है !"

" पहले भी कह चुका हूं तुम जितनी सुंदर हो , उतनी ही स्मार्ट भी हो !" चौरसिया के होठों पर भेद भरी मुस्कान उभरी------" तुमने कल जो जींस पहन रखी थी , मैने उसकी पिछली जेब में एक माइक्रोफोन छिपा दिया था !"

हकबकाई हुई नगमा के मुंह से निकला ------" तुमने ऐसा क्यों किया ?"

" क्योकि मेरे साथ भी बहुत कुछ हो रहा है !"

" तुम्हारे साथ क्या हो रहा है ?"

" उस पर बाद में चर्चा करेंगे , फिलहाल वो सुनो जो मैं कह रहा हूं !" वह सपाट लहजे में कहता चला गया ------" और कह मैं यह रहा हूं कि कल तुमने मेरी गैरहाजिरी में नवाब सहित जिस किसी से भी बातें की , उसे मैंनें अपने मोबाइल पर सुना था ! उन सभी फोन कॉल्स को मैंनें बाकायदा अपने फोन में रिकार्ड भी कर लिया है ! कल शाम तुम्हारे पास उस हस्पताल से फोन आया था जहां तुम्हारे पति भर्ती हैं ! तुम्हारे पति के इलाज का इस महीने का बिल चार लाख छब्बीस हजार बनता है , जो तुमने अभी चुकाया नहीं है ! वह फोन सुनकर ही मझे ये सारी बातें मालुम हुई ! उसकी रिकार्डिंग भी मेरे पास सेव है ! सुनाऊं ?"

" नहीं ! ज.....जरूरत नहीं है !" नगमा जल्दी से कह उठी थी------"अ.....अगर ऐसा है तो तुमने मेरी वे सभी दुसरी फोन कालें भी सुनी होगीं , जो कल मेरे मोबाइल पर आई थी ?"

" क्यों नहीं !" चौरसिया बड़ी सादगी से बोला------" उनमें से एक काल नवाब की भी थी लेकिन धबराओ मत , तुम जानती हो कि उस काल में नवाब ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था जो तुम्हें फिक्रमन्द करने वाला हो ! वह एक ओपचारिक काल थी, मुझे खुश रखने के लिए कहा गया था ! अन्य काल के बारे में भी ऐसा ही था !"

" क्यों नहीं !" चौरसिया बड़ी सादगी से बोला------" उनमें से एक काल नवाब की भी थी लेकिन धबराओ मत , तुम जानती हो कि उस काल में नवाब ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था जो तुम्हें फिक्रमन्द करने वाला हो ! वह एक ओपचारिक काल थी, मुझे खुश रखने के लिए कहा गया था ! अन्य काल के बारे में भी ऐसा ही था !"

नगमा को याद आया , चौरसिया सच कह रहा था । कल उसकी किसी से भी गोपनिय बात नहीं हुई थी ! उसके चेहरे पर थोड़ी राहत के भाव आए लेकिन चौरसिया की महज उतनी ही हरकत ने उसे बता दिया था कि वह किस हद तक शातिर तथा सावधान रहने वाला शख्स था !

" मुझे वाकई तुमसे हमदर्दी है !" चौरसिया बोला !

" मेरे पति की ट्रैजडी को लेकर ?"

" हां ! तुम एक बहुत जीवट वाली औरत हो ! इतना ही नहीं , मैं तहेदिल से तुम्हारे जज्बे को सलाम करता हूं !"

नगमा की आखें डबडबा आई !

हमदर्दी की आंच ने उसके अंदर की कोमल व सम्वेदनशील नारी को पिघला दिया था और वह रो पड़ी थी !

" मैं और मिलन निम्न मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं !" वह सुबकती हुई बोली------" जहां प्यार मोहब्बत के लिए कोई जगह नहीं आती ! खासतौर से तब लड़का लड़की अलग--अलग जाती व मजहब से हों ! इसके बाबजूद हमने न केवल एक दूसरे से मोहब्बत की बल्कि भाग कर शादी भी कर ली ! मिलन एक होनहार युवक है ! उसे मुम्बई में आते ही अच्छी नौकरी भी मिल गई थी ! हमारी जिंदगी खुशियों से भर गई ! बहारें झूमने लगी ! मगर फिर .............
 
चौरसिया गौर से उसकी बात सुन रहा था !

" मगर फिर एक दिन दुर्भाग्य कैंसर के रूप में चुपके से हमारी जिंदगी में दाखिल होगया ! हम दोनों के पेरों तले से जमीन खिसक गई ! ऐसे कैंसर का पता ही तब चलता है कि जब वह खतरनाक स्टेज पर पहुंच जाता है ! हमारे पास जितना पैसा था , मिलन का ईलाज कराया ! कोई फायदा नहीं हुआ और हमारा सारा पैसा चुक गया ! घरबालों से मदद की उम्मीद नहीं कर सकते थे और मैं अपनी आखों के सामने अपने मिलन को कैंसर के भीषण दर्द से तड़प तड़पकर दम तोड़ते नहीं देख सकती थी ! इनकम का कोई और स्रोत हमारे पास नहीं था ! मुझे बड़ी हद तक पंद्रह हजार की कोई छोटी मोटी नौकरी मिल सकती थी , उससे मिलन की दस दिन दवा भी नहीं आसकती थी ! मेरे सामने केवल एक ही रास्ता बचा था !"

चौरसिया अब भी खमोश रहा !

" औरत यदि खूबसूरत हो तो उसका जादू मर्दों के सिर पर चढ़कर बोलता है और सुंदरता के मामले में ऊपर बाले ने मुझे पर खास करम किया था ! मुझे एक रात के बीस से पैंतीस हजार तक मिलने लगे, जिन्हें मैं मिलन की दवाओं पर खर्च करने लगी और यूं खुद को लुटाने का मुझे अफसोस ना हुआ ! मंहगी दबाई मिली तो मिलन का दर्द कम होगया ! फिर एक दिन नवाब के गुर्गे मुझे नवाब के पास ले गये ! उसे अपने कुछ खास क्लाइंटस या गेस्ट के लिए एक रेग्युलर लड़की की जरूरत थी, जो खूबसूरती के सारे पैमाने पूरा करती हो , जो कि मैं थी ! नवाब ने मुझसे कहा कि---- '-यूं बीस बीस हजार रूपयों में मैं ज्यादा दिनों तक अपना धंधा नहीं करती रह सकती थी, बहुत जल्द ही चुक जाने वाली था और मेरा कसा हुआ बदन झूल जाने वाला था ! फिर कोई मेरे बदन के पांच हजार भी नहीं देने वाला था ! पकड़े जाने का खतरा बना रहता था सो अलग-' !"

चौरसिया ने केवल हुंकार भरी !

" मैनें पूछा ---- 'फिर '----- तो वह कहने लगा कि----' मेरे लिए काम करना शुरू कर दो ! काम वही होगा जो अब कर रही हो , मगर करने का तरीका अलग होगा ! रोज रोज हवस के भेड़ियों के नीचे नहीं बिछना पड़ेगा ! यह काम मुझे बड़ी हद तक महीने में चार पांच बार करना पड़ेगा और वह मुझे इतना मेहनताना देगा जितना मैं सोच भी नहीं सकती !"

"क.....कितना ?"

" पांच लाख रूपया महीना !"

" तुम तैयार हो गई ?"

" नहीं होती क्या ? इससे अच्छा अॉफर मुझे भला और कहां मिल सकता था ! तब से आज तक पूरी निष्ठा और ईमानदारी से

नवाब का हुक्म बजा रही हूं----- उसके लिए काम कर रही हूं ! उसने भी अपना वादा निभाया ! जिसका नतिजा यह है कि मेरा मिलन आज पुरा एक साल गुजर जाने के बाद भी जिंदा है और अब वह दर्द से भी उतना नहीं तड़पता है !"

" तुम्हारी कहानी तो सचमुच दर्दनाक है !" चौरसिया अफसोस भरे स्वर में गर्दन हिलाता हुआ बोला !

नगमा खमोश रही !

" नवाब से तुम्हें आज तक कभी शिकायत नहीं हुई ?"

" कैसी शिकायत ! नवाब हुनरमंद लोंगों की कद्र करना जानता है ! जब तक उसके साथ कोई फरेब नहीं करता , वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाता ! उसे दुनिया में केवल एक ही शब्द से नफरत है, जिसे धोखा कहते हैं ! धोखेवाज को नवाब बहुत बुरी मौत मारता है !"

" हूं !" चौरसिया ने एक लम्बे हुकारे के बाद बिषय बदला ------" तुम जानती हो , मैं कम्प्यूटर की दुनिया का एक हिस्ट्रीशीटर हूं ----- एक कुख्यात कम्प्यूटर हैकर !"

" जानती हूं !"

" मुझसे पहले भी मेरे जैसे तीन हुनरमंद मुम्बई में बुलाए जा चुके हैं और उन तीनों हुनरमंदों को तुम्हीं ने डील किया था , जिनकी लावारिस लाशें मुम्बई की सड़कों पर पाई गई !"

"ओहो ! तो वह सब ----तुम्हें मालूम है !" नगमा फिक्रमन्द हो उठी !

" पहले से मालूम होता तो इस होटल की बात ही बहूत दूर है , मुम्बई तक में कदम ना रखता ! कौन मरना चाहता है !"

नगमा खामोश रही !

" पता तब लगा, जब तुम बाथरूम में थी ! न्यूज चैनल पर सुना और उन तीनों की लाशों के फोटो भी देखे ! अब भला मेरे दिमाग में इस बात को घुसने से कौन रोक सकता था कि मैं उसी सिलसिले का चौथा शिकार हूं !"

" हैरानी है कि फिर भी डटे हुए हो, होटल छोड़कर रफू-चक्कर नहीं हो गये ! उन तीन विदेशी हैकरों में से किसी को भी समय रहते यह सच्चाई मालूम हो जाती तो गांरटी है, यहां से ऐसे गायब होते कि फिर नवाब को उनकी परछाई भी ढूंढे़ नहीं मिलती !"

" कोशिश तो मैंनें भी ऐसी ही की थी !"

" मतलब ?"

" देखो नगमा , तुम भी जानती हो-------दूध का धुला मैं भी नहीं हूं ! क्रिमनल हूं------लेकिन जरा अलग तरीके का क्रिमनल ! नवाब की तरह मैं हाथ पैंरों से काम नहीं लेता , खून खराबा नहीं करता ! दिमाग की दही करता हूं और कम्प्यूटर से खेलता हूं ! खून खराबे के तो नाम तक से मेरा टॉयलेट निकलने को तैयार हो जाता है इसीलिये..........

" इसीलिये ?"

"मैंनें भी भाग निकलने में ही भलाई समझी थी ओर तुम्हारे बाथरूम से बाहर आने से पहले ऐसी कोशिश भी की थी परंतु तुरंत पता लग गया कि बहुत देर हो चुकी है ! चाहूं भी तो........इस होटल की तो बात ही दूर है, सुईट तक से नहीं निकल सकता !"

" ऐसा क्या है ?"

चौरसिया ने उसे बहुत गौर से देखा ! कहा-------" तुम एक्टिंग कर रही हो या वास्तव में अनजान हो !"

" मैं समझी नहीं कि तुम क्या कह रहे हो ?"

" अगर रफू-चक्कर होने की कोशिश की तो किसी हालत में सफल नहीं हो सकूंगा बल्कि शायद वक्त से पहले ही टेंटुवा दबाकर मार दिया जाऊंगा ! नवाब ने ऐसे सारे इंतजाम कर रखे हैं ! होटल के चप्पे चप्पे पर उसके आदमी तैनात है ! जिनका एक ही काम है----मुझे रोकना !"

" क्या बात कर रहे हो !" नगमा के चेहरे पर सचमुच आश्चर्य के भाव उभर आए थे-------" मुझे तो कहीं कोई नजर नहीं आया !"

" नवाब जैसे लोग अपने आदमियों को भी उतनी ही बातें पता लगने देते हैं जितनी उनके मतलब की होती हैं !"

नगमा चुप रह गई !

हकीकत ये है कि कहने के लिए तत्काल कुछ सुझा ही नहीं था ! कुछ देर चुप रहने के बाद बोली----"एक बात पुछूं ?"

" हजार पुछो !"

" जब मैं बाथरूम से निकली थी , तुम आराम से म्युजिक सुन रहे थे ! तुम्हारे चेहरे पर खौफ का एक भी भाव नहीं था बल्कि यह कहूं तब गलत नहीं होगा कि तुम पुरी मस्ती में नजर आ रहे थे ! अगर उससे पहले यह जान चुके थे कि जिस काम के लिए तुम्हें मुम्बई बुलाया गया है, उसी काम पर आए तीन हैकर कत्ल किए जा चुके हैं तो बैसा कैसे था ?"

" मजबूरी !"

" मतलब ?"

" बता चुका हूं ! जब पता लगा होश फाख्ता हो गये मेरे बल्कि यह कहूं तब भी गलत न होगा कि मेरी फूंक सरक गई थी ! बस एक ही बात आई दिमाग में कि -------भाग राजा , वरना गया ! मगर जब बैसी कोशिश की तो सारे रास्ते बंद पाये ! पस्त होकर चेयर पर गिर जाने के अलावा कोई चारा ना बचा था ! बहुत देर तक उसी तरह पडा़ रहा और कांपता रहा अपनी मौत के खौफ से ! फिर , लगा-----ऐसे तो काम नहीं चलेगा ! अपनी जान बचाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा ! सोचते सोचते कुछ सूझा और जब सूझा तो सांसें लौट आई । फैसला किया-------- कुछ भी हो , खुद को बचाने के लिए वही करूगां जो सूझा है ! अपने सोचे पर भरोसा हुआ और तब मेरी मस्ती लौट आई जो तुमने देखी !"
 
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