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बलवंत के मुंह से बोल न फूट सका । ओवरकोट धारी को ऐसी नजरों से देखता रह गया वह अपने सामने खडी कुतुबमीनार को कत्थक करते देख रहा हो ।
" पहले सोचा था इस बारे में तुम्हें भी कुछ नहीं बताऊंगा मगर लग रहा है, तुम्हें बताए बगैर काम नहीं चलेगा ।" ओवरकोट थारी कहता चला गया----'"बहरहाल, तुम्हारी मदद भी तो चाहिए ।"
"म------मेरी मदद ?"'
"यकीनन ।"
"मेरी क्या मदद चाहिए तुम्हें और तुम क्या करने वाले हो?”
ओवरकोट धारी ने बताया तो बलवंत राव की हालत ऐसी हो गई जैसे किसी साधु के श्राप से पत्थर की मूर्ति में बदल गया हो ।
ओवरकोट धारी ने पूछा'-'"क्या हुआ"'
"त. . .तुम पागल तो नहीं हो?” पत्थर के होंठ हिले ।
"वो तो तुम जैसे लोग मुझे वहुत पहले घोषित कर चुके हैं । अब तो सिर्फ यह बताना है कि मेरी मदद करोगे या नहीं! यह तो समझ ही गए होगे कि अगर तुमने इंकार भी किया तो मैं अपने कदम वापस खींचने वाला नहीं हूं । जंग में पहला तीर छोड़ने के बाद कदम वापस खींचने भी नहीं चाहिए और वो मैं छोड़ चुका हूं ।"
बलवंत राव ने बस तीन शब्द उगले-"क्या चाहते हो?"
ओवरकोट अरी ने बताना शुरू किया और जितना बताता गया ! बलवंत की आखें उतनी ही फैलती चली गई ।
कल्याण होलकर आईबी के मुख्यालय में स्थित, अपने आफिस में बैठा कम्यूटर में उलझा हुआ था ।
उसने इंटरपोल पुलिस की वह वेबसाइट खोल रखी थीी, जिस पर आईबी की तरफ से आधिकारिक तौर पर उन तीनों विदेशियों के फोटो और भौतिक पहचान का मुकम्मल डाटा हाल ही में अपलोड कराया गया था और अव आईबी को इंटरपोल की तरफ से अाने वाली किसी प्रतिक्रिया का इंतजार था मगर, जो आज एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नहीं आई थी ! मारे गए विदेशियों को लेकर होलकर का अंदाजा अगर सही था और वे तीनों या फिर उनमें से कोई एक अपने मुल्क में या किसी भी मुल्क में वांटेड थे, तो इंटरपोल के पास उनका डाटा होना चाहिए था और इस तरह होलकर को उनकी शिनाख्त सुलभ हो सकती थी ।
अगर वे उतने की क्रिमिनल नहीं थे, जितना होने पर कोई भी इंटरपोल के रॉडार पर आता है तो होलकर की सारी कोशिश बेकार साबित होने वाली थी । तब, उन तीनों कत्लों की गुत्थी सुलझाने के लिए और उस मामले की तह तक पहुंचने के लिए उसे कोई दूसरा रास्ता अख्यियार करना पड़ता, जिसका कि उसे दूर--दूर तक कोई और-छोर नजर नहीं आ रहा था ।
अभी कोई रिजल्ट नहीं निकला था कि प्रताप ने आफिस में कदम रखा ।
प्रताप उसका एक युवा और होनहार जूनियर था, जो आईबी में भर्ती होने के पहले से उसका दोस्त था । उसे देखते ही होलकर का हाथ स्वत: ही कम्यूटर के माउस से हट गया ।
"आओ प्रताप, यया खबर लाए हो?”
"एक से ज्यादा खबर लाया हूं बॉस ।" वह अपनी अादत के मुताबिक बेबाकी से बोला ।
“अच्छा !" होलकर की उम्मीद रोशन हुई----“क्या कोई खबर उन विदेशियों के कत्ल से भी सम्बंध रखती है?"
"एक खबर उस मामले से भी सम्बंध रखती है ।"
"जल्दी बताओ ।"
"बताता हूं यार । सांस तो लेने दो ।"
"यार ?" होलकर ने आंखे निकाली ।
"सॉरी . . .बॉंस ।"
"हां । यह ठीक है । आगे बोलो ।"
"आगे क्या बोलूं ?”
" पहले मेरे केस से सम्बंध रखने वाली खबर सुनाओ ।"
"दूसरी खबर भी उसी केस से सम्बंध रखने वाली हो सकती है !"
"बाद में देखेंगे । पहले पहली सुनाओ ।"
प्रताप सांस लेने के लिए रुका, फिर बोला---"आज इतने दिनों बाद पहला ऐसा शख्स मिला है, जिसके साथ अपनी मौत से पहले तुम्हारे एक मृतक को देखा गया है ।"
"कौन से मृतक को?"
''तीसंरे को, जो हाल ही में मरा है ।"
"अच्छा ।" होलकर संभलकर बैठ गया------"कौन है वह शख्स ? और उसके साथ थर्ड मृतक को कब और कहां देखा गया?"
"वह शख्स एक है औरत.......सॉरी, लड़की है । बत्तीस-बाईस बत्तीस साइज वाली एक कयामत, जो अपनी फिगर और खूबसूरती में फैशन माडलों को भी मात कर सकती है । हमारे थर्ड मृतक को उसकी मौत से पहले फर्स्ट एंड लास्ट बार उसी बला या बाला के साथ देखा गया था ।"
“कौन है वह बला?"
"इस बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है ।"
“लेकिन कहां देखा गया है उस लड़की के साथ उसे?"
‘'एक हाई प्रोफाइल पब में, वहां वह उस अधनंगी लड़की के साथ बांहों में बांहें डाले होश खोकर नाच रहा था । दोनों ही वहुत ज्यादा नशे में थे ।"
"पब का नाम?"
"याना. . .याना पब ।"
"पता ?"
"खार मेन रोड पर स्थित काफी फेमस पब है ।"
"किसने देखा?"
"पब के एक अटेंडेंट ने ।"
“अटेंडेंट का नाम?"
"पास्को ।"
"गोवानी है क्या?"
"नाम से ही जाहिर है ।"
"कब की बात है?"
“मृतक के कत्ल से एक सप्ताह पहले की ।"
"पास्को ने मृतक को पहचाना कैसे ?"
"अगले रोज अखबार में उसकी मृत अवस्था की फोटो देखी थी । तुम्हें याद होगा, चेहरा इतना नहीं बिगड़ा था कि पहचाना ही न जा सके ।"
" पहले सोचा था इस बारे में तुम्हें भी कुछ नहीं बताऊंगा मगर लग रहा है, तुम्हें बताए बगैर काम नहीं चलेगा ।" ओवरकोट थारी कहता चला गया----'"बहरहाल, तुम्हारी मदद भी तो चाहिए ।"
"म------मेरी मदद ?"'
"यकीनन ।"
"मेरी क्या मदद चाहिए तुम्हें और तुम क्या करने वाले हो?”
ओवरकोट धारी ने बताया तो बलवंत राव की हालत ऐसी हो गई जैसे किसी साधु के श्राप से पत्थर की मूर्ति में बदल गया हो ।
ओवरकोट धारी ने पूछा'-'"क्या हुआ"'
"त. . .तुम पागल तो नहीं हो?” पत्थर के होंठ हिले ।
"वो तो तुम जैसे लोग मुझे वहुत पहले घोषित कर चुके हैं । अब तो सिर्फ यह बताना है कि मेरी मदद करोगे या नहीं! यह तो समझ ही गए होगे कि अगर तुमने इंकार भी किया तो मैं अपने कदम वापस खींचने वाला नहीं हूं । जंग में पहला तीर छोड़ने के बाद कदम वापस खींचने भी नहीं चाहिए और वो मैं छोड़ चुका हूं ।"
बलवंत राव ने बस तीन शब्द उगले-"क्या चाहते हो?"
ओवरकोट अरी ने बताना शुरू किया और जितना बताता गया ! बलवंत की आखें उतनी ही फैलती चली गई ।
कल्याण होलकर आईबी के मुख्यालय में स्थित, अपने आफिस में बैठा कम्यूटर में उलझा हुआ था ।
उसने इंटरपोल पुलिस की वह वेबसाइट खोल रखी थीी, जिस पर आईबी की तरफ से आधिकारिक तौर पर उन तीनों विदेशियों के फोटो और भौतिक पहचान का मुकम्मल डाटा हाल ही में अपलोड कराया गया था और अव आईबी को इंटरपोल की तरफ से अाने वाली किसी प्रतिक्रिया का इंतजार था मगर, जो आज एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नहीं आई थी ! मारे गए विदेशियों को लेकर होलकर का अंदाजा अगर सही था और वे तीनों या फिर उनमें से कोई एक अपने मुल्क में या किसी भी मुल्क में वांटेड थे, तो इंटरपोल के पास उनका डाटा होना चाहिए था और इस तरह होलकर को उनकी शिनाख्त सुलभ हो सकती थी ।
अगर वे उतने की क्रिमिनल नहीं थे, जितना होने पर कोई भी इंटरपोल के रॉडार पर आता है तो होलकर की सारी कोशिश बेकार साबित होने वाली थी । तब, उन तीनों कत्लों की गुत्थी सुलझाने के लिए और उस मामले की तह तक पहुंचने के लिए उसे कोई दूसरा रास्ता अख्यियार करना पड़ता, जिसका कि उसे दूर--दूर तक कोई और-छोर नजर नहीं आ रहा था ।
अभी कोई रिजल्ट नहीं निकला था कि प्रताप ने आफिस में कदम रखा ।
प्रताप उसका एक युवा और होनहार जूनियर था, जो आईबी में भर्ती होने के पहले से उसका दोस्त था । उसे देखते ही होलकर का हाथ स्वत: ही कम्यूटर के माउस से हट गया ।
"आओ प्रताप, यया खबर लाए हो?”
"एक से ज्यादा खबर लाया हूं बॉस ।" वह अपनी अादत के मुताबिक बेबाकी से बोला ।
“अच्छा !" होलकर की उम्मीद रोशन हुई----“क्या कोई खबर उन विदेशियों के कत्ल से भी सम्बंध रखती है?"
"एक खबर उस मामले से भी सम्बंध रखती है ।"
"जल्दी बताओ ।"
"बताता हूं यार । सांस तो लेने दो ।"
"यार ?" होलकर ने आंखे निकाली ।
"सॉरी . . .बॉंस ।"
"हां । यह ठीक है । आगे बोलो ।"
"आगे क्या बोलूं ?”
" पहले मेरे केस से सम्बंध रखने वाली खबर सुनाओ ।"
"दूसरी खबर भी उसी केस से सम्बंध रखने वाली हो सकती है !"
"बाद में देखेंगे । पहले पहली सुनाओ ।"
प्रताप सांस लेने के लिए रुका, फिर बोला---"आज इतने दिनों बाद पहला ऐसा शख्स मिला है, जिसके साथ अपनी मौत से पहले तुम्हारे एक मृतक को देखा गया है ।"
"कौन से मृतक को?"
''तीसंरे को, जो हाल ही में मरा है ।"
"अच्छा ।" होलकर संभलकर बैठ गया------"कौन है वह शख्स ? और उसके साथ थर्ड मृतक को कब और कहां देखा गया?"
"वह शख्स एक है औरत.......सॉरी, लड़की है । बत्तीस-बाईस बत्तीस साइज वाली एक कयामत, जो अपनी फिगर और खूबसूरती में फैशन माडलों को भी मात कर सकती है । हमारे थर्ड मृतक को उसकी मौत से पहले फर्स्ट एंड लास्ट बार उसी बला या बाला के साथ देखा गया था ।"
“कौन है वह बला?"
"इस बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है ।"
“लेकिन कहां देखा गया है उस लड़की के साथ उसे?"
‘'एक हाई प्रोफाइल पब में, वहां वह उस अधनंगी लड़की के साथ बांहों में बांहें डाले होश खोकर नाच रहा था । दोनों ही वहुत ज्यादा नशे में थे ।"
"पब का नाम?"
"याना. . .याना पब ।"
"पता ?"
"खार मेन रोड पर स्थित काफी फेमस पब है ।"
"किसने देखा?"
"पब के एक अटेंडेंट ने ।"
“अटेंडेंट का नाम?"
"पास्को ।"
"गोवानी है क्या?"
"नाम से ही जाहिर है ।"
"कब की बात है?"
“मृतक के कत्ल से एक सप्ताह पहले की ।"
"पास्को ने मृतक को पहचाना कैसे ?"
"अगले रोज अखबार में उसकी मृत अवस्था की फोटो देखी थी । तुम्हें याद होगा, चेहरा इतना नहीं बिगड़ा था कि पहचाना ही न जा सके ।"