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उसने अपनी आजाद कलाइयों को मसला, दोनों पेरों को झटका दिया । फिर दोनों हाथ उठाकर आजादी की भरपूर अंगडाई ली ।
"अब देर मत करों कमांडर ।" एक दहशतगर्द उतावलेपन से बोला- हैलीकॉप्टर तैयार है । निकल चलो । फौरन ।"
"'चल रहा हूं भाई जान, चल रहा हूं ।" मुस्तफा बड़ी बेफिक्री से बोला-----“इतने सालों के बाद आजादी की सांसे लेना नसीब हुआ है, चलना तो है ही । वस जरा एक बार इन मोहतरमा का शुक्रिया अदा कर दूं जिनकी वजह से मुझे आजादी हासिल हुई ।" कहने के साथ वह चांदनी की तरफ पलटा ।
उसकी भयावह शक्ल को देखते ही चांदनी सिहर गई । होलकर ने हस्तक्षेप करना चाहा, लेकिन इरादा बदल दिया।
"तुम वाकई वहुत हसीन हो चंदा बीबी ।” मुस्तफा चांदनी सिंह के हसीन चेहरे पर नजरें गड़ाकर बोला------“बहुत ज्यादा। अौर खुशकिस्मत भी । तभी तो जैसी आई थी, वैसी जा रही हो ! हमारी दुनिया में वैसा होता नहीं है जैसा तुम्हारे साथ हुआ इसलिए, हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ है ।"
"म. . .मतलब?” होलकर दहाड़ा । मुस्तफा के अंतिम शब्दों से उपजी अाशंकाओं ने उसके समूचे अस्तित्व को झकझोर डाला था।
"रेप न सही, एक चुम्मा तो बनता है आईबी के पिट्ठू !" कहने के साथ उसने चांदनी सिंह को न केवल अपनी बलिष्ट भुजाओं मे भर लिया था बल्कि चीखने के लिए खुले चांदनी के होठों पर अपने होंठ भी रख दिए थे ।
"हरामजादे!'' होलकर, देशपांडे, अमरीक, शेखरन , भल्ला, गिरीश और प्रताप एक साथ हलक फाड़कर चिल्ला उठे थे ।
सबकी गनें मुस्तफा की तरफ घूम गई थी और इससे पहले कि कोई ट्रेगर दबाता, वह होलकर था जो पुरजोर अंदाज में चीखा था-----" कोई गोली नहीं चलाएगा, कोई हमला नहीं करेगा उस पर ।"
सबने एक झटके से उसकी तरफ देखा । सबके चेहरे भभक रहे थे ।
सबके जिस्म कांप रहे थे । और सबकी आंखों में खून उतरा हुआ था ।
खून तो होलकर की आंखों में भी उतरा हुआ था । जिस्म में तो उसके भी सनसनी दौड़ रहीं थी और जी तो उसका भी मुस्तफा को चीर-फाड़ डालने को चाह रहा था लेकिन इस सबके बावजूद उसने अपने विवेक पर उत्तेजना को हावी नहीं होने दिया था । जेहन में चल रहे इस विचार को मरने नहीं दिया था कि----" मुस्तफा का खात्मा इस तरह नहीं होना है । सिर्फ उसी तरह होना है जिस तरह वह बहुत पहले निर्धारित कर चुका है ।
इधर उसके सभी साथियों दिमागों में जलजला-सा चल रहा था
उधर चांदनी सिंह मुस्तफा के बंधनों में यूं छटपटा रही थी जैसे बाज की गिरफ्त में कबूतरी छटपटा रही हो ।
चीखना चाहकर भी वह चीख नहीं पा रही थी क्योकि उसका निचला होंठ दरिंदा अपने दांतों में दबाए हुए था ।
"उसे छोड़ दे मुस्तफा-----छोड़ दे उसे !" होलकर कहर भरे अंदाज में दहाडा था----“वरना अपनी मौत का जिम्मेदार तू खुद होगा ।"
"छोड दी । ले । छोड़ दी तेरे मुल्क की बुलबुल ।" कहने के साथ जब चांदनी सिह को छोड़कर उसकी तरफ घूमा तो अकेले होलकर ने ही नहीं, सभी ने उसके होंठो पर लगा खून देखा ।
उधर, चांदनी सिंह का जख्मी होंठ ।
यह बात सभी की समझ में आ चुकी थी कि मुस्तफा के होंठो पर लगा खून चांदनी सिंह का है और सभी की धमनियों में लावा बह रहा था । वे होलकर के हुक्म से न बंधे होते तो अपनी जान गंवाकर भी मुस्तफा के चीथड़े उड़ा देते । उस मुस्तफा के जो अब हिंसक जानवर की तरह हंस रहा था । उधर, रोती-कलपती और लड़खड़ाती दौड़ती चांदनी सिंह डेक के दूसरे किनारे की तरफ भाग गई थी । जैसे खुद को, किसी को अपना चेहरा दिखाने लायक न समझती हो ।
दोनों गमछाधारी दहशतगर्द उस सबसे पहले ही हैलीकॉप्टर में जा बैठे थे । उनसे से एक हेलीकॉप्टर को स्टार्ट भी कर चुका था । अपने कमांडर द्वारा अचानक की गई उस हरकत से वे भी हैरान थे मगर उन्हें तो प्रतिक्रिया व्यक्त करने तक का मौका नहीं मिला था ।
'होश' में आते ही उनमें से एक ने कहा था-----“चले कमांडर !"
मुस्तफा ने बाजू से अपने होंठों पर लगे चांदनी सिह के खून को पोंछा और हिकारत भरी आखिरी निगाह होलकर इत्यादि पर डालने के बाद टू सीटर में सवार हो गया ।
"व. . .वह जा रहा है अॉफिसर ।" हैलीकॉप्टर पर नजरें गडाए देशपांडे बेचैन होकर होलकर से बोला-------"हमारी आंखों के सामने
वह हमारी इज्जत लूटकर जा रहा है ।"
होलकर पथराई-सी आंखों से सारे दृश्य को देख रहा था ।
"क. . .कब करोगे ?" देशपांडे चिल्लाया था ।
हैलीकॉप्टर ऊपर उठता चला गया ।
ऊपर मंडराता दूसरा हैलीकॉप्टर पहले ही वहां से काफी ऊपर निकल गया था । मुस्तफा बाला हैलीकॉप्टर अब वहां पहुंच चूका था, जहाँ दो पल पहले दूसरा हैलीकॉप्टर मंडरा रहा था । फिर उसने मोड़ काटा और तेजी से एक ओर को उड़ता चला गया ।
देशपांडे छटपटाता-सा दहाड़ा------'"बटन दबाओ आफिसर !"
होलकर के जबड़े भिंच चूके थे ।
उसने एक निगाह चांदनी सिह पर डाली ।
उस चांदनी सिह पर जो उन सबसे वहुत दुर डेक की रेलिंग के साथ गठरी-सी बनी अपने साथ हुई जलालत के कारण रो रही थी ।
होलकर के चेहरे पर अजीब-सी सनसनी उभरी । उसने नजर उठाकर निरंतर दूर जाते दोनों हैलीकॉप्टर्स को देखा ।
फिर, नजरें छोटे हैलीकॉप्टर पर जम गई ।
दायां हाथ, बाएं हाथ में बंधी रिस्टवॉच पर पंहुच गया !
दिल जोर---जोर से धड़कने लगा था ।
"मुझें इस बात का अफ़सोस सारी जिदगी रहेगा कि मैंने अपनी आंखो सामने तेरे हाथों देश की बेटी को बेइज्जत होते देखा मगर अब...अब तेरा खेल खत्म हुआ शैतान मुस्तफा !" वह सर्द स्वर में बोला और साथ ही, रिस्टवॉच का नन्हा-सा बटन दबा दिया ।
बटन दबाते ही रिस्टवांच से एक मद्धिम मगर काफी तीखी आवाज उभरी । इसके साथ ही वायुमंडल में इतना प्रचंड धमाका गूंजा, जिसने चारों दिशाओं को कंपा दिया----
धड़ाम $$$$$!
"अब देर मत करों कमांडर ।" एक दहशतगर्द उतावलेपन से बोला- हैलीकॉप्टर तैयार है । निकल चलो । फौरन ।"
"'चल रहा हूं भाई जान, चल रहा हूं ।" मुस्तफा बड़ी बेफिक्री से बोला-----“इतने सालों के बाद आजादी की सांसे लेना नसीब हुआ है, चलना तो है ही । वस जरा एक बार इन मोहतरमा का शुक्रिया अदा कर दूं जिनकी वजह से मुझे आजादी हासिल हुई ।" कहने के साथ वह चांदनी की तरफ पलटा ।
उसकी भयावह शक्ल को देखते ही चांदनी सिहर गई । होलकर ने हस्तक्षेप करना चाहा, लेकिन इरादा बदल दिया।
"तुम वाकई वहुत हसीन हो चंदा बीबी ।” मुस्तफा चांदनी सिंह के हसीन चेहरे पर नजरें गड़ाकर बोला------“बहुत ज्यादा। अौर खुशकिस्मत भी । तभी तो जैसी आई थी, वैसी जा रही हो ! हमारी दुनिया में वैसा होता नहीं है जैसा तुम्हारे साथ हुआ इसलिए, हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ है ।"
"म. . .मतलब?” होलकर दहाड़ा । मुस्तफा के अंतिम शब्दों से उपजी अाशंकाओं ने उसके समूचे अस्तित्व को झकझोर डाला था।
"रेप न सही, एक चुम्मा तो बनता है आईबी के पिट्ठू !" कहने के साथ उसने चांदनी सिंह को न केवल अपनी बलिष्ट भुजाओं मे भर लिया था बल्कि चीखने के लिए खुले चांदनी के होठों पर अपने होंठ भी रख दिए थे ।
"हरामजादे!'' होलकर, देशपांडे, अमरीक, शेखरन , भल्ला, गिरीश और प्रताप एक साथ हलक फाड़कर चिल्ला उठे थे ।
सबकी गनें मुस्तफा की तरफ घूम गई थी और इससे पहले कि कोई ट्रेगर दबाता, वह होलकर था जो पुरजोर अंदाज में चीखा था-----" कोई गोली नहीं चलाएगा, कोई हमला नहीं करेगा उस पर ।"
सबने एक झटके से उसकी तरफ देखा । सबके चेहरे भभक रहे थे ।
सबके जिस्म कांप रहे थे । और सबकी आंखों में खून उतरा हुआ था ।
खून तो होलकर की आंखों में भी उतरा हुआ था । जिस्म में तो उसके भी सनसनी दौड़ रहीं थी और जी तो उसका भी मुस्तफा को चीर-फाड़ डालने को चाह रहा था लेकिन इस सबके बावजूद उसने अपने विवेक पर उत्तेजना को हावी नहीं होने दिया था । जेहन में चल रहे इस विचार को मरने नहीं दिया था कि----" मुस्तफा का खात्मा इस तरह नहीं होना है । सिर्फ उसी तरह होना है जिस तरह वह बहुत पहले निर्धारित कर चुका है ।
इधर उसके सभी साथियों दिमागों में जलजला-सा चल रहा था
उधर चांदनी सिंह मुस्तफा के बंधनों में यूं छटपटा रही थी जैसे बाज की गिरफ्त में कबूतरी छटपटा रही हो ।
चीखना चाहकर भी वह चीख नहीं पा रही थी क्योकि उसका निचला होंठ दरिंदा अपने दांतों में दबाए हुए था ।
"उसे छोड़ दे मुस्तफा-----छोड़ दे उसे !" होलकर कहर भरे अंदाज में दहाडा था----“वरना अपनी मौत का जिम्मेदार तू खुद होगा ।"
"छोड दी । ले । छोड़ दी तेरे मुल्क की बुलबुल ।" कहने के साथ जब चांदनी सिह को छोड़कर उसकी तरफ घूमा तो अकेले होलकर ने ही नहीं, सभी ने उसके होंठो पर लगा खून देखा ।
उधर, चांदनी सिंह का जख्मी होंठ ।
यह बात सभी की समझ में आ चुकी थी कि मुस्तफा के होंठो पर लगा खून चांदनी सिंह का है और सभी की धमनियों में लावा बह रहा था । वे होलकर के हुक्म से न बंधे होते तो अपनी जान गंवाकर भी मुस्तफा के चीथड़े उड़ा देते । उस मुस्तफा के जो अब हिंसक जानवर की तरह हंस रहा था । उधर, रोती-कलपती और लड़खड़ाती दौड़ती चांदनी सिंह डेक के दूसरे किनारे की तरफ भाग गई थी । जैसे खुद को, किसी को अपना चेहरा दिखाने लायक न समझती हो ।
दोनों गमछाधारी दहशतगर्द उस सबसे पहले ही हैलीकॉप्टर में जा बैठे थे । उनसे से एक हेलीकॉप्टर को स्टार्ट भी कर चुका था । अपने कमांडर द्वारा अचानक की गई उस हरकत से वे भी हैरान थे मगर उन्हें तो प्रतिक्रिया व्यक्त करने तक का मौका नहीं मिला था ।
'होश' में आते ही उनमें से एक ने कहा था-----“चले कमांडर !"
मुस्तफा ने बाजू से अपने होंठों पर लगे चांदनी सिह के खून को पोंछा और हिकारत भरी आखिरी निगाह होलकर इत्यादि पर डालने के बाद टू सीटर में सवार हो गया ।
"व. . .वह जा रहा है अॉफिसर ।" हैलीकॉप्टर पर नजरें गडाए देशपांडे बेचैन होकर होलकर से बोला-------"हमारी आंखों के सामने
वह हमारी इज्जत लूटकर जा रहा है ।"
होलकर पथराई-सी आंखों से सारे दृश्य को देख रहा था ।
"क. . .कब करोगे ?" देशपांडे चिल्लाया था ।
हैलीकॉप्टर ऊपर उठता चला गया ।
ऊपर मंडराता दूसरा हैलीकॉप्टर पहले ही वहां से काफी ऊपर निकल गया था । मुस्तफा बाला हैलीकॉप्टर अब वहां पहुंच चूका था, जहाँ दो पल पहले दूसरा हैलीकॉप्टर मंडरा रहा था । फिर उसने मोड़ काटा और तेजी से एक ओर को उड़ता चला गया ।
देशपांडे छटपटाता-सा दहाड़ा------'"बटन दबाओ आफिसर !"
होलकर के जबड़े भिंच चूके थे ।
उसने एक निगाह चांदनी सिह पर डाली ।
उस चांदनी सिह पर जो उन सबसे वहुत दुर डेक की रेलिंग के साथ गठरी-सी बनी अपने साथ हुई जलालत के कारण रो रही थी ।
होलकर के चेहरे पर अजीब-सी सनसनी उभरी । उसने नजर उठाकर निरंतर दूर जाते दोनों हैलीकॉप्टर्स को देखा ।
फिर, नजरें छोटे हैलीकॉप्टर पर जम गई ।
दायां हाथ, बाएं हाथ में बंधी रिस्टवॉच पर पंहुच गया !
दिल जोर---जोर से धड़कने लगा था ।
"मुझें इस बात का अफ़सोस सारी जिदगी रहेगा कि मैंने अपनी आंखो सामने तेरे हाथों देश की बेटी को बेइज्जत होते देखा मगर अब...अब तेरा खेल खत्म हुआ शैतान मुस्तफा !" वह सर्द स्वर में बोला और साथ ही, रिस्टवॉच का नन्हा-सा बटन दबा दिया ।
बटन दबाते ही रिस्टवांच से एक मद्धिम मगर काफी तीखी आवाज उभरी । इसके साथ ही वायुमंडल में इतना प्रचंड धमाका गूंजा, जिसने चारों दिशाओं को कंपा दिया----
धड़ाम $$$$$!