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चुदाई का ज्ञान

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दीपाली- आह्ह.. मैं गई.. आह पैर दुखने लगे हैं आह मेरा पानी आ रहा है आह्ह.. फास्ट फास्ट आह…

विकास ने उसके पैरों को कंधे से उतार कर मोड़ दिया और पूरी ताक़त से चोदने लगा.. वो भी चरम पर आ गया था।

दो मिनट बाद लौड़े से पिचकारी निकली और चूत की दीवार से जा टकराई.. दीपाली भी गर्म वीर्य के अहसास से झड़ने लगी।

काफ़ी देर तक विकास उस पर ऐसे ही पड़ा रहा। उसके बाद उठकर बाथरूम चला गया। दीपाली अब भी वैसे ही पड़ी छत को देख रही थी।

विकास- अरे उठो.. जाओ बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो और कपड़े पहन लो.. पढ़ाई नहीं करनी क्या.. अब बहुत काम हैं।

दीपाली- हाँ मेरे राजा जी.. पढ़ना भी जरूरी है.. नहीं तो एक बार और चुदवा लेती।

विकास- तू एकदम पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. अब तुझे एक बार से कहाँ सबर आएगा.. रविवार को पूरा दिन चोदूँगा.. अभी पढ़ना जरूरी है।

दीपाली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।

एक घंटा पढ़ने के बाद दीपाली घर चली जाती है।

रात का खाना खा कर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। दीपाली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।

दीपाली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.. छी: मुझे तो सोच कर ही घिन आ रही है।

(ओह्ह.. दोस्तो, सॉरी आपका दिमाग़ घुमाने के लिए.. आप सोच रहे होंगे आख़िर ऐसी क्या बात कही प्रिया ने जो दीपाली इतना सोच रही है। चलो आपको ज़्यादा परेशान नहीं करूँगी… सुबह क्या हुआ.. वो बता देती हूँ इसके लिए कहानी को वापस थोड़ा पीछे ले जाना होगा तो चलो मेरे साथ।)

***********

दीपाली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है? क्या बात करनी है?

प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है इसी लिए भाग कर आई हूँ।

दीपाली- अच्छा चल बता क्या बात है?

प्रिया- यार जब तू स्कूल आई थी तब मैडी से बात करने के बाद जब अन्दर गई.. तब सोनू और दीपक भी वहाँ आ गए।

प्रिया ने उनके बीच हुई बात दीपाली को बताई.. दीपाली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पे साफ दिख रही थीं।

दीपाली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।

प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या?

दीपाली- थैंक्स यार।

प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना।

दीपाली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी।
 
प्रिया- देख यार, तू तो जानती है ना स्कूल में मुझे कोई भाव नहीं देता और वैसे भी मेरे मन में बस दीपक बसा हुआ है.. किसी और का ख्याल मेरे दिमाग़ में आता ही नहीं मगर तू जानती है वो मेरा दूर का चचेरा भाई है। अब सुन, वो तुम्हें चोदना चाहता है और मैं उससे चुदना चाहती हूँ.. बस तू कुछ भी जुगाड़ करके मुझे दीपक से चुदवाने में मदद कर दे।

प्रिया बोलती रही और दीपाली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी। आप ऐसा समझो कि दीपाली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।

दीपाली- तू पागल हो गई है क्या? ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे? मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…

प्रिया- देख सोच ले तूने पहले ‘हाँ’ कही है अब अगर तू ना करेगी तो मैं कुछ कर बैठूँगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा…

दीपाली- ये क्या बकवास है.. मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने ये सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के ही बाहर है।

प्रिया- अच्छा तू विकास सर से चुदे वो ठीक और मैं गलत.. ना ना ज़्यादा सोच मत.. मैं बताती हूँ.. जब तू पेपर लेने गई और काफ़ी देर तक नहीं आई.. मैं तुमको बुलाने वहाँ आई थी.. मगर सर को देख कर मैं एक तरफ छुप गई थी और तब तुम लोगों की बात मैंने सुनी हैं। अब जाहिर सी बात है इतना तो ज्ञान है मुझे.. कि बिना चुदे तो तू ऐसी बात सर से करेगी नहीं…

दीपाली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए.. आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी।

दीपाली का गला सूख गया… बड़ी मुश्किल से उसने बोला।

दीपाली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले.. उसके बाद भी अगर तुमको लगता है कि ये सही है तो ओके.. मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।

प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।

दीपाली- नहीं.. तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी… ओके..

प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…

दीपाली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या.. चल बाय कल मिलते हैं।

**************

(तो दोस्तों अब आपको सारी बात समझ में आ गई होगी.. सॉरी मैंने पिछले डायलोग दोबारा यहाँ लिखे मगर ऐसे आपको समझ नहीं आता.. चलो अब आगे की कहानी का मजा लीजिए।)

दीपाली सोचते-सोचते अचानक से उठी उसे कुछ याद आया और उसने एक छोटी डायरी देखना शुरू की.. थोड़ी देर बाद उसने एक नम्बर को गौर से देखा और उस पर फ़ोन लगाया।

फ़ोन की घन्टी बजने लगी.. थोड़ी देर बाद किसी ने फ़ोन उठाया।

दीपाली- हैलो क्या मैं प्रिया से बात कर सकती हूँ?

प्रिया- अरे दीपाली तू.. हाँ बोल क्या बात है और मेरा नम्बर तुझे कहाँ से मिला?

दीपाली- अरे यार पिछले साल इम्तिहान के वक्त तूने ही तो दिया था.. याद है?

प्रिया- हाँ याद आया.. मगर अभी तुझे क्या जरूरत पड़ गई.. फ़ोन करने की.. वो तो बता?

दीपाली- देख ऐसे फ़ोन पर मैं नहीं बता सकती.. तू कल स्कूल के बाद मेरे साथ मेरे घर आ सकती है क्या? बहुत जरूरी बात करनी है।

प्रिया- हाँ पढ़ाई के बहाने से आ तो सकती हूँ मगर ये बात तो तू कल भी बोल सकती थी.. अभी फ़ोन क्यों किया।

दीपाली- नहीं, कल बोलती तो तू घर में किसी को कैसे बताती अब सुन, सुबह स्कूल आने के पहले अपनी मॉम को बता कर आना ताकि किसी को कोई शक ना हो समझी।

प्रिया- हाँ यार ये तो मैंने सोचा ही नहीं चल ओके बाय… कल मिलते हैं।

अगले दिन दीपाली स्कूल जा रही थी तब मैडी रास्ते में उसको मिल गया।
 
मैडी- हाय दीपाली गुड मॉर्निंग, कैसी हो?

दीपाली- गुड मॉर्निंग, क्या बात है आज गेट पर नहीं खड़े हुए.. यहाँ क्या कर रहे हो?

मैडी- तुम्हारा इन्तजार कर रहा था.. वहाँ वो मेरे दोस्त होते है ना.. तुमको अच्छा नहीं लगता इसलिए मैंने सोचा यहीं बात कर लूँ।

दीपाली- देखो मैडी वैसे तो मुझे तुम भी पसन्द नहीं हो क्योंकि तुम तीनों के ही चर्चे स्कूल में होते रहते हैं मगर तुम्हें मैंने कभी किसी को परेशान करते हुए नहीं देखा इसलिए तुमसे बात की.. अब ऐसे अकेले में यहाँ-वहाँ मुझसे बात मत किया करो।

मैडी- थैंक्स जो तुमने मुझे समझा मगर तुम गलत सोच रही हो मैं यहाँ किसी जरूरी काम से आया हूँ।

दीपाली- कैसा काम?

मैडी- प्लीज़ बुरा मत मानना.. तुम सोमवार को आ रही हो ना.. बस ये कनफर्म करना था क्योंकि अगर तुम आओगी तो मैंने सोचा है होटल में पार्टी दूँगा.. और अगर नहीं आओगी तो इतना खर्चा क्यों करूँ.. घर में ही सब को बुला लूँगा।

दीपाली- अच्छा इस बात का मैं क्या मतलब निकालूँ.. सिर्फ़ मेरे लिए ही तुम खर्चा करना चाहते हो और किसी की कोई वेल्यू नहीं है क्या?

मैडी- तुम फिर गलत समझ रही हो देखो तुम अच्छी लड़की हो.. अगर तुम आओगी तो कुछ खास लोगों के साथ हम चुपचाप होटल में पार्टी कर लेंगे. उसके बाद में घर आकर दोबारा मेरे फालतू दोस्तों के साथ शामिल हो जाऊँगा.. उनको मैं तुम्हारे सामने नहीं लाना चाहता.. बस यही असली बात है।

मैडी की बातों ने दीपाली को काफ़ी प्रभावित किया उसको बड़ी ख़ुशी हुई ये जानकार कि खास उसके लिए मैडी ये सब कर रहा है मगर उसको एक बात और समझ में आ गई कि मैडी उसको दाना डाल रहा है, सारा चक्कर चूत लेने का है बस।
 
दीपाली- मैं 100% आऊँगी जाओ तुमको जो तैयारी करनी है कर लो।

मैडी एकदम खुश हो गया और वहाँ से चला गया। दीपाली भी स्कूल की तरफ बढ़ने लगी।

(दोस्तो, आज विकास सर ने दीपाली को कई बार देखा मगर आज दीपाली ने बस हल्की सी मुस्कान दी उसका ध्यान तो प्रिया पर था.. दिन ऐसे ही बीत गया।)

छुट्टी के बाद प्रिया को ले कर वो घर की तरफ जाने लगी।

दीपाली- हाँ तो अब बता तूने क्या सोचा?

प्रिया- सोचना क्या था मेरा तो अब भी वही जवाब है कि हाँ.. मुझे दीपक चाहिए बस।

दीपाली- अच्छा एक बात तो बता तेरे दिमाग़ में ये ख्याल आया कैसे और दीपक ही क्यों और कोई भी तो हो सकता है.. अगर तू कहे तो सर से बात कर लूँ.. इसमें दो फायदे हैं.. एक तो सर मज़ा बहुत देते हैं दूसरा तू भाई के साथ सेक्स के पाप से बच जाएगी।

प्रिया- नहीं नहीं, सर को बताना भी मत.. समझी और कैसा पाप.. आजकल तो सगे भाई-बहन मज़ा ले रहे हैं.. फिर ये तो दूर के चाचा का बेटा है.. तू ये ज्ञान देना बन्द कर.. बस ‘हाँ’ कह दे कि मेरी हेल्प करेगी और आइडिया कैसे आया ये लंबी कहानी है.. घर चल कर बताऊँगी।

दीपाली- अच्छा हाँ.. बस खुश.. मगर तूने क्या सोच कर मुझे ये बात बताई है.. मैं कैसे तेरी मदद करूँगी?

प्रिया- कल जब उन तीनों की बात मैंने सुनी.. उसी वक्त मुझे एक आइडिया दिमाग़ में आया कि वो तीनों तेरे ऊपर लट्टू हैं.. अगर कुछ ऐसा हो कि तेरी जगह मैं आ जाऊँ और उनसे चुदवा लूँ.. बस यही सोच कर मैंने तेरे को बताई ये बात..

दीपाली- मगर कैसे यार?

प्रिया- तू इसकी टेन्शन मत ले.. मैंने बहुत सी चुदाई की कहानी पढ़ी हैं.. एक से एक आइडिया मेरे पास हैं।

दीपाली- लो बातों में पता भी नहीं चला.. घर भी आ गया।

दोनों घर में चली जाती है सामान्य सी फॉरमॅलिटी के बाद दोनों साथ खाना खा लेती हैं और दीपाली के कमरे में पढ़ाई के बहाने चली जाती हैं।

दीपाली- चल आजा अब यहाँ बैठ कर सबसे पहले मुझे ये बता कि दीपक का ख्याल तुझे कैसे आया और दूसरी बात क्या कभी तूने किसी के साथ कुछ किया है?

प्रिया- नहीं यार मैंने ऊँगली के सिवा कभी कुछ नहीं किया.. हाँ दीपक के बारे में तुझे शुरू से सब बताती हूँ। तभी तुमको मेरी चाहत समझ में आएगी।

दीपाली- चल बता में भी तो सुनू कि आख़िर माजरा क्या है?

प्रिया- अच्छा सुन देख तू तो जानती है दीपक और उसके दोस्त कितने बिगड़े हुए हैं।

दीपाली- हाँ यार पता है तू अपनी बात बता ना…

प्रिया- तू सुन तो.. बीच में मत बोल।

दीपाली- सॉरी चल.. अब नहीं बोलूँगी.. आगे की बात बता।

प्रिया- कई बार दीपक अपने दोस्तों के साथ शराब पीकर घर आ जाता था.. किसी को पता नहीं चलता था।

दीपाली एकदम ध्यान से सब सुन रही थी।

प्रिया- अब सुन मेरी बात पिछले एक साल से मैं चुदाई की कहानी पढ़ रही हूँ और हर तरह की कहानी मैंने पढ़ी हुई हैं.. उसमें भाई-बहन की कहानी भी शामिल थीं। मेरे दिमाग़ में चुदाई करने की इच्छा ने जन्म ले लिया। स्कूल में कोई मुझे देखता भी नहीं था और मेरी चुदने की इच्छा दिन पर दिन बढ़ने लगी। एक बार चाचा जी को दीपक के शराब पीने की आदत का पता चल गया और उन्होंने उसे बहुत मारा और घर से निकाल दिया। मेरे पापा का स्वभाव थोड़ा नर्म है और चाचा बहुत तेज गुस्से वाले हैं। तब मेरे पापा दीपक को हमारे यहाँ ले आए ... उसे जरा भी होश ना था.. बड़ी मुश्किल से ऊपर मेरे कमरे के पास वाले कमरे में उसे लिटा कर पापा चले गए। उनके जाने के बाद माँ ने कहा कि उसके कमरे में पानी रख आओ और कुछ फल वगैरह भी रख दो.. होश आएगा तो खा लेगा।

दीपाली एकदम ध्यान से सब सुन रही थी।

- जब मैं कमरे में गई वो बैठा हुआ था जैसे ही मैं उसके पास गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा- स..सुन तो यार म..मेरी बात गौर से सुन.. साला जिन्दगी का कचरा हो गया है सोनू.. तू मेरा भाई है ना.. तू.. मुझे अरे यार साला बात के बीच में मूत आ गया यार.. मेरा हाथ पकड़ कर बाथरूम तक ले चल ना.. स..साली आज तो ज्ज..ज़्यादा चढ़ गई है। मुझे कुछ समझ नहीं आया क्या करूँ.. क्योंकि वो मुझे अपना दोस्त समझ रहा था। मैंने उसका हाथ पकड़ा और बाथरूम तक ले गई।

दीपाली- यार क्या बोल रही है.. किसी ने देखा नहीं..?

प्रिया- अरे कमरे में बाथरूम था यार बाहर नहीं गई.. अब तू सुन…

दीपक- अरे स..साली ज़िप नहीं खुल रही आह्ह… साला मूत भी अन्दर ही निकल जाएगा।

प्रिया- मुझे लगा ये यहीं सूसू कर देगा.. मैंने नीचे बैठ कर उसकी ज़िप खोली.. उसने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। सीधे ही उसका लण्ड मेरी आँखों के सामने आ गया.. यार सोया हुआ भी बड़ा मस्त लग रहा था और मज़े की बात एकदम क्लीन था। मैंने हाथ से पकड़ कर उसे बाहर निकाला।
 
दीपाली- ऊह.. माँ.. तुझे शर्म नहीं आई छी: अपने ही भाई का लण्ड हाथ में ले लिया और तुझे जरा भी डर नहीं लगा कि होश में आने के बाद वो क्या सोचेगा?

प्रिया- अरे नहीं रे.. वो बहुत टल्ली था उसे कहाँ कुछ याद रहता है। चाचा उसको मार रहे थे तब भी पता नहीं किस का नाम ले रहा था कि तुझे देख लूँगा।

दीपाली- ओह.. अच्छा आगे बता.. क्या हुआ वो बता…

प्रिया- होना क्या था नीचे से माँ की आवाज़ आ रही थी.. मैं घबरा गई उसने बहुत ज़्यादा सूसू की.. मैंने जल्दी से उसकी ज़िप बन्द की.. उसको बिस्तर पर लिटा कर कमरे से बाहर निकल गई।

दीपाली- उसके बाद तेरे मन में दीपक का ख्याल आया।

प्रिया- नहीं यार उसके बाद मैं अपने कमरे में आ कर सोचने लगी.. बस मेरे दिमाग़ में दीपक का लण्ड घूमने लगा.. मैंने जल्दी से कहानी की किताब निकाली और भाई-बहन की कहानी पढ़ने लगी.. जब रात ज़्यादा हो गई और मेरे जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी.. तो मैं चुपके से नीचे गई।

मॉम-डैड के कमरे से खर्राटों की आवाज़ आ रही थी, वो गहरी नींद में सो रहे थे। उसके बाद मैं ऊपर दीपक के पास गई.. वो अब भी बेसुध लेटा हुआ था मैंने हिम्मत करके उसकी पैन्ट का हुक खोला और लौड़ा बाहर निकाला। अरे यार तुझे क्या बताऊँ.. पहली बार लौड़े को ऐसे देख रही थी और सेक्सी कहानी क कारण मेरी चूत एकदम गीली हो रही थी। मैंने उसके लौड़े को सहलाना शुरू किया कुछ ही देर में वो अपने असली आकार में आने लगा।

दीपक तो बेसुध सा पड़ा हुआ.. ना जाने क्या बड़बड़ा रहा था.. मुझे तो बस लौड़े से मतलब था.. तन कर क्या मस्त 7″ से भी ज़्यादा हो गया होगा और मोटा भी खूब था यार.. तुझे क्या बताऊँ लौड़ा देख कर मेरी तो हालत खराब हो गई..

दीपाली- अच्छा उसके बाद तूने क्या किया.. यार तेरी कहानी में मज़ा आ रहा है।

प्रिया- यार क्या बताऊँ बस उसको सहलाती रही.. कहानी में लण्ड चूसने के बारे में पढ़ा था कि बड़ा मज़ा आता है लेकिन यह सच होता है, यह नहीं पता था।

दीपाली- अरे एकदम सच होता है.. बड़ा मज़ा आता है मैंने भी…

दीपाली जोश-जोश में बोल तो गई मगर जल्दी ही उसको ग़लती का अहसास हो गया और वो एकदम चुप हो गई।

प्रिया- अच्छा तो ये बात है… हाँ बड़े मज़े ले चुकी है तू.. तो अब बता भी दे.. कितनी बार चूस चुकी है और कैसा मज़ा आया?

दीपाली- अभी नहीं सब बताऊँगी मगर पहले तू बता पूरी कहानी।

दीपाली को उसकी बातों में बड़ा रस आ रहा था उसकी चूत भी गीली होने लगी थी।

प्रिया- यार पहली बार मैंने लण्ड को होंठों से छुआ.. उफ्फ कितना गर्म था वो.. डरते डरते मैंने उसकी टोपी को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। सच्ची वो ऐसा अहसास था जिसे मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकती।

दीपाली- चुप क्यों हो गई बोल ना यार प्लीज़..

प्रिया- यार बोल तो रही हूँ.. उस दिन को याद करके मुँह में पानी आ गया। उसके बाद मैं आराम से लौड़े को चूसने लगी। अब मैंने जड़ तक उसको चूसना शुरू कर दिया। बड़ा मज़ा आ रहा था जीभ से उसको पूरा चाट रही थी। मैंने उसकी गोटियाँ भी चूसीं.. कोई 15 मिनट तक मैं चूसती रही उसके लौड़े से कुछ पानी की बूँदें आईं जिसका स्वाद खट्टा सा.. नमकीन सा पता नहीं कैसा था.. मगर मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। कसम से मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी। जब कोई 25 मिनट हो गए होंगे मुझे चूसते हुए तो मैंने रफ़्तार से मुँह को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.. जैसे चुदाई होती है बस फिर क्या था उसका लौड़ा फूलने लगा और मेरे मुँह में ही उसने सारा माल छोड़ दिया।

दीपाली- ओह.. तूने क्या किया.. पी गई या थूक दिया बाहर…

प्रिया- अरे नहीं मैं तैयार नहीं थी कि कब पानी आएगा.. अचानक से ये सब हो गया और उसके पानी की धार भी बहुत तेज़ी से आई.. सीधे गले में चली गई.. मजबूरन पीना ही पड़ा। मगर हाँ एक बात है.. शुरू में गंदी फीलिंग आई.. उसके बाद बड़ा अच्छा लगा।

दीपाली- यार तूने कितनी हिम्मत का काम किया.. मैं होती तो शायद कभी नहीं करती।
 
प्रिया- अरे इसमें क्या हिम्मत.. आगे सुन.. उसका तो पानी निकल गया मगर मैं काम-वासना की आग में जलने लगी.. मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और अब बर्दास्त के बाहर था। मैंने नाईटी निकाली जो में रात को पहनती हूँ.. पैन्टी भी एक तरफ रख दी और अपनी कुँवारी चूत पर उसका लौड़ा रगड़ने लगी.. जो अब धीरे-धीरे बेजान हो रहा था.. तू यकीन नहीं करेगी मुरझाए हुए लौड़े ने भी वो कर दिया जो तू सोच भी नहीं सकती जैसे ही मेरी चूत पर मैंने लौड़ा स्पर्श किया.. झट से मेरी चूत का फुव्वारा फूट गया और इतना पानी निकला कि कभी ऊँगली से इतना नहीं निकला होगा यार…

दीपाली- यार तेरी बातों ने तो कमरे का माहौल गर्म कर दिया, पूरा जिस्म आग की तरह जल रहा है।

प्रिया- अरे तेरा जिस्म जल रहा है ... बात करते-करते मुझे बस दीपक का लौड़ा ही नज़र आ रहा है.. मेरी पूरी पैन्टी गीली हो गई यार..

दीपाली थोड़ा सा झिझक कर बोली- यार ऐसा ही हाल मेरा भी है।

प्रिया- हाँ जानती हूँ कब से तू पैरों को इधर-उधर कर रही है।

दीपाली- उसके बाद क्या हुआ.. उसका दोबारा कड़क किया तूने?

प्रिया- नहीं यार मॉम शायद उठ गई थीं.. वे पानी पीने आई थीं या पता नहीं.. मगर मैंने नीचे कुछ आवाज़ सुनी तो मैंने जल्दी से उसके लौड़े को पैन्ट में करके अपने कपड़े ठीक किए और वहाँ से भाग गई अब तो तुझे समझ आ गई ना मेरी बात.. बस मैं उसी वक्त ये सोच चुकी थी कि अब किसी भी तरह दीपक को फंसाऊँगी और अपनी चूत का मुहूर्त उसी से करवाऊँगी।

दीपाली- यार सुबह कुछ नहीं कहा उसने.. रात की कोई तो बात उसे याद होगी?

प्रिया- अरे कहाँ यार.. वो तो माँ से ये पूछ रहा था मैं यहा कैसे आया.. उसको तो चाचा की मार भी याद नहीं थी।

दीपाली- यार एक बात तो तुझे पता है कि दीपक एक नम्बर का आवारा है.. तू थोड़ी सी कोशिश करके देख, वो खुद तुझे चोदने को राज़ी हो जाएगा।

प्रिया- जानती हूँ.. मगर कैसे करूँ यार.. एक ही घर में होते तो ऐसा न था.. अब दीपक को बस स्कूल में देखती हूँ.. घर तो समझो वो बस खाना खाने जाता है.. बाकी वक्त अपने दोस्तों के साथ ही रहता है। उसे अपने जिस्म के जलवे दिखाने का मुझे कोई मौका ही नहीं मिलता.. अब रात को तो मैं उसके घर बिना काम के जा नहीं सकती हूँ।

दीपाली- हाँ ये बात भी सही है.. यार तूने इतनी हिम्मत कर ली वो ही बहुत बड़ी बात है।

प्रिया- यार क्या करूँ.. उसका लौड़ा था ही ऐसा कि बस मेरी चूत फड़फड़ाने लगी और हिम्मत अपने आप आ गई।

दीपाली- यार तेरी बातें सुनकर चूत की हालत पतली हो गई.. तू रूक मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।

प्रिया- अरे बाथरूम में जाकर ऊँगली करेगी.. इससे अच्छा तो यहीं कर ले और मैं तो कहती हूँ चल मज़ा करते हैं.. मैंने कहानी में पढ़ा है कि कैसे दो लड़कियाँ आपस में चुदाई का मज़ा लेती हैं।

प्रिया ने दीपाली के मन की बात बोल दी थी.. उसे अनुजा के साथ का सीन याद आ रहा था.. वो झट से मान गई।

दीपाली- चल निकाल कपड़े.. नंगी हो कर खूब मज़ा करेंगे यार..

प्रिया- हाँ यार.. नंगी हो कर ही ज़्यादा मज़ा आएगा।

दोनों ने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।
 
(दोस्तो, प्रिया का फिगर तो आपको पता ही है 30-26-30 ... चलो अब प्रिया को नंगी भी देख लो। जैसा कि मैंने पहले आपको बताया था प्रिया थोड़ी साँवली है लेकिन दोस्तों रंग का कोई महत्व नहीं होता.. कुदरत ने प्रिया के यौनांगों को बड़ा ही तराशा था.. उसके मम्मे एकदम गोल.. जरा भी इधर-उधर नहीं.. एकदम परफ़ेक्ट जगह पर और थोड़े ऊपर को उठे हुए चुदाई की भाषा में ‘तने हुए मम्मों बोल सकते हैं और उन गोल मम्मों पर उसके खड़े निप्पल.. एकदम गुलाबी.. जैसे किसी ने गुलाब की पत्ती तोड़ कर वहाँ चिपका दी हो और पतली कमर जिसमें एक गड्डा बना हुआ था.. जिससे उसकी गाण्ड का उठाव अलग ही नज़र आता था। भले ही वो साँवली हो मगर कोई इसको ऐसी हालत में देख ले उसका लौड़ा बिना चोदे ही पानी टपकने लगेगा। चलो अब प्रिया को नंगा तो अपने देख लिया। अब इन दोनों कमसिन कलियों की रगड़लीला भी देख लो।)

दीपाली- वाउ यार तेरे मम्मे तो बहुत अच्छे हैं गोल-गोल…।

प्रिया- रहने दे यार, इतने ही अच्छे हैं तो कोई देखता क्यों नहीं.. जिस्म तो तेरे पास है.. एकदम गोरा.. बेदाग … किसी को भी अपनी और खींचने वाला..

दीपाली- अरे यार अब बहस में क्या फायदा.. चल आ जा, मस्ती करते हैं।

दोनों कमसिन कलियां बिस्तर पर नंगी पड़ी.. एक-दूसरे को चूमने लगीं.. कभी दीपाली उसके मम्मों दबाती और चूसती.. तो कभी वो।

दोनों एकदम गर्म हो गई थीं प्रिया चुदी हुई नहीं थी मगर कहानी से उसने काफ़ी कुछ सीखा हुआ था.. वो मम्मे चूसने के साथ-साथ दीपाली की चूत भी रगड़ रही थी। काफ़ी देर तक दोनों एक-दूसरे के साथ मस्ती करती रहीं।

दीपाली- उफ़फ्फ़ आह प्रिया मेरी चूत में कुछ हो रहा है प्लीज़ आह्ह… थोड़ी देर चाट ले ना आह्ह… मैं भी तेरी चाटती हूँ आह्ह… आजा 69 का स्थिति बना ले।

प्रिया- हाँ यार उफ़फ्फ़.. चूत जलने लगी है.. बड़ा मज़ा आएगा चल आजा..

दोनों अब एक-दूसरे की चूत का रस चाट रही थीं दीपाली तो पहले चूत चाट चुकी थी.. उसको तो बड़ा मज़ा आ रहा था मगर प्रिया की चूत पर पहली बार होंठ लगे थे.. वो तो आनन्द की असीम सीमा पर पहुँच गई थी। उसको बहुत मज़ा आ रहा था और उसी जोश में वो दीपाली की चूत को बड़े मज़े से चाट रही थी।

दोनों पहले से ही गर्म थीं ज़्यादा देर तक चूत-चटाई बर्दास्त ना कर पाईं और एक-दूसरे के मुँह में झड़ गईं। झड़ने के 5 मिनट बाद तक दोनों शान्त पड़ी रहीं।

प्रिया- उफ़फ्फ़… साली ये चूत भी क्या कुतिया चीज है.. बड़ा मज़ा आया आज तो.. यार अगर तू लड़की होकर इतना मज़ा दे सकती है तो दीपक मुझे कितना मज़ा देगा।

दीपाली- हाँ यार लौड़े से जो मज़ा आता है.. वो कहीं किसी से नहीं मिलता और मैंने जो चूत चाटी.. वो कुछ नहीं है.. मर्द की ज़ुबान जब चूत पर लगती है.. अय..हय.. उसका मज़ा कुछ अलग ही होता है।

प्रिया- सच्ची..! ऐसा मज़ा मिलता है.. यार प्लीज़ इसी लिए तो कह रही हूँ.. कुछ कर दीपक को मेरा बना दे.. जब उन्होंने एक बार तेरा नाम लिया तो मुझे बड़ा गुस्सा आया.. मगर बाद में मैंने सोच लिया कि अब तू ही मेरी मदद करेगी।

दीपाली- यार यही बात करने तो तुझे यहाँ बुलाई हूँ.. अब तू ही बता.. मैं उसको राज़ी कैसे करूँ.. तुझे चोदने के लिए।

प्रिया- देख सीधी सी बात है.. वो तीनों तुझे चोदना चाहते हैं.. अब तू सच-सच बता.. उनसे चुदना चाहती है या नहीं.. उसके बाद मैं आइडिया बताती हूँ।

दीपाली- नहीं यार.. मैं उनसे नहीं चुदना चाहती.. वो स्कूल में बदनाम कर देंगे… मुझे उन पर ज़रा भी विश्वास नहीं है।

प्रिया- मैं जानती थी तू यही कहेगी.. अब सुन, तुझे चुदना नहीं है.. बस चुदने की एक्टिंग करनी है।

दीपाली- वो कैसे, यार?

प्रिया- सुन.. मैडी तेरे ज़्यादा करीब आ रहा है.. तू उसको सीधे बोल दे कि तुझे उनकी बात पता चल गई है और तू खुद भी यही चाहती है.. मगर तेरी एक शर्त है कि जगह तुम बताओगी और अंधेरे में सब काम करना होगा। तू उनके सामने नंगी नहीं होना चाहती।

दीपाली- इससे क्या होगा और मैं ऐसा क्यों कहूँ..? मुझे नहीं चुदना यार उनसे…

प्रिया- अरे यार सुन तो, जब वो मान जाए.. तो हम दोनों किसी जगह का इंतजाम कर लेंगे। मैं छुप कर रहूंगी.. तू उनसे ये कहना कि मैं कुँवारी हूँ और अपनी चूत पहली बार दीपक को दूंगी.. उसके बाद बाकी दोनों एक-एक कर के ले सकते हैं ... कमरे में जब तुम और दीपक ही हों तब तुम लाइट बन्द कर देना। मैं तुम्हारी जगह ले लूंगी.. बस आवाज़ तुम्हारी और चूत मेरी .. वो मुझे चोदेगा और तू साइड में चुपचाप बैठी रहना।

प्रिया की बात सुनकर दीपाली बस उसको देखती रही।

प्रिया- अरे ऐसे मुँह क्या फाड़ रही है कुछ बोल ना आइडिया कैसा लगा?
 
दीपाली- यार, ऐसे आइडिया तेरे दिमाग़ में आए कहाँ से और मुझे नहीं करना ये सब.. बात तो वहीं की वहीं है.. भले ही चुदेगी तू.. मगर उनकी नज़र में तो मैं ही हूँ ना.. वो तो मुझे पूरे स्कूल में बदनाम कर देंगे।

प्रिया- अरे यार अब तू ही कुछ सोच .. मुझे तो जो समझ आया मैंने तुझे बोल दिया।

दीपाली- देख प्रिया, तू मेरी बात मान ले.. विकास सर का लौड़ा 8″ का है और मोटा भी बहुत है.. उन्हें चोदने का बहुत ज़्यादा अनुभव भी है.. तू अपनी सील उनसे ही तुड़वा ले।

प्रिया- नहीं यार, तू मुझे सर के लौड़े का लालच मत दे … मैंने पक्का मन बना लिया है.. सील तो दीपक से ही तुड़वाऊँगी.. उसके बाद चाहे उसके दोस्त चोद लें या कोई और… मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

दीपाली- यार, तूने मुझे दुविधा में डाल दिया.. कुछ सोचना पड़ेगा मुझे.. तू ऐसा कर आज रहने दे.. मैं कल बताती हूँ कि कैसे दीपक को राज़ी करना है… अब तो कुछ भी हो जाए तेरी चूत की सील दीपक ही तोड़ेगा।

प्रिया- थैंक्स यार उम्म्म्मा…

ख़ुशी के मारे प्रिया ने दीपाली को चूम लिया।

दीपाली- अब ये सब बातें भूल जा .. देख आज शुक्रवार है.. मैडी का जन्मदिन सोमवार को है.. अभी काफ़ी वक्त है। मैं कुछ ना कुछ सोच लूँगी .. चल अभी थोड़ी पढ़ाई कर लेते हैं यार…

प्रिया- अरे यार तू इतनी अच्छी स्टूडेंट है.. तू तो पक्का पास हो जाएगी.. तो क्यों इतना पढ़ती है.. चल मुझे अपनी कहानी सुना ना..

दीपाली- नहीं अभी बस स्टडी.. और कुछ नहीं। फिर कभी अपनी बात बता दूँगी।

प्रिया बुझे मन से उसके साथ पढ़ने लगी।

शाम तक प्रिया वहीं रही.. उसके बाद दीपाली ने उसे भेज दिया और खुद विकास सर के घर जाने की तैयारी में लग गई।

सबसे पहले तो वो नहा कर फ्रेश हुई उसके बाद उसने ब्लू जींस और सफ़ेद टी-शर्ट पहनी.. बाल भी खुले रखे और घर से निकल गई।

(दोस्तों, इस ड्रेस में दीपाली बहुत सुन्दर दिख रही थी.. चुस्त टी-शर्ट में से उसके मम्मे साफ दिख रहे थे और जींस में से गाण्ड एकदम बाहर को निकल रही थी। कोई अगर उसको पीछे से देख ले तो उसके मन में बस यही विचार आए कि काश एक बार इसकी गाण्ड मार लूँ.. उसका लौड़ा तो बगावत कर दे कि अभी मुझे इसकी गाण्ड में घुसना है.. मगर ऐसा हो नहीं सकता ना.. चलो ये सब बातें जाने दो. कहानी पर आती हूँ।)

दीपाली आराम से अपनी धुन में चली जा रही थी। सुधीर उसी जगह खड़ा उसका इन्तजार कर रहा था। उसको देखते ही सुधीर की आँखों में चमक आ गई।

सुधीर- वाह क्या क़यामत लग रही हो आज तो. क्यों इस बूढ़े पर सितम ढा रही हो.. ऐसे जलवे मत दिखाओ.. देखो लौड़ा हरकत में आ गया तुमको देख कर।
 
दीपाली- हा हा हा! आप भी ना अंकल ओह.. उप्पस सॉरी सुधीर जी…

सुधीर- हाय.. मार डाला रे जालिम, आज क्या कत्ल करने का इरादा है…

दीपाली- आप को ऐसा क्यों लगा.. मैंने कौन सा हाथ में खंजर ले रखा है।

सुधीर- बेबी, तुमको खंजर की क्या जरूरत.. तेरे पास तो ऐसे-ऐसे बॉम्ब हैं कि आदमी को एक ही वार में ढेर कर दें।

दीपाली- अब ये पहेलियां अपने पास रखो.. मैंने जो काम बताया था वो किया आपने?

सुधीर- जानेमन, ऐसा हो सकता है क्या कि तुम कोई बात कहो और मैं ना करूँ.. अरे तुमने तो मुझे वो दिया है जो मरते दम तक मैं तेरा अहसानमंद रहूँगा.. ले ये रही तेरी चाभी.. मगर एक बात का ध्यान रखना… अपने दोस्त को मेरे बारे में कुछ ना बताना.. बस कोई बहाना बना देना ठीक है।

(अरे अरे ना ना.. दोस्तों दिमाग़ मत लड़ाओ कि कैसी चाभी.. कहाँ की चाभी? आप शायद भूल गए होंगे कि कल दीपाली और सुधीर के बीच कुछ काम की बात हुई थी.. बस यही था वो काम.. मैं आपको बताती हूँ कल दीपाली ने सुधीर से उसके घर की डुप्लिकेट चाभी माँगी थी.. तब वो चौंका था मगर दीपाली ने उसे समझाया कि उसका कोई दोस्त है. उसके साथ वो कभी दिन में वहाँ मज़े लेने आएगी.. जब सुधीर होटल पर रहेगा.. बस सुधीर मान गया और उसने आज चाभी दे दी।

अब आप ये सोच रहे होंगे कि कौन दोस्त? तो आपको बता दूँ दीपाली के मन में मैडी का ख्याल आया था कि शायद कभी उसको अपनी चूत का मज़ा दूँ तो जगह तो चाहिए ना.. बस यही सोच कर उसने चाभी ली।

ओके, अब आगे की कहानी पर ध्यान देते हैं।)

दीपाली- थैंक्स अब मैं जाती हूँ देर हो रही है।

सुधीर- अरे ये क्या.. आज भी मुझे सूखा रहना होगा.. जान बस थोड़ी देर के लिए आ जाओ ना.. उसके बाद चली जाना…

दीपाली- नहीं.. नहीं.. ऐसा करो आने के वक्त मैं आती हूँ.. अभी जल्दी जाना जरूरी है।

सुधीर ने बुझे मन से उसको जाने दिया मगर उससे वादा लिया कि आते समय वो उसके घर आएगी। दीपाली सीधी विकास के घर जा पहुँची।

अनुजा- ओये होये.. क्या बात है.. आज तो बड़ी मस्त लग रही हो.. क्या इरादा है मेरी दीपा रानी का…

दीपाली- इरादा तो आप जानती ही हो.. कहाँ हैं मेरे राजा जी.. दिखाई नहीं दे रहे।

अनुजा- अन्दर बैठे हैं, तेरा ही इन्तजार कर रहे हैं.. जा जाकर मिल ले बड़े उतावले हो रहे हैं तेरे लिए…

जब दीपाली कमरे में गई तो विकास को देख कर चौंक गई.. विकास एकदम नंगा बैठा लौड़े को सहला रहा था।

दीपाली- ऊह.. माँ.. ये क्या है सर.. आप ऐसे क्यों बैठे हो.. इतनी भी क्या जल्दी थी आपको.. मेरे आने का इन्तजार भी नहीं किया और लौड़े को कड़क करने बैठ गए.. मैं कब काम आऊँगी।

विकास कुछ बोलता तभी पीछे से अनुजा आ गई।

अनुजा- हा हा हा हा विकास जवाब दो.. हा हा हा चुप क्यों हो.. हा हा हा…

विकास- बस भी करो.. इतना हँसोगी तो पेट में दर्द हो जाएगा।

दीपाली- अरे कोई मुझे भी बताएगा कि क्या हुआ?

विकास- अरे कुछ नहीं दीपाली… हम दोनों मजाक-मस्ती कर रहे थे… बस उसी दौरान लौड़े पर ज़ोर से चोट लग गई.. बड़ा दर्द हुआ.. इसी लिए पैन्ट निकाल कर इसे सहला रहा था कि तुम आ गईं.. बस इसी बात पर अनु को हँसी आ रही है।

अनुजा अब भी हँसे जा रही थी.. दीपाली जल्दी से बिस्तर पर चढ़ गई और लौड़े को देखने लगी।

दीपाली- ओह.. लाओ मुझे दो मेरे प्यारे लौड़े को.. मैं अभी सहला कर इसका दर्द मिटा दूँगी।

दीपाली लौड़े को बड़े प्यार से सहलाने लगी और फूँक मारते-मारते उसने लौड़े को चूसना शुरू कर दिया।

अनुजा- लो अब आपका सारा दर्द भाग जाएगा.. आपकी दीपा रानी के मुलायम होंठ जो लग रहे हैं लौड़े पर…

विकास- आ.. आह्ह.. हाँ सही कहा तुमने.. अब ये आ गई है तो सब ठीक कर देगी।

दीपाली कुछ ना बोली बस अपने काम में लगी रही। लौड़ा अब अपने पूरे शबाव पर आ गया था।

विकास- उफ़फ्फ़ मज़ा आ रहा था मुँह से निकाला क्यों मेरी जान चूसो ना…

दीपाली- अब बस चुसवाते ही रहोगे क्या.. मेरी चूत में जो जलन हो रही है.. उसका क्या?

विकास- आज तो बड़ी मस्त लग रही है.. क्या बात है चल थोड़ी देर और चूस.. उसके बाद तेरी चूत की आग मिटाऊँगा।

दीपाली होंठ भींच कर लौड़े को चूसने लगती है।
 
विकास- आ आह्ह.. उफ्फ मज़ा आ रहा है मस्त.. मेरी जान ऐसे ही मज़ा देती रहना..

तभी फ़ोन की घंटी बजती है अनुजा फ़ोन उठाती है और विकास को आवाज़ देती है कि उनके लिए है। विकास का सारा मूड ऑफ हो जाता है वो बेमन से जाता है और बात करने के बाद तो उसका चेहरा और ज़्यादा उतर जाता है।

दीपाली- क्या हुआ मेरे राजा जी.. परेशान दिख रहे हो?

विकास- ये साले ट्रस्टी को भी आज ही आना था.. स्कूल से फ़ोन आया है.. हमारे ट्रस्टी साहब आए हैं.. पूरा स्टाफ वहाँ होना जरूरी है.. मेरा तो दिमाग़ खराब हो गया है।

अनुजा- तो चले जाना.. पहले लौड़े को तो शान्त कर लो.. देखो बेचारी कैसे आँखें फाड़े तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

विकास- अरे नहीं यार.. फ़ौरन जाना होगा.. उनके आने से पहले जाना जरूरी है.. मैं अपनी इमेज खराब नहीं कर सकता।

दीपाली भी बाहर आ गई थी और उसने सब सुन लिया था।

दीपाली- सर आप जाओ, आज नहीं तो कल सही.. मैं कहाँ भागे जा रही हूँ।

विकास- थैंक्स जान.. तुम अपनी दीदी के साथ मज़ा करो ओके.. अगर जल्दी आ गया तो तेरी चुदाई पक्का करूँगा।

विकास ने आनन-फानन में कपड़े पहने और निकल गया।

अनुजा- क्यों बहना.. क्या इरादा है चूत चाट कर मज़ा लेगी या अपनी चूत चटवा कर शान्त होगी।

दीपाली- नहीं दीदी कुछ नहीं.. मैं भी जाती हूँ आज मुझे अपनी फ्रेंड से मिलने जाना है.. मैं यहाँ आने वाली ही नहीं थी मगर सर गुस्सा करते इसलिए आ गई।

अनुजा- अरे कौन सी फ्रेंड से मिलने जा रही है और हाँ.. कल मैं पूछना भूल गई.. उस दिन तू यहाँ से तो कब की निकल गई थी मगर घर इतनी देर बाद पहुँची?

दीपाली थोड़ी चौंक सी गई और बस अनुजा को देखने लगी।

अनुजा- अरे चौंक मत तेरी माँ का फ़ोन आया था कि दीपाली को भेज दो… तब तुम्हें गए हुए काफ़ी देर हो गई थी.. मैं कुछ बोलती उसके पहले तुम घर पहुँच गई थीं।

दीपाली को याद आ गया जब वो घर गई थी.. उसकी माँ ने उसके सामने फ़ोन रखा ही था।

दीपाली- व्व..वो दीदी मेरी एक फ्रेंड है प्रिया.. वो रास्ते में मिल गई थी.. त..त..तो बस देर हो गई।

अनुजा- बहना, तू बहुत भोली है तुझे झूठ बोलना बिल्कुल नहीं आता.. तेरे चेहरे से साफ पता चल रहा है कोई तो बात है.. जो तू छुपा रही है।

दीपाली- न न नहीं दीदी ऐसी क..कोई बात नहीं है।

अनुजा- देख तू नहीं बताना चाहती.. तो मत बता… लेकिन एक बात सुन ले.. मैंने तुझे चुदाई का ज्ञान दिया है और इस नाते मैं तेरी गुरू हूँ.. अब आगे तेरी मर्ज़ी.. मैं तो बस तेरी भलाई ही चाहती हूँ।

अनुजा ने दीपाली को इस तरह ये बात कही कि दीपाली बहुत शरमिंदा हो गई और उसने अनुजा से माफी माँगी फिर सारी बात अनुजा को बता दी।

अनुजा- हे राम तू लड़की है या क्या है.. इतनी बड़ी बात मुझे अब बता रही है.. तू इतनी भोली लगती है मगर है नहीं.. कौन था वो बूढ़ा? उसके तो मज़े हो गए.. साले ठरकी को कमसिन चूत मिल गई और ये प्रिया कहाँ से टपक गई.. उसको पता चल गया.. अब वो विकास और तुझे सारे स्कूल में बदनाम कर देगी।

दीपाली- दीदी आप पूरी बात सुनो.. वो कुछ नहीं कहेगी।

दीपाली फिर बोलने लगी.. अनुजा सुकून से सब बातें सुन रही थी दीपाली ने अब तक की सारी बात बता दीं.. मैडी और उसके दोस्तों की भी ... प्रिया के साथ आज जो लेसबो किया और आते वक्त सुधीर से मिली.. सब बात बता दीं।

अनुजा- हम्म.. तो ये बात है प्रिया की चूत अपने ही भाई के लौड़े के लिए तड़प रही है और उसने तुझे बलि का बकरा बना दिया।

दीपाली- हाँ दीदी.. अब आप ही कुछ उपाय बताओ और प्लीज़ सर को कुछ मत बताना.. मैंने शर्म के मारे ही आप दोनों को अब तक कुछ नहीं बताया था।

अनुजा- कैसी शर्म?

दीपाली- आप क्या सोचते मेरे बारे में.. कि मैंने कैसे एक बूढ़े से चुदवा लिया..

अनुजा- अरे ऐसा कुछ नहीं है ये चूत की भूख होती ही कुछ ऐसी है.. जब इसे लौड़ा चाहिए तो ये कभी नहीं सोचती कि लौड़ा किसका है… बस लौड़ा होना चाहिए.. अब जवान हो या बूढ़ा.. घर हो या बाहर.. सब चलता है।

दीपाली- ओह्ह दीदी आप बहुत अच्छी हो… अब बताओ भी मुझे क्या करना चाहिए?
 
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