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दीपाली- आह्ह.. मैं गई.. आह पैर दुखने लगे हैं आह मेरा पानी आ रहा है आह्ह.. फास्ट फास्ट आह…
विकास ने उसके पैरों को कंधे से उतार कर मोड़ दिया और पूरी ताक़त से चोदने लगा.. वो भी चरम पर आ गया था।
दो मिनट बाद लौड़े से पिचकारी निकली और चूत की दीवार से जा टकराई.. दीपाली भी गर्म वीर्य के अहसास से झड़ने लगी।
काफ़ी देर तक विकास उस पर ऐसे ही पड़ा रहा। उसके बाद उठकर बाथरूम चला गया। दीपाली अब भी वैसे ही पड़ी छत को देख रही थी।
विकास- अरे उठो.. जाओ बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो और कपड़े पहन लो.. पढ़ाई नहीं करनी क्या.. अब बहुत काम हैं।
दीपाली- हाँ मेरे राजा जी.. पढ़ना भी जरूरी है.. नहीं तो एक बार और चुदवा लेती।
विकास- तू एकदम पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. अब तुझे एक बार से कहाँ सबर आएगा.. रविवार को पूरा दिन चोदूँगा.. अभी पढ़ना जरूरी है।
दीपाली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।
एक घंटा पढ़ने के बाद दीपाली घर चली जाती है।
रात का खाना खा कर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। दीपाली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।
दीपाली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.. छी: मुझे तो सोच कर ही घिन आ रही है।
(ओह्ह.. दोस्तो, सॉरी आपका दिमाग़ घुमाने के लिए.. आप सोच रहे होंगे आख़िर ऐसी क्या बात कही प्रिया ने जो दीपाली इतना सोच रही है। चलो आपको ज़्यादा परेशान नहीं करूँगी… सुबह क्या हुआ.. वो बता देती हूँ इसके लिए कहानी को वापस थोड़ा पीछे ले जाना होगा तो चलो मेरे साथ।)
***********
दीपाली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है? क्या बात करनी है?
प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है इसी लिए भाग कर आई हूँ।
दीपाली- अच्छा चल बता क्या बात है?
प्रिया- यार जब तू स्कूल आई थी तब मैडी से बात करने के बाद जब अन्दर गई.. तब सोनू और दीपक भी वहाँ आ गए।
प्रिया ने उनके बीच हुई बात दीपाली को बताई.. दीपाली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पे साफ दिख रही थीं।
दीपाली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।
प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या?
दीपाली- थैंक्स यार।
प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना।
दीपाली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी।
विकास ने उसके पैरों को कंधे से उतार कर मोड़ दिया और पूरी ताक़त से चोदने लगा.. वो भी चरम पर आ गया था।
दो मिनट बाद लौड़े से पिचकारी निकली और चूत की दीवार से जा टकराई.. दीपाली भी गर्म वीर्य के अहसास से झड़ने लगी।
काफ़ी देर तक विकास उस पर ऐसे ही पड़ा रहा। उसके बाद उठकर बाथरूम चला गया। दीपाली अब भी वैसे ही पड़ी छत को देख रही थी।
विकास- अरे उठो.. जाओ बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो और कपड़े पहन लो.. पढ़ाई नहीं करनी क्या.. अब बहुत काम हैं।
दीपाली- हाँ मेरे राजा जी.. पढ़ना भी जरूरी है.. नहीं तो एक बार और चुदवा लेती।
विकास- तू एकदम पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. अब तुझे एक बार से कहाँ सबर आएगा.. रविवार को पूरा दिन चोदूँगा.. अभी पढ़ना जरूरी है।
दीपाली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।
एक घंटा पढ़ने के बाद दीपाली घर चली जाती है।
रात का खाना खा कर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। दीपाली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।
दीपाली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.. छी: मुझे तो सोच कर ही घिन आ रही है।
(ओह्ह.. दोस्तो, सॉरी आपका दिमाग़ घुमाने के लिए.. आप सोच रहे होंगे आख़िर ऐसी क्या बात कही प्रिया ने जो दीपाली इतना सोच रही है। चलो आपको ज़्यादा परेशान नहीं करूँगी… सुबह क्या हुआ.. वो बता देती हूँ इसके लिए कहानी को वापस थोड़ा पीछे ले जाना होगा तो चलो मेरे साथ।)
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दीपाली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है? क्या बात करनी है?
प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है इसी लिए भाग कर आई हूँ।
दीपाली- अच्छा चल बता क्या बात है?
प्रिया- यार जब तू स्कूल आई थी तब मैडी से बात करने के बाद जब अन्दर गई.. तब सोनू और दीपक भी वहाँ आ गए।
प्रिया ने उनके बीच हुई बात दीपाली को बताई.. दीपाली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पे साफ दिख रही थीं।
दीपाली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।
प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या?
दीपाली- थैंक्स यार।
प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना।
दीपाली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी।