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इस बार दोनों के सिर ‘हाँ’ जल्दी-जल्दी ऊपर-नीचे हिले। नीरा उनका उत्साह देखकर हँस दी। वोह फिर खड़ी होकर बाथरूम की तरफ जाने लगी पर इससे पहले कि लड़के उसे पकड़ते, नीरा इतनी ऊँची हील के सैंडलों में नशे में संतुलन नहीं रख पायी और दो कदम के बाद ही लड़खड़ा कर धड़ाम से गिर पड़ी। कार्पेट की वजह से उसे लगी नहीं। उसने रोहित को बाथरूम से बाडी लोशन लाने को कहा और नितेश ने अपनी टीचर को सहारा देकर खड़ा किया और बिस्तर पे बिठाया।
रोहित जब लोशन लेकर आया तो नीरा ने एक बार दोनों के लौड़ों को देखा। नितेश का लण्ड छोटा तो नहीं था पर नीरा ने निश्चित किया कि वोह रोहित के लण्ड से कुछ पतला था। अचानक नीरा के मन में आशंका होने लगी पर फिर नशे की मदहोशी में उसने गाण्ड मरवाने का निश्चय कायम रखा। नीरा ने थोड़ा सा लोशन नितेश के लौड़े के सुपाड़े पर लगाया। जब नितेश उसे अपने लण्ड पे मलने को हुआ तो नीरा ने उसे रोक दिया। फिर वोह पलट कर बिस्तर पर झुक गयी। नीरा के सैंडल युक्त पैर ज़मीन पर थे और उसका पेट और मुँह गद्दे पर टिका था। नीरा ने अपने चूतड़ पकड़कर फैलाये और रोहित से गाण्ड के छेद पर लोशन लगाने को कहा। नीरा की झुरझुरी छूट गयी जब उसे अपनी गाण्ड-छिद्र पे ठंडा लोशन और अपने स्टूडेंट की अँगुली अंदर घुसती महसूस हुई।
जब रोहित ने ठीक से नीरा की गाण्ड में लोशन लगा दिया तो नीरा ने नितेश को आगे बढ़ने को कहा। नीरा को नितेश के हाथ अपने चूतड़ों पे महसूस हुए, फिर नितेश ने उसकी गाण्ड फैलायी और फिर नीरा को उसके लण्ड का सुपाड़ा अपनी गाण्ड के छेद पे महसूस हुआ। नीरा को जब अपनी गाण्ड में लण्ड घुसता महसूस हुआ तो उसका बदन अकड़ गया पर फिर खुद को शाँत और ढीला करने के लिए नीरा ने गहरी साँसें लीं। उसके स्टूडेंट का लौड़ा धीरे-धीरे उसकी गाण्ड में थोड़ा-थोड़ा आगे घुस रहा था और फिर नीरा को नितेश की जाँघें अपने चूतड़ों पे सटती महसूस हुईं। नितेश का लण्ड जड़ तक नीरा की गाण्ड में घुस चुका था और नीरा ने अपनी बाँहें खिसका कर अपना पूरा वजन अपनी बाँहों पर डाल दिया।
“यह तो बहुत तंग है…” नितेश बोला- “आप ठीक तो हैं… ढिल्लो मैडम?”
“हाँ… मैं ठीक ही हूँ। उम्म्म… गाण्ड में लण्ड अजीब सा लग रहा है…”
नितेश ने धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर अपना लण्ड नीरा की गाण्ड में पेलने लगा। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वोह किसी औरत की गाण्ड में अपना लण्ड चोद रहा है। वोह औरत जो कोई और नहीं बल्कि उसकी टीचर थी। नितेश को अपनी टीचर की गाण्ड उसकी चूत से ज्यादा गरम और ज्यादा आरामदेह लग रही थी और लण्ड के इर्द-गिर्द काफी टाइट थी। नीरा की गाण्ड की माँसपेशियों का दबाव और स्पंदन वो अपने लण्ड पे महसूस कर पा रहा था। अपनी टीचर के चूतड़ों को पकड़कर वोह अब जोर-जोर से उसकी गाण्ड में लण्ड पेल रहा था।
“नितेश और जोर से… तेज और तेज… मार ले मेरी गाण्ड… हरामी… बहुत मज़ा आ रहा है…” नीरा भी मस्ती में नितेश को उकसाने लगी और अपने चूतड़ पीछे उचका कर उसका लण्ड अपनी गाण्ड में लेने लगी।
“ठीक है… अब रोहित को भी मौका दो…” नीरा थोड़ी देर बाद बोली। मदहोशी और कामोन्माद में नीरा ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी।
“लेकिन मैडम… मैं अभी झड़ा नहीं हूँ…” नितेश ने कराहते हुए फरियाद की।
“तुझे फिर से मौका मिलेगा। रोहित को भी थोड़ी देर मेरी गाण्ड में लण्ड पेलने दे…”
नीरा ने गहरी साँस ली जब नितेश ने उसकी गाण्ड में से अपना लण्ड बाहर खींचा। जो गाण्ड कुछ क्षण पहले भरी-भरी और ठूँसी हुई थी वोह अब बहुत खाली महसूस हो रही थी। लेकिन नीरा को ज्यादा रुकना नहीं पड़ा क्योंकी कुछ ही पलों में उसका दूसरा स्टूडेंट उसके दोनों चूतड़ों को फैलाकर अपना लण्ड उसकी गाण्ड में धकेल रहा था। नीरा को खुशी हुई कि उसने नितेश को पहले अपनी गाण्ड मारने का मौका दिया था क्योंकी रोहित बिल्कुल भी दयालु नहीं था। जल्दी ही रोहित दनादन अपना लौड़ा नीरा की गाण्ड में पेल रहा था।
“तो कैसा लगा रोहित?” नीरा ने पूछा।
“काफी मज़ा आ रहा है पर फिर भी मेरे ख्याल से चूत में ज्यादा मज़ा है…” रोहित बोला।
“रोहित मेरे पास एक आइडिया है…” नीरा बोली- “अपना लण्ड बाहर निकाल। धीरे से प्लीज़…”
जब रोहित का लण्ड उसकी टीचर की गाण्ड से बाहर निकला तो नीरा ने उसे बिस्तर पे चढ़ने को कहा। रोहित को बिस्तर के बीचोंबीच लिटाकर नीरा उसके दोनों तरफ अपनी टाँगें करके रोहित के ऊपर चढ़ गयी।
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इस बार दोनों के सिर ‘हाँ’ जल्दी-जल्दी ऊपर-नीचे हिले। नीरा उनका उत्साह देखकर हँस दी। वोह फिर खड़ी होकर बाथरूम की तरफ जाने लगी पर इससे पहले कि लड़के उसे पकड़ते, नीरा इतनी ऊँची हील के सैंडलों में नशे में संतुलन नहीं रख पायी और दो कदम के बाद ही लड़खड़ा कर धड़ाम से गिर पड़ी। कार्पेट की वजह से उसे लगी नहीं। उसने रोहित को बाथरूम से बाडी लोशन लाने को कहा और नितेश ने अपनी टीचर को सहारा देकर खड़ा किया और बिस्तर पे बिठाया।
रोहित जब लोशन लेकर आया तो नीरा ने एक बार दोनों के लौड़ों को देखा। नितेश का लण्ड छोटा तो नहीं था पर नीरा ने निश्चित किया कि वोह रोहित के लण्ड से कुछ पतला था। अचानक नीरा के मन में आशंका होने लगी पर फिर नशे की मदहोशी में उसने गाण्ड मरवाने का निश्चय कायम रखा। नीरा ने थोड़ा सा लोशन नितेश के लौड़े के सुपाड़े पर लगाया। जब नितेश उसे अपने लण्ड पे मलने को हुआ तो नीरा ने उसे रोक दिया। फिर वोह पलट कर बिस्तर पर झुक गयी। नीरा के सैंडल युक्त पैर ज़मीन पर थे और उसका पेट और मुँह गद्दे पर टिका था। नीरा ने अपने चूतड़ पकड़कर फैलाये और रोहित से गाण्ड के छेद पर लोशन लगाने को कहा। नीरा की झुरझुरी छूट गयी जब उसे अपनी गाण्ड-छिद्र पे ठंडा लोशन और अपने स्टूडेंट की अँगुली अंदर घुसती महसूस हुई।
जब रोहित ने ठीक से नीरा की गाण्ड में लोशन लगा दिया तो नीरा ने नितेश को आगे बढ़ने को कहा। नीरा को नितेश के हाथ अपने चूतड़ों पे महसूस हुए, फिर नितेश ने उसकी गाण्ड फैलायी और फिर नीरा को उसके लण्ड का सुपाड़ा अपनी गाण्ड के छेद पे महसूस हुआ। नीरा को जब अपनी गाण्ड में लण्ड घुसता महसूस हुआ तो उसका बदन अकड़ गया पर फिर खुद को शाँत और ढीला करने के लिए नीरा ने गहरी साँसें लीं। उसके स्टूडेंट का लौड़ा धीरे-धीरे उसकी गाण्ड में थोड़ा-थोड़ा आगे घुस रहा था और फिर नीरा को नितेश की जाँघें अपने चूतड़ों पे सटती महसूस हुईं। नितेश का लण्ड जड़ तक नीरा की गाण्ड में घुस चुका था और नीरा ने अपनी बाँहें खिसका कर अपना पूरा वजन अपनी बाँहों पर डाल दिया।
“यह तो बहुत तंग है…” नितेश बोला- “आप ठीक तो हैं… ढिल्लो मैडम?”
“हाँ… मैं ठीक ही हूँ। उम्म्म… गाण्ड में लण्ड अजीब सा लग रहा है…”
नितेश ने धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर अपना लण्ड नीरा की गाण्ड में पेलने लगा। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वोह किसी औरत की गाण्ड में अपना लण्ड चोद रहा है। वोह औरत जो कोई और नहीं बल्कि उसकी टीचर थी। नितेश को अपनी टीचर की गाण्ड उसकी चूत से ज्यादा गरम और ज्यादा आरामदेह लग रही थी और लण्ड के इर्द-गिर्द काफी टाइट थी। नीरा की गाण्ड की माँसपेशियों का दबाव और स्पंदन वो अपने लण्ड पे महसूस कर पा रहा था। अपनी टीचर के चूतड़ों को पकड़कर वोह अब जोर-जोर से उसकी गाण्ड में लण्ड पेल रहा था।
“नितेश और जोर से… तेज और तेज… मार ले मेरी गाण्ड… हरामी… बहुत मज़ा आ रहा है…” नीरा भी मस्ती में नितेश को उकसाने लगी और अपने चूतड़ पीछे उचका कर उसका लण्ड अपनी गाण्ड में लेने लगी।
“ठीक है… अब रोहित को भी मौका दो…” नीरा थोड़ी देर बाद बोली। मदहोशी और कामोन्माद में नीरा ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी।
“लेकिन मैडम… मैं अभी झड़ा नहीं हूँ…” नितेश ने कराहते हुए फरियाद की।
“तुझे फिर से मौका मिलेगा। रोहित को भी थोड़ी देर मेरी गाण्ड में लण्ड पेलने दे…”
नीरा ने गहरी साँस ली जब नितेश ने उसकी गाण्ड में से अपना लण्ड बाहर खींचा। जो गाण्ड कुछ क्षण पहले भरी-भरी और ठूँसी हुई थी वोह अब बहुत खाली महसूस हो रही थी। लेकिन नीरा को ज्यादा रुकना नहीं पड़ा क्योंकी कुछ ही पलों में उसका दूसरा स्टूडेंट उसके दोनों चूतड़ों को फैलाकर अपना लण्ड उसकी गाण्ड में धकेल रहा था। नीरा को खुशी हुई कि उसने नितेश को पहले अपनी गाण्ड मारने का मौका दिया था क्योंकी रोहित बिल्कुल भी दयालु नहीं था। जल्दी ही रोहित दनादन अपना लौड़ा नीरा की गाण्ड में पेल रहा था।
“तो कैसा लगा रोहित?” नीरा ने पूछा।
“काफी मज़ा आ रहा है पर फिर भी मेरे ख्याल से चूत में ज्यादा मज़ा है…” रोहित बोला।
“रोहित मेरे पास एक आइडिया है…” नीरा बोली- “अपना लण्ड बाहर निकाल। धीरे से प्लीज़…”
जब रोहित का लण्ड उसकी टीचर की गाण्ड से बाहर निकला तो नीरा ने उसे बिस्तर पे चढ़ने को कहा। रोहित को बिस्तर के बीचोंबीच लिटाकर नीरा उसके दोनों तरफ अपनी टाँगें करके रोहित के ऊपर चढ़ गयी।
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