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Guest
बेशक मेरा और भाभी का रिश्ता ग़लत था पर वो खाली सेक्स के लिए ही नही था उसमे भी कुछ इमोशनल टच था जो बस मैं और वो ही समझते थे खैर, अब जो है वो है उसे बदला तो नही जा सकता था फिर मैने कपड़े चेंज कर लिए अब इंतज़ार था मिता के फोन का टाइम साला कट ही नही रहा था तो मैं फिर से घर से बाहर आ गया तो सोनू जी के दर्शन हो गये लाल साड़ी मे पूरा शृंगार किए
क्या मस्त माल लग रही थी मैने कहा मालिको आज तो गजब ढा रहे हो तो वो मेरे पास आई और कहने लगी कि आज मेला है ना तो उधर ही जा रही हू थोड़ी देर मे फिर उसने कहा कि फोन क्यो नही किया कल दोपहर मे तो मैने बता या कि भाभी मुझे तो ध्यान ही नही रहा तो वो बोली कि शाम तक घर वाले ननद के यहा जाएँगे मैं बहाना बना कर रुक जाउन्गी
मैं मज़े लेते हुए बोला पर मुझे क्यो बता रही हो तो वो मेरा गाल खीचते हुए बोली कमिने जब से तो मेरे पीछे पड़ा है और अब तू कह रहा है कि मुझे क्यो बता रहे हो मैने कहा भाभी छोड़ो मज़ाक कर रहा था तो वो अपनी आँखो को मटकाती हुई बोली रात को एक बार फोन करना फिर मैं बताउन्गी मैने कहा ठीक है जी फिर वो चली गई
और मैं खुश हो गया आख़िर एक चूत का और जुगाड़ हो गया था और वो भी इतनी मस्त औरत थी मैं अपने पुराने दिनो के बारे मे सोचने लगा कि कहा मैं सेक्सी कहानियो की किताबें पढ़ कर मुट्ठी मारा करता था और अब ज़िंदगी मे हर तरफ चूत ही चूत थी ऐसी कोई चूत नही जिसे मैने चाहा और चोदा ना हो पर मैं शायद ये भूल गया था कि वक़्त का पहिया घूमता है
सुख के बाद दुख भी आता है , फिर मैं खाना खाने चला गया कि इतने मे मिता का फोन भी आ गया तो मैं उसे पिक करने चला गया मिता को देखते ही मैं बड़ा खुश हो गया मेरी दिलरुबा आज बड़ी ही सुंदर दिख रही थी ना जाने क्यो उसे देखते ही मैने तो चाहा कि उसे अपनी बाहों मे भर लूँ पर लोक लाज से कर नही पाया
मैने बाइक शीला के पति की दुकान पे पार्क की और मिता के साथ पैदल ही चल पड़ा मेले की ओर सबसे पहले हम ने देवता को प्रसाद चढ़ाया और फिर हम लुत्फ़ लेने लगे मेले के मैने उसको कहा याद है मिता पहली बार तुम्हारे दर्शन इसी मेले मे हुए थे जब तुम्हारी चुन्नि मेरे चेहरे पे आ गयी थी तो वो बोली हाँ मुझे सब कुछ याद है
अचानक ही वो पहली छोटी सी मुलाकात आँखो के सामने आ गयी मैने देवता को धन्यवाद दिया की आख़िर उनके मेले मे ही तो मिता के दीदार हुए थे पर मैं खुश था कि आजक पूरा दिन मैं उसके साथ बिताने वाला था मैने उसका हाथ पकड़ा और झूले की ओर ले चला वो बोली क्या करते हो मैने कहा , हक़ है मुझे फिर उसने कुछ नही कहा
आख़िर वो भी तो सब जानती थी उसे झूले पर चढ़ाया और फिर मैं भी उसकी बगल मे बैठ गया उसका हाथ अपने हाथ मे थाम कर मिता के चेहरे की खुशी मैं सॉफ पढ़ पा रहा था और मेरी खुशी …………. ….. वो तो उसकी खुशी मे ही थी मेरा दिल पता नही क्यो आज बार बार बेकाबू सा हो रहा था मिता बोली कितना प्यार करते हो मुझसे मैने कहा तुम्हे नही पता क्या
मुझे पता था कि उसको गोल-गप्पे बड़े पसंद है तो मैं उसे फिर चांट के ठेले पर ले गया और कहा कि भाई मेमसाहिब के लिए ज़रा अच्छे वाले गोलगप्पे निकाल उसको छोटे बच्चो की तरह गोलगप्पे खाते देख कर अच्छा लगा मैं तो उसे निहारने मे ही खो गया वो शरमाते हुए बोली प्लीज़ तुम यूँ ना देखा करो मुझे मेरा दिल डोल जाता है मैने कहा तो फिर सुन लो ना अपने दिल की आख़िर क्या कहता है वो
वो बोली आओ घूमते है , वो फिर अपने लिए कुछ चूड़िया और हार पसंद करने लगी वो बोली कॉन से रंग की चूड़ियाँ ले लूँ , मैने कहा वो गाना है ना मैं ला दूं तुझे हरी हरी चूड़िया तो हरी ही लेले तो वो बोली तुम भी ना तो चूड़ी वाला उसके हाथो मे चूड़िया पहनने लगा मिता बोली मेरी ज़िंदगी का ये सबसे अच्छा गिफ्ट है मैं मुस्कुरा दिया
दोपहर हो चली थी हम दोनो एक साइड मे बैठ कर चने खा रहे थे कि तभी.......................................