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Guest
लोग दिलासा देते रहे पर मैं घंटो तक उसकी राख के पास ही बैठा रहा सवाल करता रहा उस से कि क्यो उसे मेरा ऐतबार ना रहा क्या मेरे प्यार की डोर इतनी कच्ची थी पोलीस को पता था ही कि मैं रॉ एजेंट हूँ तो उनको आशंका थी कि मैं कही गुस्से मे कुछ ग़लत कदम ना उठा लूँ तो उन्होने भी उधर ही डेरा डाल दिया पर इस दीवाने की हालत कोई ना समझे
मम्मी बहुत देर तक मुझे समझाती रही पर मेरी आँखो से आँसू ना रुके मेरी सुबाकिया चलती रही आख़िर चुप होउ भी तो कैसे मेरी जिंदगी बर्बाद हो गयी थी रात हो चली थी जैसे तैसे करके घरवाले मुझे गाँव ले आए थे खबर आग की तरह फैल गयी थी घर पर भाभी को देखते ही मेरी रुलाई फिर से फुट पड़ी वो मेरे गले लग कर रोने लगी
मैने कहा भाभी वो गई मुझे छोड़कर , गयी हमेशा के लिए वो भाभी बोली मनीष प्लीज़ चुप हो जाओ देखो कैसे आँखे सूज गयी है तुम्हारी होसला रखो कैसे जियूंगा मैं उसके बिना भाभी कहीं से भी लाओ पर मुझे मेरी मिथ्लेश लाकर दो घर पर सभी का बुरा हाल हुवा था मेरी वजह से दीवानगी की ऐसी इबारत ना किसी ने देखी ना सोची पूरी रात रोते रोते ही कट गयी
अगले दिन राधा ने रॉ मे फोन करके सिचुयेशन को बता दिया तो शाम तक बॉस, कुछ ख़ास लोग और निशा भी उनके साथ घर पर आ गये थे आख़िर इतनी बड़ी ट्रेजडी जो हो गयी थी निशा को देखते ही मैं अपने आप पर काबू ना रख सका मैं घरवालो को भी समझ मे आया कि बेटा क्या है पर अब क्या करूँ हर कोई मेरे दुख मे शरीक था
बॉस ने कहा कि वो पोलीस से बात करते है और जो भी लोग है इसके पीछे सबको सज़ा होगी जिन्होने मेरे बच्चे की जिंदगी बिगाड़ दी है उनको बख्शा नही जाएगा मैनेकहा नही सर जीने दीजिए उनको वही कीड़ों वाली जिंदगी बस मुझे इतना हक़ दिला दी जिए कि मिता के जाने की रस्मे मैं करूँ वो मेरी दुल्हन तो ना बन सकी पर इतना हक दिला दीजिए बॉस बोले मेरे बच्चे उसकी रस्में तू ही करेगा
और मैं कहता हूँ तेरी मोहबत की कहानी घर घर गायी जाएगी ये तेरा प्यार अमर हो गया है 26 साल की नोकरि मे अच्छा बुरा सब कुछ देखा मैने पर तेरी कहानी जुदा है अलग है सबसे मैं सबको बताउन्गा की कैसी थी कहानी एक सोल्जर की ये लोग नही समझेंगे आज पर आने वाला जमाना तेरी गाथा गाये गा मेरे बच्चे पर तू होसला रख तुझे मिता के लिए जीना होगा उसकी यादे ही तेरा सहारा बनेंगी
अगले दिन बॉस चले गये राधा चली गयी आख़िर उसको भी तो जाना ही था पर निशा मेरा साया बन गयी थी मिता का भाई एक बॉक्स ले कर आया बोला ये दीदी का कुछ समान है कुछ यादें है आप रख लो बहुत देर तक उसके कपड़ो से लिपट कर रोता रहा मैं ये ऐसा दुख दे गयी थी वो मुझे कि बस अब जीना मुश्किल था मेरे लिए निशा को डर था कि कही मैं शूसाइड ना कर लूँ तो हर पल साए की तरह मेरे आगे पीछे डोलती रहती वो
15-20 दिन हो गये थे मिता को गये हुए और मैं वैसे का वैसा ही था घरवाले भी दुखी थे मेरी हालत से मम्मी ने बार बार माफी माँगी थी पर अब सब बेकार था वो तो चली ही गयी थी मैं तो टूट कर बिखर ही गया था निशा ने बहुत समझाया कि जिंदगी नही रुकती तुम इधर रहोगे तो बार बार रोवोगे दिल दुखेगा देल्ही चलो मैं कहाँ मान ने वाला था पर कुछ तो उसका भी क़र्ज़ था ही वो ले ही आई मुझे देल्ही पर मेरी हालत वैसी की वैसी थी
तो बॉस ने मुझे कुछ दिनो के लिए रिहेबिलेशन सेंटर मे भेज दिया जहाँ रोज मेरी कौउंसिलिंग होती समझाया जाता मुझे कभी कभी ऐसा लगता की मिता मेरे आस पास ही है उसकी रूह को महसूस करने लगा था मैं रोते रोते सो जाता मैं तो लगता कि उसने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा हो बड़ी ही शिद्दत से उसकी मोजूदगी को मान ने लगा था मैं और सपनो मे तो ढेरो बाते करती ही रहती थी वो
करीब4 महीने उधर गुज़रे मैने गुज़रते समय के साथ हालत मे भी सुधार होने लगा था आख़िर मैने डॉक्टर को कह ही दिया कि मैं वापिस जाना चाहता हूँ उन्होने बॉस को रिपोर्ट दी और फिर कुछ और कौंसिलिंग के बाद मैं घर आ गया पर अब एक उदासी सी मुझे घेरे रहती थी घर वाले आ जाते थे मिलने को मम्मी तो 15- 15 दिन रुक जाती थी अब उन्हे कोई दिक्कत नही होती थी कि निशा भी मेरे साथ ही तो थी बल्कि वो खूब बाते भी किया करती थी निशा के साथ
घर मे एक बड़ी सी तस्वीर लगा दी थी मिता की जिस पर निशा रोज ही दिया जलाया करती थी मैं भी निशा के आगे नॉर्मल ही बने रहने की कोशिश करते रहता था क्योंकि वो मुझे देख कर खुद भी दुखी होती रहती थी ऑफीस भी जाना शुरू कर दिया था पर अब मैं डेस्क जॉब ही करता था बेशक वो चली गयी थी पर मुझ मे कही ना कही जिंदा थी वो दिल आज भी बस मिथ्लेश के लिए ही धड़कता था
पता नही क्यो अब दिल नही लगता था कही पर भी अप्लिकेशन लिख दी कि मुझे वापिस आर्मी मे भेज दिया जाए पर हर बार रिजेक्ट कर दी गयी बॉस ने हर बार कहा कि चाहे काम मत करो ऑफीस मत आओ पर रिटाइर होने तक रहोगे रॉ मे ही रॉ अधूरा है तुम्हारे बिना तो बस थक हार कर अपनी डेस्क जॉब कर रहा था पर अंदर अंदर टूट रहा था मैं