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Guest
आज भूरी ठान के आई थी कि चाहे कुछ भी हो जाए, आज अपनी सील तुड़वाके ही मानेगी.
शुरुआत उसी ने की, लपक के मेरी गोद में चढ़ गयी और किस करने लगी, मैने कहा क्या बात है भूरी मुँह झूठा करने की तुझे तो लत ही लग गयी.. तो वो हँसने लगी और मेरे सीने में मुँह छुपा लिया.
वो अब कुछ-2 क्या..? बहुत कुछ खुल गयी थी, फिर भी शरमाती हुई बोली- भैया आज तुम्हारा कोई बहाना नही चलेगा, आज मे तुम्हारा वो ना अपने अंदर लेके ही रहूंगी.
मे- वो क्या..?
वो- वोही.. !
मे- नाम लेके बोल तभी मिलेगा, वरना भूल जा..
मेरा लंड पकड़ के – ये..! मैने कहा इसका नाम क्या है..?
वो झिझकते हुए बोली- ल..ल्ल..लंड.. बस अब तो ठीक है, मिल गयी खुशी और शर्मीली हँसी हँसने लगी..
मे- तो खोल ले पाजामा और लेले मेरे लंड को अपने अंदर..
उसने झट से पाजामा खोल कर उतार दिया, मूसल महाराज तो तैयार ही बैठे…ओह सॉरी !! खड़े थे उसके पास जाने के लिए..
कुछ देर तो वो उसे देखती रही फिर हाथ में लेकर सहलाते हुए बोली- अरुण भैया, आपका ये तो बहुत बड़ा और मोटा है..! क्या ये मेरे अंदर घुस पाएगा..?
मे- मुँह खोल..! घुसा के दिखाता हूँ..!
वो- अरे मे मुँह की बात थोड़ी कर रही हूँ..? मे तो उसकी बात कर रही हूँ..!
मे- और किसकी..? मुँह में ही तो जाएगा.. तू और कहाँ लेगी इसको..?
वो- अरे वहाँ..! जहाँ से सू सू करते हैं..!
मे- अब मुझे क्या पता तू कहाँ से सू सू करती है..?
वो- तुम भी ना ! बहुत बड़े वाले वो हो.. ! अरे वही मेरी च..च..चुत्त्त…में अब बस.. हो गयी तसल्ली और हंस पड़ी खिल-खिला कर.
मे- देख भूरी..! तुझे पता है, मे ये शब्द खुलकर बोलने के लिए क्यों कह रहा हूँ..?
इस काम में जितना खुलकर बोला जाए ना उतना ज़्यादा मज़ा आता है समझी.. तो अपनी झिझक खोल और खुलके मज़ा ले. ठीक है.
उसने सर हिला कर और साथ-साथ मेरा लंड हिलाकर हामी भर दी.
मे- ले अब इसे थोड़ा ग्रीस लगा दे.. !
वो- कहाँ है ग्रीस..?
मैने हंसते हुए.. अरे इसे अपने मुँह में लेकर गीला कर.
वो- छि, ये भी कोई मुँह में लेने वाली चीज़ है, इसमें से मूत निकलता है,
मे- देख फिर पागलों जैसी बात की तूने, मैने उस दिन तेरे को किस किया तब तूने कहा कि मुँह झूठा कर दिया, आज इसको मुँह में लेने के लिए बोला तो छि कर रही है,
और उस दिन अपनी चूत मेरे से चटवाई तब बिल्कुल नही बोली छि..हैं बड़ी चालू बनती है अपने आपमें…ले पकड़..पहले इसका टोपा खोल.
भूरी ने काँपते हाथों से लंड की खाल पीछे करके सुपाडे का ढक्कन खोला, जिसपे एक बूँद वीर्य की लगी थी जो किसी मोती की तरह चमक रही थी,
मे- देख इस्पे एक मोती लगा है, इसको चख के देख, मज़ा आएगा, अब भूरी मेरी हर बात मान रही थी सो उसने अपनी जीभ की नोक से उसे चाट लिया,
मैने पुछा कैसा लगा ? तो कुछ देर बाद उसका स्वाद पता लगाकर बोली-मीठा सा है ये तो.
मे - हां ये असली वाला माल है, लड़किया इसे बड़े चाव से चुसती हैं, तू भी चूस के देख मज़ा आएगा.
मज़ा शब्द सुनते ही पहले उसने टोपे को मुँह में लिया उसे कुछ अच्छा लगने लगा तो और थोड़ा अंदर लेकर लॉलीपोप की तरह पुच-पुच करके चूसने लगी..
मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी तो मैं उसके सर के पीछे हाथ लगा कर उसके मुँह की चुदाई सी करने लगा…..,
भूरी बड़ी चालू थी, उसने अपने हाथ की मुट्ठी लंड की जड़ पर कस रखी थी जिससे पूरा लंड उसके मुँह में ना जाने पाए.
कुछ देर लंड चुस्वा कर मैने उसे अलग किया और उसके कपड़े उतार दिए….
दो ही तो कपड़े होते थे बेचारी के बदन पर.. उसे पूरी तरह नंगा करके बिस्तर पर लिटा दिया.
पहले मैने उसके पूरे शरीर पर हाथ फिराया और फिर उसके पैरों की उंगलियों से चूमना चाटना शुरू किया,
जैसे-2 मे उपर बढ़ता जा रहा था, वासना की खुमारी उसके उपर बढ़ती जा रही थी. आँखें बंद किए वो हौले-2 सिसकियाँ ले रही थी.
बढ़ते-2 मे उसकी जांघों पर पहुँचा बाहर से चूमते-2 जब उसकी जांघों को अंदर की तरफ से चाटा, स्वतः ही उसकी टाँगें खुल गयी,
उसकी सुंदर सी काली जैसी दो इंच लंबी दरार थोड़ी सी खुल गयी.
मैने जीभ पर दबाब बना कर उसकी पूरी दरार में नोक से चाट लिया…
आअहह…..सस्स्सिईईईईई….. जैसी सिसकी लेकर भूरी अपने खुसक होठों पर जीभ फेरने लगी.
फिर मैने उसकी दरार को और खोला तो उसका गुलाबी अन्द्रुनि भाग खिल गया और उसकी भज्नासा फूलने लगी जिसे मैने अपने होठों से पकड़ कर चूस लिया..
ऊऊ…म्म्माआआ…हाईए…ससिईइ….आहह… और उसकी कमर उपर को उठने लगी..! उसकी चूत पानी बहाने लगी और उससे बूँद-2 बनके कमरस टपकने लगा.
अब मे अपने दूसरे पड़ाव की ओर बढ़ा और उसकी नाभि को चूमा, अपनी जीभ उसकी नाभि के चारों ओर फिराई…
उसका पतला सा पेट हिलने लगा और उसे गुदगुदी सी होने लगी जिसकी वजह से वो खिल-खिलाकर हँस पड़ी.
जब मे उसकी चुचियों को चूसने लगा तो उसके सब्र का बाँध फुट पड़ा और उसने मेरे कंधे पकड़ कर उपर की ओर खींचा, और मेरे होठ चूसने लगी.
उसकी गर्दन पर चुंबन लेकर मे नीचे आया और उसकी टाँगें चौड़ा कर उसकी छोटी सी चूत को चूमा और उसकी ओर देख कर पुछा-
भूरी ! तू तैयार है ना मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए..?
वो.. हमम्म ! मैने कहा खुलके बोले..
वो- भैया अब बातें नही प्लीज़… अब अपना लंड मेरी चूत में डालो…अब नही रहा जा रहा मुझसे.. उफफफ्फ़… जल्दी करो…आहह..
मैने उसकी गीली चूत को अपने थूक से और गीला किया और अपने लंड के सुपाडे को उसके उपर एक बार फिराया.
फिर उसकी फांकों को एक उंगली और अंगूठे की मदद से खोला और दूसरे हाथ में अपना पप्पू पकड़ कर उसके नन्हे से छेद पर अड़ा दिया.
हल्का सा दबाब डाला कि चिकनी चूत आधे सुपाडे को गडप गयी.
भूरी ने अपने होठ कस रखे थे, मैने एक और हल्का सा झटका दिया अपनी कमर में, मेरा करीब डेढ़ इंच लंड माने पूरा सुपाडा उसकी संकरी सुरंग में खो गया, लेकिन दर्द से उसकी चीख निकल गयी..
शुरुआत उसी ने की, लपक के मेरी गोद में चढ़ गयी और किस करने लगी, मैने कहा क्या बात है भूरी मुँह झूठा करने की तुझे तो लत ही लग गयी.. तो वो हँसने लगी और मेरे सीने में मुँह छुपा लिया.
वो अब कुछ-2 क्या..? बहुत कुछ खुल गयी थी, फिर भी शरमाती हुई बोली- भैया आज तुम्हारा कोई बहाना नही चलेगा, आज मे तुम्हारा वो ना अपने अंदर लेके ही रहूंगी.
मे- वो क्या..?
वो- वोही.. !
मे- नाम लेके बोल तभी मिलेगा, वरना भूल जा..
मेरा लंड पकड़ के – ये..! मैने कहा इसका नाम क्या है..?
वो झिझकते हुए बोली- ल..ल्ल..लंड.. बस अब तो ठीक है, मिल गयी खुशी और शर्मीली हँसी हँसने लगी..
मे- तो खोल ले पाजामा और लेले मेरे लंड को अपने अंदर..
उसने झट से पाजामा खोल कर उतार दिया, मूसल महाराज तो तैयार ही बैठे…ओह सॉरी !! खड़े थे उसके पास जाने के लिए..
कुछ देर तो वो उसे देखती रही फिर हाथ में लेकर सहलाते हुए बोली- अरुण भैया, आपका ये तो बहुत बड़ा और मोटा है..! क्या ये मेरे अंदर घुस पाएगा..?
मे- मुँह खोल..! घुसा के दिखाता हूँ..!
वो- अरे मे मुँह की बात थोड़ी कर रही हूँ..? मे तो उसकी बात कर रही हूँ..!
मे- और किसकी..? मुँह में ही तो जाएगा.. तू और कहाँ लेगी इसको..?
वो- अरे वहाँ..! जहाँ से सू सू करते हैं..!
मे- अब मुझे क्या पता तू कहाँ से सू सू करती है..?
वो- तुम भी ना ! बहुत बड़े वाले वो हो.. ! अरे वही मेरी च..च..चुत्त्त…में अब बस.. हो गयी तसल्ली और हंस पड़ी खिल-खिला कर.
मे- देख भूरी..! तुझे पता है, मे ये शब्द खुलकर बोलने के लिए क्यों कह रहा हूँ..?
इस काम में जितना खुलकर बोला जाए ना उतना ज़्यादा मज़ा आता है समझी.. तो अपनी झिझक खोल और खुलके मज़ा ले. ठीक है.
उसने सर हिला कर और साथ-साथ मेरा लंड हिलाकर हामी भर दी.
मे- ले अब इसे थोड़ा ग्रीस लगा दे.. !
वो- कहाँ है ग्रीस..?
मैने हंसते हुए.. अरे इसे अपने मुँह में लेकर गीला कर.
वो- छि, ये भी कोई मुँह में लेने वाली चीज़ है, इसमें से मूत निकलता है,
मे- देख फिर पागलों जैसी बात की तूने, मैने उस दिन तेरे को किस किया तब तूने कहा कि मुँह झूठा कर दिया, आज इसको मुँह में लेने के लिए बोला तो छि कर रही है,
और उस दिन अपनी चूत मेरे से चटवाई तब बिल्कुल नही बोली छि..हैं बड़ी चालू बनती है अपने आपमें…ले पकड़..पहले इसका टोपा खोल.
भूरी ने काँपते हाथों से लंड की खाल पीछे करके सुपाडे का ढक्कन खोला, जिसपे एक बूँद वीर्य की लगी थी जो किसी मोती की तरह चमक रही थी,
मे- देख इस्पे एक मोती लगा है, इसको चख के देख, मज़ा आएगा, अब भूरी मेरी हर बात मान रही थी सो उसने अपनी जीभ की नोक से उसे चाट लिया,
मैने पुछा कैसा लगा ? तो कुछ देर बाद उसका स्वाद पता लगाकर बोली-मीठा सा है ये तो.
मे - हां ये असली वाला माल है, लड़किया इसे बड़े चाव से चुसती हैं, तू भी चूस के देख मज़ा आएगा.
मज़ा शब्द सुनते ही पहले उसने टोपे को मुँह में लिया उसे कुछ अच्छा लगने लगा तो और थोड़ा अंदर लेकर लॉलीपोप की तरह पुच-पुच करके चूसने लगी..
मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी तो मैं उसके सर के पीछे हाथ लगा कर उसके मुँह की चुदाई सी करने लगा…..,
भूरी बड़ी चालू थी, उसने अपने हाथ की मुट्ठी लंड की जड़ पर कस रखी थी जिससे पूरा लंड उसके मुँह में ना जाने पाए.
कुछ देर लंड चुस्वा कर मैने उसे अलग किया और उसके कपड़े उतार दिए….
दो ही तो कपड़े होते थे बेचारी के बदन पर.. उसे पूरी तरह नंगा करके बिस्तर पर लिटा दिया.
पहले मैने उसके पूरे शरीर पर हाथ फिराया और फिर उसके पैरों की उंगलियों से चूमना चाटना शुरू किया,
जैसे-2 मे उपर बढ़ता जा रहा था, वासना की खुमारी उसके उपर बढ़ती जा रही थी. आँखें बंद किए वो हौले-2 सिसकियाँ ले रही थी.
बढ़ते-2 मे उसकी जांघों पर पहुँचा बाहर से चूमते-2 जब उसकी जांघों को अंदर की तरफ से चाटा, स्वतः ही उसकी टाँगें खुल गयी,
उसकी सुंदर सी काली जैसी दो इंच लंबी दरार थोड़ी सी खुल गयी.
मैने जीभ पर दबाब बना कर उसकी पूरी दरार में नोक से चाट लिया…
आअहह…..सस्स्सिईईईईई….. जैसी सिसकी लेकर भूरी अपने खुसक होठों पर जीभ फेरने लगी.
फिर मैने उसकी दरार को और खोला तो उसका गुलाबी अन्द्रुनि भाग खिल गया और उसकी भज्नासा फूलने लगी जिसे मैने अपने होठों से पकड़ कर चूस लिया..
ऊऊ…म्म्माआआ…हाईए…ससिईइ….आहह… और उसकी कमर उपर को उठने लगी..! उसकी चूत पानी बहाने लगी और उससे बूँद-2 बनके कमरस टपकने लगा.
अब मे अपने दूसरे पड़ाव की ओर बढ़ा और उसकी नाभि को चूमा, अपनी जीभ उसकी नाभि के चारों ओर फिराई…
उसका पतला सा पेट हिलने लगा और उसे गुदगुदी सी होने लगी जिसकी वजह से वो खिल-खिलाकर हँस पड़ी.
जब मे उसकी चुचियों को चूसने लगा तो उसके सब्र का बाँध फुट पड़ा और उसने मेरे कंधे पकड़ कर उपर की ओर खींचा, और मेरे होठ चूसने लगी.
उसकी गर्दन पर चुंबन लेकर मे नीचे आया और उसकी टाँगें चौड़ा कर उसकी छोटी सी चूत को चूमा और उसकी ओर देख कर पुछा-
भूरी ! तू तैयार है ना मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए..?
वो.. हमम्म ! मैने कहा खुलके बोले..
वो- भैया अब बातें नही प्लीज़… अब अपना लंड मेरी चूत में डालो…अब नही रहा जा रहा मुझसे.. उफफफ्फ़… जल्दी करो…आहह..
मैने उसकी गीली चूत को अपने थूक से और गीला किया और अपने लंड के सुपाडे को उसके उपर एक बार फिराया.
फिर उसकी फांकों को एक उंगली और अंगूठे की मदद से खोला और दूसरे हाथ में अपना पप्पू पकड़ कर उसके नन्हे से छेद पर अड़ा दिया.
हल्का सा दबाब डाला कि चिकनी चूत आधे सुपाडे को गडप गयी.
भूरी ने अपने होठ कस रखे थे, मैने एक और हल्का सा झटका दिया अपनी कमर में, मेरा करीब डेढ़ इंच लंड माने पूरा सुपाडा उसकी संकरी सुरंग में खो गया, लेकिन दर्द से उसकी चीख निकल गयी..