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Guest
मैने हड़बड़ा कर आँखें खोली और अपने चारों ओर का निरीक्षण किया, सब कुछ पूर्ववत सामान्य ही था.
मे थोड़ी देर शवसन की मुद्रा में लेट गया और अचेतन में डूब गया.
सुबह जब में उठा, तो सब कुछ पहले जैसा ही था पर अंदर कुछ-2 बदल रहा था मानो, अब मे एक निर्णय की स्थिति मे आ चुका था.
मैने सोच लिया कि अब मुझे आती शीघ्र यहाँ से निकल जाना चाहिए. नियती ने मेरे लिए जो रास्ता निर्धारित किया है, उसी पर चलने का समय आ चुका है...
मे घर आया, नाश्ता वग़ैरह किया, और बाइक लेके टाउन में पहुँचा वहाँ एक स्ट्ड बूथ से एनएसए अमित चौधरी को फोन लगाया..
कुछ देर रिंग जाने के बाद फोन पिक हुआ- हेलो कॉन..? उधर से एनएसए की आवाज़ उभरी
मे - मे आइ टॉक तो एनएसए ऑफ इंडिया मिस्टर. अमित चौधरी..??
यस ! अमित चौधरी स्पीकिंग..! हू आर यू..? उधर से बोला गया.
मे - सर ! गुड मॉर्निंग !! अरुण शर्मा दिस साइड..!
एसी - हू अरुण शर्मा..? ओह ! तुम हो ! एस टेल मी अरुण.. व्हाट यू हॅव डिसाइडेड..??
मे - सर आइ वॉंट टू मीट यू..! वुड यू..?
एसी - एस ! ऑफ कौर्स ! व्हाई नोट..? टेल मी व्हेन कॅन यू कम टू माइ ऑफीस..?
मे - अट अर्लीयेस्ट सर !!
एसी - ओके यू कॅन कम टुमॉरो अट 11 आम. आइ विल बी अवेलबल हियर.
मे - सर ! वुड यू स्टेट मी युवर ओफिस अड्रेस.. प्लीज़ इफ़ पासिबल.
एसी - शुवर ! आइ आम गिविंग दिस कॉल टू माइ सीक्रेटरी, शी विल एक्सप्लेन यू ऑल. ओके
फिर कुछ देर शांति रही उसके बाद एक सुरीली सी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी-
हाई आइ आम श्यामल मल्होत्रा दिस साइड, सीक्रेटरी ऑफ एनएसए इंडिया. प्लीज़ नोट डाउन माइ ऑफीस अड्रेस…!
फिर उसने मुझे अपना अड्रेस लिखवाया और फोन कट कर दिया.
दूसरी सुबह अर्ली मॉर्निंग मैने ट्रेन पकड़ी और 10:45 आम को में सेक्रेट एरिया में था.
ऑफीस ढूढ़ते-2 11 बज ही गये. सेक्यूरिटी में एंट्री कराई और जाके उनके ऑफीस में एंटर हुआ.
सामने एक बहुत बड़ी सी टेबल के पीछे एक बड़ी सी रिवॉल्विंग चेर पर मिस्टर. चौधरी बैठे हुए थे उनके बगल की एक सीट पर एक साटन की साड़ी में उनकी सीक्रेटरी श्यामल मल्होत्रा बैठी थी,
वो एक लगभग 30 साल की निहायत ही खूबसूरत महिला थी.
मे आइ कम इन सर..! उन्होने अपना सर दरवाजे की ओर उठाया, और मुझे देखते ही एक स्माइल देके बोले – ओह अरुण ! प्लीज़ कम..!
मे अंदर गया तो उन्होने मुझे बैठने का इशारा किया. जब मे बैठ गया तो उन्होने अपनी सीक्रेटरी को कोई काम दिया और उसे बाहर भेज दिया.
एसी - मेरी ओर देखते हुए.. यू आर सो पुंचुअल.. अपने घर से यहाँ तक राइट टाइम पर पहुँच गये. आइ लाइक इट..!
मे - सॉरी सर ऑफीस ढूढ़ने के चक्कर में दो मिनट लेट हो गया.
एसी - इट्स ओके. टेल मी व्हाट यू डिसाइडेड..?
मे - सर आप बोलिए ! मेरे लिए क्या आदेश है ? मुझे तो बस देश और देशवासियों की हिफ़ाज़त करने का शौक है. इससे ज़्यादा मे और कुछ नही कहना चाहता.
एसी - मैने तुम्हारे बारे में होम मिनिस्टर से बात कर ली है, उनके सुझाव पर पीएम( प्रधान मंत्री ) से भी मिला,
पीएम ने सॉफ-साफ कहा है, कि हमें देश हित में काम करने वाले हर नागरिक की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, और जो जिस काबिल है उसे उस हिसाब से ज़िम्मेदारी दे सकते हो.
हमारी एक संस्था है जो देश की इंटर्नल और एक्सटर्नल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जिसकी जानकारी सिर्फ़ पीएम, एचएम, डीएम को ही है,
वाकी सरकार के नुमाइंडों को सिर्फ़ इतना पता है कि कोई नॅशनल सेकरीट सर्विस ऑफ इंडिया (एनएसएसआइ) नाम की भारत सरकार की कोई एजेन्सी है,
लिकिन इसमें कों लोग हैं, कितने एजेंट काम करते और किसको रिपोर्ट करते हैं, किसी को नही मालूम.
भारत सरकार ने ये ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी है, और इसके तमाम एजेंट या तो पीएम, वरना मुझे रिपोर्ट करते हैं,
अगर हम दोनो में से कोई अवेलबल नही है, और कोई अर्जेन्सी होती है तभी एचएम और डीएम कोई डिसिशन ले सकते हैं उन एजेंट्स के बारे मैं.
अब मैने पीएम को इसी संस्था के लिए तुम्हारा नाम प्रपोज़ किया था, जो उन्होने अप्रूव्ड कर दिया है,
अब तुम्हें इस एजेन्सी के तहत एक अंडर कवर एजेंट के तौर पर काम करना है, जो देश के अंदर या बाहर परिस्थिति के हिसाब से तुम्हें डिसाइड करना होगा.
हमारी ओर से केवल एक असाइनमेंट के तौर पर एक ऑर्डर इश्यू होगा, वाकी का काम तुम्हारा खुद का होगा.
एक बात नोट करके रखना, तुम्हारी आइडेंटिटी एनएसएसआइ के एजेंट के तौर पर किसी भी सूरत में सार्वजनिक नही होनी चाहिए,
अगर ग़लती से भी ऐसा हुआ, तो तुम्हें तुरंत वहाँ से हटा कर अंडर ग्राउंड कर दिया जाएगा,
ये भी हो सकता है कि तुम्हें अपनी जिंदगी से भी हाथ धोना पड़े. एक बार फिर से सोच लो, क्या ये हो पाएगा तुमसे..?
मैने कहा – सर ! अब जब ओखली में सर डाल ही दिया है, तो मूसल से क्या डरना…
मेरी बात पर वो ठहाका लगा कर हँस पड़े, मे भी उनका साथ देने लगा…
फिर वो बोले - शाबाश बेटे ! मुझे तुमसे ऐसी ही दिलेरी की आशा थी….!
एनएसए अजीत चौधरी बोले- अब हम तुमें एक जॉब के लिए अपायंटमेंट लेटर देंगे जो तुम्हारी डिग्री के मुताबिक भारत सरकार द्वारा मान्याताप्राप्त पीएसयू में एक इंजीनियर के तौर पर रहेगा.
ध्यान रहे वो सिर्फ़ दिखावे के लिए होगा, तुमसे उस ऑफीस में कभी भी, कोई भी, किसी काम या उपस्थित रहने के लिए नही कहेगा.
तुम वहाँ एक बहुत बड़े सिफारीसी कर्मचारी के तौर पर देखे जाओगे जैसे किसी बड़े मिनिस्टर या नेता के खास आदमी होते हैं.
वहाँ जाय्न करने से पहले 6 महीने तुम्हें एक कमॅंडो ट्राइंग कॅंप भेजा जा रहा है, जहाँ तुम्हारी ऐसी ट्रैनिंग होगी कि तुम्हें नानी याद आ जाएगी,
ये बोलकर वो हँसने लगे. फिर थोड़ा सीरीयस होकर बोले-
ध्यान रहे अरुण, अब तुम भारत सरकार के एक ऐसे नुमाइंदे हो जिसकी ज़िम्मेदारियाँ देश के प्रेसीडेंट और प्राइम मिनिस्टर से भी बढ़कर होंगी देश की सुरक्षा को लेकर,
ये लोग तो बदलते भी रहेंगे, लेकिन तुम सदैव इस देश की हिफ़ाज़त करते रहोगे.
सो अबसे तुम एक नये अवतार में बदल चुके हो, इस बात को अपने दिल और दिमाग़ में अभी से बैठा लो.
मे थोड़ी देर शवसन की मुद्रा में लेट गया और अचेतन में डूब गया.
सुबह जब में उठा, तो सब कुछ पहले जैसा ही था पर अंदर कुछ-2 बदल रहा था मानो, अब मे एक निर्णय की स्थिति मे आ चुका था.
मैने सोच लिया कि अब मुझे आती शीघ्र यहाँ से निकल जाना चाहिए. नियती ने मेरे लिए जो रास्ता निर्धारित किया है, उसी पर चलने का समय आ चुका है...
मे घर आया, नाश्ता वग़ैरह किया, और बाइक लेके टाउन में पहुँचा वहाँ एक स्ट्ड बूथ से एनएसए अमित चौधरी को फोन लगाया..
कुछ देर रिंग जाने के बाद फोन पिक हुआ- हेलो कॉन..? उधर से एनएसए की आवाज़ उभरी
मे - मे आइ टॉक तो एनएसए ऑफ इंडिया मिस्टर. अमित चौधरी..??
यस ! अमित चौधरी स्पीकिंग..! हू आर यू..? उधर से बोला गया.
मे - सर ! गुड मॉर्निंग !! अरुण शर्मा दिस साइड..!
एसी - हू अरुण शर्मा..? ओह ! तुम हो ! एस टेल मी अरुण.. व्हाट यू हॅव डिसाइडेड..??
मे - सर आइ वॉंट टू मीट यू..! वुड यू..?
एसी - एस ! ऑफ कौर्स ! व्हाई नोट..? टेल मी व्हेन कॅन यू कम टू माइ ऑफीस..?
मे - अट अर्लीयेस्ट सर !!
एसी - ओके यू कॅन कम टुमॉरो अट 11 आम. आइ विल बी अवेलबल हियर.
मे - सर ! वुड यू स्टेट मी युवर ओफिस अड्रेस.. प्लीज़ इफ़ पासिबल.
एसी - शुवर ! आइ आम गिविंग दिस कॉल टू माइ सीक्रेटरी, शी विल एक्सप्लेन यू ऑल. ओके
फिर कुछ देर शांति रही उसके बाद एक सुरीली सी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी-
हाई आइ आम श्यामल मल्होत्रा दिस साइड, सीक्रेटरी ऑफ एनएसए इंडिया. प्लीज़ नोट डाउन माइ ऑफीस अड्रेस…!
फिर उसने मुझे अपना अड्रेस लिखवाया और फोन कट कर दिया.
दूसरी सुबह अर्ली मॉर्निंग मैने ट्रेन पकड़ी और 10:45 आम को में सेक्रेट एरिया में था.
ऑफीस ढूढ़ते-2 11 बज ही गये. सेक्यूरिटी में एंट्री कराई और जाके उनके ऑफीस में एंटर हुआ.
सामने एक बहुत बड़ी सी टेबल के पीछे एक बड़ी सी रिवॉल्विंग चेर पर मिस्टर. चौधरी बैठे हुए थे उनके बगल की एक सीट पर एक साटन की साड़ी में उनकी सीक्रेटरी श्यामल मल्होत्रा बैठी थी,
वो एक लगभग 30 साल की निहायत ही खूबसूरत महिला थी.
मे आइ कम इन सर..! उन्होने अपना सर दरवाजे की ओर उठाया, और मुझे देखते ही एक स्माइल देके बोले – ओह अरुण ! प्लीज़ कम..!
मे अंदर गया तो उन्होने मुझे बैठने का इशारा किया. जब मे बैठ गया तो उन्होने अपनी सीक्रेटरी को कोई काम दिया और उसे बाहर भेज दिया.
एसी - मेरी ओर देखते हुए.. यू आर सो पुंचुअल.. अपने घर से यहाँ तक राइट टाइम पर पहुँच गये. आइ लाइक इट..!
मे - सॉरी सर ऑफीस ढूढ़ने के चक्कर में दो मिनट लेट हो गया.
एसी - इट्स ओके. टेल मी व्हाट यू डिसाइडेड..?
मे - सर आप बोलिए ! मेरे लिए क्या आदेश है ? मुझे तो बस देश और देशवासियों की हिफ़ाज़त करने का शौक है. इससे ज़्यादा मे और कुछ नही कहना चाहता.
एसी - मैने तुम्हारे बारे में होम मिनिस्टर से बात कर ली है, उनके सुझाव पर पीएम( प्रधान मंत्री ) से भी मिला,
पीएम ने सॉफ-साफ कहा है, कि हमें देश हित में काम करने वाले हर नागरिक की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, और जो जिस काबिल है उसे उस हिसाब से ज़िम्मेदारी दे सकते हो.
हमारी एक संस्था है जो देश की इंटर्नल और एक्सटर्नल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जिसकी जानकारी सिर्फ़ पीएम, एचएम, डीएम को ही है,
वाकी सरकार के नुमाइंडों को सिर्फ़ इतना पता है कि कोई नॅशनल सेकरीट सर्विस ऑफ इंडिया (एनएसएसआइ) नाम की भारत सरकार की कोई एजेन्सी है,
लिकिन इसमें कों लोग हैं, कितने एजेंट काम करते और किसको रिपोर्ट करते हैं, किसी को नही मालूम.
भारत सरकार ने ये ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी है, और इसके तमाम एजेंट या तो पीएम, वरना मुझे रिपोर्ट करते हैं,
अगर हम दोनो में से कोई अवेलबल नही है, और कोई अर्जेन्सी होती है तभी एचएम और डीएम कोई डिसिशन ले सकते हैं उन एजेंट्स के बारे मैं.
अब मैने पीएम को इसी संस्था के लिए तुम्हारा नाम प्रपोज़ किया था, जो उन्होने अप्रूव्ड कर दिया है,
अब तुम्हें इस एजेन्सी के तहत एक अंडर कवर एजेंट के तौर पर काम करना है, जो देश के अंदर या बाहर परिस्थिति के हिसाब से तुम्हें डिसाइड करना होगा.
हमारी ओर से केवल एक असाइनमेंट के तौर पर एक ऑर्डर इश्यू होगा, वाकी का काम तुम्हारा खुद का होगा.
एक बात नोट करके रखना, तुम्हारी आइडेंटिटी एनएसएसआइ के एजेंट के तौर पर किसी भी सूरत में सार्वजनिक नही होनी चाहिए,
अगर ग़लती से भी ऐसा हुआ, तो तुम्हें तुरंत वहाँ से हटा कर अंडर ग्राउंड कर दिया जाएगा,
ये भी हो सकता है कि तुम्हें अपनी जिंदगी से भी हाथ धोना पड़े. एक बार फिर से सोच लो, क्या ये हो पाएगा तुमसे..?
मैने कहा – सर ! अब जब ओखली में सर डाल ही दिया है, तो मूसल से क्या डरना…
मेरी बात पर वो ठहाका लगा कर हँस पड़े, मे भी उनका साथ देने लगा…
फिर वो बोले - शाबाश बेटे ! मुझे तुमसे ऐसी ही दिलेरी की आशा थी….!
एनएसए अजीत चौधरी बोले- अब हम तुमें एक जॉब के लिए अपायंटमेंट लेटर देंगे जो तुम्हारी डिग्री के मुताबिक भारत सरकार द्वारा मान्याताप्राप्त पीएसयू में एक इंजीनियर के तौर पर रहेगा.
ध्यान रहे वो सिर्फ़ दिखावे के लिए होगा, तुमसे उस ऑफीस में कभी भी, कोई भी, किसी काम या उपस्थित रहने के लिए नही कहेगा.
तुम वहाँ एक बहुत बड़े सिफारीसी कर्मचारी के तौर पर देखे जाओगे जैसे किसी बड़े मिनिस्टर या नेता के खास आदमी होते हैं.
वहाँ जाय्न करने से पहले 6 महीने तुम्हें एक कमॅंडो ट्राइंग कॅंप भेजा जा रहा है, जहाँ तुम्हारी ऐसी ट्रैनिंग होगी कि तुम्हें नानी याद आ जाएगी,
ये बोलकर वो हँसने लगे. फिर थोड़ा सीरीयस होकर बोले-
ध्यान रहे अरुण, अब तुम भारत सरकार के एक ऐसे नुमाइंदे हो जिसकी ज़िम्मेदारियाँ देश के प्रेसीडेंट और प्राइम मिनिस्टर से भी बढ़कर होंगी देश की सुरक्षा को लेकर,
ये लोग तो बदलते भी रहेंगे, लेकिन तुम सदैव इस देश की हिफ़ाज़त करते रहोगे.
सो अबसे तुम एक नये अवतार में बदल चुके हो, इस बात को अपने दिल और दिमाग़ में अभी से बैठा लो.