उसके सामने एक सफेद रंग की अलमारी थी जिसको उसने बड़ी धीरे से खोला.... उसकी आँखों के सामने डॉली के काई कपड़े टाँगें हुए थे.. लेकिन उसका आँखें टाँगें हुए कपड़ो पे नही बल्कि च्चिपे हुए कपड़ो को तलाश कर रही थी...
दो ड्रॉयर्स थी जिनमें चाबी डालके खोलने की जगह बनी हुई थी... वो भगवान से दुआ माँगने लगा क़ि काश दोनो
खुली वी हो... उसने एक को अपनी तरफ खीचा तो वो खुल गयी... अपने हाथो से छूता हुआ सारा समान इधर उधर
करने लगा मगर उसके हाथ में सिर्फ़ सॉक्स और हॅंकी आए.... बिल्कुल अंत में उसकी नज़र एक खाकी पेपर बॅग
पे पड़ी जिसके अंदर विस्पर्स का डिब्बा रखा हुआ था.... उसे देख कर सुधीर को पता चला कि पीरियड के समय डॉली
ये रखती है अपनी चूत पे.. ये सोचके उसकी शैतानी मुस्कान आ गयी..
दूसरे ड्रॉयर को भी उसने जल्दी से खोलना चाहा मगर अफ़सोस वो बंद पड़ी थी... उसे यकीन था के उसके मतलब
की सारी चीज़े उसी के अंदर होगी.... उसकी नज़रो के सामने डॉली की चड्डिया और ब्रा घूम रही थी और वो चाबी की
तलास में पागल हो रहा था.... बड़ी कोशिशो के बाद उसको एक चाबी दिखी जिससे वो द्रावर् खुल गयी..
आधी ड्रॉवार डॉली की ब्रा/पैंटी से भरी हुई थी...ये देख कर सुधीर मचल गया मगर उसके ख्याल से सारी
अच्छी अच्छी ब्रा/पैंटी डॉली अपने साथ दिल्ली ले गयी होगी.... सुधीर ने एक सफेद रंग की ब्रा निकाली उसको
महसूस करने लगा.. वो बड़ी ग़रीबो वाली सी लगी रही थी तो उसने उन्हे वापस रख दिया...
फिर उसकी नज़र एक काली पैंटी पे पड़ी... उसके उठाके उसने देखा और चौक गया कि वो पैंटी नही वो तो थॉंग है....
उसे नही लगता था कि डॉली कभी थॉंग भी पेहेन्ति होगी...... वो बस उसी काले रंग के थॉंग से आज खेलना चाहता था....
उसने अलमारी को बंद करा और सीधा टाय्लेट चला गया.. सुधीर ने जल्दी से जल्दी से अपने पाजामे को उतारा और
उस पैंटी को सूंगकर मसल्ने लग गया.. थॉंग धूलि हुई थी इसलिए धूलि हुई खुश्बू आ रही थी मगर उसका कपड़ा रेशम
की तरह था... जब सुधीर का लंड पूरी तरह बड़ा हो गया तो उसने डॉली के थॉंग को अपने लंड पे रखा और
ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लग गया.. उसके दिमाग़ बस डॉली की नंगी तस्वीर बना रहा था और वो उसको चौद्ने में लगा हुआ था.. वो पूरी तरह मदहोश हो चुका था शायद इसलिए उसको पता भी नहीं चला कि कब सारा वीर्य उस पैंटी पे आ गया..
सुधीर उस पैंटी को सावधानी गीले कपड़े से सॉफ करा और अंदर रखे सोने चला गया.. अब उसको लगा कि हर रात
रंगीन हो जाएगी..
उधर दूसरी ओर रिचा और ललिता पढ़ पढ़ के बोर हो गये थे... ललिता ने फिर रिचा का लॅपटॉप ऑन कर लिया और उधर
फ़ेसबुक करने लगी.. रिचा भी अब और नहीं पढ़ सकती थी इसलिए वो भी ललिता के साथ नेट करनी लगी..
दोनो किसी भी लड़के की प्रोफाइल खोलते और उसको 1-10 तक नो. देते.. ऐसी करते करते रात के 2 बज गये.. रिचा ने फिर
ललिता से लॅपटॉप छीना और उसपे कुच्छ करने लगी.. उसने ललिता को कुच्छ देखने को कहा.. ललिता ने देखा की एक
पूरे फोल्डर में सेक्स मूवीस थी.. ललिता ने पूछा "किसी को पता नही चलता क्या"
रिचा बोली "इसको कोई नही छुता क्यूंकी ये मेरा है और वैसे भी मैं इसको छुपा के रखती हूँ ताकि कोई इन्न मूवीस को ढूँढ ना पाए.. रिचा फिर हर एक मूवी ललिता को थोड़ी थोड़ी दिखाने लगी.. रिचा बोली "तूने देखी तो होगी ही ये"
"हां 2-3 बारी देखी है.. मगर इसको देखते तो लग रहा है कि तूने लाखो देख रखी होंगी अब तक"
रिचा ने एक मूवी खोली और बोली "ये वाली देखले मज़े आजाएँगे.." ललिता भी उसको गौर से देखने लग गयी..
उसकी शुरुआत ऐसी हुई कि एक लड़की जोकि डेसन जैसी लग रही थी स्कूल के कपड़ो में बस के इंतजार में खड़ी थी..
उसने देल्ही की लड़कियों के स्कूल की यूनिफॉर्म की तरह ही सफेद कमीर टाइ और नीचे नीली स्कर्ट पहेन रखी थी..
जब वो बस में चढ़ि तो बस काफ़ी भरी हुई थी तो वो किसी तरह बीच में जाके खड़ी हो गई..
बस की सीट मेट्रो की तरह थी.. वहाँ से एक लड़का उठ कर खड़ा हो गया और उसने उस लड़की को बैठने को जगह डेडी..
लड़की के दोनो तरफ 2 गोरे बुड्ढे बैठे थे.. कुच्छ ही पॅलो में एक बुड्ढे ने उस लड़की की स्कर्ट को हल्के से पकड़ा और्र
उसको उठाने की कोशिश करने लगा.. उस लड़की ने उस बुड्ढे के हाथ को हटा दिया.. फिर से उस बुड्ढे करने
की कोशिश करी मगर उस लड़की ने फिर से उसका हाथ हटा दिया.. थोड़ी देर बाद बुड्ढे ने उस लड़की के घुटने को छुआ..
लड़की कोई तमाशा नहीं चाहती थी इसलिए कुच्छ नहीं बोली.. फिर वो बुद्धा उसपे अपना हाथ फेरने लगा..
उस लड़की के चेहरे पे सॉफ दर मौजूद था.. बुद्धा हाथ फेरते फेरते स्कर्ट उपर करने लगा और लड़की वहाँ से उठ कर
खड़ी हो गयी..
फिर वो लड़की के दोनो तरफ दो गोर खड़े थे दोनो उसे थोड़े ही बड़े होंगे मगर काफ़ी ख़तरनाक लग रहे थे..
उनमें से एक लड़का उस लड़की की स्कर्ट को उपर उठाने लगा तो दूसरे अपनी कौनी से उसके स्तनो को महसूस करने लगा..
लड़की ने पूरी कोशिश करी की वो अपनी स्कर्ट को नीचे करके रक्क्खे मगर लड़के ने होने नहीं दिया और उस लड़की
की सफेद पैंटी सबके नज़र में आगयि.. आहिस्ते आहिस्ते कई हाथ लड़की के जिस्म पे पड़ने लगे.. कोई उसकी गान्ड को महसूस
कर रहा तो कोई उसकी जाँघो को.. अब उस लड़की के मम्मो को काफ़ी लोग मसल्ने लगे.. (ललिता और रिचा बड़े गौर
से उस वीडियो को देख रहे थे) जब उस लड़की ने अपने आपको बचाना चाहा तो उन्न लोगो ने उसकी पूरी उतार दी..
फिर उन्न लोगो ने उसकी शर्ट के बटन खोले और उसको भी नीचे फेंक दिया.. उस लड़की ने किसी तरह अपने हाथो से
अपने ब्रा और पैंटी को बचाना चाहा मगर वो हार गयी.. उसकी पैंटी तो वही फाड़ दी और ब्रा को उतार दिया..
नज़ाने कितने हाथ उसके जिस्म से खेल रहे थे..
रिचा ने ठंड का बहाना मारके एक चादर ओढ़ ली और अपने शॉर्ट्स के अंदर हाथ डालके चूत से खेलने लगी...
फिर सारे लड़के/बूढे नंगे हो गये और लड़की क मुँह में अपना लंड डालने लगे.. ललिता के मुँह पे बेचैनी छाई हुई थी.. उस लड़की को बस के फर्श पे बिठाकर सब उस लंड चूस वा रहे थे.. फिर बस का कंडक्टर पीछे आया और
उसने भीड़ हटा कर उस लड़की को देखा और उसने भी अपने कपड़े उतार दिए और अपने लंड उसके सामने रख दिया..
फिर सबने उस लड़की को उसकी टाँगो पे खड़ा किया और दो खंबो के सहारे खड़े रहने को कहा..
बारी बारी सब उसकी चूत को चोद्ने लग गये.. वो लड़की बुर्री तरह से चिल्ला रही थी..
रिचा इतनी मदहोश हो चुकी कि उसके मुँह से भी एक-दो सिसकिया निकल गयी.. जब सबने उस लड़की को चोद दिया तब
उसके मुँह के अंदर सारा वीर्य डाल दिया.. फिर आख़िर में सबने उसके उपर पिशब किया.. वो पूरी तरह भीग चुकी थी..
ये देख कर भी दोनो लड़कियों को ज़रा सी भी घिन नहीं आई..
जब वीडियो ख़तम हो गयी तब दोनो की हालत खराब हो गयी.. दोनो एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगे..
दोनो के पास कुच्छ कहने के लिए ज़्यादा था इसलिए दोनो आँख बंद करके लेटे रहे.. कुच्छ देर बाद रिचा खर्राटे
लेने लगी जैसे कि बड़ी गहरी नींद में सो रही हो.. ललिता यही चाहती थी कि वो किसी तरह से रिचा का सेक्स का
खिलौना लेके टाय्लेट चले जाए अपनी प्यास भुजाने.. पर वो किसी भी तरह की मुसीबत या शर्मन्दिगि में नहीं फसना
काफ़ी देर के बाद चुपचाप रिचा बिस्तर पे से उठी और ललिता को लेटा देख
अपनी अलमारी से खिलौना लेके टाय्लेट चली गयी.. ललिता को समझ आ गया था कि ये साली भी सोने का नाटक कर रही थी
ताकि मैं सो जाऊ और ये मज़े कर सके.. ललिता ने अपने गुलाबी रंग के टॉप में हाथ डाला और ब्रा के उपर
से ही अपने स्तनो से खेलने लगी.. कमरे काफ़ी ठंड होने का कारण उसकी चूचिया सख़्त हो गयी थी और वो उनको मसल्ने लगी... अपने आप ही उसने अपना दूसरा हाथ अपने पाजामे में डाल लिया और अपनी चूत के सहलाने लगी..
वो सोचने लगी कि अंदर रिचा कितने मज़े से अपनी चूत में खिलौने वाला लंड डाल रही होगी और इस वजह से उसकी प्यास और बढ़ गयी तो वो दो उंगलिया अपनी चूत के अंदर बाहर कर ने लगी... उसने जल्दी से अपनी ब्रा के हुक को खोला ताकि
वो अपने मम्मो से ढंग से खेल सके.. उसकी चूत और उंगलिया काफ़ी गीली हो चुकी थी....
उसने अपने उपर से चादर हटाई और और ज़ोर से अपनी उंगलियाँ चूत में डालने लगी... उसकी पीठ हवा में थी और सिर और पैर बिस्तर में गढ़े हुए...
मगर वो नहीं चाहती थी कि उसकी सहेली को पता चले कि वो जागी हुई है इसलिए वो जल्दी से उठ कर भागी दूसरे टाय्लेट कीतरफ जोकि ड्रॉयिंग रूम की तरफ था.. उसको अब काफ़ी तेज़ पिशाब भी आ रहा था और उसने धदाम से टाय्लेट के दरवाज़ा को मारा..
टाय्लेट के दरवाज़े की कुण्डी टूट गयी और उसके सामने परशु खड़ा हुआ मूत रहा था..
परशु ने ललिता को देख भी लिया मगर फिर भी उसने मूतना बंद नहीं किया.. वो चुपचाप खड़ा हुआ था...
ललिता उसके लंड को देख कर हैरान थी.. पार्सू का लंड पूरी तरह जागा हुआ भी नहीं था तब भी काफ़ी बड़ा/मोटा लग रहा था..
2 सेकेंड के बाद ललिता ने दरवाज़ा वापस बंद कर दिया और किचन में जाके खड़ी हो गई..
जब परशु वहाँ से निकला तो उसने ललिता को किचन की ओर खड़े देखा और उसको देख कर मुस्कुराने लगा...
ललिता की कुच्छ हिम्मत नही हुई बोलने की और वो टाय्लेट चली गयी और पिशाब करके जल्दी कमरे की तरफ भागी और
जाके बिस्तर पे गिर गयी.. उस लंड को सोचते हुए उसे गोलू चौकीदार की याद आ गयी....
दोनो का लंड काफ़ी काला था और मोटा भी था... वो जानती थी कि गोलू ने जब उसे चोदा था तब वो खुशी में झूम
रही थी मगर परशु के साथ ये सब सोचने में भी उसकी हवा टाइट हो रही थी क्यूंकी परशु काफ़ी ख़तरनाक
इंसान मालूम पड़ता था.... खैर कुच्छ देर बार रिचा भी बाहर आ गयी और बिस्तर पे लेटके सो गयी...
अगली सुबह डॉली जल्दी से तैयार होकर अपना आखरी एग्ज़ॅम देने जा रही थी और उसके कुच्छ देर बाद चेतन भी घर
से चला गया था.... शन्नो घर में अकेली फिर से हॉलो मॅन के कॉल का इंतजार कर रही थी....
आज उसने ठान ली थी कि वो हॉलो मॅन को मिलने के मना लेगी.... कुच्छ 11 बजे तक जब फोन की घंटी बजी तो शन्नो
ने जल्दी से फोन उठाया,..
"हेलो मॅम..... इतनी बेताब थी मेरी आवाज़ सुनने के लिए" हॉलो मॅन अपनी अजीब सी आवाज़ में बोला
शन्नो ने कुच्छ देर तक उसे एहसास दिलाया कि उसकी जिस्म की प्यास ऐसे नही मिट रही है और वो उससे मिलना चाहती है...
हॉलो मॅन ये सारी बात सुनके हँसने लगा जिससे शन्नो को बहुत बुरा लगा... उसके अगले ही सेकेंड घर की घंटी बजी और
ललिता घबरा के बोली "सुनो थोड़ी देर में कॉल करना"
हॉलो मॅन बोला "दरवाज़ा खोलो तुम्हारे लिए तौफा है" शन्नो को लगा शायद हॉलो मॅन ही उसे मिलने के लिए आया है....
वो धीरे धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ी और उसे खोलके देखा तो वहाँ 4 लड़के खड़े हुए थे.... हॉलो मॅन ने कहा
"ये तुम्हारी जिस्म की प्यास मिटाने के लिए है... चारो ने अभी तक किसी लड़की को छुआ तक नही है...
इन्हे खुश करदो और मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर दूँगा.... और इनको मैने तुम्हे मेरी बीवी बताया है"
वो चारो लड़को की नज़र शन्नो के पैरो की तरफ थी यानी कि के ज़मीन पर... वो चारो शन्नो से नज़र मिलाने में भी
घबरा रहे थे... सब चेतन की उम्र के जितने ही लग रहे थे.... चारो ने चस्मा पहेन रखा था... बाल चिपके हुए थे...
और एक साधारण सी शर्ट पॅंट में थे... सब ज़िंदगी से हारे हुए या तो फिर किताबी कीड़ा लग रहे थे....
उनमें से सबसे आगे खड़ा हुआ लड़का घबराके बोला "क्या आप ही शन्नो जी है"
शन्नो बोली "अंदर आ जाओ"
चारो लड़के एक के बाद एक घर के अंदर आ गये और शन्नो ने घर के दरवाज़े पर कुण्डी लगा दी....
शन्नो ने उस वक़्त अपनी हाफ बाजू वाली नीली नाइटी ही पहेन रखी थी... वो चलके उन्न चारो लड़के के सामने खड़ी हो गई... चारो की हिम्मत नही हो रही थी कुच्छ कहने की या पहले शुरुआत करने की.... शन्नो नीचे झुकी और अपनी नाइटी को
पकड़के उतार दिया... उसकी गोरा फूला हुआ जिस्म सिर्फ़ सफेद कॉटन वाली ब्रा और पैंटी से छुपा हुआ था.....
उसके बाल खुले हुए उसकी पीठ से लगे हुए थे... चारो लड़को का गला सूख गया थी इस चुदाई की देवी को देख कर...
उसने अपना एक हाथ पीछे बढ़ाया ब्रा के हुक्स खोलने के लिए और उनको खोलने के बाद उसकी ब्रा ने उसके 38डी मम्मो
को इन्न चार लड़को के सामने खुला छोड़ दिया... मम्मो को देख कर ये चारो लड़के छोटे बच्चो की तरह दूध
पीने के लिए शन्नो के उपर चढ़ गये.... किसी ने शन्नो की जाँघ को पकड़ रखा था तो किसी ने उसकी कमर को...
मगर चारो ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली हुई थी ताकि वो शन्नो के तरबूज़ वाले बदन को चख सके....
चार चार ज़ुबाने शन्नो के बदन पे छूटती हुई शन्नो मस्ती में झूल गई मस्त हो गयी.... फिर एक लड़के ने उत्साहित होकर
शन्नो की सफेद पैंटी को उतार दिया और शन्नो इन्न चारो लड़को के सामने नंगी खड़ी हुई थी....
चारो ने एक बाद अपने कपड़े उतार दिए और शन्नो के नंगे बदन से अपना नंगा बदन चिपकाने लगे...
"मैने इससे पहले कभी भी मम्मो को नही देखा" उनमें से एक लड़के ललिता के मम्मो को काटते हुए कहा
दूसरे ने बोला "सच में आज पहली बारी देख रहा हूँ और वो भी इतने बड़े.... इन्पे तो कोई पिल्लो बनाके सोसकता है..."
शन्नो की नज़र उन्न चारो की लंड पे गढ़ी हुई थी जो हर पल बढ़ते ही जा रहे थे... जितना उसको लग रहा था उनसे ज़्यादा बड़े
और तने हुए इन्न चारो के लंड लग रहे थे... शन्नो से रहा नही गया और चारो को अपने बदन से दूर करके फर्श पे
बैठ गयी और सबके लंड को छुने लगी.... उसने दो लंड को अपने हाथो में पकड़ा और बाकी दो को बारी बारी चूसने लगी.... चारो के लंड पे काफ़ी काले घने बाल थे... जिनपे शन्नो अपनी उंगलिया घुमा रही थी... सब अपने जज़्बातो को रोक नही
पा रहे थे और उनपे से एक लड़का बोला "क्या मैं आपको मा बुला सकता हूँ"
शन्नो ने अपना सिर हां में हिलाया और वो लड़का और उस लड़के का लंड और भी मज़बूत लगने लग गया...
शन्नो की बहती चूत को देख कर एक लड़का ने पूछा "क्या इसमे हम अपना लंड डालेंगे" ये सुनके शन्नो ने उनके लंड को
मुक्त कर दिया और अपनी टाँगें चौड़ी करके फर्श पे लेट गयी... चारो लड़के आपस में लड़ने लगे कि पहले कौन
शन्नो की गीली चूत में अपना लंड डालने का सौभाग्य पाएगा...
शन्नो ने फिर खुद एक लड़के को ये करने का मौका दिया और वो उत्साहित होके अपना लंड शन्नो की चूत में घुसाने लग गया... बाकी लड़को ने भी शन्नो के जिस्म को खाली नही छोड़ा और कहीं ना कहीं उससे खेलते रहे....
चूत में डालने से पहले ही उनमें से एक लड़के का पानी निकल गया जिसका उसको एहसास भी नहीं हुआ और उसका वीर्य ललिताके मम्मो पे जा गिरा... फिर बाकी तीन लड़के बारी बारी शन्नो को चोद्ने लगे.... शन्नो जानती थी कि ये चारो
ने पहले कभी किसिको नही चोदा है तो कभी भी ये अपना वीर्य छोड़देंगे.... फर्श पे लेटी लेटी शन्नो अपनी सिसकीओ को
रोक नही पा रही थी... उसके चेहरे पे हल्की सी भी शरम नही थी मानो जैसे उसने एक रांड़ का रूप धारण कर लिया हो...
. बारी सब लड़को का वीर्य निकल गया और सबने शन्नो के जिस्म को टाय्लेट समझके उसपे अपना वीर्यछिड़क दिया....
शन्नो इतना थक गयी थी इस चुदाई से कि उसने वहाँ से उठना भी ज़रूरी नही समझा.... सबने शन्नो को मम्मी
कहते हुआ धन्यवाद कहा और वहाँ से चले गये.... शन्नो ने सोफे पड़े फोन को उठाया और उसपे अभी
हॉलो मॅन की साँसें सुनाई दे रही थी.... फिर उसको आवाज़ "मॅम मज़ा आया ना मेरे तोफे से मिलकर ऊप्स मेरे तोफो से चुद्कर..." शन्नो बोली तुम्हे कैसे पता चला कि मैने फोन उठा लिया है... क्या तुम यही हो??"
शन्नो अपने वीर्य से चिपके हुए बदन को चदडार से लपेटा और चुपके से घर के दरवाज़े को खोलके देखा मगर वहाँ
कोई नही था.... उसके कानो में आवाज़ आई "हेलो मम्मी" वो डर के पीछे मूडी तो वहाँ चेतन खड़ा हुआ था..
घबराहट मे उसकी वो चादर नीचे गिर गयी और उसका नंगा बदन उसके बेटे के सामने आ गया....
चेतन फिर अपनी आवाज़ बनाके बोला "आज तो मज़े ही आ गये मेडम" और ये कहकर चेतन हँसने लगा
"तुम.. तुम हो हॉलो मॅन" फर्श पे नंगी बैठी हुई शन्नो ने अपने बेटे से पूछा
"हां मैं ही हूँ आपका चहिता हॉलो मॅन" चेतन ने शन्नो के नंगे कंधे को चूमते हुए कहा...
शन्नो को कुच्छ समझ नही आ रहा था आख़िर कार उसके ही बेटे ने उसको ऐसे बेवकूफ़ क्यूँ बनाया...
और अब आगे उसकी ज़िंदगी कैसे गुज़रेगी और अगर उसकी बेटियाँ या फिर उसके पति को पता चल जाएगा तो ना जाने कितनी
बड़ी आफ़त आ जाएगी... शन्नो को इस घर में घुटन महसूस कर रही थी... ये सारे सवाल उसका दिमाग़ खा रहे
उधर जब ललिता की आँख खुली तो उसके दिमाग़ में कल का द्रिश्य आ रहा था और परशु को अपने लिए चाइ लाते
देख वो द्रिश्य और भी सामने आ गया.. परशु में कुच्छ बात थी जो इतना सब होने के बाद भी बिल्कुल भी घबराहट
या उत्सुकता नहीं दिखाता था.. पूरे समय वो एक ही सा चेहरा बनाते फिरता था.. ललिता ने रिचा से परशु के
बारे में ऐसी ही सवाल करें तो उसने बताया कि परशु बहुत पहले से इनके घर में काम करता है जब वो कुच्छ
5 साल की थी तबसे और वो खुशी में ज़्यादा खुश नहीं होता और ना ही गम में ज़्यादा दुखी..
जब ललिता नाहके अपने कपड़े बदल के रिचा को ढूँढने लगी और ढूँढते ढूँढते बाहर गयी तो रिचा और परशु
बाहर बाल्कनी में खड़े थे.. वो जैसी ही बाल्कनी के पास बढ़ती रही तो उनकी बात करने की आवाज़ आती रही..
परशु नज़ाने क्यूँ रिचा को किसी बात के लिए डाँट रहा था और रिचा भी उसे माफी माँगे जा रही थी...
ललिता जब कोने में छुप के बात सुनने लगी तब वो चौक गयी.. परशु रिचा को इसलिए डाट रहा था क्यूंकी उसने वो
खिलौना ढंग से छुपा के नहीं रखा था.. वो बोले जा रहा था कि साब और मालकिन देख सकते थे उसे और वगेरा वगेरा... ललिता ये सुनके वापस कमरे में चली गयी और उसे कुच्छ समझ नहीं आ रहा था..
फिर उनकी ट्यूशन वाली मॅम आ गयी और वो पढ़ने लगे.
भोपाल में कुच्छ 1 बज रहा था और नारायण के पास कुच्छ काम नहीं था तो वो अपनी खिड़की के बाहर देखने लगा... उसका ऑफीस फर्स्ट फ्लोर पे था जो कि ज़मीन से कुच्छ ही फीट उपर था और उसकी खिड़की के बाहर ही स्कूल का खेलने का मैदान था... कभी कबार जब नारायण के पास काम नहीं होता था तो वो इस खिड़की के बाहर देख कर अपनी आँखो को ठंडक पहुचाता था... क्यूंकी हर बारी लड़किया कुच्छ ना कुच्छ खेल रही होती थी और जब वो भागती थी तो उनके मम्मे हिलते थे उनकी स्कर्ट भी ऊपर नीचे होती थी या कभी कोई स्टेज पे बैठता तो उसकी जाँघो को भी वो देख पाता था... काई बारी तो वो इतना गरम हो जाता की अंजाने में अपने लंड को सहलाने लगता... इस बारी भी कुच्छ ऐसा होने जा रहा था मगर उसे पहले रश्मि कॅबिन में आगयि....
रश्मि ने नारायण से कहा "सर ये कुच्छ पेपर्स है आपके इन्पे साइन चाहिए"
नारायण अपनी कुर्सी पे बैठे और रश्मि को भी बैठने को कहा.... पेपर्स साइन करते हुए नारायण ने रश्मि को बोला "तुम्हारे काम करने का जज़्बा देख कर मैं काफ़ी खुश हूँ.... ये कुच्छ अफीशियल नही हुआ है मगर मैं कोशिश करूँगा कि तुम्हारी तन्खुआह मैं बढ़ाने की पूरी कोशिश करूँगा क्यूंकी तुम काम भी हद से ज़्यादा करती हो...."
ये सुनके रश्मि के चेहरे पर खुशी च्छा गयी और उसी वक़्त एक पीयान नारायण के ऑफीस आया एक लड़की को लेके... लड़की की आँखों में आँसू झलक रहे थे और वो काफ़ी परेशान लग रही थी.. पीयान बोला "सर इस लड़की को अभी मैने शराब के साथ पकड़ा है.. इसकी बॉटल में शराब डाली हुई थी और जल्दबाज़ी में इसके हाथ से वो गिर गयी ओरजब मैने उसे सूँघा तो शराब की बू आ रही थी"
नारायण ने पीयान को जाने के लिए कहा और लड़की को गुस्से में पूछा "क्या नाम है तुम्हारा??"
लड़की ने घबरा के कहा "जी... मेरा नाम नवरीत है"
"पूरा नाम बताने का कष्ट करेंगी आप" नारायण ने थोड़े गुस्से में उस लड़की से पूछा..
लड़की ने कहा "नवरीत कौर"
नारायण फिर बोला "ये जो भी बोला गया तुम्हारे बारे में कहा पीयान ने सब सच है.. बोलो जवाब दो"
आज तो रश्मि भी नारायण को गुस्से में देख कर घबरा गयी थी...
लड़की ने सिर झुका कर कहा "एसस्स सर... मगर आप प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए ऐसा नहीं होगा"
नारायण ने रश्मि को तुर्रंत एक लेटर टाइप करके लेके आने को कहा.. रश्मि भाग कर अपने कॅबिन में गयी और लेटर लेके आई... नारायण ने बोला "ये तुम्हारा सस्पेन्षन लेटर है.. तुम अगले 10 दिन स्कूल में कदम नहीं रख सकती मगर कल सुबह तुम इस्पे साइन करवाकर अपने हाथो से रश्मि मॅम को दोगि नहीं तो 10 दिन के साथ साथ फाइन भी लग जाएगा.."
ऐसी सख्ती देख कर रश्मि नारायण की फॅन हो गयी... उसे लगता था कि नारायण ये नौकरी ऐसे करता था कि जैसे खैरात में मिली हुई हो... उसके काम करने का ढंग भी बड़ा आलस वाला लगता था मगर आज तो उसने कमाल ही कर दिया था.... लड़की नारायण से माफी मांगती रही मगर नारायण ने एक ना सुनी.. उल्टा रश्मि ने भी उस लड़की को जाने के लिए कह दिया और वो रो रो कर वहाँ से चली गयी... नारायण को लगा कि वो कुच्छ ज़्यादा सख़्त था मगर कभी कबार जीवन में सकती दिखानी चाहिए ये सोचके वो अपने फ़ैसले से संतुष्ट था..
रश्मि ने भी ऐसे फ़ैसले की हौसले अफजाई करी...
फिर दिल्ली में जब डॉली कुच्छ 3 बजे एग्ज़ॅम देके वापस आई तो पूरे घर में कोई नहीं था... उसको इतनी खुशी थी कि आज उसका आखरी इम्तिहान भी ख़तम हो गया और अब वो इस पड़ाई से आज़ाद है.. उसने जल्दी से हाथ मुँह धोके खाना खाया और राज को भोपाल में कॉल करा.. किसी कारण राज ने उसका फोन उठाया नहीं.. उसके पास करने को कुच्छ नहीं था तो उसने टीवी ऑन कर दिया और अलग अलग चॅनेल देखने लगी... टीवी पे भी कुच्छ नहीं आ रहा था और वो बुर्री तरह बोर हो गयी थी.. उसने सोचा कि कोई मूवी ही लगाके देख लेती हूँ तो वो अपने भाई के कमरे में गयी मूवीस की सीडीज़ लेने के लिए जो कि एक पूरा डिब्बा भरा हुआ था.. हर डिस्क पे मूवी के शॉर्ट फॉर्म बनी लिखी थी (जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे = द्दलज या मुझसे शादी करोगी = मस्क) डॉली ने 2-4 डिस्क निकाली जिसकी शॉर्ट फॉर्म उसे समझ में नहीं आ रही थी और एक अपनी सबसे पसंदीता ड्ड्ळ्ज़ फिल्म की अगर कुच्छ ना मिला तो वो उसे देख लेगी.. पहली जो उसने डिस्क डाली वो तो चल ही नहीं रही थी.. जब उसने तीसरी डाली तो वो चलने लगी... वो कोई अक्षय कुमार की मूवी थी.. डॉली सोफे पे बैठ गयी और शांति से मूवी देखने लगी..
कुच्छ देर बाद वो मूवी भी रुक गयी और टीवी पे काली स्क्रीन आ गयी.. डॉली ने सोचा सीडी खराब होने के कारण ऐसा हो रहा हो तो उसने 2 मिनट रुकने का सोचा मगर अचानक से एक गंदी सी फिल्म शुरू हो गई जिसमे एक गोरा एक कल्लन को चोद रहा था.. पूरे रूम में शोर भर गया था डॉली ने जल्दी से रिमोट उठाया और टीवी बंद कर दिया.. उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो गया.. उसने फिर टीवी को फिर से ऑन करा और उसे मूट कर दिया.. अब टीवी पे फिर काली स्क्रीन आगयि तो डॉली को लगा कि अब फिल्म फिर से शुरू हो जाएगी मगर फिर दिखाया कि एक छ्होटी उम्र का काला लड़का स्कूल में अकेला बैठा है क्यूंकी उसे एग्ज़ॅम में चीटिंग करने में सज़ा मिली है और उसके सामने उसकी गोरी टीचर बैठी हुई है.. वो लड़का कभी पेन और कभी पेपर गिरा कर अपनी टीचर की स्कर्ट के अंदर झुक झुक के देखने की कोशिश कर रहा है और जैसी टीचर को पता चला तो वो भी मज़े लेने के लिए उसको दिखा रही है.. डॉली ये देख कर परेशान हो गयी और उसने सीडी वापस निकालके तोड़ दी.. तभी उसका फोन बजा और वो डर गयी.. उसने राज का नाम पढ़ा और वो खुश हो गयी.. डॉली ने जब राज की आवाज़ सुनी तो उसने खुशी फोन को चूम लिया.... राज बोला "अर्रे घर पे कोई सुन लेगा आराम से.."
डॉली बोली "कोई नही सुन सकता क्यूंकी मैं अकेली हूँ फिलहाल"
राज फिर हसके बोला "फिर तो एक और बनती है"
डॉली भी हसके बोली "बेशरम... वैसे पहले फोन क्यूँ नहीं उठाया था??"
राज ने जवाब दिया "यार फोन पता नहीं कहा पड़ा हुआ था... वैसे भी जब से तूने बात करनी बंद करदी तबसे फोन का कुच्छ पता नहीं रहता है"
डॉली ये सुनके मुस्कुरा दी...
राज ने फिर पूछा "तो क्या कर रही थी??"
डॉली बोली "मूवी देख रही थी"
राज झत्ट से बोला "पॉर्न :पी"
डॉली ने जवाब नहीं दिया और उसे स्कूल के बारे में पुच्छने लगी... राज फिर बीच में ही डॉली को बोलने लगा "यार जल्दी आजा... बहुत याद आ रही है"
ये सुनका डॉली को इतना अच्छा लगा वो बोली "मैं तो अभी आना चाहती हूँ मगर फिर भाई-बहन का एग्ज़ॅम जब ख़तम होंगे तभी आ पाउन्गि.. आइ आम सॉरी... वैसे एक बात बोलू तुम्हे.. मैने अभी थोड़ी सी पॉर्न देखी थी.."
राज बोला " देखा मुझे सब कुच्छ पता है तेरे बारे में... चल बता कैसी सी थी???"
डॉली ने बताने से इनकार कर दिया मगर राज ज़िद्द पे अड़ा रहा..
डॉली बोली "उसमें ना ऐसा था कि एक गंदा सा लड़का था तेरी तरह" राज बोला "मेरी तरह से क्या मतलब है तेरा" डॉली ने बोला "मेरेको बताने तो दे ना पहले... अच्च्छा सुन तो वो लड़का अपनी एक टीचर के साथ बैठा था एक कमरे में... उसको सज़ा मिली थी थोड़े ज़्यादा घंटे स्कूल में बिताने के लिए.... वो टीचर ने काला ड्रेस पहेन रखा था जोकि छोटा टाइट सा था तो वो लड़का झुक झुक के टाँगों और जाँघो को देख रहा था... बस मैने ये देख कर ही उसे हटा दिया"
राज चिल्ला के बोला " क्या.. क्यूँ हटा दिया.. देखना चाहिए था ना.. तुझे सीख भी मिलती
डॉली हंस के बोली "अच्च्छा कैसी सीख??""
राज रूक्के बोला " कि कैसे मज़े लेने चाहिए"
डॉली ने तुरंत बोला "वो मुझे नही आपको चाहिए" राज भी बोला "तो मैं इंतिज़ार कर रहा हूँ सिखा दे... चल एक खेल खेलते है.. तूने रॉलीप्लेयिंग गेम सुना है?? उसमें ऐसा होता है कि लोग कोई किरदार प्ले करते है जैसे कि डॉक्टर/नर्स, वाइफ/सर्वेंट, टीचर/स्टूडेंट वगेरा वगेरा और एक कहानी को वो आगे बढ़ाते है.. बड़े मज़े आते है"
डॉली सुनने के बोली "हां हां तुम लड़को को ही मज़े आते होंगे ना.. हमे तो नहीं आते"
राज बोला " आते तो सबको ही है बस लड़किया दिखाना नहीं चाहती... और अगर तुझे नहीं आते तो एक बारी मेरे साथ खेलके तो देख...
डॉली सोचके बोली "चल ठीक है... मगर अगर मैं बीच में बोर हो गई तो गेम वहीं बंद करदेंगे"
राज भी जोश में बोला "जैसे आप बोलें... तो सीन वैसे ही रखे कि एक लड़का 17 साल का है और उसकी टीचर 26 साल की है और उस लड़के को पनिशमेंट मिली है स्कूल में ज़्यादा देर तक रुकने के लिए... मगर हमारी टीचर ने ड्रेस नही एक नीली हरे रंग की सारी पहेन रखी है क्यूंकी वो हिन्दुस्तानी है ना..."
डॉली की रज़ामंदी के बाद दोनो ने खेलना शुरू किया
डॉली मॅम मुझे कब तक यहाँ रुकना पड़ेगा?? राज ने पूछा
डॉली बोली "चुप चाप बैठे रहो.. मैने बोला था कि जाके कि आकृति मॅम को आइ लव यू बोलके आओ??"
राज बोला "मॅम वो तो महेश ने बोला था मैं तो बस उसके साथ क्लास के बाहर खड़ा हुआ था.. नज़ाने उसको क्या सूझा और उसने आइ लव यू चिल्ला दिया और वहाँ से भाग गया"
डॉली बोली "चुप चाप बैठे रहो मुझे तुम्हारे छिछोरि हर्कतो के बारे में नहीं सुनना"
"मॅम आप कर क्या रही हो" राज ने पूछा
डॉली बोली " बच्चो की कॉपिया चेक कर रही हूँ... क्यूँ नहीं करू??"
राज बोला "नहीं मैं सोच रहा था कि एग्ज़ॅम पास आ रहे है और मैं वक़्त बर्बाद नहीं करना चाहता.. अगर आप मुझे पढ़ा देती थोड़ा सा तो मुझे ज़्यादा अच्छे से समझ आ जाता"
डॉली बोली " अभी बड़ी पढ़ाई की याद आ रही है... चलो निकालो किताब और आगे चेर लेके आओ...
राज ने बाइयालजी की किताब निकाली और डॉली के सामने जाके बैठ गया??
डॉली ने पूछा 'कौन से चॅप्टर्स आ रहे है??"
राज बोला "मॅम बाकी सब तो आते है बस रिप्रोडक्षन में थोड़ी दिक्कत है"
(डॉली ये सुनके हँसने लगी... राज ने पूछा "बोर तो नहीं हो रही ना.. डॉली बोली "नहीं नहीं)
डॉली ने फिर किताब खोली और राज को पढ़ाना शुरू कर दिया... उसने राज से कहा 'इसमें तुम्हे ज़्यादा कुच्छ नही पढ़ना बस कौन कौन से रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स होते है, वो कैसे दिखते है और क्या क्या काम करते है ये पता होना चाहिए"
मॅम वोही तो मुझे बनाने में बहुत दिक्कत होती है.. डॉली परेशान होके कुर्सी से उठी और चॉक पकड़के बोर्ड पे बनाने लगी... राज बिल्कुल सामने बैठके उसकी गान्ड को हिलते हुए देख रहा... "लो ऐसा बनाते है" डॉली ने कहा
राज ने नादान होके पूछा "ये है क्या मॅम"
डॉली मॅम ये सुनके हल्की सी मुस्करा दी और बोली "अर्रे ये लड़कियों का ऑर्गन है"
राज बोला "वो कभी देखा नहीं ना मॅम तो इसलिए पता नहीं"
ये सुनके डॉली ने बोला "देखो ज़्यादा स्मार्ट ना बनो और उठ कर मेल का ऑर्गन बनाओ और वो देखा है या वोभी नहीं देखा??"
राज ने चॉक उठाके चित्र बना दिया... राज ने बोला "मॅम ये वाला स्कूल आने के वक़्त ऐसा होता है (गिरा हुआ) मगर आपको देख कर ये ऐसा हो जाता है (सख़्त खंबे की तरह)" डॉली हड़बड़ा के बोली "देखो राज तुम ज़्यादा बनो नहीं.. ये सब सुनने के लिए मैं तुम्हे पढ़ा नहीं रही हूँ"
ये सुनके डॉली की चूत हल्की सी गीली हो गयी और उसने राज को ये गेम खेलने से मना कर्दिआ.. राज बोला "क्यूँ क्या हुआ.. सच्ची बताओ मज़े आ रहे थे ना"
डॉली बोली "नहीं आ रहे थे और अब मैं फोन काट रही हूँ" ये कहके डॉली ने फोन काट दिया... फिर उसने अपने पाजामे में हाथ डालके महसूस किया की उसकी पैंटी हल्की सी नम हो गई है.. तभी राज का फोन पे मैसेज आया " फोन क्यूँ काट दिया.. ??" डॉली ने लिखा "बस काफ़ी बात करली थी तुमसे"
राज ने लिखा "अच्छा ये तो बताओ कि तुमने आज पहेन क्या रखा है??"
डॉली लिखती "क्यूँ क्या करना है तुम्हे??"
राज ने लिखा "अर्रे मैं तुम्हे सोचूँगा ना.. बताओ ना डॉली"
डॉली जवाब दिया "मैने सफेद रंग का नूडल स्ट्रॅप वाला टॉप पहना है और नीचे काले रंग का पाजामा"
राज मज़ाक में लिखता "और अंदर क्या पहना है??"
डॉली मज़ाक में लिखती "बदतमीज़ शर्म नहीं आती :"
राज ने बोला "मेरे ख़याल से तुमने कुच्छ नहीं पहेन रखा अंदर"
डॉली ने लिखा "अच्छा आके खुद देख लो अगर शक़ हो रहा है मुझपे"
राज का लंड ये सुनके जाग गया और उसने लिखा
"अगर पहना होगा तो पिच्छली बार की तरह उतार दूँगा"
ये पढ़के डॉली शरम के मारे लाल हो गयी थी... इससे पहले वो कुच्छ लिखती घर की घंटी बजने लगी और उसने दरवाज़ा खोलके देखा तो शन्नो खड़ी थी.... डॉली को नज़ाने क्यूँ शन्नो की हालत थोड़ी खराब सी लग रही थी... शन्नो ने डॉली से कुच्छ बात भी नही करी और सीधा अपने कमरे में जाके लेट गयी... शन्नो को राहत इस बात की थी कि उसका बेटा घर पर नहीं था... डॉली ने राज को बादमें बात करने के लिए और शन्नो के पास जाके बैठके बात करने लगी...
उधर दूसरी ओर ललिता बिल्कुल भी परशु से नज़र नहीं मिल पा रही थी और परशु किसी ना किसी बात की वजह से ललिता के सामने आए जा रहा था.. उसे ये भी समझ नहीं आ रहा था कि परशु को उस खिलौने के बारे में कैसे पता है और रिचा और उसके बीच क्या खिचड़ी पक रही है.. वो पूरी तरह परेशान थी.. कुच्छ दोपहर के 3 बज रहे थे और रिचा को काफ़ी नींद आ रही थी.. ललिता ने पूरी कोशिश करी कि वो उसको सोने ना दे मगर वो फिर सो गई.. ललिता सोचने लग गयी कि अब वो क्या करें.. उसका दिमाग़ चल ही नहीं रहा था.. उसने किताब उठाई और पढ़ना शुरू कर दिया और उसमें भी उसका बिल्कुल भी मन नहीं था.. कमरे के बाहर भी काफ़ी शांति छाई हुई थी,.. वो देखना चाहती थी कि आख़िर कार परशु कर क्या रहा है.. ललिता ने धीरे से दरवाज़ा खोला और कमरे के बाहर निकली.. घर में हल्का हल्का अंधेरा सा था क्यूँ कि सारी खिड़किया पर्दे से धकि थी.. जब वो किचन तक पहुचि तो परशु उसे देख कर बोला "क्या है" ललिता घबराकर बोली "नहीं कुच्छ नहीं पानी लेने आई थी"
जब वो पानी पीके जा रही थी तब परशु ने बोला "कल मज़ा आया था तेरे को??" ललिता ये सुनके और भी ज़्यादा घबरा गई..
परशु ने फिर से बोला मगर इस बार थोड़ा ज़ोर से "कल रात मज़ा आया??" ललिता के मुँह से सिर्फ़ "जी" निकला और वो वहाँ से चली गयी.. कमरे में जाके ललिता ने सबसे पहले अपना माथा पौच्छा और घबराकर बिस्तर पे लेट गयी और अपने आपको चादर से धक लिया..
कुच्छ देर चैन से सोने के बाद जब ललिता की आँख खुली तो रिचा बिस्तर पे नहीं थी.. ललिता जल्दी से बिस्तर से उठी और दबे पाओ कमरे के बाहर गयी.. जब पूरी घर में रिचा नहीं मिली तब उसकी नज़र परशु के कमरे के तरफ बढ़ी जोकि बंद पड़ा था.... ललिता दरवाज़ा पे कान रखे सुनने लगी.. कमरे में से हल्की हल्की आवाज़ आ रही थी.. आवाज़ फिर सिसकीओ में बदल गयी... ललिता के दिमाग़ में परशु का मोटा लंड रिचा की चूत को चोद्ता हुआ नज़र आ रहा था.. उन्न सिसकिओं ने ललिता को काफ़ी मदहोश कर दिया था और अपने आप ही उसका हाथ उसके जिस्म से खेलने लगा था... फिर कुच्छ सेकेंड के लिए आवाज़ बंद हो गई और कमरे का दरवाज़ा अचानक से खुल गया.. परशु ने ललिता को घूरके पूछा "क्या हो गया??" ललिता कुच्छ नहीं बोल पाई..
परशु ने उसको बोला "रिचा बाहर बाल्कनी में है उसके पास जाओ मुझे अभी परेशान ना करो.." ये बोलकर उसने दरवाज़ा ललिता के मुँह पे दे मारा... ललिता धीरे धीरे बाल्कनी की तरफ बढ़ी और जैसी उसने रिचा को वहाँ पाया उसका दिमाग़ पूरी तरह परेशान हो चुका था........
भोपाल में शाम के कुच्छ 5:30 बज रहे थे नारायण आराम से सफेद कुर्ते पाजामे में बैठा
एफ टी वी देख रहा था.. सुधीर आज रात को अपने घर का कुच्छ काम ख़तम करके आएगा तो इसलिए वो अकेले चैन
से बैठा हुआ था.. फिर घर की घंटी बजी और नारायण ने चॅनेल चेंज कर दिया और बाहर देखने गया..
उसके सामने रश्मि एक गुलाबी सूट में खड़ी थी और उसके साथ वो लड़की थी जिसको आज शराब पीते हुए
पीयान ने पकड़ा था.. रश्मि ने बात शुरू करते हुए कहा "सर अंदर आके बात करें?"
नारायण ने दोनो को अंदर बुलाया और दोनो अंदर जाके सोफे पे बैठ गयी और नारायण उनके सामने वाले सोफे पे..
"हां बोलो रश्मि तुम यहाँ कैसे और इन मेडम को क्यूँ लाई हो" नारायण ने पूछा
रश्मि नारायण की आँखों में आँखें डालके बोली "सर ये वोई लड़की है जिसको पीयान आपके पास लाया था...
इसका नाम नवरीत कौर है.. सर उस पीयान ने आपसे झूठ बोला था रीत को फसाने के लिए"
नारायण रीत को देख कर बोला जोकि अपना सिर झुकाके बैठी थी "रश्मि तुम्हे ये कैसे पता??
रश्मि बोली "सर आपके जाने के बाद रीत ने मुझे सब कुच्छ बताया इसलिए मैं आपके पास आई हूँ"
नारायण ने कहा "रश्मि तुम हमारे ऑफीस की ही एक अच्छी करम्चारि हो और मैं तुम्हारी बात मान भी
लेता हूँ मगर वो ऐसा क्यूँ करेगा"
रश्मि बोली "सर ये बात ही कुच्छ ऐसी थी जो आपको नही बताई जा सकती थी मगर फिर भी आपको बताना पड़ेगा....
सर वो रीत को गंदी नज़रो से देखता था और कई बारी उसको उल्टा सीधा भी बोला है उसने और जब रीत ने शिकायत
करनी चाही तो वो पीयान सीधा उसको लेके आपके पास आ गया और आपको ये झूठी कहानी सुना दी"