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तब से अब तक और आगे

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इस बार मैंने सोचा अगर कुछ नही बोलूंगा तो फिर आंटी नाराज़ हो जाएगी सो बोल पड़ा

हाँ चोदुंगा |

तो चोदा तो दुल्हन को ही जाता है न ? अच्छा छोड़ो, चलो मेरे ब्लाउज के हुक पीछे से खोल दो बहुत गर्मी लग रही है .............और यह कहते हुए आंटी करवट ले के मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई |

मेरे तो मानो हाथ काँप रहे थे लेकिन मैंने हिम्मत कर के हुक खोल ही दिए |

खुल गए आंटी |

ब्रा भी खोल ही दो , तुम चूची से खेले बिना मानोगे थोड़ी न ? की रहने दूँ ?

नही नही गर्मी है खोल ही दीजिए |

अच्छा जी ! गर्मी के चलते खोल दूँ ? तुम्हे ज़रूरत नही है न मेरी चुचियों की ?

न्नन्नन्न नही न्न्न्न नही ये बात नहीं है |

तो क्या बात है ?

जरूरत तो है |

किस चीज़ की ज़रूरत है ? उसका कोई नाम तो होगा ?

ज़ीईईईईईईईई वही आपकी चुचियाँ |

ये हुई न बात | तो जल्दी से ब्रा भी खोलो |

अब मैं काफी कुछ खुल चुका था सो ब्रा खोलने में ज़्यादा हिचक नही हुई | मैंने झट से ब्रा के हुक खोल दिए| अब आंटी बोली अरे पप्पू ब्लाउज और ब्रा खोलने के लिए बोल रही हूँ केवल हुक खोलने के लिए नही ?

जी जी अभी खोलता हूँ | यह कहते हुए आंटी की बांहों में से ब्लाउज और ब्रा के स्ट्रैप्स निकालने लगा जिस दौरान मेरे हाथ आंटी की चुचियों से छू गए | नंगी चुचियों का स्पर्श मुझे उत्तेजना के चरम पर ले गया लेकिन मै संभलते हुए बोला सौरी आंटी |

किस लिए पप्पू ?

वो गलती से मेरा हाथ आपकी चूची पर लग गया था अभी |

आंटी बहुत जोर से हंसी और मेरे गाल पर एक प्यार भरी चपत लगाते हुए बोली हट पगले अरे चूची छूने पर सौरी बोलेगा तो चोदेगा कैसे ?

मैंने अपना सर झुका लिया | आंटी इतना खुलेआम चुदाई की बात कर रही थी की मेरी हालत खराब होने लगी थी | अब मुझे महसूस हो रहा था की किसी आंटी के बारे में सोच कर मुठ मार लेना तो बहुत आसान है लेकिन वही आंटी अगर सच में चोदने को बोले तो हालत खराब हो जाती है | मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही थी |

अब आंटी उठी और बोली अरे बुद्धू अब मै बताती हूँ की कपड़े कैसे खोले जाते हैं | कहते हुए आंटी उठी और बिस्तर पर बैठ गई | फिर मेरा हाथ पकड़ कर बोली चलो खड़े हो जाओ |

मै एक सम्मोहित व्यक्ति की तरह खड़ा हो गया लेकिन मेरी नज़रें आंटी की चुचियो पर जमी हुई थीं | दोनों गोल उभार और हर उभार के ठीक बीचो बीच ब्राउन रंग के निप्पल ! मै तो मानो मदहोश सा होने लगा | तभी मेरी तंद्रा टूटी जब मैंने आंटी का हाथ अपने पैंट के हुक पर महसूस किया | मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बोला मत खोली प्लीज़ | मुझे शरम आएगी | तो क्या मुझे पैंट पहन के चोदोगे?
 
न न नही नही; वो बात नही है |

तो क्या बात है ? आंटी थोड़ा डांटते हुए बोली और मेरी पैंट के हुक खोल दिए, फिर ज़िप खुली और देखते ही देखते पैंट मेरी टांगों से बाहर आ गई | अब आंटी घुटनों के बल खड़ी हुईं और मेरी शर्ट और बनियायन भी मेरे बदन से अलग हो गईं | आंटी फिर से बेड पर बैठ गई और उन्होंने मेरी चड्डी के ऊपर से ही मेरे लण्ड को पकड़ते हुए कहा तो यहाँ पर मेरे छोटे बालम का छोटू कैद है | आंटी ने ये कहते हुए चड्डी के ऊपर से ही मेरे लण्ड को एक चुम्मा दिया और बोली बस छोटू अब तेरे आज़ाद होने का टाइम आ गया है | मै अभी तुझे आज़ाद किए देती हूँ | यह कहते हुए आंटी ने चड्डी के ऊपर से ही लण्ड को मुट्ठी में पकड़ लिया और बोली देख पप्पू कैसे फड़फड़ा रहा है ये आज़ाद होने के लिए | कर दूँ न इसे आज़ाद ?...............और आंटी मेरी तरफ देखने लगी | अभी भी आंटी ने मेरे लण्ड को चड्डी के ऊपर से ही मुठी में पकड़ा हुआ था | अब मेरी हालत बिगड़ने लगी थी |

आपको जो अच्छा लगे वो कर दो आंटी आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह | मेरे मुह से आह इसलिए निकल गई क्योंकि आंटी ने मेरा लण्ड सुपाड़े वाली जगह पर मसल दिया था |

इतने में ही आह निकल गई ? अभी तो इसे बहुत कुछ सहना है पप्पू | वैसे लग तो बड़ा प्यारा रहा है | अब देख ही लेना चाहिए ..............और ये कहते हुए आंटी ने झट से मेरी चड्डी निचे सरका दी | इससे पहले की मैं कुछ समझ पाता मेरी चड्डी घुटनों के नीचे उतर चुकी थी और चड्डी के नीचे सरकते ही फनफनाता हुआ मेरा लण्ड जो १२० डिग्री का कोण बना के खड़ा था आंटी के गालों पर जा लगा | आंटी ने झट से चड्डी छोड़ी और दोनों हाथों से लण्ड पकड़ते हुए बोली अरे पप्पू !कौन कहता है की तू बच्चा है ? तू तो जिसको चोद दे वो तेरे बच्चे की माँ बन जाए | इतना बड़ा ? ये तो तेरे मोदी अंकल से भी बड़ा है !

मै विस्मोहित सा कभी आंटी के आश्चर्य भरे चेहरे को देख रहा था और कभी उने हाथों का मेरे लण्ड पर जो स्पर्श था वो महसूस कर मदहोश हुए जा रहा था की तभी एक और सीमा का अतिक्रमण हो गया |

इससे पहले की मै कुछ समझ पाता.........आंटी बोल पड़ी ऐसे प्यारे छोटू का तो भव्य स्वागत होना चाहिए और आंटी ने मेरा लण्ड मुझे बिना कुछ सोचने का मौक़ा दिए मुँह में ले लिया और सुपाड़े तक मुँह में ले के उसके चारों तरफ अपनी जीभ फिराने लगीं | उनके मुँह की गर्माहट, वो चिपचिपापन और जीभ की गुदगुदाहट , मेरे मुँह से आआआआआआआ आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह निकल गई | वो तो अच्छा था की सुपाड़े पर से चमड़ी नही हटी थी और न ही आंटी ने हटाई थी वरना शायद मैं झड़ ही जाता | मेरे जीवन का पहला और ऐसा एह्साह था ये जो बयान नही किया जा सकता | मेरे जीवन में पहली बार किसी औरत ने मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया था | यही मेरे लिए उत्तेजना का सबसे बड़ा कारण था | मैंने आंटी का सर अपने हाथों में पकड़ लिया और बोल पड़ा .....

आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आंटी मै गिर जाऊँगा मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा | प्लीज़ मेरी चड्डी पूरी उतार दीजिए और मुझे लेट जाने दीजिए |

बिलकुल नही | तुम्हे खड़ा रहना होगा यही तुम्हारी सज़ा है |

मैंने क्या किया है ? मै रुआंसा होकर बोला तो वो बोली...... जैसे मैंने तुम्हारी चड्डी खोली तो तुम्हारे छोटू को अपने मुँह में ले के प्यार किया वैसे ही तुम्हे भी ब्रा खोलने के बाद मेरी चुचियों को चूसना चाहिए था |

मै बोल पड़ा ......ये मेरा पहली बार है मुझे पता थोड़ी न था की ऐसा करते हैं |

हाय मेरे अनाड़ी बालम , आंटी बोली और फिर बोली.........झूठा | मै बोला झूठा क्यों?

तुम ब्ल्यू फिल्म नही देखते क्या ?

सर झुका के मै बोला देखता तो हूँ |

तो उसमे नही देखा ये ?

देखा है पर मुझे लगा ये ऐसे ही दिखाते होंगे |

और अब क्या लग रहा है ?

यही की सच में चूची को पीया जाता है |

हाँ पप्पू देखो पहले फोरप्ले करते हैं | फोरप्ले मतलब एक दूसरे के अंगों से खेल कर इतना जोश में आ जाना की चुदाई का मज़ा आ जाए |

मै एक अनपढ़ शिष्य की तरह आंटी से ज्ञान लेते हुए बोला - जी |

चलो अब मेरे सारे कपड़े उतारो |
 
अब मै लाज शर्म खो चुका था और खोता भी क्यों न ? जब आंटी मेरा लण्ड मुँह में ले के चूस चुकी थी तो अब बाकी ही क्या था ?

मैंने झट से उनकी साड़ी उतारी और पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया | अब आंटी लेट गई थी सो मै बोला अपने चूतड़ ऊठा लीजिए, पेटीकोट बाहर निकालना है | आंटी ने अपने चूतड़ उचका दिए और मैंने झट से पेटीकोट उतार दिया | उनकी बिना झांटो वाली चिकनी चुत मेरे सामने थी | इस बार मैं आंटी को शिकायत का कोई मौक़ा नही देना चाहता था सो मै झुका और झट से अपनी जीभ से चुत चाटने लगा |

वाआआआआआआआआऊऊऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ओह मेरे राजा और मेरा सर पकड़ कर दो चार बार चटवाने के बाद ही आंटी ने मुझे ऊपर ऊठा लिया | ये क्या पप्पू ?

वही जो आपने किया था मेरे साथ | कहते हुए मैं ऊपर आ गया |लेकिन मन ही मन खुश भी हुआ क्योंकि आंटी की चुत का स्वाद कुछ कसैला और नमकीन सा लग रहा था जो अच्छा तो नही था लेकिन मैंने सोचा की ये मेरा लण्ड चूस रही है तो इसकी चुत तो चाटनी ही पड़ेगी और फिर इकबाल भी तो कविता की बूर चाट रहा था | इसका मतलब बुर की चटाई और लण्ड की चुसाई होती ही है चुदाई से पहले | मैं अभी इन्ही ख्यालों में था की आंटी बोल पड़ी .........................

जियो मेरे राजा तुम्हे चुदक्कड़ बनने में ज्यादा टाइम नही लगेगा | जल्दी ही सब कुछ सीख जाओगे |

मै शर्मा गया | फिर आंटी ने मुझे अपनी चुचियों पर झुका दिया और बोली तुम्हारी ज़गह अभी यहाँ है मेरे बालम चुत तो मोदी को चाटने दो |

मैं बोला ऐसा क्यों आंटी ? केवल मोदी अंकल ही आपकी चुत क्यों चाटेंगे ? क्या मै ठीक से नहीं चाट रहा ?

नही बेटे ऐसी बात नही है | तुम्हारा मुँह लगते ही मैं स्वर्ग में पहुँच गई लेकिन अभी तुम इस काम के लिए नए हो और बूर का स्वाद कोई अच्छा तो होता नही है की कोई स्वाद लेने के लिए चुसे | बुर तो औरत को गर्म करने के लिए चुसी जाती है | इसी तरह लण्ड का स्वाद थोड़ी न अच्छा होता है लेकिन चुकी चुसवाने में मर्दों को बहुत मज़ा आता है इसलिए वो लण्ड चुसवाना चाहते हैं | और ये कहते हुए ...............

आंटी ने मेरा एक हाथ पकड़ा और उसे अपनी चुत के दाने पर लगा के बोली बेटा इसे धीरे धीरे दो ऊंगलियों से मसलो | मैंने मसलना शुरू किया | और हल्के बेटा | ये ज़गह बहुत सेंसिटिव होती है | मै चूची चूसते हुए उनके बूर के दाने को आहिस्ते आहिस्ते मसल रहा था | और कभी कभी मुँह में से चूची निकाल के उनसे बात भी कर रहा था |

इधर आंटी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया और सुपाड़े के ऊपर की चमड़ी को ऊपर नीचे कर धीरे धीरे मेरी मुठ मारने लगी | लेकिन मुझे अब लण्ड चुसवाने के आगे मुठ मरवाना फीका लग रहा था | लेकिन मै शर्म के कारण कुछ बोल नही पा रहा था | अब कैसे कहता की आंटी मेरा लण्ड चूस दो ?

मैं बोला बिलकुल ठीक कह रही हैं आंटी आप | अब तक मैं मुठ मारता था तो मुझे लगता था की इससे ज्यादा मज़ा कुछ नही हो सकता लेकिन थोड़ी देर पहले जब आपने मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया तो मुझे उससे भी ज्यादा मज़ा आया | और ये भी आप ठीक कह रही हैं की बूर चूसने में कोई अच्छा स्वाद नही आ रहा था हाँ आपको कैसा लगा ये तो आप ही बताएंगी |

मुझे ऐसा ही लगा जैसा तुम्हे मेरे से लंड चुसवाने में लगा | बेटे असली लण्ड चुसाई तो अभी बाकी है उसका मज़ा ले लोगे तो मुठ मारना ही भूल जाओगे |

क्या सच में आंटी ?

हाँ

फिर तो चुदाई में और भी ज़्यादा मज़ा आता होगा ?

चुदाई तो चुदाई होती ही है बेटा | उसका तो कहना ही क्या ?

जी ........कहते हुए...................

मै एक अच्छे शागिर्द की तरह आंटी की चुचियों को बदल बदल के चूसते रहा और उनकी चुत के भगानाशे को हौले हौले सहलाता रहा | अभी पाँच मिनट भी नही बीते होंगे की आंटी की सिस्कारियां शुरू हो गईं | आआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईईईईइस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स हाँ हाँ ऐसे ही पप्पू थोड़ा और तेज़ी से रगड़ो आआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊउईईईईईईईईई हां हां ऐसे ही और न जाने क्या क्या | और थोड़ी देर के बाद ही मेरे हाथों में कुछ गीलापन महसूस हुआ | और आंटी थोड़ी सी सुस्त पड़ी और मेरे हाथ को पकड़ कर रोक दिया | मैं अचम्भित सा आंटी को देखता रहा और आंटी आँखें बंद किए हुए लगभग पाँच मिनट यूँ ही पड़ी रही | फिर उन्होंने आँखें खोलीं और मुझे अपनी गोद में ले के अपने से चिपकाते हुए मुझे एक चुम्मा लिया और बोलीं थैंक्यू बेटा |

किस लिए आंटी ?

मुझे इतना ज़बरदस्त ओर्गास्म देने के लिए | मै भौंचक्का सा आंटी को देखते हुए बोला की लेकिन मैंने तो अभी आपके साथ कुछ किया भी नही है ?

अरे बुद्धू जैसे तुम लडके मुठ मारते हो वैसे ही हम औरतें बूर का दाना रगडती हैं तो हमारा भी पानी निकल जाता है | तुम मेरा दाना ही तो रगड़ रहे थे न ?

हाँ वो तो है |

चलो अब तुम्हारी बारी | मै भी तुम्हारा पानी निकाल दूँ |

अब मै शशंकित हो उठा की आंटी कहीं अपनी तरह ही मेरा मुठ मार के मेरा पानी निकाल देंगी और चुदवाएँगी नही | मै इधर बूर चोदने के लिए बेचैन था सो हिम्मत कर के आंटी से पूछ ही लिया तो क्या आप मुठ मार के मेरा पानी निकालेंगी ?

हाँ एक तरह से मुठ ही कहो |

एक तरह से मतलब ?

मतलब की तुम तो अपने हाथ से करते होगे न ?

जी |
 
मैं हाथ और मुँह दोनों से करुँगी |

तो क्या आप बुर नहीं चोदने देंगी ?

ओह तो ये बात है | इसलिए मेरा पप्पू उदास है क्या ?

जी |

अरे मेरे बालम आज तुम्हारे लण्ड का मेरी बूर से मिलन तो होना तय है मेरे राजा | अभी तो मै तुम्हे तैयार कर रही हूँ क्योंकि ये तुम्हारा पहली बार है न ?

जी |

अगर अभी बूर में लण्ड डलवा लिया मैंने तो तुम दस बीस धक्कों में ही झड़. जाओगे और लम्बी चुदाई का मज़ा नही ले पाओगे और मैं भी प्यासी रह जाऊँगी |

तो बाद में लम्बी चुदाई कैसे कर पाऊँगा ? ऐसा क्या करेंगी आप मेरे साथ ?

मैं अपने मुँह में एक बार तुम्हारा पानी निकाल दूँगी जिससे तुम जब उसके बाद मेरी बुर में अपना लण्ड डालोगे तो ज़्यादा देर चोदोगे, जल्दी झड़ोगे नही |

अच्छा अच्छा ये भी ठीक है | ये बात मुझे सही लगी क्योंकि मैंने ये आजमाया था की एक बार मुठ मार लेने के बाद दूसरी बार मुठ मारने पर पानी देर से छुटता था | लेकिन आप मेरा पानी मुँह में निकालेंगी तो क्या ये ठीक होगा |

अरे यही तो अमृत है बुद्धू | तू मेरे मुँह में पानी निकालने से हिचकिचाना मत |

जी | लेकिन आप ही बोल रही थी न की इसका स्वाद अच्छा नही होता फिर भी आप मुँह में लेंगी ?

मुँह में लूंगी ही नही उसे पी जाऊँगी |

छी ! वो भी कोई पीने वाली चीज़ है ?

हाँ है बेटा अभी टाइम नही है उसके बारे में बात करने का | कभी बाद में आराम से समझा दूँगी तुम्हे अभी तो तुम लण्ड चुसाई का मज़ा लो और सारा लण्ड का रस मुझे पीला दो |

ये लो आंटी जैसी आपकी मर्जी .......कहते हुए मैंने लण्ड आंटी के मुँह के पास लगा दिया |

आंटी ने लण्ड हाथ में पकड़ा और बोली ..........ऐसे नही चल अब लेट जा |

मैं लेट गया और आंटी मेरे दोनों टांगों के बीच में आ के पेट के बल लेट गई और उन्होंने मेरे लण्ड को एक हाथ में पकड़ लिया और सीधा मुँह में ले लिया | दो तीन चुस्से मारे | वो सुपाड़े तक लण्ड मुँह में लेती और मुँह से अंदर खीचते हुए अपना सर पीछे की तरफ करती जिससे ऐसा लगता मानो उनका मुँह वैक्यूम पम्प की तरह मेरे लण्ड को खींचने की कोशिश कर रहा है | मेरे आनंद की कोई सीमा नही थी आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आंटी बहुत मज़ा आ रहा है | ऐसे हीं टाईट टाईट चुसिए हाँ हाँ ऐसे ही | ऐसा मज़ा आज तक नही मिला था | आप बहुत अच्छी हैं आंटी | और जोर से आंटी हाँ हाँ | तभी आंटी ने फिर मेरे लण्ड को मुँह में लिया लेकिन इस बार चुस्सा नही लगाया और सुपाड़े के चारों तरफ अपनी जीभ घुमाने लगी | मेरा मज़ा कम हो गया क्योंकि सुपाड़े पर से चमड़ी अभी भी हटी नही थी | चुस्सा तो वैक्यूम की तरह होता था इसलिए उसमे मज़ा आ रहा था | जब दो मिनट बीत गए और आंटी ने फिर चुस्सा मारना शुरू नहीं किया तो मै बोला आंटी पहले की तरह कीजिए न | उसमे बहुत मज़ा आ रहा था |

मेरे राजा तुम चिंता मत करो आज तुम्हे स्वर्ग की सैर करवाऊँगी | ये लो संभालो कितना मज़ा संभाल सकते हो | यह कहते हुए आंटी ने सुपाड़े पर से चमड़ी नीचे खिसका दी | अब जीभ सीधा सुपाड़े के सम्पर्क में आ गई | और जब जीभ का घर्षण सुपाड़े पर पड़ा तो मेरी मज़े के कारण चीख निकल गई | आःह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ये कौन सा स्टाईल है आंटी ? यही सबसे अच्छा है, हाँ हाँ पहले वाले से भी अच्छा | हाँ हाँ लो चूस लो आंटी और मैंने जोश में आ के आंटी के मुँह में एक धक्का मार दिया | लेकिन आंटी का ये रोज का काम था और उन्हें ये पता था की ऐसा हो सकता है इसलिए उन्होंने मेरे लण्ड को हाथ से भी पकड़ा हुआ था | आंटी ने कनखियों से मुझे देखा लेकिन लण्ड चूसना नही छोड़ा | आंटी के मुँह से फच फच फचर फचर फचा फच की आवाज़ आ रही थी और वो कई बार मेरे धक्कों के कारण गूं गूं भी कर रही थीं | पाँच मिनट बाद आंटी ने अब हाथ से भी मुठ मारनी शुरू कर दी और मुँह में भी लण्ड डाल के चुसाई ज़ारी रक्खी | अब वो बहुत तेज़ी से मेरी मुठ मारने लगी और अपना मुँह भी आगे पीछे करते हुए तेज़ी से लण्ड चूसने लगी |
 
अब तो मैं अपने होशो हवास में नहीं था | मेरे लण्ड का सुपाड़ा फुल के लाल हो गया था और आंटी के मुँह के थूक और लार के कारण लण्ड चमकने भी लगा था | अब मेरे मुँह से जोर जोर से आवाजें निकलने लगी थीं और मै अपने पर कोई कंट्रोल नही कर पा रहा था | अभी जोर से चुसाई शुरू हुए तीन चार मिनट भी नही हुए थे की मुझे लगा की मेरे अंडकोषों (टट्टों ) में से कोई जोर से कुछ खींच रहा हो |

न चाहते हुए भी अब मै आंटी के मुँह में ही धक्के मार कर उनका मुँह चोदने लगा और बोल पड़ा आआआआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आंटी ले लो चूस लो मेरा रस | मेरा निकलने वाला है | अब मेरा निकलेगा आंटी और तभी आंटी ने झट से लण्ड को मुँह से बाहर निकाला और लण्ड का सुपाड़ा दो ऊंगलियों के बीच में पकड़ कर कस के दबा दिया | मेरे मुँह से निकल पड़ा न्न्न्न्न्न्न्हीईईईईईइ नही नही ये क्या किया आंटी आपने ? ओह मेरा निकलने क्यों नही दिया ?

दरसल आंटी के सुपाड़ा मसलने के कारण जो वीर्य बाहर निकलने वाला था वो थम गया और मैं उत्तेजना के कारण छटपटा उठा | मै किसी पर कटे पंछी की तरह छटपटा रहा था | अभी मैं कुछ समझ पाता की आंटी ने फिर से लण्ड को मुँह में ले लिया और उसी शिद्दत से लण्ड चूसने लगी और हाथ से मुठ मारने लगी | फिर वही हुआ और पाँच मिनट बितते बितते मेरी हालत पतली हो गई | मै झड़ने को बेचैन हो गया तभी आंटी ने वही पुरानी कहानी दोहरा दी और लण्ड का सुपाड़ा मसल कर मेरा झड़ना रोक दिया | अब मैं झड़ने के लिए पागल हुआ जा रहा था इस बार आंटी ने फिर वही किया की मेरा जोश कुछ कम हुआ तभी मेरा लण्ड फिर मुँह में ले लिया और फिर उसे ज़ोरों से चूसने लगी | इस बार मै सतर्क था जैसे ही थोड़ा सा महसूस हुआ की अब मै झड़ने के नजदीक पहुँचने वाला हूँ तो मैंने आंटी का सर पकड़ लिया और लगा जोर जोर से उनके मुँह की चुदाई करने | मेरा आधा लण्ड ही उनके मुँह में जा पा रहा था |

आंटी मेरे हाथों से अपना सर छुडाने की पूरी कोशिश कर रही थी | उन्होंने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और खींचने ही वाली थी की तभी खिंचाव के साथ मेरे अंडकोषों से रस की धार आंटी के मुँह में छूट गई अब आंटी का हाथ ढीला पड़ गया और एक पिचकारी के बाद दूसरी | इस तरह मेरे लण्ड ने आंटी के मुँह में चार पाँच पिचकारियाँ छोडीं और आंटी ने पूरी कोशिश की कि उसे बाहर न गिरने दें और गटक जाएँ | लेकिन फिर भी कुछ वीर्य उनके मुँह के कोनों से टपक कर बाहर आ गया और मै आंटी का सर हाथ में पकडे निढाल सा पड़ गया | आंटी भी यूं ही पड़ी रही |

कुछ देर के बाद मुझे लगा कि आंटी मेरे सिकुड़े हुए लण्ड को फिर से चूसने लगीं तो मैने आँख खोली और बोला अरे आंटी मै इसे धो देता हूँ फिर चूस लीजिएगा |

धत्त पगले | जिस लण्ड का रस पी गई उस लण्ड को साफ़ क्या करना ? इसे मुँह से ही चूस के साफ़ कर दूंगी और वो फिर से लण्ड चूसने लगीं |

नतीजतन लण्ड साफ़ तो हो गया लेकिन फिर से तनतना गया | आंटी हैरानी से देख रही थी और बोली यही अंतर है नए और पुराने सामान में |

मै समझा नही आंटी ?

अरे बेटा तुम्हारे अंकल एक बार चोदने के बाद कम से कम एक घंटा लेते हैं दुबारा तैयार होने में और इधर तुम्हारा देखो ; अभी लण्ड की सफाई होते होते ही तैयार हो गया |

आंटी आपने मज़ा तो बहुत दिया लेकिन जान निकाल दी |

आंटी जोर से हंसी और बोली क्यों; क्या हुआ पप्पू ?

आंटी जब भी मेरा पानी निकलने वाला होता था तो आप लण्ड मुँह से बाहर कर के दबा देती थी और मुझे झड़ने से रोक देती थी | मेरी तो आपने हालत पतली कर दी थी |

हा हा हा हा आंटी हंसी और बोली ...और तुमने मेरी जान नही निकाल दी ?

मैंने क्या किया ?

मेरा सर पकड़ कर चार ईंच लण्ड मेरे मुँह में अंदर तक घुसा दिया जो जा के मेरे गर्दन में फँस गया | मुझसे तो सांस भी नही ली जा रही थी |

मै बोला आप ऐसे ही बोल रही हैं | मोदी अंकल का मुझसे बड़ा होगा और वो भी तो आपके अंदर ईसी तरह डालते होंगे?

नही रे मैंने कहा नही तुझसे कि मोदी का तेरे से छोटा है?

आप मजाक कर रही हैं | वो मुझसे इतने बड़े हैं तो उनका छोटा कैसे हो सकता है |

धत्त बुद्धू | उम्र से लण्ड के बड़े या छोटे होने का कोई संबंध नही है | हाँ एक उम्र तक बच्चों का लण्ड बड़ा होता है उसके बाद उसका साइज़ वही रहता है |

अभी तेरा साईज क्या है ?

मुझे पता नही |

अच्छा रुक .........और आंटी एक स्केल ले आई , लण्ड को मुँह में ले के पन्द्रह बीस चुस्से मारे और लण्ड टनटना गया |

फिर उन्होंने नापा और बोली देख तेरा लगभग आठ ईंच है| आठ ईंच तो किसी किसी मर्द का होता है | हर औरत चाहती है कि उसे ऐसा ही लण्ड चोदे |\

मोदी अंकल का कितना बड़ा है ?

साढ़े छे ईंच |

आप झूठ बोल रही हैं |
 
मै क्यों झूठ बोलूंगी | चल कभी दिखा दूंगी तुझे | अच्छा चलिए मान लिया कि उनका साढ़े छे इंच का भी है तो भी लण्ड तो वो भी मुँह में अंदर डाल के मेरी तरह धक्का मारते ही होंगे ?

इस बार आंटी ने मेरे गाल पकड़ के खींच लिए और बोली नहीं पप्पू तेरे मोदी अंकल तरस जाते हैं कि मै उनका लण्ड चूसूं लेकिन मैंने नियम बना दिया है कि केवल संडे को और वो भी बस पाँच मिनट चूसूंगी |

ऐसा क्यों आंटी ?

इसलिए कि वो लण्ड इतना मजेदार नही है जितना तेरा ये आठ ईंच का डंडा है...........और आंटी ने मेरे लण्ड को पकड़ कर हिला दिया |

अब मुझे अपनी मर्दानगी पर नाज़ होने लगा था | मै बोला आंटी चुदाई कब करवाएंगी?

अरे दस मिनट आराम कर लेने दे तेरे कडक लण्ड ने थका दिया है |

जी अच्छा मैने मन मार कर कहा | आंटी ने अपने चुचे मेरे मुँह में डाल दिए और पहले कि तरह ही मेरा हाथ अपनी बूर पर लगा दिया | इस बार मैंने अपने आप उनके बुर के दाने तो पकड़ लिया और मसलने लगा |

शाबाश बेटा तू बहुत जल्दी चुदाई के सारे गुण सीख जाएगा | चल गरम कर दे मुझे |

कुछ ही देर बीतने के बाद आंटी बोली अब आ जा मेरे शेर | निकाल अपनी तलवार और घुसेड मेरी म्यान में |

हाँ आंटी देखो न मेरा लण्ड आपकी बूर में जाने के लिए कैसे मचल रहा है |

अब आंटी सीधी होकर पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनो टांगें फैला दीं | फिर मुझसे बोली ....पप्पू बेटा वो तकिया मेरे चुत्तडों के नीचे लगा दे | मैंने तकिया लिया तो आंटी ने अपनी कमर उचका दी मैंने आंटी के कहे अनुसार तकिया उनकी कमर के नीचे डाल दिया | फिर मैंने पूछा ........ऐसा क्यों किया आंटी ?

इसलिए कि बूर ऊपर उठ जाए और तेरा लण्ड आराम से मेरी बूर में घुस जाए |

जी समझ गया |

पप्पू अब तू मेरी दोनों टांगों के बीच आ जा और मेरी दोनों जांघों को अपनी दोनों जांघों पर रख ले |

मैंने ऐसा ही किया अब मेरा लण्ड अपने आप आंटी कि बूर पर ठोकर मार रहा था |

आंटी बोली ...अब जो बता रही हूँ वो बहुत ध्यान से सुन |

जी

देख पप्पू लण्ड जब चुदाई के समय पहली बार बूर में घुसाया जाता है तो उस से पहले उसे बुर पर ऊपर नीचे कर के रगड़ना चाहिए | इससे भाग्नाशे पर रगड़ पड़ती है और असर ये होता है की बूर अपने रस से गीली हो जाती है जिससे लण्ड आराम से बूर में सरक जाता है| हाँ एक और बहुत ज़रुरी बात |

क्या आंटी कहते हुए मैंने एक हाथ से लण्ड पकड़ा और उसे बूर पर ऊपर नीचे कर के रगड़ने लगा |

शाबाश बेटा ठीक कर रहा है तू | ऐसे ही रगड़ा जाता है | सुन जब बूर गीली हो जाए तो लण्ड को बूर के छेद पर सेट करके धीरे से हल्का दबाव डालना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए की सुपाड़े से ज्यादा लण्ड बूर में न घुसे |

ऐसा क्यों आंटी ?

क्योंकि बूर किसी एलास्टिक की तरह होती है | जितनी बड़ी चीज़ उसमे घुसती है वो उतना ही फ़ैल जाती है | चुदाई के शुरू होने के समय बूर का मुँह बंद रहता है जो धीरे धीरे लण्ड के धक्कों से खुल जाता है | एक बार धीरे धीरे करके जब पूरा लण्ड घुस जाए तो हल्के हल्के धक्के लगाने चाहिए |

जिस मर्द का लण्ड छोटा हो वो तेज धक्का भी मार दे तो कोई बात नही लेकिन तेरे जैसा जिसका आठ ईंच का है वो अगर जोर से धक्का मार के लण्ड बूर में पेल दे तो औरत की तो फट जाएगी | बिचारी को बहुत दर्द होगा | और यही धीरे धीरे बूर का छेद लण्ड से खोलते हुए लण्ड बूर में पेलोगे तो औरत को भी मज़ा मिलेगा और तुम्हे भी | पूरा लण्ड घुसाने के बाद कुछ देर धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर कर के चुदाई करो और उसके बाद फिर जम के हचा हच मार के धक्के चोदो तो बहुत मज़ा आएगा | समझ गए न |

जी |

देखो जोश में आकर भी करार घक्का मत मारना | यही वो टाइम है जब तुम्हे अपने आप को कंट्रोल करना पड़ेगा |

जी समझ गया अब तो बूर भी गीली हो गई है | घुसाऊँ?

ठीक है आओ और आंटी ने अपनी दो उँगलियों से अपनी बूर की दोनों फाँकों को फैला दिया जिससे उनकी बुर का छेद साफ साफ़ दिखने लगा | दिख गया न छेद पप्पू?

हाँ आंटी और मैंने लण्ड का सुपाड़ा छेद के ऊपर रख के थोड़ा सा दबाया की वो फिसले नही और उसी ज़गह पर सेट रहे |

यही है न आंटी ?

हाँ बेटा अब धीरे से दबाओ | देखो धीरे से दबाना |

जी और मेने अपनी कमर को आगे की तरफ दबाया | लण्ड का सुपाड़ा फच्च की आवाज़ के साथ बूर में घुस गया और मुझे लगा जैसे मेरे लण्ड का सुपाड़ा किसी गर्म तेल के अंदर घुस गया हो और आंटी की बूर ने उसे ज़ोरों से जकड रखा था |

ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई माआआआआआआआ ! आंटी के मुँह से निकला |

क्या हुआ आंटी ?

कुछ नही बेटा मुझे इतने बड़े लण्ड की आदत नही है | तेरा मोटा भी ज्यादा है न मोदी से | बूर लण्ड को ऐडजस्ट करने में थोड़ा टाइम लेगी | तू चिंता मत कर ऐसे ही धीरे धीरे घुसाते जा |

जी बहुत अच्छा |

मैंने लण्ड को थोड़ा बाहर खींचा | आधा सुपाड़ा केवल बूर के अंदर था | इस बार थोड़ा जोर से दबाया तो सुपाड़े के साथ आधा ईंच और लण्ड बूर में दाखिल हो गया |

आआह्ह आंटी के मुँह से निकला | तेरा कुछ ज्यादा ही मोटा है रे | चल ठीक है दे एक और हल्का सा धक्का |
 
मैंने लण्ड फिर बाहर खींचा और सोचा की इस तरह तो पूरा घुसाने में काफी टाइम जाएगा और मैं धकापेल चुदाई करने के लिए बेचैन था सो मैंने एक ज़ोरदार धक्का चूत में रसीद कर दिया और आधे से ज़्यादा लण्ड चूत में दाखिल हो गया |

हाआय्य्य्य मार डाला रे | कहा था न की धीरे से मारना | अरे अनाड़ी ने जान ले ली मरी अम्मा | और हाथ नीचे ले जा के आंटी ने लण्ड को उस ज़गह से पकड़ लिया जहां वो बूर से मिल रहा था | हाय राम अभी भी इतना बाकी है ? तेरा लण्ड है या मुसल? कोई कुँवारी तेरे हत्थे चढ़ गई तो वो तो बिचारी चलने फिरने लायक भी नही रहेगी ? अरे बेटा जोश में होश मत गँवा | धीरे धीरे मार मेरे लल्ला | मै कोई भागी थोड़ी न जा रही हूँ ? तेरे नीचे ही तो लेटी हूँ बूर फैला के |

जी जी वो जोश में कंट्रोल नही हो पाया | अब ध्यान रक्खूंगा |

बहुत अच्छा | सुन लगभग आधा तो घुस ही चुका है ?

जी | उससे थोड़ा ज्यादा ही चला गया है अंदर |

बहुत अच्छा | अब एक काम कर की इतने लण्ड को ही धीरे धीरे अंदर बाहर कर के २० -२५ धक्के मार इससे बूर ढीली हो जाएगी और लण्ड आराम से सरकने लगेगा |

जी जैसा आप कहें और मैंने लण्ड अंदर बाहर करना शुरू किया | लण्ड शुरू में तो खिंचाव के साथ बहुत टाईट घिस के अंदर बाहर हो रहा था लेकिन कुछ धक्कों के बाद ही आराम से सरकने लगा और बूर ने भी पानी छोड़ दिया था और गीली हो गई थी जिसके कारण और आराम से लण्ड बूर में सरक रहा था |फच फच फचाक फचाक फचर फचर की आवाज लण्ड और बूर के घर्षण के कारण निकलने लगी थी जो माहौल को और मादक बना रही थी |

हाँ हाँ पप्पू ऐसे ही | तेरा तो बहुत घिस के रगड़ मार रहा है रे | तेरे अंकल का इतना रगड़ नही मारता | उनका तो इतना टाईट भी नही होता | ऐसे ही मारते जा मेरे बच्चे | आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आज सालों बाद मेरी बूर की अच्छी तरह घिसाई हो रही है|

मेरे छोटे बालम | चोद ले अपनी इस दुल्हन को | आज कोई कसर मत छोड़ना मेरे राजा ................और भी न जाने क्या क्या |

इधर मै बहुत कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था क्योंकि आंटी के ऊपर मैं चढ़ा हुआ धक्के लगा रहा था और इस तरह का मज़ा जिंदगी में मुझे पहली बार मिल रहा था सो मै उसमे पूरी तरह डूब चुका था | हर धक्के के साथ मेरे मुँह से हंह हंह हाँ हाँ उंह उंह आं आंह आंह हं हं ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हं ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हं आदि निकल रहा था | अब मै पुरे जोश में था लेकिन आंटी के कहने के अनुसार हल्के धक्के ही मार रहा था और लण्ड भी बस आधे से कुछ ज्यादा बूर में घुसा हुआ था | मै अब पूरा लण्ड बूर में पेलने को बेचैन था लेकिन डर भी रहा था की आंटी ने मना किया है | मैंने देखा की आंटी ने आँखें बंद की हैं और बड़बड़ाते हुए लण्ड के धक्कों का मज़ा ले रही हैं तो मैंने एक चांस लेने की सोची इस बार भी मैंने बहुत प्यार से धीरे से लण्ड को बूर के बाहर खींचा | मेरा केवल आधा सुपाड़ा ही बूर के अंदर रह गया था आंटी को जब खालीपन महसूस हुआ तो आँख बंद किए हुए ही बोली..........

डाल दे अंदर बेटे | पूरा बाहर क्यों निकाल लिया |

जी | कहते हुए मैंने एक ज़ोरदार धक्का लण्ड का बूर पर रसीद कर दिया | इस बार लण्ड बूर को चीरता हुआ बूर की जड़ तक जाकर बैठा था | इधर मुझे भी धक्का लगाने की बाद ऐसा लगा जैसे आधे से कुछ ज़्यादा लण्ड बूर में घुसने के बाद मेरे लण्ड के सुपाड़े को किसी चीज़ ने अंदर जाने से रोका हो और तेज धक्के के कारण सुपाड़ा उसे रगडता हुआ अंदर घुसा हो | उस समय जो मज़ा आया उसका बयान शब्दों में मुश्किल है उसे तो केवल महसूस ही किया जा सकता है | मैं फिर से लण्ड खींच के एक और ऐसा ही धक्का लगाने वाला था की फिर वही आनंद लूटूँ की ...............
 
उधर अचानक हुए इस हमले (धक्के) के लिए शायद मोदी आंटी तैयार नही थीं सो मोदी आंटी चीख पड़ी ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआआआआआआआर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र डाला रे ज़ालिम और उन्होंने अपनी कमर साइड में खीच ली | मुझे नही मालुम था की ऐसा हो सकता है | उनके ऐसा करने से मेरा लण्ड उनकी बूर के बाहर आ गया था | वो उठ बैठीं और बूर पर हाथ रखते हुए बोली अरे बाप रे बाप तेरा लण्ड है की मुसल मेरी तो सील तोड़ दी तुने और वो भी बिना मुझे बताए ? बदमाश |

मैं भौंचक्का सा आंटी को देख रहा था........ आपने ही तो कहा था की डाल दे |

हाँ हाँ कहा था लेकिन तेरा मेरी बच्चेदानी के मुँह को पूरा खोल के उसके भी अंदर चला जाएगा मुझे ये थोड़ी न पता था | और मेरे अनाड़ी बालम सील तो तुने तोड़ी ही है वो कैसे मै तुझे बाद में बताऊँगी लेकिन इस बार अनाड़ीपना मत करना और जैसे जैसे कहूँ वैसे ही करना |

ठीक है आंटी लेकिन ये तो बता दीजिए न की मैंने कैसे सेल तोड़ी | प्लीईईईइज़ |

अच्छा बाबा लेकिन पहले फिर से लण्ड बूर में घुसाने वाली पोजीसन में आ.....कहते हुए आंटी ने फिर से तकिया अपनी कमर के नीचे लगाया और अपनी टांगें फैला के लेट गई | मैं आंटी का मतलब समझ गया और उनकी टांगो के बीच आ के उनकी जांघों को अपनी जांघों पर रख के लण्ड के सुपाड़े से आंटी की बूर की दरार को घिसने लगा | अब हम दोनों को फिर से मज़ा मिलना शुरू हो गया | आंटी बोली देख या तो पहले चुदाई कर ले फिर सील तोड़ने वाली बात समझ लेना या फिर एकदम धीरे धीरे हल्के हल्के धक्के मारेगा तभी मै तुझे बता सकती हूँ की कैसे तुने मेरी सील तोड़ी है अभी | मेरे लिए बहुत मुश्किल घड़ी थी | इधर मैं ज़बरदस्त धक्के लगा के चुदाई का पूरा मज़ा भी लेना चाहता था और उधर ये भी जानने को उत्सुक था की चूदी हुई बूर की सील आज अभी मेरी चुदाई से कैसे टूटी ? खैर मैंने सोचा की चोदने को तो मिल ही रहा है और वैसे कहा जाए तो बात करते हुए धीरे धीरे चोदने का अपना ही मज़ा है | मै यही सब सोच रहा था की आंटी बोली अरे रगड़ता ही रहेगा या घुसाएगा भी ?

जी अभी घुसाता हूँ कहते हुए मैंने लण्ड के सुपाड़े को बूर के छेद पर सेट किया और धक्का मारने की पोजीसन बना ही रहा था की आंटी ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया | मै बोला ये क्या कर रही हैं ? मेरी कमर पकड़ लेंगी तो धक्का कैसे मारूंगा ? तू झटके से मार देता है इसलिए पकड़ा है | ध्यान से सुन ...केवल पहले की तरह आधा घुसा के ही चोद तभी बता पाऊँगी की सील कैसे टूटी मेरी तेरी चुदाई से वरना नही बता पाऊँगी | समझा?

जी समझ गया | मन ही मन मै अपनी मर्दानगी पर खुश हो रहा था की चलो अगर आंटी सही बोल रही है तो अपनी पहली चुदाई में ही मैंने एक सील तोड़ी और वो भी चूदी हुई एक्सपीरिएंसड आंटी की |

तो क्या मोदी अंकल पूरा लण्ड घुसा के नही चोदते आपको ? उनका भी तो आपकी बच्चेदानी के अंदर जाता होगा ? यह कहते हुए मैंने लण्ड का एक हल्का धक्का बूर के अंदर लगा दिया| फ्ह्च्च्च्च की आवाज़ के साथ लण्ड बूर के अंदर दाखिल हो गया |

आंटी थोड़ा सा उचकी और फिर बोली .......हाँ बेटे ऐसे ही धीरे से मारते हुए अब चोदना यानी लण्ड अंदर बाहर करना शुरु करो | बस ध्यान यही रखना की जितना घुसा हुआ है उस से ज्यादा अंदर न घुसने पाए |
 
आंटी थोड़ा सा उचकी और फिर बोली .......हाँ बेटे ऐसे ही धीरे से मारते हुए अब चोदना यानी लण्ड अंदर बाहर करना शुरु करो | बस ध्यान यही रखना की जितना घुसा हुआ है उस से ज्यादा अंदर न घुसने पाए |

जी इस बार ख्याल रक्खूँगा ....और यह कहते हुए मैंने हल्के हल्के धक्के लगाते हुए आंटी की चुदाई शुरू कर दी | आंटी भी कमर उचका उचका के मेरा साथ दे रही थी | जब मै लण्ड का धक्का बूर के अंदर मारता तो आंटी अपनी कमर ऊपर उछाल देती जिससे मेरा लण्ड और रगड़ खाते हुए बूर में घुसता और जब मैं लण्ड बाहर खींचता तो आंटी अपनी कमर जो उनकी कमर के नीचे तकिया था उस पर पटक देती जिससे लण्ड थोड़ा तेज़ी से और घिसते हुए बूर से बाहर निकलता | हम दोनों की सिस्कारियां और लण्ड बूर के घर्षण से होने वाली फच फच फचाक फ्च्चाक की आवाजों से कमरा गूंज रहा था जो वातावरण को और मादक बना रहा था |

चुदाई करते हुए दो मिनट बीत गए और जब मोदी आंटी ने कोई बात शुरू नही की तो मै ही बोल पड़ा .......... आप तो रोज मोदी अंकल से चुदवाती हैं तो मैंने कैसे आपकी सील तोड़ी ? वो तो कब की टूटी हुई है |

तो तू बिना समझे हुए नही मानेगा की तुने कैसे मेरी सील तोड़ी?

प्लीज़ बताईए न | ठीक है तो सुन लेकिन ध्यान रखना, इस बार करारा धक्का मारा तो चुदवाऊँगी भी नही और कुछ बताऊँगी भी नही |

नही नही ऐसा नही होगा | वो मै जोश में अपने को कंट्रोल नही कर पाया था | अब बताइए न की आपकी सील तो मोदी अंकल ने तोड़ी होगी तो मैंने वो भी अभी कैसे ?

नही रे | बताया तो तुझे की मोदी का तेरे से छोटा है वो मुश्किल से बच्चेदानी के मुँह तक भी नही पहुंचता | तो क्या उनसे आपकी सील नही टूटी थी ?

तब मुझसे कैसे टूटी ? ये क्या कह रही हैं आप ? मेरी समझ में कुछ नही आ रहा और मैंने ये कहते हुए छोटे छोटे ही लेकिन तेज धक्के आंटी की बूर में देने लगा | अब आंटी जवाब देने के बदले आं आं आं आं आं हं हं हंह ह हह हह ऊईईईईईईईईई आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाँ हाँ ऐसे ही हाँ रे ले ले मेरी बूर के मज़े |

मार ले फ्री की बूर बेटे | अब मै भी खुल चुका था सो बोल पड़ा ले लो आंटी नया कोरा लण्ड| फ्री में ऐसा कहाँ मिलेगा मेरी रानी | ये हुई न बात | इस बार तुने मर्दों वाला जवाब दिया है और यह कहते हुए आंटी ने अपनी कमर उछल दी | मैं आंटी का मतलब समझ गया और मैंने फिर उसी तरह हल्के लेकिन तेज धक्के मारने लगा हाँ रे तू आज से पहले क्यों नही मिला | कहाँ छुपा के रक्खा था इतना मस्त लण्ड आआह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा आज बजा दे मेरी बूर का बाजा | ले मेरी रानी ले ले मेरा लण्ड | मोदी नही दे पाते मन भर तो मेरा ले ले मेरी जान | हाँ रे मोदी तेरे सामने बहुत फीका है | उसकी बात मत कर अभी | अभी तो अपने कड़क लण्ड से मेरी बूर की कुटाई किए जा मेरे रज्जा मेरे बालम मेरी बूर के मालिक|

तो बजवा ले बाजा अपनी बूर का मेरे लण्ड से मेरी रानी | बहुत मस्त है तेरी बूर |

आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या कसा कसा जा रहा है मेरा लण्ड तेरी बूर में मेरी जान | आज मोदी की सारी कमी मुझसे पूरी कर ले मेरी जान | चुदवा ले जी भर के | और अब मेरे सब्र का बाँध टूट गया | मैं बिना कुछ बोले आंटी के गालों को चुमते हुए कभी होठों को चूसते हुए पूरी तेज रफ्तार से आधे लण्ड से ही धक्के ठोकने लगा | मेरे दोनों हाथ आंटी की चूचियों को मसल रहे थे | आंटी मेरे हर घक्के पर उछल उछल जाती थी तभी मुझे लगा की आंटी की बूर कुछ सिकुड़ने लगी और मेरे लण्ड को मानो बहुत ज़ोरों से जकड लिया | ये एक और नया अहसास था मेरे लिए जिसका मज़ा अब तक मिले मज़े से काफी अलग था | मै अब और जोश में आ गया और लगा धकापेल चुदाई करने | अब हम दोनों काफी तेज तेज बोल या यूँ कहें की बड़बड़ा रहे थे | मुझे डर लगने लगा की हमारी आवाज़ बाहर न जा रही हो लेकिन चुदाई के जोश के आगे उसकी परवाह न मोदी आंटी को थी न मुझे |

तभी मुझे लगा की मेरे लण्ड पर गर्म तेल की फुहार छूट रही हो और मोदी आंटी ने कस के मुझे जकड लिया मानो मेरे और अपने बीच में हवा भी पास नही होने देंगी | उन्होंने अपनी टांगें मेरी कमर में बुरी तरह से लपेट दीं | अब मैं पर कटे पंछी की तरह जोश में बूर में धक्के मारने के लिए छटपटा रहा था लेकिन मेरी कमर तो मोदी आंटी के कंट्रोल में थी | तभी मोदी आंटी बोल पड़ी ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स बस अब और ध ध धक्के नही अब और नही सहा जाता | बस करो अब | लेकिन मै अपने कंट्रोल में नही था | लण्ड पर गर्म तेल जैसी लगातार महसूस होती हुई फुहार वो मज़ा दे रही थी की मै बिना धक्के मारे नही रह सकता था सो मैंने अपने दोनों हाथों से मोदी आंटी की टांगों को ज़बरदस्ती कमर से अलग किया और टांगों को हाथों से ही पकड़े रक्खा ताकि फिर मेरी कमर में न लपेट सकें और लगा धका घक बूर में लण्ड की ठुकाई करने |

मोदी आंटी चिल्लाने लगीं न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्हीईईईईईई नहीं अब मै नही सह सकती | मत मार धक्के | मेरा गिरने वाला है आंटी मारने दो |

मै चूस के निकाल दूँगी | रहम कर | मत मार धक्के | अरे तुने कंडोम भी नही लगाया है बूर में मत गिराना |

मै अपना मज़ा किरकिरा नही करना चाहता था | तभी मुझे इकबाल और कविता की चुदाई वाली बात याद आई की जब कविता इकबाल को बोली की बूर के अंदर मत झड़ तो वो बोला था की अनवांटेड ७२ प्लस ले लेना सो मै भी मोदी आंटी को बोल पड़ा .......................
 
मुझे तो बूर में ही निकालना है, आप अनवांटेड ७२ प्लस ले लेना | यह कहते हुए मरे धक्कों की रफ्तार बढ़ गई | फ्च्र्फ्च्र फचाक्फच्च्हक फच फच | मोदी आंटी चिल्लाती रही और मैं चोदता रहा | यह सिलसिला पाँच मिनट के लगभग चला होगा की मेरे अंडकोषों में खिंचाव पैदा हुआ और उसके साथ मेरे लण्ड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी| आआआआआआ आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ले ले मेरी जान | चूस ले सारा रस | भर ले अपनी बूर मेरे रस से |

हाँ मेरे बालम, मोदी आंटी बोलीं और अब उनकी टांग मेरी गिरफ्त से छूट चुकी थी और मैं उनके ऊपर पूरी तरह से लेट गया था | मेरा लण्ड उनकी बूर में फूल के रस की धार छोड़ रहा था और लण्ड से छूटती हर वीर्य की धार के साथ मोदी आंटी उछल पड़ती थीं | इधर मोदी आंटी ने जितना लण्ड बूर के बाहर था उसे हाथ से कस के पकड़ रक्खा था ताकि फिर से झड़ते टाईम जोश में मै कहीं ज़ोरदार धक्का मार के पूरा लण्ड बूर में न पेल दूँ | सच भी था की अगर मोदी आंटी ने मेरा लण्ड न पकड़ा होता तो मैंने तो अपनी तरफ से ज़ोरदार धक्का बूर पर मार ही दिया था झड़ने के उस जोश में | मैंने मोदी आंटी को कस के अपनी बाहों में जकड़ रक्खा था और झड़ने के न जाने कितनी देर तक मैं और मोदी आंटी यूँ ही एक दूसरे से चिपके हुए पड़े रहे | वो किसी औरत की बूर में लण्ड डाल के पानी गिराने का मेरा पहला एहसास जो किसी भी मज़े से अतुलनीय था | मै उससे बाहर आना ही नही चाहता था | वाकई मोदी आंटी ने मुझे स्वर्ग का मज़ा दिया था और शायद उन्हें भी मुझसे वैसा ही मज़ा मिला था | पता नही हम दोनों इसी तरह कितनी देर लण्ड बूर में डाले हुए यूँ हीं चिपके हुए पड़े रहे |दोनों ने आँखें तब खोलीं जब मोदी आंटी का मोबाइल बज़ उठा |

अलसाते हुए बोलीं अरे पप्पू मै तो नीचे दबी हुई हूँ जरा मोबाइल देना ड्रेसिंग टेबल पर से मेरा |

मै उठना तो नही चाहता था पर मन मारते हुए बोला ..मैं उठ जाऊँ क्या ? आप पर मेरा वजन पड़ रहा होगा | अब आंटी ने मेरा लण्ड छोड़ दिया जो सिकुड़ के छोटा हो गया था और मुझे दोनों हाथों से अपने आगोश में भींचती हुई बोलीं......... इतनी अच्छी चुदाई के बाद इस मुए फोन के लिए तुझे खुद से अलग कर लूँ ? नही बेटे | बस तू हाथ बढ़ा के फोन उठा दे और ध्यान रखना की लण्ड बूर में से न निकले | अंधा क्या मांगे दो आँखें ? मै भी तो यही चाहता था सो मेने मोबाईल उठाया और आंटी को पकड़ा दिया |

हाँ बोलो फोन पर मोदी आंटी बोलीं और फोन को स्पीकर फोन पर डाल दिया और उसे साइड में रख के बात करने लगीं |

उधर से आवाज़ आई ..........हो गया काम ? आ जाऊँ मै ? ये आवाज़ मोदी अंकल की थी |

अरे मै खुद बुला लुंगी तुम्हे | क्यों हल्ला मचा रहे हो ?

अभी हुआ नही ?

नही .....अभी बूर में लण्ड पड़ा हुआ है | कुछ और सुनोगे ?

अरे अभी उसका पहली बार है, समझा करो | एक बार से ज्यादा मत करने देना |

तुम ज्ञान बघारना बंद करो और सुनो तीन बजे लंच के लिए आ जाना और पन्द्रह मिनट से ज़्यादा नही रुक सकते यहाँ | फिर लंच के बाद पप्पू के घर में ही जा कर आराम करना |

तो क्या मेरा संडे का कोटा .........

अरे यार अज १० मिनट चुस दूँगी ........अब तो खुश ? लेकिन दस मिनट के अंदर झड़ जाओगे तो मेरा दोष नही | वो तो मै जानता ही हूँ की पाँच मिनट ही चुसवाना भारी पड़ता है १० मिनट में तो पक्का झड़ जाऊँगा | तो सोच के रखना की बूर में झड़ोगे की मुँह में |

आज झड़ने दोगी मुँह में?
 
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