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रेणु बहुत बेचैन थी ... लगबग ग्यारह बजे उसे पड़ोसी की लड़की ने आकर खबर दी- " दीदी , आपके फ्रेंड का फोन है । "
रेणु लपककर पड़ोस में आ गई - इस समय फ्लैट की मालकिन भी वहां नहीं थी ... उसने रिसीवर उठाकर कहा - ' ' हैलो ! "
' ' रेणु ! ' '
' हां संजय भैया , मैं ही हूं । ' '
' ' क्या अकेली हो ? ' '
' ' हां । "
" सरोज के बारे में कोई खबर नहीं मिली । "
' ' खबर अच्छी नहीं है । ' '
चौंककर पूछा गया-- ' ' क्या मतलब ? '
' ' डिटेल नहीं मिल पाई ... विजय तुमसे मिलना चाहता है । "
,
" नहीं - मैं किसी से मिलने का खतरा मोल नहीं ले सकता । "
' ' पागल मत बनो भैया ! विजय तुम्हारी मदद और बयान के बगैर ज्वाला प्रसाद के असल कातिल को नहीं पकड़ सकता । '
।।
" वह सरकारी अफसर है ... क्या पता वह पहले ही मेरे गले का नाप ले ले । ' '
' ' नहीं भैया ! उन्हें विश्वास है कि तुम ज्वाला प्रसाद के असल कातिल नहीं हो । तुमने जो कुछ मुझे बताया , वह सब मैंने उसको बता दिया था - उसे तुम्हारे बयान पर पूरा भरोसा है । '
" मगर उसे विश्वास कैसे आ गया ? ' '
" एक बहुत बड़े और ठोस प्रमाण के आधार पर
' ' वह क्या ? "
" ज्वाला प्रसाद के बाथरूम में एक जूते के तले का निशान पाया गया था , जो कातिल के जूते का था .... वह निशान नौ नम्बर के जूते का है जबकि तुम्हारे जूते का नम्बर आठ है । ' '
कुछ देर मौन रहा तो रेणु ने कहा- । ' ' हैलो ! "
' ' मैं सुन रहा हूं । ' '
' ' भैया ! तुम्हें मेरे ऊपर भरोसा नहीं ? ' '
" भला तुम पर भरोसा नहीं करूंगा तो और किस पर करूगा
"
" तो फिर विजय से मिल लो - मेरी जिम्मेदारी है ... वह तुम्हारी जरूर मदद करेंगे - वह बहुत जिम्मेदार , शरीफ और ईमानदार , बहादुर ऑफिसर हैं । ' '
" ठीक है - मगर शकीला ! ' '
" दोनों मिल लो । वह शकीला से भी मिलना चाहते हैं - तुम्हारे ऊपर शकीला के कत्ल का भी आरोप है - शकीला को देखकर विजय को यह तो विश्वास हो जाएगा कि तुमने ( उसे नहीं मारा , बल्कि निरपराध पकड़े जाने से बचाया है । ' '
" ठीक है । '
।।
" कब ? और कहां ? ' '
कुछ देर मौन रहा , फिर आवाज आई
" तुम विजय को साथ लेकर जुहू बीच पर रात के दस बजे आ जाना । "
" किस जगह ? ' '
" हाली डे इन के पास जो गली साहिल पर आती है , उसके पास ही गाड़ी रोक लेना ... मैं उचित मौका देखकर खुद ही मिलने चला आऊंगा । "
फिर दूसरी ओर से डिस्कनेक्ट हो गया । इस समय रेणु कमरे में अकेली थी - उसने जल्दी से मोबाइल पर विजय सरदाना का नम्बर मिलाया और हैलो की आवाज पहचानकर बोली- ' ' विजय सरदाना , मैं रेणु बोल रही हूं ... अभी - अभी संजय से बात हो गई है । ' '
' क्या कह रहा था ? ' '
" कल रात को दस बजे जुहू बीच पर । "
' ' क्या शकीला भी साथ होगी ? "
' हां । ' ' फिर रेणु ने सिचुएशन के बारे में बताया जहां उन्हें पहुंचना है ।
" ठीक है - मैं गाड़ी लेकर आ जाऊंगा - तुम कहां मिलोगी ? "
।
' तुम गजेबो के सामने वाले स्टॉप पर मिल लेना ... मैं ठीक नौ बजे वहां पहुंच जाऊंगी । ' '
" ठीक है - लेकिन क्या तुम मां को कुछ बताए बिना रात को घर से निकल सकोगी ? "
' आज मां किसी लड़के को देखने रतलाम गई हुई है - उन्हें लौटने में चंद दिन लग जाएंगे । ' '
' तब ठीक है । ' '
फिर दोनों ओर से डिस्कनेक्ट हो गया ।
विजय ने अब्दुल रहमान के गैरेज से अपनी खास गाड़ी निकाली ... यह एक बंद , काले रंग की टू - सीटर गाड़ी थी - देखने में बड़ी मामूली - सी दिखती थी , मगर जासूसी और सुरक्षा के अनोखे छिपे ढंके औजारों से लैस - विजय इसे किसी खास मौके पर ही निकालता था ... रहमान को भी इस गाड़ी के अंदर का कुछ ज्ञान नहीं था ।
लिंकिंग रोड के बस स्टॉप पर उसे रेणु नजर आ गई - चूंकि वह गाड़ी को पहचानती नहीं थी इसलिए जब गाड़ी उसके सामने आकर रुकी तो वह चौक पड़ी .... लेकिन जब विजय ने दरवाजा खोला तो वह पास आ गई । गाड़ी में बैठकर उसने दरवाजा बंद किया तो गाड़ी अंदर से ठंडी थी । उसने बैठते हुए पूछा- ' ' यह कैसी गाड़ी है ? ' '
' ' खास मौके के लिए । ' '
।
।
।।
' आज क्या खास मौका था ? ।।
' ' संजय से मुलाकात क्या खास मौका नहीं , अगर मैं अपनी टाटा सूमो पर आता तो मेरे जानने वाले समज जाते कि मैं हूं और ऐसे रात में संजय से मुलाकात करना क्या अच्छा होता ? ' '
गाड़ी बिल्कुल बे आवाज थी और स्मूथली चल रही थी - कुछ देर बाद रेणु ने पूछा- ' ' अरे ... हां ... सरोज के बारे में कुछ पता चला ? "
' ' हां ! चल गया । ' '
' ' कहां है ? कैसी है ? '
' ' मर गई ... अब तो लाश भी जला दी गई होगी । ' '
' ' नहीं ... ! ' ' रेणु सन्नाटे में रह गई - उसकी कल्पना में सरोज का हंसमुख चेहरा घूम गया और उसने सुधे गले से कहा- ' ' लाश मिली कहां ? ' '
' ' मेरे फ्लैट में - मेरे ही बेडरूम में - मेरे ही बैड पर । ' '
।
" तुम्हारे फ्लैट में - तुम्हारे बिस्तर पर ? नहीं ! ' '
विजय ने विस्तार से सब कुछ बताकर कहा- ' ' लोग मुझे फंसाने की चालें चलने लगे हैं और इसका मतलब यह है कि साजिश का जाल पूरी तरह से फैला हुआ है
' ' फ ... फ ...
फिर ... क्या करोगे तुम ? "
-
" जो अब तक करता रहा हूं । कोई नई बात थोड़ी है ... जाने कितनी बार ऐसे हालात से दो - चार हुआ हूं
कुछ देर बाद गाड़ी हॉली डे इन के साथ वाली गली में पहुंचकर रुक गई ... विजय ने घड़ी देखी ... नौ बजकर बीस मिनट हो गए थे
उसने कहा- ' ' दस बजे आएगा संजय ? "
' ' हां । "
' ' मगर वह मेरी गाड़ी को कैसे पहचानेगा ? ' '
' ' ऐसी कोई बात तो हुई नहीं थी - उन्होंने कहा था - मैं खुद ही मौका देखकर आ जाऊंगा । ' '
" तो फिर तुम्हें बाहर निकलना पड़ेगा । "
' ' मैं भी यही सोच रही हूं । ' '
।
' साहिल पर जाओ और ऐसे बैठ जाओ जैसे किसी का इन्तजार कर रही हो - इस तरह मैं भी अंदाजा लगा लूंगा कि किसी ने पीछा तो नहीं किया । ' '
" ठीक है । "
और एक माउजर उसे देकर बोला- ' ' यह मुठ्ठी में आ जाएगा । "
' ' क्या है ? "
' ' छोटा रिवाल्वर ! कभी चलाया है ? ' '
' ' मैं स्काउटिंग में थी - राइफल शूटिंग में एक बार फर्स्ट भी आई थी । "
।
" मगर इसकी रेंज ज्यादा नहीं है - दस मीटर ही है - याद रखना । "
' ' ठीक है । '
' ' किसी भी एमरजेंसी में बेधडक गोली चला देना - मैं संभाल लूंगा । ' '
।
" ठीक है । ' '
रेणु उतरकर साहिल पर चली गई - विजय दरवाजा बंद किए उसे देखता रहा , फिर उसने डैश बोर्ड से एक छोटी - सी चिपटी शीशी निकाली और चंद बूंदे जबान पर डालकर शीशी बंद करके रख दी ।
रेणु लपककर पड़ोस में आ गई - इस समय फ्लैट की मालकिन भी वहां नहीं थी ... उसने रिसीवर उठाकर कहा - ' ' हैलो ! "
' ' रेणु ! ' '
' हां संजय भैया , मैं ही हूं । ' '
' ' क्या अकेली हो ? ' '
' ' हां । "
" सरोज के बारे में कोई खबर नहीं मिली । "
' ' खबर अच्छी नहीं है । ' '
चौंककर पूछा गया-- ' ' क्या मतलब ? '
' ' डिटेल नहीं मिल पाई ... विजय तुमसे मिलना चाहता है । "
,
" नहीं - मैं किसी से मिलने का खतरा मोल नहीं ले सकता । "
' ' पागल मत बनो भैया ! विजय तुम्हारी मदद और बयान के बगैर ज्वाला प्रसाद के असल कातिल को नहीं पकड़ सकता । '
।।
" वह सरकारी अफसर है ... क्या पता वह पहले ही मेरे गले का नाप ले ले । ' '
' ' नहीं भैया ! उन्हें विश्वास है कि तुम ज्वाला प्रसाद के असल कातिल नहीं हो । तुमने जो कुछ मुझे बताया , वह सब मैंने उसको बता दिया था - उसे तुम्हारे बयान पर पूरा भरोसा है । '
" मगर उसे विश्वास कैसे आ गया ? ' '
" एक बहुत बड़े और ठोस प्रमाण के आधार पर
' ' वह क्या ? "
" ज्वाला प्रसाद के बाथरूम में एक जूते के तले का निशान पाया गया था , जो कातिल के जूते का था .... वह निशान नौ नम्बर के जूते का है जबकि तुम्हारे जूते का नम्बर आठ है । ' '
कुछ देर मौन रहा तो रेणु ने कहा- । ' ' हैलो ! "
' ' मैं सुन रहा हूं । ' '
' ' भैया ! तुम्हें मेरे ऊपर भरोसा नहीं ? ' '
" भला तुम पर भरोसा नहीं करूंगा तो और किस पर करूगा
"
" तो फिर विजय से मिल लो - मेरी जिम्मेदारी है ... वह तुम्हारी जरूर मदद करेंगे - वह बहुत जिम्मेदार , शरीफ और ईमानदार , बहादुर ऑफिसर हैं । ' '
" ठीक है - मगर शकीला ! ' '
" दोनों मिल लो । वह शकीला से भी मिलना चाहते हैं - तुम्हारे ऊपर शकीला के कत्ल का भी आरोप है - शकीला को देखकर विजय को यह तो विश्वास हो जाएगा कि तुमने ( उसे नहीं मारा , बल्कि निरपराध पकड़े जाने से बचाया है । ' '
" ठीक है । '
।।
" कब ? और कहां ? ' '
कुछ देर मौन रहा , फिर आवाज आई
" तुम विजय को साथ लेकर जुहू बीच पर रात के दस बजे आ जाना । "
" किस जगह ? ' '
" हाली डे इन के पास जो गली साहिल पर आती है , उसके पास ही गाड़ी रोक लेना ... मैं उचित मौका देखकर खुद ही मिलने चला आऊंगा । "
फिर दूसरी ओर से डिस्कनेक्ट हो गया । इस समय रेणु कमरे में अकेली थी - उसने जल्दी से मोबाइल पर विजय सरदाना का नम्बर मिलाया और हैलो की आवाज पहचानकर बोली- ' ' विजय सरदाना , मैं रेणु बोल रही हूं ... अभी - अभी संजय से बात हो गई है । ' '
' क्या कह रहा था ? ' '
" कल रात को दस बजे जुहू बीच पर । "
' ' क्या शकीला भी साथ होगी ? "
' हां । ' ' फिर रेणु ने सिचुएशन के बारे में बताया जहां उन्हें पहुंचना है ।
" ठीक है - मैं गाड़ी लेकर आ जाऊंगा - तुम कहां मिलोगी ? "
।
' तुम गजेबो के सामने वाले स्टॉप पर मिल लेना ... मैं ठीक नौ बजे वहां पहुंच जाऊंगी । ' '
" ठीक है - लेकिन क्या तुम मां को कुछ बताए बिना रात को घर से निकल सकोगी ? "
' आज मां किसी लड़के को देखने रतलाम गई हुई है - उन्हें लौटने में चंद दिन लग जाएंगे । ' '
' तब ठीक है । ' '
फिर दोनों ओर से डिस्कनेक्ट हो गया ।
विजय ने अब्दुल रहमान के गैरेज से अपनी खास गाड़ी निकाली ... यह एक बंद , काले रंग की टू - सीटर गाड़ी थी - देखने में बड़ी मामूली - सी दिखती थी , मगर जासूसी और सुरक्षा के अनोखे छिपे ढंके औजारों से लैस - विजय इसे किसी खास मौके पर ही निकालता था ... रहमान को भी इस गाड़ी के अंदर का कुछ ज्ञान नहीं था ।
लिंकिंग रोड के बस स्टॉप पर उसे रेणु नजर आ गई - चूंकि वह गाड़ी को पहचानती नहीं थी इसलिए जब गाड़ी उसके सामने आकर रुकी तो वह चौक पड़ी .... लेकिन जब विजय ने दरवाजा खोला तो वह पास आ गई । गाड़ी में बैठकर उसने दरवाजा बंद किया तो गाड़ी अंदर से ठंडी थी । उसने बैठते हुए पूछा- ' ' यह कैसी गाड़ी है ? ' '
' ' खास मौके के लिए । ' '
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' आज क्या खास मौका था ? ।।
' ' संजय से मुलाकात क्या खास मौका नहीं , अगर मैं अपनी टाटा सूमो पर आता तो मेरे जानने वाले समज जाते कि मैं हूं और ऐसे रात में संजय से मुलाकात करना क्या अच्छा होता ? ' '
गाड़ी बिल्कुल बे आवाज थी और स्मूथली चल रही थी - कुछ देर बाद रेणु ने पूछा- ' ' अरे ... हां ... सरोज के बारे में कुछ पता चला ? "
' ' हां ! चल गया । ' '
' ' कहां है ? कैसी है ? '
' ' मर गई ... अब तो लाश भी जला दी गई होगी । ' '
' ' नहीं ... ! ' ' रेणु सन्नाटे में रह गई - उसकी कल्पना में सरोज का हंसमुख चेहरा घूम गया और उसने सुधे गले से कहा- ' ' लाश मिली कहां ? ' '
' ' मेरे फ्लैट में - मेरे ही बेडरूम में - मेरे ही बैड पर । ' '
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" तुम्हारे फ्लैट में - तुम्हारे बिस्तर पर ? नहीं ! ' '
विजय ने विस्तार से सब कुछ बताकर कहा- ' ' लोग मुझे फंसाने की चालें चलने लगे हैं और इसका मतलब यह है कि साजिश का जाल पूरी तरह से फैला हुआ है
' ' फ ... फ ...
फिर ... क्या करोगे तुम ? "
-
" जो अब तक करता रहा हूं । कोई नई बात थोड़ी है ... जाने कितनी बार ऐसे हालात से दो - चार हुआ हूं
कुछ देर बाद गाड़ी हॉली डे इन के साथ वाली गली में पहुंचकर रुक गई ... विजय ने घड़ी देखी ... नौ बजकर बीस मिनट हो गए थे
उसने कहा- ' ' दस बजे आएगा संजय ? "
' ' हां । "
' ' मगर वह मेरी गाड़ी को कैसे पहचानेगा ? ' '
' ' ऐसी कोई बात तो हुई नहीं थी - उन्होंने कहा था - मैं खुद ही मौका देखकर आ जाऊंगा । ' '
" तो फिर तुम्हें बाहर निकलना पड़ेगा । "
' ' मैं भी यही सोच रही हूं । ' '
।
' साहिल पर जाओ और ऐसे बैठ जाओ जैसे किसी का इन्तजार कर रही हो - इस तरह मैं भी अंदाजा लगा लूंगा कि किसी ने पीछा तो नहीं किया । ' '
" ठीक है । "
और एक माउजर उसे देकर बोला- ' ' यह मुठ्ठी में आ जाएगा । "
' ' क्या है ? "
' ' छोटा रिवाल्वर ! कभी चलाया है ? ' '
' ' मैं स्काउटिंग में थी - राइफल शूटिंग में एक बार फर्स्ट भी आई थी । "
।
" मगर इसकी रेंज ज्यादा नहीं है - दस मीटर ही है - याद रखना । "
' ' ठीक है । '
' ' किसी भी एमरजेंसी में बेधडक गोली चला देना - मैं संभाल लूंगा । ' '
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" ठीक है । ' '
रेणु उतरकर साहिल पर चली गई - विजय दरवाजा बंद किए उसे देखता रहा , फिर उसने डैश बोर्ड से एक छोटी - सी चिपटी शीशी निकाली और चंद बूंदे जबान पर डालकर शीशी बंद करके रख दी ।