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Guest
अरे बोल दिया न हाँ अब रक्खो फोन बोल रही हूँ न की बूर में लण्ड लगवा के लेटी हूँ ज्यादा बात नही कर सकती |
ठीक है ........... ठीक है ........ बाय
बाय .....और मोदी आंटी ने फोन काट दिया | मेरी तरफ देख के मुस्कराईं | अपनी बाँहें मेरी पीठ पर कस दीं और मुझे अपने से चिपकाते हुए मेरे होठों पर अपने होठ रख के एक चुम्मा लेते हुए बोलीं..........आंटी पसंद आई पप्पू ? थैंक्यू आंटी........ और यह कहते हुए मैंने अपने मुँह में आंटी की बाँई चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा |
आंटी मेरे सर के बालों को सहलाते हुए बोलीं....... अब बस कर राजा | तुने आंटी को थका दिया है |
इधर मेरा लण्ड अभी भी आंटी की बूर में पड़ा हुआ था | आंटी की बूर से उनके रज और मेरे वीर्य का मिश्रण बाहर टपक कर बिस्तर की चद्दर को भीगा रहा था | मै आंटी के मना करने के बावजूद लगभग पाँच मिनट तक उनकी चुचियाँ अदल बदल क्र मसलता और चूसता रहा | इधर मेरा लण्ड फिर से अकड़ने लगा था | मैंने धीरे धीरे फिर से लण्ड को बूर के अंदर बाहर करना शुरू क्र दिया | तभी आंटी ने आँखें खोलीं और मेरे कान पकड़ कर बोलीं.... बदमाश ! तू आदमी है या मशीन | मै हिल भी नही पा रही | तुने इतना थका दिया है और तू फिर शुरू हो गया ?
मैंने आंटी को चूमा और लगभग गिडगिडाते हुए बोला..... लण्ड तो अंदर है ही | बस आप लेटी रहिए मै पक्का धीरे धीरे धक्के मार के ही चोदुंगा इस बार | बस एक बार और चोद लेने दीजिए | प्लीईईईईईईईज़ | और अपने लण्ड को बूर के अंदर बाहर करना ज़ारी रक्खा |
अब मेरी बारी थी | आंटी की चुचियों को दोनों हाथों से हल्के हल्के मसलते हुए बोला ..........आपने सच में स्वर्ग की सैर करवा दी आंटी | आज तक ऐसा मज़ा मिलना तो दूर मै सोच भी नही सकता था की ऐसा मज़ा हो भी सकता है | लेकिन एक कमी फिर भी रह गई|
अब आंटी ने थोड़ा सवालिया निगाहों से मेरी तरफ देखते हुए कहा........ क्या कमी रह गई ? और यह कहते हुए अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट दिया | अब मेरा लण्ड अंदर बाहर होना रुक गया |
अरे ये क्या आंटी ? धीरे धीरे तो मार रहा हूँ | अब इससे धीरे कैसे चोदूं आप ही बताईए ?
अभी चोदना नही है | देख नीचे मेरी बूर के बखिए उधेड़ दिए हैं तुने | मेरे राजा फिर करवाउंगी थोड़ा सब्र कर मेरे सैंया |
ठीक है जैसी आपकी मर्जी | मैंने मन मार कर कहा और चूची चूसने लगा |
तुने बताया नही क्या कमी रह गई ?
मैंने मुँह उठाया | हाँ वो तो रह ही गई |
अरे बताएगा भी ?
आप पूरा करने को कहें तो बताऊँ भी वरना यूँ ही कह के क्या फायदा ?
जानता है पप्पू औरत जिसका लण्ड अपनी बूर में ले लेती है और उसे पसंद आ जाता है उसके लिए कुछ भी कर सकती है |
मेरा लण्ड आपको पसंद आया ?
ये भी कोई पूछने की बात है? बहुत पसंद आया मेरे बालम | तुने आज मुझे हरा दिया वरना मोदी तो जिंदगी भर नही हरा सकता मुझे |
हरा दिया ? मतलब?
अरे मतलब यह की पहले तुने मुझे झड़वा दिया और फिर बाद में तू झड़ा तो मै हार गई न| जो मर्द औरत को चुदाई में हरा देता है औरत उसकी गुलाम हो जाती है जैसे अब मै तेरी हो गई हूँ |
झूठ बोल रही हैं आप |
नही राजा |
तो फिर मेरे कहने पर चुदवा क्यों नही रहीं ?
बिलकुल चुदवाऊँगी मेरे बालम | देख तेरे लण्ड ने इतने करारे झटके मारे हैं बूर में की अब कुछ देर मै बुर में झटके बिलकुल बर्दाश्त नही कर पाऊँगी इसलिए थोड़ा सब्र करने को बोल रही हूँ | चिंता मत कर बेटा दूसरा राऊंड पहले से भी ज़्यादा घमासान होगा |
ठीक है| पर एक काम करने देंगी दूसरे राऊंड में ?
क्या ?
पहले हाँ बोलिए |
मेरे बस में होगा तो ज़रूर करुँगी |
है आपके बस में | तो समझ ले की हो गया तेरा काम अब बता क्या काम करवाना चाहता हसी दूसरे राऊंड में |
यही की मुझे पूरा लण्ड बूर के अंदर घुसाने दीजिएगा |
मर गई रे | ये क्या मांग लिया तुने | आधे से ही पस्त कर दिया अब पूरा डाल के क्या करने का इरादा है ?
प्लीज़ आंटी | पूरा घुसा के चोदने दीजिएगा न ?
चल ठीक है लेकिन फिर उसके लिए तैयारी करनी पड़ेगी और पूरा डलवा के चुदवाने के बाद हो सकता है दो तीन दिन और न चुदवाऊँ|
ऐसा क्यों |
मैंने सुना है की बड़े लण्ड की ठोकर जो बच्चेदानी के अंदर पडती है उससे उबरने में औरत को दो तीन दिन लग जाते हैं | मेरी ननद के पति का तेरे जैसा ही है | वो जब भी मायके से आती है तो रोती रहती थी की उसके पति उसकी हालत खराब कर देते हैं | पर हर कोई उसे मजाक समझता था | एक बार मेरी ननद अपने पति के साथ मायके आई तो मेरी जेठानी ने उसके पति से मजाक किया की सुना है हमारी बन्नो को आप ज्यादा परेशान करते हैं? अरे जोर दिखाना है तो हम पर दिखाएँ तो माने बिचारी इस बच्ची पर जोर दिखा कर क्या इतराते हैं | यह सुन कर सब लोग हंस पड़े | तभी मेरी ननद के पति बोले अरे भाभी हमे तो बस सामने खिलाड़ी होने से मतलब है वो भले कोई भी हो | हाँ आप अपनी ननद रानी से पूछ लीजिए की मै आपके साथ खाट कबड्डी खेलूँ तो उन्हें तो कोई ऐतराज़ नही है न ?
तभी मेरी ननद बोल पड़ी अरे रवि (ननदोई का नाम) मुझे कोई शिकायत नही होगी बल्कि अच्छा मौक़ा है की भईया भी नही हैं और भाभी को पता चल जाएगा की मैं ठीक बोलती हूँ आपके बारे में | अब जेठानी फँस चुकी थी सो उन्हें तैयार होना पड़ा | तय हुआ की दोपहर के खाने के बाद जेठानी और ननदोई का मुकाबला होगा | मैंने चालाकी से काम लिया और जो कमरा उन दोनों के लिए ठीक किया उसमें वीडियो रिकार्डिंग का इंतजाम कर दिया जो केवल मुझे पता था और किसी को नही | पप्पू जो मेरी जिठानी की चुदाई दोपहर दो बजे शुरू हुई वो शाम के ६ बजे तब रुकी जब हम लोग दरवाजे से बोलने लगे अरे जमाई बाबू भाभी तो हाथ जोड़ चुकी हैं | अपनी हार चिल्ला चिल्ला के मान रही हैं अब तो छोड़ दीजिए इन्हें | उसके करीब २० मिनट बाद जमाई राजा टावेल लपेट के बाहर आए |
हम लोग कमरे में गए तो जेठानी की बूर से वीर्य और रज का मिश्रण बाहर टपक कर बिस्तर को गीला कर रहा था और वो बेसुध सी पड़ी थीं | हमे देख के थोड़ा शरमाई पर फिर हमने पकड़ के उन्हें लेटे रहने को कहा | अगले आधे घंटे के बाद जब वो नार्मल हुईं तो बोलीं बाप रे बाप लण्ड है या मूसल | पक्का गधे के जैसा है | मज़ा तो वो दिया की आज तक नही मिला था पर बूर के बखिए ऊधेड़ दिए ज़ालिम ने | जरा भी रियायत नही बरती चुदाई के समय |
तभी जमाई राजा अंदर आ गए और बोल पड़े ........हमने तो सोचा था की कोई ललकारने वाला खिलाड़ी मिला है तो आज कुछ खेल का मज़ा आएगा | पर आप तो भाभी शुरू में ही बोल गईं |
हटीए जमाई राजा मेरी सील तोड़ दी और बात करते हैं?
हम सब चौंक गए ! सील तोड़ दी ? क्या मतलब है दीदी मै कुछ समझी नही ?
तब मेरी जेठानी बोली अरे देवरानी जी मेरी तो छोड़िए आपकी भी छोड़िए ये तो अपनी सासू माँ पर चढें अभी तो उनकी भी सील टूटेगी |
क्या ?
अब मै भौंचक्की हो कर जेठानी को देख रही थी | सासू मान का नाम उन्होंने क्यों लिया ये तो मै समझ गई |
क्यों लिया आंटी ?
ठीक है ........... ठीक है ........ बाय
बाय .....और मोदी आंटी ने फोन काट दिया | मेरी तरफ देख के मुस्कराईं | अपनी बाँहें मेरी पीठ पर कस दीं और मुझे अपने से चिपकाते हुए मेरे होठों पर अपने होठ रख के एक चुम्मा लेते हुए बोलीं..........आंटी पसंद आई पप्पू ? थैंक्यू आंटी........ और यह कहते हुए मैंने अपने मुँह में आंटी की बाँई चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा |
आंटी मेरे सर के बालों को सहलाते हुए बोलीं....... अब बस कर राजा | तुने आंटी को थका दिया है |
इधर मेरा लण्ड अभी भी आंटी की बूर में पड़ा हुआ था | आंटी की बूर से उनके रज और मेरे वीर्य का मिश्रण बाहर टपक कर बिस्तर की चद्दर को भीगा रहा था | मै आंटी के मना करने के बावजूद लगभग पाँच मिनट तक उनकी चुचियाँ अदल बदल क्र मसलता और चूसता रहा | इधर मेरा लण्ड फिर से अकड़ने लगा था | मैंने धीरे धीरे फिर से लण्ड को बूर के अंदर बाहर करना शुरू क्र दिया | तभी आंटी ने आँखें खोलीं और मेरे कान पकड़ कर बोलीं.... बदमाश ! तू आदमी है या मशीन | मै हिल भी नही पा रही | तुने इतना थका दिया है और तू फिर शुरू हो गया ?
मैंने आंटी को चूमा और लगभग गिडगिडाते हुए बोला..... लण्ड तो अंदर है ही | बस आप लेटी रहिए मै पक्का धीरे धीरे धक्के मार के ही चोदुंगा इस बार | बस एक बार और चोद लेने दीजिए | प्लीईईईईईईईज़ | और अपने लण्ड को बूर के अंदर बाहर करना ज़ारी रक्खा |
अब मेरी बारी थी | आंटी की चुचियों को दोनों हाथों से हल्के हल्के मसलते हुए बोला ..........आपने सच में स्वर्ग की सैर करवा दी आंटी | आज तक ऐसा मज़ा मिलना तो दूर मै सोच भी नही सकता था की ऐसा मज़ा हो भी सकता है | लेकिन एक कमी फिर भी रह गई|
अब आंटी ने थोड़ा सवालिया निगाहों से मेरी तरफ देखते हुए कहा........ क्या कमी रह गई ? और यह कहते हुए अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट दिया | अब मेरा लण्ड अंदर बाहर होना रुक गया |
अरे ये क्या आंटी ? धीरे धीरे तो मार रहा हूँ | अब इससे धीरे कैसे चोदूं आप ही बताईए ?
अभी चोदना नही है | देख नीचे मेरी बूर के बखिए उधेड़ दिए हैं तुने | मेरे राजा फिर करवाउंगी थोड़ा सब्र कर मेरे सैंया |
ठीक है जैसी आपकी मर्जी | मैंने मन मार कर कहा और चूची चूसने लगा |
तुने बताया नही क्या कमी रह गई ?
मैंने मुँह उठाया | हाँ वो तो रह ही गई |
अरे बताएगा भी ?
आप पूरा करने को कहें तो बताऊँ भी वरना यूँ ही कह के क्या फायदा ?
जानता है पप्पू औरत जिसका लण्ड अपनी बूर में ले लेती है और उसे पसंद आ जाता है उसके लिए कुछ भी कर सकती है |
मेरा लण्ड आपको पसंद आया ?
ये भी कोई पूछने की बात है? बहुत पसंद आया मेरे बालम | तुने आज मुझे हरा दिया वरना मोदी तो जिंदगी भर नही हरा सकता मुझे |
हरा दिया ? मतलब?
अरे मतलब यह की पहले तुने मुझे झड़वा दिया और फिर बाद में तू झड़ा तो मै हार गई न| जो मर्द औरत को चुदाई में हरा देता है औरत उसकी गुलाम हो जाती है जैसे अब मै तेरी हो गई हूँ |
झूठ बोल रही हैं आप |
नही राजा |
तो फिर मेरे कहने पर चुदवा क्यों नही रहीं ?
बिलकुल चुदवाऊँगी मेरे बालम | देख तेरे लण्ड ने इतने करारे झटके मारे हैं बूर में की अब कुछ देर मै बुर में झटके बिलकुल बर्दाश्त नही कर पाऊँगी इसलिए थोड़ा सब्र करने को बोल रही हूँ | चिंता मत कर बेटा दूसरा राऊंड पहले से भी ज़्यादा घमासान होगा |
ठीक है| पर एक काम करने देंगी दूसरे राऊंड में ?
क्या ?
पहले हाँ बोलिए |
मेरे बस में होगा तो ज़रूर करुँगी |
है आपके बस में | तो समझ ले की हो गया तेरा काम अब बता क्या काम करवाना चाहता हसी दूसरे राऊंड में |
यही की मुझे पूरा लण्ड बूर के अंदर घुसाने दीजिएगा |
मर गई रे | ये क्या मांग लिया तुने | आधे से ही पस्त कर दिया अब पूरा डाल के क्या करने का इरादा है ?
प्लीज़ आंटी | पूरा घुसा के चोदने दीजिएगा न ?
चल ठीक है लेकिन फिर उसके लिए तैयारी करनी पड़ेगी और पूरा डलवा के चुदवाने के बाद हो सकता है दो तीन दिन और न चुदवाऊँ|
ऐसा क्यों |
मैंने सुना है की बड़े लण्ड की ठोकर जो बच्चेदानी के अंदर पडती है उससे उबरने में औरत को दो तीन दिन लग जाते हैं | मेरी ननद के पति का तेरे जैसा ही है | वो जब भी मायके से आती है तो रोती रहती थी की उसके पति उसकी हालत खराब कर देते हैं | पर हर कोई उसे मजाक समझता था | एक बार मेरी ननद अपने पति के साथ मायके आई तो मेरी जेठानी ने उसके पति से मजाक किया की सुना है हमारी बन्नो को आप ज्यादा परेशान करते हैं? अरे जोर दिखाना है तो हम पर दिखाएँ तो माने बिचारी इस बच्ची पर जोर दिखा कर क्या इतराते हैं | यह सुन कर सब लोग हंस पड़े | तभी मेरी ननद के पति बोले अरे भाभी हमे तो बस सामने खिलाड़ी होने से मतलब है वो भले कोई भी हो | हाँ आप अपनी ननद रानी से पूछ लीजिए की मै आपके साथ खाट कबड्डी खेलूँ तो उन्हें तो कोई ऐतराज़ नही है न ?
तभी मेरी ननद बोल पड़ी अरे रवि (ननदोई का नाम) मुझे कोई शिकायत नही होगी बल्कि अच्छा मौक़ा है की भईया भी नही हैं और भाभी को पता चल जाएगा की मैं ठीक बोलती हूँ आपके बारे में | अब जेठानी फँस चुकी थी सो उन्हें तैयार होना पड़ा | तय हुआ की दोपहर के खाने के बाद जेठानी और ननदोई का मुकाबला होगा | मैंने चालाकी से काम लिया और जो कमरा उन दोनों के लिए ठीक किया उसमें वीडियो रिकार्डिंग का इंतजाम कर दिया जो केवल मुझे पता था और किसी को नही | पप्पू जो मेरी जिठानी की चुदाई दोपहर दो बजे शुरू हुई वो शाम के ६ बजे तब रुकी जब हम लोग दरवाजे से बोलने लगे अरे जमाई बाबू भाभी तो हाथ जोड़ चुकी हैं | अपनी हार चिल्ला चिल्ला के मान रही हैं अब तो छोड़ दीजिए इन्हें | उसके करीब २० मिनट बाद जमाई राजा टावेल लपेट के बाहर आए |
हम लोग कमरे में गए तो जेठानी की बूर से वीर्य और रज का मिश्रण बाहर टपक कर बिस्तर को गीला कर रहा था और वो बेसुध सी पड़ी थीं | हमे देख के थोड़ा शरमाई पर फिर हमने पकड़ के उन्हें लेटे रहने को कहा | अगले आधे घंटे के बाद जब वो नार्मल हुईं तो बोलीं बाप रे बाप लण्ड है या मूसल | पक्का गधे के जैसा है | मज़ा तो वो दिया की आज तक नही मिला था पर बूर के बखिए ऊधेड़ दिए ज़ालिम ने | जरा भी रियायत नही बरती चुदाई के समय |
तभी जमाई राजा अंदर आ गए और बोल पड़े ........हमने तो सोचा था की कोई ललकारने वाला खिलाड़ी मिला है तो आज कुछ खेल का मज़ा आएगा | पर आप तो भाभी शुरू में ही बोल गईं |
हटीए जमाई राजा मेरी सील तोड़ दी और बात करते हैं?
हम सब चौंक गए ! सील तोड़ दी ? क्या मतलब है दीदी मै कुछ समझी नही ?
तब मेरी जेठानी बोली अरे देवरानी जी मेरी तो छोड़िए आपकी भी छोड़िए ये तो अपनी सासू माँ पर चढें अभी तो उनकी भी सील टूटेगी |
क्या ?
अब मै भौंचक्की हो कर जेठानी को देख रही थी | सासू मान का नाम उन्होंने क्यों लिया ये तो मै समझ गई |
क्यों लिया आंटी ?