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ताकत की विजय

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जैसे जैसे पुनीत बताता जा रहा था ... आयुष की हैरानी बढती जा रही थी..

गेट पर खड़े गार्ड ने सवालिया निगाहों से आयुष की ओर देखा

कहो.... गार्ड बोला

सर से मिलना है मुझे...

आयुष की आवाज में घबराहट और उत्तेजना को महसूस कर चौंका गार्ड... ऊपर से रात के साढ़े बारह बजे राजीव सेन से मिलना चाह रहा था

अवश्य ही कोई गंभीर मामला है

मगर राजीव सेन इस वक्त सो रहा था और उसे सोते हुए से जगाना सांप के बिल में हाथ डालने जैसा था , सो गार्ड बोला

साहब तो अभी सो रहे है , सुबह आ जाना

समझने की कोशिश करो , मेरा उनसे मिलना बहुत जरूरी है... अगर जरूरी नहीं होता तो मैं सुबह भी आ सकता था .. व्यग्र स्वर में बोला आयुष

लेकिन ......

मैंने कहा ना मेरा उनसे मिलना बहुत जरूरी है

सॉरी.... गार्ड बोला.. तुम सर से सुबह ही बात कर सकते हो... उनको इस वक्त जगाने का रिस्क मैं नही ले सकता

ठीक है ... कंधे उचकाते हुए बोला आयुष... लेकिन कल को अगर सर ने तुम्हारी छुट्टी कर दी तो मुझे दोष मत देना... मैं तो सर से कह दुंगा कि मैंने तुमसे बहुत मिन्नत मलानत की लेकिन तुम नहीं माने

अचकचाया गार्ड... कन्फ्यूज हो गया बिचारा.. कुछ पल सोचा फिर बोला

क्या मिलना सच में बहुत जरूरी है ?

मैंने कहा न , अगर जरूरी नहीं होता तो मैं इस वक्त आता ही क्यों ?

तुम यही ठहरो... मैं सर से बात करने की कोशिश करता हूँ

आयुष ने मौन सहमति देते हुए कंधे उचका दिये...

गार्ड गेट के पहलू में बने लकड़ी के बूथ में घुस गया

क्या नाम है तुम्हारा ? बूथ में से गार्ड ने गरदन बाहर निकाल कर पूछा

आयुष... कांस्टेबल आयुष ..

गार्ड की गरदन पुन: बूथ में गायब हो गई...

किर्र.. किर्र... किर्रर

इन्टरकॉम के बजर की आवाज सुनकर राजीव सेन की नींद उचट गई

लेटे लेटे ही उसने इन्टरकॉम को कच्चा चबा जाने वाले अंदाज में घूरा... फिर रिसीवर उठा कर कान से लगाते हुए गुर्राया...

तुम जानते हो जब मैं आराम कर रहा हूँ तो मुझे डिस्टर्ब पसंद नहीं , फिर भी ऐसी गुस्ताखी कर डाली

स-सॉरी सर.. गार्ड की घबराहट भरी आवाज़ आई... मैंने वो कांस्टेबल आयुष को बहुत समझाया कि आप से सुबह मिल ले... मगर वह कह रहा है कि आपसे मिलना बहुत जरूरी है

चौंका राजीव सेन... आँखों में सोचें उभर आई और पेशानी पर बल पड़ गये

ठीक है ... कुछ सोच कर खीजते हुए बोला... भेजो उसे

यस सर... गार्ड ने राहत की सांस ली

राजीव सेन बैड पर अधलेटी अवस्था में बैठ कर गहरी सोच में डूब गया

ऐसा क्या काम आन पडा कि आयुष को उससे मिलने के लिए रात के इस वक्त आना पड़ा

आयुष को वह जानता था... एक कांस्टेबल की हैसियत से नहीं , बल्कि एक इमानदार और सच्चे सिपाही की हैसियत से ... पूरे पुलिस डिपार्टमेंट में एक अकेला आयुष ही ऐसा शख्स था जो ना कभी किसी से रिश्वत लेता था और ना ही किसी का बुरा सोचता था

शूरू शूरू में उसने आयुष पर निगाह भी रखी , मगर बहुत जल्द उसे पता चल गया कि आयुष का दिल तो करता है कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाये.... लेकिन वह कर नही पाया , क्योंकि वह जान गया कि अकेला चना भाड नहीं फोड सकता... तो उसने भी निगाह रखना बंद कर दी और उसकी तरफ़ से लापरवाह हो गया

करीब पाँच मिनट बाद आयुष ने उसके बैडरूम में प्रवेश किया......

क्या बात है ? आयुष के भीतर प्रवेश करते ही राजीव सेन उस पर चढ गया... ऐसी कौनसी आफत आ पड़ी जो तू इस वक्त यहां आ मरा ...

हडबडाया आयुष या शायद अभिनय किया

सॉरी सर... बट

क्या बट .? भिन्नाया राजीव सेन

व..वो... इं..इंस्पेक्टर साहब...

चौकन्ना हो गया राजीव सेन साथ ही एक झटके में सीधा होकर बैठ गया

क्या हुआ जोगलेकर को ? आयुष के घबराये हुए चेहरे को देखकर कहा राजीव सेन ने

व.. वो अभी तक नहीं लौटे...

सेन की आँखें सिकुड गई... कहा गया है वो ?

पता नहीं सर...

बस इतनी सी बात बताने के लिए तू इस कदर मरा जा रहा था जो रात के इस वक्त मेरा सर खाने आ धमका.. गुर्रा उठा सेन

आयुष का दिल जोरो से धडक गया

ज..जाने से पहले इंस्पेक्टर साहब ने किसी से बात की थी.. आयुष ने सयंत होकर कहा

क्या बात ? सेन बोर होते हुए बोला

इंस्पेक्टर साहब ने दूसरी तरफ़ से बात सूनी फिर गुस्से में आ गए , फिर बोले.. तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई यह बात करने की.... आयुष ने होते डरते कहा

सेन को लगा कि कोई ऐसी बात जरूर है जिसे कहने में वह हिचकिचा रहा है , जिसे जुबां पर लाने में वह खौफ से मरा जा रहा है... सो उसने गहरी सांस ली और स्वर को नरम बनाते हुए बोला...

घबराओ मत आयुष, साफ साफ कहो बात क्या है ?

आयुष की आँखें भर आई

सर... वह भर्राये लहजे में बोला... नयनाश्री मेरी छोटी बहन जैसी है , मैं नहीं चाहता कि मेरी बहन का कोई अहित हो..

उछल पडा सेन जैसे गर्म तवे पर बैठा दिया हो.... आँखों में अंगारे झांकने लगे... चेहरा भट्टी के समान सुर्ख लाल हो गया

झपट कर वह आयुष के करीब आया और दोनों हाथों से उसका गिरेहबान पकड़ कर झिंझोडते हुए फुंफकारा....

तू... तू मेरी बेटी की बात कर रहा है ना आयुष ?

आयुष की आँखों से आँसू बह निकले

य-यस सर.... आँसू बहाते हुए बोला आयुष.. इसलिए मैं इस वक्त आपके पास आया हूँ

राजीव सेन का चेहरा गुस्से से तपने लगा...बता क्या बात है ? और खबरदार , जो तूने कोई भी बात छुपाई तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा... स्वर खूंखार हो गया सेन का

स..सर.....

घबरा मत , अगर तूने सच बताया तो कोई बाल भी बांका नहीं कर पायेगा तेरा

अ-आप बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे सर (आयुष भी शायद मजे ले रहा था)

तू बोल... बोल आयुष ...

झिंझोड़ कर उसके गिरेहबान को छोड़ दिया राजीव सेन ने मगर उसका चेहरा बता रहा था कि जैसे उसके अंदर ज्वालामुखी दहक रहा हो

आयुष ने थूक निगलते हुए अपना गिरेहबान दुरस्त किया और फिर सहमे लहजे में कहने लगा...

दस बजे के करीब इंस्पेक्टर साहब को फोन आया था , उस समय मैं उन्हें पानी देने के लिए ऑफिस में दाखिल हुआ था कि तभी फोन की घंटी बजी ....

**********

आयुष का बताया वार्तालाप

**********

हैलो... इंस्पेक्टर जोगलेकर स्पीकिंग

अवतार सिंह बोल रहा हूँ... दूसरी तरफ से आवाज आई

ओहो... कहिये सिंह साहब आज कैसे याद किया

पुनीत शर्मा मिला कि नहीं ?

अभी कहा ? पता नहीं कौनसे बिल में छुप गया है वह हरामजादा

नोट कमाना चाहते हो ?

यह भी भला कोई पूछने की बात है... लक्ष्मी तो हर किसी को प्यारी लगती है... आँखों में चमक लाते हुए कहा जोगलेकर ने

काम बहुत मुश्किल है , उसे सिर्फ तुम ही पूरा कर सकते हो

आप काम बताये सिंह साहब फिर देखिए जोगलेकर उसे कैसे आसान बनाता है

नयनाश्री

नाम सुनते ही चौंका जोगलेकर और उलझते हुए कहा... कौन नयनाश्री

तेरे एस पी की लड़की ... और कौन

क्या हुआ उसे ... जोगलेकर बोल उठा

पाटील साहब का दिल आ गया है उस पर

जोगलेकर की आँखों में खून उतर आया....

 


अवतार सिंह.. उसके होंठों से गुर्राहट निकली... नयनाश्री मेरे ऑफिसर की बेटी है , उसके बारे में बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? मैं अभी एस पी साहब को तुम्हारी शिकायत करता हूं... फिर तुम्हें और पाटील साहब को पता चल जाएगा कि नयना श्री की तरफ गंदगी भरी आंख उठाने का क्या हश्र होता है...

हा... हा... हा... तुम क्या समझते हो जोगलेकर , राजीव सेन तुम्हारी बात पर यकीन कर लेगा...

जानते हो पाटील साहब पर वह अपने से ज्यादा भरोसा करता है सो अगर तुमने हमारी शिकायत भी की तो वो सीधा तुम्हारे सीने में गोली उतार देंगे... अक्लमंद बनो, नोट कमाओ और ऐश करो

जोगलेकर की आँखों के भाव बदले...

और अगर एस पी साहब को पता चल गया तो मैं तो बेमौत मारा जाऊंगा न ?

फिक्र मत करो , तुम पर जरा भी शक नहीं जायेगा... पाटील साहब ने ऐसे ही इस वक्त नयना श्री की मांग नहीं रखी है... मौका देखकर चौका लगाने की सोची है ...

कैसा मौका ? पूछा जोगलेकर ने

पुनीत शर्मा...

क्या मतलब ?

नयना श्री के गायब होते ही राजीव सेन का शक सीधे पुनीत शर्मा पर जायेगा, शक क्या , एस पी को तो पूरा विश्वास होगा कि उसकी बेटी को पुनीत शर्मा ने ही अगवा किया है... इस तरह तुम पर या पाटील साहब पर जरा भी संदेह नहीं जायेगा और वो पुनीत शर्मा पर शक नहीं करेगा तो हम लोग तो बैठे ही है उसके कान में फूंक मारने को

लेकिन नयना बेबी को कोठी से निकाल कर लाना...

तुम ऐसा करो, मुझे मिलो... ऐसी बातें फोन पर डिस्कस नही की जा सकती.. मैं तुम्हें स्कीम बताऊंगा.. स्कीम सुनकर तुम भी हैरान रह जाओगे और वकील साहब के दिमाग की तारीफ किए बिना नहीं रह सकोंगे

कहां आना होगा मुझे ?

देवी मंदिर के पीछे आ जाओ , मैं तुम्हें वहीं मिलूंगा.. वहां से मैं तुम्हें अपने ठिकाने पर ले जाऊंगा

ठीक है .... मैं आ रहा हूँ

कह कर जोगलेकर ने रिसीवर रखा और खतरनाक स्वर में गुर्राया

हरामजादे... स्कीम तो तेरी तभी पूरी होगी जब मैं करूंगा... उससे पहले ही तुझे ऊपर पहुंचा दूंगा मैं , लेकिन उससे पहले तेरी स्कीम सुनूंगा और साथ ही ऐसा सबूत भी पैदा करूंगा जिससे एस पी साहब पर तुम लोगों की असलियत जाहिर हो सके

और फिर वह चले गए , पानी भी नहीं पिया उन्होंने... आयुष भर्राये स्वर में कहता चला गया

मैं उनका इंतजार करता रहा.. फिर ड्यूटी के पश्चात मैं अपने घर गया लेकिन घर में मेरा दिल नहीं लग रहा था.. आपके पास आकर ऐसी बात कहने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी.. आखिर जब रहा नहीं गया तो बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटाकर आपके पास चला आया

बात पूरी करके आयुष राजीव सेन के चेहरे को देखने लगा

राजीव सेन की मुठ्ठीयां भिंची हुई थी, आँखों में अविश्वास तथा खूंखारता के भाव फैले हुए थे... चेहरा इस हद तक सख्त हो उठा था कि उस पर भयानकता की छाप लगी नजर आ रही थी

आयुष की बात खतम होते ही वह उसे देखते हुए बेहद खौफनाक अंदाज में फुंफकारा......

थाने में यह बात और किसे मालूम है ?

क.किसी को भी नहीं

एक बात कान खोल कर सुन ले आयुष... अंगारे निकले राजीव सेन के होंठों से... अगर तेरी बात जरा भी गलत निकली तो समझ ले मैं तेरा क्या हाल करूंगा

अ..आप इंस्पेक्टर साहब से पूछ लीजियेगा.. उन्होंने मुझे यही बात बताई थी जो मैंने आपको बताई है... घबराते हुए बोला आयुष

राजीव सेन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया.. वह झटके से मुडा और फोन की तरफ बढ़ गया... कुछ ही देर में वह अवतार सिंह का नम्बर डायल कर रहा था

हैलो...

दूसरी तरफ से आवाज आते ही वह स्वर को सामान्य बनाने की कोशिश करते हुए बोला... अवतार को फोन दो

सिंह साहब तो यहा नहीं है सर... दूसरी तरफ से आवाज आई

किधर गया है ?

पता नहीं सर

सेन की आँखों में बेचैनी उभर आई

कब का गया हुआ है वो ? कुछ सोचकर पूछा उसने

दस बजे के करीब गये थे

कुछ कह कर गया की कहा जा रहा है ?

नहीं सर

राजीव सेन ने पलन्जर दबाया और सुरेश पाटील का नम्बर डायल करने लगा...

पहली रिंग में ही दूसरी तरफ़ से सुरेश पाटील की आवाज़ सुनाई दी... हैलो

राजीव सेन कुछ बोलने को हुआ मगर कुछ सोच कर उसने रिसीवर रख दिया...

वह वापिस पलटा और आयुष की तरफ देखते हुए कहा

तुम यही ठहरो , मैं चेंज करके आता हूं

आयुष ने खामोशी से सिर हिला कर जवाब दिया

राजीव सेन ड्रेसिंग रूम में चला गया.. जल्द ही वह वापिस लौटा तो अपनी यूनिफॉर्म में था

आओ... दरवाजे की तरफ बढते हुए बोला वह

उसके पीछे पीछे चलते हुए आयुष के होंठों पर तब पहली बार रहस्यमयी मुस्कान उभरी थी, मगर उसने उसी पल मुस्कान को दबा लिया और पुनः गंभीर नजर आने लगा

राजीव सेन के साथ चलते हुए वह उसकी एम्ब्रेसेडर के करीब पहुंच कर ठिठका...

बैठो... राजीव सेन बोला

स-सर.. आप के साथ.. मैं भला कैसे...

बाकी शब्द अधुरे ही रह गए आयुष के कि गुर्राया सेन...

बैठो

और तेजी से हडबडाते हुए वह पिछला दरवाजा खोल कर सीट पर बैठ गया.. तब तक कार का ड्राइवर वहां पहुंच चुका था

राजीव सेन भी जब पिछली सीट पर बैठ गया तो ड्राइवर ने स्टियरिंग संभाल लिया

देवी मंदिर चलो... ड्राइवर की खोपड़ी पर निगाह डालते हुए आदेश भरे स्वर में बोला राजीव सेन

ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर के आगे बढा दी , तभी आयुष कह उठा...

लेकिन सर, देवी मंदिर जाने से क्या फायदा होगा ?

क्यों ? राजीव सेन उसकी तरफ़ देखते हुए आँखें सिकोड़ कर गुर्राया.. अवतार ने जोगलेकर को वहां नहीं बुलाया था ?

वहां तो सिर्फ मिलने के लिए कहा था , वहां से आगे वह उन्हें कहा ले जायेगा.. इसका क्या पता

फिर भी पहले हम देवी मंदिर जायेंगे.. कुछ सोचते हुए बोला सेन

आयुष ने अपने होंठ भींच लिये

ऊपर से वह बेशक गंभीर बना हुआ था लेकिन मन ही मन ठहाके लगा रहा था

अब पता लगेगा तुम्हें कुत्तों... तुम्हारा सत्यानाश करने वाला रायपुर में आ गया है, बहुत दुख दिये हैं तुमने लोगों को, अब तुम रोओंगे... खून के आंसू रोओंगे और उन आंसूओं का अंत तुम सब की बर्बादी पर होगा... हा-हा-हा...

Too be continue

 
आयुष के साथ राजीव सेन ने जैसे ही खंडहर में प्रवेश किया, उसके कदम वही थम गये

नजरे एकटक जोगलेकर और अवतार सिंह की लाशों पर टिक गई.... चॉंद की रोशनी में दोनों की लाशें साफ पहचानी जा सकती थी

आयुष हालांकि पहले से ही जानता था कि खंडहरों में उसे दोनों की लाशों के दर्शन होंगे, फिर भी लाशें देखकर उसका कलेजा उछल कर हलक में आ गया

य यह तो इंस्पेक्टर साहब की लाश है सर.... कांपते स्वर में बोला आयुष

देख रहा हूँ.... गुर्राया राजीव सेन... साथ में उस हरामजादे अवतार सिंह की लाश को भी देख रहा हूँ

आयुष थूक निगल कर रह गया

तभी राजीव सेन की निगाहें दोनों लाशों के करीब पडी रिवॉल्वरो पर पड़ी

रिवॉल्वरे देखते ही वह फौरन इस नतीजे पर पहुंचा कि अवतार सिंह के सामने आते ही जोगलेकर ने उस पर रिवॉल्वर तान दी और उससे यही पर स्कीम बताने को कहा.... ताकी वह उस स्कीम को बतौर सबूत भुना सके.... अवतार सिंह के बारे में भी वह जानता था कि बेहद फुर्तीला और खतरनाक है सो अवश्य ही अवतार सिंह खतरे को भांप गया होगा सो उसने जोगलेकर को खत्म करने के लिए बिना अपनी तरफ तनी रिवॉल्वर की परवाह किये अपनी रिवॉल्वर निकाली और जोगलेकर पर फायर कर दिया... उधर जोगलेकर ने भी स्थिति को परखते हुये फायर कर दिया

नतीजा..... दोनों एक दूसरे की गोली का शिकार हो गए

जोगलेकर की मौत राजीव सेन के दिमाग में बस एक ही बात बिठा रही थी कि आयुष ने जो कहा है, सही कहा है.. यानी उसका पार्टनर उसकी बेटी पर बुरी नजर रखता था

उस पर..... जिसे वह बेटी बेटी कहते नही थकता था

कमीने..... उसके होंठों से फुंफकार निकली

हरामजादे..... आस्तिन के सांप.... दोस्त बनकर, भाई बनकर, तूने मेरी ही पीठ में जो छुरा भोंकने की कोशिश की है.... उसकी सजा तुझे मिलेगी और जरूर मिलेगी..... मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा हरामजादे..... जमीन में गाडकर रख दूंगा तुझे...... मेरी बेटी की तरफ आंख उठाने वाले को मैं जिंदा नहीं छोड़ता

बडबडाते हुए वह झटके से आयुष की तरफ मुडा और सुर्ख आंखों से घूरते हुए फुंफकारा.... यहां कही टेलिफोन बूथ है .?

य यस सर.... तत्परता से बोला आयुष... मंदिर के बाहर एक पब्लिक बूथ है

तू यही ठहर, मैं आता हूँ

यस सर....

राजीव सेन खंडहर से बाहर निकला तो आयुष के होठों पर जहर भरी मुस्कान नाच उठी

उसने लाशों की तरफ देखा और बडबडाया.... बहुत जल्द तुम्हारा एक बाप तुम्हारे पास आने वाला है... स्वागत के लिए नर्क के दरवाजे पर खड़े हो जाना.... फिर अपनी ही बात पर होले से हंस पडा....

ट्रिन - ट्रिन...

फोन की घंटी बज उठी

सुरेश पाटिल की आंख खुल गई

अभी कुछ देर पहले घंटी बजी थी... उसने फोन उठाया... हेल्लो कहा तो फोन कट गया

इसी वजह से उसे थोडी झुंझलाहट हुई थी, मगर फिर पुन: सो गया

अब फिर घंटी बज उठी थी

उसने आंखे मिचमिचाते हुए फोन की तरफ देखा फिर लेटे लेटे ही थोडा सरककर बाहं लम्बी करके फोन उठाया और उनींदे स्वर में हेल्लो बोला

मैं बोल रहा हूँ सेन... दूसरी तरफ से आवाज आई

एकदम से चौकन्ना हो गया सुरेश पाटिल और उठ कर बैठ गया

खैरियत तो है सेन....

तुम फौरन देवी मंदिर के पीछे वाले खंडहरों में आ जाओ, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ... सेन बोला

लेकिन बात क्या है ? कुछ बताओगे भी या.....

यहां आओगे तो सब मालूम पड जायेगा

यार तुम तो सस्पेंस में डाल रहे हो....

चौधरी साहब और प्रताप सिंह को भी फोन कर दिया है मैंने.... तुंरत यहा पहुंचो

उसी के साथ फोन कट गया.... सुरेश पाटिल हैरान... ऐसी क्या बात हो गई जो सेन उसे देवी मंदिर के पीछे बुला रहा है और कारण भी तो नहीं बताया

जो भी था उसे जाना तो था ही, आखिर पार्टनर ने बुलाया है और फिर दूसरे पार्टनर भी तो वहां पहुंच रहे हैं

उसने फोन रखा और बैड से उतर कर वाश बेसिन के आगे आ खडा हुआ

जल्दी जल्दी उसने अपना चेहरा धोया, तौलिये से मुंह साफ किया और वार्डरोब की तरफ बढ़ गया

जल्दी जल्दी कपड़े बदले और बैडरूम से बाहर आकर ड्राइंगरूम में पहुंचा, वहां से कम्पाउंड में, कम्पाउंड से निकल कर वह पोर्च में खडी अपनी कार की तरफ बढ़ गया

ड्राइवर सीट पर बैठ कर उसने कार स्टार्ट की ओर बैक करता हुआ ड्राइव वे पर ले आया

 
गेट पर खड़े गार्ड ने जब कार की आवाज सुनी तो उसने फौरन गेट खोल दिया

सुरेश पाटील कार चलाते हुए बाहर निकल गया

मौत का सफर आरम्भ हो गया

तुम जाओ आयुष... वापिस खंडहर में प्रवेश करते ही बोला सेन....

यस सर...

और जोगलेकर ने तुमसे जो बात की थी, उसे भूल जाना

ज..जी..... हडबडाया आयुष

यह भी भूल जाना कि तुम मुझे लेकर यहां आये थे

य...यस सर

अगर तुमने किसी के आगे यह बात की और मुझे पता चल गया तो तुम्हारी नौकरी बेशक रहेगी लेकिन नौकरी करने के लिए तुम जिंदा नही रहोगे

मैं किसी को कुछ नहीं कहूंगा सर... बनावटी स्वर में आयुष बोला

शाबाश.... अब जाओ और जितनी जल्दी हो सके अपने घर पहूंचो और आराम से सो जाओ

यस सर कहकर आयुष खंडहरों से बाहर निकल आया

सेन कुछ पल लाशों को देखता रहा फिर वह भी खंडहरों से बाहर आकर खड़ा हो गया

आयुष को उसने वहां से इसलिए भेजा था कि कहीं सुरेश पाटील के मुंह से कोई ऐसी बात ना निकल जाये जो आयुष के सुनने लायक न हो.... ऐसी वैसी किसी बात का वह कल को कोई फायदा भी उठा सकता है... इसलिए उसे वहा से चलता कर दिया

तभी उसकी निगाह अपने ड्राइवर पर पड़ी, जो की कार के बाहर बोनट से टेक लगाये खडा था

इधर आओ... सेन ने उसे आवाज लगाई

ड्राइवर लपकते हुए उसके सामने अदब से आ खडा हुआ

गाडी में बैठ जाओ और शिशे चढा लो

यस सर... हैरान होता हुआ ड्राइवर बस यहीं बोल पाया

खबरदार जो बाहर निकलने की कोशिश की, चुपचाप कार में बैठे रहना...

ड्राइवर की खोपड़ी नाच गई ऐसा आदेश सुनकर

यस सर कहकर वापिस कार की तरफ मुड़ गया ड्राइवर

सेन वापिस खंडहर में घुसा और आगे बढ़कर अवतार सिंह कि लाश के करीब पहुंच गया

हरामजादे... उसने लाश को ठोकर मारी.... मेरी बेटी को अगवा करना चाहता था सूअर की औलाद

लाश करवट में लूठक गई

राजीव सेन झुका और जमीन पर पड़ी उसकी रिवॉल्वर उठा कर जेब में रख ली

लाश को वापस ठोकर मार कर उसने दिल की भड़ास निकाली और पुन: खंडहर से बाहर आ गया

अब उसे सुरेश पाटिल का इंतजार था

यह इंतजार उसे किस कदर भारी पड़ रहा था यह तो उसका दिल ही जानता था

इंतजार करने के साथ साथ उसे खतरे की भी धुकधुकी लग रही थी कि कही पाटिल चौधरी या प्रताप सिंह को फोन ना कर दे

अगर उसने ऐसा किया तो वह चौकन्ना हो जायेगा, तब हो सकता है वह यहा आये ही नहीं

करीब बीस मिनट के लम्बे इंतजार के बाद उसे देवी मंदिर की तरफ आती सड़क पर किसी वाहन की हैडलाईट नजर आई

राजीव सेन सतर्क हो गया

हैडलाईट करीब आई तो उसने पाटिल की कार को तुरंत पहचान लिया

राजीव सेन की आंखों में खुंखार भाव उभरने लगे चेहरे पर कठोरता फैल गई

पाटिल की कार उसकी कार के बगल में आकर रुकी और फिर सुरेश पाटिल उसमें से बाहर निकला

उस पर निगाह पडते ही राजीव सेन के चेहरे पर उत्तेजना फैलने लगी... यह तो वही जानता था कि वह स्वयं पर किस तरह काबू पाये हुए था

सुरेश पाटिल ने भी उसे देख लिया था सो वह सीधा उसकी तरफ बढ़ गया

क्या बात हो गई जो तुमने यहा पहुंचने के लिए अफरा तफरी मचा दी.... करीब आते हुए बोला पाटिल

आ तुझे एक चीज दिखाता हूं... राजीव सेन उसकी तरफ़ पीठ करते हुए बोला और खंडहर में प्रवेश कर गया

उसके पीछे चलते हुए जैसे ही सुरेश पाटिल खंडहर में प्रविष्ट हुआ, उसके हलक से घुटी हुई सी चीख निकल गई

ओह नो...

फटी-फटी आंखों से वह जोगलेकर और अवतार सिंह की लाशों को देखने लगा, फिर उसने राजीव सेन की तरफ देखा और पूछा

... किसने मारा इन्हें ?

सेन ने घुरकर उसे देखा... तुम बताओ, कौन मार सकता है इन्हें ?

मौजूदा वक्त में तो केवल पुनीत शर्मा ही हमारा दुश्मन है

सेन की आंखों में खून उतर आया और होंठों पर भयानक मुस्कान नाचने लगी

मैं जानता था तेरा यही जवाब होगा, क्योंकि यही जवाब तुम सोचकर जो आये हो

सुरेश पाटिल की खोपडी घूम गई सेन की टोन सुनकर, हैरानी से उसे देखते हुए पूछा... तुम कहना क्या चाहते हो ?

एक्टिंग भी अच्छी कर लेता है तू, वकील जो ठहरा... अदालत में झूठ बोलकर भी ऐसी एक्टिंग करनी पड़ती है कि जज तुझे सच्चा समझे.... लेकिन मेरे सामने तेरी कोई एक्टिंग नही चलेगी हरामी

य.. यह तू क्या बक रहा है सेन... तेरी तबीयत तो ठीक है ना?

मेरी तबीयत अब ठीक हो चुकी है हरामी, पहले मैं धोखे का शिकार था हरामजादे

कहने के साथ ही उसने जेब से रिवॉल्वर निकाल कर सुरेश पाटिल पर तान दी

 


रिवॉल्वर देख कर पाटिल के चेहरे पर खौफ उमड आया, रंगत पीली पड़ गई

यह तू क्या कर रहा है सेन ? कहीं तू पागल तो नही हो गया है ?

तेरी मौत तेरे सामने खड़ी है आस्तीन के सांप... मेरी ही बेटी के साथ रेप करने के सपने देख रहा था तू

बूरी तरह से उछल पडा़ सुरेश पाटिल

य... यह क्या कह रहा है तू नयना जैसे तेरी बेटी है वैसे.....

अपनी गंदी जुबान से मेरी बेटी का नाम मत ले हरामखोर... तेरी असलियत जान चुका हूँ मैं.... अवतार को तुने अपने साथ मिला लिया और जोगलेकर को लालच भी दिया.... शुक्र है कि जोगलेकर ने मेरे प्रति वफादारी निभाई, वर्ना अब तक तो तू मेरी बेटी को लूट चुका होता....

यह तू कैसी बहकी बहकी बाते कर रहा है यार.. जरूर किसी ने तुझे मेरे खिलाफ भडकाया है

अब इसका इल्जाम भी पुनीत शर्मा पर लगा दे कि उसने मुझे तेरे खिलाफ भडकाया है

पाटिल ने जोरो से थूक निगली और धडकते दिल को किसी तरह संभालने की कोशिश करते हुए बोला.. वह बहुत चालाक है सेन, जरूर उसी ने तुझे मेरे खिलाफ भडकाया है ... म मैं कसम खाता हूं कि मैं नयनाश्री को अपनी बेटी की तरह मानता हूँ

तेरी बात का भरोसा नहीं मुझे , मेरे मातहत की लाश चीख चीख कर कह रही है कि इसका हत्यारा तू है सिर्फ तू, क्योंकि तेरे ही कारण इसकी मौत हुई है

मेरी बात समझने की कोशिश करो सेन, मैं....

तेरी बात सुनने की अवधि खत्म हो चुकी है हरामजादे... मैंने तुम्हें यहा बुलाया ही इसलिए है कि तुम्हें भी इनके पास पहुंचा दूं

न-नहीं..... थरथरा उठा सुरेश पाटिल.... देवता कूच कर गये पठ्ठे के.... मौत जो सामने खडी थी

मेरी बेटी की तरफ गंदी निगाह से देखने वाले को मैं जिंदा नहीं छोड़ता और तूने तो...

धांय....

बात करते करते उसने गोली चला दी

गोली सीधी सुरेाश पाटिल के माथे के ऐन बीचोबीच जा लगी

सुरेश पाटिल का जिस्म जोर से लहराया फिर धडाम से मुंह के बल निचे गिर पड़ा.... राजीव सेन ने नफरत भरी निगाहों से उसकी लाश को देखा फिर गुस्से से उस पर थूक दिया

फिर उसने रिवॉल्वर को जोगलेकर की लाश के करीब फैंका और खंडहर से बाहर निकल आया

क्या रहा ?

आयुष के कमरे में प्रवेश करते ही पूछा पुनीत शर्मा ने

आयुष आगे बढकर उसके सामने बैड पर बैठ गया

वही हुआ शर्मा जी जैसा आपने चाहा....

यानी राजीव सेन भडक उठा

न केवल भडक, बल्कि उसने फोन करके सुरेश पाटिल को वहा बुला भी लिया

इतनी जल्दी बुला लिया ? हैरानी दिखाई पुनीत ने... मैं तो यही सोच रहा था कि वह पहले जानकारी करेगा , फिर सुरेश पाटिल को खत्म करेगा...

अब तक तो उसने पाटिल को खत्म भी कर दिया होगा...

इसका मतलब यही निकलता है कि राजीव सेन जल्दबाज किस्म का दरिंदा है... वह सोचता बाद में कर पहले डालता है और ऐसे ही आदमी के कदम मौत की तरफ बढते हैं.... फिर आयुष के चेहरे पर निगाह टिकाई और बोला...

तुम्हारा यह काम खत्म हुआ आयुष, अब सुनो तुम्हें आगे क्या करना है...

आयुष थोडा खिसक कर पुनीत के करीब आ गया

तुम अभी दिल्ली के लिए रवाना हो जाओ... पुनीत बोला

दिल्ली ? चौंका आयुष

हा, वहा मेरे बडे भाई देव साहब से मिलना और उन्हें कहना कि हाईकोर्ट के वकील प्रशांत भूषण को फौरन रायपुर के लिए रवाना कर दे

आयुष ने सिर हिला दिया

उनसे कहना कि वकालतनाना भी साथ लेते आये

बेहतर.. मैं कह दूंगा

साथ ही उनसे ये भी कहना कि वे तुम्हारे रहने का बंदोबस्त करवा दे...

क्या मतलब ? एकबार फिर चौंक पडा आयुष

जब तक बाकी के तीनों अपराधी भी उपर नहीं पहुंच जाते, तुम दिल्ली में ही रहो

ल - लेकिन इस तरह तो राजीव सेन को पता चल जाएगा कि..

पता तो उसे सुबह होते ही चल जाएगा जब वह अपने पार्टनरों से मिलेगा.... पुनीत उसकी बात को काटते हुए बोला

फिर तो मेरी नौकरी गई

मुस्कुराया पुनीत.... फिक्र मत करो आयुष, अब जब तुम रायपुर वापिस आओगे तो तुम्हारे कंधे पर एक स्टार लगा होगा... एडिशनल सब-इंस्पेक्टर बन कर आओगे तुम यहां

आयुष पुनीत को ऐसे देखने लगा जैसे उसे लग रहा हो कि पुनीत मजाक कर रहा है

विश्वास नहीं हो रहा न ? सदाबहार मुस्कान के साथ बोला पुनीत

आपने बात ही ऐसी कह डाली कि...

पुनीत की बात कितनी सच और पुख्ता होती है इसका पता तुम्हें तब लगेगा जब तुम वापिस लोटोंगे.... कहकर पुनीत खडा हो गया

आओ मैं तुम्हें स्टेशन छोड दूं

आयुष भी फौरन खडा हो गया और बोला ... कोई पत्र भी साथ लिख देते तो साहब को मुझ पर पूरा विश्वास हो जायेगा

फिक्र मत करो, स्टेशन पहुंच कर लिख दूंगा

फिर दोनों वहा से निकल गये...

 


बुरी तरह से उछल पड़े थे निरंजन चौधरी और प्रताप सिंह... आंखें फट पडी, उन्हीं फटी फटी आँखों से वे राजीव सेन को देखने लगे, जिसने अभी अभी उनके सामने ऐसा विस्फोट किया था कि वे दोनों अभी तक उसके धमाके से उबर नहीं पाये थे

क.. क्या कहा तूने ? बडी मुश्किल से चौधरी के हलक से शब्द निकल पाये... जुबान जैसे तालु से जा लगी

पाटिल मर गया है... राजीव सेन ने भावहीन स्वर में कहा

क.. कैसे मर गया वह ? कल शाम तक तो भला चंगा था... प्रताप सिंह ने सकते की सी हालत में पूछा

सेन ने उसकी तरफ़ देखा और गम्भीरता से बोला.... मैंने उस कुत्ते को गोली से उडा दिया है

इस बार का विस्फोट पहले से भी कई गुणा तेज था

दोनों एक साथ चिंहुक उठे... आंखें फटने की कगार तक जा पहुंची

हलक का सारा पानी सूख गया चौधरी के... उसने पास ही रखा पानी का गिलास उठाया और एक ही सांस में पीता चला गया.... पानी पीकर कुछ राहत की सांस लेकर बोला चौधरी....

तू.. तू होश में तो है सेन ? जानता है तू क्या कह रहा है ?

मैं बिल्कुल होश में हूं चौधरी साहब... मगर वह हरामजादा अपने होश गंवा बैठा था, इसलिए मैंने उसे गोली मार दी

ल. लेकिन क्यों ? क्यों मार डाला तूने उसे ? प्रताप सिंह के होंठों से थर्राया स्वर निकला

क्योंकि वह हरामी मेरी बेटी पर गंदी निगाह रखे हुए था

क्या....?

दोनों के होंठों से एक साथ निकाला...

ऐसी सूरत में भला मैं कैसे बरदाश्त कर सकता था

यह तू क्या बक रहा है , नयना को तो वो अपनी बेटी मानता था...

वह कुत्ता आंखों के पीछे गंदगी समेटे हुए था... बहुत दिनों से वह नयना को पाने के ख्वाब देख रहा था... कल जब पुनीत शर्मा फरार हुआ तो उसे अपनी इच्छा पूरी करने का मौका मिल गया ...

सब कुछ बताता चला गया राजीव सेन

उसकी बातें सुनकर निरंजन चौधरी और प्रताप सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई

त..... तो क्या अवतार और जोगलेकर भी मारे गए ? प्रताप सिंह हडबडाये स्वर में बोला

जोगलेकर तो मेरी वफादारी निभाते हुए मरा जबकि अवतार को उसके किये की सजा मिली

बेवकूफ़

तभी चौधरी की आवाज में गुर्राहट उभर आई

क्या मतलब ? हकबका कर उसकी तरफ देखते हुए सेन के होंठों से निकला

चौधरी उसे खा जाने वाली नजरों से देखते हुए गुर्राया... समझ में नहीं आता कि तू एस पी कैसे बन गया, जबकि तू तो हवलदार बनने के लायक भी नहीं है

चौधरी साहब, आप मेरी बेइज्जती कर रहे हैं... रोष भरे स्वर में बोला सेन

बेइज्जती.... अरे मेरा तो दिल करता है कि जूता उतार कर तुझ पर पिल पडू... लगाऊं सौ और दिन एक

आपकी बातों से लगता है कि बजाय मुझसे सहानुभूति करने के आप पाटिल का पक्ष ले रहे हैं

तू ठीक समझ रहा है... भडका चौधरी... अबे अक्ल के अंधे, आयुष ने आकर तुझे बताया और तूने यकीन कर लिया... ये नही सोचा कि पाटिल से तेरे सम्बन्ध कैसे हैं और कितने पूराने है

मैंने यूं ही उसकी बातों पर विश्वास नहीं कर लिया चौधरी साहब, अवतार और जोगलेकर की लाशों को देखकर ही मैंने उसकी बात को सच माना...

और फौरन पाटील को बुलाकर उसकी मौत के परवाने पर दस्तखत कर डाले... उपहास उडाने वाले अंदाज में कहा चौधरी ने

मेरी जगह अगर आप होते तो आप भी वही करते जो मैंने किया है

मैं तुम्हारी तरह बेवकूफ़ नहीं हुं जो ऐसा करता... गुर्राहट भरी आवाज में बोला चौधरी... आंखे बंद करके मैं आयुष की बात पर विश्वास नहीं करता, बल्कि पहले पूरी जानकारी करता फिर उसके हलक में हाथ डालकर उससे सच्चाई उगलवाता, फिर अपना अगला कदम उठाता

आयुष को मैं जानता हूं, पूरे थाने में एक वही ऐसा शख्स हैं जो न रिश्वत लेता है और न ही कानून के खिलाफ जाता है... राजीव सेन बोला

क्या उसे तुम्हारे बारे में जानकारी है... तभी प्रताप सिंह ने पूछा

हो सकता है मालूम हो...

ऐसी सूरत में सोचो एक न्यायप्रिय सिपाही कानून को बचाने के लिए क्या करेगा

त.. तुम यह कहना चाहते हो कि उसने हमारे खिलाफ चाल चली है... अविश्वसनीय स्वर में बोला सेन

हाँ... और जरूर उसकी पीठ पर पुनीत शर्मा का हाथ होगा.. अब तक वह अकेला था इसलिए कुछ नहीं कर पाया , या यूं कह लो वह मजबूर था... मगर अब जब पुनीत शर्मा उसके साथ है तो वह भी खुल गया.... प्रताप सिंह ने कहा

तुम गलत सोच रहे हो पुनीत शर्मा तो उसे जानता तक नहीं

गलत हम नहीं तुम सोच रहे हो सेन... गुर्रा उठा निरंजन चौधरी

राजीव सेन मुंह फाड कर चौधरी को देखने लगा

अगर तुमने पहले ही पुनीत शर्मा के बारे में जरा भी खोजबीन की होती तो तुम्हें पता चल जाता कि वह कितनी पहुंची हुई हस्ती हैं... कल जब तुम उसकी फरारी की खबर सुनाकर गये थे तो तुम्हारे जाते ही मैंने दिल्ली में अपने दोस्त बलवंत को फोन करके पुनीत शर्मा के बारे में पूछा था , जानते हो उसने क्या कहा

क्या कहा... राजीव सेन के मुंह से शब्द अपने आप ही फिसल गये

उसने कहा कि पुनीत शर्मा जो न कर गुजरे वही कम है, वो एक ऐसा वकील है जो जितनी जुबान अदालत में चलाता है उससे ज्यादा हाथ पैर अदालत के बाहर चलते हैं... अंडरवर्ल्ड में कसाई के नाम से मशहूर है वह , जिस भी अपराधी पर उसकी टेढ़ी नजर पड गई... वह या तो ऊपर पहुंच गया या जेल में .. वन मेन आर्मी हे वो... लोमड़ी से ज्यादा चालाकी.. चीत्ते से भी ज्यादा फुर्तीला.. बस यह समझ लो कि मुजरिमों का काल है

मैं मानता हूं आपकी बात, लेकिन आयुष तक कैसे पहुंच गया...

इसके बारे में तो अब आयुष ही बताएगा... वैसे मैं तुम्हें बता दूं कि पुनीत शर्मा ने पहले कोई चाल चल कर जोगलेकर और अवतार को देवी मंदिर के पीछे बुलाया और उन्हें खत्म कर दिया... उसके पश्चात उसने आयुष को तुम्हारे पास भेजा, ऐसी स्कीम बनाकर जिसे सुनते ही तुम अपना आपा खो बैठे और पाटिल को मौत के घाट उतार दिया

यही तो चाहता है वह हरामजादा कि हम सब मर जाये... प्रताप सिंह गुस्से में बोला

राजीव सेन के चेहरे पर अब पसीने की बूँदें चमकने लगी थी... आंखों में सोचे उभर आई थी , अब उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था कि आयुष की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए था

याद है अदालत में पुनीत शर्मा ने क्या कहा था ... तभी प्रताप सिंह बोला... उसने कहा था कि इंसाफ और सत्य की रक्षा के लिए अगर उसे कानून से टकराना भी पडा तो भी पीछे नहीं हटेगा... अवतार और जोगलेकर का खून और तुम्हारे हाथों पाटिल का खून, यह सब कानून से टकराना ही तो है.... हमें चिढा रहा है वो हरामजादा कि हम - जिनकी जुबान से निकला शब्द कानून माना जाता है, उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते और वह अपना काम मजे से कर रहा है

 


राजीव सेन ने जेब से रूमाल निकाल कर पसीना पोंछा और सहमे लहजे में बोला... मैं आयुष से बात करूंगा

करूंगा ? गुस्से से भडक उठा चौधरी... उसे यहां बुला, हमारे सामने, ताकि हम भी उससे पूछ सके कि किसके कहने पर उसने तुम्हारे हाथों पाटिल का फातिहा पढवाया

वो तो पुनीत शर्मा ने ही करवाया है... प्रताप सिंह कह उठा

मैं जानता हूं , मगर यही बात मैं उस कमीने के मुंह से सुनूंगा फिर अपने हाथों से साले की गरदन तोडूंगा... अभी के अभी फोन कर थाने और सब इंस्पेक्टर को बोल कि वह आयुष को लेकर फौरन यहा पहुंचे

राजीव सेन ने हाथ आगे बढाकर फोन का रिसीवर उठाया और थाने का नम्बर मिलाने लगा....

हेलो... दूसरी तरफ से आवाज आते ही वह बोला... सब इंस्पेक्टर खरे को फोन दो

कुछ ही पल बाद जब खरे लाईन पर आया तो सेन बोला.. आयुष को लेकर फौरन चौधरी साहब की हवेली पहुंचो खरे...

क्या ? अभी तक पहुंचा नही वह...

दो कांस्टेबल उसके घर भेजो... मुझे फौरन से पेश्तर आयुष चाहिए

सेन ने रिसीवर रखा और चौधरी की तरफ कुछ कहने को हुआ ही था कि चौधरी पहले ही बोल पड़ा

मैंने सुन लिया है सब... अब एक बात मेरी भी सुन लो, आयुष अपने घर पर भी नहीं मिलेगा

यह आप क्या कह रहे हैं ? हैरानी से बोला सेन

जुर्म की दुनिया में यूं ही तो हुकूमत नही कर रहा सेन , आयुष से पुनीत शर्मा को जितना काम लेना था ले लिया , अब उसे अंडरग्राऊंड कर दिया...

अगर ऐसा है तो मैं उस हरामजादे को पाताल से भी खोज निकालुंगा..

रहने दे.. रहने दे.. व्यर्थ के दावे मत कर , पुनीत शर्मा को तो अभी तक खोज नहीं पाया और दावे करने चला है

राजीव सेन ने सकपका कर सोफे पर पहलु बदला...

एक बेवकूफी तो तू कर चुका है सेन... तभी प्रताप सिंह बोला.. तेरी उसी बेवकूफी के कारण हमारा एक साथी हमसे बिछुड़ गया... भगवान के लिए अब कोई और बेवकूफी मत कर बैठना... कहीं कल को फिर पुनीत शर्मा की चाल का शिकार मत हो जाना

राजीव सेन बिचारा क्या बोलता... अपने किये पर उसे जो पछतावा हो रहा था वो तो वो ही जानता था.. सो केवल थूक गटक कर रह गया

स्कॉच निकालिये चौधरी साहब... प्रताप सिंह उदास स्वर में बोला... पाटिल की मौत का गम गलत करने का अब बस यही एक रास्ता नजर आ रहा है...

चौधरी ने गहरी सांस ली और दरवाजे की तरफ देखते हुए आवाज़ लगाई..

बहादुर...

दस सेकंड में ही बहादुर कमरे में था

स्कॉच लाओ... चौधरी आदेश भरे स्वर में बोला

बहादुर ने सिर झुकाया और बाहर निकल गया

कुछ ही देर में वे स्कॉच के पेग लगा रहे थे

तीनों के बीच एक पैनी खामोशी छाई हुई थी

Pin drop silence

उस वक्त राजीव सेन दूसरा पेग खतम करके तीसरा पेग उठा रहा था कि फोन की घंटी बजी

पुलिस स्टेशन से आया होगा... राजीव सेन बोला और फोन की तरफ हाथ बढ़ाया

हेलो... एस पी राजीव सेन स्पीकिंग

मैं एस आई खरे बोल रहा हूँ सर... दूसरी तरफ से आवाज आई

आयुष को अभी तक लाये क्यूँ नही तुम ?

वह अपने मकान में भी नहीं है सर...

व्हाट ? गर्जा राजीव सेन

उसके घर तो ताला लगा हुआ है सर

मुझे हर हाल में आयुष चाहिए खरे... ढूंढो उसे... कहीं से भी ढूंढो..

यस सर

भिन्नाते हुए राजीव सेन ने रिसीवर फोन पर पटक दिया

क्यों ... अब तो तुम्हें विश्वास हो गया ना कि पाटिल बेकसूर था... चौधरी कहे बिना नही रह पाया

मुझे और शर्मिंदा मत कीजिए चौधरी साहब... पश्चाताप भरे स्वर में बोला सेन.. अपनी गलती का अहसास हो रहा है मुझे , समझ में नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं

गहरी सांस छोडी चौधरी ने

जो होना था हो गया , पाटिल की मौत तेरे ही हाथों से होनी लिखी थी... अब आगे संभल कर रहना और कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले हमसे सलाह ले लेना

मगर अब उनकी लाशों का क्या करेंगे हम ?

अभी तक कुछ किया नहीं तुमने ?

मैंने खरे को बस यही कहा है कि एफआईआर में पुनीत शर्मा के सिर तीनों कत्ल लिख दो

ठीक किया... बोला प्रताप सिंह... अब बस एक बार वह हमारे हत्थे चढ़ जाये, फिर हरामी को सीधा फांसी की सजा सुनाऊंगा

वो नौबत आने से पहले ही उसे गोली से उड़ा दिया जाएगा... पहली बार राजीव सेन गुर्राया... इस वक्त जितना खून मेरा जल रहा है, वो मै ही जानता हूँ

सेन ठीक कह रहा है...

ईधर आयुष दिल्ली बिग बॉस प्राइवेट डिटेक्टिव के ऑफिस में पहुंच चुका था.. और रिसेप्शनिस्ट को अपने आने का मंतव्य बताया.... मगर देव साहब इस वक्त ऑफिस में नही थे तो रिसेप्शनिस्ट ने सीधे प्रशांत को ही कॉल किया

(वैसे प्रशांत पुनीत का ही असिस्टेंट था)

सर.. रायपुर से कांस्टेबल आयुष आये हैं

इन्टरकॉम में से रिसेप्शनिस्ट की आवाज सुनकर चौंका प्रशांत , फिर फौरन बोला... उसे अंदर भेज दो

यस सर... रिसेप्शनिस्ट बोली

एक मिनट बाद आयुष झिझकता हुआ प्रशांत के शानदार ढंग से सजे ऑफिस में पहुंचा

आओ बैठो... प्रशांत गहरी नजरों से देखते हुए आदर भरे स्वर में बोला

आयुष एक विजिटिंग चेयर पर बैठ गया

म.. मुझे पुनीत शर्मा जी ने भेजा है... झिझकते हुए आयुष ने कहा

प्रशांत जानता था कि पुनीत रायपुर गया हुआ है , अवश्य ही कोई खास बात होगी...

क्या कहा उन्होंने.... प्रशांत ने पूछा

 
जवाब देने के स्थान पर आयुष ने जेब से तय किया हुआ एक पर्चा निकाला और प्रशांत की तरफ बढ़ा दिया

हाथ आगे बढाकर प्रशांत ने पर्चा लिया और उसे खोलकर पढने लगा

पत्र पढते हुए उसके होठों पर अर्थ भरी मुस्कान दौड गई

हालांकि पत्र देव साहब के नाम था मगर प्रशांत सब कुछ समझ गया था

आपका भी जवाब नही सर... वह बडबडाया और पर्चा मेज पर पेपर वेट से दबाते हुए आयुष से बोला....

बताइये चाय पियेंगे या ठंडा ?

ज.. जी.. कुछ नहीं.... झिझकते हुए बोला आयुष

मुस्कुराया प्रशांत... यह देव साहब का ऑफिस है , यहा अगर शर्म करोगे तो भूखे ही रह जाओगे , क्योंकि यहां दोबारा पूछने का रिवाज नहीं है

फिर तो बहुत भूख लगी है

हंस पडा प्रशांत

आयुष भी मुस्कुरा उठा

आओ... वह खडा होते हुए बोला

आयुष को साथ लिये वह रिसेप्शनिस्ट के पास पहुंचा... रिसेप्शनिस्ट ने पहले आयुष पर निगाह डाली फिर प्रशांत की तरफ देखने लगी

सर ने भेजा है इन्हें और मुझे फौरन रायपुर के लिए बुलाया है... जाने से पहले काफी काम करने हे मुझे सो मिस्टर आयुष के खाने पीने और रहने का इंतजाम तुम्हें करना है

रिसेप्शनिस्ट ने सर हिला दिया

फिलहाल इन्हें भूख लगी है इसलिए इनके लिए खाने का प्रबंध करो

रिसेप्शनिस्ट ने पुनः सिर हिलाया

प्रशांत ने मुस्कुरा कर आयुष की तरफ देखा... आप बैठिये , मुझे अभी बहुत काम करने है और कोई भी तकलीफ हो तो आप मेडम को बता देना और जब बडे सर जी आये तो उनसे मुलाकात कर लेना.... इतना कहकर वह अपने ऑफिस की तरफ बढ़ गया

अपनी चेयर पर बैठ कर पहले देव साहब को सारी बात बताई... 5-7 मिनट देव साहब से बात करने के बाद उसने दो तीन जगह और फोन किये फिर टेबल की दराज खोलकर उसमें से वकालतनामा तथा अन्य कुछ जरूरी कागजात निकाल कर टेबल पर रखने लगा...

पता लगा उस हरामजादे का ? सोफे पर बैठते हुए बोला प्रताप सिंह

पता नहीं कहां गायब हो गया वह... राजीव सेन बोला.. हमारे गैंग के पचास आदमी उसे ढूंढने में लगे हुए हैं , पूरा पुलिस डिपार्टमंट पुनीत शर्मा की तलाश में हैं... पता नहीं उसे जमीन निगल गई या आसमान खा गया... मुझे तो लगता है वह हम लोगों के खिलाफ कोई पुख्ता जाल तैयार कर रहा है

चौधरी ने उसे घूरकर देखा... वह यहां पिकनिक मनाने के लिए नहीं आया है... हमें मारने की स्कीम नहीं बना रहा होगा तो क्या झक मार रहा होगा...

हडबडा कर राजीव सेन ने पेग उठा लिया

क्या हो गया है तेरी अक्ल को ? पहले तो ऐसा नही था तू... चौधरी रोष भरे स्वर में बोला

छोडिये चौधरी साहब... प्रताप सिंह हालात को सामान्य बनाने के उद्देश्य से बोला... अगर हम आपस में एक दूसरे की नुक्ताचीनी करते रहे तो पुनीत शर्मा इसका फायदा उठा सकता है

चौधरी ने दो तीन गहरी सांसे लेते हुए खुद को नार्मल करने की कोशिश करने लगा

इस सारे फसाद की जड़ वह हरामजादा विशाल है... प्रताप सिंह पुनः बोला... उसी के कारण पुनीत शर्मा यहां आया और हमें अपने एक पार्टनर के साथ साथ अवतार और जोगलेकर को खोना पडा... इससे अच्छा तो यही था कि उस पर मुकदमा चलाने की बजाय गोली मार देते , वह हरामी मर जाता तो आज हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता

हमें क्या पता था कि हमारी लुटिया डुबोने के लिए वह यहा आ टपकेगा , अपनी तरफ से हमने जो किया था सही किया था... जनता में अपनी इमेज बनाये रखने के लिए यह जरूरी भी था... लेकिन अब हालात बदल गए हैं , अब हमारे खिलाफ जंग छिड़ गई है और पुनीत शर्मा ने हमें पहली मात दे दी है... अब अगर हमने उसके हमले का जवाब नहीं दिया तो हम हिजड़े कहलाये जायेंगे... चौधरी बेबसी और गुस्से से मिले जुले स्वर में बोला

मगर हम कर भी क्या सकते हैं ... सेन बोला... पुनीत का हमे कोई अता पता नहीं चल रहा है , अगर पता होता तो अब तक दुश्मनी का सिलसिला ही खतम हो चुका होता

बेशक हमें उसका ठिकाना मालुम नहीं चल पाया , मगर फिर भी हम उसे चोट पहुंचा सकते हैं

राजीव सेन और प्रताप सिंह दोनों चौंके

कैसी चोट ? प्रताप सिंह उसे घूरते हुए बोला

चौधरी के होंठों पर भयानक मुस्कान नाच उठी , आंखों में धूर्तता भरी चमक कौंधने लगी

विशाल...

उसके होंठों से विशाल का नाम ऐसे निकला जैसे वह विशाल का कलेजा चबा रहा हो

क्या मतलब ? प्रताप सिंह ने सवाल किया

चौधरी ने गरदन राजीव सेन की तरफ घुमाई तो सेन एकदम से सतर्क हो गया

विशाल की मौत पुनीत शर्मा के हौंसले को काफी हद तक तोड़ सकती है

जोर का झटका लगा राजीव सेन को...

ल.. लेकिन वह तो जेल में बंद हैं

रामभरोसे को फोन करो , उससे बोलो कि विशाल कल का सूरज ना देख पाये

मगर जेल में हत्या करना नामुमकिन है

रूपया एक ऐसी चीज है जो नामुमकिन को मुमकिन बना देता है सेन... बीस लाख की ऑफर दे देना उसे , फिर देखना जेल में हत्या कैसे होती है

बीस लाख के लिए तो वह अपने बाप का भी कत्ल करने में देर नहीं लगायेगा... प्रताप सिंह हंसा... और उसकी मौत के बाद पुनीत शर्मा जिस तरह छटपटायेगा , उसका अहसास करके ही हम कुछ हद तक संतुष्ट हो जायेंगे कि हमने अपने दोस्त की मौत का आधा बदला ले लिया है

सेन ने समझने वाले अंदाज में सिर हिलाया और हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठा लिया

हेलो.. दूसरी तरफ से आपरेटर की आवाज़ आते ही वह माऊथपीस में बोला... मैं वार्डन रामभरोसे से बात करना चाहता हूं

बात करते हुए उसने अपनी आवाज को जितना ज्यादा हो सका , भारी बनाया , ताकि आपरेटर उसकी आवाज को पहचान ना सके

आप कौन बोल रहे हैं ? आपरेटर की आवाज़ आई

किशन, रामभरोसे मेरा ममेरा भाई हैं

होल्ड ऑन प्लीज

सेन रिसीवर पकडे इंतजार करने लगा...

 
चौधरी और प्रताप सिंह की निगाहें सेन के चेहरे पर टिकी हुई थी

चौधरी और प्रताप सिंह की निगाहें सेन के चेहरे पर टिकी हुई थी

हेलो... दूसरी तरफ से रामभरोसे की उलझन भरी आवाज़ आई

चौंकना मत रामभरोसे , और फोन पर मुझे किशन कह कर ही पुकारना.... अपनी असली आवाज में गुर्राया सेन

ओह... तुम केशू , मैं सोचा पता नही कौन किशन आ गया... कहो कब आये रायपुर में ?

विशाल कल का सूरज न देख पाये

य.. यह तुम क्या कह रहे हो ? ऐसा कैसे हो सकता है ?

हरामजादे चौंक मत... फुंफकारा राजीव सेन

बिलकुल नहीं जाना तुझे... आज ही आये हो और आज ही वापस जा रहे हो

दूसरी तरफ से आवाज आई

जाहिर था कि रामभरोसे अपने चौंकने का कारण आपरेटर पर स्पष्ट करना चाहता था

पूरे बीस लाख मिलेंगे ... सेन ने लालच की पूडिया फेंकी

मेरा आना बहुत मुश्किल है यार...

सेन समझ गया कि वो इंकार कर रहा है

इतनी दौलत एक मुश्त हाथ नही लगती रामभरोसे... सिर्फ एक कत्ल ही तो करना है

मगर ऐसा कैसे हो सकता है... दुविधा में बोला रामभरोसे

रकम तूने कमानी है तो यह सोचना तेरा काम है, मेरा नही

ठीक है ... गहरी सांस के साथ आवाज आई... मैं कोशिश करूंगा

अगर कामयाब रहे तो कल आकर रकम ले जाना... कहकर सेन ने फोन रख दिया और दोनों को फोन पर हुई बातचीत बताने लगा

क्या वह कत्ल कर पायेगा ? उसकी बात खतम होते ही प्रताप सिंह बोला

वह कोशिश करेगा.... मुस्कुराया चौधरी.. और मुझे पूरी उम्मीद है कि वह अपनी कोशिश में सफल होगा

खट - खट - खट

दो बार लगातार खटखटा कर प्रशांत रूका फिर थोडा सा गेप डाला फिर तीसरी बार दस्तक दी

करीब आधे मिनट बाद दरवाजा खुला

सामने पुनीत खडा था

पुनीत मुस्कुराया और एक तरफ हट गया

प्रशांत चुपचाप भीतर प्रवेश कर गया , उसके दांये हाथ में एक ब्रीफकेस लटक रहा था

पुनीत ने तुरंत दरवाजा बंद किया और सिटकनी चढा दी

विशाल का मकान था यह जिसमें इस वक्त पुनीत पनाह लिए हुये था

पुलिस क्या , चौधरी और उसके पार्टनरों को सपने में भी गुमान नहीं हो सकता था कि पुनीत यहा हो सकता है...

अंदर कमरे में पहुंच कर प्रशांत ने उसे नमस्ते की

कब आये ? सोफे पर बैठते हुए पूछा पुनीत ने

स्टेशन से सीधे आपके पास ही आ रहा हूँ... प्रशांत भी सोफे पर बैठते हुए बोला

काम करवाया ?

जी हां... ब्रीफकेस अपनी गोद में रखते हुए कहा... जैसा आपने पत्र में लिखा था , बिलकुल वैसा ही है... आप चेक कर लीजिए

कहकर उसने ब्रीफकेस खोल कर पुनीत के सामने कर दिया

पुनीत ने भीतर निगाह मारी , कुछ क्षण वह देखता रहा फिर संतुष्टी से सिर हिलाते हुए कहा... ठीक है , कितने हैं ?

पांच सौ... प्रशांत बोला

आगे क्या करना है यह तो तुम्हें पता ही है , और अपना ख्याल रखना , दुश्मन की नजर भी तुम पर नहीं पडनी चाहिए

फिक्र मत कीजिए सर... आपका शार्गिद हूं , इतनी आसानी से दुश्मन की निगाह में नहीं आने वाला... हंसते हुए कहा प्रशांत ने

अब तुम जेल जाओ, वहां विशाल से वकालतनामे पर दस्तखत कराओ और दिल्ली की सैशन कोर्ट में अपील कर दो

ओके सर...

और इस बात का ध्यान रखना , अपील करने के दौरान तुम्हें अदालत पर दबाव डालना है कि रायपुर में विशाल की जान को खतरा है इसलिए अदालत विशाल को दिल्ली जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दे

मैं पूरी कोशिश करूंगा

कोशिश नहीं , काम होना चाहिए.. एक बेगुनाह जो पुनीत की शरण में है , अगर उसे कुछ हो गया तो पुनीत शर्मा खुद को कभी भी माफ नहीं कर पायेगा

कहते हुए पुनीत की आवाज सख्त होती चली गई

जेलर ने सवालिया निगाहों से प्रशांत को देखते हुए कहा.... कहिये , किससे मिलना है आपको ?

मेरा नाम प्रशांत है , तीन रोज पहले पुनीत शर्मा जी आपसे मिले थे.. प्रशांत बोला

जी हां ...

वो मेरे सर है , उन्होंने ही मुझे यहां भेजा है... कैदी नम्बर 310 मिस्टर विशाल की तरफ से सैशन कोर्ट में अपील करनी है , उसके लिए वकालतनामे पर दस्तखत कराने है

जेलर ने समझने वाले अंदाज में सिर हिलाया और फिर बैल पर हाथ मार दिया

बाहर स्टूल पर बैठा संतरी तुरंत अंदर आया

इन्हें 310 से मिलना है.. जेलर बोला

आईये... संतरी ने अदब से कहा

कुछ ही देर में प्रशांत काल कोठरी में विशाल के सामने खड़ा था

हेलो विशाल.... वह मुस्कुराया

विशाल आंखों में असमजसता के भाव लिए उसे देखने लगा

 
प्रशांत उसके करीब जमीन पर ही बैठ गया और बोला... मैं पुनीत जी का असिस्टेंट हूं , प्रशांत

ओह... गंभीर स्वर में बोला विशाल

तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है

फिकी सी हंसी हंस के रह गया विशाल

सिर्फ सात दिन रह गये हैं मेरी जिंदगी के, मेरे लिए क्या खुशखबरी हो सकती है भला

प्रशांत खिसक कर उसके और करीब हो गया फिर फुसफुसाते हुए बोला... जोगलेकर , अवतार सिंह और सुरेश पाटिल अल्लाह को प्यारे हो गये हैं

जबरदस्त तरीके से चौंका विशाल , फिर उसकी आँखों में ऐसी चमक उभर आई जैसे नयी जिंदगी मिल गई हो

आप सच कह रहे हैं ?

बिलकुल सच है यह , और यह जो तुम जिंदगी के आखरी लम्हे गिन रहे हो, इन्हें गिनना छोड़ दो... सर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा ही इसीलिए है

ये कहकर प्रशांत ने हाथ में थमी फाईल खोली और पेन निकाल कर विशाल की तरफ बढाते हुए कहा... स्वयं को बेगुनाह साबित करने के लिए तुम सैशन कोर्ट में अपील कर रहे हो , इस वकालतनामे पर दस्तखत कर दो ताकि सर तुम्हारी तरफ से अपील कर सके

विशाल ने पैन लेकर दस्तखत कर दिये , जहां जहां प्रशांत ने बताया

प्रशांत ने फाईल बंद की ओर धीमी आवाज में बोला... अब एक काम करना है तुम्हें , मेरे जाने के फौरन बाद ही करना है

विशाल सवालिया निगाहों से उसे देखने लगा

मेरे जाने के बाद जेलर साहब से मिलने की इच्छा व्यक्त करोगे , जब जेलर साहब मिलने आये तो उनसे कहना तुम्हारी जान को खतरा है

क्या मतलब ? चिहूंका विशाल

जो कह रहा हूं वही करो , मतलब जानने की कोशिश मत करो... जेलर साहब के पूछने पर तुम उनसे कहोगे कि तुम्हें रामभरोसे नाम के वार्डन से खतरा है.... रामभरोसे को जानते हो ना ?

हां, जानता हूँ

तो बस कह देना कि उसने तुमसे कहा था कि तुम एक दो दिन के मेहमान हो... क्योंकि पुनीत सर नही चाहते कि तुम्हें कुछ भी हो... दुश्मन अंगारों पर लोट रहा है सो वह कोई भी ओछी हरकत कर सकता है , इसलिए तुम्हारी सेफ्टी उनके लिए बहुत जरूरी हो गई है

लेकिन रामभरोसे...

जो कहा है वही करो, आगे हम संभाल लेंगे

ठीक है , मैं वही करूंगा जो आपने कहा है... हथियार डालने वाले अंदाज में विशाल बोला

प्रशांत के होंठों पर संतुष्टि भरी मुस्कान तैर गई...

मेरी जान को खतरा है

सुनकर बुरी तरह से चौंका जेलर

प्रशांत के जाने के पांच मिनट बाद ही विशाल ने जेलर से मिलने की इच्छा जताई... फांसी की सजा पाये कैदी की इच्छा पूरी करना जेलर का फर्ज था सो वह उससे मिलने चला आया... और आते ही विशाल ने जो कहा उसे सुनकर जेलर का चौंकना स्वाभाविक ही था

जेलर ने उसे घूरकर देखा... तुम जानते हो तुम्हें एक हफ्ते बाद फांसी पर लटका दिया जायेगा...

मुझे मालूम है... गंभीरता से बोला विशाल

फिर भला कोई क्योंकर तुम्हारी हत्या करेगा

जेलर साहब... विशाल बोला... आपकी बात अपनी जगह सही है , लेकिन कानून की बजाय मुझे कोई और वक्त से पहले ही मार डाले तो वह हत्या कहलायेगी... और उसकी सारी जिम्मेदारी आप पर आयेगी , इसलिए फांसी की सजा मिलने तक मेरी हिफाज़त करना आपका फर्ज है

मुस्कुराया जेलर... लगता है तुम्हारा वकील तुम्हें काफी कुछ सीखा पढा कर गया है

आप ठीक समझ रहे हैं , जब मेरे वकील ने मुझसे कहा कि वह मुझे बाईज्जत बरी करा देगा तो मैंने उसे रामभरोसे वाली बात बताई

चौंका जेलर... साथ ही उसके कानों में पुनीत के कहे शब्द गूंजने लगे

"रामभरोसे पर निगाह रखियेगा"

क्या कहा रामभरोसे ने ?

कल उसने मुझसे कहा था कि वह वक्त से पहले ही मुझे ऊपर पहुंचा देगा , उस वक्त मैंने यही सोचा कि जब मौत आनी है तो दो दिन पहले भी आ गई तो क्या फर्क पड जायेगा... लेकिन अपने वकील के आत्मविस्वास को देख कर मुझमें जीने की तमन्ना पैदा हो गई है... इसलिए मैंने आपसे मिलने की इच्छा जताई थी

तो रामभरोसे ने तुम्हें खत्म करने की धमकी दी थी

धमकी नहीं वादा किया था जेलर साहब... उसने मुझे खत्म कर देने का वादा किया था

कारण बताया उसने ?

नहीं ...

गहरी सांस छोडी जेलर ने और सीखचों में हाथ डालकर विशाल के कंधे को थपथपाते हुए कहा... डोंट वरी मिस्टर विशाल , यह मेरी जेल हैं , यहा कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता... तुम्हारे फांसी पर चढने तक तुम्हारी जिंदगी की गारंटी मैं लेता हूं

विशाल कुछ नहीं बोला बस सिर हिला दिया

इधर जेलर की आंखों में अंगारे भरने लगे , चेहरा कठोर होता चला गया

रामभरोसे....

जेलर के होंठों से सांप की सी फुफकार निकली

सीन चेंज

तडाक...

थप्पड़ की तेज आवाज ऑफिस में गूंज उठी

रामभरोसे चीखता हुआ दूर जा गिरा

तो विशाल की हत्या करने की साजिश रची जा रही है... जेलर खौफनाक अंदाज में गुर्राया

रामभरोसे की आंखों में आंतक के साये लहरा गये... वह यही समझा कि उसे उसकी असलियत मालुम पड चुकी है... यह अलग बात थी कि पुनीत ने केवल विशाल की सुरक्षा के लिए यह चाल चली थी

बुरी तरह से कांप उठा रामभरोसे

 
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