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Guest
जैसे जैसे पुनीत बताता जा रहा था ... आयुष की हैरानी बढती जा रही थी..
गेट पर खड़े गार्ड ने सवालिया निगाहों से आयुष की ओर देखा
कहो.... गार्ड बोला
सर से मिलना है मुझे...
आयुष की आवाज में घबराहट और उत्तेजना को महसूस कर चौंका गार्ड... ऊपर से रात के साढ़े बारह बजे राजीव सेन से मिलना चाह रहा था
अवश्य ही कोई गंभीर मामला है
मगर राजीव सेन इस वक्त सो रहा था और उसे सोते हुए से जगाना सांप के बिल में हाथ डालने जैसा था , सो गार्ड बोला
साहब तो अभी सो रहे है , सुबह आ जाना
समझने की कोशिश करो , मेरा उनसे मिलना बहुत जरूरी है... अगर जरूरी नहीं होता तो मैं सुबह भी आ सकता था .. व्यग्र स्वर में बोला आयुष
लेकिन ......
मैंने कहा ना मेरा उनसे मिलना बहुत जरूरी है
सॉरी.... गार्ड बोला.. तुम सर से सुबह ही बात कर सकते हो... उनको इस वक्त जगाने का रिस्क मैं नही ले सकता
ठीक है ... कंधे उचकाते हुए बोला आयुष... लेकिन कल को अगर सर ने तुम्हारी छुट्टी कर दी तो मुझे दोष मत देना... मैं तो सर से कह दुंगा कि मैंने तुमसे बहुत मिन्नत मलानत की लेकिन तुम नहीं माने
अचकचाया गार्ड... कन्फ्यूज हो गया बिचारा.. कुछ पल सोचा फिर बोला
क्या मिलना सच में बहुत जरूरी है ?
मैंने कहा न , अगर जरूरी नहीं होता तो मैं इस वक्त आता ही क्यों ?
तुम यही ठहरो... मैं सर से बात करने की कोशिश करता हूँ
आयुष ने मौन सहमति देते हुए कंधे उचका दिये...
गार्ड गेट के पहलू में बने लकड़ी के बूथ में घुस गया
क्या नाम है तुम्हारा ? बूथ में से गार्ड ने गरदन बाहर निकाल कर पूछा
आयुष... कांस्टेबल आयुष ..
गार्ड की गरदन पुन: बूथ में गायब हो गई...
किर्र.. किर्र... किर्रर
इन्टरकॉम के बजर की आवाज सुनकर राजीव सेन की नींद उचट गई
लेटे लेटे ही उसने इन्टरकॉम को कच्चा चबा जाने वाले अंदाज में घूरा... फिर रिसीवर उठा कर कान से लगाते हुए गुर्राया...
तुम जानते हो जब मैं आराम कर रहा हूँ तो मुझे डिस्टर्ब पसंद नहीं , फिर भी ऐसी गुस्ताखी कर डाली
स-सॉरी सर.. गार्ड की घबराहट भरी आवाज़ आई... मैंने वो कांस्टेबल आयुष को बहुत समझाया कि आप से सुबह मिल ले... मगर वह कह रहा है कि आपसे मिलना बहुत जरूरी है
चौंका राजीव सेन... आँखों में सोचें उभर आई और पेशानी पर बल पड़ गये
ठीक है ... कुछ सोच कर खीजते हुए बोला... भेजो उसे
यस सर... गार्ड ने राहत की सांस ली
राजीव सेन बैड पर अधलेटी अवस्था में बैठ कर गहरी सोच में डूब गया
ऐसा क्या काम आन पडा कि आयुष को उससे मिलने के लिए रात के इस वक्त आना पड़ा
आयुष को वह जानता था... एक कांस्टेबल की हैसियत से नहीं , बल्कि एक इमानदार और सच्चे सिपाही की हैसियत से ... पूरे पुलिस डिपार्टमेंट में एक अकेला आयुष ही ऐसा शख्स था जो ना कभी किसी से रिश्वत लेता था और ना ही किसी का बुरा सोचता था
शूरू शूरू में उसने आयुष पर निगाह भी रखी , मगर बहुत जल्द उसे पता चल गया कि आयुष का दिल तो करता है कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाये.... लेकिन वह कर नही पाया , क्योंकि वह जान गया कि अकेला चना भाड नहीं फोड सकता... तो उसने भी निगाह रखना बंद कर दी और उसकी तरफ़ से लापरवाह हो गया
करीब पाँच मिनट बाद आयुष ने उसके बैडरूम में प्रवेश किया......
क्या बात है ? आयुष के भीतर प्रवेश करते ही राजीव सेन उस पर चढ गया... ऐसी कौनसी आफत आ पड़ी जो तू इस वक्त यहां आ मरा ...
हडबडाया आयुष या शायद अभिनय किया
सॉरी सर... बट
क्या बट .? भिन्नाया राजीव सेन
व..वो... इं..इंस्पेक्टर साहब...
चौकन्ना हो गया राजीव सेन साथ ही एक झटके में सीधा होकर बैठ गया
क्या हुआ जोगलेकर को ? आयुष के घबराये हुए चेहरे को देखकर कहा राजीव सेन ने
व.. वो अभी तक नहीं लौटे...
सेन की आँखें सिकुड गई... कहा गया है वो ?
पता नहीं सर...
बस इतनी सी बात बताने के लिए तू इस कदर मरा जा रहा था जो रात के इस वक्त मेरा सर खाने आ धमका.. गुर्रा उठा सेन
आयुष का दिल जोरो से धडक गया
ज..जाने से पहले इंस्पेक्टर साहब ने किसी से बात की थी.. आयुष ने सयंत होकर कहा
क्या बात ? सेन बोर होते हुए बोला
इंस्पेक्टर साहब ने दूसरी तरफ़ से बात सूनी फिर गुस्से में आ गए , फिर बोले.. तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई यह बात करने की.... आयुष ने होते डरते कहा
सेन को लगा कि कोई ऐसी बात जरूर है जिसे कहने में वह हिचकिचा रहा है , जिसे जुबां पर लाने में वह खौफ से मरा जा रहा है... सो उसने गहरी सांस ली और स्वर को नरम बनाते हुए बोला...
घबराओ मत आयुष, साफ साफ कहो बात क्या है ?
आयुष की आँखें भर आई
सर... वह भर्राये लहजे में बोला... नयनाश्री मेरी छोटी बहन जैसी है , मैं नहीं चाहता कि मेरी बहन का कोई अहित हो..
उछल पडा सेन जैसे गर्म तवे पर बैठा दिया हो.... आँखों में अंगारे झांकने लगे... चेहरा भट्टी के समान सुर्ख लाल हो गया
झपट कर वह आयुष के करीब आया और दोनों हाथों से उसका गिरेहबान पकड़ कर झिंझोडते हुए फुंफकारा....
तू... तू मेरी बेटी की बात कर रहा है ना आयुष ?
आयुष की आँखों से आँसू बह निकले
य-यस सर.... आँसू बहाते हुए बोला आयुष.. इसलिए मैं इस वक्त आपके पास आया हूँ
राजीव सेन का चेहरा गुस्से से तपने लगा...बता क्या बात है ? और खबरदार , जो तूने कोई भी बात छुपाई तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा... स्वर खूंखार हो गया सेन का
स..सर.....
घबरा मत , अगर तूने सच बताया तो कोई बाल भी बांका नहीं कर पायेगा तेरा
अ-आप बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे सर (आयुष भी शायद मजे ले रहा था)
तू बोल... बोल आयुष ...
झिंझोड़ कर उसके गिरेहबान को छोड़ दिया राजीव सेन ने मगर उसका चेहरा बता रहा था कि जैसे उसके अंदर ज्वालामुखी दहक रहा हो
आयुष ने थूक निगलते हुए अपना गिरेहबान दुरस्त किया और फिर सहमे लहजे में कहने लगा...
दस बजे के करीब इंस्पेक्टर साहब को फोन आया था , उस समय मैं उन्हें पानी देने के लिए ऑफिस में दाखिल हुआ था कि तभी फोन की घंटी बजी ....
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आयुष का बताया वार्तालाप
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हैलो... इंस्पेक्टर जोगलेकर स्पीकिंग
अवतार सिंह बोल रहा हूँ... दूसरी तरफ से आवाज आई
ओहो... कहिये सिंह साहब आज कैसे याद किया
पुनीत शर्मा मिला कि नहीं ?
अभी कहा ? पता नहीं कौनसे बिल में छुप गया है वह हरामजादा
नोट कमाना चाहते हो ?
यह भी भला कोई पूछने की बात है... लक्ष्मी तो हर किसी को प्यारी लगती है... आँखों में चमक लाते हुए कहा जोगलेकर ने
काम बहुत मुश्किल है , उसे सिर्फ तुम ही पूरा कर सकते हो
आप काम बताये सिंह साहब फिर देखिए जोगलेकर उसे कैसे आसान बनाता है
नयनाश्री
नाम सुनते ही चौंका जोगलेकर और उलझते हुए कहा... कौन नयनाश्री
तेरे एस पी की लड़की ... और कौन
क्या हुआ उसे ... जोगलेकर बोल उठा
पाटील साहब का दिल आ गया है उस पर
जोगलेकर की आँखों में खून उतर आया....