शर्म तो मुझे आ रही है मम्मी...नयना भर्राये लहजे में बोली.... कि मैं एक एस पी की नहीं एक खूनी - स्मगलर - कानून के दुश्मन की बेटी हूं
तडाक......
सुनीता का भरपूर थप्पड़ नयना के गाल पर पड़ा
आंखों में आंसू उमड़ आये... नयना का गाल झनझना गया
खबरदार जो अपने पापा के बारे में ऐसी उल्टी सीधी बात की तो, तेरे पापा को मैं तेरे पैदा होने से पहले से जानती हूं , समझी, उन पर झूठा इल्जाम लगा कर तुने अपने पापा का अपमान तो किया ही है साथ में मेरा दिल भी दुखाया है
दिल तो एक दिन दुखना ही था मम्मी... नयना अपना गाल सहलाती हुई बोली... आज नहीं तो कल दुखता
बकवास बंद कर अपनी... दहाडी सुनीता
आप पापा की पत्नी है मम्मी, इनकी तरफदारी करना, इन पर आंख बंद करके विश्वास करना, जो यह कहे उसे बिना सोचे समझे सच मान लेना आपका धर्म भी है और फर्ज भी.. इसीलिए आप पापा की सुने बिना मुझे झूठा कह रही है
नयना.......
चीखने की जरूरत नहीं है मम्मी , आप तो सारा दिन घर पर रहती है, बाहर क्या हो रहा है इसका कुछ पता है आपको ? मैं कॉलेज स्टूडेंट हूं और एक जागरूक महिला भी , रायपुर क्या पूरे हिन्दुस्तान में कहा क्या हो रहा है इसका पूरा ख्याल रखती हूं मैं... अगर आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं तो पापा से कहीये कि वो मेरी कसम उठा कर कहे कि मैं झूठ बोल रही हूं....
सुनीता फटी फटी आँखों से नयना को देखने लगी... मगर जब उसने नयना के चेहरे पर द्रढता देखी तो वह झटके से राजीव सेन की तरफ पलटी
य.. यह क्या कह रही है जी... आपकी ही बेटी आपको खूनी हत्यारा स्मगलर कह रही है और आप चुपचाप इसकी बातें सुन रहे हैं.... कह दीजिये इससे कि आप वो नहीं जो यह समझ रही है
सेन के मुंह से बोल न फूटा , होंठ थरथरा कर रह गये
यह क्या बतायेंगे आपको , मैं आपको पापा की असलियत बताती हूँ.... नयना दांत भिंचे हुए बोली... निरंजन चौधरी, प्रताप सिंह, सुरेश पाटील और पापा ... यह चारों काले धंधे में पार्टनर भी है.... कुछ वक्त पहले इन चारों ने मिलकर मेरी ही उम्र की एक लड़की के साथ बलात्कार किया और...
त..डा..क..
राजीव सेन का जोरदार तमाचा नयना के चेहरे पर पड़ा
नयना चीखती हुई पीछे जा गिरी
मुझे मारकर आप सच्चाई को नही झुठला सकते पापा... आंसू बहाती हुई नयना नीचे गिरी और गिरते ही चीखते हुए बोली... आप लोगों ने रानी के साथ बलात्कार किया और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया.... इतना ही नहीं, जब उसके भाई ने आप लोगों के खिलाफ आवाज उठाई तो उस पर झूठा मुकदमा चलवाकर उसे फांसी की सजा सुना दी गई
सेन ने आगे बढ़कर उसकी बांह पकडी और खडा करते हुए गुर्राया... किसने कहा यह सब तुझसे ?
नयना की आंखों में आंसू भर आये... चेहरा बिगड़ने लगा....
इस बात का पता मुझे तभी से है जब विशाल को गिरफ्तार किया गया
त.. तू विशाल को जानती है ? हैरत से बोला सेन...
हाँ... और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैं विशाल को प्यार करती हूं
राजीव सेन के पैरों तले जमीन खिसक गई , आंखों में जलजला उफनने लगा
बेहया... बेगैरत... अपने बाप के सामने ऐसी बात कहते शर्म नहीं आती तुझे
यह बात मै पापा से कभी न कहती मम्मी , विशाल को सजा मिलने के बाद मैंने उसकी तरफ़ से मुंह मोड़ लिया... किस लिये ? सिर्फ इसलिए कि पापा खुद को मेरी निगाह में गिरा हुआ महसूस ना करे... बेचारा विशाल , जो यह तक नहीं जानता कि मैं उस शख्स की बेटी हूं जिसने उसकी बहन के साथ बलात्कार किया था... वह मुझे अपनी तरह मध्यम परिवार की लड़की मानता है.... मगर अब तो उसने भी मेरी तरफ से सोचना छोड दिया होगा... मुझे मतलबी स्वार्थी समझ कर अपने दिल से निकाल दिया होगा उसने... एक बार भी नहीं मिली ना मैं उससे...
राजीव सेन को काटो तो खून नहीं... फटी हुई आंखों से वह नयना को देख रहा था जो उस पर तमाचे पर तमाचे बरसाती जा रही थी
सुनीता भी स्टैच्यू बन कर रह गई थी....
विशाल को मैं पिछले एक साल से जानती हूं पापा , उसका स्वभाव, उसका ढंग, सब मालूम है मुझे... और मैं यह बात दावे से कह सकती हूं कि उसने अदालत में जो भी कहा, सच कहा.... मगर जब केस लडने वाला वकील गुनहगार हो, जज की कुर्सी पर बैठा शख्स अपराधी हो तो फिर इंसाफ मिलना नामुमकिन हो जाता है...
विशाल के साथ भी ऐसा ही हुआ... अदालत में उसे अपनी बहन का दलाल तक साबित किया गया और रवी की हत्या का आरोप लगा कर उसे फांसी की सजा सुना दी गई
फिर भी मैंने उफ तक नहीं की... पापा से वैसे ही मिलती रही जैसे पहले मिलती थी... क्या इससे यह साबित नही होता कि मैं पापा से प्यार करती हूं , पापा के लिए मैंने अपने प्यार की तरफ से मुंह मोड़ लिया.... दुनिया में शायद ही कोई बेटी अपने बाप का प्यार पाने के लिए कुर्बानी दे सके मगर मैंने वो कुर्बानी दी
लेकिन आज... आज मुझे यह सब करना पड़ा.... जानते हो क्यों पापा ? जानते हो क्यों आज मुझे आपको जलील करना पड रहा है ?
क्यों ?
अपने आप ही मशीनी अंदाज में राजीव सेन के मुंह से निकल गया
क्योंकि आज आपकी बेटी के साथ भी वही सब होने वाला था जो आप लोगों ने रानी के साथ किया था
न-य-ना.......
चीख उठा राजीव सेन... उसे लगा जैसे किसी ने उसका कलेजा मुट्ठी में दबा कर भींच डाला हो
य... यह तू क्या कह रही है बेटी... सुनीता कांपती आवाज में बोली
त.. तू ठीक तो है ना बेटी ... दर्द भरे स्वर में बोला सेन
अगर वह देवता आकर मुझे बचा ना लेता तो मैं भी अब तक रानी के पास पहुंच चुकी होती
किसकी बात कर रही हो तुम ? राजीव सेन ने पूछा
उसी की , जो दिल्ली से तुम लोगों को बेनकाब करने और विशाल को इंसाफ दिलाने के इरादे से आया है
प.. पु. पुनीत शर्मा ... हकलाहट और आश्चर्य भरा स्वर निकला राजीव सेन का
हां... पुनीत भैया ने ही मुझे बचाया उन कुत्तों से जो मेरी इज्जत को लूटने के लिए एक दूसरे से होड लगा रहे थे... ऐन वक्त पर आकर पुनीत भैया ने मेरी इज्जत को बचा लिया ... और जब उन्हें पता चला कि मैं उनके दुश्मन की बेटी हूं तो उन्होंने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा... मेरी दुश्मनी ना तो तुम्हारे बाप से है और ना ही चौधरी वगैरह से , मेरी दुश्मनी तो कानून के दुश्मनों से है और उन्हें खत्म करने के लिए मैंने कमर कसी है.....
मेरे प्रति तब भी उनके दिल में जरा भी मैल नहीं आया , जबकि वे चाहते तो मुझे नुकसान पहुंचा सकते थे या मुझे कैद करके आपको मजबूर कर सकते थे.... लेकिन वे ऐसी लडाई को कायरता मानते हैं , तभी तो उन्होंने मुझे पूरी इज्जत के साथ भेजा....
राजीव सेन के चेहरे पर भूकंप सा आ गया , उसका पूरा वजूद हिल गया.... आंखों में बेचैनी, विवशता, पश्चाताप के भाव उत्पन्न होने लगे
कब की बात है यह ? पूछा सेन ने
आज सुबह की.... बोली नयना... आज सुबह जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं अपने प्यार को सिर्फ एक नजर देखने के लिए घर से निकली थी , लेकिन रास्ते में ही गुंडो ने मुझे घेर लिया और.... कहते कहते आंसू लुढक पडे नयना की आंखों से
किस जगह हुई थी यह वारदात ? दांतो से होंठों को काटते हुए बोला सेन
क्यों ? पुनीत भैया को पकड़ने का इरादा है या उन गुंडों को ?
मैं उन गुंडों को जान से मरवा दूंगा... गुस्से में गुर्राया सेन
क्यों नहीं ... एस पी जो ठहरे आप, अदालत भी आपकी है फिर उन्हें गिरफ्तार करने की क्या जरूरत है... सीधे गोली से उडा दीजियेगा
नयना....
आप यह भूल रहे हैं कि अगर रायपुर में यह बात फैल गई कि एस पी की बेटी की इज्जत चन्द गुंडों ने लूटने की कोशिश की.. तो यह अफवाह फैलते भी देर नहीं लगेगी कि गुंडो ने सच में मेरी इज्जत लूट ली थी और उस सूरत में मेरे सामने सिवाय आत्महत्या के और कोई रास्ता नहीं रह जायेगा
न.... ही
दहल गया राजीव सेन
सुनीता का कलेजा धाड धाड बजने लगा
फिर भी आप जानना चाहते हैं तो सुनिये , उन गुंडो ने...
नही.... मत बताना मुझे बेटी... मत बताना , वर्ना मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाऊंगा.... सेन का गला भर्रा गया.. और मैं नहीं चाहता मेरी नयना को कुछ भी हो
पापा... नयना बेतहाशा सेन से लिपट गई
अगर बता ही सकती हो तो मुझे पुनीत शर्मा का पता बता दो
एक झटके से अलग हो गई नयना
ताकि आप उस देवता को मार सके... सेन के चेहरे पर नजरें गडाये बोली नयना
नहीं बेटी... सेन की आंखें भर आईं... तुम्हारी बातों ने उस राजीव सेन को मार डाला है जो अब तक दूसरों की बहू बेटियों से रेप करता था , हत्यायें करता था , काले धंधे करता था... काले धंधों से कमाई मेरी दौलत उस वक्त किस काम आती जब तुम्हें कुछ हो जाता ... आज मेरी आंखें खुल गईं हैं... मैं तो उस देवता से मिल कर कोई ऐसा रास्ता पूछना चाहता हूं जिस पर चल कर मैं अपने गुनाहों का प्रायश्चित कर सकूं , एक बेटी के दिल में वो जगह बना सकूं जो मैं खो चुका हूँ
नयना ने एक गहरी सांस छोडी और कहा
मैं नहीं जानती पापा कि आपके दिल में क्या है... आप सचमुच पश्चाताप की आग में जल रहे हैं या उन्हें खत्म करने के लिए मुझे बहला रहे हैं.... अगर आपके दिल में अभी भी खोट है तो भी मैं आपको उनका पता बताऊंगी , क्योंकि मैं जानती हूँ कि आप कुछ लोग तो क्या, पूरी बटालियन मिलकर भी उसे खत्म नहीं कर सकती
नही बेटी , मैं सच में पछता रहा हूँ
पुनीत भैया विशाल के घर में हैं... नयना ने बताया
बिच्छू ने डंक मार दिया हो, इस तरह चौंक के उछल पडा सेन
सचमुच उस तरफ तो कोई सोच भी नहीं सकता था कि पुनीत वहा हो सकता है
आप शाम तक उससे मिल सकते हैं पापा , उसके बाद वह खुलकर सामने आ जायेगा और जंग का बिगुल बजा देगा... गंभीर स्वर में कहा नयना ने
सेन कुछ नहीं बोला बस सुनीता के सामने सिर झुका कर खडा हो गया
सुनीता ने मुंह परे फेर लिया
तुम्हारी नाराजगी वाजिब है सुनीता... राजीव सेन रुंधे गले से बोला... मैंने तुम्हें कदम कदम पर धोखा दिया, एक पति की मर्यादाओं का उल्लंघन किया.. म..मैं तुम्हारा गुनहगार हूं... हो सके तो मुझे माफ कर देना
कहते हुए उसने सुनीता के सामने हाथ जोड़ दिये
तडप गई सुनीता और उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया
यह आप क्या कर रहे हो जी, पत्नी के आगे हाथ जोड़कर क्यों पाप चढा रहे हो मुझ पर
सुनीता की आंखों से गंगा जमुना बहने लगी
मै तो ऐसा पापी हूं सुनीता कि तुम्हारे पैरों में गिर कर माफी मांगने के योग्य भी नहीं हूं , कानून की वर्दी पहन कर मैंने इतने पाप किये हैं कि उसकी सजा अगर मौत भी मिले तो कम होगी
पश्चाताप का केवल एक आंसू हजारों गुनाहों को धो डालता है, वो एक आंसू गंगा से भी बड़ा होता है जो इंसान को पवित्र कर जाता है....भावुक स्वर में कहा सुनीता ने
आपने जितने भी गुनाह किये हैं उन्हें पुनीत के सामने कबूल कर लीजिये और फिर उसके कहने पर चल कर कानून की रक्षा कीजिए.... मुझे पूरा विश्वास है कि कानून आपको माफ बेशक न करे मगर रहम जरूर करेगा
सेन ने नयना की तरफ गरदन घुमाई और बोला... हो सके तो तुम भी मुझे माफ कर देना बेटी
नयना बोली कुछ नहीं बस भाव विभोर होकर अपने पापा के सीने से जा लगी