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निशा:“आआअहह...आाययइ.....मार डाला.. फाड़ डालिए. ...... आपको क्या? इससस्स.. बेटी की चाहे फॅट जाए.” पापा का मोटा लंड आख़िर जड़ तक निशा की चूत में घुस गया था और उनके मोटे मोटे बॉल्स उसकी गांड के छेद पे दस्तक दे रहे थे. निशा का बदन पसीने में नहा गया था. पापा थोडी देर बिना हिले निशा के ऊपर पड़े रहे और निशा की चूचियों और होंठों का रसपान करते रहे. निशा की चूत का दर्द भी अब कम होने लगा था.अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
“बेटी थोड़ा दर्द कम हुआ?” जगदीश राय निशा की चूचियों को दबाते हुए बोले.
“हाँ पापा, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” निशा उनके कान में फुसफुसाते हुए बोली. अब जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर निकाल के निशा की चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में चुदवाने में इतना मज़ा आएगा निशा ने कभी सोचा नहीं था. अब निशा को एहसास हुआ कि क्यूँ उसकी सहेलियां रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. अब निशा की चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च...फ़च...फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उन्होने अपना लंड निशा की चूत से बाहर खींचा और उसके मुँह में डाल दिया. पापा का पूरा लंड और बॉल्स निशा की चूत के रस में सने हुए थे.निशा ने पापा का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पापा बोले,
जगदीश राय: “निशा मेरी जान, अब थोड़ा कुतिया बन जाओ. अपने इन जान लेवा नितम्बों के दर्शन भी तो करा दो.”
“आपको मेरे नितम्ब बहुत अच्छे लगते हैं ना?” निशा पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली.
जगदीश राय“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितम्ब हैं तुम्हारी.”
निशा“ और मेरी? मेरी गाँड अच्छी लगी आपको?”
जगदीश राय: “तुम्हारी गाँड तो बिल्कुल जान लेवा हैं बेटी. जब नहा के टाइट कपड़ो में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे कपडे फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतडों को देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”
निशा:“हाय पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितम्ब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितम्ब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.”
“बेटी थोड़ा दर्द कम हुआ?” जगदीश राय निशा की चूचियों को दबाते हुए बोले.
“हाँ पापा, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” निशा उनके कान में फुसफुसाते हुए बोली. अब जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर निकाल के निशा की चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में चुदवाने में इतना मज़ा आएगा निशा ने कभी सोचा नहीं था. अब निशा को एहसास हुआ कि क्यूँ उसकी सहेलियां रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. अब निशा की चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च...फ़च...फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उन्होने अपना लंड निशा की चूत से बाहर खींचा और उसके मुँह में डाल दिया. पापा का पूरा लंड और बॉल्स निशा की चूत के रस में सने हुए थे.निशा ने पापा का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पापा बोले,
जगदीश राय: “निशा मेरी जान, अब थोड़ा कुतिया बन जाओ. अपने इन जान लेवा नितम्बों के दर्शन भी तो करा दो.”
“आपको मेरे नितम्ब बहुत अच्छे लगते हैं ना?” निशा पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली.
जगदीश राय“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितम्ब हैं तुम्हारी.”
निशा“ और मेरी? मेरी गाँड अच्छी लगी आपको?”
जगदीश राय: “तुम्हारी गाँड तो बिल्कुल जान लेवा हैं बेटी. जब नहा के टाइट कपड़ो में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे कपडे फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतडों को देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”
निशा:“हाय पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितम्ब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितम्ब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.”