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तीन बेटियाँ complete

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निशा:“आआअहह...आाययइ.....मार डाला.. फाड़ डालिए. ...... आपको क्या? इससस्स.. बेटी की चाहे फॅट जाए.” पापा का मोटा लंड आख़िर जड़ तक निशा की चूत में घुस गया था और उनके मोटे मोटे बॉल्स उसकी गांड के छेद पे दस्तक दे रहे थे. निशा का बदन पसीने में नहा गया था. पापा थोडी देर बिना हिले निशा के ऊपर पड़े रहे और निशा की चूचियों और होंठों का रसपान करते रहे. निशा की चूत का दर्द भी अब कम होने लगा था.अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

“बेटी थोड़ा दर्द कम हुआ?” जगदीश राय निशा की चूचियों को दबाते हुए बोले.

“हाँ पापा, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” निशा उनके कान में फुसफुसाते हुए बोली. अब जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर निकाल के निशा की चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में चुदवाने में इतना मज़ा आएगा निशा ने कभी सोचा नहीं था. अब निशा को एहसास हुआ कि क्यूँ उसकी सहेलियां रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. अब निशा की चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च...फ़च...फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उन्होने अपना लंड निशा की चूत से बाहर खींचा और उसके मुँह में डाल दिया. पापा का पूरा लंड और बॉल्स निशा की चूत के रस में सने हुए थे.निशा ने पापा का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पापा बोले,

जगदीश राय: “निशा मेरी जान, अब थोड़ा कुतिया बन जाओ. अपने इन जान लेवा नितम्बों के दर्शन भी तो करा दो.”

“आपको मेरे नितम्ब बहुत अच्छे लगते हैं ना?” निशा पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली.

जगदीश राय“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितम्ब हैं तुम्हारी.”

निशा“ और मेरी? मेरी गाँड अच्छी लगी आपको?”

जगदीश राय: “तुम्हारी गाँड तो बिल्कुल जान लेवा हैं बेटी. जब नहा के टाइट कपड़ो में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे कपडे फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतडों को देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”

निशा:“हाय पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितम्ब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितम्ब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.”

 
ये कह कर निशा जल्दी से पापा के लंड के मोटे सुपाडे को चूम लिया और फिर कुतिया बन गयी. अब उसकी चूचियाँ बिस्तर पे टिकी हुई थी और चूतड हवा में लहरा रहे थे. निशा चूतड चुदवाने की मुद्रा में उचका रखे थे. जगदीश राय निशा के विशाल चूतडो को देख कर गरम हो गये. उन्होने निशा के दोनो चूतडो को अपने हाथ में दबोचा और अपना मुँह उनके बीच में घुसेड दिया. अब निशा कुतिया बनी हुई थी और जगदीश राय उसके पीछे कुत्ते की तरह निशा के चूतडो के बीच मुँह दिए उसकी चूत चाट रहे थे.

फिर उन्होने निशा के चूतडो को पकड़ के चौड़ा किया और उसकी गांड के छेद के चारों ओर जीभ फेरने लगे. निशा तो अब सातवें आसमान पे थी. बहुत ही मज़ा आ रहा था. इतने में जगदीश राय ने अपनी जीभ निशा के गांड के छेद में घुसेड दी. निशा ये ना सह सकी और एकदम से झड़ गयी. काफ़ी देर तक इसी मुद्रा में निशा की चूत और गांड चाटने के बाद उन्होने दोनो हाथों से निशा के चूतडो को पकड़ा और अपने मोटे लंड का गरम गरम सुपारा निशा की लार टपकाती चूत पे टिका दिया........

निशा का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तभी जगदीश राय ने एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया और उनका लंड चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर समा गया.

“ आाऐययईईई….आआअहह….आह.” निशा के मुँह से ज़ोर की चीख निकल गयी.

जगदीश राय“बेटी ऐसे चिल्लाओगी तो आशा और सशा जाग जाएगी.”

निशा“आप भी तो हमें कितनी बेरहमी से चोद रहे हैं पापा.” जगदीश राय के मोटे मूसल ने निशा की चूत को बुरी तरह से फैला के चौड़ा कर दिया था . अब जगदीश राय ने निशा की कमर पकड़ के धक्के लगाना शुरू कर दिया. आसानी से उनका लंड निशा की चूत में जा सके इसलिए अब उसने टाँगें बिल्कुल चौड़ी कर दी थी. मीठा मीठा दर्द हो रहा था. निशा अपने ही बाप से कुतिया बन के चुदवा रही थी.

 
निशा बेटी तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है.” फ़च फ़च.. फ़च…..फ़च फ़च….फ़च… की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी. निशा की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी. वह इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने चूतड पीछे की ओर उचका उचका के अपने पापा का लंड अपनी चूत में ले रही थी.

जगदीश राय“ निशा मेरी जान, तुम्हारी मम्मी को चोद कर भी आज तक इतना मज़ा नहीं आया था”बहुत मज़ा आ रहा है बेटी।

निशा:मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है पापा।3 दिनों से मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही थी।आज जाकर मेरी गर्मी शांत हुई।और चोदो पापा।

निशा तो वासना में पागल हुई जा रही थी. शायद अपने ही बाप से चुदवाने के एहसास ने उसकी वासना को और भड़का दिया था.

जगदीश राय निशा के चूतडो को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए बोले,

“निशा बेटी. सच इन चूतडो ने तो हमारा जीना ही हराम कर रखा था.आज इसे फाड़ने में बहुत मज़ा आया और तुम्हारा ये गुलाबी छेद!” ये कहते हुए उन्होने एक उंगली मेरी गांड में सरका दी.

“आआआहह…….. ईीइससस्स... ये क्या कर रहे हैं पापा?”

जगदीश राय:“बेटी तुम्हारे पापा ने आज पहली बार इस छेद को प्यार किया है?” पापा अब मेरी गांड में उंगली अंदर बाहर कर रहे थे.

“आईईIईईIई

ईईईईईई निशा समझ गयी थी कि अब पापा फिर से गांड मारना चाहते थे.निशा को मालूम था कि पापा को गांड मारने का बहुत शौक है. अपने ही बाप से फिर से गांड मरवाने की बात सोच सोच कर वह बहुत उत्तेजित हो गयी थी और निशा की चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर उसकी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका उसे अंदेशा था.

पापा निशा की गांड में उंगली करते हुए बोले,

“ निशा बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”इसमें अपना मोटा लंड डालके पेलना चाहता हूँ।

“हाय पापा आपको हमारे चूतड इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज की रात मैं पूरी तरह से आपको खुश करना चाहती हूँ.”

 
जगदीश राय:“शाबाश मेरी जान , ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांड ज़रूर देगी. अब अपने ये मोटे मोटे चूतड थोडे से और ऊपर करो”

निशा ने चूतड ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि पापा का लंड आसानी से गांड में जा सके. पापा ने निशा की गांड से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ निशा की गांड के छेद पे टीका दी. निशा की तो वासना इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था.वासना के नशे में वो धीरे धीरे निशा की गांड चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांड के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी गीली चूत सहला रहे थे.

जगदीश राय: “सच बेटी तुम्हारी गांड बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांड में से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” निशा को आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि लड़को को लडकियों की गांड चाटने में क्या मज़ा आता है. अब पापा ने निशा की चूत के रस में से सना हुआ लंड उसकी गांड के छेद पे टिका दिया. हाय राम ! निशा के पापा उसकी गांड फिर से मारने जा रहे थे. निशा भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब पापा का लंड उसकी गांड में घुसेगा. पापा ने निशा के चूतडो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

निशा: “ आआईयईई……आआआअहह….इसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” जैसे ही लंड का मोटा सुपाडा निशा की गांड में घुसा उसके मुँह से चीख निकल ही गयी.

जगदीश राय: “हाय मेरी जान ! क्या मस्त गांड है तुम्हारी!” पापा ने निशा के चूतड पकड के एक ज़ोर का धक्का लगा के आधे से ज़्यादा लंड निशा की मोटी गांड में पेल दिया.

निशा: “आआईईईआआआआआ……..ऊऊऊऊऊओ……….ईईस्स्स्स्स्स स.” निशा का दर्द के मारे बुरा हाल था.उसे पक्का विश्वास था कि आज तो फिर से उसकी गांड ज़रूर फटेगी, लेकिन पापा से गांड मरवाने की चाह ने उसे अँधा कर दिया था.

जगदीश राय: निशा बेटी जितना मज़ा तुम्हारी गांड मार के आ रहा है उतना मज़ा तो तुम्हारी मम्मी की गांड मार के कभी नहीं आया.” निशा को सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की थी की उसको चोदने में पापा को मम्मी से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. इस बार जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर खीच कर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा लंड जड़ तक निशा की गांड में पेल दिया.

निशा: “ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई………………आआआआआआआआआआ आ……..आआआआआअहह....मर गयी....ईीइससस्स”

अब जगदीश राय ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मार के लंड निशा के गांड के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था. हर धक्के के साथ उनके बॉल्स निशा की चूत पे चिपक जाते.पापा अब जोर जोर से निशा की गाँड मार रहे थे।साथ ही साथ चूत में भी अपनी ऊँगली पेलने लगे थे जिससे निशा एक बार फिर झड़ गयी.

 
पापा के धक्के अब तेज़ होते जा रहे थे और शायद वो झड़ने वाले थे. अचानक निशा को अपनी गांड में गरम गरम पिचकारियाँ सी महसूस हुई. पापा झड़ गये थे. निशा की गांड लाबा लब उनके वीर्य से भर गयी थी. उन्होने जैसे ही निशा की गांड से अपना लंड बाहर खींचा।

वीर्य गांड में से निकल कर निशा की चूत और जांघों पे बहने लगा. निशा पीठ के बल लेट गयी और अपनी गांड से निकला हुआ पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया . पूरा लंड, बॉल्स और जांघें मेरी चूत के रस और उनके वीर्य के मिश्रण में सनी हुई थी. उनके लंड से मेरी चूत और गांड दोनो की गंध आ रही थी.निशा ने बडे प्यार से जगदीश राय लंड और बॉल्स को चाट चाट के सॉफ किया. पापा भी 3 घंटे से निशा को चोद रहे थे. वो भी तक कर निढाल हो गये थे।फिर निशा भी अपने कपडे पहन कर अपने रूम में सोने चली गई।

 
कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट कल
 
अगले दिन जगदीश राय लंच से पाँच मिनट पहले ही ऑफिस से छुट्टी लेकर घर आ गया था लेकिन आशा अभी नहीं आई थी।आशा को कॉल किया तो बोली 10 मिनट में आ रही हूँ।तब जगदीश राय ने बियाग्रा की 1 गोली खा ली।आज आशा से उसे बदला लेना था।

ठीक 10 मिनट बाद आशा आ गई।डोर बंद करके अंदर आते ही आशा ने अपने सभी कपडे उतार फेंके।वो अपने पापा के सामने पूरी नंगी थी।वो भी दिन में उसका नंगा बदन चमक रहा था।उसकी गांड में फँसी पुंछ को देखकर जगदीश राय का लंड फुंफकारने लगा।

जगदीश राय आशा के पास जाकर 1 हाथ से उसकी पुंछ और गांड सहलाने लगा।इधर आशा ने जगदीश राय के कपडे निकालने शुरू कर दिए।थोड़ी ही देर में वो भी आशा की तरह पुरे नंगे थे।अब आशा अपने पापा के आगे घुटनों पर बैठ गई और जगदीश राय के लंड को किसी कुतिया की तरह चाटने लगी।फिर आशा अपने पापा के लंड को मुँह में भर कर चूसने लगी।

जगदीश राय :आशा.... बेटी.... थोड़ा और अंदर लो बेटी… नाक से सासे लेती रहो ....

आशा आँखो से हामी भरी …..

जगदीश राय धीरे धीरे लंड अंदर धकेलने लगा ...

आशा के गले की दीवारो पे उनका लंड ठोकरे मारने लगा ...

धीरे धीरे पूरा लंड आशा के मुह में घुस गया ...

उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था ...

जगदीश राय की झांटे आशा के नाक पे लग रही थी ...

आशा के गले में खराश होने लगी थी ...

लेकिन आशा मना भी नहीं कर पा रही थी ...

उसके मुँह से गुं गुं की आवाज निकलने लगी ...

जगदीश राय ने लंड वापस खींचा तो आशा ने सांस ली ...

थोड़ी देर बाद जगदीश राय ने अपना पूरा लंड फिर से आशा के गले तक उतारा ...और आशा के मुँह में पेलने लगा।

जगदीश राय के चहरे पे स्वर्गीय आनंद की अनुभूति दिख रही थी …

कुछ देर आशा का मुह ऐसी ही चोदने के बाद जगदीश ने अपना लंड निकाल लिया …..

फिर जगदीश राय ने आशा को अपनी गोद में उठाया...

और पलंग पे ले गए …जगदीश राय अब पलंग पे बैठे थे ...और आशा उनकी गोद में ...फिर जगदीश राय ने आशा की गांड में घुसी पूँछ को सहलाने लगे।फिर धीरे धीरे उन्होंने आशा की गांड से पूँछ निकाल दिया।

 
आशा ने जगदीश राय को साफ मना कर दिया था चूत चोदने के लिए।इसलिए वो आशा की गांड में थूक लगाकर धीरे धीरे ऊँगली पेलने लगे।

उनका कठोर लंड आशा की चूत पे टकरा रहा था….

जगदीश राय आशा की चुचिया मसलते हुए उसके होठो को चुम रहे थे…..

जगदीश राय का लंड आशा की गाँड में घुसने के लिए….. बेक़रार था ।

उन्होंने आशा की टाँगे फैला कर …

अपना लंड आशा की गाँड में पेल दिया

आशा के मुह से सिसकी निकल गयी ।वह सिसियाने लगी ।

हाआआयय्य्य्य्य्य उफ्फ्फ्फ्फ़ स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स

जगदीश राय का पूरा लंड अंदर घुसने के बाद उन्होंने धक्के लगाने शुरू किये

आशा पापा के हर धक्के को कमर उचका कर जवाब देने लगी ।

जगदीश राय: लगता है बेटी तुमको पहले जैसा दर्द नहीं हो रहा ।

आशा: नहीं पापा … अब दर्द नहीं हो रहा … बहोत मजा आ रहा है .... और तेज करिये ना …...

जगदीश राय ने अपनी स्पीड बढ़ा दी ….

कुछ देर धक्के मारने के बाद वो रुके ....

उन्होंने आशा को उठाया ……

और खुद निचे लेटे … अब उनका वो फौलादी लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा था

जगदीश राय: आओ.... बेटी .... बैठो अपनी सवारी पर……

आशा उनकी दोनों ओर पैर रख कर खड़ी हुयी ……

एक हाथ से पकड़कर उनका लंड अपनी गाँड पर अड्जस्ट करके धीरे धीरे निचे बैठने लगी …...

अब उनका वो मोटा लंड पूरी तरह से आशा की टाइट गांड में कैद हो गया था ….

आशा पापा का लंड अंदर लेते लेते थक गयी थी

सो लंड पूरा अंदर जाने के बाद में बैठे बैठे हांपने लगी

आशा को आराम से बैठा देख उसके पापा बोले

आशा बेटी .... सिर्फ बैठना नहीं है… जरा ऊपर निचे करो …मेरे लंड पर

फिर देखना कैसा जन्नत का मजा आता है

फिर आशा थोडी सी ऊपर हुयी … और निचे भी ….

धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ़ती गयी

उसके बाल बार बार चहरे पर आ रहे थे

जगदीश राय ने उन बालो की लट को ठीक किया ….

 
आशा को बहोत ही मस्त लगा रहा था इसी मस्ती में उसके मुह से आहे निकल रही थी।

धीरे धीरे वह पापा के लंड पर उछलने लगी

और उसकी आहे भी तेज होने लगी ।अब आशा पूरी तेजी से अपनी गांड अपने पापा के लंड पर पटक रही थी।लंड एक ही बार में आशा की गांड में पूरा घुस जाता और फिर अगले ही पल निकलने लगता।

10 मिनट घुड़सवारी करने के बाद आशा निचे उतरी ....फिर जगदीश राय ने बेड में सुलाकर आशा की गांड में लंड घुसाकर पेलते हुए बोला।

जगदीश राय: वाह क्या उछली हो मेरी जान … पूरी रंडी लग रही थी तुम….

आशा: छिः पापा … ये क्या आप मेरे लिए इतना गन्दा बोल रहे हो …..

जगदीश राय:इसमें गन्दा क्या है बेटी …… मैं तो तेरी तारीफ़ कर रहा हु …..

आशा: ऐसे करते है तारीफ।.... रंडी क्या अच्छा वर्ड है।

जगदीश राय: अरे बेटी कहा ये अच्छे बुरे के बारे में सोच रही हो ….चुदाई में कुछ गलत नहीं ….कुछ गन्दा नहीं होता।

आशा: … पर....

जगदीश राय: अरे बेटी .... एक अच्छी रंडी ही सबसे बेहतर चुदना जानती है ….. ये एक बहोत बड़ी कला है मेरी जान ….हाँ ये रण्डी वर्ड कुछ लोगो को बुरा लगता है……. पर बेटी चुदाई के समय ऐसे शब्द यूज़ करना बड़ा अच्छा लगता है ….

आशा: अगर आपको अच्छा लगता है … तो … आप मुझे जो चाहे बुलाओ…..

जगदीश राय: हाय मेंरी प्यारी बिटिया।…

आशा: हा मेरे प्यारे पापा …… अपनी इस रंडी से टूट के प्यार करो … चोद डालो अपनी इस रंडी को ….

जगदीश राय:आशा … तू भी मुझे गालिया दे तो और भी मजा आएगा …

आशा: तो मैं क्या आपसे डरती हु क्या … आप भी तो बेटीचोद …..हो।अपनी दो दो बेटियों को चोद रहे हो।



जगदीश राय: वाह मेरी रंडी साली.... मजा आ गया ….

तेरी गांड में जो मज़ा है।वो किसी में नहीं है।कितनी गरम और टाइट गांड है तेरी।कितना भी पेलो तुझे फर्क नहीं पड़ता।साली तेरी कुँवारी चूत में जिसका लंड पहली बार जाएगा वो कितना लकी होगा।

 
आशा:और जोर से पेलो पापा।आप भी कम लकी नहीं हो।आपको मेरी कुँवारी गांड मिली।चूत भी चूस लेते हो।जीभ से चोद भो देते हो।मेरी चूत में ऊँगली भी घुसा देते हो।और मेरे मुँह को तो चूत की तरह चोदते हो और आपको क्या चाहिए पापा।

और आज तो आपने मुझे अपनी रंडी भी बना दिया

जगदीश राय:ठीक है मेरी रांड।आज से तू मेरी पर्सनल रांड है।अब तू साली कुतिया बन जा।आज मैं तेरी गाँड को इतना फाडूँगा की उसमे से आज फिर खून निकल जाए।तू दर्द से चीखने लगे।

आशा बेड से निचे उतरकर अपने पापा के लंड को पकड़कर हिलाने लगती है।लंड आशा की गांड से निकला था।वो रस में भीगा पिला रंग का हो गया था।लेकिन आशा ने लंड को अपने मुँह में भर लिया और चुसने चाटने लगी।जगदीश राय भी मस्ती में भरकर आशा के मुँह को चोदने लगा।

कुछ देर बाद जगदीश राय ने निशा को कुतिया बना दिया।

जगदीश राय: हाँ बेटी अब मैं तुम्हे अपनी फेवरेट पोजीशन में चोदूंगा ....

आशा : तो चोदो न पापा ....

जगदीश राय: लेकिन इसबार तुम्हें बहोत दर्द हो सकता है ।क्योंकि इस बार तुम्हारी गांड फाड़ने का मन कर रहा है …

आशा : आप उस की चिंता मत करो पापा …आप मुझे जैसे चाहो वैसे चोदो …… मेरे दर्द की परवाह मत करो

जगदीश राय ने आशा को खीच के गले लगाया उसे चूमा …...

बाद में उन्होंने आशा को पलंग को पकड़ कर कुतिया जैसा खड़ा किया ….

आशा की टाँगे फैला दी…..

और खुद उसकी गांड के पीछे खड़े हुए ……

उन्होंने अपना लंड आशा की गांड के भूरे छेद पे रगड़ा…

और अचानक एक करारा धक्का दे कर आधा लंड अंदर पेल दिया …..

आशा इस अचानक हमले के लिए तैयार नहीं थी ….

वह गिरते गिरते बची …..

फिर जगदीश राय ने झुककर आशा की चुचिया थामी … और उसे पीछे खींचा।

जगदीश राय ने बेदर्दी से आशा की चूचियोंको मसलना शुरू किया बिलकुल रफ तरीके से।

आशा के मुह से जोरो की आह निकल गयी

ओफ्फ्फ्फ्फ्फ़ ह्म्म्म्म्म्म पापा हाय्य्य्य्य्य्य्य

जगदीश राय: साली रंडी अभी तो शुरू भी नहीं किया है … अभी इतना तड़प रही है तो आगे क्या होगा।

आशा: नहीं पापा कुछ नहीं हुआ है .... आप आगे बढ़ो

और आशा ने अपनी गांड उभार के दिखाई

जगदीश राय गांड पे थप्पड लगाते बोले…. "वाह….. बेटी…...ये हुयी ना बात।और अपनी गांड पीछे कर।

फिर उन्होंने एक और तेज झटका मार के पूरा के पूरा लंड आशा की गाण्ड में घुसा दिया।

आशा अपने होठ दबा रखे थे .... वह चाहती थी की उसके मुह से कराह न निकले।

फिर जगदीश राय ने आशा की कमर थामी

और लंड आगे पीछे करके आशा की गांड में अपना 9 इंच का लंड पेलने लगे ।

धीरे धीरे वो अपनी स्पीड में इजाफा कर रहे थे

कुछ ही देर में उनकी स्पीड इतनी बढ़ गयी ....

की उनके हर धक्के से आशा तो हिल ही जाती लेकिन साथ साथ पलंग भी चरमरा जाता।साथ ही साथ थप्पड़ मार मार के उन्होंने आशा के चुचड़ पुरे लाल कर दिए थे।इतनी बुरी तरह से आज पहली बार उन्होंने आशा की गांड मारी थी।

अब दोनों खड़े खड़े पसीने में भीग गए थे

जगदीश राय ने खूब धक्के लगाये। …

आशा इस धुँवाधार चुदाई में दो बार झड़ी थी

जब जगदीश राय को लगा की वो झड़ने वाले है …

वो बोले " बेटी.... अब मैं झड़ने वाला हूँ। ....

आशा: तो झड़ियें ना पापा … आप के माल से मेरी गाण्ड भर दो पापा ।

जगदीश राय: मैं तुम्हारे मुह में झड़ना चाहता हु साली रंडी।मुह खोल के बैठ साली कुतिया …

आशा सीधी हुयी और बोली " तो डाल दो न पापा … आपका लंड अपनी रंडी बेटी के मुँह में ।

आशा उनके आगे घुटनो पर बैठी

उनका लंड हाथ में लेकर उसे चाटने और चूसने लगी।

और उसी समय जगदीश राय नेअपना लंड आशा के मुह में घुसाया ….और उसका सर पकडे वो आशा के मुह को चोदने लगे...

 
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