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त्यागमयी माँ और उसका बेटा
दोस्तों मेरी पिछली कहानी “ अदला बदली “ को आपने पसंद किया। अब मैं आपके लिए एक नयी कहानी लेकर आया हूँ जिसमें मैं अपनी पिछली कहानी की एक कमी को दूर करूँगा और वो है आकर्षित करना ।
इस कहानी में आकर्षित करना( यानी किसी को अपने सम्मोहन मेंलाना या पटाना) का बहुत बड़ा role होगा ।
आशा है किआपको ये कहानी पसंद आएगी।
कहानी का नाम रखा है :::
त्यागमयी माँ और उसका बेटा
आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।
इस कहानी के दो मुख्य पात्र हैं राज और उसकी माँ नमिता ।
आज राज की उम्र १८ साल की है और उसकी माँ ४० साल की है। राज के पिता का देहांत क़रीब ५ साल पहले एक दुर्घटना मेंहो चुका था। नमिता एक ऑफ़िस में काम करती है, और उसके पति के पेन्शन और उसकी तनखा से घर का ख़र्च आराम से चल रहा था। नमिता की बस एक ही इच्छा थी किराज ख़ूब पढ़े और बड़ा आदमी बने। वह बस इसी इंतज़ार में जी रही थी।
आइए अब राज के बारे मेंबताएँ , वह पढ़ने मेंबहुत अच्छा था और हमेशा पहले या दूसरे नम्बर पर आता था।वह अभी १२ वीं में था और खेल मेंभी वो बहुत अच्छा था और फ़ुट्बॉल उसका प्रिय खेल था। उसकी क़द काठी अच्छी थी और वो एक अपने उम्र के लिहाज़ से एक तगड़ा लड़का था। गोरा चिट्ठा और चेहरे से मासूमियत टपकती थी। उसके दिमाग़ मेंअब तक वासना ने अपना स्थान नहीं बनाया था। सेक्स के बारे में सीमित जानकारी रखता था क्योंकि उसके सब दोस्त उसके जैसे ही पढ़ने वाले थे। हाँ कभी कभी उसको कोई लड़की या मैडम अच्छी लगती तो उसको लगता था किउसके हथियार मेंकुछ हरकत हो रही हो। और वो शर्मिंदा हो जाता था किउसके विचार इतने गंदे कैसे हो गए!!!
उसकी माँ नमिता एक घरेलू महिला थी, पर काम करने के कारण बाहरी दुनिया को समझती थी। अपनी ज़िन्दगी मेंउसने कुछ समझोते भी किए थे। कभी नौकरीके लिए तो कभी पैसों के लिए और कभी अपनी शरीर की भूक मिटाने के लिए। पर वो बहुत ही सुलझी हुई औरत थी और अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझती थी। वो भी अपने बेटे की तरह गोरी चीट्टी भरे हुए बदन की औरत थी, जिसको कोई भी मर्द एक बार देख ले तो दूसरी बार पलट कर देखता ज़रूर था। उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ और पतली कमर और बाहर निकला हुआ पिछवाड़ा मर्दों पर बिजली गिराते थे।वह साड़ी या सलवार कुर्ती ही पहनती थी और घर में नायटि ही पहनती थी।
सब कुछ ठीक चल रहा था और नमिता का पूरा ध्यान राज के खाने पीने और उसकी पढ़ायी पर ही रहता था।
राज और उसकी माँमें भी एक बहुत ही प्यारा रिश्ता था और वो दोनों ही एक दूसरे के लिए जीते थे। दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते थे। नमिता का ऑफ़िस का समय १०से ५ का था और राज का स्कूल ७ से १ बजे का था।
नमिता रोज़ सुबह राज को उठाने आती क्योंकि राज देर रात तक पढ़ता रहता था। सुबह जब वो उसे उठती तो वो उठके उससे लिपट जाता था और माँ के गाल चूमते हुए goodmorningकरता था। वो भी उसके गाल या माथा चूमकर उसको प्यार करती थी।
पर कभी नमिता को अटपटा लगता था जब राज की ओढ़ी हुई चद्दर नीचे उसकी जाँघों के पास से उठी रहती थी। उसे थोड़ा सा अजीब लगता था पर वो जानती थी किइस उम्र मेंये एक प्रकृतिक अवस्था है और सब लड़के इस दौर से गुज़रते हैं।
पर उसको हैरानी इस बात की होती थी किहे भगवान ये तंबू इतना ऊँचा कैसे तनजाता है? क्या राज का हथियार इतना बड़ा है? उसे कुछ अजीब सी फ़ीलिंग होती थी पर बाद में वो जब उसका भोला चेहरा देखती थी तो सब भूलकर उसे प्यार करने लगती थी। पर राज जब ऐसी उत्तेजित अवस्था मेंउठता था तो उसको अपनी माँ के सामने बड़ा ख़राब लगता था और वो उसको छुपाने की असफल कोशिश करता था और भागकर बाथरूम मेंजाके पेशाब करने की कोशिश करता था और हथियार के नोर्मल होने के बाद ही वापस बाहर आता था।
माँ मन ही मन मुसकाती थी और कुछ नहीं होने का बहाना करती थी। सुबह की चाय पीकर राज नहा धोकर नाश्ता करने आता था और माँबेट साथ ही नाश्ता करते थे और फिर राज अपनी माँसे लिपटकर प्यार करके स्कूल बस से स्कूल चला जाता था। नमिता बाद में नहाकर खाना बनाती थी और फिर ख़ुद बस से ऑफ़िस चली जाती थी।
जीवन ऐसे ही कट रहा था।
राज बस में बैठे हुए अपनी पढ़ायी के बारे में सोच रहा था तभी अगले स्टॉप पर उसकी मैडम जो कि उसको maths ( गणित) पढ़ाती थीं आकर उसके साथ वाली सीट पर बैठ जाती है।
राज: गुड मोर्निंग मैडम ।
मैडम: गुड मोर्निंग , कैसे हो राज बेटा? पढ़ायी कैसी चल रही है?
राज: जी मैडम अच्छी चल रही है, पर गणित बहुत कठिन है।
मैडम: बेटा कभी भी कोई समस्या हो तो मेरे ऑफ़िस आ जाना मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। फिर मैडम को फ़ोन आया और वो उसमें व्यस्त हो गयी। राज ने देखा कि वो बात करते हुए अपनी छाती के निचले हिस्से को खुजाने लगी और हल्के से ब्रा को भी अजस्ट की। राज ने सोचा कि शायद उसकी ब्रा टाइट होगी , तभी शायद वो ऐसा करी होंगी। उसने कई बार माँ को भी ऐसा करते देखा था, और माँ ही बतायी थी कि जब भी नयी ब्रा पहनो थोड़ी दिन कुछ तकलीफ़ तो होती है।
राज अचानक मैडम की अपनी माँ से तुलना करने लगा। दोनों क़रीब एक ही उम्र की थीं क्योंकि उनका बेटा भी उससे एक साल स्कूल में पीछे था।उनके बेटे श्रेय से उसकी बहुत पटती थी, वो भी पढ़ायी में काफ़ी आगे रहता था।राज ने देखा कि उसकी माँ की तरह मैडम भी गोरी और बदन से भरी हुइ हैं और उनकी छातियाँ भी एक जैसी ही हैं।
नीचे ब्लाउस के नीचे से गोरा थोड़ा उभरा हुआ पेट भी एक समानही था।नीचे उसे मैडम की गोल गोल भारी जाँघें साड़ी से दिख रही थीं। माँकी भी वैसे ही जाँघें थी।
अचानक फ़ोन पर बात करते हुए उसने अपनी जाँघ सहलायी बहुत ऊपर की तरफ़। राज को अपने हथियार में हरकत सी हुई और वो उसको अजस्ट करते हुए बाहर की ओर देखने लगा।
वह अपने आप पर हैरान हो रहा था कि वह मैडम की तुलना अपनी माँ से भला क्यों कर रहा है? तभी स्कूल आ गया और मैडम खड़ी हो गयी और अब साड़ी में से उसके बड़े बड़े नितंब उसके सामने थे। साड़ी उसके बड़े गोल चूतरों के बीच थोड़ी फँस सी गयी थी। ऐसा ही माँ के साथ भी कई बार होता था, उनकी nighty या साड़ी भी ऐसी ही फँस जाती थी ।मैडम ने पीछे हाथ डालकर अपने कपड़े को बाहर की ओर खिंचा और उसे निकाला और अब राज का हथियार और बड़ा हो गया।
उसने थोड़ी देर रुककर सबको उतरने दिया और बाद में ख़ुद उतरा , पैंट के आगे स्कूल का बैग रखकर।
दोस्तों मेरी पिछली कहानी “ अदला बदली “ को आपने पसंद किया। अब मैं आपके लिए एक नयी कहानी लेकर आया हूँ जिसमें मैं अपनी पिछली कहानी की एक कमी को दूर करूँगा और वो है आकर्षित करना ।
इस कहानी में आकर्षित करना( यानी किसी को अपने सम्मोहन मेंलाना या पटाना) का बहुत बड़ा role होगा ।
आशा है किआपको ये कहानी पसंद आएगी।
कहानी का नाम रखा है :::
त्यागमयी माँ और उसका बेटा
आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।
इस कहानी के दो मुख्य पात्र हैं राज और उसकी माँ नमिता ।
आज राज की उम्र १८ साल की है और उसकी माँ ४० साल की है। राज के पिता का देहांत क़रीब ५ साल पहले एक दुर्घटना मेंहो चुका था। नमिता एक ऑफ़िस में काम करती है, और उसके पति के पेन्शन और उसकी तनखा से घर का ख़र्च आराम से चल रहा था। नमिता की बस एक ही इच्छा थी किराज ख़ूब पढ़े और बड़ा आदमी बने। वह बस इसी इंतज़ार में जी रही थी।
आइए अब राज के बारे मेंबताएँ , वह पढ़ने मेंबहुत अच्छा था और हमेशा पहले या दूसरे नम्बर पर आता था।वह अभी १२ वीं में था और खेल मेंभी वो बहुत अच्छा था और फ़ुट्बॉल उसका प्रिय खेल था। उसकी क़द काठी अच्छी थी और वो एक अपने उम्र के लिहाज़ से एक तगड़ा लड़का था। गोरा चिट्ठा और चेहरे से मासूमियत टपकती थी। उसके दिमाग़ मेंअब तक वासना ने अपना स्थान नहीं बनाया था। सेक्स के बारे में सीमित जानकारी रखता था क्योंकि उसके सब दोस्त उसके जैसे ही पढ़ने वाले थे। हाँ कभी कभी उसको कोई लड़की या मैडम अच्छी लगती तो उसको लगता था किउसके हथियार मेंकुछ हरकत हो रही हो। और वो शर्मिंदा हो जाता था किउसके विचार इतने गंदे कैसे हो गए!!!
उसकी माँ नमिता एक घरेलू महिला थी, पर काम करने के कारण बाहरी दुनिया को समझती थी। अपनी ज़िन्दगी मेंउसने कुछ समझोते भी किए थे। कभी नौकरीके लिए तो कभी पैसों के लिए और कभी अपनी शरीर की भूक मिटाने के लिए। पर वो बहुत ही सुलझी हुई औरत थी और अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझती थी। वो भी अपने बेटे की तरह गोरी चीट्टी भरे हुए बदन की औरत थी, जिसको कोई भी मर्द एक बार देख ले तो दूसरी बार पलट कर देखता ज़रूर था। उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ और पतली कमर और बाहर निकला हुआ पिछवाड़ा मर्दों पर बिजली गिराते थे।वह साड़ी या सलवार कुर्ती ही पहनती थी और घर में नायटि ही पहनती थी।
सब कुछ ठीक चल रहा था और नमिता का पूरा ध्यान राज के खाने पीने और उसकी पढ़ायी पर ही रहता था।
राज और उसकी माँमें भी एक बहुत ही प्यारा रिश्ता था और वो दोनों ही एक दूसरे के लिए जीते थे। दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते थे। नमिता का ऑफ़िस का समय १०से ५ का था और राज का स्कूल ७ से १ बजे का था।
नमिता रोज़ सुबह राज को उठाने आती क्योंकि राज देर रात तक पढ़ता रहता था। सुबह जब वो उसे उठती तो वो उठके उससे लिपट जाता था और माँ के गाल चूमते हुए goodmorningकरता था। वो भी उसके गाल या माथा चूमकर उसको प्यार करती थी।
पर कभी नमिता को अटपटा लगता था जब राज की ओढ़ी हुई चद्दर नीचे उसकी जाँघों के पास से उठी रहती थी। उसे थोड़ा सा अजीब लगता था पर वो जानती थी किइस उम्र मेंये एक प्रकृतिक अवस्था है और सब लड़के इस दौर से गुज़रते हैं।
पर उसको हैरानी इस बात की होती थी किहे भगवान ये तंबू इतना ऊँचा कैसे तनजाता है? क्या राज का हथियार इतना बड़ा है? उसे कुछ अजीब सी फ़ीलिंग होती थी पर बाद में वो जब उसका भोला चेहरा देखती थी तो सब भूलकर उसे प्यार करने लगती थी। पर राज जब ऐसी उत्तेजित अवस्था मेंउठता था तो उसको अपनी माँ के सामने बड़ा ख़राब लगता था और वो उसको छुपाने की असफल कोशिश करता था और भागकर बाथरूम मेंजाके पेशाब करने की कोशिश करता था और हथियार के नोर्मल होने के बाद ही वापस बाहर आता था।
माँ मन ही मन मुसकाती थी और कुछ नहीं होने का बहाना करती थी। सुबह की चाय पीकर राज नहा धोकर नाश्ता करने आता था और माँबेट साथ ही नाश्ता करते थे और फिर राज अपनी माँसे लिपटकर प्यार करके स्कूल बस से स्कूल चला जाता था। नमिता बाद में नहाकर खाना बनाती थी और फिर ख़ुद बस से ऑफ़िस चली जाती थी।
जीवन ऐसे ही कट रहा था।
राज बस में बैठे हुए अपनी पढ़ायी के बारे में सोच रहा था तभी अगले स्टॉप पर उसकी मैडम जो कि उसको maths ( गणित) पढ़ाती थीं आकर उसके साथ वाली सीट पर बैठ जाती है।
राज: गुड मोर्निंग मैडम ।
मैडम: गुड मोर्निंग , कैसे हो राज बेटा? पढ़ायी कैसी चल रही है?
राज: जी मैडम अच्छी चल रही है, पर गणित बहुत कठिन है।
मैडम: बेटा कभी भी कोई समस्या हो तो मेरे ऑफ़िस आ जाना मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। फिर मैडम को फ़ोन आया और वो उसमें व्यस्त हो गयी। राज ने देखा कि वो बात करते हुए अपनी छाती के निचले हिस्से को खुजाने लगी और हल्के से ब्रा को भी अजस्ट की। राज ने सोचा कि शायद उसकी ब्रा टाइट होगी , तभी शायद वो ऐसा करी होंगी। उसने कई बार माँ को भी ऐसा करते देखा था, और माँ ही बतायी थी कि जब भी नयी ब्रा पहनो थोड़ी दिन कुछ तकलीफ़ तो होती है।
राज अचानक मैडम की अपनी माँ से तुलना करने लगा। दोनों क़रीब एक ही उम्र की थीं क्योंकि उनका बेटा भी उससे एक साल स्कूल में पीछे था।उनके बेटे श्रेय से उसकी बहुत पटती थी, वो भी पढ़ायी में काफ़ी आगे रहता था।राज ने देखा कि उसकी माँ की तरह मैडम भी गोरी और बदन से भरी हुइ हैं और उनकी छातियाँ भी एक जैसी ही हैं।
नीचे ब्लाउस के नीचे से गोरा थोड़ा उभरा हुआ पेट भी एक समानही था।नीचे उसे मैडम की गोल गोल भारी जाँघें साड़ी से दिख रही थीं। माँकी भी वैसे ही जाँघें थी।
अचानक फ़ोन पर बात करते हुए उसने अपनी जाँघ सहलायी बहुत ऊपर की तरफ़। राज को अपने हथियार में हरकत सी हुई और वो उसको अजस्ट करते हुए बाहर की ओर देखने लगा।
वह अपने आप पर हैरान हो रहा था कि वह मैडम की तुलना अपनी माँ से भला क्यों कर रहा है? तभी स्कूल आ गया और मैडम खड़ी हो गयी और अब साड़ी में से उसके बड़े बड़े नितंब उसके सामने थे। साड़ी उसके बड़े गोल चूतरों के बीच थोड़ी फँस सी गयी थी। ऐसा ही माँ के साथ भी कई बार होता था, उनकी nighty या साड़ी भी ऐसी ही फँस जाती थी ।मैडम ने पीछे हाथ डालकर अपने कपड़े को बाहर की ओर खिंचा और उसे निकाला और अब राज का हथियार और बड़ा हो गया।
उसने थोड़ी देर रुककर सबको उतरने दिया और बाद में ख़ुद उतरा , पैंट के आगे स्कूल का बैग रखकर।