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फॅमिली में मोहब्बत और सेक्स

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फॅमिली में मोहब्बत और सेक्स --51

कुशल का लंड ऐसे होंठो के बीच था कि जो चाहे कितनी भी बार इस लंड को चूसे ये लंड बोर नही होने वाला था. और आज की रात तो जैसे ख़तम ही नही होने वाली थी क्यूंकी स्मृति भी फुल मूड मे थी और कुशल तो हमेशा ही एवरग्रीन रहा है.

स्मृति ऐसे ही उसका लंड चूसे जा रही थी और कुशल के मूँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गयी थी.

“उफफफफफ्फ़………….. ओूऊऊऊऊओ…आआहहह……….. “ कुशल ऐसी ही सिसकारियो के साथ अपने हाथ स्मृति की पीठ की तरफ बढ़ाता है. स्मृति आधे से ज़्यादा लंड अपने मूँह मे ले चुकी थी. कुशल अपना हाथ पीठ से और नीचे ले जाना चाह रहा था जहाँ स्मृति की गान्ड थी लेकिन वो ऐसा कर नही पाया.

कुशल की हालत और भी खराब होती जा रही थी. जवान खून था और पूरी रात बाकी थी.

“ आअहह……… मेडम आज तो दिखा दो अपने उस छेद को…….. जिसके लिए मैं दीवाना हू……….. उफफफफफफफ्फ़ मेरी जाआअन्न्‍नणणन्….. ओह…….” कुशल की हालत बहुत ही ज़्यादा खराब हो रही थी.

कुशल की ये बात सुन कर स्मृति अपने होंठ उसके लंड से हटा लेती है और बेड पे लेटने की तैयारी करने लगती है. कुशल को ये उम्मीद थी कि आज तो उसका सपना पूरा होने जा रहा है लेकिन स्मृति अपनी दोनो टांगे फैलाती है और अपनी चूत के छेद को खोल कर कुशल को दिखाती है. ये भी एक बेहद एरॉटिक सीन था लेकिन कुशल तो जैसे स्मृति की गान्ड का दीवाना था.

“ आज तो कुच्छ स्पेशल हो जाए………” कुशल का इशारा शायद उसकी गान्ड की तरफ ही था.

“ स्पेशल ही तो है ये…………..” स्मृति फिर से अपनी चूत पर हाथ लगाते हुए बोलती है.

“ लेकिन आपने तो प्रॉमिस किया था कि मैं अपनी हर इच्छा पूरी कर सकता हू……” कुशल थोड़ा सा रूखे स्वर मे बोलता है.

“ लाइयन….. चिंता क्यू करता है….. मैने तो उस रात भी पूरा मौका दिया था लेकिन तू ही नीचे नही आया. लेकिन आज फिर से वोही से सिचुयेशन है पहले मेरी टर्न और फिर तेरा टर्न………..” स्मृति फिर से उसे खुला मौका देती है.

कुशल ये सुनते ही आगे बढ़ता है और झुक कर स्मृति की चूत पर एक स्ट्रॉंग किस करता है. ऐसे लगता है कि जैसे वो उसकी चूत खा जाने के मूड मे था. स्मृति उसकी इस मर्दानगी भरी स्टाइल से और भी इंप्रेस हो जाती है लेकिन फिर भी अपनी सिसकी को नही रोक पाती……

“ उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…….. लाइयन………… कोई फॉर्मॅलेटीस नही…….. प्लीज़ बुझा दे इसकी प्याआसस्स्स्स्सस्स………….” स्मृति शायद उसका लंड अंदर जल्दी लेना चाहती थी.

कुशल भी वेट ना करते हुए लंड का मूँह चूत पर टिकाता है और धकककककक से अंदर घुसा देता है. स्मृति को तो जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल जाती है.

“ उफफफफ्फ़……….ओह….आआहहह………आहहहहहः……………” स्मृति अपनी चूत मे लगते हुए झटको के साथ और भी मस्त हो जा रही थी. जैसे जैसे झटके लग रहे थे वैसे वैसे स्मृति अपनी टांगे और फैलाती जा रही थी.

जब वो इतना बड़ा लंड बाहर आ रहा था और जिस स्पीड के साथ अंदर जा रहा था तो सीन देखने लायक था. जैसे कोई समुद्रा मंथन से खास चीज निकलना चाह रहा हो लेकिन यहाँ पर तो कुशल सिर्फ़ स्मृति की चूत से पानी ही पानी निकाल रहा था जिसे खुद कुशल भी देख कर पागल हो रहा था.

“उईईईईईईई….आआहहह….. येस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…………..फकक्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क………………………” स्मृति अपनी पूरी लाइफ जी रही थी. ऐसे स्ट्रॉंग स्ट्रोक्स जो कि किसी भी लड़की को स्वर्ग की सैर करा सकता था.

बेड रूम से फूच फुच्च के साउंड आने शुरू हो गये थे. कुशल की आँखे भी बंद हो गयी थी और वो मस्त होकर धक्के लगा रहा था. उसके मूँह से भी सिसकारियाँ निकल रही थी.

ऐसा करीबन कुच्छ मिनिट चला और तभी पता नही स्मृति को क्या सूझा कि वो डिफरेंट पोज़िशन मे आने की कोशिश करने लगी. कुशल को शुरू मे समझ नही आया लेकिन फिर वो समझ गया कि आख़िर स्मृति क्या चाहती है. अब स्मृति ऐसी पोज़िशन मे थी कि उसकी गान्ड का छेद भी कुशल को क्लियर दिखाई दे रहा था और लेकिन लंड अभी भी चूत मे ही था. स्मृति की गान्ड कुशल की बहुत बड़ी फॅंटेसी थी तो अब वो छेद उसके सामने था तो जैसे कुशल और भी पवरफुल सिचुयेशन मे था. कस कस के धक्के लगाने शुरू कर दिए थे और वहीं दूसरी तरफ स्मृति भी अपनी गान्ड अच्छे से उछाल रही थी. स्मृति एक एक्सपीरियेन्स्ड लेडी थी, किस मूव से कैसे लंड अंदर जाएगा उसको सब पता था और इसका वो पूरा फ़ायदा उठा रही थी.

कुशल पागल हुए जा रहा था और वहीं स्मृति भी पूरी मस्ती मे थी.

“उफफफफ्फ़…..हीईीईई………….एसस्स्स्स्स्सस्स……….फुक्कककककककक…………आआहहह…….म्ह” और कुच्छ ही देर मे स्मृति की गान्ड कुशल के लंड पर कसति चली गयी और वो मंज़िल तक पहुँच गयी थी. और इन नो टाइम कुशल भी अपनी पिचकारी उगल देता है. क्या मस्त सेक्स हुआ दोनो के बीच, दोनो उसी बेड पर लेट गये. और स्मृति कुशल के बालो मे हाथ फिराने लगी………. शायद उसे पूरा अहसास था कि ये मीटिंग पूरी रात चलेगी.
 
दूसरी तरफ

सिमरन अपनी पास्ट स्टोरी प्रीति को सुना रही थी जिसमे सिमरन के भाई ने सिमरन को साड़ी मे देखा और वो रूम से बाहर चला गया क्यूंकी उसका लंड खड़ा हो गया था.

“ फिर क्या हुआ दीदी……. आगे बताओ ना…..” प्रीति फिर से पूछती है.

“उस दिन मैं बहुत खुस थी, आख़िर लड़की होने का अहसास मुझे उस दिन ही हुआ था. ये भी अहसास हो गया था कि लड़की का मीनिंग क्या है. लड़की का मीनिंग बस घर की चार दीवारी मे रह कर बस काम करना नही है बल्कि लड़की उनका मन बहलाने के लिए बनी है जो घर के लिए काम करते है – फॉर मेन. उपर वाले का तहे दिल से शुक्रिया अदा करा उस दिन, कि उसने मुझे किसी लायक बनाया. मैं इस लायक थी कि किसी के लंड को खड़ा कर पाऊ, और यही तो लड़की की सबे बड़ी इज़्ज़त है. मैने सोच लिया था कि अपने भैया के दिल मे उतर कर रहूंगी और अपनी शराफ़त से भी नही हटूँगी. मुझे पता था कि भैया के पास अब उनकी गर्ल फ्रेंड कभी नही आने वाली क्यूंकी चुदाई हुई ही इतने भयंकर तरीके से थी. और मुझे ये भी पता था कि अब भैया के मूँह खून लग चुका है. वो कहीं ना कहीं भटकेंगे ज़रूर तो क्यू ना मैं उन्हे अपने कदमो मे ही झुका लू.”

“वाउ दीदी ग्रेट….. क्या जबरदस्त एनकाउंटर रहा होगा….. आगे बताओ कि क्या हुआ……….” प्रीति और भी मज़े लेते हुए बोलती है.

“ अगले एक दिन भैया का मूड काफ़ी अपसेट रहा, सिर्फ़ अपने गर्ल फ्रेंड मॅटर की वजह से… मैं चाहती थी कि उनका मूड फ्रेश करू……. तो उस दिन उसके रूम मे पहुँच गयी……… और बात करनी शुरू करी –

“हेलो भैया….. कैसे हो….. क्या सोच रहे हो इतनी गौर से……….” वो अपने बेड पर उल्टे लेटे हुए थे और मैने उनके पास बैठते हुए पुछा. वो मेरी आवाज़ सुन कर चोंक गये थे. वो एक मॉर्निंग थी तो मैने अच्छे से अपने आप को रेफ्रेश किया था. हल्का सा मेक अप भी किया था जोकि भैया को दिखाई नही दे सकता था, बस लिप्स थोड़े ग्लॉसी नज़र आ रहे थे. एक लूस सी स्लीवेलेस्स टी-शर्ट पहनी थी और बेलून पयज़ामा पहना था.

“ बस मूड ऐसे ही ठीक नही है……” भैया ने थोड़ा अपसेट मन से जवाब दिया.

“ ऐसा क्या हो गया भैया जो इतने उदास हो…… आ जाओ चेस खेलते है………” मैने अपने भैया का हाथ पकड़ कर उन्हे उठाते हुए कहा.

“ सिम्मी मेरा मूड कुच्छ भी खेलने का नही है….. तू जा यहाँ से….” उन्होने फिर से रूखे से सुर मे जवाब दिया.

“ चेस नही तो क्या चेस्ट से खेलने का मन कर रहा है……….” मैं अपने मन ही मन बड़बड़ाई

“ क्या कहा तूने……?”

“ मैने कहा कि प्लीज़ चलो ना……….”

“ नही मुझे ऐसे लगा कि तूने कुच्छ और कहा……………” मेरे भैया को थोडा शक था कि मैने कुच्छ और कहा.

“ अब ये सोचना छोड़ो और चलो मेरे साथ खेलने…….” मैं भी भी उनका हाथ पकड़े ज़िद कर रही थी.

“उन्होने इस बार अपना हाथ ऐसे खींचा जैसे मुझसे छुड़ाना चाह रहे हो लेकिन उनके हाथ के साथ मैं भी खींचती हुई चली गयी और धदमम्म्मममममम…….वही हुआ जिसका मुझे इंतेज़ार था. सीधा उनके सीने पर जाकर गिरी मैं……. किसी मर्द की छाती से मेरे अनटच बूब्स की पहली टक्कर थी वो. उफ्फ क्या बताऊ प्रीति कि बदन मे कैसी आग सी लग गयी थी लेकिन कुच्छ कर नही सकती थी. फ़ायदा इतना मिला कि भैया को भी अहसास हो गया की कुच्छ तो है मेरे सीने मे. उनकी आवाज़ नही निकली लेकिन उनका चेहरा बता रहा था कि मेरी उभरती जवानी को वो अपने पूरे मन से देख रहे है.”

“ डीडीिईईईईईई…… बस बताती जाओ……………” प्रीति अपने बूब्स अब खुद प्रेस करने लगी थी.

“ मैं धीरे से उठी…… मेरे भैया वापिस अपने होश मे आए और मुझे सॉरी बोलने लगे…… मुझे पता था कि इसमे उनकी कोई ग़लती नही तो मैने भी उन्हे सॉरी बोलने के लिए मना किया. उठ कर बहुत ही सावधानी से अपनी टीशर्ट को सही किया और दोनो हाथो को उपर करके अपने बालो को सही किया…. मेरा टारगेट अब उन्हे अपनी आर्म्पाइट पे आए थोड़े बालो को दिखाना था. उन्होने उन बालो को गौर से देखा लेकिन कुच्छ बोले नही. मैं फिर से उनके साइड मे बैठ गयी और फिर से एक कॉन्वर्सेशन स्टार्ट हुई और पहले शुरू करने वाले वो ही थे –

“ छोटी तुझे नही लगता कि तू बड़ी हो रही है………..”

“ आपको क्यूँ लग रहा है…………. ऐसा?” मैने बहुत ही शरमाते हुए कहा

“ नही बस ऐसे ही…. और बता…. स्कूल का क्या प्लान है…………”

“क्या प्लान होता…. अब तो कल जाना है….. ड्रेस धोने के लिए डाल दी है……..”

“ तू कब तक वो ड्रेस पहनती रहेगी……….. बाकी लड़कियो की तरह कपड़े क्यूँ नही पहनती है…….”

“ बाकी लड़कियो की तरह?उनमे और मेरे कपड़ो मे क्या फ़र्क है…….?” मैने भी अंजान बनते हुए कहा.

“ पागल आज की लाइफ मे तुझे थोड़ा मॉडर्न होना चाहिए…… देख आज कल की लड़किया स्कर्ट पहनती है और तू है कि पढ़ने लिखने के बावजूद इतने कपड़ो के तले दबे रहती है……..तुझे स्कर्ट पहन नी चाहिए और टीशर्ट……. ज़्यादा कपड़े पहन ने से तेरी हाइट कम रह जाएगी. समझ आ रहा है या नही?”

“भैया समझ तो आ रहा है लेकिन मेरे पास स्कर्ट नही है और मुझे पता भी नही कि मैं स्कर्ट मे कैसी लगूंगी…..?”

“पूरा स्कूल पागल हो जाएगा तुझे देख कर…………..” भैया के मूँह से ये बात एग्ज़ाइट्मेंट मे निकल गयी थी और ये सुनकर मैं शरमा गयी….

“ लेकिन मैं स्कर्ट लेने किसके साथ जाउ……………?” मैने नादान बनते हुए बोला

“ चल तो फिर तुझे शॉपिंग करा के आता हू…….. चल तैयार होकर आ जा मैं तेरा नीचे वेट करूँगा…….” एक ही दिन मे इतना सब हो रहा था तो यकीन नही हो रहा था. कल तक जो भाई घास भी नही डालता था, आज वो शॉपिंग करने ले जाने को तैयार था. यही होता है लड़की के हुश्न का जादू…..”

“फिर आप गयी शॉपिंग करने….?” प्रीति सिमरन से पूछती है.

“फिर शॉपिंग करने के लिए मैं तैयार हो गयी और आख़िर नीचे चली गयी, मेरे दिल मे काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट था कि पता नही आख़िर मेरे लिए क्या शॉपिंग होने जा रही है. जो कुच्छ भी हो लेकिन सबसे ज़्यादा खुश मे इस बात के लिए थी कि मेरा भाई मुझ पर ध्यान दे रहा था और यही हर लड़की चाहती है कि उसको इग्नोर ना किया जाए और उसको हमेशा लोगो की अटेन्षन मिले. अपने भाई के साथ बाइक पर बैठने का उस दिन अलग ही एक्सपीरियेन्स था, बाइक जितनी तेज़ी के साथ चल रही थी उतनी ही तेज़ी के साथ हम दोनो एक दूसरे के और करीब आते जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि जैसे लाइफ मे कोई भी टेन्षन नही है और सब कुच्छ बहुत अच्छा चल रहा है. जब लड़की ऐसा सोचती है तो उसके चेहरे पर और भी निखार आ जाता है और वैसे भी उस टाइम तो मैं एक पूरी टीन थी.”

“वाउ…… ग्रेट…… आगे बताओ………..” प्रीति का एग्ज़ाइट्मेंट भी कम नही हो रहा था.

 
“ फिर काफ़ी चलने के बाद हम एक माल मे पहुँचे…… मेरा कॉन्फिडेन्स इतना अच्छा नही था और माल मे बहुत घबरा कर चल रही थी मैं, पता नही क्यूँ एक अजीब सा डर लग रहा था. माल मे पता नही कितने सारे गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड के जोड़े बैठे थे. गर्ल्स ने बेहद टाइट टाइट क्लोदिंग पहनी हुई थी जिसे देख कर मुझे अपने भाई की एक्स गर्ल फ्रेंड की और भी याद आ रही थी और समझ भी आ रहा था कि जमाना आज कल उन्ही लड़कियो का है जिनमे अपनी बॉडी दिखाने का टॅलेंट है. नही तो खूबसूरती किसी भी काम की नही. खैर मेरे दिल मे अभी तक यही बात चल रही थी कि पता नही भैया आज मुझे कैसी शॉपिंग कराने जा रहे है. थोड़ी ही देर मे हम एक डिपार्ट्मेनल शोरुम मे घुस गये……. मुझे लगा कि भैया मेरी हेल्प करेंगे मेरी शॉपिंग मे क्यूंकी ये उन्ही का डिसिशन था कि मैं शॉपिंग करू…..” सिमरन बस बताती जा रही थी.

“ तो क्या उन्होने हेल्प नही की……..?” प्रीति क्वेस्चन मार्क वाली निगाहो से देखती है.

“सबसे पहले तो उन्होने पूरे शोरुम मे नज़रे फिरा कर देखी और फिर मेरे पास आकर बोले –

माइ ब्रदर- सिम्मी आज तेरी चाय्स देखता हू. तुझे एक मॉडर्न और टाइम के साथ चलने वाली लड़की बन ना है. ले ले जो मर्ज़ी लेना है.

मे – भैया सच मे मुझे कुच्छ आइडिया नही है. वैसे भी जैसे सूट सलवार मे पहनती हू तो वो तो मुझे यहाँ दिखाई भी नही दे रहे है……….

“और ये बात सच ही है कि मुझे आइडिया नही था कि मैं क्या लू….. मुझे उसे खुले आसमान मे ऐसे छोड़ दिया गया कि मुझे आइडिया लगाना मुश्किल था कि मैं क्या लू….. खैर फिर भैया आगे बोलते है….”

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा हा……… तुझे आइडिया नही है. अरे पगली तू कोई बच्ची थोड़े ही ना है. आज कल 80% शोरुम गर्ल्स के लिए होते है क्यूंकी उनके पास पहन ने के ऑप्षन ज़्यादा होते है. तेरे जैसी लड़की के लिए काउंटलेस ऑप्षन है पहन ने के लिए………..
 
Kushal ka lund aise hontho ke beech tha ki jo chahe kitni bhi baar is lund ko chuse ye lund bore nahi hone wala tha. Aur aaj ki raat to jaise khatam hi nahi hone wali thi kyunki Smriti bhi full mood me thi aur Kushal to hamesha hi evergreen raha hai.

Smriti aise hi uska lund chuse ja rahi thi aur Kushal ke moonh se siskariyan nikalna shuru ho gayi thi.

“Uffffff………….. wooooooooooo…aaaahahhhhhhhhhhh……….. “ Kushal aisi hi siskariyo ke sath apne hath Smriti ki Peeth ki taraf badhata hai. Smriti aadhe se jyada lund apne moonh me le chuki thi. Kushal apna hath peeth se aur neeche le jaana chah raha tha jahan Smriti ki gaand thi lakin wo aisa kar nahi paaya.

Kushal ki halat aur bhi kharab hoti jaa rahi thi. Jawan khoon tha aur puri raat baaki thi.

“ Aaahhhhhhhhhhhhh……… madam aaj to dikha do apne us chhed ko…….. jiske liye main deewana hu……….. uffffffff meri jaaaaannnnnn….. ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh…….” Kushal ki halat bahut hi jyada kharab ho rahi thi.

Kushal ki ye baat sun kar Smriti apne honth uske lund se hata leti hai aur bed pe letne ki teyaari karne lagti hai. Kushal ko ye ummeed thi ki aaj to uska sapna pura hone ja raha hail akin Smriti apni dono taange felati hai aur apni chut ke chhed ko khol kar Kushal ko dikhati hai. Ye bhi ek behad erotic scene tha lakin Kushal to jaise Smriti ki gaand ka deewana tha.

“ Aaj to kuchh special ho jaaye………” Kushal ka ishara shayad uski gaand ki taraf hi tha.

“ Special hi to hai ye…………..” Smriti phir se apni chut par hath lagate hue bolti hai.

“ Lakin aapne to promise kiya tha ki main apni har ichha puri kar sakta hu……” Kushal thoda sa rukhe swar me bolta hai.

“ Lion….. chinta kyu karta hai….. maine to us raat bhi pura mauka diya tha lakin tu hi neeche nahi aaya. Lakin aaj phir se wohi se situation hai pehle meri turn aur phir tera turn………..” Smriti phir se use khula mauka deti hai.

Kushal ye sunte hi aage badhta hai aur jhuk kar Smriti ki chut par ek strong kiss karta hai. Aise lagta hai ki jaise wo uski chut kha jaane ke mood me tha. Smriti uski is mardangi bhari style se aur bhi impress ho jaati hail akin phir bhi apni sisaki ko nahi rok paati……

“ Ufffffffffffffff…….. lion………… koi formalaties nahi…….. please bujha de iski pyaaaassssssss………….” Smriti shayad uska lund ander jaldi lena chahti thi.

Kushal ne bhi wait na karte hue Lund ka moong chut par tikata hai aur dhakkkkkk se ander ghusa deta hai. Smriti ko to jaise duniya ki sabse badi khushi mil jaati hai.

“ Ufffff……….ohhhhhhhhhh….aaaahahhhhh………aahahahahahah……………” Smriti apni chut me lagte hue jhatko ke saath aur bhi mast ho ja rahi thi. Jaise jaise jhatke lag rahe the vaise vaise Smriti apni taange aur felati ja rahi thi.

Jab wo itna bada lund bahar aa raha tha aur jis speed ke sat hander ja raha tha to scene dekhne layak tha. Jaise koi samudra manthan se khas cheeje nikalna chah raha ho lakin yahan par to Kushal sirf Smriti ki chut se paani hi paani nikal raha tha jise khud Kushal bhi dekh kar pagal ho raha tha.

“Uiiiiiiiii….aaahahhhhh….. yessssssssssssssssssssss…………..fuckkkkkkkkkkkkkkkk………………………” Smriti apni puri life jee rahi thi. Aise strong strokes jo ki kisi bhi ladki ko swarg ki sair kara sakta tha.

Bed room se fuch fuchh ke sound aane shuru ho gaye the. Kushal ki aankhe bhi band ho gayi thi aur wo mast hokar dhakke laga raha tha. Uske moonh se bhi siskariyan nikal rahi thi.

Aisa kareeban kuchh minute chala aur tabhi pata nahi Smriti ko kya sujha ki wo different position me aane ki koshish karne lagi. Kushal ko shuru me samjh nahi aaya lakin phir wo samjh gaya ki aakhir Smriti kya chahti hai. Ab Smriti aisi position me thi ki uski gaand ka chhed bhi Kushal ko clear dikhai de raha tha aur lakin lund abhi bhi chut me hi tha. Smriti ki gaand Kushal ki bahut badi fantasy thi to ab wo chhed uske saamne tha to jaise Kushal aur bhi powerful situation me tha. Kas kas ke dhakke lagane shuru kar diye the aur wahin dusri taraf Smriti bhi apni gaand achhe se uchhal rahi thi. Smriti ek experienced lady thi, kis move se kaise lund ander jaayega usko sab pata tha aur iska wo pura fayda utha rahi thi.

Kushal pagal hue ja raha tha aur wahin Smriti bhi puri masti me thi.

“Ufffff…..hiiiiii………….yesssssssss……….fuckkkkkkkk…………aaahahhhhhhhh…….mhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh” Aur kuchh hi der me Smriti ki gaand kushal ke lund par kasti chali gayi aur wo manjil tak pahunch gayi thi. Aur in no time Kushal bhi apni pichkaari ugal deta hai. kya mast sex hua dono ke beech, dono usi bed par let gaye. Aur Smriti Kushal ke baalo me hath phirane lagi………. Shayad use pura ahsaas tha ki ye meeting puri raat chalegi.

Dusri taraf

Simran apni past story Preeti ko suna rahi thi jisme Simran ke bhai ne Simran ko saree me dekha aur wo room se bahar chala gaya kyunki uska lund khada ho gaya tha.

“ Phir kya hua didi……. Aage batao na…..” Preeti phir se puchhti hai.

“Us din main bahut thi, aakhir ladki hone ka ahsaas mujhe us din hi hua tha. Ye bhi ahsaas ho gaya tha ki ladki ka meaning kya hai. Ladki ka meaning bas ghar ki char diwari me rah kar bas kaam karna nahi hai balki ladki unka man bahlane ke liye bani hai to ghar ke liye kaam karte hai – FOR MEN. Upar wale ka tahe dil se shukriya ada kara us din, ki usne mujhe kisi layak banaya. Main is layak thi ki kisi ke lund ko khada kar pau, aur yehi to ladki ki sabe badi ijjat hai. Maine soch liya tha ki apne bhaiya ke dil me utar kar rahungi aur apni sharafat se bhi nahi hatungi. Mujhe pata tha ki bhaiya ke pass ab unki girl friend kabhi nahi aane wali kyunki chudai hui hi itne bhayankar tarike se thi. Aur mujhe ye bhi pata tha ki ab bhaiya ko moon lag chuka hai. Wo kahin na kahin bhatkenge jarur to kyu na main unhe apne kadmo me hi jhuka lu.”

“Wow didi great….. kya jabardast encounter raha hoga….. aage batao ki kya hua……….” Preeti aur bhi maje lete hue bolti hai.

 


“ Agle ek din bhaiya ka mood kafi upset raha, sirf apne girl friend matter ki vajah se… main chahti thi ki unka mood fresh karu……. To us din uske room me pahunch gayi……… aur baat karni shuru kari –

“Hello bhaiya….. kaise ho….. kya soch rahe ho itni gaur se……….” Wo apne bed par ulte lete hue the aur maine unke pass bethte hue puchha. Wo meri aawaj sun kar chonk gaye the. Wo ek morning thi to maine achhe se apne aap ko refresh kiya tha. Halka sa make up bhi kiya tha joki bhaiya ko dikhai nahi de sakta tha, bas lips thode glossy najar aa rahe the. Ek loose si sleeveless t-shirt pahni thi aur balloon payjama pahna tha.

“ Bas mood aise hi thik nahi hai……” Bhaiya ne thoda upset man se jawab diya.

“ Aisa kya ho gaya bhaiya jo itne udaas ho…… aa jao chess khelte hai………” Maine apne bhaiya ka hath pakad kar unhe uthate hue kaha.

“ Simmy mera mood kuchh bhi khelne ka nahi hai….. tu ja yahan se….” Unhone phir se rukhe se sur me jawab diya.

“ Chess nahi to kya chest se khelne ka man kar raha hai……….” Main apne man hi man badbadayi

“ Kya kaha tune……?”

“ Maine kaha ki please chalo na……….”

“ Nahi mujhe aise laga ki tune kuchh aur kaha……………” Mere bhaiya ko thoda shak tha ki maine kuchh aur kaha.

“ Ab ye sochna chhodo aur chalo mere sath khelne…….” Mainabhi bhi unka hath pakde jid kar rahi thi.

“Unhone is baar apna hath aise khincha jaise mujhse chhudana chah rahe ho lakin unke hath ke sath main bhi khinchti hui chali gayi aur dhadammmmmmmmm…….Wahi hua jiska mujhe intezaar tha. Seedha unke seene par jakar giri main……. Kisi mard ki chhati se mere untouch boobs ki pehli takkar thi wo. Uff kya batau Preeti ki badan me kaise aag si lag gayi thi lakin kuchh kar nahi sakti thi. Fayda itna mila ki bhaiya ko bhi ahsaas ho gaya ki kuchh to hai mere seene me. Unki aawaj nahi nikli lakin unka chehra bata raha tha ki meri ubharti jawani ko wo apne pure man se dekh rahe hai.”

“ Didiiiiiiiii…… bas batati jao……………” Preeti apne boobs ab khud press karne lagi thi.

“ Main dheere se uthi…… mere bhaiya wapis apne hosh me aaye aur mujhe sorry bolne lage…… mujhe pata tha ki isme unki koi galti nahi to maine bhi unhe sorry bolne ke liye mana kiya. Uth kar bahut hi saavdhani se apni tshirt ko sahi kiya aur dono hatho ko upar karke apne baalo ko sahi kiya…. Mera target ab unhe apni armpit pea aye thode baalo ko dikhana tha. Unhone un baalo ko gaur se dekha lakin kuchh bole nahi. Main phir se unke side me beth gayi aur phir se ek conversation start hui aur pehle shuru karne wale wo hi the –

“ Chhoti tujhe nahi lagta kit u badi ho rahi hai………..”

“ Aapko kyun lag raha hai…………. aisa?” Maine bahut hi sharmate hue kaha

“ Nahi bas aise hi…. Aur bata…. School ka kya plan hai…………”

“Kya plan hota…. Ab to kal jaana hai….. dress dhone ke liye daal di hai……..”

“ Tu kab tak wo dress pahanti rahegi……….. baaki ladkiyo ki tarah kapde kyun nahi pahanti hai…….”

“ Baaki ladkiyo ki tarah?unme aur mere kapdo me kya fark hai…….?” Maine bhi anjaan bante hue kaha.

“ Pagal aaj ki life me tujhe thoda modern hona chahiye…… dekh aaj kal ki ladkiya skirt pahanti hai aur tu hai ki padhne likhne ke baavjood itne kapdo ke tale dabe rehti hai……..tujhe skirt pahan ni chahiye aur tshirts……. Jyada kapde pahan ne se teri height kam rah jaayegi. Samjh aa raha hai ya nahi?”

“Bhaiya samjh to aa raha hail akin mere pass skirt nahi hai aur mujhe pata bhi nahi ki main skirt me kaisi lagungi…..?”

“Pura school pagal ho jayega tujhe dekh kar…………..” bhaiya ke moonh se ye baat excitement me nikal gaye the aur ye sunkar main Sharma gayi….

“ Lakin main skirt lene kiske sath jau……………?” Maine nadan bante hue bola

“ Chal to phir tujhe shopping kara ke aata hu…….. chal teyaar hokar aa ja main tera neeche wait karunga…….” Ek hi din me itna sab ho raha tha to yakin nahi ho raha tha. Kal tak jo bhai ghas bhi nahi daalta tha, aaj wo shopping karane le jaane ko teyaar tha. Yehi hota hai ladki ke husan ka jadoo…..”

“Phir aap gayi shopping karne….?” Preeti Simran se puchhti hai.

“Phir shopping karne ke liye main teyaar ho gayi aur aakhir neeche chali gayi, mere dil me kaafi excitement tha ki pata nahi aakhir mere liye kya shopping hone ja rahi hai. Jo kuchh bhi ho lakin sabse jyada khush me is baat ke liye thi ki mera bhai mujh par dhyan de raha tha aur yehi har ladki chahti hai ki usko ignore na kiya jaaye aur usko hamesha logo ki attention mile. Apne bhai ke sath bike par bethne ka us din alag hi experience tha, bike jitni teji ke saath chal rahi thi utni hi teji ke saath hum dono ek dusre ke aur kareeb aate ja rahe the. Aisa lag raha tha ki jaise life me koi bhi tension nahi hai auir sab kuchh bahut achha chal raha hai. jab ladki aisa sochti hai to uske chehre par aur bhi nikhar aa jaata hai aur vaise bhi us time to main ek pure teen thi.”

“Wow…… great…… aage batao………..” Preeti ka excitement bhi kam nahi ho raha tha.

“ Phir kaafi chalne ke baad hum ek mall me pahunche…… mera confidence itna achha nahi tha aur mall me bahut ghabra ka chal rahi thi main, pata nahi kyun ek ajeeb sa dar lag raha tha. Mall me pata nahi kitne saare girl friend aur boy friend ke jode bethe the. Girls ne behad tight tight clothing pahni hui thi jise dekh kar mujhe apne bhai ki ex girl friend ki aur bhi yaad aa rahi thi aur samjh bhi aa raha tha ki jamana aaj kal unhi ladkiyo ka hai jinme apni body dikhane ka talent hai. Nahi to khubsurati kisi bhi kaam ki nahi. Khair mere dil me abhi tak tehi baat chal rahi thi ki pata nahi bhaiya aaj mujhe kaisi shopping karane ja rahe hai. Thodi hi der me hum ek departmental showroom me ghus gaye……. Mujhe laga ki bhaiya meri help karenge meri shopping me kyunki ye unhi ka decision the ki main shopping karu…..” Simran bas batati ja rahi thi.

“ To kya unhone help nahi ki……..?” Preeti question mark waali nigaaho se dekhti hai.

“Sabse pehle to unhone pure showroom me najre phire kar dekhi aur phir mere pass aakar bole –

My Brother- Simmy aaj teri choice dekhta hu. Tujhe ek modern aur time ke saath chalne wali ladki ban na hai. le le jo marji lena hai.

Me – Bhaiya sach me mujhe kuchh idea nahi hai. vaise bhi jaise suit salwar me pahnati hu to wo to mujhe yahan dikhai bhi nahi de rahe hai……….

“Aur ye baat sach hi hai ki mujhe idea nahi tha ki main kya lu….. mujhe use khule aasman me aise chhod diya gaya ki mujhe idea lagana muhskil tha ki main kya lu….. khair phir bhaiya aage bolte hai….”

My brother – Ha ha ha ha ha ha……… Tujhe idea nahi hai. Are pagli tu koi bachchi thode hi na hai. Aaj kal 80% showroom girls ke liye hote hai kyunki unke pass pehan ne ke option jyada hote hai. Tere jaisi ladki ke liye countless option hai pahan ne ke liye………..

 
फॅमिली में मोहब्बत और सेक्स --52

“भैया बताते जा रहे थे और मैं सब सुन कर शरमा भी रही थी और खुश भी हो रही थी……. भैया खुल कर तो सब नही बोल सकते थे लेकिन मैं समझ रही थी कि वो बोलना चाहते थे कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की के पास तो बहुत सारे ऑप्षन्स है ट्राइ करने के लिए… लेकिन फिर भी मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा था तो मैने फिर से भैया से पुछा –

मे- भैया प्लीज़….. मैं इतनी बड़ी नही हुई हू. आप ही ने तो शॉपिंग के लिए कहा था तो मैं आ गयी अब आप ही हेल्प करिए मेरी. नही तो सच मे मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा है………

“भैया जैसे मेरी उस रिक्वेस्ट को सुन ने के लिए ही खड़े थे और मेरे मूँह से ऐसी बात सुनते ही वो शोरुम मे आ आगे की तरफ बढ़ते है. मैं उनके पीछे पीछे चल रही थी…. वो एक स्कर्ट सेक्षन मे पहुँचे…… प्रीति तुझे क्या बताऊ कि जो उन्होने स्कर्ट उठाई उसे देख कर मेरा दिल कैसे धक धक करने लगा था. वो स्कर्ट बहुत ही छोटी थी………..”

“वाउ….. युवर ब्रो ईज़ सो रोमॅंटिक…. वो आपको छोटे कपड़ो मे देखना चाहते थे…….. एनीवे फिर क्या हुआ……………” प्रीति भी मुस्कुराते हुए कहती है.

“ वो स्कर्ट उठा कर मेरी तरफ टर्न हुए…… और मुझसे बोले –

माइ ब्रदर – सिम्मी ट्राइ दिस……….

मे- भैया आर यू सीरीयस……….. ये बहुत ही छोटी है

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा हा हा…….

मे – आप हंस क्यू रहे है…… क्या मैने कोई जोक सुनाया है…….

माइ ब्रदर – मैं हंस….. इसलिए रहा हू कि पता नही मेरी बहन बड़ी कब होगी……… मेरी ऐसी भी दोस्त है जिनके लिए ये स्कर्ट भी लोंग है….. और मेरी बहन कहती है कि ये छोटी है…. हा हा हा हा हा

मे- वाह वाह……… ये किसी के लिए लोंग स्कर्ट भी है. ये बहाने ना बनाइए………

माइ ब्रदर – देख सिम्मी, ये मेरी शॉप नही है. यहाँ पर वोही रखा है जो यहाँ बिकता है. और देख स्कर्ट सेक्षन मे सबसे पहले यही स्कर्ट रखी है क्यूंकी लड़कियो की पहली डिमॅंड ही यही है…………. चल अब बाते बाद मे…. इसे पकड़ और फिटिंग रूम मे इसे ट्राइ कर के आ……..

मे- यू श्योर भैया?????

माइ ब्रदर – अरे मेरी मा और कैसे बताऊ कि हाँ श्योर. अब जल्दी जा और ट्राइ करके बाहर आ………..

“ मैने उस टाइम तक अपने पाँव किसी को भी नही दिखने दिए थे. घर मे और या स्कूल मे, हमेशा धकि रहती थी. अब हाथ मे एक छोटी सी स्कर्ट को पकड़ के चलना बड़ा भारी सा लग रहा था.” सिमरन सीरीयस भाव बनाते हुए बोलती है.

“ तो क्या आपने वो ट्राइ करी या नही करी……..” प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.

“ आख़िर मैं फिटिंग रूम मे घुस ही गयी….. बॉटम उतारा और स्कर्ट ट्राइ की……. प्रीति सच बता रही हू कि इतनी शरम आई कि बता नही सकती…….. वो मिनी स्कर्ट थी. बचपन से कोई लड़की पहने तो बात नही लेकिन जब जवानी मे कोई लड़की पहली बार इसे पहनती है तो बड़ा अजीब लगता है. मेरी गोरी और टाइट जांघे पूरी विज़िबल हो गयी थी….. स्कर्ट इतनी छोटी थी कि अगर थोड़ी भी हवा नीचे चली जाए तो बस सब कुच्छ दर्शन हो जाए…….. स्कर्ट पहन ने के 5 मिनिट बाद तक भी मैं सोचती रही कि बाहर जाउ या नही… कन्फ्यूज़ थी ही कि इतने मे फिटिंग रूम का डोर नॉक हो गया…….. मैं समझ गयी कि ये भैया ही है………. बहुत ही दबे पाँवो से…. बढ़ी हुई धड़कनो के साथ मैने फिटिंग रूम का डोर खोला और धीरे धीरे गेट के पीछे से मैं सामने आई………. मेरे भैया की निगाहे मुझ पर पड़ी…….. उपर से नीचे तक उनकी निगाहे पहुँची………… मेरी थाइस पर रूकी और फिर और भी नीचे चली गयी….. मैने क्लियर देखा कि उनका मूँह खुला का खुला रह गया था और और गले के अंदर अटका हुआ सब कुच्छ अंदर ले जा रहे थे…….”

“ तो आख़िर गिरा ही दी बिजली……… ग्रेट…………” प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.

“ कुच्छ सेकेंड्स तक भैया के मूँह से कोई शब्द नही निकले………… मुझे खुद भी टेन्षन हो रही थी कि कहीं उस स्कर्ट मे मैं जोकर तो नही लग रही थी… तभी भैया मे चुप्पी तोड़ी ……..

माइ ब्रदर – ओह माइ गॉड……. यू आर सो सो हॉट…………………

“ये बात बोलते हुए भैया की आइज़ मेरी थाइस पर थी…… और चेहरा बिल्कुल लाल पड़ चुका था…. वो आगे बोलते है………

माइ ब्रदर – यू आर नोट आ चाइल्ड अनीमोर………. इतनी गजब दिख सकती है कि मुझे आइडिया भी नही था…… ज़रा पीछे घूम कर दिखा……….
 
“अपने भाई के कहने पर मैं पीछे घूम गयी………… पीछे का हिस्सा तो मैं भी नही देखा था लेकिन मुझे इतना अहसास ज़रूर हो गया था कि पीछे से मेरे हिप्स पर वो स्कर्ट उठी हुई है………….. तभी मुझे कुच्छ गिरने की आवाज़ आती है…. मैं पीछे मूड कर देखती हू तो भैया नीचे झुक कर कुच्छ उठा रहे है…… मैने कोई रिएक्ट नही किया लेकिन जैसे ही मुझे याद आया कि आज मैने क्या पहना हुआ है तो ये सोचते ही मैं उच्छल पड़ी और फिटिंग रूम के अंदर की साइड हो गयी……”

माइ ब्रदर – वो… वो…. मोबाइल गिर गया था……..

“ अपने भाई की इस बात पर मुझे हँसी आ गयी लेकिन मुझे ये भी डर था कि आज तो मेरी पैंटी देख ही ली शायद भैया ने……… लेकिन मैं और कर भी क्या सकती थी……….”

“ हाई दीदी…….उस स्कर्ट को थोड़ा सा और उठा देती तो क्या हो जाता….. आपने तो भैया को तरसा ही दिया………….” प्रीति भी खुलती जा रही थी…. उसे सिमरन की ये स्टोरी काफ़ी एरॉटिक लग रही थी.

“ तू बाते ना बना और मेरी बात सुन……. मेरे भैया ने मुझसे वहीं रुकने के लिए बोला और कहा कि वो एक टॉप लेकर आते जो उस टीशर्ट के साथ अच्छा लगेगा……… मैने भी यही सोचा कि जब एक बात स्कर्ट पहन ही ली तो टॉप से क्या डरना…. मैने उन्हे हाँ बोल दिया और वो मेरे लिए टॉप लेने चले गये…… मैं बहुत हॅपी थी……. मिरर मे चारो और घूम कर देख रही थी…. जैसे ही मैं घूमती तो मेरी स्कर्ट हवा मे उड़ती और मेरी रेड पैंटी खुद भी मुझे दिख जाती…….” सिमरन रोमॅंटिक अंदाज़ मे सारी बात बताती जा रही थी.

“ हाई मैं मर जावा दीदी…. पैंट पहनी भी तो रेड……… अपने भैया को पूरा फ्लॅट करने की तैयारी कर रखी थी आपने तो………….. खैर आगे बताइए आप……….” प्रीति हर बार की तरह इस बार भी बहुत एग्ज़ाइटेड थी.

“ मैं खुश हो ही रही थी कि इतने मे भैया फिर एक टॉप लेकर आए…………. टॉप को देखते ही मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी. वो एक छोटा सा स्लीवेलेस्स टॉप था जोकि लेंग्थ मे काफ़ी चौड़ा था. गला इतना डीप कि क्या बताऊ……….. मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे भैया दुश्मनी निभा रहे हो………….

माइ ब्रदर – ले सिम्मी इसे ट्राइ कर…………..

मे- ये कैसा टॉप है……………किसी बच्चे का तो नही है…………….

माइ ब्रदर – हा हा हा हा हा…. तू भी काफ़ी नॉटी है. अगर देखना चाहती है तो वहाँ देख उस मॅनिकिन पर यही टॉप है……

“भैया के इशारा करते ही मैने फिटिंग रूम से मूँह बाहर निकाला और उस डाइरेक्षन मे देखा जहाँ भैया ने इशारा किया था. मॅनिकिन को देखते ही मुझे चक्कर आ गये…. वो टॉप बस मॅनिकिन के बूब्स से बस थोड़ा ही नीचे था, यानी कि आधा पेट नंगा ही रहता उसमे….. और यही नही…… इतना डीप नेक था कि मॅनिकिन के बूब्स जैसे बाहर आ जाने को तैयार थे…. मैं फिर से कन्फ्यूज़ थी कि क्या करू….इतने मे मेरे भैया ने फिर से मुझसे बात करनी शुरू की…….

माइ ब्रदर – कम ऑन सिम्मी……. इतना टाइम क्यू लगा रही हो……

मे- भैया ये टॉप तो……. कैसे….यानी……… ये तो……….

माइ ब्रदर – अरे मेरी प्यारी बहना….. ये मैं तुझे लड़को के टॉप थोड़े ही दे रहा हू…. तूने देखा ना कि मॅनिकिन पर भी यही टॉप है यानी कि यही फॅशन है…. अब टेन्षन ना ले और जल्दी जाकर ट्राइ करके आ……………..

“ मेरे भैया ने इतना बोलते ही मुझे टॉप दे दिया और फिटिंग रूम का डोर बंद कर दिया……… बहुत ही अजीब मन से वो टॉप मैने पहना………….. बॉडी के किसी भी पार्ट को वो टॉप सही से ढकने मे पासिबल नही था…….. मेरा पेट, शोल्डर्स, ब्रा, बूब्स सब कुच्छ थोड़ा थोड़ा विज़िबल था………….. शॉर्ट स्कर्ट और उपर से इतना शॉर्ट टॉप….. अब तो लगभग मे आधी नंगी थी…… मिरर मे अपने आप को देखा तो पेट क्लियर दिखाई दे रहा था……… पेट की नाभि भी क्लियर दिखाई दे रही थी….. यही नही मेरी रेड ब्रा भी क्लियर दिख रही थी. मुझे यकीन था कि भैया मुझे देखे बिना नही मानेंगे…. तो मैने उस टॉप मे अपनी ब्रा को छुपाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन नाकाम रही… इससे पहले की कुच्छ और सोचती कि डोर फिर से नॉक हुआ…… मैं समझ गयी कि टाइम ओवर…….” सिमरन के चेहरे के भाव अभी भी बता रहे थे कि उस दौरान क्या सिचुयेशन रही होगी……
 
“ क्या बात है दीदी………. आप को तो सूपर सेक्सी स्लट बनाने पे तुले हुए थे भैया……………” खैर फिर क्या हुआ….

“ मैने धीरे से दरवाजा खोला…………. पहले मेरी आइज़, फिर मेरे लिप्स, फिर शोल्डर्स, फिर ब्रा, ब्रा के अंदर बूब्स, बूब्स के नीचे सपाट पेट, पेट की नाभि, नाभि के नीचे स्कर्ट, स्कर्ट के नीचे नंगी थाइस…….. मेरे भाई ने अपनी आँखो से सब एक्सरे कर दिया……. और मैं शरम से गढ़ी जा रही थी………….”

सिमरन आगे बताती है…… “ मेरे भैया आगे बढ़ते है………… मेरे बालो मे लगे क्लट्चर को हटाते है… मैं एक स्टॅच्यू बन कर सब होने दे रही थी… बालो को खोलने के बाद धीरे धीरे शोल्डर्स पर लाते है……… उसके बाद जो उन्होने बोला उसे सुन कर तो मेरे पाँव काँप गये…………”

“ उफफफफफफफ्फ़…… ऐसा क्या बोल दिया आपके जालिम भाई ने……. जल्दी बताओ ना…………….” प्रीति एग्ज़ाइटेड होते हुए बोलती है.

“ उन्होने मेरे टॉप की स्ट्राइप को पकड़ कर सीधा करना शुरू किया…… उनकी फिंगर्स मेरे बूब्स पर भी अंजाने मे टच हो रही थी……… पूरी बॉडी काँप रही थी मेरी…. वो धीरे से मेरे कानो के पास आए बोले –

माइ ब्रदर – फिटिंग अच्छी है टॉप की…….. लेकिन इस टॉप को बिना ब्रा के पहना जाता है…………

“मेरी हालत ऐसी थी कि क्या बताऊ…….. एक जवान लड़के से अपनी ब्रा के बारे मे ऐसी बात सुन कर मैं हैरान भी थी और शरम भी आ रही थी. दिल मे 10 सवाल आ रहे थे कि बिना ब्रा के ये टॉप कैसे पहना जाएगा और पहना भी जाएगा तो बूब्स तो जैसे बाहर ही लटके रहेंगे…………… मैं सोच ही रही थी कि भैया ने अपने बोल्ड अंदाज़ मे फिर से बोलना शुरू किया……….”

माइ ब्रदर – “ सिम्मी……… थोड़ा बहुत चलता है…………….. तू टेन्षन ना ले……. सच मे तू सूपर लग रही है. अब जल्दी से इन्हे चेंज कर ले….ये आउटफिट तो फिक्स है….. अब तेरे लिए जीन्स देख लेते है…………..”

“ बचपन मे डेली लड़ाई झगड़े होते थे..... पता नही मैं कितनी कोशिश करती थी कि डेली मेरे लिए कपड़े लिए जाए…. लेकिन मेरा भाई सबसे पहले मेरा दुश्मन बन कर खड़ा होता था…. और आज मेरा भाई ही था जो मेरे जवानी मे कदम रखते ही पता नही मुझे क्या क्या दिलाने को तैयार हो रहा था…. यही कीमत होती है हर लड़की की जवानी की……. खैर मे फिटिंग रूम मे टॉप और स्कर्ट उतारने लगी और दूसरी तरफ भैया जीन्स लेने के लिए चले गये....”
 
“ मॉल से खरीददारी करने के बाद हम घर की तरफ निकल लिए . मॉल से निकलते ही बारिस शुरू हो गई . बारिश से बचने की कोशिश करते भी जब हम गाड़ी तक पहुचे तो हम दोनो पूरे भीग चुके थे गीले कपड़ो मे मुझे ठंड लग रही थी , भीगने से मेरे कपड़े बदन से चिपक गए थे. घर आ कर भैया मेरे शरीर के उभारों को आनंद ले कर देखने लगा. मैं शरमा गई. मेरे मुंह से निकल गया..” भैया, मत देखो न ऐसे…मुझे शर्म आती है…” भैया ने शरारत से आँख मार दी… और मैं शरमा कर मेरे रूम में अन्दर भाग गई.

हम दोनों नहा कर फ्रेश हो कर भैया के कमरे में बैठ गए. भैया अलमारी से व्हिस्की की बोतल निकाल लाया.

“यार ठण्ड लग रही है…एक पैग पी लेता हूँ…तुम भी थोडी सी ले लो..”

“नहीं..नहीं…” मैं उसकी हरकते नोट कर रही थी. मुझे लग रहा था आज भैया मूड में हैं. मैंने सोचा आज अच्छा मौका है, पटाने का…

उसने धीरे धीरे पीना चालू कर दिया. कह रहा था – “सिमरन तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है क्या…”

“हाँ…था..अब नहीं है..”

“अच्छा, भैया तुम्हारे साथ कुछ करता था..”

” धत्त…भैया… मुझे शर्म आती है…”

” मत बताओ…लो थोड़ा सा पी लो…अच्छा लगेगा…”

मैंने सोचा अच्छा मौका है… भैया समझेगा मैं नशे में हूँ… और नशे में ऐसा कर रही हूँ…

“अच्छा भैया…थोड़ा ही देना..”

“वाह ये हुई न बात…ये लो ” उसने एक पैग बना कर दिया.

मैंने पीने का नाटक किया. थोडी सी ड्रिंक पास में गिरा दी..और गिलास मुंह से लगा लिया..

कुछ ही देर में भैया को व्हिस्की चढने लगी. बोला- “यार सिमरन तू तो एकदम मस्त है…”

भैया कुछ आगे बोलता उसके पहले ही मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी… मैंने भी नशे में होने का नाटक किया..

“मस्त आप है..भैया…”

“नहीं…मस्त तो तू है… जरा देख अपने को..”

“क्या देखूं…मुझे तो तुम ही दिखाई दे रहे हो…”

अब भैया मस्ती में आ गया था… उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया… मैं जान करके उसकी गोदी में गिर गई. उसने मुझे बाँहों में कस लिया…

मैंने कहा- “भैया…ये नीचे क्या लग रहा है…”.

मैं थोड़ा कसमसाई… पर उसका लंड था की घुसता ही जा रहा था. मैं थोड़ा उठ गई… मैंने जान कर के ऐसे उठी की अपनी चूतड की गोल गोल फ़ांकें उसके सामने हो गई…

उसने मेरे दोनों चूतडों को दबा दिया…

मैं जैसे नशे में बोली- “हाय रे..भैया मर गई…क्या कर रहे हो…”

भैया ने कहा – ” सिमरन… मज़ा आया न..अब तुम बिस्तर पर लेट जाओ…”

“नहीं..नहीं…तुम कुछ गड़बड़ करोगे…”

ज्यादा नहीं…बस थोड़ा सा…”

“अच्छा.. ठीक है..”

मेरा मन तो खुशी के मरे उछल रहा था…मैं धीरे से जा कर बिस्तर पर लेट गई.

“ क्या बात है दीदी………. आप को तो चोदने पे तुले हुए थे भैया……………” खैर फिर क्या हुआ….

सिमरन आगे बताती है…… “ भैया ने कहा – “अब आँखे बंद कर लो…”.

“हटो भैया…जरूर तुम… देखो छेड़ना मत…”मैंने आँखें बंद कर ली… भैया पलंग पर पास आकर बैठ गए…और उनका हाथ हौले हौले से मेरे बदन को गुदगुदाने लगा. भैया मेरी दोनों टांगों को धीरे धीरे सहलाने लगे…और ऊपर की तरफ़ आने लगे. मेरे नितम्बों पर उनका हाथ घूमने लगा… मुझे सनसनी सी होने लगी… भैया जान करके अपना हाथ मेरी चूत पर भी टकरा देता था… तब जोर का करंट जैसा लग जाता था…

फिर धीरे धीरे उसने मेरी चूत पर कब्जा कर लिया… मैं सी सी कर सिस्कारियां भरने लगी. अब उसका हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था… एक हाथ चूत पर…और एक हाथ बूब्स पर… “सिमरन…कैसा लग रहा है…”

मेरे मुंह से अचानक निकल गया – ” भैया…तुम्हारे हाथो में तो कमाल है… अब कुछ कर दो न… कुछ भी करो..”

भैया ने मेरे बूब्स भींचने चालू कर दिए…दूसरा हाथ मेरी चूत की गहराई नापने लगा…उसकी बेताबी बढाने के लिए मैंने कहा – “भैया… बस अब नहीं… दूर हटो…”

मैं बिस्तर से नीचे उतर गई. भैया भी मेरे पीछे आ गया था…उसने पीछे से हाथ डाल कर मेरे बूब्स पकड़ लिए… “सिमरन… प्लीज़ करने दो… तुम्हे देख कर मेरा मन कब से कर रहा था की बस एक बार तुम्हे दबा दूँ. तुम्हारे ये उभार…गोलाईयां देख कर मुझसे रहा नहीं जाता है अब…”

भैया का लंड मेरे चूतड़ों में घुसा जा रहा था. मुझे उसके लंड का साइज़ तक चूतड़ों में महसूस हो रहा था.

मैंने मुस्करा कर भैया की तरफ़ देखा… और कहा ” पहले अपना ये मेरे हाथ में दो..”

“क्या…हाथ में क्या दूँ ?”

“भैया… अपना मोटा सारा लंड…”

लंड का नाम सुनते ही भैया तो जैसे पागल हो उठा.” मेरा लंड… वऊऊ… अरे पकड़ लो न… पूरा लंड तुम्हारा ही है…”

“ तो आख़िर गिरा ही दी बिजली……… ग्रेट…………” प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.

मेरी तमन्ना पूरी होने लगी थी. मेरा मन आनंद से भर उठा. मुझे लगा अब चुदाई में ज्यादा देर नहीं है… मैंने नशे में होने का नाटक करते हुए कहा – “हाय रे भैया…मत करो न…मुझे गुदगुदी होती है… देखो न तुम्हारा नीचे का डंडा…मेरी गांड में लग रहा है…”उसका लंड नीचे से गांड में घुसने के लिए जोर मार रहा था. उसके मोटे लंड का स्पर्श मुझे पूरा महसूस हो रहा था. मैंने अपने आप को उसके हवाले करते हुए कहा- “दूर हटो न…भैया… तुम्हारा लंड तो गांड में घुसा जा रहा है..”.

लंड और गांड का नाम सुनते ही भैया बेकाबू हो गया और जोश में भर कर बोला – “सिमरन..तुम्हारी गांड ही इतनी प्यारी है..की उसे देखते ही लंड को घुसा देने का मन करता है…”. भैया ने भी खुली भाषा का इस्तेमाल किया… देसी भाषा सुनते ही मैं तरंग में डूब गई.

अब उसने और कास के पकड़ लिया था. मेरे बूब्स मसलने लगा, चुन्चियों को खीचने लगा… और ऊपर से कमर हिला हिला कर लंड को गांड की दरारों में मारने लगा…

“भैया…बस भी करो…कोई आ जाएगा न…”

“सिमरन…कोई नहीं आएगा… “. उसने अपना पजामा उतार दिया और कहा…”देख ये कितना टन्ना रहा है..” फिर उसने अपना कुरता भी उतार दिया और पूरा नंगा हो गया…

 
मैंने कहा – “भैया…ये क्या करते हो… मुझे शर्म आ रही है…”

उसने मेरी एक नहीं सुनी. और मुझे उठा लिया…और बिस्तर पर प्यार से लेटा दिया. उसका लंड कड़क हो गया था. बहुत ही टन्ना कर फुफकार रहा था…

मेरा पजामा और कुरता खींच कर उतार दिया.मैं तो यही चाह रही थी. कहा – “अरे क्या कर रहे हो… मैं तो नंगी हो जाऊँगी न…”

बोला – “नंगे बदन आपस में रगड़ खायेंगे तो मज़ा भी तो आएगा “उसने मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया. मेरी चूत भी गीली हो गई थी. मैं बहुत खुश थी कि अब मैं चुद जाऊँगी. मैंने अपनी टांगे फैला दी और भैया को अपने ऊपर चढ़ने का न्योता दिया.

भैया मुस्करा कर पास आया और मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गया. उसने मेरी चूत सहलाई और चेहरा पास लाकर चूत को प्यार किया. मेरे चूत के दाने को जीभ से घुमा कर चाटना शुरू कर दिया. मैं झनझना उठी… मुंह से आह निकल गई. अब भैया मेरी चूत चाटने लगा. उसके हाथों ने मेरे बूब्स को मसलना चालू कर दिया. मुझे नशा सा आने लगा. कहने लगी – ” मज़ा आ रहा है…भैया…आ ह…हाय रे…और चूसो…निकाल दो मेरा पानी…आह्ह्ह्ह…”

“ तो दीदी आपकी चुदाई होने वाली थी……..” प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.

“ अरे कहाँ भैया तो पहले गान्ड मारना चाहता था ” सिमरन हँसते हुए कहती है

“ तो क्या दीदी आपकी चुदाई नही गान्ड मरने वाली थी……..” प्रीति जानने के लिए मरी जा रही थी.

सिमरन आगे बताती है---भैया ने मेरी टांगे और ऊपर कर दी अब मेरी गांड उसके सामने थी. टांगे थोडी और फ़ैलाकर उसने अपना मुह मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और जीभ निकर कर छेद को चाटने लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. उसने अपनी जीभ मेरी गांड के छेद में घुसा दी. मैं आनंद के मारे मैंने आंखे बंद कर ली. मैं समझ गई थी कि भैया मेरी गांड मारने कि तय्यारी कर रहा है. भैया ने कहा – “तुमने तो पहले से ही गांड में चिकनाई लगा रखी है ”

“हाँ भैया…मुझे आज लग रहा था कि तुम आज कुछ न कुछ ऐसा ही करने वाले हो…इसलिए मैंने तो पूरी तय्यारी कर ली थी… आह भैया… मज़ा आ रहा है…और करो…मैंने खुशबू वाली क्रीम लगाई है… आह रे…पूरी जीभ अन्दर डाल दो…”

भैया उठा और तकिया मेरी कमर के नीचे रख दिया. मेरी गांड अब थोडी ऊपर हो गई थी… उसने अपना लंड छेद पर रख दिया…

“सिमरन… मेरी प्यारी सिमरन… गांड मराने को तैयार हो जाओ…”

“हाँ मेरे राजा… घुसा दो अन्दर… मार लो गांड मेरी…”… तो लो मेरी जान… ” उसके लंड की सुपारी गांड में घुस गई… मेरी गांड की चुदाई शुरू हो गई थी… मैं मन ही मन झूम उठी…

“..हाय… घुस गया रे… राजा…लगाओ…जोर लगाओ भैया…”

” येस…येस… ये लो… आह… आया…आह…”

भैया का लंड अन्दर घुसा जा रहा था…मुझे अन्दर जाता हुआ महसूस हो रहा था…फिर उसने बाहर निकाला और जोर लगा कर एक ही झटके में पूरा ही घुसेड दिया…

“हाय भैया… मज़ा आ गया… धक्के लगाओ…हाँ…हाँ… थोड़ा जोर से… और जोर से…”

“मेरी जान… तुम्हारी गांड तो बिल्कुल मक्खन मलाई है… इतनी चिकनी कि बहुत मज़ा आ रहा है… देखो लंड कैसे फटाफट चल रहा है…”

गांड में लगाई हुयी चिकने से दर्द बिल्कुल नहीं हो रहा था. और अब तो मीठा मीठा मज़ा भी आ रहा था. मुझे लग रहा था भैया लम्बी रेस का घोड़ा है… भैया जोर जोर से धक्के मारने लगा…मैं तकिये के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी. पर उसके धक्को का पूरा मज़ा ले रही थी…

अचानक भैया रुक गया और धीरे से अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया. मुझे छेद के अंदर ठंडी सी हवा लगी…जैसे कुछ खाली हो गया हो… उसने नीचे से तकिया हटा दिया.

अब भैया मेरे ऊपर आकर धीरे से लेट गया और अपना बदन का पूरा भर मेरे पर डाल दिया. मेरे होटों को अपने होटों में दबा लिया… और चूसने लगा… उधर नीचे भी लंड अपना रास्ता दूंढ रहा था. मैं भी कसमसा कर लंड को निशाने पर लेने की कोशिश कर रही थी. मेरी चूत पानी से चिकनी हो गई थी. आखिर लंड ने रास्ता दूंढ ही लिया. उसके लंड की मोटी सुपारी मेरी चूत में सरक गई. मेरी आह निकाल गई.. मैंने नीचे से जोर लगाया तो लंड और अन्दर सरक गया. मैं तड़प गई. कहा – ” भैया…आह…धक्का मरो ना… क्या कर रहे हो…हाय रे…चोदना शुरू करो ना..”

भैया ने अपना बॉडी अपनी दोनों कोहनियों पर उठा लिया. मेरा बदन अब फ्री हो गया था. उसने लंड को बाहर खींचा और जोर से अन्दर धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड भीतर तक बैठ गया. मेरे मुंह से चीख निकल गई. चूत गीली होने से धक्के मारने पर फच फच की आवाजें गूंजने लगी…

” राजा और जोर से…लगाओ…हाय रे…पूरा घुसा दो…जड़ तक… घुसेड दो… हाँ…हाँ… चोद दो..राजा…जोर से.. चोद दो…”

“हाँ मेरी रानी… तुम्हे देख कर ये लंड कब से तड़प रहा था… चोदूंगा रे… कस के चोदूंगा… ले… ले…और ले… फाड़ ही दूँगा..आज तो…”

“आह रे.. मेरे भैया…सुच में..फाड़ मेरी चूत…लगा..जोर से…दे…दे…जोर दे दे..हाय…सी..सी…सी…चुद गई रे… मेरी माँ…”

“हाँ..हाँ… मेरी जान…आज तो फाड़ डालूँगा…तेरी चूत को…ये ले…पूरा लंड..ले..ले..ये ले..और ले… मेरी जान… क्या चीज़ हो तुम…”

उसके धक्के तेज होने लगे लगे. फच फच की आवाजे भी तेज होने लगी. मैं भी नीचे से चूत उछाल उछाल कर जोर से चुदवा रही थी. मेरी कमर भी तेजी के साथ चल रही थी. मुझे बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा था. मेरी सिसकियाँ भी बढ़ने लगी… मेरे मुंह से अपने आप निकलता जा रहा था – “मेरी चूचियां मसल डालो भैया… हाँ…जरा जोर से मसलो… मज़ा आ रहा है… हाय…मसलो डालो… झटके दे दे..के चोदो राजा..हाँ..हा…ऐसे ही…चोद डालो मेरे राजा…”

मेरी सिस्कारियां बढती जा रही थी. मेरे चूतड अब तो अपने आप ही नीचे से उछल उछल कर उसके लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे. भैया के धक्के भी जोरदार पड़ रहे थे… उसके मुंह से सिस्करिआं तेज होने लगी… अचानक ही उसके मुंह से निकला – “सिमरन… सिमरन… मैं तो गया… हाय..मैं गया…मुझे कस के पकड़ ले ना…अरे..रे..रे..गया…हा आया… हा आया. ”

मैं भैया से जोर से चिपक गई मेरा भी निकलने ही वाला था… भैया अपना लंड जोर से चूत में दबाने लगा ने…और मैं… मैंने अपने दोनों टंगे ऊँची करके चूत को लंड पर गडा दिया… और पूरा जोर लंड पर लगा दिया…

ऊऊईई ए…हाय राम…मर गई ए… पानी निकल गया या…अरे…निकला रे…हाय…चोद दे…चोद दे..हाय रे आह…आह…आआह्ह्… गई ..गऽऽई…अआः…चुद गई…चुद गई…आह…आःह्छ ” सिसकारी भर कर मैंने पानी छोड़ दिया… उधर भैया ने अपना लंड निकला और मेरे बूब्स पर अपना लावा उगलने लगा… रुक रुक कर उसका लंड रस उछाल रहा था…

मैंने तुंरत उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. और उसका चिकना चिकना रस चाटने लगी. लंड को पूरा साफ़ करके मैं आराम से लेट गई. भैया भी मेरी बगल में लेट गया… भैया हाँफ रहा था. मैं करवट लेकर उस से लिपट गई… हम वैसे ही नंगे पड़े रहें और हम दोनों कब सो गए हमें पता भी नहीं चला…

 
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