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दूध ना बख्शूंगी/ complete

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“जो चेहरे पर नकाब पहनकर किया है, बह मेरा कर्त्तव्य है !"

"किन्तु इस खेल में हमारा हैरी भी खत्म हो सकता है जूलिया ?"

"भले ही जूलिया का सब कुछ लुट जाए-बेटे की लाश पर रो…रोकर भले ही जूलिया पागल हो जाए, मगर सीक्रेट सर्विस का चीफ अपने एक एजेण्ट की मौत के डर से दुश्मन को

नेस्तनाबूद कर देने का आदेश बापस नहीं ले सकता ।"

"एक बार जूलिया----सिर्फ एक बार तुम अपने कर्तव्य से गद्दारी कर दो ।" जैकी अजीब-से स्वर में कह उठा…........भले ही हैरी मेरे और तुम्हारे कहने से न माना हो, लेकिन, यदि उसे

एक बार सीक्रेट सर्विस के चीफ़ का यह सब कुछ न करने और अमेरिका बापस चले जाने का आदेश मिल जाएगा तो वह उस आदेश को ठुकरा नहीं सकता ।"

जूलिया का जहरीला स्वर----" मुझें कर्तव्यं से गद्दारी करने की सलाह दे रहे हैं?"

. "एक बार जुलिया-सिर्फ एक बार ।"

“हरगिज नही दृढ़ स्वर । कैदखाने में सन्नाटा छा गया----जंजीरे तक खामोश थी !"

धमकते चेहरे बाला जैकी उत्तेजित-सा जूलिया को देखता रह गया, जबकि जूलिया भी निरन्तर उसी की आंखों में झांक रही हैं थी---------जैकी ने कसमसाकर पहलू बदला-जंजीरे खड़खड़ा उठी---फिर वह किसी जुनूनी पागल समान खुद ही बडबड़ा उठा…"ये..............ये तेरे दिए हुए वचन का अपमान हो रहा है जैकी------तुमने विकास से वादा किया था कि वह जैकी-विजेता है…धर्मयुद्ध मे जीत गया था वह---------यदि विजय या विकास में से किसी को कुछ हो गया तो यह मेरी शिकस्त होगी-मेरी शिकस्त !"

जूलिया उसे स्थिर-सी निगाहों से देखती रही ।

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हैरी आर्मस्ट्रांग !

विकास के मेकअप में उसने एक बहुत लम्बे-चौड़े और चमकदार हाॅल मे प्रबेश किया----------उसके साथ ही रेहाना भी थी--------

उसे देखते ही हाल की दीवारों से सटे हरी वर्दी पहने सशस्त्र लोगों ने उसे सैल्यूट दिया और सावधान की मुद्रा में खडे हो गए । अपने चेहरे से विकास का फेसमास्क उतारता हुआ वह हाल के एक तरफ़ पडी लम्बी-चौडी मेज की तरफ बढा-----इस वक्त खूबसूरत हैरी कीं नीली आंखों में गजब की चमक थी---------- --------फेसमास्क को किसी बेकार बस्तु के समान मेज पर डालता हुआ बोला----" तुम फ्रेश हो लो रेहाना-----कपड़े पहनकर तीस मिनट के अन्दर आओ----------तुम्हारे लोटने पर मैँ तुम्हें इसे हाल में एक ऐसा खेल दिखाऊँगा, जिसे देखकर तुम भी चौंक पड्रोगी ।"

" ऐसा क्या है?"

उसकी बात पर कोई ध्यान न देते हुए हैरी ने किसी को पुकारा-"हाॅफटन! "

" यस सर!" एक तन्दुरुस्त और गोरा-चिट्टा अमेरिकी एक कदम आगे आया ।

"रेहाना को हमारे कमरे में छोड़ आओ ।" कहने के बाद हैरी वहां स्का नहीं बल्कि लम्बे-लम्बे कदमों के साथ हाल पार कर गया-एक गैलरी में से गुजरता हुआ वह अंत में एक कमरे में पहुंचा ।

अलमारी में रखा एक शक्तिशाली ट्रांसमीटर ऑन किया-----किसी से सम्बन्थ स्थापित होने पर बोला-"हैलो… . हैलो…लाॅकहीड !"

दूसरी तरफ से आवाज उभरी…“लाॅकहीड हियर सर, ओबर ।"

"क्या रिपोर्ट है?”

"विजय और विकास का टकराव हो गया है सर! "

"हो गया है-इतनी जल्दी?"

"यस सर !"

"क्या परिणाम निकला?"

"विजय के बाएं पैर में गोली लगी है सर--"बस इससे आगे विकास उसे कोई हानि नहीं पहुंचा सका-उसके बाद की सभी गोलियों से विजय खुद को संग आर्ट की मदद से बचा गया-------उनमें जमकर मल्लयुद्ध हुआ---अंत में विकास बेहोश हो गया !"

"क्या विजय अंकल विकास पर भारी पड़े थे ?"

"यस सर-----उसके बाद मोन्टो ने भी कोशिश की थी, परन्तु विजय ने उसे भी बुरी तरह जख्मी और बेहोश कर दिया तथा उस इमारत से अपने साथियों को-----निकलकर ले गया ।"

"हम विस्तार पुर्वक पूरी रिपोर्ट सुनना चाहते हैं ।"

दूसरी, तरफ से बोलने वाले लॉकहीड नामक व्यक्ति ने उसके द्वारा विकास के मेकअप में पुलिस हेडक्वार्टर से रेहाना क्रो निकाल लाने की प्रतिक्रियास्वरूप समी घटनाएं विस्तार पुर्वंक बता दी ।

अंत में बोला------"विकास और मोन्टो को बेहोश अवस्था में उसी इमारत में छोडकर विजय अपने साथियो के साथ फिर गुलफाम के होटल पहुच गया है…इस वक्त वह-वही है !"

" विकास और मोन्टो को अभी तक होश आया या नहीं?"

" नो सर!"

" कोई बात नहीँ-होश में आते ही वह फिर वहीं प्रक्रिया जारी कर देगा---------------हालात ऐसे बनाए गए हैं लॉकहीड कि विजय … विकास को नहीं मार सकता, जबकि बिकास विजय के प्राणों का प्यासा है, इसीलिए विजय विकास को सिर्फ बेहोश करके छोड़ गया, यहीँ मौका यदि विकास को मिल जाता तो विकास उसे कभी जिन्दा न छोड़ता- जो रिपोर्ड तुमने दी है, उससे जाहिर है कि विजय अभी तक खुद को रघुनाथ का हत्यारा समझ रहा है, जबकि विकास उसे मार डालने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है----------मुठमेड़ में बह सिर्फ इसलिए बच गया, क्योंकि विकास पर भारी पडा-----मगर वह बिकास पर हमेशा भारी-नहीं पड़ेगा लाॅकहिड----------विकास उससे कम नहीं है-----मौके की बात है----एक बार विकास को मौका लगा नहीं, यानी विकास विजय पर भारी पड़ा नहीं कि लाश बिछ जाएगी-----भले ही हजार मुठभेड हों--------------विजय भारी पडता रहे, किंतु जव तक खुद विजय के दिमाग में यह गलतफहमी घुसी रहेगी कि उसने रघुनाथ को मार दिया है, तब तक यह दुश्मनी कायम रहेगी यह गलतफ़हमी विजय को अपनी, आखिरी सांस तक रहेगी --------विकास को भी हकीकत तब पता लगेगी, जबकि वह विजय को मार चुका होगा ।"

लॉकहीड की आवाज़-"यस सर!"

"तुम उन पर बराबर नजर रखो-----विकास और मोन्टो के होश मे आते ही तुम्हें कोई ऐसा शगूफा छोड़ना है जिससे विकास को यह पता लग जाए कि अपने साथियों कै साथ विजय गुलफाम के होटेल में हे…मैं जल्दी ही उनका टकराव दुबारा कराना चाहता हूं।”

"हो जाएगा सर !"

"ओ के, मुझें तुम्हारे मुंह से इस सूचना का बडी बेताबी से इंतजार है लॉकहीड कि विकास ने विजय को गोलियों से भून दिया है ।" कहने के बाद हैरी ने सम्बन्थ-विच्छेद कर दिया ।

कैदखाने में गहरी खामोशी का साम्राज्य था !!!

कभी-कभी जंजीरों की खड़खड़ाहट उसे भंग कर देती-एक कोने में जैकी पड़ा था, दूसरे में जूलिया-मोटी जंजीरों में कैद!

बे चल-फिर सकते थे ----किन्तु सिर्फ अपने-अपने दायरे में । अचानक वे दोनों हल्के से चौके…नजरे मिली---.फिर कैदखाने के एकमात्र रोशनदान पर स्थिर हो गई…छत से सिर्फ दो फुट नीचे एक छोटा-सा रोशनदान था-मोटी सलाखों से युक्त-----उसी रोशनदान के पार से अभी-अभी किसी कै कराहने की आवाज उभरी थी ।

जैकी और जूलिया के कान खड़े ही गए । तभी उस तरफ से पुन: किसी मानव के कराहने का स्वर उभरा----"इस बार आवाज पहले से कुछ ज्यादा स्पष्ट थी-----कुछ कहने के लिए अभी जैकी ने खोला ही था कि… !
 
वहुत-से बूटों की आवाज तहखाने के इस्पाती दरवाजे कै पार आकर स्क गई--------जूलिया के साथ ही जैकी ने भी पलटकर उधर देखा---------ऐसी आवाज़ उभरी जैसे कोई किसी भारी ताले में चाबी डालकर उसे खोल रहा हो।

अगले ही पल हल्की-सी गड़गड़ाहट के साथ इस्पात की मोटी चादर वाला दरवाजा खुल गया…अपने कई साथियों के साथ हैरी ने अन्दर कदम रखा !

जंजीरें खनखनाई…जैकी औऱ जूलिया खडे हो गए ।

हैरी के शेष साथी दरवाजे या उसके, आसपास ही ठिठक गए, जबकि स्वयं हैरी चहलकदमी--सी करता हुआ पहले जैकी

के समीप पहुचा पूरी श्रद्घा के साथ झुककर उसने चरण स्पर्श किए----ऐसा ही जूलिया के समीप पहुँचकर किया----वे चरण छुऐ, जिनमें मोटी-मोटी जंजीरें पड्री थी ।

आखिर जैकी ने कह ही दिया…"जिन पैरों को छूते समय किसी के मन से श्रद्घा हो, उन पैरों में वही जंजीरें नहीं पहनाया करते ।"

हैरी ने गम्भीर स्वर में पूछा-“क्या आपने कभी मेरे मन में अपने लिए श्रद्धा का अभाव देखा है डैडी?"

जैकी चुप रह गया, जबकि जूलिया बोली-----------"ल.....लेकिन बेटे अपने माती-पिता को यूं कैद करके पैरों को जंजीरों में है जकड़कर पूरी श्रद्घा के साथ भी उसे छूने से क्या लाभ !'

"'वहीँ, किसी भी श्रद्धेय के चरण स्पर्श करने में है---मन को शांति मिलत्ती है।”

"श्नद्धेय के आदेशों का भी तो पालन करना चाहिए !"

"जरुर ।"

"तो फिर हम-तुम्हें एक वार फिर आदेश देते हैं हैरी!" जैकी बोला…“इस खूनी खेल से अपना हाथ खीच-ले-----अभी कुछ नहीं बिगड़ा है-अमेरिका बापस चल ।"

"श्नद्धेय बच्चों को उनके कर्तव्य से हट जाने के उपदेश नहीं देते और यदि दें तो बच्चों को कभी ऐसे किसी आदेश का पालन नहीं करना चाहिए ।"

" तुम इस सवको अपना कर्तव्य, कहते हो?" है ।"

" बेशक-उससे बदला लेना मेरा -जन्मसिद्ध कर्तव्य है… जिसने मेरे पिता का हाथ...।"

" बह धर्मयुद्ध था !'

" सुन चुका हू डैडी…हजार बार आपके और मम्मी के मुंह से यही बात सुन चुका हुँ ।

एकाएक उत्तेजित-सा होकर ऊंची आवाज में हैरी कहता ही चला गया…"मैं नहीं जानता कि धर्मयुद्ध क्या होता है------------वह आपने लडा…आप हार गए…उसके बारे में विकास जाने या आप----'मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि उस ने मेरे पिता का हाथ काटा है…खून की कीमत खून है. डैडी-जान की कीमत जान और हाथ की कीमत हाथ ।"

"हैरी !"

"आप दोनों में से कभी कोई मेरी इस मान्यता का नहीं रहा…मैंने कितना पूछा था, किन्तु आपने कभी नहीं बताया कि यह हाथ उस ने काटा था…माइक अंक्ल ने बताया-------------मैंने तभी फैसला कर लिया था कि भारत 'में जाकर इसका बदला लूंगा…भला हो उसका जिसने न सिर्फ मुझे यहां भेजा, बल्कि यहाँ काम करने के लिए यह इमारत दी++-------------भारत में स्थित अमेरिकी जासूसों को यह आदेश दिया कि वे मेरे आदेशों पर काम क्ररें--------आपने तो तब भी मेरा विरोध किया----धमकी दी कि यदि मैं भारत आया तो आप मेरा विरोध करेंगे-उसी मजबूरी के कारण मुझे आप दोनों को यहीं----,इस रूप में रखना पड़ा ।"

जैकी औंर-जूलिया खामोश रहे ।

"आज ही या ज्यादा-से-ज्यादा दो-चार दिन बाद आपको इस कैदखाने से मुक्ती मिल जाएगी-फिर आप कहीं भी जाकर कुछ भी कर सकते है------मेरे और मेरे मुल्क के बचे…खुचे दुश्मनों की मदद भी----नम्बर पाइव---!"

“यस सर !" एक व्यक्ति आगे बढा।

" इन लोगों को हाॅल में लाओ।"

"जो हुक्म सर !'

"पूरी सावधानी के साथ-ये जासूसों के देवता हैं-यदि हम हल्के से भी चूक गए तो फिर ये हमारी पकड से बहुत दुर निकल लेगे और इनका हमसे दुरं निकल जाने का मतलब दुश्मन खेमे में उनके मददगार और: दोस्त बनकर पहुच जाना----उस स्थिति-मे हमारी एक नहीं-चलेगी नम्बर फाइव----हमारा सारा प्लान चौपट हो जाएगा ।"

" आप फिक्र न करें सरा !"

हैरी बाहर निकलने के लिए मुडा ही था कि उसे जैकी ने पुकारा-"हैंरी !"

"जी ।" वह मुड़ा ।

"बराबर बाले कैदखाने में तुमनै किसे कैद कर रखा है?”

" ओह-----फिक्र न कीजिए-कुछ ही देर बाद हाल में सब कुछ पता लग जाएगा ।" कहने के बाद लम्बा लड़का एक मिनट लिए भी वहां नहीं रुका, बाहर निकल गया ।

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हाल में जैकी और जूलिया दो थम्बो के सहारे बंधे हुए थे----- हेरी लम्बी-चौडी मेज के पीछे रिवॉल्विंग चेयर पर बैठा था------दीवारों के सहारे हरी वर्दी वाले सशस्त्र लोग मुस्तेदी के साथ खड़े थे-मेज के समीप ही एक अन्य कुर्सी डाल दी गई थी, जिसे पर रेहाना बैठी थी ।

जाने क्या बात थी कि थम्ब के साथ बंधा जैकी निरंतर रेहाना को ही घूरे जा रहा था, वह बोला कुछ नहीं था------मगर हां, उसे निरंतर अपने को घूरता देखकर रेहाना पर अजीब-सी घबराहट जरूर सवार हो गई ही ।

एकाएक हाल में जंजीरो की खनखनाहट गूंजी ।

सभी की नजंरें उस तरफ़ उठ गई।

दाई तरफ से हाल में एक कैदी प्रविष्ट हुंआ-उसके हाथ पैर जंजीरों में बंधे थे----हैरी के सशस्त्र साथियों के घेरे में था वह--------------कैदी को देखते ही कुर्सी पर बैठी रेहाना उछलकर खडी होगई------जैकी और जूलिया भी चौंक पडे…"अरे-यह तो रघुनाथ है?”

हैरी मन्द-मन्द मुस्कराता रहा।

रेहाना ने चकित स्वर में पूछा ----" ह..............हेरी--रधुनाथ यहाँ--जिन्दा?"

"तुम्हारा चौंकना स्वाभाविक है रेहाना क्योंकि तुम्हारी आंखों के सामने रघुनाथ को विजय ने गोली मार दी थी , लेकिन--------नही-------ऐसा नही था…इसीलिएं तो कहते हैं कि कभी-कभी

आँखों देखी बात भी झुठ होती है !"

" म------मगर---. ।"

"धैर्य रखो------कुछ देर बाद मै सब कुछ बता दूँगा और आपके लिए भी रघुनाथ अंकल का जीवित होना हैरत की ही बात है मम्मी-डैडी, क्योंकि रेहाना की तरह ही आप लोग भी

यही समझते थे कि मेरी प्लानिंग के अनुसार रघुनाथ भी विजय अंकल की गोलीसे मर गया है।"

जैकी-जुलिया चुछ ना बोले एकटक सुपंर रघुनाथ को देख रहे थे वे------जंजीरों मे कैद बह हरेक को घूस्ता हुआ बढा चला, आ रहा था…गहरी खामोशी छाई रही, जबकि सुपर रघुनाथ को दो थम्बो के बीच में बांध दिया गया-----दाईं भुजा में पडी जंजीर का दूसरा सिरा-दाईं तरफ वाले थम्ब में बंधा था और बाई तरफ वाला बाई तरफ के थम्ब में ।

हैरी के सशस्त्र साथी उसके आस-पास से हट गए ।

हैरी कुर्सी से उठा-----उसे घूमती छोड़कर रघुनाथ की तरफ़ बढा-----समीप पहुंचकर उसने रघुनाथ की आखो में झांककर कहा---------"आप विकास के पिता हैं-कुछ भी सही, विकास कभी मेरा दोस्त था और जो कभी दोस्त बनते हैं, वे हेमेशा दोस्त ही रहते हैं-हम दोस्त` हैं…रहेगे-----------सिद्धान्त की बात अलग हे…जिस तरह. आप विकास के लिए आदरणीय हैं, उसी तरह मेरे लिए भी हैं ।" कहने के साथ ही वह नीली आंखों वाला लड़का पूरी श्रद्घा के साथ रघुनाथ के चरणों से झुक गया !

न जाने क्यों इस वक्त जैकी ने कनखियों से रेहाना की तरफ़ देखा ।
 
सीधा खड़ा होता हुआ हैरी बोला-"लेकिन उस तरफ----जरा उस तरफ देखिए रघुनाथ अंकल… ।” हैरी ने जैकी के कटे हाथ की तरफ उंगली उठा दी-“उस कटे हुए हाथ को देखिए-------वे मेरे पिता हैं-----बह हाथ विकास ने काटा है-----आपके बेटे ने !"

गहरी खामोशी !

हैरी¸ने चहलकदमी-सी की, फिर ठिठककर बोला-------" अब आपका बायां हाथ कटेगा-------ठीक उसी जगह से, जहां से विकास ने मेरे पिता का काटा है ।"

" नहीं हैरी-नहीं ।” जैकी चीख पडा ।

“आप भूल गए डैडी ।" हैरी का कठोर स्वऱ--------“कुछ ही देर पहले मैंने कहा था कि हाथ के बदले हाथ------खून के बदले खून और जान के बदले जान लेना हैरी का सिद्धान्त है ।"

"म.......मगर-बिकास ने तेरे डैडी को इस तरह लाचार नहीं …कर दिया था…यूं जंजीरों में जंकडकर उंसने यह हाथ 'नूही काटा था-----------उसने टक्कर ली थी मुझसे-------------उस जांबाज ने मुझे-जीता था !"

"रघुनाथ अंकल को भी बचाव का पुरा मौका मिलेगा ।"

जूलिया कह उठी…"तुम पागल हो गए हो हैरी!"

"नही-----मै पागल-नहीं हुआ हू-------पूरे होश में हू में-यदि पागल हो गया होता तो उस चौराहे पर विजय की गोली से नकली रघुनाथ नहीं, वल्कि असली रघुनाथ मारा जाता------------मगर -मेरा प्रतिशोध इनके 'प्राण' लेने से नही बल्कि इनका हाथ काटकर छोड़ देने से पूरा होंगा !"

" फिर-वहां उस नकली ,रघुनाथ के मरवाने कीं क्या ज़रूरत थी?”

“विजय और विकास को हपेशा के लिए-दुशूमन बनाने के लिए !

" त...... ..तुम विजय और विकास को दुश्मन बनाओगे, हा हा हे---अचानक ही खिल्ली उडाने के अन्दाज में कहने के बाद ज़जीरों मेँ ज़कड़ा जैकी ठहाका लगा उठा--जव वह एक बार हंसा तो फिर हंसता ही चला गया…न सिर्फ हैरी बल्कि सभी चौंके हुए अन्दाज में उसकी तरफ देखने लगे थे-वह इस तरह ठहाके लगा-लगाकर हँस रहा था, मानो पागल हो गयो हो ।

हैरी ने पूछा-----"क्या बात है डैडी-आप इस तरह क्यों हंस रहे हैं?"

"य........यह सुनकर कि तुम विजय और बिकास मे दुश्मनी कराओगे ?"

"इसमे हंसने की क्या बात है-वे एक-दूसरे के दुश्मन बन चूके है !

इस बार जैकी ने पहले से'भी कहीं जोरदार ठहाका लगाया, बोला…"भले ही तुम विकास को मूर्ख बना दो हैरी-भले ही विकास तुम्हारी-चाल मेँ फंसकर विजय की लाश बिछाने निकल पडे, मगर विजय तुम्हारे दिमाग से बहुत बाहर की चीज है ।"

"इस बार विजय अंकल भी फंस गए है डैडी…उन्हे पूरा विश्वास है कि चौराहे पर उनकी गोली से सुपर रघुनाथ ही मरा ।"

"तुम्हारा वहम हे बेटे और हम दावे के साथ कह सकते है कि कुछ देर में विजय यहां पहुंचने वाला है ।"

"ये-आप-क्या कह-रहे-हैं ?"

चमकदार आंखों वाले जैकी ने कहा-"सच यहीं है बेटे!"

जूलिया सहित सभी चकित निगाहों से जैकी की तरफ देखने लगे--जैकी के होंठों पर बहुत ही गहरी जहरीली मुस्कान थी-- हैरी ने पूछा…“ऐसा आप किस आधार पर कह रहे हैं?"

" यह तुम्हें नही बताऊंगा ।"

" "डैडी!”

"किसी भी कीमत -पर नहीं बेटे?"

हैरी एकदम बेचैन-सा नजर आने लगा…चेहरे पर उलझन के भाव उभरे-बह ज्यादा ही तेजी से चहलकदमी करने लगा-----न केवल वंही सारी दुनिया जैकी के दिमाग का लोहा मानती थी-------वहं जानता था कि यदि उसके डैडी कह रहे हैं ' तो निश्चित रूप से उसके पीछे कोई आघार है, लेकिन क्या-----------ऐसा डैडी ने क्या महसूस किया कि वे एकदम इतने आश्वस्त नजर आ रहे हैं !!

उसकी ऐसी अवस्था देखकर जैकी और जोर-जोर से ठहाके लगाकर हंस पडा…हैरी समझ चुका का था कि उनसे कोई भी सवाल करना बेकार है-- वे जवाब नही देगे ।

एकाएक ही हैरी के दिमाग में विचार उटा----------कही ऐसा तो नहीं कि डैडी सिर्फ उसे उलझाना चाह रहे हों----यह महसूस करने के बाद कि अब वह रघुनाथ के हाथ काटे बगैर नही रहेगा--बे उसे मुख्य मकसद से भटका देना चाहते हों?"

"'जरूर ऐस ही है !"

इस विचार के दिमाग में आते ही वह चीखा---------“नम्बर ट्वन्टी!"

"यस सर !"

"खुखरी !"

नम्बर टूवन्टी ने अपनी बैल्ट में धंसी हुई खुखरी निकालकर हैरी की तरफ उछाल दी--------वेहद चमकदार खुखरी हाल के चकाचौंध कर देने वाले प्रकाश में झन्नाती हुई-सी हवा में लहराई------`हेरी ने लपकी और जैकी की तरफ़ घूमकर बोला---"मैं आपकी चाल में नहीं र्फसा हू डैडी!"

"क्या मतलब?”

"आप मेरा दिमाग हाथ काटने की तरफ़ से भटकाना चाहते थे न?"

"वहम है तुम्हारा ।"

"वहम' ही सही-आपकी बात ठीक ही सही डैडी---यदि आपके कथनानुसार यह मान भी लिया जाए कि विजय अंकल यहां पहुंचने बाले है तो उनके पहुंचने से ही पहले ही मैं अपना प्रतिशोध पूरा करनै वाला हूं--यहां उन्हें सुपर रघुनाथ का हाथ कटा हुआ ही मिलेगा ।" कहने के बाद उसने खुखरी वाला हाथ ऊपर उठाया ही था कि----।

“न......नहीँ हैरी-नहीं!" रेहाना चीख पडी ।

हैरी ने चौंककर उसकी तरफ देखा-जैकी के अलावा सभी के चेहरों पर चौंकने के भाव थे, जबकि चीखती हुई रेहाना ने अपने चेहरे से एक फेसमास्क नोच लिया ।

हैरी के कंठ से चीख-सी निकल गई--रैना मां...!""

" रैना !" जंजीरों में जकड़ा रघुनाथ उछल पडा ।

" न.. नहीं मेरे बेटे?" चीखती हुई रैना उसकी तरफ बढी--ऐसा अनर्थ न करो…यदि एक बेटा पागल है तो तुम भी पागल मत बनो-बन्द कर दो ये खूनी खेल हाथ काटकर आखिर तुम्हें क्या मिलेगा--------जैकी भइया का हाथ तो नहीं लौट आएगा !"
 
हैरी की नीली आंखों में आंसू भर आए-बोला------उस वक्त तुम कहाँ थी रैना मां----उस वक्त कहां थी तुम ----------- तुम्हारे गर्भ से जन्मा मेरे डैडी का हाथ काट रंहा था? "

" प्रतिशोध में जलकर इंसान पागल हो जाता है हैरी ।"

" मुझे अपने पागल होने की-परबाह नहीं हे-मैं बदला लेने निकला हू…हर हालत में बदला लेकर, ही लोटूगा-चुपचाप खडी रहो--बैसे आप चूक गईं------मै अभी हाथ काटने नहीँ जा रहा था । भला इस तरह हाथ कैसे काट सकता हुं--------रधुनाथ अंकल को संघर्ष का मौका भी तो देना है-------मेने खुखरी इनकी जंजीरें काटने के लिए हवा में उठाई थी-------------शायदं आपने सोचा कि--------!"

"ये गलत है हैरी-हिंसा से हिंसा ही भडक्रती हैं---+--तुम........!"

उसकी बात पूरी होने से पहुले ही हैरी चीखा…"इन्हें पकड लो !"

तुरन्त चार व्यक्तियों ने रैना को जकड़ लिया-रैना चोखी चिल्लाई , परन्तु व्यर्थ---हैरी के चेहरे पर जो कठोरता विराजमान थी, उसमें लेशेमात्र भी अन्तर-नहीं आया-तभी बाई तरफ़ से हाल में खुशी के कारण बदहवास-सा एक व्यक्ति दाखिल होत हुआ चीखा-----"स...सर...सर....…!"

"क्या बात है?” हैरी ने घूमकर पूछा ।

उसने अपनी फूली सांस नियन्त्रण में रखकर जल्दी से कहा---------"व.. विजय मर गया है सर।"

सभी धक्क से रह गए।

"क्या बकते हो?" हैरी अजीब से स्वर में चीख पड़ा।

"म.. .मैँ सही कह रहा हूं सर…ट्रांसमीटर पर अभी-अमी खबर आइं है।"

" खबर किसने भेजी?"

"ल...लॉकहीड ने सर !"

“क्या कहाँ उसने?"

"आपके आदेशानुसार विकास के होश में आते ही बड्री तरकीब से उसके दिमाग में यह बात डाल दी गई कि विजय अपने साथियों के साथ गुलफाम के होटल में है----मोन्टो को साथ लेकर सीधा गुलफाम होटल पहुचा…इस बार उसने विजयी को कोई मौका नहीं दिया-जाते ही उसके पीछे से सारा रिबाॅल्बर उस पर खाली कर दिया--------विजय को पूरी छह गोलियां लर्गी-तड़पने का मौका भी नहीं मिला उसे और ठण्डा पढ़ गया ।"

"फिर क्या हुआ !"

यह दृश्य देखकर विजय के साथी-------गुलफाम और उसके साथी पागल हो उठे…उन सभी ने मिलकर विकास और, मोन्टो को अधमरा कर डाला है लेकिन सर......!"

"लेकिन क्या?”

" लाॅकहीड ने यह खबर भी दी है कि रेहाना भी वहीँ है और वे सब जानते हैं कि चौराहे पर विजय की गोली से मरने वाला सुपर रघुनाथ नकली था ।"

"यह वे कैसे जानते हैं?"

“यह तो नहीं पता, क्रिन्तु लॉंकहीड का कहना है कि अचानक ही विजय की मृत्यु के बाद जब उसके दोस्त-----गुलफाम और गुलफाम के दोस्त स्वय रोते-बिलखते उसे मार रहे थे,

वे चीखे-चीखकर विकास को बता रहे थे कि विजय ने चौराहे पर रघुनाथ को नहीं मारा था---------रघुनाथ के मेकअप में वह कोई और था…वे आपका नाम भी जानते हैँ…लॉंकंहीड ने उसी वक्त उन्हें यह कहते भी सुना कि-हैरी को धोखे में रखने के लिए ही विजय अभी तक खुद को रघुनाथ का हत्यारा प्रर्थार्शत कर रहा था…विकास को मारते समय उसे वे यह भी बता रहे थे कि हैरी के अड्डे तक पहुचने के लिए विजय ने एक जबरदस्त चाल भी चल रखी थी ।"

रैना की तरफ देखकर हैरी कह उठा… "हां-चाल तो चल रखी थी !"

जोश मे भरा रिपोर्ट देने वाला व्यक्ति शात खडा रहा।

" अब विकास की क्या हालत है ?"

" बूरी तरह घायल होने के बाद वहं बेहोश हो गया है ।"

"ओह !" कहने के बाद उसने एक पल सोचा फिर बोला-----"तुम ट्रांसमीटर के पास जाओ----जैसे ही कोई नई रिपोर्ट मिले तुरन्त हमें खबर करना ।"

" जो आज्ञा ।" कहकर वह चला गया ।

हाल में सन्नाटा छा गया था-गहरा सन्नाटा !

बहुत से चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थी…बहुत-से चेहरों पर खुशी नाच रही थी-------हैरी का चेहरा बिल्कुल सपाट था, 'जेसे इस खबर से न तो उसे कोई विशेष खुशी ही हुई हो और न से विशेष दुख--------उसने बारी-बारी से जैकी-जूलिया--रघूनाथ और रैना के चेहरे देखे--------हाल में चहलकदमी-करता हुआ बोला------

--------" अब सारी घटनाएं शीशे की तरह साफ़ हैँ…विजय अंकल चौराहे पर रघुनाथ को गोली मारने से पहले ही यह भांप गए थे कि वह सुपर रघुनाथ नहीं है--------वे उसी समय यह भी समझ गए कि मुजरिम क्या चाहता है…,इसीलिए उन्होंने गोली सुपर रघुनाथ के पैर में न मारकर सीधी सीने में भारी-वहाँ से भागे और उसके बाद जितनी भी हरकतें की, उनसे यह जाहिर किया कि के स्वयं को सचमुच ही रघुनाथ का हत्यारा समझते हैं------

----------उस वक्त वे मेरा नाम नहीं जानते थे…मगर यह समझ गए थे कि उन घटनाओं के पीछे जो भी कोई है , वह उन्हें रघुनाथ का हत्यारा दर्शा कर बिकास से टकराना चाहता है-----

---------उस वक्त मुजरिम पर यह जाहिर-करना ही उनकी सबसे बडी चाल थी कि वे मुजरिम की चाल में फंस गए है-------

--------- निसंदेह वे अपनी इस चाल में कामयाब रहे, यानी मुझे कभी शक न हुआ कि वे हकीकत जानते है और स्वयं सुपर रघुनाथ का हत्यारा दर्शाने का नाटक कर रहे हैं----------जिस समय विकास उनके साथियों को पकड-पकडकर कैद कर रहा था, उस वक्त वे अन्दर--ही अन्दर उस तक पहुचने की कोशिश कर रहे थे, जिसके इशारे पर यह सब कुछ हो रहा था….......

-------रेहाना एक रात पुलिस लॉकअप में रही------इसी रात विजय अंकल ने उसे वहां से गुप्त तरीके से उठवाकर गुलफाम के होटल में टार्चर किया होगा-------मैं समझ सकता हू कि उनके सामने रेहाना अपना मुंह बन्द न रख सकी--------अत उन पर सब कुछ खुल गया…मेरा नाम--------मेरा मकसद--किन्तु रेहाना को इस अड्डे का पता नहीं मालूम था----- उसने यह जरूर बता दिया होगा कि मैंने उसे पुलिस की गिरफ्त से निकालने का वचन

दिया है----उसी रात वे रैना मां से मिले-----------इन्हें सारी हरकत बताने के बाद, रेहाना बनाकर टार्चर चेयर पर डाल दिया गया-----------क्यों रैना मां , बोलो ------ क्या यही सब कुछ नही हुआ था ?"

रैना ने चेहरा झुका लिया !
 
“इसका मतलब यहीं हुआ था-विजय अंकल को मेरे अड्डे पर हमला बोलने के लिए अपने-साथियों की जरूरत, थी, इसीलिए विकास से टकराकर भी ये उन्हें निकालकर लाए----------जब

आप रेहाना के कमरे में अकेली थी, तब आपने किसी ट्रात्समीटर आदि के जरिए यहाँ का पता उन्हें बता दिया होगा ।"

"मैं अभी ऐसा नहीं कर पाई थी ।"

"यदि कर भी दिया होगा, तब भी अब कोई बहुत बडा तीर चलने वाला नहीं है-------------------विकास को विजय अकल की किसी योजना की भनक तक नहीं थी , इसलिए फ्ता लगते ही वह गुस्से में भरा गुलफाम के होटल . पहुंच गया------------------जिस वक्त उसने उन पर रिवॉल्वर खाली किया, उस वक्त विजय अंकल अपने साथियों को या तो इस अड्डे पर हमला करने की स्कीम समझा रहे थे या आपके सन्देश की प्रतीक्षा कर रहे थे-----------------भारत में ऐसी सिर्फ दो हस्तियां थी, जो हैरी का कुछ बिगाड सकती थीं----+----एक हमेशा के लिए खत्म हो गई---एक बेहोश पडी है---हा होश में आने और हकीकत का पता लगने पर विकास ज्वालामुखी जरूर वन सकता है, किन्तु तब तक हैरी अपना प्रतिशोध लेकर, हिन्दुस्तान की धरती छोड़ चुका होगा----ये मुमकिन है कि आप झूठ बोल रही हो यानी इस इमारत का पता आप विजय अंकल को बता चुकी हों और मरने से पहले वे यही पता अपने साथियों को बता चुके हों-----------उस हालत में मुझे गुलफाम और उसके साथियों से खतरा है-----मगर हैरी के लिए यह केई विशेष खतरा नहीं है-----इस किस्म के छुटभइयों से निपटना मैं खूब जानता हू।"

फिर'-उसने अपने कई आदमियों को इमारत की सुरक्षा हेतु निदेश दिए।

जैकी के ठीक सामने पहुंचकर बोला---------------आपने ठीक ही कहा था डैडी----------इसमे शक नही कि विजय अंकल मेरी चाल में बिल्कुल नहीं फंसे थे, बल्कि उल्टा मैं ही उनके झांसे में आ गया था----------इसमे भी शक नहीं कि अपके कहे मुताबिक वे कुछ ही

देर बाद यहा पहुचने बाले थे, लेकिन---. ।" कहकर एक पल तक चुप रहा हेरी फिर बोला-------"विकास ने सब कुछ खत्म कर दिया----. ।"

“मुझे यकीन नहीं कि तुम्हारे पास आई यह रिपोर्ट 'सच है ।”

"आपके शब्दों में दृढता नहीं है, यानी आप खुद मानते है कि यह रिपोर्ट सही है…लाॅकहीड ने आज तक गलत रिपोर्ट नहीं दी-----------------फिर रिपोई की सच्चाई तो इसी से जाहिर है कि लाकॅहीड ने तबस्सुम का उनके पास होने और विजय को मेरा नाम आदि सब कुछ पता होने का उल्लेख किया ।"

जैकी के पास कोई ज़वाब नहीं था।

हंसता हुआ हैरी उनके सामने से हटा, बोला--------“बड़े-बड़े . धुरन्धरों की जुबान को ताले लग गए हैँ-हा-हा-हा किसी पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है--विजय अंकल मर चुके हैं डैडी…............आपके सबसे ज्यादा होनहार शिष्य इस दुनिया नहीं रहे-----हा-हा-हा ।

हैरी पागलों की तरह हंसता रहा।

"सम्भालो अंकल…सम्भालो-----! कहने के साथ ही हैरी ने झपटकर सुपर रघुनाथ पर खुखरी का वार किया------रघुनाथ ने फुर्ती से पैंतरा बदला---अपने दाएं हाथ में दबी खुखरी चलाई,.......किन्तु हैरी ने उसे अपनी खुखरी पर रोक लिया ।

सारे हाॅल में खुखरिर्यो के आपस में टकराने की आबाज गूंज उठी ।।।

जैकी-जूलिया और रैना के दिल. धंड़क रहे थे-रेना का चेहरा तो विल्कुल सफेद ही पड चुका था…हाल के बीचोबीच पिछले पांच मिनट से रघुनाथ और हैरी के बीच खुखरियों का यह युद्ध चल रहा था।

हेरी ने रघुनाथ के बंधन काटकर उसे भी एक खुखरी दिला दी थी-----अभी तक रघुनाथ खुद को बचाए हुए था----मगर सभी यही सोच रहे थे कि रघुनाथ इस तरह खुद को कव तक बचा सकेगा ?

अचानक हाँल में बदहवास-से एक बलिष्ठ अमेरिकी प्रविष्ट हुआ…हाँल में चल रहे युद्ध को देखकर वह एक पल के लिए ठिठका----------------मगर फिर जल्दी से बोला-------------"ग...गज़ब हो गया बाॅस !"

रघुनाथ से लडते हैरी ने पूछा---------------“क्या बात लाॅकहीड ?"

" लगता है कि गुलफाम आदि को इस अड्डे का पता मालूम है !'

"केसे?"

"मैं अपने कानों से सुनकंर आया हू-वै लोग यहाँ हमला बोलने की योजना वना रहे हैं ।"

रघुनाथ से लड़ते हुए हैरी ने कहा…"मेरा

अनुमान ठीक ही निकला------रैना मां ट्रांसमीटर पर विजय अकंल को यहां का पता बता चुकी थी….......खैर, तुम परवाह मत करो लाँकहीड------ज़व तक रैना मां यहां है, तब तक वे इस इमारत को एकदम नहीं उडा सकते--------सिर्फ पांच मिनट का खेल और रह गया है-मेरा प्रतिशोध पूरा होने बाला है----------जब वे यहाँ पहुंचेंगे, तब उन्हें मलंबे के सुलगते-हुए एक बहुत बड़े ढेर के अलावा कुछ नहीं मिलेगा ।"

"लेकिन बाॅस---!'

"घबराओ नहीं लॉकहीड-आराम से खडे होकर खेल देखो------देखो कि मेरा प्रतिशोध कितने रोमांचकारी ढंग से… पूरा होता है।"

बलिष्ठ अमेरिकी कुछ कहता-कहता रुक गया ।

खुखरियों के आपस में टकराने की आवाज गूंज रही थी-----'खन-खन-खन ।

जैकी ने अमेरिकी की तरफ़ देखा-एकाएक ही जैकी के होंठों पर मुस्कान दौड गई-----उसी मुस्कान के साथ लाॅकहीड नामक ने भी जैकी को आंख-मारी !

अभी सिर्फ दो ही मिनट गुजरे थे कि इमारत के बाहर कहीं फायर की एक आवाज गूंजी------इस आबाज को सुनकर सभी चौके, किन्तु अभी ठीक से चोंक भी नहीं पाए थे कि लॉकहीड का रिवॉल्वर गरजा ।

गोली हैरी के हाथ में दबी खुखरी पर लगी'।

उसके हाथ से निकलकर खुखरी झनझनाती’हुई एक दीवार से जा टकराई-हैरी ने चौंककर लॉकहीड की तरफ़ देखा ही था कि रघुनाथ की खुखरी उसकी पीठ पर एक लम्बा चीरा लगा गई !!!!!

.हेरी के कंठ से एक चीख उबली-----जिस वक्त उसने रधुनापके चेहरे पर अपने बूट की ठोकर मारी थ्री,उसी वक्त बिजली-की सी तेजी से लॉकहीड फ़र्श पर लेटा---रिवॉल्वर हाथ में लिए वह अजीब-से ढंग से लुढकता ही चला गया----साथ ही फायर भी करता जा रहां था ।

एक के बाद एक लगातार उसके रिवॉल्वर ने चार शोले उगले ।

जैकी और जूलिया के हाथो में बंधी जंजीरे खनखनाकर टूट गई…जोश में भरी रैना ने तेज झटका दिया तो उसे पकड़े हक्के-बक्के से खड़े चारों व्यक्ति झिटक गए ।

रघुनाथ दूर जा गिरा।

दीवारों के सहारे खड़े सशस्त्र व्यक्तियों ने विजय पर फायर किए, तब तक विजय अपना काम करने के बाद तेजी से लुढकता जा रहा था…गोलियां उसके इर्दं-गिर्द फर्श धंस गई-----------कुछ उसे लगीं भी, किन्तु कोई लाभ नहीं-----क्रदाचित् उसने बुलेट प्रूफ लिबास पहन रखा था ।

हालातों को भांपते ही हैरी चीख पड़ा-"लाइट आँफ कर दो ।"

एक झमाके के साथ हाल में अन्मेरा छा गया---------घुप्प अंधेरा-कोई किसी को नहीं चमक रहा था----- हाॅल में गहरी खामोशी छा गई, परन्तु इमारत के बाहर से लगातार फायरिंग की आवाज आ रही थी।

जैसे छोटी-मोटी सेनाएं भिड गई हों ।

सच्चाई थी भी यही-----यानी इमारत के बाहर संचमुच दो सेनाएं भिंड गई थी---------एक सेना हरी -वर्दी में थी…दूसरी खाकी वर्दी मे-------हरी वर्दी बाली सेना का नेतृत्व भारत में स्थित अमेरिकी जासूसों का सीनियर कर रहा था और खाकी वर्दी वालो का नेतृत्व ठाकुर साहब ।

लडाई छेड़ने से पहँले ठाकूर साहब ने इमारत के चारों तरफ एक जबरदस्त मोर्चा जमा लिया था-उनकी सेना की संख्या भी हरी वर्दी वालों से बहुत ज्यादा थी-----अत: हरी वर्दी बाले कमजोर पड रहे थे !!!!!

ठाकुर साहब की सेना चारों तरफ़ से इमारत के नजदीक जा रही थी।"

खाकी ववर्दी वाली इस सेना की मदद गुलफाम-उसके गुर्गे तथा अशरफ, विक्रम नाहर, परवेज और आशा भी कर रहे थे-------------जंग का ऐलान करने के लिए वह सबसे पहला फाॅयर

अशरफ ने ही किया था, जिसकी आवाज सुनने के बाद लाॅकहीड के रूप मे विजय ने कार्यबाही शुरू की।

सारी इमारत. अंधेरे में डूब चुकी थी…लान में अंधेरा छा गया, था और-----ठाकुर साहब के जवान आगे बढने के लिए टार्चो का प्रयोग कर रहे थे !!!

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हैरी मूर्ख नंहीं था----समझ सकता था कि खेल बिगड़े चुका है !!!

लाॅकहीड की चुस्ती--फुर्ती ने हीँ उसे बता दिया था कि वह विजय है और उसी ने लाॅकहीड की आवाज में ट्रांसमीटर पर अपनी मृत्यु की सूचना भी दी थी-------हैरी को खुद पर झुंझलाहट भी आई-------यह सोचकर उसे स्वयं पूर गुस्सा आया कि वह लाॅकहीड की हकीकत तब समझा, जब खेल बिगड चुका था ।।।।

जैकी----जूलिया----रघुनाथ--रैना भी इस वक्त आजाद है------वह समझ सकता था कि इन पांच व्यक्तियों की मोजूदगी इस हाॅल मे कहर ढाने के लिए काफी है !!!!

फिलहाल अंधेरा था और अंधेरा अभी हुआ था, यानी किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, मगर कुछ ही देर बाद हाल में मौजूद लोगों की आंखें अंधेरे की अभ्यस्त हो जाएंगी और तब हर कोई खुद से करीब एक ग़ज की दुरी तक किसी भी वस्तु को साए के रूप में देख सकेगा ।।।।।

हाथ में रिवॉल्वर लिए इस वक्त हैरी एक थम्ब से चिपका खडा था…वाहर से लगातार गूंजने बांली फायरिंग की आवाज ने उसे बता दिया कि कुछ देर बाद इस इमारत पर दुश्मन का कब्जा हो जाएगा---वह यह सब सोच ही रहा था कि एक टॉर्च-चमकी ।

"धांय! "

कांच के टूटकर बिखर जाने की ध्वनि।

इस फाॅयर अंधेरे हाल में एक अजीब-सा कोलाहल मचा दिया-------भगदड़ मच गई-------------कदाचित् हरी वर्दी बाले अपना धैर्य खो बेठे थे----वहां निरन्तर फाॅयर और चीखें गूंजने लगी ।

हैरी अपने स्थान तो हटा…रिवॉल्बर सम्भाले छोटे-छोटे कदमों के साथ अनूमान से ही उस तरफ़ बढा, जिस तरफ लम्बी-चौड्री मेज थी…अचात्तक कोई उससे टकराया ।।

अभी वह ट्रिगर दबाने ही बाला, था कि जैकी की आबाज -----"'कौन'हे?"

"पांव लागूं गुरुदेव !" उसने फुसफुसाकर विजय के से स्वर मे कहा ।

"औह !!" जैकी विजय--तुम हो-----हैरी को . तलाश करो----वह निकलने न पाए ।"

जवाब देने के लिए हैरी ने मुंह खोला, लेकिन फिर विना कुछ कहे ही वन्द कर लिया, अंधेरे में सरसराता हुआ जैकी उसका उत्तर सुने विना ही एक तरफ़ को चला गया था------- हैरी अपनी-मंजिल की तरफ़ बढा ।

मेज के किसी कोने से टकराया-----मेज को ही टटोलता-टटोलता वह कुर्सी तक भी पंहुच गया-----कूर्सी पर बैठकर उसने बाएं हत्थे पर कुछ टट्रोला-एक बटन पर उंगली पाते ही उसने बटन दवा दिया ।।।

हल्की सी सरसराहट के कुर्सी फर्श मे समा गई !

॥॥॥॥॥
 
करीब पन्द्रह मिनट तक जंग जारी रही ।

जंग के दौरान पुलिस माइक पर लगातार दुश्मनों को लडाई बन्द करके आत्मसमर्पण करने की चेतावनी और सलाह विभिन्न शब्दों मे दी जाती रहीँ…पुलिस को अंधेरे के कारण इमारत पर कब्जा करने में काफी दिक्कत और परेशानी हुई--समय भी लगा ॥

बहुत से हरी वर्दीधारी मारे गए…कुछ गिरफ्तार हो गए ।

जब इमारत पर पूरी तरह पुलिस का कब्जा हो गया-तब टार्चो की मदद से मेन स्विच की तलाश की गई ।।

उसे ऑन किया गया---रोशनी होने पर अंधेरे में इधर-उधर छुपे हरी वर्दीधारियों ने संधर्ष किया, किन्तु अधिक्रांश मारे गए-शेष गिरफ्तार ॥

अंतत: इमारत पर पुलिस का‘ कब्जा ॥॥

ठाकुर साहव ने रघुनाथ को लिपटा लिया ।

किन्तु सारी इमारत छान मारने पर भी हैरी का कहीं कुछ पता नहीं लगा-मेज के पीछे रिवाल्विंम चेयर अपने स्थान पर मौजूद थी--------अंत में जाने क्या सोचकर जैकी उस तरफ बढा---शीघ्र ही वह कुर्सी के बाएं हत्थे पर मौजूद बटन की और संकेत करके बोला-"शायद हैरी इसी बटन की मदद से गायब हो गया है विजय !"

विजय कुर्ती पर बैठकर बटन दवा चुका था !

कुर्सी फ़र्श में समाती चली रई----देखने वाले उसे हैरत से देखते रह गए, जबकि कुर्सी पर बैठा विजय भी फर्श में समाता चला गया-------करीब आठ गज नीचे जाकर कुर्सी स्वयं ही रुक गई------बिज़य ने देखा-उसके सामने दूर तक चली गई एक छोटी-सी गेलरी थी------------गैलऱी की छत मे एक-दूसरे से काफी दुर-दुर लगे बल्ब टिमटिमा रहे थे-सारी गैलरी में उनका धूंधला-सा प्रकाश मौजूद था ॥॥

विजय कुर्सी से उठ खडा हुआ।

उसके हटते ही सरसराती हई कुर्सी ऊपर जाने लगी--------कुर्सी के निचले भाग से लोहें की एक मोटी रांड सम्बद्ध थी , जो कि गैलरी के फर्श से निकलकर ..लम्बी होती जा रही थी----------रांड के उपरोक्त सिरे पर कुर्सी फिक्स थी----अगले ही पल, गैलरी की छत के पारं जाकर फिक्स हो गई।

छत से फर्श तक लोहे की रांड तनी हुई-थी ।

विजय समझ गया कि इस वक्त कुर्सी हाॅल में मेज के पीछे मौजूद होगी-----कुछ ही देर बाद धंसती हुई कुर्सी पुन: नीचे आई-लोहे की राठ फर्श में समाती चली गई…इस बार कुर्सी पर बैठकर जैकी नीचे आया था ।

बे ही वे'दोनों गैलरी में बढ गए ।

कई मोड' पार करने के बाद वे एक ऐसे स्थान पर पहुचे जहां हलकी सी गड़गड़ाहट के साथ छोटा-सा जनेरेटर चल रहा था ।

उसे देखकर जैकी कह उटा--"ओह !-तो ये चक्कर था ?"

"क्या चक्कर था ?" विजय ने पूछा !

"मैं यह सोच-सोचकर परेशान था कि जब मेनं स्विच ही आँफ था तो बटन के दबने से कुर्सी कैसे हरकत में आई---बह इमारत की लाइट से नहीं, इस जनरेटर से सम्बद्ध थी !"

"यह बात तो हम बचपन से समझे बैठे हैं गुरूदेब !"

जैकी उसकी तरफ देखकर धीमे से मुस्करा दिया !!!!!

जव विकास और मोन्टो को होश आया तो उन्होंने स्वयं को अपने घर यानी रघुनाथ की कोठी में पाया ॥॥॥

बे दोनों एक्र के ही बिस्तर पर मौजूद थे----------सबसे पहले उनकी नजर ठाकुर साहब पर पडी, देखते ही वे उछल पड़े---------- --------फिर रैना पर नजर पडते ही उनके होश उड़ गए…रैना पूरे श्रृंगार में थी-------" पूरा मेकअप--------मांग में सिन्दूर और गौरी गोल कलाइयों मैं चूडियां ।

वे चकित रह गए ।

जबकि विजय ने कहा-----"कही प्यारे !"
 
चौंककर दोनों ऩे विजय की तरक देखा------------उनकी अवस्था पर देर सारे स्त्री-पुरुषों का संयुक्त ढ़हाका गुंज उठा......!

कमरे में सभी सोजूद थे ॥॥॥

ठाकुर साहब, रघुनाथ, रैना,. विजय, गुलफाम, जैकी, अशरफ, विक्रम नाहर, परवेज, आशा और अजय और विजय के अलाबा कोई नहीं जानता था कि अजय ही भारतीय सीक्रेट सर्विस का चीफ है ॥॥॥

सबको ठहाका-लगाकर हंसते देखकर वे भोचक्के रह गए ।

जैकी और जूलिया को यहाँ देखकर तो उन्होंने बहुत ही ज्यादा आश्चर्य व्यक्त किया ।

रघुनाथ को जीवित देरब, उनकी खोपडी झनझना गई थी ॥॥॥

आश्चर्य में डूबे विकास ने पूछा---------“ये सब क्या चक्कर है?"

"खेल खत्म हो गया है प्यारे और पैसा हजम !"

" क्या मतलब?"

"मतलब ये प्यारे दिलजले कि खुद को हीरो समझने वाले यानी तुम और मोन्टो बेहोश ही रहे,जबकि हमने और बापूजान ने मिलकर न सिर्फ उस मुजरिम का तबला वजा दिया, जो यह सब कर रहा था, बल्कि गुरुदेव--------------गुरूवानी और तुताराशि को उसकी कैद से भी मुक्त करा लिया ।"

"क...कैद से-----मगर वह था कौन…क्या चाहता था…जैकी और जूलिया आंटी उसकी कैद में क्यों थे------यदि डैडी जिंदा हैं तो वहाँ चौराहे पर कौन मरा था ?"

"इन सब सवालों के जवाब में हमें पूरी रामायण सुनानी पडेगी प्यारे !"

" मै सुनने के लिए बेताब हूं अंकल !"

" सबसे पहले मुजरिम का नाम ही सुनो प्यारे!"

"कहिए ।"

"हेरी यानी इस केस का मुजरिम हैरी आर्मस्ट्रांग था ।"

विकास एकदम उछल पड़ा------" ह.....हैरी ?"

"न-न-उछलो मत प्यारे----आराम से बैठो ।" उसे पुचकारते हुए विजय ने कहा----"अभी तो पहला ही धमाका किया है-------हमारी रामायण में ऐसे तो जाने कितने धमाके होंगे---------तुम इसी तरह उछलते रहे तो निश्चित रूप से अपना सिर कमरे के छत से टकराकर फोड़ लोगे !"

“म...मगर-----हैरी ने यह सब क्यों किया?"

"अपने गुरुदेव के कटे हुए इस हाथ की वजह से !"

"कटा हुआ हाथ----"मगर--!”

"सुनो प्यारे-----कान लगाकर ध्यान से सुनो--- गुरुदेव आदि से बात करने के बाद जो मलूदा निकलकर सामने आया है, उसे संक्षेप में हम यूं कह सकते हैं--- ।" विजय रूका और एक लम्बी सांस लेने के बाद किसी टेपरिकार्डर के समान शुरू हो गया------------"अमेरिका में अपने साइकल चेन (माइक) से हैरी को यह पता लगा कि गुरुदेव का हाथ तुमने काटा है….....हैरी तुम्हारी तरह पायजामे से बाहर हो गया-------सब्रसे पहले वह से बदला लेने के लिए भारत जाने की इजाजत लेने अपने चीफ के पास गया......…चीफ ने सिर्फ इजाजत ही नहीं दी,, बल्कि हैरी को हमारे विरुद्ध और ज्यादा भड़काकर भारत में स्थित अपने जासूसों के पते भी दिए--------यानी पूरी मदद की….........यही बात जब घर पहुचने पर हैऱी ने इन दोनों से कही तो इन्होंने विरोध किया-------इन्होंने समझाना चाहा कि यह हाथ धर्मयुद्ध में कटा है, अत: किसी भी रूप में इसका बदला लेने की बात सोचना भी युक्ति संगत नहीं है---------मगर गर्म खोपडी हैरी को न मानना था न माना….......उधर हैरी के चीफ़ ने कहा कि जब वह भारत जा ही रहा है तो ऐसा कोई काम क्यों न करे जो हममें और तुममें ठन जाए.......…हैरी ऐसा करने के लिए तेयार हो गया…दोनों ने मिलकर हमें आपस में भिड़ा देने की स्कीम बनाई !"

“वह स्कीम क्या थी?"

"सबसे पहले लॉकहीड नामक राजनगर में स्थित अमेरिकी जासूस के जरिए गुप्त ढंग से अपने तुलाराशि की एलबम से वह फोटों गायब कराई गई, जिसमें लाराशि तेरह वर्ष की आयु का अपने माता-पिता के साथ था----हैरी ने मालूम कर लिया था कि अपने तुलाराशि का इंससे पहला कोई फोटो उपलब्द नहीं…उस फोटो से निगेटिव बनाए गए…फोटो बापस एलबम में लगवा दी गई---------

हैरी ने मालूम कर लिया था कि अपने तुलाराशि का इंससे पहला कोई फोटो उपलब्द नहीं…उस फोटो से निगेटिव बनाए गए…फोटो बापस एलबम में लगवा दी गई----------अमेरिकी जासूसों के हाथ से गुजरते हुए निगेटिव न्यूयार्क पहुंचे------निगेटिव में से अपने तुलाराशी का फोटो अलग कर लिया गया-----" अच्छे आर्टिस्ट से फोटो में हल्का सा चेंज कराके ट्रिक फोटोग्राफी से उसे ऐसा बना दिया गया, जैसे अलग पोज़ में हो…............फिर मिस्र की हिस्ट्री के मुताबिक इस फोटो का सम्बन्ध मिस्र के छोटे से कस्बे दोघट से जोड़ा गया ।"

"क्या मतलब ?"

"आज से इकत्तीस साल पहले 'दोघट' में सचमुच एक ऐसा जलजला आया आया था, जैसे जलजले का जिक्र अहमद ने किया था ।"

"यानी यदि वह हिस्ट्री उठाकर देखते, तब भी उनका बयान ही सच होता?"

" हां, सारी योजना खूब सोच-समझकर बनाई गई थी…कल्पनिक करैक्टरों का सम्बन्थ वास्तविक स्थानों और घटनाओं से जोड़ा गया था--------बड्री मेहनत से कागजों पर तीस साल पुराने से लेकर आज तक की लरीखों के देश-विदेश के विभिन्न अखबार छपवाए गए---------तारीफ की बात यह थी कि प्रत्येक अखबार मे तात्कालीन घटनाओं का ही जिक्र था, जो सचमुच तात्कालिक अखबारों से मारी गई थी-----------गर्ज यह कि तुलाराशी को इकबाल साबित करने के लिए एक लम्बी-चौडी जबरदस्त योजना पर काम जारी हो गया----------अहमद और तबस्सुम (रेहाना) दरअसल एक पाकिस्तानी नाटक कम्पनी के दो आर्टिस्ट थे, जो पिछले छह महीने से न्यूयार्क में शो दिखा रहे थे….........संयोग से हैरी का इश्क रेहाना से चल रहा था….......उसी इश्क के जाल में फंसाकर उसने रेहाना को और पैसे के वूते पर अहमद को इस स्कीम पर काम करने के लिए तैयार कर लिया------योजना के मुताबिक इन्हें सब कुछ समझाकर मिस्र और मिस से भारत मेजा गया.....…राजनगर जाकर ये दिलबहार होटल में रुके------------------उधर हैरी पहले ही यहाँ पहुंचकर विदेशी जासूसों की मदद से डेरा डाल चुका था ।"

"तुम बीच में कुछ भूल गए हो विजय! " जैकी ने टोका ।
 
"हां गुरुदेव-साला चक्कर ही ऐसा घुमावदार है कि एक तरफ के फ्लो में दूसरी तरफ का तारतम्य 'फ्यूज' हो गया---------हां-तो कहना यह था कि जब हैरी भारत के लिए,चलने लगा है तो इन्होंने उसका तगडा विरोध किया---हैरी को लगा कि यदि इन्हें खुला छोड़ दिया गया तो ये उसके नेक इरादों की खबर हमें पहुचा देंगे और वैसी हालत में हैरी का सारा प्लान चौफ्ट होने वाला था-अतः उसने इन्हें कैद कर लिया-उसे यकीन नहीं था कि किसी अन्य की देखरेख में ये अन्तिम समय तक कैद रहेंगे, अत: अपनी देख-रेख में रखने के लिए ही इन्है भी भारत ले आया--------- ---------फिर यहां अखबार में पहले से ही खूब अच्छी तरह सोचा-समझा विज्ञापन दे दिया गया------उस विज्ञापन के निकलते ही जो कुछ हुआ वह सबको मालूम ही है !"

रघुनाथ ने पूछा…" ये मास्टर का क्या चक्कर था?"

" लो ----- अपने तुलाराशि की समझ में अभी तक मास्टर का चक्कर ही नहीं आया है।"

सभी ठहाका लगाकर हैंस पड़े।

"क्या मतलब?" उलझे रघुनाथ ने पूछा ॥॥

"मतलब ये प्यारे कि तोताराम हत्याकांड के सम्बन्ध में ही हमने तुम्हें जो अलंकार सुनाए थे, उसके ज़ले-भुने तुम इस केस को खुद हल करने निकेल पड़े--दिलबहार होटल कमरे

में फोन पर अहमद और रेहाना की बात सुनकर ही तुमने निश्चय कर लिया कि तुम इकबाल बनकर-------मास्टर तक पहुचोगे----- -------तुम अपने को तीसमारखां समझ रहे थे, जबकि वह फोन और उस पर होने बाली बाते तुम्हें सुनाई ही इसलिए गई थीं कि तुम्हारे दिमाग में यह विचार आए-----हैरी सफ़ल रहा, यानी तुम खुद ही उसकी लाइन पर चल पड़े!"

"कमाल है!"

"आगे सुनो प्यारे…हैरी ने तो धोती को फाड़कर रूमाल भी वना दिया था ।"

विकास ने पूछा------"ज्ञान भारती के रजिस्टरों मैं डैडी का नाम क्यों नहीं था?"

विकास ने पूछा------"ज्ञान भारती के रजिस्टरों मैं डैडी का नाम क्यों नहीं था?"

"क्योंकि अमेरिकी जासूस ज्ञान भारती की प्रिसिंपल को एक बहुत मोटा रजिस्टर दे चुके थे जिसका हर पृष्ठ सिर्फ डॉलरों से ही बना था ।"

"ओह !"

"अपना तुलाराशि मास्टर तक पहुचने के लिए ड्रामा करता रहा, जबकि दरअसल यह कर वही सब कुछ रहा था, जो हैरी चाहता था---------शिकारगाह के खण्डहर में हैरी तब पहुंचा, जव तुलाराशि और अहमद भी सो रहे थे-------उसने रेहाना को विश्वास मे लेकर अहमद की हत्या कर दी-------------अहमद की लाश देखने के बाद तुलाराशि ने जो नाटक किया, उसी की हैरी को उम्मीद थी ,

और उससे बही सबकुछ कराने के लिए हैरी ने यह हत्या की थी----------हैरी जानता था कि रघुनाथ कथित मास्टर तक पहुंचने के लिए एक से एक ऊटपटांग हरकत करेगा------- --------उसने की-----अंत में जब वह मोन्टो का कत्ल करके भागा तो रेहाना सचमुच ही घबरा गई------------उसने सोचा कि अब पुलिस 'उन्हें पकड़ लेगी-------उधर हैरी को लॉकहीड द्वारा घटना की सूचना मिल गई थी-----------रेहाना सारी प्लानिंग जानने के बावजूद यह नहीं जानती थी कि हैरी का अड्डा कहाँ है------इसलिए घबरा गई----- -------उधर हैरी समझ गया कि क्लाइमेक्स आ गया है, अत: उसने बेहोश करके उन्हें अड्डे पर बुला लिया--------------रेहाना से बाते की--------जब वह रेहाना को समझा रहा था, तभी उसके आदेश पर हॉल में रघुनाथ को बदल दिया गया, यानी स्वयं रेहाना को भी-पता नहीं लगने दिया गया कि रघुनाथ बदल गया है-----------जिसे रघुनाथ बनाया गया था,,उसे यह नही बताया गया था कि उसे मरने के लिए भेजा जा रहा है---------उसे यह आदेश दिया गया था कि रेहाना सहित वह किसी की भी शक न होने दे कि वह रघुनाथ नहीं है और किसी भी ऐसे अवसर पर, जहाँ रैना और विजय मोजूद हों, रैना को गोली मार दे------------हैरी जानता था कि हमारी मौजूदगी ये सच्चे दिल से कोशिश करने के बावजूद भी वह कामयाब न हो सकेगा---- --------- मेरी गोली से मारा जाएगा-- ------यही हैरी चाहता था !"

"और यही हुआ ।"

" हुआ नहीं प्यारे, बल्कि यूं कहो कि हमने किया ।"

"क्या मतलब?”

"इसमे शक नहीं कि हमारा दिमाग शुरू से ही चकरघिन्नी बना हुआ था…यानी हम भी न ताड़ सके थे कि अपना तुलाराशी साला इकबाल बना नहीं है, बल्कि नाटक कर रहा है------मोन्टो की लाश देखकर हम सचमुच उत्तेजित हो गए….......तुलाराशि को मार-मारकर भूत वना और उसे पुलिस के हवाले कर देने का निश्चय करके वहां से निकल पड़े--------चौराहे पर उससे भिड़ने तक मैं गुस्से में ही था….....मगर लडाई के दौरान मैं यह भांपकर मन ही मन चोंक पड़ा कि वह अपना तुलाराशि नहीं है------ ----लड़ता हुआ मैं यह बराबर सोचता रहा कि मैं है नकली रघुनाथ से ये हरकते कराकर आखिर मुजरिम चाहता क्या है------ ----- जब वह रैना को ही मारने लगा तो मैं समझ गया कि मुजरिम क्या चाहता है--------- -----मुजरिम की योजना मेरे रिवॉल्वर से रघुनाथ की हत्या करा देने की थी----- ------यदि मैं वहां यह न ताड़ता कि रघुनाथ नकली है तो मैं निश्चय ही रघुनाथ के पैर में गोली मारता, किन्तु यह ताड़ने और यह समझने के बाद कि मुजरिम क्या चाहता है, मैंने मुजरिम तक पहुंचने के लिए वही कर दिया, जो वह चाहता था ------ --------------रघुनाथ की मृत्यु की जो प्रतिक्रिया रैना और विकास पर होनी स्वाभाविक थी, वह हुई----मै समझ सकता था कि विकास को और मुझे भिड़ने के लिए ही मुजरिम ने यह सब कुछ किया है----- मैं ऐसा नाटक करता चला गया, जैसे मैं खुद को भी खुद रघुनाथ का हत्यारा ही समझ रहा हूं..... …तब तक की घटना से मैं अन्दाजा लगा चुका था कि मुजरिम को एक-एक घटना की जानकारी मिल रही है, अत: मैंने हर जगह खुद को रघुनाथ का हत्यारा ही दर्शाया--------यहां तक कि गुलफाम सामने-------फोन पर अजय और विकास के सामने भी------बहाँ भी जहाँ विकास ने अशरफ आदि को कैद कर रखा था------फिर भी, मुझे मुजरिम तक ,तो पहुंचना ही था-मुजरिम तक पहुंचने के लिए तबस्सुम के रूप में एकमात्र 'क्लू' नजर आया-------गुप्त रूप से पूरी सावधानी के साथ मैंने पुलिस लाकअप से तबस्सुम को उड़ा लिया--------

गुलफाम के होटल

में लाकर मुझे उसे टार्चर करना पड़ा--- ----वह ज्यादा टार्चर न सह सकी और सब कुछ बताती चली गई-----ऊपर मैंने जो कुछ कहा है, यह सब मुझे तबस्सुम ने ही बताया था….... .....यह भी कि उसका असली नाम रेहाना है-----इतना सब कुछ जानते हुए भी वह हैरी का पता नहीं जानती थी---- ----- इसी तरह यह की ज्ञात नहीं था कि जो रघुनाथ मरा है, वह नकली था… ..... मैं समझ गया कि हैरी उसे भी सिर्फ उतनी ही बाते बताता था, जितनी आवश्यक होती थीं… .....मुझें रेहाना की इस बात से आशा बंधी कि हैरी ने उसे पुलिस की गिरफ्त से निकालने का वचन दिया है------मैंने सोचा कि हैरी तक मैं तभी पहुच सकता के जबकि हैरी रेहाना के भ्रम में पुलिस लॉकअप से निकाल कर किसी और को ले जाए------मगर किसे…? यहीं मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल था… ऐसे काम के लिए मेरे पास सिर्फ एक ही लड़की थी… .....अपनी गोगिया पाशा, मगर बह विकास की कैद में थी और मैं नहीं जानता था कि बह कहाँ कैद है----- -----विकास को हकीकत मैं बता नहीं सकता था--------अन्त में मेरे दिमाग में रैना बहन का ख्याल आया---- मै मजबूर था… .......उसी रात जाकर रैना को यह विश्वास दिला सका कि असली तुलाराशी को नहीं मारा है--------रैना को रेहाना मैंने खुद बनाया जिस तरह से गुपचुप रेहाना को लॉकअप से लाया था, रैना को पहुचा दिया----- रैना को मैंने वे सभी बाते कंठस्थ करा दी थी , जो टार्चर के बाद रेहाना ने बताई थी ।"

"उसके बाद क्या हुआ? "

"वह सभी जानते है…अश्रु और लाॅर्फिग गेस के मिश्रित बमो का प्रयोग करके हैरी रैना को रेहाना समझकर पुलिस लाकअप से निकाल ले गया..... …रैना को मैंने पहले ही शुगर क्यूब की शक्ल का एक ऐसा ट्रांसमीटर दे दिया था, जिसके, सम्बन्थ एक विराम घड्री से था.

. …क्योंकि हैरी रैना को पुलिस लाकअप से ले जाते वक्त विकास के मेकअप मे था इसलिए बापूजान दलवल के साथ दिलजले पर टूट पड़े-दिलजला घबराकर भागा--------यह घटना मेरे लिए वरदान-हीं साबित हुई, क्योंकि मैं वहाँ पहुच गया, जहाँ यह सब कैद थे------- ---------- के बाद मैंने विकास चौर मोन्टो को बेहोश कर दिया और इन्हें कैद से निकाल लिया ।"

" तुमने बिकास-गुलफाम या किसी और को यह हकीकत क्यों नहीं बता दी कि तुमने असली रघुनाथ को नहीं मारा है? यदि तुम ऐसा करते इतनी मुसीबत न उठानी पडती ।”

"मै समझ चुका था कि हैरी की चाल हम दोनों को उलझाए ऱखने की है---मैंने निश्चय किया कि उसे इस भूल में रखकर ही काम किया जाए कि हम उलझ गए-----यदि विकास को हकीकत बता देता तो वह इतना सब बखेडा न करता, जो है इसने किया और उसके विना हैरी को यकीन नहीं होता कि हम उसकी चाल के शिकार हो गए हैं----मै यह भी समझ चुका था कि किसी माध्यम से हैरी तक हमारी पल-पल की रिपोर्ट पहुंच रही है, इसलिए हर जगह मैंने यही दर्शाया कि मैं खुद को सचमुच रघुनाथ का हत्यारा समझता हू।"

"खैर-फिर क्या हुआ?"

"अशरफ आदि को लेकर मैं गुलफाम के होटल पहुचा ,किन्तु रास्ते में ही यह भांप चुका था एक बलिष्ट अमेरिकी मेरा पीछा कर रहा हे…मौका लगते ही गुलफाम के होटल के पास हमने उसे दबोच लिया…टार्चर के बाद उसने अपना नाम लॉकहीड बताया और कहा किं उसके और विकास के सम्बन्थ में हैरी को सारी रिपोर्ट वही पहुंचाता है--------उसके पास एक ट्रांसमीटर भी था-बिराम घड़ी की मदद से मैं यह जान ही चुका था कि हैरी का अड्डा कहां है--------फिर लॉकहीड की आवाज ट्रांसमीटर पर मैंने सच की चाशनी में लपेटकर हैरी को एक गलत खबर दी-----मकसद सिर्फ हैरी को अपनी तरफ से लापरवाह कर देना था-मैंने लॉकहीड का मेकअप किया… .........अशरफ को अपने बापूजान के पास सब कुछ बता देने के बाद पुलिस मदद के लिए भेजा-----उससे बाद खेल ख़त्म…पैसा हजम ।"

भभकते-से स्वर में विकास ने पूछा---------;-----" तो यह सब हैरी ने किया था?"

"लो !" विजय बोला-----" सारी रामायण खत्म हो रई, लेकिन जनाब पूछ रहे है कि रावण कौन था !"

भभकते-से स्वर में विकास ने पूछा-----------------" तो यह सब हैरी ने किया था?"

"लो !" विजय बोला-----" सारी रामायण खत्म हो रई, लेकिन जनाब पूछ रहे है कि रावण कौन था !"

विकास, ने उसी स्वर मे पूछा-----रिहाना और लॉकहीड कहां है ?"

"पुलिस की गिरफ्त में प्यारे !" विजय ,बोला-------"अमेरिका के ज्यादातर एजेण्ट मारे गए-जो शेष थे, वे गिरफ्तार हो गए---- उस इमारत पर भी इस वक्त पुलिस का कब्जा है ।"

"और हैरी का क्या हुआ?"

"बस प्यारे-यही चूक गए ।"

गुर्राता हुआ-सा स्वर…"क्या मतलब?"

"आखिह समय में वह एक गुप्त सुरंग के रास्ते से फरार होने में कामयाब हो गया----उस इमारत से शुरु होने बाली सुरंग का अन्तिम सिरा एक नाले के पुल के नीचे है, बह उसी रास्ते से..!"

विकास एक झटके के साथ खड़ा हो क्या ।

सभी ने उसे आश्चर्य के साथ देखा ॥

विजय ने पूछा----"क्या हुआ प्यारे ?"

"यह केस खत्म कहाँ हो गया गुरू ?"

"खत्म होने के लिए अब शेप रह ही क्या गया है प्यारे-------- हैरी का सारा षड्यंत्र बिखर चुका है-उसफी ताकत खत्म हो चुकी है , तुम्हारा यू कलफ़ लगे पायजामे की तरह खड़े

रहना समझ' में नहीं आया ।"

" उसकी ताकत इस तरह खत्म 'नहीं होगी गुरू------उसका नाम हैरी है-----बात अभी तक वही लटकी हुई है, जहाँ शुरू मे, थी ; यानी उसे कटे हाथ का बदला लेना है----------- ----अपनी ताकत हैरी खुद है---- ---बह फिर कभी-न-कभी इस मिशन लेकर निकल पडेगा।"

" तुम क्यों दुबले हुए जा रहे हो प्यारे-----तब की तभी देखेंगे ।"
 
"नहीं गुरू-----विकास का सिद्धांत सांप को फन उठाते ही कुचल देना ।"

" क्या मतलब ?"

"केस तव तक खत्म नहीं होगा, जब तक हैरी जिन्दा हैं !'

चकराए हुए विजय ने पूछा-“तब क्या हैरी को..... ?"

.परन्तु उसका वाक्य अधूरा ही रह गया--------- ----ना सिर्फ विजय-----बल्कि सभी बुरी तरह चौंक पड़े थे----- --- चीते की तरह झपटकर उसने ठाकुर साहब के होलस्टर से रिवॉत्वर निकाल लिया ॥॥॥

इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाए, रिवॉल्वर जूलिया की कनपटी पर रखे लड़का गुर्रा रहा था---------"सभी लोग हाथ ऊपर उटा ले.......यदि एक भी हिला तो मैं जूलिया आन्टी के भेजे में गोली उतार दूंगा ।"

समी चकित--हैरान---परेशान---उलझे हुए ।

"तुम्हें क्या हो गया है विकास?" रैना कह उठी ।

“बको मत मम्मी…आई से हेण्ड्स अप !" विकास जंगली शेर के समान गुर्राया-------------" अभी ये केस खत्म नहीं हुआ है------------ऐसा नहीं हो सकता गुरु कि कोई हरामजादा हिन्दुस्तानी सरहदों के अंदर घुसकर-------राजनगर में रहर्कर इतना सब कुछ करे और फिर सरहदों के पार भी निकल जाए------हरगिज नहीं गुरु-मेरी मां को मानसिक यातनाएं देने वाला---------पिता के हाथ काटने का इरादा रखने बाला और हमारे बीच हमेशा के लिए दुश्मनी की दीवार खडी करने की कोशिश करने वाला हैरी इतनी आसानी से नहीं निकल सकता ।"

"म...मगर-अब करना क्या चाहते हो प्यारे?"

"देखते रहो गुरू देखते रहो…यहां मौजूद एक भी व्यक्ति की गलत हरकत जूलिया आंटी की मौत साबित होगी ।"

"त… मुझे मारोगे विकास?" जूलिया कह उठी । "

"यदि हैरी डैडी का हाथ काटने भारत आ सकता है तो मैं दुश्मन की मां को मौत के घाट उतारने में जरा भी नहीं हिचकूगा आंटी? विकास ने कुछ ऐसे अन्दाज में कहा कि जूलिया के सारे जिस्म में झुरझुरी-सी दौड़ गईं------लड़के के चेहरे पर इस वक्त ऐसे वाशियहिना भाव थे कि सबके हाथ स्वयं ही हवा में उठते चले गए-------जैकी और विजय जेसे लोगों ने भांप लिया था कि लडका कोरी धमकी ही नहीं दे रहा है-क्रोध मैं पागल हुआ बिकास जो कर जाए, वह कम ही हैं!

गहरा सन्नाटा छा गया था वहां ।

किसी ने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि सारी वारदात सुनने के बाद विकास पर यह प्रतिक्रिया होगी-----एकदम से बदली हुई इन परिस्थितियों ने सभी को र्किकर्तव्यविमूढ़ कर दिया था । ।

विकास ने उसी अवस्था में पुकारा…"मोन्टो?"

मोन्टो एकदम उछलकर सावधान की मुद्रा में सोफे की पुश्त पर खडा हो गया------विकास ने उसे आदेश दिया----"सबकी तलाशी लो…जेबें बिल्कुल खाली कर दो ।"

मोन्टो ने जो हुक्म कहने के-अंदाज में गर्दन हिलाई।

जूलियो की कनपटी पर रिवॉल्वर रखे------+ ----कठोर चेहरे वाले विकास ने एक-एक को अपनी लाल आंखों से घूरा, बोला-----" यदि मोन्टो द्वारा तलाशी के दौरान किसी ने भी चालाकी दिखाने की कोशिश की तो जूलिया आंटी तडप-तडप कर इस हाँल में जान दे रहीँ होंगी-------विशेष रूप से तुम सुनो गुरु----तुम भी डबल गुरू-----सबसे ज्यादा मुझें तुम दोनो की तरफ़ से गलत हरकत की उम्मीद है ।"

जैकी बोला----"म.......मगर बिकास….......हमारा क्या दोष है--!"

" हम तो खुद ही हैरी की कैद मे थे।"

"दोष आपका नहीं गुरु-----दोष तो मेरे डैडी का था-मेऱी मां का था !"

" हमने अपनी तरफ से उसे माफ कर दिया है विकास ।" रघुनाथ ने कहा ।

"लेकिन विकास देश में घुसकर उत्पात मचाने बाले को मांफ़ नहीं कर सकता डैर्डी-ऐसा नहीं हो सकता कि विकास सोया पड़ा रहे और कोई कुत्ता इतना सब'कुष्ठ करने के बाद देश से निकल भी जाए ।"

"तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है दितजले!" हल्की सी झुझलाहट के साथ विजय ने कहा…"तुम्हें हजार बार समझाया कि विवेकहीन उतेजना----जोश---और बात-बात पर यूं पागल हो उठना बेवकूफी है…तुमसे बदला लेने की ऐसी ही जिद हैरी ने भी की थी----विरोध करने बालों को उसने कैद कर लिया-----मगर नतीजा क्या निकला प्यारे---------बैसी ही जिद इस वक्त तुम कर रहेहो।"

"इस वक्त मुझे आपका भाषण नहीं चाहिए गुरू !"

" उफ्फ !" जैकी चीख पड़ा-"किसो एक का नहीं, वल्कि इन दोनों ही लड़को का दिमाग खराब हो गया है ।”

उनकी बातों से ध्यान हटाकर विकास ने कहा-------तलाशी लो मोन्टो !"

रघुनाथ- की कोठी का हॉल !

बिकास और मोन्टो ने मिलकर इस हाल का दूश्य बड़ा ही अजीब बना दिया था--हाल की दीबारों के सहारे चारों तरफ़ वे सभी मोटी-मोटी रस्सियों में कैद थे ।"

विजय---- रघुनाथ--- रैना -- अजय-----------गुलफाम अशरफ--विक्रम-नाहर--- परबेज ----आशा और ठाकुर साहब भी ।

हाॅल के बीचो--बीच छत में दो कुन्दो से होकर रस्सियां लटक रही थीं-रस्सियों के निचले सिरों पर लटके थे जैकी और जूलिया---सिर से उपर दोनों हाथ रस्सियों मे बंधे----हबा में झूल रहे थे !

पैर फर्श से पांच फुट ऊपर थे ।

उन सभी के जेबों से निकला सामान एक कोने में पड़ा था ।
 
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