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नए पड़ोसी complete

अगले दिन मैं जल्दी ही नहा कर तैयार हो गया था और मम्मी पापा के घर से निकलते ही रश्मि दीदी को बोल कर की एक दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ घर से निकल गया. सोचा तो मैंने था की आंटी को चोदुंगा पर फिर मैंने सोचा की हो सकता है की अंकल अभी ऑफिस के लिए न निकले हो तो पहले चल कर एक बार चारू के दर्शन कर लिए जाए. आंटी कहा भागी जा रही थी. लौट कर चोद लूँगा और मैं नीलम अरोरा के घर पहुच गया. बेल बजाई तो नीलम आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर घबरा गयी और बोली "अरे ओम ने तुम्हे बताया नहीं की चारू आई हुई है."

"नहीं तो. कब आई चारू." मैंने अनजान बनते हुए कहा.

तब तक चारू ने अन्दर से पुछा "कौन है मम्मा." और देखने के लिए खुद भी बाहर आ गयी. "अरे मनीष तू. कैसा है? और रश्मि कैसी है?"

"जी दोनों एकदम बढ़िया. आप तो ठीक है न?" मैंने पुछा.

"देखने पर ठीक नहीं लग रही क्या." चारू ने हँसते हुए पुछा.

शादी के बाद चारू का बदन थोडा गदरा गया था पर एक दम सही जगहों पर. मांस केवल कुल्हो और छातियों पर चढ़ा था. चारू के गदराये बदन को थोडा बारीकी से देख के मैंने कहा "देख कर तो आप एकदम मस्त लग रही हो."

"कैसे आया था?" चारू ने पुछा.

मुझसे पहले ही कामिनी ने जवाब दिया. "वो जब से चेतन गया है ये कभी कभी यूं ही पूछने आ जाता है की कोई काम या जरूरत तो नहीं है. नहीं मनीष बेटा फिलहाल कोई काम नहीं है, जब होगा मैं फ़ोन कर दूँगी."

"ठीक है आंटी" बोल कर मैं वापस आने लगा.

"अरे मम्मा का इतना ध्यान रखता है. गुड. चल अन्दर आ. चाय पिलाती हूँ तुझे." चारू मुझे रोकते हुए बोली.

"अपने दूध की चाय पिलाओ तो आऊं." मैं चारू की चुचियां घूरते हुए बडबडाया.

"अरे मुह में क्या बोल रहा है आ न." चारू ने फिर से कहा.

"नहीं दीदी. कुछ जरूरी काम है. बाद में आऊंगा." मैंने कहा और निकलने लगा.

"ठीक है. रश्मि को लेकर आना." चारू पीछे से बोली.

 
मैं जल्दी से रुची के घर पहुच गया. सोचा था की लाला से पूछ लूँगा की अंकल और रुची चले गए या नहीं पर यहाँ तो दुकान ही बंद थी. मैंने सोचा ओम तो गया होगा रश्मि दीदी को चोदने पर ये लाला कहाँ गायब हो गया कहीं दुकान बंद करके आंटी को चोदने तो नहीं चला गया. मेरे साथ तो klpd हो जाएगी. इससे अच्छा चारू की चाय ही पी लेता. फिर भी मैंने सोचा की चांस लेता हूँ और मैंने घंटी बजा ही दी.

2 मिनट बाद ही आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर हँसते हुए बोली "आइये आइये."

मैंने सोचा की अगर लाला अन्दर होता या इनको चोद रहा होता तो ये दरवाजा इतनी जल्दी नहीं खोलती. मैं अन्दर गया और आंटी ने दरवाजा बंद कर लिया.

मैंने पुछा "अंकल कहा है?"

आंटी फिर से हंसी और बोली "ये तो ऑफिस गए है. इनसे मिलना हो तो शाम को आना."

"और रुची?" मै समझ तो गया था फिर भी पूछ ही लिया.

"वो भी शाम को मिलेगी तब आइयेगा." आंटी ने कहा.

"मैं तो आपसे मिलने आया हूँ" मैंने आंटी को गले लगाते हुए कहा.

"क्यों?" आंटी ने छुड्वाते हुए कहा.

"याद आ रही थी आपकी." मैं बोला.

"गलत टाइम याद आई तुम्हे. मेरी छुट्टी शुरू हो गयी है आज." आंटी हँसते हुए बोली.

"मतलब." मैंने पुछा.

"मतलब पीरियड शुरू हो गए है. अब 5 दिनों को छुट्टी. समझे? अब 5 दिन बाद याद करना क्योंकि उस दिन मुझे भी बहुत याद आती है इसकी." ये कह कर आंटी में मेरा लंड पकड़

लिया. पर अब क्या फायदा klpd तो हो ही गयी.

मैंने कहा "ठीक है आंटी. पांचवे दिन का वादा."

आंटी ने पुछा "चाय पियोगे."

"जो पीने आया था वही पियूंगा 5 दिन बाद. चलिए चलता हूँ. ऊपर से ही चला जाता हूँ. दीदी शायद नहा रही होगी." कह कर मैं आंटी की छत पर आ गया. मैंने सोचा की जब आज कही दाल गल ही नहीं रही तो क्यों न दीदी और ओम की चुदाई ही देखी जाये. इसीलिए मैं छत पर आया और अपने घर में कूद गया.
 
मैं धीरे से बाथरूम को तरफ बढ़ा पर वहां कोई हलचल नहीं थी. मैं धीरे धीरे नीचे आने लगा तभी दीदी के कमरे से दीदी की जोर से चीखने की आवाज आई. "उफ्फ माआर दाल्ल्ल्लल्ला. निकालो ऊऊऊऊऊऊऊऊओ इस्स्सीईईई"

मतलब ओम दीदी के कमरे में दीदी की चुदाई कर रहा था. मैंने धीरे धीरे नीचे आया और छुप कर देखने की कोशिश करने लगा. पर अन्दर का नज़ारा देख कर मेरा दिमाग गनगना उठा क्योंकि अन्दर ओम और दीदी के साथ लाला भी था. दीदी बेड पर नंगी पड़ी थी और ओम ने दीदी का मुह पकड़ रखा था और लाला अपने हलब्बी लंड से दीदी की चूत की कुटाई कर रहा था. इसीलिए दीदी इतने जोर से चीखी होंगी वरना ओम से तो अब वो आराम से चुदवा लेती थी. मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करूं. ये साला ओम मुझे मयंक जैसा ही चुतिया बना रहा था. मेरी रश्मि दीदी की चूत को इसने मुफ्त का चन्दन बना दिया था जिसे मेरे अलावा हर कोई घिसे जा रहा था. तब तक ओम ने दीदी का मुह छोड़ दिया था तो दीदी फिर से लाला को गलिया देने लगी थी. "अबे कमीने चूत फाड़ दी मेरी तूने. बोला था न आराम से करना. उफ्फ्फ्फ़ जानवर है क्या ओह्ह्हह्ह्ह्ह."

वो कुछ और बोलती तब तक ओम ने दीदी के मुह में अपना लंड डाल दिया और लाला को बोला आराम से कर यार. जान लेगा क्या.

तो दीदी ने ही इसको बोला था चोदने को. ये सुन कर मैं ध्यान से दीदी की चुदाई देखने लगा. ओम दीदी का मुह चोद रहा था और लाला चूत. ओम ने दीदी से कहा "रश्मि डार्लिंग, बोलो डालूँ पीछे. बड़ा मजा आयेगा."

दीदी मुह से ओम का लंड निकाल कर बोली "न बाबा न. तुमने बोला था की इसके लंड से चुदवा कर बहुत मजा आयेगा. इसके लंड के साइज़ का सुन कर मैं लालच में गयी थी पर इसने

मेरी जान निकाल दी है. अब तो एक दो दिन चूत ही नहीं मरवा पाऊंगी और तुम एक साथ गांड और चूत मरवाने को बोल रहे हो. आज तो रहने ही दो."

ये कह कर दीदी फिर से ओम का लंड चूसने लगी और लाला हलके हलके धक्के मारने लगा. मेरा मन तो हो रहा था की मैं दीदी की और चुदाई देखूं पर मैं वापस छत से होकर आंटी के घर आ गया और उनसे कहा "चाय पिला ही दीजिये. छत का दरवाजा बंद है और दीदी नहा रही है." चाय पीकर करीब आधे घंटे बाद जब मैं आंटी के घर से निकला तब भी ओम की दुकान बंद थी मतलब ये लोग अभी तक दीदी को निचोड़ रहे थे पर अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने दरवाजा ठोका. 5 मिनट बाद ओम ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर बोला "यार तुम जल्दी आ गए"

"तो क्या हुआ? तुम्हारा काम तो हो गया न." मैंने गुस्सा दबाते हुए कहा.

ओम मुझे लेकर बाहर आ गया और बोला "यार पर अभी तो लाला रश्मि को चोद रहा है."

"क्या? ये तो हमारी बात नहीं हुई थी." मैं अब अपना गुस्सा नहीं दबा पाया.

"भाई जो मैं कर रहा हूँ तुम्हारे लिए ही कर रहा हूँ. तुम्ही के रहे थे की जल्दी है, समझने की कोशिश करो" ओम ने आवाज दबा कर कहा.

"मेरे लिए क्या कर रहे हो. मेरी बहन को दुनिया से चुदवा रहे हो मेरे लिए? यार मैंने कहा था की मुझे चोदना है और तुमने चुदवा दिया लाला से. अरे जब दीदी की चूत भोसड़ा बन जाएगी तब क्या फायदा. मैं क्या उस स्विमिंग पूल में गोते लगाऊँगा." मैंने ओम को चिल्लाते हुए कहा.

"यार तुम्हारा कम मैंने कर दिया और सब लाला की वजह से ही हुआ. समझे. अब तुम्हारी बहन उतनी शर्मीली नहीं रही देख रहे हो न. कैसे आराम से लाला से चुदवा लिया. आज मैंने उसे बोला है की अगले महीने राखी के दिन मेरा बर्थडे है और मैं एक फार्म हाउस में पार्टी रख रहा हूँ और वो आने के लिए फ़ौरन तैयार हो गयी. समझे क्योंकि मैंने उससे कहा की लाला और मयंक भी वहां होंगे." ओम ने मुझे समझाया.

"तो क्या? तुम तीनो फिर से दीदी को चोदोगे तो इसमें नयी बात क्या है." मैंने पुछा.

"देखो रश्मि ने मुझे बताया की तुम्हारे मम्मी पापा हर साल राखी में तुम्हारे मामा के घर जाते है और अगली रात तक लौट कर आते है तो वो शाम को रुची के साथ पार्टी में आ जाएगी. मैंने उसको नहीं बताया की तुम भी पार्टी में होगे. मैं रात में रश्मि को रोक लूँगा और तुम्हारा काम करवा दूंगा. पक्का प्रोमिस." ओम बोला.

ये बात की मम्मी पापा हर साल राखी में 2 दिन के लिए मामा के घर जाते है सही थी. मतलब रश्मि दीदी ने ही इसको बताया होगा. मुझे ओम पर थोडा भरोसा हुआ. तब तक लाला भी कपडे पहन कर बाहर आ गया. मुझे देख कर बोला "भाई कमाल का कड़क माल है तुम्हारी बहन. मजा आ गया."

ओम बोला "अच्छा अच्छा तुम जाकर दुकान खोलो. मैं अभी आता हूँ. सुनो मनीष भाई उस दिन बहुत मजा आयेगा. हम 4 लड़के और 2 लडकिया. पूरी रात मजे करेंगे. अब तुम टेंशन मत लो. बस अपनी दीदी की चुदाई की तैय्यारी कर लो. लंड को तेल पिलाओ ताकि दीदी को पूरा सुख दे पाए. अब हम जाते है. कल आएंगे रश्मि को चोदने."

"कौन तुम या लाला?" मैंने पुछा.

"कभी हम और कभी लाला. ये तुम्हारे काम के लिए बहुत जरूरी है." ओम जाते जाते बोला.

 
अगले दिन मैं थोडा देर से सो कर उठा तो मम्मी पापा जा चुके थे और दीदी के कमरे का दरवाजा बंद था. मैंने दरवाजे से कान लगाया तो दीदी की सीत्कारी सुनाई दी मतलब दीदी की चुदाई चल रही थी. मैं फ्रेश होकर आया पर दीदी के बेडरूम का दरवाजा अभी भी बंद था तो मैं ड्राइंग रूम में बैठकर पेपर देखने लगा. थोड़ी देर में दरवाजा खुला और लाला बाहर आया.

मुझे सामने देख कर वो बोला "और मनीष भाई, क्या हाल है?"

"सब ठीक है." अब और मैं क्या कहता.

"चलो दरवाजा बंद कर लो." लाला बोला और बाहर निकल गया.

दरवाजा बंद करके मैं वापस दीदी के कमरे की तरफ आया. अन्दर रश्मि दीदी बेड पर नंगी पड़ी हुई थी. शायद लाला की चुदाई से थक कर आराम कर रही थी. मुझे दरवाजे से अन्दर झांकता देख कर दीदी ने अपने ऊपर चादर डाल लिया. मैंने कहा "मैं नहाने जा रहा हूँ. नाश्ता तो बना दो."

"आज ब्रेड बटर खा लेना. अभी मुझमे दम नहीं है." दीदी ने जवाब दिया और आँखें बंद करके लेट गयी.

मुझे गुस्सा तो आया की कल तो कह रही थी की एक दो दिन चुदवा ही नहीं पाऊंगी पर लाला से सुबह सुबह ही चुदवा लिया और वो भी ऐसे की अब उठा भी नही जा रहा. "अभी मयंक या ओम आ जायेगे तो फिर तुम्हारी सारी थकन उतर जाएगी." मैंने ताना मारा.

"अभी मुझको तुझसे लड़ाई भी नहीं करनी है. मेरे बहुत मना करने पर भी लाला ने पीछे डाल दिया है. मुझे थोडा आराम करने दे." दीदी धीरे से बोली.

 
मुझे लगा जब लाला ने अपना मोटा लंड दीदी की गांड में डाला होगा तो दीदी की गांड तो फट ही गयी होगी. काश मैंने वो मंजर देखा होता. मैं चुपचाप वहां से नहाने चला गया. दीदी दोपहर तक लेटी ही रही और मुश्किल से उठ कर नहाया धोया. पर शाम को मम्मी पापा के आने के टाइम तक दीदी काफी नार्मल हो गयी या फिर मम्मी पापा को दिखाने के लिए नार्मल होने की एक्टिंग करने लगी.

अगले दिन लाला की जगह ओम आया. मैंने सोचा की आज तो रश्मि दीदी मना कर देगी लेकिन वो उसको लेकर अपने कमरे में घुस गयी और खाट कबड्डी खेलने लगी. बस अब तो रोज का ही नियम हो गया था की मम्मी पापा के जाने के बाद ओम या लाला घर आ जाते और दीदी को अच्छी तरह से बजाते थे.

उधर आंटी के पीरियड ख़तम होने पर मैंने उन्हें चार पांच बार चोदा और बीच बीच में रुची को भी लेकिन नीलम की चुदाई नहीं कर पाया क्योंकि चारू जाने का नाम ही नहीं ले रही थी. लेकिन एक दिन रुची ने मुझे बताया की उसने लाला से भी चुदवा लिया है. एक दिन जब ओम रश्मि को चोदने मेरे घर आया था तब लाला ने रुची को दुकान के अन्दर ले लिया और शटर डाउन करके रुची की अगाडी पिछाड़ी सब बजा डाली. कुल मिला कर रुची आंटी और रश्मि दीदी तीनो ही लाला के हल्ल्बी लंड की दीवानी हो गयी थी. बड़े मजे से हँसते हँसते तीनो लाला का लंड आगे और पीछे ले लेती थी.

बीच में एक दिन जब ओम दीदी को चोदने आया तो मैंने उससे कहा भी की अब तो लाला भी रुची को चोदता है तो मेरे लिए किसी और चूत का जुगाड़ कराओ तो वो बोला की उसने कामिनी भौजी से मेरे लिए बात की थी पर उन्होंने इंकार कर दिया लेकिन वो फिर से कोशिश करेगा. मैंने भी सोचा की अब तो रक्षाबंधन में दिन ही कितने बचे है. कामिनी आंटी पर बाद में फोकस करेंगे अभी तो रश्मि दीदी की लेने की तैय्यारी करनी है फिर तो घर में ही मजे होंगे.

 
राखी से ३ दिन पहले मयंक भी छुट्टी में घर आ गया था और अगले दिन वो रुची को लेकर घर आ गया. दीदी मयंक को देख कर बहुत खुश हुई और हम चारों ने पुराने दिनों की तरह धमाकेदार चुदाई की. दोपहर तक हमारा ये खेल जारी रहा और हमने कई राउंड में चुदाई की. मयंक ने रश्मि दीदी और रुची के साथ थ्रीसम भी किया और मैं सिर्फ देखता रहा. आज दीदी ने अपना कमरा बंद नहीं किया था जो की वो ओम या लाला के आने पर कर देती थी. काफी दिन बाद दीदी को पूरा नंगा देख कर मेरे अन्दर एक नया जोश आ गया और मैंने रुची को तबियत से चोदा. आखिर में दीदी और रुची बोल पड़े की बस अब और नहीं. फिर मयंक और रुची वापस अपने घर चले गए. हम दोनों भाई बहन भी अपने कमरे में आ कर सो गए. शाम को जब मम्मी पापा आये तो उन्होंने हम दोनों को जगाया और हमे मुह हाथ धोकर हाल में आने को कहा.

जब हम दोनों वह पहुचे तो पापा ने कहा "देखो तुम लोग सक्सेना अंकल को जानते ही हो. वो कल रात को अपनी कार से गोंडा जा रहा है तो मैं सोच रहा था की हम दोनों भी उसी के साथ तुम्हारे मामा के यहाँ चले जाए पर तुम्हारी मम्मी कह रही थी की तुम दोनों अकेले रक्षाबंधन नहीं कर पायोगे तो हम दोनों कल पूजा के बाद जब तुम मनीष को राखी बांध दो फिर चलें."

मैं कुछ कहता उससे पहले ही दीदी बोली "नहीं पापा आप आराम से जाइये. मैं सब कर लूंगी. हर साल तो देखती हूँ की मम्मी क्या क्या करती है."

अगले दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ क्योंकि पापा मम्मी ने छुट्टी ली हुई थी. दोनों लोग पैकिंग वगेरह करने में लगे थे तो मैं भी ऐसे ही घूमने नीलम आंटी की तरफ निकल गया. आज नीलम आंटी घर पर नहीं थी. सिर्फ चारू थी. मैंने चारू का अच्छे से चाछुचोदन किया और दो घंटे बाद घर लौटा.

मम्मी अभी भी हमें अकेले छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी. जब मैं घर पंहुचा तो देखा की मम्मी पापा से कह रही थी "देख लो. मेरा तो मन नहीं मान रहा. अब हम बस से जाते तो कल जाते और एक दिन बाद लौट आते और सक्सेना भाई साब के साथ आज जायेंगे और तीन दिन बाद लौटेंगे."

 
"अरे तो क्या हुआ. अब बच्चे बड़े हो गए हैं. और याद नहीं पिछले साल बस में कितनी दिक्कत हुई थी. एक काम करता हूँ. मैं पड़ोसियों को बोल देता हूँ की वो थोडा ध्यान रखेंगे. ठीक है" पापा ये बोल कर बाहर चले गए और मम्मी पैकिंग में लग गयी.

थोड़ी देर बाद पापा आये और बोले "अरे सुनती हो और भी अच्छा हो गया. उन्होंने कहा है की कल ये दोनों सुबह १० बजे उनके घर चले जाये और वही रक्षाबंधन भी कर ले और दोपहर का खाना भी खा लें. तो तुम दोनों कल सुबह तैयार हो कर उनके घर चले जाना." करीब एक घंटे बाद सक्सेना अंकल आ गए और मम्मी पापा हम दोनों को तमाम सारे इंस्ट्रक्शन देकर मामा के यहाँ चले गए.

उनके जाने के बाद मैंने सोचा की अब तीन दिन घर पर सिर्फ मैं और दीदी ही रहेंगे. उधर दीदी भी यही सोच रही होंगी की अब वो तीन दिन के लिए आजाद पंछी है. हम दोनों खाना खाकर टीवी देखने बैठ गए. करीब रात को ग्यारह बजे मैंने दीदी से कहा की मैं सोने जा रहा हूँ. मैं जैसे ही उठा मैंने देखा की मयंक छत से नीचे आ रहा था. मैंने पुछा "अरे इतनी रात में कैसे?"

"जब तुम्हारे पापा ने बोला की घर पर सिर्फ तुम दोनों हो तो मैंने सोचा आज मैं रात भर रश्मि के साथ रहूँगा. क्यों ठीक किया न" मयंक ने दीदी से पुछा.

"बहुत अच्छा किया." दीदी ने कहा और टीवी बंद करके मयंक को लेकर अपने कमरे में चली गयी. मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. थोड़ी देर तो रश्मि दीदी की हँसने की आवाजे आती रही फिर दीदी की सिस्कारिया शुरू हो गयी जो रुक रुक के 2 घंटे तक चली. करीब ३ घंटे बाद मयंक दीदी के कमरे से निकला और ऊपर चला गया. मैं थोड़ी देर बाद उठा और दीदी के रूम में गया. दीदी पूरी नंगी होकर बेसुध सो रही थी. इतने लोगो से चुदवा कर दीदी का बदन और क़यामत हो गया था. मैंने बड़ी देर तक हसरत से दीदी के नंगे बदन को देखता रहा फिर अपने कमरे में आकर सो गया.

 
अगले दिन मुझे दीदी ने उठाया और कहा "जल्दी से तैयार हो जा. आंटी का फोन आया था. बुलाया है."

मैं उठा तो देखा दीदी पहले से ही नहा कर तैयार है. मैं भी फटाफट तैयार हुआ और हम पड़ोसियों के यहाँ पहुच गये. अंकल अपनी बहन के पास गाँव चले गए थे तो आंटी ने पूजा की. फिर रुची ने मयंक को और दीदी ने मुझे राखी बांधी. अचानक आंटी रुची से बोली अरे तुम मनीष को भी तो राखी बांधो और रश्मि तुम भी मयंक को राखी बांधो. रुची ने तो फ़ौरन मुझे राखी बाँध दी पर दीदी ने टालने के लिए कहा की उन्होंने मेरे लिए सिर्फ एक ही राखी खरीदी थी पर आंटी ने अपने पास से एक राखी दीदी को दे दी. अब दीदी के पास कोई चारा नहीं रहा तो उन्हे मन मार के मयंक को राखी बांधनी पड़ी. उसके बाद रुची रश्मि को लेकर अपने रूम में चली गयी और मैं और मयंक बाहर ओम के पास आ गए.

ओम ने हमे आगे का प्लान बताया. वो बोला "सुनो मयंक, तुम थोड़ी देर में कुछ बहाना बना के फार्म हाउस निकल जाना और मनीष तुम अपने घर चले जाना. रुची रश्मि को साथ लेकर शॉपिंग के लिए निकलेगी और मैं उन दोनों को गाडी से लेकर निकला जाऊँगा. और मनीष तुम शाम को लाला के साथ पहुच जाना करीब 4-5 बजे तक. लाला फार्म हाउस का रास्ता जानता है."

 
मैंने ओम का प्लान ठीक से समझ लिया और वापस घर आ गया और लाला का इंतज़ार करने लगा. अभी ५ बजने में काफी समय था इसीलिए मैं काफी बेसब्र हो रहा था पर करीब ३ बजे मेरे घर की बेल बजी तो मुझे लगा की लाला जल्दी आ गया है. मैंने दरवाजा खोला तो देखा की सामने रुची थी.

"अरे तुम यहाँ? तुम्हे तो रश्मि दीदी के साथ फार्म हाउस जाना था." मैंने रुची से पुछा.

"मम्मी ने KLPD कर दी यार." रुची ने अन्दर आते हुए कहा.

"क्या हुआ? दीदी कहाँ है?" मैंने डरते हुए पुछा. मुझे लगा की प्लान फेल हो गया है.

"यार मयंक तो बहाना बना कर निकल गया की रात को नहीं आयेगा. उसको तो मम्मी ने कुछ कहा नहीं पर जब मैं और रश्मि निकलने लगे तो पूछने लगी की कहाँ जा रहे हो और कितनी देर में आओगे. मैंने बोला की पारलर जा रहे है और शाम को एक दोस्त के यहाँ पार्टी है तो पारलर से वहां चले जायेंगे तो मना कर दिया और बोली की घर में मयंक और पापा दोनों नहीं है तो तुम पारलर से वापस घर आ जाना. पार्टी में जाने की कोई जरूरत नहीं. हुह खुद तो इस उम्र में भी दसियों लंड खाती है और मुझे...." रुची कहते कहते रुक गयी...

मैं समझ गया की इसे पता है की इसकी माँ हम सबसे चुदती है पर मैंने उस तरफ बात ही नहीं की और पुछा "ओह तो फिर रश्मि दीदी?"

"फिर क्या? हम दोनों पारलर गए. रश्मि की वैक्सिंग वगेरह करवा दी, झांटे साफ़ करवा दी और फेसिअल वगेरह करवा के उसको तो भेज दिया ओम के साथ फार्म हाउस और मैं वापस आ गयी. सोचा घर जाने से पहले तेरे साथ एक राउंड खेल लूं. तेरे जाने में तो अभी टाइम है." रुची कपडे उतारते हुए बोली.

"यार मैं तो डर ही गया की मेरे साथ आज फिर klpd न हो जाए. चलो रश्मि दीदी तो पहुच गयी फार्म हाउस. आंटी को शायद अकेले डर लगता हो इसीलिए तुम्हे न जाने दिया हो." मैंने रुची को बाँहों में भरते हुए कहा.

"क्या डर यार. मेरा तो मूड ख़राब कर दिया. और रश्मि का सोच. आज तो भोसड़ा बन जायेगा उसका. वैसे तो हम दो लडकिया होती तो संभाल लेती. अब सोच उसको अकेले ५-६ लौंडो को झेलना पड़ेगा." रुची ने कहा.

"५-६ लौंडे कौन. हम 4 ही तो हैं. मैं लाला ओम और मयंक."

"और सलमान जिसका फार्म हाउस है फिर वो भी कभी कभी अपने एक अफ्रीकन दोस्त को बुला लेता है क्योंकि एक तो वो फ्री में ड्रग्स ले आता है और दूसरा उसके लंड का साइज़. करीब करीब १२ इंच का होगा और लौकी जितना मोटा." रुची अब पूरी नंगी हो गयी थी और उसने नीचे बैठ कर मेरा लंड निकालकर अपने मुह में ले लिया और चूसने लगी.

 
ये सब सुन कर मुझे थोडा झटका तो लगा पर साला कोई नीग्रो मेरी बहन को चोदेगा ये सोच कर लंड भी खड़ा हो गया. जब रुची ने लंड मुह में लेकर चुसना शुरू किया तो मेरे आनंद की सीमा न रही. फिर भी मैंने खुद पर कण्ट्रोल करते हुए पुछा "ओम ने मुझसे तो ये सब नहीं कहा. इतना सब तुम्हे कैसे पता."

"अरे ओम मुझे भी ले गया था उसी फार्म हाउस पर. तब तो केवल ३ लोग ही थे. ओम सलमान और वो हब्शी क्या नाम था उसका हाँ कुछ रुबेन जैसा. पर मेरी तो जान ही निकल गयी थी. तभी तो ओम चाहता था की आज ३ लड़कियां हों. वैसे ओम कह रहा था की हम दोनों के अलावा भी कोई पूजा नाम की रंडी भी बुलाई है पर उसका पक्का नहीं है. वो मिल जाए वरना रश्मि तो मरी आज." रुची फिर से मेरा लंड चूसने लगी.

मुझे रश्मि दीदी की थोड़ी चिंता हुई तो सोचा की फटाफट रुची को चोद कर लाला के पास चलना चाहिए. मैंने रुची को बोला "यार ज्यादा टाइम नहीं है. चलो कुतिया बन जाओ."

"आज कुछ अलग करो न." रुची मचलते हुए बोली.

मैंने मन ही मन रुची को गालिया देते हुए कहा की अच्छा मेरे साथ लेग्क्रोस करके बैठ जाओ और हम एक दूसरे से लंड और चूत को सटाकर बैठ गए. अब मैं कभी रुची के चूचों को मस्लता कभी उन्हें अपने मुँह में भरता. वह कभी मेरे निप्पल को अपनी जीभ से चाँटती कभी गले को चूमते. लंड तो मेरा पहले से ही तन्नाया था और अब रुची भी ऊपर नीचे हो कर मचलने लगी.

मैंने फट से रुची को अपनी जांघो पर लेकर थोड़ा सा उठाया और लंड उसकी चूत में घुसा दिया. लंड चूत में जाते ही उसने अपनी जीभ पूरी मेरे मुंह में घुसा ली और ऊपर नीचे होने लगी. मैं भी उसे अपनी जाँघों से ऊपर नीचे करके इस अनोखी चुदाई का मजे ले रहा था. इस पोज में पहली बार करने के कारण हमको मजा तो काफी आ रहा था पर थोड़ी देर बाद रुची थोड़ी ढीली पड़ने लगी तब मैंने उसे जमीन पर लिटा दिया.

अब मैंने उसकी दोनों टाँगें हवा में दोनों तरफ फैलाई. घुँटनों के बल उसपर झुका और लंड उसकी चूत में घूसा दिया और फटाफट फूल स्पीड में हमारी चुदाई चालू हो गई. मैं रुची के दोनों चूचों को कसकर दबाने और मसलने लगा. और धकाधक चोदने लगा. ये सोचकर की थोड़ी ही देर बाद मैं ऐसे ही अपनी सगी बेहेन को भी पेल रहा होऊंगा मेरा लंड मदमस्त होने लगा. उधर रुची भी काफी गरम थी तो उसकी चूत से भी हल्का पानी गिरने लगा. वो जो अभी तक सिसक रही थी अब चिल्लाने लगी. वो अब जोरों से आह.. आह.. ऊई माँ.. अरे माई रे.. कर रही थी.

मैंने अब उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी. हम दोनों की आँखें अपने आप ही बंद हो गई जैसे नशे में शराबोर हो. मुझे उसे चोदने का इतना मजा पहले कभी नहीं आया था जितना आज आ रहा था. उसी पोज में सेक्स करते हुए हमें काफी देर हो गई. जब मैं थोड़ा धीमा पड़ने लगा तो रुची मेरे ऊपर आ गयी और रगड़ मारते हुए मुझे चोदने लगी. अब हम दोनों को ऐहसास हो गया की हम दोनों ही झड़ने वाले थे. थोड़ी देर बाद ही वह मेरे पेट पर ऊपर नीचे करते हुए झड़ गई पर झड़ने कुछ देर बाद तक वह मुझे चोदती रही, और कुछ सेकेण्ड बाद ही मैं भी उसकी चूत में झड़ गया. कुछ देर तक हम यूँ ही जमीन पर नंगे पड़े रहे फिर मैं जल्दी से खड़ा हुआ और लंड से रुची का रस साफ़ करके कपडे पहनने लगा.

 
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