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Guest
अगले दिन मैं जल्दी ही नहा कर तैयार हो गया था और मम्मी पापा के घर से निकलते ही रश्मि दीदी को बोल कर की एक दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ घर से निकल गया. सोचा तो मैंने था की आंटी को चोदुंगा पर फिर मैंने सोचा की हो सकता है की अंकल अभी ऑफिस के लिए न निकले हो तो पहले चल कर एक बार चारू के दर्शन कर लिए जाए. आंटी कहा भागी जा रही थी. लौट कर चोद लूँगा और मैं नीलम अरोरा के घर पहुच गया. बेल बजाई तो नीलम आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर घबरा गयी और बोली "अरे ओम ने तुम्हे बताया नहीं की चारू आई हुई है."
"नहीं तो. कब आई चारू." मैंने अनजान बनते हुए कहा.
तब तक चारू ने अन्दर से पुछा "कौन है मम्मा." और देखने के लिए खुद भी बाहर आ गयी. "अरे मनीष तू. कैसा है? और रश्मि कैसी है?"
"जी दोनों एकदम बढ़िया. आप तो ठीक है न?" मैंने पुछा.
"देखने पर ठीक नहीं लग रही क्या." चारू ने हँसते हुए पुछा.
शादी के बाद चारू का बदन थोडा गदरा गया था पर एक दम सही जगहों पर. मांस केवल कुल्हो और छातियों पर चढ़ा था. चारू के गदराये बदन को थोडा बारीकी से देख के मैंने कहा "देख कर तो आप एकदम मस्त लग रही हो."
"कैसे आया था?" चारू ने पुछा.
मुझसे पहले ही कामिनी ने जवाब दिया. "वो जब से चेतन गया है ये कभी कभी यूं ही पूछने आ जाता है की कोई काम या जरूरत तो नहीं है. नहीं मनीष बेटा फिलहाल कोई काम नहीं है, जब होगा मैं फ़ोन कर दूँगी."
"ठीक है आंटी" बोल कर मैं वापस आने लगा.
"अरे मम्मा का इतना ध्यान रखता है. गुड. चल अन्दर आ. चाय पिलाती हूँ तुझे." चारू मुझे रोकते हुए बोली.
"अपने दूध की चाय पिलाओ तो आऊं." मैं चारू की चुचियां घूरते हुए बडबडाया.
"अरे मुह में क्या बोल रहा है आ न." चारू ने फिर से कहा.
"नहीं दीदी. कुछ जरूरी काम है. बाद में आऊंगा." मैंने कहा और निकलने लगा.
"ठीक है. रश्मि को लेकर आना." चारू पीछे से बोली.
"नहीं तो. कब आई चारू." मैंने अनजान बनते हुए कहा.
तब तक चारू ने अन्दर से पुछा "कौन है मम्मा." और देखने के लिए खुद भी बाहर आ गयी. "अरे मनीष तू. कैसा है? और रश्मि कैसी है?"
"जी दोनों एकदम बढ़िया. आप तो ठीक है न?" मैंने पुछा.
"देखने पर ठीक नहीं लग रही क्या." चारू ने हँसते हुए पुछा.
शादी के बाद चारू का बदन थोडा गदरा गया था पर एक दम सही जगहों पर. मांस केवल कुल्हो और छातियों पर चढ़ा था. चारू के गदराये बदन को थोडा बारीकी से देख के मैंने कहा "देख कर तो आप एकदम मस्त लग रही हो."
"कैसे आया था?" चारू ने पुछा.
मुझसे पहले ही कामिनी ने जवाब दिया. "वो जब से चेतन गया है ये कभी कभी यूं ही पूछने आ जाता है की कोई काम या जरूरत तो नहीं है. नहीं मनीष बेटा फिलहाल कोई काम नहीं है, जब होगा मैं फ़ोन कर दूँगी."
"ठीक है आंटी" बोल कर मैं वापस आने लगा.
"अरे मम्मा का इतना ध्यान रखता है. गुड. चल अन्दर आ. चाय पिलाती हूँ तुझे." चारू मुझे रोकते हुए बोली.
"अपने दूध की चाय पिलाओ तो आऊं." मैं चारू की चुचियां घूरते हुए बडबडाया.
"अरे मुह में क्या बोल रहा है आ न." चारू ने फिर से कहा.
"नहीं दीदी. कुछ जरूरी काम है. बाद में आऊंगा." मैंने कहा और निकलने लगा.
"ठीक है. रश्मि को लेकर आना." चारू पीछे से बोली.