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नए पड़ोसी complete

राजेश मेरे पास आकर मेरे गले लगा और रेणुका ने भी मुझे गाल पर किस किया. राजेश बोला "ऐसे आंखे फाड़ कर क्या देख रहे हो तुम्हारे घर का माल है."

मैंने कहा "वही तो देख रहा हूँ की पैकिंग तो पूरी बदल गयी."

"सिर्फ पैकिंग ही नही माल अन्दर से भी बहुत बदल गया है. घर पहुच कर देख लेना. दिव्या कहा है." राजेश ने पुछा.

"मैंने आज बैंक से छुट्टी ली है तो वो आज स्कूल चली गयी. चलो घर चलो. रश्मि दीदी वेट कर रही होंगी." मैंने राजेश को बताया.

"वाह क्या खबर सुनाई है दोस्त. रश्मि आई हुई है." राजेश बोला.

"मन नहीं भरा तुम्हारा अभी भी? पूरे एक महीने सुबह से शाम यही तो किया है." रेणुका ने राजेश को ताना मारा पर उसने ध्यान नहीं दिया. हम लोग सामान लेकर घर वापस आ गए. अच्छा हुआ की मोहल्ले में हमे किसी ने नहीं देखा वरना रेणुका की ड्रेस को लेकर हल्ला हो जाता. घर पहुचते ही रेणुका तो नहाने चली गयी. राजेश ने मुझसे पुछा "यार तेरी बहन नहीं दिखाई दे रही."

"अन्दर सो रही होगी. कल पूरी रात जगे थे हम लोग" मैंने राजेश को बताया. राजेश फ़ौरन मेरे बेडरूम में घुस गया. रश्मि दीदी वही सो रही थी. शायद रेणुका और राजेश आने वाले है ये सोच कर उन्होंने अपने इनर वियर पहन लिए थे. राजेश ने आव देखा न ताव सीधे दीदी के चुतर को पकड़ कर मसल दिया.

आःह्ह्ह दीदी एक कराह के साथ जाग गयी. वो राजेश को देख कर चौंक गयी पर राजेश ने उन्हें कुछ बोलने का मौका ही नहीं दिया और उनकी ग्रीन पेंटी को उतारने लगा. मैंने दीदी को इशारा किया तो दीदी ने कमर उठा कर उसकी मदद कर दी. पेंटी उतार कर राजेश ने सीधा दीदी की चूत पर अपनी जबान से हमला किया और जोर जोर से दीदी की चूत चाटने लगा.
 
तभी रेणुका ने मुझे बाथरूम से आवाज दी और अपने कपडे मांगे. मैंने जल्दी में एक शोर्ट नाईटी उठाई और जाकर बाथरूम में रेणुका को दे आया. रेणुका पूरा नंगी होकर शावर ले रही थी. उसका गीला बदन क़यामत लग रहा था. मेरा मन हुआ की उसे वही शावर में चोद दूं पर फिर मैंने सोचा की ये तो घर का माल ही है जरा पहले राजेश और रश्मि की चुदाई का मजा लिया जाए. तो मैं रेणुका को नाईटी देकर जल्दी से वापस आ गया और वही बैठ कर उन दोनों को देखने लगा.
 
अब तक राजेश अपने और दीदी के बाकी कपडे भी उतार दिए. राजेश बेड पर लेट गया और उसने रश्मि दीदी को अपने ऊपर खींच लिया और उनको अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर दीदी के होंठ चूसने शुरु कर दिये. दीदी की छाती राजेश के सीने पे दबी हुई थी. राजेश अब रश्मि दीदी को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और दीदी अब उसके नीचे हो गई. दीदी राजेश के चुम्मे का जवाब देने में लगी थी. राजेश दीदी के लिए तो बिलकुल अजनबी जैसा था. दोनों शकल से एक दुसरे को जानते थे पर आज से पहले दोनों ने कभी एक लफ्ज बात भी नहीं की थी. कोई हाय हेल्लो भी नहीं था. वही राजेश सीधा आकर दीदी के बदन से खेलने लगा यही सोच कर दीदी बहुत उत्तेजित हो गयी थी.

राजेश 2-3 मिनट के बाद हटा और फ़िर दीदी की दाहिनी चूची को चूसने लगा. वह अपने एक हाथ से उनकी बाँई चूची को हल्के से मसल भी रहा था. रश्मि दीदी की आँखें बन्द थी और उनकी साँस गहरी हो रही थी. जल्द ही दीदी अपने पैर को हल्के हल्के हिलाने, आपस में रगड़ने लगी, उनकी चूत गीली होने लगी. जैसे ही दीदी ने एक सिसकारी भरी राजेश उनके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे दीदी के पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया. मैं अब रश्मि दीदी के सर की तरफ़ से हट कर उनके पैरों की तरफ़ हो गया. राजेश ने दीदी को बेड पर नंगा पड़े रहने दिया और फिर से उनकी टांगो की तरफ बढ़ा.

राजेश अब उनकी चूत पर झुका. होठों के बीच उनकी क्लिट को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उनकी जाँघ खोल दी. दीदी की चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी. राजेश ने दुबारा चूत पे हमला किया और अपने स्टाईल में फिर से चूत चूसने लगा और रश्मि दीदी के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह की आवाजे आने लगी.

राजेश चूसता रहा और रश्मि चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है. जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई. राजेश बोला "मेरी जान अब जरा मेरा लंड भी चूस दो. तुम्हारा भाई बहुत तारीफ करता है तुम्हारी चुसाईं की."

रश्मि शान्त पड़ी रही पर राजेश उनके बदन को हलके हलके सहला कर उन्हें फिर से गरम करने लगा और फ़िर उनको लण्ड चूसने को कहने लगा. दीदी बहुत प्यारी अदा के साथ उठी और फ़िर राजेश के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया. वो अब खूब मजे लेने के मूड में आ गयी थी. कभी हाथ से वो मुठ मारती, कभी चूसती और जल्द ही राजेश का लण्ड फ़ुफ़कारने लगा, फ़िर झड़ने भी लगा. राजेश तुरंत उठा और सारा माल रश्मि की चूची पर निकाल दिया.

 
झड़ने के बाद भी राजेश का लण्ड हल्का सा ही ढीला हुआ था. उसने फिर से रश्मि दीदी को कहा "जानेमन अब इसको चूस कर फ़िर से तैयार कर. चल आ जा अब, देर ना कर". दीदी ने फ़ौरन राजेश का लंड मुह में ले लिया और चूसने लगी. कुछ ही देर में लंड फिर से कुतुबमीनार बन गया.

राजेश मेरी तरफ़ देख बोला "यार सच में तेरी बहन के आगे तेरी और मेरी दोनों की बीविया फेल है. क्या कड़क माल है तू एक काम कर यहाँ पालथी मार कर बैठ जा." मैं बेड पर पालथी मार कर बैठ गया तो राजेश ने दीदी को बाँहों में उठा कर मेरी गोद में लिटा दिया और फ़िर उनकी टाँगों को पेट की तरफ़ मोड़ दिया. राजेश खुद अपने फ़नफ़नाए लण्ड के साथ बिल्कुल उनकी खुली हुई बुर के पास घुटने पर बैठ गया. राजेश का लंड हल्के हल्के से अब दीदी की बुर के मुहाने पे दस्तक देने लगा था. रश्मि दीदी अपनी आँख बन्द करके अपने बुर के भीतर घुसने वाले लण्ड का इन्तजार कर रही थी.

राजेश ने अपने लण्ड को अपने बाँए हाथ से उनकी बुर पर टिकाया और फ़िर उसको धीरे धीरे भीतर पेलने लगा. दीदी के मुँह से सिसकारी निकल गई और जब लण्ड आधा भीतर घुस गया, तब राजेश ने अपने वजन को बैंलेन्स करके एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड भीतर पेल दिया.

रश्मि हल्के से चीखी "उई ई ईईई ईईईए स्स्स्स्स् स माँ आआआह" और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया. मैंने भी दीदी की चून्चिया मसलना शुरू कर दिया. उधर राजेश दीदी को मेरी गोद में ताबड़तोड़ चोद रहा था और जल्द ही दीदी भी अपनी बुर को राजेश के लण्ड के साथ ताल मिला कर में हिला हिला कर मस्त आवाज निकाल निकाल कर चुद रही थी.

दीदी बोले जा रही थी "आह चोदो, वाह, मजा आ रहा है, और चोदो, जोर से चोदो, लूटो मजा मेरी बुर का, मेरी चूत का, बहुत मजा आ रहा है, खूब चोदो! खूब चोदो"

फ़िर जब राजेश ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई, तो दीदी के मुँह से गालियाँ भी निकलने लगी "आआह मादरचोद! ऊऊ ऊ ऊओह बहनचोद! साले चोद जोर से चोदो रे साले मादरचोद"

राजेश भी मस्त हो रहा था, यह सब सुन सुन कर मस्ती में चोदे जा रहा था और रश्मि की गाली का जवाब गाली से दे रहा था "ले चुद साली, बहुत फ़ड़क रही थी, देख आज कैसे बुर फ़ाड़ता हूँ। साली कुतिया, आज लण्ड से तेरी बच्चादानी हिला के चोद दूँगा. साली तेरे भोसड़े से बेटी पैदा करके उसको भी तेरे सामने चोदूँगा इसी लण्ड से"

दोनों एक दूसरे को खूब गन्दी गन्दी गाली दे रहे थे और चुदाई चालू थी. मैं समझ गया की राजेश रेणुका को भी ऐसे ही गाली देकर चोदता होगा.

थोड़ी देर बाद राजेश ने लण्ड बाहर निकाल लिया. तब रश्मि ने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई. वो अब ऊपर से उसके लण्ड पर कुद रही थी और मैं उसके सामने होकर देख रहा था कि कैसे लण्ड को उनकी बुर लील रही थी.

 
4-5 मिनट बाद राजेश फ़िर उठने लगा और फ़िर रश्मि को पलट कर उसको घुटनों और हाथों पर कर दिया फ़िर पीछे से उनकी बुर में पेल दिया, बोला "अब बन गई ना रश्मि तू कुतिया. साली चुद और चुद साली. अपने पति को बेवकूफ़ बना और यहाँ लण्ड खा गपागप गपागप गपागप. मादरचोद. भाई से चुदती है, अब मुझसे भी चुद. चुद साली रन्डी."

और दीदी भी कहने लगी "हाँ हाँ साले बहनचोद मैं तुम लोगों की रन्डी हूँ. अब चोदो मुझे."

राजेश अब एक बार फ़िर लण्ड बाहर निकाल लिया और फ़िर दीदी को मेरी गोद में सीधा लिटा दिया. ऊपर से एक बार फ़िर चुदाई शुरु कर दी. अब तक रेणुका भी नहा कर निकल आई थी. वो दरवाजे पर आकर देखने लगी की कैसे उसका नया यार राजेश उसकी ननद को उसके पति की गोद में लिटा कर चोद रहा था. मैं भी बीच बीच में दीदी के होठ चूस लेता और चूंची दबा लेता.

राजेश पहले एक बार झड चूका था तो वो जल्दी नहीं झडा हां दीदी २ बार झड चुकी थी. काफी देर की धुआधार चुदाई के बाद रश्मि दीदी एक बार फ़िर काँपने लगी, वो फ़िर एक बार झर रही थी. तभी राजेश भी झरा. उसने दीदी की चूत अपने वीर्य से लबालब भर दी और निढाल होकर लेट गया. मैंने भी दीदी को गोद से लुढका कर राजेश के बगल में लिटा दिया और बोला

"दीदी ये हमारे पडोसी राजेश छाबडा है. जब चुदवा लिया है तो परिचय तो कर लो."

दीदी धीरे से उठी और राजेश को हलके से चूम कर फिर से लेट गयी. दीदी और राजेश दोनों निढ़ाल हो कर अब एक दम शान्त एक दूसरे के बगल में लेट गये. करीब 5 मिनट तक वैसे ही रहने के बाद रश्मि दीदी उठी और अपने कपड़े ले कर बाथरुम में चली गयी... राजेश भी अब अपने कपड़े पहन कर जाने लगा और बोला "यार बहुत मस्त माल है तेरी बहन. शेयर करने के लिए थैंक्स. चलो मैं भी घर जाकर थोडा आराम करता हूँ. शाम को मिलते है."

मेरा लण्ड दीदी की भीषण चुदाई देख कर विकराल रूप ले चूका था. तो मेरा ध्यान मेरी बीवी रेणुका पर गया जो नहा कर शोर्ट नाईटी में बाहर आ गयी थी और उसके गीले बदन पर नाईटी चिपक गयी थी. रेणुका एक सेक्स की देवी लग रही थी.

 
पता नहीं क्यों जब से रेणुका राजेश से चुदी थी वो मुझे बहुत सेक्सी लगने लगी थी शायद मेरी बीवी को कोई और भी चोदना चाहता है ये बात मुझे और उत्तेजित करती थी और मेरा प्यार जो मेरी बीवी के लिए कम हो रहा था वो अब फिर से बढ़ गया था. मैंने तुरंत रेणुका को पकड़ कर बिस्तर पर खीच लिया. रेणुका भी दीदी और राजेश की चुदाई देख कर काफी काफी गरम हो चुकी थी. रेणुका ने फ़ौरन मेरा लंड अपने मुह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मुझे बहुत अच्छा लगा की मेरी बीवी जो पहले खुल कर चुदाई भी नही करवाती थी आज बिना बोले मेरा लंड चूस रही है. मैंने कहा "राजेश ने लंड चूसना तो अच्छा सिखा दिया तुम्हे."

रेणुका मुस्कुरा दी फिर मैंने उसकी नाईटी उतार दी, उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था तो अब वो भी पूरी नंगी हो गयी और फिर से मेरा लंड चूसने लगी. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने रेणुका को कुतिया बनने के लिए कहा. मैंने देखा की राजेश का लंड ले ले कर रेणुका की चूत एक कचोरी की तरह फूल गयी है. मैंने फ़ौरन उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और जोर जोर से उसे चोदने लगा.

मैं तेज़ी से रेणुका की चूत में लंड अन्दर बाहर कर रहा था और रेणुका की चिकनी गांड पर अपना हाथ फेर रहा था. रेणुका आज चुदते हुए बहुत सेक्सी आवाजे निकाल रही थी. कुल मिला कर राजेश से अपनी बीवी चुदवा कर मैं काफी खुश था. वो वाकई एक बदली हुई औरत की तरह मुझसे चुद रही थी. थोड़ी देर तक डौगी पोजीशन में रेणुका को चोदने के बाद रेणुका ने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरे लंड को अपनी बुर में लेकर कूदने लगी. रेणुका पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी और हम दोनों का चुदाई का घमासान युद्ध शुरु हो चुका था. दोनों तरफ से चुदाई की बराबर गोलाबारी हो रही थी. मैं उसके चूतड़ों को पकड़ कर मसल रहा था और नीचे से कमर उठा-उठा कर उसको चोदे जा रहा था और उसके भी कहने ही क्या हैं… मेरे लंड पर चूत को ऐसे पटक कर मार रही थी जैसे एक महीने की कमी आज ही पूरी करेगी. तभी रश्मि दीदी ब्रा पेंटी पहन कर बाथरूम से निकल आई पर रेणुका पर कोई असर नहीं हुआ वो वैसे ही मेरे लंड पर उछलती रही. मुझे अच्छा लगा की राजेश ने वाकई मेरी बीवी को बेशर्म बना दिया था. दीदी हमको देख कर हँसते हुए किचन में चली गयी शायद उनको भूख लग रही थी.

मैंने रेणुका की कमर में बाँहे डाल दी और उसे बुरी तरह ऊपर नीचे करने लगा. पूरे कमरे में उसकी कामुक आवाज गूंज रही थी जो कि मेरे जोश को और बढ़ावा दे रही थी. उसके चूतड़ पटकने पर फच-फच की आवाज आ रही थी. मुझे लगा की मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने उसे थोडा रोका और फिर उसे नीचे लिटा कर उसके ऊपर आ गया और उसे चूमने लगा, साथ ही मैं रेणुका की गदराई चूचियाँ हाथों में ले मसलने लगा.

रेणुका बोली "आराम से दबाओ यार, उफ्फ्फफ्फ्फ़ उखाड़ोगे क्या?"

मैंने कहा "जानेमन इतने दिन तक तो राजेश ने इन्हें चूसा होगा. आज मुझे भी तो इनका रस पिलाओ."

मैं इतना कह कर अपनी बीवी की चूचियों का रसपान करने लगा और वो भी मेरी गर्दन पर चूमने लगी. हम दोनों पर ऐसा नशा छाया हुआ था जैसे कि कई पैग लगा रखे हों.

 
मैंने अब थोड़ा नीचे सरकना शुरु किया और उसके जिस्म को काटने लगा. वो तो पागलों की तरह आहें भर रही थी. जैसे ही मैंने उसकी चूत पर चूमा वो तो जोर-जोर से सीई… ईईई… सीईईईई… की आवाजें करने लगी. मैं उसकी चूत उंगलियों से खोल कर अंदर तक चाटने लगा. उसे इतना मजा आ रहा था कि उसने अपनी पूरी टाँगें खोल कर मेरे सर पर हाथ रखा और मेरा मुँह अपनी चूत पर जोर से दबा दिया. मैं भी उसकी चूत को खा जाने पर तुला हुआ था. वो बुरी तरह आहें भर रही थी और पिछाड़ी उठा-उठा कर चूत चटवा रही थी.

थोड़ी देर बाद रेणुका बोली "जान अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा, अब वापस अपना लंड मेरी फुद्दी डाल कर मुझे चोदो और मेरी प्यास बुझा दो"

मेरी बीवी के मुह से ऐसे शब्द सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया और मैंने उसके चूतड़ों के नीचे तकिया रखा और उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख ली और कमर पकड़ कर एक जोर का शॉट लगा कर लंड उसकी चूत में पेल दिया. मेरा लंड भी दीदी और दिव्या की चुदाई कर कर के मोटा हो गया था तो रेणुका को भी ज्यादा मजा आ रहा था. मैंने उसको चोदने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई, बिल्कुल आराम-आराम से लौड़े को अंदर बाहर कर रहा था. वो भी अब तो कमर उठा कर झटके मारने लगी. मेरे साथ ही ताल में ताल मिला रही थी, दोनों एक-दूसरे को ऐसे कस कर पकड़ के चोद रहे थे जैसे फिर कभी मौका ही नहीं मिलेगा. इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि मैं शब्दो में भी बयान नहीं कर सकता। हम दोनों में जैसे कोई होड़ लगी हो कि कौन ज्यादा झटके लगाएगा.

काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा और अब वो घड़ी आ गई थी जब एक-दूसरे का रस भी आपस में मिल कर एक हो जाने को तैयार थे. उसने मेरे कूल्हों को पकड़ लिया था और मैं जैसे ही झटका लगाता, वो मेरे कूल्हे पकड़ कर अपनी ओर खींच रही थी. उसकी इस हरकत ने तो मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया. इसी तरह हम दोनों ने काफी देर चुदाई की और फिर और रेणुका तेज़-तेज़ झटके लगाने लगी. मैं समझ गया कि उसका निकलने वाला है, मैंने भी उसके कूल्हों को पकड़ के ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा. रेणुका एक तेज़ आवाज के साथ झड गयी और मैं भी साथ ही रेणुका की चूत में ही झड गया. मैं उसके ऊपर ही लेट गया. हम दोनों की साँसें इतनी तेज़ तेज़ चल रही थीं जैसे कि कोई एक्सप्रेस ट्रेन.

कुछ देर तक माहौल बिल्कुल शांत रहा, जैसे वहाँ कोई हो ही ना. वो मदहोशी का आलम ही कुछ और था, मैं उसके ऊपर बेसुध सा पड़ा था और वो भी मुझे बाँहों में कसे हुए ऐसे लेटी थी जैसे उसके अंदर भी प्राण ना हों. तभी दीदी कमरे में आई और बोली चलो भाई मैंने कुछ नाश्ता बनाया है. चलकर खा लो. फिर हम दोनों उठे और रेणुका कपडे पहनने लगी.

मैंने उसे मना किया और बोला "जब दीदी सिर्फ ब्रा पेंटी में है तो तुम क्यों पूरे कपडे पहन रही हो. सिर्फ अंडर वियर ही पहनो."

फिर रेणुका ने भी एक पिंक कलर की ब्रा और पेंटी पहन ली और मैं भी सिर्फ अंडर वियर पहन कर बाहर आ गया और फिर हम नाश्ता करने लगे. नाश्ता करने के बाद रेणुका ने अपने बैग खोले और हमको अपनी शौपिंग दिखाने लगी. मैंने देखा की रेणुका ने काफी सारा पैसा शौपिंग में खर्च किया है तो मैंने उससे पुछा "ये शौपिंग के पैसे क्या तुमको राजेश ने दिए है. मुझे बताओ मैं उसको वापस कर दूंगा."

 
तो रेणुका बोली "उसकी कोई जरूरत नहीं है. दरअसल बैंकाक में राजेश के ६ क्लाइंट्स ने मुझे चोदा तो ये शौपिंग मैंने उनसे पैसे लेकर की है."

"क्या? वो क्या इसीलिए तुमको बैंकाक ले गया था." मैंने गुस्से से पुछा.

"अरे नहीं. वो क्या है की जब वो दिव्या के साथ जाता है तो उसके वहां के क्लाइंट दिव्या को चोदते है पर इस बार दिव्या तो थी नहीं तो उसने मुझसे कहा की तुम ही चुदवा लो तो मैंने हाँ तो कर दी पर साफ़ कह दिया की मेरी चूत कोई मुफ्त का चन्दन नहीं है इसीलिए हर चुदाई के मैंने पैसे ले लिए." रेणुका बोली.

"अरे पर तुम कोई रंडी हो क्या." मैंने कहा.

"अरे अब रहने भी दो. दकियानूसी बातें मत किया करो. उसने पैसे लेकर बिलकुल ठीक किया. तुम्हारा मन हुआ तो तुमने उसे राजेश से चुदवा दिया और वो अपने मन से राजेश के क्लाइंट्स से नहीं चुदवा सकती." दीदी ने भी रेणुका का साथ दिया तो मैं चुप हो गया और बात सही भी थी. वैसे भी मुझे इस बात की काफी ख़ुशी थी की रेणुका अब खुल कर चुदे चुद्वायेगी. शाम को राजेश दिव्या के साथ फिर से घर पर आ गया और डिनर के बाद दिव्या को मेरे यहाँ छोड़ कर दीदी को अपने घर ले गया. दिव्या तो अगले दिन सुबह अपने घर चली गयी लेकिन दीदी वापस मेरे घर तभी आई जब उनका वापस जाने का दिन था. मैंने ट्रेन में बिठा कर दीदी से कहा "ये गलत बात है की आप इतने दिन के लिए राजेश के घर चली गयी."

दीदी बोली "अब राजेश ने मुझे छोड़ा ही नही तो मैं क्या करू. देख इतने दिन तो वो अपने ऑफिस भी नही गया बस या तो सोता था या मुझे चोदता था पर तू चिंता मत कर. तेरे जीजा जी अगले महीने एक साल के लिए अमरीका जाने वाले है. मैंने उनके मम्मी पापा की देख भाल का बहाना बना कर पहले ही उनके साथ जाने से मना कर दिया है पर मैं इस एक साल में ज्यादातर तेरे पास आ कर ही रहूंगी और हम सब मिल कर मस्ती करेंगे. समझा."

दीदी को छोड़ कर मैं बैंक चला गया और शाम को जब वापस आया तो मैंने देखा की दिव्या टीवी देख रही थी. उसने नियम के हिसाब से सिर्फ ब्रा पेंटी ही पहना था. मैंने उससे पुछा "अरे अकेले क्यों बैठी हो. रेणुका कहाँ है?"

दिव्या ने कहा "राजेश अभी अभी उसको बेड रूम में ले गए है."

 
मैंने बेडरूम में जाकर देखा तो राजेश और रेणुका पूरे नंगे एक दुसरे से लिपट कर चूमा चाटी कर रहे थे. मैंने भी फ़ौरन अपने कपडे उतारे और बाहर आकर दिव्या को अपनी गोद में उठाया और अन्दर ले जाकर रेणुका के साथ बेड पर लिटा दिया और उसकी पेंटी उतार दी.

रेणुका ने अपनी जांघें राजेश के सामने ऐसे फ़ैलाईं हुई थी जैसे रंडी अपनी चूत को ग्राहक के आगे फैलाती है. राजेश उसकी रसीली चूत को चूसने लगा तो वो अजीब सी सिसकारियाँ लेने लगी. मैं भी राजेश की देखा देखि दिव्या की चूत चूसने लगा. अब एक ही बिस्तर पर एक दुसरे की बीवियों को लिटा कर उनकी चूत का रसपान करने लगे.

दोनों औरतें गरम हो गयी थी और दोनों की चूतों ने पानी छोड़ना चालू कर दिया और हम करीब 20 मिनट तक चूसते ही रहे. इस चुसाई से दोनों झड गयी फिर दोनों ने हमारे लंड चूसना चालू किया तो हमारे लंड और तन कर खड़े हो गए.

हमने दोनों को वापस लिटा दिया और हम उनके ऊपर आकर उनके होंठ चूसने लगे फिर धीरे-धीरे उनकी चूचियों को चूसने लगे. अब रेणुका और दिव्या बहुत तड़प रही थीं तो राजेश ने मेरी बीवी की चूत पर लंड रखा और धक्का मारा तो रेणुका के मुह से सिसकारी निकल गयी. मैंने उसकी चूत की तरफ देखा की राजेश के लौड़े का सुपारा ही चूत में अन्दर गया था तो फिर राजेश ने एक और धक्का मारकर पूरा लंड मेरी बीवी की चूत के अन्दर कर दिया तो मस्ती में रेणुका की आँखे बंद हो गयी.

इधर मैं अपना लंड दिव्या की चूत में डालने लगा और धीरे-धीरे पूरा लौड़ा उसके अन्दर डाल दिया. फिर हमने धक्के लगाने चालू किए और हम एक-दूसरे की बीवियों को बहुत जोरों से चोदने लगे.

रेणुका किसी बाजारू औरत की तरह जोर जोर से चिल्लाने लगी "ऊ..आअहह और ज़ोर से करो.. निकाल दो.. मेरी चूत का रस.. पी लो इसको जानेमन.... दे दो मुझे अपना पूरा लंड.. और लूट लो मेरी जवानी…’

दिव्या उतना शोर नहीं कर रही थी. थोड़ी देर में दोनों एक साथ झड गयी और हमसे लिपट गईं लेकिन हमने उन्हें चोदना नहीं छोड़ा. हम बदस्तूर चुदाई में लगे रहे और कुछ देर बाद हम दोनों उनकी चूत अपने वीर्य से भर दी. फिर उन्हीं के ऊपर ढेर हो गए और ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने लगे.

 
फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा तो राजेश ने मुझसे कहा "यार मनीष पता है.. मेरी बीवी को गाण्ड मरवाने का बहुत शौक है जब तक एक बार उसकी गांड न मारी जाये उसको नींद नहीं आती."

तो मैंने कहा "ये सब आपके साथ रहने का नतीजा है. पहले मेरी बीवी गांड में लंड तो क्या ऊँगली भी नहीं लेती थी पर जब से आपके साथ घूम कर आई है तो किसी छिनाल की तरह गाण्ड में लौड़ा डलवा लेती है"

तो इसी बात पर एक राउंड पीछे भी हो जाए. राजेश बोला और हमने अपनी बीवियों को पलट कर कुतिया बना दिया और उनकी गाण्ड चाटने लगे. वो दोनों गरम फिर से हो गईं. फिर हम शुरू हो गए.. राजेश ने मेरी बीवी रेणुका की गाण्ड पर लंड टिका कर एक जोरदार धक्का मारा तो रेणुका चिल्ला पड़ी और बोली- ओए.. धीरे-धीरे डाल. फिर राजेश ने पूरा लंड रेणुका की गाण्ड में डाल दिया और चोदने लगा.

इधर मैंने भी दिव्या की गाण्ड मारना चालू कर दी और दोनों फिर से चुदाई करने लगे. हम चारों पसीना-पसीना हो रहे थे और इन दोनों छिनालों के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं.

मेरी बीवी चिल्ला रही थी "अरे मेरे प्यारे राजेश काश.. मैं अपनी सुहागरात तुम दोनों से एक साथ चुदवा कर मनाती.. तो मेरे लिए वो यादगार बन जाती"

तो राजेश ने कहा "अरे मेरी रानी.. अब तो मैं यहीं हूँ और रोज तेरी सुहागरात तेरे ही बिस्तर पर तुझे चोद कर मनाया करूँगा"

मैंने भी उसकी बीवी से कहा "जब राजेश मेरे घर में सोएगा तो मैं तुम्हारे घर में तुझे रात भर चोदूँगा"

ऐसे ही हम दोनों चरम सीमा पर पहुँचने लगे और हमने एक साथ अपना रस उन दोनों की गांड में डाल कर उनकी पीठ से लिपट गए और वहीं बिस्तर पर लेट गए.

थोड़ी देर हम ऐसे ही लेते रहे तब राजेश मुझसे बोला " यार मनीष मैं सोच रहा हूँ की जब रश्मि यहाँ रहने आएगी तो मैं उसको लेकर १०-१५ दिनों के लिए गोवा हो आऊं."

मैं

 
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