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"बनूँगी........,जब भी बोलेगा बनुन्गी........हाए जब तेरा दिल करे चोद लेना अपनी कुतिया को" रेखा बोली।
"हाए सच कहता हूँ तेरे मम्मे तो बस कमाल के हैं......इतने बड़े बड़े हैं.........मगर फिर भी कितने नुकीले हैं, कितने सख़्त हैं" विजय बोला।
"हाए अगर कोई ढंग से मसलता तभी ढीले पड़ते ना......." रेखा उसके लंड पर उपर नीचे होते चुदवाते बोली.
"हाए मैं हूँ ना माँ... देखना कैसे कस कस कर मसलूंगा......." विजय बोला।
"तब तो यह और भी बड़े हो जाएँगे बेटे..........उफफफफफफ्फ़...........तुझे क्या सिर्फ़ मेरे मम्मे ही अच्छे लगता हैं........मेरी चूत कैसी लगती है हाए बता ना.....कैसी लगी है तुझे अपनी माँ की चूत" रेखा ने सिसकते हुए पूछा. लगता था उस पर फिर से वासना की खुमारी चढ़ गयी थी.
"हाए माँ ......तेरी चूत की क्या कहूँ........इतनी चुदने के बाद भी देख कैसे मेरे लंड को कस रही है, कितनी टाइट है.उपर से इसके मोटे मोटे होंठ. माँ तेरी गुलाबी चूत की तो मैं जितनी भी तारीफ करूँ कम है" विजय बोला उसे लगा माँ को अपनी तारीफ खूब भाई थी. वो थोड़ा स्पीड बढ़ा रही थी और स्पीड बढ़ने से उसके मम्मे भी पूरे जंप मार रहे थे, हाए बड़ा दिलकश नज़ारा था.
"और ....और भी बोल ना......रुक क्यों गया....,बोल मेरे लाल ...अपनी कुतिया में क्या क्या अच्छा लगता है तेरे को...." रेखा बोली।
"हाए माँ तेरी गान्ड भी......तेरी गान्ड भी बहुत प्यारी है साली.......सच में कितनी प्यारी है.....दोपहर को तो मेरा दिल कर रहा था कि तेरी चूत से निकाल अपना लौडा तेरी गान्ड मे पेल दूं" विजय बोला।
"नही नही बाबा.....मैं नही कह सकती. इतना मोटा लंड ......उफफफ्फ़ मेरी गान्ड तो फट जाएगी" विजय को मालूम था उसकी माँ उपर उपर से बोल रही थी. उसने विजय के घुटनो से हाथ उठाकर उसकी छाती पर रख दिए और गान्ड घुमा घुमा कर विजय का लंड चूत में पीसने लगी.
"अरे माँ सच में बड़ा मज़ा आएगा........हाए तुझे घोड़ी बनाकर तेरी संकरी सी गान्ड में लंड घुसाने में बड़ा मज़ा आएगा.........."विजय बोला।
"तुझे तो मज़ा आएगा.............मेरा क्या होगा यह भी सोचा है........मेरी तो फट ही जाएगी......मैं बर्दाशत नही कर पाउन्गी" रेखा बोली।
विजय ने अपनी माँ के निप्पल चुटकियों में लेकर फिर से मसलने सुरू कर दिए.
"हाए सच कहता हूँ तेरे मम्मे तो बस कमाल के हैं......इतने बड़े बड़े हैं.........मगर फिर भी कितने नुकीले हैं, कितने सख़्त हैं" विजय बोला।
"हाए अगर कोई ढंग से मसलता तभी ढीले पड़ते ना......." रेखा उसके लंड पर उपर नीचे होते चुदवाते बोली.
"हाए मैं हूँ ना माँ... देखना कैसे कस कस कर मसलूंगा......." विजय बोला।
"तब तो यह और भी बड़े हो जाएँगे बेटे..........उफफफफफफ्फ़...........तुझे क्या सिर्फ़ मेरे मम्मे ही अच्छे लगता हैं........मेरी चूत कैसी लगती है हाए बता ना.....कैसी लगी है तुझे अपनी माँ की चूत" रेखा ने सिसकते हुए पूछा. लगता था उस पर फिर से वासना की खुमारी चढ़ गयी थी.
"हाए माँ ......तेरी चूत की क्या कहूँ........इतनी चुदने के बाद भी देख कैसे मेरे लंड को कस रही है, कितनी टाइट है.उपर से इसके मोटे मोटे होंठ. माँ तेरी गुलाबी चूत की तो मैं जितनी भी तारीफ करूँ कम है" विजय बोला उसे लगा माँ को अपनी तारीफ खूब भाई थी. वो थोड़ा स्पीड बढ़ा रही थी और स्पीड बढ़ने से उसके मम्मे भी पूरे जंप मार रहे थे, हाए बड़ा दिलकश नज़ारा था.
"और ....और भी बोल ना......रुक क्यों गया....,बोल मेरे लाल ...अपनी कुतिया में क्या क्या अच्छा लगता है तेरे को...." रेखा बोली।
"हाए माँ तेरी गान्ड भी......तेरी गान्ड भी बहुत प्यारी है साली.......सच में कितनी प्यारी है.....दोपहर को तो मेरा दिल कर रहा था कि तेरी चूत से निकाल अपना लौडा तेरी गान्ड मे पेल दूं" विजय बोला।
"नही नही बाबा.....मैं नही कह सकती. इतना मोटा लंड ......उफफफ्फ़ मेरी गान्ड तो फट जाएगी" विजय को मालूम था उसकी माँ उपर उपर से बोल रही थी. उसने विजय के घुटनो से हाथ उठाकर उसकी छाती पर रख दिए और गान्ड घुमा घुमा कर विजय का लंड चूत में पीसने लगी.
"अरे माँ सच में बड़ा मज़ा आएगा........हाए तुझे घोड़ी बनाकर तेरी संकरी सी गान्ड में लंड घुसाने में बड़ा मज़ा आएगा.........."विजय बोला।
"तुझे तो मज़ा आएगा.............मेरा क्या होगा यह भी सोचा है........मेरी तो फट ही जाएगी......मैं बर्दाशत नही कर पाउन्गी" रेखा बोली।
विजय ने अपनी माँ के निप्पल चुटकियों में लेकर फिर से मसलने सुरू कर दिए.