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परिवार(दि फैमिली) complete

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"बनूँगी........,जब भी बोलेगा बनुन्गी........हाए जब तेरा दिल करे चोद लेना अपनी कुतिया को" रेखा बोली।

"हाए सच कहता हूँ तेरे मम्मे तो बस कमाल के हैं......इतने बड़े बड़े हैं.........मगर फिर भी कितने नुकीले हैं, कितने सख़्त हैं" विजय बोला।

"हाए अगर कोई ढंग से मसलता तभी ढीले पड़ते ना......." रेखा उसके लंड पर उपर नीचे होते चुदवाते बोली.

"हाए मैं हूँ ना माँ... देखना कैसे कस कस कर मसलूंगा......." विजय बोला।

"तब तो यह और भी बड़े हो जाएँगे बेटे..........उफफफफफफ्फ़...........तुझे क्या सिर्फ़ मेरे मम्मे ही अच्छे लगता हैं........मेरी चूत कैसी लगती है हाए बता ना.....कैसी लगी है तुझे अपनी माँ की चूत" रेखा ने सिसकते हुए पूछा. लगता था उस पर फिर से वासना की खुमारी चढ़ गयी थी.

"हाए माँ ......तेरी चूत की क्या कहूँ........इतनी चुदने के बाद भी देख कैसे मेरे लंड को कस रही है, कितनी टाइट है.उपर से इसके मोटे मोटे होंठ. माँ तेरी गुलाबी चूत की तो मैं जितनी भी तारीफ करूँ कम है" विजय बोला उसे लगा माँ को अपनी तारीफ खूब भाई थी. वो थोड़ा स्पीड बढ़ा रही थी और स्पीड बढ़ने से उसके मम्मे भी पूरे जंप मार रहे थे, हाए बड़ा दिलकश नज़ारा था.

"और ....और भी बोल ना......रुक क्यों गया....,बोल मेरे लाल ...अपनी कुतिया में क्या क्या अच्छा लगता है तेरे को...." रेखा बोली।

"हाए माँ तेरी गान्ड भी......तेरी गान्ड भी बहुत प्यारी है साली.......सच में कितनी प्यारी है.....दोपहर को तो मेरा दिल कर रहा था कि तेरी चूत से निकाल अपना लौडा तेरी गान्ड मे पेल दूं" विजय बोला।

"नही नही बाबा.....मैं नही कह सकती. इतना मोटा लंड ......उफफफ्फ़ मेरी गान्ड तो फट जाएगी" विजय को मालूम था उसकी माँ उपर उपर से बोल रही थी. उसने विजय के घुटनो से हाथ उठाकर उसकी छाती पर रख दिए और गान्ड घुमा घुमा कर विजय का लंड चूत में पीसने लगी.

"अरे माँ सच में बड़ा मज़ा आएगा........हाए तुझे घोड़ी बनाकर तेरी संकरी सी गान्ड में लंड घुसाने में बड़ा मज़ा आएगा.........."विजय बोला।

"तुझे तो मज़ा आएगा.............मेरा क्या होगा यह भी सोचा है........मेरी तो फट ही जाएगी......मैं बर्दाशत नही कर पाउन्गी" रेखा बोली।

विजय ने अपनी माँ के निप्पल चुटकियों में लेकर फिर से मसलने सुरू कर दिए.
 
"क्यों पिताजी भी तो मारते होंगे ना तेरी गान्ड. जब उनसे मरवा सकती है तो फिर मुझसे क्यों नही"

"तुझे क्या पता वो मारते हैं कि नही?"

"इतनी प्यारी टाइट गान्ड तो कोई नामर्द ही बिना चोदे छोड़ेगा.......बोल मारते हैं ना?" विजय अपनी माँ के निप्पलो को कस कर मसला तो वो कराह उठी.

"इतना ज़ोर से क्यों मसलता है........नहीं मारते है वो मेरी गान्ड....बस बोल दिया" रेखा ने अपनी कमर घुमाना बंद कर दिया था. विजय उसकी कमर पर हाथ रख उसे अपने लंड पर उपर नीचे करने लगा तो वो फिर से शूरू हो गई.

"और तू मज़े ले लेकर उनसे चूत मरवाती थी....अब यह ना कहना कि नही मरवाती थी" विजय अपनी कमर उछाल लंड अपनी माँ की चूत में पेलते बोला. उसकी माँ अब फिर से सिसकने लगी थी.

"हाए चूत तो मरवाती हूँ बेटा ........मज़े से मरवाती हूँ बेटा.......मगर मज़ा उतना नही आता "

"क्यूँ माँ....क्यूँ मेरी माँ को मज़ा नही आता ?" विजय अपनी माँ को पेलते हुए बोला।

"हाए वो कभी कभी चूत मारते हैं....रोज नही.......इसलिए मेरी टाइट ही रहती हैं........शुरू शुरू में जब शादी हुई थी तो तेरे पिता अपना लंड मेरी टाइट गान्ड में थोड़ी सी घुसाते तो सुरू में बहुत तकलीफ़ होती.......हाए जब......उफफफफ्फ़........जब थोडा सा लंड घुसता उनका.....उनका माल छूट जाता"

"मतलब मेरी ......मेरी कुतिया की जम कर गान्ड चुदाई नही होती थी......यही कहना चाहती है ना तू?"विजय बोला।

"हां.....उन्न्नन्ग्घह......हाए......उफफफफफफफफ्फ़.......हााआआं.........नही होती थी जम कर चुदाई......." विजय ने नीचे से कमर उछालना बंद कर दिया और अपनी माँ की कमर थामे उठ कर बैठ गया लेकिन उसकी चूत से लंड नही निकलने दिया.

"और तुझे जम कर गान्ड मरवानी है?.......जैसे आज तूने अपनी चूत मरवाई है?"विजय ने अपनी माँ की चूत में लंड अंदर बाहर करते हुए कहा।

"हां मरवानी है"रेखा अपने बेटे के आँखो में आँखे डालते होंठ काटते बोली.
 
"अभी अभी तेरा दिल कर रहा है अपने बेटे के मोटे लंड से अपनी गांड फड़वाने को.......कर रहा है ना तेरा दिल"

"हाए करता है बेटा मेरी गांड में बहुत खुजली हो रही है फाड़ दे अपनी माँ के गांड के छेद को...."

"क्या चाहिए मेरी कुतिया को.......बोल साली रंडी" विजय माँ के निप्पलो को रबड़ बैंड की तरह खींचते बोला.

"हीईिइîईईईईईईईई......उफफफफफफफ्फ़.......तेरी कुतिया को तेरा लंड चाहिए........तेरा लंड चाहिए वो भी अपनी गान्ड में...........मार अपनी माँ की गान्ड मेरे लाल"रेखा पूरी बेशर्मी से बोली।

विजय ने अपनी माँ को धक्का दे अपनी गोद में से उतारा और फौरन बेड से नीचे उतरा और उसके सिरे पर खड़े होकर अपनी माँ को अपनी तरफ खींचा. रेखा फौरन पीछे को हो गई. जैसे ही विजय उसे पलटने के लिए उसकी कमर पकड़ी वो खुद इशारा समझ पलट गयी.

"चल साली रंडी.......कुतिया बन जा जल्दी से" विजय अपनी माँ की कमर उपर को उठाते बोला. उसकी माँ एक भी पल गँवाए बिना कमर हवा मे उँची कर कुतिया बन गयी. विजय ने अपनी माँ की गान्ड की उँचाई अपने लंड के हिसाब से सेट की और फिर उसकी टाँगे थोड़ी चौड़ी कर दी. अब पोज़िशन यह थी कि उसकी माँ बेड के किनारे गान्ड हवा में उठाए कुतिया बनी हुई थी, उसके पाँव बेड के थोड़े से बाहर थे. विजय ने अपनी माँ की गान्ड के छेद पर जैसे ही लंड लगाया तो वो एकदम से बोल उठी "हाए इतना मोटा सूखा घुसाएगा क्या बेटे....तेल लगा ले"

"माँ लॉडा तो पहले ही तेरी चूत के रस से सना पड़ा है...तेल की क्या ज़रूरत है"विजय बोला।

"मगर मेरी गान्ड तो सूखी है ना.......ऐसे बहुत तकलीफ़ होगी......थोड़ा तेल लगा ले बेटा प्लीज"

अपनी माँ की टाईट गान्ड देख विजय को भी लगा कि तेल लगा ही लेना चाहिए. विजय कमरे में सरसों के तेल की शीशी उठाई और एक ढक्कन में डाल वापस बेड पर अपनी माँ के पीछे पहुँच गया. उंगली तेल से तर कर विजय ने अपनी ऊँगली अपनी माँ की गान्ड में घुसाने लगा. साली गान्ड इतनी टाइट थी कि उंगली भी मुश्किल से जा रही थी. विजय को अहसास हो गया कि खूब मेहनत करनी पड़ेगी. वह बार बार तेल लगा कर अपनी माँ की गान्ड में उंगली पेलने लगा, उधर रेखा जब भी उंगली गान्ड में जाती महसूस करती तो गान्ड टाइट करने लग जाती।
 
माँ गान्ड को ढीला छोड़.......क्यों कस रही है" विजय की बात सुन रेखा थोड़ा कोशिश करने लगी. विजय एक के बाद धीरे धीरे दो उंगलियाँ अपनी माँ की गान्ड में डालने की कोशिश करने लगा. रेखा फिर से गान्ड टाइट करने लगी. विजय ने गुस्से में एक चांटा कस कर उसके चुतड पर मारा तो रेखा को समझ में आ गया. बहुत जल्द तेल से सनी विजय की दो उंगलियाँ उसकी माँ की गान्ड में अंदर बाहर हो रही थीं. हालाँकि रेखा सी सी कर रही थी. अब विजय को लगा कि लंड घुसाया जा सकता है. उसने दो तीन वार तेल से उंगलियाँ तर कर अपनी माँ की गान्ड में डाली ताकि अच्छी तरह से चिकनाई हो जाए और ढक्कन उठाकर दूर रख दिया.

"माँ थोड़ा अपनी गान्ड तो फैला" विजय ने जैसे ही कहा उसकी माँ ने अपने दोनों हाथ पीछे लाकर अपने दोनो चुतड़ों को फैलाया. उसकी टाँगे तो पहली ही खूब चौड़ी थी अब उसने जब अपने चुतड़ों को विपरीत दिशा में खींचा तो गान्ड का छेद हल्का सा खुल गया. विजय ने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और अपना लन्ड़ उसकी गान्ड के सुराख पर रख दिया.

"हाए धीरे....धीरे-धीरे डालना.......बेटे उूउउफफफ्फ़ बहुत बड़ा है तेरा लंड" रेखा ने विजय चेताया।

"तू डर मत माँ......तुझे मैं तकलीफ़ नही होने दूँगा" विजय ने अपनी माँ को दिलासा दिया. वो कुछ घबरा रही थी क्योंकि एक तो इतने सालों से ना चुदने से रेखा की गान्ड बिल्कुल संकरी हो गयी थी और उपर से विजय का लंड काफ़ी मोटा था।

विजय ने अपनी माँ की कमर हाथों मे कस कर पकड़ ली और लंड आगे सुराख के उपर रख ज़ोर लगाने लगा. उसकी माँ का बदन कांप रहा था. मगर वाकई गान्ड बहुत टाइट थी. वो उसके ज़ोर लगाने से थोड़ा सा खुली तो ज़रूर मगर इतनी नही कि लंड घुस पाता. लगता था काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ेगा और माँ को भी थोड़ी तकलीफ़ सहन करनी पड़ेगी. ये सोचकर विजय ने कमर को पूरे ज़ोर से थाम फिर से ज़ोर लगाना शूरू किया.
 
इस बार जब विजय ने ज़्यादा और ज़्यादा ज़ोर लगाने लगा और उसकी माँ की गान्ड खुलने लगी तो माँ उन्ह...उन्ह करने लगी. वो कराह रही थी मगर एक बार तो उसे झेलना ही था. तेल से सने लंड का चमकता सुपाडा गान्ड को धीरे धीरे खोलता गया और फिर 'गप्प' की आवाज़ हुई और लंड का सुपाडा उसकी माँ की टाइट गान्ड में गायब हो गया. इधर विजय का लंड उसकी माँ की गान्ड मे घुसा उधर उसकी माँ ने अपने हाथ कुल्हों से हटा चादर अपनी मुत्ठियों में भींच ली. उसे दर्द हो रहा था मगर उसने अभी तक अपने बेटे को रुकने के लिए नही कहा था. विजय ने ज़ोर लगाना चालू रखा. बिल्कुल आहिस्ता आहिस्ता धीरे धीरे ज़ोर लगाता वह लंड को आगे और आगे ठेलने लगा. उसकी माँ के मुख से हाए...हाइ......उफफफफ्फ़....आआहज.....हे भगवान..... करके कराहें फूट रही थीं।

जिस तरह उसका बदन पसीने से भर उठा था और जिस तरह वो बदन मरोड़ रही थी उससे विजय जान गया था कि उसकी माँ को बहुत तकलीफ़ हो रही थी. मगर हैरानी थी की रेखा ने विजय को एक बार भी रुकने के लिए नही कहा..... और जब उसने अपने बेटे को रोका तब तक लगभग दो तिहाई लंड उसकी गान्ड में घुस चुका था।

विजय ने आगे घुसाना बंद किया और धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. गान्ड इतनी टाइट थी कि खुद विजय को बहुत तकलीफ़ हो रही थी. गान्ड लंड को बुरी तरह से निचोड़ रही थी. इसलिए पीछे लाकर वापस अंदर डालने में बहुत परेशानी हो रही थी और उपर से उसकी माँ भी बुरी तरह सिसक रही थी और बार बार दर्द से बदन सिकोड अपनी गान्ड टाइट कर रही थी. मगर तेल की चिकनाई की वजह से विजय को लंड आगे पीछे करने मे मदद मिली. धीरे धीरे लंड रेखा की गान्ड में थोड़ा आसानी से आगे पीछे होने लगा. हर घस्से से कुछ जगह बनती जा रही थी. विजय ने मौका देख हर धक्के के साथ लंड थोड़ा....थोड़ा आगे और आगे पेलने लगा।

आख़िर कार कोई बीस मिनिट बाद विजय का पूरा लंड उसकी माँ की गान्ड में था. उसकी माँ को भी इसका जल्द ही अहसास हो गया जब विजय के टटटे उसकी चूत से टकराने लगे.

"उफफफफ्फ़.बेटे......पूरा घुसा दिया........इतना मोटा लौडा पूरा तूने मेरी गान्ड में डाल दिया" रेखा कराहते हुए बोली।

"हां माँ......पूरा ले लिया है तूने........तू ऐसे ही बेकार में डर रही थी"विजय अपनी माँ की गांड मारते हुए बोला।
 
"बेकार में......उूउउफफफफ्फ़.........मेरी जगह तू होता तो तुझे मालूम चलता.....अभी भी कितना दुख रहा है....,धीरे कर" रेखा बोली।

"माँ अब तो चला गया है ना पूरा अंदर.......बस कुछ पलों की देर है देखना तू खुद अपनी गान्ड मेरे लौडे पर मारेगी" विजय अपनी की माँ की पीठ चूमता बोला.

"धीरे पेल बेटा.......हाए बहुत दुख रही है मेरी गान्ड......." रेखा सिसिया रही थी.उसकी माँ का तेल वाला सुझाव वाकई मे बड़ा समझदारी वाला था. तेल से लंड आराम से अंदर बाहर फिसलने लगा था. जहाँ पहले इतना ज़ोर लगाना पड़ रहा था लंड को थोड़ी सी भी गति देने के लिए अब वो उतनी ही आसानी से अंदर बाहर होने लगा था. हालाँकि माँ ने विजय को धीरे धीरे धक्के लगाने के लिए कहा था मगर पिछले आधे घंटे से किए सबर का बाँध टूट गया और विजय ना चाहता हुआ भी माँ की गान्ड को कस कस कर चोदने लगा.

"हाए उउउफफफफफफफ्फ़.........आआआहज्ज्ज्ज मार...डााअल्ल्लीीगगगघाा क्या आआअ......हीईीईईईई.....ओह माआआअ.......,,हे भगवान......मेरी गान्ड....,उफफफफफफफ़फ्ग"

रेखा चीख रही थी, चिल्ला रही थी मगर अपने बेटे को रुकने के लिए नही कह रही थी. सॉफ था उसे इस बेदर्दी में भी मज़ा आ रहा था. अगर रूम साउंड प्रूफ नहीं होता तो पड़ोसी ज़रूर उसकी चिल्लाते हुए सुन लेते.वैसे भी माँ रोकती तो भी विजय रुकने वाला नही था. दाँत भींचे विजय माँ की गान्ड में पेलता जा रहा था और वो पेलवाती जा रही थी.

"हाए अब बोल साली कुतिया......मज़ा आ रहा है ना गान्ड मरवाने में....."विजय अपनी माँ की गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोला।

"आ रहा है....हाए बहुत मज़ा आ रहा है....ऐसे ही ज़ोर लगा कर चोदता रह.......हाए मार अपनी माँ की गान्ड"

फाड़ डाल मेरे बेटे।रेखा बोली।

"ले साली कुतिया .....ले....यह ले.........मेरा लॉडा अपनी गान्ड में" विजय पूरी रफ़्तार पकड़ते हुए अपनी माँ के चुतड़ों पर तड़ तड़ चान्टे मारने शुरू कर दिए.

"हाई....उूुुउउफफफ्फ़...,मार ..,हरामी....मार अपनी माँ की गान्ड....मार अपनी माँ की गान्ड.......,हाए मार मार कर फाड़ डाल इसे...,उफफ़गगगगगग...हे भगवान..........ले ले मेरी गान्ड.......ले ले मेरे लाल...," रेखा अब पूरी गरम हो चुकी थी।
 
विजय कइ थप्पड़ों से उसकी माँ के चुतड लाल सुर्ख होने लगे. उधर फटक फटक विजय का लौडा भी अपनी माँ कई गान्ड फाड़ने पर तुला हुआ था. उसकी माँ तो लगता था जैसे ऐसी चुदाई की भूखी थी, यह उसका विजय ने नया रूप देखा था. उसकी इच्छाएँ इतने समय तक दबी रहने के कारण हिंसक रूप धारण कर चुकी थी. उसे चुदाई में गालियाँ अच्छी लग रही थी।

आह साली तू तो रंडियो की तरह चिल्ला रही है । साली कुतिया की तरह गांड मरवा रही है।कैसा लग रहा है तुझे अपने बेटे का लंड।कितनी गरम और टाइट गांड है तेरी माँ।विजय बोला।

बहुत मज़ा आ रहा बेटे और जोर जोर से पेल मेरी गांड में। तेरा लंड कितना मज़ा दे रहा है।जी चाहता है तेरे लंड को चूम लूँ। रेखा नशीले अंदाज़ में बोली।

ये सुनकर विजय ने अपना लंड कुतिया बनी अपनी की गांड से निकाल लिया।विजय के लंड पर उसकी माँ के गांड का पीला रस लगा हुआ था। विजय ने जल्दी से अपनी माँ के मुँह में अपना गन्दा लंड पेल दिया।जिसे उसकी माँ चाट चाट के साफ करने लगी।वासना के नशे में विजय की माँ सच में एक कुतिया बन गई थी।

जब विजय का लंड पूरा साफ हो गया तो उसने फिर से कुतिया बनी अपनी माँ के गांड में एक झटके में ही पूरा 9 इंच का लंड पेल दिया।उसकी माँ दर्द से चिल्लाने लगी।

आह बेटे तुझे जरा भी सबर नहीं है आराम से नहीं पेल सकता क्या। आखिर मैं तेरी माँ हूँ मेरे लाल।

विजय ने अपनी माँ के गांड पर जोर से थप्पड़ मारकर बोला। चुप साली रंडी तू मेरी कुतिया है तुझे तो मैं किसी कुत्ते से चुदवाऊँगा।तब तू असली कुतिया बनेगी साली रंडी ।

विजय ने 1 घंटे तक अपनी माँ को किसी कुतिया की तरह चोदा। रेखा 4 बार झड़ चुकी थी।फिर जब विजय

झड़ने को हुआ तो उसने अपना लंड अपनी माँ की गांड से निकाला और अपना सारा वीर्य अपनी माँ के मुँह पर गिराने लगा।जिसे उसकी माँ उंगलियो में लेकर चाटने लगी।उसकी माँ वीर्य में भीगी हुई पोर्नस्टार के जैसी दिख रही थी।

उसकी माँ की गाँड फट गई थी।चूत भी सूज गई थी।मुँह का तो बुरा हाल था। चूतड़ों पर थप्पड़ों के निशान पड़ चुके थे।विजय ने अपनी माँ के निप्पल और चूचियों पर भी दांत के निशान बना दिए थे।

अब उसे विजय की मार भी अच्छी लग रही थी, विजय का उससे जानवरों की तरह पेश आना अच्छा लगता था. बल्कि जितना विजय बेदरद हो जाता उतना ही उसका आनंद बढ़ जाता, इस बात को जान कर विजय उसके साथ कोई नर्मी नहीं बरत रहा था, तब भी जब विजय उसकी गान्ड मार रहा था या तब जब रात के आख़िरी पहर के समय में विजय उसे छत पर रेलिंग के साथ घोड़ी बनाकर चोद रहा था । ना आने वाले दिनो में जब कभी विजय उसे किचन में, तो कभी घर में अपने पिता के बेड पर अपनी माँ को अलग अलग आसनो मे चोदता. वो हर वार विजय का पूरा साथ देती और चुदाई के समय विजय की किसी बात पर एतराज ना करती।

चुदाई के बाद दोनों फिर से अपने पुराने रूप मे आ जाते जिसमे वो विजय की माँ होती और वह उसका बेटा. हालाँकि उन दोनो को चुदाई में बेहद आनंद आता था मगर फिर भी उनके बीच रोजाना चुदाई नही होती थी. सप्ताह में एक दो बार, ज़्यादा से ज़्यादा. विजय ने अपना ध्यान कभी भी पढाई से भटकने नही दिया था और उसकी माँ भी इस बात का पूरा ख़याल रखती थी।समय मिलने पर वह कोमल की भी चुदाई कर लेता था ।इधर कंचन अपने पिता और दादा के साथ बीजी थी।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
कुछ दिन बाद की बात है आज संडे था तो सभी की छुटी थी।सभी ने नाश्ता किया और अपने अपने रूम में चले गए।रेखा को कल से ही मासिक शुरू हो गया था इसलिए मुकेश को चुदाई करने को नहीं मिला था।उसने अपनी बीबी से कंचन को चोदने की परमिसन ले लिया था।

जब सभी सोने चले गए तो मुकेश भी धीरे से कंचन के रूम में घुस गया।कंचन लेटी हुई थी।अपने पिताजी को अपने रूम में घुसकर दरवाजा बंद करते देखकर वह समझ गई की उसके पिताजी उसे चोदने के लिए ही आये है।

मुकेश धीरे से बेड पर अपनी बेटी कंचन के पास लेट गया और अपनी बेटी को बाहों में भरने लगा।

जब मुकेश ने कंचन के रसीले होंठो को चूसना शुरू किया तो कंचन भी अपने पिताजी का साथ देने लगी क्योंकि वह भी कई दिनों से प्यासी थी।क्योंकि विजय अब ज्यादा ध्यान कोमल पर ही दे रहा था।

मुकेश ने जल्दी जल्दी अपनी बेटी के सभी कपडे निकाल दिए और अपने कपडे भी निकाल दिए।अब कंचन पूरी नंगी थी।

मुकेश-आह मेरी गुड़िया।कितनी सुन्दर है तू।तेरे होंठ कितने रसीले है।जी चाहता है इनका सारा रस चूस लूँ और दिन रात तेरी चूत चोदता रहूँ।

फिर कंचन ने अपने पिताजी से कहा– पिताजी, अपनी मासूम बच्ची को चोद दो, फक मी प्लीज! आज बना लो अपनी बेटी को अपनी रखैल!

उसके पिता यह सुन कर पागल हो गए और कंचन को पकड़ लिया और उसके होंठों पर चुम्बन करने लगे।

किस करते करते वो कंचन के बूब्स दबा रहे थे।

काफ़ी देर तक दोनों की किसिंग चलती रही तब उसके पिता ने बोला– चल अब मेरा लंड चूस बेटी।

बाप बेटी दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे को चूसने लगे। चूसते चूसते काफी टाइम हो गया तो कंचन ने अपने पापा से बोला– पिताजी, अपनी बेटी को चोदो अब… प्लीज फक मी, अब और कण्ट्रोल नहीं हो रहा है मुझसे!

उसके पिता भी कम चालाक नहीं थे, वो कंचन को खूब तड़पा रहे थे और उसकी चिकनी गीली चूत में उंगली पेल रहे थे। कंचन से तो रहा ही नहीं जा रहा था, वह जोर जोर से सिसकारियाँ ले रही थी और बोल रही थी- आहाहह अहह अहहः अहहाह उऔ औऔऔअ उईईईइ फक मी प्लीज अहहहः अहहाह प्लीज अब तो लंड डाल दो… प्लीज… फक मी हार्ड… मेरी चूत बहुत प्यासी है पिताजी… प्लीज … और मत तड़पाओ…
 
‘पिताजी चोदो मुझे… जैसे मेरी मम्मी को रंडी की तरह चोदते हो!’ कंचन कुछ भी बक रही थी, उसकी चूत में आग सी लगी हुई थी।

पिताजी ने अपना 7 इंच का लंड का टोपा कंचन की चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा और उनका टोपा अन्दर चला गया।

‘ले मादरचोद रंडी की औलाद… ले मेरे लंड को अन्दर तक ले!’ कहते हुए मुकेश ने एक और जोरदार झटका मारा और इस बार उसका आधा लंड कंचन की चूत के अन्दर घुस गया।

कंचन की तो मज़े से हालत ख़राब हो गई थी… उसे बहुत जबरदस्त मज़ा आ रहा था, कंचन ने अपने पिता से कहा– पापा, प्लीज इसी तरह पेलो… मैं जल्दी ही झड़ जाऊँगी… बहुत मज़ा आ रहा है मुझे!

कंचन को बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

उसके पापा अब किस करने लगे और कुछ देर रुक गए, उनका आधा लंड ही कंचन की चूत में था।

कुछ देर बाद कंचन को और मज़ा आने लगा और कंचन का शरीर शांत सा हुआ, मुकेश ने फिर से एक और जोर का झटका मार दिया और उनका पूरा लंड कंचन की चूत में घुसता चला गया… इस बार कंचन के मुख से हल्की सी चीख निकली और उसे थोडा दर्द होने लगा लेकिन इस बार उसके पापा नहीं सुन रहे थे, वो अपने लंड को दनादन अपनी बेटी की चूत में पेले जा रहे थे।

कुछ देर बाद कंचन को भी मज़ा आने लगा और वह भी गांड उठाकर अपने पिता का साथ देने लगी थी, पूरे कमरे में दोनों की चुदाई की खच खच फच फच की आवाज़ें आ रही थी।

करीब पंद्रह मिनट के बाद, मुकेश झड़ने जा रहा था और कंचन तब तक दो बार झड़ चुकी थी।

फिर कंचन ने अपने पिता से कहा– बाहर ही झड़ना पिताजी नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी।

लेकिन मुकेश ने अपने लंड का माल कंचन के मुँह में डाल दिया जिसे कंचन धीरे धीरे चाट गई और बाप बेटी दोनों वहीं बिस्तर पर लेट गए।

आधे घंटे बाद दोनों फिर से तैयार हो गए थे।

कंचन के पापा के हाथ फिर से उसके चिकने गोरे चूतड़ों पर फ़िसलने लगे।
 
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