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परिवार(दि फैमिली) complete

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सूरज भी अब बेड पर आ चुका था और वो अब शीला की गांड पर तेल लगाने लगा उसके हाथ के स्पर्श से शीला सिहर उठी उसकी गांड का छेद धीरे धीरे खुलने बंद होने लगा अब सूरज ने अपनी एक उंगली में तेल लिया और वो उंगली शीला की गांड में आगे पीछे करने लगा चूँकि शीला को पहले से भी उंगली की आदत थी तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। इधर सूरज अब गांड मारने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका था।

”बेटी तुम तैयार हो मैं लंड तुम्हारी गांड में घुसाने वाला हूँ” वो अपना लंड शीला की गांड के छेद पर सेट करते हुए शीला से बोले।

”हाँ अंकल मैं तैयार हूँ”कह कर शीला ने तकिया अपने मुंह में भर लिया और बेडशीट पर उसकी पकड़ सख्त हो गई वो दर्द सहने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी थी

अब अंकल ने शीला की चोटी पकड़ी और दूसरा हाथ उसकी कमर में डालते हुए अपने लंड को शीला की गांड के छेद पर रखकर एक ज़ोर का धक्का दिया ”आहह….माँ…….मर…गैिईईईई…….रीईए…..”की आवाज़ शीला के मुंह से निकली और अंकल का आधा लंड शीला की गांड में घुस गया।

शीला की चीख सुन कर सूरज रुक गया और वो एकटक शीला को ही देखने लगा।

”आहह……..अंकल रुक जाओ प्लीज़ जैसे हो वैसे ही रहो बहुत दर्द हो रहा है” शीला बोली उसे बहुत दर्द हो रहा था उसका दिल था की कह रहा था की अंकल लंड को तुरंत बाहर निकाल ले पर वो जानती थी की जब गांड मरवाना ही है तो दर्द तो सहन करना ही पड़ेगा इस लिए उसने अंकल से लंड निकालने को नहीं कहा।

अब धीरे धीरे उसका दर्द कुछ कम हुआ तो वो बोली ”अंकल अब जितना भी लंड बाहर है एक ही बार में अंदर घुसा दो ताकि बार बार दर्द ना हो” उसकी बात सुन कर सूरज ने तेल उठा कर बाहर बचे हुए लंड पर लगाया और थोड़ा सा लंड बाहर खिच कर एक जोरदार धक्का लगाया जिससे पूरा लंड शीला की गांड में घुस गया।

शीला के होठों से फिर एक घुटि घुटि सी चीख निकली क्योंकि उसने तकिया अपने मुंह में ठुंसा हुआ था जैसे ही लंड पूरा अंदर गया सूरज फिर रुक गया शीला धीरे धीरे अपने आपको संभालने लगी ।
 
कुछ देर बाद शीला का दर्द कम हुआ तो उसने सूरज अंकल को धक्के लगाने का इशारा किया । शीला की गांड टाइट होने से सूरज को भी धक्के लगाने में परेशानी हो रही थी उसका लंड फँसा फँसा सा धीरे धीरे अंदर बाहर होने लगा थोड़ी देर बाद गांड अच्छे से खुल गई थी और शीला का दर्द भी लगभग खत्म हो गया था अब वो भी गांड पीछे धकेल कर लंड अंदर लेने लगी थी अब अंकल भी अपने धक्को की रफ़्तार काफी बढ़ा चुके थे ‘खच खच की आवाजें सारे कमरे में गूँज रही थी।

”मारो अंकल मारो अपनी बेटी की गांड। पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की गांड में ” शीला अंकल को उकसाने के लिए कुछ भी बकते हुए बोली।

”ले साली रंडी ले अपनी गांड में मेरा लंड, आज अगर मैंने तेरी गांड नहीं फाड़ी तो मैं भी तेरा अंकल नहीं”कह कर सूरज भयानक तरीके से धक्के लगाने लगा।

लगभग 10 मिनट तक धक्के मरने के बाद सूरज शीला की गांड में ही झड़ गया । शीला भी अपने अंकल का माल अपनी गांड में महसूस करके झड़ने लगी और बेड पर ही ढेर हो गई ।

शीला गांड मरवाने के बाद अपने सूरज अंकल से यह वादा ले लेती है कि उसके अंकल कभी पिंकी पर बुरी नजर नहीं डालेंगे जो करना हो शीला के साथ करें सूरज भी शीला की जवानी के नशे में यह वादा कर देता है

उसके अंकल ने दिखाने के लिए कि किसी को शक ना हो इसके लिए वह पिंकी को भी एक स्मार्टफोन देते हैं और और सूरज अंकल नरेश को भी एक नई बाइक दिलाते हैं जिससे सभी परिवार खुश हो जाता है और सभी अंकल का बहुत मान जान करते हैं।

पिंकी और नरेश दोनों खुश है नरेश पिंकी को अपनी गर्लफ्रेंड बना चुका है और वह दोनों जब भी एकांत मिलता है सेक्स करते रहते हैं और इधर अंकल शीला के साथ मजा करते हैं साथ में कभी कभी मनीषा के साथ ही मजे ले लेते हैं मनीषा के पति का प्रमोशन हो चुका है अब यह लोग हंसी-खुशी दिन बिताने लगते है।
 
दोस्तों एक परिवार की कहानी खत्म हो चुकी है अब चलते है महेश के घर।जहाँ महेश अपनी बहु नीलम और बेटी ज्योति के साथ रहता है।उसका बेटा समीर ऑफिस चला गया है।

ज्योति बैंक के किसी काम से घर के बाहर गई है वह शाम तक शॉपिंग करके घर आने वाली थी। इधर नीलम रसोई में खाना बना रही है।पिछले कुछ दिनों से मासिक होने के कारण बहु और ससुर दोनों प्यासे थे अब बहु फ्री हो गई थी।

ज्योति को गए आधा घंटा बीत चुका था। महेश अपने कमरे में टीवी देख रहा था नीलम को टीवी की आवाज़ सुनाई दे रही थी। नीलम ने सब्जी को तड़का लगा कर जैसे ही आटा गूंथना शुरू किया, उसके ससुर ने उसे पीछे से जकड़ लिया वो सेल्फ पर झुकी हुई आटा गूँथ रही थी इसिलए खुद को महेश की पकड़ से छुड़ा भी न पाई; महेश ने उसके मम्मों को दबाना मसलना शुरू कर दिया।

नीलम- क्या कर रहे हैं पिताजी, छोड़िए न आटा गूँथने दो न!

महेश- तुम आटा गूंथो, मैं तुम्हारे ये मोटे-2 मम्में!

महेश ने अपनी बहु की बड़ी बड़ी चूचियों को मसलते हुए कहा।

वो अपनी बहू की चूचियों को बुरी तरह मसल रहा था, रौंद रहा था और इसके साथ ही वो उसकी गर्दन चेहरे को चूमता जा रहा था.नीलम की सिसकारियाँ निकल रही थी, वो आटा बनाते हुए “आह… ओह… माँ… ओह पिताजी… आह…” कहकर पागल सी होती जा रही थी।

महेश ने अपना एक हाथ नीलम की मैक्सी के अंदर डाल लिया। नीलम ने उसका हाथ बाहर निकालने की कोशिश की तो महेश ने उसका स्तन बेहद बेहरहमी से मसल दिया “आइ… आ… आ… मर गई”नीलम चीत्कार कर उठी।

महेश- बहू, तुम्हारा आटा बन गया, अब चपातियाँ बनाओ, बाकी सब मुझ पर छोड़ दो। बड़ी प्यारी चूत है तुहारी देखो कैसे फड़फड़ा रहा है तुम्हारी चूत का दाना… यह मुझे कह रहा है कि इसे लौड़ा चाहिए… बहू कस के शेल्फ पकड़ लो !

नीलम- पिताजी प्लीज नहीं…

वो एक आखिरी कोशिश कर रही थी, उसने न चाहते हुए भी शेल्फ को दोनों हाथों से पकड़ लिया। झुकने के कारण उसकी चूत ऊपर की तरफ हो गयी।वह अब घोड़ी बन चुकी थी।

महेश ने नीलम को कमर से पकड़ लिया और लन्ड को चूत पर सेट करके ज़ोर से धक्का लगाया।

“आ… आ… माँ मर गयी मैं…” नीलम को लगा जैसे लोहे का मोटा डंडा उसकी बुर में डाल दिया गया हो।
 
महेश ने नीचे की तरफ देखा तो लन्ड लगभग आधा अंदर जा चुका था। महेश ने अंदाज़ा लगाया पर यह समय रहम खाने का नहीं था, उसने पांच छह शॉट एक के बाद एक पेल दिए जैसे कि कोई ऐक्शन रीप्ले कर रहा हो नीलम की दर्दनाक चीखों से सारा घर गूंज उठा, उसकी टाँगें काँपने लगी.

अगर महेश अपनी पूरी ताकत लगा कर उसे शेल्फ पर न झुकाता तो यकीनन वो गिर पड़ती। महेश ने अपनी पूरी ताकत से नीलम को शेल्फ पे दोहरा किया हुआ था उसने अपने दोनों हाथों से नीलम के चेहरे को शेल्फ पर दबा रखा था । नीलम के स्तन शेल्फ से पिचक रहे थे उसकी साँस रुक रही थी। पर बेरहम ससुर को उसकी कोई चिंता नहीं थी उसने अपनी बहु को इसी पोजीशन में दबाए रखा और पीछे से धक्को की रेल चला दी। नीलम पसीने से तरबतर हो गयी। उसकी कमसिन जवानी को उसके मोटे तगड़े ससुर ने मसल के रख दिया था। उसके कानों में धक्को की… फच… फच… पट… पट… फच… फच… की आवाज़ गूँज रही थी।

तभी महेश की नजर कोने में रखे मक्खन पर चली जाती है मक्खन देखकर महेश के दिमाग में नीलम की मस्त गांड मारने का ख्याल आ जाता है ।वह धीरे से मक्खन का डिब्बा अपनी तरफ खींचता है और मक्खन निकालकर नीलम की टाइट गांड के भूरे छेद पर मक्खन लगाने लगता है फिर फिर धीरे धीरे मक्खन नीलम की गांड के अंदर डालने लगता है। साथ साथ नीलम की चूत की चुदाई भी जारी रखता है जिससे नीलम पूरी तरह से गर्म रहती है और उसका ध्यान गांड की तरफ नहीं जाता।

इधर महेश धीरे धीरे नीलम की गांड में ढेर सारा मक्खन डाल देता है। निलम की गांड अब मक्खन से पूरी तरह भर गई है तब महेश अपना लंड नीलम की चूत से निकालता है और जब तक नीलम कुछ समझ पाती तब तक अपना मोटा लंड नीलम की गाँड के छोटे से छेद पर रख कर एक ही झटके में आधा लंड नीलम की गांड में एकदम से पेल देता है।

नीलम दर्द से चीखने चिल्लाने लगती है महेश को तो अपने मजे से मतलब था नीलम को कस के पकड़ लेता है और अपने लंड को नीलम की टाइट गांड में चार पांच धक्को में ही पूरा 9 इंच तक पेल देता है। नीलम अपनी गांड छुड़ाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन महेश की ताकत के आगे वह हार मान लेती है और वह भी गांड मरवाने लगती है ।
 
महेश-आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् सालीईईई रंडीईईईई

तेरी गांड कितनी मस्त है।बिलकुल किसी कुतिया की तरह गरम गांड है तेरी साली रंडी।

नीलम-आह्ह्ह्ह्ह्ह पिताजीईईईई फाड़ दो अपनी रांड की गांड।बहुत खुजली हो रही है इसमें।

5 मिनट की गांड चुदाई में नीलम को भी मजा आने लगता है चुकी नीलम की पूरी गांड मक्खन से भरी हुई है इसीलिए ज्यादा तकलीफ नहीं होती । और नीलम भी मस्ती में अपनी गांड मरवाने लगती है

10 मिनट तक नीलम की गांड मारने के बाद वह फिर से अपनी बहु नीलम के चूत में लंड पेल देता है और फिर से नीलम की चूत की चुदाई करने लगता है

पर कुदरत भी अजीब है, लन्ड और चुदाई कैसी भी क्यों न हो, औरत की चूत और गांड उसके हिसाब से एडजस्ट कर ही लेती है ताकि चर्म सुख का आनन्द ले सके!

और ऐसा ही नीलम के साथ भी हुआ और धीरे धीरे उसका दर्द आनन्द में बदलने लगा… चीखों की जगह कामुक आहों ने ले ली- आह… आह… आह… ओह… आह… उम्म… उफ्फ… ओह्ह… अअ अअअ अअ… हहहहहह!

एक लंबी आह के साथ उसका बदन अकड़ा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

महेश ने उसे अपनी पकड़ से आज़ाद कर दिया पर नीलम निढाल शेल्फ पर ही पड़ी रही… उसे परमानन्द का अनुभव हो रहा था, उसके ससुर का घोड़ा लन्ड अभी भी उसकी चूत में था पर अब वो उसे अपने ही बदन का हिस्सा लग रहा था… लन्ड की गर्मी उसे अच्छी लग रही थी।

महेश- बहू… आज तूने कमाल कर दिया?

नीलम- पिताजी आपने तो पीस कर रख दिया है मुझे, मैंने क्या कमाल किया है, कमाल का तो आपका यह शैतानी लन्ड है।

महेश- आज तो तूने इसे भी फेल कर दिया, दो बार झड़ा हूँ और तू बस एक बार, इतनी कसी हुई चूत और गांड है तेरी कि यकीन नहीं होता।

नीलम- इतनी जल्दी आप तीन बार झड़ गए?

महेश- साली जल्दी थोड़े ही है।पूरे 45 मिनट से चुदाई कर रहा था तेरी।

नीलम- इतना टाइम। पर मुझे तो लगा कि कुछ ही मिनट हुए हैं… अब निकालो अपने लन्ड को पिताजी। मुझे रोटियां बनानी हैं।

महेश- लन्ड निकालने की क्या ज़रूरत है तू रोटियां बना मैं हल्के हल्के धक्के लगाता रहूंगा…बेटी।
 
नीलम- पूरे चोदू हो आप… इतनी बुरी गत बना दी है मेरी । फिर भी चैन नहीं है आपको…

महेश- मुझे तो चैन ही चैन है पर अपने इस लन्ड का क्या करूँ?

नीलम- भागे थोड़े न जा रही हूँ, जल्दी-2 रोटियां बनाने दीजिये, कोई आ गया तो दिक्कत हो जाएगी।

महेश- ठीक है बेटी धक्के नहीं लगाऊंगा पर लन्ड अंदर ही रहने दे। बड़ा सुख मिल रहा है।

नीलम रोटियाँ बनाने लग पड़ी और महेश उसके मम्मों से खेलता रहा, बीच- 2 में दो0 चार झटके भी दे देता।

“आह… आह… क्या कर रहे हो? रोटी जल जाएगी.” वो प्यार से कहती।

“अच्छा रोटी जलने की चिंता है तुझे साली और जो तेरी इस कसी हुई चूत में मेरा लन्ड जल रहा है उसका क्या?” महेश ने उसकी गांड पर हल्के हाथों से मारते हुए कहता।

नीलम- पिताजी निकालो न अपना लंड, देखो देर हो रही है… कोई आ जायेगा देखो 10 बज गए।

महेश ने टाइम देखा तो दस बज चुके थे उसने अपना लन्ड नीलम की चूत से बाहर निकाल लिया।

महेश- अब पड़ गयी तुझे ठंडक? ले बना ले रोटियां… मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ।

महेश के चले जाने के बाद सबसे पहले नीलम ने अपनी मैक्सी ऊपर करके अपनी चूत चेक की उसमें जमा हुआ वीर्य और सूज गयी चूत देख कर बेचारी डर गई “हाय राम, कितनी बेहरमी से चुदाई की है उसके ससुर ने क्या हाल कर दिया है… कितनी सूज गयी है.” उसने अपने आपसे से कहा और जैसे जैसे उसका बदन ठंडा पड़ता गया, उसका बदन शांत हो गया लेकिन चूत और गांड में दर्द अभी भी था।

अब बेचारी क्या करती, कोई चारा नहीं था उसके पास… उसने किसी तरह रोटियां पकाई और अपने पति के लिए खाना टिफिन बॉक्स में पैक किया।

वक़्त बीतने के साथ साथ दर्द बढ़ता जा रहा था, उसने पानी हल्का गर्म किया और एक कपड़ा लेकर टाँगों पे लगा हुआ वीर्य साफ किया और फिर अपनी चूत और गांड को गरम पानी से साफ करने लगी, गर्म पानी से उसे जलन हो रही थी पर आराम भी मिल रहा था।
 
नीलम रसोई के फर्श पर ही दीवार का सहारा लेकर बैठ गयी… वो अपने ससुर के सामने नहीं जाना चाहती थी, बेचारी थक चुकी थी, कब उसकी आँख लग गयी, उसे पता ही चला।

वो लगभग एक घण्टे तक सोती रही और ऑफिस बॉय ने जब डोरबेल बजाई तो उसकी आँख खुली। नीलम बड़ी मुश्किल से दीवार का सहारा लेकर खड़ी हो सकी किसी तरह उसने टिफिन उठाया और दरवाजा खोल के उसको टिफिन दे दिया और दरवाजा बंद कर दरवाजे के सहारा लेकर ही खड़ी हो गयी क्योंकि चल पाने की शक्ति अब उसमें नही थी।

“नहीं…” अचानक अपने सामने महेश को देखकर वो चिल्लाई… और जैसे हिरण शिकार होने से पहले पूरी ताकत लगा कर शेर से दूर भागता है वो भी भागने लगी।

महेश उसके पीछे भागा… वो लॉबी में सोफ़े के दाईं तरफ होती महेश बायीं तरफ से उसका रास्ता रोक लेता.

“बहू क्यों डर रही है… चल आ मेरे पास!” महेश उसे बहलाने के लिए कहता।

वो बाईं तरफ होती तो दिनेश दाईं तरफ से सामने आ जाता…नीलम छत की सीढ़ियों की तरफ भागी, वो लॉबी के उत्तरी कोने से ऊपर जाती थीं… महेश उसके पीछे भागा… उसने अपने शिकार को पकड़ने के हाथ आगे किया. नीलम तो बच गई पर उसकी मैक्सी महेश के हाथ में आ गयी और फट गयी. वो नंगी ही सीढ़ियों की और भागी और सीढ़ियों पे चढ़ने में कामयाब हो गयी।

महेश सीढ़ियों के नीचे आते हुए- बहू नंगी ही छत पे जाओगी क्या?

नीलम अपने नंगे बदन को देखते हुए- पिताजी, प्लीज आज और मत करो, मैं और सहन नहीं कर पाऊँगी।

महेश- पहले तो शायद तुझे छोड़ देता पर अब जितना भगाया है तूने उसका हर्जाना तो भरना ही होगा न? अब तू नीचे आएगी या मैं ऊपर आऊँ पर अगर मैं ऊपर आया तो…

नीलम(नीचे उतरते हुए वो जानती थी इनके इलावा उसके पास कोई चारा नहीं है)- सॉरी पिताजी आपका लन्ड देख कर डर गई थी मैं प्लीज जाने दो न मुझे।

महेश(नीलम को पकड़ते हुए)- तुझे मजा नहीं आया क्या बेटी। बोल?

नीलम- नहीं पिताजी, आपने आज मेरे साथ जोर आजमाइश की है.

महेश नीलम की चूत में उंगली घुसाते हुए बोला- तू भी तो लन्ड लेना चाहती थी मेरा।

नीलम को उंगली का अंदर बाहर होना अच्छा लग रहा था पर वो खुद को रोक रही थी वह बोली- यह झूठ है।

महेश ने उसे सीढ़ियों की ग्रिल के सहारे झुका लिया और अपना लन्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा- अगर झूठ है तो तू मेरे लन्ड को देख कर उंगली क्यों कर रही थी?

नीलम- नही… आह… आह… ओह… माँ… प्लीज पिताजी रुक जाओ।मेरी चूत में दर्द हो रहा है।

महेश- झूठ मत बोल बेटी… तेरी आवाज़ बता रही है कि तुझे अभी भी लन्ड चाहिए… तू चाहे न कहे पर तेरी ये चाहत मैं पूरी करूँगा।

उसने नीलम की चूत पर लन्ड रगड़ते हुए कहा और एक जोरदार झटके से अपना लन्ड बहु की चूत में पेल दिया।
 
“आई माँ मर गई…” नीलम जल बिन मछली की भांति कराह उठी। महेश ने उसकी चूचियों को ज़ोर से भीच लिया और हल्के हल्के झटके देने शुरू किए। महेश उसकी चुचियों को दबा रहा था, उसे चूम रहा था और लगातार हल्के हल्के झटके लगाए जा रहा था.

नीलम की चूत लन्ड की गर्मी से पिघलती जा रही थी, उसके बदन फिर गर्म हो रहा था, दर्द और शर्म की जगह काम सुख ने ली- आह… पिताजी बड़ा… मजा आ रहा है… ऐसे ही… आह… मुझे आपका लन्ड चाहिए… आह…

महेश- देख आया न मजा साली रंडी… ऐसे ही नाटक कर रही थी.

नीलम- उम्म… आह… अब से आप मेरे पति हो… आह… तेज़ करो फाड़ दो फिर से मेरी आह…

महेश- हम्म आज से पत्नी हुई तू मेरी… क्या चूत है तेरी… आह… और नहीं सहन होता!

नीलम- तो कौन रोक रहा है… बन जाओ घोड़े और मसल दो मुझे… आह…

महेश ने अपने झटकों की रफ्तार एक का एक तेज़ कर दी ‘फच… फच…’ की आवाज से एक बार फिर सारा घर गूँजने लगा… दोनों ससुर बहू की एक लम्बी आह के साथ एक साथ झड़ गए।

महेश का लन्ड सिकुड़ के अपने आप बाहर आ गया।

नीलम- पापा, मजा आ गया, मैं तो फैन हो गयी आपके इस मूसल लन्ड की।

महेश- बहू अभी तो पूरा जलवा कहाँ देखा है तूने असली फैन तो तू रात खत्म होने पर बनेगी… अभी सारी रात बाकी है और चुदाई के कई दौर भी।

नीलम- अभी और चुदाई करोगे क्या ?

महेश- बस तू देखती जा बहू, सब ठीक कर दूँगा मैं। तू सोफ़े पर बैठ और टीवी देख मैं तेरे लिये कॉफी बना के लाता हूँ।

नीलम- नहीं पापा आप क्यों? मैं बनाकर लाती हूँ।

महेश- अरे अब क्या औपचारिकता निभानी? तू आराम कर अभी बड़ी मेहनत करनी है तुझे। यह देख मेरा लन्ड फिर खड़ा हो गया है।

नीलम- हाय राम, कितना बड़ा लग रहा है यह तो।

बेचारी अपने ससुर के मूसल लन्ड को देख कर घबरा गई थी… अब उसके ससुर ने लन्ड तेल भी लगा रखी थी, लन्ड खम्बे जैसा लग रहा था।

महेश- बहू मेरी प्यारी रांड, तू लन्ड से मत घबरा यह तो तुम्हारे मज़े की चाबी है। तूम बैठो मैं आता हूँ।
 
महेश रसोई में गया,नीलम ने टीवी ऑन कर लिया और “सीरियल” देखने लगी।

नीलम-कितनी जल्दी कॉफी बना लाये पिताजी ।आप कितने बेकरार है।

महेश कॉफी के दो कप लेकर आया था और नीलम को कप देते हुए बोला- बेकरार तो हम हैं ही, देखो तो बेचारा अभी तक अकड़ा हुआ है.

नीलम- इसमें मेरा क्या कसूर है?

महेश- तेरा नहीं पर तेरे इस हुस्न का कसूर है।

नीलम- तो आओ इसका इलाज कर देती हूँ।

महेश उसके पास ही सोफ़े पर बैठ गया। नीलम ने अपने ससुर के लन्ड को एक हाथ से पकड़ लिया और कॉफी पीते हुए मुठियाने लगी।

महेश- बहू बड़ा मस्त माल है तू कॉफी पीते हुए लन्ड का मजा लेगी?

नीलम- पर मुझे तो सीरियल देखना है।

महेश- वो तो मैं भी देखूँगा, तू आ जा मेरी गोद में और चढ़ जा इस लंड पे, फिर देख तीनों चीजों का मजा आएगा।

महेश सोफ़े पर पीठ लगा के आराम से बैठ गया, नीलम उठी मुँह टीवी और पीठ महेश की तरफ करके महेश के गोद में बैठने लगी.महेश ने अपने लन्ड को पकड़ के नीलम की चूत के नीचे सेट किया।

नीलम- ऊई माँ… आपका लंड चुभता है पिताजी।

वो लन्ड पर बैठते हुए बोली। वो जैसे अपना वजन लन्ड पर डालती जा रही थी वैसे वैसे लन्ड उसकी फुद्दी में घुसता जा रहा था।

“उफ्फ… आह कितना मोटा है दर्द हो रहा है.” नीलम सिसक उठी।

महेश- तुझे पसंद आया मेरा लन्ड बहु?

नीलम ने अपना पूरा वजन लन्ड पर डाल दिया और लन्ड सरकता हुआ जड़ तक नीलम की गीली चूत में समा गया.

“अहह… बहुत पसंद है पिताजी आह… ओह माँ!”

महेश ने हल्के हल्के झटके देने शुरू किए, उसका अजगर जैसा लन्ड नीलम कि चूत के दाने से रगड़ खाता हुआ अंदर बाहर होने लगा। नीलम की आह… आह… पूरे घर में गूँजने लगी।

महेश- बहू, तू कॉफी नहीं पी रही बता तो कैसी बनी है?

नीलम- आह… अहह…पिताजी आप इतना उछाल रहे हो कैसे पीऊँ?

महेश- चल ऐसा करते हैं, मैं एक झटका दूँगा और तू एक घूँट पीना फिर मैं एक झटका दूँगा तो दूसरा घूँट पीना इतना कह कर महेश ने एक भारी झटका मारा उसका लन्ड जोर से नीलम की बच्चेदानी से जा टकराया. उसने लन्ड पीछे नहीं खींचा अंदर ही रहने दिया। नीलम की चूत की कसावट और गर्मी से महेश को असीम मजा आ रहा था।

नीलम कॉफी पीते हुए- मस्त है पिताजी।

महेश- क्या मस्त है मेरी रांड?

नीलम- कॉफी और क्या?
 
महेश- तो मेरा धक्का मस्त नहीं था क्या? अब यह अगला वाला तुझे ज़रूर पसंद आएगा।

उसने अपने लन्ड टोपे तक बाहर खींच लिया और फिर एक ज़ोरदार शॉट मारा, वैसा ही शॉट जैसा क्रिसगेल या बिराट कोहली क्रिकेट में मारता है।

नीलम चिल्ला पड़ी- आई माँ मर गयी… बुड्ढे फाड़ेगा क्या? आराम से कर!

यह सुन कर महेश की वासना चर्म पर पहुँच गयी और उसने बिना रुके 8-10 शॉट मार दिए और फिर अपनी बहु के मम्में दबाता हुआ बोला- साली मेरी रंडी बहू तू किस काम की जवान है जो बूढ़े से तेरी फट रही है।

ससुर की गन्दी बातों ने नीलम की काम इच्छा को बढ़ा दिया, वो नीलम को चुदाई और गलियों की काफी ट्रेनिग दे चुका था पर अब उसकी बारी थी, इससे पहले कि वो कुछ समझ पाता, नीलम लन्ड को चूत में लिए लिए ही 180 डिग्री घूम गयी, उसने अपनी गोरी बाहें अपने ससुर के गले में डाल दीं और फुल स्पीड लन्ड पर उठक बैठक करने लगी।

“आह… आह… साली रंडी लन्ड को छीलेगी क्या… आह… कुतिया साली आराम से कर…” महेश बेबस होता हुआ बोला।

“साले बेटी चोद बूढ़े अब बोल… तेरे इस अजगर को चूहा न बनाया तो मेरा नाम नीलम नहीं!” नीलम मशीन की तरह उछलते हुए बोली, वो अपनी सारी ताकत लगा कर उछल रही थी उसके ससुर का लन्ड उसकी कसी हुई चूत में खूंटे की तरह फंसा हुआ था. वो कुछ देर और मुकाबला कर लेती तो जंग जीत जाती पर वो थक गई और कुछ धीरे हो गयी।

महेश बस झड़ने ही वाला था, मौका देख कर वो नीलम पर भूखे शेर की तरह झपट पड़ा, उसने नीलम को सोफ़े पर फेंक दिया और उस पर घोड़े की तरह चढ़ गया; उसने नीलम के गले को पकड़ लिया और ऐ. के47 की तरह ताबड़तोड़ शॉट लगाने शुरू कर दिए।

“साली बड़ी चुदक्कड़ बन रही थी न… तेरी इस फूल सी चूत का भोसड़ा न बना दिया तो मैं अपने बाप की औलाद नहीं!” वो नीलम को बेहरहमी से पेलते हुए बके जा रहा था।
 
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