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बहन का दर्द Complete

बारिश में बूँदों से उसका संगमर मर सा बदन और उस पर उसकी सेक्सी नथ बिजली की रोशनी बार-बार दमकती है...और

रवि एक तक खड़ा-खड़ा अलका के मस्ताने जिस्म को अपनी प्यार भरी नज़रों नज़रो से देख रहा था तब अलका ने अपनी नज़रे उपर उठा कर रवि को देखा और दोनो की नज़रे मिल जाती है और रवि अलका की तरफ हाथ बढ़ा कर उसे अपनी बाँहे दिखाता है तो अलका दौड़ कर रवि से लिपट जाती है और रवि अलका को बेतहाशा चूमते हुए उसको अपनी गोद मे उठा कर

फिर से अपने उपर चढ़ा लेता है, और उसको अपने लंड पर टाँग कर दीदी तुम बहुत सेक्सी हो आइ लव यू, अलका उससे चिपक कर उसको चूमती रहती है,

रवि- दीदी तुम फिर से मेरे उपर चढ़ गई,

अलका रवि के सीने पर मुक्का मारते हुए, रवि तू बहुत गंदा है

रवि- अलका को चूमते हुए पर दीदी तुम बहुत अच्छी हो आइ लव यू

रवि अलका को उतार कर दीदी मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूँ और अलमारी से एक पॅकेट निकाल कर अलका को पीछे से अपनी बाँहो मे भर कर उसके गले को चूमता हुआ लो इसे अभी पहनकर दिखाओ, अलका उस पॅकेट को खोलती है तो उसके अंदर एक बहुत ही फैशनेबल वाइट कलर की ब्रा और पेंटी रहती है,

अलका- रवि को मुस्कुरा कर देखती हुई रवि मैं इसे बाद मे पहन लूँगी,

रवि- नही दीदी इसे तुम्हे अभी पहनना होगा,

अलका- पर रवि मैं तेरे सामने कैसे पहनु मुझे शरम आती है

रवि- मुस्कुराते हुए अच्छा मैं अपना मूह दूसरी तरफ कर लेता हूँ तब तो पहन सकती हो ना

अलका- कुछ सोच कर अगर तूने अपना मूह इधर घुमा लिया तो

रवि- अलका के होंठो को चूम कर उसके दूध को दबाता हुआ, दीदी मुझे तुम्हे अभी नंगी करना होता तो मैं कब का

कर चुका होता, पर मैं तुम्हारे इस खूबसूरत हुस्न को बहुत धीरे-धीरे पीना चाहता हूँ, बोलो पिलाओगी ना

अलका- अपने मोटे दूध को रवि द्वारा कस कर दबाए जाने से सीसियती हुई आह, रवि आज तू मुझे पागल कर देगा

रवि- अलका के पीछे चिपका हुआ अपना हाथ आगे लेजा कर उसके मसल गुदाज पेट को सहलाता हुआ अपने हाथ को उसकी पेंटी मे कसी फूली हुई चूत पर लेजा कर अपनी दीदी की चूत को पेंटी के उपर से कस कर पकड़ कर दबाता हुआ--- दीदी मैं तुम्हारी इस रसीली चूत का रस पीना चाहता हूँ बोलो पिलाओगी ना,

अलका- रवि से पलट कर चिपक जाती है और उसके होंठो को कस कर चूमते हुए ओह रवि तू मुझे तेरे साथ बहुत

अच्छा लग रहा है मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ तू मुझे कितना तडपा रहा है रवि और रवि को कसकर अपने दूध

से भींच लेती है

रवि- अपने हाथ को फिर से अलका की फूली हुई चूत पर लेजा कर उसकी चूत को अपने हाथो मे भर कर दबाता हुआ बोलो

दीदी अपनी इस मस्तानी चूत का रस मुझे पिलाओगी ना,

अलका- सीसीया कर आह, ओह रवि तुझे जो करना है कर लेना मैं तुझे नही रोकूंगी बस मुझे तू इसी तरह प्यार करता रहना

मुझे कभी छोड़ कर मत जाना मैं तेरे बिना मर जाउन्गा, आइ लव यू रवि

रवि- उसकी चूत को पेंटी के उपर से सहलाता हुआ. बोलो पिलाओगी ना

अलका-आह हाँ पिलाउन्गी रवि, हाँ पिलाउन्गी

रवि- अलका को चूम कर ठीक है दीदी तो जल्दी से ये कपड़े पहन लो मैं उधर मूह कर लेता हूँ और रवि अपना मूह दूसरी

ओर घुमा लेता है

..............................

 
और उधर एक अलग ही मौसम था ... रति और बिरजू खेत पर थे...उनके फार्म के बगल से ही नदी बहती है....और आज तो जबरदस्त मुसलाधार बारिश हो रही थी.....मौसम भी बड़ा खुस्गवार था...

बिरजू ने रति को अपनी बाहों मे लेकर बोलता है..... रति ....

बिरजू : रति आज तेरे साथ नदी मे नहाने का बड़ा मन कर रहा है...भीगते हुए नहाएँगे बारिश मे दोनो...

रति : हाँ भैया मुझे भी बड़ा मज़ा आएगा

बिरजू : अच्छा अब तेरे वहाँ दर्द तो नही है, उसने गान्ड की ओर इशारा करते हुए कहा

रति : अपने चेहरे पर बनावटी दर्द समेटते हुए, भैया कल जितना तो नही है पर थोड़ा दर्द अभी बाकी है

बिरजू : तो फिर कैसे जाएगा तेरा दर्द ,लेकिन रति यहाँ कोई देख लेगा तो अच्छा नही लगेगा

रति : भैया अभी थोड़ी देर रुक जाओ , कुछ खाने को बना लूँ..

रति ने फार्म मे बने रूम के किचन मे बाटी चोखा बनाया...

बिरजू रति की मोटी गान्ड और चुतड़ों को खा जाने वाली नज़रो से घूर रहा था

रति मंद मंद मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी

रति के मोटे दूध देख कर ही खड़ा हो गया था तभी रति ने अपने घाघरे के उपर से अपनी चूत पोछते हुए मुस्काई

रति : क्या भैया

बिरजू : रति कब चलेगी मेरे साथ नदी मे नहाने

रति : हाँ चलूंगी लेकिन वो आपकी गोद वो चढ़ कर पानी मे उतरूँगी मुझे बड़ा डर लगता है

बिरजू : तू फिकर ना कर मैं अपनी प्यारी बहना को अपनी गोद वो उठा कर नहलाउंगा, इतना कह कर बिरजू ने रति की मोटी गान्ड पर हाथ रख दिया उसका लहंगा पहले से ही उपर चढ़ा हुआ था और बिरजू का हाथ उसकी नंगी गान्ड पर चला गया, और लंड यह जान कर पूरी तरह अकड़ गया कि रति ने पैंटी नही पहनी हुई थी, बिरजू की उंगलियो से उसकी गान्ड की दरार बस एक इंच की दूरी पर थी लेकिन वो हाथ आगे नही बढ़ा पा रहा था

रति : भैया आप मुझसे बहुत प्यार करते हो ना

बिरजू : यह भी कोई पूछने की बात है,

रति ने इतना सुना और अपने मूह से बिरजू के होंठो को चूम लिया और उसका हाथ अपने आप बिरजू की छाती पर बलोँकि घाटी मे घूमने लगा रति कस कर उस से चिपक गई,

अब बिरजू बेतहाशा रति के रसीले होंठो को चूसने लगा और उसकी मोटी गान्ड की गहरी दरार वो हाथ फेरने लगा

रति : भैया एक बात कहूँ

बिरजू : क्या

अलका और रवि क्या कर रहे होंगें....

बिरजू: उन्हे मस्ती करने दे हम उन्हे प्राइवसी देने के लिए ही तो यहाँ पड़े हैं... आज वैसे भी वॅलिंटाइन डे है ....

रति :तो क्या आज रवि अलका को चोद देगा....

बिरजू: शायद...तेरे को याद है ना हमारी पहली चुदाई आज के ही दिन हुई थी और ठीक नौ महीने बाद अलका पैदा हुई थी....

रति: तो क्या आज इतिहास अपने आप को दोहराएगा......

बिरजू: लगता तो ऐसा ही है....और दोनो एक दूसरे के गले लग जाते हैं...

रति: ओह भैया एक चीज़ तो हम भूल ही गये जल्द बाज़ी मे...

बिरजू: क्या/....?

रति: वो निरोध का पॅकेट ....

बिरजू: कुछ नहीं होगा एक दिन मे तू मस्त रह....

भैया: मैं पूरे फर्टाइल पीरियड मे हम कहीं कुछ हो ना जाए...

बिरजू: तू बहुत चिंता करती है... मस्त रहा कर...

बिरजू हाथ के उपर हाथ रख कर अपने दूध को दबाने लगा

बिरजू : और कुछ

रति : मुस्कुराते हुए, कुछ नहीं...

बिरजू : धीरे से रति की गान्ड सहलाते हुए उसकी चूत की फांको को उंगलियो से कुरेदा और फिर कहा बता ना रति मैं क्या बहुत अच्छा चाट्ता हूँ

रति : धीरे से बिरजू कान के पास मूह लगा कर कहने लगी, भैया आप चाटते थोड़े ही हो, आप तो चूस्ते हो और पीते हो

बिरजू : रति के मोटे मोटे दूध को दबाते हुए, बता ना क्या पीता हूँ

रति : अपनी बहन की चूत और क्या

बिरजू : भला कोई भाई अपनी बहन की चूत पीता है क्या इतना कह कर बिरजू ने अपनी जीभ रति के मूह वो डाल ली और वह बिरजू की जीभ चूस कर कहने लगी,

रति-भैया आज कल तो सब सबसे पहले अपनी बहन की ही चूत पीना पसंद करते है

बिरजू : तुझे कैसे पता है यह सब

रति : मुझे शरम आती है

बिरजू : अच्छा मैं तेरी चूत चाटूँगा फिर तो बताएगी

रति : मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन कोई देख लेगा तो

 
बिरजू उसकी रसीली छूट की मादक गंध सूंघते ही पागल हो गया और अपनी बहन की रसीली चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा, लेकिन तभी मुझे ज़ोर का झटका लगा जब रति ने बिरजू काले लंड को धोती के उपर से अपने हाथ वो भर कर दबोच लिया, वो उस एहसास से पागल होने लगा और रति की मस्त चूत को अपने हाथों से फैला फैला कर चाटने लगा. इतने मे रति ने बिरजू लंड को धोती से बाहर निकाला और बिरजू लंड को चूसने लगी .

बिरजू तो चकित हो गया कि रति किसी एक्सपर्ट की तरह बिरजू के मस्त लंड को चूस रही थी, कुछ देर बाद रति ने कहा भैया इधर आओ ना, वो उठ कर उसकी तरफ चला गया और उसे देखा तो उसने बिरजू हाथ पकड़ कर अपने मोटे मोटे दूध पर रख दिए और वो अपनी बहन के कसे हुए ठोस दूध को

कस कस कर दबाने लगा, रत के 12 बज चुके थे गाँव वो सन्नाटा था और रति अपने दूध दबावते हुए बिरजू लॅंड को खूब दबा दबा कर देख रही थी, नदी के पानी मे और बारिश मे सुहाना चुदाई का संगम चल रहा था...

रति : भैया आज कल तो लोग सबसे पहले अपनी बहन को ही नंगी करके चोदना चाहते है

बिरजू : तूने कही सुना है ऐसा

रति अपने बच्चों को ही देख लो.....

बिरजू : मुस्कुराते हुए अपनी बहन के रसीले होंठो को दबा दबा कर चूस्ते हुए, अरे रति जब बेहन अलका और तेरे जैसी मस्त माल हो तो कोई क्यों भाई और कहीं जाएगा...तू बता

रति : बिरजू लॅंड को दबाते हुए, अरे भैया आजकल तो लोगो को सबसे ज़्यादा अपनी बहन के दूध और चूतड़ ही सबसे ज़्यादा अच्छे लगते है, और दोनो हँसने लगे....तुम्हे भी मेरे चूतड़ को देखना अच्छा लगता है ना

बिरजू : चूत मे उंगली पेलते हुए, मुझे तो तेरे और अलका दोनो के चूतड़ बहुत अच्छे लगते है

रति : तो क्या आज रात भर आप अपनी बहन को पूरी नंगी करके चोदोगे

बिरजू : क्या तू अपने भैया का मोटा तगड़ा लंड अपनी चूतमे नही डलवाना चाहती है

रति : मैं तो कब से अपने भैया के मोटे तगड़े लंड से चुदने के लिए तड़प रही हूँ, भैया अपनी बहन के उपर चढ़ो ना

 
रति की बात सुन कर बिरजू ने उसकी मोटी जाँघो को फैला कर अपने मस्ताने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख कर उसके दूध को दबोचते हुए एक कस कर धक्का दिया और रति बिरजू से कस कर चिपक गई

रति : ओह भैया आह सी सी बहुत मोटा और लंबा है रति की चूत फटी जा रही आ सी स ओह भैया,

बिरजू : ओह रति कितनी कसी हुई टाइट चूत है तेरी पर तेरे दूध बड़े कसिले है रति बस थोड़ा सा लंड और बचा है

रति : धीरे धीरे डालो भैया आह सी सीईइ ओह मर गई भैया

बिरजू ने रति को धीरे धीरे गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए और रति भी धीरे धीरे अपनी कमर उचकाने लगी,

रति=आह भैया थोड़ा तेज तेज करो ना बहुत मज़ा आ रहा है, बिरजू ने रति के मोटे मोटे चुतड़ों के नीचे अपने हाथ लगा कर खूब कस कर कर रति की चूत मे अपने काले मूसल को पेलने लगा और रति खूब चिपक चिपक कर अपनी चूत मरवाने लगी,

रति : तगड़े धक्के अपनी चूत मे लेते हुए आह ओह ओह भैया मैं वो सब जानती हूँ, पहले दिन से ही तुम्हारी नज़रे जब अलका की मोटी गान्ड पर पड़ी हुई है...मैं समझ गयी तुम्हारी नियत अब ...अपनी बेटी पर ही दिल डोल गया है....

बिरजू: चुप रह और चुदाई का मज़ा ले....

बिरजू : कस कस कर लंड अपनी बहन रति की मस्त चूत को पेलते हुए, रति क्या अलका भी अपनी चूत रगड़ रगड़ कर पानी निकालती होगी

रति : क्यो नही भैया आह स ओह हर औरत जवान होती है तो अपनी चूत ज़रूर रगड़ती है.

रति : भैया एक बार अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर उस को दिखा दो तो वह तुम्हारे खड़े लंड को देख कर पागल हो जाएगी और अपनी मस्त भोस में वो आपका लंड लेने के लिए तड़प जाएगी, आपका लंड ही इतना मोटा तगड़ा है कि किसी की बुर भी पानी छोड़ सकती है,

बिरजू : अरे रति मैं तो खुद उस को पूरी नंगी करके उसकी मस्त चूत मारना चाहता हूँ पर अभी तक उसने पता नहीं रवि तक को दी है या नहीं दी है....

रति : भैया अब खूब तेज तेज चोदो बड़ा मज़ा आ रहा है, खूब चूत मारो अपनी रति रानी की, वैसे भी किसी का भी लंड सबसे ज़्यादा अपनी बहन और बेटी की नंगी जवानी देख कर ही खड़ा होता है, आज रात भर खूब चोदिये भैया अपनी बहन को

बिरजू : हाई रति ले अपने भैया का मस्त लंड तेरी चूत भी बिल्कुल माँ पर गई है और तेरे चूतड़ भी माँ की तरह ही मोटे मोटे होते जा रहे है

रति : आह आह ओह भैया तुमने क्या उस की चूत देखी है..आज बिरजू के मन मैं केवल अलका का चेहरा ही घूम रहा था...वो चूत तो रति की मार रहा था दिमाग़ मे अलका चल रही थी....

 
बिरजू : हाई रति ले अपने भैया का मस्त लंड तेरी चूत भी बिल्कुल माँ पर गई है और तेरे चूतड़ भी माँ की तरह ही मोटे मोटे होते जा रहे है

रति : आह आह ओह भैया तुमने क्या उस की चूत देखी है..आज बिरजू के मन मैं केवल अलका का चेहरा ही घूम रहा था...वो चूत तो रति की मार रहा था दिमाग़ मे अलका चल रही थी....

बिरजू : वो रवि के साथ मटकती गान्ड के साथ बाइक पर बैठती है तो बॅस....

रति जान रही थी क़ि आज उसके दिमाग़ मे अलका चल रही है और तभी बिरजू आज इतना उतेज़ित है....वो चुदाई के मज़े के लिए उसे और उकसा रही थी...

रति : भैया कभी अलका को मुत्ते हुए देखा है आपने

बिरजू : देखा है बहुत मोटी धार निकलती है पर जब वो छोटी थी...

रति : भैया एक बात कहूँ

बिरजू : क्या

रति : वो चाहती हूँ कि आप अलका को मेरे सामने नंगी करके खूब कस कस कर चोदो, मैं चाहती हूँ कि मैं छुप जाउ और आप उसे रगड़ के चोदो...और मैं छुप कर चोदते हुए देखु, वो देखना चाहती हूँ कि आपके मस्त काले लंड को कैसे चुस्ती है और फिर आप उसको को झुका कर कैसे उसकी मस्त चूत को खूब हमच हमच कर चोदते हो, मैं चाहती हूँ आप अलका को खड़ी करके उसकी मस्त चूत के दाने को रगड़ते जाओ और वो खड़ी खड़ी मुत्ती जाए, जब वह मुतना रोक दे तो आप उसकी मस्त चूत के दाने को अपने मूह वो भर कर चूसना शुरू कर दो और फिर वो आपके मूह मे मुतना शुरू कर दे

बिरजू : तू फिकर ना कर जब भी मैं अलका को पूरी नंगी करके चोदुन्गा तुझे ज़रूर बताउन्गा, लेकिन उस को चोदने के लिए पटाऊ कैसे

रति: कोई रास्ता निकलते हैं.....

बिरजू : रति की चूत मे गहराई तक लंड पेलते हुए, हाई रति ठंड के मौसम मे हाई हाई करने लगती है...

बिरजू : ठीक है बिरजू की रानी बहना जैसा तू कहेगी वैसा ही करूँगा अब ज़रा अपनी जांघे थोड़ा और फैला कर उठा ले ताकि तेरे भैया का मोटा लंड अपनी बहन की चूत की जम कर ठुकाई कर सके और फिर उसने रति को खूब कस कस कर चोदना शुरू कर दिया और रति है भैया हाई बिरजू राजा भैया चोदो मुझे खूब कस कर चोदो आज फाड़ दो अपनी बहन की रसीली चूत और चोदो आ आ आह ओह सी सी ओह भैया मैं मर जाउन्गी बस फिर क्या था बिरजू ने रति की गान्ड को अपनी हथेली उठा कर ताबड तोड़ धक्के उसकी चूत मे मारना शुरू कर दिया और फिर सारा रस रति की रसीली बुर मे डाल दिया और दोनो हान्फते हुए चिपक गये, उस रात रति को बिना निरोध के उस ने रात भर खूब जम जम कर छोड़ा पानी .... अब बारिश बंद हो चुकी थी....और दोनो रात भर की चुदाई से थक गये थी वो दोनो सुबह 4 बजे सोए.....,

अब यहाँ.......

अलका रवि की पीठ को देखते हुए शरमाती हुई अपनी ब्रा का हुक खोलने लगती है और फिर रवि की लाई हुई ब्रा को पहन लेती है और जल्दी से रवि को देखते हुए अपनी पेंटी भी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है और फिर जल्दी से दूसरी पेंटी पहन लेती है और रवि को देखती हुई बुत बन कर खड़ी हो जाती है, उस समय अलका को बहुत शर्म महसूस हो रही थी, जब रवि

बुहुत देर तक नही पलटता है तो अलका धीरे से जाकर रवि को पीछे से पकड़ कर उसकी पीठ से चिपक जाती है और रवि

उसकी ओर घूम कर अलका की बाँहो को अपने हाथो से पकड़ कर थोड़ा अपने से दूर करता है और फिर उपर से लेकर नीचे

तक अलका के पूरे संगमरमर जैसे बदन पर अपनी नज़र डालता है और उसका लंड खड़ा हो जाता है, अलका मुस्कुराती हुई

अपनी नज़रे नीचे कर लेती है और रवि अलका के करीब जाकर उसे सीधा अपनी गोद मे उठाकर बेड पर लेजा कर लिटा देता है, और अलका की आँखो मे देखता है, अलका शर्म से लाल हो जाती है और अपना मूह दूसरी और कर के मंद -मंद मुस्कुराती रहती है, रवि अलका के मूह को अपनी ओर घुमा कर उसके रसीले होंठो को चूम लेता है और अलका अपनी आँखे बंद कर लेती है,

रवि धीरे-धीरे अपने मूह से अलका के गालो को चूमता हुआ उसकी गर्दन से होता हुआ उसकी उभरी हुई ब्रा मे कसी

चुचियो पर अपना मूह दबाता है और अलका की साँसे तेज होने लगती है रवि अपने एक हाथ को अलका की कसी हुई गुदाज

गोरी-गोरी जाँघो पर ले जाकर उन्हे कस कर दबोचता हुआ अलका के गुदाज पेट पर अपना मूह रख कर चूमता है तो अलका का पेट लरज कर अंदर की ओर धँस जाता है और अलका के मूह से एक आह भरी सिसकी निकल जाती है और रवि उसकी जाँघो को अपने हाथों से कस कर दबाता है फिर रवि अपने मूह को पेंटी के उपर से जब अलका की फूली हुई चूत पर रख कर दबाता है तो अलका अपने दोनो पैरो को आपस मे सटा कर सिहर जाती है और रवि के सर को अपने हाथो से सहलाने लगती है, रवि अलका की चूत से उठती हुई मादक खुसबू को सूँघता हुआ उसकी चूत को अपने मूह से कस कर दबाता है और अलका अपने बदन को ऐंठने लगती है,

 
रवि अलका का हाथ पकड़ कर उसको उठा कर बैठा देता है और उसको अपनी बाँहो मे कस लेता है और अलका भी रवि की

बाँहो से लिपट जाती है रवि अलका के होंठो को चूमता हुआ अपना हाथ पीछे लेजा कर उसकी ब्रा का हुक खोल देता है और

उसके मोटे दूध ब्रा की कप से आज़ाद हो जाते है. रवि अपनी दीदी के कसे हुए रसीले आमो को देख कर पागल हो जाता है

और उसके मोटे-मोटे कसे रसीले आमो को अपने हाथो से कस-कस कर मसल्ते हुए उसकी चुचि के निप्पल को अपने मूह मे

भर कर दबा-दबा कर चूसने लगता है और अलका आह आह करती हुई रवि से लीपटने की कोशिश करने लगती है,

रवि अलका के मोटे-मोटे दूध को कस-कर दबाता हुआ उसके दूध को पीने लगता है और अलका ओह रवि आह रवि प्लीज़

आह करने लगती है, उसके बाद रवि अलका की कमर मे हाथ डाल कर उसको अपने उपर खिचता हुआ अपना हाथ उसकी मोटी -मोटी गान्ड मे भर कर उसकी मोटी गान्ड को दबाते हुए उसके रसीले होंठो को चूसने लगता है और अलका अपनी आँखे बंद किए हुए सीसीयाने लगती है रवि अलका को बेड पर लेटा देता है और अलका उल्टी होकर लेट जाती है और रवि अपने मूह को सीधे अपनी दीदी की मोटी गान्ड पर रख कर अपने मूह को उसकी गदराई गान्ड के उपर दबाने लगता है, अलका अपना मूह तकिये मे छुपाए मज़ा लेती रहती है फिर रवि धीर से अपनी दीदी की पेंटी को नीचे खीच कर उसके गदराए चुतड़ों को नंगा कर देता है और रवि अपनी दीदी के गुदाज चुतड़ों और उसकी गहरी खाई को देख कर मदहोश हो जाता है और अपने मूह को अपनी दीदी के नंगे मोटे-मोटे चुतड़ों पर रख कर अपने हाथों से दबाते हुए पागलो की तरह चूमने लगता है, फिर

रवि डॉली के मस्ताने चुतड़ों को फैला कर उसकी गुदा को अपने हाथो से सहलाता हुआ उसकी जाँघो उसकी मोटी गान्ड पर

अपने हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से देखने लगता है,

बारिश अपने पूरे शबाब पर थी...और इधर भाई बेहन अपने मधुर संगम की ओर बढ़ रहे थे.....

बीच बीच मे अलका की नथ का मोती बिजली चमकने से अंगार पैदा करताा है रवि के सीने मे.... और वो अलका

की नाक की नथ को चूम लेता है....लौंडिया सिहर उठती है....

कुछ देर बाद रवि अपनी दीदी की पेंटी उसके पेरो से निकाल कर अलग कर देता है और उसकी दीदी उसके सामने मादर जात नंगी पड़ी रहती है रवि का लंड उसका पाजामा फाड़ने को आतुर हो जाता है और रवि अलका की कमर मे हाथ डाल कर उसको सीधी कर देता है और अलका अपने मूह को अपने दोनो हाथो से छुपा लेती है, रवि जब अपनी दीदी की फूली हुई बिना बालो की चिकनी चूत को देखता है तो बिना रुके उस पर अपना मूह रख देता है और अपने मूह से उसकी फूली हुई गदराई चूत को दबाते हुए चूमने लगता है और अलका गहरी-गहरी साँसे लेती हुई अपने मूह पर अपना हाथ रखे सहमी सी पड़ी रहती है,

रवि अपनी दीदी की नंगी चूत पर अपना हाथ फेर कर अलका को देख कर मुस्कुराता हुआ, दीदी अपना हाथ अपने मूह से हटा कर मेरी तरफ देखो ना

लेकिन अलका चुपचाप अपने मूह को छुपाए लेटी रहती है,

रवि- दीदी प्लीज़ मेरी तरफ देखो ना, और अलका धीरे से अपना हाथ हटा कर रवि को देखती है, और रवि उसको

मुस्कुराता हुआ देख कर उसकी चूत को अलका के सामने चूम लेता है और अलका रवि से उठ कर चिपक जाती है और उसको अपने सीने से लगा लेती है, रवि अलका को अपने पास बैठा कर धीरे-धीरे उसके दूध मसल्ने लगता है और अपने मूह से

उसके होंठो को चूमते हुए

रवि- दीदी कैसा लग रहा है,

अलका उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए उससे लिपट जाती है और रवि अपना एक हाथ उसकी दोनो जाँघो को थोड़ा खोल कर उसकी फूली हुई रस से भीगी चूत की दरार मे रख कर उसकी फूली हुई फांको को अलग-अलग करके सहलाने लगता है, अलका आह आह करती हूँ रवि को कस कर पकड़ लेती है,

रवि- अलका की चूत की फांको को सहलाता हुआ --दीदी

अलका-हूँ

रवि- देखो दीदी आज मैने तुम्हे पूरी नंगी कर ही दिया

अलका- रवि को मारते हुए रवि तू बहुत खराब है

रवि -अलका के मूह को चूमता हुआ, दीदी मुझे नंगा देखोगी,

अलका - अपना मूह रवि की छाती मे छुपाती हुई, नही

रवि- प्लीज़ दीदी एक बार देख लो ना, बोलो देखोगी ना

अलका- मुस्कुरा कर मैं नही जानती.

रवि- दीदी पहले कभी तुमने मुझे नंगा देखा है

अलका- झूठ बोलते हुए नही

रवि- आज देखोगी

अलका- मुस्कुरा कर मैं नही जानती

रवि- ठीक है तुम कहती हो तो मैं नंगा हो जाता हूँ

अलका- रवि को देख कर मुस्कुराते हुए मैने कब कहा

रवि- तुमने मना भी तो नही किया ना, और रवि अपनी बनियान उतार देता है, और अपनी बॉडी दिखाते हुए दीदी आओ ना और अलका उसके सीने से चिपकते हुए अपने मोटे दूध को उसकी उसकी छाती से लगा देती है और रवि जब अपनी बहन के नंगे बदन से अपना नंगा बदन चिपकाता है तो उसे एक अद्भुत आनंद का एहसास होता है और वह अपनी दीदी की मस्तानी गान्ड को अपने हाथ मे भर कर उसे अपने उपर चढ़ाने की कोशिश करता हुआ अलका को अपने बदन से कस कर दबा लेता है और अलका की चूत पानी छोड़ने लगती है, रवि का मोटा लंड उसके पाजामे मे अकडा खड़ा हुआ था और रवि अपनी दीदी का हाथ पकड़ कर अपने मोटे लंड के उपर जब रखता है तो अलका को एक दम उसके मोटे लंड का एहसास होता है और वह एक दम से अपना हाथ हटा लेती है,

रवि- दीदी एक बार पकडो ना तुम्हे बहुत अच्छा लगेगा,

 
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