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उसने अपनी एक टांग को टेबल पर रखा और अपनी चूत को शीशे में देखा तो उसकी आंखे उत्तेजना से लाल हो गई। उसकी चूत पूरी तरह से लाल होकर सूज गई थी जिससे उसे दर्द का एहसास हो रहा था। शहनाज़ ने धीरे से अपनी चूत के होंठ को सहलाया फिर हल्के गुनगुने पानी से नहाने लगी। शहनाज़ के बदन में हो रहा चुदाई का दर्द काफी हद तक कम हो गया और वो अपने कपड़े पहनते हुए अजय के बारे में सोचने लगी। कमीना कहीं का, कोई भला ऐसे करता है क्या ? मेरी जगह कोई ए क कुंवारी लड़की होती तो उसका क्या हाल होगा।
ये ही सब सोचते सोचते वो बाहर आ गई और फिर सबने साथ में नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद अजय उन्हें आज रात होने वाली पूजा के बारे में समझाने लगा।
अजय:" बस आज रात शहनाज़ की आखिरी विधि होगी और उसके बाद कल आखिरी पूजा सिर्फ सौंदर्या के साथ होगी क्योंकि आज रात के बाद मंगल का प्रभाव कम हो जाएगा। आज पूर्णिमा की रात होगी और थोड़ी देर के लिए रात में इन्द्र धनुष दिखाई देगा जो इस बात का सबूत होगा कि हम कामयाब होने वाले है।
दोनो ने ध्यान से उसकी बाते सुनी और देखते ही देखते शाम के छह बज गए तो सभी ने हल्का सा खाना किया और फिर पूजा की आगे की विधि करने के लिए गंगा के किनारे आ गए।
बाहर अंधेरा हो गया था और तीनो के बदन पर अभी सिर्फ काली चादर लिपटी हुई थी।
अजय एक स्थान पर बैठ गया हवन के पास बैठ गया और मंत्र पढ़ने लगा। देखते ही देखते चारो ओर से जोर जोर से हवाएं चलने लगी और अजय के चेहरे पर मुस्कान फैल गई तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो स्माइल करने लगी।
अजय ने दोनो को उठने का इशारा किया और शहनाज़ के उठते ही उसके जिस्म पर लिपटी हुई चादर हवा के झोंके के साथ उड़ती चली गई और वो पूरी तरह से नंगी हो गई। शहनाज़ शर्म से लाल हो गई क्यूंकि सौंदर्या और अजय के सामने उसे बेहद शर्म आ रही थी।
अजय ने हवन कुंड के पास से एक लालटेन उठाई और शहनाज़ को अपने पास आने का इशारा किया। शहनाज़ मुंह नीचे किए धीरे धीरे चलती हुई उसके पास आई और अजय ने उसे लालटेन थमा दी और कुछ मंत्र पढ़ने लगा और फिर बोला:"
" शहनाज़ अब ये लालटेन जलती रहेगी चाहे कितनी भी तेज हवाएं चले। तुम इसे लेकर आगे आगे चलो और पीछे पीछे सौंदर्या आएगी। जैसे ही सामने इन्द्र धनुष दिख जाए तो आज की आधी पूजा कामयाब समझी जाएगी।
शहनाज़ का जिस्म लालटेन की रोशनी में बेहद खूबसूरत लग रहा था और उसकी चूत के आश पास मंगल यंत्र अभी भी हिल रहा था जिससे शहनाज़ बेचैन हो गई थी। उसने लालटेन को हाथ में लिया और आगे बढ़ने लगी।
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शहनाज़ के चलने के उसकी नंगी गांड़ पूरी तरह से कामुक अंदाज में हिल रही थी जिसका असर अजय के साथ साथ सौंदर्या पर भी हो रहा था। सौंदर्या को शहनाज़ के जिस्म पर पड़े हुए लाल निशान देखकर हैरानी हो रही थी कि इसे क्या हो गया है, कहीं ये सब पूजा का असर तो नहीं है या फिर अजय ने ही शहनाज़ को चोद....
सौंदर्या अगले ही पल सोचने लगी कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता, जरूर पूजा की वजह से ही ये सब हुआ है। वो शहनाज़ के पीछे पीछे चल रही थी और अजय उसके ठीक पीछे। तभी हवाएं बहुत तेजी से चलने लगी और लालटेन की बत्ती इधर उधर हिल रही थी लेकिन बुझ नहीं रही थी। हवाओं से सौंदर्या के जिस्म पर पड़ी हुई चादर भी हिल रही थी और उसकी गांड़ हल्की हल्की खुल कर दिख रही थी। अजय ने देखा कि उसकी बहन की गांड़ के दोनो हिस्से किसी भी तरह से शहनाज़ से बहुत ज्यादा कम कम नहीं थे। शायद एक या दो ही इंच कम लेकिन उसके मुकाबले काफी ठोस लग रहे थे।
तभी सामने आकाश में जोर जोर से बिजलियां कड़कने लगी और तेज हवाओं के साथ सौंदर्या की गांड़ पूरी तरह से नंगी हो गई। तभी सामने आकाश में इन्द्र धनुष बना हुआ दिखाई दिया और सौंदर्या उसे देखते ही खुशी से अजय की तरफ देखते हुए बोली:"
" भैया वो देखो इन्द्र धनुष।
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अजय ने एक बार इन्द्र धनुष की तरफ देखा और फिर उसने अपनी नजरे सौंदर्या की मोटी मोटी गांड़ पर टिका दी। उफ्फ क्या माल है उसकी बहन,सच में किसी भी तरह से शहनाज़ से कम नहीं, दोनो की गांड़ एक से बढ़कर एक। अजय इन्द्र धनुष कम और अपनी बहन की गांड़ ज्यादा देख रहा था।
इन्द्र धनुष के निकलते ही हवाएं रुक गई और शहनाज़ ने लालटेन को एक तरफ रख दिया और अपनी चादर को उठाकर अपने जिस्म पर लपेट लिया।
सौंदर्या खुशी से दौड़ती हुई अजय के गले लग गई और बोली:"
" भाई इन्द्र धनुष निकल गया इसका मतलब हमारी पूजा कामयाब हो रही हैं।
अजय ने सौंदर्या को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी गांड़ पर दोनो हाथ टिका कर बोला:"
" हाँ मेरी प्यारी दीदी, अब तुम दोष मुक्त होकर दुल्हन बन जाओगी।
इतना कहकर उसने सौंदर्या की गांड़ को हल्का सा सहला दिया तो सौंदर्या मचल गई और फिर उससे छूटकर शहनाज़ के गले लग गई।
अजय:" अच्छा अब देर मत करो क्योंकि अभी कुछ और विधियां आज के लिए बाकी है। उन्हें पूरा करना होगा।
खुशी से झूमती हुई अलग हो गई और बोली:"
" हाँ भैया बताओ ना क्या करना होगा अब मुझे
अजय:" देखो आचार्य जी ने बताया था कि मैं बहुत ही शुभ योग में पैदा हुआ हूं। इसलिए मेरे सारे शरीर की छाया तुम्हारे शरीर पर पड़नी चाहिए। वैसे तो रात में पूरा अंधेरा है लेकिन अभी इन्द्र धनुष की रोशनी में छाया बन ही जाएगी। एक बार इन्द्र धनुष गायब हो गया तो फिर सब व्यर्थ चला जाएगा।
सौंदर्य:" ओह भाई जल्दी बताओ ना कैसे और क्या करना होगा ?
अजय:" तुम दोनो पूरी तरह से नंगी होकर लेट जाओ। मै सीधा खड़ा रहूंगा। पहले छाया शहनाज़ पर और फिर तुम पर भी पड़ेगी।
अजय की बात सुनकर दोनो शर्म से लाल हो गई। सौंदर्या का कहीं ज्यादा बुरा हाल था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी अजय फिर से बोल उठा :"
" शरमाओ मत दीदी आप, अगर शर्म के कारण इन्द्र धनुष गायब हो गया तो आप ज़िन्दगी भर मांगलिक ही रह जाएगी।
सौंदर्या तड़प उठी और उसने बेबस नजरो से शहनाज़ की तरफ देखा जो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी। शहनाज़ अजय के इशारे पर तेजी से आगे बढ़ी और उसने सौंदर्या के जिस्म से चादर को खींच कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और सौंदर्या ने शर्म के मारे अपने दोनो हाथ अपने चेहरे पर रख लिए। अजय ने पहली बार अपनी बहन की गोल गोल ठोस नारियल के आकार की चुचियों को देखा और उसकी आंखे चमक उठी।
शहनाज़ और सौंदर्या दोनो जमीन पर पड़ी हुई चादर पर लेट गई। अजय ने अपनी चादर को हटा दिया और नंगा हो गया। उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहरा उठा जिसे देखते ही सौंदर्या के मुंह से डर के मारे चींखं निकल पड़ी और उसकी आंखे फिर से बंद हो गई। लंड को देखते ही शहनाज़ की आंखे चमक उठी और उसने अजय को एक कामुक इशारा किया।
अजय अब ठीक शहनाज़ के सामने खड़ा हुआ था और उसके जिस्म की परछाईं शहनाज़ के ऊपर पड़ रही थी। अजय शहनाज़ की तरह देखते हुए बोला:"
" ऐसे ही मेरी आंखो में देखती रहना, तभी जाकर ये विधि सही से पूर्ण होगी।
शहनाज़ ऐसे ही उसकी तरफ देखती रही और देखते ही देखते अजय उसके करीब आ गया और उसका लन्ड की परछाई अब शहनाज़ के होंठो के सामने पड़ रही थी और शहनाज़ ने अपनी जीभ निकाल कर अजय को इशारा किया तो अजय बोला:"
" बस शहनाज़ अब तुम्हारी बारी खत्म, अब परछाई सौंदर्या के उपर पड़नी चाहिए। दीदी जल्दी से आंखे खोल दो।
सौंदर्या ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और उसने अजय की आंखो से मिला दी। अजय के जिस्म की परछाईं उसके जिस्म पर पड़ रही थी और लंड की परछाई ठीक सौंदर्या की चूत पर पड़ रही थी। सौंदर्या का शर्म के मारे बुरा हाल हो गया था।
अजय:" बस दीदी हो गया, आपका जिस्म अब काफी हद तक मंगल के प्रभाव से मुक्त हो गया है। कल एक अंतिम दिन पूजा होगी। ढलते हुए इन्द्र धनुष की लालिमा आप पर कहीं बुरा असर ना कर दे इसलिए आप अपनी आंखे फिर से बंद कर लीजिए।
सौंदर्या ने जैसे ही आंखे बंद करी तो अजय ने शहनाज़ को स्माइल दी और शहनाज़ ने आगे बढ़कर उसके लंड को हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। देखते ही देखते उसने लंड को एक झटके के साथ मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
इन्द्र धनुष कभी का छुप गया हो और शहनाज़ बेसब्री सी लंड चूसे जा रही थी। अजय और शहनाज़ दोनो पूरी तरह से सौंदर्या से बेखबर हो गए थे और लंड चूसने से निकलती हुई आवाज से सौंदर्या बेचैन हो रही थी क्योंकि उसने कई बार सेक्सी मूवी में इस तरह की आवाज सुनी थी लेकिन उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि क्या सच में शहनाज़ उसके भाई का लंड चूस रही है।
शहनाज़ पूरी जोर जोर से लंड चूस रही थी और अजय के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसने शहनाज़ के मुंह में एक धक्का लगाया और उसके मुंह में वीर्य की पिचकारी मारते हुए जोर से सिसक पड़ा। सौंदर्या ने हिम्मत करके आंखे खोली तो उसे मानो यकीन नहीं हुआ। उसका भाई शहनाज़ की दोनो चूचियों को थामे हुए उसके मुंह में लंड से वीर्य की पिचकारी मार रहा था। अजय का लन्ड धीरे धीरे शहनाज़ के मुंह से बाहर निकल रहा था और सौंदर्या को यकीन नहीं हो रहा था कि इतना मोटा और तगड़ा लंड कैसे शहनाज़ के मुंह में घुस गया था।
जैसे ही शहनाज़ और अजय को होश आया तो उन्होंने सौंदर्या की तरफ देखा जिसकी आंखे फिर से बंद हो गई थी। अजय ने शहनाज़ के होंठो को चूम लिया और दोनो ने कपडे पहन लिए और शहनाज़ ने सौंदर्या को आवाज लगाई
" पूजा खत्म हो गई सौंदर्या, चलो जल्दी से अपने कपड़े पहन लो।
सौंदर्या में जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए और सभी वापिस कमरों की तरफ बढ़ गए। अंदर जाते ही फिर से सभी लोग गहरी नींद में चले गए।
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ये ही सब सोचते सोचते वो बाहर आ गई और फिर सबने साथ में नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद अजय उन्हें आज रात होने वाली पूजा के बारे में समझाने लगा।
अजय:" बस आज रात शहनाज़ की आखिरी विधि होगी और उसके बाद कल आखिरी पूजा सिर्फ सौंदर्या के साथ होगी क्योंकि आज रात के बाद मंगल का प्रभाव कम हो जाएगा। आज पूर्णिमा की रात होगी और थोड़ी देर के लिए रात में इन्द्र धनुष दिखाई देगा जो इस बात का सबूत होगा कि हम कामयाब होने वाले है।
दोनो ने ध्यान से उसकी बाते सुनी और देखते ही देखते शाम के छह बज गए तो सभी ने हल्का सा खाना किया और फिर पूजा की आगे की विधि करने के लिए गंगा के किनारे आ गए।
बाहर अंधेरा हो गया था और तीनो के बदन पर अभी सिर्फ काली चादर लिपटी हुई थी।
अजय एक स्थान पर बैठ गया हवन के पास बैठ गया और मंत्र पढ़ने लगा। देखते ही देखते चारो ओर से जोर जोर से हवाएं चलने लगी और अजय के चेहरे पर मुस्कान फैल गई तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो स्माइल करने लगी।
अजय ने दोनो को उठने का इशारा किया और शहनाज़ के उठते ही उसके जिस्म पर लिपटी हुई चादर हवा के झोंके के साथ उड़ती चली गई और वो पूरी तरह से नंगी हो गई। शहनाज़ शर्म से लाल हो गई क्यूंकि सौंदर्या और अजय के सामने उसे बेहद शर्म आ रही थी।
अजय ने हवन कुंड के पास से एक लालटेन उठाई और शहनाज़ को अपने पास आने का इशारा किया। शहनाज़ मुंह नीचे किए धीरे धीरे चलती हुई उसके पास आई और अजय ने उसे लालटेन थमा दी और कुछ मंत्र पढ़ने लगा और फिर बोला:"
" शहनाज़ अब ये लालटेन जलती रहेगी चाहे कितनी भी तेज हवाएं चले। तुम इसे लेकर आगे आगे चलो और पीछे पीछे सौंदर्या आएगी। जैसे ही सामने इन्द्र धनुष दिख जाए तो आज की आधी पूजा कामयाब समझी जाएगी।
शहनाज़ का जिस्म लालटेन की रोशनी में बेहद खूबसूरत लग रहा था और उसकी चूत के आश पास मंगल यंत्र अभी भी हिल रहा था जिससे शहनाज़ बेचैन हो गई थी। उसने लालटेन को हाथ में लिया और आगे बढ़ने लगी।
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शहनाज़ के चलने के उसकी नंगी गांड़ पूरी तरह से कामुक अंदाज में हिल रही थी जिसका असर अजय के साथ साथ सौंदर्या पर भी हो रहा था। सौंदर्या को शहनाज़ के जिस्म पर पड़े हुए लाल निशान देखकर हैरानी हो रही थी कि इसे क्या हो गया है, कहीं ये सब पूजा का असर तो नहीं है या फिर अजय ने ही शहनाज़ को चोद....
सौंदर्या अगले ही पल सोचने लगी कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता, जरूर पूजा की वजह से ही ये सब हुआ है। वो शहनाज़ के पीछे पीछे चल रही थी और अजय उसके ठीक पीछे। तभी हवाएं बहुत तेजी से चलने लगी और लालटेन की बत्ती इधर उधर हिल रही थी लेकिन बुझ नहीं रही थी। हवाओं से सौंदर्या के जिस्म पर पड़ी हुई चादर भी हिल रही थी और उसकी गांड़ हल्की हल्की खुल कर दिख रही थी। अजय ने देखा कि उसकी बहन की गांड़ के दोनो हिस्से किसी भी तरह से शहनाज़ से बहुत ज्यादा कम कम नहीं थे। शायद एक या दो ही इंच कम लेकिन उसके मुकाबले काफी ठोस लग रहे थे।
तभी सामने आकाश में जोर जोर से बिजलियां कड़कने लगी और तेज हवाओं के साथ सौंदर्या की गांड़ पूरी तरह से नंगी हो गई। तभी सामने आकाश में इन्द्र धनुष बना हुआ दिखाई दिया और सौंदर्या उसे देखते ही खुशी से अजय की तरफ देखते हुए बोली:"
" भैया वो देखो इन्द्र धनुष।
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अजय ने एक बार इन्द्र धनुष की तरफ देखा और फिर उसने अपनी नजरे सौंदर्या की मोटी मोटी गांड़ पर टिका दी। उफ्फ क्या माल है उसकी बहन,सच में किसी भी तरह से शहनाज़ से कम नहीं, दोनो की गांड़ एक से बढ़कर एक। अजय इन्द्र धनुष कम और अपनी बहन की गांड़ ज्यादा देख रहा था।
इन्द्र धनुष के निकलते ही हवाएं रुक गई और शहनाज़ ने लालटेन को एक तरफ रख दिया और अपनी चादर को उठाकर अपने जिस्म पर लपेट लिया।
सौंदर्या खुशी से दौड़ती हुई अजय के गले लग गई और बोली:"
" भाई इन्द्र धनुष निकल गया इसका मतलब हमारी पूजा कामयाब हो रही हैं।
अजय ने सौंदर्या को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी गांड़ पर दोनो हाथ टिका कर बोला:"
" हाँ मेरी प्यारी दीदी, अब तुम दोष मुक्त होकर दुल्हन बन जाओगी।
इतना कहकर उसने सौंदर्या की गांड़ को हल्का सा सहला दिया तो सौंदर्या मचल गई और फिर उससे छूटकर शहनाज़ के गले लग गई।
अजय:" अच्छा अब देर मत करो क्योंकि अभी कुछ और विधियां आज के लिए बाकी है। उन्हें पूरा करना होगा।
खुशी से झूमती हुई अलग हो गई और बोली:"
" हाँ भैया बताओ ना क्या करना होगा अब मुझे
अजय:" देखो आचार्य जी ने बताया था कि मैं बहुत ही शुभ योग में पैदा हुआ हूं। इसलिए मेरे सारे शरीर की छाया तुम्हारे शरीर पर पड़नी चाहिए। वैसे तो रात में पूरा अंधेरा है लेकिन अभी इन्द्र धनुष की रोशनी में छाया बन ही जाएगी। एक बार इन्द्र धनुष गायब हो गया तो फिर सब व्यर्थ चला जाएगा।
सौंदर्य:" ओह भाई जल्दी बताओ ना कैसे और क्या करना होगा ?
अजय:" तुम दोनो पूरी तरह से नंगी होकर लेट जाओ। मै सीधा खड़ा रहूंगा। पहले छाया शहनाज़ पर और फिर तुम पर भी पड़ेगी।
अजय की बात सुनकर दोनो शर्म से लाल हो गई। सौंदर्या का कहीं ज्यादा बुरा हाल था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी अजय फिर से बोल उठा :"
" शरमाओ मत दीदी आप, अगर शर्म के कारण इन्द्र धनुष गायब हो गया तो आप ज़िन्दगी भर मांगलिक ही रह जाएगी।
सौंदर्या तड़प उठी और उसने बेबस नजरो से शहनाज़ की तरफ देखा जो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी। शहनाज़ अजय के इशारे पर तेजी से आगे बढ़ी और उसने सौंदर्या के जिस्म से चादर को खींच कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और सौंदर्या ने शर्म के मारे अपने दोनो हाथ अपने चेहरे पर रख लिए। अजय ने पहली बार अपनी बहन की गोल गोल ठोस नारियल के आकार की चुचियों को देखा और उसकी आंखे चमक उठी।
शहनाज़ और सौंदर्या दोनो जमीन पर पड़ी हुई चादर पर लेट गई। अजय ने अपनी चादर को हटा दिया और नंगा हो गया। उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहरा उठा जिसे देखते ही सौंदर्या के मुंह से डर के मारे चींखं निकल पड़ी और उसकी आंखे फिर से बंद हो गई। लंड को देखते ही शहनाज़ की आंखे चमक उठी और उसने अजय को एक कामुक इशारा किया।
अजय अब ठीक शहनाज़ के सामने खड़ा हुआ था और उसके जिस्म की परछाईं शहनाज़ के ऊपर पड़ रही थी। अजय शहनाज़ की तरह देखते हुए बोला:"
" ऐसे ही मेरी आंखो में देखती रहना, तभी जाकर ये विधि सही से पूर्ण होगी।
शहनाज़ ऐसे ही उसकी तरफ देखती रही और देखते ही देखते अजय उसके करीब आ गया और उसका लन्ड की परछाई अब शहनाज़ के होंठो के सामने पड़ रही थी और शहनाज़ ने अपनी जीभ निकाल कर अजय को इशारा किया तो अजय बोला:"
" बस शहनाज़ अब तुम्हारी बारी खत्म, अब परछाई सौंदर्या के उपर पड़नी चाहिए। दीदी जल्दी से आंखे खोल दो।
सौंदर्या ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और उसने अजय की आंखो से मिला दी। अजय के जिस्म की परछाईं उसके जिस्म पर पड़ रही थी और लंड की परछाई ठीक सौंदर्या की चूत पर पड़ रही थी। सौंदर्या का शर्म के मारे बुरा हाल हो गया था।
अजय:" बस दीदी हो गया, आपका जिस्म अब काफी हद तक मंगल के प्रभाव से मुक्त हो गया है। कल एक अंतिम दिन पूजा होगी। ढलते हुए इन्द्र धनुष की लालिमा आप पर कहीं बुरा असर ना कर दे इसलिए आप अपनी आंखे फिर से बंद कर लीजिए।
सौंदर्या ने जैसे ही आंखे बंद करी तो अजय ने शहनाज़ को स्माइल दी और शहनाज़ ने आगे बढ़कर उसके लंड को हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। देखते ही देखते उसने लंड को एक झटके के साथ मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
इन्द्र धनुष कभी का छुप गया हो और शहनाज़ बेसब्री सी लंड चूसे जा रही थी। अजय और शहनाज़ दोनो पूरी तरह से सौंदर्या से बेखबर हो गए थे और लंड चूसने से निकलती हुई आवाज से सौंदर्या बेचैन हो रही थी क्योंकि उसने कई बार सेक्सी मूवी में इस तरह की आवाज सुनी थी लेकिन उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि क्या सच में शहनाज़ उसके भाई का लंड चूस रही है।
शहनाज़ पूरी जोर जोर से लंड चूस रही थी और अजय के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसने शहनाज़ के मुंह में एक धक्का लगाया और उसके मुंह में वीर्य की पिचकारी मारते हुए जोर से सिसक पड़ा। सौंदर्या ने हिम्मत करके आंखे खोली तो उसे मानो यकीन नहीं हुआ। उसका भाई शहनाज़ की दोनो चूचियों को थामे हुए उसके मुंह में लंड से वीर्य की पिचकारी मार रहा था। अजय का लन्ड धीरे धीरे शहनाज़ के मुंह से बाहर निकल रहा था और सौंदर्या को यकीन नहीं हो रहा था कि इतना मोटा और तगड़ा लंड कैसे शहनाज़ के मुंह में घुस गया था।
जैसे ही शहनाज़ और अजय को होश आया तो उन्होंने सौंदर्या की तरफ देखा जिसकी आंखे फिर से बंद हो गई थी। अजय ने शहनाज़ के होंठो को चूम लिया और दोनो ने कपडे पहन लिए और शहनाज़ ने सौंदर्या को आवाज लगाई
" पूजा खत्म हो गई सौंदर्या, चलो जल्दी से अपने कपड़े पहन लो।
सौंदर्या में जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए और सभी वापिस कमरों की तरफ बढ़ गए। अंदर जाते ही फिर से सभी लोग गहरी नींद में चले गए।
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