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StoryPublisher
Guest
अब वापस आज पर आते हैं.... और इस तरह रति और बिरजू के संबध आज भी चल रहे थे......रति के पति की मौत के बाद बिरजू ने ही घर की ज़िम्मेदारी संभाल ली और उसने शादी भी नहीं की और पूरी तरह रति को समर्पित रहा......
रवि ने -बाइक देखी और उसकी आखें खिल उठी.... उसने बाइक को ठीक किया सफाई की और उसे स्टार्ट किया....
तभी अंदर से अलका कॉलेज जाने के लिए.... तैयार हो कर आ गयी.....
उसने उस समय गुलाबी कलर की लो कट गले कई सलवार कमीज़ पहनी हुई थी.....रवि की आखें फटी की फटी रह गयी.....
उस की नज़र उसकी मस्त चुचिओ पर टिक गयी....
अपने भाई को इस तरह घूरते हुए देखते हुई पाकर अलका अंदर से सिहर गयी....
पर रवि की नज़र तो जैसे उसकी चुचिओ पर चिपक सी गयी... थी...उसका क्लीवेज और चुचिओ की अंदर तक की ढलान उसे सॉफ-सॉफ दिखाई दे रही थी.... रवि का कंट्रोल करते-करते भी लॅंड तन तना गया.....
रवि को इस तरह घूर ने कारण ...अलका थोड़ी असहज सी हो गयी.....उसने अपनी नज़रें नीचे कर ली और किचिन की तरफ जाने लगी......
अब रवि को उसके चौड़े- चौड़े चूतड़ दिखाई दिए...बड़ी ही मद मस्त बाहर निकली हुई गान्ड थी अलका की.... रवि का मन किया अभी दबोच के चोद दे ......पर उसने अपने मन को काबू किया....
किचन मे अलका ने एक ग्लास पानी पिया.....उसे अब बाहर जाने मे शरम आ रही थी....क्यों कि फिर उसे पता था रवि उसे वैसे ही घूरेगा....
तभी अंदर के कमरे से माँ आ जाती है..... अलका की तो जैसे साँस मे साँस आती है.....अच्छा माँ मैं चलती हूँ....इतना कह कर वो बाहर की तरफ आती है....
तभी रवि अपनी बाइक मे किक मरता है....और बोलता है.... चलो दीदी मैं आपको छोड़ देता हूँ.....
अलका : नहीं मैं चली जाउन्गि.... एक सहेली भी है वो मिल जाएगी....
रवि: अरे क्या प्राब्लम मैं छोड़ देता हूँ ना...मुझे कुछ काम भी है स्टेशन पर ...बाइक मे पेट्रोल भी भरवाना है... चलो बैठो...
मा: अरे जब ये जा ही रहा है तो चली जा ना.....
अलका बड़े बेमन से मोटर-बाइक पर बैठ जाती है...... और मन ही मन ...सब समझती हूँ तेरी चाल तू क्या चाहता है....
अलका के बैठते ही.... रवि अपनी बाइक बाहर निकाल लेता है.... और सड़क पर दौड़ा देता है....
अलका थोड़ा डिस्टेन्स मेनटेन करके बैठी हुई थी... और हाथ हल्के से रवि के कंधे पर रखा होता है.....
अचानक रवि ब्रेक लगाता है....और अलका सरक के रवि से सॅट जाती है..और उसकी चुचियाँ .... रवि की पीठ से धँस जाती है....
अलका ...मन ही मन बड़ा बेशरम है रवि तू.....
रवि: दीदी ज़रा अच्छी तरह से पकड़ के बैठो नहीं तो गिर जाओगी.....
अलका समझ जाती है रवि क्या चाहता है.... वो कुछ सोचती उस से पहले एक गाय रास्ते मे आ जाती है.... और रवि फिर ब्रेक लगा ता है....और फिर उसकी चुचियाँ रवि की पीठ से टकराती हैं.....
अलका मन ही मन सोचती है...अगर वो दूर बैठी रही... तो ये चलाएगा कम और ब्रेक ज़्यादा मारेगा.... इस लिए वो रवि के थोड़ा करीब हो जाती है...जिससे उसे उसकी चुचिओ का आनंद भी मिलने लगता है.....
रवि आनंद के सातवें आसमान पर दौड़ने लगता है........उसके मुलायम मुलायम चूचक रवि के शरीर मे आनंद और रोमांच का संचार कर रहे थे..... और वो भी आनंदित थी.... पर मन मे एक पाप बोध भी था....अपने सगे भाई के साथ...
पता नहीं कितनी जल्दी कॉलेज आ गया.....
दीदी आपकी छुट्टी कितने बजे होगी....
.2 बजे वो बोली
ठीक है मैं लेने आ जाउन्गा....
अलका: क्यों परेशान हो रहा है.... मैं आ जाउन्गी ना...
रवि: मुझे ज़रा इस मोटर साइकल मे कुछ काम भी करवाना है..... उसके बाद मैं यहीं आपका वेट कर लूँगा....ठीक है ...2 बजे मिलते हैं.....
रवि ने बाइक मे काम करवाया और ठीक 2 बजे कॉलेज के गेट पर पहुँच गया .....
जब स्टूडेंट की भीड़ ख़तम हो गयी... तभी उसे अलका आती हुई दिखाई दी वो अपनी सहेली नीला के साथ थी...दोनो बात करते हुए आ रही थी...
अलका : आज मेरा भाई मुझ को लेने आ रहा है तू कैसे जाएगी ..
नीला: ओह ! फिर मेरे को अकेले जाना पड़ेगा....
अलका: तू हमारे साथ चल ना ... मोटर साइकल पर....
नीला: अरे यार कैसे बैठ पाएँगें...
अलका : चल ना ...अड्जस्ट हो जाएँगे....
रवि ने -बाइक देखी और उसकी आखें खिल उठी.... उसने बाइक को ठीक किया सफाई की और उसे स्टार्ट किया....
तभी अंदर से अलका कॉलेज जाने के लिए.... तैयार हो कर आ गयी.....
उसने उस समय गुलाबी कलर की लो कट गले कई सलवार कमीज़ पहनी हुई थी.....रवि की आखें फटी की फटी रह गयी.....
उस की नज़र उसकी मस्त चुचिओ पर टिक गयी....
अपने भाई को इस तरह घूरते हुए देखते हुई पाकर अलका अंदर से सिहर गयी....
पर रवि की नज़र तो जैसे उसकी चुचिओ पर चिपक सी गयी... थी...उसका क्लीवेज और चुचिओ की अंदर तक की ढलान उसे सॉफ-सॉफ दिखाई दे रही थी.... रवि का कंट्रोल करते-करते भी लॅंड तन तना गया.....
रवि को इस तरह घूर ने कारण ...अलका थोड़ी असहज सी हो गयी.....उसने अपनी नज़रें नीचे कर ली और किचिन की तरफ जाने लगी......
अब रवि को उसके चौड़े- चौड़े चूतड़ दिखाई दिए...बड़ी ही मद मस्त बाहर निकली हुई गान्ड थी अलका की.... रवि का मन किया अभी दबोच के चोद दे ......पर उसने अपने मन को काबू किया....
किचन मे अलका ने एक ग्लास पानी पिया.....उसे अब बाहर जाने मे शरम आ रही थी....क्यों कि फिर उसे पता था रवि उसे वैसे ही घूरेगा....
तभी अंदर के कमरे से माँ आ जाती है..... अलका की तो जैसे साँस मे साँस आती है.....अच्छा माँ मैं चलती हूँ....इतना कह कर वो बाहर की तरफ आती है....
तभी रवि अपनी बाइक मे किक मरता है....और बोलता है.... चलो दीदी मैं आपको छोड़ देता हूँ.....
अलका : नहीं मैं चली जाउन्गि.... एक सहेली भी है वो मिल जाएगी....
रवि: अरे क्या प्राब्लम मैं छोड़ देता हूँ ना...मुझे कुछ काम भी है स्टेशन पर ...बाइक मे पेट्रोल भी भरवाना है... चलो बैठो...
मा: अरे जब ये जा ही रहा है तो चली जा ना.....
अलका बड़े बेमन से मोटर-बाइक पर बैठ जाती है...... और मन ही मन ...सब समझती हूँ तेरी चाल तू क्या चाहता है....
अलका के बैठते ही.... रवि अपनी बाइक बाहर निकाल लेता है.... और सड़क पर दौड़ा देता है....
अलका थोड़ा डिस्टेन्स मेनटेन करके बैठी हुई थी... और हाथ हल्के से रवि के कंधे पर रखा होता है.....
अचानक रवि ब्रेक लगाता है....और अलका सरक के रवि से सॅट जाती है..और उसकी चुचियाँ .... रवि की पीठ से धँस जाती है....
अलका ...मन ही मन बड़ा बेशरम है रवि तू.....
रवि: दीदी ज़रा अच्छी तरह से पकड़ के बैठो नहीं तो गिर जाओगी.....
अलका समझ जाती है रवि क्या चाहता है.... वो कुछ सोचती उस से पहले एक गाय रास्ते मे आ जाती है.... और रवि फिर ब्रेक लगा ता है....और फिर उसकी चुचियाँ रवि की पीठ से टकराती हैं.....
अलका मन ही मन सोचती है...अगर वो दूर बैठी रही... तो ये चलाएगा कम और ब्रेक ज़्यादा मारेगा.... इस लिए वो रवि के थोड़ा करीब हो जाती है...जिससे उसे उसकी चुचिओ का आनंद भी मिलने लगता है.....
रवि आनंद के सातवें आसमान पर दौड़ने लगता है........उसके मुलायम मुलायम चूचक रवि के शरीर मे आनंद और रोमांच का संचार कर रहे थे..... और वो भी आनंदित थी.... पर मन मे एक पाप बोध भी था....अपने सगे भाई के साथ...
पता नहीं कितनी जल्दी कॉलेज आ गया.....
दीदी आपकी छुट्टी कितने बजे होगी....
.2 बजे वो बोली
ठीक है मैं लेने आ जाउन्गा....
अलका: क्यों परेशान हो रहा है.... मैं आ जाउन्गी ना...
रवि: मुझे ज़रा इस मोटर साइकल मे कुछ काम भी करवाना है..... उसके बाद मैं यहीं आपका वेट कर लूँगा....ठीक है ...2 बजे मिलते हैं.....
रवि ने बाइक मे काम करवाया और ठीक 2 बजे कॉलेज के गेट पर पहुँच गया .....
जब स्टूडेंट की भीड़ ख़तम हो गयी... तभी उसे अलका आती हुई दिखाई दी वो अपनी सहेली नीला के साथ थी...दोनो बात करते हुए आ रही थी...
अलका : आज मेरा भाई मुझ को लेने आ रहा है तू कैसे जाएगी ..
नीला: ओह ! फिर मेरे को अकेले जाना पड़ेगा....
अलका: तू हमारे साथ चल ना ... मोटर साइकल पर....
नीला: अरे यार कैसे बैठ पाएँगें...
अलका : चल ना ...अड्जस्ट हो जाएँगे....