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मजबूरी का फैसला complete

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गाँव के बड़े बुढ़ों ने अकरम को समझाने की बहुत कोशिश की | मगर अकरम ने उनकी कोई बात ना सुनी | जिस पर गाँव के सब चौधरियों ने उसका सोशल बायकाट कर दिया |

मगर अकरम को इस बात की परवाह नहीं थी | वो अपनी शादी की तैयारी में लगा रहा और फिर शादी का दिन आ पहुंचा |

शादी वाले दिन ज़ाकिया सुबह सुबह अपने घर के एक कोने में बने हुए छोटे से बाथरूम में नहाने के लिए गई | एक बालटी में पानी उसने पहले ही रख दिया था | बाथरूम को अंदर से कुण्डी लगाकर उसने अपने कपडे उतारे | उसकी जवान कमसिन चूत पर थोडे थोडे बाल थे |

ज़ाकिया ने गाँव की दूकान से खरीदे हुए “लिफाफे”( गाँव में उन दिनों हेयर रेमोविंग क्रीम पाउडर की शक्ल में ही मिलती थी ) में से पाउडर निकाला और उसको नहाने वाले बर्तन में डाल कर उस का पेस्ट बनाया और अपनी चूत के बालों पर मल लिया |

कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसने पानी से अपनी चूत को धो दिया |

शेव करने के बाद उसने अपनी चूत पर हाथ फेरा | ज़ाकिया की चूत शेव करने के बाद और मुलायम हो गयी और चूत का हुसन और निखर गया था |

इस के बाद ज़ाकिया ने गुस्सल किया और कपडे पहनकर गुसल्खाने से बाहर आ गयी और अपनी शादी की तैयारी करने लगी |

दोपहर को बाबा रहमत की चारों बेटियों की बारातें एक एक कर बाबा रहमत के घर पहुँचना शुरू हो गयी | सबसे आखिर में चौधरी अकरम की बरात अपने गाँव वाले मकान से निकली |

चौधरी अकरम घोड़े पर सवार था और उसका बारात में शामिल चंद लोग उसके पीछे पैदल चल रहे थे |

अकरम घोड़े पर बैठा ज़ाकिया के जिस्म को तरह तरह से गंदे अंदाज़ में चोदने का सोच रहा था | अकरम जितना सोचता उतना ही ज़ाकिया का माँसल जिस्म उसके सामने माजिद रंगीन अंदाज़ में जलवागुर होता |

अकरम को सख्त बेचैनी महसूस हो रही थी | कुछ ही देर में बारात बाबा रहमत के घर पहुच गई |

बरात में शामिल लोगो को घर से बाहर ज़मीन पर दरिया बिछा कर बिठाया गया था और निकाह के बाद सब बरातियों की चाय और मिठाई से ख़िदमत की गई | शाम से थोडा पहले सब दुल्हे अपनी अपनी दुल्हन को लेकर अपने अपने घर रवाना हो गए और अकरम भी ज़ाकिया को डोली में बैठा कर अपने घर ले आया |

रात को अकरम उस कमरे में दाखिल हुआ जिधर ज़ाकिया सुहाग की सेज पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी |

बेड के चारो तरफ नकली फूलों की बनी हुयी “लड़ियों” की वजह से सुहाग की सेज काफी खुबसूरत लग रही थी |

अकरम ने दरवाज़ा अन्दर से बंद कर दिया | कमरे में एक जीरो वाट का बल्ब जल रहा था | जिसकी वजह से कमरे में थोड़ी रौशनी थी |

कमरे में ज़ाकिया शलवार कमीज़ पहने बिस्तर पर सिमटी सी बैठी थी | अकरम ज़ाकिया के पास बिस्तर पर बैठ गया |

अकरम ने ज़ाकिया को मुखातिब किया : ज़ाकिया |

“जी” ज़ाकिया ने अहिस्ता से जवाब दिया |

अकरम ने आगे बढकर आहिस्ता से ज़ाकिया का घूंघट उठा दिया | ज़ाकिया और सिमट सी गई | उसका चेहरा और आंखें अभी तक झुकी हुई थी |

अकरम ने ज़ाकिया को देखा | ज़ाकिया अपनी नाक पर पहनी हुई नथ और पहली बार किए हुए मेकअप की वजह से पहले से भी हसीं नज़र आ रही थी |

अकरम ने अपनी बीवी को पहली बार इस तरह बने संवरे देखा तो उसके मुंह से “माशाल्लाह” निकल गया |

अकरम के लिए अब मजीद इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा था | अकरम ने ज़ाकिया का हाथ पकडकर उसे अपनी तरफ खींचा |

अकरम ने ज़ाकिया की झुकी हुई ठोड़ी को हाथ से ऊपर किया | ज़ाकिया को बहुत शर्म आ रही थी और उसकी आँखें शर्म से अभी तक बंद थी |

अकरम ने ज़ाकिया के नर्म नाज़ुक होंठो पर अपने सख्त और खुरदरे होंठ रखे और ज़ाकिया की पंखुड़ियों जैसे नाज़ुक होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा |

अकरम ज़ाकिया के होंठो को चुसे जा रहा था और उसके हाथ ज़ाकिया की पीठ पर चल रहे थे | ज़ाकिया एकदम पागल सी हो गई | ज़ाकिया को नहीं मालूम था कि किस करने में इतना मज़ा आएगा |

अकरम ने ज़ाकिया को अपनी बाँहों में कस लिया और ज़ाकिया उससे चिपक गई | ज़ाकिया का गर्म बदन और सांसें अकरम महसूस कर रहा था |

 
अकरम का बायां हाथ सरकता ज़ाकिया के बाएँ मुम्मे पर आ कर रुक गया | ज़ाकिया की तो सांस ही रुकने लगी |

अकरम बोला “ज़ाकिया…”

ज़ाकिया कुछ नहीं बोली तो उसने हौले से ज़ाकिया के उभरते हुए सीने पे अपना हाथ फेर दिया |

“ ओऊह्ह्ह्ह ज़ाकिया मुझे कब से इस वक़्त का इंतज़ार था” साथ ही अकरम ने कमीज़ के ऊपर से ही ज़ाकिया के निप्पल को दबा दिया |

ज़ाकिया अब चुप नहीं रह सकी और उसके मुंह से एक सिसकारी सी निकल गयी.. स्स्स्ससिसिस..

ज़ाकिया पूरी तरह से काँप गई और शर्म से अकरम को हटाने की एक नाकाम सी कोशिश की | पर अकरम ने उसे कस कर दबोचा हुआ था |

अकरम की हरकतों और उसके हाथो की गर्मी से ज़ाकिया बहकने लगी और उसके प्यासे बदन में आग लग गई |

अकरम का हाथ अब आहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया की शलवार के नाडे पर आ गया | अकरम ने ज़ाकिया के होंठो और गालों को चूसते हुए एक झटके में ही सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार सरका कर नीचे की तरफ कर दी |

यूँ ही अकरम ने ज़ाकिया की शलवार उतारी तो उसे ज़किया की दूध जैसी गोरी और चिकनी चिकनी टांगे नज़र आईं , और इन चिकनी टांगों के दरमियाँ ज़ाकिया की छोटी सी , गोरी और नर्म चूत का दीदार भी अकरम को पहली बार हुआ |

“उफफ्फ्फ्फ़” क्या ज़बरदस्त चूत थी | चूत बिलकुल श्फाफ़ थी और फूली हुई चूत को देख कर अकरम के होश उड़ गए |

अकरम ज़ाकिया की कमीज़ को उपर की तरफ करने लगा और आहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया की कमीज़ भी उसके जिस्म से आजाद हो गई |

कमीज़ उतरने के बाद अकरम ने पीछे से ज़ाकिया की ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से ज़ाकिया के ब्रेज़िएर को उतार कर फेंक दिया |

अब ज़ाकिया के नंगे कोरे जिस्म पर सिवाए जेवरात के कुछ भी ना था |

ज़ाकिया शर्म से लाल हो गई | पहली वार वो किसी मर्द के सामने यूँ एक दम नंगी हो गई थी |

ज़ाकिया के मुंह से एक सिसकारी के साथ निकला "हाय अल्लाह जीईईई... " ज़ाकिया

की आवाज़ में बला का सेक्सीपन था |

ज़ाकिया ने अपने हाथों से अपने सीने और चूत को छुपाने की कोशिश की मगर वो अपने कंवारे जिस्म को अकरम की निगाहों और हाथों से छुपा और बचा ना सकी |

 
ज़ाकिया शर्म से बेहाल हो रही थी | उसने एक आखरी कोशिश के तौर पर अपने बदन को छुपाने के लिए बिस्तर की चादर को खीन्च कर अपनी तरफ करने लगी तो अकरम ने वो चादर भी खींच कर फ़ेंक दी और उसने आहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया की सारी ज्वेलरी को बारी बारी से उतारना शुरू कर दिया |

अकरम ने ज़ाकिया के मम्मो को दोनों हाथों में पकड लिया और ज़ाकिया के नुकीले निप्लस को ऊँगली और अंगूठे से मसलना शुरू किया तो वो सिस्कारियां भरने लगी |

ज़ाकिया के सख्त और नुकीले मम्मो को देख कर अकरम से रहा नहीं गया और ज़ाकिया के तने हुए मुम्मो को चूमने चाटने लगा |

अकरम ज़ाकिया के मम्मो को मुंह में पूरा भर के चूस रहा था क्योंकि ज़ाकिया के छोटे छोटे समोसे जैसे मम्मे उसके मुंह में पूरे समा रहे थे |

अकरम जैसे पागल सा हो रहा था | वो ज़ाकिया के कंवारे मम्मो को किस करता, उनको सहलाता, दबाता, मसलता , खेलता , चूसता , वो एक निप्पल को मसल रहा था दुसरे निप्पल को अपने दांत से काटने लगता |

ज़ाकिया को अपने मम्मो में दर्द होने लगा और उसने दर्द की सिस्कारियां भी मारी | लेकिन अकरम अब कहाँ कुछ सुनने वाला था |

साथ ही साथ अकरम ने अपना हाथ ज़किया की चिकनी गर्म टांगों पर रखा और उनको सहलाने लगा | टांगों पर हाथ फेरते फेरते अकरम बोला “ज़ाकिया कितना चिकना और सख्त बदन है तुम्हारा मेरी जान” |

अकरम ने बड़े प्यार से ज़ाकिया की टांगों को सहलाते हुए उसकी टांगों को फैला दिया | चूत के दोनों लिप्स आपस में चिपके हुए थे |

अकरम अपनी बीवी की कंवारी गोरी गुलाबी चूत को देखता रह गया |

अकरम ने ज़ाकिया की पूरी चूत हाथ में थाम ली और चूत को दबा दिया और बोला “हाए ज़ाकिया मेरी बीवी क्या चीज़ है तू” |

अब अकरम ने आहिस्ता से ज़ाकिया की फुद्दी के चिपके हुए लिप्स को ऊँगली से रगड़ दिया और चूत में अपनी ऊँगली डालनी चाही लेकिन ज़ाकिया की चूत काफी टाइट थी | अकरम की ऊँगली चूत में नहीं जा रही थी |

.....स्स्स्सस्स्स्स....... हह्ह्ह्हाआआअ....... उई...... नहीईईई ...सीईईई....... ज़ाकिया मस्ती से कराह उठी |

ज़ाकिया अब एक कबूतरी की तरह शिकारी के जाल में फंस चुकी थी और वो शिकारी उस का शिकार करने को तैयार था |

अकरम ने ज़ाकिया को बेड पर लेटाया और खुद वो अपने कपड़े उतार कर ज़ाकिया की टांगों के बीच आ गया |

अकरम ने ज़ाकिया की गांड को उठा कर एक तकिया निचे रख दिया |

अब ज़ाकिया की चूत थोडा और ऊपर हो गई |

अकरम ने ज़ाकिया की टागों को हाथों से पकड कर फैला दिया और अपने लंड की टोपी ज़ाकिया की चूत के दरमियाँ में रख दी |

अकरम ज़ाकिया के ऊपर झुक गया और ज़ाकिया के होंठो को अपने मुंह में ले लिया | होंठों को चूसते हुए अकरम ने एक जोरदार धक्का मारा |

ज़ाकिया की चीख निकलते निकलते रह गयी क्योंकि अकरम ने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा रखा था |

ज़ाकिया दर्द से कराह उठी तो अकरम रुक गया | अकरम अपना आधा लंड घुसा चूका था |

अकरम जो अब तक कई गश्तियों की फुद्दी ले चूका था | आज पहली बार किसी कंवारी चूत की सील तोड़ रहा था | अकरम को ऐसे लग रहा था कि जैसे उसने अपना लंड किसी गर्म तंदूर में डाल दिया है |

उसको अपनी कमसिन बीवी की गर्म चूत का जो स्वाद मिला | वो उसको पहले कभी नसीब नहीं हुआ था और वो इस स्वाद का खूब मज़ा लेना चाहता था |

2-3 मिनट तक ज़ाकिया के ऊपर लेटे रहने के बाद अकरम ने आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया |

ज़ाकिया अभी भी दर्द से कराह रही थी | अकरम फिर रुक गया और ज़ाकिया के होंठों को चूसने लगा |

अकरम जो ज़िन्दगी की कई बहारें गुज़ार चूका था | अपनी शादी से कुछ टाइम पहले वो अब यह महसुसू करने लगा था कि 44 साल की उम्र में उसके लंड में वो ताकत नहीं रही थी जो कभी जवानी में होती थी |

मगर आज ज़ाकिया के कोरे बदन ने उसके लिए जैसे एक टॉनिक का सा काम किया था |

अकरम के लंड में अपनी गर्म बीवी के कंवारेपन को तोड़ते हुए एक ताड आ गया था |

अकरम जो ज़ाकिया का दरद कम होने का इंतज़ार कर रहा था | उसने जब यह महसूस किया कि ज़ाकिया अब दर्द से थोड़ी संभल गई है तो उसने फिर एक ज़ोरदार धक्का दिया | अकरम का लंड सनसनाता हुआ ज़ाकिया की चूत में और ज्यादा अन्दर तक घुस गया | ज़ाकिया की चूत की झिल्ली फर् गई और ज़ाकिया का कुंवारापन तार तार हो गया |

ज़ाकिया की चूत से खून निकला जो उसकी जवान रानो से होता हुआ बिस्तर की सफ़ेद चादर में जज़ब हो गया |

आह्ह्हह्ह्ह इसी के लिए तो यह सारा खेल था अकरम ने चोदना शुरू किया |

ज़ाकिया अपनी फुद्दी के अन्दर कुछ अलग ही महसूस कर रही थी | उसे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था |

अकरम ने अपनी स्पीड बढाई |

ज़ाकिया चिल्लाने लगी |

अकरम बिना रुके ज़ाकिया को चोदता रहा |

कुछ देर बाद अकरम का गर्म पानी ज़ाकिया की चूत में फारिग हो गया तो अकरम ज़ाकिया के उपर से हटकर उसके बराबर लेट गया |

अकरम को जैसे एक सकून सा आ गया था | उसका बदन पसीने से सरोबर था | वो लेटते ही खराटे लेने लगा |

ज़ाकिया बिस्तर पर लेट कर अपनी सांसें ठीक करती रही | उसका अंग अंग चुदाई की वजह से दुःख रहा था | थोड़ी देर बाद वो बाथरूम जाने के लिए उठी तो उसकी नज़र अपनी टांगों के दरमियाँ अपनी छोटी सी चूत पर पड़ी |

अकरम ने ज़ाकिया की चूत को खूनम खून कर दिया था |

 
शादी के एक पहले हफ्ते अकरम हर रोज़ रात को ज़ाकिया को चोदता था |

ज़ाकिया को पहली रात अपनी कंवारी चूत की सील टूटने की वजह से काफी दर्द हुआ | जिसकी वजह से उसे अपनी सुहाग रात को चुदाई का ज्यादा मज़ा नहीं आया |

मगर फिर आहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया की चूत को भी अकरम के लंड का चस्का लग गया और उसको भी चुदाई का मज़ा आना शुरू हो गया था |

मगर अकरम सुहागरात से लेकर पूरी रात में ज़ाकिया को सिर्फ एक ही दफा चोदता | उसको कभी इस बात से कोई गरज नहीं थी , कि ज़ाकिया उसकी चुदाई से संतुष्ट हुई या नहीं |

अकरम बस दो चार धक्के मारता | अपना पानी ज़ाकिया की फुद्दी में डालता और फिर थक के सो जाता |

ज़ाकिया को भी अभी कुछ समझ नहीं थी कि सेक्स की संतुष्टि क्या होती है और चुदाई के वक़्त औरत को ओर्गास्म कैसे होता है |

उसके ख्याल में तो चुदाई इसे ही कहते हैं थे कि मियां ने बीवी की टांगें उठाई और फिर लंड को दो चार दफा अन्दर बाहर किया और खल्लास |

यह सिलसिला एक हफ्ता चला | अब अकरम का पाकिस्तान में यह आखरी हफ्ता था |

ज़ाकिया बिस्तर पर लेटी थी और अकरम उसके पास आ कर लेट गया और उसको चूमने चाटने लगा | ज़ाकिया को चूमते अकरम के हाथ उसकी शलवार के ऊपर से ज़ाकिया की फुद्दी से टकराए तो ज़ाकिया ने उसका हाथ एकदम रोक लिया |

अकरम : क्यों बेगम , आज अपनी फुद्दी का स्वाद नहीं दोगी मुझे |

ज़ाकिया : नहीं आज नहीं |

“क्यों आज क्या मंगल या बुद्द है जो गोशत का नंगा है” अकरम ने हस्ते हुए पूछा |

“सिर्फ मंगल बुद्द नहीं बल्कि पूरे हफ्ते का नंगा है जनाब” , ज़ाकिया ने भी शरारती अंदाज़ में जवाब दिया |

“ क्यों मैंने कौन सी ऐसी गलती कर दी कि जिस की इतनी बड़ी सज़ा” अकरम ने ज़ाकिया के गाल पर अपने दान्त गाड़ते हुए कहा |

“आप जो हर रोज़ मुझे तंग करते हैं इसकी सजा तो आप को मिलेगी अब” , ज़ाकिया भी अकरम को फुल सताने के मूड में थी |

“अच्छा बाबा नहीं करो और मुझे अपनी फुद्दी दो” , अकरम ने ज़बरदस्ती शलवार के उपर से ज़ाकिया की चूत पर हाथ रखा तो उसे फुद्दी पर कुछ रखा महसूस हुआ |

“यह क्या है” अकरम ने ज़ाकिया की तरफ देखते हैरत से पूछा |

“मुझे पीरियड्स आए हुए है जी , इसलिए अब आप की एक हफ्ता छुट्टी” , ज़ाकिया ने अपनी जुबान निकली और अकरम को छेड़ते हुए कहा |

“मार डाला ज़ालिम, मेरा तो यह आखरी हफ्ता है अब मैं क्या करूँ”? अकरम ने मायूस होते हुए कहा |

“अब सब्र करें अल्लाह , सब्र करने वालों के साथ है” यह कहते हुए ज़किया चादर औड कर सो गई |

एक हफ्ते बाद अकरम वापिस अमेरिका चला गया |

अकरम को एअरपोर्ट पर अलविदा कहते हुए वक़्त ज़ाकिया बहुत रोई |

अकरम ने उसको तसल्ली दी कि वो ज़ाकिया को भी जल्द अपने पास अमेरिका बुला लेगा |

अकरम के जाने के दो दिन बाद वकास भी एजेंट के ज़रिये अमेरिका अकरम के पास पहुच गया |

अब ज़ाकिया अपने घर में अकेली रह गई | जिसकी वजह से बाबा रहमत और उसकी बीवी भी अपनी बेटी के घर में आ कर रहने लगे |

वकास न्यूयॉर्क के एक इलाके ब्रोंक्स में रहने लगा | ब्रोंक्स में पुरतो इमिग्रेंट्स की बड़ी तादाद आबाद है |

वकास के अमेरिका आने के कुछ दिन बाद अकरम ने कुछ पैसे देकर ग्रीन कार्ड के लिए वकास की पेपर मैरिज एक बड़ी उम्र की पुरतो औरत से करवा दी |

पेपर मैरिज की वजह से उस पुरतो औरत का वकास के साथ रहना और सेक्स करना जरुरी नहीं था |

मगर जब उस औरत ने वकास जैसे गबरू जवान को देखा तो उसकी चूत पानी छोड़ गई |

उसने हफ्ते में दो तीन वार वकास से सेक्स करना शुरू कर दिया | अपने गाँव में “खोती” चोदने वाले को जब एक गोरी चिट्टी औरत का फुद्दा मिला , तो उसकी तो जैसे “मोज़े” ही लग गईं |

सेक्स के दौरान उस औरत ने अकरम को सेक्स करने के ऐसे ऐसे तरीके सिखाए कि वकास के होश उड़ गए |

वकास को पहली बार पता चला कि सेक्स किसे कहते हैं और सेक्स के दौरान किस तरह से सिर्फ खुद मज़ा नहीं लिया जाता बल्कि औरत को भी किस तरह मज़ा दिया जाता है |

वकास की बीवी ने जब पहली दफा वकास के लंड का चुप्पा लगाया तो वो जैसे पागल हो गया |

फिर उसने वकास को मजबूर कर दिया कि वो भी उसकी फुद्दी को चाटे| पहले तो वकास ने इंकार कर दिया | मगर जब उस औरत ने धमकी दी कि अगर वो उसकी फुद्दी नहीं चाटेगा तो वो उसको ग्रीन कार्ड हासिल करने में हेल्प नहीं करेगी , तो वकास मजबूर हो गया |

वकास को पहले तो चूत चाटने में कोई मज़ा नहीं आया , मगर फिर आहिस्ता आहिस्ता उसको चूत सक करने में भी मज़ा आने लगा और वो एक चूत सकिंग एक्सपर्ट बन गया | अब तो वकास को 69 किये बगैर चुदाई का स्वाद नहीं आता था | वकास को पेपर मैरिज के फोरन बाद जब पहला ग्रीन कार्ड मिला तो उसे बहुत ख़ुशी हुई , मगर इसी दौरान अकरम के इमीग्रेशन के पेपर्स की चेकिंग हुई तो वो फेक साबित हो गए | जिसकी वजह से अकरम का केस डेनी हो गया |

अब अकरम पाकिस्तान जा के वापिस अमेरिका नहीं आ सकता था | उसने एजेंट की ज़रिए ज़ाकिया को अपने पास बुलाने की तैयारी की, मगर वो इस्लामाबाद एअरपोर्ट पर पकड़ी गई |

इस बात के कुछ महीने बाद अकरम ने ज़ाकिया को लाहौर में मकान खरीद कर दिया | जिसमें वो अपने माँ बाप के साथ शिफ्ट हो गई |

 
साल 1990

अकरम और ज़ाकिया को भी एक दुसरे से जुदा हुए तीन साल हो गए | यह तीन साल ज़ाकिया ने कैसे अकेले गुज़ारे | यह वो ही जानती थी |

अकरम उसको हर महीने पैसे तो भेज रहा था | मगर चुत की गर्मी ने उसका बुरा हाल कर दिया था |

रात को उसका बिस्तर उसको काटने को दौड़ता और वो तकिये को अपनी गर्म टांगों के दरमियाँ दबा के सो जाती |

इन तीन सालों में ज़ाकिया ने अकरम को बहुत से ख़त लिखे और हर ख़त में एक ही बात थी कि मुझे कब अपने पास अमेरिका बुलाओगे | मगर अकरम के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था |

अकरम जैसा आदमी जिसने जवानी में रंडी औरतों के साथ बहुत ऐश की थी | शादी के बाद बहुत बदल गया था | अकरम को पता था कि अमेरिका तो “फुद्दियों का समंदर “ है | जिधर हर मज़हब , रंग और साइज़ की चूत हर वक़्त मिलती है |

मगर उसका लंड अब सिर्फ अपनी बीवी ज़ाकिया की जवान फुद्दी के लिए मचलता था |

अकरम खुद भी ज़ाकिया से दुरी की वजह से बहुत परेशान था | उसको समझ नहीं आती थी कि वो किस तरह ज़ाकिया को अमेरिका बुलाए |

साल 1991

वकास को अमेरिक आए हुए चार साल हो गये थे और अब वकास अमेरिकन सिटीजन से शादी की वजह से खुद भी अमेरिकन सिटीजन बन गया था | जिसके बाद वकास ने अपनी पेपर मैरिज ख़त्म कर दी | वकास और अकरम अब ब्रुकलिन में रह रहे थे | जिधर पाकिस्तानी कम्युनिटी काफी तादाद में आबाद है |

अकरम अभी तक पेट्रोल स्टेशन पर जॉब कर रहा था | जब कि वकास ने अब येलो कैब चलानी शुरू कर दी थी | एक शाम वकास जॉब से वापिस घर आया तो देखा कि अकरम हाथ में फ़ोन थामे काफी परेशान बैठा है |

वकास : चौधरी साहब क्या बात है, आप काफी परेशान नज़र आ रहे हैं |

अकरम : यार अभी अभी तुम्हारी बहन से फ़ोन पर बात हुई है |

अकरम ने लाहौर में अपने घर एक महीना पहले ही फ़ोन लगवाया था और अब उसकी हफ्ते में दो तीन दफ्फा ज़ाकिया से बात होती थी |

वकास : तो क्या मसला है जिससे आप परेशान हैं ?

अकरम : हाँ , ज़ाकिया हमेशा की तरह मुझसे लड़ रही थी कि या तो मैं खुद पाकिस्तान आ जाऊं या फिर उसको इधर बुला लूँ |

वकास , अकरम की बात सुन कर खामोश हो गया | उसको पता था कि अकरम अब किसी सूरत में पाकिस्तान वापिस नहीं जाना चाहता था और ज़किया का अमेरिका आना नामुमकिन था |

अकरम : वकास यार मैंने एक बात सोची है अगर तुम मेरा साथ दो तो मेरा मसला हल हो सकता है |

वकास : चौधरी साहब , आपने मेरे और मेरे खानदान के लिए बहुत कुछ किया है | मुझे बताएं मैं आपकी हर बात मानने को तैयार हूँ |

अकरम : सोच ले काम थोडा ओखा है |

वकास : आप बताएं तो सही ?

अकरम : ज़ाकिया एक तरीके से इधर आ सकती है |

“वो कैसे” , वकास ने बेचैन होते हुए पूछा |

अकरम: बात यह है कि....

अकरम बात करते हुए रुक सा गया |

“चौधरी साहब , आप खुल कर कहें , मुझसे जो हो सका , मैं अपनी बहन के लिए वो जरूर करूंगा” , वकास ने अकरम को हौसला देते हुए कहा |

अकरम : वकास तुम अब अमेरिकन सिटीजन हो , अगर तुम ज़ाकिया से जाली निकाह कर लो तो वो एक साल के अन्दर आसानी से अमेरिका आ सकती है |

वकास के कदमो के निचे से जैसे ज़मीं ही निकल गई |

“चौधरी साहब आप यह क्या कह रहे हो” , वकास ने गुस्से से अकरम को घूरते हुए कहा |

अकरम : अगर तुम हाँ कर दो , तो मैं ज़ाकिया के जाली पेपर्स बनवा सकता हूँ , जिनमें ज़ाकिया की वादियत बदल जाएगी और फिर एक जाली निकाह नामा भी बन सकता है |

आजकल काफी लोग इसी तरह अपने दोस्त की बीवी , अपनी भाभी और तो और अपनी सगी भान्जी को अपनी बीवी बना कर यूरोप और अमेरिका ला रहे हैं |

“इसी तरह वाकियात के बारे में मैंने भी सुना है मगर ज़ाकिया और मैं बहन भाई हैं , तो यह कैसे मुमकिन है? नहीं चौधरी साहब , यह बात नहीं हो सकती” वकास ने अकरम को साफ़ जवाब दे दिया |

अकरम : अच्छा तुम ही मुझे बताओ कि इसके इलावा इस बात का क्या हल है?

वकास कुछ नहीं बोला |

वकास को खामोश देख कर अकरम बोला,” वकास तुम अब बच्चे नहीं , तुमको पता है कि मियां बीवी का रिश्ता क्या होता है और तुम को यह भी पता है कि मुझे तुम्हारी बहन से जुदा हुए चार साल हो गये हैं और अब तुम्हारी बहन से यह दुरी बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही , मुझे डर है कि इस दुरी की वजह से तुम्हारी बहन ज़ाकिया गुमराह ना हो जाए |

वकास को समझ थी कि अकरम की इस बात का क्या मतलब है |

वकास : मगर चौधरी साहब |

अकरम : वकास अगर मगर कुछ नहीं तुम सोच लो , अगर तुम यह काम नहीं कर सकते तो फिर मेरी लिए इस बात के अलावा कोई हल नहीं कि मैं तुम्हारी बहन को तलाक दे दूँ |

वकास अकरम की यह धमकी सुन कर डर गया | वो कभी नहीं चाहता था कि उसकी बहन को जिसने अपने पूरे खानदान के लिए कुर्बानी दे दी थी | अब उसका घर इस तरह टूट जाए |

वकास बोला , “ठीक है चौधरी साहब , मुझे सोचने के लिए एक दो दिन का समय दीजिये , मैं आपको सोचकर बताता हूँ |

वकास गहरी सोच में पड गया | दो दिन उसने इस बारे में काफी सोचा और फिर ना चाहते हुए भी उसने अकरम को उसकी बात पर हाँ कर दी |

 
अकरम ने फोन कर ज़ाकिया से इस बात का जिक्र किया | यह् बात सुन कर ज़ाकिया के भी होश उड़ गए | उसे नहीं पता था कि अपने शोहर के पास आने के लिए उसको अपने ही सगे भाई की “जाली बीवी” बनने का इतना बड़ा कदम भी उठाना पड़ेगा | ज़ाकिया के लिए यह भी एक “मज़बूरी का फैसला” था |

ज़ाकिया ने इस बात से अपनी माँ शरीफा बीबी से ज़िक्र किया तो वो भी हिल कर रह गई |

शरीफा: यह क्या बकवास है , तुम दोनों का दिमाग तो नहीं खराब हो गया |

शरीफा बीबी गुस्से से कांपने लगी | उसके बस में होता तो वो अकरम का मुंह नोच लेती |

ज़ाकिया : अम्म्मा तेरा गुस्सा जायज है , मगर इसके अलावा कोई हल भी नहीं और वैसे भी मेरा कौन सा अपने भाई से सही का निकाह होना है , बस एक “जाली निकाहनामा” ही तो बनना है |

शरीफा : मगर पुतर ?

ज़ाकिया : अम्मा तू एक औरत है , तुझे पता है कि एक औरत के लिए अपने शोहर से इतनी देर दुरी , अच्छी बात नहीं , मुझसे अब अकरम से अलग नहीं रहा जाता , अम्म्मा |

ज़ाकिया ने यह कह कर शर्म से अपनी आँखें झुका लीं |

शरीफा बीबी समझ गई कि उसकी बेटी की जवान चूत अब लौड़े से बिलकुल दूर नहीं रह सकती और अगर उसकी बात ना मानी तो वो लाहौर में ही अपने लिए किसी लंड का बंदोबस्त कर लेगी |

शरीफा बीबी ने अपने शोहर बाबा रहमत से बात की और काफी बहस के बाद वो भी आखिरकर इस बात पर राज़ी हो गया |

कुछ दिन बाद वकास पाकिस्तान आया | उसे माँ बाप और उसकी तीनो बड़ी बहने जो कि वकास से मिलने लाहौर आई हुयी थी | वो सब वकास से मिल कर बहुत खुश हुए | सबसे मिल कर जब वकास घर के ड्राइंग रूम में पानी वाणी पी कर बैठ गया तो उसकी नजरें उसकी छोटी बहन ज़ाकिया को तलाश करने लगी | मगर ज़ाकिया उसे नज़र न आई |

“अम्मी ज़ाकिया कही बाहर गयी है” , वकास ने माँ से पूछा |

“नहीं वो अपने कमरे में है बेटा , पता नहीं वो क्यों तुम्हारे सामने आने से घबरा रही है” , माँ ने जवाब दिया |

“अच्छा मैं खुद ही उसको मिल लेता हूँ अम्मी” , यह कहता हुआ वकास ज़ाकिया को मिलने उसके कमरे की तरफ चल पड़ा |

“टक टक टक” वकास ने कमरे के बंद दरवाज़े पर नॉक किया |

यूँ ही ज़ाकिया ने दरवाज़ा खोला और उसकी नज़र अपने भाई वकास पर पड़ी | तो ज़ाकिया की तो जैसे सांस ही रुक गई |

वो जिससे छूप कर कमरे में दुबकी बैठी थी | उससे यूँ अचानक सामना हो जाएगा उसने सोचा भी ना था |

आज चार साल बाद वकास उसके सामने एक भाई के रूप में बल्कि उसका “होने वाला जाली शोहर” की हैसियत से खड़ा था |

ज़ाकिया अब और तो कुछ नहीं कर सकती थी | इसलिए वो बस शर्मा कर रह गयी |

वकास ने भी चार साल बाद अपनी बहन को देखा | ज़ाकिया अब वो पहले वाली 18 साल की लड़की नहीं थी | जिस को वकास 4 साल पहले छोड़ कर गया था | अब वकास के सामने एक 22 साल की शादीशुदा औरत खड़ी थी |

इन चार सालों में ज़ाकिया के रंग रूप पहले से ज्यादा निखर आया था |

उसका जिस्म पहले से थोडा और भर गया था | जिस का असर उसके कमीज़ से बाहर आते हुए मम्मो से साफ़ नज़र आ रहा था | जिन का साइज़ अब 36 हो गया था | उसके कुल्हे भी थोड़े और चौड़े हो गये थे |

ज़ाकिया वकास से नजरें नहीं मिला पा रही थी |

वकास : कैसी हो तुम ज़ाकिया |

ज़ाकिया : मैं ठीक हूँ , आप कैसे हैं भाई |

ज़ाकिया ने आहिस्ता से पूछा |

वकास : मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूँ हट्टा कट्टा |

ज़ाकिया कुछ ना बोली और नज़रें निचे किये बस फर्श को ही देखती रही |

जिस भाई से वो बचपन से लेकर जवानी तक बातें करते नहीं थकती थी | आज उसी भाई से बात करने का ज़ाकिया का होसला नहीं पड रहा था | वकास समझ गया कि ज़ाकिया उससे झिझक रही है तो वो उससे बाथरूम जाने का बहाना करके वापिस चला आया |

वकास के वापिस आने की वजह से बाबा रह्मत के घर में जैसे रोनक सी आ गयी थी | उसके सब बच्चे उसके साथ थे और वकास अपनी सब बहनों के साथ खूब हंसी मजाक कर रहा था |

कुछ दिन गुज़रे तो ज़ाकिया की वकास से झिझक भी थोड़ी कम हो गयी और वो अब वकास से थोडा खुल कर बातें करने लगी |

वकास ने अकरम के बताए हुए बन्दे से कांटेक्ट किया | जिसने वकास को ज़ाकिया का “जाली निकाहनामा”, “जाली बर्थ सर्टिफिकेट” और “स्नाख्ती कार्ड” बना कर दिया |

जिसकी वजह से ज़ाकिया का पासपोर्ट ज़ाकिया वकास के नाम से बन गया |

अब सब पेपर्स तो मुक्कमल हो गए थे | मगर अब वकास अपनी और बहन की “जाली शादी” की कुछ फोटो भी बनाना चाहता था | ताकि कल को अगर एम्बेसी वाले वीसा इंटरव्यू के वक़त कुछ साबुत मांगे तो वो इन फोटो को इंटरव्यू के वक़त साबुत के तौर पर वीसा ऑफिसर को दिखा सके |

इसलिए वकास ने एक दिन अपने घर में एक छोटी सी पार्टी रखी | घर के एक बड़े कमरे को शादी वाले घर की तरह सजाया गया | बाबा रहमत उसकी बीवी और वकास की बड़ी बहने सब ऐसे तैयार हुई | जैसे शादी पर लोग तैयार होते हैं | वकास और ज़ाकिया भी दूल्हा और दुल्हन की तरह तैयार हुए | जल्दी में ज़ाकिया को और तो कुछ पहनने को ना मिला तो उसने अपने घर में ही पड़ा हुआ अपनी बड़ी बहन का पुराना लहंगा पहन लिया | जिस की चोली ज़ाकिया को छातियों से तंग थी | ज़ाकिया अपनी दो बहनों के साथ एक कुर्सी पर बैठी थी और वकास उनकी फोटो खींच रहा था |

एक दो तस्वीरें खिचवाने के बाद जब ज़ाकिया कुर्सी से उठने लगी तो उसकी चोली सामने से थोड़ी फट गई | जिस की वजह से उसके गोर मम्मे आधे से ज्यादा नंगे हो गए | वकास जल्दी जल्दी फोटो पे फोटो खीच रहा था | वकास की ऊँगली कैमरा का बटन बार बार प्रेस किये जा रही थी | इससे पहले कि ज़ाकिया अपने दुपट्टे से अपने नंगे मुम्मो को कवर करती | वकास की तेज़ी से बटन पर चलती हुई उँगलियों ने उस हसीं मंज़र को कैमरा की ज़ालिम आँख में महफूज़ कर लिया |

उस वक़त वकास को भी यह अहसास न हुआ कि उसने किस पोज में अपनी बहन की फोटो अपने कैमरा में सेव कर ली है | फिर वकास ने कैमरा अपनी बड़ी बहन रेहाना को दिया और खुद ज़ाकिया के साथ जुड़ कर बैठा और रेहाना उन दोनों की एक साथ फोटो खीचने लगी | यूँ सब घर वालों के सामने अपने ही सगे भाई के साथ इस तरह दुल्हन बन कर बैठने और फोटो उतरवाने से ज़ाकिया खुश तो ना थी | मगर उसको यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ अपने शोहर के पास जाने के लिए मजबूरन करना पड रहा था |

दो महीने पाकिस्तान रहने के बाद वकास वापिस न्यू यॉर्क आया और उसने आते ही ज़ाकिया की इमीग्रेशन अर्जी फाइल कर दी |

 
तक़रीबन एक साल बाद ज़ाकिया की इंटरव्यू डेट इस्लामाबाद एम्बेसी में आ गई | अकरम और ज़ाकिया बहुत खुश थे कि अब जल्द ही उन दोनों का दुबारा मिलन होगा | वकास ने भी दुबारा पाकिस्तान जाने का प्रोग्राम बना लिया ताकि वीसा हासिल करने के बाद वो ज़ाकिया को साथ ही अमेरिका ले आए |

पाकिस्तान जाने से दो दिन पहले वकास ने फोटो स्टूडियो से पाकिस्तान वाली फोटोज को प्रिंट करवा लिए | शाम का थोडा अँधेरा हो रहा था और हलकी हलकी बारिश की वजह से थोड़ी ठण्ड भी हो रही थी | वकास अपनी टैक्सी में बैठ कर सब फोटो को एक एक करके देखने लगा | जैसे ही उसकी नज़र अपनी बहन ज़ाकिया की फटी हुई चोली वाली तस्वीर पर पड़ी | उसका दिल तो जैसे धडकना ही भूल गया | उसको समझ नहीं आई कि उसने कब और कैसे यह तस्वीर खीच ली थी | वकास ने इससे पहले अपनी ज़िन्दगी में कभी भी अपनी किसी भी बहन को इस हालत में नहीं देखा था | इसीलिए यूँ अचानक उसने यह फोटो देखी तो वो समझ नहीं पाया कि वो क्या करे |

वो तो बस अपनी फटी हुई आखों से अपनी सगी बहन के जवान गोरे और खुबसूरत मम्मो का ना चाहते हुए भी नज़ारा करने लगा | उसको थोडी ठण्ड में भी पसीना आने लगा और उसके जिस्म में एक अजीब सी हलचल मच गई | उसकी नजरें अपनी बहन की नीम नंगी छातिओं पर जमी हुई थी और उसका लंड उसकी पेंट में खूद बा खुद ही खड़ा हो गया |

वकास फोटो को देखने में मगन था कि ऐसे में घर से अकरम का फोने आया | जो उसका खाने पर इंतज़ार कर रहा था | वकास ने टैक्सी फ़ौरन घर की तरफ मोड़ ली | घर में एंटर होने से पहले उसने ज़ाकिया की फटी चोली वाली फोटो बाकी फोटोज से अलग करके अपनी जैकेट की पॉकेट में डाल ली | वकास ने अकरम को बाकी फोटो दिखाई और उसके बाद दोनों ने मिल कर शाम का खाना एक साथ खाया |

साल 1992

वकास के पाकिस्तान आने के एक हफ्ते बाद ही ज़ाकिया और वकास लाहौर से इस्लामाबाद वीसा इंटरव्यू के लिए रवाना हुए | वो दोनों इंटरव्यू के टाइम से काफी पहले इस्लामाबाद पहुँच गए | इसीलिए वो एम्बेसी की पार्किंग लोज में ही अपनी गाडी में बैठे इंटरव्यू के टाइम का इंतज़ार करने लगे |

वकास महसूस कर रहा था कि ज़ाकिया काफी नर्वस लग रही है |

वकास : ज़ाकिया क्या बात है तुम काफी परेशान लग रही हो?

ज़ाकिया : बस भाई, सोच रही हूँ कि सब काम सही हो जाए कहीं कोई गड़बड़ हो गई तो सब किए किराए पर पानी फिर जायेगा |

वकास : तुम फिक्र ना करो , सब ठीक हो जायेगा |

ज़ाकिया : भाई कैसे फिकर ना करूँ? मुझे तो कुछ पता नहीं कि इंटरव्यू में क्या सवाल पुछेगे और मैंने उनका क्या जवाब देना है |

वकास : मैंने इससे पहले ग्रीन कार्ड का इंटरव्यू दिया हुआ है , कोई खास सवाल नहीं पूछते , बस तुम्हारा नाम, डेट ऑफ़ बर्थ , शादी की डेट वगैरा पूछेगे तुमसे |

ज़ाकिया: बस यह तो सब मुझे याद है |

“ मगर कभी कभी वो कुछ “ख़ासस्सस्सस्स चीज़ों” के बारे में भी पूछ लेते हैं” वकास अपनी बहन को छेड कर एन्जॉय करने के मूड में था |

ज़ाकिया अपने भाई के मुंह से “खास्स्स्सस्स्स चीज़ों” वाले लफ्ज पर जोर को समझ गई | मगर उसने जान बूझ कर अनजान बनने की एक्टिंग करते हुए कहा , “क्या मतलब? कौन सी खास्स्स्स चीज़ें भाई”?

वकास जो अपनी बहन के शार्मिंदा होने का इंतज़ार में था अब खुद जैसे शर्मिंदा हो गया |

उसको अपनी बहन से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी | मगर उसने अभी हार ना मानी और फोरन बोला

“शायद तुम्हारे इल्म में ना हो , कि अगर आप अमेरिका में शादी करके ग्रीन कार्ड हासिल करते हैं तो इम्मिग्रेशन ऑफिसर कभी कभी लड़का और लड़की को इंटरव्यू के टाइम अलग अलग बुला कर उनसे ऐसे सवाल पुछ लेता है और यह मेरे साथ उस वक़्त हो चूका था जब मैंने अपना ग्रीन कार्ड हासिल किया था | यह आम तौर पर उसी वक़्त होता है | जब इमीग्रेशन ऑफिसर को शक हो कि शायद यह पेपर मैरिज है और लड़का लड़की दोनों अलग कंट्री और मज़हब से हों | हो सकता है, कि यह बात हमारे साथ ना हो क्योंकि हम दोनों पाकिस्तानी ही हैं | मगर फिर भी अगर ऑफिसर मुझसे तुम्हारे जिस्म के किसी खास हिस्से पर कोई निशान पूछेंगे , तो मैं उनको बताऊंगा कि तुम्हारी लेफ्ट छाती के ऊपर एक तिल है” |

अपने भाई के मुंह से यह बात सुनकर ज़ाकिया का मुंह शर्म से लाल हो गया | उसने बेइख्त्यारी में जल्दी से अपने सीने को दुपट्टे से डांपा और बोली, “आपको कैसे पता है यह बात”?

वकास उसकी हरकत से मज़े ले रहा था | उसने हँसते हुए अपनी कमीज़ की पॉकेट से फोटो निकाली और ज़ाकिया की गोद में फेंक दी |

ज़ाकिया ने अपने जवान सीने को फोटो में इस तरह नंगे देखा तो वो समझ गई कि उसका भाई उसकी हसीं छातियों के दीदार कर चूका है | यह बात सोच कर तो वो भी शर्मा कर रह गई |

“ज़ाकिया मुझे तो तुम्हारे जिस्म के एक ख़ास हिस्से पर पड़े निशान का इल्म हो गया है , क्या तुम भी मेरे किसी ऐसे निशान को जानना चाहती हो?”, वकास ने अपनी बहन को फिर छेड़ते हुए पूछा |

ज़ाकिया वकास की बात का कोई जवाब दिए बगैर गाड़ी से बाहर निकल गई | वकास की उस बात से उसके दिल और जिस्म में गर्मी सी आ गई |

इतनी देर में ज़ाकिया के इंटरव्यू का टाइम हो गया | इंटरव्यू खैरियत से हुआ और ज़ाकिया को उसी दिन अमेरिका का वीसा इशू हो गया | ज़ाकिया बहुत खुश थी अब उसका अकरम से दुबारा मिलने का वक़्त करीब था |

वीसा मिलने के अगले हफ्ते वकास और ज़ाकिया अमेरिका पहुँच गए | जिधर अकरम ने अब एक दो बेडरूम और दो बाथरूम का अपार्टमेंट रेंट पर ले लिए हुआ था | जिसमे वो सब इकट्ठे रहने लगे |

 
वकास, अकरम और अपनी बहन ज़ाकिया को आपस में मिलने का पूरा मौका देना चाहता था | इसीलिए उसने रात को टैक्सी चलानी शुरू कर दी और दिन को घर में सोता | जबकि अकरम दिन को जॉब करता |

इस तरह अकरम और ज़ाकिया रात को घर में अकेले होते | अब 23 साला जवान लड़की ज़ाकिया और 49 साला बूढ़े अकरम की चुदाई का सिलसिला दुबारा स्टार्ट हो गया | अकरम हर रोज़ रात को ज़ाकिया की जवान चूत में अपना बुढा लंड डालता और अपनी बीवी की गर्म चूत की गर्म आग को बुझाने की कोशिश करता | ज़ाकिया को भी लंड का ऐसा चस्का लगा कि अगर एक दिन भी लंड ना मिले तो उसे रात को नींद नहीं आती थी | इसी तरह से उनकी ज़िन्दगी की गाडी आगे चल पड़ी |

साल 1994

ज़ाकिया को न्यू यॉर्क दो साल हो गए | मगर अभी तक उसको औलाद की रहमत नसीब ना हुई | होती भी कैसे ? वो 25 साल की जवान सेहतमंद औरत थी और अकरम अब 51 साल का बुढा और कमज़ोर मर्द था | जो अब काफी बीमार रहने लग गया था | एक दिन अकरम ने अपना ब्लड टेस्ट करवाया तो उसे पता चला कि उसको डायबटीज हो गया है और उसकी सुगर लेवल काफी हाई था | अकरम ने सुगर की दवाई लेना शुरू कर दी |

आहिस्ता आहिस्ता अकरम पे ना सिर्फ बुढ़ापे बल्कि सुगर की बीमारी ने भी अपना असर छोड़ना शुरू कर ही दिया | अब उसके लंड में पहले जैसी ताकत भी न रही | अब बड़ी मुश्किल से ही उसका लंड खड़ा हो पाता था और दो चार धक्कों के बाद ही लंड पानी छोड़ देता | इधर ज़ाकिया को तो अभी अभी जवानी का मज़ा आना शुरू हुआ था | उसे चुदाई में मज़ा आने ही लगा था कि अकरम का लंड उसको चुदाई के बीच मंज्धार में छोड़ने लगा | जिसकी वजह से ज़ाकिया की चूत की पूरी तसल्ली ना हो पाती |

एक रात वकास की टैक्सी खराब हो गई तो वो जल्दी घर वापिस आ गया | उसने ख़ामोशी से अपार्टमेंट के बाहर का दरवाज़ा खोला और अन्दर चला आया | रात का एक बज रहा था और अकरम और ज़ाकिया अपने कमरे में सो रहे थे | इसलिए वकास आहिस्ता से अपने बेडरूम में जा कर अपने बिस्तर पर लेट गया | वो आज काफी सालो बाद रात को सोने के लिए लेता था | मगर उसको नींद नही आ रही थी |

कुछ देर बाद वकास को साथ वाले बेडरूम से कुछ आवाज़ आने लगी | जिसको सुनकर वकास के कान खड़े हो गए | वकास और अकरम के बेडरूम की दीवार आपस में जुडी हुई थी |

(अमेरिका में मकान लकड़ी की बने होते हैं, जिनकी अन्दर की दीवारें प्लाईवुड की होने की वजह से पतली होती हैं , जिस वजह से घर और खास तौर पर अपार्टमेंट में लोगों की प्राइवेसी नहीं रहती)

पहली आहट के बाद थोड़ी सी ख़ामोशी हुई फिर दुबारा साथ वाले कमरे से एक सिसकारी की आवाज़ वकास के कानो में गूंजी

“अह्ह्ह्हह हईईई तेज़ी से करो जोर से जोर से चोदो मुझे अकरम ......”

वकास चौंक पड़ा | वकास समझ गया कि अकरम उसकी बहन ज़ाकिया की चुदाई कर रहा है | वो जल्दी से अपने बिस्तर से उठ कर दीवार के पास खड़ा हुआ और दीवार के साथ कान लगाकर दुसरे कमरे में होनी वाली कारवाई को सुनने लगा |

वकास को खुद भी चुदाई किए काफी टाइम हो गया था | इसीलिए उसका लंड उसके पजामे में खड़ा होने लगा | उधर दुसरे कमरे में ज़ाकिया और अकरम वकास की घर वापसी से बेखबर थे | ज़ाकिया पलंग पर बिल्कुल नंगी लेटी थी और उसने अपनी टांगों को फैला रखा था |

अकरम का लंड मुरझाया हुआ था | जिस को वो ज़ाकिया की फुद्दी में डालने की नाकाम कोशिश कर रहा था | लंड ढीला होने की वजह से चूत से बार बार फिसल जाता | ज़ाकिया गरम हो चुकी थी और लंड लेने के लिए तडप रही थी |

“चोदो मुझे अकरम , डाल भी दो मेरी फुद्दी में अपना लंड ..........आआआआ बुझा दो मेरी प्यास”

इतनी देर में अकरम के लंड से पानी की धारा बह निकली |

“आहऊऊओ ज़ाकिया , मेरा लंड पानी छोड़ चूका है, मैं फारिग हो गया हूँ, मुझे माफ़ कर दो , मैं तुम को आज भी अच्छी तरह नहीं चोद सका”

 
“अकरम अब माफ़ी क्यों मांगते हो जब अपने से आधी उम्र की लड़की से शादी की थी , तब क्यों नहीं सोचा ...मेरी ज़िन्दगी क्यों तबाह की”, ज़ाकिया ने सिसकते हुए अकरम को कोसा |

“मैं कितने महीनों से तड़प रही हूँ , तुम अपना इलाज क्यों नहीं करवाते”, ज़ाकिया अपनी फुद्दी को अपने हाथों से रगड़ते हुए बोली |

“ज़ाकिया तुम्हें पता है , मैं अपनी दवाई ले रहा हूँ , उम्मीद है कुछ टाइम बाद मेरा लंड पहले जैसा हो जाएगा”, अकरम शर्मिंदगी से बोला |

ज़ाकिया जलकर बोली , “जब आदमी बुढा हो जाये तो इलाज नहीं होता लंड का , अच्छा मेरी चूत की आग आज फिर अपनी ऊँगली से ही बुझा दो , नहीं तो मैं मर जाऊंगी , अकरम” |

अकरम ने आगे बढ़ कर ज़ाकिया को अच्छी तरह चूमा और फिर उसकी टांगों को फैला कर अपनी दो उँगलियाँ ज़ाकिया की फुद्दी में डाल दी |

ज़ाकिया ने अपनी टाँगे अकरम के हाथ के पास कस दीं और अपने मस्त चुतड उठाकर अकरम की ऊँगली से अपनी गर्म फुद्दी को चुदवाना शुरू कर दिया |

ज़ाकिया गर्म हो कर बुदबुदाने लगी , “आआआअ हैईईइ तेजी से अपनी उन्ग्लों को डालो मेरे अन्दर , चोदो मेरी फुद्दी अकरम, मैं फारिग हो रही हूँ” |

ज़ाकिया ऊँगली से चुदाई करवाते हुए चीख रही थी और उसके चुतड पसीने से भीग रहे थे | साथ ही साथ ज़ाकिया अपने तने हुए निप्प्लस को अपने हाथों में ले कर मसल भी रही थी और फिर कुछ देर बाद ज़ाकिया भी छुट गई |

उधर साथ वाले कमरे में यह सब गर्म बातें और आवाजें सुन कर वकास का लंड भी उसके बस में नहीं था और वो जोर जोर से अपने हाथ से अपने लंड की मुठ मार रहा था और फिर वो भी मुठ मारते मारते अपने पजामे में ही फारिग हो गया |

इस बात के बावजूद कि साथ वाले कमरे में से उठने वाली सिस्कारियां और गर्म आहें उसकी अपनी सगी छोटी बहन की थी | वकास को नाजाने क्यों यह सब अच्छा लगा | इसकी वजह शायद सिस्कारियों में शामिल प्यासापन था या फिर शायद यह कि यह सिस्कारियां उसकी अपनी सगी बहन की थी |

जिस लड़की को बचपन से ले कर जवानी तक उसने सिर्फ बहन के मुकदस रिश्ते की हैसियत से ही देखा , समझा और सोचा था | आज उसी बहन को एक गर्म प्यासी बीवी के रूप में सुन और सोच कर वकास को बहुत मज़ा आया |

वकास को ज़ाकिया की सिस्कारियों ने पागल बना दिया | उसका बस चलता तो वो इन मधुर कर देने वाली सिसिकारियों को टेप कर लेता और वॉकमैन में लगा कर दिन रात अपनी बहन की प्यासी आवाज़ को सुनता रहता |

उधर दुसरे कमरे में बुढा अकरम अपनी जवान बीवी की जवानी की आग को अपनी उँगलियों से थोडा सा ठण्ड करने के बाद सिरहाने पर सर रख कर लेट गया और लेटते ही उसे नींद आ गई |

ज़ाकिया की चूत की प्यास अभी तक ठंडी नही हुई थी | वो अपने एक हाथ से अभी तक अपनी गुदाज चूत के मोटे लबों को आहिस्ता आहिस्ता मसल रही थी |

अकरम ने अब खर्राटे लेना शुरू कर दिए | ज़ाकिया को अकरम के यह खर्राटे ज़हर लग रहे थे | वो बहुत गुस्से में अकरम को सोते हुए देख रही थी |

जो खुद तो अपने बूढ़े लंड का पानी निकाल कर सो गया | मगर उसकी जवानी की आग अभी तक सुलग रही थी | उस वक़्त ज़ाकिया की हालत आज कल के नए पंजाबी गीत जैसी थी

“अगां ला के सानु इश्क दियां,

ते आप मीठी नींद सोना ए” |

ज़ाकिया के जिस्म का एक एक अंग प्यासा था | मगर उसकी प्यास बुझाने वाला कब का थक हर कर सो गया था | ज़ाकिया भी अपनी किस्मत को कोसती रोज़ की तरह प्यासी आखिर सो ही गई | वकास को भी जब ज़ाकिया के कमरे से किसी किस्म की आवाज़ आना बंद हो गई तो वो भी वापिस अपने बिस्तर पा आ कर लेट गया |

 
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