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गाँव के बड़े बुढ़ों ने अकरम को समझाने की बहुत कोशिश की | मगर अकरम ने उनकी कोई बात ना सुनी | जिस पर गाँव के सब चौधरियों ने उसका सोशल बायकाट कर दिया |
मगर अकरम को इस बात की परवाह नहीं थी | वो अपनी शादी की तैयारी में लगा रहा और फिर शादी का दिन आ पहुंचा |
शादी वाले दिन ज़ाकिया सुबह सुबह अपने घर के एक कोने में बने हुए छोटे से बाथरूम में नहाने के लिए गई | एक बालटी में पानी उसने पहले ही रख दिया था | बाथरूम को अंदर से कुण्डी लगाकर उसने अपने कपडे उतारे | उसकी जवान कमसिन चूत पर थोडे थोडे बाल थे |
ज़ाकिया ने गाँव की दूकान से खरीदे हुए “लिफाफे”( गाँव में उन दिनों हेयर रेमोविंग क्रीम पाउडर की शक्ल में ही मिलती थी ) में से पाउडर निकाला और उसको नहाने वाले बर्तन में डाल कर उस का पेस्ट बनाया और अपनी चूत के बालों पर मल लिया |
कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसने पानी से अपनी चूत को धो दिया |
शेव करने के बाद उसने अपनी चूत पर हाथ फेरा | ज़ाकिया की चूत शेव करने के बाद और मुलायम हो गयी और चूत का हुसन और निखर गया था |
इस के बाद ज़ाकिया ने गुस्सल किया और कपडे पहनकर गुसल्खाने से बाहर आ गयी और अपनी शादी की तैयारी करने लगी |
दोपहर को बाबा रहमत की चारों बेटियों की बारातें एक एक कर बाबा रहमत के घर पहुँचना शुरू हो गयी | सबसे आखिर में चौधरी अकरम की बरात अपने गाँव वाले मकान से निकली |
चौधरी अकरम घोड़े पर सवार था और उसका बारात में शामिल चंद लोग उसके पीछे पैदल चल रहे थे |
अकरम घोड़े पर बैठा ज़ाकिया के जिस्म को तरह तरह से गंदे अंदाज़ में चोदने का सोच रहा था | अकरम जितना सोचता उतना ही ज़ाकिया का माँसल जिस्म उसके सामने माजिद रंगीन अंदाज़ में जलवागुर होता |
अकरम को सख्त बेचैनी महसूस हो रही थी | कुछ ही देर में बारात बाबा रहमत के घर पहुच गई |
बरात में शामिल लोगो को घर से बाहर ज़मीन पर दरिया बिछा कर बिठाया गया था और निकाह के बाद सब बरातियों की चाय और मिठाई से ख़िदमत की गई | शाम से थोडा पहले सब दुल्हे अपनी अपनी दुल्हन को लेकर अपने अपने घर रवाना हो गए और अकरम भी ज़ाकिया को डोली में बैठा कर अपने घर ले आया |
रात को अकरम उस कमरे में दाखिल हुआ जिधर ज़ाकिया सुहाग की सेज पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी |
बेड के चारो तरफ नकली फूलों की बनी हुयी “लड़ियों” की वजह से सुहाग की सेज काफी खुबसूरत लग रही थी |
अकरम ने दरवाज़ा अन्दर से बंद कर दिया | कमरे में एक जीरो वाट का बल्ब जल रहा था | जिसकी वजह से कमरे में थोड़ी रौशनी थी |
कमरे में ज़ाकिया शलवार कमीज़ पहने बिस्तर पर सिमटी सी बैठी थी | अकरम ज़ाकिया के पास बिस्तर पर बैठ गया |
अकरम ने ज़ाकिया को मुखातिब किया : ज़ाकिया |
“जी” ज़ाकिया ने अहिस्ता से जवाब दिया |
अकरम ने आगे बढकर आहिस्ता से ज़ाकिया का घूंघट उठा दिया | ज़ाकिया और सिमट सी गई | उसका चेहरा और आंखें अभी तक झुकी हुई थी |
अकरम ने ज़ाकिया को देखा | ज़ाकिया अपनी नाक पर पहनी हुई नथ और पहली बार किए हुए मेकअप की वजह से पहले से भी हसीं नज़र आ रही थी |
अकरम ने अपनी बीवी को पहली बार इस तरह बने संवरे देखा तो उसके मुंह से “माशाल्लाह” निकल गया |
अकरम के लिए अब मजीद इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा था | अकरम ने ज़ाकिया का हाथ पकडकर उसे अपनी तरफ खींचा |
अकरम ने ज़ाकिया की झुकी हुई ठोड़ी को हाथ से ऊपर किया | ज़ाकिया को बहुत शर्म आ रही थी और उसकी आँखें शर्म से अभी तक बंद थी |
अकरम ने ज़ाकिया के नर्म नाज़ुक होंठो पर अपने सख्त और खुरदरे होंठ रखे और ज़ाकिया की पंखुड़ियों जैसे नाज़ुक होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा |
अकरम ज़ाकिया के होंठो को चुसे जा रहा था और उसके हाथ ज़ाकिया की पीठ पर चल रहे थे | ज़ाकिया एकदम पागल सी हो गई | ज़ाकिया को नहीं मालूम था कि किस करने में इतना मज़ा आएगा |
अकरम ने ज़ाकिया को अपनी बाँहों में कस लिया और ज़ाकिया उससे चिपक गई | ज़ाकिया का गर्म बदन और सांसें अकरम महसूस कर रहा था |
मगर अकरम को इस बात की परवाह नहीं थी | वो अपनी शादी की तैयारी में लगा रहा और फिर शादी का दिन आ पहुंचा |
शादी वाले दिन ज़ाकिया सुबह सुबह अपने घर के एक कोने में बने हुए छोटे से बाथरूम में नहाने के लिए गई | एक बालटी में पानी उसने पहले ही रख दिया था | बाथरूम को अंदर से कुण्डी लगाकर उसने अपने कपडे उतारे | उसकी जवान कमसिन चूत पर थोडे थोडे बाल थे |
ज़ाकिया ने गाँव की दूकान से खरीदे हुए “लिफाफे”( गाँव में उन दिनों हेयर रेमोविंग क्रीम पाउडर की शक्ल में ही मिलती थी ) में से पाउडर निकाला और उसको नहाने वाले बर्तन में डाल कर उस का पेस्ट बनाया और अपनी चूत के बालों पर मल लिया |
कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसने पानी से अपनी चूत को धो दिया |
शेव करने के बाद उसने अपनी चूत पर हाथ फेरा | ज़ाकिया की चूत शेव करने के बाद और मुलायम हो गयी और चूत का हुसन और निखर गया था |
इस के बाद ज़ाकिया ने गुस्सल किया और कपडे पहनकर गुसल्खाने से बाहर आ गयी और अपनी शादी की तैयारी करने लगी |
दोपहर को बाबा रहमत की चारों बेटियों की बारातें एक एक कर बाबा रहमत के घर पहुँचना शुरू हो गयी | सबसे आखिर में चौधरी अकरम की बरात अपने गाँव वाले मकान से निकली |
चौधरी अकरम घोड़े पर सवार था और उसका बारात में शामिल चंद लोग उसके पीछे पैदल चल रहे थे |
अकरम घोड़े पर बैठा ज़ाकिया के जिस्म को तरह तरह से गंदे अंदाज़ में चोदने का सोच रहा था | अकरम जितना सोचता उतना ही ज़ाकिया का माँसल जिस्म उसके सामने माजिद रंगीन अंदाज़ में जलवागुर होता |
अकरम को सख्त बेचैनी महसूस हो रही थी | कुछ ही देर में बारात बाबा रहमत के घर पहुच गई |
बरात में शामिल लोगो को घर से बाहर ज़मीन पर दरिया बिछा कर बिठाया गया था और निकाह के बाद सब बरातियों की चाय और मिठाई से ख़िदमत की गई | शाम से थोडा पहले सब दुल्हे अपनी अपनी दुल्हन को लेकर अपने अपने घर रवाना हो गए और अकरम भी ज़ाकिया को डोली में बैठा कर अपने घर ले आया |
रात को अकरम उस कमरे में दाखिल हुआ जिधर ज़ाकिया सुहाग की सेज पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी |
बेड के चारो तरफ नकली फूलों की बनी हुयी “लड़ियों” की वजह से सुहाग की सेज काफी खुबसूरत लग रही थी |
अकरम ने दरवाज़ा अन्दर से बंद कर दिया | कमरे में एक जीरो वाट का बल्ब जल रहा था | जिसकी वजह से कमरे में थोड़ी रौशनी थी |
कमरे में ज़ाकिया शलवार कमीज़ पहने बिस्तर पर सिमटी सी बैठी थी | अकरम ज़ाकिया के पास बिस्तर पर बैठ गया |
अकरम ने ज़ाकिया को मुखातिब किया : ज़ाकिया |
“जी” ज़ाकिया ने अहिस्ता से जवाब दिया |
अकरम ने आगे बढकर आहिस्ता से ज़ाकिया का घूंघट उठा दिया | ज़ाकिया और सिमट सी गई | उसका चेहरा और आंखें अभी तक झुकी हुई थी |
अकरम ने ज़ाकिया को देखा | ज़ाकिया अपनी नाक पर पहनी हुई नथ और पहली बार किए हुए मेकअप की वजह से पहले से भी हसीं नज़र आ रही थी |
अकरम ने अपनी बीवी को पहली बार इस तरह बने संवरे देखा तो उसके मुंह से “माशाल्लाह” निकल गया |
अकरम के लिए अब मजीद इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा था | अकरम ने ज़ाकिया का हाथ पकडकर उसे अपनी तरफ खींचा |
अकरम ने ज़ाकिया की झुकी हुई ठोड़ी को हाथ से ऊपर किया | ज़ाकिया को बहुत शर्म आ रही थी और उसकी आँखें शर्म से अभी तक बंद थी |
अकरम ने ज़ाकिया के नर्म नाज़ुक होंठो पर अपने सख्त और खुरदरे होंठ रखे और ज़ाकिया की पंखुड़ियों जैसे नाज़ुक होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा |
अकरम ज़ाकिया के होंठो को चुसे जा रहा था और उसके हाथ ज़ाकिया की पीठ पर चल रहे थे | ज़ाकिया एकदम पागल सी हो गई | ज़ाकिया को नहीं मालूम था कि किस करने में इतना मज़ा आएगा |
अकरम ने ज़ाकिया को अपनी बाँहों में कस लिया और ज़ाकिया उससे चिपक गई | ज़ाकिया का गर्म बदन और सांसें अकरम महसूस कर रहा था |