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माँ की अधूरी इच्छा complete

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मुवी ख़तम होने के बाद।

सब अपने २ बेड पे।

प्रीति सुभाष और अरुन तीनो रूम में।

कपडे चेंज करते है।

सुभाष बाथरूम में।

अरुण: वो गिफ्ट दिया था वही पहन कर सोना।

प्रीति: ओके बाबा।

अरुण : जाओ दूध ले आओ।

प्रीति:अभी लाई।

कुछ देर बाद

सुभाष दूध पिते हुए

और प्रीति चेंज करने चली जाती है।

सुभाष अरुन से।

सुभाष: देख तेरी बुआ को ।रात के १२ बजे नहा रही है।

अरुण: हो सकता है गर्मी लग रही हो।

सुभाष: हाँ हो सकता है पर अपने घर में कभी नहीं नहाती इतना लेट।

तभी प्रीति बाथरूम से बाहर आ जाती है।

उसने नाइटी पहने हुई थी।

और ड्रेसिंग टेबल पे अपना मेकअप करते हुए

सुभाष कुछ बोलना चाहता है पर दूध पिने की बजह से नीन्द आ जाती है क्योंकी प्रीति ने अरुन से चुदने के लिए सुभाष के दूध में नीन्द की गोलियां मिला दी थी जो अरुन ने मेडिकल स्टोर से खरीद के दी थी।

प्रीति आवाज़ देते हुए ।

अरुण: डोंट वरी अब ये सुबह से पहले नहीं उठेंगे।

मेकअप ख़तम करने के बाद प्रीति बेड पर आती है और सुभाष से बात करते हुए।

उठ जाओ आप देखो नहीं तो तुम्हारा ये भतीजा तुम्हारी बीवी को तुम्हारे सामने चोद देगा। बचा लो मुझे इस से

प्लीज बचा लो।

अरुण: अब ये नहीं उठेंगे चलो आ जाओ अपने नए पति के पास।

प्रीति उठ कर अरुन के पास आती है।

प्रीति : तुम्हे शरम नहीं आएगी मुझे मेरे पति के सामने चोदते हुए।

नही मेरी जान और उठ कर बाथरूम चला जाता है और थोड़ी देर बाद नहा कर सिर्फ टॉवल में बाहर आता है।

प्रीति अरुन को देखते हुए

अपनी बाँहे फैला देती है।

और अरुन आ कर उसकी बाँहों में समां जाता है।

प्रीति: हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे।

अरुण: अगर आप को गलत लग रहा है तो मैं चला जाता हूँ।

प्रीति: नहीं नहीं मैं तो पूछ रही थी।

अरुण; अब मत पूछना।

प्रीति: ओके नहीं पूछुँगी।

बाहर दो इंसान ऐसे थे जिन्हे नीन्द नहीं आ रही थी सरला और नीतू पर समझ नहीं पा रही थी की क्या करे।

अंदर।

बेड पे सुभाष लेटा था ।

प्रीति: अब भी टाइम है बचा लो अपनी बीवी को इस लड़के के चगुल से फिर काफी देर हो जायेगी।

पर सुभाष तो गहरी नींद में सो रहा था।

प्रीति: नहीं उठ रहे ये अरुन तुझे जो करना है कर ले मैं इनकी तरफ से परमिशन देती हू।

बना ले मुझे अपनी बीबी।

और अरुन प्रीति को बेड पे बैठा देता है।

और अपनी टॉवल उतार देता है।

पोसिशन प्रीति बेड पे अपनी टांगे लटका कर बैठी थी

और अरुन का लंड उस के मुह के सामने था ।

अरुण: लो चुसो इसे मेरी जान।

प्रीति की ऑंखें फटी की फटी रह जाती है

और कुछ आवाज़ नहीं निकलती।

अरुण: क्या हुआ सुरु करो।

प्रीति: ये क्या है।

अरुण: तुम्हारा होने वाला असली पति का लण्ड।

प्रीति: ये तो किसी डण्डे की तरह है।

अरुण: तो क्या हुआ मेरी जान चुसो इसे।

और प्रीति के दोनों हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख देता है।

प्रीति ड़रते हुए अरुन के लंड को पकड़ती है।

ये तो बहुत बड़ा है अरुन मैं नहीं ले पाऊँगी इसे और ड़रते २ उस पर हाथ फेरती है।

अरुण: कुछ नहीं होगा बहुत आराम से करुँगा।

अभी तुम पहले इसे चुसो जल्दी से।

 
और अरुन अपने लंड को प्रीति के गालो पे और मुह पे रगडने लगता है।

अरुण: जल्दी से मूँह खोलों ।

प्रीति थोड़ा सा मुह खोल देती है।

और अरुन के लिए इतना ही काफी था और अपने लंड का टोपा प्रीति के मुँह में पेल देता है।

और प्रीति टोपे को जीभ से चाटने लगती है।

अरुण: आह शाबाश ऐसे ही चाट।

हाहह और थोड़ा अंदर घुसा देता है।

प्रीति रुकने का इशारा करती है ।

और जितना मुँह में था उसे अंदर बाहर करती है।

अरुण: बहुत अच्छा बुआ आह ओह आह सी चुसो

ऐसे ही तुम एक्सपर्ट हो बुआ लण्ड चुसने में

और अपना लंड और घूसाने लगता है।

प्रीति उसे रुकने को बोलती है और

उतना ही चुसती है ।

अरुन प्रीति का एक हाथ अपने टट्टों पे रख देता है

और प्रीति उन्हें सहलाने लगती है।और अपनी स्पीड बढ़ा देती है।

अरुण: आह आ मौसी आह सी धीरे धीरे मेरी जान मजा आ रहा है तू तो एक्सपर्ट रंडी है।

प्रीति अरुन के मुह से ये सुन के रुक जाती है।

अरुण: क्या हुआ मेरी रांड मुँह क्यों रोक दिए चूस जल्दी २।

अभी तो बहुत कुछ करने है।

और प्रीति बिना कुछ बोले लंड चुसना फिर से शूरु कर देती है।

अरुण: आह ओह माँ आह सी प्रीति मेरी जान।

ऐसे ही चूस अपने नए खसम के लंड को।

आह ओह मज़ा आ रहा है।

अरून अपना और लंड घुसाने लगता है प्रीति रुकने का इशारा करती है।

अरुण: क्या हुआ मेरी रांड इसको पूरा नहीं ले पा रही

क्यूं फुफा का छोटा है क्या मेरे से ।

प्रीति हाँ में सर हिलाती है पर लंड को चुसती रहती है।

अरुण: अगर मेरे से मज़े लेने है तो पूरा लेना पडेगा।

प्रीति हाँ में सर हिला देती है।

अरुण: चल अभी इतना ही चूस फिर तेरी चुत की बारी और फिर गाण्ड की।

गाण्ड वाली बात पे प्रीति रुक जाती है।

अरुण: रुक नहीं तो और टाइम लगेगा चुसती रह।

और प्रीति चालु हो जाती है।

बाहर सरला और नीतू दोनों इतनी बैचन हो गई की उस वक़्त दोनों अरुन के रूम की खिड़की से झाँक रही थी

सरला और नीतू को बुरा तो लग रहा था पर मर्ज़ी तो सरला की थी तो ये सब तो सहना पडेगा।

अंदर।प्रीति का बुरा हाल था चूस चूस कर पर अरुन था की झड नहीं रहा था।

नीतु सरला से ।

माँ भाई तो झड नहीं रहा।

सरला: वो ऐसे नहीं झडेगा जब तक कोई उससे किसीकी बातें नहीं करेगा।

नीतू: फिर बुआ की तो हालत ख़राब हो जाएंगी।

सरला: हाँ तभी पता चलेगा उसे की पति से दूरी क्या होती है।

अरुण: आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ अअअअअअअ ुह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊह माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ चुसू मेरी जान

क्या हुआ मेरी रांड को ।थक गई क्या

प्रीति हाँ में सर हिलाती है।

तो ठीक है अपनी बेटी को बुला ले वो चूस देगी ।

वो तो एक बच्चे की माँ है कुछ सिखाया है उसे या वो भी तेरे जैसी है।

प्रीति अरुन को घुरते हुए।

अरुण: घुर क्या रही है।

जलदी कर नहीं तो रहने दे ।मैं कोई और इन्तज़ाम करता हूँ।

प्रीति ना में सर हिलाती है।

और जोर जोर से चुसने लगती है।
 
और एक हाथ से टट्टों को सहलाती है।

और अरुन के लंड को चुसती है।

अरुण: आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह धीरे धीरे कर रांड ये लंड है कोई डंडा नहीं जो मरोड़ रही है साली कुतिया।

बाहर सरला।

मार डालेगी क्या मेरे बेटे को। नहीं चूस रही तो बोलती मैं चूस दूंगी पर मरोड़ तो मत मेरे राजा के लंड को।

नीतू: माँ अंदर चले हम दोनों भाई का ख़याल रख लेंगे।

किसी प्रीति की हमें ज़रूरत नही।

सरला: रुक जा बेटी देखते है नहीं तो मैं जाऊंगी अपने राजा के पास उसकी रैंड नंबर १।

अंदर।

आ: और तेज़ मेरी राँड जल्दी कर आह मेरा आने वाला है आह माँ आह सा आ ओह उह माँ मार ड़ाला कमिनी बहन की लोडी आह सी आ और अरुन का शरीर अकडने लगता है और पिचकारी छोड देता है

प्रीति अपना मुह हटाने की कोशिश करती है पर अरुन प्रीति के सर को अपने लंड पे दबा देता है और सारा पानी प्रीति को पीना पड़ता है।

प्रीति की ऑंखों से ऑंसू आ जाते है पर अरुन कोई रहम नहीं करता और अपनी आखरी बूँद तक निकाल कर अपना लंड प्रीति के मुह से बाहर निकालता है।

प्रीति एकदम से बेड पर गिर जाती है ।

और लम्बी २ साँस लेती है और खाँसने लगती है।

अरून प्रीति के ऑंसू पोछता है और

कुछ नहीं हुआ मेरी जान अभी तो पूरा भी नहीं गया था।

प्रीती: और कितना डालेगा मादरर्चोद मैं कोई रंडी नहीं हु जो तू इतनी बेरहमी से मेरे मुँह को चोद रहा था। लास्ट में तो तूने मेरी जान ही निकाल दी थी।

पुरा गधे का लंड है

अरुण: क्यों फुफा का कितना है।

प: तेरे से पूरा आधा वो तो अच्छा है मैं उनसे ज़िद कर के लंड चुस्वाति थी नहीं तो तूने आज मेरी जान ले लेती थी।

अरुण: मुझे तेरी जान नहीं चुत चाहिये।

बोल देगी या नहीं ।

प्रीति: जब ओखली में सर दे दिया है तो मुसल से क्या डरना।
 
अरुन बेड पर बैठ जाता है।

चल रांड दिखा ना ब्रा पेंटी मैं कैसे लग रही है।

और प्रीति उठ कर नाइटी उतारते हुए ।

अरुण : ज्यादा नखरे मत कर जल्दी उतार ।

और प्रीति नाइटी उतार देती है।

प्रीति: सुभाष से कहती है ।ये बोलते है तुम्हे बहुत प्यार करता हु भतीजा रांड बोल रहा है अपना लंड चुसवा दिया अब चोदने जा रहा है और ये मेरा पति सो रहा है कैसे पति है कितनी बेहरमी से मेरे मुह को चोदा।फिर भी इसकी नीन्द नहीं खुली ।

फिर ब्रा पेंटी में अरुन के सामने खड़ी हो जाती है।

प्रीति अब अरुन की स्टाइल में।

प्रीति: कैसे लग रही है तेरी रांड ।

अरुण: बहुत ज़बर्दस्त बिलकुल नंबर १ माल ।

क्या मम्मे है तेरे बिलकुल पपीता और गाण्ड तो तरबुज हो रही है जांघे बिलकुल केले के पेड़ की तरह और कमर बिलकुल सुराहिदार।

ये चोद के बहुत मजा आएगा।

प्रीति: तो चोद न रोका किसने है जिसने रोकना था वो देख कैसे घोड़े बेच कर सो रहा है।

और अरुन के पास आ कर अपनी ब्रा उतार कर अपना एक मम्मा उसके मुह में दे देति है।

अब चूस इन्हे ।

अपनी माँ के तो चुसे होंगे ही अब बुआ के चूस और अरुन एक हाथ दूसरे मुम्मे पे रख कर मसलता है और एक को मुँह में भरकर चूसने लगता है।

आह चूस मेरे राजा ।

आह ओह क्या चुसता है।

आह उह मा

और अरुन प्रीति को बेड पे लीटा देता है ।

और उसकी पेंटी उतार कर दोनों पैर अपने काँधे पे रख कर प्रीति की चुत को सूँघता है।

आआआ रांड क्या खुशबु है तेरी चुत की और एकदम चिकनी भी की है क्या अपने खसम के लिये।

प्रीति: हाँ मेरे राजा तेरे लिए चिकनी की है मैं जानती हु आज कल के लोंडो को चिकनी चुत पसंद है।

और अरुन इतना सुनते ही प्रीति की चुत की फांकों को खोलकर चुत चाटने लगता है।

अब बारी प्रीति की

प्रीति: अअअअअ ये क्या कर रहे हो छी गंदी जगह है ये बेटा वहाँ से अपना मुह हटा।

और अरुन वहाँ से मुह हटा कर लंड का सुपाडा प्रीति की चुत पे लगा कर एक ही झटके में आधा घुसा देता है

प्रीति की चीख निकलने वाली होती है की अरुन प्रीति की कच्छी उसके मुह में ठूँस देता है और बेहरमी से पेलने लगता है।

और कुछ देर उसके मम्मे मसलने के बाद प्रीति को कुछ राहत मिलती है।

और प्रीति अपने मुह से कच्छी निकाल कर सुभाष से: देखो कैसे ये मुझे बेरहमी से चोद रहा है बचाओ मुझे इससे और अरुन को अपने उपर खींच लेती है।

ओर उसके कान में आज पहली बार किसी मरद का लंड अंदर गया है दर्द तो होगा ही कोई रहम मत कर और जैसे चाहे वैसे चोद।

और अरुन एक बार पूरा लंड निकाल कर एक ही झटके में पुरा पेल देता है और प्रीति अपने मुह पे अपना हाथ रख के अपना मुह बंद कर लेती है।

और अरुन प्रीति को बेरहमी से चोदने लगता है।

प्रीति: आ माँ आह सी धीरे धीरे आह माँ मार डाला कमिने मादरर्चोद ने । फाड़ दिया मेरी चुत तेरे लंड ने इतना दर्द को तीन बच्चे पैदा करने में भी नहीं हुआ

मादरचोद।

आआआआह उउउउउउउह माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ।

कल तेरी माँ को बताऊँगी की तेरे लड़का का लंड मर्द का लंड से भी बडा है।मैंने तो चुदवा लिए तू भी चुदवा ले ।
 
कम से कम बूढ़ापा को सही से कट जायेगा जवानी तो भाई ने बर्वाद कर दी ।

भाभी पसंद नहीं थी इसलिए मेरा सहारा ले कर भाभी से दुर रहते थे और भाभी को लगता था की मैं उन लोगों के दूरी की बजह हूँ।क्या करती भाई बड़े थे इसलिए कुछ कह नहीं पाई।

आआआआह उउउउउउउह माआआआआ

अब बोल दूंगी तुम दोनों का मिलन करवा दूंगी तो मेरा कुछ बोझ हल्का हो जाएगा।

बोल अरुन अपनी माँ को चोदेगा।बोल न मेरे बेटे

चोदेगा न ।

अरुन कुछ नहीं बोलता और बाहर सरला शॉकड थी ।

ओ सोच रही थी वो बदला ले रही है पर वो तो उसकी खुशी के लिए अरुन से और सरला से बात करने को राजी थी।

नीतु माँ ये क्या हो गया भाई भी बंट गया और काम भी नहीं हुआ।

अंदर

अरुन प्रीति को चोदते हुए रुक जाता है।

प्रीति; क्या हुआ अरुन बुरा लगा।

जब तुम मुझे चोद सकते हो तो अपनी माँ को क्यों नही।वो बहुत तरसी है अपने पति के प्यार के लिए ।।

वो जगह तू पूरी कर सकता है।बोल अरुन बोल मानेगा मेरी बात।

मानेगा तो।

तू बोल रहा था न मेरी बेटी को चोदेगा तो तू मेरी बात मान मैं तुझसे अपनी बेटी चुदवा दुँगी।

सरला शॉक से रोने लगी।

जीसे मैं इतना गलत समझ रही थी वो मेरे खातिर अपनी बेटी चुदवाने के लिए तैयार है।

और रोने लगती गई है नीतू उसे समझाती है।

अंदर

प्रीति; बोल ना मेरे बेटे चोदेगा न अपनी माँ को।

अरुण: हाँ माँ की खातिर उसकी खुशी की खातिर चोदुँगा पर वो नहीं मानेगी।

प्रीति: वो तो मुझ पे छोड़ दे मैं मना लुंगी क्यों की मैं उसकी सब से फवरेट ननद हु और वो मेरी भाभी।

अरुण: अगर वो मान जायेगी तो ज़रूर चोद दुन्गा।

प्रीति: आ अब मुझ को तो चोद और ठण्डा कर दे ।

तेरे जैसे लंड पा के मैं निहाल हो गई और कल सरला की भी दिला कर उसे भी निहाल कर दूँगी।

चोद मेरे राजा तेज़ तेज़ चोद और झड जा मुझ में।

अरून कहा माँ का बदला लेने के लिए प्रीति की बेरहमी से चोद रहा था पर अब उसको अच्छा जान कर प्रीति को बड़े प्यार से चोदता है।
 
प्रीति: ये प्यार वाली चुदाई अपनी माँ को करना मुझे तो बेरहमी से चोद जैसे पहले चोद रहा था।

और अरुन प्रीति की बात सुन कर पूरा लंड निकाल कर फिर से पूरा घुसा देता है और बेरहमी से पेलने लगता है।

प्रीति: आआआअह्ह उउउउउउउह माआआआज़ा आ मायआ आआआआ माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ माआआआआ मरररररररर डाआआआआआ कमिने मादरर्चोद। मेरी आज ही फाड़ दे मेरी जान

आआआआह उउउउउउउह माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ अअअअअअअ उह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊह माआआआआ मरररररररर डाआआआआआ ज़ालिम आआआअह्ह मा।

प्रीति: अपनी बेटी की भी चुत दिलाऊँगी और नीतू की भी ओ भी मस्त माल है बिलकुल तेरी माँ की तरह उसका पति भी ढिला है।

अब तू ही उसको चोद कर ठण्डा कर सकता है।

अरून अपनी माँ और बहन की चोदने की सोच कर

करीब १ घंटे प्रीति को नॉन स्टोप चोद कर प्रीति की चुत में झड जाता है।और प्रीति के उपर लेट जाता है।

प्रीति : अभी से थक गया अरुण।अरुन की ऑंखों में देखते हुए।

अरुण: नहीं वो।।

प्रीति; मुझे पता है।

आ: हाँ वो।

प्रीति: मैं तभी समझ गई थी जब तूने बेहरमी के साथ पहली बार में पूरा डाल दिया था।

अपनी माँ और बहन के साथ ऐसा मत करियो नहीं तो वो मर जायंगे।

अरुण: ठीक है समझ गया।

प्रीति: पक्का मेरे राजा चल अब सो जा रात हो गई है

तूने तो मेरी चाल ही बिगाड दी ।

कल अपनी माँ और बहन की बिगाड देना।

अरुण शरमा जाता है।

प्रीति: हा हा शरमा रहा है अपनी बुआ को चोदने में नहीं शरमाया ।

और अरुन को गले लगा लेती है।

ओर सुभाष को देखती है।

चुद गई तुम्हारी बीवी भतीजे से और हो गई उसकी रखैल।

आज से सिर्फ अरुन ही मुझे चोदेगा ।

प्रीति : चोदेगा न।

अरुण: हाँ और आप की गाण्ड भी माँरुंगा।

प्रीति: ठीक है पर पहली बार करना तो आराम से मारना

अरुण: पक्का ।

और दोनों एक दूसरे के बाँहों मैं लेटे हुए सो जाते है।

और बाहर नीतू और सरला दोनों भी उठ कर अपने २ जगह आ जाती है।

कहा सर्ला प्रीति को रँगे हाथ पकड़ कर बेइज्जत करना चाहती थी और कहा अरुन को उसकी बाँहों में छोड़ कर अपने बिस्तर में आ जाती है।

और इधर नीतू फाइनली अरुन से चुदने का ख्वाव पूरा होते हुए देखती है।

और सुबह सभी उठ जाते है।

सभी ब्रेकफास्ट टेबल पे।

सरला और नीतू किचन में

ब्रेकफास्ट बना रही थी।

नीतू: माँ आज बुआ आप से बात करेंगी।

सरला: हाँ देखते है क्या होता है।

नीतू: माँ भाई ने बुआ की चाल बिगाड दी।

सरला: बेटा और पति किसका है।

नीतू: मेरा पति और आप क बेटा।

सरला: चुप कर बेशरम मेरा पति।

और दोनों हँस पडते है।

तभी प्रीति किचन में आ जाती है।

प्रीति: क्या हो रहा है।

सरला: कुछ नहीं बस हो गया आप चलो।

वैसे आप लंगड़ा के क्यों चल रही है।

प्रीति:आप के बेटे की बजह से।

सरला: प्रीति के चेहरे को देखते हुए

क्या।

प्रीति: कुछ नहीं मज़ाक़ कर रही थी।

 
और सभी डायनिंग टेबल पे

ब्रेकफास्ट करते हुए ।

सुभाष रमेश से।

भाई साहब आज हम चले जाएंगे।

और रवि भी बोलता है।

पर प्रीति और नीतू अभी जाना नहीं चाहती थी

क्यूं की अभी तो उन्हें अरुन से अपनी गाण्ड और चुत फडवानी थी।

और दोनों रमेश की सिफारिस लगाती है।

रमेश: सुभाश और रवि से।

छोड़ जाओ दोनों को कुछ दिंनो के लिए बाद में अरुन छोड़ आयेगा।

और दोनों रमेश की बजह से कुछ बोल नही पाते और

दोनो अपनी अपनी टाइम पे ट्रैन पकड़ने के लिए घर से चले जाते है और रमेश भी ऑफिस चला जाता है।

और अरुन जब कॉलेज के लिए निकलता है तो प्रीति उसे रोक लेती है।

प्रीति: कहाँ जा रहे हो।

अरुण: कालेज।

प्रीति: हम तेरी बजह से रुकि है और तुम कॉलेज जा रहे हो।

अरुन प्रीति को देखते हुए।

मुझे देख क्या रहे हो तुम्हारी बजह से तो मैं रुकि हूँ।

नीतु :मैं भी।

सरला उन दोनों को देखती है।

और प्रीति सब के सामने अरुन को किस करने लगती है

अरून पीछे हटता है।

प्रीति क्या हुआ

अरुण: ये आप क्या कर रही हो बुआ।

प्रीति: वही जो रात में किया था।

और नीतू और सरला को देखने लगती है।

और नीतू और सरला प्रीति को देखति है।

सरला: क्या बोल रही हो।

प्रीति: वही जो तुम खिड़की से झाँक कर देख रही थी

तुम दोनो।

अरुन सरला और नीतू एक दूसरे को देखते है।

प्रीति: हाँ मैंने तुम दोनों को खिड़की से झाँकते हुए देख लिया था।

इसलिये मैंने अरुन से तुम दोनों को चोदने के लिए बोला था।

और शायद नीतू भी इसीलिए रुकी है।

प्रीति: भाभी मैं जानती हु मैंने भाई की बातों मैं आकर आप को काफी दुःख दिए पर अब आप और अरुन का मिलन करा कर मैं भूल सुधारना चाहती हूँ।

सरला: तुम पागल जो गई हो ,ए मेरा बेटा है।

हाँ मैंने कब मना किया।

मेरा भी तो भतीजा है मैंने भी तो सेक्स किया और तुम दोनों ने देखा ।

सरला: देखने और करने में काफी अंतर है।

प्रीति: कुछ नहीं है।

अच्छा ठीक है ।

तो तुम दोनों मेरे एक सवाल का जवाब दो सच है तो मेरी बात मान लेना और अगर झूठ हुआ तो मैं तुम दोनों की बात मान लूँगी।

सरला: पुछो।
 
प्रीति: क्या तुम दोनों के पति का लंड अरुन के लंड से बड़ा है।

और दोनों चुप हो जाती है।

प्रीति: बोलो बड़ा है।

सरला: उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है।

प्रीति: भाई मुझे तो पड़ता है तभी तो कल रात मुझे वो मजा मिला जो पूरी ज़िन्दगी नहीं मिला।

बोलो भाभी।

सरला: हाँ अरुन का बहुत बड़ा है।

प्रीति: तभी तो ऐसी ज़िन्दगी कब तक गुजारोगी।

मज़ा करो।

भाई कौन सा आप ख़याल रखते है।

सरला: पर ये मेरा बेटा है मेरा ख़ून।

नीतु उन दोनों की बहस सुन रही थी।

तभी तो किसी को शक़ नहीं होगा और आपकी ज़िन्दगी मज़े से कटेगी।

सरला कुछ नहीं बोलती।

प्रीति नीतू से।

अपनी माँ को समझा। क्यों अपनी ज़िन्दगी ख़राब कर रही है।

ऐसा मौका हर किसी को नहीं मिलता।

नीतु: मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा।

प्रीति: सब समझ जायेगी जब अरुन का मुसल जायेगा तेरी चूत के अंदर।

और नीतू शरमा जाती है।

और अरुन को देखने लगती है जो उसी को देख रहा था।

प्रीति: भाभी तुम नहीं मानोगी।

सरला:प्रीति तुम समझ क्यों नहीं रही देखने और करने ने में बहुत अंतर है।

जो तुम ने कहा वो भी गलत था और जो कह रही हो वो भी गलत है

ऐर मुझे पूरा यकीन है अरुन भी मना कर देगा।

प्रीति: अरुन से बोली अरुन ।

अरुण: क्या मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा।

प्रीति: यही की तुम ने जो मेरे साथ किया वो तुम अपनी माँ और बहन के साथ कर सकते हो।

अरुण: पर बुआ वो सब जो रात को हुआ वो आप की मरजी से हुआ और अगर माँ और नीतू नहीं चाहती तो नहीं करुन्गा।

प्रीति: रात को तो बोल रहा था ।

अरुण: बुआ वो आप पूछ रही थी इस लिए बोल दिया।

सरला: हो गई तसल्ली ।

प्रीति: नहीं

सरला: कोई बात नहीं अरुन तुम कॉलेज जाओ।

अरुण: ठीक है माँ।

प्रीति: तुम कहीं नहीं जाओगे मैं यहाँ तुम्हारे लिए रुकि हूँ।

और अरुन के पास जा कर उसके होंठो पे किस कर देती है।

सरला: ये क्या बतमीज़ी है प्रिती।वो अभी बच्चा है।

प्रीति: बच्चा, ये तो बड़ो बड़ो का बाप है रात में देखा नही।

सरला: प्रीति तुम ऐसे क्यों कर रही हो।

तूमने जो कल किया मैंने कुछ बोला और कुछ भी करना है तो कर लो पर हमें इन सब में मत खीचो।

प्रीति: ओके भाभी जैसे आप की मरजी पर मैं अरुन को पूरा पकडे रहूँगी

सरला: पर अरुन से तो पूछ लो की वो क्या चाहता है।

प्रीति: वो क्या बोलेगा उसने रात को ही बोल दिया था की वो तुम्हारी और नीतू की फाड़ना चाहता है

और ये बात तुम दोनों ने अपने कानों से सुनी है।

सरला अरुन को देखती है।

सरला: प्रीति क्या बोल रही है।

अरुण: वो माँ सॉरी।

सरला: सॉरी नहीं क्या ये सच है।

अरुण: वो माँ ।

प: वो माँ क्या। मरद है सच बोल।

अरुण मन में ही

हा माँ आप की और नीतू को चोदना चाहता हू।

ऐर साथ में बुआ की गाण्ड भी मारनी है चुत तो फाड़ चूका हूँ। बुआ तो अपनी बेटी की भी दिलाएँगी।

सरला:बोल मर्द की तरह।

अरुण: माँ वो बुआ सच कह रही है।

सरला: क्या बोला अरुन तू भी।

अरुण: हाँ माँ मैंने भी आप को परेसान देखा है पापा आप का ख्याल नहीं रखते।

मै आप को सारी ख़ुशी देना चाहता हुँ।

सरला: पर बेटा मैं तेरी माँ हूँ ये गलत है।

माँ बेटा ऐसा नहीं करते ।

मै तुझे बुआ के नहीं रोकुंगी

पर मैं नहीं दे सकती तेरा साथ।

नीतु मन ही मन पता नहीं क्या ड्रामा हो रहा है

मुझे कब मिलेगा अरुन का लंड़।
 
प्रीति सरला से

क्यूं कर रही हो ऐसा अब तो अरुन ने भी बोल दिया है

वो भी तुम से प्यार करता है ।

पकड़ लो इसका हाथ ज़िन्दगी मज़े से कटेगी।

सरला: चुप रहो तुम।

प्रीति कुछ बोलने वाली थी ।

तभी प्रीति का सेल बजता है।

प्रीति: हेलो।

और उधर से कूछ बोला जाता है।

ठीक है मैं निकल रही हुँ।

सरला: क्या हुआ और कहा निकल रही हो।

प्रीति: वो रानी और उसके पति में झगड़ा हो गया है और वो घर आ गई है।

मुझे जाना पड़ेगा वो स्टेशन पे मेरा वेट कर रहे है।

ओर पैकिंग करने चली जाती है।

रानी वही है जिसकी चुत दिलाने की प्रीति अरुन को बोली है।

रानी प्रीति की सब से बड़ी बेटी थी जिसकी भी एक एक साल की बेटी थी।

प्रीति पैकिंग कर के बाहर आ जाती है।

अरुण से:अरून क्या तू मुझे स्टेशन तक छोड सकता है।

अरून हाँ बुआ।

और दोनों घर से निकल जाते है।
 
अगले अपडेट से शुरू होगी माँ बेटी की जबरदस्त चुदाई।
 
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