• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


मेरी बात सुन कर नजीबा ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा…मैं बेड के किनारे पर नीचे खड़ा था…नजीबा के होंठो पर दिलकश मुस्कान देख कर ही मेरा लंड पाजामा के अंदर झटके खाने लगा था…वो उठी और घुटनो के बल बैठ कर घुटनो के बल आगे बढ़ी …..और फिर बेड के किनारे पर आकर उसने घुटनो के बल बैठे-2 ही मेरे गले में आपने बाज़ुओं को डाला…..और मेरे माथे पर किस करते हुए बोली…. “अब तो ये घर मेरा भी है…है नही…तो इसकी सॉफ सफाई कोई बाहर से तो आकर करेगा नही… वैसे भी में यहाँ 2:30 बजे तक हूँ…..सिर्फ़ एक घंटे के लिए इंतजार करिए…. आपकी ये कनीज़ आपकी खिदमत में हाज़िर होती है…..”

मेने भी नजीबा को अपनी बाहों में भर लिया….और उसे अपनी चेस्ट से दबाते हुए बोला….”तुम कनीज़ नही मेरी जान हो….आगे से कभी ऐसा मत कहना….” मेने अपने हाथो को उसके कमर से नीचे लेजाते हुए उसकी बुन्द पर ले गया….और उसकी बुन्द के दोनो पार्ट्स को अपने हाथों में लेकर जैसे ही दबाया,.,…तो नजीबा ने सिसकते हुए अपने बाजुओं को मेरी पीठ पर और कस लिया…हम दोनो के गाल एक दूसरे से जुड़े हुए थे….नजीबा ने अपने फेस को थोड़ा सा पीछे किया और फिर अपनी नशीली आँखो को खोल कर मेरी आँखो में देखते हुए खुद ही अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा दिया….जैसे ही मेने नजीबा के होंठो को अपने होंठो में लेकर चूसना शुरू किया…

नजीबा ने अपने होंठो को खोल कर ढीला छोड़ दिया…..पर उसके होंठो को अपने होंठो में दबा -2 कर चूसने लगा….और साथ ही उसकी शलवार से उसकी नरमो मुलायम बुन्द को अलग करके दबाने लगा…जैसे-2 में उसकी बुन्द के दोनो पार्ट्स को फैला कर दबाए जा रहा था…वैसे-2 नजीबा का जोश किसिंग में और बढ़ता जा रहा था… फिर एक दम से नजीबा ने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग किया….और मेरी चेस्ट पर मुक्का मारते हुए बोली….”आप बड़े खराब हो….?”

मेने मुस्कुराते हुए उसके आँखो में देखा तो, उसने अपने फेस को मेरे सीने में छुपा लिया….”क्यों मेने ऐसा क्या कर दिया….?”

नजीबा: मुझे बहका दिया और किया….अब हटो भी….मुझे काम करने दो….

मेने नजीबा की बुन्द से हाथ हटा कर उसके फेस को दोनो हाथो से पकड़ कर ऊपेर उठाया तो देखा उसका फेस एक दम रेड हो चुका था….उसके कान भी सूर्ख होकर दिख रहे थे….नजीबा उस समय आसमान से उतरी हुई परी लग रही थी….उसने मेरी आँखो में देखा और फिर नज़रे झुका ली…मेने उसके माथे को चूमा और सरगोशी से भरी आवाज़ में बोला….”ठीक है…जब तुम्हारा मूड करे…तो मुझे बुला लेना.. में ऊपेर जा रहा हूँ….”

मेने नजीबा को छोड़ा और बाहर आ गया…..और ऊपेर छत पर चला गया….9 बजने में 15 मिनिट बाकी थी….धूप निकली हुई थी….मेने स्टोर रूम से चारपाई निकाली और बाहर धूप में डाल कर एक पिल्लो लेकर लेट गया….और दिल ही दिल में सोचने लगा कि, आज चाहे कुछ भी हो जाए….मेने नजीबा को अपनी दिल की ख्वाहिशों से रूबरू करवा ही देना है…मैं काफ़ी देर तक ऐसे ही लेटा रहा…..धूप बहुत अच्छी लग रही थी….तकरीबन एक घंटे बाद जब में नीचे पहुँचा तो, फर्श पर लगा हुआ संगमरमर एक दम चमक रहा था….जब से नाज़िया गयी थी….तब से घर की सॉफ सफाई भी नही हुई थी…इतने दिनो से में इस घर में कैसे रह रहा था. मैं खुद हैरान था…खैर मुझे नजीबा दिखाई नही दी तो, मेने उसका नाम पुकारा तो, बाथरूम से नजीबा की आवाज़ आई….”आ रही हूँ ख़ान सहाब….”

मैं जल्दी से अपने रूम में जाकर टीवी और डीवीडी ऑन करके कल वाली पोज़ीशन में बैठ गया…आज भी मेने राज़ाई को फोल्ड करके बेड के पुष्ट के साथ लगा दिया था….और वीडियो को स्टार्टिंग पॉइंट पर पॉज़ करके नजीबा के रूम में आने का वेट करने लगा… पर थोड़ा सा इंतजार भी सदियों बीतने जैसा लग रहा था….और जब मुझसे सबर नही हुआ… में बेड से नीचे उतरा और बाहर आया…तो देखा नजीबा बातरूम से निकल कर रूम की तरफ ही आ रही थी….मेने आगे बढ़ कर नजीबा को अपनी बाहों में उठा लिया….”अहह ख़ान सहाब गिराना है मुझे….?” नजीबा ने डरते हुए कहा…. “नही गिराता…..” और फिर नजीबा को रूम की तरफ लेजाने लगा…

मैं नजीबा को गोद में उठाए हुए, रूम की तरफ जाने लगा….मेने रूम में जाकर नजीबा को बेड पर लेटा दिया…..नजीबा ने पीछे रखी राज़ी के साथ टेक लगा ली….मेने उसकी तरफ देखते हुए अपने पाजामा को उतारना शुरू किया तो, नजीबा ने शरामते हुए अपने सर को झुका लिया….पाजामा उतारने के बाद अब मेरे जिस्म पर सिर्फ़ अंडरवेर और वही गरम टी-शर्ट थी….में बेड पर चढ़ा…और नजीबा के दोनो बाज़ुओं को पकड़ कर कल की तरह ही उसे अपनी गोद में बैठा लिया….आज भले ही नजीबा शर्मा रही थी…पर जैसा में कर रहा था….वो मुझे वैसे ही करने दे रही थी….इसलिए आज मुझे उसको कल वाली पोज़ीशन में अपनी गोद में बैठने के लिए ज़्यादा जद्दो जेहद नही करनी पड़ी….मेने डीवीडी का रिमोट उठाया और मूवी चालू की तो, नजीबा ने सर को झुकाए हुए कहा….

“ये क्या ख़ान सहाब इसे तो बंद कर दो….कल देखी तो है…? “

मेने नजीबा के फेस को पीछे की तरफ घुमाया और उसके होंठो को चूमते हुए बोला…ये दूसरी है कल वाली नही है….”

 


नजीबा चुप हो गयी….और उसकी नज़रे टीवी स्क्रीन पर गढ़ गई…. और फिर जैसे ही स्क्रीन पर उस वीडियो का टाइटल (नेम) आया “थ्रीसम विद माइ वाइफ आंड मदर इन लॉ…..(मेरी बीवी और सास के साथ चुदाई….) तो नजीबा ने चोंक कर मेरी तरफ देखा, जैसे आँखो से पूछ रही हो, ये क्या है समीर...” नजीबा कुछ देर तो कुछ नही बोली….फिर जैसे ही मूवी स्टार्ट हुई तो, नजीबा ने सर को झुकाए हुए कहा….”ये कैसी मूवी है…क्या ये अजीब सा नहीं है….?”

शायद नजीबा खुल के बात नही कर पा रही थी….”मुझे भी नही पता… चलो देखते है आख़िर है क्या…..” नजीबा मेरी बात सुन कर चुप हो गयी….

अब सेसेन ये था कि, मैं बेड के पुस्त के साथ लगाए राज़ाई के साथ पीठ टिका कर आधा बैठा और आधा लेटने वाले अंदाज़ में था…और नजीबा मेरी गोद में थी…उसकी पीठ मेरी चेस्ट के साथ लगी हुई थी….उसकी बुन्द ठीक मेरे लंड के ऊपेर थी….जो पहले से एक दम सख़्त खड़ा था….मेरी टांगे घुटनो से मूडी हुई थी……मेने नजीबा की दोनो टाँगो को उसकी रानो से पकड़ कर खोला और अपनी दोनो टाँगो के दोनो तरफ कर दिया…जैसे ही नजीबा की टांगे खुली… मेरा लंड जो उसकी बुन्द के नीचे दबा हुआ था…वो खिसक कर नीचे से शलवार के ऊपेर से उसकी फुद्दि पर जा लगा….

नजीबा आज कल के मुक़ाबले मेरा खुल कर साथ दे रही थी…मेने नजीबा की टाँगो से हाथ हटा कर उसके पेट पर हाथ फेरना शुरू कर दिया…..टीवी स्क्रीन पर पहला सेसेन शुरू हो चुका था….उसमे एक लड़का अपनी बीवी के साथ अपनी सास के घर उसे मिलने के लिए आता है….रात को पहला सेसेन शुरू होता है…जब वो लड़का अपनी वाइफ के साथ सेक्स शुरू करता है….तो उसकी सास टाय्लेट जाने के लिए उठ कर रूम से बाहर आती है….और अपने जमाई और बेटी के रूम से आ रही मस्ती से भरी सिसकारियाँ सुन कर वो औरत अपने आप को उस तरफ जाने से रोक नही पाती…और जब वो रूम के डोर पर पहुँचती है तो, वो डोर खुला पाती है….अंदर उसका जमाई (दामाद ) उसकी बेटी को बेड पर डॉगी स्टाइल में किए हुए पीछे से अपने लंबे मोटे लंड को उसकी फुद्दि के अंदर बाहर कर रहा होता है….

ये सब देख कर नजीबा की साँसे मजीद तेज होती जा रही थी…..नजीबा को गरम होता देख कर मेने नजीबा की कमीज़ को दोनो हाथो से पकड़ कर ऊपेर करना शुरू किया तो, नजीबा ने चोंक कर मेरी तरफ देखा…और फिर बिना कुछ बोले उसने अपनी बाज़ुओं को ऊपेर कर लिया….मेने उसकी कमीज़ को उसके जिस्म से अलग करके बेड पर रख दिया…फिर उसकी ब्रा के हुक्स खोल कर उसके ब्रा को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया.. नजीबा ने शरमाते हुए अपने बाजुओं से अपने मम्मो को कवर कर लिया…एक बार फिर नजीबा मेरी चेस्ट पर पीठ टिका कर मेरी गोद में बैठी हुई थी…उधर वो लड़का अपनी वाइफ की बुन्द को पकड़ कर तेज़ी से कमर हिलाते हुए उसकी फुद्दि में लंबे-2 शॉट लगा रहा था….जब कॅमरा फुद्दि और लंड पर फोकस होता तो, लंड पर लगा हुआ फुद्दि का पानी भी सॉफ दिखाई देती…जिसे देख कर नजीबा भी और ज़यादा गरम होने लगी….

 


मेने नजीबा के पेट पर हाथों को फेरते-2 जैसे-2 ऊपेर की तरफ ले जा रहा था.. वैसे -2 नजीबा खुद ही अपने बाजुओं को अपने मम्मो के ऊपेर से उठाती जा रही थी…आख़िर कार नजीबा के 32 साइज़ के मम्मे मेरी हाथो के नीचे आ ही गये… मेने नजीबा के दोनो मम्मो को बड़े-2 प्यार से दबाना शुरू कर दिया…उसके मम्मो के सख़्त हो चुके निप्प्लो पर जब में अपनी हथेली को रगड़ता तो, नजीबा को करेंट सा लगता….उधर मूवी में अब कॅमरा अब उस लड़की की माँ पर फोकस था…जो डोर के बाहर खड़ी छुप कर अपने दामाद और बेटी की चुदाई देख कर गरम हो चुकी थी….

फिर जैसे ही उस औरत ने अपनी शॉर्ट नाइटी को उठा कर अपनी पैंटी को नीचे सरकाया तो, नजीबा के बदन ने हल्का सा झटका खाया….जो मुझे अपने जिस्म पर भी महसूस हुआ…फिर उस औरत ने अपनी पैंटी को नीचे करके अपनी फुद्दि के लिप्स के दरमियाँ जैसे ही अपनी उंगली को फेरना शुरू किया तो, नजीबा ने सिसकते हुए मेरी तरफ देखा…” क्या हुआ जान….? “ मेने नजीबा के होंठो को चूमते हुए कहा…”प्लीज़ इस बंद कर दें…ये कैसी मूवी है…मुझे नही देखनी….” पर मेने नजीबा की बात को कोई जवाब नही दिया….और एक हाथ उसके मम्मे से हटा कर नीचे ले गया…और जैसे ही मेने उसकी शलवार और पैंटी के ऊपेर से उसकी फुद्दि को दबाया….तो नजीबा ने सिसकते हुए कल की तरह ही अपने सर को मेरे कपड़े पर गिरा दिया…. मेने तेज़ी से नजीबा की फुद्दि को शावलार और पैंटी के ऊपेर से रगड़ना शुरू कर दिया….

नजीबा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…..मैं धीरे-2 एक हाथ से नजीबा के मम्मे को दबा रहा था…और दूसरे हाथ से शलवार के ऊपेर से उसकी फुद्दि को दबा रहा था…मुझे उसकी शलवार गीली होती हुई महसूस होने लगी थी….उधर उस लड़के की सास अपनी फुद्दि में तेज़ी से अपने दो उंगलियों को अंदर बाहर कर रही थी…और साथ ही साथ अपने दामाद के लंड को देख कर अपने होंठो पर जीभ फेर रही थी….नजीबा अपनी अध खुली आँखो से टीवी स्क्रीन पर देख रही थी…पहल सेसेन ख़तम हुआ….तो कुछ स्टोरी वाले सेसेन शुरू हो गये…मैं नजीबा को और ज़यादा गरम कर देना चाहता था….इसलिए मेने नजीबा के फेस को अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठो को अपने होंठो में लेकर चूसना शुरू कर दिया….

नजीबा के होंठो को चूस्ते हुए, मेने उसकी फुद्दि से हाथ हटा कर उसके शलवार के नाडे को खोलना शुरू कर दिया….नजीबा पूरी तरह मस्त होकर अपने होंठो को चुस्वा रही थी….मेने नजीबा के शलवार का नाडा खोला और फिर दोनो हाथो को उसके शलवार और पैंटी के अंदर फँसा कर उसे नीचे करने लगा…कुछ ही पॅलो में मेने नजीबा के शलवार और पैंटी दोनो को उसके जिस्म से अलग कर दिया… और फिर अपने अंडरवेर को भी उतार दिया….

मेरा तना हुआ सख़्त खड़ा लंड सीधा नीचे से नजीबा की फुद्दि के लिप्स पर दबा हुआ था…..मेने एक हाथ नीचे लेजा कर नजीबा के हाथ को पकड़ा और अपने लंड पर जैसे ही रखा तो, उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करके मेरी आँखो में देखा….मेने भी उसके आँखो में देखते हुए, उसके हाथ में अपने लंड को पकड़वा दिया….और हाथ के इशारे से उसे लंड को फुद्दि पर दबाने का इशारा भी किया….मूवी में दूसरा सेसेन शुरू हो चुका था….जिसमे अगले दिन उस लड़के की वाइफ किसी काम से घर से बाहर जाती है…और उसके पीछे से उसकी सास अपने दामाद को अपना भरा हुआ जिस्म दिखा कर अपनी तरफ अट्रेक्ट करती है….नजीबा ये सब देख कर बहुत हैरान हो रही थी….मेने उसकी आँखो में देखा तो, उसकी आँखो और फेस के एक्सप्रेशन हर बदलते हुए सेसेन के साथ बदल रहे थे….

आख़िर दूसरा सेसेन स्टार्ट हो गया….उसमे वो लड़का शवर के नीचे खड़ा होकर अपने साँस के मम्मो को याद करते हुए अपने लंड को हिला रहा था…जो उसके सास ने उसे कुछ देर पहले झुक-2 कर दिखाए थे…तभी उसकी सास बाथरूम का डोर खोल कर अंदर आ जाती है….उसकी सास के जिस्म पर उस वक़्त सिर्फ़ ब्रा और पैंटी होती है…लड़का थोड़ा सा नर्वस हो जाता है…पर उसकी सास स्माइल करते हुए उसके सामने ही अपनी ब्रा और पैंटी खोल कर नीचे पैरो के बल बैठते हुए अपने दामाद के लंड को पकड़ कर हिलाने लगती है….ये देख लड़का भी सकून से मज़े लैने लगता है….और फिर देखते ही देखते वो औरत अपने दामाद के लंड को मूह में लेकर चुप्पे लगाना शुरू कर देती है…..जैसे जैसे उस औरत का जोश अपने दामाद के लंड के चुप्पे लगाने में बढ़ता जा रहा था…..

 


वैसे-2 नजीबा भी मेरे लंड को पकड़े हुए तेज़ी से अपनी फुद्दि को लंड पर रगड़ने लगी थी….उसकी फुद्दि से पानी बह कर मेरे लंड की पूरी लेंथ पर फेल रहा था… और मेरा लंड उसकी फुद्दि से निकले लैसदार पानी से पूरा चिप चिपा सा हो गया था.. नजीबा को इस कदर गरम होता देखा….मेने भी गरम लोहे पर हथौड़ा मार ही दिया….”कैसी लग रही है मूवी….?” मेने नजीबा के कान में सरगोशी करते हुए कहा तो, नजीबा ने चोंक कर मेरी तरफ देखा…पर बोली कुछ नही….और फिर से मूवी की तरफ देखने लगी….उसका सर अभी मेरे कंधे पर था…और में दोनो हाथो से नजीबा के मम्मो के निपल्स को दबा रहा था…जो एक दम सख़्त हो चुके थे…उधर मूवी में जब उस लड़के का लंड उसकी सास के थूक से एक दम गीला होकर चमकाने लगा तो,

उसकी सास ने अपने दामाद का लंड मूह से बाहर निकाला और खड़ी होकर अपने दामाद की तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी….उसने अपने दोनो हाथो को दीवार पर टिकाया और फिर कोड़ी होकर अपनी बुन्द पीछे की तरफ बाहर निकाल ली…तो उसके दामाद ने भी अपनी सास के राइट लेग को उठा कर दीवार पर रख दिया….अब उस औरत की एक टाँग उठी हुई थी….उस लड़के ने जैसे ही पीछे से अपने लंड को सास की फुद्दि के सूराख पर रखा तो, इधर नजीबा ने भी तड़प्ते हुए मेरे लंड के कॅप को अपनी फुद्दि के सूराख पर सेट कर दिया….जैसे ही मेरे लंड का दहकता हुआ कॅप नजीबा की फुद्दि के दहकते हुए सूराख पर लगा…नजीबा एक दम से सिसक उठी…और उधर उसकी सास ने अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश किया तो, उसके दामाद का लंड उसकी फुद्दि को चीरता हुआ अंदर जा घुसा….

जिसे देख नजीबा से भी रहा नही गया….और उसने खुद ही अपनी बुन्द को मेरी गोद से थोड़ा सा ऊपेर उठाया और अपनी फुद्दि के सूराख को मेरे लंड पर दबा दिया…मेरे लंड का कॅप नजीबा की एक दम गीली फुद्दि की दीवारो को खोलता हुआ अंदर जाने लगा… जैसे ही मेरा आधा लंड अंदर गया…तो मेने भी नीचे से अपनी कमर को ऊपेर की तरफ पुश किया….ऊपेर से नजीबा नीचे के तरफ अपनी बुन्द दबा रही थी….नतीजा ये हुआ कि, कुछ ही पॅलो में मेरा पूरा का पूरा 8 इंच लंबा लंड नजीबा की फुद्दि की गहराइयों में समा गया…”उंह सीईईईईईईईईईईई…ओह्ह्ह ख़ान सहाब…” नजीबा ने सिसकते हुए मेरे गाल पर हाथ रखा और अपनी नशीली आँखो से मेरी तरफ देखते हुए अपने होंठो को मेरे होंठो के साथ लगा दिया….

वो एक पल के लिए मेरे होंठो को किस करती…और फिर अपने होंठो को मेरे होंठो से हटा कर गहरी और गरम साँस बाहर छोड़ती….और फिर से अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा देती…इस तरह उसने 30 सेकेंड में मुझे पता नही कितनी बार किस किया…और फिर से अपने सर को मेरे कंधे पर गिरा दिया….पर उसका हाथ मेरे गाल पर ही रहा…वो मूवी देखते हुए लगतार मेरे गाल पर हाथ फेर रही थी….और मैं नीचे से धीरे-2 अपने लंड को नजीबा की फुद्दि से थोड़ा सा बाहर निकालता और फिर धीरे-2 से अंदर कर देता…नजीबा को थोड़ा पेन भी हो रहा था…पर कल से बहुत कम था…नजीबा अभी भी मूवी में हो रही सास दामाद की चुदाई देख रही थी….

तभी अचानक से उस लड़के की वाइफ घर वापिस आ जाती है…और अपने हज़्बेंड को अपनी माँ के साथ चुदाई करते हुए देख लेती है…फिर तीनो में कुछ बात होती है…और आख़िर कार वो तीनो रूम में पहुँच जाते है…जहाँ पर थ्रीसम शुरू होता है… जैसे ही उस लड़की ने भी अपने कपड़े उतारने शुरू किए….तो नजीबा की आँखे पूरी खुल गयी…वो बड़े गोर से सामने चल रहे सीन की तरफ देखती तो, कभी मस्ती से भरी आँखो से मेरी तरफ ….फिर क्या था…जैसे-2 दोनो माँ बेटी ने उस लड़के के लंड के एक साथ चुप्पे लगाने शुरू किए तो, नजीबा ऐसी गरम हुई कि, पूछो मत…उसने खुद ही तेज़ी से अपनी बुन्द को हिलाना शुरू कर दिया….मेरा लंड दो इंच तक उसकी फुद्दि से बाहर आता…और फिर से उसकी फुद्दि के अंदर चला जाता,…

 
नजीबा को इस तरह जोशो ख़रोश के साथ अपनी फुद्दि मरवाते देख मुझे लगने लगा था कि, अब मैं ज़यादा देर तक संभाल नही पाउन्गा….फिर जैसे ही उस लड़की की माँ ने अपनी बेटी की टाँगो को खुद खोल कर उसकी फुद्दि को सक करना शुरू किया तो, ये देख नजीबा और ज़्यादा तड़प उठी…..वो लड़का अपनी वाइफ की टाँगो के बीच आकर बैठा तो, उसकी सास ने अपनी बेटी की फुद्दि से मूह हटा कर अपनी बेटी की फुद्दि के ऊपेर लटक रहे अपने दामाद के लंड को मूह में लेकर दो तीन बार चुप्पे लगाए और फिर खुद ही अपने हाथ से पकड़ कर अपने दामाद के लंड को अपनी बेटी की फुद्दि के सूराख पर लगा दिया…और खुद अपनी बेटी के ऊपेर झुक कर अपने मम्मो को अपने बेटी से चुसवाने लगी….जैसे ही उस लड़के ने लड़की की फुद्दि में अपने लंड को डाला नजीबा एक दम सिसक उठी…वो मेरी गोद से उठी तो, मेरा लंड उसकी फुद्दि से बाहर आकर झटके खाने लगा….

एक पल के लिए तो मुझे भी कुछ समझ में नही आया कि, नजीबा को क्या हो गया है…मेरी गोद से उठने के बाद उसने मेरी तरफ फेस किया और फिर मेरी कमर के दोनो तरफ अपने घुटनो को टिका कर बैठते हुए मेरे लंड को पकड़ अपनी फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए बोली….”ओह्ह्ह ख़ान शाहब मेरी फुद्दि की आग को ठंडा कर दो..”और फिर खुद ही वजन डालते हुए मेरे लंड को पूरा का पूरा अपनी फुद्दि की गहराईयो में ले लिया….और झुक कर मेरे होंठो को अपने होंठो में लेकार चूस्ते हुए अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे करने लगी….

मेरा लंड तेज़ी से नजीबा की फुद्दि के अंदर बाहर होने लगा….”ओह्ह्ह्ह हाआँ ख़ान सहाब बहुत मज़ा आ रहा है…..चोदो ना मुझे….प्लीज़ फक मी…..” नजीबा ने चिल्लाते हुए कहा…तो मेने भी अपने हाथो को पीछे लेजाते हुए नजीबा की बुन्द को पकड़ कर दबाते हुए अपनी कमर को ऊपेर के तरफ पुश करके शॉट लगाने शुरू कर दिए… नजीबा ने झुक कर अपने एक मम्मे को पकड़ कर मेरे होंठो पर लगा दिया….”अहह हाां समीर….मेरे मम्मे को प्यार करो….प्लीज़ चूसो ना इसे…..” मेने भी देर नही की, और थोड़ा सा ऊपेर उठ कर नजीबा के मम्मे को जितना हो सकता था…अपने मूह में लेकर सक करना शुरू कर दिया….नजीबा भी पूरे जोश के साथ अपनी बुन्द को उठा-2 कर अपनी फुद्दि मेरे लंड पर पटक रही थी….फिर कुछ ही लम्हो बाद नजीबा ने पूरे जोश ख़रोश के साथ अपने कमर हिलाते हुए अपने फारिघ् होने का ऐलान कर दिया….

“अहह ओह उंह सीईईईई खाअन सहाब….आपकी नजीबा आहह ओह्ह्ह्ह अम्मी….हइई मैं मरी….ओह आह आहह उंघह उंगघह आह ख़ान सहाब कर दी आह आपने मेरी फुद्दि ठंडी…..” नजीबा के जोश और मस्ती को देख कर में भी ज़यादा देर नही रुक सका…और मेरे लंड ने भी नजीबा की फुद्दि की दीवारो पर पानी के बोछार कर दी….. नजीबा परस्कून होकर मेरे ऊपेर ही गिर गयी…पर उसका जोश ठंडा नही हुआ….वो पागलो की तरह कभी मेरे होंठो को चूमती तो,कभी मेरे गालो और गर्देन पर किस करती….तो कभी नीचे झुक मेरे चेस्ट पर…..कभी मेरे निपल्स को मूह में लेकर सक करती तो में मस्ती के दरिया में डूब जाता…

 


नजीबा लंबी-2 साँसे ले रही थी….और अभी भी वो मेरे ऊपेर लेटी हुई थी… थोड़ी देर बाद जब नजीबा की साँसे संभली तो, नजीबा मेरी ऊपेर से उतर कर बगल में लेट गयी….उसने पेट के बल लेटते हुए, अपने चेहरे को बिस्तर में छुपा लिया… मेने उसकी तरफ करवट बदली, और उसकी बुन्द पर हाथ फेरते हुए, सरगोशी से उसके कान के पास होंठो को लेजाते हुए बोला….” नजीबा क्या हुआ….? “ पर नजीबा ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया….मेने उसकी बुन्द पर हाथ फेरते हुए उसकी बुन्द के पार्ट को अपने पंजे में लेकर कस्के दबाया तो नजीबा बुरी तरह सिसकी….पर वो बिना कुछ बोले ऐसे ही लेटी रही……

मैं: क्या हुआ मुझसे नाराज़ हो….?

मेने नजीबा की बुन्द पर हाथ फेरते हुए कहा…..तो नजीबा ने नही में सर हिला दिया…..”तो फिर ऐसे फेस को क्यों छुपा रही हो…प्लीज़ मेरे तरफ देखो तो सही….” मेने नजीबा के कंधे को पकड़ कर उसे सीधा करने की कॉसिश की पर वो वैसे ही उलटी लेटी रही….”क्या हुआ नजीबा बात क्या है…मुझसे शरम आ रही है…?” मेने नजीबा की नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए दोबारा पूछा तो, इस बार नजीबा ने हां में सर हिला दिया….” अच्छा ठीक जब तुम्हारा शरमाना ख़तम हो जाए…तो बाहर आ जाना….में ऊपेर छत पर जा रहा हूँ….

मैं वहाँ से उठा और अपने कपड़े पहन कर छत पर आ गया…अभी सिर्फ़ 11:30 ही हुए थे….नजीबा के जाने से पहले में उसके साथ एक राउंड चुदाई का और कर सकता था….टाइम की कमी नही थी….इसलिए कपड़े पहन कर में सीधा ऊपेर आ गया… और ऊपेर धूप में चारपाई पर लेट गया….अभी 15 मिनिट ही हुए थे कि, मुझे सीढ़ियों पर से कदमो की आवाज़ सुनाई दी….थोड़ी देर बाद नजीबा ऊपेर आ गयी… उसके बाल खुले हुए थे….गाल एक दम लाल सुर्ख होकर दहक रहे थे…ऊपेर आते हुए जैसे ही उसकी नज़र मुझ पर पड़ी….तो उसने शरमाते हुए अपनी नज़रे झुका ली.. वो सर को झुकाए धीरे-2 चलते हुए मेरे पास आकर चारपाई पर नीचे पैर लटका कर बैठ गयी….

“क्या हुआ था तुम्हे….?” मेने एक हाथ उठ कर उसकी थाइट पर रखते हुए कहा…

.तो उसने नही में सर हिलाते हुए धीरे से कहा…”कुछ नही….”

मेने दूसरे हाथ से नजीबा के बाजुओं को पकड़ा और अपनी ऊपेर खेंचा तो, नजीबा ने चप्पल उतारीं और खुद ही मेरी चेस्ट के ऊपेर आकर लेट गयी…फिर उसने अपनी टाँगो को भी चारपाई के ऊपेर कर लिया….अब हम दोनो एक दूसरे की आँखो में देख रहे थे… “नजीबा तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो…..” मेने नजीबा के गालो पर हाथ रखते हुए कहा….तो नजीबा शरमाते हुए मुस्कुराने लगी…मेने धीरे-2 नजीबा के फेस को झुकाते हुए अपने होंठो को उसके होंठो पर लगा दिया…जैसे ही मेने नजीबा के होंठो को अपने होंठो में लेकर चूसना शुरू किया तो, नजीबा ने मेरी टी-शर्ट को चेस्ट वाले हिस्से से कस्के पकड़ लिया…..और अपने होंठो को ढीला छोड़ दिया….. मेने भी नजीबा के गालों से हाथ हटा कर उसकी कमर पर अपने बाजू कस लिए…..

मैं नजीबा के होंठो को चूसने में मस्त था, तो नजीबा भी अपने होंठो को चुस्वा कर मस्त हो चुकी थी....उसके होंठो को चूस्ते-2 कब मैं नजीबा को नीचे करके खुद ऊपेर आया….पता नही चला….उसके ऊपेर आते ही, मेने अपने टाँगो की मदद से उसकी टाँगो को खोला और अपनी कमर से नीचे वाले हिस्से को उसकी खुली हुई रानो के बीच में सेट कर लिया….बीच-2 में जब मैं अपनी कमर को आगे की तरफ हिला कर अपने लंड को उसकी सलवार और पेंटी के ऊपेर से उसकी फुद्दि पर रगड़ता तो, नजीबा का पूरा बदन झटका खा जाता...

मेने नजीबा के होंठो को चूसना छोड़ा और उसकी टाँगों के बीच घुटनो के बल बैठ गया... नजीबा मुझे अपनी अध खुली आँखो से देख रही थी.....मेने नजीबा की कमीज़ को पकड़ कर धीरे-2 जैसे ही ऊपेर सरकाना शुरू किया तो, नजीबा ने दोनो हाथो से अपनी कमीज़ को पकड़ते हुए नही में सर हिलाया...."प्लीज़...." मेने नजीबा की कमीज़ को ऊपर की तरफ सरकाते हुए कहा तो, धीरे-2 नजीबा के हाथो से उसकी कमीज़ निकल गयी...

.” यहाँ किसी ने देख लिया तो,” नजीबा ने अपनी आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा.

.”यहाँ कोई नही देखता…यहाँ पर किसी की नज़र नही पड़ेगी…” मेने नजीबा के गालो को चूमते हुए कहा….

जैसे-2 मैं उसकी कमीज़ को ऊपर कर रहा था....वैसे-2 नजीबा की गोरी पतली कमर मेरी आँखो के सामने आती जा रही थी....मैं नजीबा की कमीज़ को सरकाते हुए उसके मम्मो के ऊपेर ले गया.......जैसे ही मेने उसकी ब्रा में क़ैद मम्मो को देखा तो, मुझसे रहा नही गया...मेने उसके मम्मो को अपनी दोनो हथेलियों में भर कर जैसे ही दबाया, तो नजीबा का पूरा जिस्म कांप गया....कमर में बल पड़ गया उसके....उसने सिसकते हुए, चारपाई पर बिछी चद्दर को दोनो हाथों से पकड़ लिया....

 


शायद उसको वो मज़ा बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था….मेने तीन चार बार उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मो को दबाया तो, वो बिना पानी की मछली की तरफ चारपाई पर तड़प पड़ी….मेने उसके मम्मो को छोड़ उसकी कमीज़ को और ऊपर सरकाते हुए, धीरे-2 उसके बदन से अलग कर दिया…और चारपाई पर एक किनारे पर फेंकते हुए, उसके बगल में लेट गया….फिर मेने उसकी गर्दन पर अपने होंठो को लगा दिया. और उसकी गर्दन पर अपने होंठो को रगड़ने लगा…और उसकी गर्दन को चूमते हुए मेने नजीबा को बाहों में भरते ही अपने ऊपेर ले आया….

नजीबा के दोनो घुटने मेरी कमर के दोनो तरफ थे….जैसे ही नजीबा मेरे ऊपेर आई, तो मेने अपने दोनो हाथो को उसकी पीठ के पीछे लेजाते हुए, उसके ब्रा के हुक्स खोल दिए…और फिर ब्रा के स्ट्रॅप्स को खेंचते हुए उसके बदन से अलग करके ब्रा को भी उसके कमीज़ के पास फेंक दिया….नजीबा अपने नंगेपन के कारण शरमा रही थी. और फिर जैसे ही मेने उसे अपनी बाहों में भर कर अपने साथ चिपकाया तो, उसके गोल-2 सख़्त मम्मे मेरी चेस्ट में धँस कर रगड़ खाने लगे…एक बार फिर से मेने नजीबा के होंठो को चूसना शुरू कर दिया था…मेने कुछ देर उसके होंठो को चूसा, और फिर वैसे ही उठ कर बैठ गया…..

अब नजीबा मेरी गोद में बैठी थी…उसकी दोनो टाँगे मेरी कमर के इर्द गिर्द थी…मेने झुक कर नजीबा के लेफ्ट मम्मेको जैसे ही मूह में भर कर सक करना शुरू किया तो, नजीबा एक दम से सिसकते हुए मुझसे कस्के लिपट गयी….उसकी कमर ने ज़ोर दार झटका खाया….”अहह मम्मी…शियीयीयैआइयैआइयैयीयीयियी…..” मेने नजीबा के मम्मेको मूह से निकाला और उसके कान के पास अपने होंठो को लेजाते हुए धीरे से बोला….” नजीबा मुझे अपनी बुर चोदने देगी तू…बोल चुदवायेगी अपनी फुद्दि मुझसे…” ये कहते हुए मेने फिर से उसके मम्मेको मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे मम्मेको अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू कर दिया….”अहह शियीयियीयियी उंह हाआँ चोदे ना मुझे भी…..”

नजीबा ने सिसकते हुए कहा…तो मेने अपने हाथो को नीचे लेजाते हुए, उसकी सलवार के नाडे को खोलना शुरू कर दिया….जैसे ही नजीबा की सलवार का नाडा खुला तो मेने उसे पीछे की तरफ पीठ के बल लिटा दिया…और खुद बेड से उतर कर नीचे खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा…..नजीबा मेरी तरफ पीठ करके करवट के बल लेटी हुई थी……

मैं: क्या हुआ अपनी सलवार तो उतारो…(मेने अपने कपड़े उतारते हुए कहा….)

पर नजीबा शायद शरम की वजह से कुछ नही कर रही थी….में कुछ ही पलों में एक दम नंगा हो चुका था…मैं नजीबा की बगल में लेट गया….उसकी पीठ मेरी तरफ थी….मेरा तना हुआ लंड सीधा उसकी सलवार के ऊपेर से उसकी बुन्द की लाइन में रगड़ खाने लगा तो, नजीबा सिसकते हुए मुझसे और चिपक गयी…मेने अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए नजीबा की सलवार के जबरन में अपनी उंगलियों को फँसाया और धीरे-2 उसकी सलवार और पेंटी एक साथ नीचे करने लगा….मुझे नजीबा की तेज चलती साँसे भी सॉफ सुनाई दे रही थी…..

मेने नजीबा की सलवार को उसकी जाँघो तक सरका दिया…और फिर एक हाथ से अपने लंड को पकड़ते हुए, एक दम से उसकी बुन्द की लाइन में रगड़ते हुए उसकी बुन्द के सूराख पर जैसे ही लगाया तो, नजीबा के बदन ने एक तेज झटका खाया और वो बुरी तरह से मचल उठी…..उसकी सिसकारी पूरे रूम में गूँज गयी…मेरे लंड का मोटा कॅप उसकी बुन्द के सूराख पर भिड़ा हुआ था….और उसकी कमर धीरे-2 झटके खा रही थी…मेने अपनी गर्दन को थोड़ा सा ऊपेर उठा कर उसके कंधे पर अपने सर को रखा और फिर एक हाथ से उसके फेस को अपनी तरफ घुमाया तो, देखा उसकी आँखे बंद थी…..उसके रसीले होंठ तेज़ी से थरथरा रहे थे……उसके मम्मो के निपल्स तन कर किसी भाले की नोक की तरह तीखे हो गये थे….

कामवासना में उसका तमतमाता हुआ लाल चेहरा देख कर मैं भी अपने होश खो बैठा…कितनी हसीन लग रही थी वो….मैं उठा और उसकी सलवार और पेंटी को पकड़ कर एक साथ उसकी टाँगो से निकालते हुए दूसरे बेड पर फेंक दिया…अब नजीबा बिल्कुल नंगी मेरे सामने लेटी हुई थी….एक कली फूल बनने के लिए तैयार थी….मेने उसकी कमर में हाथ डालते हुए उसे धीरे-2 सीधा करके पीठ के बल किया और अगले ही पल मेने उसकी टाँगो को बीच आते हुए, उसकी टाँगो को पकड़ कर फैला दिया….मेरा लंड उसकी फुद्दि के ऊपेर लहरा रहा था….नजीबा ने अपनी फुद्दि को अपने हाथो से ढकने की कॉसिश की, पर मेरे एक बार ही कहने पर उसने अपने हाथों को अपनी फुद्दि से हटा लिया……और आँखे बंद करके अपने फेस को एक साइड में कर लिया…..

नजीबा की कुँवारी फुद्दि जो एक दम क्लीन शेव्ड थी…देखते ही मेरे लंड ने झटके खाने शुरू कर दिए…मेने जैसे ही उसकी फुद्दि के ऊपेर अपना हाथ फेरा तो, नजीबा सिसकते हुए एक दम से मचल उठी….”श्िीीईईईईईईईईई उंह उन्न्ञनणणन्” उसकी कमर ने हल्का सा झटका खाया….”तुमने बाल सॉफ किए थे…..” जब मेने उसकी फुद्दि के आसपास अपनी हथेली में छोटे-2 बालो को चुभते हुए महसूस किया तो, मैं अपने आप को पूछने से रोक नही सका….”बोलो नही सॉफ किए थे….”

नजीबा: (हां में सर हिलाते हुए….) ह्म्म उन्न्ञणणन्…..”

मैं: किस लिए…..बोलो ना…..प्लीज़…..(मेने नजीबा की फुद्दि को धीरे-2 दबाते हुए कहा तो वो काँपते हुए सिसकने लगी…पर बोली कुछ नही….”

मैं: बोलो ना किस लिए…मुझसे चुदवाने के लिए ना…..?

नजीबा : ह्म्म्म्म ….

मेने नजीबा की फुद्दि से हाथ हटाया और फिर उसके ऊपेर झुकते हुए, उसके मम्मो को चूसना शुरू कर दिया….एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर लंड के कॅप को फुद्दि के सूराख पर सेट किया…और फिर उसकी दोनो टाँगो को घुटनो से मोड़ कर अपने कंधो पर रख दिया….जिससे नजीबा की फुद्दि ऊपेर की तरफ खुल गयी…..मेने उसके मम्मो को चूसना छोड़ कर उसके होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसना शुरू कर दिया. और साथ ही उसके दोनो कंधो को मजबूती से पकड़ते हुए एक ज़ोर दार झटका मारा….. “गच की आवाज़ करता हुआ मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के टाइट सूराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….

 


नजीबा एक दम से तडपी….”ओह्ह्ह्ह ख़ान सहाब धीरे ओह्ह्ह अम्मी….

मेने नजीबा के मम्मो को दबाना शुरू कर दिया….में कभी उसके लेफ्ट मम्मेको चूस्ता तो, कभी उसके राइट मम्मेको…..उसके हाथ जो मेरी कमर पर रखे हुए थे….अब धीरे-2 उसके हाथों की पकड़ मुझे मेरी पीठ और कमर पर कस्ति हुई महसूस होने लगी…मेने उसके मम्मो को चूस्ते हुए, उसकी आँखो की तरफ देखा, तो उसकी आँखे मस्ती में बंद हो चुकी थी…शायद अब उसका दर्द कम हो गया था….मेने वैसे ही उसके मम्मो को चूस्ते हुए, धीरे-2 अपने लंड को थोड़ा-2 बाहर निकाल कर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….

नजीबा: श्िीीईईई ह्म्म्म्म मममम धीरीई करिये ना..प्लीज़….

मैं: अब कैसा लग रहा है मेरी जान दर्द तो नही हो रहा….?

नजीबा: थोड़ा सा है…..(नजीबा ने सिसकते हुए कहा तो, मुझे अहसास हो गया कि, अब ये चुदने के लिए पूरी तरह गरम हो चुकी है….)

मेने धीरे-2 अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए, उसके मम्मो को दबाना शुरू कर दिया…और उसके होंठो को अपने होंठो में लेकर ज़ोर-2 से चूसने लगा…नजीबा भी गरम हो चुकी थी….इसीलिए वो भी मस्त होकर मुझसे अपने होंठो को चुस्वा रही थी…..उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर थिरक रहे थे…..मेने उसके होंठो से अपने होंठो को अलग किया….और उसके कानो के पास अपने होंठो को लेजाते हुए बोला….” मज़ा आ रहा है ना मेरी जान लंड को फुद्दि में लेने में…..बोल ना फुद्दि मरवाने में मज़ा आ रहा है ना…..” मेने अपनी कमर को और तेज़ी से हिलाते हुए उसकी फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए कहा….अब मेरा लंड उसकी फुद्दि से निकल रहे पानी से पूरा गीला होकर अंदर बाहर हो रहा था….

नजीबा: श्िीीईईई ओह बहुत मज़ा आ रहा है नही….चोदिये ना और तेज चोदो…”

नजीबा ने सिसकते हुए खुद ही अपनी टाँगो को और ऊपेर उठा लिया…वो अब खुद भी धीरे-2 नीचे से अपनी बूँद को उचका रही थी….मेरा लंड उसकी फुद्दि के पानी से गीला होकर फच-2 की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…”ओह्ह्ह नजीबा तेरी फुद्दि बहुत टाइट है….बहुत मज़ा आ रहा है तेरी फुद्दि मारने में…..रोज तेरी फुद्दि मारूँगा…बोल देगी ना मुझे तू अपनी फुद्दि मारने को….” अब मेने अपने लंड को कॅप तक बाहर निकाल-2 कर उसकी फुद्दि में घस्से लगाना शुरू कर दिया था….नजीबा भी मदहोश होकर अपनी बूँद को धीरे-2 ऊपेर की ओर उछाल रही थी…..

नजीबा: हाआँ समीर जी जब मरजी चोद लेना मुझे…..मैं मना नही करूँगी…ओह्ह्ह्ह अम्मी श्िीीईईई बहुत मज़ा आता है….रोज मरवाउन्गी मैं अपनी फुद्दि आपसे…..

मैं: अपनी मम्मी के सामने भी हां….?

नजीबा: हां मम्मी के सामने भी…आपका वो वो भी चुसुन्गि….

मैं: वो क्या नजीबा…..

नजीबा: आपका लंड….हाआँ आपका लंड चुसुन्गी…..जैसे मम्मी चुस्ती है….

जैसे ही नजीबा के मूह से वर्ड निकले……मेने चोंक कर नजीबा की तरफ देखा तो, उसे भी अपनी ग़लती का अहसास हो गया….शायद उस वीडियो का असर अभी भी उसके जेहन में था….और जैसे ही उसे इस बात का अहसास हुआ, और मुझे अपनी तरफ ऐसे घूरते देखा तो, उसने मेरे बालो को पकड़ कर मेरे होंठो को अपने गर्देन पर लगा लिया….”ओह्ह्ह प्लीज़ ख़ान सहाब मेरी तरफ ऐसे ना देखें….ओह्ह्ह्ह आपने मेरे जेहन को खराब कर दिया है….कैसे -2 वीडियोस दिखाते हो….बहुत गंदे हो आप….”

मैं: आह नजीबा काश तुम्हारे मूह की बात सच हो जाए….

नजीबा: ओह्ह ख़ान सहाब सीईईईईईईईई प्लीज़ ऐसे मत बोलिए…मुझे कुछ हो रहा है….

 
में अब पूरी रफतार से नजीबा की फुद्दि में लंड पेलने लगा था….और नजीबा की सिसकारी पुर रूम में गूँज रही थी….”ओह्ह्ह अहह ओह समीर अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाईए मुझे कुछ हो रहा है….कुछ निकलने वाला है ओह” नजीबा ने सिसकते हुए मुझसे चिपकना शुरू कर दिया…

.”आह निकाल दे अपनी फुद्दि से हां मेरे लंड पर छोड़ दे रुकना नही अहह….”

नजीबा: अहह शीईईईईईई ओह माँ……

नजीबा का बदन एक बार कुछ पलों के लिए ऐसे काँपा मानो जैसे उसके बदन में करेंट का झटका लग गया हो….उसकी फुद्दि ने अंदर-2 ही मेरे लंड को निचोड़ना शुरू कर दिया….मेने भी पूरे जोश में आते हुए ऐसे-2 शॉट मारे कि नजीबा मेरे बदन से काँपते हुए लिपट गयी…और नजीबा की फुद्दि के पानी से मेरे लंड के अंदर से निकल रही बौछारो का मिलन शुरू हो गया…..हम दोनो खुले आसमान के नीचे सूरज की फुल रोशनी में एक दम नंगे लेटे हुए थे….और हम दोनो के बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे…फिर जैसे ही नजीबा को होश सा आया…तो वो मुझसे अलग हो गयी…उसने चारपाई से नीचे गिरे अपने कपड़ों को उठाया और ऊपेर वाले स्टोर रूम में भाग गयी…मेने वही बैठे-2 अपने कपड़े पहने….और वही चारपाई पर बैठ गया…

 
40

थोड़ी देर बाद नजीबा रूम से बाहर आई….उसने कपड़े पहने हुए थे….वो बाहर आई और नीचे जाने लगी,…..अभी वो सीढ़ियों के पास ही पहुँची थी कि, मुझे ख़याल आया कि, मुझे तो कल 3-4 दिन के लिए सबा के साथ उसकी फूफी के घर जाना है... मुझे नजीबा को अभी बता देना चाहिए कि, वो कल यहाँ नही आए….”नजीबा….?” मेने नजीबा को आवाज़ दी….तो नजीबा सीढ़ियों के पास रुक गयी…उसने मेरी तरफ स्माइल करते हुए देखा….और फिर नज़ारे झुका ली….”इधर आओ मेरे पास…” मेने नजीबा को शरमाते हुए देख कर कहा….तो नजीबा ने नही में सर हिला दिया…”प्लीज़ जान मुझे तुम से कुछ ज़रूरी बात करनी है….कसम से….” नजीबा ने चोंक कर मेरी तरफ देखा और फिर धीरे-2 चलते हुए मेरे पास आ गयी….”बैठो….” मेने नजीबा का हाथ पकड़ते हुए कहा….तो नजीबा मेरे साथ चारपाई पर बैठ गये…”जी….” नजीबा ने सर को झुकाए हुए कहा…

मैं: तुम कल स्कूल चली जाना…इधर नही आना…..

मेरी बात सुन कर नजीबा ने चोंक कर मेरी तरफ देखा….”वो दरअसल हम कुछ दोस्त 3-4 दिन के लिए कराची घूमने जा रहे है….इसलिए मैं कल यहाँ नही रहूँगा…”

नजीबा: ठीक है….पर….

मैं: पर क्या….?

नजीबा: आप जल्दी वापिस आ जाओगे ना….?

मैं: हां मेने वहाँ कॉन से नया घर बसा कर बैठना है….जल्दी वापिस आ जाउन्गा…

नजीबा ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा…और फिर उठ कर नीचे चली गयी….में भी उसके पीछे नीचे आ गया…जैसे ही 2 बजे नजीबा अपनी स्कूल यूनिफॉर्म पहन कर मेरे रूम में आई…तो मैं उठ कर बाहर आया…अब्बू की बाइक निकाली और फिर घर को लॉक करके….नजीबा को उसकी मामी के गाओं तक छोड़ने के लिए चला गया…नजीबा को उसकी मामी के घर छोड़ने के बाद में वापिस आ गया….उस दिन और कोई ख़ास बात नही हुई….रात को सोने से पहले में अपनी सारी पॅकिंग की…और फिर बाहर ढाबे से खाना खाया….और घर आकर सो गया…

अगली सुबह मैं उठ कर तैयार हुआ….और मेन रोड पर पहुँच गया…नजीबा और रानी मेरा ही वेट कर रही थी…हम ने वहाँ से सिटी के लिए बस पकड़ी और फिर वहाँ से इस्लामाबाद के लिए ट्रेन….पूरे रास्ते में सबा और रानी मुझसे छेड़छाड़ करती रही….खैर हम दोपहर को इस्लामबाद पहुँच गये…स्टेशन से बाहर निकल कर हमने रिक्क्षा लिया और वहाँ से रिक्शे वाले को अड्रेस बता कर हम सबा की फूफी के घर के लिए चल पड़े….20 मिनिट बाद सबा ने रिक्शे वाले को रुकने के लिए कहा….और हम सब नीचे उतरे तो, सबा ने उसको पैसे दिए और हम ने अपने बॅग्स उतारे….”कॉन सा घर है….?” मेने सबा की तरफ देखते हुए कहा…..

सबा: ये सामने वाला घर है…..

सबा ने एक बड़े से घर की तरफ इशारा करते हुए कहा….फिर सबा ने डोर बेल बजाई तो, थोड़ी देर बाद गेट खुला….और जैसे ही गेट खुला सबा मेरा और रानी का रंग उड़ गया…ख़ासतोर पर मेरा…मुझे यकीन नही हो रहा था कि, मैं जो देख रहा हूँ… वो सच है…..या फिर सपना….मेरे तो हाथ पैर सुन्न हो गये थे….ज़ुबान हलक में कही फँस गयी थी….हम तीनो हैरतभरी नज़रों से कभी एक दूसरे की तरफ देखते तो, कभी गेट पर खड़ी नाज़िया की तरफ……

..............जी हां सामने नाज़िया ही खड़ी थी….जिस कदर हम हैरान थे…वही हालत नाज़िया की भी थी…पर हैरानी के साथ -2 उसकी आँखे गुस्से से भी लाल हो रही थी….”तुम तुम सब यहाँ क्या लेने आए हो….?” नाज़िया ने मुझे जहर भरी नज़रो से देखते हुए कहा…..

हम तीनो में से किसी का भी जवाब देने के लिए मूह नही खुल रहा था….तभी अंदर से किसी औरत की आवाज़ आई…..” बाहर कॉन है नाज़ी…..” फिर अंदर से एक बूढ़ी औरत बाहर आई….उसने जैसे ही सबा को देखा तो, उस बूढ़ी औरत के फेस पर स्माइल आ गयी…”आह मेरी बच्ची सबा तुम हो…..नाज़ी तुमने इन्हे बाहर क्यों रोका है… आओ सब अंदर आओ….” उसने आगे बढ़ कर सबा को गले से लगा लिया…नाज़िया हम को घुरती हुई अंदर चली गयी….”आओ अंदर आ जाओ….कि बाहर ही खड़े रहोगे….” उस बूढ़ी औरत ने मेरे और रानी की तरफ देखते हुए कहा….तो हम घबराए हुए अंदर आ गये….वो हमें सीधा अपने रूम में ले गयी….जो काफ़ी बड़ा था….पीछे की तरफ ही सबा की फूफी (यानी उस बूढ़ी औरत का रूम था….जिसमे एक तरफ डबल बेड दूसरी तरफ सोफा सेट और कुछ चेर्स पड़ी हुई थी….

सबा: फुफो…..ये है समीर….फ़ैज़ का दोस्त….फ़ैज़ कल अपने दोस्तो के साथ घूमने के लिए कराची चला गया….तो इसे अपने साथ ले आई….और ये रानी है…घर में काम करती है…और समीर ये है मेरी फुफो ज़ाकिया….”

ज़ाकिया: अच्छा अच्छा ठीक है…..आने से पहले कम से कम खबर तो कर देती…किसी को स्टेशन भेज देती…और सुनाओ पहुँचने में तकलीफ़ तो नही हुई….

सबा: नही तकलीफ़ किस बात की होनी है…..अच्छा फुफो….ये कॉन है……

सबा का इशारा नाज़िया की तरफ था….”क्या तुमने पहचाना नही…..ये नाज़िया है….मेरी बेटी…..तुम तो बचपन में इसके साथ खेली भी हो….हां वैसे काफ़ी अरसा हो गया है….तब नाज़ी 7-8 साल की थी….जब तुम्हारी शादी हो गयी थी…उसके बाद से तुम यहाँ सिर्फ़ एक बार ही आई हो…पहचानोगी कैसे…..”

सबा: हां फुफो काफ़ी अरसा हो गया…..

सबा अपनी फुफो के साथ बातो में मशरूफ थी….और इधर मेरी फटी हुई थी… पर जब ये पता चला कि, नाज़िया यहाँ क्यों है….तो थोड़ी राहत मिली थी….मेने कभी सोचा भी नही था कि, अगली बार नाज़िया से सामना ऐसी हालात में होगा….थोड़ी देर बाद नाज़िया चाइ और कुछ स्नॅक्स लेकर आ गयी….उसके चेहरे से सॉफ पता चल रहा था कि, वो हमें यहाँ देख कर खुश नही है…सबा और रानी को चाइ देने के बाद जब नाज़िया मुझे चाइ देने मेरे पास आई….तो उसने जहर भरी नज़रों से मुझे देखा….उसका बस नही चल रहा था….नही तो, वो मुझे कच्चा ही खा जाती….सबा ने भी इस बात को नोट कर लिया….और उसने भी मोका देख कर ऐसा चौका मारा कि, नाज़िया के चेहरे का रंग भी उड़ गया….

सबा: फुफो आपको पता है…ये जो समीर है….इसका आपके साथ क्या रिश्ता है….?

नाज़िया की अम्मी ने जब मेरी तरफ स्माइल करते हुए देखा….तो नाज़िया ने चोंक कर सबा की तरफ देखा….”नही…” ज़ाकिया ने स्माइल करते हुए कहा…

.”ये नाज़िया के शोहर का बेटा है….आप पहले मिली नही समीर से…..और नाज़िया तो, समीर को बहुत चाहती है….क्यों नाज़िया…?”

सबा की बात सुन कर नाज़िया का फेस गुस्से से एक दम लाल हो गया…

.”क्या….” ज़ाकिया एक दम से चोंक कर खड़ी हो गयी…और मेरे पास आकर प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरते हुए दुआये देने लगी…”सुनो नाज़ी….समीर पहली दफ़ा यहाँ आया है… ये इसकी नानी का घर है….इसे यहाँ किसी भी तरह की तकलीफ़ नही होनी चाहिए….इसकी खातिरदारी की सारी ज़िम्मेदारी तुम्हारी है…”

नाज़िया: जी अम्मी…..

उसके बाद और कुछ ख़ास बात नही हुई….सबा और ज़ाकिया दोनो आपस में बातें करती रही….नाज़िया भी अपनी अम्मी की वजह से साथ में बैठी थी….पर उसके फेस से पता चल रहा था कि, वो हम लोगो को वहाँ देख कर किस क़दर गुस्से और परेशानी में है…उसके बाद नाज़िया उठ कर दोपहर के खाने की तैयारी में लग गयी…. नाज़िया की अम्मी हम तीनो को ऊपेर ले गयी….घर दो मंज़िला था…..ऊपेर वाली मंज़िल पर पीछे की तरफ तीन रूम थे….और आगे एक स्टोर था…..और फिर बरामदा….और गली वाली तरफ बाथरूम और टाय्लेट था….पीछे वाले तीन रूम्स में से एक नाज़िया के पास था….नाज़िया की अम्मी ने पीछे बचे दो रूम्स में से बीच वाला रूम मुझे रहने के लिए दिया और उससे आगे वाला सबा को….और रानी को स्टोर रूम में अड्जस्ट करने को कहा…. हमने अपने बॅग्स वहाँ रखे….और उसके बाद फ्रेश होकर नीचे आ गये…

नीचे आकर खाना खाया….और उसके बाद रानी और सबा भी नाज़िया की किचन में हेल्प करने लगी…मैं वही बैठ कर टीवी देखने लगा….उसके थोड़ी देर बाद में ऊपेर चला गया….और जो रूम मुझे दिया था….वहाँ जाकर बेड पर लेट गया….मुझे पता नही चला कब आँख लग गयी….6 बजे मुझे रानी ने रूम में आकर उठाया…मैं आँखे मलता हुआ बेड पर बैठा तो, रानी ने मुस्कुराते हुए कहा….”यहाँ पर जनाब सोने तो नही आए थे आप……हाहाहा ?”

मैं: तो फिर तुम ही बता दो किस लिए आया था में….?

रानी: (शरमाते हुए….) मुझसे क्या पूछ रहे हैं….जाकर सबा से पूछिए… उसकी तो हर बात मानते है आप….

मैं: अच्छा जी तो तुम ही बता दो…मेने तुम्हारी कॉन सी बात नही मानी….

रानी: एक बात हो तो बताऊ….खैर छोड़ो आप ये सब…उठ कर मूह हाथ धो कर नीचे आ जाओ….नाज़िया की अम्मी आपके बारे में पूछ रही है….

मैं: अच्छा ठीक है….तुम चलो में आता हूँ…..

 
Back
Top