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Guest
मेने बड़ी मुस्किल से नजीबा को अब तक संभाला हुआ था….पर किसी तरह से उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग किया तो, मेने उसके फेस की ओर देखा, उसकी आँखो से तेज आँसू बह रहे थे….”उन्न्ञणणन्….समीर बहुत दर्द हो रहा है…..”नजीबा ने सूबकते हुए कहा, तो मेरा दिल पिघल गया….मेने उसकी आँखो से आँसू पोंछे…..
मैं: कुछ नही होता….जितना दर्द होना था….हो गया…..अब दर्द नही होगा….
नजीबा: (सूबकते हुए) मुझे पता है समीर….पर में इस दर्द को सहन करना चाहती थी….तुमने कभी भी मुझे कोई तकलीफ़ नही दी….बिना किसी लालच के मुझे प्यार करते रहे….और मेरी वजह से तुम्हे कितना दुख पहुँचा है....अब ये दर्द सहन करके में तुम्हे अपनी सबसे कीमती चीज़ तुम्हे देना चाहती हूँ….(उसने मुझे कंधो से पकड़ कर अपने ऊपेर झुकाते हुए कहा..)
मेने नजीबा के मम्मो को दबाना शुरू कर दिया….थोड़ी देर बाद नजीबा का दर्द कम होने लगा… मेने अपने लंड को आधे से ज़यादा बाहर निकल कर देखा तो देखा मेरा लंड उसकी फुद्दि के सील टूटने से निकले खून से सना हुआ था….पर ये बात नजीबा को बता कर में उसे डराना नही चाहता था…इसीलिए मेने उसके मम्मो को दबाते हुए उसके राइट निपल को मूह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…और उसके लेफ्ट मम्मे के निपल को अपने हाथ की उंगलियों से दबाना शुरू कर दिया….
में कभी उसके लेफ्ट मम्मे को चूस्ता तो, कभी उसके राइट मम्मे को…..उसके हाथ जो मेरी कमर पर रखे हुए थे….अब धीरे-2 उसके हाथों की पकड़ मुझे मेरी पीठ और कमर पर कस्ति हुई महसूस होने लगी…मेने उसके मम्मो को चूस्ते हुए, उसकी आँखो की तरफ देखा, तो उसकी आँखे मस्ती में बंद हो चुकी थी…शायद अब उसका दर्द कम हो गया था….मेने वैसे ही उसके मम्मो को चूस्ते हुए, धीरे-2 अपने लंड को थोड़ा-2 बाहर निकाल कर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….
नजीबा: शियीयीयीयियी ह्म्म्म्म मममम धीरीई करो नही समीर ..प्लीज़….
मैं: अब कैसा लग रहा है मेरे जान दर्द तो नही हो रहा….?
नजीबा: थोड़ा सा है…..(नजीबा ने सिसकते हुए कहा तो, मुझे अहसास हो गया कि, अब ये चुदने के लिए पूरी तरह गरम हो चुकी है….)
मेने धीरे-2 अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए, उसके मम्मो को दबाना शुरू कर दिया…और उसके होंठो को अपने होंठो में लेकर ज़ोर-2 से चूसने लगा…नजीबा भी गरम हो चुकी थी….इसलिए वो भी मस्त होकर मुझसे अपने होंठो को चुस्वा रही थी…..उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे…..मेने उसके होंठो से अपने होंठो को अलग किया….मेने अपनी कमर को और तेज़ी से हिलाते हुए उसकी फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….अब मेरा लंड उसकी फुद्दि से निकल रहे पानी से पूरा गीला होकर अंदर बाहर हो रहा था….
नजीबा: शियीयीयीयियी ओह बहुत मज़ा आ रहा है….हां समीर ऐसे करते रहे आप सीईईईई ओह अहह…..
नजीबा ने सिसकते हुए खुद ही अपनी टाँगो को और ऊपेर उठा लिया…वो अब खुद भी धीरे-2 नीचे से अपनी बुन्द को ऊपेर कर रही थी….मेरा लंड उसकी फुद्दि के पानी से गीला होकर फॅच-2 की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…”ओह्ह्ह नजीबा तुम्हारी फुद्दि बहुत टाइट है….बहुत मज़ा आ रहा है तेरी फुद्दि मारने में…..” अब मेने अपने लंड को कॅप तक बाहर निकाल-2 कर उसकी फुद्दि में घस्से लगाना शुरू कर दिया था….नजीबा भी मदहोश होकर अपनी बुन्द को धीरे-2 ऊपेर की और उछाल रही थी…..
मैं: नजीबा मुझे बहुत मज़ा आ रहा है….दिल कर रहा है कि रोज तुम्हारी ऐसे ही लिया करूँ….
नजीबा: हाआँ समीर जब मरज़ी ले लेना …..में मना नहिकरूँगी…ओह्ह्ह्ह अम्मी शीईईइ अह्ह्ह्ह ख़ान सहाब आज से में आपकी हूँ….
मैं: नजीबा क्या तुम अपनी मम्मी के सामने भी ये कह सकती हो….?
नजीबा: हां मम्मी के सामने भी कह दूँगी…..
में अब पूरी रफतार से नजीबा की फुद्दि में लंड अंदर बाहर करने लगा था….और नजीबा की सिसकारी पूरे रूम में गूँज रही थी….”ओह्ह्ह अहह ओह समीर अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाईए मुझे कुछ हो रहा है….कुछ निकलने वाला है ओह” नजीबा ने सिसकते हुए मुझसे चिपकना शुरू कर दिया….”आह निकाल दे अपनी फुद्दि से हां मेरे लंड पर छोड़ दे रुकना नही अहह….”
नजीबा: अहह श्िीीईईईईईईईईईई ओह माँ……
नजीबा का बदन एक बार कुछ पॅलो के लिए ऐसे काँपा मानो जैसे उसके बदन में करेंट का झटका लग गया हो….उसकी फुद्दि ने अंदर-2 ही मेरे लंड को निचोड़ना शुरू कर दिया….मेने भी पूरे जोश में आते हुए ऐसे-2 शॉट मारे कि नजीबा मेरे बदन से काँपते हुए लिपट गये…और नजीबा की फुद्दि के पानी से मेरे लंड के अंदर से निकल रही बौछारो का मिलन शुरू हो गया…..
हम दोनो बुरी तरह हाँफ रहे थे…..जब वासना का नशा उतरा तो, सर्दी से बदन ठिठुरने लगा…नजीबा ने जल्दी से उठ कर बेड पर कंबल को उठा कर हम दोनो के ऊपेर सरका लिया…और मेरे ऊपेर लेटते हुए एक बार फिर से अपने रसीले होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया….उम दोनो मदहोशी के आलम में एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे…