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Guest
नाज़िया की आँखे गुस्से से लाल हो रही थी…..वो अपनी नाक से लंबी-2 साँस खेंचते हुए मुझे घूर कर देख रही थी…मैं अपने रूम की तरफ बढ़ा….मैं भी उसके आँखो में आँखे डाले आगे बढ़ रहा था…और हर तरह के हालात के लिए तैयार था… मैं उसके आँखो में देखते हुए साइड से होकर आगे जाने लगा तो, नाज़िया की उँची आवाज़ कानो में पड़ी….”रूको….”
मैं वही रुक गया…..और नाज़िया की तरफ मुड़ा…वो अभी भी बाहर की तरफ फेस किए खड़ी थी….”हां बोलो….”
नाज़िया ने घूम कर मेरी तरफ फेस किया और एक लंबी साँस लेन के बाद बोली….” तुमने इस घर को क्या समझ रखा है…..?” नाज़िया ने अपनी जहर बरसाती आँखो से मुझे देखते हुए कहा….उसकी आँखो से ऐसे लग रहा था….जैसे वो अभी मेरा कतल कर देगी….
“मेरा घर है…..मैं जो चाहे जो करूँ….तुम्हे क्या..?” पर मैने भी सोच लिया था कि ईंट का जवाब पत्थर से देना है…
नाज़िया: क्या कहा तुमने तुम्हारा घर हाँ….और तुम इस घर की बड़ी इज़्ज़त बना रहे हो… इस घर को रंडी खाना समझ रखा है तुमने तो…मैं इस घर में ये सब हरगिज़ नही होने दूँगी….आइन्दा तुमने कभी इस घर में कोई ऐसी हरक़त क़ी तो, मैं तुम्हारे अब्बू को बता दूँगी…
मैं: हाहहः जिस दिन तुम ये बात अब्बू को बताओगि….वो दिन तुम्हारा इस घर में आखरी दिन होगा…अब्बू को सब बता दूँगा…वो खुद तुम्हे घर से धक्के देकर बाहर निकाल देंगे…..और रही बात घर की तो, इस घर में क्या होगा और क्या नही होगा वो मेरी मरज़ी से होगा…तुम्हारी नही….
नाज़िया: तुम्हारी ग़लत फेहमी है…
मैं: अच्छा….रोक सकती हो तो रोक लो….
मैने वही खड़े-2 अपनी शलवार का नाडा खोल कर अपने लंड को बाहर निकाल लिया…और नाज़िया के सामने खड़े-2 ही अपने लंड को हिलाने लगा….”ले उखाड़ ले मेरा लंड जो तूने उखाड़ना है….” गुस्से और जोश में मैं पागल हो गया था….और उस गुस्से और जोश में मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था…ये सब इतनी तेज़ी से हुआ था कि, नाज़िया को कुछ सोचने समझने का मोका भी नही मिला…..नाज़िया हैरत से आँखे फाडे कभी मेरे चेहरे तो कभी मेरे सख़्त तने हुए 8 इंच लंबे लंड को देखती…”क्यों पसंद है…अगर पसंद है तो हां बोल दो….आगे से इस घर में और कोई औरत नही आएगी…” मैने आँख मार कर नाज़िया को कहा…तो नाज़िया ऐसे हड़बड़ाई जैसे किसी ख्वाब से जागी हो….
नाज़िया: अपनी हद में रहो….( और नाज़िया ने मेरी तरफ अपनी पीठ कर ली….)
मैने अपने लंड को हिलाते हुए नाज़िया के बिल्कुल पास चला गया….मैं उसके ठीक पीछे खड़ा था…और नाज़िया की साँसे बहुत तेज चल रही थी…मैने अपने होंटो को उसके कान के पास लेजा कर धीरे से सरगोशी में कहा…”क्यों क्या हुआ…मूह क्यों घुमा लिया… ये वही लंड है….जिससे तुम रोज बस में अपनी बुन्द के बीच मे लेकर खड़ी होती थी…अब क्या हो गया….”
नाज़िया के जिस्म में झुरजुरी सी दौड़ गयी….और नाज़िया वहाँ से तेज़ी से पलट कर अपने रूम मे जाते हुए बोली….”मूज़े तुम जैसे बदतमीज़ और गँवार इंसान के मूह नही लगना…
.मैं वहाँ खड़ा मुस्करता रहा..फिर अपनी शलवार ऊपेर की और अपने रूम मे आ गया….और बेड पर लेट गया…
बेड पर लेटा हुआ था….दिल में अजीब सा सकून था…ऐसे ही लेटे-2 नींद आ गयी….जब आँख खुली तो दोपहर के 2 बज रहे थी…मैं अंगड़ाई लेता हुआ बाहर आने लगा तो, मुझे दूसरे रूम से नाज़िया की आवाज़ आई….वो किसी से फोन पर बात कर रही थी…जब मैं रूम के डोर के पास जाकर खड़ा तो अहसास हुआ कि, नाज़िया अपनी अम्मी से बात कर रही थी….बातो से लग रहा था कि, उसकी अम्मी की तबीयत खराब है…”जी अम्मी वैसे भी मैं काफ़ी दिनो से सोच रही थी कि छुट्टी लेकर कुछ दिन आपके पास आ जाउ….जी नजीबा के तो स्कूल शुरू है…जी वो नही आ पाएगी मेरे साथ….”
अच्छा तो, पता चला कि नाज़िया अपनी अम्मी के घर जा रही थी…वो भी कल…तो नाज़िया ने कुछ दिनो के लिए मुझसे पीछा छुड़ाने का रास्ता खोज ही लिया था…मैं वहाँ से हट कर बाथरूम में चला गया…फ्रेश होकर अपने रूम में आया…और कपढ़े पहन कर घूमने के लिए निकल गया…ऐसे ही घूमते हुए मैं फ़ैज़ के घर चला गया… वहाँ बैठ कर उससे कॉलेज की बातें करने लगा…
फ़ैज़: तुम आज कॉलेज क्यों नही आए…
मई: ऐसे ही यार तबीयत ठीक नही थी…..
फ़ैज़: अर्रे यार सुन आज हम सब ने कॉलेज में प्लान बनाया था कि, हम कराची जा रहे है घूमने तुम भी चलो….
मैं: नही यार तुम जाओ…मेरा मूड नही है…
फ़ैज़: चल ना यार…3 दिन बाद जाना है…..
मैं: यार सच में घर पर कोई नही है अब्बू लाहोर गये हुए ट्रनिंग के लिए….समझा कर ना….
फ़ैज़: अच्छा चल यार तेरी मरजी…अच्छा तू बैठ मैं ज़रा बाथरूम होकर आता हूँ..
फ़ैज़ जैसे ही उठ कर हॉल का जाली वाला गेट खोल कर बाहर गया….तो सबा बाहर खुले में धूप सेक रही थी….उठ कर अंदर आ गयी….मैं हॉल मे सोफे पर बैठे हुए था…. सबा मेरे पास आई…और सोफे पर बैठ कर उसने थोड़ा परेशानी भरे अंदाज में पूछा…”समीर कुछ हुआ तो नही मेरे आने के बाद…..” मैने ना में सर हिला दिया…तो सबा ने एक बार जाली वाले गेट से बाहर देखा….वहाँ से सामने बाथरूम नज़र आता था…फिर सबा ने मेरी कमीज़ के नीचे से हाथ डाल कर मेरे लंड को शलवार के ऊपेर से पकड़ कर धीरे-2 दबाना शुरू कर दिया…”अच्छा किया तुमने फ़ैज़ को मना कर दिया….”
मैं: क्यों क्या हुआ….?
सबा: सुनो मेरे दूर के रिश्ते में मेरी फुफो है इस्लामाबाद में….वो काफ़ी दिनो से बीमार है….मैने उनका पता लेने जाना है…वो अकेली रहती है…घर काफ़ी बड़ा है… तुम मेरे साथ चलना…वहाँ तुम जैसे चाहे हम कर सकते है….