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अमोल और मैं एक दूसरे से लिपटे हुए घाँस पर लेटे चुदाई कर रहे थे. शाम पूरी ढल चुकी थी और सांझ हो गयी थी. चारो तरफ़ अंधेरा छाने लगा था. पेड़ों पर कौवे काँव-काँव कर रहे थे. ठंडी ठंडी हवा चल रही थी जिससे मकई के पौधे लहरा रहे थे और मेरे नंगे शरीर पर रोंगटें खड़ी कर रहे थे. चारों ओर से आती सोंधी मिट्टी की खुशबू मुझे मस्त बना रही थी.
मकई के पौधों के बीच मे मैं कमर उठा उठाकर अमोल से चुदवा रही थी और बीच-बीच मे झड़ रही थी. और अमोल भी एक निपुण चोदू की तह मुझे चोदे जा रहा था.
मै समझ गयी अमोल ने अपनी नौकरानी के अलवा भी बहुत औरतों को चोदा होगा. पर मुझे क्या ग़म? जब अमोल मेरे गुनाहों को माफ़ करने को तैयार था, मैं भी परवाह नही करती वह और किस किस को चोद रहा है.
करीब 20 मिनट तक मुझे पेलने के बाद अमोल बोला, "तुम्हारी प्यास बुझी कि नही, वीणा?"
"हाँ अमोल!" मैने ठाप लेते हुए कहा, "मै तो चार-पांच बार झड़ भी चुकी हूँ."
"बहुत दिनो की प्यास है न तुम्हारी, इसलिये सोचा तुम्हे अच्छे से चोद दूं." अमोल बोला, "फिर न जाने कब मौका मिले तुम्हे चुदवाने का."
"मुझसे जल्दी शादी कर लो, अमोल!" मैने कहा, "फिर दिन रात मैं तुमसे चुदवा सकूंगी!"
"वीणा, शादी की तैयारी मे बहुत समय लगता है." अमोल मुझे पेलते हुए बोला, "तब तक तुम्हे चोदे बिना मैं कैसे जीऊंगा?
"अपनी दीदी से कहो कि मुझे हाज़िपुर बुला ले." मैने सुझाव दिया, "फिर तुम जब जी करे हाज़िपुर आ जाना और मुझे चोद लेना. तुम्हारी दीदी हमारी चुदाई का सारा इंतज़ाम कर देगी."
"यह ठीक रहेगा." अमोल बोला, "शादी से पहले मेरा यहाँ बार-बार आना ठीक नही लगेगा."
अमोल फिर मुझे चोदने मे जुट गया. लग रहा था अब वह झड़ने के बहुत करीब आ गया है. मेरी प्यास तो बुझ गयी थी और मैं बहुत थक भी गयी थी. पर मैं उसके मज़े के लिये उसका साथ दे रही थी.
"अमोल, मेरा गर्भ गिराने कब ले जाओगे?" मैने पूछा.
"ले जाऊंगा, डार्लिंग...इतनी जल्दी क्या है?" उसके मेरी ठुकाई करते हुआ कहा.
"हाय, जल्दी नही होगी?" मैने जवाब दिया, "शादी से पहले मेरा पेट फूल गया तो मैं घरवालों को क्या जवाब दूंगी?"
"कह देना तुम खेत मे मुझसे चुदवाई थी."
"मेरे पिताजी तुमसे मेरी शादी तो करवा देंगे, पर फिर कभी हम दोनो को अपने घर मे घुसने नही देंगे!"
"मै तो चाहता हूँ...तुम कुछ दिन अपने कोख मे...यह नाजायज़ बच्चा रखो." अमोल मुझे चोदता हुआ बोला, "गर्भवती औरत को चोदने मे...बहुत मज़ा आता है."
"अमोल, मज़ाक छोड़ो!" मैने कहा.
"मै मज़ाक नही कर रहा हूँ, वीणा!" अमोल ने कहा और मुझे जोर जोर से चोदने लगा, "मै तो यह सोचकर...बहुत उत्तेजित हो रहा हूँ...के मेरी होने वाली पत्नी के गर्भ मे...किसी अनजान आदमी का बच्चा है!"
जिस जोश के साथ वह मुझे पेलने लगा मैं समझ गयी वह मज़ाक नही कर रहा था. पर मैं उसके वश मे थी. मेरा गर्भपात वही करा सकता था. मेरे पास उसके शर्त पर चलने के अलावा अब कोई चारा नही था.
मेरे होठों को चूमते हुए अमोल लंबे लंबे ठाप लगाने लगा.
अचानक उसका शरीर अकड़ गया. उसने मेरे नरम होठों को अपने मुंह मे ले लिये और मेरी चूत की गहराई मे अपना लन्ड घुसाकर अपना वीर्य छोड़ने लगा.
"आह!! आह!! आह!! आह!!" करके कराहते हुए वह कुछ देर तक झड़ता रहा. फिर मेरे ऊपर थक कर लेट गया.
चारों तरफ़ अंधेरा हो चुका था. अमोल उठा और चांद की धुंधली रोशनी मे उसने अपने कपड़े पहने. मैने अपनी ब्रा नीचे की और ब्लाउज़ के हुक लगा ली. अंधेरे मे मुझे अपनी चड्डी नही मिली. मैने अपनी साड़ी और पेटीकोट नीचे की और अपने बालों को ठीक किया.
मै अमोल को लेकर खेत से घर पहुंची. आंगन के बल्ब की रोशनी मे मुझे दिखाई दिया कि हमारे कपड़ों की क्या हालत है!
मेरी साड़ी बुरी तरह मुसड़ गयी थी. उस पर जगह जगह घाँस के तिनके लगे थे. ऊपर से मेरी चूत से अमोल का वीर्य बह रहा था. मैं तो शर्म से पानी-पानी हो गयी कि घर मे कैसे घुसूंगी!
पर अमोल मुझे जबरदस्ती अन्दर ले गया.
हमे देखते ही मेरी माँ चिल्ला पड़ी, "वीणा! कहाँ थी इतनी देर तक? मैने कहा था ना जल्दी आ जाना?"
नीतु मेरे कपड़ों को देखकर बोल उठी, "दीदी, तेरे कपड़ों का यह क्या हाल हुआ है? इतनी घाँस मिट्टी कैसे लग गयी?"
मै तो शरम से मिट्टी मे गड़ी जा रही थी पर अमोल जोर से कराह कर बोला, "और पूछ मत, नीतु! तेरे गाँव के गाय लोग इतने कमीने हैं मुझे बताया तो होता?"
"क्या हुआ, बेटा?" मेरी माँ ने चिंतित होकर पूछा.
"वीणा और मैं शिव मन्दिर के पास से आ रहे थे तो रास्ते से कुछ गाय घर को लौट रहे थे." अमोल ने कहा, "शायद मैं उन्हे पसंद नही आया. अचानक मेरे पीछे दौड़ने लगे और सींग मारने लगे! वीणा मुझे बचाने आयी तो वह उसके भी पीछे पड़ गये. दोनो किसी तरह गिरते-पड़ते बचकर आये हैं."
"हाय राम!" मेरी माँ बोली, "वीणा, किसके गऊ थे तुने देखा? मैं अभी जाकर शिकायत करती हूँ!"
"नही, इससे क्या फ़ायदा होगा!" अमोल और कराहकर बोला, "आपके गाँव के गाय मुझे पसंद ही नही करते. पिताजी, मैं इस गाँव मे शादी नही करुंगा!"
अमोल के पिताजी जोर से हंस पड़े और बोले, "तेरी शादी इसी गाँव मे होगी. तुने ही ज़िद की थी कि शादी करेगा तो सिर्फ़ वीणा से, नही तो शादी ही नही करेगा. अब तु नही मानेगा तो तेरे कान पकड़कर वीणा बिटिया से तेरी शादी कराउंगा!"
मै शरमाकर अपने कमरे मे भाग आयी और बाथरूम मे गुस गयी.
मेरी चूत से मेरे होने वाले पति का पहला वीर्य बह रहा था. अच्छा होता मैं उसी वीर्य से गर्भवती हो जाती. पर अफ़सोस, मैं पहले ही दूसरे मर्दों से चुदवाकर पेट बना चुकी थी!
अपनी चूत को अच्छे से धोकर मैं बाहर निकली और नये कपड़े पहन ली.
बाद मे नीतु मुझे बोली, "दीदी, थोड़ी अजीब बात नही हो गयी?"
"क्या?"
"गाँव के गऊ लोग जो जीजाजी के पीछे पड़ गये थे..."
"क्यों नही पड़ सकते है क्या?" मैने बात को टालने के लिये कहा.
"पड़ तो सकते हैं..." नीतु बोली, "पर शिव मन्दिर के पास एक ही खटाल है और दोपहर से उनके सारे गऊ खटाल के अन्दर ही हैं."
"तेरा कहने का क्या मतलब है?" मैने आंखें दिखाकर कहा.
"कुछ नही!" नीतु कमरे से निकलते हुए बोली, "पर सोचने वाली बात यह है...के जीजाजी झूठ क्यों बोल रहे थे!" बोलकर वह तुरंत नीचे भाग गयी.
अमोल और उसके पिताजी के जाने का बाद मैने तुरंत मीना भाभी को चिट्ठी लिखी.
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मेरी प्यारी मीना भाभी,
मै नही जानती मैं किन शब्दो से तुम्हे धन्यवाद कहूं! तुम ने मेरी जान और मेरे घर की इज़्ज़त बचा दी है. मुझे अमोल बहुत पसंद आया है और मैने उससे शादी के लिये हाँ कर दी है. सच कहूं तो मुझे उसे देखकर ही प्यार हो गया है.
मुझे नही पता तुम ने उसे मेरे सोनपुर के कारनामों के बारे मे क्या क्या बताया है. पर उसे पता था मैं गर्भवती हूँ. फिर भी वह मुझे इतना प्यार करता है कि मुझसे शादी करने को तैयार है. मेरी इतनी अच्छी किस्मत होगी मैने कल्पना भी नही की थी.
भाभी, तुम मुझसे कुछ छुपाती नही हो, इसलिये मैं भी यह बात तुमसे छुपाना नही चाहती. तुम्हारी तरह साहित्य रचना मुझे नही आता है - इसलिये संक्षेप मे लिख रही हूँ. आज मैं अमोल को लेकर हमारी खेती दिखाने ले गयी थी. उधर अमोल मुझे बहुत प्यार करने लगा. तुम तो जानती हो मैं पिछले महीने भर से चुदवाई नही हूँ. अमोल के प्यार मे मैं बह गयी और हम दोनो ने खेत मे ही चुदाई कर ली. मुझे अमोल से चुदवाकर बहुत मज़ा आया. तुम ने ठीक ही कहा था. खुले वातावरण मे चुदवाने का एक अलग ही मज़ा है!
और भाभी, तुम्हारा भाई बहुत बड़ा खिलाड़ी है! उसने मुझे बताया कि उसने तुम्हारे मैके की एक नौकरानी का बलात्कार किया था और उसे गर्भवती बना दिया था. अगर तुम्हे पता हो तो मुझे बताना वह और किन किन औरतों की चूत मारे फिरता है. वैसे मुझे कोई आपत्ती नही है अगर वह शादी के बाद भी दूसरी औरतों को चोदता फिरे. एक तो मैं खुद कुछ कम खेल खाई नही हूँ. दूसरे, सच कहूं तो मैं अमोल से जितना भी प्यार करुं, मेरे मन से दूसरे मर्दों को भोगने की लालसा हमेशा रहेगी. मैं अमोल को कोई धोखा नही देना चाहती. अगर उसे आपत्ती न हो तो मैं दूसरे मर्दों से चुदवाते रहना पसंद करूंगी. पता नही मैं अमोल को यह कैसे समझा पाऊंगी.
खैर यह सब बाद की बात है. अभी तो मुझे बस शादी का इंतज़ार है ताकि मैं अपने अमोल से दिन-रात चुदवा सकूं. न जाने अमोल से मेरी शादी कब होगी! भाभी मुझे बताओ, तब तक मैं बिना लन्ड के कैसे जीऊं!
तुम्हारी अपनी,
वीणा
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