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मैं और मेरा परिवार

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502

मैं मेले मे जाकर अपनी बाइक ले ली.

घर जाउ या मंदिर जाउ, कपड़े चेंज करने है, एक काम करता हू बाइक से मंदिर की तरफ चक्कर मार कर घर चला जाता हू.

मैं धोती पहन कर बाइक लेकर मंदिर की तरफ चला गया.

मंदिर मे सब कुछ ठीक चल रहा था. पंडितजी लोगो को दर्शन करवा रहे थे. दर्शन करने के बाद लोगो को परसाद दिया जा रहा था.

पोलीस हर तरफ नज़र रखे हुए थी.

मैं अपनी बाइक घर की तरफ ले जा रहा था कि मैं ने देखा पंडिताइन मंदिर के पीछे जा रही थी.

पंडितजी का घर मंदिर के पीछे था. मंदिर के पीछे से जंगल शुरू होता है. पंडितजी वही रहते थे

पंडिताइन अपने घर जा रही है.पंडितजी लोगो को दर्शन करवा रहे है.

पंडिताइन को रणजीतसिंघ के साथ चुदाई करते हुए देखा था.

ठकुराइन ने मुझे गुलाम बनाने के लिए पंडिताइन का नाम लिया था.

पंडिताइन ने ठकुराइन को बताया था जिस की वजह से ठकुराइन के साथ इतना कुछ हो गया.

पंडिताइन की खबर लेनी पड़ेगी.

पर मेरे पास कॉंडम, अरे हाँ मैं ने कुछ कॉंडम बाइक मे रखे है.

मैं ने बाइक वही पास मे रख दी और कॉंडम लेकर मंदिर के पीछे जाने लगा.

मंदिर के पीछे इस समय ज़्यादा लोग नही थे. जो थे वो अपने काम मे बिज़ी थे

पंडिताइन का घर मंदिर से 40 50 कदमो की दूरी पर था.

मैं पंडिताइन के घर के पीछे चला गया. मैं नही चाहता था कि कोई मुझे पंडितजी घर जाते हुए देखे

मैं ने पीछे का गेट खटखटाया

थोड़ी देर बाद पंडिताइन की आवाज़ आई.

पंडिताइन-कौन है

अवी- मैं हू

पंडिताइन-मैं कौन

अवी- मुझे पंडितजी ने भेजा है. कुछ समान लेना है

पंडिताइन-आगे के गेट से आओ. ऐसे पीछे के गेट से क्यू आ रहे हो

अवी- मुझे लगा यही घर का गेट है

पंडिताइन-रूको खोलती हू

पंडिताइन ने गेट खोला .और मुझे सामने देख कर शॉक्ड हो गयी.

पंडिताइन-तुम, यहाँ, यहाँ किस लिए आए, किसी ने देखा तो नही, जल्दी अंदर आओ

पंडिताइन ने मुझे घर के अंदर ले लिया. और गेट से इधर उधर देख कर गेट बंद किया.

पंडिताइन-तुम

अवी- हाँ मैं, मुझे लगा तुम भूल गयी होगी

पंडिताइन-भूल गयी थी पर पूजा मे देख कर फिर याद आ गयी.

अवी-चलो अच्छा है, सब याद है

पंडिताइन-तुम यहाँ किस लिए आए हो

अवी-अधूरा काम पूरा करने के लिए

पंडिताइन-कौनसा अधूरा काम

अवी-हवेली मे अधूरा रह गया था

पंडिताइन-हवेली , वो तो शुरू हुआ ही नही फिर अधूरा कैसे रह गया

अवी-अब शुरू करते है

पंडिताइन-मुझे कुछ नही करना.

अवी- क्यू, मैं तो ठाकुर से अच्छा हू

पंडिताइन-वो तो देखने के बाद पता चलेगा ,

अवी- ठीक है दिखाऊ

पंडिताइन-मुझे नही देखना, तुम जाओ यहाँ से

अवी- पर मुझे तो देखना है

पंडिताइन-तुम ऐसे नही मनोगे.ठीक है बाद मे देख दूँगी. इस समय जाओ यहाँ से

अवी-अभी देखने मे बुराई क्या है

पंडिताइन-मंदिर मे पूजा हो रही है. कितने लोग है

अवी- मैं बाहर देखने को थोड़ी कह रहा हू.

पंडिताइन-पंडितजी आ जाएँगे

अवी- वो 3 4 घंटे के बाद मंदिर से बाहर आएँगे

पंडिताइन-मतलब आज देख कर जाओगे

अवी- हाँ, पिछली बार तुम डरी हुई थी. इस लिए मैं ने नही देखा पर आज देखे बिना नही जाउन्गा.

पंडिताइन-क्या मुसीबत है.

अवी- ये मुसीबत तुम ने खुद बनाई है

पंडिताइन-ठाकुर को कहा था कि गेट बंद कर दो पर उसको तो आग लगी थी.

अवी- अब मुझे लगी है

पंडिताइन-ठीक है दिखाती हूँ पर इस से ज़्यादा कुछ नही

अवी- ठीक है

पंडिताइन ने अपनी साड़ी और पेटिकोट उपर करके मुझे चूत दिखाई, और जल्दी से साड़ी नीचे भी कर ली

अवी- शुक्रिया, अब मैं चलता हू

पंडिताइन मुझे अजीब सी नज़रो से देखने लगी.

मैं गेट की तरफ जाने लगा.

पंडिताइन-रूको

अवी- मैं रुक गया.

पंडिताइन-तुम पागल हो क्या

अवी- नही.क्यू?

पंडिताइन-हवेली मे भी मुझे इतनी आसानी से जाने दिया और अब भी बस देख कर जा रहे हो,

अवी- मैं कुछ समझा नही

पंडिताइन-हाथ मे आया माल ऐसे छोड़ कर जा रहे हो, कभी किया नही तुम ने

अवी- (आक्टिंग तो करनी पदेन्गि.झुथ तो बोलना पड़ेगा.) नही किया और किया भी

पंडिताइन-ठीक से बताओ

अवी- पहले तुम बताओ ,तुम ने हवेली के बारे मे ठकुराइन को मेरा नाम क्यू बताया. मैं ने तो कुछ नही किया था.

पंडिताइन-मैं ने बस इतना बताया कि तुम्हारी वजह से देर हो गयी.

अवी- पर मेरा नाम क्यू बताया

पंडिताइन-मुझे उपर गये हुए बहुत देर हो गयी थी. और वो ठकुराइन थी. मैं रणजीतसिंघ का नाम लेती तो मैं मुसीबत मे फस जाती.इस लिए मैं ने तुम्हारा नाम लिया.पर ऐसा वैसा कुछ नही बताया

अवी- ठकुराइन ने मेरे साथ जो किया वो तुम्हें पता नही

पंडिताइन-क्या किया ठकुराइन ने

अवी- मुझे गुलाम बनाकर रखा. बड़ी मुश्किल से पीछा छुड़ाया है

पंडिताइन-मैं ने इसी लिए रणजीतसिंघ का नाम नही लिया

अवी- जाने दो जो हुआ सो हुआ. अब मैं चलता हू

पंडिताइन-रूको तुम ने मेरे सवाल का जवाब नही दिया.

अवी- जब बिना कुछ किए ठकुराइन ने सज़ा दी तो सोचा कि वो काम जिस की वजह से सज़ा मिली वो कर लेता हू.इस लिए देखने आ गया.

पंडिताइन-तो ये बात है,

अवी- हाँ, मुझे आपकी चूत देखनी थी जो मैं ने देख ली अब मैं चलता हू

पंडिताइन-ह्म्म्मा

फिर मैं गेट की तरफ जाने लगा

 
503

मैं गेट की तरफ जाने लगा.

पंडिताइन मुझे देखती रह गयी.

पता नही पंडिताइन क्या सोच रही थी.

मैं ने गेट खोल दिया. और बाहर जाने लगा.

पंडिताइन ने गेट के पास आकर मुझे आवाज़ दी.

पंडिताइन-अवी

मैं ने पलट कर देखा. पंडिताइन को मेरा नाम कैसे पता चला. पंडितजी ने बताया होगा.

अवी- हाँ

पंडिताइन-एक मिनिट के लिए इधर आना

अवी- मेरा काम तो हो गया .अब किस लिए बुला रही हो

पंडिताइन-चाय पीने के लिए बुला रही हूँ

अवी- (मुझे तो लगा कि पंडिताइन हाथ से निकल गयी. पर चलो एक और चान्स मिला)

मैं फिर से पंडिताइन के घर चला गया.

पंडिताइन ने गेट बंद कर दिया. और रशोई घर मे चूल्हेर पर टी बनाने लगी.

मैं भी पंडिताइन के पास रशोई घर मे जाकर बैठ गया.

पंडिताइन टी बनाने लगी.

अवी- तुम को एक बात पुच्छू

पंडिताइन-हाँ पूछो

अवी- मैं तुम्हे कुछ कहूँ तो बुरा तो नही लगता

पंडिताइन-नही,

अवी- वैसे एक और बात पूछनी थी.

पंडिताइन-हाँ पूछो,

अवी- क्या सबकी चूत पे बाल होते है

मेरी बात सुनकर पंडिताइन हँसने लगी

पंडिताइन-तुम ने कभी किसी की नही देखी

अवी- मुझे कौन दिखाएगा

पंडिताइन-मतलब तुम्हें कुछ पता नही है,

अवी- हाँ

पंडिताइन-फिर उस्दिन अचानक से मुझे चूत दिखाने को क्यू कहा था.

अवी- वो मैं ने अपने दोस्तो से सुना था कि एक बार चूत देखी तो ज़िंदगी भर देखते रहने का मान होता है.इस लिए उस दिन हवेली मे देखने को कहा

पंडिताइन-तो ये बात है. पर मुझे पूछते हुए तुम्हें डर नही लगा.

अवी- तुम डरी हुई थी, इस लिए पूछ लिया.

पंडिताइन-फिर बताओ मेरी चूत देख कर कैसा लगा.

अवी- मैं ने देखी कहाँ है

पंडिताइन-अभी तो देखी थी.

अवी- आपने इतनी जल्दी देखी कि मैं ठीक से देख नही पाया.

पंडिताइन-फिर दुबारा दिखाने को क्यू नही कहा.

अवी- मुझे लगा कि तुमको बुरा लगेगा.

पंडिताइन-मुझे सच बताओ तुम ने कभी चुदाई की है.

अवी- नही, मुझे कुछ नही पता (पंडिताइन के सामने अनाड़ी बन जाता हू)

पंडिताइन-इतने बड़े हो गये और तुम्हें कुछ नही पता

अवी- बताने वाला कोई नही मिला.

पंडिताइन-(इसको सीखा देती हू ,पंडित जी तो कुछ करते नही ,इस के साथ चुदाई कर लेती हू. बिचारा मेरी वजह से मुसीबत मे फस गया था. इसको सिखा देती हू ,) मैं तुम्हें सिखा सकती हू

अवी- तुम सच मे सिख़ाओगी(हो गया काम)

पंडिताइन-हाँ पर तुम्हें मेरी कुछ बातें मान नी होगी,

अवी- मुझे सब मंज़ूर है

पंडिताइन-पहले सुन तो लो

अवी- कहिए

पंडिताइन-मेरे और रणजीतसिंघ के बारे मे किसी को नही बताओगे.

अवी- नही बताउन्गा,

पंडिताइन-और सीखने के बाद मुझे बार बार परेशान मत करना चुदाई के लिए.

अवी- नही करूँगा. जब आप कहेंगी तब आ जाया करूँगा (ये तो बढ़िया है, एक दो बार चुदाई करने के बाद तुम कौन वाला फंडा अच्छा है)

पंडिताइन-और पीछे के गेट से आया करो,और इसी समय पर आ जाया करो

अवी- ठीक है,

पंडिताइन-तो फिर कल से तुम्हें सिखा दूँगी.

अवी- कल से क्यू, आज क्यू नही

पंडिताइन-मेरे पास कॉंडम नही है,

अवी- कॉंडम,वो किस लिए चाहिए

पंडिताइन- मैं पंडितजी के साथ बिना कॉंडम के करती हू ,क्यू कि वो मेरे पति है,रणजीतसिंघ के साथ कॉंडम के साथ करती हू,

अवी- और किस के साथ करती हो

पंडिताइन-बस पंडितजी और रणजीतसिंघ, और कल से तुम्हारे साथ करूँगी.

अवी- ठीक है कल शुरू करेंगे (मेरे पास कॉंडम है .पर मुझे तो कुछ नही आता,पंडिताइन ने पूछ लिया तो गड़बड़ हो जाएगी, एक दिन तो रुक सकता हू)

फिर पंडिताइन ने मुझे टी दी .

हम बातें करते हुए टी पीने लगे.

पंडिताइन-और बताओ मैं कैसी दिखती हू

अवी- कैसी मतलब

पंडिताइन-क्या मैं मोटी हू,

अवी- हाँ, वो पीछे से आप मोटी है. और आपके दूध बड़े है

पंडिताइन-पीछे से, मेरी गंद बड़ी है, ये सब रणजीतसिंघ ने किया है. जब देखो तब गंद मारने के पीछे लगा रहता है.वैसे तुम्हें क्या पसंद है

अवी- मुझे, मुझे जो मिलेगा उसी मे खुश हो जाउन्गा.

पंडिताइन-तुम्हारी बात मुझे अच्छी लगी. नही तो पंडितजी जो सिर्फ़ चूत के पीछे रहते है और रणजीतसिंघ जिसे सिर्फ़ गंद चाहिए.

अवी- तो मेरे लिए क्या बचा

पंडिताइन-तुम्हें मैं दोनो दूँगी. पर मेरे हिसाब से

अवी- मैं इंतज़ार करूँगा.

पंडिताइन-कल तुम्हें ऐसा मज़ा करवाउन्गी कि मुझे ज़िंदगी भर याद रखोंगे

अवी- (कुछ भी कर ,बस लंड को चूत और गंद मे जाने देना) अच्छा अब मैं चलता हू, कल आउन्गा

पंडिताइन-ठीक है, और कल आते समय कॉंडम लेकर आना,

अवी- तुम्हारे पास नही है

पंडिताइन-मैं कहाँ जाउन्गी. मुझे बहुत काम होते है,तुम लेकर आ जाना

अवी- ठीक है

और फिर मैं वापस मंदिर के पास आकर बाइक लेकर घर3 चला गया.

 


504

मैं घर3 आकर कपड़े चेंज किए और मंदिर की तरफ जाने लगा.

कल तो मेरा कॅमरा राज ने ले लिया. अब कॅमरा वापस नही मिलेगा. मुझे नया कॅमरा लेना होगा.

मेरे पास पैसे भी कम है. मेरे पास तो चाचा के अकाउंट का एटीएम कार्ड है. अगर चाचा के अकाउंट से पैसे निकाले तो चाचा मेरा जीना हराम कर देंगे.

चाची से पैसे माँग लेता हू, छोटी चाची से ,नही नही बड़ी चाची से माँगता हू, बड़ी चाची को अच्छा लगेगा.

पर पहले मंदिर की तरफ जा कर देखता हू कि काम कैसे चल रहा है.वैसे रणजीतसिंघ ने अपनी सेक्रेटरी को काम पे लगा दिया था पर मुझे भी जाकर देखना होगा.

मैं मंदिर की तरफ निकल गया.

पंडितजी लोगो को दर्शन करवाने मे बिज़ी थे.

मैं ने काम करने वाले लड़को से बात की ,उन लड़को ने कहा कि सब ठीक चल रहा है.

फिर मैं इधर उधर घूमने लगा.

थोड़ी देर बाद रणजीतसिंघ भी मंदिर मे आ गये.

रणजीतसिंघ-क्या बात है तबीयत तो ठीक है ना.

अवी-मुझे क्या हुआ,मैं तो एकदम फिट हू

रणजीतसिंघ-फिर कल रात को मज़े क्यू नही किए, मैं ने एक लड़की को भेजा था ,पर तुम उसे नही मिले

अवी-कल मैं घर पे रुका था.

रणजीतसिंघ-इसी लिए वो मुझे कह रही थी कि खेत के घर3 मे कोई नही है, वहाँ पर ताला लगा है.

अवी-कल अचानक एक काम याद आ गया जिस की वजह से घर पे रुक गया.

रणजीतसिंघ-तुम टेन्षन मत लो, कल नही किया तो क्या हुआ आज वापस उसे भेजता हू. आज मज़े करना

अवी-(आज तो रुकसाना या रज़िया आएगी) आज नही कल भेज देना

रणजीतसिंघ-आज क्यू नही.

अवी-आज मैं फिर से घर पे रुकने वाला हू.

रणजीतसिंघ-तुम पहले लड़के हो जो चुदाई करने के लिए मना करके अगले दिन का बोल रहे हो, नही तो दूसरे लोग होते है जो चुदाई करने के लिए एक पैर पर खड़े हो जाते है.अब ये मत पूछना कौन सा पैर

अवी-मैं तो ऐसा ही हू(आज मेरी सेट्टिंग है) .अच्छा मैं चलता हू ,मुझे शहर भी जाना है.

रणजीतसिंघ-ठीक है ,कल मज़े करना.

अवी-ज़रूर, वैसे आप से एक बात पुच्छू

रणजीतसिंघ-हाँ पूछो

अवी-आपकी सेक्रेटरी सेक्सी है

मेरी बात सुनकर रणजीतसिंघ हँसने लगा.

रणजीतसिंघ-उस पे नज़र है तुम्हारी

अवी-ऐसा नही है,

रणजीतसिंघ-कोई बात नही, उसके साथ भी मज़े कर्वाउन्गी. पर मेले के बाद, और हाँ सेक्रेटरी से भी सेक्सी लड़की से मज़े कर्वाउन्गा. साथ मे मज़े करेंगे.पर पहले मेले का मज़ा लेते है.

अवी-मेला ख़तम होने का इंतज़ार रहेगा.

रणजीतसिंघ के साथ बातें करने के बाद मैं घर चला गया.

घर जाकर मैं सीधा बड़ी चाची के कमरे मे चला गया.

छोटी चाची और सीमा चाची भी वही पर थी.

छोटी चाची और सीमा चाची के सामने बड़ी चाची से पैसे माँग लिए तो तीनो चाची पैसे देंगी.इस लिए कम पैसे माँगता हू जिस से तीनो चाची जो पैसे देंगी वो मेरे लिए ज़्यादा हो जाएँगे.

मैं कमरे मे जाते ही बड़ी चाची की गोदी मे सर रख लेट गया.

बड़ी चाची मेरे बालो पर हाथ घुमाने लगी.

अवी-चाची

ब चाची-हाँ

अवी-मुझे कुछ पैसे चाहिए थे

ब चाची-कितने

अवी-10000 रुपये

ब चाची-इतने पैसे किस लिए चाहिए

अवी-वो कल मेरा कॅमरा राज ने ले लिया. वो कॅमरा राज को पसंद आ गया.उस से वापस माँगना अच्छा नही लगेगा. इस लिए नया कॅमरा खरीद रहा हू

ब चाची-इतने पैसो से हो जाएगा.

अवी-हाँ हो जाएगा.

ब चाची-ठीक है, तू जा फ्रेश होकर खाना खा मैं पैसे लेकर तेरे कमरे मे आती हू

अवी-जी चाची

ब चाची-सीमा जा अवी को खाना खिला दे

म चाची-जी दीदी

फिर मैं अपने कमरे मे जाकर फ्रेश होकर खाना खाने लगे.

सीमा चाची मुझे खाना दे कर अपने कमरे मे चली गयी.

मैं खाना खा रहा था कि बड़ी चाची पैसे लेकर आ गयी.

ब चाची-अवी

अवी-जी चाची

ब चाची-ये लो पैसे, और लगे तो माँग लेना

अवी-इतने ही चाहिए थे

ब चाची-तू सब को मेला दिखाता है ना ,पैसे तो लगते है ना. मैं उसकी बात कर रही हू.

अवी-उसके लिए चाचा का एटीएम कार्ड है मेरे पास

ब चाची-जितना चाहिए उतना निकाल लेना. तुम्हारे चाचा से मैं बात कर लूँगी.आराम से खाना खा ले

और बड़ी चाची चली गयी. और छोटी चाची और सीमा चाची एक साथ मेरे कमरे मे आ गयी.

म चाची-तूने हम से पैसे क्यू नही माँगे

अवी-आपसे ही तो माँगे है. दीजिए पैसे

म चाची-तुम ने सुमन दीदी से पैसे माँगे थे. हम क्यू दे तुम को पैसे

सी चाची-हाँ हम क्यू दे,

अवी-मैं बड़ी चाची से बात कर रहा था पर वो बात आप सब के लिए थी. इस लिए मैं ने बड़ी चाची से कम पैसे माँगे,

सी चाची-देखा मैं ने कहा था ना आपको

म चाची-ये ले पैसे

सी चाची-और ये मेरी तरफ से

मैं ने सीमा चाची और छोटी चाची से पैसे ले लिए

फिर खाना खाने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए सो गया.

2 घंटे सोने के बाद मैं फ्रेश होकर शहर चला गया.

फिर से एक कॅमरा लेकर मेले मे चला गया.

इतने बड़े मेले मे शीला को ढूँढा मुश्किल है जब कभी मिलेगी तो कोई आइडिया लेकर पटा लूँगा.

और वो प्रसाद लेने वाली,क्या नाम बताया था उस काकी ने ,हाँ शोभा वो भी नही दिख रही

1 घंटा मेले मे घूमने के बाद मैं 4.30 बजे घर आ गया जहाँ पर सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

 


505

1 घंटा मेले मे घूमने के बाद मैं 4.30 बजे घर आ गया जहा पर सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

मैं ने बाइक घर पे रख दी और कार मे सब के साथ बैठ कर मेले मे चला गया.

कार मे ड्राइवर के साथ राज और राजेश बैठा था. उसके पीछे वाली शीट पर रानी ,कोमल,मैं और सीतल दीदी बैठे थे. और पीछे स्वेता दीदी, पूनम दीदी, कविता और लीना बैठी थी.

हम सब मस्ती करते हुए,मेले मे चले गये.

आज चाची और बुआ नही थी जिस की वजह से हम कल की तरह लड़के लेकर नही घूम रहे थे ,अपनी मस्ती मे मेला देख रहे थे.

राज-भैया आज नये झूले पे बिठाएँगे

कविता-आज मौत का कुँआ देखेंगे

सीतल दीदी- आज सिर्फ़ मस्ती करते हुए मेले मे खाएँगे पिएँगे और सिर्फ़ मस्ती करेंगे

अवी-मेला 25 दिन तक चलेगा. उसके बाद भी चल सकता है. हम एक दिन मे एक झूले पे बैठेंगे और मस्ती करेंगे

कविता- मुझे मौत का कुँआ देखना है

राज-मुझे झूले पे बैठना है

अवी-राज छोटा है तो पहले झूले पर फिर मौत का कुँआ देखेंगे

स्वेता दीदी-ये सही रहेगा.

कोमल -चलो चलते है

फिर राज ने एक झूले सेलेक्ट किया.

झूले का बॉक्स कप शेप का था. जिस मे 4 लोग बैठ सकते थे.झूले का बॉक्स भी घूमता था और पूरा झूला भी घूमता था.

मैं ने झूले वाले से बात की ,हमारा नंबर बिना लाइन मे लगे लग गया.

स्वेता दीदी- मेरी बात ध्यान से सुनो

सब स्वेता दीदी की तरफ देखने लगे

स्वेता दीदी- मैं और कोमल कविता और लीना के साथ बैठेंगे, पूनम और सीतल राज और राजेश के साथ बैठेंगे,अवी तुम रानी के साथ बैठ जाना

कोमल- मैं अवी के साथ बैठ ती हूँ रानी तू स्वेता दीदी के साथ बैठ जाना

स्वेता दीदी-कोमल मैं ने इस लिए ऐसे बैठने को कहा क्यू कि 2 छोटे के साथ 2 बड़े बैठे, रानी हमारी मेहमान है तू उसे काम करने को बोल रही है.

कोमल-सॉरी दीदी

मैं तो खुश हो गया. स्वेता दीदी ने क्या दिमाग़ लगाया. मैं रानी के साथ बैठ सकता हू. मज़ा आएगा.

4 4 अरेंज्मेंट के हिसाब से 16 कप थे.

मैं जानबूझ कर रानी के साथ दूसरे 4 वाले ग्रूप मे बैठ गया

अवी-रानी, एक किस

रानी-अवी 2 किस

अवी-रानी 3 किस

रानी-अवी 4 किस

हम बातें कर रहे थे कि हमारे सामने एक कपल आ कर बैठ गया.

झूला शुरू हो गया. सब मस्ती मे चिल्लाने लगे

रानी-इनके सामने किस कैसे करेंगे

अवी-उस लड़के का हाथ देखो कहाँ है.

उस लड़के का हाथ लड़की की चूत पर था. और वो लड़का उसकी चूत दबा रहा था.

फिर वो दोनो किस करने लगे.

अवी-चलो हम भी

मेरी बात पूरी होने से पहले रानी मुझे किस करने लगी

मैं भी हवा वो के साथ घूमते हुए रानी को किस करने लगा.

मैं ने किस जल्दी तोड़ दिया.

रानी-क्या हुआ

अवी- इतना काफ़ी है. किसी ने देख लिया तो

रानी ने फिर से एक किस किया.

रानी-अब ठीक है.

किस करने के बाद हम भी झूले का मज़ा लेने लगे

झूले का मज़ा लेने के बाद हमे चक्कर आने लगे

राजेश-कल से ज़्यादा आज मज़ा आया

राज-मुझे बहुत मज़ा आया.

सीतल दीदी-सिर्फ़ तुम दोनो को मज़ा आया. मुझे तो उल्टी हो रही थी.चलो मौत का कुँआ देखने

अवी-थोड़ी देर आराम करते है. चलो गरम गरम भजिया और जलेबी खाते है

कोमल-जलेबी ,कितने दिनो के बाद आज खाउन्गी.

पूनम दीदी-शहर मे खाने मे मज़ा नही आता. गाओं की वो भी मेले की जलेबी का मज़ा तो मैं भी लेना चाहूँगी.

अवी-चलो फिर

हम सब हलवाई की दुकान पर आ गये.

हम ने भजिया और गरम गरम जलेबी का ऑर्डर दिया.

जलेबी टेबल पर आते ही सब जलेबी पर टूट पड़े, हलवाई ने बढ़िया जलेबी बनाई थी.

भाजिया को तो किसीने हाथ भी नही लगाया.सब जलेबी के हर एक बाइट का टेस्ट ले रहे थे.

स्वेता दीदी-इतनी टेस्टी जलेबी आज तक नही खाई

कविता-हाँ दीदी, जलेबी के साथ उंगली ना खा जाउ ऐसा लग रहा है.

सीतल दीदी-मैं तो उंगलिया भी खा जाउ ,क्या जलेबी है.

रानी-भाजिया भी टेस्टी है.

कोमल-हाँ, पर जलेबी के सामने फीकी है.

राजेश-फीकी तो रहेंगी ना ,जलेबी मीठी है वो भाजिया फीकी है.

राजेश के जोक पर सब हँसने लगे. और हस्ते हुए जलेबिका मज़ा लेने लगे.

पूनम दीदी-अवी मेरे लिए एक और प्लेट जलेबी मॅंगा दो, और ये भाजिया तुम खा लो

पूनम दीदी के इतना कहते ही फिर एक आवाज़ आई मेरे लिए भी एक प्लेट, मुझे भी, हमको भी चाहिए.

मैं गया काम से सारी भाजिया मुझे खानी होगी.

लेकिन रानी के रहते मुझे भाजिया खाने मे मज़ा आने लगा.

रानी-मैं भाजिया खाउन्गी

रानी और मैं भाजिया खाने लगे और सब जलेबी का मज़ा लेने लगे.

सब जलेबी खाने मे खोए थे .और मैं रानी के साथ प्यार करने लगा.

रानी भाजिया को आधा खा कर प्लेट मे रखती और दूसरी भाजिया उठा लेती.

मैं रानी की भाजिया उठा कर खा लेता. और अपनी भाजिया रानी को देता.

ऐसा हम जलेबी के साथ भी करने लगे.

रानी के खाने से जलेबी और मीठी हो जाती जिस से मुझे जलेबी मे प्यार वाली मिठास मिलने लगी.

फिर कोमल ने भी भाजिया ख़तम करने मे मुझे मदद की.

इतनी भाजिया , घर3 जाकर हाजमोला खानी होगी.

जलेबी तो बहुत बढ़िया थी. मैं ने हलवाई को 10 प्लेट जलेबी पॅक करके रखने को कहा . चाची यहाँ नही आ सकती तो क्या हुआ. मैं मेला घर लेकर जाउन्गा.

राज जलेबी खाने के साथ साथ कमेरे से फोटो निकाल रहा था.

राज-भैया ,ये कॅमरा

अवी-ये तेरे लिए ही लाया था.

कॅमरा मिलते ही राज खुश हो गया.

कविता-अब चलो मौत का कुँआ देखने के लिए.

लीना-कविता कल चलते है. ज़्यादा जलेबी खाने के बाद वहाँ पर खड़े रह कर ,हिलते हुए जगह पर देखने मे मज़ा नही आएगा.

कविता-ये भी सही है, तो 1 घंटा क्या करेंगे

अवी-कुछ खरीदी करते है. और गेम खेलेंगे.

राज-वो बंदूक से बलून फोड़ने वाला गेम खेलेंगे.

राजेश-मैं तो सारे बलून फोड़ दूँगा.

अवी-चलो चलते है.

हम फिर से मेले मे घूमने लगे.

बहनें अपने लिए खरीदी करने लगी. राज और राजेश गेम खेलने लगे

मैं सीतल दीदी के पीछे खड़ा होकर ये सब क्या ले रहे है वो देखने लगा.

मेरी बहनें छोटी मोटी चीज़े लेने लगी.

मैं सीतल दीदी से थोड़ा चिपक कर खड़ा हो गया और थोड़ा झुक कर चीज़े देखने लगा

सीतल दीदी- धीरे से, ये क्या कर रहे हो

अवी-प्यार कर रहा हू

सीतल दीदी-अवी कोई देख लेगा.

अवी-कपड़ो के अंदर है कोई नही देखेगा.

सीतल दीदी-जोक मत करो, पीछे सरक जाओ, नही तो गड़बड़ हो जाएगी.

जाने दो, मैं राज के पास चला गया.

इनकी खरीदी मे 1 घंटा चला गया.

अवी-आज के इतना काफ़ी है, 8.00 बज रहे है.

फिर हम सब घर जाने के लिए कार की तरफ जाने लगे. मैं ने हलवाई की दुकान से जलेबी पॅक कर के ले ली.

और हम घर की तरफ निकल पड़े.

 


506

मैं सब के साथ घर आ गया.

मैं ने एक जलेबी का पॅकेट स्वेता दीदी को दिया, एक कोमल को और एक राजेश को ,और पूजा बुआ,नेहा बुआ ,नीता बुआ को जलेबी देने को कहा

बाकी की जलेबी मैं चाची के लिए लाया था.

अवी-चाची ,चाची

मेरी आवाज़ सुनकर तीनो चाची बाहर आ गयी.

ब चाची-क्या है अवी, ऐसे चिल्ला क्यू रहे हो, बच्चे सो रहे है.

अवी-मुझे पता नही था.

सी चाची-तूने आवाज़ क्यू दी

अवी-मैं आपको मेले का मज़ा दिलाने के लिए आवाज़ दे रहा था.

ब चाची-कल इतना कुछ हुआ फिर भी तू हमे मेले मे ले जाना चाहता है

अवी-मैं मेला यहाँ लेकर आया हू

सी चाची-मुझे पागल बोल रहा था. देखो दीदी अवी खुद पागलो जैसी बातें कर रहा है.

अवी-आप ऐसे मेरा विस्वाश नही करेंगी.रूको अभी दिखाता हू.

और मैं ने जलेबी का पॅकेट खोल दिया.

अवी-ये है असली मेला. मेले की जलेबी

म चाची-जलेबी,नाम सुनते ही मुँह मे पानी आ गया.

अवी-क्यू चाची

सी चाची-मैं पागल ,चल जल्दी दे जलेबी, बहुत दिनो के बाद खाने को मिल रही है

मैं ने छोटी चाची और सीमा चाची को जलेबी दे दी

ब चाची-मुझे भी दो, मैं ने क्या गुनाह किया है.

सी चाची-दीदी आप को तो सब से ज़्यादा पसंद है जलेबी

ब चाची-मैं तो पूरी खा जाउन्गी. एक तो जलेबी मीठी है और उपर से अवी लेकर आया है.

अवी-चाची मैं सब के लिए 2 2 प्लेट लेकर आया हू

म चाची-ये अच्छा किया.

फिर हम सब जलेबी का मज़ा लेने लगे.

चाची और मैं .और हमारे बच्चे ,मुझे तो लग रहा था हमारी फॅमिली इतनी ही है. चाचा दूर दूर तक नज़र नही आ रहे थे.

जलेबी का मज़ा लेने के बाद मुझे खाना खाने का मूड नही था इस लिए मैं बाइक लेकर मेले मे चला गया.

अभी 9.00 बज रहे थे ,मेला ख़तम होने मे 2 घंटे बाकी है.

मेले मे घूम कर शीला को ढूँढने लगा. शीला तो नही मिली पर सविता दिख गयी. सविता पे कुवरसिंघ की नज़र थी और मेरी भी नज़र थी. पर मुझे लग रहा था कि कुवरसिंघ बाज़ी मार लेगा. क्यू कि मैं तो बिज़ी हू जिस की वजह से सविता मेरे हाथ से निकलती जा रही थी.

मैं सविता को दूर से देख कर मज़ा ले रहा था. सविता की फॅमिली सविता के साथ थी. बड़ी फॅमिली थी सविता की. सविता की फॅमिली मे जो आदमी थे वो तो पहलवान की तरह दिख रहे थे.

मैं सविता की तरफ देख रहा था ,कि तभी कुछ लड़को ने चलते हुए सविता की गान्ड पर थप्पड़ मारा.

सविता इतनी खूबसूरत और सेक्सी थी की कोई भी उसको पाना चाहता था.

लड़के ने कुछ ज़्यादा की ज़ोर से थप्पड़ मारा. थप्पड़ की आवाज़ और सविता की चीख ने उसके फॅमिली वालो को बता दिया कि क्या हुआ है.

सविता की फॅमिली मे पहलवान की कमी नही थी, सविता के पति ने उस लड़के को पकड़ कर मारना शुरू किया.

सविता के पति ने उस लड़के की गंद पर ज़ोर दार थप्पड़ मारना शुरू किया.

मुझे ये अंदाज़ अच्छा लगा, थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से

पर सविता का पति कुछ ज़्यादा ही गुस्से मे था.

झगड़ा बढ़ता हुआ देख कर पोलीस वाले बीच मे आ गये. और झगड़ा रोक दिया. मैं भी उनके पास चला गया.

हम ने सविता के पति को समझाया ,बड़ी मुश्किल से वो मान गया और अपनी फॅमिली के साथ चला गया.

पोलीस उस लड़के को हॉस्पिटल ले गयी.

सविता की फॅमिली डेंजर है, इस से दूर रहना समझदारी होगी

फिर से मैं मेले मे घूमने लगा.

सब लोग अपने घर जाने लगे.

मैं भी रुकसाना या रज़िया जो मेरे पास आएगी उसकी चुदाई करने के लिए घर3 चला गया.

वो दोनो अभी तक आई नही थी.मैं घर3 के अंदर जाकर कॅमरा चालू करके उनका इंतज़ार करने लगा.

इंतज़ार करते हुए मैं रानी का लॅपटॉप देखने लगा.

लॅपटॉप मे एक ड्राइव का नाम " माइ लाइफ "था.

शायद इसमे रानी की लाइफ के बारे मे लिखा होगा.

ओपन करू या नही. ओपन किया तो रानी के बारे मे पता चल जाएगा. पर किसी की पर्सनल चीज़े देखना अच्छी बात नही है.

रानी तो मेरी गर्लफ्रेंड है, मैं देख सकता हू.पर ऐसे देखना ठीक नही होगा. मुझे पूरा यकीन है कि रानी एक दिन खुद मुझे इसमे क्या है वो बता देंगी.

लेकिन इसमे क्या लिखा होगा. क्या मेरे बारे मे लिखा होगा.

हो भी सकता ,या फिर उसकी पूरी लाइफ के बारे मे लिखा हो. उसके माता पिता के बारे मे हो ,या फिर आंटी की स्टोरी हो ,जिस मे प्रपोज़ करने की स्टोरी मुझे आंटी ने बताई है.

ओपन करू तो अभी पता चल जाएगा कि इसमे क्या है.

लेकिन ये करना ठीक नही होगा ,रानी को इसके बारे मे पूछता हूँ उसका रिक्षन पॉज़िटिव मिला तो पढ़ लूँगा वरना रानी के बताने तक इंतज़ार करूँगा.

मैं सोच रहा था कि गेट पे किसी ने नॉक किया.

 


507

मैं सोच रहा था कि गेट पे किस ने नॉक किया.

रुकसाना या रज़िया होगी. मैं ने लॅपटॉप बंद किया और गेट खोला.

मेरे सामने रुकसाना थी.

मैं ने रुकसाना को अंदर बुला लिया और गेट बंद कर दिया.

गेट बंद करते ही रुकसाना ने मुझे पीछे से पकड़ लिया.

अवी-लगता है बहुत आग लगी है

रुकसाना-तुम्हें क्या बताऊ, किस आग मे जल रही हू

अवी-आग पे पानी डाल दो

रुकसाना-पानी तो तुम्हारे पास है.

अवी-कितना पानी चाहिए

रुकसाना-2 बार पानी चाहिए.

अवी-ले पाओगी

रुकसाना-हाँ,

अवी-तो शुरू करते है

रुकसाना-मैं ने तो कर ली शुरुआत ,तुम शुरू हो जाओ

अवी-तो ये बात है.

मैं पलट गया.

रुकसाना ने मुझे छोड़ दिया और जल्दी से अपने कपड़े निकालने लगी.

अवी-आराम से करो

रुकसाना-और इंतज़ार नही होता. मैं तो कल ही आ जाती पर दर्द के वजह से नही आ पाई.

अवी-आज तुम्हारी चूत का भोसड़ा बनाना होगा.

रुकसाना-जो करना है करो, बस मेरी आग शांत कर दो

और रुकसाना नंगी हो गयी.

रुकसाना-तुम भी कपड़े निकालो


अवी-(इसके साथ जल्दी चुदाई कर लेता हूँ, जिस से ज़्यादा देर आराम कर पाउन्गा)

मैं ने भी अपने कपड़े निकाल दिए.

कपड़े निकालने के बाद रुकसाना ने मेरे लंड को हाथ मे पकड़ लिया.

रुकसाना- उस्दिन इतना बड़ा मेरी चूत मे कैसे गया था.

अवी-थोड़ी देर मे पता चल जाएगा.

और फिर मैं ने रुकसाना को दोनो हाथो से उठाया और बेड पे लेटा दिया.

रुकसाना तो रेडी है. रुकसाना को बेड पर लिटाने के बाद मैं उसके उपर आ गया.

उस्दिन रुकसाना के साथ किस और बूब्स चूसना ज़्यादा नही किया था.आज पहले इसके होंठो का रस पीता हू.

रुकसाना के उपर आकर होंठो पे किस केरने लगा,

किस करने के साथ दोनो बूब्स हाथो मे पकड़ के बहुत प्यार से मसल्ने लगा.

किस करते हुए बूब्स को दबाने मे मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर किस करने के बाद, मैं निपल को मुँह मे लेके चूस ने लगा.

रुकसाना मस्ती मे आहहे भरने लगी.

रुकसाना-बूब्स के पीछे लगने से अच्छा है कि चूत चूसो

रुकसाना को बस चूत मे लंड चाहिए, मुझे क्या है, मैं ने दोनो निपल को हाथो मे पकड़ कर मरोड़ दिया. और चूत की तरफ जाने लगा.

निपल को मरोड़ ते ही रुकसाना के मुँह से चीख निकल गयी.

रुकसाना- एक बार और करो ना

अवी-क्या?

रुकसाना-मेरे निपल को एक बार और मरोड़ दो.

मैं ने इसे मज़ा देने के लिए निपल थोड़े मरोड़े थे.

कोई बात नही, इस बार ऐसे मरोडता हू कि इसको नानी याद आ जाएगी.

मैं फिर से दोनो निपल को हाथो मे पकड़ कर सहलाने लगा और फिर दोनो निपल को मरोड़ दिया. पहली बार निपल को मरोड़ कर छोड़ दिया था पर इस बार मैं ने निपल को नही छोड़ा

पहले तो उसको मज़ा आया पर बाद मे उसको दर्द होने लगा.

रुकसाना-दर्द हो रहा है

अवी-दर्द तो अभी शुरू हुआ है.

रुकसाना-निपल को छोड़ दो

अवी-ये लो छोड़ दिया.

मैं ने निपल छोड़ दिए .निपल लाल हो गये थे. रुकसाना को दर्द हो रहा था.

मैं ने निपल को जीभ से चाट लिया. ऐसा करने से उसको मज़ा आया.मैं थोड़ी देर निपल को चाटता रहा.

फिर मैं रुकसाना के पैरो के बीच मे आ गया.

मैं ने दोनो पैरो को फैला दिया और अपना मुँह चूत के पास ले गया.

और चूत के होंठो को चूस ने लगा .रुकसाना शीष्कारिया लेने लगी.

थोड़ी देर मैं रुकसाना की चूत पर किस करता फिर जीभ से चूत पर लगा हुआ पानी पी ने लगा.

फिर जीभ को चूत मे डाल दी, और दाने को चूस ने लगा.

रुकसाना मज़े मे शीष्कारिया लेने लगी.

रुकसाना- तुम मेरी जाने लोगे

मैं लगातार रुकसाना की चूत चूसने लगा.

5 मिनिट तक चूत को मुँहमे ले के चूस ने से रुकसाना ने पानी छोड़ दिया.

रुकसाना ने मेरे सर को अपनी चूत पे दबा दिया और सारा पानी मेरे मुँह मे डाल दिया.

रुकसाना पानी छोड़ने के बाद हल्का मुँहसूस करने लगी.

मैं चूत का पानी पीने लगा. तब तक रुकसाना नॉर्मल हो गयी. और मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत से अलग कर के धक्का दे कर बेड पर गिरा दिया और खुद मेरे उपर आने लगी.

और रुकसाना ने मेरे लंड को मुँह मे ले लिया और प्यार से चूस ने लगी.

मेरे लंड पर अपनी जीभ हर तरफ फिराने लगी और आधा लंड मुँह मे ले लिया.

फिर आधे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी .लंड को चूसने के साथ मेरे आंडो को हाथो से सहलाने लगी.

रुकसाना का ऐसे करने से मुझे मज़ा आ रहा था.

रुकसाना तो लगातार मेरे लंड को चूसे जा रही थी.

इसको रोका नही तो ये मेरा पानी निकाल कर रहेंगी.

मैं रुकसाना के बालो को पकड़ कर खिचने लगा.तो रुकसाना ने मेरे आंडो को दबा दिया. मुझे रुकसाना के बाल छोड़ने पड़े.

अवी-रुकसाना रुक जाओ नही तो मैं चुदाई नही करूँगा.

रुकसाना ने जल्दी से लंड अपने मुँह से बाहर निकाला.

रुकसाना-क्या हुआ लंड भी चूसने नही दे रहे हो

अवी-तुम क्या लंड का पानी चूस कर निकाल ना चाहती हो या चूत मे लेना चाहती हो.

रुकसाना-समझ गयी. बस एक दो बार लंड को किस करने दो

फिर रुकसाना ने लंड पर किस किए और चूत मे लंड लेने को तय्यार हो गयी.

 


508

चूसना चाटना बहुत हो गया.

अब लंड चूत मे डालने का समय आ गया था.

रुकसाना बेड पर लेट गयी .और अपनी गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

ऊस्दिन की तरह रुकसाना मेरे लंड को चूत मे लेने को मर रही थी.

रुकसाना का यही जोश मुझे उसकी चूत का भोसड़ा बनाने के लिए काफ़ी था.

रुकसाना जैसी और 1 2 लड़किया मिल गयी मैं घर बैठ चूत का मज़ा ले पाउन्गा.

मैं ने उस्दिन रुकसाना को ज़्यादा देर तक इंतज़ार करवाया था .आज उसको इंतज़ार करवाना ठीक नही होगा.

मैं रुकसाना के उपर आ गया.और लंड पर थूक लगा कर लंड को रुकसाना की चूत पर रख दिया.

कितने झटके मारू, 1 झटके मे डालु ,या 2 झटके मे, या फिर धीरे धीरे.

चलो रुकसाना से पूछ लेता हू .

अवी-तुम्हें बूब्स कितने है

रुकसाना -2

अवी-ये लो,

और मैं ने एक जोरदार झटका मारा और आधा लंड रुकसाना की चूत मे समा गया.

रुकसाना को लगा कि मैं लंड डाल ने से पहले उसको बता दूँगा. उसका पूरा ध्यान मेरे सवाल पर था .और इसकी का फ़ायदा लेते हुए मैं ने लंड पेल दिया.

ऐसे अचानक हमले के लिए रुकसाना कैसे तय्यार होती.

और मेरे झटके से रुकसाना की चीख निकल गयी. और एक जोरदार झटका मार कर पूरा लंड रुकसाना की चूत मे डाल दिया.

रुकसाना की इस बार जोरदार चीख निकली.

रुकसाना बॅक टू बॅक धक्को के लिए वो भी मेरे लंड के .उसे उस दिन वाला दर्द फील हो रहा था.

दूसरी चुदाई 2 झटकों मे लंड अंदर,रुकसाना की आवाज़ उसके हलक मे दब गयी.

पर रुकसाना की आँखे बड़ी हो गयी.रुकसाना ने मेरी पीठ को पकड़ कर लंड को चूत मे वैसे रखने दिया.

रुकसाना की आँखे से पानी निकलने लगा. जिस से उसने मुझे रुकने को कहा.

रुकसाना- थोड़ी देर ऐसे रहो, बहुत दर्द हो रहा है

मैं ने लंड को चूत मे वैसे ही रहने दिया और बूब्स को मसल ने लगा,

उसके बूब्स को मसल कर उसे मज़ा देने लगा.

रुकसाना के अंदर जो चुदाई का जोश था वो उसका दर्द कम करने के लिए काफ़ी था.

कुछ मिनट के बाद रुकसाना का दर्द कम हुआ.रुकसाना को मेरे लंड का मज़ा चाहिए था जिस के लिए उसने अपने दर्द को साइड मे रखा.

रुकसाना- अब हो जाओ शुरू, जी भर के मेरी चुदाई करो,

रुकसाना का सिग्नल मिलते ही मैं ने अपना लंड आधे से ज़्यादा अंदर बाहर करके चुदाई करने लगा,

रुकसाना थी जबरदस्त लड़की, चुदाई मे अव्वल, बातें करने मे अव्वल,

उसे आराम से ,धीरे से धक्के मार कर कुछ नही होगा.

मैं ने शुरू से धक्को की स्पीड ज़्यादा रखी ताकि रुकसाना की गरमी कम हो जाए.

रुकसाना मेरे धक्को का जवाब शीष्कारी लेते हुए दे रही थी.

इस सवाल जवाब मे हम दोनो को मज़ा आ रहा था.

5 मिनिट की ऐसी चुदाई मे रुकसाना ने पानी छोड़ दिया. उसकी गरम चूत से मेरे लंड ने पानी निकाल दिया.

रुकसाना ने मुझे टाइट पकड़ के झड ने लगी.

रुकसाना के झड़ने के बाद मैं ने धीरे धीरे चुदाई करनी चालू रखी,ताकि वो फिर जोश मे आकर मेरा साथ दे

रुकसाना की गरमी निकाल ने के लिए कुछ नया ट्राइ करना होगा.

पिछली चुदाई इसी पोज़िशन मे की थी जिस से अब रुकसाना की पोज़िशन चेंज करके उसको मज़ा देना था.

मैं ने लंड पूरा बाहर निकाल लिया और रुकसाना को घोड़ी बना दिया.

रुकसाना के घोड़ी बन ने से उसकी गंद और चूत मेरे सामने आ गयी.

ऐसी चूत मे लंड जल्दी डालने मे भलाई होती है. मैं लंड को पीछे से चूत मे डाल कर चुदाई करने लगा

घोड़ी बनाकर चुदाई करने मे मज़ा आ रहा था.

मैं रुकसाना की चूत मे लंबे लंबे धक्के मारने लगा

रुकसाना शीष्कारिया लेने लगी. आआहह गयी फाडो मेरी फाडो मेरी चूत को ,पूरा लंड अंदर डाल दो,

रुकसाना की चूत की गरमी से मुझे पसीना आने लगा

लगभग10 मिनिट की जोरदार चुदाई मे मैं थक चुका था.

उधर रुकसाना शीष्कारिया ले रही थी

और ये मैं गया. रुकसाना की चूत को अपने वीर्य से भरने लगा.

मेरे झड़ने के साथ उसने भी अपना पानी निकाल लिया. उसका पूरा बदन की अकड़न ख़तम हो गयी.

हम दोनो अपना अपना पानी निकालने के बाद ठंडे पड़ गये.

वीर्य निकलने के बाद मेरा लंड नरम होने लगा,

मैं ने उठ कर लंड को चूत से बाहर निकाला,

थोड़ी देर मे नॉर्मल होने के बाद हम दोनो बाथरूम चले गये.

फ्रेश हो जाने के बाद हम वापस बेडरूम मे आ गये.

अवी-रुकसाना

रुकसाना- हाँ

अवी-मैं थक गया हू

रुकसाना-क्या?

अवी-मैं दुबारा चुदाई नही कर सकता.

रुकसाना-पर मुझे तो करनी है

अवी-तुम्हें मेरे साथ जो करना है करो, पर मैं सोने वाला हू.

रुकसाना-तुम सो जाओ, मैं दुबारा चुदाई करके सो जाउन्गी

अवी-किस के साथ करोगी

रुकसाना-तुम्हारे साथ, तुम सो जाओ, मैं खुद दुबारा चुदाई कर लूँगी.

अवी-(चुदाई किए बिना रुकसाना नही मानेंगी.और जब ये चुदाई करेंगी तो मुझे नींद कैसे आएँगी.) जल्दी ख़तम करना

रुकसाना-जल्दी हो जाएगा.

अवी-इतने कम समय मे हो जाएगा.

रुकसाना-मैं कर लूँगी तुम सो जाओ

अवी-मैं बस लेटता.तुम्हें जो करना है करो

और मैं बेड पर लेट गया. रुकसाना फिर से बाथरूम मे चली गयी.

 
509

रुकसाना ने बाथरूम मे जाकर अपने कपड़े पहन लिए.

ये करना क्या चाहती है. इसने कपड़े पहन लिए, मतलब मेरे सोने के बाद मुझे परेशान करती रहेंगी.

एक बार फिर इसकी चुदाई कर लेता हू, आख़िरी बार इसकी चूत मारता हू.

रुकसाना फिर से बाथरूम मे जाने लगी तो मैं ने रुकसाना का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया

और रुकसाना को अपने सीने से लगा लिया .

अवी-दुबारा चुदाई कर रहा हूँ ,इसके बाद चुप चाप सो जाना

रुकसाना-जल्दी करो, पर इस बार अच्छे से करना

और मैं रुकसाना को किस करने लगा .रुकसाना सेक्स की प्यासी थी.

मेरे किस करते ही वो भी मुझे रेस्पॉन्स देने लगी .

हम दोनो कस के एक दूसरे को किस करने लगे और अपनी जीभ को एक दूसरे के मूह मे डालने लगे

रुकसाना को किस करने से मूज़े चुदाई करने का मूड हो गया.

करीब 5 मिनिट तक हम दोनो ने किस की फिर मैं ने रुकसाना की गर्दन पर किस करने लगा

रुकसाना को कंट्रोल नही हो रहा था. रुकसाना ज़ोर ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी

मैने एक हाथ रुकसाना के राइट बूब्स पर रखा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और दूसरा हाथ रुकसाना की गंद पर ले गया और गंद को सहलाने लगा.

पहली चुदाई नॉर्मल की थी. पर इस चुदाई मे कोई कसर नही छोड़ रहा था.

इस के बाद रुकसाना के साथ बस एक और बार मिलना है और उस वक्त मैं रुकसाना की गंद मारने वाला हूँ. इसी लिए रुकसाना की आज अच्छे से चुदाई करने लगा.

मेरा मूड नही था फिर भी मैं पूरी एनर्जी लगा कर रुकसामा की जोरदार चुदाई करने के मूड मे था.

गंद पर हाथ लगते ही रुकसाना तो पागल ही हो गयी और चिल्लाने लगी

आआअहह हमम्म्मम ऊऊहह क्या मार ही डालोगे क्य्ाआअ

गंद पर हाथ लगाने से ये हाल है तो गंद मारने पे उसका क्या होगा, उसको जो होना है वो होगा पर मुझे पूरा मज़ा आएँगा.

रुकसाना ने फिर से कपड़े पहने थे, चुदाई मे कपड़े निकालने मे मज़ा आता है.

मैं ने रुकसाना की कमीज़ थोड़ी कंधों से नीचे कर ली.

मैं रुकसाना के कंधे पर किस करने लगा मैं ने उसके बूब्स दबाने चालू रखे .वो मेरे बाल नोच रही थी और अपनी बदन पर दबा रही थी

रुकसाना मछली की तरह तड़प रही थी .मैं रुकसाना को आज बहोत तड़पाना चाहता था ताकि जब मैं रुकसाना की गंद मारने की बात करूँगा तो वो मेरा पूरा साथ दे

फिर मैं ने रुकसाना को बेड पर लिटाया और रुकसाना की कमीज़ निकाल दी.

रुकसाने के दो बड़े बड़े सफेद बूब्स मेरे सामने थे.

मैं ने पहली चुदाई मे ध्यान नही दिया. रुकसाना ने एक ब्लॅक कलर की बहोत ही सेक्सी नेट वाली ब्रा पहन रखी थी

मैं तो देखते ही पागल हो गया .अगर पहली चुदाई मे देख लेता तो दूसरी चुदाई करने की ज़रूरत नही होती.

पर मैं रुकसाना को तड़पाना चाहता था तो मैं ने रुकसाना के बूब्स ब्रा के उपर से ही चूसना सुरू किया और एक उंगली को रुकसाना की नाभि मे डाल दिया

रुकसाना आआवऊउककच करके उछल पड़ी बोली क्या मारने का इरादा है क्या, पहली चुदाई इतने अच्छे से करते तो , और मत तड़पाओ ,तुम्हे गंद मारनी है ना, जब मारनी है मार लेना.

बिना पूछे रुकसाना की गंद मिल गयी. आज जी भर चूत मारता हू. और नेक्स्ट टाइम गंद मारूँगा.

अब मैं ने रुकसाना की ब्रा के हुक खोल दी और रुकसाने के सफेद बूब्स और पिंक निपल मैं ने तुरंत मूह मे लिया और चूसने लगा

और लेफ्ट बूब्स के निपल को उंगली से दबाने लगा वो आआओऊउककच आआअहह ऊओखह उूउउम्म्म्मम की आवाज़ निकालने लगी और अपना हाथ मेरे बालो मे घुमाने लगी

मैं थोड़ी देर तक रुकसाने के बूब्स चूस्ता रहा

करीब 20 मिनिट तक चूस ने के बाद मैं नीचे आया और अपनी जीभ को रुकसाना की नाभि मे घुसा दी

फिर से सुरुआत से सुरू करने मे मज़ा आ रहा था.

नाभि मे जीभ घुमाने लगा तो रुकसाना अपना सर ही पटाकने लगी.

रुकसाना- क्या कर रहे हो मुझे बर्दस्त नही हो रहा . जल्दी कुछ करो मेरी चूत मे आग लगी हुई है .

फिर मैं चूत की तरफ जाने लगा. मैं ने रुकसाना की चूत को कपड़ो के उपर से चाटना सुरू कर दिया .

थोड़ी देर बाद मैं ने रुकसाना की सलवार का नाडा खिच कर पूरी सलवार उतार दी.

रुकसाना मेरे सामने ब्लॅक पैंटी मे थी .

मैं ने पहले रुकसाना की जांघों को चूसना सुरू किया.

फिर मैं रुकसाना की चूत पर टूट पड़ा और प्यार से चूत को दबाने लगा

चूत को मसल्ने से रुकसाना चिल्लाने लगी. आआआहह आआओउुऊउक्ककचह माअरर्र्ररर. डाल्ल्लूवघ्गगीईए कयययययाआआअ

फिर मैं ने रुकसाना की पैंटी उतार दी

और बिना वक्त बर्बाद किए मैं ने रुकसाना की चूत को चूसना चालू किया

पहले रुकसाना ने खुद अपने कपड़े निकाले थे जिस मे मुझे ज़्यादा मज़ा नही आया था.

पर अब रुकसाना को नंगी करके चुदाई करने से मुझे चुदाई मे इंटेरेस्ट आने लगा.

रुकसाना अपना सिर पटाकने लगी, इधर उधर मारने लगी और शीष्कारिया लेने लगी.

आआमम्म्मम ऊऊहह आआआहह आाआऊीीईईईईईईईईईई माआआआ ये क्या कर दिया तूने अंदर आग लग गयी है

मैं ने रुकसाना की चूत मे अपनी जीभ घुसा दी और एक उंगली भी डाल दी

वो आओउऊउककच करके चिल्लाई बोली थोड़ा धीरे करो पर मैं कहाँ मानने वाला था .

रुकसाना वर्जिन तो नही थी,उस्दिन ही सील थोड़ी, बस 2 बार चुदाई हुई है.

जिस की वजह से रुकसाना की चूत बहोत टाइट थी मैं 10 मिनिट तक चूत चूस्ता रहा

जिस मे रुकसाना ने एक बार पानी छोड़ा था.

अब मैं ने रुकसाना को अपना लंड चूसने के लिए कहा . रुकसाना ने बिना वक्त गवाए लंड चूसने लगी

मैं तो जैसे सातवे आसमान पर था वो बहोत अच्छा चूस्ति थी. वो मेरा लंड चूस्ति रही फिर मैं ने रुकसाना को बेड पर लिटाया.

अब मैं ने अपना लंड रुकसाना की चूत के पास रखा और चूत पर रगड़ने लगा .

फिर मैं ने धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया. रुकसाना बहोत तेज चिल्लाई आआईइ माआ मररर गाइिईई निकालो बाहर इसको

वो ऐसे चिल्ला रही थी कि जैसे वो पहली बार चुद रही हो.

फिर मैं ने एक और ज़ोर दार झटका मारा और पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया

वो जैसे ही चिल्लाती मैं ने रुकसाने को किस करना सुरू कर दिया .

वो मेरा जोश बढ़ाने के लिए ऐसा चीख रही थी.

अभी थोड़ी देर पहले रुकसना की चुदाई की ऐसे मे उसे दर्द कैसे होगा.

रुकसाना का आइडिया मुझे पसंद आया जिस से मैं उसको चुदाई का मज़ा देने लगा.

और उसके होंटो को लॉक कर दिया और लगातार धक्के मारता रहा

वो कुछ देर मे शांत हो गयी और अपनी गंद उठाने लगी तो मैं समझ गया कि अब रुकसाना को भी मज़ा आ रहा है

फिर मैं फुल रफ़्तार मे रुकसाना को चोदने लगा

रुकसाना फिर से झड गयी.

मैं 25 मिनिट तक रुकसाना को अलग अलग पोज़िशन मे चोदता रहा

मैं धक्के मारता रहा 10 12 लंबे लंबे धक्के मारने के बाद मैं भी झड़ने वाला था

मैं ने फिर 3 4 धक्के मारे और रुकसाना की चूत मे ही झड गया

रुकसाना भी मेरे साथ झड गयी.

रुकसाना की चूत मेरे वीर्य से भर चुकी थी और हम दोनो का पानी एक साथ चूत से बाहर आ रहा था

रुकसाना बहोत खुश थी

इस लंबी चुदाई के बाद हम दोनो नॉर्मल होते हुए सो गये. मैं रुकसाना के उपर ही सो गया.

 
510

4थ डे

सुबह 5.00 बजे मेरी नींद खुल गई.

रात मे मैं रुकसाना के उपर सो गया था पर अब रुकसाना मेरे उपर थी.

मैं उठ कर बाथरूम मे जाकर फ्रेश हो गया.

मैं बाथरूम से बाहर आया था कि किसी ने गेट पर नॉक किया.

इतनी सुबह कॉन आ गया. मैं ने रुकसाना के उपर चद्दर डाल दी और गेट खोल दिया.

मेरे सामने रज़िया थी.

अवी-तुम इतनी सुबह यहाँ कैसे

रज़िया-अंदर तो आने दो

मैं रज़िया को लेकर अंदर आ गया. रज़िया ने रुकसाना के उपर की चद्दर हटा दी.

रज़िया-ये अभी तक सो रही है

अवी-हाँ कल कुछ ज़्यादा ही हो गया

रज़िया-और अब तुम्हें जाना है

अवी-हाँ

रज़िया-मैं इसी लिए आई थी कि तुम्हें मंदिर जाना होगा और रुकसाना सोती रहेंगी. तुम्हें मंदिर मे जाने मे परेशानी ना हो इस लिए आ गई

अवी-सुक्रिया.और मैं ने रज़िया को किस किया.

रज़िया-तुम जाओ मैं उस दिन की तरह चाबी खिड़की मे रख दूँगी.

अवी-ठीक है.रुकसाना को संभाल लेना.

और मैं पुराने कपड़े लेकर घर चला गया.

मैं ने घर जाकर दोती पहन ली. और अपनी फॅमिली के साथ मंदिर चला गया.

मंदिर मे मैं ने और रणजीतसिंघ ने पूजा की.

पूजा हो जाने के बाद रणजीतसिंघ अपनी फॅमिली के साथ हवेली और मैं अपने घर चला गया.

घर आकर नाश्ता करने के बाद कपड़े बदल कर पंडिताइन के पास चला गया.

जैसा पंडिताइन ने कहा था मैं कॉंडम लेकर पीछे के गेट के पास आ गया.

और पंडिताइन को आवाज़े दी.

पंडिताइन ने जल्दी से गेट खोल कर मुझे अंदर ले लिया.और गेट बंद किया.

पंडिताइन-तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए दूध लेकर आती हू

अवी-दूध नही टी लेकर आना

पंडिताइन-तुम जिस लिए यहाँ आए हो उसके लिए दूध की ज़रूरत है.

अवी-ठीक है,पर ज़्यादा मत लाना

पंडिताइन-कितना चाहिए ये मुझे पता है .तुम मुझे अपना काम करने दो

और पंडिताइन दूध लेकर आ गई.

पंडिताइन-पी लो

मैं ने दूध पी लिया.

पंडिताइन-शुरू करने से पहले तुमसे कुछ पूछना है

अवी-हाँ पूछिए

पंडिताइन-तुम ने चुदाई कभी नही की

अवी-नही की

पंडिताइन-और अपना लंड हिला कर पानी निकाला है

अवी-हाँ, एक दो बार निकाला है.

पंडिताइन-तुम मज़ा आया था

अवी-हाँ ,बहुत मज़ा आया था.

पंडिताइन-मैं तुम्हें 5 दिन मे सब सिखा दूँगी.

अवी-सिर्फ़ 5 दिन मे

पंडिताइन-हाँ, पहले दिन दूध के बारे मे बताउन्गी. फिर तुम्हारे लंड के बारे मे, फिर चूत के बारे मे, फिर 2 दिन चुदाई के बारे मे सिखा दूँगी.

अवी-उसके बाद

पंडिताइन-उसके बाद तुम अपने लिए चुदाई करने के लिए कोई लड़की ढूँढ लेना

अवी-(5 दिन ,ये तो धीरे धीरे मारने वाली है. चलो देखते है क्या सिखाती है.) मैं देख लूँगा.

पंडिताइन-चलो शुरू करते है.

पंडिताइन-मैं जैसा करूँगी वैसा तुम करते जाओ, मैं जो करूँगी उसमे मेरा साथ देते जाओ

अवी-मैं ने हाँ मे गर्दन घुमा दी

फिर पंडिताइन मेरे पास आकर बैठ गई.

पंडिताइन-पहले किस करने से शुरू करते है.

अवी-किस

पंडिताइन-और बस किस करना ,उसके सिवाय कुछ नही ,

अवी-समझ गया.

पंडिताइन-पहले मैं किस करती हू फिर तुम मेरा साथ देना

पंडिताइन अपने होंठो को मेरे होंठो के पास लेकर आ गई. और हल्के से अपने होंठ मेरे होंठो को टच किए, और अलग हो गई.

पंडिताइन-अब तुम करो

जैसा पंडिताइन ने किया था मैं ने भी वैसे ही किया.

हल्के से अपने होंठ पंडिताइन के होंठो को टच किए. पर मैं अलग नही हुआ.

और वैसे ही होंठो से होंठो मिलाकर रखे.और धीरे धीरे चूसने लगा.

आहिस्ता से पंडिताइन के उपर वाले होंठो को अपने होंठो के बीच लेकर किस करने लगा.

पंडिताइन कुछ नही कर रही थी. वो बस मैं जैसा कर रहा हू वैसा करने दे रही थी.

मेरे होंठो के बीच पंडिताइन का उपर वाला होंठ था तो मेरा नीचे वाला होंठ पंडिताइन के होंठो के बीच था.

मैं इडार पंडिताइन का उपर वाला होंठ चूस रहा था तो उधर पंडिताइन मेरा नीचे वाला होंठ चूस रही थी.

पंडिताइन के होंठो मे जादू था. पंडिताइन के होंठो को चूसने मे मज़ा आ रहा था.

फिर पंडिताइन ने मेरे उपर वाले होंठ को चूसना शुरू किया और मैं ने पंडिताइन के नीचे वाले होंठ का रस पीना शुरू किया.

हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे के होंठो को चूस कर रस पी रहे थे.

फिर पंडिताइन ने मुझे अलग किया

पंडिताइन-ऐसे किस करना कहाँ से सीखा

अवी-(फँस गया ) वो वो हां टीवी मे देखा था. एक मूवी मे ऐसे ही किस करते हुए देखा था.

पंडिताइन-(ये खुद को समझदार और दूसरो को पागल समझ रहा है.या फिर इसकी बात सही भी हो सकती है) और क्या देखा था मूवी मे

अवी-किस करते हुए एक दूसरे के मुँह मे जीभ डाल कर किस करते हुए देखा था.

पंडिताइन-करके दिखाओ

पंडिताइन के कहते ही मैं ने फिर से किस करना शुरू किया.

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं ने अपनी जीभ पंडिताइन के मुँह मे डाल कर पंडिताइन की जीभ के साथ खेलने लगा.

पंडिताइन के मुँह मे जीभ डालते ही पंडिताइन ने अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी जिस से मुझे अपनी जीभ पीछे करनी पड़ी.

फिर मैं पंडिताइन की जीभ को चूसने लगा. पंडिताइन कुछ नही कर रही थी.

थोड़ी देर पंडिताइन ने मुझे अपनी जीभ के साथ खेलने दिया .और फिर मुझ से अलग हो गई.

पंडिताइन-(ये जिस तरह किस कर रहा है उस से लग रहा है कि ये पहले भी कर चुका है. अगर ये मुझे धोखा दे रहा होगा तो मैं इसको चुदाई करने नही दूँगी. पर आज कल तो कोई भी किस कर लेता है. मुझे कल इसका पता लगाना होगा. आज टाइम भी बहुत हो गया है. जो पता लगाना है कल लगा लूँगी) तुम तो जल्दी सीख गये.

अवी-सिखाने वाला इतना अच्छा हो तो सीखने वाला जल्दी सीख जाता है.

पंडिताइन-आज के लिए इतना काफ़ी है, बाकी कल देखते है.

अवी-ठीक है, मैं कल जल्दी आउन्गा जिस से हमे ज़्यादा समय मिलेगा.

पंडिताइन-हाँ ये ठीक रहेगा.

फिर मैं पंडिताइन से किस करने के बारे मे सीख कर मंदिर चला गया.

 
511

पंडिताइन को किस करने के बाद मैं मंदिर मे चला गया.

मंदिर मे मुझे प्रिन्सिपल सर मिल गये.

प्रिन्सिपल सर अपने बेटे और बहू किरण के साथ आए थे.

अवी-सर आप आइए ना

प्रिन्सिपल-मैं तुम ही को ढूँढ रहा था.

अवी-मुझे

प्रिन्सिपल- हमे मंदिर मे दर्शन करना है और यहाँ पर तो लंबी लाइन लगी है.और किरण बेटी को इस हालत मे लाइन मे लगना ठीक नही होगा. तो मैं ने सोचा कि

अवी-सर आपने सही सोचा जो मेरे पास आ गये.वैसे आप पहली बार मंदिर आए है.

प्रिन्सिपल-हां, वो हम बहू को मायके लेकर गये थे. मैं दादा बन ने वाला हूँ ना

अवी-ये तो बहुत अच्छी न्यूज़ सुनाई है.पार्टी चाहिए

प्रिन्सिपल-पार्टी,तुम तो गायब हो गये थे फिर पार्टी कहाँ से देता. अब तो बहू को 4 था महीना चालू है

अवी-फिर कभी देना. चलिए आपको मंदिर मे ले जाता हू

प्रिन्सिपल-अब ये कहाँ चला गया.

किरण-पिताजी वो अभी तो यही थे. पता नही कहाँ चले गये

प्रिन्सिपल-मैं देखता हूँ, तुम अवी के साथ जाकर पूजा कर लो

किरण-जी पिताजी

प्रिन्सिपल सर अपने बेटे को ढूँढने लगे. मैं किरण को अपने साथ मंदिर मे ले गया.

अवी-तो तुम माँ बन ने वाली हो

किरण-हां

अवी-मुझे बताया नही

किरण-तुम ने घर आना बंद कर दिया है फिर कैसे बताती

अवी-अब तो पता चल गया है.तुम माँ बन ने वाली हो और तुम्हारा 4 महीना चालू है, मुझे तो तुम्हारे माँ बन ने की न्यूज़ सुनकर लगा कि कही इस बच्चे का बाप मैं तो नही.

किरण-तुम ही हो, मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बन ने वाली हू

अवी-मेरे, ये कैसे हो सकता है. जहाँ तक मुझे पता है, हम ने 5 महीने पहले चुदाई की थी और तुम्हें तो 4 महीने हुए है

किरण-पहले ये बताओ तुम खुश नही हुए ये सुनकर कि मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनी हू

अवी-मैं तो खुश हू. मैं बाप जो बनूंगा पर ये कैसे हुआ.

किरण-मुझे 5 वाँ महीना चालू है, मैं ने पिताजी को झूठ कहा कि मुझे 4 महीने हुए है. मैं ने रिपोर्ट पर डेट चेंज कर दी थी.

अवी-पर डेलिवरी के वक्त तो पता चल जाएगा.

किरण-कितनो को 8 महीने मे बच्चा होता है ,मुझे भी हुआ है बता दूँगी. और डेलिवरी तो मेरे गाओं मे होंगी. वहाँ पर मैं सब देख लूँगी.

अवी-तुम खूबसूरत होने के साथ साथ स्मार्ट भी हो

किरण-वो सब जाने दो, और ये बताओ तुम मुझ से मिलने क्यू नही आ रहे

अवी-वो मैं कॉलेज की वजह से, अब तो मैं अपने बच्चे का चेहरा देखने आउन्गा.

किरण-आओगे तो सही.

अवी-चलो जल्दी पूजा करते है फिर तुम्हारा मुँह मीठा भी कराना है

फिर मैं ने किरण की मदद की ,मंदिर मे पूजा करने के लिए.

किरण ने पूजा कर ली. अपने लिए और अपने बच्चे के लिए.

किरण-पूजा तो हो गई.

अवी-ये सर कहाँ रह गये.

किरण-उनको जाने दो, तुम मुँह मीठा करने की बात कर रहे थे.

अवी-हन, पर यहाँ जगह नही है. रूको ...हां...टेंट मे चलते है.

किरण-किसी ने देख लिया तो

अवी-बस मुँह मीठा करेंगे.

किरण-ठीक है

फिर मैं किरण को टेंट वाले स्टोर रूम ले गया. जो अंदर बना हुआ था. मेरे पास और रणजीतसिंघ को एक चाबी दी थी.वहाँ कुछ समान रखा हुआ था.

किरण-कहाँ है मीठा

अवी-(मीठा नही तुम्हें लोल्लपोप देता हू)अपनी आँखे बंद करो

किरण ने अपनी आँखे बंद की

मैं ने अपना लंड जीन्स से बाहर निकाल कर किरण के हाथ मे दिया.

किरण ने अपनी आँखे खोल दी.

अपने हाथ मे लंड देख कर मेरी तरफ देखा. और नीचे बैठ गई.

अवी-मुँह मीठा करो

किरण-इसमे तो टाइम लगेगा. पिताजी और मेरे पति को क्या कहेंगे

अवी-वो मैं देख लूँगा.तुम्हारा मुँह मीठा करना ज़रूरी है. इतनी अच्छी खुश खबरी जो सुनाई है.

किरण अपने बच्चे के बाप का लंड को देख कर खुश हो गई.

खुश होती भी क्यू ना उसको इस ने तो माँ बनाया है.

किरण के साथ सेक्स करते हुए मैं ने इस बात पे ध्यान नही दिया. मुझे लगा कि किरण समझदार है वो सेक्स करने के बाद प्रेग्नेन्सी की गोली खा लेंगी. लेकिन किरण ने तो आज मुझे झटका दिया.

छोटी चाची ने मुझे कहा था कि इस बात का पूरा ध्यान रखना कि कोई प्रेग्नेंट ना हो जाए. इस लिए छोटी चाची मुझे प्रेग्नेन्सी की गोली लाकर देती है.ताकि मैं चुदाई के बाद खिला दूं.

जब ये बात छोटी चाची को पता चलेंगी तो मुझ पे गुस्सा करेंगी.

मुझे किरण के साथ चुदाई करते हुए ये सोचना चाहिए था कि उसका पति उस से दूर रहता है ऐसे मे वो अपनी प्यास और अपना अकेलापन दूर करने के लिए माँ बन गई.

छोटी चाची को ये बात बताना ठीक नही होगा.

वैसे किरण स्मार्ट है वो ये बात किसी को पता लगने नही देंगी.

मैं किरण और हमारे बच्चे के बारे मे सोच रहा था कि किरण ने लंड चूसना शुरू किया.

किरण ने लंड को एक बार मे पूरा मुँह मे ले लिया. लंड किरण के गले तक चला गया. किरण ने जल्दी से लंड बाहर निकाला.

और खांसने लगी.

अवी-आराम से

किरण-5 महीने के बाद मिला है, कंट्रोल नही कर पाई.

अवी-प्यार से करो. जल्द बाज़ी मे मज़ा नही आएगा.

किरण ने फिर से लंड को मुँह मे ले लिया .और लंड को प्यार से चूसने लगी.

अवी-किरण प्यार से पर ज़ोर से चूसो(पंडिताइन को किस करने से जो लंड खड़ा हुआ था वो किरण को देखते ही अपना पानी निकाल के तैयार हो गया था.)

किरण पहले तो आराम से लंड चूस रही थी.

पर मेरे लंड की दीवानगी उसे पागल बना रही थी.

किरण मेरे साथ की हुई चुदाई को याद करते हुए लंड को चूसने लगी.

किरण हमारे प्यार वाले पलों को याद करके अपने बच्चे के बाप का लंड चूस कर माँ बनाने के लिए थॅंक्स बोल रही थी.

फिर किरण मस्ती मे आकर ज़ोर ज़ोर से लंड चूस रही थी.किरण तो किरण थी, लंड चूस कर ही मेरा पानी निकाल देती पर मैं ने किरण को रोक दिया.

अवी-किरण दीवार को पकड़ कर झुक जाओ,और अपनी सारी और पेटिकोट उपर कर लो

किरण-मैं चूस कर पानी निकाल देती हू, चुदाई करेंगे तो गड़बड़ हो जाएगी.

अवी-(किरण की बात भी सही थी.) झुको तो सही.

किरण मेरे कहने के मुताबिक दीवार को पकड़ कर झुक गई.

मैं ने किरण की सारी और पेटिकोट उपर किया और पैंटी नीचे की.

किरण की सेक्सी गंद और प्यारी चूत को देखने लगा.

किरण की चूत पर किस किया और लंड डालने का सोच रखा था कि किरण की हालत देखते हुए मैं ने सिर्फ़ चूत पे किस किया.

अवी-किरण लो चूस कर प्यार करो. पर जल्दी करना

किरण-बस 5 मिनिट मे

और किरण फिर से लंड चूसने लगी.

किरनी इस बार मेरा वीर्य निकालने के लिए लंड चूसने लगी.

किरण का जवाब नही, 5 मिनिट मे मेरा पानी निकाल दिया.

किरण ने सारा वीर्य पी लिया.और अपना मुँह मीठा कर लिया और अपने आप को ठीक किया.

किरण-तुम्हारे साथ प्यार करने से अच्छा लगता है

अवी-मुझे भी,

फिर मैं ने किरण को किस किया

किरण-चले,बहुत टाइम हो गया

अवी-हाँ, चलो, और अगर सिर कुछ पूछे तो इतना कहना कि पंडित जी के घर गई थी.

किरण-पंडित जी के घर

अवी-पूछा तो बोल देना और शरमा कर कहना

किरण-ठीक है

फिर मैं किरण को लेकर प्रिन्सिपल सर जहाँ मिले थे वही आकर सर का इंतज़ार करने लगे.

10 मिनिट बाद प्रिन्सिपल सर आ गये.

प्रिन्सिपल-कहाँ गये थे

अवी-पूजा करने

प्रिन्सिपल-हम भी तो आए थे पर तुम मंदिर मे नही दिखे

अवी-मेरी वजह से पूजा जल्दी हो गई. और फिर

मैं ने सर के कान मे कहा

अवी-भाभी को बाथरूम जाना था तो मैं ने पंडिताइन को बोल कर उनके घर भेजा था. इस लिए देर हो गई.

प्रिन्सिपल-ऐसे दिनो मे... सुक्रिया

अवी-आप मेरे सर है,सुक्रिया बोल कर आप मुझे शर्मिंदा कर रहे है.बस खुशख़बरी लेकर मीठा खिला देना

प्रिन्सिपल-पहला मीठा तुम्हें ही दूँगा. अच्छा अब हम चलते है.

प्रिन्सिपल सर अपने बेटे और बहू किरण के साथ वापस गाओं चले गये.और शाम को किरण को अपने मायके भेजने वाले है.

मैं फिर से बाप बन ने वाला हू.

किरण ने कभी पता ही नही चलने दिया कि वो मुझसे बच्चा चाहती है.

कुछ भी हो फिर से बाप बन रहा हूँ.

चाची को बताउन्गा तो वो गुस्सा हो जाएँगी.उनको अभी बताना ठीक नही होगा.

अब ध्यान रकना होगा कौन चुदाई के बाद गोली खाती है या नही. वरना मैं बाप बनता जाउन्गा.

कुछ भी हो, मैं फिर से बाप बन ने वाला हू.

चलो अब प्रिन्सिपल के घर जाने का रीज़न तो मिलेगा.

प्रिन्सिपल से फिर से दोस्ती करनी होगी. और किरण और अपने बच्चे को प्यार करना होगा.

 
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