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मैं मेले मे जाकर अपनी बाइक ले ली.
घर जाउ या मंदिर जाउ, कपड़े चेंज करने है, एक काम करता हू बाइक से मंदिर की तरफ चक्कर मार कर घर चला जाता हू.
मैं धोती पहन कर बाइक लेकर मंदिर की तरफ चला गया.
मंदिर मे सब कुछ ठीक चल रहा था. पंडितजी लोगो को दर्शन करवा रहे थे. दर्शन करने के बाद लोगो को परसाद दिया जा रहा था.
पोलीस हर तरफ नज़र रखे हुए थी.
मैं अपनी बाइक घर की तरफ ले जा रहा था कि मैं ने देखा पंडिताइन मंदिर के पीछे जा रही थी.
पंडितजी का घर मंदिर के पीछे था. मंदिर के पीछे से जंगल शुरू होता है. पंडितजी वही रहते थे
पंडिताइन अपने घर जा रही है.पंडितजी लोगो को दर्शन करवा रहे है.
पंडिताइन को रणजीतसिंघ के साथ चुदाई करते हुए देखा था.
ठकुराइन ने मुझे गुलाम बनाने के लिए पंडिताइन का नाम लिया था.
पंडिताइन ने ठकुराइन को बताया था जिस की वजह से ठकुराइन के साथ इतना कुछ हो गया.
पंडिताइन की खबर लेनी पड़ेगी.
पर मेरे पास कॉंडम, अरे हाँ मैं ने कुछ कॉंडम बाइक मे रखे है.
मैं ने बाइक वही पास मे रख दी और कॉंडम लेकर मंदिर के पीछे जाने लगा.
मंदिर के पीछे इस समय ज़्यादा लोग नही थे. जो थे वो अपने काम मे बिज़ी थे
पंडिताइन का घर मंदिर से 40 50 कदमो की दूरी पर था.
मैं पंडिताइन के घर के पीछे चला गया. मैं नही चाहता था कि कोई मुझे पंडितजी घर जाते हुए देखे
मैं ने पीछे का गेट खटखटाया
थोड़ी देर बाद पंडिताइन की आवाज़ आई.
पंडिताइन-कौन है
अवी- मैं हू
पंडिताइन-मैं कौन
अवी- मुझे पंडितजी ने भेजा है. कुछ समान लेना है
पंडिताइन-आगे के गेट से आओ. ऐसे पीछे के गेट से क्यू आ रहे हो
अवी- मुझे लगा यही घर का गेट है
पंडिताइन-रूको खोलती हू
पंडिताइन ने गेट खोला .और मुझे सामने देख कर शॉक्ड हो गयी.
पंडिताइन-तुम, यहाँ, यहाँ किस लिए आए, किसी ने देखा तो नही, जल्दी अंदर आओ
पंडिताइन ने मुझे घर के अंदर ले लिया. और गेट से इधर उधर देख कर गेट बंद किया.
पंडिताइन-तुम
अवी- हाँ मैं, मुझे लगा तुम भूल गयी होगी
पंडिताइन-भूल गयी थी पर पूजा मे देख कर फिर याद आ गयी.
अवी-चलो अच्छा है, सब याद है
पंडिताइन-तुम यहाँ किस लिए आए हो
अवी-अधूरा काम पूरा करने के लिए
पंडिताइन-कौनसा अधूरा काम
अवी-हवेली मे अधूरा रह गया था
पंडिताइन-हवेली , वो तो शुरू हुआ ही नही फिर अधूरा कैसे रह गया
अवी-अब शुरू करते है
पंडिताइन-मुझे कुछ नही करना.
अवी- क्यू, मैं तो ठाकुर से अच्छा हू
पंडिताइन-वो तो देखने के बाद पता चलेगा ,
अवी- ठीक है दिखाऊ
पंडिताइन-मुझे नही देखना, तुम जाओ यहाँ से
अवी- पर मुझे तो देखना है
पंडिताइन-तुम ऐसे नही मनोगे.ठीक है बाद मे देख दूँगी. इस समय जाओ यहाँ से
अवी-अभी देखने मे बुराई क्या है
पंडिताइन-मंदिर मे पूजा हो रही है. कितने लोग है
अवी- मैं बाहर देखने को थोड़ी कह रहा हू.
पंडिताइन-पंडितजी आ जाएँगे
अवी- वो 3 4 घंटे के बाद मंदिर से बाहर आएँगे
पंडिताइन-मतलब आज देख कर जाओगे
अवी- हाँ, पिछली बार तुम डरी हुई थी. इस लिए मैं ने नही देखा पर आज देखे बिना नही जाउन्गा.
पंडिताइन-क्या मुसीबत है.
अवी- ये मुसीबत तुम ने खुद बनाई है
पंडिताइन-ठाकुर को कहा था कि गेट बंद कर दो पर उसको तो आग लगी थी.
अवी- अब मुझे लगी है
पंडिताइन-ठीक है दिखाती हूँ पर इस से ज़्यादा कुछ नही
अवी- ठीक है
पंडिताइन ने अपनी साड़ी और पेटिकोट उपर करके मुझे चूत दिखाई, और जल्दी से साड़ी नीचे भी कर ली
अवी- शुक्रिया, अब मैं चलता हू
पंडिताइन मुझे अजीब सी नज़रो से देखने लगी.
मैं गेट की तरफ जाने लगा.
पंडिताइन-रूको
अवी- मैं रुक गया.
पंडिताइन-तुम पागल हो क्या
अवी- नही.क्यू?
पंडिताइन-हवेली मे भी मुझे इतनी आसानी से जाने दिया और अब भी बस देख कर जा रहे हो,
अवी- मैं कुछ समझा नही
पंडिताइन-हाथ मे आया माल ऐसे छोड़ कर जा रहे हो, कभी किया नही तुम ने
अवी- (आक्टिंग तो करनी पदेन्गि.झुथ तो बोलना पड़ेगा.) नही किया और किया भी
पंडिताइन-ठीक से बताओ
अवी- पहले तुम बताओ ,तुम ने हवेली के बारे मे ठकुराइन को मेरा नाम क्यू बताया. मैं ने तो कुछ नही किया था.
पंडिताइन-मैं ने बस इतना बताया कि तुम्हारी वजह से देर हो गयी.
अवी- पर मेरा नाम क्यू बताया
पंडिताइन-मुझे उपर गये हुए बहुत देर हो गयी थी. और वो ठकुराइन थी. मैं रणजीतसिंघ का नाम लेती तो मैं मुसीबत मे फस जाती.इस लिए मैं ने तुम्हारा नाम लिया.पर ऐसा वैसा कुछ नही बताया
अवी- ठकुराइन ने मेरे साथ जो किया वो तुम्हें पता नही
पंडिताइन-क्या किया ठकुराइन ने
अवी- मुझे गुलाम बनाकर रखा. बड़ी मुश्किल से पीछा छुड़ाया है
पंडिताइन-मैं ने इसी लिए रणजीतसिंघ का नाम नही लिया
अवी- जाने दो जो हुआ सो हुआ. अब मैं चलता हू
पंडिताइन-रूको तुम ने मेरे सवाल का जवाब नही दिया.
अवी- जब बिना कुछ किए ठकुराइन ने सज़ा दी तो सोचा कि वो काम जिस की वजह से सज़ा मिली वो कर लेता हू.इस लिए देखने आ गया.
पंडिताइन-तो ये बात है,
अवी- हाँ, मुझे आपकी चूत देखनी थी जो मैं ने देख ली अब मैं चलता हू
पंडिताइन-ह्म्म्मा
फिर मैं गेट की तरफ जाने लगा