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मैं और मेरा परिवार

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484

रुकसाना मुझे गुस्से से देख रही थी और रज़िया नॉर्मल थी

रुकसाना-तू भी ना रज़िया थोड़ी देर रुक लेते वही अच्छा होता

रज़िया-अब क्या हुआ

रुकसाना-बंदर के साथ बैठ कर झूले का मज़ा नही ले पाएँगे

रज़िया-जाने दे ना वो अपना काम कर रहा है हम अपना मज़ा लेते है

मैं चुप चाप बैठ कर उनकी बातें सुन रहा था.

गुस्से शुरू हो गया.

रुकसाना-रज़िया मज़ा आ रहा है

रज़िया-हाँ

रुकसाना-रज़िया

रज़िया-हाँ बोल

रुकसाना-तुम्हें वो लड़का याद है

रज़िया-किस की बात कर रही है

रुकसाना-अरे वही. जिस ने मंदिर मे पूजा की थी और लोगो को प्रसाद दे रहा था

अवी-(ये तो मेरी बात कर रही है. देखता हूँ क्या बात करती है)

रज़िया-उसे तो मैं कभी नही भूल सकती, कितना हॅंडसम था वो

रुकसाना-हाँ, उसकी बॉडी देखी तुम ने

रज़िया-ऐसा था कि बस देखती रहूं

अवी-(इनको तो मैं पसंद आ गया.)

रुकसाना-काश वो मुझे मिल जाता ,

रज़िया-मिल जाता तो क्या करती

रुकसाना-पूरी रात ना मैं सोती और ना उसे सोने देती

अवी-(ये तो खुद तय्यार है मेरे साथ सोने के लिए)

रज़िया-धीरे बोल वो लड़का सुन रहा है

अवी-(सुनूँगा तभी तो तुम्हारी चूत मारूँगा)

रुकसाना-मैं क्या डरती हू किसी से

अवी-(डरना भी नही चाहिए ऐसी लड़की तो मुझे ज़्यादा पसंद है)

रज़िया-तो क्या कहा तूने

रुकसाना-अगर वो मिलता तो रात भर ना उसे सोने देती और ना मैं सोती.

रज़िया-बड़ी आई उसके साथ रात ...तुझ से पहले मैं उसके साथ मज़ा करती

अवी-(ये भी तय्यार है. एक साथ दोनो मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा)

रुकसाना-तू ,

रज़िया-हाँ मैं, पर मुझे तो लगता था कि उसे हम दोनो भी कम पड़ सकती है

अवी-(सही कहा ,तुम दोनो को आज ही लूँगा)

रुकसाना-हाँ, वो एक गबरू पहलवान की तरह दिख रहा था. काश वो मुझे मिल जाता.

रज़िया-सपने मत देख हमारी तरह बाकी लड़किया भी यही सोच रही होगी

अवी-(काश सारी लड़किया तुम्हारी तरह सोचे)

रुकसाना- हमारी बात अलग है

रज़िया-क्या अलग है. तुझे कहा था कि उस से बात कर पर तू तो बस उसे देख कर अपनी प्यसस भूज़ा रही थी. और बाकी की लड़किया तो उसे से बात भी कर रही थी.

अवी-(अच्छा हुआ बात नही की. वरना मुझे तुम पर ट्राइ करना पड़ता. )

रुकसाना-कल करूँगी ना

अवी-(कल की ज़रूरत नही पड़ेगी. आज ही तुम्हारी चुदाई करूँगा)

रज़िया-कल तो उसके पीछे लड़कियो की लाइन लग जाएँगी. आज अच्छा मौका था. काम बन जाता तो हम उसके साथ मज़े कर रहे होते

अवी-(आज इनकी चुदाई करता हू, कल रणजीतसिंघ भी देने वाला है )

रुकसाना-हाँ, पर जो होना था वो हो गया. अब क्या कर सकते है

अवी-(अभी भी बहुत कुछ कर सकती हो)

रुकसाना-उसका नाम क्या था

अवी-(नाम मे क्या रखा है)

रज़िया-अवी

रुकसाना-आज अगर वो मिल जाता तो मैं आज ही लड़की से औरत बन ने को तय्यार थी.

अवी-(ये तो वर्जिन है. रज़िया भी वर्जिन हुई तो मज़ा आ जाएगा)

रज़िया-मैं भी

अवी-(दोनो वर्जिन, मेले की शुरुआत अच्छी हो रही है)

रुकसाना-उसके साथ करके मज़ा आता ,अगर वो मुझे प्यार करेगा तो मैं उसकी बन कर रहने को तय्यार थी .अगर नही करता तो भी उसके साथ मज़ा करके चली जाती , हम तो यहाँ के नही है. मेले के बाद कुछ प्राब्लम भी नही होती.

अवी-(ऐसी लड़किया मिल जाए तो मज़ा ज़्यादा आता है. चुदाई करने के बाद तुम कौन और मैं कौन.रात गयी बात गयी)

रज़िया-वो तो है. इस मेले मे अगर किसी के साथ भी किया तो ज़्यादा प्राब्लम नही होगी. पर अगर अवी मिल जाता तो मज़ा आ जाता

अवी-(मिलेगा रज़िया जान ,आज चूत और कल या फिर उसके अगले दिन गंद)

रुकसाना-काश बंदर की जगह अवी होता

अवी-(ये बंदर आज तुम्हारी चुदाई करने वाला है)

रज़िया-ज़्यादा सपने मत देख

रुकसाना-अभी तो उसे सपनो मे ही देखना होगा.

अवी-(पहले रियल मे देखो बाद मे सपने मे याद करते रह जाना)

रज़िया-आज तो वो मेरे सपनो मे आने वाला है.

रुकसाना-तेरे

रज़िया-अब सपने मे तो पहले मुझे मज़ा लेने दे

अवी-(रुकसाना से पहले तेरी चुदाई करूँगा रज़िया जान )

रुकसाना-चल दिया तू भी क्या याद रखेंगी

अवी-(नही देती तो भी रज़िया की चुदाई पहले करता)

रज़िया-शुक्रिया

फिर दोनो इधर उधर की बातें करते हुए झूले का मज़ा ले रही थी.

झूला रुकने वाला था.

अब इनको मेरा असली चेहरा दिखाने का समय आ गया.

इन को चेहरा दिखाता हूँ पर बात नही करूँगा. चुप चाप चला जाउन्गा.

ये दोनो मेरा चेहरा देख कर मेरे पीछे पीछे बात करने के लिए ज़रूर आएगी.

झूला हमारे बॉक्स के पास रुक गया. झूला रुकते ही मैं ने अपने मुँह पर से कपड़ा निकाल दिया.

कपड़ा निकलते ही उन दोनो को एक जोरदार झटका लगा.

जिसे वो बंदर कह रही थी वो उनके सपनो का राजा था.

उनको तो कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे

वो कभी मेरी तरफ देखती तो कभी एक दूसरे की तरफ

रुकसाना का चेहरा सुन्न पड़ गया था. वो ज़्यादा शोक्ड हुई थी.

झूला रुकते ही मैं ने उनके सामने चुटकी बजाई. उनको होश मे लाया.

और झूले मे से उतर कर धीरे धीरे जाने लगा.

धीरे धीरे इस लिए जा रहा था कि उनको मुझे ढूँढने मे प्राब्लम ना हो जाए

वो दोनो भी उतर कर मेरे पीछे आ रही थी.

 


485

मैं झूले से उतरने के बाद धीरे धीरे आगे जाने लगा.

रुकसाना और रज़िया मेरे पीछे पीछे आने लगी.

रज़िया-रुकसाना

रुकसाना-हाँ रज़िया

रज़िया-ये तो

रुकसाना-ये तो वही मंदिर वाला लड़का है

रज़िया-हाँ

रुकसाना-ये मैं ने क्या किया.

रज़िया-तू भी ना रुकसाना कुछ भी करती रहती है

रुकसाना-मुझे क्या पता था कि वो वही निकलेंगा

रज़िया-पर तुझे ज़रूरत क्या थी. उसके साथ ज़गाड़ा करने की

रुकसाना-मुझे पता होता कि वो वही है तो मैं उसके धक्के के मज़े लेती

रज़िया-अब तो वो भी नही मिलेंगे

रुकसाना-अब क्या करे

रज़िया-मैं ने तुम्हें तभी समझाया था कि जाने दे जो हो गया सो हो गया. पर तू तो उसको भला बुरा बोलती गयी

रुकसाना-मैं क्या करती ,तब मुझे जो सही लगा वही किया

रज़िया-बिना ग़लती के वो चुप चाप तेरी गलिया सुनता गया.

रुकसाना-मुझे भी पता था कि उसकी ग़लती नही. मैं तो बस थोड़ा सा मज़ा ले रही थी.

रज़िया-तेरे मज़े के चक्कर मे असली मज़ा हाथ से निकल गया.

रुकसाना-तू कुछ कर ना

रज़िया-क्या करू,मुझे तो लगता है उसे बुरा लगा. देखा नही तूने, चुप चाप तेरी बात सुन रहा था .अगर दूसरा कोई होता तो तेरे साथ ज़गाड़ा करता

रुकसाना-हाँ, वो बहुत सीधा था जो मेरी बात सुनता गया.

रज़िया-वो छोड़ ,जब झूले मे बैठ थे तब तूने उसे बंदर कहा था

रुकसाना-क्या उसने सुना होगा

रज़िया-मैं ने तो तुझे रोका था पर तू तो किसी से डरती नही है .कितनी ज़ोर से उसे बंदर कह रही थी.

रुकसाना-क्या उसने हमारी दूसरी बातें जो उसके बारे मे बोल रहे थे वो भी सुनी होगी.

रज़िया-मुझे नही लगता की उसे हमारी बातें समझ मे आई होगी

रुकसाना-तू ऐसा कैसे बोल सकती है

रज़िया-अगर उसे हमारी बातें समझ मे आती तो वो हमारे साथ चुदाई कर रहा होता

रुकसाना-ये तूने सही कहा.

रज़िया-चल उसे जाकर सॉरी बोलते है.

रुकसाना-सॉरी बोलने से काम हो जाएगा

रज़िया-हो गया तो अच्छा है. नही तो उंगली है

रुकसाना-मुझे तो वही चाहिए था. कितना सीधा लड़का है वो उसके साथ करने मे मज़ा आता

रज़िया-एक बात बताऊ

रुकसाना-क्या?

रज़िया-वो तुझ पर गुस्सा है. मुझ पर नही. मेरा काम तो हो जाएगा.

रुकसाना-हाँ ,तूने तो मुझे रोका था. क्या वो मेरे साथ बात भी नही करेगा

रज़िया-कर सकता है

रुकसाना-वो कैसे

रज़िया-अगर वो जैसे कहे वैसा तुम ने किया तो वो तुम्हें माफ़ कर देगा.

रुकसाना-मतलब मेरी ग़लती की वो जो सज़ा देगा वो मुझे मान नी होगी

रज़िया-हां,इस के सिवा दूसरा कोई रास्ता नही है

रुकसाना-चल पहले सॉरी बोलते है

रज़िया-किस से बोलेंगे

रुकसाना-अवी से

रज़िया-वो तो जा चुका है

रुकसाना-कहाँ गया वो

रज़िया-मुझे क्या पता. हम बातें कर रहे थे शायद तभी चला गया होगा.

रुकसाना-अब क्या करे

रज़िया-चल ढूंढते है

रुकसाना-इतने बड़े मेले मे कैसे ढूंढ़ेंगे,

रज़िया-मुझे पता है वो कहाँ मिलेगा

रुकसाना-कहाँ पर

रज़िया-मंदिर मे होगा

रुकसाना-इतनी रात को वो वहाँ किस लिए जाएगा.

रज़िया-दोपहर मे वो एक लड़की के साथ पैदल गाओं गया था.उसकी बाइक वही मंदिर मे देखी थी मैं ने

रुकसाना-तो चलना जल्दी

रज़िया-चल

रुकसाना और रज़िया मुझे ढूँढने के लिए मंदिर मे आ गयी.

मैं कब से मंदिर मे उनका इंतज़ार कर रहा था.

पर उन दोनो का कोई पता नही था. मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था.

अच्छी 2 वर्जिन लड़किया मिल रही थी और मैं ने उनको हाथ से जाने दिया.

अगर वो यहाँ नही आई तो...

मैं रुकसाना और रज़िया के बारे मे सोच रहा था कि वो दोनो मेरी तरफ आते हुए दिखाई दी.

मैं ने उनको देखते ही अपनी बाइक स्टार्ट की

 


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बाइक की आवाज़ सुनकर रुकसाना और रज़िया भागते हुए मेरे पास आ गयी.

रुकसाना-रूको मुझे तुमसे बात करनी है.

अवी-मुझे तुमसे कोई बात नही करनी

रज़िया-हम तुमसे माफी माँग ने आए है.

अवी-तुम रज़िया हो ना

रज़िया-हाँ तुम्हें कैसे पता

अवी-झूले मे तुम्हारा नाम पता चल गया. आओ बैठो मैं तुम्हें छोड़ देता हू

मेरी बात सुनकर दोनो खुश हो गयी.

उन को लगा कि मैं ने उनको माफ़ किया. वैसे मुझे रुकसाना की बात का बुरा नही लगा. उसकी जगह कोई भी होती तो यही करती जो रुकसाना ने किया.

पहले रज़िया बाइक पर बैठ गयी.

रुकसाना-रज़िया आगे बैठो मुझे जगह कम है

अवी-तुम कहाँ बैठ रही हो, मैं ने सिर्फ़ रज़िया को कहा था.

और इतना बोलते मैं रुकसाना और रज़िया के कुछ बोलने से पहले बाइक का गियर डाल कर बाइक चलाने लगा.

रज़िया और रुकसाना दोनो शॉक्ड हो गयी.

रुकसाना को वही छोड़ कर मैं रज़िया को लेकर खेत की तरफ जाने लगा.

रुकसाना को ना ले जाने से रज़िया भी मेरी साथ नही आती इसी लिए मैं ने उनके बोलने से पहले बाइक चलानी शुरू की.

रुकसाना समझ गयी कि मैं ने उसे माफ़ नही किया. और रज़िया तो ऐसे मोड़ पर थी जहाँ एक तरफ उसके सपनो का राजा और दूसरी तरफ सहेली थी.

रज़िया-मुझे कहाँ ले जा रहे हो

मैं ने बाइक रोक दी

अवी-तुम्हारी फॅमिली के पास

रज़िया-और रुकसाना

अवी-उसकी ग़लती की सज़ा है वो

रज़िया-पर इतनी रात को वो अकेली कैसे आएगी

अवी-ये उसे पहले सोचना चाहिए था

रज़िया-तुम मुझे रुकसाना के पास छोड़ दो.

अवी-सोच लो फिर मैं दुबारा नही मिलूँगा

रज़िया-ये क्या मुसीबत है एक तरफ तुम और दूसरी तरफ सहेली...

रज़िया सोचने लगी.

रज़िया-तुम मुझे रुकसाना के पास छोड़ दो

अवी-सोच लो

रज़िया-सोच लिया

अवी-तुम कमाल की हो,झूले मे तो रात भर ना सोने की बात कर रही थी और अब मौका मिला तो हाथ से जाने दे रही हो

रज़िया-क्या कहा,मतलब तुम ने हमारी पूरी बात सुन ली थी

अवी-हाँ

रज़िया-तुम्हारे साथ करना तो चाहती हू पर वो मेरी सहेली है.

अवी-सहेली को गोली मारो, चलो मेरे साथ तुम्हें रात भर प्यार करूँगा

रज़िया-क्या करू, थॅंक्स पर मुझे मेरी सहेली के पास छोड़ दो

अवी-अगर तुम्हारी जगा रुकसाना होती तो वो मेरे साथ चलती

रज़िया-मैं रज़िया हू. और मैं रुकसाना को छोड़ कर कही नही जाउन्गी.

अवी-तो वो तुम्हारी पक्की फ्रेंड है

रज़िया-हाँ

अवी-और तुम मेरे साथ करना भी चाहती हो

रज़िया-हाँ

अवी-टाइम क्या हुआ,10 मिनिट हो गये.

रज़िया-10 मिनिट

अवी-हो गयी रुकसाना की सज़ा ख़तम .चलो रुकसाना को लेकर आते है

रज़िया-तुम रुकसाना को सज़ा दे रहे थे

अवी-हाँ

रज़िया-मतलब रुकसाना को माफ़ किया

अवी-हाँ पर तुम्हें मेरी एक बात मान नी होगी

रज़िया-तुम्हारी हर बात मानूँगी

अवी-आज रात तुम और रुकसाना मेरे साथ मेरे घर रुकोगी

रज़िया-सच

अवी-हाँ ,तुम दोनो ने झूले मे जो कहा वही करेंगे

रज़िया मेरी बात सुनकर खुश हो गयी. और मुझे पीछे से गले लगा लिया

अवी-मैं ने रुकसाना को माफ़ किया ये बात उसे मत बताना, उसकी थोड़ी मज़ा लेंगे

रज़िया-ज़्यादा मज़ाक मत करना

अवी-नही करूँगा.

रज़िया-चलो अब,बिचारी रो रही होगी

अवी-हाँ चलो,

मैं रज़िया को लेकर वापस मंदिर के पास आ गया.

रुकसाना मंदिर की सीडियो पर बैठ कर रो रही थी.

हम उसके पास आ गये

रज़िया और मैं बाइक के उपर से उतर कर रुकसाना के पास चले गये.

रुकसाना अपने सर को नीचे कर के रो रही थी.

मंदिर मे सिर्फ़ कुछ 10 12 लोग थे. वो अपना काम कर रहे थे.

मैं ने पहले इधर उधर देखा ,हमारे पास कोई नही था.

फिर मैं रुकसाना के पास बैठ गया.

उसके सर को पकड़ कर उपर किया.

वो रो रही थी.

मुझे देख कर और रोने लगी.

मैं ने उसके सर को पकड़ कर उसके होंठो पर किस किया.

मेरे इस तरह उसे किस करने से रज़िया शोक्ड हो गयी. और रुकसाना भी शॉक्ड हो गयी.

मैं रुकसाना के नरम होंठो को चूसने लगा.

रुकसाना कुछ नही कर रही थी.

मैं ने किस तोड़ दिया.

अवी-झूले मे तो बड़ी बड़ी बातें कर रही थी कि रात भर सोने नही दूँगी.अब क्या हुआ. तुम्हें तो किस भी करना नही आता.फिर रात भर तो मुझे सोना पड़ेगा.

मेरी बात सुनकर रुकसाना ने रोना बंद किया.

और मेरे गले लग गयी.

अवी-रात भर यही करने का इरादा है

मेरी बात सुनकर रुकसाना ने मुझे और कस के गले लगा लिया.

रज़िया-अब छोड़ भी दो रुकसाना ,बिचारा तुम्हारे पहाड़ो मे फस कर मर जाएगा.

रुकसाना ने मुझे छोड़ दिया

रुकसाना-मुझे माफ़ करना ,वो सब...

अवी-माफी बाद मे माँग लेना चलो जल्दी

रुकसाना-कहाँ पर

रज़िया-भूल गयी, रात भर सोने नही देना है इसे

रुकसाना-ये माने गा...

रज़िया-हाँ ,हम इसके घर रुकेंगे. आज रात भर

रुकसाना-सच मे

रज़िया-हाँ, पर तूने जल्दी नही किया तो शायद अवी अपना इरादा बदल दे

अवी-चलो जल्दी, मुझे सुबह जल्दी उठना है

रुकसाना-हाँ चलो

मैं बाइक पर बैठ गया. फिर रुकसाना बैठ गयी.

रुकसाना के बाइक पर बैठ ते ही रज़िया और मैं हँसने लगे.

रुकसाना-तुम दोनो हंस क्यू रहे हो

रज़िया-वो तुम बैठी इतनी जल्दी कि ऐसा लगा तुम्हें फिर से छोड़ कर ना जाए इस लिए तुम पहले बैठ गयी.

अवी-सही कहा रज़िया तुम ने

रुकसाना-चलो ना जल्दी

रज़िया-क्यू अब खुजली हो रही है

रुकसाना-तुझे तो कल देखूँगी

रज़िया-हम कल बेड से उठ पाएँगे ऐसा मुझे नही लगता

अवी-मैं प्यार से करता हू. तुम कल तो सब कुछ कर पाओगी (पेशाब के लिए भी उठ नही पाओगी)

रुकसाना-चलो ना ,मुझे यहाँ डर लग रहा है

रज़िया-अभी से डरने लगी

रुकसाना-ज़्यादा बहादुर मत बन. पता है मुझे तुझे भी डर लग रहा है

अवी-रज़िया बैठ जाओ.

रज़िया के बैठने के बाद मैं दोनो को अपने खेत की तरफ ले गया. रुकसाना और रज़िया भी वही रुकी थी.

 


487

मैं ने खेत से थोड़ी देर पहले बाइक रोक दी.

रुकसाना-यहाँ क्यू बाइक रोकी,हम तो तुम्हारे घर जाने वाले थे.

रज़िया-हाँ, यहाँ खेत मे क्यू लेकर आए हो.

अवी-सामने जो खेत मे घर3 दिख रहा है मैं वही रहता हू.

रुकसाना-सच ,तुम वहाँ रहते हो

रज़िया-ये तो अच्छा हुआ. हम भी खेत मे रुके है. तुम भी खेत मे रहते हो

रुकसाना-इस से तो हम जब चाहे इसके घर जा सकते है.क्यू रज़िया

रज़िया-हाँ

अवी-वो सब बाद मे सोचेंगे, पहले तुम दोनो अपने फॅमिली के पास जाओ

रुकसाना-क्यू, हम तो आज तुम्हारे साथ रहने वाले थे.

रज़िया-क्या तुम ने अपना इरादा बदल दिया.

अवी-इरादा नही बदला . तुम अपने फॅमिली के पास जाकर बता दो कि आज रात तुम दोनो बाहर रुकने वाली

रुकसाना-ये तो हम ने सोचा नही

रज़िया-हाँ, हम अपने अम्मी अब्बू को क्या कहेंगे

अवी-कुछ भी कह दो. जैसे कि सहेली के पास जा रही हो. या फिर एक दूसरे का नाम बता दो जैसे रज़िया तुम ये कहो कि रुकसाना के पास जा रही हो और रुकसाना रज़िया के पास

रुकसाना-दूसरा वाला तरीका सही रहेगा

रज़िया-हाँ, हमारी फॅमिली एक दूसरे से दूर रुकी है.मेरी फॅमिली इस तरफ है तो इसकी फॅमिली दूसरी तरफ और अब तो वो सो गये होगे.

अवी-फिर जाओ जल्दी. और अपनी फॅमिली को बता कर मेरे घर3 आ जाओ

रुकसाना-हम अभी गये और अभी आए

रज़िया-चलो रुकसाना जल्दी जाकर आते है

रुकसाना और रज़िया अपनी फॅमिली के पास चली गयी.

मैं अपने घर3(खेत वाला घर) चला गया.

घर3 जाकर मैं ने बेड को ठीक किया. और रुकसाना और रज़िया का इंतज़ार करने लगा.

मैं ने रुकसाना और रज़िया को इस लिए खेत से पहले बाइक से उतारा क्यू कि मैं नही चाहता था कि मैं किसी को रुकसाना और रज़िया के साथ दिखाऊ

रुकसाना और रज़िया को आने मे समय था

मैं ने अपने मोबाइल को कमरे मे एक जगा पर रख दिया .और रेकॉर्डिंग शुरू कर दी.और रुकसाना और रज़िया का इंतज़ार करने लगा.

मेला का पहला दिन मेरे लिए अच्छा साबित हो रहा था.

पूरे फॅमिली के साथ मस्ती की,रानी के साथ मस्ती की. और बहुत सारी मस्ती की

मेले के पहले दिन 2 कुवारि चूत मिली.

रुकसाना और रज़िया खुद मेरे पास आई. मुझे कुछ नही करना पड़ा.

कल रणजीतसिंघ भी कुछ ना कुछ करेगा.

कुवरसिंघ का कुछ तो करना होगा.मोना से कुवरसिंघ को कुछ नही होगा.

मोना की मदद करने से मुझे 15 लाख मिल जाएँगे.

मैं मोना की मदद कैसे करू यही सोच रहा था कि किसी गेट खटखटाया.

शायद रुकसाना और रज़िया आ गयी होगी.

खुद अपनी चूत का भोसड़ा बनवाने के लिए मेरे पास आ गयी.

मैं ने गेट खोला . सामने रुकसाना और रज़िया थी.

मैं ने रुकसाना और रज़िया को जल्दी अंदर ले गया और गेट बंद कर दिया.

अवी-तुम दोनो तो जल्दी आ गयी

रुकसाना-काम जल्दी हो गया ,

अवी-चलो शुरू करते है

रुकसाना-हाँ

अवी-तुम अपने कपड़े उतार दो.

रुकसाना कपड़े उतारने लगी.

रज़िया-तुम भी हमारे साथ उतारो ना

अवी-ठीक है.

रुकसाना ने पहले कपड़े निकाल दिए. रुकसाना पूरी नंगी हो गयी.

रुकसाना को मेरे साथ चुदाई करने की जल्दी थी इस लिए वो बिंदास होकर नंगी हो गयी.

रज़िया कपड़े निकालने के लिए झिझक रही थी. शर्मा रही थी. पर मेरे ज़ोर डालने पे उस ने कपड़े निकाल दिए.

रज़िया ने पैंटी और ब्रा छोड़ कर सब कपड़े निकाल दिए

मैं ने भी अपने कपड़े निकाल दिए. सिर्फ़ अंडरवेर हो गया.

मैं ने रुकसाना ,रज़िया और अपने कपड़े उठा कर अलमारी मे रख दिए.

रज़िया-ये कपड़े क्यू अंदर रखे तुम ने

अवी-खराब ना हो इस लिए. अगर कपड़ो पर दाग या कुछ ऐसा वैसा लग गया तो तुम पर तुम्हारी फॅमिली शक करेगी

रुकसाना-ये सही किया तुम ने

अवी-रुकसाना

रुकसाना-हाँ

अवी- तुम ने झूले मे मुझे जो कुछ कहा उसकी सज़ा देने के बाद मैं तुम्हारे साथ चुदाई करूँगा

रुकसाना-सज़ा ,वो तो तुम ने दे दी थी.

अवी- सज़ा तो अब मिलेंगी.सज़ा पूरी होने के बाद तुम्हारी चुदाई करूँगा.

रुकसाना ने रज़िया की तरफ देखा.रज़िया को तो पता था कि मैं क्या करने वाला हू. रज़िया ने रुकसाना को हाँ करने को कहा

रुकसाना-ठीक है.बताओ मुझे क्या करना होगा

अवी-जब तक मैं रज़िया की चुदाई नही करता तब तक तुम्हें मुर्गी बन कर रहना होगा. और हमारी तरफ देखना होगा ,और अपनी चूत को हाथ नही लगाना होगा.

मेरी बात सुनकर रज़िया हँसने लगी.

रुकसाना-तू क्यू हँस रही है, तुझे तो कल देखूँगी.

रज़िया-देख लेना, पहले मुर्गी बन

अवी-जल्दी करो ,नही तो एक और सज़ा दूँगा.

एक और सज़ा का नाम सुनकर रुकसाना जल्दी से मुर्गी बन गयी.

अवी-(रुकसाना ने अगर ना कहा होता तो उसे बिना कपड़े दिए खेत मे भेजता.)

 


488

रुकसाना नंगी मुर्गी बन गयी.

रज़िया रुकसाना पर हँस रही थी

रज़िया-अवी ये मुर्गी अंडे कब देगी. मुझे ओमलेट खाना है

अवी- तुम खुद देख लो

रज़िया-रुकसाना मुर्गी जल्दी अंडे दो

रुकसाना-तुझे अंडे चाहिए ,रुक तुझे कल अंडे के साथ डंडे खिलाती हू

रज़िया-कल का कल देखेंगे,आज अंडे खिला

रुकसाना-तो बोल ना अपने मुर्गे(अवी) को की डंडा डाल कर अंडा निकाल ले(चूत मे लंड डाल दे)

रज़िया-मुर्गा तो पहले डंडा मुझे खिलाने वाला है.

रुकसाना-तो खाना ,और जब अंडे निकलेंगे तब अपने अंडे खुद खा लेना

रज़िया-कोई अपने अंडे थोड़ी ख़ाता है

रुकसाना-तो आज खा ले ,पर मेरा दिमाग़ मत खा,एक तो दर्द हो रहा है और उपर से तू मज़ाक उड़ा रही है.

रज़िया-तेरी ग़लती की सज़ा है.मैं ने कहा था

रुकसाना-कर रही हू ना सज़ा पूरी अब चुप चाप करने देना

रज़िया-ज़्यादा दर्द हो रहा है

रुकसाना-हाँ

रज़िया-अवी रुकसाना को दर्द हो रहा है

अवी-तो क्या करूँ

रज़िया-दर्द कम करो ना रुकसाना का

अवी-तुम कह रही हो इस लिए ,रुकसाना अपने कान(एअर) छोड़ दो पर मुर्गी की तरह बैठे रहना

रुकसाना ने अपने कान छोड़ दिए. रुकसाना थोड़ा रिलॅक्स हो गयी.

रुकसाना-शुक्रिया रज़िया

रज़िया-अब तो दर्द कम हुआ होगा

रुकसाना-हाँ,पर तुम एक काम करेगी तो पूरा दर्द ख़तम हो जाएगा

रज़िया-क्या ,बोल ना

रुकसाना-अपनी चुदाई जल्दी कर जिस से मैं मुर्गी से फिर से रुकसाना बन जाउ

रज़िया-ये नही कर सकती

रुकसाना-क्यू?

रज़िया-ऐसा किया तो मुझे ज़्यादा दर्द होगा.

रुकसाना-जाने दे. पर बाकी का काम तो जल्दी करना

रज़िया-कौनसा बाकी का काम

रुकसाना-अपने कपड़े तो उतार दे जिस से अवी तुम्हें देख कर जल्दी चुदाई शुरू करे और तुम बातें करके टाइम बरबाद ना करो

रज़िया-ये कर सकती हू

रज़िया अपनी ब्रा और पैंटी निकालने लगी.

मैं ने भी अपना अंडरवेर निकाल दिया.

और रुकसाना के मुँह के पास चला गया.

रुकसाना मेरा लंड को देखती रही.

रुकसाना-कितना बड़ा है इसका

रज़िया-क्या बड़ा है

रुकसाना-पलट कर तो देख

रज़िया अपने कपड़े निकालने के लिए पलट गयी थी. रुकसाना की बात सुनकर रज़िया पलट गयी.

और मेरे लंड को आँखे फाड़ कर देखने लगी

रुकसाना-ऐसे क्या देख रही है. मैं ने तो तुम्हें सुबह कहा था कि इसका बड़ा होगा

रज़िया-बड़ा क्या बहुत बड़ा है.

रुकसाना-इस से तो हमारी फट जाएगी.

रज़िया-फटने दे पर ऐसा दुबारा नही मिलेगा.

रुकसाना-ऐसा तो ढूँढने से भी नही मिलेगा

रज़िया-हमारा नसीब अच्छा है जो मेले के पहले दिन अवी मिल गया.

रुकसाना-हाँ,कितनी लड़कियो मे से हमे मिला

रज़िया-अब तो पूरा मेला अच्छा जाएगा. मज़ा ही मज़ा होगा.

रुकसाना-आज दर्द होगा पर कल तो पूरा मज़ा होगा

रज़िया-हाँ,इतने बढ़िया लंड से हम आज लड़की से औरत बन जाएँगी

रुकसाना-मेरी शादी जिस से हो ,काश उसका भी ऐसा ही हो

रज़िया-शादी का बाद मे सोचना पहले सुहागरात मना लेते है.

अवी-तुम दोनो कितनी बातें करती हो. 2 मिनिट मे पूरे साल भर की बातें की तुम ने.

रुकसाना-क्या करे, तुम्हारा लंड देख कर मुँह मे पानी आ गया.

रज़िया-मेरी तो चूत मे आ गया.

अवी-तुम्हारे मुँह मे आया है ना ,तो स्वाद लेकर देख लो

रुकसाना-सच,पहले मैं टेस्ट करू

रज़िया-कर ले,पर चूत मे पहले मेरे जाएगा.

अवी-पर पूरा एक साथ लेना होगा

रुकसाना-इतना लंबा,एक साथ,ठीक है

रुकसाना ने अपना छोटा मुँह मेरे मोटे लंड के लिए खोला. और एक साथ पूरा लंड अपने मुँह मे ले लिया.

मान गये रुकसाना को ,एक साथ, मेरा लंड रुकसाना के गले तक चला गया.

रुकसाना को मैं ने लंड को हाथ लगाने को नही कहा ,जिस से वो ऐसे बैठ हुए लंड को चूसने लगी.

रुकसाना ने पहले तो पूरा लंड मुँहमे लिया था फिर आधे लंड को मुँह मे लेकर चूस रही थी.

रुकसाना ने खुद को बॅलेन्स करने के लिए अपने हाथ ज़मीन पर रख कर लंड चूसने का मज़ा लेने लगी.

रुकसाना का थूक उसके मुँह से नीचे गिर रहा था. रुकसाना लंड चूसने का मज़ा लेने मे कुछ ज़्यादा एग्ज़ाइट हो गयी थी.

रज़िया और मैं रुकसाना को लंड चूस्ते हुए देख रहे थे.

रुकसाना 1 मिनिट तक मुर्गी बन कर मेरा लंड चूस्ति रही.

रुकसाना को मुर्गी बन कर लंड चूसने मे तकलीफ़ हो रही थी.

रुकसाना ने खुद को अड्जस्ट करने के लिए लंड को मुँह मे से निकाल लिया.

लंड मुँह मे से निकालते ही मैं रुकसाना से दूर हो गया.

रुकसाना-मुझे और चूसना है.

अवी-तुम ने लंड बाहर निकाला मतलब अब रज़िया की बारी है .ये तो मैं ने तुम्हारा दर्द कम करने के लिए किया था. अब अपनी सज़ा पूरी करो. मैं रज़िया की चूत फाड़ता हू.रज़िया ने बहुत हँस लिया. अब थोड़ा रोने का टाइम आया है.क्यू रज़िया रोने के लिए तय्यार हो

रज़िया-हाँ,पर ज़्यादा मत रुलाना

अवी-थोड़ा तो रोना होगा.

रुकसाना-रो ले ,ऐसे रोने का मौका दुबारा नही मिलेगा

रज़िया-पता है मुझे

अवी-चलो बेड पर

रुकसाना-रज़िया,बेस्ट ऑफ लक

रज़िया-थॅंक्स, मैं जल्दी करने की कोशिस करूँगी

अवी-पहले बेड पर तो चलो ,फिर जो करना है कर लेना

 


489

रज़िया को लेकर बेड पर चला गया.

रज़िया-तुम्हारा बहुत बड़ा है,आराम से करना

अवी-मेरी रज़िया,आराम से करूँगा.

रज़िया-चलो शुरू करते है

अवी-कहाँ से शुरू करना चाहती हो

रज़िया-कहाँ से मतलब

अवी-पहले किस,फिर चूसना और बाद मे चुदाई ,ऐसा करना चाहती हो या रुकसाना के लिए सीधा चुदाई करना चाहती हो

रज़िया-पहले जैसा कहा था वैसा करते है. पहले किस,फिर चूसना और बाद मे चुदाई

अवी-और रुकसाना का दर्द

रज़िया-वो भी बाद मे ऐसा ही करेगी. और वैसे भी पहली बार कर रही हू तो पूरे तरीके से मज़ा लूँगी

अवी-ये तुम ने सही सोचा.चलो पहले मुझे अपनी चूत दिखाओ

रज़िया-सब तुम्हारे सामने है,जो देखना है देख लो

अवी-अपने पैर तो फैला दो

रज़िया बेड पर लेट गयी.और अपने पैरो को फैला दिया.

मैं रज़िया की चूत देखने लगा. गुलाबी,कुवारि,छोटे बालो वाली की चिकनी चूत देख कर मैं खुश हो गया.

बिना कुछ किए कुवारि चूत मिल गयी.वो भी दो कुवारि चूत

रज़िया-देख ली

अवी-हाँ, अब तुम मेरा लंड देख लो

फिर रज़िया उठ कर बैठ गयी .और मेरे लंड को देखने लगी.

रज़िया ने मेरे लंड को हाथ मे पकड़ लिया और बोली बाप रे इतना बड़ा लंड है तुम्हारा .रुकसाना ने इसे मुँह मे कैसे लिया.

अवी-जैसा उसने लिया तुम भी वैसे ही लो

मेरे इतना कहते ही रज़िया ने लंड को मुँह मे ले लिया.

रज़िया के मुँह मे लंड जाते ही मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

रज़िया ने रुकसाना की तरह मेरा पूरा लंड मुँह मे ले लिया और चूस ने लगी

रज़िया के चूसने से मुझे पहली बार मज़ा भी आ रहा था और गुदगुदी भी हो रही थी.

रज़िया मेरे लंड को चूस रही थी. मैं चुप चाप कैसे रहता ,मैं भी उसके बूब्स दबाने लगा. रज़िया के बूब्स टाइट थे .उसकी पहली चुदाई थी. और मेरी.1 2 3 जाने दो गिनती करूँगा तो सुबह हो जाएगी.

मैं रज़िया के बूब्स दबाता गया.मैं जब भी ज़ोर से रज़िया के बूब्स दबाता तो वो लंड को मुँह से बाहर निकाल कर शीष्कारियाँ लेती और फिर से लंड को चूसने लग जाती.

इसमे मज़ा आ रहा था. पर बूब्स ज़ोर से दबाने से रज़िया को दर्द हो रहा था.

दर्द और लंड का मज़ा इस मे से किसी एक को रज़िया को सेलेक्ट करना था.

पहले तो रज़िया ने दोनो सेलेक्ट किए. बूब्स पे दर्द होते ही लंड मुँह से बाहर निकाल कर शीष्कारी लेती और फिर से लंड चूसना शुरू कर देती.

पर अब रज़िया को बूब्स पर ज़्यादा दर्द हो रहा था. उधर रुकसाना को भी दर्द हो रहा था.

रुकसाना को बाद मे देखूँगा पहले रज़िया का दर्द कम करना होगा.

मैं ने ज़ोर से बूब्स दबाना बंद किया और बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगा .

धीरे धीरे बूब्स दबाने से रज़िया लंड चूस्ते हुए शीष्कारिया लेने लगी.राजिका के मुँहसे अया आ उम्म्म की आवाज़ आ रही थी .

बूब्स दबाना और लंड चूसना 3 मिनिट तक चलता रहा.

जब उसके मुँह से लंड बाहर निकाला तब मैं ने उसके बूब्स देके.रज़िया के बूब्स लाल हो चुके थे .बूब्स पर मेरे उंगली के निशान बन गये थे.

दर्द देने के बाद अब बूब्स को चूस कर दर्द करना मेरे काम था.

मैं ने रज़िया को बेड पर लेटा दिया और उसके बूब्स को मुँह मे ले के चूस ने लगा.

रज़िया तो कब से गरम हो चुकी थी. अगर इधर रज़िया का ये हाल था तो उधर रुकसाना

मैं ने रुकसाना की तरफ देखा वो हमारी तरफ देख रही थी. और अपने पैरो से चूत को मसल रही थी.

मैं ने रुकसाना को चूत को हाथ लगाने से मना किया था जिस की वजह से रुकसाना अपने पैरो को रगड़ रही थी.

रुकसाना का नंबर भी आएगा.पहले रज़िया का मज़ा तो ले लूँ

मैं एक बूब्स को धीरे धीरे हाथ से मसल रहा था और दूसरे बूब्स को चूस रहा था.

रज़िया अपनी बेचैनी दिखाने के लिए मेरे सर को अपने बूब्स पे दबाने लगी.

रज़िया के मुँह से अयाया अया की आवाज़ आने लगी

एक बूब्स का रस पान करने के बाद दूसरे बूब्स को चूस्ता रहा.

मैं ने बूब्स चूसना जल्दी ख़तम किया.

क्यू कि रुकसाना का बुरा हाल हो रहा था.

15 मिनिट हो गये थे रुकसाना को मुर्गी बन कर.

बहुत सज़ा हो गयी. अगर रुकसाना मुर्गी बन कर थक गयी तो चुदाई नही कर पाएगी

अवी-रुकसाना

रुकसाना-हााआ

अवी-तुम्हें मुर्गी बन ने की ज़रूरत नही. तुम्हारी सज़ा पूरी हो गयी. पर अपनी चूत को हाथ मत लगाना. वही रह कर हमारी चुदाई देखना

मेरी बात सुनते ही रुकसाना ने अपनी गंद ज़मीन पर रख दी. और राहत की सास ली.

रज़िया के बूब्स चूसना बहुत हो गया. अब चूत की बारी थी.

मैं रज़िया के पैरो की बीच मे आ गया.

और रज़िया की चूत को देखने लगा.रज़िया के चूत पे हल्के हल्के बाल थे.

मैं ने देर ना करते हुए रज़िया की चूत को टच किया . मैं ने रज़िया की चूत को अपने हाथ से मसल दिया.

चूत को हाथ से मसल ने के साथ अपना हाथ रज़िया की चूत पर फेरने लगा.

चूत मसल ने से रज़िया के बदन मे बिजली दौड़ गयी. वो अपने सर को इधर उधर कर रही थी.

मैं ने रज़िया को ज़्यादा देर तड़फ़ ने नही दिया और रज़िया की चूत की गरमी शांत करने के लिए अपनी जीभ से रज़िया की चूत को चाटने लगा .

जीभ से चाटने से रज़िया शीष्कारिया लेने लगी.

जिस तरह बूब्स चूस्ते हुए मेरे सर को अपने बूब्स पे दबा रही थी ठीक उसी तरह चूत को चाटने से मेरे सर को अपनी चूत पे दबाने लगी .

चूत को चाट कर साफ करने के बाद मैं रज़िया की चूत को चूस ने लगा.

रज़िया की चूत के होंठ थोड़े खुले हुए थे. शायद रज़िया और रुकसाना आपस मे एक दूसरे के साथ मज़ा करती होगी.

अगर रुकसाना की चूत भी ऐसी ही हुई तो पक्का ये दोनो मस्ती करती होगी.

फिर भी रज़िया के चूत मे जीभ मुश्किल से जा रही थी.

जितनी भी जा रही थी उसी के साथ मैं रज़िया की चूत का मज़ा ले रहा था.

थोड़ी देर रज़िया की चूत चूसने के बाद ही रज़िया की चूत से गरम लावा बाहर आ गया.

ठंडी के दिनो मे रज़िया का गरम पानी पीने से मुझे मज़ा आ गया.

मैं ने रज़िया की चूत का पानी पी लिया. उसकी चूत का पानी थोड़ा नमकिनी था .

चूसने का प्रोग्राम बहुत हो गया. अब असली खेल खेलने का टाइम आ गया था.

रज़िया के बाद रुकसाना का भी नंबर आने वाला था.

रुकसाना जो कब से अपनी चूत की खुजली को कंट्रोल कर के अपना नंबर आने का इंतज़ार कर रही थी.

मुझे तो लग रहा था कि मैं ने बस रुकसाना की चूत को टच भी किया तो रुकसाना की चूत से पानी निकल जाएगा.

रज़िया भी पानी छोड़ने के बाद मैं क्या करने वाला हू ये सोच रही थी.

जीभ तो आराम से अंदर ले ली थी अब लंड लेने की बारी थी.

रज़िया खुद को लंड लेने के तय्यार कर रही थी.

रज़िया ने एक बार रुकसाना की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देखा और लंड चूत मे डालने के लिए इशारा किया

 


490

रज़िया ने एक बार रुकसाना की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देखा और लंड चूत मे डालने के लिए इशारा किया.

रज़िया के इशारा करते ही मैं ने रज़िया की गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

गंद के नीचे पिल्लो रखने से रज़िया की चूत उपर हो गयी.

फिर मैं ने रज़िया के पैरो के बीच मे जगा बना दी.

रज़िया ने अपने पैर फैलाया दिए.पैर फैलाने से चूत के होंठ थोड़े खुल गये.

मैं ने अपने लंड को रज़िया की चूत पे लगा दिया

लंड चूत पर रखते ही रज़िया के बदन की गरमी का असली पता चल गया.

जिस तरह उसके बूब्स सॉफ्ट थे उसी तरह उसकी चूत भी सॉफ्ट थी .

मैं लंड को चूत पर रगड़ने लगा.

रज़िया को मेरे लंड का इस तरह रगड़ना बर्दास्त नही हुआ और रज़िया ने मेरे लंड को हाथ मे पकड़ कर अच्छे से लंड को चूत के होंठो के बीच रख दिया.

रज़िया-अवी थोड़ा धीरे करना

अवी-मैं ने आँखे से इशारा करके रज़िया को तसल्ली दी. कि मैं आराम से करूँगा

रज़िया की चूत पर लंड ने अपने लिए जगह बना दी .

मैं ने रज़िया को धीरे करने का प्रॉमिस किया था जिस की वजह से मैं धीरे से झटका देने लगा पर मेरा लंड रज़िया की चूत मे नही जा रहा था .

रज़िया की चूत टाइट थी .

जोरदार धक्के मारे बिना लंड अंदर कैसे जाएगा. रज़िया कुवारि है. उसके लिए 1 2 3 जोरदार झटके मारने होगे

अवी-रज़िया.

रज़िया-हाँ

अवी-धीरे करने से काम नही बनेगा.

रज़िया-जैसा करना है वैसा करो .अब बर्दास्त नही हो रहा

रज़िया की तरफ से ग्रीन सिंगल मिलते ही मैं जोरदार झटका मारने के लिए तय्यार हो गया.

पर पहले मैं ने लंड पर तेल लगा लिया जिस से जोरदार झटका मारने के बाद भी रज़िया को ज़्यादा दर्द ना हो

फिर मैं ने लंड को चूत पर अड्जस्ट किया. और एक बार रुकसाना की तरफ देखा और फिर रज़िया की तरफ ,दोनो के चेहरे से पता चल रहा था कि दोनो कितना दर्द होगा इसके बारे मे सोच रही थी.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए एक ज़ोर दार झटका मार कर लंड का टोपा रज़िया की कुवारि चूत मे डाल दिया.

टोपा अंदर जाते ही रज़िया की चीख निकल गयी.

पर रज़िया की चूत के होंठ खुले हुए थे और लंड पर तेल लगा हुआ था जिस से रज़िया को ज़्यादा दर्द नही हुआ.

पर जितना भी दर्द हुआ था उसे कम करने के लिए

मैं ने रज़िया के होंठो पे किस करना शुरू किया.

पहली बार मैं रज़िया को किस कर रहा था.

रज़िया के नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगा.

थोड़ी देर मैं रज़िया के होंठो को चूस्ता रहा पर मैं ये भूल गया था कि मैं रज़िया का दर्द कम करने के लिए किस कर रहा था. मैं तो होंठो का रस पीने का मज़ा ले रहा था.

फिर मैं ने चूत पर ध्यान दिया. रज़िया के होंठो को चूस्ते हुए ,रज़िया को लड़की से औरत बनाने वाला एक ज़ोर दार झटका मारा.

और मेरा लंड रज़िया की चूत की सील तोड़ते हुए लंड लगभग आधा अंदर चला गया.

रज़िया को जाने लेने वाला दर्द हुआ. लंड अंदर जाते ही वो उछल ने लगी

रज़िया मुझे धक्का देने लगी .रुकसाना हम दोनो की तरफ आँखे फाड़ कर देख रही थी.रुकसाना अपना नंबर कब आएगा इस लिए आँखे फाड़ कर मेरी तरफ देख रही थी.

रज़िया तड़फ़ रही थी और मैं रज़िया को किस कर रहा था और वो मुझे अपने से अलग करने के कोशिस कर रही थी

मैं ने रज़िया को किस करते कस के पकड़ लिया था.

मुझे अलग करने मे नाकाम होने के बाद रज़िया ने अपने नाख़ून से मेरी पीठ खरोचने लगी.

नाख़ून की वजह से मुझे दर्द हो रहा था पर मैं ने रज़िया को पकड़े रखा.

रज़िया थक कर हार गयी और अपना आख़िरी हथियार इस्तेमाल किया.रज़िया की आँखों से पानी निकलने लगा.

उधर रुकसाना मुझे घूर घूर के देख रही थी.

रज़िया के मेहनत करने की वजह से रज़िया जो अपने बदन को हिला कर मुझे धक्का दे रही थी उसकी वजह से चूत मे मेरे लंड के लिए जगह बन ने लगी.

रज़िया के शांत होते ही मैं ने एक ज़ोर का झटका मारा.ऐसा झटका जिस से मेरा लंड रज़िया की चूत की गहराई मे चला गया.

रज़िया मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगी औरर मेरा लंड पूरी तरह से रज़िया की चूत मे चला गया था.

रज़िया की चीख मेरे मुँह की वजह से रुकसाना तक नही पहुँची

रज़िया का दर्द कम करने के लिए मैं ने किस करने के साथ बूब्स दबाना शुरू किया.

रज़िया समझदार थी. उसको जब समझ मे आ गया कि लंड पूरा अंदर चला गया है तब उसने चीखने की बजाय दर्द कम करने पे ज़्यादा ज़ोर दिया.

मेरे बूब्स दबाने से और रज़िया के दर्द कम करने की कोशिस की वजह से रज़िया 5 मिनिट मे धक्के खाने के लिए तय्यार हो गयी.

रज़िया के शांत होते ही मैं ने किस करना बंद किया.

उसके होंठो को छोड़ते ही रज़िया अपनी सासो पर कंट्रोल करने लगी.

रज़िया के शांत होते ही मैं ने धीरे से आधे लंड को बाहर निकाला और फिर धीरे से अंदर डाल दिया.

पहले ऐसे ही धीरे धीरे आधा लंड बाहर निकाल कर फिर अंदर डाल देता.

थोड़ी देर ऐसे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा.

आड़ा लंड बाहर निकाल कर फिर अंदर डालने से वो मुझे कस के पकड़ कर लंड का दर्द के साथ मज़ा ले रही थी.

मैं ने धीरे धीरे अपनी गति बढ़ा दी .गति बढ़ने से रज़िया दर्द की जगह शीष्कारिया लेने लगी .

रज़िया को मज़ा आ रहा था .रज़िया ने अपने पैर मेरी कमर पे रख कर मुझे कस के पकड़ लिया.

रज़िया मज़े मे शीष्कारिया लेने लगी. मुझे भी मज़ा आ रहा था

मैं ने ने भी गति बढ़ा दी .ऐसा करने से रज़िया झड गयी .

चूत का पानी मतलब चूत के लिए दर्द कम करने की दवा थी.

रज़िया तो झड गयी पर मे अभी तक नही झडा था

मैं रज़िया की चूत मारता गया.

रज़िया की चूत मे ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और रज़िया मेरे धक्कों का मज़ा भी लेती और और अपनी चूत से मुझे मज़ा भी देती गयी.

रज़िया ने फिर पानी छोड़ दिया.

रज़िया ने चुदाई करते हुए 2 बार पानी छोड़ा जिस की वजह से सील टूट ने जो खून निकला था वो पानी के साथ बह कर चूत से बाहर आ गया.

मैं ने अभी तक हार नही मानी थी. पर कुवारि चूत के सामने मैं ने भी जल्दी अपने घुटने टेक दिए.

आख़िरी के कुछ जोरदार धक्के मारने के बाद मैं ने अपना वीर्य रज़िया की चूत मे डाल दिया.

मेला शुरू होने के बाद पहली चूत मे वीर्य डाला था.

पहली चूत वो भी कुवारि वो भी रज़िया की मज़ा आ गया.

मेले की पहली चूत अपने साथ एक और चूत लेकर आई थी.

दूसरी चूत भी कुवारि ,

रज़िया की चूत मे वीर्य डालने के बाद मैं उसके पर गिर गया

 


491

रज़िया की चूत मे वीर्य डालने के बाद मैं रज़िया के उपर गिर गया.

मैं रज़िया के उपर गिरते ही हमारी चुदाई ख़तम हो गयी.

हमारी चुदाई ख़तम हो गयी. मतलब रुकसाना

मैं रज़िया के उपर लेटा रहा और रुकसाना की तरफ देखने लगा.

जहाँ रुकसाना बैठी थी वहाँ पर वो नही थी.

कहाँ गयी रुकसाना. मैं रुकसाना को देखने के लिए दूसरी तरफ सर घुमा रहा था कि रुकसाना ने मेरे कंधो को पकड़ लिया.

रुकसाना मेरे कंधे को पकड़ कर रज़िया के उपर से उठा रही थी.

रुकसाना-उठो ना

अवी-क्या है

रुकसाना-रज़िया के साथ हो गया अब मेरी बारी है

अवी-रूको 2 मिनिट मैं थक गया हू

रुकसाना-थक गये

अवी-हाँ

रुकसाना-40 मिनिट से मैं रुकी हुई थी.अब और रुकना होगा.

अवी-हाँ

रुकसाना-मैं और नही रुक सकती. जब से तुम रज़िया के साथ चुदाई कर रहे थे तब मैं क्लॉक की तरफ देख रही थी.और रज़िया की चुदाई ख़तम होने का इंतज़ार कर रही थी. मेरे लिए और रुकना मुश्किल होगा. 1 मिनिट मेरे लिए 1 साल के बराबर था.

अवी-(रुकसाना की बात सही है.रुकसाना हमारी चुदाई देख कर गरम हो चुकी है. उसे और रोकना मतलब कुछ भी हो सकता है. शायद रुकसाना अपनी गरमी ठंडी करने के लिए किसी और के पास जा सकती है.)बस 5 मिनिट और रूको. मैं लंड साफ करके आता हू.

रुकसाना-बस 5 मिनिट उस से ज़्यादा 1 सेकेंड नही

अवी-5 मिनिट

रुकसाना पे तो चुदाई का भूत सवार हो चुका है.

रुकसाना के साथ इतनी जल्दी चुदाई करने के लिए,लंड भी तो खड़ा हो ना चाहिए.

एक काम करता हू ज़ोया की दी हुई सेक्स की गोली खा लेता हू.

मैं रज़िया के उपर से उट गया.

और लंड को रज़िया की चूत से बाहर निकाल लिया.

लंड खून और हम दोनो के पानी की वजह से गंदा हो गया था.

अवी-ये देखो ,लंड को साफ करना ज़रूरी है कि नही.

रुकसाना-हाँ,

अवी-साफ करू या तुम्हारी चुदाई करू

रुकसाना-पहले साफ करो फिर चुदाई करना

अवी-ये की ना समझदार वाली बात

और मैं ने ज़ोया की दी हुई गोली ले ली और बाथरूम मे चला गया.

बाथरूम मे जाने के बाद मैं ने पहले गोली खा ली. और बाद मे लंड को साफ करने लगा.

लंड को साफ करते हुए लंड फूलने लगा था.

मैं ने लंड को अच्छे से साफ किया.

लंड आधा खड़ा हो गया था.

मेरी सफाई तो हो गयी. रज़िया की सफाई करने की बारी थी.

पर ये क्या, घर2 की तरह यहाँ पर पानी गरम करने को कुछ नही था.

रज़िया को तो गरम पानी की ज़्यादा ज़रूरत है.

पानी गरम करने के लिए कुछ मिलता है कि नही ये देखने लगा.

मैं बाथरूम को अच्छे से देखने लगा.

बाथरूम मे एक कॉर्नर मे कुछ समान रखा हुआ था.उसमे पानी गरम करने की चीज़ ढूँढने लगा.

वहाँ पर मुझे वाइयर और स्प्रिंग जैसा कायिल मिल गया. जिसे मैं हीटर की तरह इस्तेमाल कर सकता था.

मैं ने कायिल को वाइयर के साथ जोड़ कर पानी गरम करने का हीटर बना दिया.

हीटर को पानी के बक्केट मे डाल कर स्विच ऑन किया.

हीटर भपके मारने लगा .पानी गरम होने लगा.

कल मार्केट मे जाकर पहले गरम पानी करने के लिए हीटर लेकर आउन्गा.

पानी 2 मिनिट मे गरम हो गया. ये तो बहुत काम की चीज़ निकली.

पानी गरम हो गया.

स्विच ऑफ करने के बाद मैं ने हीटर को अलग रख दिया.

पानी बहुत गरम हो गया था.रुकसाना और रज़िया पानी इसतमाल कर सके इस लिए मैं ने आधे पानी को दूसरे बक्केट मे डाल दिया.

बक्केट को मैं बाजू मे रख रहा था कि एक गड़बड़ हो गयी. मेरा पैर कायिल पर गिर गया. कायिल गरम था

एक जोरदार चटाका लगा. पैर जल गया. वो अच्छा हुआ कि जल्दी पैर उठा लिया था. पर हल्की सी जलन हो रही थी.

एक काम ठीक से नही कर सकता मैं.मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था.

गुस्सा निकालने के लिए मैं ने दीवार पर घूँसा मारा.

एक और गड़बड़ हो गयी. दीवार पर घूँसा मारने से दीवार पर लगा हुआ मिरर नीचे गिर गया.

वो अच्छा हुआ कि एक बक्केट ठीक मिरर के नीचे थी जिस की वजह से मिरर पानी मे गिर गया और टूटने से बच गया.

ये क्या मिरर के पीछे दीवार मे समान रखने की जगह थी. और वहाँ पर कुछ समान था.

शायद ये समान चाचा का था.चाचा ने वहाँ पर क्या रखा है वो देख ने लगा.

ये क्या कॉंडम, चाचा यहाँ पर कॉंडम रखते है. चाचा यहाँ पर किस की चुदाई करते होगे.

ज्योति बुआ और मंगला काकी के बाद किसी और के साथ भी चुदाई करते होंगे.

मैं फिर से वहाँ देखने लगा.वहाँ पर एक पेज था. उस पेज पे कुछ लिखा था.

उस पेज मे औरतो के नाम लिखे हुए थे. और नाम के सामने डेट लिखी हुई थी.

एक के साथ मंडे,दूसरी की साथ थर्सडे इस तरह लिखा था.

सभी औरते हमारे खेत मे काम करने वाली थी.

तो इस लिए चाचा हमे खेत मे नही आने देते थे. कही चाची और मुझे चाचा के बारे मे पता ना चल जाए.

मैं पेज की दूसरी तरफ देख रहा था .वहाँ पर 2 साल पहले की डेट लिखी हुई थी.

तो ये 2 साल पहले के चाचा के कारनामे थे.

मंगला काकी के घर पे चाचा ने सिर्फ़ ज्योति बुआ का नाम लिया था. मतलब इन औरतो के साथ चाचा अब चुदाई नही करते

ये पुरानी बात है. अगर ये पुरानी बात नही होती तो मैं चाची को सब कुछ बता देता.

पर ये कॉंडम तो नये लग रहे है. शायद चाचा ने ज्योति बुआ के साथ चुदाई करने के लिए लाए होंगे. पर मेरी वजह से हो नही पा रही है.

मैं ने पेज और कॉंडम वहाँ पर वापस रख दिए. और मिरर को दीवार पर लगा कर बाथरूम से बाहर आ गया.

रज़िया वैसे ही लेटी हुई थी जैसा मैं छोड़ कर गया था.

मेरे बाथरूम से आने पर रुकसाना खुश हो गयी.

मैं पहले रज़िया के पास चला गया.

अवी-रज़िया

रज़िया-हाँ

अवी-दर्द हो रहा है

रज़िया-हाँ

अवी-ये लो पेन किल्लर ,इसे खाने से आराम मिलेगा

रज़िया ने पेन किल्लर ले ली.

अवी-बाथरूम मे तुम्हारे लिए गरम पानी रखा है .उसका इस्तेमाल करना. गरम पानी से तुम्हें अच्छा लगेगा.

रज़िया-शुक्रिया

अवी-चलो मैं तुम्हें बाथरूम मे लेकर चलता हू.

फिर मैं ने रज़िया को उठा कर बाथरूम मे ले गया.

रज़िया को बाथरूम मे छोड़ ने के बाद मैं रुकसाना के पास आ गया.

रुकसाना-हो गया

अवी-हाँ

रुकसाना-चलो शुरू करते है

अवी-कहाँ से शुरू करना चाहती हो

रुकसाना-सोचते हुए, पहले तुम मेरा पानी पी लो फिर मैं पिउन्गी

अवी-ठीक है ,तो लेट जाओ बेड पर

रुकसाना बेड पर लेट गयी

 


492

रुकसाना बेड पर लेट गयी.

रुकसाना की चूत को देखने लगा. रज़िया के चूत की ड्यूप्लिकेट कॉपी थी.

जैसी रज़िया की चूत थी वैसी रुकसाना की चूत थी.

पर रुकसाना की चूत गीली हो चुकी थी.

रुकसाना की चूत लावा छोड़ने को तय्यार थी.

अगर मैं ने रुकसाना की चूत को हाथो से मसला तो हाथ लगते चूत से पानी निकल जाएगा.

मैं ने हाथ लगाने की बजाय सीधा जीभ से वॉर करने का सोचा.

मैं ने रुकसाना के पैरो को फैला दिया.

और चूत को चाटने की बजाय सीधा मुँह लगा कर चूसना शुरू किया.

चूत को चूस्ते ही रुकसाना ने अपना पानी छोड़ना शुरू किया.

रज़िया की चुदाई ख़तम होने तक रुकसाना ने कंट्रोल करके रखा था वो सारा पानी मेरे मुँह मे चला गया.

रुकसाना की चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ा

रुकसाना ने बेडशीट को मुट्ठी मे पकड़ कर पूरी ताक़त के साथ अपना पानी मेरे मुँह डाल दिया.

मैं रुकसाना का सारा पानी पी गया. रुकसाना के पानी मे महक ज़्यादा थी.

रुकसाना का पानी पीने के बाद मैं ने रुकसाना के चेहरे की तरफ देखा ,रुकसाना के चेहरे पे सुकून था. रुकसाना रिलॅक्स हो गयी थी.

अवी-अब कैसा लग रहा है

रुकसाना-अब कही जाके अच्छा लग रहा है

अवी-तो शुरू करे खेल

रुकसाना-मैं करू

अवी-तुम करना चाहती हो ,ठीक है करो

रुकसाना-तो लेट जाओ बेड पर

मैं बेड पर लेट गया.

मेरे लेटते ही रुकसाना मेरे लंड के पास बैठ गयी .

और मेरे लंड को हाथ मे पकड़ कर दबाने लगी.

रुकसाना के दबातें ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

रुकसाना-तुम्हारा लंड तो हाथ लगाते ही खड़ा हो गया

अवी-तुम्हारी चूत ने तो मुँह लगाते ही पानी छोड़ दिया था.

लंड खड़ा होने के बाद भी रुकसाना मेरे लंड को दबाती रही.और हाथ से मूठ मारने लगी.

अवी-हिला कर पानी निकालने वाली हो

रुकसाना-रूको तो सही,

और रुकसाना ने लंड को उपर से नीचे तक अपनी जीभ से चाट लिया

फिर रुकसाना ने पूरे लंड को मुँह मे ले लिया और जल्दी से बाहर निकाल लिया

ऐसा रुकसाना ने 10 12 बार किया.

फिर आधे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी.

रुकसाना मज़े लेते हुए लंड को चूस रही थी.

जो कर रही थी वो रुकसाना कर रही थी.

मैं चुप चाप बेड पर लेटा हुआ था. रुकसाना के लंड चूसने से मुझे मज़ा आ रहा था पर चुप चाप लेते रहना मुझे पसंद नही था.

अवी-रुकसाना

रुकसाना ने मेरी तरफ देखा पर लंड को मुँह मे से बाहर नही निकाला.

अवी-तुम अकेली मज़ा ले रही हो.मुझे भी मज़ा लेने दो

रुकसाना ने लंड मुँह मे से बाहर निकाल लिया.

रुकसाना-तुम ने रज़िया के साथ मज़ा लिया है ,अब मुझे लेने दो मेरे बाद तुम लेना

अवी- तुम लो ना मज़ा ,मैं तुम्हें रोक कहा रहा है.बस तुम पैरो के बीच मे बैठ कर लंड मत चूसो .मेरे पेट पर गोदी की तरह बैठ जाओ

रुकसाना-इस से क्या होगा

अवी-तुम्हें ज़्यादा मज़ा आएगा

रुकसाना-सच

अवी-हाँ

रुकसाना ने लंड को हाथ मे पकड़ा रखा और मेरी पेट पर बैठ गयी.

अवी-ऐसा नही गोदी की तरह थोड़ा पीछे हो कर

मैं मे जैसा कहा वैसा रुकसाना ने किया.

रुकसाना की चूत मेरे मुँह के उपर आ गयी.

रुकसाना-तो तुम 69 पोज़िशन की बात कर रहे थे.

अवी-तुम्हें पता है 69 पोज़िशन

रुकसाना-हाँ, सीधा बता देते ,

अवी-जाने दो,तुम अपना काम शुरू करो मैं अपना काम शुरू करता हू(मुझे लगा कि रुकसाना गाओं की लड़की है उसे 69 पोज़िशन के बारे मे क्या पता होगा. पर मैं ग़लत था. रुकसाना को तो सब पता है.)

रुकसाना ने लंड चूसना शुरू कर दिया.

मैं ने भी अपना काम शुरू किया.

मैं ने सब से पहले रुकसाना की चूत के अंदर अपनी उंगली डाल ने की कोशिश की ,पर रुकसाना की टाइट चूत मे उंगली नही गयी.

मैं ने थोड़ा ज़ोर लगाया तो आधी उंगली चूत मे चली गयी. चूत मे उंगली जाते ही रुकसाना उछल पड़ी.

रुकसाना ने लंड मुँह मे से बाहर निकाल लिया और बोली थोड़ा आराम से करो

मैं ने रुकसाना की तरफ स्माइल की और अपने काम मे लग गया. रुकसाना भी लंड चूसने लगी.

फिर मैं ने उंगली बाहर निकाल ली और रुकसाना की चूत को मसल्ने लगा.

चूत को मसल ने के बाद मैं ने अपनी जीभ उस की चूत पर रख कर रुकसाना की चूत को चूसना शुरू कर दिया

रुकसाना की चूत चूस्ते ही रुकसाना ने लंड को मुँह मे से बाहर निकाला और शीष्कारिया लेने लगी आआआ ह्म्म्म्म आआआ अवी तूमम्म्मने आआग लगाआ डीईइ आआ सुउुउउ आऐईयईईईई अम्म एमेम एयाया ओह्ह्ह्ह

रुकसाना तो अपने मज़े मे थी.फिर मैं ने रज़िया की तरह रुकसाना की चूत के होंठ खोल कर अपनी जीभ उस की चूत मे डाल कर चूत का मज़ा लेने लगा.

जीभ चूत के अंदर तक जाने से रुकसाना ने फिर से सिसकारियाँ लेनी शुरू की एम्म्म अहह एम्म और उंड़ईएररर हााअ ऐसे हीईिइ

फिर चूत के अंदर के भाग को अपनी जीभ से गुद्गुद्दि करने लगा. आआआअ ओईईई अह्ह्ह्ह एम्म

और एक जोरदार शीष्कारी ले कर रुकसाना ने पानी छोड़ दिया. फिर से रुकसाना का पानी पी कर प्यास और बढ़ गयी

रुकसाना तो पानी छोड़ने के बाद मेरे उपर गिर गयी. और हाँफने लगी.

रुकसाना की चूत मेरे चेहरे पे पड़ते ही मैं ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया.

मेरा चेहरा बाथरूम की तरफ था.

बाथरूम ,ये रज़िया अभी तक बाथरूम से बाहर क्यू नही आई. कही इसे हीटर का झटका तो नही लग गया

 


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ये रज़िया बाथरूम से बाहर क्यू नही आई.कही हीटर का झटका

पानी तो गरम करके रखा था ,हीटर का झटका तो नही लगेगा.

फिर इतनी देर से अंदर क्या कर रही है

अवी-रुकसाना उठो मेरे उपर से

रुकसाना-तुम्हारे उपर आराम करने दो ना

अवी-जितना आराम करना है बाद मे कर लेना .मुझे रज़िया को देखना है.

रुकसाना-रज़िया को देखना है,उसकी चुदाई तो हो गयी अब मेरी बारी है

अवी-तुम्हारी ही चुदाई करूँगा .बस रज़िया को देखता हू कि इतनी देर से बाथरूम मे क्या कर रही है.

रुकसाना-जल्दी आना. अभी तक मेरी आग ठंडी नही हुई.

मैं ने रुकसाना को अपने उपर से अलग किया. और बाथरूम का गेट खटखटाने लगा.

अवी-रज़िया,रज़िया

रज़िया-क्या है

अवी-तुम इतनी देर से अंदर क्या कर रही हो

रज़िया-गरम पानी से सिकाई कर रही हू

अवी-थोड़ा पानी रुकसाना के लिए रखना

रज़िया-हाँ रख दूँगी.

चलो रज़िया तो गरम पानी से चूत साफ कर रही है.

मैं ने वापस रुकसाना पर फोकस किया.

ये क्या रुकसाना तो पूरी तरह से तय्यार है.

रुकसाना ने अपनी गंद के नीचे पिल्लो रख दिया था और पैरो को फैला कर चूत मे लंड लेने को तय्यार थी.

मेरा लंड रुकसाना का खून पीने के लिए तय्यार था

मैं ने बेड पर छलान्ग लगाई.

रुकसाना के पैरो की बीच आ गया.और लंड को चूत पर रख दिया

रुकसाना-रूको

अवी-क्या हुआ.

रुकसाना-हम ने किस नही किया.तुम ने मेरे बूब्स को चूसा नही.

अवी-वो सब लंड डालते हुए कर लूँगा

रुकसाना-तब तो मुझे दर्द होगा. मज़ा नही आएगा.

अवी-किसी और दिन कर लूँगा

रुकसाना-किसी और दिन नही, हम तो 10 दिन के लिए मेले मे आए है. उसके बाद चले जाएँगे आआहह मर गयी,क्या किया आआहह मर गयी....ऐसे...बीनाआ बताइई....आआअहह

जब रुकसाना बातें कर रही थी तब मैं ने लंड को चूत पर रख कर जोरदार झटका मारा. इतना जोरदार कि मेरा लंड एक बार मे रुकसाना की चूत की सील तोड़ते हुए 5 इंच तक लंड अंदर डाल दिया.

अवी-देखो अब तुम्हारे बूब्स चूस्ता हू

और मैं रुकसाना के बूब्स को चूसने लगा.

वही अपना तरीका एक हाथ से बूब्स को मसलना और दूसरे बूब्स को चूसो

मैं ने रुकसाना के मुँह को खुला रहने दिया.

रुकसाना चिल्ला रही थी.मार डाला....रज़ियाअ....मार डाला....रज़ियाअ

ये मोत्त्त्ताअ लुंद्द्द्द्ड ने मेरिí जान ले लीइीइ

अम्मी दर्द्द्द्द हो रहाआ है.

रज़िय्ाआ तूने कैसीए लिय्ाआ था

आअहह मर गयी.

मैं ने रुकसाना पर ध्यान नही दिया .बस अपना काम करता रहा

रुकसाना के बूब्स को चूस्ता रहा. मसलता रहा.

एक बूब के निपल को हाथ मे पकड़ कर खिचता और दूसरे बूब के निपल को दाँतों मे पकड़ खिच लेता

पूरे मज़े लेते हुए रुकसाना के बूब्स को मसल रहा था.

आआहह बाहर निकककल्ल्लू...मुझे नहिी आआहह

अम्मिईिइ मर गयी...रज़िय्ाआ आआहह बचा मुझे

मैं ने दूसरे बूब्स को चूसना शुरू किया

आआआहह आअराम से .....हाँ ऐसे ही...दर्द्दद्ड...मजाआा...ये क्या हो रहाा....और ज़ोर से चूसूऊ....चूत मे दर्द्द्द्द्द

ये क्या हो रहााअ हाईईइ...एक तरफ दर्द्द्द्द.... दूसरी तरफ मजाआ.....

रुकसाना का दर्द कम हो रहा था. रुकसाना को दर्द के साथ मज़ा आ रहा था

मैं ने बूब्स चूसना बंद किया और 5 इंच लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा

पहले तो थोड़ा बाहर निकाल कर अंदर डालने लगा. और फिर धीरे धीरे चुदाई करने लगा.

बूब्स चूसना बंद किया था पर दबाना शुरू था. हाथो मे रुकसाना के बूब्स थे जो मसल्ने से ढीले पड़ रहे थे

इधर धक्के लग रहे थे .और उधर रुकसाना का दर्द ख़तम हो रहा था.

रुकसाना भी मज़े में शीष्कारिया ले रही थी.

आआहह....मजाआ...उईईइ....तुम्हाराआा...जवब्ब्ब्बब....आअहही

रुकसाना मज़े मे शीष्कारी ले रही थी.

मैं धीरे धीरे धक्के मार रहा था..

अवी-रुकसाना कैसा लग रहा है

रुकसाना-आअहह मज़ा आआ रहाआ है

अवी-पूरा डालु

रुकसाना-नही,आअहह हाँ,नही,आअहह हाँ मज़ा दो मुझीई

रुकसाना बोलती बहुत है. मैं ने रुकसाना का बोलना बंद किया. मैं ने रुकसाना के होंठो पे किस करना शुरू किया.

रुकसाना, चूत मे धक्के की वजह से मेरे होंठो को चूसने लगी.

रुकसाना के होंठ बंद करते ही मैं ने एक झटके मे पूरा लंड चूत मे डाल दिया.

चूत मे पूरा लंड जाते ही रुकसाना की चीख निकल गयी.

मैं रुकसाना के होंठो को चूस्ता रहा.

लंड चूत मे जाते ही मैं रुकने की बजाय धक्के मारता गया.

रुकसाना दर्द और मस्ती मे मेरे होंठो को चूस रही थी.

मैं धक्के मारता गया.और किस करना बंद किया.

जोरदार धक्का मारते ही रुकसाना के मुँह से हमम्म्म हप्प्प्प्प्प सस्स्स्स्स्सस्स ऊऊीीईई उउउफफफफफफफ्फ़ आआहह और ऊऊऊऊहह

रुकसाना ने अपने पैरो से मेरे कमर को पकड़ लिया.

और चुदाई का मज़ा लेने लगी .मेरे धक्के मारते ही रुकसाना नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा के मेरे धक्के का जवाब देती.

रज़िया की चूत की तरह रुकसाना की चूत टाइट थी जिस की वजह से चोदने मे बहुत मज़ा आ रहा था.

उसकी टाइट चूत को चोदने लगा.

मैं ने धक्के मारने की गति बढ़ा दी. मेरी गति बढ़ते ही रुकसाना ज़ोर ज़ोर से शीष्कारी लेने लगी

ऊऊऊओिईईईईई अम्म्म्मममी आअहह बहुत मज़ा आ रहा है रीए आअहह ऊऊीीईई सस्स्स्स्स्सस्स आआआहह

और रुकसाना का बदन अकड़ने लगा.रुकसाना ने मुझे ज़ोर से गले लगाया

मैं ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था आआआआआआआआआआआआ हह हह की आवाज़ के साथ ही झड गयी

मेरा भी झड़ने वाला था.मैं ने जोरधर धक्के मारने शुरू किए.

रुकसाना झड़ने के बाद फिर से मस्ती मे आ गयी. और मेरा साथ देने लगी.

मेरे जीभ ने रुकसाना का 2 बार पानी निकाला था और लंड ने भी रुकसाना का 2 बार पानी निकाला.

मैं ने 10 12 जोरदार धक्के मार कर अपनी मलाई रुकसाना की चूत मे डाल दी.

मेरे वीर्य की पिचकारी निकलती रही और

रुकसाना की चूत को भरती गयी.

दोनो की सासे तेज़ी से चल रही थी.

वीर्य रुकसाना की चूत मे डालने के बाद मैं एक दम से उसके बदन पे गिर गया.

हम दोनो लंबी लंबी साँसे लेते हुए एक दूसरे से चिपके रहे

 
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