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मैं और मेरा परिवार

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530

फिर मैं ने अपने कपड़े पहन लिए. और ठकुराइन का बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा.

ठकुराइन तो थोड़ा समय लग रहा था .पता नही अंदर क्या कर रही थी.

मैं ना बैठ सकता था बस खड़ा रह कर ठकुराइन का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी देर बाद ठकुराइन ने बाथरूम का गेट खोल कर मुझे अंदर बुलाया

ठकुराइन-ये क्या तुम ने कपड़े क्यूँ पहने

अवी-काम हो गया तो पहन लिए

ठकुराइन-जब मैं कहूँगी तब तक तुम हवेली से बाहर नही जा सकते हो

क्या समझे

अवी-जी समझ गया.

ठकुराइन-समझ गये हो तो कपड़े निकाल कर बाथरूम मे आकर मुझे नहला दो

अवी-(क्या मुसीबत है)जी अभी आया.

मैं ने कपड़े निकाल लिए और बाथरूम मे चला गया.

ठकुराइन ने अपने पेटिकोट को उपर बूब्स के पास बाँध दिया था.

ठकुराइन-ये तुम्हारा लंड इतना लाल कैसे हो गया.

अवी-आपकी चुदाई करने से

ठकुराइन-ये तो कुछ ज़्यादा ही कमजोर दिख रहा है.

अवी-थोडा सा,पर कल तक ठीक हो जाएगा.

ठकुराइन-जाने दो फिर ,तुम बेडरूम मे जाओ बाकी चुदाई फिर कभी कर लेंगे.

अवी-(ठकुराइन की बात सुनकर दिल को सुकून मिला) जी

पता नही ठकुराइन बाथरूम मे मुझसे क्या करवाती.

अच्छा हुआ मेरे लंड ने मुझे बचा लिया

मैं बेडरूम मे आकर फिर से क्रीम को लंड पर लगा लिया और क्रीम को अपने पास रख लिया. और कपड़े पहन कर ठकुराइन का इंतजार करने लगा.

ठकुराइन पहले बाथरूम से टवल मे बाहर आ गई और फिर नये कपड़े लेकर फिर बाथरूम मे चली गई.

ठकुराइन कपड़े पहन के आ गई .

ठाकूरीन-अपना लंड दिखाओ मुझे

मैं ने फिर से लंड बाहर निकाला

ठकुराइन-बेड पर लेट जाओ

मैं बेड पर लेट गया.

और ठकुराइन कुछ ढूँढने लगी.

ठकुराइन-वो क्रीम कहाँ गई.

अवी-मेरे पास है.

ठकुराइन ने क्रीम ली और मेरे लंड पे क्रीम लगाने लगी. बड़े प्यार से क्रीम लगा रही थी.

ठकुराइन-इस तरह करने की क्या ज़रूरत थी. दर्द हो रहा है

अवी-(नही ) थोड़ा सा

ठकुराइन-ये क्रीम लगा लेना 24 घंटे मे पहले जैसा हो जाएगा. और आराम करना ,

अवी-जी

ठकुराइन-और ठकुराइन ने बड़े प्यार से मेरे सर पे किस किया.

ठकुराइन का ये नया रूप देख कर मैं उनको समझ नही पाया.

ठकुराइन-थोड़ी देर कपड़े मत पहनना

अवी-जी

और ठकुराइन मेरे पास बैठ गई .और लंड का ख़याल रखने लगी.

ठकुराइन का एक हाथ लंड पर और दूसरा हाथ मेरे सर पे घुमा रही थी.

ठकुराइन के ऐसा करने से मुझे नींद आ रही थी.

मेरी आँखे लग गई. और ठकुराइन वैसे ही मेरे लंड को क्रीम की मालिश देने लगी.

थोड़ी देर बाद किसी ने गेट नॉक किया.

ठकुराइन-कौन है

नौकरानी- मालकिन ,ठाकुर जी आ गये .आप को नीचे याद कर रहे है.

ठकुराइन-ठीक है, उनसे कहो 10 मिनट मे आ रहे है

नौकरानी चली गई

ठकुराइन- अवी सुनो

अवी-जी ठकुराइन

ठकुराइन-नीचे कोई पूछेंगा कि तुम यहाँ क्या कर रहे तो क्या खाओगे

अवी-मैं क्या कहूँगा.

ठकुराइन-(ये भी मुझे बताना होगा.) कहना कि रणजीतसिंघ से मिलने आए थे.और इस के सिवा एक वर्ड ज़्यादा बोला तो मुझ से बुरा कोई नही होगा

अवी-समझ गया.(ठाकूरीन का सच बता दूं,नही बता सकता, मेरे पास प्रूफ नही है.)

ठकुराइन-10 मिनट है हमारे पास, तुम खुद को ठीक करो फिर हम नीचे जाएँगे.

मैं फ्रेश हो गया और ठकुराइन के साथ नीचे हॉल मे आ गया.

हॉल मे रणजीतसिंघ अपनी बीवी कामिनी, ठाकुरजी, कुवरसिंघ अपनी बीवी रेशमा और ठाकुर की बेटी पायल बैठे थे

हम भी उनके पास जाकर बैठ गये.

मुझे हवेली मे देख कर सब शॉक्ड हो गये.

ठाकुरजी-अवी तुम कब आए

मैं बोलने वाला था कि ठकुराइन बोल पड़ी

ठकुराइन-अबी 10 15 मिनट पहले आया है.

ठाकुरजी-कुछ काम से आए हो

अवी-जी

ठकुराइन-रणजीतसिंघ को मिलने आया था.

रणजीतसिंघ-मुझ से मिलने, एक कॉल कर देते

अवी-ठकुराइन की तरफ देखते हुए ,मेरा मोबाइल खराब हो गया है.

रणजीतसिंघ-कोई बात नही चलो मेरे रूम मे चल कर बात करते है.

रणजीतसिंघ और कामिनी मुझे अपने रूम मे ले गये.

रणजीतसिंघ-अब बोलो क्या काम था जिस के लिए हवेली आना पड़ा.

अवी-कुछ खास काम नही था बस ऐसे ही हवेली घूमने आ गया.

रणजीतसिंघ की बीवी हमारे पास बैठी थी.

कामिनी-क्या रंजीत डार्लिंग,अपने दोस्त से मुझे नही मिलवाओगे

रणजीतसिंघ-रणजीतसिंघ का दोस्त है, ऐसा वैसा थोड़े ही होगा.

कामिनी-कुछ भी कहो, अवी काम का आदमी है, बैठे बैठे मुझे ठकुराइन बना दिया.

अवी-आप कहो तो सच मे बना सकता हूँ.

कामिनी -खुद पे इतना यकीन है.

अवी-आज़माके देख सकती हो,

रणजीतसिंघ-कामिनी,अवी को मैं एक बार आज़माके देख चुका हूँ, और इस ने मुश्किल काम ,जो मैं भी नही कर पाया इस ने 2 मिनट मे कर दिया ,

कामिनी-फिर बना दो मुझे ठकुराइन.

अवी-1 महीने मे आप गाओं की ठकुराइन होगी.

रणजीतसिंघ मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगा.

कामिनी-रंजात डार्लिंग ने इतने सालो मे नही किया और तुम 1 महीने मे करने का प्रॉमिस कर रहे हो.

अवी-अपना तो यही स्टाइल है.

कामिनी-चलो ठीक है अगर तुम ने मुझे ठकुराइन बना दिया तो मैं तुम्हारी गुलाम बन जाउन्गी.

रणजीतसिंघ-क्या डार्लिंग ,फिर मेरा क्या होगा.

कामिनी-फिर आप बना दो मुझे ठकुराइन

रणजीतसिंघ-वो सब जाने दो पहले अवी के लिए कुछ नाश्ते का इंतज़ाम करो

कामिनी-पहले बात तो पूरी होने दो

रणजीतसिंघ-कैसी बात

कामिनी-मुझे ठकुराइन बनाने की.

रणजीतसिंघ-तुम पागल हो, अवी तुम्हारे साथ मज़ाक कर रहा था.और तुम ने सच मान लिया.

रणजीतसिंघ और मैं हँसने लगे.

कामिनी का चेहरे पे गुस्सा दिख रहा था.

अवी-सॉरी भाभिजी.

कामिनी-तुम्हें तो मैं

रणजीतसिंघ-मैं ने अवी को ऐसा करने को कहा था

कामिनी-आपने, आज रात बाहर सोना पड़ेगा आपको ,यही सज़ा है मेरा मज़ाक उड़ाने की

और कामिनी बेड पर जाकर अपना चेहरा पिल्लो मे छुपा कर अपना गुस्सा हमे दिखा रही थी.

 


531

अवी-भाभिजी तो गुस्सा हो गई.

रणजीतसिंघ-कामिनी की टेन्षन तुम मत लो मैं एक मिनट मे उसका मूड ठीक कर दूँगा.

अवी-वो कैसे

रणजीतसिंघ-तुम्हें पता है मेरी बीवी को खाना बनाना नही आता.

अवी-उनको खाना बनाने की ज़रूरत क्या है

रणजीतसिंघ-मेरी लिए तो बनाना पड़ता है.और मुझे इशारे से बात कंटिन्यू करने को कहा.

अवी-मैं नही मानता, भाभी को देख के लगता है कि उनके हाथ से खाना अगर एक बार खा लिया तो ज़िंदगी सफल हो जाएँगी.

बेड पर थोड़ी हलचल हुई

रणजीतसिंघ-मैं भी ऐसा ही सोचता था पर मैं ग़लत था.

अवी-ये होई नही सकता

रणजीतसिंघ-तुम्हे एक बात बताता हूँ फिर तुम्हें मेरी बात का यकीन हो जाएगा.

अवी-कहो

रणजीतसिंघ-पहले दिन जब कामिनी ने खाना बनाया था ना तो एक एक नीवाला बड़ी मुश्किल से खाना पड़ा.

अवी-वो क्यू

रणजीतसिंघ-नही ख़ाता तो कामिनी गुस्सा हो जाती ,और कामिनी के गुस्से से मुझे डर लगता है.

बेड पर फिर हलचल हुई.

अवी-और अगर भाभिजी को गुस्सा आ गया तो आप क्या करते हो

रणजीतसिंघ-बताऊ या करके दिखाऊ.

अवी-करके दिखाओ

रणजीतसिंघ-जब कामिनी को गुस्सा आता है तो ऐसे ही बेड पर सोती है, फिर मैं फ़्रीज़ मे से आइस निकालता हूँ. और धीरे धीरे कामिनी के पास जाता हूँ.

कामिनी-रूको, आगे कुछ मत करना,आप को अपने दोस्त को कर के दिखाने की ज़रूरत नही है. देखो हम गुस्सा नही है.

रणजीतसिंघ-मैं नही मानता,तुम मुझ पर गुस्सा हो, और अवी को देखना है मैं तुम्हारा गुस्सा कैसे गायब करता हूँ.

कामिनी-आप भी ना,

और कामिनी बेड के दूसरे तरफ से उतर गई और भागते हुए रूम से बाहर चली गई.

रणजीतसिंघ-देखा हो गया गुस्सा गायब

अवी-आइस के बाद क्या करते हो ये बताया नही.

रणजीतसिंघ-क्या कर सकता हू, प्यार करता हूँ ,और वो मेरे प्यार मे पिघल जाती है.

अवी-चलो अच्छा हुआ भाभिजी का गुस्सा ख़तम हो गया.

रणजीतसिंघ-वो छोड़ो ये बताओ आज मुझसे मिलने कैसे आ गये.

अवी-ये तो मैं भूल गया.मैं ने तुमको कॉल किया था पर कॉल नही लग रहा था.फिर अचानक मोबाइल भी खराब हो गया.

रणजीतसिंघ-अब बताओ क्यू मिलना था

अवी-आज तुम एक लड़की को भेजने वाले थे ना

रणजीतसिंघ-हां,

अवी-आज मत भेजना ,आज मुझे घर पे रुकना होगा(आज ठकुराइन की वजह से मैं चुदाई करने की हालत मे नही था.)

रणजीतसिंघ-तुम चुदाई करने से इतना मना क्यूँ कर रहे हो.

अवी-मैं मना नही कर रहा ,बस आज भेजने से मना कर रहा हूँ

रणजीतसिंघ-फिर कल चलेगा.

अवी-कल नही परसो.

रणजीतसिंघ-परसो पक्का ना,क्यू कि वो लड़की बार बार ना करने से परेशान हो रही है.

अवी-परसो पक्का

कामिनी-क्या पक्का

कामिनी हमारे लिए नाश्ता लेकर आ गई.

कामिनी-ये लो खा कर देखो मेरे हाथ का

कामिनी ने हमे नाश्ता दिया. कामिनी के हाथ मे जादू था. स्वादिष्ट नाश्ता बनाया था.

अवी-भाभिजी आपका जवाब नही,क्या नाश्ता बनाया था.

रणजीतसिंघ-तुम्हें ये पसंद आया.ताज्जुब की बात है

कामिनी-आप को रात मे देख लूँगी.

कामिनी-तुम मज़ाक करने के सिवा क्या करते हो

अवी-कॉलेज मे जाता हूँ,

कामिनी-तुम तो सच मे बच्चे हो

अवी-पहले सब यही कहते है

कामिनी-और बाद मे

अवी-और बाद मे खुद बच्चे की माँ बनती है.

कामिनी-तुम बाते अच्छी करते हो

अवी-और आप खाना अच्छा बनाती हो

और रणजीतसिंघ ने मेरे सामने कामिनी को किस किया.

कामिनी-क्या कर रहे हो, कौन सामने है ये भी नही देखते

रणजीतसिंघ-तुम हो कि मुझे बात करने नही दे रही हो, इस लिए तुम्हारा मुँह बंद किया.

कामिनी फिर बेड पर जाकर लेट गई.

अवी-तुम फिर भाभिजी का गुस्सा गायब करो मैं चलता हू.

और मैं खड़ा हो गया.

अवी-अच्छा भाभिजी,चलता हूँ, और 1 महीने का प्रॉमिस पूरा करके मिलूँगा.

कामिनी मुझे देखती रही.

मेरे गेट के पास जाते ही रणजीतसिंघ ने कामिनी को मनाना शुरू किया.

 


532

मैं रणजीतसिंघ से रूम से बाहर निकल कर सीडियो के पास आया था कि पीछे से मुझे एक आवाज़े आई.

पायल-सुनो

मैं ने पलट कर देखा,ये ठकुराइन की बेटी पायल थी.

अवी-जी, आपने मुझे बुलाया.

पायल-हां,मुझे तुमसे बात करनी है.

अवी-जी कहिए

पायल-यहाँ नही मेरे पीछे आओ

पायल अपने रूम मे चली गई और मैं पायल के पीछे पीछे उसके रूम मे आ गया.

पायल-खड़े क्यू हो बैठो

अवी-(ठकुराइन ने जो हालत की उसकी वजह से बैठने से पहले दस बार सोचता हूँ)जी

पायल-ये जी जी क्या लगाकर रखा है, मेरा नाम पायल है, मुझे पायल कह सकते हो.

अवी-जी,पायल्जी

और मैं सोफे पर बैठ गया.

पायल-कोल्ड ड्रिंक पियोगे.

अवी-हां,(नाश्ता करने के बाद बिना पानी पिए रणजीतसिंघ के रूम से बाहर आ गया.)

पायल ने हम दोनो के लिए फ़्रीज़ से कोल्ड ड्रिंक निकाली और मेरे पास आकर बैठ गई.

पायल-तुम मुझे जानते हो

अवी-नही और हां

पायल-ये कैसा जवाब हुआ

अवी-आप ठाकुरजी के बेटी हो ये जानता हू और पर्सनाली नही जनता

पायल-पर्सनाली जान ना चाहोगे

अवी-आप मुझ मे इतना इंटेरेस्ट क्यू ले रही हो

पायल-बस ऐसे ही.

अवी-पर्सनाली जान ने के लिए फ्रेंड बन ना पड़ता है.

पायल-ये पता है मुझे

अवी-और फ्रेंड बन ने के बाद लव हो जाता है.

पायल-पहले फ्रेंड बनते है.

अवी-अभी डिसाइड करते है, क्यू कि तुम ठाकुर की बेटी हो और कुछ गड़बड़ हुई तो मैं फस जाउन्गा. और वैसे भी मेरी गर्लफ्रेंड है.

पायल-तुम्हारी गर्लफ्रेंड है फिर प्राब्लम नही होगी, हम बस फ्रेंड बन सकते है

अवी-लेकिन आप मेरी फ्रेंड क्यू बन ना चाहती है.

पायल-फ्रेंड के साथ मेला देखना है मुझे, फॅमिली के साथ मज़ा नही आता.तुम कितने मज़े करते हुए मेला देखते हो , मुझे भी वैसे मेला देखना है.

अवी-मेला,फिर सॉरी

पायल-क्यू ,क्या हुआ

अवी-मैं 10 दिन बिज़ी हू

पायल-तो 10 दिन के बाद फ्रेंड बनते है, मेला तो और 19 दिन है.

अवी-ठीक है, फ्रेंड अब बनाते है और मेला 10 दिन बाद दिखाउन्गा.

पायल-मंज़ूर है,

और पायल ने मेरे साथ हॅंड शेक किया.

अवी-ये क्या था.

पायल-फ्रेंडशिप करने के लिए हॅंडशेक किया.

और मैं ने पायल को खड़ा किया और गले लगा लिया.

अवी-हॅंडशेक करना पुराना स्टाइल है अब गले लग कर फ्रेंडशिप स्टार्ट करते है.

पायल-आइ लीके इट

अवी-अपने बारे मे बताओ

पायल-क्या बताऊ

अवी-तुम वर्जिन हो

पायल-ये क्या बेहुदगी है.

अवी-तुम मेरी फ्रेंड हो ,इस लिए पूछा

पायल-फ्रेंड हूँ तो क्या ऐसे सवाल पुछोगे.

अवी-इस सवाल का मतलब है तुम्हारा बाय्फ्रेंड है क्या. अगर है तो तुम वर्जिन नही हो और नही है तो तुम वर्जिन हो, ये न्यू स्टाइल है

पायल-तुम से तो बहुत कुछ सीख सकती हू, मैं वर्जिन हूँ.

अवी-आज के लिए एक सवाल काफ़ी है

पायल-ये सवाल के चक्कर मे जो पूछना तो वो रह गया.

अवी-क्या पूछना था

पायल-तुम्हारी चोट कैसी है.

अवी-(क्या इसे ठकुराइन के बारे मे पता है) कैसी चोट

पायल-तुम्हारा आक्सिडेंट हुआ था ना.

अवी-कब

पायल-2 हफ्ते पहले, हमारी कार से

अवी-(उसकी बात कर रही हो,उसका इलाज तो मंगला काकी ने कर दिया था.) बस छोटी सी चोट लगी थी.वैसे कार कौन चला रहा था.

पायल-मैं चला रही थी.

अवी-पहली बार था

पायल-मुझे तो कार चलानी आती है. पर पिताजी के सामने नाटक कर रही थी.

अवी-और उस नाटक के चक्कर मे मुझे ऐसी जगह चोट लगी कि किसी को बता नही सकता.

पायल-क्या अभी तक ठीक नही हुए

अवी-नही ,अभी तक दर्द है

पायल-कहाँ लगी चोट

अवी-वो नही बता सकता.

पायल-क्यूँ, हम अब फ्रेंड है.

अवी-नही बता सकता ,समझा करो

पायल-बता नही सकते तो दिखा दो ,शायद मैं कुछ मदद कर दूं,

अवी-(ये तो सुपर आइडिया है. आज ठकुराइन की वजह से मेरा लंड लाल हो गया है. पायल को लंड की फोटो निकाल कर देता हू, 10 दिन फोटो देख देख कर मज़ा लेने देता हूँ.क्या पता काम बन जाए) दो अपना मोबाइल,

पायल-मोबाइल क्यू ,तुम तो चोट दिखा रहे थे

अवी-चोट ऐसी जगह है कि कपड़े निकालने पड़ेंगे .समझा करो

पायल ने कुछ सोचा और मुझे अपना मोबाइल दिया.

और मैं मोबाइल लेकर बाथरूम मे चला गया.

और अपने कपड़े निकाल कर लंड खड़ा करके ,फोटो निकालने लगा.लंड खड़ा होने के बाद मुझे दर्द नही हुआ ,शायद क्रीम का असर हो रहा है.

फोटो मे मेरा चेहरा छोड़ कर सब कुछ था.

मेरी चेस्ट, मेरी बॉडी,मेरा खड़ा लंड ,

20 30 फोटो अलग अलग आंगल्स से निकाल लिए. और वापस लंड पर क्रीम लगा ली.

पायल-क्या कर रहे हो, कितना समय ले रहो हो

अवी-बस हो गया.

और मैं बाथरूम से बाहर आ गया. और मोबाइल पायल को दे दिया.

अवी-मेरे जाने के बाद देखना

पायल-तुम्हारे जाने के बाद देखूँगी तो तुम्हारी हेल्प कैसे करूँगी

अवी-मेरे जाने के बाद देखो, और ऐसा लगे कि मेरी मदद कर सकती हो तो मुझे बुला लेना.मैं आ जाउन्गा.

पायल-मुझे समझ नही आ रहा.

अवी-समझ जाओगी.

पायल-ठीक है

अवी-तो 10 दिन बाद मिलते है.तुम्हें मेला दिखाउन्गा.

और मैं ने पायल को फिर से गले लगा लिया.

पायल भी आराम से मेरे गले लग गई. और मैं अपने घर चला गया.

 


533

हवेली से मैं घर चला गया.

घर पे आते ही पहले मैने अपने रूम मे जाकर अपने दिमाग़ और लंड को आराम देना शुरू किया.

और विद्या को अपने कमरे मे बुलाया. अच्छा हुआ विद्या ने नर्सिंग किया है. और आज मेरे काम आ रही है.

विद्या-सर आपने बुलाया

अवी-सर नही अवी कहो, और जल्दी मेरा जीन्स निकालो पर ध्यान से

विद्या-क्या हुआ

अवी-निकाल कर खुद देख लो

विद्या ने मेरा जीन्स निकाल लिया. और मैं ने अंडरवेर निकालने को कहा.

लंड आधा खड़ा था और लाल हो चुका था.

विद्या-ये क्या हुआ.

अवी-मत पूछो पर इसका कुछ करो

विद्या-तुम्हारे पास कोई क्रीम है.

अवी-मेरी जीन्स मे है, और मोबाइल भी दो मुझे

विद्या ने क्रीम निकाल ली और नाम पढ़ कर लंड पर लगाने लगी.

मैं ने ज़ोया को कॉल किया

अवी-हेलो ज़ोया, मैं अवी

ज़ोया-अवी, इतने दिनो बाद मेरी याद आई,

सारा-ज़ोया मुझे फोन दो

अवी-पहले मेरी बात सुनो, यहाँ एमर्जेन्सी है.

ज़ोया-क्या हुआ

अवी-पिछली बार की तरह लंड खराब हुआ है.

ज़ोया-कितना सेक्स करते हो, तुम्हें क्रीम दी थी ना

अवी-वो है मेरे पास पर उस क्रीम की जगह दूसरी क्रीम लगा ली.

ज़ोया-नाम बताओ

अवी-मैं ने क्रीम का नाम बताया

ज़ोया-ये तो मेरी दी हुई क्रीम से अच्छी है, इस से तो 24 घंटे मे ठीक हो जाओगे

अवी-थॅंक्स, मैं तुम्हें रात मे कॉल करता हूँ.

ज़ोया-पक्का करना. और अपना ख़याल रखा करो

अवी-बाइ

फोन कट कर दिया

विद्या-किसे फोन किया.था

अवी-डॉक्टर को,

विद्या-लो हो गया क्रीम लगा कर

अवी-हो गया. थॅंक्स ,एक काम करो ये क्रीम खरीद ..,जाने दो इतने से हो जाएगा

.

विद्या-और कुछ

अवी-हां, मुझे 5.00 बजे से पहले मत उठाना

विद्या-ठीक है. एक बात पुच्छू

अवी-हां पूछो

विद्या-ये सब कैसे हुआ

अवी-(विद्या को क्या बताऊ) एक औरत मुझे ब्लॅकमेल कर रही है. ये सब उसने किया.

विद्या-ब्लॅकमेल, हमे पोलीस के पास जाना होगा

अवी-जाएँगे पर मेला हो जाने के बाद

विद्या-तब तक उस औरत ने फिर से ऐसा किया तो

अवी-मेला ख़तम होने तक नही करेंगी.

विद्या-जैसा तुम ठीक समझो, पर एक बात कहूँ

अवी-कहो,

विद्या-तुम्हारा लंड गोरा है जिस की वजह से इतना लाल हो गया. वरना सब ठीक है,कुछ नही हुआ है लंड को,

अवी-तुम्हें पसंद आया

विद्या-हां, मुझे कब मिलेगा.

अवी-मेले के बाद ,किसी दिन आराम से करेंगे.

विद्या-मुझे दर्द होगा?

अवी-मैं प्यार से करूँगा.

विद्या-कैसे भी करो ,दर्द तो होगा. मैं नर्स हूँ भूल क्यू रहे हो, मुझे पता है.

अवी-तुम नर्स हो

और मैं ने अपनी आँखे बंद की.

विद्या थोड़ी देर बैठी रही फिर कमरे से बाहर जाने लगी.

अवी-विद्या

विद्या-दर्द हुआ.

अवी-नही, तुम्हें मेडिकल ,डॉक्टर के बारे मे पता होगा ना

विद्या-हां, थोड़ा बहुत पता है. मैं ने सिर्फ़ कोर्स किया है. एक्सपीरियेन्स नही है.

अवी-तुम अपना नालेज शेर कर सकती हो

विद्या-हां, किसे पढ़ना है

अवी-कोमल और रानी को डॉक्टर बन ना है, तुम उनको1 महीने थोड़ा बहुत जनरल बाते बता देना. और रानी के चले जाने के बाद कोमल की मदद करना

विद्या-वो तो मैं कर दूँगी, जितना मुझे पता है मैं बता दूँगी.

अवी-थॅंक्स

विद्या-थॅंक्स कह कर तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो

अवी-थॅंक्स की जगह तुम्हारे एक्सपर्रेन्स के लिए कुछ करता हू.

विद्या-ये ठीक रहेंगा.

अवी-अब मुझे सोने दो ,किसी को डिस्ट्रब मत करने देना

विद्या-मेरे होते हुए यहाँ मक्खी भी नही आ सकती.

फिर विद्या कमरे से बाहर चली गई.

और मैं सोचने लगा कि कल तक में ठीक हो जाना चाहिए.

कल रुकसाना के साथ करना है.

ज़ोया ने कहा कि जल्दी ठीक हो जाउन्गा. और वैसे भी लंड सिर्फ़ लाल हो गया था.

और विद्या ने कहा कि मेरा लंड गोरा है जिसकी वजह से जल्दी लाल हो गया.

रात मे लंड पर क्रीम लगानी होगी.

एक साथ इतने सारे काम, ये कुवरसिंघ, ये ठकुराइन, मोना, रणजीतसिंघ ,मेरा दिमाग़ खराब हो रहा है.

पर सब को एक साथ लेकर चलना ज़रूरी है.

मोना ,कुवरसिंघ, वो गर्ल, ठकुराइन, .ठकुराइन को अलग रखता हू और कुवरसिंघ पे फोकस करता हूँ.

जाने दो जो करूँगा दिमाग़ का इस्तेमाल करके करूँगा.

पहले देखना होगा मोना ने कुवरसिंघ को अपनी तरफ अट्रॅक्ट किया कि नही.

मुझे जो करना है वो सोच समझ कर करना होगा. और मोना को कुछ पता नही चलने दूँगा अपने प्लान के बारे मे

ऐसे इधर उधर की बाते करते हुए मैं सो गया.

 


534

विद्या ने मुझे 5.00 बजे उठाया

विद्या-उठो, 5.00 बज रहे है. सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है

अवी-5.00 बज गये.

मैं ने अपने उपर से चद्दर हटाई. ये क्या मैं नंगा ही सो गया था.

अवी-विद्या कोई अंदर आया था.

विधा-नही, किसी को अंदर नही आने दिया.

मैं ने अपने लंड को देखा जो अब नॉर्मल लग रहा था. फिर भी कल तक लंड को थोड़ा आराम देना चाहिए.

मैं ने अपनी कमर पर टवल लगा कर अपने कपड़े लेकर कमरे से बाहर आ गया.

सब मुझे टवल मे देख कर गुस्सा हो गये

कविता-क्या भैया आप अभी तक तैयार नही हुए.

अवी-10 मिनट रूको, फिर चलते है.

सीतल दीदी-जल्दी करना ,कल भी मेले मे नही गये थे और आज लेट कर रहे हो.

अवी-तुम सोचो कि आज मेले मे क्या करना है तब तक मैं फ्रेश होकर आता हू.

और मैं बाथरूम मे जाकर फ्रेश हो गया. फ्रेश हो जाने के बाद लंड पर क्रीम लगाई. और कपड़े पहन कर बाहर आ गया.

मुझे देखते ही सब हँसने लगे.

स्वेता दीदी-ये क्या पहन लिया. जीन्स और टीशर्ट पहन लो उसने स्मार्ट लगते हो

कोमल-स्वेता दीदी सही बोल रही है,

मैं ने अपने पुराने कपड़े पहने थे. एक लूस पैंट ताकि लंड को तकलीफ़ ना हो और पुरानी शर्ट,

अवी-इसमे क्या बुराई है, पहले तो मैं यही पहनता था

पूनम दीदी-कम से कम टीशर्ट तो पहन लो

अवी-ठीक है, तुम सब कार मे बैठो

मैं ने टी-शर्ट पहन ली और विद्या को भी अपने साथ मेले मे ले गया.

मेले मे आते ही राज ने फिर अपनी डिमॅंड बतानी शुरू की.

विद्या मेला देख कर खुश हो गयी.

कोमल और रानी मेरी परछाई बन कर साथ साथ चल रही थी.

अवी-आज क्या करने के बारे मे सोचा है.

राज-भैया, झूले मे बैठेते है

राजेश-मैं भी झूले मे बैठना चाहता हू.

राजेश ने पहली बार कुछ कहा था.

सब राजेश की तरफ देखने लगे.

राजेश-क्या हुआ ,ऐसे क्या देख रहे हो

लीना-मुझे तो आज पता चला कि मेरा भाई बोलता भी है.

कविता-मुझे भी

अवी-तुम दोनो को दूसरो को परेशान करने के सिवा कोई काम नही होता.

लीना-सॉरी भैया, सॉरी राजेश भैया

अवी-आज हम वही करेंगे, जो राजेश कहेगा.

सीतल दीदी-आज की शाम राजेश के नाम

स्वेता दीदी-बोलो राजेश किस झूले पे बैठना है.

राजेश-4 दिन मे जो जो झूले पे बैठे थे उसपर आज एक एक करके बैठते है

पूनम दीदी-ये तो बढ़िया आइडिया है,

सीतल-फिर मौत का कुँआ भी देखेंगे.

अवी-चलो फिर

राज की तो लॉटरी लग गयी. राज को जो चाहिए था वो राजेश ने माँग लिया.

पहले दिन जिस झूले पे बैठे थे वहाँ से शुरुआत की.

मैं आज राजेश के साथ बैठ गया.

झूला घूमने लगा.

अवी-राजेश,

राजेश-हाँ भैया

अवी-तुम चुप चाप क्यू रहते हो, मेले को एंजाय करो,

राजेश-करता तो हूँ

अवी-6 दिन मे आज तुम ने कुछ बोला है, कोई परेशानी हो तो मुझे बता सकते हो

राजेश-परेशानी और मुझे, स्कूल के फ्रेंड की याद आ रही है

अवी-स्कूल के फ्रेंड,स्कूल के टाइम पर ,अब फॅमिली टाइम है ,फॅमिली के साथ भी एंजाय करना चाहिए

राजेश-जो एंजाय फ्रेंड के साथ कर सकते है वो फॅमिली के साथ नही कर सकते

अवी-कर सकते है, और करना आना चाहिए, और स्कूल के फ्रेंड ग्रड्यूशन तक साथ रहेंगे उसके बाद तो फॅमिली के साथ ज़िंदगी बितानी पड़ती है.

राजेश-मैं भी तो वही कह रहा हूँ , कॉलेज के बाद फॅमिली के साथ रहना है

अवी-तुम समझ नही रहे हो, जाने दो ये बताओ स्कूल से कितनी दिन की छुट्टिया मिली है.

राजेश-10 दिन

अवी-मतलब और 4 दिन है तुम्हारे पास

राजेश-हाँ

अवी-ये 4 दिन हँसते हुए बिताना,क्या समझे

राजेश-समझ गया

राजेश के साथ बाते करते हुए पहले झूले का मज़ा लिया.

पूनम दीदी-राजेश अब कौन सा झूला

राज और राजेश- ट्रेन मे बैठते है.

सब ट्रेन वाले झूले मे बैठ गये.

विद्या सब के साथ ऐसे घुल मिल गयी कि जैसे वो सब को सालो से जानती हो.

विद्या मेले का मज़ा वो भी अपनी नयी फॅमिली के साथ ले रही थी.

नेक्स्ट झूले मे मैं और सीतल दीदी को छोड़ कर सब बैठ गये. सीतल दीदी के मना करने से मुझे सीतल दीदी के साथ रुकना पड़ा.ये मेरे लिए अच्छा था.मुझे भी थोड़ा आराम चाहिए था.

सीतल दीदी-अवी एक बात पुछु

अवी-हाँ

सीतल दीदी-तुम रानी को गर्लफ्रेंड बना लो, तुम्हारे लिए पर्फेक्ट रहेगी

सीतल दीदी की बात सुनकर मैं शॉक्ड हो गया.

अवी-कुछ भी

सीतल दीदी-ट्राइ करके देखो,मे बी रानी भी हाँ कर दे

अवी-तुम हो ना, जब तक तुम्हारी शादी नही होती तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो ,

सीतल दीदी-मेरी शादी फिक्स हुई है

अवी-तो क्या हुआ, हुई तो नही ना

सीतल दीदी- एक ही बात है, ये टॉपिक क्लोस्ड ,

सीतल दीदी ने ऐसा क्यू कहा ,क्या उनको पता चला मेरे और रानी के बारे मे

नही, शायद हम पहले गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड थे, उसके बाद मैं ने उनके लिए सोहन को सेलेक्ट किया इसी लिए मेरे लिए रानी को सेलेक्ट किया होगा. मुझे अकेला देख कर उनको अच्छा नही लग रहा होगा.

और सब झूले का मज़ा लेकर वापस आ गये

पीर नेक्स्ट झूले मे सीतल दीदी और मैं भी बैठे कर एंजाय करने लगे.

अवी-अब खाने का टाइम

पूनम दीदी-गोलगप्पे

राज-जलेबी

पूनम दीदी-गोलगप्पे खट्टा मीठा खाने मे ज़्यादा मज़ा आता है.

राज-मुझे जलेबी खानी है

स्वेता दीदी-पहले गोलगप्पे

रानी-फिर जलेबी

गोलगप्पे का मज़ा लेने के बाद टेडी मेडी गरम गरम जलेबी खाने से मज़ा दुगना हो गया.

इस मज़े मे मैं ने चाची के लिए जलेबी पेक करके ले ली.

सीतल दीदी-मौत का कुँआ

सीतल दीदी की पसंद की जगह भी चले गये.

इस बार हम ने मौत के कुँए के हिलते हुए स्टेज मे डॅन्स करते हुए मज़ा लिया.

धीरे धीरे हम अपने पैर हिला कर डॅन्स कर रहे थे.

मेरे साथ पहले कोमल और फिर स्वेता दीदी डॅन्स कर रही थी.

सब हमारी तरफ देख रहे थे. पर किसी की हिम्मत नही थी जो मुझे रोक सके. पर इसका ये मतलब नही है कि मैं कुछ भी करू

थोड़ी देर डॅन्स करने के बाद हम चुप चाप मौत का कुँए का शो देखने लगे .

लेकिन फिर भी हमारे पैर मे डॅन्स वाली लचक थी.

मौत के कुँए के बाद हम ने फिर थोड़ी पेट पूजा की फिर मेले मे घूम ने लगे.

रात की लाइटिंग मे मेले की जगमग मे घूमते हुए मेला देखने मे मज़ा आ रहा था.

हाथ मे आइस क्रीम, पॉपकॉर्न, केरिम्यूरी, चन्न्चोर खाते हुए दुकानो मे टाइम पास करना पर कुछ खरीदना नही ,इसमे भी एक अलग मज़ा था.

ऐसा मज़ा लेने के बाद हम वापस घर आ गये.

घर आकर चाची को उनकी मनपसंद चीज़ का लुफ्त उठाते हुए हम फिर हँसी मज़ाक करते हुए इस खुशी के पल को एंजाय करने लगे.

 


535

आज मैं ने घर मे रुकने का फ़ैसला किया ,

मुझे आराम की ज़रूरत थी. 6 दिन की कसरत से जो मेरा हाल हुआ था वो ठीक करना था.

आज चाची के साथ बैठे कर खाना खाने मे आनंद मिल रहा था.

मेरे घर पे रुकने से चाचा आज अपने दोस्त के साथ किसी पार्टी मे चले गये.

चाचा का खास दोस्त हमारे गाओं का सरपंच था.

मेले के वजह से ऐसी छोटी मोटी पार्टी तो होती रहती है.

खाना खाने के बाद मैं थोड़ी देर चाची के साथ बाते करता रहा .पीर अपने कमरे मे चला गया.

अपने कमरे मे जाते ही मैं बेड पर लेट कर रिलॅक्स फील कर रहा था.

अभी मैं सोने वाला था कि मेरा मोबाइल बजने लगा.

कॉल सारा का था.

सारा-हेलो अवी

अवी-बोलो सारा डार्लिंग

सारा-डार्लिंग, डार्लिंग बोलते हो और एक कॉल नही करते

अवी-तुम्हे क्या बताऊ सारा, मैं इतना बिज़ी हूँ कि बता नही सकता

सारा-पता है कहा बिज़ी हो, ज़ोया ने बताया मुझे

अवी-मैं सच मे बिज़ी हूँ, हमारे गाओं मे मेला शुरू हो गया. और मेले का काम मुझे करना है.

सारा-मेला, तो तुम वहाँ रहते हो

अवी-हाँ,

सारा-चलो मान लेती हूँ कि तुम बिज़ी हो पर हफ्ते मे एक बार कॉल तो कर सकते हो.तुम्हारी याद मे मेरा बुरा हाल हो रहा.

अवी-एक काम करो तुम यहाँ मेरे पास आ जाओ, मेला भी दिखा दूँगा और मज़े भी करेंगे.

सारा-ये तो बढ़िया आइडिया है पर हॉस्पिटल छोड़ कर नही आ सकती और मैं एक प्राब्लम हूँ

अवी-प्राब्लम

सारा-उसे जाने दो ये बताओ मेरी अमानत की हालत कैसी है अब

अवी-अभी थोड़ी हालत ठीक हुई है.

सारा-एक काम करो, आज रात भर 3 3 घंटे बाद क्रीम लगा लेना, जिस से कल तुम और तुम्हारा वो फिट हो जाएँगे.और जाम कर कुवारि का शिकार करना.

अवी-ऐसा करने से काम बन जाएगा.

सारा-डॉक्टर हूँ मैं,

अवी-थॅंक्स, आंड मिस यू

सारा-मिस यू टू ,

थोड़ी देर सारा के साथ बात करने के बाद मैं ने विद्या को अपने कमरे मे बुलाया

अवी-क्या विद्या यहाँ मेरी हालत खराब है और तुम्हारा कुछ पता नही.

विद्या-सॉरी वो चाची को दूध दे रही थी.

अवी-दोपेहर की तरह क्रीम लगा दो ,तुम्हारे हाथों मे जादू है.देखो फिट लग रहा है.

विद्या-क्रीम तो दो

विद्या ने मेरा पैंट निकाल लिया और लंड पर क्रीम लगाने लगी.

विद्या के नाज़ुक हाथ से क्रीम लगाने से लंड को ठंडक मिली.

अवी-विद्या.तुम मेरा एक काम कर सकती हो,

विद्या-नही कर सकती

अवी-क्यू ?

विद्या-क्यू कि तुम डाइरेक्ट काम बता दिया करो ,ऐसे पूछने की क्या ज़रूरत है.

अवी-अच्छा बाबा सॉरी

विद्या-तुम मुझे सॉरी और थॅंक्स बोलते हो तो अच्छा नही लगता.

अवी-आज से नही बोलूँगा. तुम आज रात भर हर 3 घंटे बाद क्रीम को लगाना है

विद्या-समझो हो गया

अवी-रात भर

विद्या-कहा ना हो जाएगा.

अवी-अब तुम जाओ और रात मे आकर क्रीम लगा देना.

विद्या अपने कमरे मे चली गयी.

विद्या के जाते मुझे रानी की याद आ गयी. मुझे रानी से बात करने का मन हो रहा था. पर कोमल की वजह से रानी को रात मे कॉल नही कर सकता था.कल से रानी को कहूँगा की 10 बजे मोबाइल को अपने पास रखा करो, जिस से मैं रानी से बात कर पाउन्गा.

मैं मोबाइल के साथ टाइम पास कर रहा था कि मुझे मोना का ख़याल आ गया.

और मोना को कॉल किया.

अवी-हेलो मोना

मोना-कौन बोल रहा है

अवी-मैं अवी बोल रहा हू

मोना-अवी, हाँ बोलो

अवी-क्या हुआ आज के काम का,

मोना-मेरा नाम मोना है, मुझे देखते ही कुवरसिंघ का मूह खुला का खुला रह गया.

अवी-ऐसा क्या किया.

मोना-आज मैं टीशर्ट और जीन्स पहन कर मेले मे गयी थी.

अवी-फिर

मोना-टीशर्ट लूस थी, मेरे नीचे झुकते मेरी बिना ब्रा के बूब्स लोग देखने लग जाते.

अवी-तुम बोलती रहो

मोना-मैं ने कुवरसिंघ को अपने बूब्स दिखा कर परेशान किया.

अवी-फिर

मोना-फिर मैं कुवरसिंघ को सुनाई दे इस तरह उची आवाज़ मे बोल कर पेशाब करने चली गयी.

अवी-टाय्लेट मे

मोना-नही ,एक पेड़ के नीचे, मेरी जाली(नेट) वाली पैंटी को नीचे सरका कर पेशाब करने लगी. कुवरसिंघ मुझे छुप कर देखता रहा.

अवी-फिर क्या किया.

मोना-बस इतना ही किया.

अवी-(अच्छा हुआ इतना ही किया. क्या कहा था और क्या कर दिया. एक रंडी की तरह हरकत की, पता नही कुवरसिंघ को शक हुआ या नही) और कल क्या करने वाली हो,

मोना-आज की तरह पेशाब करके ज़िप बिगड़ जाने का ड्रामा करके कुवरसिंघ को ज़िप लगाने को कहूँगी.

अवी-(ये मरवाएगी ) एक काम करना तुम्हारी ज़िप लगाते कुवरसिंघ की ज़िप खोल देना.

मोना-क्या ?

अवी-कुवरसिंघ की ज़िप निकाल कर लंड को चूस कर उसका पानी निकाल देना

मोना-ऐसा करूँगी तो वो मेरी चुदाई करेगा.

अवी-उसका पानी निकालने के बाद अपने मालिक के बारे मे बता कर मेला ख़तम होने तक का टाइम माँग लेना. और बदले मे उसके साथ हर रोज चुदाई करने का ऑफर देना

मोना-वो मान जाएगा?

अवी-तुम ने आज ग़लत तरीका इसतमाल किया. अब इसके सिवा दूसरा रास्ता नही है हमारे पास.

मोना-ठीक है, कुवरसिंघ के साथ चुदाई करूँगी.

अवी-और वो जैसी चुदाई करे ,कर लेना,उसे खुश करना.चाहे कुछ भी हो (मोना को जोरदार चुदाई बहोत पसंद है)

मोना-ठीक है, और कुछ

अवी-एक बात है वो कल का काम हो जाने के बाद बताउन्गा.

मोना-ठीक है, अब मुझे सोने दो

मोना को कल क्या करना है ये बता कर मैं भी सो गया.

 


536

विद्या ने रात भर मेरा ख़याल रखा.

मैं तो गहरी नींद मे था.और विद्या ने मेरी नींद को डिस्ट्रब नही किया.

सुबह 5.00 बजे मुझे विद्या उठाने आ गयी.

7थ डे

विद्या-अवी उठो सुबह हो गयी.

मैं ने उठ ते ही विद्या को अपने उपर गिरा दिया.

विद्या-क्या कर रहे हो.

अवी-तुमने जो रात भर काम किया उसका इनाम दे रहा हूँ

विद्या-इनाम

और मैने एक विद्या को किस किया.

अवी-कैसा लगा इनाम

विद्या-छोटा था, अगर लंबा मिलता तो मज़ा आता

अवी-अभी के लिए इतना काफ़ी है, बाकी का बाद मे देखेंगे

विद्या-गुलाम इंतज़ार करेगी.और हँसने लगी.

अवी-अच्छा अब उठो ,देखने दो तुम ने कैसा ख़याल रखा.

विद्या-देख लो, पहले जैसा हो गया

मैं ने लंड को देखा ,लंड एक रात मे ठीक हो गया. क्रीम काम की निकली और विद्या भी,

अवी-अच्छा काम किया तुम ने, चलो अब मुझे फ्रेश होने दो

विद्या अपने काम मे लग गयी और मैं फ्रेश होकर मंदिर जाने की तैयारी करने लगा.और आज भी क्रीम लगा ली.

चाची का आशीर्वाद लेने के बाद हम मंदिर चले गये.

आज मंदिर मे कुवरसिंघ को छोड़ कर सब थे.

ठकुराइन का चेहरा कल की चुदाई से चमक रहा था.

मेरे लंड की फोटो देख कर पायल के चेहरे पे शरम थी. और एक स्माइल थी.

कामिनी मुझे देख कर खुश लग रही थी,

रणजीतसिंघ और मैं मंदिर मे पूजा करने लगे.

पंडितजी के साथ पंडिताइन भी थी.पंडिताइन बिना पलके झुकाए मुझे देख रही थी.

ऐसा लग रहा था कि पंडिताइन मुझसे कुछ कहना चाहती है.

पंडिताइन मेरे साथ चुदाई करने को तैयार है.

पर पहले मुझे बाकी के काम निपटाने होगे.

मोना का काम कर देता हूँ .उसके बाद पंडिताइन की चुदाई करूँगा.

तब तक पंडिताइन की प्यास बढ़ने देता हूँ.

पंडिताइन से ज़्यादा इम्पोर्टेंट काम है मुझे.

मैं ने पंडिताइन की तरफ ध्यान नही दिया और पूजा करने लगा.

पूजा हो जाने के बाद ठाकुर की फॅमिली अपनी हवेली चली गयी.

और मैं अपनी फॅमिली के साथ घर आ गया.

रानी मेरे भाई बहनों के साथ इतनी घुल मिल गयी थी उसे मेरे साथ बात करने का समय नही मिल रहा था.

मैं ने मोका देख कर रानी को इशारा करके छत पर बुला लिया.

रानी 10 मिनट के बाद बहाना करके छत पर आ गयी.

रानी को देखते ही मैं रानी के गले लग गया.और रानी को किस करने लगा.

रानी को किस करते हुए छत पर रखे हुए गद्दे पर लिटा दिया ,जिस से हमे कोई देख ना पाए.

गद्दे पर लेटने के बाद मैं रानी के होंटो को रस पीने लगा.

रानी भी कुछ कम नही थी. वो भी किसी की परवाह किया बिना मुझे किस कर रही थी.

रानी का किस मेरे लिए अनमोल था.

और रानी के लिए मैं अनमोल था.

थोड़ी देर साँस लेने के बाद हम फिर से किस करने लगे.

फिर हम खुले आसमान के नीचे छत पर लेट कर अपनी सासे नॉर्मल करने लगे.

रानी-क्या बात है, आज कंट्रोल नही हो रहा

अवी-मैं तो कल रात को तुम्हारे पास आने वाला था. पर कोमल की वजह से आया नही

रानी-वो हैना ,क्या नाम है उसका विद्या

अवी-विद्या कहाँ से बीच मे आ गयी.कहीं तुम मुझ पे शक तो नही कर रही हो.

और मैं नाराज़ हो गया

रानी-मेरे कहने का वो मतलब नही था

अवी-तो क्या मतलब था

रानी-मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी. चाची ने बताया था मुझे विद्या के बारे मे. तुम ने अच्छा किया जो उसे यहाँ लेकर आए हो

मैं ने कोई जवाब नही दिया.

रानी-मैं मज़ाक कर रही थी ,तुम को तो मेरा मज़ाक करना भी पसंद नही.

और रानी का चेहरा रोने जैसा हो रहा था कि मैं ने रानी को किस किया.

अवी-ग़लती मेरी है .मुझे तुम्हे बताना चाहिए था .मुझे लगा चाची तुम्हे विद्या के बारे मे बता देंगी.

रानी-इस बात को यही ख़तम करते है. तो तुम कुछ कंट्रोल ना होने की बात कर रहे थे

अवी-कल मैं तुमसे बात करने का चान्स देख रहा था पर मिला नही

रानी-तो कॉल कर लेते

अवी-फिर तो कोमल को पता चल जाता.

रानी-ये भी हो सकता है, वैसे मेरी याद क्यूँ आ रही थी.और आते ही मुझे पे टूट पड़े

अवी-कल रात भर बहोत कंट्रोल किया पर आज कंट्रोल नही रख पाया

रानी-तुम्हारे किस करने से पता चल गया.

अवी-तुम रात को मुझे एक कॉल किया करो ,जिस से मुझे थोड़ा सुकून मिले

रानी-कोमल से छुप कर करूँगी.और कहो कैसा चल रहा है मेले का काम

अवी-सब ठीक चल रहा है.बस काम ज़्यादा है जिस की वजह से तुम्हारे साथ बात करके थोड़ा रिलॅक्स होना चाहता हूँ.

रानी-तो ये बात है, पहले क्यू नही बताया, आज से रोज कॉल करके तुम्हारी थकान दूर करती जाउन्गी

अवी-थॅंक्स,

रानी-अब कॉल नही करूँगी.

अवी-क्यू क्या हुआ

रानी-थॅंक्स क्यू बोला

अवी- तो ऐसा कहो ना ,कि किस चाहिए

और मैं ने रानी को थॅंक्स वाला किस किया.

रानी-ऐसा थॅंक्स ही बोला करो, चलो अब मैं नीचे जाती हूँ ,सब मुझे ढूँढ रहे होगे

अवी-रूको एक और बात करनी थी

रानी-और भी है,

अवी-तुम ने सीतल दीदी से हमारे बारे मे कुछ कहा

रानी-नही तो ,क्यू क्या हुआ

अवी-कुछ नही, सीतल दीदी कह रही थी कि रानी को गर्लफ्रेंड बना लो

रानी-मुझे भी पूछ रही थी कि मेरा बाय्फ्रेंड है कि नही

अवी-तुम ने क्या कहा

रानी-क्या कहूँगी, कह दिया कि मेरा बाय्फ्रेंड नही है.

अवी-तो ये बात है. सीतल दीदी हमे एक करना चाहती है

रानी-ये तो अच्छा है हमारे लिए,

अवी-नही, तुम सीतल दीदी को हमारे बारे मे कुछ मत बताना

रानी-वो क्यू ?

अवी-सीतल दीदी को बताया तो समझो स्वेता दीदी को बता दिया. और स्वेता दीदी से पूनम दीदी तक बात चली जाएगी.

और पूनम दीदी से सबको पता चल जाएगा.

रानी-ये तो अच्छा होगा हमारे लिए

अवी-तुम्हे मेरे साथ इस तरह प्यार कर ना अच्छा नही लगता

रानी-मुझे क्यू अच्छा नही लगेगा. मैं तो तुम्हें प्यार करते रहना चाहती हूँ

अवी-तो किसी को हमारे बारे मे मत बताना

रानी-मैं समझी नही

अवी-अगर तुम ने बता दिया तो हमारा मिलना मुश्किल होगा. तुम्हारी सब बहू की तरह देख भाल करेंगे .तुम अब जिस तरह रह रही हो वैसा फ्रीली नही रह पाओगी .जिस से ना तुम मुझे ठीक से प्यार कर पाओगी ना दूसरे कोई करने देंगे.शादी तो एक दिन हमारी होगी. पर उस से पहले अच्छे से प्यार तो कर ले.और जिस बताना था उनको बता दिया है. छोटी चाची को पता हैना ,बस उतना काफ़ी है.

रानी-समझ गयी. अगर दुबारा सीतल दीदी ने कुछ पूछा तो बात वही ख़तम कर दूँगी.

अवी-मुझे भी यही करना होगा.

रानी-अब चलो नीचे

अवी-तुम चलो ,मैं कुछ देर बाद आता हूँ

रानी नीचे चली गयी. और मैने गद्दे पर वैसा ही लेट कर अपनी आँखे बंद कर दी

थोड़ी देर कुवरसिंघ का क्या करना है ये सोचने लगा.
 


537

थोड़ी देर छत पर बैठने के बाद मैं हॉल मे आ गया. जहा पर सब बैठे कर टीवी देख रहे थे.

मैं भी अपने भाई बहनों के साथ टीवी देखने लगा.

सुबह सुबह सब मूवी देख रहे थे.

मेरे लिए जगह खाली नही थी. तो मैं बड़ी चाची की गोद मे सर रख कर लेट गया.

मेरे ऐसा करते सब हँसने लगे.

बड़ी चाची मेरे बालो मे हाथ घुमाने लगी.

बी चाची-क्या हुआ .ऐसे हंस क्यू रहे हो.

सीतल दीदी-मामी आपके प्यारे बेटे का प्यार देख कर हँसी आ गयी.

बी चाची-इसमे हँसने की क्या बात है,मेरा बेटा है मुझे प्यार तो करेगा ही ना

स्वेता दीदी-मामी आपका बेटा बड़ा कब होगा

बी चाची-क्या मतलब

स्वेता दीदी-अवी इतना बड़ा होगा गया है फिर भी छोटे बच्चों की तरह आपकी गोद मे सर रख कर लेता है

बी चाची-बेटा कितना भी बड़ा क्यूँ ना हो वो अपनी माँ के लिए हमेशा बच्चा ही रहता है.

सीतल दीदी-मामी, अवी को पूछो भूक तो नही लगी है.

सी चाची-सीतल, मूवी देखो या फिर हम मूवी बंद करते है

सीतल दीदी-सॉरी मामी

हम फिर से मूवी देखने लगे.

थोड़ी देर बड़ी चाची की गोद मे लेटने के बाद मैं सीतल दीदी की गोद मे सर रख लेट गया.

सीतल दीदी-अवी ,ये क्या कर रहे हो

अवी-सीतल दादीमा की गोद मे सर रख कर मूवी देख रहा हूँ

मेरी बात सुनकर सब सीतल दीदी पे हँसने लगे.

सीतल का चेहरा उतर गया. सीतल को बुरा लगा.

मैं ने जल्दी से अपना सर सीतल दीदी की गोद से हटा दिया.

अवी-सॉरी दीदी,

सीतल दीदी ने कुछ नही कहा.

स्वेता दीदी-क्या सीतल, हम ने अवी के साथ मज़ाक किया उसने तो कुछ नही कहा और अब अवी ने मज़ाक किया तो तुम्हे बुरा लगा ,ये ग़लत है सीतल, अवी की जगह तुम्हे अवी को सॉरी बोलना चाहिए.

सीतल दीदी को अपनी ग़लती का अहसास हुआ.

सीतल दीदी-सॉरी अवी

अवी-कोई बात नही, मैं अपनी दूसरी दादीमा के पास जाता हू, स्वेता दादीमा मैं आ रहा हूँ.

फिर से सब हँसने लगे

मैं स्वेता दीदी के पास जाकर बैठ गया.और मूवी देखने लगा.

सब इसी तरह मूवी देखते हुए हँसी मज़ाक कर रहे थे

मुझे मूवी मे कोई इंटेरेस्ट नही था. मैं ने पास मे रखा हुआ मोबाइल उठा लिया.

ये स्वेता दीदी का मोबाइल था. स्वेता दीदी मूवी देखने मे खोई हुई थी.

मैं मोबाइल मे पहले गॅलरी मे जाकर फोटो और वीडियो देखने लगा.

वीडियो कुछ खास नही थे, पर फोटो, सभी फोटो एक तो रोहन या स्वेता दीदी के थे, कुछ फोटो मे रोहन और स्वेता दीदी एक दूसरे को किस कर रहे थे.

मैं ने सभी फोटो देख लिए.

फिर मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया आया ,मैं ने चॅट मॅसेंजर ओपन किया .और रोहन के मेसेज देखने लगा.

स्वेता दीदी के मेसेज देखु या नही देखु, क्या ये ठीक रहेगा,

स्वेता दीदी और रोहन का मिलन तो मेरी वजह से हुआ ,मुझे देखना चाहिए कि स्वेता दीदी खुश है कि नही.

रोहन दीदी को खुश ना रखे ये हो नही सकता, फिर भी देख लेता हूँ कि क्या बाते होती है.

रोहन -स्वेता तुम्हारे गाओं के मेले मे मज़ा आया

स्वेता दीदी-सिर्फ़ तुम्हे मज़ा आया

रोहन -तुम ने भी तो बहोत मज़ा किया.

स्वेता दीदी-तुम्हे इतनी जल्दी क्या थी ,कुछ दिन रुक जाते

रोहन -मम्मी ने पर्मिशन नही दी

स्वेता दीदी-किस करने की पर्मिशन दी थी क्या

रोहन -गुस्सा मत हो, तुम मेरे पास आना फिर तुम्हारा गुस्सा एक दिन मे ख़तम कर दूँगा.

स्वेता दीदी-वो कैसे

रोहन -तुम्हे उस होटेल मे लेकर जाउन्गा.

स्वेता दीदी-वो सब शादी की बाद ,उस दिन जितना हुआ वो काफ़ी है

रोहन -मैं भी उतने की बात कर रहा हूँ,

स्वेता दीदी-पता है , पिछली बार किस करते करते मेरे कपड़े निकाल दिए थे

रोहन -तो क्या हुआ, अपनी बीवी के कपड़े निकालना गुनाह थोड़े है ,

स्वेता दीदी-वो सब मुझे पसंद नही है,जो करना है वो शादी के बाद

रोहन-शादी फिक्स हो गयी ,और क्या चाहिए

स्वेता दीदी-मैं ने कहा ना शादी के बाद तो शादी के बाद

रोहन-चलो ठीक है, किस तो मिलेगा ना

स्वेता दीदी-किस, सोचना पड़ेगा

रोहन-क्या स्वेता,मुझे एक किस नही दे सकती तुम

स्वेता दीदी-सिर्फ़ एक

रोहन-रोज एक

स्वेता दीदी-रोज एक , ये कुछ ज़्यादा नही हो रहा.

रोहन-कुछ ज़्यादा नही है,

स्वेता दीदी-तो फिर सोचना होगा

रोहन-अब मुझे गुस्सा आ रहा है.

स्वेता दीदी-गुस्सा ,हा हा हा

रोहन-मुझे सच मे गुस्सा आ रहा है.

स्वेता दीदी-मुझे पता है तुम्हारा गुस्सा कैसे शांत करना है

रोहन-कैसे

स्वेता दीदी ने नेक्स्ट मेसेज मे "किस का स्माइल भेजा".

रोहन-ये हुई ना बात ,अब जल्दी मेरे पास आओ ,फिर

स्वेता दीदी-1 महीना ,बाइ सीतल आ गयी है.

रोहन-बाइ

 


538

मैं स्वेता दीदी के मेसेज देख रहा था कि पूनम दीदी की नज़र मेरे उपर पड़ी.

मेरे हाथ मे स्वेता दीदी का मोबाइल देख कर मेरे पास आ गयी.

और मोबाइल मे देखने लगी.

पूनम दीदी-क्या कर रहे हो

अवी-कुछ नही, मूवी बोर है इस लिए मोबाइल देख रहा हूँ

पूनम दीदी-किस का मोबाइल है

अवी-स्वेता दीदी का

पूनम दीदी-स्वेता का, क्या देखा मोबाइल मे

अवी-फोटो

पूनम दीदी-ये तो मेसेज है

अवी-फोटो देखने के बाद मेसेज देख रहा हूँ

पूनम दीदी-तुम्हे पता है ना किसी के मेसेज देखना बुरी बात है, और वो भी लड़की की हों तो नही देखना चाहिए

अवी-किसी की थोड़ी ,दीदी के मेसेज है.

पूनम दीदी-पर्सनल मेसेज नही पढ़ने चाहिए.

अवी-वो तो ऐसे ही देख रहा था.

पूनम दीदी-ऐसे ही ,

अवी-बस देख रहा था कि बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड बात कैसे करते है.

पूनम दीदी-क्यू तुम्हें गर्लफ्रेंड बनानी है.

अवी-हाँ,

पूनम दीदी-तो बना लो, और मोबाइल मुझे दो

अवी-10 मिनट और

पूनम दीदी-तुम ऐसे नही मानोगे.

और गयी भैस पानी मे

पूनम दीदी-ज़ोर से स्वेता अवी तुम्हारे मेसेज पढ़ रहा है

और हॉल मे भूंकंप आ गया.

स्वेता दीदी ने मेरे हाथ से मोबाइल छीन लिया.

और मोबाइल मे देखने लगी. मोबाइल मे मेसेन्जर ओपन था.

स्वेता दीदी-अवईीईई

और स्वेता दीदी मेरे पीछे भागने लगी.

सीतल दीदी-मूवी से अच्छी तो ये फाइटिंग है

कोई स्वेता दीदी के नाम से चिल्ला रहे थे ,तो कोई मुझे भागने को कह रहे थे

चाची को कुछ समझ नही रहा था.

मुझे कोमल ,रानी और पूनम दीदी सपोर्ट कर रही थी और बाकी गॅंग स्वेता दीदी को सपोर्ट कर रही थी.

घर मे कोई जगह ऐसी नही थी कि जहाँ हम गये ना हों

फाइनली भागते हुए मैं अपने कमरे मे चला गया.

मैं और तो भाग सकता हूँ पर स्वेता दीदी थक गयी थी. जिस की वजह से मैं ने रुकने का फ़ैसला किया.

मैं अपने कमरे मे जाकर अपने कान पकड़ कर उठक बैठक लगाने लगा.

मेरे पीछे पीछे भागते हुए स्वेता दीदी भी मेरे कमरे मे आ गयी.

मुझे उठक बैठक करते हुए देख कर बेड पर बैठे कर हाँफने लगी.

स्वेता दीदी के पीछे पीछे बाकी सब आ गये.

और आते ही राज ने काउंटिंग शुरू की.

छोटी चाची बड़ी चाची को वापस मूवी देखने के लिए ले गयी. छोटी चाची ने बड़ी चाची को समझा दिया कि भाई बहन के झगड़े मे नही पड़ना चाहिए.

और मूवी भी भाइयो की थी, यादो की बारात

सीतल दीदी-क्या दीदी इतने सस्ते मे निपटा दिया.

स्वेता दीदी-मैं ने अभी तक सज़ा नही दी

पूनम दीदी-तो अवी उठक बैठक क्यू कर रहा है

सीतल दीदी-ये अवी का पुराना स्टाइल है.

राज- 51 52 53 54....

पूनम दीदी-जाने दे स्वेता ,अब अवी को माफ़ कर दे, देख इतना भागने के बाद लगातार उठक बैठक मार रहा है.

कोमल-हाँ, दीदी अब माफ़ कर दो अवी को

राज-73 74 75 76...

सीतल दीदी-देखो दीदी 100 हो रहे है ,अब जाने दो अवी को

मैं अपने काम मे लगा हुआ था.

राज-106 107 108....

सब ने एक साथ -दीदी अब माफ़ करदो

पूनम दीदी-देख स्वेता अब ज़्यादा ही हो रहा है. मेरी ग़लती है मुझे तुम्हे बताना नही चाहिए था

अब जाके स्वेता दीदी ने कुछ कहा

स्वेता दीदी- गुस्से मे तुम सब हमे अकेला छोड़ दो

स्वेता दीदी की गुस्से वाली आवाज़ सुनकर कविता और लीना ने जल्दी कमरा खाली किया .और बाकी सब भी कमरे से बाहर चले गये.

राज-131 132 133....

स्वेता दीदी-राज सुना नही तुम ने मैं ने क्या कहा

राज ने भी कमरा खाली किया. अब कमरे मे मैं और स्वेता दीदी रह गये थे.

मेरा शरीर पसीने से भीग चुका था, मैं थक चुका था ,फिर भी मैं उठक बैठक लगा रहा था.

स्वेता दीदी मेरे पास आ गयी .और मुझे गले लगा लिया.

स्वेता दीदी के गले लगते ही, मैं ने अपने शरीर को दिला छोड़ दिया. और मेरा भार स्वेता दीदी पर था.

मैं ने स्वेता दीदी के कान मे सॉरी कहा.

स्वेता दीदी- अपनी गर्लफ्रेंड का नाम पहले मुझे बताना होगा.तभी माफ़ करूँगी.

स्वेता दीदी की बात सुनकर मेरी सोचने की शक्ती ख़तम हो गयी.

स्वेता दीदी-तेरी सज़ा ये है कि अपनी गर्लफ्रेंड का नाम पहले मुझे बताना होगा.और मुझे पहले मिलना होगा.

अवी-चाची के बाद आपको बताउन्गा.

स्वेता दीदी-कोई पसंद है,जो मेरे मेसेज पढ़ कर उसे मेसेज करने का सोच रहे थे

अवी-नही,

पूनम दीदी वापस कमरे मे आ गयी

पूनम दीदी-हो गया या थोड़ी देर बाद आउ

स्वेता दीदी-हो गया. अवी को सज़ा दे दी

पूनम दीदी-क्या सज़ा दी

स्वेता दीदी-वो अवी और मेरे बीच की बात है चलो मूवी ख़तम हो रही होगी.

फिर हम वापस हॉल मे आ गये .और मैं स्वेता दीदी की गोद मे सर रख कर मूवी देखने लगा.

सीतल दीदी -थोड़ी देर पहले टॉम आंड जेर्री बने हुए थे और अब देखो ऐसे बैठे है जैसे कुछ हुआ ही ना हो

पूनम दीदी-सीतल ,मूवी देखो

और फिर से हम मूवी देखने लगे.

 


539

आज सुबह मूवी देखने मे एक अलग मज़ा आया. ज़्यादातर समय हम रात मे या दोपेहर मे मूवी देखते थे पर आज सुबह वो भी पूरी फॅमिली के साथ देखने मे मज़ा आया.

मूवी देखने के बाद चाची खाना बनाने चली गयी. और मेरे भाई बहन भी अपने अपने घर चले गये.

विद्या को बोल कर मैं ने रानी को रोकने को कहा. रानी मेरा इशारा समझ गयी और कोमल को आगे भेज कर रानी रुक गयी.

मैं रानी को अपने कमरे मे ले गया.

रानी-रुकने को क्यू कहा,अभी तो छत पर मिले थे, कुछ काम था.

अवी-मैं तुम से नाराज़ हूँ

रानी-नाराज़, मैं ने क्या किया

अवी-मैं उठक बैठक कर रहा था तो तुम ने मेरी मदद क्यू नही की,

रानी-तुम ने ग़लती की ,उसकी सज़ा तो तुम्हे मिलनी चाहिए ना

अवी-मैं सिर्फ़ मेसेज ही तो पढ़े थे,

रानी-किसी के मेसेज पढ़ना बुरी बात है,

अवी-बुरी बात है, चलो ठीक है, अब थोड़ा मलम तो लगा दो( मेसेज तो छुप कर पढ़ लिए थे उसकी सज़ा मिली. क्यू ना रानी से उसके लॅपटॉप के ड्राइव के बारे मे पुछू, पर पहले रानी क्या सोचती है वो जान लेता हूँ.रानी को भी छुप कर मेसेज पढ़ना बुरा लगा .लॅपटॉप के बारे मे पूछ कर रानी को गुस्सा दिलाना ठीक नही होगा)

और रानी ने मुझे किस किया.

रानी-अभी से ये हाल है तो शादी के बाद मुझे लिपस्टिक की कंपनी खोलनी पड़ेगी.

अवी-लिपस्टिक के साथ पेन किल्लर, बेड जो डेली टूटेंगे, उनकी कंपनी भी खोल दूँगा.

रानी-तुम से तो बात करना भी बेकार है, चलती हू कोमल मेरा इंतज़ार कर रही होगी.

अवी-बाइ

रानी के जाने के बाद विद्या को कह कर फिर से लंड पर क्रीम लगा ली. लंड फिर से अपने रूप मे आ गया.

फिर भी एक बार और क्रीम लगा कर लंड को ठंडक मिल गयी.

फिर खाना खाने के बाद मैं मंदिर मे चला गया.

मंदिर के पास हमारे लिए जो टेंट बनाया था वहाँ पर रणजीतसिंघ को मिलने चला गया.

टेंट मे रणजीतसिंघ अपनी सेक्रेटरी के साथ था. सेक्रेटरी रणजीतसिंघ को मेले के बारे मे बता रही थी. और रणजीतसिंघ का हाथ सेक्रेटरी की सलवार मे था.

अवी-मैं बाद मे आता हूँ

रणजीतसिंघ-बाद मे क्यू, यहाँ कुछ खास नही हो रहा जो तुम जा रहे हो

मैं वापस चेर पर बैठ गया.

रणजीतसिंघ का हाथ अभी भी सेक्रेटरी की सलवार के अंदर था.

रणजीतसिंघ-आज बड़ी देर कर दी तुम ने यहाँ आने मे

अवी-घर पे थोड़ा बिज़ी था जिस से देर हो गयी.

रणजीतसिंघ-ये बाद मे आने की बात क्यूँ कर रहे थे

अवी-आप सेक्रेटरी के साथ...

सेक्रेटरी मेरी वजह से थोड़ा अनकंफर्टबल फील कर रही थी.

रणजीतसिंघ-मैं तो ऐसे ही फाइल चेक करता हूँ, एक हाथ मे पेन और दूसरा हाथ गंद पर

गंद वर्ड वो भी मेरे सामने सुनकर सेक्रेटरी का चेहरा लाल हो गया.

अवी-अच्छा तरीका है

रणजीतसिंघ-तुम भी ऐसा तरीका इस्तेमाल किया करो

अवी-कर तो लेता पर मेरे पास सेक्रेटरी कहाँ है.

रणजीतसिंघ-ये है ना, मेरी सेक्रेटरी के साथ आदत लगा लो,फिर अपनी सेक्रेटरी के साथ मज़े करना

अवी-आपकी सेक्रेटरी मुझे करने देगी.

रणजीतसिंघ-ज़रूर करने देंगी,क्यू करने दोगि ना

सेक्रटरी-जैसा आप ठीक समझे

अवी-फिर भी एक प्राब्लम है

रणजीतसिंघ-क्या?

अवी-सेक्रेटरी स्कर्ट मे हो तो ज़्यादा मज़ा आता है.

रणजीतसिंघ-ये भी स्कर्ट ,जीन्स पहनती है, पर मेले मे ये ठीक नही दिखेगा इस लिए मैं ने सिंपल कपड़े पहनने को कहा था.

अवी-ये भी सही है, पर मुझे स्कर्ट मे करना है, जब तक मेला ख़तम ना हो जाए तब तक इंतज़ार करूँगा.

मेरी बात सुनकर सेक्रेटरी ने राहत की सास ली,

रणजीतसिंघ-तुम्हे मैं अभी तक समझ नही पाया.

अवी-मुझे मे ना समझने जैसा कुछ नही है.

रणजीतसिंघ-तुम्हे जब भी कोई मज़े करने को देता हूँ तुम मना कर देते हो. ऐसा करने वाले तुम पहले इंसान होगे

अवी-मैं अपने तरीके मज़ा लेता हूँ.

रणजीतसिंघ-मेले के बाद देखूँगा तुम्हारा मज़ा.

अवी-ज़रूर,

रणजीतसिंघ-और कहो कैसा चल रहा है, मेले मे एंजाय करते हो या नही.

अवी-करता हूँ, अपनी फॅमिली के साथ डेली जाता हूँ मेले मे

रणजीतसिंघ-फॅमिली के साथ नही, किसी के साथ मज़ा किया या नही.

अवी-कोशिस जारी है,

सेक्रेटरी-सर मैं 2 मिनट मे बाहर जाकर आती हू.

रणजीतसिंघ-तुम्हे कहाँ जाना है.

सेक्रटरी-सर .वो

रणजीतसिंघ-तुम भी ना, हाथ लगाने से पानी निकल गया.रूको थोड़ी देर बाद फ्रेश होने चली जाना.

सेक्रेटरी-यस सर

सेक्रेटरी उदास हो गयी.

अवी-जाने दो इसे, और आते वक्त टी लेकर आ जाएगी.

अवी-अगर इसे दिखाना होगा तभी देखूँगा वरना नही.

सेक्रेटरी को मेरी बाते अच्छी लगने लगी.

सेक्रेटरी ने खुद अपना कुर्ता उपर कर दिया. और सलवार जो स्किन फिट थी उसमे से गंद देखने मे मज़ा आ गया.

सलवार गंद की दरार मे फसि हुई थी और गंद का शेप को अच्छे से दिख रहा था.

रणजीतसिंघ-इसकी गंद को देखने मे मज़ा आ गया.

अवी-अच्छा फिगर है तुम्हारा.

सेक्रेटरी-थॅंक्स

रणजीतसिंघ-टच करके देखो

अवी-वो सब तब करूँगा जब ये स्कर्ट पहन कर होगी.

रणजीतसिंघ-तुम अजीब हो, अगर किसी और को कहता तो हाथ क्या लंड डाल देता. और तुम हो कि

अवी-कोई और अवी नही होता, मुझे इन सब मे मज़ा तब आता है जब मैं अपनी मर्ज़ी से करता हूँ.

रणजीतसिंघ-और मुझे ...

सेक्रेटरी-सर फार्म हाउस

रणजीतसिंघ-देखो कितनी स्मार्ट है मेरी सेक्रेटरी ,कितनी जल्दी समझ जाती है.

अवी-मान गये, जितनी खूबसूरत है उस से ज़्यादा स्मार्ट है,

रणजीतसिंघ-आज इस खूबसूरती का मज़ा लेता हूँ.

अवी-तुम मज़ा लो, मैं चला घर

और मैं रणजीतसिंघ से मिलने के बाद घर चला गया. चाची के साथ बाते और बच्चो के साथ खेलने लगा

 
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