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10 थ डे
मैं ने सुबह उठ कर नीता बुआ को बता दिया कि मैं घर जा रहा हूँ.
घर जाकर मैं ने मंदिर जाने की तैयारी कर ली.
फिर चाची और बुआ का आशीर्वाद लेकर हम मंदिर चले गये
विद्या आज घर पर रुक गयी. मेरा कमरा ठीक करने के लिए.
मंदिर मे हर दिन की तरह हमने पूजा की. आज कुवरसिंघ की बीवी रेशमा मंदिर मे नही आई. और कुवरसिंघ तो आता ही नही था.
मंदिर मे पूजा करने के बाद हम घर चले गये.
विद्या ने मेरा कमरा साफ करने के बाद हमारे लिए नाश्ता भी बना लिया था.
नाश्ता करने के बाद मैं घर3 चला गया.
खेत मे जो लोग थे उनसे बात करने लगा.
रुकसाना और रज़िया की फॅमिली जाने की तैयारी कर रही थी.
रुकसाना और रज़िया मेरी तरफ देख रही थी. पर मैं ने उन पर ध्यान नही दिया.बस एक स्माइल दे कर उनको विदा कर दिया.
और वापस अपने काम पे लग गया.
ये मोना का फोन क्यूँ नही आया. एक काम ठीक से नही करती. कहा था कि सुबह फोन करना पर 11.00 बज गये है और फोन का कुछ पता नही.
मोना की जगह किसी और को इस काम मे लगा देता तो अच्छा होता. पर मोना जैसी ईडियट दूसरी मिलनी मुश्किल थी.
और तो और मोना का इस्तेमाल करना ज़रूरी था .क्यू कि मालिक उसका था और पैसे उसके पास है. इस वजह से मोना को झेल रहा था.
पर अब तक कॉल क्यूँ नही किया,उस दिन की तरह आज भी सो रही होगी. या फिर कुवरसिंघ ने गुस्से मे कही कुछ कर तो नही दिया.
नही, मैं ने जैसा सोचा है वो ग़लत नही हो सकता.
यहाँ से जा भी नही सकता.और किसी को बोल नही सकता यहाँ पर रुकने के लिए.मोना फोन भी नही उठा रही ,किस लिए फोन लिया है.
11 से 12 और 12 से 1.00 बज गया.
लोग मंदिर से दर्शन करके वापस आ रहे थे, और मैं मोना के फोन का इंतज़ार करने लगा.
लेकिन एक बात अच्छी हुई.सविता अपनी फॅमिली के साथ दर्शन कर के वापस आ गयी.
चलो सविता को देख कर टाइम पास कर लेता हूँ.
सविता की बात ही अलग थी,उसकी जैसी खूबसूरत मेले मे दूसरी नही होगी. पर कुवरसिंघ ने बाज़ी मार ली.
और आ गया साला.कुवरसिंघ सविता की खुश्बू सूंघते हुए यहाँ आ गया.
अब क्या था, शुरू हो गया नैनमटक्का ,उधर से कुवरसिंघ इशारा कर रहा था और इधर से सविता स्माइल कर के जवाब दे रही थी.
फिर कुवरसिंघ ने इशारा करके सविता को अपने पास बुलाया. सविता की फॅमिली अपने काम धाम कर रही जिस की वजह से सविता खूब मज़ा ले रही थी.
कुवरसिंघ के अपने पास बुलाते ही सविता ने टाय्लेट जाने का बहाना करके आम के बगीचे मे जाने लगी.
ये तरीका तो है लड़की इस्तेमाल कर रही है. पता नही कितनी चुदाई हुई होगी आम के बगीचे मे.
सविता के पीछे पीछे कुवरसिंघ भी आम के बगीचे मे चला गया.
चलो देख लेते है ये क्या करने वाले हैं. मैं दूसरे रास्ते से आम के बगीचे मे चला गया.
आम का बगीचा था इतना बड़ा कि औरतें और आदमी यही पर टाय्लेट करने जाते है.
अब इनको ढूढ़ु कहा. कभी इधर तो कभी दूसरी तरफ जाके देखने लगा.
आख़िर मिल ही गये. ये तो वही पेड़ है जहाँ पर मैं ने रज़िया और रुकसाना को घोड़ी बनाया था.
पेड़ ऐसा था कि उसके पीछे छुपने से दिखाई नही देता था. पर मेरी किस्मत अच्छी थी जो सविता की साड़ी का पल्लू हवा से उड़ने लगा और मुझे दोनो दिखाई दिए
मैं दूर से उन दोनो को देखने लगा. पास गया और कुवरसिंघ ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.
यहाँ से सिर्फ़ उनको देख सकता था. उनकी आवाज़ सुनाई नही दे रही थी.
दोनो किस कर रहे थे. किस करने के साथ एक दूसरे के बदन पर हाथ घुमा रहे थे.
सविता कुवरसिंघ का हाथ बार बार अपनी गंद पर ले जा रही थी.
कुवरसिंघ ने रति की गंद नही मारी थी. मतलब कुवरसिंघ को गंद मारना पसंद नही है.
पर ये देख कर ऐसा लग रहा है कि सविता को अपनी गंद मरवाना पसंद है.
एक तो अपनी पति से रोज गंद मरवाती होगी या फिर उसके पति ने कभी उसकी गंद ना मारी हो ,इस लिए कुवरसिंघ का साथ दे रही हो. अपनी इच्छा पूरी करने के लिए.
कुवरसिंघ ने अपना हाथ सविता की गंद से हटा दिया.
हाथ हटाते ही सविता ने किस तोड़ दिया. और उन दोनो मे कुछ बातें होने लगी.
थोड़ी देर बातें करने के बाद फिर से किस करने लगे और इस बार कुवरसिंघ ने खुद अपना हाथ सविता की गंद पे रख कर दबाने लगा.
कुवरसिंघ को गंद मारना पसंद नही है फिर ये सविता की गंद क्यू दबा रहा है.
तो ये बात है. सविता को गंद मरवाना पसंद है, और कुवरसिंघ जब तक उसकी गंद नही मारेगा उसे कुछ नही मिलेगा.
तो सविता ने किस तोड़ कर ये बात की कुवरसिंघ से.
कुवरसिंघ को सविता की गंद मारनी पड़ेंगी. उसके बिना सविता कुछ नही करने देंगी.पर कुवरसिंघ भी ठाकुर है वो पहले चूत ही मारेगा.
उनकी किस थोड़ी देर और चली फिर उनके बीच कुछ बातें हुई. मुझे कुछ सुनाई नही दे रहा था.
पर उनके एक्शप्रेशन और हाथ चलाने के तरीके पता चल गया कि वो क्या बातें कर रहे थे.
बातें करने के बाद सविता जाने लगी. उसके चेहरे पे खुशी झलक रही थी. और कुवरसिंघ भी खुश था.
मतलब आज सविता और कुवरसिंघ चुदाई करेंगे.
सविता मेरे हाथ से चली गयी. अब शीला को जाने नही दूँगा पर पहले हाथ तो आने दो.
मैं वापस खेत मे आ गया और फिर रणजीतसिंघ के पास चला गया.