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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 885

कोमल ने मुझे अपने साथ बारिश मे फसा दिया.

बस अगर एक 2 दुकान के फ़ासले पे होती तो भाग कर बस के पास जा सकते थे.

रोहन भी अपनी कार लेकर पहले निकल गया था. वरना कार शॉप के पास आ सकती थी.

अब उनको पास बुलाना ठीक नही है

बस तो गाँव के बाहर थी.और बारिश भी ऐसी शुरू हुई कि हम शॉप से बाहर निकलते ही गीले हो जाते.

बारिश के साथ अंधेरा भी हो गया.

सब अपनी शॉप बंद कर रहे थे.

अगर ये शॉप भी बंद हो गयी तो हमारे लिए तो प्राब्लम होजाएगी.

अवी-कोमल ये तुम ने क्या

कोमल-अवी पहली बारिश चलो भीगते है.

अवी-कोमल ,

कोमल-मैं मज़ाक नही कर रही.

अवी-एक तो तुम ने यहाँ फसा दिया. और तुम्हें इस तूफान मे भीगने का मन हो रहा है.

कोमल-तुम बे वजह परेशान हो रहे हो.

अवी-बेवजह, तुम्हें कुछ हुआ तो नेहा बुआ मुझे कच्चा खा जाएगी.

कोमल-ऐसा कुछ नही होगा. तुम्हारे होते हुए मुझे कुछ नही होगा

अवी-मैं तुम्हें कुछ होने नही दूँगा. और भीगने का सोचना भी मत

कोमल-अवी ,पहली बारिश

अवी-बिल्कुल नही.

कोमल-तुम मत आओ मैं तो जा रही हूँ

अवी-तुम्हें मेरी कसम अगर बाहर गयी तो

कोमल-ये चीटिंग है.

अवी-चीटिंग तुमने की. क्या ज़रूरत थी ब्रेसलेट लेने की.

कोमल-वो मैं

अवी-कल भी आ सकते थे या फिर मुझे बताती ,मैं लाकर देता.

कोमल-मुझे तुमसे बात नही करनी. और वो ब्रेसलेट मैं ने अपने लिए नही तुम्हारे लिया था.

अवी-मेरे लिए.

कोमल-एक तो तुम्हारा लिए गिफ्ट लूँ और तारीफ करने की जगह गुस्सा हो रहे हो

अवी-अब रोना शुरू मत करना

कोमल-मैं क्यूँ रोने लगी

अवी-दिखाओ मुझे ,क्या लिया है.

कोमल-लो खुद देख लो

कोमल ने मुझे ब्रेसलेट दिया. और दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी.

मैं ने ब्रेसलेट देखा ,बहुत सुंदर था और उस पे मेरा नाम भी लिखा था.

अवी-कोमल ये मेरे लिए है.

कोमल ने कुछ नही कहा.

अवी-कोमल ये तो बहुत संदर है. मुझे तो बहुत पसंद आया

कोमल-झूठी तारीफ मत करो

अवी-सच ,देखो कितना अच्छा लग रहा है.

ब्रेसलेट पे मेरा नाम लिखा था.

"अवी के "

के- मेरे सरनेम के से स्टार्ट होता है

अवी-पर तुम ने ये नाम अधूरा क्यूँ लिखा.

कोमल-वो शॉप वाला लिखने वाला था कि वोल्टेज कम ज़्यादा होने से उसने मशीन बंद की. मैं ने उससे रिक्वेस्ट की पर उसने शॉप बंद करने की बात कही और तभी तुम आ गये सुर मुझे यहाँ लेकर आ गये

अवी-फिर भी इतना काफ़ी है.चलो मैं भी तुम्हें एक गिफ्ट देता हूँ.

मैं शॉपवाले से पूछने वाला था कि उस शॉपवाले हम पे बिजली गिरा दी.

शॉपवाला-भैया तुम्हें यहाँ से जाना होगा .हम शॉप बंद कर रहे है.

अवी-थोड़ी देर की बात है बारिश कम होते ही चले जाएँगे.

शॉपवाला-भैया ये बारिश रुकने वाली नही है. यहाँ बारिश ऐसी होती है.आपको पहले चले जाना चाहिए था. अभी भी टाइम है कोई टॅक्सी देख कर चले जाओ , अगर और थोड़ी देर रुके तो टॅक्सी भी नही मिलेगी.

मैं और कोमल एक दूसरे के चेहरे देखने लगे.

शॉपवाला-बाहर देख लो .सारी शॉप बंद हो गयी है. सबको पता है ये बारिश जल्दी नही रुकेगी.आप जल्दी चले जाइए वरना आपको परेशानी होगी.यहाँ कई बार बतीश शुरू होती है तो कोई बता नही सकता की कब रुकेगी

मैं ने इसके बारे मे सोचा नही. मुझे पूछना चाहिए था कि बारिश कब रुक सकती है. बिना वजह बस वापस भेज दी.

मुझे तो लगा था 1 घंटे मे बारिश कम होते ही टॅक्सी ले लूँगा. पर यहाँ तो टॅक्सी मिलना मुश्किल होगा.

अवी-मैं फोन करता हूँ. स्वेता दीदी को बुलाता हूँ कार लेकर

शॉपवाला-आपको लगता है इस बारिश मे नेटवर्क होगा. ऐसे मे बड़ी मुस्किल से नेटवर्क रहता है अब तो बारिश शुरू हो गयी.

शॉपवाले सही कहा. नेटवर्क नही था.

वहाँ बुआ का कॉल आया था तब तो नेटवर्क था और अब क्या हो गया

अब क्या करूँ, अकेला होता तो कैसे भी मनेज करता .पर कोमल के होते हुए ,

मुझे खुद को शांत रखना होगा. और इसका हल ढूँढना होगा.वरना कोमल बिना वजह डर जाएगी

अवी-भैया ये जेंट्स शॉप है.

शॉपवाला-हाँ

अवी-तो हमे लार्ज साइज़ के 2 शर्ट दीजिए. और एक प्लास्टिक बॅग. और छाता .एक टॉर्च मिल सकती है.

शॉपवाले ने मुझे शर्ट और प्लास्टिक तो दिया पर छाता और टॉर्च नही दी.

शॉपवाला-भैया यहाँ छाता और टॉर्च नही मिलती.और रेनकोट भी नही है हमारे पास

कोमल- वो वहाँ रखी है ना.

शॉपवाला-वो मेरी है. चलो आपकी परेशानी समझते हुए आप ले जा सकते है. पर इसके भी पैसे लूँगा.

अवी-ठीक है. और मुझे ये बताइए टॅक्सी कहाँ से मिलेगी.

उसने हमे टॅक्सी का पता बता दिया.मैं ने शॉपवाले को पैसे दिए.

मैं ने हम दोनो के मोबाइल और एक शर्ट बॅग मे डाल कर बॅग को अपनी बनियान के अंदर डाल दिया.

कोमल-ये क्या कर रहे हो

अवी-तुम देखती जाओ, ये शर्ट तुम पहन लो. ताकि तुम्हारा ड्रेस ज़्यादा गीला नही होगा.

कोमल-रैन कोट होगा तो पूछ लो

शॉपवाला-वो भी नही है.

और उस शॉप वाले ने बाहर जाके देखा

शॉपवाला-सभी दुकान बंद हो गयी

अवी-तुम शर्ट पहन लो. आज हम पहली बारिश मे भीगने का मज़ा लेंगे

कोमल-तुम्हें मुझपे गुस्सा आ रहा होगा ना

अवी-नही. तुम्हारी वजह से बारिश मे भीगने का मोका मिल रहा है.पहली बारिश

कोमल-पहले तुम मना कर रहे थे

शॉपवाला-भैया थोड़ा जल्दी करेंगे. मुझे शॉप बंद करनी है.

कोमल ने शर्ट पहन लिया.और हम छाते के नीचे आकर टॅक्सी ढूँढने के लिए निकल पड़े

एक बात अच्छी हुई कि हवा बंद हो गयी थी.सिर्फ़ बारिश चल रही थी.

वरना हमारा छाता तो उड़ जाता

अवी-तुम क्या कह रही थी.

कोमल-तुम मना कर रहे थे ना बारिश मे भीगने से

अवी-कोमल, भगवान यही चाहता है कि हम बारिश का मज़ा ले.

कोमल-स्मार्ट आन्सर

अवी-खुब्सरत लड़की साथ मे हो तो स्मार्टनेस दिखानी पड़ती है

कोमल-अपनी स्मार्टनेस दूसरी जगह लगाओ. देखो सब शॉप बंद है. और टॅक्सी का नामो निशान नही है

अवी-जितना टेन्षन लेंगे उतनी मुश्किल होंगी. टॅक्सी मिलनी होंगी तो मिल जाएगी.

कोमल-तुम तो ऐसे कह रहे हो कि टॅक्सी ना मिली तो होटेल तक पैदल चले जाएँगे

अवी-हमारा होटेल 10 किमी दूर है.

कोमल-अगर टॅक्सी ना मिली तो

अवी-वो बाद मे. पहले मेरे साथ चिपक कर चलो तुम गीली हो रही हो.

कोमल-हम भिगेंगे नही तो मज़ा कैसे आएगा पहली बारिश का

मैं ने कोमल की कमर मे हाथ डाला और उसे अपने से चिपका दिया.

मेरे ऐसा करते ही कोमल मेरी तरफ देखने लगी. और मुझसे चिपक गयी.

हम बारिश मे थोड़ा भिगते हुए आगे आगे चलने लगे .पर टॅक्सी नही मिली.

मेरा हाथ वैसे ही कोमल की कमर मे था. जिस से बारिश मे गरमी बढ़ रही थी.

उसकी गीली कमर मे हाथ फिसल रहा था.

रोड पे पानी जमा हुआ था जिस से मैं फिसल गया.

फिसल ने से मेरा हाथ कोमल की कमर पे फिसलने लगा

फिसलते हुए हमारे हाथ मे जो आता है वो पकड़ लेते है.

ऐसे मे मेरे हाथ मे जो चीज़े आई उसे पकड़ते मुझे करेंट लगा.

कमर से मेरा हाथ फिसल कर कोमल की हिप पर चला गया.

और मैने फिसलने से बचने के लिए उसके चूतड़ को पकड़ लिया था.

चूतड़ को दबातें ही कोमल के मुँह से आउच निकल गया.

मेरे हाथ को चूतड़ का टच पता था.

मेरे शरीर को करेंट लगते ही मैं ने चूतड़ को छोड़ दिया.

और कोमल ने भी राहत की सास ली.

इस घटना के बाद तो जैसा मुझे समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ.

मैं क्या कहूँ कोमल को. ये एक आक्सिडेंट था.

हम दोनो चुप चाप एक दूसरे को देखने लगे

मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि क्या कहूँ

कोमल भी शर्मा रही होंगी

मुझे तो लग रहा था कि कोमल को गुस्सा आएगा

फिर भी कोमल मेरे बारे मे क्या सोचेंगी.

मुझे लग रहा था कि मैं क्या करूँ. ऐसे मे कोमल ने बात शुरू की.

कोमल-अवी टॉर्च मुझे दो .मैं रास्ता दिखाती हूँ. वरना तुम फिर फिसल जाओगे

अवी-वो मैं ,मैं वो , फिसल गया , मैं ने ग़लती से

कोमल- अभी तो तुम फिसले थे और अब तुम्हारी ज़बान फिसल रही है

अवी- वो मैं

कोमल- टॉर्च

अवी- हाँ हाँ टॉर्च , लो टॉर्च.

कोमल- रास्ते पे बहुत गढ्ढे है. आक्सिडेंट हो जाता है.

मैं ने उस पे कुछ नही कहा

कोमल टॉर्च पकड़ कर चलने लगी.

कोमल-अवी एक जोक सुनोगे

अवी-क्यूँ नही.ज़रूर

कोमल-एक बार एक हाथी बारिश मे भिगते हुए घर जा रहा था. रास्ते मे उसे चिटी मिल गयी. तो चिटी ने पूछा तुम बारिश मे भागते हुए घर क्यूँ जा रहे हो. तो हाथी ने कहा कि पेड़ को पानी देने का समय हो गया है. अगर पानी नही दिया तो पेड़ हमे फ्रूट कैसे देगा .

अवी-हा हा हा ,नाइस जोक ,बारिश मे पानी देगा पेड़ को.

कोमल-आगे सुनो. चिटी भी भागने लगी. तो हाथी ने पूछा तुम्हें क्या हुआ .तो चिटी ने कहा कि मुझे मेरी बीवी ने कपड़े धो कर छत पे सुखाने कहा था वही सुखाने का भूल गया , घर जल्दी जाकर कपड़े सुखाने डालने होंगे छत पर

अवी-हा हा ,बारिश मे छत पे कपड़े सुखाने डालेगा.

कोमल-आगे सुनो, हाथी ने कहा मेरी छत पे कपड़े मत सुखाना .कल ग़लती से तुम्हारी बीवी के कपड़े मेरी बीवी ने पहन लिए थे , और कह रही थी कि वो आज स्लिम हो गयी है

अवी-बस कोमल. और नही ,पेट दुख रहा है हँसते हुए.

कोमल-अवी, टॅक्सी कहाँ है. हम तो इस गाओं के बाहर आ गये

अवी-तुम्हारे जोक मे पता ही नही चला.

कोमल-मुझे तो अब डर लग रहा है

अवी-मेरे होते हुए

कोमल-कोई लड़की तुम्हें अकेला देख कर तुम्हारा फ़ायदा ना उठा ले इस बात का डर लग रहा है.

अवी-मुझे बचा लेना .पता नही यहाँ की लड़किया कैसी है.

कोमल-वेरी फन्नी

अवी-शुरुआत तुम ने की थी.

कोमल-अवी कुछ करो ना. मुझसे और चला नही जाता.

अवी-मैं गोद मे उठा लूँ.

कोमल-सीरियस्ली

अवी-यहाँ तो कोई घर दिखाई नही दे रहा है.

कोमल-अवी हवा चलने लगी है.

अवी-कोमल पकड़के रखना वरना तुम उड़ जाओगी.

मैं तो इस सिचुएशन से डर ख़तम करने के लिए मज़ाक मस्ती का सहारा ले रहा था

लेकिन अचानक तेज हवाएँ चलने लगी और हमारा छाता

कोमल-छाता

कोमल ने इतना कहा था कि तेज हवा से हमारा चटा टूट गया.

और हम भीगने लगे.

मैं ने कोमल को जल्दी पास के पेड़ के नीचे चलने को कहा.

लेकिन तब तक हम 75% भीग चुके थे.

फिर भी हम बारिश की तेज बूँदो से बचने के लिए पेड़ के नीचे आ गये.

पेड़ के नीचे आ तो गये फिर भी हम भीग रहे थे.

अब तो हम पूरी तरह से भीग गये थे.

कोमल ठंड से काप रही थी.

कोमल का ड्रेस उसके बदन से चिपक गया था.

अवी-कोमल मेरे गले लग जाओ

कोमल-मैं ठीक हूँ

मैं ने उसको पकड़ कर अपने गले लगा लिया. कस के पकड़ लिया

अवी-तुम मेरी बात मान लिया करो.

कोमल-मैं ठीक थी.

अवी-दिख रहा था. तुम पूरी काप रही हो

कोमल-वो तो

अवी-अब देखो तुम्हारी ठंड गायब हो गयी है.

कोमल-लेकिन हमे किसी ने ऐसे देख लिया तो

अवी-यहाँ बारिश मे कौन आएगा.

कोमल को गले लगाते ही हमारी सर्दी गायब हो गयी.

कोमल का नाज़ुक बदन मेरे कसरती शरीर से चिपकते ही हमारे बदन मे गर्मी पैदा होने लगी.

हमारी धड़कने तेज चल रही थी.

हम तो जैसे भूल गये थे हम बारिश भीग रहे थे.

जवान बदन एक दूसरे के संपर्क मे आते ही जवानी की ज्वाला मे जलने लग जाते हैं.

हम भी तेज बारिश मे जल रहे थे.

जवानी की ज्वाला हमारे अरमान को जगा रही थी.

अरमान जागने मे ज़्यादा समय नही लगता .इसका पता पहले कोमल को लगा.

कोमल-अवी मुझे कुछ चुभ रहा है

अवी-क्या

कोमल-कुछ नही.

शायद कोमल समझ गयी थी वो क्या है

और ग़लती से वो क्या बोल गयी इसका पता चलते ही कोमल शरमा गयी

मुझे थोड़ी देर मे समझ आया क्यूँ कि मेरा ध्यान कोई सेफ जगह ढूँढने पर था

मैं ने ,ये तो ,शिट ,मेरा लंड टाइट हो गया था.वो कोमल को चुभ रहा था.

मुझे कोमल का माइंड दूसरी तरफ डाइवर्ट करना होगा.

अवी-कोमल

कोमल ने कोई जवाब नही दिया.

मैं ने कोमल की कमर मे चींटी काट ली. तो कोमल होश मे आ गयी.

अवी-कहाँ खो गयी थी.

कोमल-क्या हुआ

अवी-वो देखो एक बाइक आ रही है.

कोमल-ये तो गाओं की तरफ जा रही है और हमे दूसरी तरफ जाना है

अवी-उस से पूछ लेते है. यहाँ से होटेल कैसे जाएँगे.

हम उस बाइक को रोकने वाले थे कि वो बाइक हमारे पास आकर रुक गयी.

बाइक वाला-क्या हुआ. ऐसे यहाँ क्यूँ खड़े हो

अवी-हमे होटेल जाना था. पर टॅक्सी नही मिल रही.इस बारिश मे हम फस गये है

बाइक वाला-वो तुम्हारे पीछे जो खेत है वहाँ तबेला है. वहाँ रुक जाओ. बारिश रुकने तक , वो तबेला मेरा है. वहाँ रुक सकते हो

(इतफाक से हम जहाँ खड़े थे वो उस बाइक वाले का खेत था ,अपने खेत के पास हमे खड़ा देखा इस लिए वो रुक गया था )

अवी-सुक्रिया.

और वो बाइक वाला चला गया. और हम बाइक वाले की बताई हुई जगह पर जाने लगे.

तबेला ठीक हमारे पीछे था .पर पेड़ की वजह से दिखा नही था.

तबेला दिखते ही हम खुश हो गये और भाग कर तबेले मे चले गये.

तबेले मे 2 गाय थी. और सुखी घास रखी थी.

तबेले मे आते ही हम रिलॅक्स हो गये

हम कम से कम बारिश से तो बच सकते है.

तबेले मे आते हम वहाँ थोड़ी जगह बनाने लगे.

कोमल मुझसे दूर होते ही फिर से कापने लगी.

मैं भी पूरी तरह से भीग गया था.

हमे सर्दी से बचने के लिए कुछ करना होगा.
 
चॅप्टर 886

हमने तबेले मे आते ही चैन की सास ली.

पर हम पूरी तरह से भीग गये थे.

कोमल को जो शर्ट पहनाया था वो भी भीग गया था. साथ वे सलवार कमीज़ भी

अब बारिश के साथ हवा चल रही थी. जिस से कोमल ठंड से काप रही थी.

मुझे आग का बंदोस्त करना होगा.

मैं ने पहले अपनी टीशर्ट निकाल ली .और जो प्लास्टिक बॅग था उसमे से मोबाइल निकाल कर नेटवर्क चेक किया पर नो नेटवर्क था.

अवी-कोमल

कोमल- अवी ठंड लग रही है

अवी-कोमल वो कपड़े निकाल लो वरना सर्दी लग जाएगी.

कोमल-कपड़े .यहाँ कैसे ,

अवी-यहाँ कोई नही है. मैं ने चेक किया है.

कोमल-फिर पहनूँगी क्या

अवी-ये शर्ट जो एक्सट्रा ली थी.

कोमल-तो इस लिए ली थी शर्ट

अवी-ज़रूरत पड़ने पे ईस्तमाल करने को ली थी.

कोमल-दो मुझे .और इधर देखना मत

अवी-तुम गाय के पीछे जाकर चेंज करो .मैं आग जलाने का बंदोस्त करता हूँ

कोमल ड्रेस चेंज करने चली गयी. और मैं तबेले मे ज़रूरत का समान ढूँढने लगा.

मुझे माचिस और बुझी हुई लकड़िया मिल गयी.

मैं आग जलाने वाला था कि रुक गया. पहले कोमल को ड्रेस चेंज करने दूं .फिर आग जला दूँगा.

कोमल ने अपने गीले कपड़े निकाल लिए और शर्ट पहन कर आ गयी

कोमल-गीले कपड़े कहा सुखाऊ

अवी-एक मिनट रूको.

और मैं ने आग जला दी. आग जलते ही तबेले मे रोशनी हो गयी.

और रोशनी होते ही मेरी नज़र सामने खड़ी कोमल के नंगे पैरो पे गयी.

नंगे पैर को देखते ही मेरी आँख उपर जाने लगी.

घुटने तक आते ही मैं ने अपनी आँख को रोकने की कोशिस की पर वो धोकेबाज मेरी आँख रुकने का नाम नही ले रही थी.

मेरी आँख कोमल की गोरी चिकनी जाँघो पे जाते ही मुझे खुद पे गुस्सा आ रहा था .कि मैं ये क्या कर रहा हूँ.

पर थॅंक गॉड ,कि आधी जाँघो के बाद शर्ट स्टार्ट हो गया.

फिर क्या था मैं ने एक झटके मे उपर तक कोमल को देख लिया जो एक हाथ मे अपने कपड़े लेकर खड़ी थी तो दूसरे हाथ से शर्ट को नीचे खिच रही थी.

अवी-कोमल दो मुझे कपड़े मैं सूखा देता हुआ.

कोमल-मैं सूखा दूँगी.

और कोमल ने अपनी सलवार कमीज़ को सुखी घास पे बिच्छा दिया .और गीले शर्ट को मेरी टशहिर्त के पास रख दिया.

मैं तो कोमल के सुंदर से बदन को देख रहा था.

उसकी आँख जो लाल हो चुकी थी. शायद थोड़ी देर पहले की चुभन

उसके गीले बालो से गिरता हुआ पानी.

उसके पर्फेक्ट फिगर पे लूस शर्ट ,हवा से उड़ रहा था.

और कोमल शर्ट को नीचे से पकड़ कर खड़ी थी.

मुझे खुद को इस तरह घूरता हुआ देख कर कोमल शरमा गयी.

और मेरी तरफ घास फेक कर मेरे सामने आग की दूसरी तरफ जाके बैठ गयी.

कोमल अपने पैरो पीछे की तरफ मोड़ कर बैठी थी.

मैं होश मे आते ही अपनी आँख नीचे करके बैठा था.

कोमल भी नीचे देखते हुए घास के टुकड़े के साथ खेल रही थी.

थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद जैसे ही मैं ने अपनी आँख उपर की उसी वक्त कोमल ने भी अपनी आँख मेरी तरफ घुमाई. हमारी नज़रें मिलते हम फिर से शर्मिंदा हो गये.

और नीचे देखते हम दोनो की हँसी निकल गयी.

अवी-तुम हँस क्यूँ रही हो.

कोमल-तुम मुझे ऐसे घूर क्यूँ रहे थे.

अवी-कोमल तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हें देखते ही मैं ,सच कहता हूँ तुम अपसरा लगती हो इंद्रपुरी की.

कोमल-झूठ मत बोलो वरना कॉवा काट लेगा.

अवी-सच कोमल , भगवान ने तुम्हें फ़ुर्सत से बनाया है. मुझे ये कहना नही चाहिए था पर तुम हॉट लग रही हो.

कोमल-हॉट होती तो ठंड थोड़ी लगती. आंड थॅंक्स .

अवी-अब ठंड लग रही है.

कोमल-नही.पर थोड़ी थोड़ी

अवी-मेरे पास आकर बैठो

कोमल-नही. मैं यहीं ठीक हूँ.वैसे हम कब तक यहीं रहेंगे

अवी-क्यूँ ,होटेल जाना है. होटेल जाकर क्या करोगी. रूम मे जाकर बोर हो जाओगी. उस से अच्छा यहाँ है हम बारिश को एंजाय कर रहे है.

कोमल-तुम्हारी बात तो ठीक है. पर माँ परेशान हो रही होंगी.

अवी-पूजा बुआ उनको संभाल लेंगी. और तुम अकेली नही हो. मैं हूँ तुम्हारे साथ ,

कोमल-तुम हो तो

अवी-क्या कहा फिर से कहना

कोमल-कुछ नही. बारिश को एंजाय करना भारी पड़ गया.

अवी-इसी मे मज़ा आता है. लाइफ मे एक नया एक्सपीरियेन्स मिलता है.

कोमल-देख रही हूँ किसे एक्सपीरियेन्स मिल रहा है

अवी-मैं समझा नही.

कोमल-कुछ बातें खुद समझनी पड़ती है. वैसे मुझे डीडीएलजी का एक सीन याद आ गया.

अवी-कौन सा

कोमल-वही. दोनो ने एक तबेले मे रात बिताई. हम भी कुछ वैसे ही सिचुएशन मे है.

अवी-हाँ याद आया. पर तुम डीडीएलजी की सिमरन से बहुत संदर हो.

कोमल-और तुम राज हो,

अवी-राज तो होटेल मे है. मैं तो अवी हूँ.

कोमल-वेरी फन्नी

अवी-मैं तो सोच रहा हूँ. आज रात यही बिताते है. एक नया एक्सपीरियंस मिलेगा.

कोमल-नया एक्सपिरिन्स लेना चाहते हो. माँ को बताऊ

अवी-तुम भी ना ,किसका नाम ले लिया .पूरा मूड ऑफ कर दिया

कोमल-मेरी माँ क्या इतनी बुरी लगती है तुम्हें.

अवी-और नही तो क्या .अगर तुम बीमार पड़ गयी तो मेरी पिटाई करेंगी

कोमल-ये मिसटर, माँ ने कहा था कि तुम्हें टीशर्ट गिफ्ट दूं. अब बोलो

अवी-झूठ मत बोलो वरना कॉवा काट लेगा.

कोमल-सच .मैं तो ब्रेसलेट लेना चाहती थी. और लिया भी. टीशर्ट माँ ने देने को कहा था इस टूर पे लाकर हमे खुशिया देने के बदले

अवी-मैं नेहा बुआ को समझ नही पा रहा हूँ.

कोमल-माँ ,वो कभी गुस्सा करती है तुम पे तो कभी हम ने तुम्हें कुछ कहा तो हम पे गुस्सा करती है कि हम ने तुम्हें बुरा भला कहा कैसे

अवी-तुम मुझे बरा बुला कहती हो.

कोमल-नही. वो तो तुम ने कहा था कि अपने बारे मे पता लगाऊ .इस लिए कहा था. वरना मैं ग़लती से तुम्हारे लिए कुछ बुरा नही बोल सकती.

अवी-वो मुझे पता है.कोमल चूहा तुम्हारे पैर के पास

कोमल चूहे का नाम सुनते ही एक झटके मे खड़ी हो गयी. और अपने शर्ट को और पैर को झटकने लगी.

कोमल को ऐसे डरते हुए देख कर मैं हँसने लगा.

कोमल-हसो मत ,कहाँ है चूहा.

अवी-कौनसा चूहा

कोमल-अभी तो कहा था कि, एक मिनट, मुझे डराते हो

और कोमल गुस्से मे मेरी तरफ आने लगी.

मैं कोमल से बचने के लिए खड़ा हो रहा था कि कोमल मुझे पकड़ने के लिए मुझपे छलाँग मारी थी कि हम दोनो घास पे गिर गये.

कोमल दबाक से मेरे उपर ऐसी गिरी कि उसकी चेस्ट मेरी चेस्ट से टकरा गयी. पहाड़ गिर गये

कोमल तो इस तरह गिरने से खुद को संभाल नही पाई और उसकी शर्ट पीछे से कमर तक उपर हो गयी.

कोमल को इस बात का पता नही था.

वो तो अलग मूड मे थी.

कोमल ने मेरे हाथो को अपने हाथो से पकड़ लिया .

कोमल-अब बोलो

अवी-कोमल वो

कोमल-चुप ,मुझे डराते हो. मैं तुम्हारा खून पी जाउन्गी.

अवी-कोमल मेरी बात तो सुनो

कोमल-चुप ,आज ये बिल्ली अवी नाम के चूहे का शिकार करेंगी.

कोमल मस्ती के मूड मे थी

हँसी मज़ाक वाली मस्ती

अवी-मेरी बात तो सुनो

कोमल-क्यूँ क्या हुआ. बिल्ली से डर गये. ये बिल्ली पंजा भी मारती है.

अवी-जितने पंजे मारने है मारो पहले मेरी बात तो सुनो

कोमल-बोलो ,तुम्हारी आख़िरी इच्छा क्या है.

अवी-रेड कलर

कोमल-क्या रेड कलर

अवी-अब तुम्हें कैसे बताऊ. एक काम करो मेरे हाथ छोड़ो.

कोमल-हाथ छुड़वा कर भागना चाहते हो

अवी-एक हाथ छोड़ सकती हो

कोमल-लो छोड़ दिया.

और मैं ने कोमल के शर्ट को ठीक किया .उसकी रेड पैंटी को छुपा दिया.

कोमल को पता चलते ही उस से अंजाने मे क्या हुआ तो उस अपना चेहरा मेरे चेस्ट पे छुपा दिया.

अवी-क्या हुआ बिल्ली को

कोमल-तुम गंदे हो

अवी-मैं गंदा होता तो बताता थोड़े

कोमल-पहले नही बता सकते थे

अवी-तुम बिल्ली बनी हुई थी. ऐसे मे चूहा क्या कर सकता था.

कोमल-अच्छा हुआ चूहा बिल्ली से डर के गुफा मे घुस नही गया अभी भी.मेरे हाथो मे है

उसके कहने का मतलब था कि कोमल मेरे उपर थी और मुझे चूहे की तरह पकड़े हुई थी और मैं उसके हाथ से निकला नही

अवी-गुफा

कोमल फिर से अपनी बात पे सोचने लगी.

उसे फिर से कुछ चुभने लगा.

कोमल तो , कोमल बिना कुछ कहे मेरे उपर से उठ गयी.

कोमल के उठने से मेरी पैंट मे उभार उसे सॉफ दिख रहा था.

कोमल शरमा कर अपनी जगह चली गयी. मैं भी अपनी हरकत के लिए शर्मिंदा था

अवी-कोमल सॉरी

कोमल-ह्म

अवी-इतने अच्छे मौसम मे ग़लती हो जाती है.

कोमल-आक्सिडेंट भी होते है बारिश मे

अवी-उसका ग़लत मतलब नही निकालना चाहिए

कोमल-ग़लत समझ ही नही सकती. हालत ऐसे थे

अवी-तुम बेस्ट फ्रेंड हो

कोमल-तुम भी.

डबल मीनिंग बातें करके जैसे बता दिया कि जो हुआ एक आक्सिडेंट था.

हम फिर से नॉर्मल हो गये .

अवी-कोमल

कोमल-हाँ

अवी-ये बारिश चाहती क्या है.

कोमल-(हम एक हो जाए) मुझे क्या पता .पर इतना पक्का है इस बारिश की वजह से हम साथ आ गये .वरना सबका ध्यान रखते हुए खुद के लिए तुम्हारे पास टाइम नही होता.

अवी-अपनो के लिए मेरे पास हमेशा टाइम होता है.

कोमल-टाइम कितना हुआ है

अवी-1 घंटा हो गया .बारिश रुकने का नाम नही ले रही

कोमल-(ये बारिश रुके ना) इस बारिश ने हमे तो बाँध के रखा है.

अवी-हाँ. मुझे तो ठंड लग रही है.

कोमल-घास पे लेट जाओ .घास गरम हो गयी है आग की वजह से

मैं ने कोमल की कमीज़ उठा के सलवार के उपर रख दी. और घास पे लेट गया.

कोमल-तुम तो सच मे लेट गये.घर नही जाना

अवी-बारिश रुकेगी तभी तो कुछ कर पाउन्गा.

कोमल-पर मुझे अकेला छोड़ कर तुम सो रहे हो

अवी-तुम भी तो आराम से सो रही हो

कोमल-मैं यहाँ बैठी हूँ, चश्मा लगा लो

अवी-फिर ये कौन है वो रेड सलवार कमीज़ पहन कर मेरे साथ सो रही है.

कोमल ने ड्रेस को ऐसे सुखाने डाला था कि ऐसा लग रहा था कि कोई लड़की सलवार कमीज़ पहन कर सो रही है.

कोमल मेरी.तरफ देखती रह गयी

उसको.समझ मे नही आया

अवी-कौन हो तुम

कोमल2-मेरा नाम कोमल2 है

मैं ने उस ड्रेस से बात करनी शुरू की.और खुद जवाब देने लगा.तब जाके कोमल समझी कि मैं किस बारे मे बात कर रहा था

अवी-कोमल इसका नाम तो कोमल2 है.

कोमल-पूछो यहाँ कैसे आई.

अवी-तुम यहाँ क्या कर रही हो

कोमल2- मैं अपने शहज़ादे का इंतजार कर रही हूँ

अवी-कौन है तुम्हारा शहज़ादा

कोमल2-मेरा शहज़ादा वो होगा जो मुझे किस करके फिर से अपने असली रूप मे लाएगा.

कोमल-ये तो वो स्टोरी है जिसमे ड्रॅगन राजकुमारी को महल मे क़ैद करके उसकी रखवाली करता है.फिर वो किस करके

कोमल2-ये कौन बोल रही थी

अवी-ये कोमल है. जन्नत की परी है. जो तुम्हारी मदद करने आई है.

कोमल2-मेरी मदद ,वो कैसे

अवी-वो तुम्हें पहनेगी. जिस से तुम्हारा रूप वापस आ जाएगा

कोमल2-लेकिन वो तो शहज़ादे के किस करने से आएगा.

अवी-मैं वही शहज़ादा हूँ.मैं बारिश और तूफान नाम के शैतान को हराके आया हूँ.मैं तुम्हें किस करके पहले वाले रूप मे वापस लाउन्गा.

कोमल2-जल्दी करो किस

अवी-पहले परी को पूछो क्या वो तुम्हें पहनेंगी.

कोमल-मैं तुम्हारे सुख जाते ही पहन लूँगी

कोमल2-मुझे किस करो. मुझे अपने शरीर मे वापस आना है.

अवी-अभी करता हूँ

और मैं कोमल2 के उपर आगया .और प्यार से उसके होंटो पे किस करके ,बारिश नाम के शैतान ने जो उसे भिगो दिया था वो पानी थोड़ा सुख गया.

किस करते ही कोमल2 जल्दी जल्दी सूखने लगी.

और इसका इंतजार करने लगी कि कोमल परी उसे पहनेगी

मैं ने कोमल की तरफ देखा तो वो आँख बंद करके ऐसी बैठी थी जैसे मैं ने किस उसे किया हो

मैं ने चुटकी बजा कर कोमल को होश मे लाया .

कोमल होश मे आते ही मेरे आक्ट के लिए तालिया बजाने लगी.
 
चॅप्टर 888

मैं ये क्या कर रहा था.

मुझसे ऐसी ग़लती हुई कैसे ,मैं कोमल के साथ ,ये मैं था या मेरे अंदर का शैतान था ,

पता नही क्यूँ जब भी कोमल को देखता हूँ तो मैं उसकी खूबसूरती मे खो जाता हूँ.

बस ऐसा लगता है कि.कोमल को प्यार करता रहूं

एक अजीब सा अट्रॅक्षन पैदा होता है जिस से मेरा खुद पे कंट्रोल नही रहता ,

कोमल से मैं जितना भी दूर रहने का सोचता हूँ उतना ही मैं उसके पास जाता हूँ

मैं सब कुछ भूल जाता हूँ जब कोमल मेरी बाहों मे होती है.

कोमल के साथ रहता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं जो चाहता था वो मिल गया हो.

कोमल के चेहरे पे स्माइल देखते ही उसकी खुशी मुझे होती है.

ये मुझे हो क्या रहा है.

पहले तो ऐसा नही होता था. अब ये क्यूँ हो रहा है.

जब से उस झरने से हम आए है. ऐसा लगता है कोमल के बिना मैं अधूरा हूँ

एक अजीब सी शक्ति मुझे कोमल के पास ले आती है. कोमल और मुझ मे क्या कोई कनेक्षन बन गया है.

जैसे हमारी आत्मा एक हो गयी हो.

कहीं उस मंदिर मे झरने वाले गाओं के जहाँ हम ने पूजा की थी .उसका तो असर नही है

वहाँ जो धागा हमने अपने हाथ पे बाँधा था वो आज भी हमारे हाथो मे है.

जब भी उसको निकालना चाहता हूँ तो किसी ना किसी बहाने से उसको निकाल नही पाता.

ये मैं क्या सोच रहा हूँ.

ऐसी बातें फ़िल्मो मे अच्छा लगती है.रियल लाइफ मे ऐसा थोड़े होता है.

लेकिन कुछ तो है जो हम एक दूसरे के करीब आ रहे है किसी ना किसी वजह से

मैं ने तो आज सारी हद पार कर ली

मैं ने कोमल के लिए कभी ऐसा सोचा ही नही

पर कोमल ने कुछ कहा क्यूँ की

उसको मुझे रोकना चाहिए था

शायद वो भी इस सिचुएशन की वजह से बहक गयी हो

लेकिन इस मे ग़लती मेरी है , ग़लती हमेशा चाकू की होती है ना कि खरबूजे की

अगेर मैं आगे बढ़ जाता तो

अगेर वो बिजली गिरी नही होती तो

तो मैं कोमल का सामना कैसे करता

अभी भी मुझे खुद पे गुस्सा आ रहा है

कोमल से नज़रें नही मिला पा रहा हूँ

वो क्या सोच रही होगी मेरे बारे मे

पहले जो हुआ उसको तो कोमल ने आक्सिडेंट मान लिया था

लेकिन अब जो हुआ वो आक्सिडेंट नही था

क्या मैं इतना अँधा हो गया हूँ

क्या सेक्स के सिवा मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा है

ये मेरी हवस थी जो मुझसे ये सब करवा रही थी

या ये प्यार था मेरा कोमल के लिए जिस के चलते मैं खुद को रोक नही पाया

लेकिन हर बार मेरा खुद पे कंट्रोल रहता है चाहे मैं किसी के साथ भी सेक्स करूँ या प्यार करूँ

रानी के साथ प्यार करते हुए मैं खुद पे कंट्रोल रखता हूँ तभी तो उसका प्रॉमिस मैं ने टूटने नही दिया

फिर आज मुझे क्या हो गया था जो मैं बहता चला गया कोमल की खूबसूरती मे

कोमल मे कुछ तो बात है जो मुझे उसकी तरफ खिचती है

ये मैं क्या सोच रहा हूँ. जो हुआ उसमे मेरी ग़लती है. कोमल तो नादान है उसकी क्या ग़लती है

जैसे मैं ये सब सोच रहा हूँ क्या कोमल भी.मेरे बारे मे सोच रही होगी

कोमल मेरी बारे मे क्या सोच रही होगी

कहीं उसने मेरे बारे मे ग़लत सोच लिया तो

कोमल ने मेरे साथ सारे रिस्ते तोड़ दिए तो

कोमल ने मुझे ग़लत समझ लिया तो

कोमल ने मुझे बात करने से मना किया तो

ये सब सोचते ही मैं डरने लगा

लेकिन कोमल की प्यारी आवज़ सुनकर मैं होश मे आ गया

कोमल-अवी , अवी

अवी-हाँ कोमल

कोमल- मुझे डर लग रहा है

अवी- डर

कोमल-वो बिजली

अवी- डरो मत मैं हूँ तुम्हारे साथ

मैं ने ये बोल तो दिया पर क्या सच मे मैं कोमल के साथ था आज

कोमल- उस बिजली की आवाज़ अभी तक गूँज रही है मेरे कानों मे

अवी-बिजली शायद आस पास गिरी हो.

कोमल-मुझे डर लग रहा है

अवी-मेरे रहते तुम्हें डरने की ज़रूरत नही है.

मेरे रहते

लेकिन मैं ही तो कोमल के साथ

नही नही वो सब ग़लती से हुआ

मैं कोमल के साथ ऐसा नही कर सकता

कोमल-ये इतना उजाला कैसे हुआ है

अवी-बिजली गिरने से आग लग गयी है.

कोमल-तबेले मे तो नही लगी

अवी-नही. रोड की तरफ से उजाला दिख रहा है.

कोमल-जाकर देखो ना मुझे डर लग रहा है.

अवी-मैं हूँ ना

कोमल-तुम ,

कोमल के इस एक वर्ड ने मेरी हालत खराब कर दी

उस एक वर्ड से कई मतलब निकलते है

कोमल ने किस वजह से ये कहा होगा

मैं यही सोच रहा था कि कोमल ने मुझे फिर से आवज़ दी

कोमल-कहाँ खो गये

अवी- वो मैं

कोमल- और तुम ऐसे मेरे उपर क्यूँ लेटे हो

अवी-वो मैंन्ननणणन्

कोमल-हम तो डॅन्स कर रहे थे .फिर मैं यहाँ कैसे आ गयी.

इसका क्या जवाब दूं मैं कोमल को

कोमल को तो कुछ पता ही नही है

शायद वो होश मे नही थी

इसका मतलब जो हुआ वो मैं कर रहा था मेरी वजह से हुआ है

क्या कहूँ मैं कोमल को

कोमल- अवी क्या हुआ ,

अवी-वो हम गिर गये थे.

कोमल-मुझे तो कुछ याद नही है

अवी-कुछ बातें याद ना हो ये अच्छा रहता है

कोमल को कुछ याद नही है या फिर वो नाटक कर रही है.

कोमल के एक्सप्रेशन हमेशा की तरह एक ससपेन्स बना रहे थे

कुछ भी हो .मैं जो कर रहा था वो ग़लत था.

अवी-तुम यही रूको मैं देखता हूँ बिजली कहाँ गिरी.

कोमल-मुझे अकेला मत छोड़ो.

अवी-तुम भी चलो

मैं कोमल के उपर से खड़ा हो गया .

कोमल की शर्ट उसके पेट तक उपर हो गयी थी. और उसकी पैंटी पूरी दिख रही थी. उस पे एक दाग का निशान भी था.

कोमल ने जल्दी खुदको ठीक किया और खड़ी हो गयी. और शरम के कारण नीचे देखने लगी.

कोमल शर्मा रही थी

उसे कुछ याद नही था तो वो शर्मा क्यूँ रही है

मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा था

कोमल भी कुछ बोल नही रही थी बस अपने शर्ट को नीचे खींच रही थी ताकि कुछ छुपाना चाहती हो

ऐसे मे मैं ने महहोल को हल्का करने का सोचा

अवी-चलो देखते है क्या हुआ है.

कोमल ने हाँ मे गर्दन घुमा दी

कोमल को डर भी लग रहा था जिस से वो मेरे पास आ गयी

पर मेरे पास आते हुए वो शरमा भी रही थी

बड़ी मुश्किल से कोमल ने मेरा हाथ पकड़ लिया और हम तबेले से बाहर आ गये

मैं कोमल के साथ बाहर आ गया .और तबेले से बाहर देखते ही हम तो शॉक्ड हो गये.
 
चॅप्टर 888ए

मैं कोमल के साथ बाहर आ गया .और तबेले से बाहर देखते ही हम तो शॉक्ड हो गये.

बिजली उस पेड़ पे गिरी थी जहाँ हम थोड़ी देर पहले खड़े थे.

मुझे तो ये खुद के लिए चेतावनी लग रही थी कि अगर मैं कोमल के साथ कुछ करता तो ये बिजली पेड़ पे नही मेरे उपर गिरती .

कोमल तो.उस पेड़ को आग मे जलते हुए देख कर कोमल बहुत डर गयी थी

क्यूँ कि थोड़ी देर पहले हम उस पेड़ के नीचे खड़े थे

कोमल-अवी ये तो

अवी-कुछ मत सोचो

कोमल फिर से मेरे गले लग गयी.

कोमल-हम उस पेड़ के नीचे होते तो....

अवी-कहा ना कुछ मत सोचो.

कोमल-अवी ,वो पेड़

अवी-थप्पड़ मारूँगा अगर कुछ सोचा तो

कोमल-अवी

अवी-मैं तुम्हें कभी कुछ नही होने दूँगा. ये मेरा प्रॉमिस है.

कोमल-अवी

अवी-तुम भी प्रॉमिस करो ,कभी डरोगी नही. हिम्मत से काम लोगि.

कोमल-अवी

कोमल बहुत डरी हुई थी

ऐसे मे उसका ध्यान दूसरी तरफ डाइवर्ट करना होगा

पेड़ को आग लगने से काफ़ी उजाला हो चुका था

अवी-कोमल वो देखो .वो तो मोबाइल का टॉवेर है. मतलब यहाँ रेंज होंगी. देखा वो बिजली हमे रास्ता दिखाने के लिए गिरी थी.

एक पॉज़िट्व सोच कोमल के दिमाग़ मे डाल दी

जिसका असर पॉज़िटिव मिला

कोमल-सच

अवी-भगवान भी चाहता है कि हम होटेल जल्दी जाए. चलो मोबाइल पे रेंज लाने का कुछ सोचते है

मैं कोमल के साथ अंदर आ गया.

कोमल-मेरे मोबाइल पे तो नेटवर्क नही है

अवी-मॅन्यूयेली सर्च करो

कोमल-अभी करती हूँ

कोमल नेटवर्क सर्च करने लगी.

अवी-क्या हुआ .मिला नेटवर्क

कोमल-मेरा नेटवर्क तो नही है पर तुम्हारे सिम की कंपनी का नाम दिखा रहा है.

अवी-पर मेरे मोबाइल पे नेटवर्क नही है.

कोमल-रिसटार्ट करके देखो

मैं ने मोबाइल रिबूवाय्ट किया तो मोबाइल पे थोड़ा नेटवर्क आगया.

नेटवर्क आते ही मेरे मोबाइल पे मिस्ड कॉल की लिस्ट आ गयी.

जल्दी फोन करता हूँ वरना नेटवर्क चला जाएगा.

मैं ने स्वेता दीदी को फोन लगाया. हमारे सिम एक कंपनी के थे.

अवी-हेलो

स्वेता दीदी-अवी कहाँ हो तुम .ठीक तो हो ना कोमल कहाँ है.

अवी-कोमल सेफ है. हम एक तबेले मे रुके है.

स्वेता दीदी-मुझे बताओ मैं रोहन के साथ आती. हूँ

अवी-होटेल से मार्केट की तरफ जो रास्ता है.वहाँ एक पेड़ को आग लगी है. बस उसी के पीछे जो तबेला है वहाँ हम रुके है.

स्वेता दीदी-मैं अभी निकलती हूँ. वही रहना.

अवी-जी दीदी.

स्वेता दीदी से बात होते ही कोमल का डर कम हो गया.

स्वेता दीदी कार लेकर आ जाएगी.

कोमल-क्या कहा दीदी ने

अवी-वो रोहन के साथ आ रही है

कोमल-अच्छा हुआ .

अवी-इस जगह से तो अब जा सकेंगे

कोमल-ये जगह काफ़ी अच्छी थी.

अवी-वो क्यूँ

कोमल-कुछ नही.

अवी-कोमल

कोमल-हाँ

अवी-तुम्हें सच मे पता नही कि क्या हुआ था.

कोमल-मैं कपड़े चेंज करती हूँ.

अवी-मेरे सवाल का जवाब नही दिया.

कोमल-कपड़े ज़्यादा गीले नही है.

अवी-कोमल

कोमल ने फिर भी मेरे सवाल का जवाब नही दिया.

मैं समझ गया कि कोमल को पता है कि मैं ने क्या किया. वो उस बात को भूल जाना चाहती है. इसी लिए वो कुछ नही कह रही है.

मैं ने अपनी इमेज खराब की. मैं ने आज बहुत बड़ी ग़लती की.

इस ग़लती के बाद मैं उसके सामने कैसे जा पाउन्गा.

क्या मैं उसके साथ नज़र मिला पाउन्गा. नही, ये मैं ने क्या कर दिया.

कोमल का विश्वास तोड़ दिया.

कोमल-तुम भी कपड़े पहन लो .अगर दीदी ने देखा तो वो क्या सोचेंगी.

अवी-हाँ ,वो मैं ,अभी पहनता हूँ

और मैं ने अपनी टीशर्ट पहन ली.

कोमल ने अपने साथ वो शर्ट लिया ,जो उसने थोड़ी देर पहले पहना था. और दूसरा शर्ट जिसमे वो गीली हुई थी वो वही छोड़ दिया जैसे उसको बस सिर्फ़ एक शर्ट चाहिए था.

हम ने खुद को ठीक किया और स्वेता दीदी का इंतजार करने लगे.

कोमल मुझसे शर्मा रही थी. वो मुझसे आँख नही मिला रही थी.

जिस से मुझे खुद पे गुस्सा आ रहा था.

मैं ने अपनी फ्रेंड को खो दिया.

पता नही कोमल मेरे बारे मे क्या सोचती होंगी.

हम दोनो अपने अपने ख़यालो मे डूबे थे.

ऐसे डूबे कि हमे स्वेता दीदी के आने का पता नही चला.

रोहन ने कार का हॉर्न बजा कर हमे आवाज़ दी

रोहन-अवी आ जाओ. कार वहाँ नही आ सकती.

अवी-कोमल चले

कोमल-एक मिनट

कोमल वापस तबेले मे गयी. पता नही क्यूँ गयी .पर मुझे फ्लश का आवाज़ आया.

अवी-क्या कर रही हो

कोमल-कुछ नही. चलो जल्दी

हम भाग कर कार के पास चले गये. कोमल पीछे और मैं आगे रोहन के साथ बैठ गया.

स्वेता दीदी ने हम टवल दिया. और हम अपने बाल सुखाने लगे

रोहन-चले

अवी-हाँ, जल्दी गरम गरम टी पीनी है

स्वेता दीदी-हम थरमस मे टी लेकर आए है. ये लो पी लो .अच्छा लगेगा.

कोमल-आप टवल टी और क्या क्या लाया है.

स्वेता दीदी-हम तो पूरी तैयारी से बैठ थे कि कब फोन आता है और हम तुम्हें लेने आएँगे

कोमल-दीदी जैसे नेटवर्क आया हमने कॉल किया.

रोहन-अवी उस पेड़ पे बिजली गिरी थी

अवी-हाँ

रोहन-अच्छा हुआ तबेले पे नही गिरी.

अवी-बिजली गिरने से पता चला कि वहाँ टवर है. जिस से हम ने दीदी को कॉल किया.

कोमल-दीदी. माँ कैसी है.

स्वेता दीदी-उनको झूठ बताया था कि तुम्हें एक फ्रेंड मिल गया है और तुम उसी के घर पे हो. तब जाके मौसी रिलॅक्स हुई.

अवी- ऐसा क्यूँ किया

स्वेत दीदी- क्यू कि हम पहले एक चक्कर इधर आ चुके थे पर तुम कही मिले ही नही जिस से हम वापस होटेल आ गये , होटेल जाते ही सब तुम्हारे बारे मे पूछने लगे तो सोहन ने मेरे मोबाइल पे कॉल किया जिसको तुम्हारा कॉल बता कर सबको बताया कि तुम फ्रेंड के यहाँ हो

कोमल-अच्छा किया .वरना माँ परेशान होती.और अब तो मैं ज़्यादा भीगी भी नही.

रोहन-हमारी साली को ऐसे थोड़े भीगने देते .हम तो अम्ब्रेला भी लाए थे पर ईस्तमाल नही किया.

कोमल-थॅंक यू जीजाजी

रोहन-सिर्फ़ थॅंक यू,

कोमल-मुझसे इतना ही मिलेगा .बाकी सब आपने दीदी से ले लिया है

स्वेता दीदी-क्या मतलब

कोमल-दादी आप लिपस्टिक ठीक कर लो.

रोहन-क्या स्वेता ,ध्यान रखा करो .पकड़ी गयी ना.

स्वेता दीदी-कोमल ,किसी को बताना मत ,

कोमल-नही बताउन्गी

अवी-दीदी एक ग्लास और टी देना.

मैं फिर से टी पीने लगा.

टी पीते हुए हमारा होटेल भी आ गया.

होटेल आते ही मैं ने चैन की सास ली

सीतल दीदी और सोहन हमे होटेल की लॉबी मे मिल गये

सीतल दीदी कोमल को लेकर उपर चली गयी. और सोहन मुझे कॅंटीन मे ले गया.

सोहन-सब ठीक है ना. कुछ परेशानी तो नही हुई

अवी-नही. हमे अच्छी जगह मिल गयी थी.

सोहन-चलो अच्छा है. अब तो इस बारिश मे हम भी नही जा पाएँगे

अवी-आज यहीं रुक जाओ .कल सुबह साथ मे निकलते है

रोहन-हम ने भी वही सोचा है. पर सोहन कह रहा था.

अवी-क्या ?

सोहन-तुम्हें हम फ्रेंड की तरह ट्रीट करते है. इसी लिए तुम्हें बता रहे है.

अवी-बात क्या है.

सोहन-कुछ नही. हमारे लिए सीतल के बाजू वाला रूम मिल जाता तो बढ़िया रहता.

अवी-बढ़िया तो रहेगा. पर बुआ को पता चला तो

रोहन-मतलब तुम्हें कोई प्राब्लम नही है.

अवी-मैं अपनी दीदी को अच्छे से जानता हू. इसी लिए तुम्हें बुलाया था.

सोहन-तो हमारा काम करोगे

अवी-पहले स्वेता दीदी से बात करनी होगी. वो हाँ कहेंगी तो मैं मनेज कर लूँगा.

रोहन-स्वेता का ही प्लान है. और बेफिकर रहो ,हम बस साथ रहेगे ,फिर से ऐसा वैसा करके स्वेता को गुस्सा नही दिलाना चाहता

अवी-फिर से मतलब

रोहन-कुछ नही. तुम कुछ इंतज़ाम कर दो

अवी-स्वेता दीदी के बाजू वाला रूम मेरा है. वहाँ तुम रूको .और तुम्हारे लिए जो रूम बुक किया है वहाँ राजेश और मैं रुकुंगा.

सोहन-ये तो बढ़िया हो जाएगा.

अवी-पर मुझे नही लगता कि कविता लीना तुमको अकेला छोड़ेंगी.

रोहन-उन दोनो के लिए हम ने गिफ्ट लिए है. और थोड़ी देर उनके साथ बातें करेंगे.फिर

अवी-ठीक है. लेकिन बुआ को पता नही चलना चाहिए.

सोहन-बेफिकर रहो ,चलो सब तुम्हारा इंतजार कर रहे है.

रहम सोहन से बात करने के बाद हम उपर हमारे रूम के पास चले गये.
 
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रोहन और सोहन मुझे अपने साथ स्वेता दीदी के कमरे मे ले गये.

बुआ चाची स्वेता दीदी के रूम मे थी.

नेहा बुआ कोमल के बालो को टवल से पोछ रही थी. और कोमल को पूछ रही थी कि क्या हुआ था.

कोमल सबको आज के अड्वेंचर के बारे मे बताने लगी. कुछ बातें छोड़ कर.

जैसे मैं रूम मे आया तो कोमल ने बात करना बंद किया. और शरमा गयी.

मेरे रूम मे आते बड़ी चाची उठ कर मेरे पास आ गयी. और मुझे ठीक तक देख कर मेरे गले लग गयी.

यहाँ छोटी चाची नही थी. वो चाचा के साथ होगी. अगर उनको किसीने ज़रा सा भी मेरे बारे मे बताया होता तो वो चाचा को छोड़ कर मेरे पास आती.

अवी-चाची मैं ठीक हूँ.

ब चाची-पहले बता ,कहाँ था ,और फोन करने मे इतनी देर क्यूँ की

अवी-मैं एक अच्छी जगह पे रुका था. मेरे फ्रेंड के घर

ब चाची-और तू गीला कैसे हो गया.

अवी-चाची, फ्रेंड के घर से कार मे जाते हुए गीला हो गया.

ब चाची-जा जल्दी कपड़े बदल ले .वरना सर्दी लग जाएगी.

अवी-ज़्यादा गीला नही हुआ . मैं बाद मे कपड़े बदल लूँगा.

ब चाची-अब तू खुद को बड़ा समझने लगा है तो मेरी बात क्यूँ सुनेगा.

अवी-चाची. आज भी मैं आपका छोटा सा अवी हूँ. पहले सब से मिल लेता हूँ फिर कपड़े चेंज करूँगा.

ब चाची-जल्दी करना.

पूजा बुआ-अवी ,

अवी-बुआ कुछ मत पूछो. बस होटेल आ गये उतना काफ़ी है.

पूजा बुआ-मुझे पता था कि तेरे होते हुए हमे ज़्यादा टेन्षन लेने की ज़रूरत नही है

अवी-ये आपका विश्वास मेरे बहुत काम आता है.

नीता बुआ-विश्वास कभी टूटने मत देना.

अवी-मेरे तरफ से कभी नही टूटेगा.

नेहा बुआ-कोमल ,कपड़े चेंज कर लो

कोमल-मैं इन कपड़ो मे ठीक हूँ. थोड़ी देर बाद कपड़े बदल लूँगी.

नेहा बुआ- जल्दी कर वरना बुखार हो जाएगा

कोमल- करती हूँ ,

नीता बुआ- नेहा तुझे अवी से कुछ कहना तो नही है

नेहा बुआ- मुझे क्या ,

पूजा- धीरे से नेहा रोहन यहीं है

नेहा बुआ- अवी तुम.भी कपड़े बदल लो वरना ठंड लग जाएगी

अवी- जी बुआ

रोहन के सामने नेहा बुआ कोई सीन क्रियेट नही करना चाहती थी

कविता-भैया देखिए जीजाजी ने हमे नया ड्रेस गिफ्ट किया है.

अवी-अच्छा है. तुम इस ड्रेस मे परी लगोगी.

राज-भैया मुझे भी दिया है गिफ्ट

अवी-राज तो हीरो लग रहा है. पर तुम्हें भी जीजाजी को गिफ्ट देना चाहिए था.

रोहन-हमे गिफ्ट नही चाहिए

लीना-जीजाजी को तो अपनी दीदी गिफ्ट मे दी है

लीना की बात पे सब हँसने लगे

सोहन-साली हो तो ऐसी. ये गिफ्ट सब से प्यारा है मेरे लिए

सोहन की बात सुनते सीतल दीदी शरमा गयी.

रानी-सीतल दीदी आप को तो प्यारा जीवन साथी मिला है.

स्वेता दीदी-चलो अब डिन्नर करने चलते है

रानी-यहाँ रूम मे बुलाते है. बातें करते हुए डिन्नर कर लेंगे. हम ने लंच तो थोड़ी देर पहले किया था.

कविता-हम ऑर्डर करे

सब ने एक साथ ना कहा

स्वेता दीदी ने सबके लिए ऑर्डर किया .और मुझे अकेले मे बुलाया.

अवी-दीदी ,रोहन कह रहा था कि.

स्वेता दीदी-पता है.

अवी-लेकिन शादी से पहले क्या ये ठीक रहेगा.

स्वेता दीदी-शादी तो हो जाएगी. पर तुम टेन्षन मत लो हम बस बातें करेंगे.

अवी-सिर्फ़ बातें

स्वेता दीदी-रोहन को पता है कि मैं उसके ऐसा वैसे करने पे गुस्सा करोगी. जिस से वो सिर्फ़ बातें करना चाहता है.

अवी-मगर फिर भी.

स्वेता दीदी-मैं तुमसे बड़ी हूँ .मुझे पता है क्या सही है क्या ग़लत .तुम बस मेनेज कर लो.

अवी-वो तो मैं ने कर लिया

स्वेता दीदी-थॅंक्स.

फिर हम सब ने डिन्नर कर लिया.कोमल ने अपने कपड़े चेंज कर ली पर मैं उन्ही कपड़ो मे था.

मेरा तो मन ही नही लग रहा था.

जो आज कोमल के साथ हुआ उसके बाद जब भी कोमल की तरफ देखता तो मुझे वो पल याद आ जाता.

मैं खुद को गुनहगार समझ रहा था.

सबके सामने तो हंस रहा था पर अंदर ही अंदर रो रहा था.

पता नही मैं ने ऐसा क्यूँ किया.

मेरा तो किसी बात मे मन नही लग रहा था.

पर मैं अपनी वजह से दूसरो को परेशान नही करना चाहता था.

इस लिए उनके सामने कोई सीन नही करना चाहता था.

मैं उनके जोक पे. कविता लीना की मस्ती पे हंस देता. और चुप चाप अपना सर नीचे करके खाना खा रहा था.

मैं तो जल्द से जल्द यहाँ से दूर जाके थोड़ी देर अकेला रहना चाहता हूँ.

कोमल तो मेरी तरफ देख नही रही थी.

ये बात मुझे चुभ रही थी.

कोमल ने तबेले मे भी मेरे सवाल का जवाब नही दिया

जिस से मुझे ऐसा लग रहा था कि कोमल उस बात से नाराज़ है. जिस से उस पे बात नही करना चाहती.

मैं तो रानी के बारे मे सोचने की बजाय कोमल के बारे मे सोच रहा था.

मेरे लिए ये टूर खराब एंडिंग के साथ याद रहेगा.

पता नही ऐसा क्यूँ हो रहा है.

डिन्नर हो जाने के बाद मैं राजेश के साथ बाहर आ गया.

अवी-राजेश

राजेश-भैया हम यहाँ क्यूँ आए है.चलिए जीजाजी के साथ बातें करते है.

अवी-तुम कर लो मैं आराम करना चाहता हूँ.

राजेश-क्या हुआ

अवी-कुछ नही. वैसे तू एक काम कर अपने रूम की चाबी रोहन को देना और हम उनके रूम मे रुकेंगे

राजेश-ऐसा क्यूँ

अवी-दीदी उनके साथ थोड़ा टाइम बिताना चाहती है.

राजेश-शादी से पहले

अवी-कुछ नही होता. तू बस ध्यान रखना किसी को पता ना चले,

राजेश-जैसा आप ठीक समझे .आप आराम कीजिए मैं संभाल लूँगा.

अवी-मैं आराम करता हूँ . तू जा अपने जीजाजी के पास

राजेश वापस रूम मे चला गया. और मैं अपनी सोच मे डूब गया.

सोचते हुए चलने से मुझे पता ही नही चला कि मैं कहाँ आ गया हूँ

मैं तो चलता रहा .

जब मेरे उपर बारिश की बूंदे गिरी , तब मुझे होश आया.

मैं तो ख़यालो मे ऐसा डूब गया कि.मैं कब छत पर आ गया पता ही नही चला.

बारिश की बूंदे मेरे उपर गिरते ,मैं होश मे आ गया.

पर मैं वैसे बारिश मे खड़ा रहा.

जिस बारिश ने मुझे ऐसा करने पे मज़बूर किया उस से सवाल पूछने लगा.
 
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मैं होटेल की छत पर आ गया , बारिश मे भीग कर थोड़ी देर पहले जो किया उसके बारे मे सोचने लगा.

मैं ने कोमल के साथ जो किया वो मुझे नही करना चाहिए था.

कोमल के विश्वास को मैने तोड़ दिया. पता नही वो मेरे बारे मे क्या सोच रही होगी.

वो मुझे बुरा भला कहती. थप्पड़ मारती वो चल जाता पर उसकी खामोशी मेरी जान लेकर रहेगी.

कोमल की खामोशी का मैं क्या मतलब निकालु. नही ,कोमल ऐसा थोड़े कर सकती है ,वो मुझे जानबूझ कर सब कुछ कैसे करने देती.

जो हुआ उसमे मेरी ग़लती थी. कोमल तो शायद उस पल को दुबारा याद ना करने के लिए खामोश होगी.

अगर कोमल मुझे थप्पड़ मारती ,या कुछ बोलती तो मैं समझ जाता कि उसके दिमाग़ मे क्या चल रहा है.

ऐसा तो मैं ने पहले भी किया था. झरना देखने जब गये थे तब मैं उसकी खूबसूरती मे डूब कर उसे किस करने वाला था. पर वो एक मज़ाक समझ कर हम भूल गये थे.

पर आज जो हुआ वो मज़ाक नही था.

अगर बिजली गिरी ना होती तो, नही नही, मैं ऐसे कैसे करता.

ये ग़लती मैने की. ये ग़लती इस बारिश की वजह से हुई.

ना बारिश आती ,ना हम फँसते और ना ये सब होता.

इस बारिश को हमेशा के लिए बंद करने का मन हो रहा है

इस बारिश ने हमारे अंदर ऐसी आग लगाई कि हम उसमे जलते गये.

वो अच्छा हुआ कि बिजली गिर गयी .वरना सब हो जाने के बाद मैं तो मर ही जाता.

ये कसूर मेरे लंड का है जो बार बार कोमल को चुभ रहा था.

कोमल अपने नाम की तरह नाज़ुक और शर्मीली है. वो कुछ बोल ही नही पाई.

हाँ, इसी लिए कोमल खामोश थी.

ये बारिश हमे जला कर देखो अब कैसे खुश होकर बरस रही है.

कुछ हुआ तो इसे क्या फरक पड़ता, फराक तो मुझे और कोमल को पड़ेगा

लेकिन ये कोमल की खूबसूरती मुझे पहले तो ऐसे अट्रॅक्ट नही करती थी.

पहले भी तो वो हमेशा मेरे साथ रहती थी. बाइक पर चिपके बैठा करती थी.हाँ कभी कभी लगता कि वो ज़्यादा ही कार्रीब आ रही है

तब कभी मुझे कोमल की खूबसूरती ने अपनी तरफ अट्रॅक्ट नही किया .

पर जब से हम उस झरने को देख कर आए थे तब से हम दोनो एक दूसरे की तरफ खिचते जा रहे है.

ये क्या हो सकता है जो हमे एक दूसरे के पास लाना चाहता है.

या फिर मैं ग़लत सोच रहा हूँ. ये सब इतफाक से हो सकता है.

कोमल को तो इन सब के बारे मे ,उसने तो कभी इसके बारे मे सोचा नही होगा.

तो इसका सिर्फ़ एक मतलब निकलता है कि मैं हवस के नशे मे ये सब कर रहा था.

मैं और हवस ,ये हो नही सकता.

मैं ने कभी हवस को अपने उपर हावी नही होने दिया. मेरा और हवस का 36 का आकड़ा था.

अगर मुझमे हवस होती तो चाची के साथ मैं अब तक कुछ किया बिना कैसे रहता.

हवस हो भी सकती ,या फिर प्यार,

प्यार ,ये कैसे हो सकता है. हम भाई बहन है.

प्यार नही, हवस नही. तो मेरे और कोमल के बीच मे जो हुआ वो क्या था.

दोनो मे से एक होगा. प्यार या फिर हवस, या फिर हम पे किसीने जादू किया.

वो झरने वाले लोगो ने किया होगा जादू

जब से हम वहाँ से आए है तभी से ऐसा कुछ हो रहा है.

ये धागा ,निकलता भी नही.

हम पे पक्का किसी ने जादू किया होगा.

[जब दिमाग़ खराब होता है तो ऐसे अजीब ख़याल आते है]

और ये बारिश ,इसकी तो मैं.

मेरे हाथ मे होता तो ये बारिश बंद कर देता.

ये बारिश मुझे रोकती तो सही.

रोका तो था. बारिश ने कुछ बूढ मेरे उपर उड़ाई थी. हवा ने भी घास उड़ाया था फिर बिजली गिरना.

ये हो क्या रहा है.

मैं पागल हो जाउन्गा.

ये बारिश मुझे पागल बना देगी .

ये कोमल की खूबसूरती मुझे पागल कर देगी.

इसमे इनका क्या कसूर है.

मैं ने पाप ही इतने किए है कि ये बारिश उनको धो नही सकती.

मुझे लगा कि ये बारिश मेरे लिए गिर रही है. तो मैं इसमे अपने पाप धो लूँ. परेरे पापो के लिए ये बारिश भी कम पड़ जाएगी.

इतने पाप किए है की मुझे मरना चाहिए.

पर मैं मर भी नही सकता. मेरे बाद चाची का क्या होगा. फॅमिली का क्या होगा.

मुझे अपने पाप के साथ जीना होगा.

मुझे अपने पाप ढोने के लिए एक पुन्य आत्मा की ज़रूरत है.

ऐसे आत्मा जिसकी एक आवाज़ से मैं सबकुछ भूल जाउ. ऐसी आत्मा जिसे देखु तो दिल को चैन मिले.

आँख बंद करके देखता हूँ वो पुन्य आत्मा दिखाई दे .

मेरे दिल मे छुपी होगी तो दिख जाएगी

मैं इस बारिश को साक्षी मान कर आज उस पुन्य आत्मा के दर्शन करके रहूँगा.उस पुन्य आत्मा की आवाज़ सुनके रहूँगा

मैं ने आसमान से गिरती हुए बूड़ों को देखते हुए अपनी आँख बंद की.और

बारिश की बूंदे मेरे चेहरे पे गिरके मुझे उसका चेहरा दिखा रही थी . उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी.

पर चेहरा साफ दिखाई नही दे रहा था उसके चेहरे पे बारिश की बूंदे थी.

उसकी आवाज़ भी बारिश की बूँदो के गिरने की आवाज़ से ठीक से सुनाई नही दे रही थी.

मैं ने अपने दिल पे हाथ रख कर फिर से उस पुन्य आत्मा का आवाहन किया. जो मेरे पाप अपने पुन्य करमो से ख़तम कर दे

दिल पे हाथ रखते ही मुझे उसका चेहरा दिखाई दिया. और उसकी आवाज़ भी सुनाई दी.

ये चेहरा तो कोमल का है. और ये आवाज़ तो रानी की है.

मैं ठीक से ध्यान नही लगा रहा हूँ.

मैं ने फिर से ट्राइ किया तो वही हुआ.

अब मुझे कोमल और रानी का चेहरा दिखाई दिया

ये नही हो सकता, कुछ तो ग़लत कर रहा हूँ मैं.

मैं फिर से आँख बंद करने वाला था कि मेरे चेहरे के उपर बारिश गिरनी बंद हुई और एक आवाज़ सुनाई दी.

रानी-अवी .होश मे आओ

मैं ने आवाज़ की तरफ देखा तो मेरे पास रानी खड़ी थी.वो मुझे हिला रही थी मुझे होश मे लाने की कोसजिस कर रही थी. मुझे बारिश से बचाने के लिए छाता पकड़ कर खड़ी थी.

रानी-अवी .होश मे आओ ,क्या हुआ.

रानी को देखते ही मैं उसके गले लग गया.

रानी के गले लग कर रोने लगा.

रानी को देख कर दिल पे जो बोझ था वो उतारने के लिए रो रहा था.

मुझे ऐसे रोता हुआ देख कर रानी ने चटा को छोड़ दिया .और मेरे गले लग गयी.

रानी मेरे साथ बारिश मे भीगने लगी.

मुझे ऐसे रोता हुआ देख कर वो डर गयी कि मुझे क्या हुआ.

वो मेरी पीठ पे हाथ घुमा कर मुझे शांत करा रही थी.

जैसा वो मेरी माँ हो .और अपने बेटे का रोना बंद करना चाहती हो.

रानी की आँख मे भी पानी आ रहा था.

हम दोनो रो रहे थे.

मैं खुद के भावनाओं को रोक नही पाया.

तबेले से जब से मैं आया था ,मैं अपने आप से लड़ रहा था.

अब रानी को देख कर ऐसा लग रहा था कि मेरी हिम्मत वापस आ गयी.

हमारे आँसू निकलते बारिश भी ज़ोर से होने लगी. जैसे हमारे साथ आसमान भी रो रहा हो.

रानी के गले लगते ही ,मुझे हिम्मत मिलते ही मैं ने रोना बंद किया.

और रानी की आँख से गिरते हुए आँसू को पीने लगा

रानी का प्यार मेरी ढाल थी. मुझे हर बुराई से बचा कर रखती थी.

रानी का प्यार हर बार मेरी हिम्मत बनती है. मुझे टूटने से बचाने आ जाता है.

मैं बारिश मे भिगते हुए रानी को प्यार कर रहा था.

रानी भी समझ गयी कि मैं खुद से लड़ रहा हूँ.

इस लिए वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. मुझे अपने प्यार की ताक़त से बचाना चाहती है. वो मुझे कभी कुछ नही होने देगी.

तेज बारिश की बूड़े हमारे शरीर को जखम दे रही थी .फिर भी रानी मुझे प्यार करके हर बोझ से आज़ाद करना चाहती है.

रानी को किस करके मैं कोमल की बात को कुछ पल के लिए भूल गया.

रानी जिस वजह से मुझे प्यार कर रही थी वो काम उसने कर दिया.

रानी के प्यार ने मेरे दिल और दिमाग़ के बीच मे जो जंग चल रही थी.उसे ख़तम कर दी.

ये बारिश आज मुझसे क्या क्या करवाना चाहती है वो सब आज होके रहेगा.

इस बारिश को मैं कभी नही भूलूंगा.

इस बारिश ने मुझे रुलाया है.
 
thanks mitro

mujhe khushi hai bahut log mere sath hain . han ye such hai ki main ise hinglish ( roman ) me dusare forum par post kar raha hun our hindi font me yahan post kar raha hun
 
चॅप्टर 891

रानी ने मुझे प्यार तो किया पर बाद मे मुझे थप्पड़ मारा.

उसके थप्पड़ मारने से मैं शॉक्ड हो गया.

रानी-तुम खुद को समझते क्या हो.

ये क्या

अभी तो रानी मुझे प्यार करके दिलासा दे रही थी

और अभी गुस्सा कर रही है और साथ मे एक थप्पड़ भी मारा

अवी-क्या हुआ.

रानी-इस तरह बारिश मे छत पर भीग रहे हो. खुद का नही कम से कम मेरे बारे मे तो सोचते.तुम्हें कुछ हो जाता तो मेरा क्या होता ये नही सोचा

अवी-मैं वो

रानी-कुछ मत बोलो, पता है कितनी घबरा गयी थी जब वेटर ने कहा कि एक लड़का अपने ख़यालो मे खो कर छत पे गया है.

अवी-सॉरी

रानी-क्या सॉरी , मैं ने तुम्हें पूरे होटेल मे ढूँढा .पर तुम नही मिले तो छत पे वो लड़का तुम तो नही हो ये सोच कर मेरी जान निकल गयी थी.

अवी-वो मैं

रानी-क्या वो मैं, ऐसा कभी दुबारा मत करना. मेरी जान निकल गयी थी.

अवी-मुझे खुद पता नही कि मैं यहाँ कब आ गया.

रानी-सब पता चलेंगा. पहले इस बारिश मे भीगना तो बंद करो.

और रानी मेरा हाथ पकड़ दीवार के पास खड़ी हो गयी. जहाँ हमे खड़े रहते तो भीगने से बच सकते थे.

रानी-अब बोलो .

अवी-अब तुम्हें क्या बताऊ, जाने दो.

रानी-तुम नही बताओगे तो फिर गुस्सा हो जाउन्गी.

अवी-कुछ नही. बस सोचते सोचते छत पर कब आ गया पता ही नही चला.

रानी-क्या हुआ . तुम्हारी बातों से मुझे घबराहट हो रही है.

अवी-कुछ नही. तुम बेवजह परेशान हो रही हो. जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ नही है.

रानी-तुम मुझसे झूठ तो बोलो ही मत, बताओ क्या हुआ. जब तक तुम किसी को दिल की बात नही बताओगे तब तक तुम्हारे दिल से बोझ उतरेगा कैसे

अवी-तुम्हें बताना तो चाहता हूँ पर डर भी लगता है.

रानी-किसी लड़की ने प्रपोज किया है.

ये रानी भी ना

कितने आराम से बोल रही है जैसे इसको कोई फरक ही नही पड़ता

अवी-कुछ कुछ ऐसा ही है.

रानी-मेरे बाय्फ्रेंड पे लड़किया फिदा होगी ही. इतना हॅंडसम जो है. इसमे परेशान होने की क्या बात है. पसंद हो तो हाँ कर दो नही तो ना कर दो

अवी-तुम्हें इस बात से फरक नही पड़ता. कितनी आसानी से बोल देती हो तुम

रानी-तुम्हें परेशान देख नही सकती. और प्यार का दूसरा नाम कुर्बानी होता है.

अवी-तुम सबसे अलग हो.

रानी-वो तो मैं हूँ ही. अब बताओ क्या बात है.

अवी-मैं समझ नही पा रहा हुआ कि मैं प्यार का राजा हूँ या मैं हवस का पुजारी हूँ.

रानी-मैं रानी हूँ तो तुम प्यार के राजा हो

अवी-मज़ाक नही मैं सीरीयस हूँ. मुझे इस सवाल का जवाब चाहिए.वरना मुझे चैन नही मिलेगा

रानी मेरी बात पे सोचने लगी

अवी- क्या हुआ , इतना क्या सोच रही हो

रानी-मैं जैसा कहूँगी वैसा करोंगे तो तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब मिल जाएगा.

अवी-मैं इस सवाल के जवाब के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

रानी-चलो मेरे साथ

रानी ने पहले अपनी कमीज़ निकाली .

अवी- ये क्या कर रही हो

रानी ने कुछ नही कहा

और मेरे हाथ उपर करके मेरी टीशर्ट निकाली.

मैं ने उसे रोका नही क्यूँ कि मुझे अपने सवाल का जवाब चाहिए था.

मैं फिर से इस बारिश मे उपर से नंगा हो गया तो रानी ब्रा मे मेरे सामने थी.

फिर मुझे अपने साथ पानी की टंकी के पास ले जाने लगी.

रानी को क्या हुआ. उसने अपनी कमीज़ क्यूँ निकाली. मेरे सामने ब्रा मे ,ऐसे खुले मे ,करना क्या चाहती है.

रानी मुझे टंकी के पास ले गयी. तनी 3 फीट उची थी छत से .

रानी टंकी के नीचे चली गयी और मुझे भी टंकी के नीचे बुलाया.

टंकी के नीचे जाते ही रानी ने मुझे लेटा दिया .और मेरे उपर आ गयी.

रानी कैसे मेरे सवाल का जवाब देगी ये मेरी समझ मे नही आ रहा है

पर रानी तो रानी है , उसके पास भी छोटी चाची जैसे हर सवाल का सोलुशन रहता है

रानी जैसा बोल रही थी मैं वैसा वैसा करता गया

मैं टंकी के नीचे लेट गया और रानी मेरे उपर आ गयी

मेरे उपर आते ही रानी ने मेरे जीन्स के बटन और ज़िप खोलनी शुरू की

रानी को ऐसा करने से मैं ने रोक दिया

मैं ने रानी के हाथ को पकड़ लिया

तो रानी ने मेरे हाथो पे किस करके मेरी पकड़ ढीली कर दी और अपना काम करने लगी

फिर रानी ने मेरे उपर आकर मेरी चेस्ट पे किस करना शुरू किया.

ये रानी करना क्या चाहती है.

पहले ही मैं बारिश मे भीग चुका हूँ. ऐसे मे रानी के ऐसा रूप देख कर मैं गरम होने लगा.

रानी अपने नाज़ुक होंटो से मेरे चेस्ट पे जिस अंदाज़ मे किस कर रही थी .उस से मैं सब कुछ बुलाता गया.

रानी के इरादे नेक नही लग रहे थे.

आज तो उस पे भी बारिश का नशा होने लगा.

ये बारिश आज तो मुझे मार ही डालेगी.

पहले कोमल और अब रानी

बस इसी की कमी थी

पता नही ये बारिश मुझसे क्या क्या करवाना चाहती है.

मैं तो इस बारिश के नशे मे झूम रहा था.

रानी मेरे चेस्ट पे जिस तरह किस कर रही थी.उस से मैं गरम हो गया था.

रानी तो एक के बाद एक किस किए जा रही थी.

जो मैं रानी के साथ करना चाहता था वही रानी मेरे साथ कर रही थी

मेरे गीले कसरती शरीर ने रानी को भी अपना कंट्रोल खोने पे मज़बूर किया.

रानी मेरे चेस्ट पे किस करते हुए मेरे होंटो के पास आ गयी.

मेरे होंटो पे अपनी उंगली घुमा कर होंटो पे गिरी हुई बारिश के बूंदे हटा कर अपने नशीले होंटो से मिला दिए.

आज तो रानी मे रति की आत्मा चली गयी होगी तभी वो मुझे प्यार कर रही थी.

मुझे तो कुछ करने नही दे रही थी. खुद मेरे होंटो को चूस रही थी.

मुझे से ज़्यादा वो किस मे अपना प्यार लगा रही थी.

आज तो रानी मेरी सुहागरात मना देगी.

उसका गीला बदन मेरे गीले शरीर से रगड़ कर आग लगा रहा था.

रानी ने तो मेरे दिमाग़ को अपने प्यार से वश मे कर लिया.

मेरे होंटो को चूस कर मुझे अपने प्यार की ज्वाला से जला दिया

रानी कभी ऐसा करेगी सोचा नही था.

रानी आज तो अपनी शरम को बेचकर मेरे पास आई थी.

रानी के साथ जब मैं ने पहली बार प्यार किया था उस दिन रानी बेडपर लेटी थी और सिर्फ़ मैं प्यार कर रहा था

और आज मैं लेटा हुआ था और रानी मुझे प्यार कर रही थी.

उस दिन सूरज की किरण हमारे प्यार की गवाह थी. तो आज बारिश को साक्षी मान कर रानी मुझे प्यार कर रही थी.

अगर ये होटेल का रूम होता तो रानी के नये नये रूप देखने को मिलते पर यहाँ जगह कम थी फिर भी वो अपना पूरा प्यार मेरे नाम कर रही थी.

रानी ने किस तब तक किया जब तक मेरा लंड खड़ा नही हुआ.

जब उसे मेरा लंड चुभने लगा था तब उसने मेरे होंटो पे काट कर किस ख़तम किया.

किस ख़तम करते ही मैने हान्फते हुए रानी की तरफ देखा तो उसने अपनी ब्रा निकाल ली थी.

रोशनी कम थी फिर भी उसके बूब्स जो दूध से सफेद थे वो चमकते हुए मुझे अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी

मैं तो रानी का दीवाना था ऐसे मे उसके बूब्स देखते ही उनको प्यार करने का दिल कर रहा था.

इतने दिनो बाद देखने को मिले थे मैं उनको हाथ लगाने वाला था कि रानी पीछे हो गयी और मेरे कमर के पास बैठ गयी.

रानी मुझे कुछ करने नही दे रही थी

पता नही रानी करना क्या चाहती है

उसके बूब्स को टच भी करने नही दिया पर वो मुझे हर जगह टच कर रही थी

रानी करना क्या चाहती है. पहले खुद अपने बूब्स दिखाए फिर उनको हाथ लगाने भी नही दिया.

पर ये क्या रानी ने मेरी जीन्स को घुटने तक नीचे कर दिया.

मैं ने रानी की तरफ देखा तो अंडरवेर मे फुनफना रहे लंड को देखने लगी.

रानी इस से आगे नही जा सकती .उसमे शरम है. वो अंडरवेर नीचे नही करेगी.

पर ये क्या रानी ने मेरी तरफ देख कर एक सेक्सी स्माइल की और मेरा अंडरवेर नीचे कर दिया.

मुझे रानी से ऐसी उम्मीद नही थी

ये रानी ही है ना. मेरी रानी ऐसा कुछ नही कर सकती.

पर रानी ने सच मे मेरे लंड को अपने हाथ मे पकड़ा.

ऐसा कभी होगा ऐसा सोचा भी नही था

पिच्छली बार जब हम एक हुए तब रानी ने देखा भी नही होगा मेरे लंड को.

आज तो इतनी बेशरम होके मेरे लंड को पकड़ रही है.

बारिश मे लड़की काफ़ी रोमांटिक हो जाती है ऐसा सुना था आज देख भी लिया.

रानी जिसका दूसरा नाम शरम है वो आज बेशरम हो गयी.

रानी से मुझे ऐसी उम्मीद नही थी. रानी को मैं बिंदास बनाना चाहता था पर ऐसे नही. ये ज़्यादा हो रहा है.

मुझे रानी को रोकना होगा.

पर ये क्या रानी ने मेरे लंड पे एक किस किया.

ये सपना है

ये सच हो ही नही सकता

रानी ऐसा कर ही नही सकती

मैं ने अपने हाथ पर चिमती काट ली ,

ये सच था

रानी मेरे लंड पे किस कर रही थी

रानी ने मेरे लंड पे, इस के बाद तो मैं चाह कर भी खुद को रोक नही पाउन्गा.और रानी को रोकना तो मुश्किल होगा.

मेरे लंड को जो चाहिए था वो आज उसे मिल गया.

रानी के प्यार केलिए मेरा लंड कब से तरस रहा था वो उसे आज मिल गया.

रानी ने जैसे मेरे लंड पे किस किया तो तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी.

इसके बाद मुझे लगा कि रानी मेरे लंड को प्यार करेगी पर उसने ऐसा नही किया.

रानी ने एक बार मेरी तरफ देखा और खुद की सलवार एक पैर से निकाल दी .और पैंटी नीचे करके मेरे लंड पे बैठने को तैयार हो गयी.

रानी करना क्या चाहती है.

आज वो मुझे प्यार करके अपनी 2न्ड सुहागरात मना लेगी.

लेकिन इतनी फास्ट, मुझे कुछ करने नही दे रही है.

लेकिन वो जो कर रही है उस से मैं खुश था.

मैं इस दिन का कब से इंतजार कर रहा था.

रानी ने आज मुझे सबसे अच्छा गिफ्ट दिया है.

रानी के दिल मे क्या चल रहा था इस बात से मैं अंज़ान था.

लेकिन मेरे दिल मे जो सवाल था उस के बारे मे रानी को पता था.

रानी ने फिर से मेरी तरफ एक बार देखा और मेरे लंड को अपनी चूत से रगड़ने लगी.

रानी के ऐसा करते ही मेरी आँख बंद हो गयी.

मैं इस मिलन को दिल से फील करना चाहता था.

रानी की चूत से मेरा लंड छूते ही मेरे शरीर मे आग की ज्वाला भड़क उठी.

मेरा दिल उस ज्वाला की आग मुझे रानी के साथ बिताए हुए हर एक पल को दिखाने लगा.

कैसे हम मिले ,

कैसे हम एक हुए

कैसे मुझे रानी से प्यार हुआ.

कैसे हम दोनो ने साथ जीने मरने की कसमे खाई.

कैसे रानी मेरी फॅमिली का एक हिस्सा बन गयी.

हर एक पल मेरे आँख के सामने आ गया.

रानी का रूठना ,मेरा मनाना ,हसना हसाना ,पहले रुला के फिर माफी माँग लेना.

एक दूसरे के सपने पूरे करने

प्रॉमिस करके उनको निभाना.

प्रॉमिस?

रानी ने अपनी मम्मी को प्रॉमिस किया था कि वो शादी से पहले कुछ नही करेंगी

रानी के पापा का सपना था वो डॉक्टर बन जाए

मैं ने रानी को प्रॉमिस किया था उसका प्रॉमिस मैं टूटने नही दूँगा.

रानी मेरा प्यार है. मेरी जान है. उसका प्रॉमिस मैं टूटने नही दूँगा.

रानी के लिए उसकी जान मैं था ,उसकी खुशी मैं था. उसका प्यार मैं था. उसकी आत्मा मेरे पास थी. उसका दिल मेरे पास था.

मेरे लिए रानी सब कुछ थी.

उसका दर्द मेरा था. उसकी परेशानी मेरी थी. उसका प्रॉमिस पूरा करना मेरा कर्तव्य था.

मैं रानी को उसका प्रॉमिस तोड़ने नही दे सकता.

मैं उस से प्यार करता हूँ. मैं उसके लिए ज़िंदगी भर इंतजार कर सकता हूँ.

मुझे रानी को रोकना होगा

मैं रानी से प्यार करता हूँ उसका प्रॉमिस कैसे टूटने दूँगा

ये सब तो शादी के बाद भी हो सकता है

लेकिन रानी को मैं रोकू कैसे

पर मुझे रानी को रोकना होगा

मैं ने एक झटके मे अपनी आँखे खोली.

रानी मेरे लंड को अपने अंदर लेने वाली थी कि मैं ने उसे थप्पड़ मार कर अपने उपर से गिरा दिया.

रानी मेरे उपर से नीचे गिर गयी.

मैं ने रानी को थप्पड़ तो मार दिया पर इस से मुझे कैसा लगा होगा ये मैं ही जानता हूँ

पर ऐसा करना ज़रूरी था वरना रानी को.मैं रोक नही पाता

मुझे लगा वो गुस्सा करेगी.पर उसने मेरी तरफ देख कर स्माइल की

और उठ कर मेरे गले लग गयी.

रानी-आइ लव यू अवी
 
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